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- -एनएचएआई ने सभी एंट्री एवं एग्जिट पॉइंट किए बंद-सीसीटीवी से होगी निगरानी, उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाईबिलासपुर । भारतमाला परियोजना के अंतर्गत विकसित किए जा रहे रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर (NH-130A) के निर्माणाधीन बिलासपुर-उरगा खंड पर आम नागरिकों एवं सभी प्रकार के वाहनों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित है। यह खंड अभी निर्माणाधीन है तथा तकनीकी रूप से सामान्य यातायात के लिए चालू नहीं किया गया है। वर्तमान में इस मार्ग का उपयोग केवल परियोजना निर्माण कार्य में संलग्न वाहनों, मशीनरी एवं अधिकृत कर्मियों द्वारा ही किया जा रहा है।भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), परियोजना कार्यान्वयन इकाई, कोरबा के परियोजना निदेशक श्री अंकित आनंद ने बताया कि निर्माणाधीन बिलासपुर-उरगा खंड पर अनधिकृत आवागमन को रोकने के लिए सभी एंट्री एवं एग्जिट पॉइंट बंद कर दिए गए हैं। साथ ही, पूरे राजमार्ग में निगरानी के लिए सीसीटीवी सर्विलांस प्रणाली स्थापित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद निर्माणाधीन मार्ग पर प्रवेश करने वाले व्यक्तियों एवं वाहनों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।एनएचएआई ने सभी नागरिकों एवं वाहन चालकों से अपील की है कि वे निर्माणाधीन मार्ग पर प्रवेश न करें तथा आवागमन के लिए केवल निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का ही उपयोग करें। निर्माणाधीन मार्ग पर अनधिकृत प्रवेश न केवल सुरक्षा की दृष्टि से अत्यधिक जोखिमपूर्ण है, बल्कि इससे निर्माण कार्य की गति भी प्रभावित होती है। एनएचएआई सुरक्षित, सुगम एवं विश्वस्तरीय राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है तथा आम नागरिकों से सहयोग की अपेक्षा करता है।
- दुर्ग। शाला प्रवेशोत्सव के तहत शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव आज दुर्ग विधानसभा क्षेत्र के बोरसी स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, आदर्श कन्या शाला एवं जेआरडी विद्यालय में आयोजित प्रवेश उत्सव कार्यक्रमों में शामिल हुए। उन्होंने नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर एवं मिठाई खिलाकर स्वागत किये तथा उन्हें नवीन शिक्षा सत्र की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विद्यार्थियों को गणवेश एवं जूते भी वितरित किए गए।शिक्षा मंत्री बताया यादव ने कार्यक्रम में उपस्थित पालकों से भी मुलाकात कीये और उनसे अपने बच्चों की नियमित पढ़ाई, विद्यालय में शत-प्रतिशत उपस्थिति तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किये। उन्होंने कहा कि बच्चों की पहली पाठशाला उनका परिवार होता है और अभिभावकों का सहयोग ही उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की सबसे बड़ी प्रेरणा देता है।इस अवसर पर विद्यालय में स्थापित स्मार्ट क्लास का लोकार्पण करते हुए मंत्री श्री यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक आधारित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित शिक्षण व्यवस्था विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगी तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सक्षम बनाएगी।कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री सीधे क्लासरूम पहुंचे और बच्चों के बीच बैठकर उनसे संवाद किये। उन्होंने विद्यार्थियों से पहाड़े सुनने के साथ स्वयं भी उन्हें सरल तरीके से पहाड़ा सिखाया तथा पढ़ाई को रुचिकर बनाने के लिए प्रेरित किये। बच्चों की जिज्ञासाओं का उत्तर देते हुए उनके सपनों, भविष्य की आकांक्षाओं और लक्ष्य के बारे में चर्चा की तथा उन्हें मन लगाकर अध्ययन करने, अनुशासन का पालन करने और निरंतर मेहनत से आगे बढ़ने का संदेश दिया।शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने छात्राओं एवं शिक्षकों से भी संवाद करते हुए शिक्षा के साथ संस्कार, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्थाओं का अवलोकन किया और छात्राओं को पूरी लगन, अनुशासन एवं आत्मविश्वास के साथ अध्ययन कर अपने परिवार, समाज और प्रदेश का नाम गौरवान्वित करने के लिए प्रेरित किये।
- रायपुर । इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डाॅ. एम.पी. ठाकुर सहित चार कर्मचारियों को आज यहां भावभीनी विदाई दी गई। विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के सभा कक्ष में कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल की अध्यक्षता में आयोजित विदाई समारोह में पूर्व में निदेशक शिक्षण, निदेशक विस्तार सेवाएं तथा अधिष्ठाता कृषि संकाय जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके डाॅ. एम.पी. ठाकुर को उनकी अर्धवार्षिकी आयु पूर्ण होने पर विदाई दी गई। डाॅ. ठाकुर सेवानिवृत्ति से पूर्व कृषि विश्वविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के नोडल अधिकारी का दायित्व संभाल रहे थे। छत्तीसगढ़ में मशरूम की खेती को गांव-गांव तक पहुंचाने में डाॅ. ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अलावा निदेशक शिक्षण कार्यालय से सेवानिवृत्त तीन अन्य कर्मचारियों श्री मुक्तानंद नायक शाखा अधिकारी, श्री जलम यादव सहायक ग्रेड-01 एवं श्री नवल किशोर श्रीवास्तव वाहन चालक को भी भावभीनी विदाई दी गई। कुलपति डाॅ. चंदेल ने सभी सेवानिवृत्त होने वालों को शाॅल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने उनके सेवानिवृत्ति उपरांत स्वस्थ, सुदीर्घ तथा सुखमय जीवन हेतु शुभकामनाएं व्यक्त कीं। विदाई समारोह में कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डाॅ. कपिलदेव दीपक, निदेशक शिक्षण डाॅ. विजय कुमार, वित्त नियंत्रक श्रीमती मनीषा नाग, उप वित्त नियंत्रक श्री सचिन शर्मा, उप कुलसचिव डाॅ. येमन कुमार देवांगन सहित विश्वविद्यालय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, प्राध्यापकगण एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।
- -मुख्य सचिव की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्नरायपुर /मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई की सामान्य सभा की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में मुख्य सचिव ने सामाजिक अंकेक्षण में पारदर्शिता और जवाबदेही पर विशेष जोर दिया जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सामाजिक अंकेक्षण के दौरान प्राप्त आपत्तियों का कंडिकावार शीघ्र निराकरण किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण में जनभागीदारी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण ग्राम सभा को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य के सभी जिला कलेक्टरों को ग्राम सभाओं में अनिवार्य रूप से अंकेक्षण रिपोर्ट दिया जाना आवश्यक है। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तुत वार्षिक कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा हुई। इस वर्ष प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी नरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण एवं राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रमों के सामाजिक अंकेक्षण कराये जाने पर बल दिया गया।बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 से 2025-26 में अब तक किए गए सामाजिक अंकेक्षण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई। वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना एवं बजट का भी अनुमोदन किया गया। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के निर्माण हेतु विस्तार से चर्चा हुई। सामाजिक अंकेक्षण कार्य में नवाचार एवं गुणवत्तापूर्ण कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु डेवलपमेंट एजेंसी के सहयोग के लिए भी चर्चा हुई। बैठक में सामाजिक अंकेक्षण इकाई के विस्तार हेतु अन्य योजनाओं से निश्चित विकास निधि के निर्धारण के संबंध में विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में मनरेगा योजना को संशोधित नवीन योजना वीबीजीरामजी में सामाजिक अंकेक्षण के प्रावधान का अवलोकन, आत्मसात करने के प्रस्ताव पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत महात्मा गांधी नरेगा सहित अन्य योजनाओं के सामाजिक अंकेक्षण के कार्यों के संपादन हेतु विभिन्न पदों को नियमानुसार भरने के लिए आवश्यक नियमों के प्रस्ताव पर चर्चा के बाद अनुमोदन किया गया।बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋर्चा शर्मा, आदिम जाति विकास विभाग एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती शहला निगार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी, जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं छत्तीसगढ़ सामाजिक अंकेक्षण इकाई के सामान्य सभा के सदस्यों ने भाग लिया।
