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- -मुख्यमंत्री ने किया छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क का विमोचन, बस्तर के समग्र एवं परिणामोन्मुख विकास के लिए 'बस्तर अंजोर' पहल का शुभारंभ-राज्य स्तर पर 343 और जिला स्तर पर 99 संकेतकों के माध्यम से होगी विकास कार्यों की प्रभावी निगरानीरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की उपस्थिति में राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क का विमोचन किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. राज्य एवं जिला संकेतक फ्रेमवर्क 2.0 तथा मेटाडेटा हैंडबुक का भी विमोचन किया गया। साथ ही बस्तर संभाग के समावेशी, अभिसरण आधारित और मापनीय विकास के लिए तैयार की गई अभिनव पहल 'बस्तर अंजोर' की भी शुरुआत की गई।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, सटीक डेटा और परिणाम आधारित मॉनिटरिंग अत्यंत आवश्यक है। एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क शासन को साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय तथा योजनाओं की नियमित निगरानी के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल 'विकसित छत्तीसगढ़ @2047' के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल विकास योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। एस.डी.जी. 2.0 के माध्यम से विकास की प्रगति को अधिक पारदर्शी, मापनीय और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।नए एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क के अंतर्गत राज्य स्तर पर संकेतकों की संख्या 275 से बढ़ाकर 343 तथा जिला स्तर पर 82 से बढ़ाकर 99 कर दी गई है। इससे विकास कार्यों की अधिक व्यापक, सटीक और वैज्ञानिक निगरानी संभव होगी। मेटाडेटा हैंडबुक में प्रत्येक संकेतक की गणना पद्धति एवं रिपोर्टिंग प्रणाली को मानकीकृत किया गया है, जिससे पूरे राज्य में डेटा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।इस अवसर पर राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने 'बस्तर अंजोर' की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह अभिसरण (कन्वर्जेंस) आधारित विकास मॉडल है, जिसे बस्तर संभाग को देश का सर्वाधिक विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाने के संकल्प को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।उन्होंने बताया कि 'बस्तर अंजोर' के 3+4 मॉडल के अंतर्गत जिला स्तर की तीन प्रमुख पहल - नियद नेल्लानार 2.0, बस्तर मुन्ने और स्वस्थ बस्तर - का अभिसरण चार प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विकास फ्रेमवर्क - एस.डी.जी. 2030, विकसित छत्तीसगढ़ @2047, आकांक्षी जिला एवं विकासखंड कार्यक्रम से किया गया है। इसका उद्देश्य अतिरिक्त संसाधनों के बिना बेहतर समन्वय के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में ठोस एवं मापनीय परिणाम प्राप्त करना है।'बस्तर अंजोर' अंत्योदय से सर्वोदय की भावना पर आधारित एक दूरदर्शी पहल है, जो बस्तर को समावेशी, सतत एवं परिणामोन्मुख विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, मंत्रिपरिषद के सदस्य, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।
- रायपुर । समय पर कृषि आदान सामग्री की उपलब्धता और आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से प्रदेश का अन्नदाता आत्मविश्वास के साथ खरीफ फसलों की तैयारियों में जुटा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किसानों को खाद, बीज, उर्वरक एवं अन्य आवश्यक कृषि संसाधनों की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। इसके परिणामस्वरूप किसानों को खेती की तैयारी के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है और वे निर्धारित समय पर बुआई कार्य प्रारंभ कर पा रहे हैं।कोरबा के विकासखंड करतला अंतर्गत ग्राम भलपहरी के कृषक श्री फूल साय इसका प्रेरक उदाहरण हैं। लगभग तीन एकड़ भूमि में धान की खेती करने वाले श्री फूल साय वर्षों से कृषि कार्य से जुड़े हुए हैं। वे बताते हैं कि इस वर्ष उन्हें आवश्यकता के अनुरूप खाद, बीज एवं अन्य कृषि आदान सामग्री समय पर उपलब्ध हो गई, जिससे खेती की तैयारी बिना किसी कठिनाई के पूरी हो सकी। उन्होंने बताया कि पहले की तुलना में अब कृषि व्यवस्थाएं अधिक सुव्यवस्थित और किसान हितैषी हुई हैं। शासन द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं एवं कृषि प्रोत्साहन उपायों से किसानों को खेती के लिए आवश्यक संसाधन समय पर मिल रहे हैं, जिससे खेती करना पहले की अपेक्षा अधिक सुगम हुआ है।श्री फूल साय ने बताया कि इस वर्ष उन्होंने अपनी फसल में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया का उपयोग शुरू किया है। आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचारों को अपनाना समय की जरूरत है। नैनो उर्वरकों से फसल को संतुलित पोषण मिलता है, लागत नियंत्रित रहती है तथा बेहतर उत्पादन की संभावनाएं बढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि कृषि आदान सामग्री प्राप्त करने में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। किसानों को समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने तथा कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है।
- -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के प्रयासों से रायगढ़ में आधारभूत सुविधाओं का लगातार हो रहा विस्ताररायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व तथा वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के विशेष प्रयासों से रायगढ़ जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) द्वारा 4 करोड़ 13 लाख 82 हजार 400 रुपये से अधिक की लागत के विभिन्न विकास कार्यों को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले के ग्रामीण एवं खनन प्रभावित क्षेत्रों में जनसुविधाओं का विस्तार होगा और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी।स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से धरमजयगढ़ क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घरघोड़ा के निर्माण एवं उन्नयन कार्य के लिए 2 करोड़ 80 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस परियोजना के पूर्ण होने पर क्षेत्रवासियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी । ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पांच पेयजल परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है। ग्राम गोरपार एवं नंदगांव में 25 केएल सम्पवेल आधारित पेयजल व्यवस्था के लिए 6 लाख 47 हजार 700 रुपये-रुपये, ग्राम शहपुर में नलकूप खनन, रॉ-वॉटर पंप एवं पाइपलाइन विस्तार के लिए 9 लाख 94 हजार रुपये, ग्राम नवापारा के लिए 5 लाख 32 हजार रुपये तथा ग्राम पुसल्दा के लिए 8 लाख 45 हजार रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन योजनाओं से संबंधित गांवों में स्वच्छ एवं नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।युवाओं को बेहतर तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए धर्मजयगढ़ स्थित शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था (आईटीआई) भवन के जीर्णोद्धार हेतु 82 लाख 86 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई है। इससे संस्थान की अधोसंरचना मजबूत होगी और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।शिक्षा के क्षेत्र में भी ग्राम पंचायत साम्हारसिंघा में नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण के लिए 14 लाख 30 हजार रुपये की प्रशासकीय मंजूरी प्रदान की गई है। नए भवन के निर्माण से विद्यार्थियों को सुरक्षित, सुविधायुक्त और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध होगा।स्वीकृत परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। स्वास्थ्य संबंधी कार्य छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी), पेयजल योजनाएं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, आईटीआई भवन का जीर्णोद्धार छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड तथा प्राथमिक शाला भवन का निर्माण जनपद पंचायत धरमजयगढ़ के माध्यम से कराया जाएगा।डीएमएफ से स्वीकृत इन विकास कार्यों के पूरा होने से रायगढ़ जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और पेयजल सुविधाओं का दायरा और मजबूत होगा। इससे आम नागरिकों को बेहतर जनसुविधाएं उपलब्ध होने के साथ जिले के समग्र एवं संतुलित विकास को नई गति मिलेगी।
