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- दुर्ग. मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति तथा जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना (पूर्व में जवाहर उत्कर्ष योजना) अंतर्गत अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के ग्रामीण प्रतिभावान विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना, नयी सोच के साथ बेहतर कॅरियर चयन का अवसर प्रदान करते हुए प्रतिस्पर्धी बनाना तथा बहुमुखी व्यक्तित्व विकास के लिए अवसर प्रदान करना है। इस योजना अंतर्गत विद्यार्थी को कक्षा 6वीं से 12वीं तक छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित उत्कृष्ट आवासीय विद्यालय में अध्ययन की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।चयनित उत्कृष्ट विद्यालय को विभाग द्वारा निर्धारित मान्य शुल्क की प्रतिपूर्ति किया जाएगा। समस्त प्रस्ताव रूचि की अभिव्यक्ति के प्रारूप में कलेक्ट्रेट जिला दुर्ग, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग के कार्यालय (कमरा नं. 25) में जमा करना होगा। सहायक आयुक्त अदिवासी विकास दुर्ग से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रस्ताव को जिला कार्यालय में जमा करने की अंतिम तिथि-23 अप्रैल 2026 अपरान्ह 5.00 बजे तक योजना अंतर्गत संस्थाओं के लिए मापदण्ड एवं विस्तृत विवरण विभाग की वेबसाईट www.tribal.cg.gov.in से अवलोकन कर प्राप्त कर सकते है।
- दुर्ग. आईआईटी भिलाई के रसायन विज्ञान विभाग के एक शोध समूह, जिसमें भानेंद्र साहू, सुब्रत दोलुई, स्वरूप माईती, देबाशीष दास, के. सी. गुरजाला और डॉ. संजीब बैनर्जी शामिल हैं, के प्रयासों को HPCL NGIC (Next Generation Ideation Contest) 2025 में “Commendable Idea Award” से सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम 30 मार्च 2026 को बेंगलुरु में आयोजित किया गया था, जिसका आयोजन HPCL Green R&D Center द्वारा किया गया।HPCL NGIC, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का एक प्रमुख नवाचार मंच है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा, पर्यावरण और सततता से जुड़ी महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान हेतु उन्नत विचारों की पहचान और प्रोत्साहन करना है। यह मंच देशभर के शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों को एक साथ लाकर वैज्ञानिक विचारों को वास्तविक और प्रभावी समाधानों में बदलने के लिए एक प्रतिस्पर्धात्मक और गतिशील वातावरण प्रदान करता है।यह पुरस्कार “Waste-to-Wealth: Oil Spill Remediation Using Porous Polysulfide Adsorbents” शीर्षक वाले शोध कार्य के लिए प्रदान किया गया, जिसे “सस्टेनेबिलिटी और सर्कुलर इकोनॉमी” थीम के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया था। यह शोध कार्य उक्त टीम द्वारा किया गया, जिसमें स्वरूप माईती ने कार्यक्रम में समूह का प्रतिनिधित्व करते हुए कार्य प्रस्तुत किया और टीम की ओर से पुरस्कार प्राप्त किया।यह शोध कार्य अपशिष्ट संसाधनों से उन्नत पॉलीमेरिक सामग्रियों के विकास पर केंद्रित है, जो तेल रिसाव (oil spill) के प्रभावी निवारण में सहायक हैं, तथा पर्यावरणीय सततता और परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं। इस शोध से संबंधित दो वैज्ञानिक प्रकाशन हो चुके हैं, और इस तकनीक को एक भारतीय पेटेंट भी प्राप्त हुआ है।HPCL NGIC 2025 में मिली यह मान्यता इस शोध की वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार क्षमता और वास्तविक जीवन में इसके प्रभावी अनुप्रयोग को दर्शाती है, जो महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में एक सशक्त कदम है।--