- -खरीफ 2026 में पूर्व वर्ष की तरह मिलेगा एकमुश्त यूरिया, 80 प्रतिशत वितरण सीमा समाप्तरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने और खेती को अधिक सुगम बनाने के लिए लगातार महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। इसी क्रम में खरीफ सीजन 2026 के लिए जांजगीर-चांपा जिले के किसानों को बड़ी राहत देते हुए सहकारी समितियों के माध्यम से यूरिया वितरण पर लागू 80 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर दी गई है। अब किसानों को खरीफ 2025 की भांति उनकी पात्रता के अनुसार एकमुश्त यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा।उप संचालक कृषि श्री राकेश शर्मा ने बताया कि खरीफ 2026 में किसानों को खरीफ 2025 में प्राप्त यूरिया की मात्रा के अनुरूप यूरिया वितरित किया जाएगा। यदि संबंधित सहकारी समिति में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा तो किसानों को एकमुश्त यूरिया प्रदान किया जाएगा। किसी समिति में स्टॉक की कमी होने पर शेष मात्रा यूरिया उपलब्ध होते ही किसानों को वितरित कर दी जाएगी।उन्होंने बताया कि शासन के इस निर्णय से किसानों को बार-बार समिति के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और खरीफ सीजन में आवश्यक उर्वरक समय पर उपलब्ध होने से कृषि कार्य निर्बाध रूप से संचालित हो सकेंगे। इससे किसानों को खेती की तैयारी में सुविधा मिलेगी तथा समय पर उर्वरक उपलब्ध होने से फसल उत्पादन को भी गति मिलेगी। राज्य सरकार का यह निर्णय किसान हितों के प्रति उसकी संवेदनशीलता और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शासन का उद्देश्य किसानों को आवश्यक कृषि आदान समय पर उपलब्ध कराकर उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाना और कृषि को अधिक समृद्ध एवं टिकाऊ बनाना है।
- -किसानों को नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग के लिए किया जा रहा जागरूक-राज्य में नैनो डीएपी का लगभग 2.47 लाख बोतलों का भंडारण और किसानों को 87 हजार से अधिक बोतलों का वितरण-नैनो यूरिया का लगभग 2.86 लाख बोतलों का भंडारण और किसानों को 1.14 लाख बोतलों का वितरणरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ आधुनिक एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए राज्य में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के दौरान सहकारी समितियों के माध्यम से नैनो उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण की सतत मॉनिटरिंग की जा रही है। 26 जून 2026 की स्थिति में राज्य में नैनो डीएपी का लगभग 2.47 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है, जिसमें से 87 हजार से अधिक बोतलों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। इसी प्रकार नैनो यूरिया का लगभग 2.86 लाख बोतलों का भंडारण किया गया है तथा 1.14 लाख बोतलों से अधिक का वितरण किसानों को किया जा चुका है। शेष मात्रा समितियों में उपलब्ध है, जिससे आगामी कृषि कार्यों के लिए किसानों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।राज्य सरकार किसानों को नैनो उर्वरकों के लाभों के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चला रही है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया पारंपरिक ठोस रासायनिक उर्वरकों की तुलना में अधिक प्रभावी हैं। इनका उपयोग करने से उर्वरकों की मात्रा कम लगती है, पौधों द्वारा पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है, उत्पादन लागत घटती है तथा फसलों की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में वृद्धि होती है। साथ ही मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण संरक्षण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि लागत कम करने तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से नैनो उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के किसान वैज्ञानिक खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकें।कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे अपने निकटतम सहकारी समिति एवं कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया के वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी प्राप्त करें तथा इन आधुनिक उर्वरकों का अधिक से अधिक उपयोग कर कृषि को लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने में सहभागी बनें।
- - कालाबाजारी रोकने प्रशासन सतर्करायपुर /राज्य सरकार खरीफ सीजन 2026 के लिए किसानों को पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध कराने सतर्कता के साथ कार्य कर रही है। जिलों में भी खाद बीज की उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। खाद-बीज की कालाबाजारी को रोकने प्रशासन सतर्क है। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिला प्रशासन के कृषि अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए जांजगीर-चांपा जिले में किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है तथा खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए नियमित निरीक्षण एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।कृषि विभाग के अनुसार सहकारी क्षेत्र में 39,200 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण लक्ष्य के विरुद्ध वर्तमान में 21,362 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जिसमें से 7,826 मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसी प्रकार निजी क्षेत्र में 26,130 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 13,487 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है तथा 10,150 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। जिला जांजगीर-चांपा के नवागढ़ विकासखंड की सेवा सहकारी समिति मुनुंद में वर्तमान में यूरिया, डीएपी, एनपीके, जिंकेटेड सुपर फॉस्फेट तथा नैनो उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को निरंतर वितरण किया जा रहा है।अधिकारियों ने बताया कि किसानों को उनके खेती के रकबे के आधार पर किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के माध्यम से उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए शनिवार एवं रविवार सहित अवकाश दिवसों में भी सेवा सहकारी समितियों को संचालित कर खाद वितरण जारी रखा गया है। खाद की कालाबाजारी एवं वितरण में अनियमितता रोकने के लिए जिला एवं विकासखंड स्तरीय उर्वरक निरीक्षक दल द्वारा निजी कृषि केंद्रों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान शासकीय दर से अधिक मूल्य पर उर्वरक विक्रय की शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। file photo
