सहकारी संघवाद को अधिक सार्थक बनाने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए- प्रधानमंत्री
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देकर कहा कि सहकारी संघवाद को अधिक सार्थक बनाने के लिए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिस्पर्धी, सहकारी संघवाद न केवल राज्यों के बीच, बल्कि जिलों के बीच भी कायम किया जाना चाहिए।
आज वीडियो कांफ्रेंस के जरिये नीति आयोग की शासी परिषद की छठी बैठक में अपने प्रारंभिक संबोधन में श्री मोदी ने कहा कि भारत तेजी से प्रगति का संकल्प ले चुका है और कोई समय नहीं गंवाना चाहता। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में उठाए गए रचनात्मक कदमों का स्वागत हुआ है जिससे राष्ट्र के मूड का पता चलता है। उन्होंने कहा कि इसमें युवाओं ने प्रमुख भूमिका अदा की है। श्री मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भर अभियान भारत के निर्माण का एक महत्वपूर्ण उपाय है। इसका उद्देश्य न केवल स्वयं की, बल्कि विश्व की जरूरतें पूरी करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का निजी क्षेत्र भी बड़े उत्साह के साथ आगे आ रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान बजट में बुनियादी ढांचे के लिए धन आवंटन सराहनीय है। इससे रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 से ग्रामीण और शहरी भारत में दो करोड़ 40 लाख से अधिक मकान बनाये गए हैं। उन्होंने कहा कि एक नई पहल के अंतर्गत छह राज्यों में आधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिये मकान बनाये जा रहे हैं। श्री मोदी ने कहा कि जल जीवन मिशन शुरू होने के बाद से साढ़े तीन करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को पाईप के जरिये जलापूर्ति की गई है। उन्होंने कहा कि गांवों को इंटरनेट से जोडऩे में भारत नेट कार्यक्रम ने परिवर्तनकारी भूमिका अदा की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि इससे देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने के उत्कृष्ट अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि राज्यों को भी इस कार्यक्रम का पूरा लाभ उठाना चाहिए और अधिक से अधिक निवेश आकर्षित करना चाहिए। श्री मोदी ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत फ्रेमवर्क और सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में कृषि और पशुपालन से लेकर मछली उद्योग तक सभी क्षेत्रों में समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप कोरोना के दौरान भी देश के कृषि निर्यात में महत्?वपूर्ण बढ़ोतरी हुई। श्री मोदी ने कहा कि जीवन और व्यापार दोनों में सुगमता के उपाय साथ-साथ किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य के लिए नियमों और विनियमों में संशोधन करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें नवाचार और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि देश के हर राज्य और हर जिले की अपनी विशेषता और क्षमता है। श्री मोदी ने कहा कि सरकार निर्यात के लिए विभिन्न जिलों से संबद्ध हजारों उत्पादों की सूची बना रही है ताकि उनका मूल्य संवर्धन किया जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में निर्धनों के सशक्तिकरण के लिए बैंक खाते खोलने, टीकाकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं में वृद्धि, नि:शुल्क विद्युत और गैस कनेक्शन प्रदान करने से उनके जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। श्री मोदी ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि कोविड के दौरान लोगों ने यह महसूस किया कि केंद्र और राज्यों ने मिलकर काम किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अपनी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे करने जा रहा है, ऐसे में शासी परिषद की बैठक और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
शासी परिषद की इस बैठक में लद्दाख और जम्मू-कश्मीर ने पहली बार केंद्र शासित प्रदेश के रूप में हिस्सा लिया। इस बार प्रशासकों के नेतृत्?व वाले केंद्र शासित प्रदेशों को भी आमंत्रित किया गया। बैठक में शासी परिषद के पदेन सदस्य, केंद्रीय मंत्री, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, आयोग के सदस्य और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत और केंद्र सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।


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