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 बुलेट ट्रेन परियोजना में इस्तेमाल होगी 'वेंटिलेटेड हुड' तकनीक, सुरंगों में आवाज नियंत्रित करेगी

नयी दिल्ली. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कर रही 'नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड' (एनएचएसआरसीएल) ट्रेनों के परिचालन के दौरान पैदा होने वाली तेज ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए आठ पर्वतीय सुरंगों के दोनों सिरों पर कुल 16 वेंटिलेटेड हुड (हवादार संरचनाएं) बना रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक भारत में पहली बार इस्तेमाल की जा रही है, क्योंकि मौजूदा रेलवे सुरंगों में 'वेंटिलेटेड हुड' की जरूरत नहीं पड़ती। इसकी वजह यह है कि पारंपरिक ट्रेनें अपेक्षाकृत काफी कम गति से चलती हैं। 
बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। लगभग 500 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरता है और इसमें महाराष्ट्र में सात तथा गुजरात में एक, कुल आठ पर्वतीय सुरंगें शामिल हैं। परियोजना से जुड़े एक विशेषज्ञ ने बताया कि जब कोई तेज रफ्तार ट्रेन किसी सुरंग में प्रवेश करती है, तो वह अपने आगे बड़ी मात्रा में हवा को धकेलती है। यह ठीक उसी तरह होता है जैसे किसी सिलेंडर के भीतर पिस्टन आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा, ''हवा के इस अचानक दबाव से दबाव तरंगें (प्रेशर वेव्स) उत्पन्न होती हैं, जो पूरी सुरंग में आगे बढ़ती हैं। यदि इनका उचित प्रबंधन नहीं किया जाए, तो ट्रेन के सुरंग से बाहर निकलने पर ये तरंगें तेज गूंजती हुई आवाज पैदा कर सकती हैं।'' इसके लाभों का उल्लेख करते हुए इंजीनियरों ने बताया कि 'टनल हुड' खुले वातावरण और सुरंग के सीमित दायरे वाले हिस्से के बीच एक 'ट्रांजिशन ज़ोन' का काम करते हैं।

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