भारत के गगनयान मिशन को मिली नई ताकत, ऑस्ट्रेलिया में स्थापित होगा ट्रैकिंग स्टेशन
नई दिल्ली। भारत और ऑस्ट्रेलिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए शिक्षा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष सहयोग के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से कई नई पहलों की घोषणा की। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन क्षेत्रों में हुए बड़े ऐलानों को लेकर एक बयान जारी किया। दोनों ने ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी एवं नवाचार (एसीआईटीआई) साझेदारी के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर का स्वागत किया। इस पहल के माध्यम से कनाडा के साथ मिलकर महत्वपूर्ण और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया विश्वास पर आधारित साझेदारी के साथ भविष्य की तकनीकों पर मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने गगनयान मिशन में सहयोग को दोनों देशों के मजबूत अंतरिक्ष संबंधों का प्रतीक बताया।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भी दोनों देशों ने एक अहम कदम उठाया है। ऑस्ट्रेलिया के कोकोस (कीलिंग) द्वीप समूह में भारत के गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल स्थापित किया जाएगा। यह केंद्र गगनयान कार्यक्रम के शुरुआती चार प्रमुख मिशनों की निगरानी और ट्रैकिंग में सहायता करेगा। इससे भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम को महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग मिलेगा।
शिक्षा और कौशल विकास को भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताते हुए, दोनों नेताओं ने इस क्षेत्र में बढ़ते सहयोग पर संतोष व्यक्त किया। वर्तमान में, भारत, ऑस्ट्रेलिया में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। पिछले वर्ष, 1.40 लाख से अधिक भारतीय छात्रों ने ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में अध्ययन किया।
जिसे लेकर ऑस्ट्रेलिया के शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने कहा कि शिक्षा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सबसे मजबूत पुल है। उन्होंने कहा कि अब केवल भारतीय छात्र ही ऑस्ट्रेलिया नहीं आ रहे, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय वहीं, भारत में विश्वस्तरीय शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। पीएम अल्बनीज ने फ्लिंडर्स विश्वविद्यालय को भारत में अपना परिसर स्थापित करने की मंजूरी मिलने का स्वागत किया। इसके साथ ही भारत में परिसर खोलने वाले ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। इससे भारतीय छात्रों को अपने देश में ही विश्वस्तरीय ऑस्ट्रेलियाई शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा, वहीं शोध, नवाचार और दोनों देशों के बीच आर्थिक तथा सामाजिक संबंध भी और मजबूत होंगे।
व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में भी नई पहल की गई है। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के टीएएफई और भारत के बीच खनन तथा माइनिंग उपकरण, प्रौद्योगिकी एवं सेवाओं के क्षेत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर स्किलिंग स्थापित करने पर सहमति बनी है। इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को आधुनिक औद्योगिक कौशल से लैस करना है। इस पर विज्ञान मंत्री टिम एयर्स ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान के दौर में भारत जैसे समान विचार वाले साझेदारों के साथ विज्ञान, अनुसंधान और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों की औद्योगिक क्षमता, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। दोनों पक्षों ने मैत्री ग्रांट्स कार्यक्रम की भी सराहना की, जिसके माध्यम से आर्थिक, सांस्कृतिक और शोध परियोजनाओं को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2026 में सेंटर फॉर ऑस्ट्रेलिया-इंडिया रिलेशंस के जरिए 41 परियोजनाओं को 1 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (10 मिलियन डॉलर) की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
Leave A Comment