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- श्री तोरण लाल की बिटिया निकिता का कॉलेज में प्रवेश हुआ सुनिश्चित
- सेवा सेतु पोर्टल में मिल रही 400 से अधिक शासकीय सेवाएं
राजनांदगांव । शासन की डिजिटल पहल सेवा सेतु पोर्टल आम नागरिकों के लिए शासकीय सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी बना रही है। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे या अपने नजदीकी केंद्रों से जाति, आय, निवास प्रमाण पत्र, राजस्व कार्यों, राशन कार्ड और पेंशन सहित 400 से अधिक सरकारी सेवाओं का लाभ बिना सरकारी कार्यालय जाकर उठा सकते हैं।
जिले के विकासखंड डोंगरगांव के ग्राम आयबांधा निवासी श्री तोरण लाल का सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से 24 घंटे के भीतर आय प्रमाण पत्र जारी हो गया। उन्होंने बताया कि सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से आय प्रमाण पत्र प्राप्त होने से उनकी बिटिया निकिता का उच्च शिक्षा के लिए कॉलेज में प्रवेश समय पर सुनिश्चित हो सका। श्री तोरण लाल ने बताया कि उनकी बिटिया निकिता के कॉलेज प्रवेश के लिए आय प्रमाण पत्र आवश्यक था। प्रवेश की अंतिम तिथि निकट होने के कारण उन्हें चिंता थी कि यदि समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिला तो उनकी बेटी का प्रवेश प्रभावित हो सकता है। इसी दौरान उन्हें डोंगरगांव स्थित सेवा सेतु केंद्र की जानकारी मिली। वे आवश्यक दस्तावेजों के साथ केंद्र पहुंचे, जहां सेवा सेतु केंद्र संचालक ने उन्हें पूरी प्रक्रिया समझाई और 22 जून 2026 को आय प्रमाण पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से आवेदन का त्वरित निराकरण करते हुए 24 घंटे के भीतर आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। समय पर आय प्रमाण पत्र मिलने से निकिता का कॉलेज में प्रवेश निर्धारित समय-सीमा के भीतर सफलतापूर्वक हो गया। इससे श्री तोरण लाल और उनका परिवार अत्यंत प्रसन्न है।
श्री तोरण लाल ने कहा कि पहले शासकीय दस्तावेज बनवाने के लिए कई कार्यालयों में बार-बार जाना पड़ता था, लेकिन सेवा सेतु केंद्र की डिजिटल सुविधा से हमारा काम बहुत आसान और कम समय में पूरा हो गया। समय पर आय प्रमाण पत्र मिलने से मेरी बेटी का कॉलेज में प्रवेश भी बिना किसी परेशानी के हो गया। सेवा सेतु केंद्र डोंगरगांव में पूरी डिजिटल प्रक्रिया सरल और सुविधाजनक रही। केन्द्र में बताया गया कि सेवा सेतु पोर्टल के माध्यम से घर बैठे भी आवेदन कर सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सेवा सेतु केंद्रों के माध्यम से आम नागरिकों को समय पर शासकीय सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं, जिससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा विद्यार्थियों को आवश्यक प्रमाण पत्र समय पर मिल रहे हैं। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार की डिजिटल सेवाओं की सराहना की और धन्यवाद ज्ञापित किया। - -5 हजार रूपए के लोन से शुरू हुआ सफर, आज बहुआयामी उद्यमी हैं सुनीता वर्मा-स्व-सहायता समूह ने दिया संबल, खेती, मसाला निर्माण और सीएससी सेंटर से मिली नई पहचानरायपुर ।खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के विकासखंड खैरागढ़ अंतर्गत ग्राम टेकापारकला की निवासी श्रीमती सुनीता वर्मा आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायी मिसाल बन चुकी हैं। कभी खेती-किसानी और मजदूरी के सहारे परिवार का भरण-पोषण करने वाली सुनीता वर्मा ने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन *’बिहान’* से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी और आत्मनिर्भरता की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की, जो आज क्षेत्र की अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।वर्ष 2017 में पद्म मां गायत्री स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत हुई। समूह के माध्यम से प्राप्त प्रथम ऋण राशि 5 हजार रुपये से उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और बैग सिलाई का कार्य प्रारंभ किया। यह छोटा प्रयास आगे चलकर उनके आर्थिक सशक्तिकरण की मजबूत नींव साबित हुआ। इसके बाद प्राप्त 5 लाख रुपये के ऋण से उन्होंने 48 डिसमिल कृषि भूमि और ट्रैक्टर खरीदा, जिससे कृषि कार्य का विस्तार हुआ तथा उत्पादन में वृद्धि हुई। बाद में 3 लाख रुपये के ऋण से ट्रॉली खरीदकर कृषि एवं परिवहन कार्य को और अधिक सुदृढ़ बनाया।आज सुनीता वर्मा कृषि आधारित उद्यमिता के क्षेत्र में सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं। वे हल्दी, धनिया और मिर्च जैसी मसाला फसलों की खेती कर स्वयं हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर एवं मिर्च पाउडर तैयार करती हैं। इसके साथ ही अचार, बड़ी और पापड़ का निर्माण एवं पैकेजिंग कर सी-मार्ट, सरस मेला तथा ग्रामीण क्षेत्रों में प्राप्त ऑर्डर के अनुसार विक्रय करती हैं। छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में आयोजित क्षेत्रीय सरस मेलों में भाग लेकर वे अपने उत्पादों का विपणन करती हैं, जिससे उन्हें बेहतर आय प्राप्त हो रही है। मसाला एवं खाद्य उत्पादों के निर्माण और विक्रय से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होती है।कृषि क्षेत्र में भी उन्होंने उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। वर्तमान में वे लगभग सात एकड़ भूमि किराये पर लेकर धान, गेहूं, चना, अरहर, मूंग, उड़द तथा विभिन्न सब्जियों की खेती कर रही हैं। कृषि कार्य से लागत निकालने के बाद उन्हें प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त होती है। इसके अतिरिक्त वे पिछले तीन वर्षों से ई-रिक्शा संचालन से भी जुड़ी हुई हैं। सृजन संकुल संगठन से किराये पर प्राप्त ई-रिक्शा के संचालन से उन्हें नियमित अतिरिक्त आय मिल रही है।वर्ष 2025 से उन्होंने सब्जी नर्सरी तैयार करने का कार्य भी शुरू किया, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग एक लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। विविध आजीविका गतिविधियों के माध्यम से आज उनकी वार्षिक आय लगभग चार लाख रुपये तक पहुंच गई है। सुनीता वर्मा की उपलब्धियां यहीं तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने खैरागढ़-छुईखदान मुख्य मार्ग पर अपना पक्का मकान एवं दुकान भी स्थापित किया है। वर्तमान में वे अपनी दुकान से स्वयं निर्मित मसाले, अचार, बड़ी और पापड़ का विक्रय कर रही हैं। साथ ही दुकान में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का संचालन कर ग्रामीणों को विभिन्न डिजिटल सेवाएं भी उपलब्ध करा रही हैं।सुनीता वर्मा का संघर्ष और सफलता यह सिद्ध करता है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, अवसर और आर्थिक सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती हैं, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं। आज वे अपने गांव और आसपास की महिलाओं के लिए प्रेरणा का केंद्र बन चुकी हैं। भविष्य में वे पशुपालन गतिविधि प्रारंभ कर अपने व्यवसाय को और विस्तारित करने की योजना बना रही हैं। बिहान योजना के सहयोग और अपनी अथक मेहनत के बल पर सुनीता वर्मा ने आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी कहानी लिखी है, जो ग्रामीण विकास की दिशा में एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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- 3 किलोवाट का सोलर रूफटॉप लगाकर दिया ऊर्जा आत्मनिर्भरता का संदेश, अब गांव के अन्य लोग भी ले रहे जानकारी
- केन्द्र एवं राज्य शासन से मिलेगी 1 लाख 8 हजार रूपए की सब्सिडी
राजनांदगांव । प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ लोगों को बिजली बिल से राहत दिलाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। विकासखंड डोंगरगढ़ की ग्राम पंचायत चैतूखपरी के सरपंच श्री मनोहर सिन्हा ने इस योजना के अंतर्गत अपने घर की छत पर 3 किलोवॉट क्षमता का सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित कर गांव में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की प्रेरणादायी शुरूआत की है। श्री सिन्हा ने बताया कि उन्होंने कुछ दिन पहले योजना के तहत आवेदन किया था। बैंक वित्तीय प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद करीब 15 से 20 दिन पहले उनके घर पर 3 किलोवॉट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया गया। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 2 लाख रूपए लगी है। जिसमें केन्द्र एवं राज्य शासन से 1 लाख 8 हजार रूपए की सब्सिडी प्राप्त होगी। शेष राशि बैंक के माध्यम से आसान किश्तों में फायनेंस कराया है तथा उन्होंने प्रारंभिक अंशदान के रूप में लगभग 10 हजार रूपए जमा किए।