- -दो विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित, 40 कृषि केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारीरायपुर /राज्य सरकार खरीफ सीजन 2026 के लिए किसानों को पर्याप्त रासायनिक खाद उपलब्ध कराने सतर्कता के साथ कार्य कर रही है। जिलों में भी खाद-बीज की उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन द्वारा कड़ी निगरानी रखी जा रही है। खाद-बीज की कालाबाजारी को रोकने प्रशासन सतर्क है। इसी कड़ी में कबीरधाम जिले में भी खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण किया गया है तथा कालाबाजारी एवं अधिक मूल्य पर विक्रय रोकने के लिए व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है।अधिकारियों ने बताया कि जिला कबीरधाम में सहकारी क्षेत्र में 57,200 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण लक्ष्य के विरुद्ध सेवा सहकारी समितियों में 32,700 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जबकि डबल लॉक केंद्रों में 5,668 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध हैं। समितियों के माध्यम से किसानों को अब तक 21,151 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है।इसी प्रकार निजी क्षेत्र में 10,457 मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया गया है, जिसके विरुद्ध अब तक 7,639 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है। सहकारी समितियों एवं निजी विक्रय केंद्रों के माध्यम से उर्वरकों का वितरण निरंतर जारी है। डीएपी उर्वरक के वैकल्पिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की अनुशंसाओं के अनुसार एनपीके, टीएसपी एवं एसएसपी जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग और वितरण के संबंध में किसानों को जागरूक किया जा रहा है। मैदानी अमलों द्वारा किसानों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। जिले में उर्वरकों के भंडारण, वितरण, कालाबाजारी, अधिक मूल्य पर विक्रय एवं अन्य अनियमितताओं पर नियंत्रण के लिए जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों, उड़नदस्ता दल तथा उर्वरक निरीक्षकों द्वारा अब तक 170 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया जा चुका है।निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर 2 विक्रय केंद्रों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं तथा 40 कृषि केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सभी निजी उर्वरक विक्रेताओं को निर्धारित मूल्य एवं नियमानुसार उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। हाल ही में कलेक्टर की उपस्थिति में बोड़ला विकासखंड के तीन निजी उर्वरक विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान किसानों से चर्चा कर उर्वरक वितरण व्यवस्था तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग के संबंध में जानकारी दी गई। इस दौरान अधिक मूल्य पर उर्वरक विक्रय की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। कृषि विभाग ने कहा है कि खरीफ 2026 के दौरान किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कालाबाजारी और अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी एवं कार्रवाई जारी रहेगी। file photo
- -छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के सामाजिक भवन का हुआ लोकार्पण, उत्कृष्ट प्रतिभाओं का सम्मान-शिक्षा, संगठन और संस्कार से समाज होगा मजबूत, युवाओं से आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकाररायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप आज रायपुर के महादेव घाट में आयोजित छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के सामाजिक भवन लोकार्पण, सम्मान समारोह एवं वार्षिक अधिवेशन में शामिल हुए। उन्होंने नवनिर्मित सामाजिक भवन का लोकार्पण किया और शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल करने वाले समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों एवं प्रतिभाओं को सम्मानित किया।मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक ताकत उसकी शिक्षा, संगठन और संस्कार होते हैं। आज आदिवासी समाज के युवा शिक्षा, प्रशासन, तकनीक, व्यवसाय, खेल और जनप्रतिनिधित्व सहित अनेक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। यह नए और विकसित होते छत्तीसगढ़ का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि आज दूरस्थ क्षेत्रों के आदिवासी युवा डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, उद्यमी और जनप्रतिनिधि बनकर समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि सामाजिक भवन केवल एक भवन नहीं, बल्कि समाज की एकता, संवाद, संस्कार और नई पीढ़ी के मार्गदर्शन का केंद्र है। यहां विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, सांस्कृतिक गतिविधियों, सामाजिक कार्यक्रमों और समाज के विकास से जुड़े कार्यों के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।श्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति, छात्रवृत्ति, आवासीय विद्यालय, कौशल विकास, वनाधिकार, स्वरोजगार, लघु वनोपज का बेहतर मूल्य तथा महिला स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण जैसी योजनाओं से आदिवासी समाज को आगे बढ़ाया जा रहा है।मंत्री श्री केदार कश्यप ने समाज के वरिष्ठजनों से अपनी समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं को उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, डिजिटल तकनीक और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की अपील की।कार्यक्रम के अंत में मंत्री श्री केदार कश्यप ने सामाजिक भवन के निर्माण के लिए समाज को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि संगठित समाज, शिक्षित युवा और सशक्त नेतृत्व के बल पर छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज विकास और प्रगति की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ आदिवासी परंपरा औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम, अनुसूचित जनजाति आयोग के पूर्व अध्यक्ष श्री नंदकुमार साय,छत्तीसगढ़ कंडरा आदिवासी समाज के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र कुंजाम,श्रीमती अनसूया मरकाम, श्रीमती तुलसी मरकाम, श्री होरीलाल छेदैया, श्री शांतनु मरकाम श्री कमल नारायण मरकाम सहित बड़ी संख्या में कंडरा आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।
- -प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के अभियान को मिली बड़ी सफलता, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जनस्वास्थ्य संकल्प को मिला बल-90 प्रतिशत लक्ष्य पूर्ण, अब शत-प्रतिशत टीकाकरण पर विशेष जोररायपुर / प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा 28 फरवरी 2026 को प्रारंभ किए गए राष्ट्रव्यापी निःशुल्क एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण अभियान में छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। महिलाओं को भविष्य में गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से संचालित इस अभियान में जिले ने 8,785 लक्ष्य आबादी के विरुद्ध 7,931 बालिकाओं का टीकाकरण कर 90 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की है ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार जनस्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा मातृ एवं बाल स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रही है। इसी प्रतिबद्धता के अनुरूप बलरामपुर-रामानुजगंज जिले ने एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में अग्रणी स्थान हासिल किया है।कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा मैदानी अमले के समन्वित प्रयासों से अभियान को व्यापक जनसहभागिता मिली। दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों तक पहुंच बनाकर पात्र बालिकाओं का टीकाकरण सुनिश्चित किया गया।कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने इस उपलब्धि पर सभी संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को बधाई देते हुए शत-प्रतिशत एचपीवी टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए छूटी हुई प्रत्येक पात्र बालिका तक पहुंच बनाने के निर्देश दिए हैं। दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों वाला बलरामपुर-रामानुजगंज जिला आज राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन का उदाहरण बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के जनकल्याणकारी विजन, मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व, विभागीय समन्वय और जनसहभागिता से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा रहे हैं।