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-15 निकायों एवं दो नवगठित नगर पंचायतों पर होगा निर्वाचन
-राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह अधिकारियों को समय सीमा में सभी प्रक्रियाएं पूर्ण करने के दिए निर्देशरायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग, नवा रायपुर में आज राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह की अध्यक्षता में आगामी दिसंबर 2026 में प्रस्तावित नगरीय निकायों के आम एवं उप निर्वाचन की तैयारियों की समीक्षा हेतु नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश की 15 नगरीय निकायों( जिनमें 4 नगरपालिक निगम, 5 नगरपालिका परिषद तथा 6 नगर पंचायत शामिल हैं, जिनका कार्यकाल दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है) के साथ ही दो नवगठित नगर पंचायतों के आम निर्वाचन की तैयारियों एवं शासन स्तर पर की जा रही आवश्यक कार्यवाहियों की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान बताया गया कि जिन नगरीय निकायों में निर्वाचन प्रस्तावित हैं, उनमें नगरपालिक निगम बीरगांव, भिलाई, भिलाई-चरौदा एवं रिसाली, नगरपालिका परिषद जामुल, सारंगढ़, बैकुण्ठपुर, शिवपुर-चरचा एवं खैरागढ़ तथा नगर पंचायत प्रेमनगर, मारो, कोंटा, नरहरपुर, भैरमगढ़ एवं भोपालपट्टनम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त नवगठित नगर पंचायत तमनार एवं बड़ी करेली में भी आम निर्वाचन कराया जाएगा।बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव श्रीमती आर संगीता ने नगरीय निकायों के परिसीमन एवं आरक्षण की प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि 15 नगरीय निकायों में महापौर एवं अध्यक्ष पदों का आरक्षण पूर्ण किया जा चुका है तथा वार्ड पार्षदों के आरक्षण की प्रक्रिया जारी है। वहीं नवगठित नगर पंचायत तमनार में वार्ड आरक्षण तथा बड़ी करेली में वार्ड परिसीमन एवं आरक्षण की कार्रवाई प्रगति पर है। विभाग द्वारा दो वार्ड पार्षद पदों पर आकस्मिक रिक्तियों की जानकारी भी बैठक में प्रस्तुत की गई।बैठक में राज्य निर्वाचन आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में राज्य निर्वाचन आयुक्त श्री अजय सिंह ने अधिकारियों को निर्वाचन संबंधी सभी आवश्यक शासकीय प्रक्रियाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी आम एवं उप निर्वाचन का संचालन समयबद्ध, निष्पक्ष एवं सुचारू रूप से सुनिश्चित किया जा सके। - -सघन वन क्षेत्र में विकास की नई शुरुआत-करीब एक करोड़ की लागत से पूरा हुआ विद्युतीकरण कार्य, एससीए योजना से मिली सौगातरायपुर । वन क्षेत्रों और सुदूर गांवों में बिजली का पहुंचना विकास और मुख्यधारा से जुड़ने का एक बड़ा प्रतीक है। बस्तर जिले के कार्लाकोंटा जैसे क्षेत्रों के विद्युतीकरण से स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर, सुरक्षा, और शिक्षा में अभूतपूर्व सुधार होता है, जो उन्हें आधुनिक सुविधाओं से जोड़ता है।विकासखंड लोहंडीगुड़ा के सघन वनों से घिरे ग्राम कार्लाकोंटा में अब अंधेरा बीते दिनों की बात हो गई है। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे इस दूरस्थ आदिवासी गांव में विद्युतीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस पहल से गरीबी रेखा वर्ग के 43 परिवारों के घरों में पहली बार बिजली पहुंची है, जिससे ग्रामीणों के जीवन में विकास और उम्मीद की नई रोशनी आई है। ग्रामीणों ने अपने गांव में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन के समक्ष आवेदन दिया था । जिला के आला अधिकारी ने भी गांव का दौरा कर ग्रामीणों से चर्चा की थी और ग्रामीणों को विकास कार्यों के लिए आश्वस्त भी किया था । दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और घने जंगलों के बीच विद्युत अधोसंरचना तैयार करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन विभाग ने इसे सफलतापूर्वक पूरा कर ग्रामीणों को बड़ी राहत दी। इस परियोजना के तहत 3 किलोमीटर 11 केवी विद्युत लाइन, 4.9 किलोमीटर लो टेंशन (एलटी) लाइन तथा 25 केवी क्षमता के चार ट्रांसफार्मर स्थापित किए गए हैं। इस महत्वपूर्ण कार्य पर 99.19 लाख रुपये की लागत आई है, जिसका भुगतान एससीए (Special Central Assistance) योजना के अंतर्गत किया गया है। योजना का उद्देश्य दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार कर वहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाना है।बिजली पहुंचने से अब ग्रामीणों को रात में रोशनी, बच्चों को बेहतर अध्ययन का माहौल, घरेलू कार्यों में सुविधा तथा भविष्य में विभिन्न आजीविका गतिविधियों के नए अवसर मिल सकेंगे। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार जैसी सेवाओं तक पहुंच भी पहले की तुलना में अधिक आसान होगी। कार्लाकोंटा में विद्युतीकरण केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि यह दूरस्थ वनांचल में विकास की नई शुरुआत का प्रतीक है। यह पहल दर्शाती है कि शासन की योजनाएं अब अंतिम छोर पर बसे परिवारों तक भी प्रभावी ढंग से पहुंच रही हैं और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।
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-जशपुर में 141 बोरी उर्वरक जब्त, जांच के बाद होगी एफआईआर
-कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध उर्वरक विक्रय पर प्रशासन की सख्त निगरानी जारीरायपुर। खरीफ सीजन के दौरान किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध कराने तथा उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अवैध विक्रय पर प्रभावी रोक लगाने के लिए जशपुर जिले में कृषि विभाग द्वारा लगातार सघन निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में विकासखंड बगीचा के ग्राम चम्पा में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिना वैध लाइसेंस एवं दस्तावेज के भंडारित 141 बोरी उर्वरक जब्त कर उसके विक्रय पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिया गया।उप संचालक कृषि श्री एम.आर. भगत ने बताया कि वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री लालसाय केरकेट्टा, कृषि विकास अधिकारी एवं उर्वरक निरीक्षक श्रीमती क्रुसलीना मिंज तथा संबंधित ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों की संयुक्त टीम ने ग्राम चम्पा में श्री नईम अख्तर के निवास पर औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान 25 बोरी डीएपी, 10 बोरी एसएसपी तथा 106 बोरी यूरिया सहित कुल 141 बोरी उर्वरक बिना किसी वैध बिल अथवा दस्तावेज के भंडारित पाया गया।जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित व्यक्ति द्वारा बिना वैध उर्वरक लाइसेंस के खाद का विक्रय किया जा रहा था। आवश्यक दस्तावेज एवं लाइसेंस प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कृषि विभाग ने उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत संपूर्ण उर्वरक जब्त कर सुपुर्दनामा तैयार किया तथा उसके विक्रय पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी।कृषि विभाग ने बताया कि प्रकरण की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।कलेक्टर श्री रोहित व्यास के निर्देश पर जिले के सभी विकासखंडों में जिला स्तरीय टीम द्वारा उर्वरक विक्रय केंद्रों एवं भंडारण स्थलों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य कालाबाजारी, जमाखोरी, नकली उर्वरकों की बिक्री तथा निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक विक्रय जैसी अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं संबंधित नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यापारी अथवा व्यक्ति के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसानों से भी अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही खाद एवं बीज खरीदें, खरीदारी का बिल अवश्य लें तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना तत्काल कृषि विभाग को दें, ताकि दोषियों के विरुद्ध समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। -