सरपंच श्री मनोहर सिन्हा ने बताया कि सोलर प्लांट लगाने से पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग 700 से 800 रूपए आता था। अब उन्हें उम्मीद है कि बिजली बिल लगभग समाप्त हो जाएगा और अतिरिक्त बिजली उत्पादन होने पर उसका लाभ भी मिलेगा। श्री सिन्हा ने बताया कि उन्हें इस योजना की जानकारी अधिकृत वेंडर के माध्यम से मिली, जिसके बाद उन्होंने योजना का लाभ लेने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि गांव में सबसे पहले सोलर प्लांट लगाया है। इसे देखने के लिए कई ग्रामीण आए हैं और योजना के संबंध में जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में गांव के अन्य लोग भी इस योजना से प्रेरित होकर अपने घरों में सोलर रूफटॉप स्थापित करेंगे। उन्होंने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को आम नागरिकों के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी से लोगों पर आर्थिक बोझ काफी कम हो जाता है। उन्होंने नागरिकों से इस योजना का लाभ उठाकर स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने और बिजली खर्च में बचत करने की अपील की। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से जिले में लगातार लोग सौर ऊर्जा की ओर अग्रसर हो रहे हैं। यह योजना न केवल बिजली बिल में राहत प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण एवं ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। - महासमुंद। कृषि विज्ञान केन्द्र, महासमुंद द्वारा "आत्मनिर्भर दलहन मिशन योजना" अंतर्गत खरीफ 2026 में जिले के किसानों के बीच उन्नत गुणवत्ता वाले दलहन एवं तिलहन बीजों का वितरण तथा वैज्ञानिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के क्षेत्रफल एवं उत्पादकता में वृद्धि करना, धान आधारित फसल प्रणाली में विविधीकरण को बढ़ावा देना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है।कार्यक्रम के अंतर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए अरहर, 25 हेक्टेयर के लिए उड़द तथा 20 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए मूंगफली की उन्नत किस्मों का वितरण किया गया। साराईपाली विकासखंड के ग्राम सालडीह, देवाभाठा, खिसड़ी एवं मानकी में किसानों को सीजी अरहर-2 तथा ग्राम राजाडीह में आईपीयू-13-1 उड़द के प्रमाणित बीज वितरित किए गए। वहीं बसना विकासखंड के ग्राम मिलाराबाद सहित महासमुंद विकासखंड के चयनित गांवों में भी किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराकर तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को वैज्ञानिक खेती की नवीनतम तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीज, जैव उर्वरकों, संतुलित पोषण, मृदा परीक्षण, जल संरक्षण, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा मौसम आधारित कृषि सलाह की जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैव उर्वरकों के उपयोग, जल संरक्षण तथा समेकित कीट प्रबंधन (आईपीएम) अपनाने पर बल दिया।विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि सस्य विज्ञान) डॉ. मुकेश कुमार पाण्डेय ने कहा कि महासमुंद जिले की कृषि मुख्यतः धान आधारित होने से मिट्टी में नाइट्रोजन एवं जैविक कार्बन की मात्रा लगातार घट रही है। उन्होंने किसानों से धान के साथ दलहनी फसलों को अपनाने की अपील करते हुए बताया कि दलहनी फसलों की जड़ों में उपस्थित राइजोबियम जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर भूमि की उर्वरता बढ़ाते हैं। उन्होंने बुवाई से पूर्व ट्राइकोडर्मा, राइजोबियम एवं पीएसबी से बीजोपचार करने की सलाह दी। विषय वस्तु विशेषज्ञ (मृदा विज्ञान) डॉ. कुनाल चंद्राकर ने मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन अपनाने पर जोर देते हुए संतुलित पोषण, सल्फर, जिंक एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों के महत्व की जानकारी दी। वहीं डॉ. समस्थ बघेल ने प्रमाणित एवं उन्नत बीजों के उपयोग को अधिक उत्पादन का आधार बताया। डॉ. शिल्पा लाकड़ा ने किसानों को एफपीओ एवं कृषि विभाग की योजनाओं से जुड़ने तथा नियमित प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। डॉ. रविश केशरी ने वर्षा जल संरक्षण, खेत में नमी संरक्षण एवं जल निकास व्यवस्था पर किसानों को तकनीकी जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने बताया कि अरहर, उड़द एवं मूंगफली जैसी फसलें जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में भी बेहतर विकल्प हैं। इनकी खेती से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलता है, मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है तथा किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलता है।कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने किसानों से धान आधारित एकल खेती के स्थान पर दलहन एवं तिलहन आधारित फसल प्रणाली अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इससे उत्पादन लागत में कमी आएगी, मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होगा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी। कार्यक्रम में शामिल किसानों ने कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा उपलब्ध कराए गए उन्नत बीज, वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं तकनीकी मार्गदर्शन की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि इन तकनीकों को अपनाकर वे अधिक उत्पादन एवं बेहतर आय प्राप्त कर सकेंगे। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा आगामी खरीफ एवं रबी मौसम में भी जिले के विभिन्न गांवों में वैज्ञानिक प्रशिक्षण, अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन, फसल निरीक्षण एवं तकनीकी परामर्श कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।
- महासमुंद / प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना द्वारा समय पर प्रदान की गई आर्थिक सहायता परिवार के लिए कठिन समय में आर्थिक संबल सिद्ध हुई तथा दैनिक आवश्यकताओं एवं अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करने में सहायक बनी। घोडारी निवासी स्वर्गीय श्रीमती सतरूपा चक्रधारी के निधन उपरांत उनके नामित उत्तराधिकारी श्री पवन चक्रधारी को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के अंतर्गत 02 लाख रुपए की बीमा राशि बैंक ऑफ बड़ौदा, मेन ब्रांच, महासमुंद के माध्यम से आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान की गई।उक्त बीमा राशि का दावा स्वीकृत कराने एवं लाभ परिवार तक पहुँचाने में जिला अग्रणी बैंक, महासमुंद के प्रबंधक श्री प्रकाश चन्द्र मेहर, बैंक ऑफ बड़ौदा, मेन ब्रांच, महासमुंद के शाखा प्रबंधक श्री संदीप कुमार साव, बैंक अधिकारी श्री अभिषेक भारती तथा एफएलसी के श्री ओम प्रकाश पटेल का सहयोग एवं मार्गदर्शन रहा। इनके संयुक्त प्रयासों से मृतक के परिवार को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का लाभ समय पर प्राप्त हो सका।इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने ग्रामीणों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि जीवन बीमा किसी भी परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि केवल एक छोटी वार्षिक प्रीमियम राशि जमा कर कोई भी पात्र व्यक्ति इस योजना से जुड़ सकता है। बीमित व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके नामित परिजन को 2 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे कठिन परिस्थितियों में परिवार को आर्थिक सहारा मिलता है।ग्रामीणों से अपील की गई कि वे स्वयं तथा अपने परिवार के पात्र सदस्यों का प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में नामांकन कराएँ और अधिक से अधिक लोगों को इस योजना की जानकारी दें, ताकि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना अकेले न करना पड़े। साथ ही, सभी नागरिकों से समय पर बैंक खाते का नवीनीकरण, प्रीमियम कटौती एवं नामांकन की जानकारी अद्यतन रखने का भी आग्रह किया गया।
- -ग्राम कुर्मीपाली में नलकूप खनन कर पेयजल का किया स्थायी समाधानमहासमुंद / सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत प्राप्त जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई करते हुए ग्राम किसड़ी के उप स्वास्थ्य केन्द्र में बंद पड़े हैंडपंप की मरम्मत कर उसे पुनः चालू कर दिया गया है। वहीं ग्राम कुर्मीपाली के बाजरपारा में नलकूप खनन का कार्य सफलापूर्वक किया गया है।विकासखंड सरायपाली के ग्राम किसड़ी निवासी श्री यशपाल पटेल ने आवेदक क्रमांक 26144597500087 के माध्यम से ग्राम किसड़ी के उप स्वास्थ्य केन्द्र में बंद पड़े हैंडपंप की मरम्मत हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन प्राप्त होते ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की गई। विभाग के तकनीकी दल द्वारा स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य किया गया तथा 30 मई 2026 को हैंडपंप की मरम्मत पूर्ण कर उसे पुनः सुचारू रूप से चालू कर दिया गया। इससे मरीजों, स्वास्थ्य कर्मियों और ग्रामीणों को पुनः स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध हो गई है। मांग के सफल निराकरण के पश्चात आवेदक श्री यशपाल पटेल को इसकी सूचना भी प्रदान कर दी गई। ग्रामीणों ने त्वरित कार्रवाई के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।इसी तरह ग्राम कुर्मीपाली के निवासी श्री उपेन्द्र बारिया ने आवेदन क्रमांक 26144603800008 के माध्यम से ग्राम कुर्मीपाली के बाजारपारा में बोर खनन कराने का अनुरोध किया था। आवेदन प्राप्त होने के बाद लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने बिना विलंब आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की और स्थल का तकनीकी परीक्षण कराया। जांच के उपरांत 2 जून 2026 को रिंग मशीन के माध्यम से 120 मीटर गहराई तक नलकूप खनन का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। नलकूप खनन पूर्ण होने से बाजारपारा के निवासियों में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इससे पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित होगा। समयबद्ध कार्रवाई के लिए उन्होंने शासन एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया।