- -मुख्यमंत्री ने रामगढ़ पहुँचकर निहारी सीताबेंगरा की प्राचीन विरासत-जोगीमारा गुफा शिलालेख एवं हाथीपोल का किया अवलोकन-हमारी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य विरासत - मुख्यमंत्री श्री सायरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय "रामगढ़ महोत्सव-2026" के समापन समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात सीताबेंगरा गुफा का अवलोकन किया तथा इसकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने इसके साथ ही जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेख, भित्तिचित्रों तथा क्षेत्र की अनूठी प्राकृतिक धरोहर हाथीपोल का भी अवलोकन किया। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि रामगढ़ सरगुजा की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में विख्यात यह स्थल संस्कृति, इतिहास, साहित्य एवं पर्यटन का अद्भुत संगम है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक एवं पुरातात्विक विरासत भी विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान रखती है। रामगढ़ जैसी धरोहरें हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि हैं, जिनका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित हो सकें और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त हों।उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ भारतीय इतिहास, स्थापत्य, शिलालेख एवं चित्रकला की अनुपम धरोहर मानी जाती हैं। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इन्हीं पहाड़ियों में अपनी कालजयी कृति "मेघदूतम्" की रचना की थी, जिसका आरंभ "आषाढस्य प्रथमदिवसे" से होता है। इसी ऐतिहासिक एवं साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर रामगढ़ महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लगभग 44 फीट लंबी सीताबेंगरा गुफा में निर्मित प्राकृतिक रंगमंच, जोगीमारा गुफा में तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व की भित्तिचित्र परंपरा तथा यहाँ प्राप्त प्राचीन अभिलेख इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।रामगढ़ की एक अन्य महत्वपूर्ण पहचान "हाथीपोल" नामक प्राकृतिक सुरंग है। लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊँची यह प्राकृतिक सुरंग अपनी अनूठी संरचना के कारण पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। माना जाता है कि वर्षों तक जल प्रवाह के कारण इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। सुरंग के दूसरे छोर पर स्थित सीताबेंगरा एवं जोगीमारा गुफाएँ इस सम्पूर्ण क्षेत्र को और अधिक रहस्यमयी, आकर्षक एवं ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं। रामगढ़ पर्वत के निचले शिखर पर स्थित इन कलात्मक गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जोड़ा जाता है, जिसके कारण यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
- -फॉरेस्ट रेस्ट हाउस "राम वाटिका" में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन कर प्राप्त किया आशीर्वाद-"एक पेड़ माँ के नाम 3.0" अभियान के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरक संदेश-मुख्यमंत्री ने आमजन से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का किया आह्वान, भगवान श्री राम के आदर्श पथ पर चलने का दिया संदेशरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज अपने सरगुजा प्रवास के दौरान विकासखंड उदयपुर स्थित रामगढ़ के फॉरेस्ट रेस्ट हाउस "राम वाटिका" में स्थापित भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की, इसके साथ ही उन्होंने "एक पेड़ माँ के नाम 3.0" अभियान के अंतर्गत रुद्राक्ष का पौधारोपण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान को मातृशक्ति एवं प्रकृति के प्रति श्रद्धा तथा आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि माँ के नाम पर लगाया गया एक पौधा न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित भविष्य की सुदृढ़ आधारशिला भी है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक पौधे लगाएँ तथा उनके संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लें, ताकि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करते हुए प्रकृति के संतुलन को बनाए रखा जा सके।भगवान श्री राम की प्रतिमा को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभु श्री राम का जीवन मर्यादा, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता का अनुपम आदर्श है, जो युगों-युगों से समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता आ रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से प्रभु श्री राम द्वारा प्रशस्त आदर्श पथ पर चलते हुए सेवा, सद्भाव एवं समर्पण के भाव से समाज एवं राष्ट्र के उत्थान में सहभागी बनने का आह्वान किया। इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम, लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज, सीतापुर विधायक श्री रामकुमार टोप्पो सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
- -खीरे की वैज्ञानिक खेती बनी वरदानरायपुर / खीरे की व्यावसायिक खेती एक बेहद लाभदायक व्यवसाय है, जो 45 से 50 दिनों में पैदावार देना शुरू कर देता है। व्यावसायिक खेती में खीरे को जमीन पर फैलाने के बजाय मचान और तारों का सहारा देकर ऊपर चढ़ाना चाहिए। इससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, गलते नहीं हैं और उनका आकार, रंग और चमक शानदार रहती है, जिससे बाजार में बेहतरीन भाव मिलता है। बुवाई के 45-50 दिनों बाद फल तोड़ने योग्य हो जाते हैं। मचान विधि से एक एकड़ में लगभग 30 से 45 क्विंटल तक उपज प्राप्त हो जाती है।सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के दौर में यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो खेती कैसे फायदे का सौदा बन सकती है, इसे धमतरी जिले के एक प्रगतिशील किसान ने सच कर दिखाया है। जिला धमतरी के विकासखंड नगरी के अंतर्गत ग्राम सेलबहरा के विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार समुदाय) के कृषक श्री खीमांशु गजेसिंग आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं।श्री गजेसिंग के पास कुल 10 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें से उन्होंने इस वर्ष 4 एकड़ क्षेत्र में खीरे की व्यावसायिक खेती की। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के नियमित संपर्क और तकनीकी मार्गदर्शन से उन्होंने उन्नत खेती की तकनीक, गुणवत्तायुक्त बीजों का चयन, संतुलित पोषण प्रबंधन, आधुनिक सिंचाई और पौध संरक्षण जैसी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया।पहले पारंपरिक ढर्रे पर खेती करने के कारण श्री गजेसिंग के लिए कृषि की लागत निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी और आय बेहद सीमित थी। लेकिन आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के बाद पासा पलट गया। वैज्ञानिक तरीके से की गई इस खेती के कारण खीरे की फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में जबरदस्त सुधार हुआ है। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में भी उनके खीरे की भारी मांग है। उपज का सही और उचित मूल्य मिलने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए श्री खीमांशु गजेसिंग ने बताया कि विभागीय अधिकारियों के तकनीकी सुझावों और शासकीय योजनाओं के सहयोग से मुझे खेती को एक नए नजरिए से देखने का मौका मिला। इस सफलता से प्रेरित होकर अब मैं भविष्य में अन्य उद्यानिकी फसलों का विस्तार करने और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए उत्पादन को और बढ़ाने की योजना बना रहा हूँ।उद्यानिकी विभाग भी लगातार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है। श्री गजेसिंग की यह उपलब्धि साबित करती है कि वैज्ञानिक नवाचार और सरकारी योजनाओं का सही लाभ उठाकर कृषि को टिकाऊ और अत्यधिक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।