-6 लाख रुपये के ऋण से पशुपालन, मिक्सचर मशीन एवं सेटरिंग व्यवसाय का कर रहीं विस्तार
रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन की बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी साबित हो रही है। योजना के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को स्वरोजगार एवं आजीविका संवर्धन के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं। इसी क्रम में सक्ती जिले के ग्राम रायपुरा की विकास समिति महिला स्व-सहायता समूह को विभिन्न आजीविका गतिविधियों के विस्तार हेतु 6 लाख रुपये का ऋण प्रदान किया गया है।समूह की सदस्य श्रीमती दिलेश्वरी सिदार एवं अन्य महिलाओं ने बताया कि ऋण राशि का उपयोग पशुपालन, मिक्सचर मशीन तथा सेटरिंग सामग्री क्रय करने में किया गया है। इन गतिविधियों के माध्यम से समूह की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी, बल्कि परिवार की आवश्यकताओं की पूर्ति भी पहले से बेहतर ढंग से हो सकेगी।महिलाओं ने कहा कि बिहान योजना से प्राप्त वित्तीय सहायता उनके लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस सहयोग से उन्हें अपने स्वरोजगार कार्यों का विस्तार करने का अवसर मिला है और भविष्य में आय बढ़ाने के नए मार्ग भी खुल रहे हैं। समूह की महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा प्रदान कर रही हैं। -
-आवास और महतारी वंदन योजना ने दी नई उम्मीद
रायपुर। शासन की प्रधानमंत्री आवास योजना एवं महतारी वंदन योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के साथ उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सक्ती जिले की ग्राम पंचायत रायपुरा निवासी श्रीमती डागरीबाई इन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर अपने परिवार के बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ा रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत उन्हें पक्के आवास की स्वीकृति मिली है, जिसका निर्माण कार्य अब पूर्णता की ओर है। वहीं महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह मिलने वाली सहायता राशि से उन्हें घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति में आर्थिक संबल मिल रहा है।श्रीमती डागरीबाई ने बताया कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बरसात के दिनों में घर की छत से पानी टपकने सहित अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण पक्का मकान बनाना संभव नहीं था। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने से अब उनका पक्का घर तैयार होने की अंतिम अवस्था में है। उन्होंने कहा कि नया आवास बनने से उनके परिवार को सुरक्षित, सुविधाजनक एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध होगा तथा बरसात सहित अन्य मौसम संबंधी परेशानियों से भी राहत मिलेगी।श्रीमती डागरीबाई ने बताया कि महतारी वंदन योजना के अंतर्गत प्रतिमाह प्राप्त होने वाली सहायता राशि से वे घर की आवश्यक जरूरतों की पूर्ति कर रही हैं। इस राशि से आवश्यक घरेलू सामग्री खरीदने में सुविधा मिल रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। श्रीमती डागरीबाई ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण महिलाओं को नया आत्मविश्वास, आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रही हैं। - -हरित आवरण बढ़ाने के लिए उद्योगों को दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश, 33 प्रतिशत क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित करने पर जोररायपुर । छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा मानसून 2026 के दौरान राज्य की औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा, समन्वय एवं आगामी कार्ययोजना के संबंध में आज राजधानी रायपुर स्थित न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस के न्यू कन्वेंशन हॉल में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव श्री राजू अगसिमनी ने उद्योगों द्वारा प्रस्तावित एवं संचालित वृक्षारोपण कार्यों की प्रगति, पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव, निगरानी व्यवस्था तथा उद्योगवार कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के निर्धारित लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने तक सीमित न रहे, बल्कि लगाए गए पौधों का संरक्षण एवं उनकी जीवित रहने की दर भी सुनिश्चित की जाए।बैठक में उद्योगों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक हेक्टेयर क्षेत्र में न्यूनतम 2,500 पौधों का रोपण किया जाए तथा त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधारोपण को बढ़ावा देते हुए सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।सदस्य सचिव ने बरगद, पीपल, नीम, आम सहित स्थानीय एवं पर्यावरण की दृष्टि से लाभकारी प्रजातियों के अधिकाधिक पौधे लगाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय दायित्वों का निर्वहन भी समान रूप से आवश्यक है। उद्योगों को परिसर के भीतर एवं बाहर (इनडोर एवं आउटडोर) दोनों स्तरों पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया गया।बैठक में पर्यावरणीय निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश भी दिए गए। सभी उद्योगों को अपने ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (एनालाइजर) को 24 घंटे संचालित रखने तथा प्रत्येक तीन माह में उसका नियमित कैलिब्रेशन कराने के निर्देश दिए गए।बैठक में यह भी बताया गया कि शीघ्र ही विभागीय मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी राज्य के उद्योगपतियों के साथ बैठक कर वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी कार्यों की समीक्षा करेंगे। बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के अधिकृत प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- -कार्यों में तेजी लाने लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों को बेहतर समन्वय से काम करने के दिए निर्देश-कार्यस्थलों में आ रहे अवरोधों को तत्परता से दूर कर अप्रारंभ कार्यों को जल्दी शुरू करने कहारायपुर। लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने विभाग के सेतु परिक्षेत्र और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर प्रदेश में रेलवे ओवर-ब्रिज (ROB) और रेलवे अंडर-ब्रिज (RUB) के निर्माणाधीन एवं प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में आज हुई बैठक में रेलवे ओवर-ब्रिज और रेलवे अंडर-ब्रिज के कार्यों में तेजी लाने लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों को बेहतर समन्वय से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थलों की बाधाओं को तत्परता से दूर कर अप्रारंभ कार्यों को जल्दी शुरू करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी और दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे के बिलासपुर मुख्यालय के प्रधान मुख्य अभियंता श्री अवनीश कुमार पाण्डेय भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।लोक निर्माण विभाग के सचिव ने बैठक में विभागीय और रेलवे के अधिकारियों को आपसी समन्वय को और मजबूत करते हुए निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माणाधीन परियोजनाओं के कार्यों में तेजी लाते हुए उन्हें शीघ्र पूरा करने को कहा, ताकि लोगों को जाम और रेलवे फाटकों पर होने वाली असुविधा से राहत मिल सके। इससे माल परिवहन भी अधिक सुगम और तेज होगा। विभागीय सचिव ने नए आरओबी और आरयूबी के कार्यों को जल्द शुरू करने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर बाधाओं का तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कार्यस्थलों से अतिक्रमण हटाने, भूमि व्यपवर्तन, नामांतरण तथा भू-अर्जन जैसी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के साथ समयबद्ध ढंग से पूरा करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रगतिरत परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण कर प्रदेश में आवागमन को अधिक सुरक्षित, सुगम, सुव्यवस्थित और तेज बनाना राज्य शासन की प्राथमिकता में है।