- -उपयोग कर प्राप्त कर रहे हैं बेहतर फसलसहकारी समितियों में 17 हजार नैनो यूरिया बाॅटल उपलब्धमहासमुंद / राज्य शासन द्वारा किसानों को नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग के लिए लगातार अभियान चलाकर प्रोत्साहित और जागरूक किया जा रहा है। इस क्रम में महासमुंद जिले में हजारों किसान नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को अपनाकर बेहतर फसल उत्पादन की ओर अग्रसर है। वर्तमान में जिले के 10,000 से अधिक किसान नैनो उर्वरकों का उपयोग कर फसल उत्पादन में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए आशान्वित है।कृषि विभाग एवं इफको द्वारा जिले में किसानों के बीच नैनो उर्वरकों के वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से किसान प्रशिक्षण, खेत प्रदर्शन, ग्राम स्तरीय जागरूकता कार्यक्रम एवं तकनीकी मार्गदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में किसानों ने धान सहित अन्य फसलों में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी को अपनाया। उन्होंने बताया कि नैनो यूरिया, का सहकारी समितियों में 17000 बॉटल 500 मि.ली. भण्डारित किया गया है एवं कृषकों द्वारा 8100 बॉटल उठाव कर लिया गया है तथा नैनो डीएपी का सहकारी समितियों में 12400 बॉटल 500 मि.ली. पैकिग में भण्डारित किया गया है, जिसके विरूद्ध 9600 बॉटल का उठाव कृषकों द्वारा किया जा चुका है। समय-समय पर कृषक चौपाल एवं खरीफ कैंपेन अवेयरनेस अभियान चलाकर कृषकों को नील हरित काई, हरी खाद, नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी का उपयोग करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने हेतु कृषकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।विकासखण्ड पिथौरा के ग्राम लाल माटी के कृषक श्री गोविंद पटेल ने बताया कि उन्होंने धान की बुवाई से पूर्व बीजों का नैनो डीएपी से उपचार किया। इसके लिए प्रति किलोग्राम बीज में 5 एमएल नैनो डीएपी का उपयोग किया गया। इसी तरह पूर्व में नैनो उर्वरकों का उपयोग करने वाले किसानों ने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से फसलों की वृद्धि अधिक संतुलित एवं स्वस्थ हुई है। पौधों में पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होने से फसल की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिला है तथा उर्वरकों के अधिक दक्ष उपयोग में भी सहायता मिली है। इसके अलावा फसल में रोग एवं कीटों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम देखने को मिला, जिससे अतिरिक्त कीटनाशकों की आवश्यकता कम हुई और खेती लागत में कमी आई।जिले में 01 जून 2026 से 30 जून 2026 तक खेत बचाओ अभियान अंतर्गत सभी विकासखंडों में तिथि वार कृषक चौपाल, कृषक संगोष्ठी का आयोजन कर विभागीय अमलों द्वारा नील हरित काई उत्पादन हेतु कृषकों को प्रोत्साहित किया गया। उप संचालक कृषि श्री एफ.आर. कश्यप ने बताया कि जिले के 71 कृषकों द्वारा स्वयं से तैयार किए गए 91 टाकों में 220 क्विंटल नील हरित उत्पादन कर अपने खेतों में उपयोग कर रहे है।
- -राजस्व अधिकारियों को एग्रीस्टैक बैकेटिंग एवं नजूल पट्टाधृति अधिनियम-2023 का दिया गया प्रशिक्षणमहासमुंद / जिले के राजस्व अधिकारियों को आज आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालय, रायपुर के प्रशिक्षकों द्वारा एग्रीस्टैक बैकेटिंग के संबंध में वर्चुअल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस प्रशिक्षण में कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह की उपस्थिति में जिले के राजस्व अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया। वहीं एनआईसी कक्ष में नजूल पट्टाधृति अधिनियम-2023 के संबंध में भी विस्तृत प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिले के सभी राजस्व अनुविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।प्रशिक्षण के दौरान कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के शत-प्रतिशत पात्र किसानों का एग्रीस्टैक पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यह किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का त्वरित एवं पारदर्शी लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार कर किसानों को एग्रीस्टैक पंजीयन के प्रति जागरूक किया जाए।आयुक्त भू-अभिलेख कार्यालय, रायपुर के प्रशिक्षकों ने बताया कि एग्रीस्टैक भारत सरकार द्वारा विकसित कृषि क्षेत्र का एक डिजिटल इकोसिस्टम है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक किसान को एक विशिष्ट किसान आईडी प्रदान की जाती है। यह आईडी किसान के आधार, बैंक खाते तथा भूमि अभिलेखों को एकीकृत करती है, जिससे किसानों की पहचान और भूमि संबंधी जानकारी का डिजिटल सत्यापन संभव हो पाता है। प्रशिक्षकों ने बताया कि एग्रीस्टैक आईडी के माध्यम से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा, खाद एवं बीज पर मिलने वाली सब्सिडी जैसी विभिन्न शासकीय योजनाओं की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा सकती है। साथ ही किसानों को बार-बार खसरा-खतौनी जैसे दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं रहती, क्योंकि समस्त जानकारी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहती है। इससे बैंकों को भी किसानों की भूमि एवं फसल संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध होती है, जिससे किसान क्रेडिट कार्ड एवं कृषि ऋण की प्रक्रिया सरल और तेज होती है। प्रशिक्षकों ने किसानों से अपने खेत एवं पहचान का एग्रीस्टैक पंजीयन निकटतम कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से कराने की अपील की।क्रमांक/34/493/पोषण साहू
- -पशुपालकों की आय बढ़ाने वैज्ञानिक पशुपालन, नस्ल सुधार और बेहतर प्रबंधन के दिए निर्देशमहासमुंद / जिले में दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर पशुपालकों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह की अध्यक्षता में पशुधन विकास विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री हेमंत नंदनवार, उप संचालक पशुधन विकास विभाग, जिले के सभी पशु चिकित्सक, मैदानी अमला, दुग्ध महासंघ के सुपरवाइजर तथा सभी पशु सखियां उपस्थित रहीं।बैठक में कलेक्टर श्री लंगेह ने कहा कि महासमुंद जिले में दुग्ध उत्पादन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने सभी पशु चिकित्सकों को निर्देशित किया कि वे पशुपालकों तक नियमित रूप से पहुंचकर पशु प्रबंधन, पशु स्वास्थ्य संरक्षण, नस्ल सुधार एवं संतुलित पशु पोषण संबंधी वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। कलेक्टर ने देशी गायों में सेक्स सॉर्टेड सीमेन के माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। इससे उन्नत नस्ल की अधिक संख्या में बछियों का जन्म होगा, जो भविष्य में अधिक दुग्ध उत्पादन देने वाली गायों के रूप में तैयार होंगी।बैठक में पशु सखियों को जिम्मेदारी देते हुए निर्देशित किया गया कि वे राष्ट्रीय एवं राज्य मार्गों से लगे गांवों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएं। पशुपालकों को समझाएं कि वे अपने मवेशियों को खुला छोड़ने के बजाय घरों या सुरक्षित स्थानों पर बांधकर रखें। सड़क पर छोड़े गए पशुओं से दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ती है। ऐसे मामलों में यदि पशु पकड़े जाते हैं तो संबंधित पशुपालकों से नियमानुसार दंडात्मक राशि वसूल की जाएगी।मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री नंदनवार ने कहा कि जिले में दुग्ध उत्पादन को दोगुना करने के लिए सुनियोजित कार्ययोजना के साथ समन्वित प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने पशुधन विकास विभाग के मैदानी अधिकारी-कर्मचारियों, दुग्ध महासंघ के सुपरवाइजर, मार्ग पर्यवेक्षकों तथा पशु सखियों को आपसी समन्वय से कार्य करते हुए अधिकाधिक पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन से जोड़ने और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। बैठक में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, पशुधन की उत्पादकता में सुधार तथा पशुपालकों की आय को सुदृढ़ बनाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना के साथ प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
- *-औषधि प्रतिष्ठान नियमों का पालन करते हुए ही कर सकेंगे दवाओं का संग्रहण एवं क्रय-विक्रय*दुर्ग/ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन पाए जाने पर औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी एवं सहायक औषधि नियंत्रक द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए मेसर्स मानिक मेडिकल स्टोर्स, अहिवारा का औषधि लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, विगत 16 जून 2026 को सहायक औषधि नियंत्रक श्री संजय सिंह झडेकार एवं औषधि निरीक्षक श्रीमती गायत्री पटेल द्वारा मेसर्स मानिक मेडिकल स्टोर्स, बस स्टैण्ड के सामने, अहिवारा, जिला-दुर्ग (छ.ग.) का औचक निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान उक्त संस्थान में अन्य औषधियों के साथ अनवांटेड किट/एम.टी.पी. किट का एक नग पाया गया। मौके पर संचालक द्वारा इस संवेदनशील औषधि के संबंध में कोई भी वैध क्रय-विक्रय रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया। अवैध रूप से दवा रखने और रिकॉर्ड न होने के कारण फर्म को विगत 24 जून 2026 को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया था। इस संबंध में फर्म द्वारा 30 जून 2026 को कार्यालय में अपना जवाब प्रस्तुत किया गया, जिसमें संचालक ने उक्त औषधि से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज या बिल प्रस्तुत करने में असमर्थता जाहिर की। फर्म के इस कृत्य को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 एवं नियमावली 1945 के नियमों का स्पष्ट और गंभीर उल्लंघन मानते हुए, औषधि अनुज्ञापन प्राधिकारी एवं सहायक औषधि नियंत्रक श्री संजय सिंह झडेकार द्वारा 06 जुलाई 2026 को मेसर्स मानिक मेडिकल स्टोर्स, अहिवारा को स्वीकृत औषधि लाईसेंस/अनुज्ञप्ति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। कार्यवाही के उपरांत, सहायक औषधि नियंत्रक ने जिले में संचालित समस्त औषधि प्रतिष्ठानों के संचालकों को कड़ा संदेश देते हुए आग्रह किया है कि वे एम.टी.पी. किट एवं ऐसी अन्य औषधियां जिनका नशे या अन्य रूप में दुरूपयोग संभव है, उनका संग्रहण, क्रय एवं विक्रय पूरी पारदर्शिता और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 तथा नियमावली 1945 के नियमों के तहत ही करें। भविष्य में भी इस संबंध में किसी भी प्रकार का उल्लंघन या लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार सख्त दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी।
