दो करोड़ रुपये की ‘व्हेल ‘एम्बरग्रिस' जब्त, दो लोग गिरफ्तार
-क्यों होता है एम्बरग्रिस' इतना महंगा
नागपत्तिनम (तमिलनाडु)। तमिलनाडु में नागपत्तिनम जिले के वेदारण्यम से व्हेल मछली के आंत से निकलने वाला दो किलोग्राम का ‘एम्बरग्रिस' जब्त किया गया, जिसकी कीमत दो करोड़ रुपये है तथा इस संबंध में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि एक खुफिया सूचना मिलने के बाद वे वेत्तईकरानीरुप्पु तट पर निगरानी रख रहे थे तभी उन्होंने यह जब्ती की और लोगों को गिरफ्तार किया। ‘एम्बरग्रिस' मोम जैसा एक ठोस पदार्थ होता है जो व्हेल मछलियों के पाचन तंत्र में उत्पन्न होता है और इसे आम तौर पर ‘‘व्हेल वमन'' भी कहा जाता है। इसे तस्करी के जरिये श्रीलंका भेजा जाना था। चूंकि, भारत में वन्यजीव संरक्षण कानून, 1972 के तहत व्हेल मछली विलुप्त प्रजातियों की सूची में शामिल है इसलिए एम्बरग्रिस रखना गैरकानूनी है। पुलिस ने बताया कि यह पता लगाने के लिए जांच चल रही है कैसे इन दोनों लोगों को यह पदार्थ मिला।
क्यों होता है यह इतना महंगा
व्हेल की उल्टी की कीमत हीरे और सोने के आभूषणों से कई गुना ज्यादा होती है। भारत में भी व्हेल की उल्टी की कीमत करोड़ों-अरबों में है। दरअसल व्हेल के शरीर से अपशिष्ट निकलता है। इसे वैज्ञानिक व्हेल की उल्टी (व्हेल वमन) या उसका मल कहते हैं। कई बार जब यह अपशिष्ट ज्यादा बड़ा हो जाता है तो व्हेल इसे मुंह से उगल देती है। वैज्ञानिक भाषा में इसे एम्बरग्रिस कहा जाता है।
व्हेल समुद्र तट से दूरी बनाकर रखती है। इसकी वजह से एम्बरग्रिस को किनारे आने में काफी समय लग जाता है। समुद्र का नमकीन पानी और धूप इस एम्बरग्रिस को चिकनी, काली और भूरी गांठ में तब्दील कर देता है। इसके बाद यह मोम जैसा दिखता है। एम्बरग्रिस के वजन की बात करें तो यह 15 ग्राम से 100 किलो तक हो सकता है।
व्हेल की उल्टी का इस्तेमाल परफ्यूम बनाने में किया जाता है। इस वजह से दुनियाभर के बाजारों में इसकी काफी कीमत होती है। एम्बरग्रिस से बने परफ्यूम की खुशबू लंबे समय तक बनी रहती है। कई देशों में एम्बरग्रिस से सुगंधित धूप और अगरबत्ती भी बनाई जाती है। इसके साथ ही यूरोप के लोगों का मानना है कि एम्बरग्रिस का टुकड़ा साथ रखने से प्लेग रोकने में मदद मिलती है।

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