श्री बंसल ने कार्यस्थलों पर यूटिलिटी शिफ्टिंग के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यूटिलिटी शिफ्टिंग में देरी के कारण निर्माण कार्यों में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रस्तावित परियोजनाओं के प्राक्कलन तथा ड्राइंग-डिजाइन तैयार करने के लिए जहां भी लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों के संयुक्त निरीक्षण की जरूरत हो, वहां तत्काल संयुक्त निरीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही पूर्ण करने को कहा।उन्होंने रेलवे ओवर-ब्रिज और रेलवे अंडर-ब्रिज परियोजनाओं को शीघ्रता से पूर्ण करने नियमित और कड़ाई से मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और रेलवे के अधिकारियों को हर तीन महीने में बैठक कर कार्यों की प्रगति का आकलन करने और लंबित मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव, सेतु परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता श्री एस.के. कोरी, अधीक्षण अभियंता श्री डी.के. माहेश्वरी, दक्षिण-पूर्व-मध्य रेलवे के बिलासपुर मुख्यालय के मुख्य अभियंता श्री मनोज कुमार सिंह, सीपीएम-बिलासपुर श्री राजीव कुमार और सीपीएम-रायपुर श्री तत्वदर्शी साहू भी बैठक में मौजूद थे।
- रायपुर। कल ग्राम बेन्द्री, उरला औद्योगिक क्षेत्र के पास, थाना उरला, जिला रायपुर स्थित मेसर्स 3-डी इनोवेशन कारखाने में एक गंभीर औद्योगिक दुर्घटना घटित हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार कारखाने के फेरो एलॉयज डिवीजन में संचालित फर्नेस में लांसिंग कार्य के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर में अचानक भीषण विस्फोट होने से कार्यरत तीन श्रमिकों श्री अरुण पाण्डेय, श्री लाल सिंह एवं श्री कमल सिंह की दुःखद मृत्यु हो गई।दुर्घटना की सूचना प्राप्त होते ही औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा तत्काल घटनास्थल पहुँचकर दुर्घटना स्थल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान घटनास्थल का विस्तृत परीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य लिए गए, फोटोग्राफ एवं विडियोग्राफ लिए गए तथा कारखाना प्रबंधन एवं श्रमिकों से प्रारंभिक पूछताछ कर दुर्घटना के कारणों की जांच प्रारंभ की गई।प्रारंभिक जांच के आधार पर एवं श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता, 2020 की धारा 38(1)(ए) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कारखाना परिसर में संचालित समस्त प्रकार की विनिर्माण गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश तक प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस संबंध में कारखाने के अधिभोगी एवं प्रबंधक को प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया गया है।औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा यह भी निर्देशित किया गया है कि प्रतिबंधात्मक आदेश की अवधि में कारखाने में नियोजित सभी श्रमिकों को नियमानुसार देय वेतन एवं अन्य भत्तों का भुगतान निर्धारित समय पर सुनिश्चित किया जाए। विभाग के प्रयासो से कारखाना प्रबंधन द्वारा प्रत्येक मृतक श्रमिक के परिजनों को 30 - 30 लाख रूपए की तत्काल आर्थिक सहायता राशि देने की सहमति दी गयी।औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच प्रतिवेदन एवं उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
- -350 आजीविका डबरियां और 150 से अधिक सामुदायिक तालाब बदलेंगे ग्रामीण जल परिदृश्य-भू-जल संवर्धन, सिंचाई विस्तार और ग्रामीण आजीविका को मिलेगा स्थायी संबलएमसीबी/ विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (VB G - RAM-G) के अंतर्गत जिले में संचालित “मोर गांव मोर पानी“ अभियान जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए ग्रामीण विकास का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। अभियान के तहत जिले में 350 आजीविका डबरियों तथा 150 से अधिक सामुदायिक तालाबों का निर्माण, गहरीकरण एवं विकास किया गया है। इन कार्यों से वर्षा जल के संरक्षण, भू-जल पुनर्भरण और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता मिलने लगी है।जिले में मानसून के दौरान प्राप्त होने वाले वर्षा जल का अधिकतम संचयन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से निर्मित इन जल संरचनाओं से अब जल संरक्षण के सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं। आजीविका डबरियां एवं सामुदायिक तालाब वर्षा जल को संरक्षित कर भू-जल स्तर में वृद्धि करने के साथ-साथ खेतों में सिंचाई की उपलब्धता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे किसानों को खेती के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध होगा तथा फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।अभियान के अंतर्गत निर्मित 350 आजीविका डबरियां ग्रामीण परिवारों के लिए आय के नए अवसर भी सृजित करेंगी। इन डबरियों का उपयोग मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन, उद्यानिकी, पशुपालन तथा अन्य आजीविका गतिविधियों में किया जा सकेगा, जिससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। वहीं 150 से अधिक सामुदायिक तालाबों के निर्माण एवं गहरीकरण से गांवों में जल संचयन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इन तालाबों से सिंचाई, पशुओं के लिए पेयजल, भू-जल पुनर्भरण तथा पर्यावरण संरक्षण को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। गर्मी के मौसम में जल संकट से राहत मिलने के साथ-साथ जल स्रोतों की स्थिरता भी बनी रहेगी।जिला प्रशासन द्वारा संचालित यह अभियान केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि जल संरक्षण के प्रति सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बन रहा है। ग्राम पंचायतों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों तथा ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है। सामुदायिक सहयोग से निर्मित इन जल संरचनाओं का संरक्षण एवं नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि इनके दीर्घकालिक लाभ ग्रामीणों को निरंतर मिलते रहें।जिला प्रशासन का मानना है कि जल संरक्षण ही भविष्य की जल सुरक्षा का आधार है। इसी सोच के साथ “मोर गांव मोर पानी“ अभियान के माध्यम से जल संसाधनों के संरक्षण, भू-जल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। आने वाले समय में यह अभियान जिले को जल समृद्ध, आत्मनिर्भर और सतत विकास की दिशा में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।जिला प्रशासन ने सभी ग्राम वासियों से अपील की है कि वे निर्मित आजीविका डबरियों एवं सामुदायिक तालाबों की सुरक्षा, स्वच्छता और संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाएं। जन सहयोग से ही जल संरक्षण के इस अभियान को स्थायी सफलता मिलेगी और प्रत्येक गांव जल सुरक्षा की दिशा में आत्मनिर्भर बन सकेगा।