- -उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री को पीएम आवास के संबंध में लिखा पत्रदुर्ग/ उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोई भी पात्र परिवार आवास से वंचित न रहे, इसके लिए आवश्यक पहल करने का आग्रह किया है। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर नई दिल्ली में 28 एवं 29 जून 2026 को आयोजित राष्ट्रीय ग्रामीण सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। श्री शर्मा ने अपने पत्र में लिखा कि राष्ट्रीय ग्रामीण सम्मेलन वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन तथा ग्रामीण विकास के क्षेत्र में श्री चौहान के नेतृत्व की सराहना करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।उपमुख्यमंत्री ने पत्र में उल्लेख किया कि सम्मेलन के दौरान केन्द्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा यह आश्वासन दिया गया था कि किसी भी परिस्थिति में कोई भी पात्र व्यक्ति प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) से वंचित नहीं रहेगा। इसी संदर्भ में उन्होंने छत्तीसगढ़ में सामने आई कुछ महत्वपूर्ण व्यावहारिक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया। उन्होंने बताया कि 24 जून को प्रदेशभर में आयोजित ग्राम सभाओं में आवास प्लस 2.0 की सूची प्रस्तुत की गई, जिसके दौरान कुछ समस्याएं भी सामने आईं, जिसमें सर्वेक्षण के समय कुछ पात्र व्यक्ति पलायन अथवा अन्य कारणों से उपलब्ध नहीं हो सके, जिसके कारण उनका सर्वे नहीं हो पाया और उनका नाम पात्रता सूची में शामिल नहीं हो सका। साथ ही कुछ पात्र परिवारों का सर्वे तो हुआ, लेकिन तकनीकी अथवा अन्य कारणों से उनकी जानकारी पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं हो सकी, जिससे ग्राम सभा में उनकी पात्रता प्रदर्शित नहीं हो पाई।श्री शर्मा ने कहा कि इन दोनों कारणों से प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे पात्र परिवार आवास स्वीकृति से वंचित रह गए हैं, जो वास्तव में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के लाभ के हकदार हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया कि इन समस्याओं के समाधान हेतु भारत सरकार स्तर पर आवश्यक निर्णय एवं पहल की जाए, ताकि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सभी पात्र परिवारों को आवास के संकल्प को पूर्ण रूप से साकार किया जा सके। अंत में उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने छत्तीसगढ़ के प्रति श्री शिवराज सिंह चौहान के निरंतर मार्गदर्शन, सहयोग के लिए उनका पुनः आभार व्यक्त किया है।
- दुर्ग/ इस वर्ष अल-नीनो के चलते मानसून में देरी, खंड वर्षा (लंबे समय तक सूखा) और सीजन के जल्दी समाप्त होने की गंभीर आशंका बनी हुई है। इस संभावित संकट से निपटने और किसानों की आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए कृषि विभाग द्वारा एक विशेष 'आकस्मिक कार्ययोजना' तैयार की गई है। इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य जोखिम को कम करने के लिए फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, कम पानी वाली फसलों का चयन, जल संरक्षण और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना है।उप संचालक कृषि श्री संदीप भोई ने बताया कि कार्ययोजना अनुसार किसान भाई मौसम की अनिश्चितता से बचने के लिए कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली धान की उन्नत किस्मों को अपनाये। इसके साथ ही, टिकरा और भर्री जैसी ऊंची तथा ढलान वाली भूमियों पर जल संरक्षण और समयबद्ध बुआई सुनिश्चित करने के लिए कतारबद्ध सीधी बुआई यानी डीएसआर पद्धति को अपनाये। जोखिम को कम करने के लिए किसी एक फसल (जैसे धान) पर पूरी तरह निर्भर न रहें फसल विविधिकारण अपनाएं। धान के बदले कम पानी में होने वाली दलहनी फसल जैसे अरहर, मूंग एवं उड़द तथा तिलहनी फसल जैसे तिल, सोयाबीन, मूंगफली को प्राथमिकता देवें। फसलों की सुरक्षा के साथ-साथ खेतों की मिट्टी में नमी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए 'भूमि आच्छादन' (मलचिंग) तकनीक अपनाये जिसके तहत फसल बोने से पहले और कटाई के बाद खेतों को ऊँचा अथवा दलहनी फसलों से ढका जाएगा ताकि वाष्पीकरण कम हो। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए खेतों में मेड़बंदी (फील्ड बंडिंग) को मजबूत करने और वर्षा जल संवर्धन के स्थानीय पारंपरिक उपायों को पुनर्जीवित करें। आपदा की स्थिति में आर्थिक क्षाति से बचाव हेतु प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत कृषक अपना पंजीयन अवश्य करावें। खेती के दौरान कोई भी समस्या या तकनीकी कठिनाई आती है, तो किसान बिना देरी किए अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के अधिकारियों से तुरंत संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते है।
- -सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित ग्रामीणों ने मुआवजा दिलाने जनदर्शन में दिया आवेदन-जनदर्शन में प्राप्त हुए 127 आवेदनदुर्ग/जिला कार्यालय के सभाकक्ष में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचे जनसामान्य लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनी। उन्होंने जनदर्शन में पहुंचे सभी लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समुचित समाधान एवं निराकरण करने संबंधित विभागों को शीघ्र कार्यवाही कर आवश्यक पहल करने को कहा। जनदर्शन में अपर कलेक्टर श्री वीरेन्द्र सिंह भी उपस्थित थे। जनदर्शन में अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, भूमि सीमांकन कराने, सीसी रोड निर्माण, ऋण पुस्तिका सुधार, आर्थिक सहायता राशि दिलाने सहित विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आज 127 आवेदन प्राप्त हुए। जनदर्शन में प्राप्त विभिन्न आवेदनों पर कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेेते हुए संबंधित अधिकारियों से फोन पर जानकारी ली और उक्त आवेदनों पर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।इसी कड़ी में ग्राम अंजोरा के किसानों ने खेतों में बरसाती पानी की निकासी कराने की मांग की है। किसानों ने बताया कि गांव के एक किसान द्वारा अपने खेत में ऊंची मेड़ बना देने से बरसाती पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया है। वर्षों से खेतों का बरसाती पानी एक-दूसरे के खेतों से होकर निकलता रहा है, लेकिन पानी की निकासी बंद होने से कई किसानों के खेतों में जलभराव हो गया है। इससे धान की फसल के खराब होने की आशंका बढ़ गई है और किसानों को लाखों रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इस पर कलेक्टर ने जनपद दुर्ग सीईओ को निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने को कहा। ग्राम परसाही के ग्रामीणों ने सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा दिलाने की मांग की। ग्रामीणों ने बताया कि परसाही से सिर्री मार्ग के चौड़ीकरण के दौरान करीब 50 परिवारों के मकान प्रभावित हुए थे, जिनमें कई मकान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए। ग्रामीणों ने बताया कि जनवरी 2024 में मकान टूटने के बाद से अब तक किसी भी प्रभावित परिवार को मुआवजा नहीं मिला है। इस संबंध में संबंधित विभाग को भी आवेदन दिए जा चुके हैं। ग्रामीणों ने कलेक्टर से प्रभावित परिवारों को जल्द मुआवजा राशि दिलाने की मांग की है। इस पर कलेक्टर ने एसडीएम पाटन को नियमानुसार कार्यवाही करने को कहा। उल्लास नगर, बॉम्बे आवास और अयप्पा नगर के रहवासियों ने जाम नालियों, जलभराव और दूषित पेयजल की समस्या के संबंध में आवेदन दिया। रहवासियों ने बताया कि अवैध अतिक्रमण हटाए जाने के बाद नाली पूरी तरह जाम हो गई है, जिससे गंदा पानी घरों के सामने और आसपास जमा हो रहा है। गंदे पानी के बीच से पेयजल पाइपलाइन गुजरने के कारण पानी दूषित होने की आशंका है। साथ ही क्षेत्र में दुर्गंध, मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है। इस संबंध में वार्ड पार्षद और नगर निगम में इसकी शिकायत की गई थी। इस पर कलेक्टर ने नगर निगम भिलाई आयुक्त को निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