- महासमुंद. राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत संचालित योजनाएं जिले के किसानों के लिए आय वृद्धि का बेहतर माध्यम बन रहा हैं। विकासखण्ड बागबाहरा के ग्राम जुनवानी खुर्द निवासी प्रगतिशील किसान श्री ओमनारायण ध्रुव ने उद्यानिकी फसलों की वैज्ञानिक खेती अपनाकर अपने आय में अच्छी वृद्धि की है।श्री ओमनारायण ध्रुव बताते हैं कि उनके पास कुल 2.32 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है। जिसमें वर्षभर विभिन्न उद्यानिकी फसलों का उत्पादन किया जाता है, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त होती है तथा पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं अधिक आय अर्जित कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना के तहत करेला की खेती की। विभाग द्वारा उन्हें 1.00 हेक्टेयर क्षेत्र में करेला उत्पादन हेतु 24 हजार रुपये का अनुदान तथा 0.50 हेक्टेयर क्षेत्र में सपोर्ट सिस्टम स्थापना हेतु 5 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया गया।कृषक ओमनारायण ध्रुव ने अपनी खेती में ड्रिप सिंचाई एवं कृषि यंत्रों का उपयोग कर आधुनिक तकनीकों को अपनाया, जिससे जल की बचत के साथ फसल उत्पादन में भी वृद्धि हुई। करेला फसल से उन्हें लगभग 12 टन प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। फसल का विक्रय औसतन 15 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से किया गया। उत्पादन पर प्रति एकड़ लगभग 39 हजार रुपये की इनपुट लागत, 34 हजार 900 रुपये श्रमिक लागत तथा 9 हजार 900 रुपये अन्य लागत व्यय हुई। सभी खर्चों को घटाने के बाद कृषक को लगभग 96 हजार 200 रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ।श्री ओमनारायण ध्रुव ने अपनी सफलता का श्रेय राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना, उद्यानिकी विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन तथा आधुनिक कृषि तकनीकों को दिया है। उनकी सफलता को देखकर ग्राम एवं आसपास के क्षेत्रों के अनेक किसान भी सब्जी एवं उद्यानिकी फसलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे क्षेत्र में उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है।
- 0- सार्थक स्कूल के छात्र सत्यांशु स्पेशल ओलंपिक्स गोथिया ट्रॉफी 2026 में बिखेरेंगे जलवा0- कलेक्टर अबिनाश मिश्रा और समाज कल्याण विभाग ने दी बधाई, कहा- प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहींरायपुर। धमतरी जिले के लिए यह अत्यंत गौरव और हर्ष का क्षण है। समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित विशेष विद्यालय ‘सार्थक स्कूल’ के विशेष छात्र सत्यांशु दीप का चयन स्पेशल ओलंपिक्स भारत (Special Olympics Bharat) की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम में हो गया है। सत्यांशु आगामी 12 से 16 जुलाई 2026 तक स्वीडन में आयोजित होने वाली स्पेशल ओलंपिक्स गोथिया ट्रॉफी 2026 (Special Olympics Gothia Trophy 2026) अंतर्राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।सत्यांशु दीप की यह ऐतिहासिक उपलब्धि न केवल धमतरी जिले, बल्कि समूचे छत्तीसगढ़ के लिए बड़े गौरव का विषय है। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और खेल कौशल का यह उत्कृष्ट उदाहरण यह साबित करता है कि यदि उचित प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और अवसर मिले, तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश का परचम लहरा सकते हैं।विद्यालय परिवार के अनुसार, सत्यांशु ने यह मुकाम अपने कड़े व नियमित अभ्यास, अनुशासन, समर्पण और मैदान पर बेहतरीन खेल प्रदर्शन के दम पर हासिल किया है। उनकी यह शानदार सफलता अन्य विशेष बच्चों के लिए भी एक बड़ी प्रेरणास्रोत बनेगी और उन्हें अपने सपनों को साकार करने के लिए उत्साहित करेगी।समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित और अनुदानित इन विशेष विद्यालयों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेल, जीवनोपयोगी कौशल और व्यक्तित्व विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना है। सत्यांशु का यह चयन विभाग की इन कोशिशों की सार्थकता को प्रमाणित करता है। इस बड़ी उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए धमतरी कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि यह सफलता सत्यांशु की कड़ी मेहनत, लगन और खेल के प्रति उनके अटूट समर्पण का परिणाम है। मैं सत्यांशु दीप, उनके माता-पिता, प्रशिक्षकों, विद्यालय परिवार और समाज कल्याण विभाग को इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि वे स्वीडन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर भारत, छत्तीसगढ़ और धमतरी जिले का नाम विश्व स्तर पर गौरवान्वित करेंगे।कलेक्टर ने आगे कहा कि सत्यांशु की सफलता यह गहरा संदेश देती है कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। यह गौरवपूर्ण उपलब्धि धमतरी जिले में समावेशी शिक्षा, खेल संस्कृति और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर है।इस ऐतिहासिक अवसर पर समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों एवं प्रशिक्षकों ने सत्यांशु के उज्ज्वल भविष्य और आगामी मैचों में शानदार प्रदर्शन की कामना की है। इसके साथ ही उन्होंने सत्यांशु के माता-पिता को भी विशेष रूप से बधाई दी है, जिनके निरंतर सहयोग, अटूट विश्वास और संबल ने सत्यांशु को इस अंतर्राष्ट्रीय मुकाम तक पहुँचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पूरे धमतरी जिले को विश्वास है कि स्वीडन की धरती पर सत्यांशु दीप अपने खेल कौशल से विश्व मंच पर भारत का मान और बढ़ाएंगे।
- 0- सहकारिता सप्ताह का हुआ भव्य शुभारंभ, किसानों और ग्रामीणों को मजबूत बनाने पर जोर0- सहकारिता आंदोलन के जनक पंडित वामनराव बलिराम लाखे को दी गई श्रद्धांजलिरायपुर। सहकारिता मंत्रालय के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सहकारिता सप्ताह के शुभारंभ सोमवार को जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, रायपुर में सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि सहकारिता केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि लोगों को साथ लेकर विकास करने की एक मजबूत सोच है। सरकार का मुख्य लक्ष्य सहकारिता को एक जनआंदोलन बनाकर प्रत्येक ग्रामीण परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना है।मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के बाद, केंद्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह के मार्गदर्शन में देश में सहकारिता क्षेत्र को एक नई और मजबूत पहचान मिली है। पिछले पांच वर्षों में सहकारिता के माध्यम से किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कई ऐतिहासिक व महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।राज्य सरकार के प्रयासों को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सहकारिता को गांव-गांव तक मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्राथमिक कृषि साख समितियों को सशक्त बनाया जा रहा है, किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है तथा सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है।मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि साथ मिलकर विकास ही सहकारिता का मूल मंत्र है और इसी भावना से आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण संभव होगा। उन्होंने सहकारी संस्थाओं के पदाधिकारियों और कर्मचारियों से पूरी सेवा, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ कार्य करने का आग्रह किया, ताकि सहकारी व्यवस्था पर जनता का विश्वास और अधिक मजबूत हो सके। उन्होंने आगे कहा कि यह सहकारिता सप्ताह केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि सहकारिता की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने का महाअभियान है। सप्ताहभर चलने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से नई पीढ़ी को सहकारिता से जोड़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति देने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ सहकारिता आंदोलन के जनक पंडित वामनराव बलिराम लाखे की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर की।इस महत्वपूर्ण अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक मर्यादित के अध्यक्ष श्री केदारनाथ गुप्ता, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के अध्यक्ष श्री निरंजन सिन्हा, उपाध्यक्ष श्री अभिनेष कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सहकारी संस्थाओं के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित थे।