- -चटिया मिल और मशरूम उत्पादन से आर्थिक रूप से हुई आत्मनिर्भरकांकेर। जिले में ‘बिहान’ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी कई महिलाएं विभिन्न व्यवसायिक गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। सालाना 01 लाख रूपए से अधिक की आय अर्जित कर ‘लखपति दीदी’ बन रही हैं, इससे उन्हें सम्मानजनक पहचान मिल रही है।विकासखण्ड कांकेर के ग्राम सिदेसर निवासी श्रीमती सविता साहू आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं। महानदी महिला क्लस्टर संगठन माकड़ीखूना के अंतर्गत संचालित गायत्री स्व सहायता समूह की सदस्य सविता साहू ने बिहान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी है। सविता साहू ने बताया कि समूह में जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी। परिवार का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करना कठिन था। स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की इच्छा होने के बावजूद आर्थिक संसाधनों की कमी थी।श्रीमती सविता साहू ने बताया कि बिहान योजना के बारे में जानकारी मिलने पर गायत्री स्व सहायता समूह से जुड़कर सदस्यता ग्रहण की। समूह में नियमित बचत और बैठकों के माध्यम से उन्हें आर्थिक सहयोग मिलने लगा। बिहान योजनांतर्गत चक्रीय निधि, प्रोत्साहन स्वरूप राशि भी प्राप्त हुआ तथा आजीविका गतिविधियों के लिए 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि का लाभ मिला। बैंक से लेन-देन करना भी सीख गई। समय-समय पर बिहान के बीपीएम, एसी एवं पीआरपी के मार्गदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। बैंक से मुद्रा ऋण प्राप्त करने में भी बिहान की टीम ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। बिहान के मार्गदर्शन में सविता साहू ने चटिया मिल एवं मशरूम उत्पादन का व्यवसाय शुरू किया। उनके इस उद्यम से वर्ष 2024-25 में लगभग 03 लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त हुई, जबकि वर्ष 2025-26 में 01 लाख 21 हजार रूपए अर्जित कर अपने व्यवसाय का विस्तार कर रही है। आज सविता साहू न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर चुकी हैं, बल्कि अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
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-राष्ट्रीय कृषि विकास योजना और कृषि अभियांत्रिकी योजनाओं से प्रदेश में आधुनिक खेती को मिल रही नई गति
रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन की किसान हितैषी योजनाओं के प्रभाव से प्रदेश के किसानों की खेती अब आधुनिक तकनीकों से जुड़ रही है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) तथा कृषि अभियांत्रिकी योजनाओं के माध्यम से किसानों को सिंचाई सुविधाओं और आधुनिक कृषि यंत्रों पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे खेती अधिक सुगम, वैज्ञानिक और लाभकारी बनने के साथ किसानों की आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है।प्रदेशभर में कृषि विभाग द्वारा किसानों को सेलो बोर (बोरवेल), ट्रैक्टर एवं अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों पर अनुदान प्रदान कर सिंचाई और मशीनीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से वर्षा पर निर्भरता कम हो रही है तथा किसान वर्षभर खेती और उद्यानिकी फसलों का उत्पादन कर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं।सरगुजा जिले के विकासखंड अंबिकापुर के ग्राम नावाबांध निवासी किसान मुकुल राजवाड़े का परिवार इन योजनाओं का सफल उदाहरण है। परिवार को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत सेलो बोर की सुविधा तथा कृषि अभियांत्रिकी योजना के तहत ट्रैक्टर सहित विभिन्न आधुनिक कृषि यंत्रों पर अनुदान प्राप्त हुआ। इससे खेती के सभी कार्य समय पर होने लगे हैं और उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।किसान मुकुल राजवाड़े ने बताया कि पहले खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थी, लेकिन सेलो बोर स्थापित होने के बाद अब पूरे वर्ष सिंचाई उपलब्ध हो रही है। इससे धान की नर्सरी तैयार करने के साथ-साथ सब्जी उत्पादन भी नियमित रूप से किया जा रहा है। बेहतर सिंचाई व्यवस्था के कारण उत्पादन बढ़ा है और अतिरिक्त आय के नए अवसर भी मिले हैं।मुकुल राजवाड़े ने बताया कि उनके परिवार के पास लगभग 8 से 9 एकड़ कृषि भूमि है, जहां आधुनिक तकनीकों से खेती की जा रही है। कृषि अभियांत्रिकी योजना के अंतर्गत उनके परिवार को ट्रैक्टर, रोटावेटर, सीड ड्रिल, सिंचाई पंप, स्प्रेयर, रीपर एवं थ्रेशर जैसे आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए गए। इन यंत्रों की कुल लागत लगभग 35 लाख रुपये रही, जिसमें शासन द्वारा लगभग 16 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इससे खेती की लागत कम हुई, श्रम की बचत हुई और समय पर कृषि कार्य पूरे होने लगे।किसान ने बताया कि आधुनिक सिंचाई और कृषि यंत्रों की उपलब्धता से उनका परिवार उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती की दिशा में आगे बढ़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की किसान हितैषी योजनाओं ने उनकी खेती को नई दिशा दी है। प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा संचालित ऐसी योजनाएं किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए कृषि को अधिक उत्पादक, लाभकारी और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
- -मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजस्व विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की-बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका एवं भूमि संबंधी अन्य जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से उपलब्ध कराने की होगी व्यवस्था-राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता, तकनीक आधारित समाधान एवं समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश-राजस्व मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने विभाग द्वारा किए जा रहे प्रशासनिक सुधारों, तकनीक आधारित नवाचारों तथा नागरिकों एवं किसानों को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों की समीक्षा करते हुए उनके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की स्पष्ट नीति राजस्व प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेह एवं भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है। राजस्व मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा नागरिकों को बिना अनावश्यक कार्यालयीन आवागमन के गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।बैठक में डिजिटल किसान किताब एवं भूमि संबंधी दस्तावेजों के डिजिटलीकरण की प्रगति की समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि किसानों को बी-1, खसरा, ऋण पुस्तिका तथा भूमि संबंधी अन्य जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से सहज रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि उन्हें तहसील अथवा पटवारी कार्यालय जाने की आवश्यकता न पड़े। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग सीधे आमजन एवं किसानों के जीवन से जुड़ा विभाग है, इसलिए शासन के सभी सुधारों एवं नवाचारों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचना चाहिए।मुख्यमंत्री ने आरबीसी 6-4 के प्रकरणों का त्वरित एवं संवेदनशीलता के साथ निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आरबीसी 6-4 की ऑनलाइन व्यवस्था एक महत्वपूर्ण सुधार है, जिसके लागू होने पर आवेदक स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे तथा संपूर्ण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल एवं समयबद्ध होगी। उन्होंने अविवादित फौती नामांतरण की प्रक्रिया पंचायतों के माध्यम से संपादित करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने लंबित राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण पर विशेष बल देते हुए सीमांकन प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निपटारा सुनिश्चित करने तथा समय-सीमा से बाहर लंबित प्रकरणों की जिला-वार नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।बैठक में VASUNDHARA (Verified Accessible System for Unified Digital Land Records & Historical Archives) परियोजना की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने नकल शाखा को पूर्णतः ऑनलाइन करने के लिए इस परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत राज्य के सभी जिला एवं तहसील कार्यालयों के महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों का एकीकृत डिजिटल अभिलेखागार विकसित किया जाएगा। इससे प्रमाणित अभिलेखों का निर्गमन कुछ ही मिनटों में संभव होगा तथा अभिलेखों में छेड़छाड़ की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।