- दुर्ग/ जिले में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जिले के विभिन्न शासकीय विद्यालयों के जर्जर हो चुके भवनों और कमरों को डिस्मेंटल (ध्वस्त) करने की अनुमति दे दी है । जिला शिक्षा अधिकारी और लोक निर्माण विभाग दुर्ग संभाग के प्रतिवेदन और प्रस्ताव के आधार पर इन अनुपयोगी और असुरक्षित ढांचों को निष्प्रयोज्य घोषित किया गया है। कलेक्टर द्वारा जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में चिन्हित किए गए स्कूलों के अतिरिक्त, क्षेत्र के अन्य जर्जर भवनों (शेष) का भी लोक निर्माण विभाग द्वारा लगातार निरीक्षण कर प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर शीघ्र ही उन्हें भी डिस्मेंटल करने की अनुमति प्रदान की जाएगी।प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले के तीनों प्रमुख विकासखंडों के कुल 66 शासकीय स्कूलों में यह कार्रवाई की जाएगी। जारी सूची के अनुसार, दुर्ग विकासखंड के अंतर्गत कुल 08 शासकीय स्कूलों के जर्जर कक्ष/भवन शमिल हैं। जिसमें शासकीय प्राथमिक शाला तितुरडीह क्रमांक 01 के 3 कक्ष और 1 हॉल, शासकीय प्राथमिक शाला कातुलबोड़ के 5 कक्ष, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुपेला के 9 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला सुपेला क्रमांक 01 के 10 कमरा, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला वृन्दानगर के 1 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला जुनवानी के 04 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला सुभाषनगर के 04 कक्ष व 1 बरामदा और शासकीय प्राथमिक शाला केम्प 01 भिलाई के पूरे भवन को डिस्मेंटल किया जाएगा ।इसी प्रकार धमधा विकासखंड के तहत कुल 26 शासकीय स्कूलों के जर्जर कक्ष/भवन शामिल हैं। जिसके तहत् शासकीय प्राथमिक शाला ठेंगाभाट का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला धौराभांठा के 02 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला सुरडुंग के कुल 03 कक्ष, 02 बरामदा व 1 सीढ़ी, शासकीय प्राथमिक शाला लिमतरा के 04 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला रिंगनी के 02 कक्ष व 01 बरामदा, शासकीय प्राथमिक शाला गोढ़ी के 02 कक्ष व 01 बरामदा, शासकीय प्राथमिक शाला दारगांव के 02 कक्ष व 01 हाल, शासकीय प्राथमिक शाला मोहलई का 01 कक्ष व 01 हाल, शासकीय प्राथमिक शाला मोहरेंगा के 04 कक्ष व 01 हाल, शासकीय प्राथमिक शाला मुड़पार ना. के 02 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला सेमरिया गि. के 07 कक्ष व 01 हाल, शासकीय प्राथमिक शाला न.अकोला का 01 कक्ष, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला गोढ़ी के 03 कक्ष व 01 हॉल, तथा शासकीय प्राथमिक शाला पाहरा के 04 कक्ष व 01 बरामदा को ढहाया जाएगा। इसके साथ ही शासकीय प्राथमिक माध्यमिक शाला जरवाय के 02 कक्ष व 01 बरामदा, शासकीय प्राथमिक शाला धिकुड़िया के 02 कक्ष व 01 हॉल, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सेमरिया गि. के 4 कक्ष व 01 हॉल, शासकीय प्राथमिक शाला नंदौरी के 02 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला हरदी का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला पिटौरा के 02 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला सांकरा के 03 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला मलपुरीखुर्द का 01 कक्ष (किचन), शासकीय प्राथमिक शाला मुरमुंदा के 02 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला अहिवारा के 05 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला खेरधा का 01 कक्ष और शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला खेरधा के 02 कक्ष व 01 बरामदा को भी निष्प्रयोज्य मानकर डिस्मेंटल किया जा रहा है।इसी क्रम में पाटन विकासखंड के अंतर्गत आने वाले कुल 32 शासकीय स्कूलों में भी यह कार्रवाई की जा रही है, जिसमें शासकीय प्राथमिक शाला सोनपुर के 02 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला खम्हरिया ड का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला गाड़ाडीह के 3 कक्ष व शौचालय, शासकीय प्राथमिक शाला बोदल (मटंग) के 4 कक्ष व शौचालय, शासकीय प्राथमिक शाला चीचा का 1 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला नवागांव के 2 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला परेवाडीह का 1 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला गोंड़पेण्डी का 1 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला पहन्दा अ के 13 कक्ष व 2 बरामदा, शासकीय कन्या पूर्व माध्यमिक शाला पाटन के 04 कक्ष, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला जमराव का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला मजार चौक सेलूद का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला धूमा के 04 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला शुक्लाडीह का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला डीह का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला दरबारमोखली के 04 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला देमार नवागांव का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला लोहरसी वरि. के 02 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला भांठागांव का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला बालक जामगांव एम के 02 कक्ष तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झीट का 01 कक्ष, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सांकरा का 01 कक्ष, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला असोगा का 01 कक्ष, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला तुलसी का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला बजरंगपारा अमलेश्वर का 01 कक्ष, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सेलूद का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला सिपकोना के 03 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला सेजस रानीतराई का 01 कक्ष, शासकीय प्राथमिक शाला सेलूद का 01 कक्ष, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मर्रा के 02 कक्ष, शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला केसरा का 01 कक्ष और शासकीय प्राथमिक शाला भनसुली के का 01 कक्ष डिस्मेंटल किया जाएगा।
- दुर्ग/ कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशन में आज लोक निर्माण विभाग के मीटिंग हॉल में जिला दुर्ग के आधार ऑपरेटरों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में दुर्ग जिले के 58 तथा खैरागढ़ जिले के 4 आधार ऑपरेटरों ने भाग लिया। प्रशिक्षण भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के असिस्टेंट मैनेजर मो. सौबान मोहिदीन द्वारा प्रदान किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य आधार नामांकन एवं आधार अद्यतन कार्यों को यूआईडीएआई के नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुरूप अधिक गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनाना था। प्रशिक्षण के दौरान ऑपरेटरों को दस्तावेज़ सत्यापन, तकनीकी अपडेट, जन्मतिथि संशोधन, जेंडर लिमिट क्रॉस, नाम लिमिट क्रॉस, पेनल्टी संबंधी प्रावधान, आधार रद्द एवं निष्क्रिय मामलों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही ऑपरेटरों द्वारा उठाए गए विभिन्न तकनीकी एवं कार्य संबंधी प्रश्नों का विस्तार से समाधान किया गया।कार्यक्रम में ई-डिस्ट्रिक्ट प्रबंधक, जिला समन्वयक एवं एमटीओ भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के माध्यम से आधार सेवाओं को और अधिक प्रभावी, सटीक एवं नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
- 24 घंटे मिलेगी अपने राशनकार्ड का चावल-कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने किया अन्नपूर्ति ग्रीन एटीएम का निरीक्षण*दुर्ग,/ जिले का पहला अन्नपूर्ति ग्रीन एटीएम सुपेला के गदा चौक स्थित अम्बेडकर नगर में शुरू होने जा रहा है। इस अत्याधुनिक व्यवस्था के माध्यम से राशनकार्डधारी अब 24 घंटे अपनी सुविधा अनुसार चावल प्राप्त कर सकेंगे। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने अन्नपूर्ति ग्रीन एटीएम का निरीक्षण कर शुभारंभ की तैयारियों का जायजा लिया तथा सुरक्षा एवं संचालन के लिए चौकीदार और ऑपरेटर की दो शिफ्ट में ड्यूटी लगाने के निर्देश दिए। वन नेशन, वन राशनकार्ड योजना के तहत राशनकार्डधारी, चाहे वह जिले के किसी भी क्षेत्र में निवास करता हो या किसी भी उचित मूल्य दुकान से राशन प्राप्त करता हो, अम्बेडकर नगर स्थित इस ग्रीन एटीएम से अपने हिस्से का चावल प्राप्त कर सकेगा। अन्नपूर्ति ग्रीन एटीएम का संचालन महिला स्व-सहायता समूह द्वारा किया जाएगा। समूह की सदस्य मशीन में चावल की आपूर्ति, संचालन एवं हितग्राहियों की सहायता के लिए उपस्थित रहेंगी। वहीं इच्छुक हितग्राही स्वयं भी मशीन का उपयोग कर चावल प्राप्त कर सकेंगे। एटीएम की क्षमता 2.7 मीट्रिक टन है। इस व्यवस्था से लोगों को उचित मूल्य की दुकानों पर लंबी कतारों में खड़े रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी और राशन वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज एवं सुविधाजनक बनेगी।*ऐसे करेगा काम अन्नपूर्ति ग्रीन एटीएम*मशीन से चावल प्राप्त करने के लिए हितग्राही को सबसे पहले अपना राशनकार्ड नंबर दर्ज करना होगा। इसके बाद बायोमेट्रिक सत्यापन (अंगूठे का निशान) करना होगा। सत्यापन पूर्ण होते ही पात्रता के अनुसार निर्धारित मात्रा में चावल मशीन से स्वतः उपलब्ध हो जाएगा। केवल शासन द्वारा जारी वैध राशनकार्डधारियों को ही इस सुविधा का लाभ मिलेगा। इस दौरान खाद्य नियंत्रक श्री अनुराग भदौरिया सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