- 0- नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों की रामलीला, कस्तूरबा विद्यालय की बालिकाओं की मनमोहक प्रस्तुति और कवियों की ओजस्वी रचनाओं ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्धअम्बिकापुर। सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विरासत को समर्पित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव-2026 के प्रथम दिवस में सोमवार को संस्कृति, साहित्य और लोककला का अद्भुत संगम देखने को मिला। महोत्सव में प्रस्तुत विविध सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नई दिल्ली के ख्याति प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भव्य रामलीला, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय उदयपुर की छात्राओं द्वारा ’जटायु मोक्ष’ की भावपूर्ण नृत्य-नाटिका तथा कवि सम्मेलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।नई दिल्ली से आए ख्याति प्राप्त कलाकारों ने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का अत्यंत प्रभावशाली मंचन कर दर्शकों को त्रेतायुग की अनुभूति कराई। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, धर्म, सत्य, त्याग एवं कर्तव्यपरायणता को सशक्त अभिनय, प्रभावी संवाद, आकर्षक वेशभूषा, भव्य मंच सज्जा और मधुर संगीत के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुति के दौरान पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शक कलाकारों के अभिनय से अभिभूत नजर आए।इसी क्रम में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, उदयपुर की बालिकाओं ने 'जटायु मोक्ष' पर आधारित मनमोहक नृत्य-नाटिका प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीराम और जटायु के प्रसंग को बालिकाओं ने अत्यंत संवेदनशील एवं प्रभावशाली अभिनय तथा नृत्य के माध्यम से साकार किया। भावपूर्ण अभिव्यक्ति, उत्कृष्ट मंच संचालन, पारंपरिक वेशभूषा और सुमधुर संगीत के समन्वय ने प्रस्तुति को अत्यंत जीवंत बना दिया। बालिकाओं की इस प्रस्तुति ने उपस्थित दर्शकों की आंखें नम कर दीं और पूरा सभागार देर तक तालियों की गूंज से गूंजता रहा। उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास ने सभी का मन मोह लिया।महोत्सव का एक अन्य प्रमुख आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसमें प्रतिष्ठित कवियों ने अपनी ओज, वीर, श्रृंगार, हास्य-व्यंग्य एवं समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति, सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर आधारित कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया, वहीं हास्य-व्यंग्य की रचनाओं ने पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। कवियों की दमदार प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया।इसके अतिरिक्त लोकगीत, सरगुजिहा लोकनृत्य, करमा नृत्य, स्वागत गीत एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी महोत्सव को भव्यता प्रदान की। स्थानीय एवं क्षेत्रीय कलाकारों ने सरगुजा की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपनी कला का उत्कृष्ट परिचय दिया। रामगढ़ महोत्सव का उद्देश्य सरगुजा अंचल की ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विरासत एवं साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध संस्कृति से जोड़ना है। प्रथम दिवस के भव्य और सफल आयोजन ने इस उद्देश्य को सार्थक रूप से अभिव्यक्त किया।
- सूरजपुर.पल्स पोलियो अभियान को सफल बनाने के उद्देश्य से जिला टीकाकरण अधिकारी ने स्वयं स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ क्षेत्र का भ्रमण कर घर-घर जाकर 05 वर्ष से कम आयु के बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई। इस दौरान उन्होंने टीमों के कार्यों का निरीक्षण किया तथा अभियान की प्रगति का जायजा लिया।जिला टीकाकरण अधिकारी ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने 05 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को पोलियो की दो बूंद अवश्य पिलाएं। उन्होंने कहा कि “हर बच्चे तक पोलियो की दवा पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पोलियो मुक्त भारत के लक्ष्य को बनाए रखने के लिए प्रत्येक बच्चे को हर बार पोलियो की खुराक दिलाना आवश्यक है।”निरीक्षण के दौरान उन्होंने घरों पर टीमों द्वारा किए जा रहे चिन्हांकन (मार्किंग) का भी अवलोकन किया तथा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य करने के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने घर-घर पहुंचकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के साथ-साथ अभिभावकों को नियमित टीकाकरण एवं पोलियो उन्मूलन के प्रति जागरूक भी किया।जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी कारणवश कोई बच्चा पोलियो की खुराक लेने से वंचित रह गया हो, तो निकटतम स्वास्थ्य कार्यकर्ता से संपर्क कर उसे अवश्य पोलियो की दवा पिलाएं।
- 0- मोर अंगना के शोर साझा बाल काव्य संग्रह का हुआ विमोचन0- साहित्य और तकनीक के अभिनव समन्वय (क्यूआर कोड) की हुई सराहनारायपुर। छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप सोमवार को राजधानी रायपुर के वृंदावन भवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने साझा बाल काव्य संग्रह मोर अंगना के शोर का विमोचन किया और सभी संबंधित रचनाकारों व शिक्षकों को सम्मानित किया। समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास शिक्षा, संस्कार और साहित्य के माध्यम से ही संभव है। बाल साहित्य हमारी नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखने का काम करता है। मंत्री श्री कश्यप ने पुस्तक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मोर अंगना के शोर केवल कविताओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह बच्चों की कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता, नैतिक मूल्यों और भाषा कौशल को विकसित करने का एक सशक्त माध्यम है। यह अभिनव प्रयास नई शिक्षा नीति (NEP) और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN)उद्देश्यों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।इस बाल काव्य संग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसमें शामिल तकनीकी नवाचार है। पुस्तक में प्रत्येक कविता के साथ एक क्यूआर (QR) कोड जोड़ा गया है। इस पहल की सराहना करते हुए वन मंत्री ने कहा कि इससे बच्चे केवल कविताओं को पढ़ेंगे ही नहीं, बल्कि उन्हें सुनकर भी सीख सकेंगे। यह साहित्य और तकनीक का एक बेहतरीन समन्वय है जो शिक्षा को अधिक रोचक, सरल और समावेशी बनाएगा। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि यह अनूठी पहल दिव्यांग बच्चों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जिससे वे भी समान रूप से सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे।मंत्री श्री कश्यप ने पुस्तक के संपादक श्री वीरेंद्र कुमार साहू, सभी लेखकों, शिक्षकों एवं सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि जब शिक्षा, साहित्य और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तब राष्ट्र निर्माण की दिशा और अधिक मजबूत होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि श्मोर अंगना के शोरश् छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बाल साहित्य के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनेगी।इस विमोचन एवं सम्मान समारोह में स्थानीय विधायक एवं पद्मश्री अनुज शर्मा, श्री अमित चिमलानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में साहित्यकार, रचनाकार और शिक्षक गण उपस्थित रहे।