मुख्यमंत्री ने असर्वेक्षित ग्रामों, विशेषकर अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वेक्षण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि राजस्व अभिलेख तैयार हो सकें, भूमि अभिलेख अद्यतन हों तथा स्थानीय नागरिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।बैठक में स्वामित्व योजना, वन अधिकार पट्टों की प्रविष्टि एवं नामांतरण, पट्टाधृति अधिनियम-2023 के प्रभावी क्रियान्वयन, एग्री स्टैक, फार्मर रजिस्ट्री एवं एक्सेम्प्टेड कैटेगरी फार्मर रजिस्ट्री की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने आगामी खरीफ सीजन के डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं गिरदावरी की सभी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण नहीं, बल्कि नागरिकों को तेज, पारदर्शी, जवाबदेह एवं विश्वासपूर्ण राजस्व व्यवस्था उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के नीतिगत सुधारों एवं नवाचारों से राजस्व प्रशासन में सकारात्मक परिवर्तन आया है और इसे और अधिक प्रभावी बनाना सभी अधिकारियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।बैठक में साइबर तहसील व्यवस्था लागू करने की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इस व्यवस्था के माध्यम से अविवादित नामांतरण, अविवादित बंटवारा सहित विभिन्न राजस्व सेवाएं केंद्रीकृत एवं पूर्णतः ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा सकेंगी। मुख्यमंत्री ने अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन कर नागरिक हित में आवश्यक नीतिगत निर्णय लेने के निर्देश दिए।बैठक में ई-कोर्ट प्रणाली, रेवेन्यू बोर्ड एवं संभागीय आयुक्त कार्यालयों में ऑनलाइन साक्ष्य प्रस्तुत करने की व्यवस्था, नक्शा डिजिटाइजेशन, ऑटो म्यूटेशन, ऑटो डायवर्सन तथा भू-अर्जन से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि धमतरी, अंबिकापुर एवं जगदलपुर में नक्शा परियोजना का पायलट कार्य प्रारंभ किया गया है, जिसे दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग में पटवारी, राजस्व निरीक्षक, लिपिक एवं अन्य रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती, तहसीलों के अधोसंरचना विकास तथा तहसीलदारों के लिए आवश्यक वाहन उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए।बैठक में राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री प्रभात मलिक, राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, विशेष सचिव श्रीमती इफ़्फत आरा, संचालक भू-अभिलेख श्री विनीत नंदनवार, संयुक्त सचिव श्री अरविन्द एक्का सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- -08 जुलाई को न्यू कन्वेंशन हॉल, रायपुर में आयोजित होगी बैठक-सचिव आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा मंडल अध्यक्ष श्री अंकित आनंद करेंगे अध्यक्षतारायपुर / छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा मानसून 2026 के दौरान राज्य की औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा, समन्वय तथा आगामी कार्ययोजना तैयार करने के उद्देश्य से 08 जुलाई 2026 (बुधवार) को प्रातः 11:30 बजे न्यू सर्किट हाउस, सिविल लाइंस, रायपुर स्थित न्यू कन्वेंशन हॉल में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी।बैठक की अध्यक्षता सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल श्री अंकित आनंद करेंगे। बैठक में राज्य की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के अधिकृत प्रतिनिधि, मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे।छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव श्री राजू अगसिमनी ने बताया कि बैठक में उद्योगों द्वारा प्रस्तावित एवं संचालित वृक्षारोपण कार्यों की प्रगति, पौधों के संरक्षण एवं रखरखाव की व्यवस्था, निगरानी तंत्र तथा उद्योगवार कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। साथ ही वृक्षारोपण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा पर्यावरण संरक्षण के निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सभी संबंधित औद्योगिक इकाइयों को अपने वृक्षारोपण लक्ष्य, अब तक की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना के साथ बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राज्य में हरित आवरण बढ़ाने के अभियान को और अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सके।
- -अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति के हितग्राहियों को निःशुल्क स्पॉन, सरसों खली और जाल का वितरणरायपुर ।जशपुर जिले में मत्स्य पालन को प्रोत्साहन देने और मत्स्य उत्पादन बढ़ाने की दिशा में मछली पालन विभाग ने मत्स्य बीज उत्पादन कार्य प्रारंभ कर दिया है। विभाग को इस वर्ष 1000 लाख स्पॉन उत्पादन का लक्ष्य मिला है, जिसके विरुद्ध अब तक 80 लाख स्पॉन का उत्पादन किया जा चुका है, जबकि 140 लाख स्टैंड फाई (फ्राई) उत्पादन का कार्य प्रगति पर है। मत्स्य पालन विभाग द्वारा जिले के चयनित 20 अनुसूचित जनजाति तथा 5 अनुसूचित जाति के हितग्राहियों को मौसमी तालाबों में स्पॉन संवर्धन योजना के तहत निःशुल्क मत्स्य बीज स्पॉन, सरसों खली एवं जाल उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल से मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलने के साथ ग्रामीणों की आय में भी वृद्धि होगी।शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र बधिमा (जशपुर) में स्पॉन 650 रुपये प्रति लाख की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं स्टैंड फाई एवं फिंगरलिंग पर 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। अर्थात 4,000 रुपये मूल्य के मत्स्य बीज पर हितग्राही को 2,000 रुपये की अनुदान राशि का लाभ मिलेगा। जिले के शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र बधिमा (जशपुर), शासकीय मत्स्य बीज संवर्धन प्रक्षेत्र मटासी (कुनकुरी), शासकीय मत्स्य बीज संवर्धन प्रक्षेत्र पालीडीह (पत्थलगांव) तथा शासकीय मत्स्य बीज संवर्धन प्रक्षेत्र कुरोंग (बगीचा) में मत्स्य कृषकों को स्टैंड फाई एवं फिंगरलिंग का वितरण और विक्रय किया जा रहा है। मत्स्य बीज प्राप्त करने के इच्छुक कृषक शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र बधिमा (जशपुर) एवं मटासी (कुनकुरी) के लिए सहायक मत्स्य अधिकारी श्री प्रवीण कुमार शर्मा (मो. +91-9977789988), पालीडीह (पत्थलगांव) के लिए सहायक मत्स्य अधिकारी श्री रविशंकर (मो. +91-9244520073) तथा कुरोंग (बगीचा) के लिए मत्स्य निरीक्षक श्री अभिनीत कुमार सिंह (मो. +91-7999565025) से संपर्क कर अनुदान का लाभ लेते हुए मत्स्य बीज प्राप्त कर सकते हैं।
- -जशपुर में सहकारी समितियों के माध्यम से किफायती दरों पर मिल रहा खाद-बीज-समय पर उपलब्धता से किसानों को राहत, खेती की लागत हुई कमरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को समय पर और रियायती दरों पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है। जशपुर जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को खेती के लिए आवश्यक उर्वरक एवं कृषि सामग्री किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक राहत मिलने के साथ खेती-किसानी करना भी आसान हुआ है। जिले की सभी विकासखंडों और ग्राम पंचायतों में खाद वितरण का कार्य सुचारू रूप से संचालित किया जा रहा है। किसान प्रतिदिन अपनी निकटतम सहकारी समिति से यूरिया, डीएपी तथा अन्य उर्वरक निर्धारित दरों पर प्राप्त कर रहे हैं। इससे किसानों को निजी दुकानों पर अधिक कीमत चुकाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।किसानों ने बताया कि पहले खाद-बीज खरीदने के लिए अलग-अलग दुकानों के चक्कर लगाने पड़ते थे और अधिक कीमत चुकानी पड़ती थी। कई बार खेती के लिए ब्याज पर पैसे लेने या कर्ज का सहारा लेना पड़ता था। अब सरकारी व्यवस्था के कारण समय पर उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध होने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और खेती का खर्च भी कम हुआ है। जशपुर जिले की महिला किसान मंजुला भगत ने बताया कि पहले खाद और यूरिया के लिए काफी परेशान होना पड़ता था, लेकिन अब सहकारी समिति से आसानी से और कम कीमत पर सभी आवश्यक सामग्री मिल जाती है। उन्होंने कहा कि इससे खेती करना आसान हुआ है और परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई है। पहले खेती के लिए ब्याज पर पैसे लेने पड़ते थे, लेकिन अब ऐसी आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की इस पहल से किसानों को वास्तविक लाभ मिल रहा है। शासन द्वारा किसानों को निर्धारित दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें यूरिया 266.50 रुपये प्रति बोरी, डीएपी 1,350 रुपये, सुपर फॉस्फेट (पाउडर) 551 रुपये, सुपर फॉस्फेट (दानेदार) 591 रुपये, जिंकयुक्त सुपर फॉस्फेट 576 रुपये, टीएसपी 1,300 रुपये, एनपीके 1,850 रुपये एवं 1,990 रुपये तथा पोटाश 1,975 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उचित मूल्य पर मिल रहे हैं और खेती को नई मजबूती मिल रही है।