- निःशुल्क मिलेंगी परिवार नियोजन सेवाएंजब बच्चों में हो सही अंतराल, परिवार बने स्वस्थ और खुशहाल’’ के ध्येय के साथ होगा आयोजनदुर्ग/ जिले में कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में आगामी 11 से 18 जुलाई 2026 तक जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़े का विशेष आयोजन किया जा रहा है। ‘‘जब बच्चों में हो सही अंतराल, परिवार बने स्वस्थ और खुशहाल’’ ध्येय के साथ मनाए जाने वाले इस अभियान का मुख्य उद्देश्य समुदाय को गर्भधारण के उचित समय, दो बच्चों के मध्य न्यूनतम 3 साल का सुरक्षित अंतराल रखने और परिवार नियोजन के प्रति जागरूक करना है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में गुणात्मक सुधार लाया जा सके। अभियान के दौरान आम जनता के बीच व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने और परिवार नियोजन सेवाओं की उपयोगिता बताने के लिए सभी विकासखंडों के सामुदायिक व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ’सास-बहू सम्मेलन’ एवं ’मोर मितान मोर संगवारी चौपाल’ जैसे जागरूक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस पखवाड़े की सफलता के लिए वर्तमान में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा लक्षित दंपत्तियों से घर-घर संपर्क कर स्वास्थ्य सेवाओं का परामर्श दिया जा रहा है।जिला परिवार कल्याण कार्यक्रम नोडल अधिकारी डॉ. अर्चना चौहान ने बताया कि जिला चिकित्सालय सहित समस्त स्वास्थ्य केंद्रों में परिवार नियोजन के स्थायी और अस्थायी साधन पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध हैं। सरकार द्वारा परिवार नियोजन अपनाने वाले लाभार्थियों को आर्थिक प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है, जिसके तहत महिला नसबंदी के लिए 2,000/- रुपये तथा पुरुष नसबंदी के लिए 3,000/- रुपये की राशि प्रदान की जाती है। इसके अतिरिक्त अस्थायी साधनों जैसे- कॉपर-टी, अंतरा इंजेक्शन, गर्भ निरोधक गोलियां (छाया/माला-एम) और निरोध की भी मुफ्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है, जिन्हें मितानिनों के माध्यम से भी घर-घर वितरित किया जा रहा है। पखवाड़े के दौरान 11 से 18 जुलाई तक जिला चिकित्सालय दुर्ग और सिविल अस्पताल सुपेला में प्रतिदिन महिला नसबंदी ऑपरेशन की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा निर्धारित तिथियों पर विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में विशेषज्ञ सर्जनों द्वारा कैंप लगाए जाएंगे, जिसमें पाटन में 11 जुलाई को डॉ. के.के. डहरिया, धमधा में 14 जुलाई को डॉ. रचना अग्रवाल, उतई में 16 जुलाई को डॉ. कालिन्दी, अहिवारा में 17 जुलाई को डॉ. रूबी मरकाम एवं निकुम में 13 जुलाई को डॉ. ज्योति ध्रुव महिला नसबंदी ऑपरेशन करेंगी। इसी तरह पुरुष नसबंदी को बढ़ावा देने के लिए सर्जन डॉ. ए.के. सान्याल द्वारा जिला चिकित्सालय दुर्ग में 11 जुलाई, निकुम में 13 जुलाई और उतई में 15 जुलाई को ऑपरेशन किए जाएंगे। डॉ. प्रफुल्ल धीवर द्वारा 13 जुलाई को धमधा, 14 जुलाई को कुम्हारी, 15 जुलाई को अहिवारा और 17 जुलाई को सुपेला में तथा डॉ. दीपक कश्यप द्वारा पाटन विकासखंड के अंतर्गत 15 जुलाई को पाटन और 17 जुलाई को झीट में पुरुष नसबंदी शिविर का संचालन किया जाएगा। जिले के नागरिकों से अपील की गई है कि वे माता और शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
- 10,000 की वार्षिक की सहायता से बढ़ी आर्थिक सुरक्षारायपुर/ राज्य शासन की जनकल्याणकारी भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजनाआर्थिक रूप से कमजोर और भूमिहीन परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक बड़ा माध्यम साबित हो रही है। यह योजना जरूरतमंद परिवारों को सीधी आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत संबल दे रही है। इसी कड़ी में विकासखंड सक्ती के ग्राम जेठा की निवासी श्रीमती रुकमणी पटेल इस योजना का लाभ उठाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में सफल रही हैं।मजदूरी पर निर्भर परिवार को मिला बड़ा सहाराश्रीमती रुकमणी पटेल के परिवार के पास कृषि योग्य भूमि नहीं है, जिसके कारण उनकी आजीविका मुख्य रूप से मजदूरी पर ही निर्भर है। सीमित आय होने की वजह से परिवार की दैनिक आवश्यकताओं और घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना बेहद कठिन होता था। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में राज्य शासन की यह योजना उनके परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर सामने आई। योजना के अंतर्गत उन्हें प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है।आर्थिक राहत से जीवनयापन हुआ सहजश्रीमती रुकमणी ने बताया कि इस राशि का उपयोग वे अपने घरेलू खर्चों की पूर्ति और अन्य ज़रूरी कार्यों के लिए कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार को बड़ी आर्थिक राहत मिली है, बल्कि उनका जीवनयापन भी पहले की तुलना में काफी सहज और सुगम हो गया है। नियमित रूप से मिलने वाली इस मदद से भविष्य को लेकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और दैनिक खर्चों को लेकर होने वाली आर्थिक चिंताएं काफी हद तक दूर हुई हैं।मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभारयोजना की उपयोगिता के संबंध में श्रीमती रुकमणी पटेल ने कहा कि भूमिहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए यह योजना अत्यंत लाभकारी है, जो संकट के समय सीधे मदद पहुँचाती है। उन्होंने इस कल्याणकारी पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को एक नई उम्मीद, आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा का ठोस आधार प्रदान किया है।
- - थोक बाजार फेस -2 का नामकरण लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के नाम पर : परिसर में स्थापित होगी 15 फिट ऊंची प्रतिमारायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज रायपुर के डुमरतराई में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा विकसित नवीन थोक बाजार फेस-2 का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि परिसर का नामकरण लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम पर किया जाएगा तथा यहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तर्ज पर उनकी 15 फीट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की मजबूत नींव रखी। उनके नाम पर इस आधुनिक व्यापारिक परिसर का नामकरण राष्ट्र निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि है।मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यापार और रोजगार एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां आधुनिक व्यापारिक अधोसंरचना विकसित होती है, वहां आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होता है, नए निवेश आकर्षित होते हैं और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। डुमरतराई का यह आधुनिक थोक बाजार रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापार को नई गति देगा तथा प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाएगा।उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर लगभग 36 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस अत्याधुनिक परिसर में चौड़ी सड़कें, पर्याप्त पार्किंग, सुव्यवस्थित यातायात व्यवस्था तथा आधुनिक व्यापारिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह व्यापारियों की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के साथ-साथ 'ईज ऑफ लिविंग' को भी समान महत्व दे रही है। व्यापार, उद्योग और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए अनेक सुधार लागू किए गए हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर दिखाई दे रहा है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अब केवल आवास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की अधोसंरचना विकास परियोजनाओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मंडल द्वारा अपनाई गई नई कार्यसंस्कृति और कुशल प्रबंधन विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण को नई गति देंगे।आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में व्यापारिक अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में डुमरतराई में आधुनिक थोक बाजार की जो परिकल्पना की गई थी, वह आज साकार हुई है। इससे व्यापारियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने के साथ रायपुर की यातायात व्यवस्था भी अधिक सुगम होगी।छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव ने कहा कि नवीन थोक बाजार मंडल की गुणवत्ता, नवाचार और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह परियोजना प्रदेश में व्यापार, निवेश, रोजगार सृजन तथा समग्र आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।कार्यक्रम में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा सहित जनप्रतिनिधि, विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी, व्यापारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।उल्लेखनीय है कि डुमरतराई थोक बाजार का विकास दो चरणों में किया गया है। प्रथम चरण में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकानें एवं हॉल निर्मित किए गए। द्वितीय चरण में लगभग 145 करोड़ रुपये की लागत से 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया है। दोनों चरणों के पूर्ण होने के साथ प्रदेश को आधुनिक, सुव्यवस्थित और सर्वसुविधायुक्त थोक व्यापारिक परिसर की सौगात मिली है।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर लंबित प्रकरण का हुआ शीघ्र निराकरण-पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभाररायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के गृह निवास बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में प्रस्तुत आवेदन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आकाशीय बिजली गिरने से मृत व्यक्ति के आश्रित को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है। इस पहल से पीड़ित परिवार को बड़ी राहत मिली है और शासन की संवेदनशील कार्यप्रणाली का एक और उदाहरण सामने आया है।