- 0- पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभवरायपुर। डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय "इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर" का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके।कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी।मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं।यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है।डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी। इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।
- 0- प्राकृतिक वादियां, झरने और शांत वातावरण पर्यटकों को कर रहे आकर्षितरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जशपुर जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और विविध पर्यटन स्थलों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है।हरी-भरी पहाड़ियां, घने साल के जंगल, कल-कल बहते झरने, स्वच्छ नदी-नाले और शांत वातावरण जशपुर को प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनाते हैं। महानगरों की व्यस्त और भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून के कुछ पल बिताने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।जशपुर में प्रकृति, रोमांच, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिलता है। जिले के विभिन्न विकासखंडों में स्थित पर्यटन स्थल हर वर्ष हजारों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।जशपुर मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित रानीदाह जलप्रपात हरी-भरी पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच स्थित है। वर्षा ऋतु में इसकी प्राकृतिक छटा और भी मनमोहक हो जाती है। यह पिकनिक एवं प्रकृति प्रेमियों के लिए पसंदीदा स्थल है।बगीचा विकासखंड में स्थित कैलाश गुफा घने जंगलों के बीच प्राकृतिक रूप से निर्मित अद्भुत गुफा है। यहां भगवान शिव का मंदिर तथा संत गहिरा गुरु का आश्रम स्थित है। यह स्थान आध्यात्मिक शांति एवं प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम संगम प्रस्तुत करता है।बगीचा विकासखंड का राजपुरी जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यहां पहुंचकर पर्यटक प्रकृति के बीच अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त करते हैं।कुनकुरी विकासखंड का मयाली नेचर कैम्प एडवेंचर और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां बोटिंग सहित प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया जा सकता है।कुनकुरी क्षेत्र में स्थित मधेश्वर पहाड़ प्राकृतिक रूप से शिवलिंग के आकार का विशाल पर्वत है। इसे विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है। यह स्थल धार्मिक आस्था और प्राकृतिक आश्चर्य दोनों का अद्भुत उदाहरण है।फरसाबहार विकासखंड में ईब नदी के तट पर स्थित कोतेबिरा अपनी विशाल प्राकृतिक चट्टानों, शांत वातावरण और मनोहारी पहाड़ी श्रृंखलाओं के लिए प्रसिद्ध है।बगीचा विकासखंड स्थित खुडिया रानी गुफा ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व का महत्वपूर्ण स्थल है, जहां प्रकृति और इतिहास का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।जशपुर सड़क मार्ग से प्रदेश के प्रमुख शहरों से सुगमता से जुड़ा हुआ है। निकटतम रेलवे स्टेशन रांची (झारखंड) और झारसुगुड़ा (ओडिशा) हैं। रांची स्थित बिरसा मुंडा हवाई अड्डे तथा झारसुगुड़ा हवाई अड्डे तक हवाई यात्रा कर पर्यटक लगभग तीन घंटे की सड़क यात्रा के बाद जशपुर पहुंच सकते हैं। रायगढ़, सरगुजा और बिलासपुर से भी सड़क मार्ग द्वारा जशपुर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।जिले में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांच होमस्टे स्थापित किए गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों को होमस्टे संचालन, आतिथ्य प्रबंधन एवं पर्यटक सेवाओं का प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है, जिससे स्थानीय लोगों की आय में वृद्धि के साथ रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।जिला प्रशासन ने केरे गांव को एक आकर्षक एवं भरोसेमंद ग्रामीण पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। इससे स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन शैली से पर्यटकों को परिचित होने का अवसर मिल रहा है।प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक आस्था, रोमांच और आदिवासी संस्कृति का अद्भुत संगम समेटे जशपुर आज छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। यहां आने वाला प्रत्येक पर्यटक प्रकृति के बीच सुकून, रोमांच और अविस्मरणीय अनुभव लेकर लौटता है।
- धमतरी। जिले में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग ने ग्राम पीपरछेड़ी (ग), थाना अर्जुनी क्षेत्र में 52 पाव अवैध देशी प्लेन शराब जब्त की है। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। न्यायालय में पेशी के बाद आरोपी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गठित टीम ने गोपनीय सूचना के आधार पर ग्राम पीपरछेड़ी निवासी सुमित कुमार भारती के घर दबिश दी। तलाशी के दौरान वहां से 52 पाव अवैध देशी मदिरा प्लेन बरामद की गई। आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धारा के तहत प्रकरण दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की गई। विभाग के अनुसार जिले में अवैध मदिरा के निर्माण, परिवहन और विक्रय पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। आबकारी विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि अवैध शराब के निर्माण, परिवहन या बिक्री संबंधी किसी भी गतिविधि की जानकारी तत्काल विभाग को दें, ताकि दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जा सके।
- 0- किसान भईयों को कम लागत में होगी अधिक पैदावारी0- विशेष लेख- तेजबहादुर सिंह भुवाल, सहा. जनसंपर्क अधिकारीरायपुर। छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है। यहां की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है और किसानों की समृद्धि राज्य के विकास से सीधे जुड़ी हुई है। बदलते समय के साथ खेती में नई तकनीकों का उपयोग बढ़ रहा है, जिनमें नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभरा है। कम लागत, अधिक प्रभाव और पर्यावरण संरक्षण जैसे गुणों के कारण नैनो उर्वरक आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा हैं। नैनो उर्वरक अत्यंत सूक्ष्म कणों से निर्मित होते हैं, जिन्हें पौधे तेजी से और अधिक मात्रा में अवशोषित कर लेते हैं। इसके कारण पौधों को आवश्यक पोषक तत्व सही समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और फसलों का विकास बेहतर तरीके से होता है। पारंपरिक उर्वरकों की तुलना में इनकी मात्रा कम लगती है, जिससे किसानों का खर्च घटता है और उत्पादन में वृद्धि होती है।छत्तीसगढ़ में धान, मक्का, चना, अरहर तथा सब्जी फसलों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का उपयोग किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। प्रदेश में कई किसानों ने अनुभव किया है कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से फसल की पैदावार बेहतर होती है, पौधे अधिक हरे-भरे रहते हैं और उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होता है।