- -36 वर्षों की निःस्वार्थ सेवा को मिला पद्मश्री सम्मान, बस्तर के हजारों परिवारों के जीवन में लाया सकारात्मक बदलावरायपुर । बस्तर में पिछले 36 वर्षों से आदिवासी समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए निःस्वार्थ भाव से कार्य कर रहे डॉ. रामचंद्र गोडबोले और उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले की सेवा को देश ने पद्मश्री सम्मान देकर सम्मानित किया है। यह सम्मान केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि बस्तर की जनता के लिए किए गए उनके समर्पित सेवा कार्यों का राष्ट्रीय सम्मान है।महाराष्ट्र के सातारा जिले के मूल निवासी डॉ. रामचंद्र गोडबोले आयुर्वेद चिकित्सक हैं, जबकि उनकी पत्नी श्रीमती सुनीता गोडबोले समाज कार्य (एमएसडब्ल्यू) की विशेषज्ञ हैं। वर्ष 1990 में विवाह के बाद दोनों ने अपना जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया। सेवा कार्य के लिए उन्हें मेघालय और बस्तर में से किसी एक क्षेत्र का चयन करना था। उन्होंने बस्तर को चुना और तभी से यहीं के लोगों के बीच रहकर सेवा कर रहे हैं।शुरुआत में बस्तर की भाषा, संस्कृति और जीवनशैली उनके लिए नई थी। इसके बावजूद उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों के बीच रहकर उनका विश्वास जीता। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में हजारों जरूरतमंद आदिवासियों का निःशुल्क उपचार किया। जहां स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं थीं, वहां चिकित्सा शिविर लगाए और गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार के लिए बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने में भी सहयोग किया।श्रीमती सुनीता गोडबोले ने गोंडी और हल्बी जैसी स्थानीय बोलियां सीखकर आदिवासी महिलाओं और बच्चों के साथ सहज संवाद स्थापित किया। उन्होंने कुपोषण से मुक्ति, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, बाल शिक्षा, सिकल सेल एनीमिया के प्रति जागरूकता, बाल अधिकार संरक्षण और बालिकाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में लगातार कार्य किया। उनके प्रयासों से अनेक बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ और कई गांवों में पोषण एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी। वर्तमान में गोडबोले दंपत्ति बनफूल संस्था के माध्यम से जनजातीय बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि सेवा केवल ईलाज तक सीमित नहीं होती, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी होती है।राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों पद्मश्री सम्मान प्राप्त करना गोडबोले दंपत्ति के तीन दशक से अधिक समय से किए जा रहे समर्पित सेवा कार्यों की राष्ट्रीय पहचान है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने भी उनके योगदान की सराहना की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने उनके सेवा कार्यों की प्रशंसा करते हुए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। गोडबोले दंपत्ति की जीवन यात्रा यह संदेश देती है कि सेवा, संवेदनशीलता और समर्पण के बल पर समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन बस्तर के आदिवासी समाज के स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए समर्पित किया है। उनका कार्य आज पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।
- -घर बैठे करें आवेदन, बुकिंग और मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान-कमल विहार एवं रावभाटा सहित लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां पोर्टल पर उपलब्धरायपुर /रायपुर विकास प्राधिकरण (आर.डी.ए.) ने नागरिकों की सुविधा और पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए अपनी संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब इच्छुक नागरिक बिना कार्यालय आए घर बैठे ही प्राधिकरण की वेबसाइट पर उपलब्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपत्तियों की जानकारी प्राप्त कर ऑनलाइन आवेदन एवं बुकिंग कर सकेंगे।प्राधिकरण ने प्रथम चरण में लगभग 121 आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियों को ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध कराया है। इनमें कमल विहार तथा रावभाटा सहित प्राधिकरण की प्रमुख योजनाओं की संपत्तियां शामिल हैं। कमल विहार में आवासीय फ्लैट, आवासीय एवं व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध हैं, जबकि रावभाटा में व्यावसायिक संपत्तियां बुकिंग के लिए उपलब्ध कराई गई हैं।प्राधिकरण द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के हितग्राहियों के लिए भी आवासीय संपत्तियों का निर्माण किया गया है, ताकि प्रत्येक वर्ग के नागरिकों को उनकी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुरूप आवास उपलब्ध कराया जा सके।ऑनलाइन बुकिंग सुविधा के साथ अब हितग्राही घर बैठे ही वेबसाइट के माध्यम से मेंटेनेंस शुल्क का ऑनलाइन भुगतान भी कर सकेंगे। इससे नागरिकों को कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी और सेवाएं अधिक सुविधाजनक, समयबद्ध तथा पारदर्शी बनेंगी।रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नंदे साहू ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य नागरिकों को आधुनिक, पारदर्शी एवं जनहितैषी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से समय की बचत होगी, प्रक्रिया सरल बनेगी तथा संपत्तियों के आवंटन में पारदर्शिता और सुगमता सुनिश्चित होगी। डिजिटल भुगतान की सुविधा से हितग्राहियों को त्वरित एवं बेहतर सेवाओं का लाभ मिलेगा। उन्होंने नागरिकों से इस ऑनलाइन व्यवस्था का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की।प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अवनीश कुमार शरण ने बताया कि लंबे समय से संपत्तियों की बुकिंग प्रक्रिया बंद थी। अब उपलब्ध सभी संपत्तियों को एक साथ ऑनलाइन पोर्टल पर लाइव कर दिया गया है, जिससे नागरिक पारदर्शी, त्वरित और सुविधाजनक तरीके से संपत्तियों की बुकिंग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य अधिकाधिक सेवाओं का डिजिटलीकरण कर नागरिकों को सहज, सरल और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है।रायपुर विकास प्राधिकरण की यह पहल डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने के साथ-साथ नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ऑनलाइन आवेदन, बुकिंग और डिजिटल भुगतान की सुविधा से संपत्तियों के आवेदन, भुगतान एवं आवंटन की पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और पारदर्शी हो जाएगी।