जानकारी के अनुसार, आकाशीय बिजली गिरने से हुई मृत्यु के बाद मुआवजा राशि लंबित होने पर मृतक के परिजनों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया में आवेदन प्रस्तुत कर आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री के निर्देशों के पालन में राजस्व विभाग द्वारा प्रकरण का परीक्षण किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) ने मृतक के आश्रित श्री संजय कुजूर, ग्राम झिक्की, तहसील बगिया, जिला जशपुर के पक्ष में 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत करने की अनुशंसा कलेक्टर जशपुर को भेजी। आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर प्रदान की गई। आर्थिक सहायता मिलने से मृतक के परिजनों को कठिन समय में संबल मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन देने के बाद उनके मामले पर तत्काल संज्ञान लिया गया और शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित होने से उन्हें समय पर आर्थिक सहायता प्राप्त हो सकी।उल्लेखनीय है कि बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी केंद्र बनकर उभरा है। यहां प्राप्त आवेदनों पर प्राथमिकता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, जिससे जरूरतमंदों को समय पर राहत मिल रही है और शासन के प्रति आमजन का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
- -शासकीय सेवकों के लिए वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना का शुभारंभ-आकस्मिक जरूरतों के लिए अब ऊंची ब्याज दर पर ऋण लेने की आवश्यकता नहीं होगी-ई-कोष से एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से मिलेगा त्वरित लाभरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन के सभागार में राज्य के शासकीय सेवकों के लिए वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने योजना के ब्रोशर का भी विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने इसे कर्मचारी कल्याण, सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य शासकीय सेवकों को आकस्मिक परिस्थितियों में सम्मानजनक, त्वरित और सहज वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि शासकीय सेवक राज्य के विकास की रीढ़ हैं। जब कर्मचारी आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर कार्य करेंगे, तभी शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारियों को आकस्मिक आवश्यकताओं के लिए निजी साहूकारों अथवा ऊंची ब्याज दरों पर ऋण लेने की विवशता का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने उनकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की है, जिसके माध्यम से वे बिना अनावश्यक कागजी प्रक्रिया के अपनी पात्रता के अनुसार अल्पावधि ऋण प्राप्त कर सकेंगे।मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त विभाग ने सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभावी उपयोग करते हुए इस सुविधा को ई-कोष प्रणाली से एकीकृत किया है। यह व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल, पेपरलेस, सुरक्षित और पारदर्शी है तथा इससे राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार भी नहीं आएगा। उन्होंने इस अभिनव पहल के लिए वित्त विभाग की टीम को बधाई देते हुए सभी शासकीय सेवकों से विकसित छत्तीसगढ़ और सुशासन के संकल्प को आगे बढ़ाने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों और कर्मचारी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने के बाद अब वेतन के विरुद्ध अल्पावधि ऋण योजना प्रारंभ की गई है, जिससे तात्कालिक आवश्यकताओं के लिए बिना ब्याज वित्तीय सहायता उपलब्ध होगी। उन्होंने बताया कि पायलट चरण के मात्र दो माह में 73 हजार से अधिक कर्मचारियों ने पंजीयन कराया है तथा 27 हजार कर्मचारी इस सुविधा का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। भविष्य में बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर अधिक राशि के ऋण की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना है।छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी संघ के प्रांतीय संयोजक श्री कमल वर्मा ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना कर्मचारियों की लंबे समय से महसूस की जा रही आवश्यकता को पूरा करेगी तथा आकस्मिक परिस्थितियों में उन्हें सम्मानजनक और त्वरित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराएगी।उल्लेखनीय है कि यह सुविधा ई-कोष प्रणाली से एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित होगी। कर्मचारी ई-कोष के एम्प्लॉयी कॉर्नर से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। ई-केवाईसी, डिजिटल प्रमाणीकरण एवं सहमति की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ऋण स्वीकृति एवं वितरण त्वरित रूप से किया जाएगा। वित्त विभाग द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के अनुसार पूरी व्यवस्था में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता तथा डिजिटल प्रमाणीकरण के उच्च मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया है।कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री विकासशील, वित्त विभाग के विशेष सचिव श्री चंदन कुमार, लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश बंसल, संचालक (बजट एवं वित्त) श्री ऋषभ पराशर, छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री चंद्रकांत पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
- -पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान की घोषणा-गृहग्राम गनियारी को कलाग्राम के रूप में किया जाएगा विकसित-संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई के श्रद्धांजलि समारोह के अवसर पर की घोषणारायपुर । छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित करने वाली पंडवानी की महान साधिका, पद्म विभूषण स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई को बुधवार को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर के मुक्ताकाशी मंच पर आयोजित भव्य सांगीतिक श्रद्धांजलि समारोह में भावपूर्ण श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। लोककला, साहित्य और संस्कृति जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति में आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में स्व. तीजन बाई के जीवन, साधना और उनके अद्वितीय सांस्कृतिक योगदान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की प्रेरणा एवं मंशा के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने घोषणा की कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के नाम पर पंडवानी कला के क्षेत्र में प्रतिवर्ष राज्य सम्मान प्रदान किया जाएगा। उनके जन्मस्थल गनियारी ग्राम को कलाग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा तथा उनके प्रिय तंबूरे को रायपुर स्थित महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में संरक्षित एवं प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनकी सांस्कृतिक विरासत से प्रेरणा ले सकें।कार्यक्रम में मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय तीजन बाई की पुत्रवधु श्रीमती वेणु देशमुख को एक लाख रुपये की सहायता राशि का चेक भी प्रदान किया। इस अवसर पर श्रीमती वेणु देशमुख ने श्रद्धांजलि समारोह के आयोजन के लिए संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल तथा संस्कृति विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनके परिवार का नहीं, बल्कि पूरी लोककला परंपरा का सम्मान है।इस अवसर पर मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि स्वर कभी मौन नहीं होते। वे समय की सीमाओं को लांघकर युगों तक जनमानस की चेतना में गूंजते रहते हैं। पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का स्वर छत्तीसगढ़ की लोकआत्मा का अमर नाद है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति, परंपरा और लोकगौरव से सदैव जोड़ता रहेगा। वे केवल एक महान लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की सजीव पहचान थीं। राज्य को उन पर सदैव गर्व रहेगा और उनकी अमर लोकधुने हमारी सांस्कृतिक चेतना में अनवरत गूंजती रहेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोककलाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है तथा तीजन बाई की स्मृति में की गई घोषणाएं इसी संकल्प का विस्तार हैं।कार्यक्रम के दौरान मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, संस्कृति विभाग के सचिव श्री एस. भारतीदासन तथा संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे ने स्वर्गीय तीजन बाई के जीवन और कला यात्रा पर आधारित विशेष ब्रोशर का विमोचन किया। सभी अतिथियों ने स्वर्गीय तीजन बाई के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। संस्कृति विभाग द्वारा उनके जीवन पर आधारित वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया गया, जिसे उपस्थित जनों ने भावुक होकर देखा।सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत लोक कलाकार पुष्पा निषाद के पंडवानी गायन से हुई। इसके बाद स्वर्गीय तीजन बाई की शिष्याएं तरूणा साहू और आराध्या साहू तथा दुर्गा साहू ने कापालिक शैली में प्रभावशाली पंडवानी प्रस्तुति देकर अपनी गुरु को श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्री दुष्यंत द्विवेदी ने वेदमती शैली में पंडवानी गायन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को और अधिक भावपूर्ण बना दिया। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों, कलाकारों और संस्कृति प्रेमियों ने स्वर्गीय तीजन बाई से जुड़े अपने संस्मरण साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व और कला साधना को याद किया। अनेक वक्ताओं ने कहा कि तीजन बाई ने छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व स्तर पर नई पहचान दिलाई। इस अवसर पर कलाकारों ने स्वर्गीय तीजन बाई को मरणोपरांत भारत रत्न प्रदान किए जाने तथा उनके नाम पर पंडवानी एवं सांस्कृतिक विश्वविद्यालय की स्थापना की मांग भी राज्य सरकार के समक्ष रखी।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा, छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सुश्री मोना सेन, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्रकार, छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष श्री सलीम राज, यूसीसी सदस्य श्री मोहन पवार सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।साहित्य जगत से डॉ. पी.सी. लाल यादव, श्री परदेशीराम वर्मा, डॉ. सुशील त्रिवेदी तथा कला जगत से पद्मश्री ममता चंद्राकर, पद्मश्री भारती बंधु, पद्मश्री उषा बारले, पद्मश्री राधेश्याम बारले, मीर अली मीर, निर्मला ठाकुर, मोक्षदा चंद्राकर, श्री सुनील सोनी, किरण शर्मा, कविता वासनिक, राकेश तिवारी, सरस्वती बारले, वंदना बारले, दुर्गा साहू, इतिहासकार आचार्य रमेन्द्रनाथ मिश्र, अशोक तिवारी, छत्तीसगढ़ी वाद्ययंत्रों के संग्रहकर्ता रिखी क्षत्रीय, चेतन देवांगन, रत्ना पांडे तथा सुधीर शर्मा सहित बड़ी संख्या में कलाकार और साहित्यकार उपस्थित रहे। मंच का संचालन छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा तथा श्री अरुण निर्मलकर ने किया।समारोह के अंत में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्षा सुश्री मोना सेन ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई ने अपने स्वर से केवल पंडवानी को नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व मंच तक पहुंचाया। उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनकी लोककला, उनकी परंपरा और उनके मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं। आज यहां उपस्थित प्रत्येक कलाकार, साहित्यकार और संस्कृति प्रेमी की सहभागिता उनके प्रति सामूहिक सम्मान का प्रतीक है। संस्कृति विभाग और राज्य सरकार इस अमूल्य विरासत को सहेजने और आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। महान कलाकार भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच न रहें, लेकिन उनकी कला, उनकी साधना और उनकी सांस्कृतिक विरासत सदैव समाज की चेतना में जीवित रहती है। स्वर्गीय पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का अमर स्वर भी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और छत्तीसगढ़ की लोकधारा में अनवरत गूंजता रहेगा।
- -82.19 करोड़ रुपए की अग्रिम कृषि सहायता और 31.28 करोड़ रुपए के खाद-बीज से खरीफ खेती को मिली नई रफ्ताररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को खेती-किसानी के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करते हुए खेती को अधिक लाभकारी और सशक्त बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। खरीफ सीजन की शुरुआत में किसानों को आर्थिक संसाधनों की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसी क्रम में रायगढ़ जिले के 33,017 किसानों को 79 प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से 82.19 करोड़ रुपए की अग्रिम कृषि सहायता उपलब्ध कराई गई है। वहीं किसानों को 31.28 करोड़ रुपए मूल्य के खाद एवं बीज उपलब्ध कराए गए हैं। इस प्रकार जिले के किसानों तक अब तक 113.47 करोड़ रुपए की अग्रिम सहायता पहुंचाई जा चुकी है। समय पर मिली इस सहायता से किसानों को खेती की तैयारियों में बड़ी राहत मिली है और खरीफ फसलों की बुवाई को नई गति मिली है।जिले के सभी विकासखंडों में किसानों को समान रूप से लाभान्वित किया गया है। रायगढ़ विकासखंड की 14 समितियों के माध्यम से 6,113 किसानों, पुसौर की 15 समितियों से 6,487 किसानों, खरसिया की 12 समितियों से 8,575 किसानों, धरमजयगढ़ की 15 समितियों से 4,898 किसानों, घरघोड़ा की 5 समितियों से 1,432 किसानों, तमनार की 10 समितियों से 3,228 किसानों तथा लैलूंगा की 8 समितियों से 2,284 किसानों को अग्रिम कृषि सहायता उपलब्ध कराई गई है। इससे किसानों को समय पर कृषि कार्य प्रारंभ करने के लिए आवश्यक संसाधन प्राप्त हुए हैं।खरीफ सीजन में किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए जिले की सभी सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में लक्ष्य के विरुद्ध 22,668 मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों का भंडारण किया गया है। इनमें से अब तक 18,641 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 82 प्रतिशत है। किसानों को अब तक 10,718 मीट्रिक टन यूरिया, 2,342 मीट्रिक टन डीएपी, 2,430 मीट्रिक टन एनपीके, 795 मीट्रिक टन पोटाश तथा 2,356 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध कराया जा चुका है। सभी सहकारी समितियों में किसानों की मांग के अनुरूप उर्वरकों की सतत उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिससे कृषि कार्य बिना किसी बाधा के संचालित हो रहे हैं।पिछले सप्ताह हुई अच्छी वर्षा से खरीफ सीजन की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। समय पर उपलब्ध कराई गई अग्रिम कृषि सहायता, खाद एवं बीज से किसानों को खेती की तैयारियों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। जिलेभर में धान सहित खरीफ फसलों की बुवाई तेजी से जारी है और किसान पूरे उत्साह के साथ खेतों में जुटे हुए हैं। शासन की किसान हितैषी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा कृषि आदानों की समय पर उपलब्धता से खेती का कार्य सुचारु रूप से आगे बढ़ रहा है। समय पर उपलब्ध संसाधनों और अनुकूल मौसम के कारण किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है। इससे न केवल खरीफ सीजन की बुवाई को गति मिली है, बल्कि जिले में इस वर्ष बेहतर उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
- -पात्र आवासहीन परिवारों को पक्का घर मिले यह सुनिश्चित होरायपुर / मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में प्रधानमंत्री आवास 2.0 भूमि टॉक्स फोर्स की बैठक सम्पन्न हुई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय प्रोजेक्ट के लिए भूमि के सर्वेक्षण एवं चिन्हांकन करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है। मुख्य सचिव ने सभी जिलों के कलेक्टरों को प्रधानमंत्री आवास 2.0 के लिए हितग्राही की पहचान कर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। उन्होंने आबादी भूमि पर रहने वाले पात्र हितग्राहियों को ढूंढकर सत्यापन करना एवं उन्हें आवास उपलब्ध कराने के लिए समूचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए है। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को नगरीय निकायों मेें वर्तमान और भविष्य की आवासीय आवश्यकता का आंकलन कर कार्ययोजना बनाने कहा है। जिससे समय पर हितग्राहियों को आवास उपलब्ध कराये जा सकें। इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्रों में योजनांतर्गत हितग्राहियों की पहचान कर आवश्यकतानुसार आवास बनाने के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए है। बैठक में नगरीय एवं प्रशासन विकास विभाग की सचिव श्रीमती आर.शंगीता, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
- रायपुर /छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेज़ी से बढ़ाने का फैसला लिया है। मंत्रालय में सचिव सह-परिवहन आयुक्त श्री एस प्रकाश की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में परिवहन विभाग, सभी आरटीओ/डीटीओ, ऊर्जा विभाग, एचपीसीएल, बीपीसीएल, एलओसीएल, जिओ -बीपी, ईवी निर्माता और विशेषज्ञ मौजूद रहे।अभी अलग-अलग कंपनियों के अलग-अलग एप हैं, जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी होती है। सरकार अब राज्य स्तर पर एकीकृत प्लेटफॉर्म/एप बनाएगी। भारत सरकार भी यूनिवर्सल ईवी चार्जिंग एप ला रही है। चिप्स के जरिए ऊर्जा विभाग पहले ही पायलट एप पर काम कर रहा है। केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत चार्जिंग स्टेशन लगाने पर वित्तीय सहायता और छत्तीसगढ़ ईवी नीति-2022 के प्रोत्साहनों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी जिलों के आरटीओ/डीटीओ को अपने क्षेत्र में चार्जिंग स्टेशनों के लिए जगह चिन्हित करने और एनओसी की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए।एचपीसीएल, बीपीसीएल, एलओसीएल, जिओ -बीपी के निर्माताओं ने राज्य में लगे और प्रस्तावित चार्जिंग स्टेशनों की जानकारी दी और आगे विस्तार की योजना बताया। सचिव सह-परिवहन आयुक्त ने कहा कि ईवी चार्जिंग का मजबूत नेटवर्क बनाना और लोगों को समय पर जानकारी देना जरूरी है। इससे हरित परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और प्रदूषण कम होगा। छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य राज्यभर में आसान और सुलभ चार्जिंग सुविधा देकर ज्यादा से ज्यादा लोगों को ईवी अपनाने के लिए प्रेरित करना है।



























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