नैनो उर्वरकों का एक बड़ा लाभ यह भी है कि इनके उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव कम पड़ता है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जहां भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है, वहीं नैनो उर्वरक संतुलित पोषण प्रदान कर मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता करते हैं। साथ ही जल स्रोतों में रासायनिक तत्वों के बहाव को भी कम करते हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।परिवहन और भंडारण की दृष्टि से भी नैनो उर्वरक काफी सुविधाजनक हैं। पारंपरिक उर्वरकों की भारी बोरियों की जगह छोटी बोतलों में उपलब्ध नैनो उर्वरक किसानों के लिए आसानी से ले जाने और उपयोग करने योग्य होते हैं। इससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है।छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा देकर खेती को अधिक उत्पादक, किफायती और टिकाऊ बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और नवाचार आधारित खेती ही भविष्य की कृषि का आधार है। नैनो उर्वरकों का उपयोग न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को भी बढ़ावा देगा।छत्तीसगढ़ सरकार तथा कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही हैं। इसी क्रम में माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी ने भी राज्य के किसानों से अपील की है कि वे वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और नवीन तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाएं। उन्होंने किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के प्रति जागरूक होने तथा कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार इनका प्रयोग करने का आग्रह किया है, ताकि उत्पादन बढ़े, लागत घटे और किसानों की आय में वृद्धि हो सके।वर्तमान में कृषि क्षेत्र में बढ़ती लागत और संसाधनों की सीमित उपलब्धता के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आए हैं। यह तकनीक कम खर्च में बेहतर उत्पादन, स्वस्थ मिट्टी और सुरक्षित पर्यावरण का मार्ग प्रशस्त करती है। यदि छत्तीसगढ़ के किसान वैज्ञानिक सलाह और संतुलित उपयोग के साथ नैनो उर्वरकों को अपनाते हैं, तो आने वाले समय में यह राज्य की कृषि उन्नति और किसानों की आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बन सकता है। निस्संदेह, नैनो उर्वरक छत्तीसगढ़ के किसान भाइयों के लिए आधुनिक खेती का नया वरदान साबित हो सकता है।
- 0- घर बैठे मिला स्थायी जाति प्रमाण पत्र, समय और धन की हुई बचत; डिजिटल सेवाओं से रोजगार की राह हुई आसान, ग्रामीणों में बढ़ा शासन पर विश्वासरायगढ़। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल सेवा वितरण को नई दिशा मिल रही है। शासन की जनहितैषी सोच और तकनीक आधारित प्रशासनिक सुधारों का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा सेवा सेतु पोर्टल आज प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए भरोसेमंद माध्यम बन चुका है। इस पोर्टल के जरिए शासकीय सेवाएं अब घर बैठे सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध हो रही हैं, जिससे आमजन का समय और धन दोनों की बचत हो रही है तथा शासन के प्रति विश्वास भी लगातार मजबूत हो रहा है।रायगढ़ जिले की तहसील पुसौर के ग्राम भाठनपाली निवासी श्री अजय कुमार प्रधान की सफलता की कहानी मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की डिजिटल सुशासन की सोच को साकार करती है। लंबे समय से स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए वे सरकारी कार्यालयों के लगातार चक्कर लगा रहे थे। बार-बार तहसील कार्यालय जाने से समय और आर्थिक संसाधनों की हानि हो रही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आवश्यक प्रमाण पत्र समय पर प्राप्त नहीं हो पा रहा था। इसके कारण वे कई सरकारी नौकरियों में आवेदन करने से भी वंचित रह जाते थे।इसी दौरान उन्हें सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिली। उन्होंने आवश्यक दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन आवेदन किया। पूरी प्रक्रिया बेहद सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और उन्हें स्थायी जाति प्रमाण पत्र प्राप्त हो गया। इस प्रमाण पत्र ने न केवल उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान किया, बल्कि रोजगार के नए अवसरों के द्वार भी खोल दिए।प्रमाण पत्र मिलने के बाद श्री अजय कुमार प्रधान ने रोजगार सहायक के पद के लिए आवेदन किया। अब वे स्वयं सेवा सेतु पोर्टल का लाभ लेने के साथ-साथ अपने गांव के अन्य लोगों को भी जाति, आय, निवास सहित विभिन्न शासकीय प्रमाण पत्रों और सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा सेतु पोर्टल ने सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर समाप्त कर दिए हैं। अब घर बैठे आवेदन करना, समय पर सेवाएं प्राप्त करना और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता आम नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार डिजिटल तकनीक के माध्यम से सुशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। सेवा सेतु पोर्टल इसी सोच का सशक्त परिणाम है, जिसने शासकीय सेवाओं को आमजन के द्वार तक पहुंचाकर प्रशासन को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जनोन्मुखी बनाया है। यह पहल न केवल नागरिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध करा रही है, बल्कि शासन और जनता के बीच विश्वास का मजबूत सेतु भी बन रही है।श्री अजय कुमार प्रधान की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सुशासन आधारित डिजिटल पहल ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सेवा सेतु पोर्टल आज केवल एक ऑनलाइन मंच नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों नागरिकों के लिए सुविधा, विश्वास और सशक्तिकरण का माध्यम बन चुका है।
- 0- पिछले साल जितनी मात्रा इस बार भी मिलेगी\रायपुर। खरीफ सीजन में किसानों को यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने उर्वरक वितरण व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार अब पात्र किसानों को खरीफ 2025 में मिली यूरिया की मात्रा के बराबर ही खरीफ 2026 में भी यूरिया उपलब्ध कराया जाएगा। इससे किसानों को समय पर खाद मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।प्रदेश में यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता को देखते हुए पहले लागू कुछ प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को उनकी पात्रता के अनुसार यूरिया का वितरण किया जाएगा। यदि संबंधित सहकारी समिति में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है तो किसानों को एकमुश्त यूरिया दिया जाएगा। वहीं, स्टॉक सीमित होने की स्थिति में उपलब्ध मात्रा पहले वितरित की जाएगी और शेष यूरिया बाद में स्टॉक पहुंचते ही संबंधित किसान को उपलब्ध कराया जाएगा।शासन ने स्पष्ट किया है कि डीएपी उर्वरक के वितरण की पूर्व व्यवस्था यथावत लागू रहेगी, जबकि संशोधित निर्देश केवल यूरिया वितरण के लिए प्रभावी होंगे। इसका उद्देश्य उर्वरकों का संतुलित और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों, कृषि विभाग के अधिकारियों तथा सहकारी संस्थाओं को निर्देश दिए हैं कि संशोधित व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करें। सरकार का मानना है कि समय पर और सुचारु रूप से यूरिया उपलब्ध होने से खरीफ फसलों की बुवाई और पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति होगी तथा किसानों को खेती के दौरान किसी प्रकार की उर्वरक संकट की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।







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