- -उच्च शिक्षा विभाग ने 29 अंशकालीन जिला संगठकों की सूची की जारीरायपुर /छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की गतिविधियों को और अधिक सुचारू, प्रभावी और गतिशील बनाने के लिए राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में 29 अंशकालीन जिला संगठकों की नियुक्ति की गई है, जिसमें संबंधित प्राध्यापकों व व्याख्याताओं को उनके वर्तमान शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ आगामी 02 वर्षों के लिए जिला संगठक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी सूची में राज्य के सभी प्रमुख जिलों और अंचलों को शामिल किया गया है। सभी नवनियुक्त जिला संगठकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों के कलेक्टर से तत्काल संपर्क स्थापित कर 'जिला स्तरीय सलाहकार समिति' का गठन सुनिश्चित करें और नियमानुसार बैठकों का आयोजन करें। सभी संगठकों को हर महीने अपना दौरा कार्यक्रम, कार्यों का संकलित प्रतिवेदन और निरीक्षण रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप में संबंधित विश्वविद्यालयीन रासेयो प्रकोष्ठ और राज्य एनएसएस प्रकोष्ठ को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी।जिला संगठक अपने क्षेत्र में आने वाले सभी प्रकार के रासेयो इकाईयों, जिसमें कृषि व तकनीकी शिक्षा से संबंधित इकाईयां भी शामिल हैं,के सुचारू संचालन में सहयोग करेंगे और इसकी रिपोर्ट संबंधित विश्वविद्यालयीन प्रकोष्ठ को देंगे।
- -51 हितग्राहियों को नोटिस, सितंबर से पहले निर्माण पूरा करने के निर्देशरायपुर । प्रधानमंत्री आवास योजना (1.0) के तहत दंतेवाड़ा जिले की नगर पंचायत बारसूर ने वर्षों से अधूरे पड़े आवासों को पूरा कराने के लिए अभियान शुरू किया है। नगर पंचायत ने ऐसे 51 हितग्राहियों की पहचान की है, जिनके मकानों का निर्माण निर्धारित समय के बाद भी पूरा नहीं हुआ है।नगर पंचायत की टीम सभी अधूरे आवासों का मौके पर जाकर निरीक्षण कर रही है। निरीक्षण के बाद संबंधित हितग्राहियों को नोटिस जारी किए गए हैं और उन्हें सितंबर 2026 से पहले निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर पंचायत के अनुसार, कई हितग्राहियों को योजना की विभिन्न किश्तों की राशि मिल चुकी है, लेकिन उन्होंने निर्माण कार्य निर्धारित स्तर तक पूरा नहीं किया। जिन हितग्राहियों को फाउंडेशन स्तर की राशि मिली थी, उन्हें लिंटल स्तर तक निर्माण करना था। छत स्तर की राशि प्राप्त करने वालों को रूफ स्तर तक तथा रूफ स्तर की राशि पाने वाले हितग्राहियों को फिनिशिंग तक निर्माण कार्य पूरा करना था। इसके बावजूद कई मकान अब भी अधूरे हैं। मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (1.0) के सभी अधूरे आवासों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है। नगर पंचायत की टीम हितग्राहियों से संपर्क कर उन्हें जल्द निर्माण पूरा करने के लिए प्रेरित कर रही है। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा तक निर्माण कार्य पूरा नहीं करने वाले हितग्राहियों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य पात्र परिवारों को सुरक्षित और पक्का आवास उपलब्ध कराना है। नगर पंचायत बारसूर द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान योजना के अधूरे आवासों को जल्द पूरा कर पात्र हितग्राहियों को इसका पूरा लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- -सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और जनकल्याण के साझा प्रयासों को और सशक्त बनाने पर दिया गया जोररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में झारखंड के वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर ने सौजन्य भेंट की ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और झारखंड केवल भौगोलिक रूप से पड़ोसी राज्य ही नहीं हैं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक संबंधों की मजबूत परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जशपुर क्षेत्र का झारखंड से वर्षों पुराना आत्मीय जुड़ाव रहा है, जिसने दोनों राज्यों के लोगों के बीच विश्वास और निकटता को निरंतर मजबूत किया है। बैठक में सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन तथा परस्पर अनुभवों के आदान-प्रदान जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों राज्यों के बीच सहयोग से विकास के नए अवसर सृजित होंगे तथा सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा।
- -कच्ची झोपड़ी से पक्के घर तक का सफर, बिहान योजना ने बनाया आत्मनिर्भररायपुर। सुकमा जिले के छिंदगढ़ विकासखंड के ग्राम जैमेर की रहने वाली श्रीमती हड़मे कवासी की जिंदगी कभी कठिनाईयों से भरी थी। आत्मसमर्पित नक्सली स्वर्गीय कवासी सोमडू देवा के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। वे एक जर्जर कच्ची झोपड़ी में रहती थीं, जहां बरसात में पानी टपकता था और गर्मी के दिनों में रहना भी मुश्किल हो जाता था। सीमित संसाधनों के कारण परिवार का जीवन संघर्षों में बीत रहा था। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं उनके जीवन में उम्मीद की नई किरण बनकर आईं। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का मकान स्वीकृत हुआ। आज उनका सुंदर, सुरक्षित और पक्का घर बनकर तैयार है। अब उनका परिवार हर मौसम में सुरक्षित और सम्मान के साथ रह रहा है। घर के साथ स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शौचालय का निर्माण भी कराया गया। इससे परिवार को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिला तथा उनके स्वास्थ्य और जीवन स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ।हड़मे कवासी का जीवन केवल पक्के घर तक ही नहीं बदला, बल्कि वे आर्थिक रूप से भी मजबूत बनीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत वे रैला पुंगार स्व- सहायता समूह से जुड़ीं। समूह के माध्यम से विभिन्न आजीविका गतिविधियों में भाग लेकर वे नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं और अपने परिवार का बेहतर ढंग से पालन-पोषण कर रही हैं। हड़मे कवासी बताती हैं कि पहले उनका जीवन अभावों और असुरक्षा से भरा था, लेकिन आज उनके पास पक्का घर, शौचालय और नियमित आय का साधन है। वे इसके लिए भारत सरकार और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। हड़मे कवासी की कहानी इस बात का सशक्त उदाहरण है कि शासन की योजनाएं जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचकर उनके जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिख रही हैं।
- -आवागमन हुआ आसान, चेहरे पर लौटी मुस्कानरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर एवं सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इसी कड़ी में मोटराइज्ड ट्रायसायकल वितरण योजना के तहत मुंगेली जिले के विकासखंड पथरिया के ग्राम भटगांव निवासी दिव्यांग श्री कलेश ओगरे को मोटराइज्ड ट्रायसायकल प्रदान कर लाभान्वित किया गया, जिससे उनके जीवन में नई गति और आत्मविश्वास का संचार हुआ है। कलेश ओगरे को शारीरिक दिव्यांगता के कारण दैनिक कार्यों एवं आवागमन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। घर से बाहर निकलना, आवश्यक कार्यों के लिए बाजार या शासकीय कार्यालयों तक पहुंचना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। अब मोटराइज्ड ट्रायसायकल मिलने से उनकी यह परेशानी काफी हद तक दूर हो गई है।मोटराइज्ड ट्रायसायकल के माध्यम से अब वे बिना किसी पर निर्भर हुए अपने दैनिक कार्य आसानी से कर पा रहे हैं। इससे उनकी स्वतंत्र आवाजाही संभव हुई है और सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी भी बढ़ी है। उनके परिवार को भी बड़ी राहत मिली है। कलेश ओगरे ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अब वे पहले की तुलना में अधिक आत्मनिर्भर महसूस कर रहे हैं और अपने जरूरी कार्य स्वयं कर पा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की इस संवेदनशील पहल ने उनके जीवन को नई दिशा दी है। समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक श्री नदीम काजी ने बताया कि दिव्यांगजनों को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पात्र हितग्राहियों को आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।



























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