- दुर्ग. कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने आपदा पीड़ित 03 परिजनों को 04-04 लाख रूपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम चिखली जिला दुर्ग निवासी मृतक हीरा सिंह यादव की 31 जुलाई 2023 को तालाब के पास जहरीले सांप के काटने से ईलाज के दौरान शासकीय अस्पताल दुर्ग में मृत्यु हुई थी। इसी प्रकार चरोदा भिलाई 3 निवासी मृतिका हिमेश्वरी महिपाल की 23 जुलाई 2019 को सिगड़ी से खाना पकाते समय कपड़े में आग लगने से उपचार के दौरान 25 जुलाई 2019 को मृत्यु हुई थी। ग्राम तेलीगुंडरा तहसील पाटन जिला दुर्ग निवासी मृतक देव्यांशा साहू की 09 मई 2025 को खेलते-खेलते घर के पीछे तालाब में डुबने से मृत्यु हुई थी।कलेक्टर द्वारा शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन के प्रावधानों के अनुरूप स्व. हीरा सिंह यादव की पत्नी श्रीमती पूजा यादव, स्व. देव्यांशा साहू की पिता प्रेमशंकर साहू एवं माता श्रीमती युगेश्वरी साहू और स्व. हिमेश्वरी महिपाल की पति रवि कुमार महिपाल को क्रमशः 04-04 लाख रूपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि की स्वीकृति दी गई है।
- 0- महाराष्ट्र मंडल में रामकथा के दौरान हुआ एक पात्रीय नाटक में शबरी को जीवंत किया चंचल नेरायपुर। महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में जब एक पात्रीय नाटक शबरी का मंचन हुआ, तो शबरी की वेदना देख दर्शकदीर्घा में बैठे लोगों की आंखें नम हो गईं। वहीं जब श्रीराम ने शबरी को दर्शन दिए, तो शबरी के साथ दर्शक भी तृप्त नजर आए। 15 मिनट के एकांकी नाटक को महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि के कलाकारों ने राम कथा के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में प्रस्तुत किया।आचार्य रंजन मोड़क के निर्देशन में चंचल ध्रुव ने एकमात्रीय नाटक में शबरी की भूमिका इतनी संजीदगी से निभाई कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं। चेहरे पर झुर्रियां, झुकी हुई कमर और चलने के लिए लाठी का सहारा, शबरी के उम्र के पड़ाव को चंचल ने मंच पर सटीकता से पेश किया। राम भजन करते हुए जब शबरी ने ‘राम आएंगे, तो अंगना सजाऊंगी’ का गायन किया, तो दर्शक भी खुद को रोक नहीं पाए और राम के भजन में डूब गए।आचार्य मोड़क के अनुसार वंदना ठाकुर की कविता का आलेख लोकेश साहू ने तैयार किया। कार्यक्रम का संचालन चैतन्य मोड़क, मंच सज्जा अजय पोतदार, रूप सज्जा अक्षदा मातुरकर, ध्वनि व्यवस्था संतोष नियाल, नेपथ्य में प्रकाश गुरव की भूमिका रही। राम की संक्षिप्त भूमिका में भूपेंद्र साहू भी ध्यान खींचते हैं।
- रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में 18 से 27 अप्रैल तक समर कैंप लगाया जा रहा है। इसमें बच्चों को डांस, जुंबा, म्यूजिक, गीत- संगीत, ड्राइंग, क्राफ्ट, खेलकूद, योग, मेडिटेशन के साथ फायरलेस कुकिंग सीखने का मौका मिलेगा। प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि स्कूल में विगत वर्षों की तरह वार्षिक परीक्षा के बाद बच्चों के चौमुखी विकास व विभिन्न तरीकों से उनकी रुचि को पल्लवित करने के लिए समर कैंप लगाया जाता रहा है। समर कैंप समय सुबह आठ से 10 बजे तक होगा। अभिभावक और बच्चे अपनी पसंद की गतिविधियों में रजिस्ट्रेशन कराकर प्रतिदिन कैंप के दो घंटे का समुचित उपयोग कर सकते हैं। समर कैंप संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के विद्यार्थियों के अलावा भी बाहर के बच्चों के लिए भी होगा, जिसमें वे शामिल होकर अपनी प्रतिभा को और निखार सकेंगे। समर कैंप से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए संत ज्ञानेश्वर विद्यालय या महाराष्ट्र मंडल में किया जा सकता है।
- 0- हिंदी रंगमंच दिवस पर आयोजित नाटक टीस में दिखी रंगमंचीय कलाकारों के पर्दे के पीछे की पीड़ा0- महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि की प्रस्तुति को संत ज्ञानेश्वर सभागृह में देखने के लिए उमड़ी प्रेमी दर्शनरायपुर। रंगमंच पर खड़ा कलाकार जहां दुनिया का मनोरंजन करता हैं, वहीं उसके नाट्य अभिनय के लिए पर्दे के पीछे की कहानी कुछ और ही होती है। इन कलाकारों के दैनिक जीवन के संघर्ष को भावनात्मक रूप से मंच पर ‘टीस’ के माध्यम से प्रस्तुत किया। निर्देशक लोकेश साहू ने 'टीस' के माध्यम से दर्शाया कि जिंदगी कोई नाटक नहीं होता कि वहां हर बात पहले से हिसाब- किताब करके बोली जाए। हिंदी रंगमंच के दिवस पर महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि के कलाकारों ने स्व. डा. कुंज बिहारी शर्मा की जन्मतिथि पर पुण्य स्मरण करते हुए संत ज्ञानेश्वर सभागृह में हिंदी नाटक टीस का मंचन किया गया।नाटक के मुख्य पात्र रजत (आकाश वरठी) एक उत्कृष्ट रंगमंच अभिनेता हैं, जो अपनी कला की दुनिया में खोए रहते हैं, किंतु अपने ही घर में निरंतर संघर्ष करते दिखाई देते हैं। उनकी पत्नी मीना (ट्विंकल परमार) के संवादों में घर की आर्थिक स्थिति और जीवन की कठोर सच्चाइयां सामने आती हैं। बाबूजी (प्रांजल सिंह राजपूत) का संवेदनशील दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि कलाकारों के भीतर चल रहे भावनात्मक संघर्ष को समझना कितना आवश्यक है। वहीं बलवंत (प्रभात साहू) के संवाद समाज की उस सोच को उजागर करते हैं, जहां घर की प्रतिभा को अक्सर पहचान नहीं मिलती।नाटक में अत्यंत भावुक प्रसंग लेखक की पत्नी रंजना ध्रुव ने प्रस्तुत किया। इसमें यह बताया गया कि इस नाटक की प्रेरणा उनके दिवंगत पुत्र के अधूरे सपनों से जुड़ी है। इस पृष्ठभूमि ने नाटक को और अधिक संवेदनशील और प्रभावशाली बना दिया। चंचल ध्रुव ने कलाकारों का कुशल मार्गदर्शन करते हुए एक निर्देशक के संघर्ष को बखूबी प्रस्तुत किया। नाटक के संवाद और प्रस्तुति ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया।कविताओं की प्रस्तुति ने किया प्रभावितनाटक के मंचन से पहले कविता मंचन 'शबरी', 'किवाड़', 'जिंदगी' में डॉ. विकास अग्रवाल, भूपेंद्र साहू और अक्षदा मातुरकर के उत्कृष्ट अभिनय ने समां बांध दिया। इसकी परिकल्पना आचार्य रंजन मोड़क ने की। मंच संचालन चैतन्य मोड़क ने किया। प्रकाश व्यवस्था नीरज सिंह ठाकुर, संगीत नितीश यादव, रूप सज्जा सुषमा गायकवाड़, वेशभूषा सुमन त्यागी और मंच सज्जा अजय पोद्दार, प्रवीण क्षीरसागर ने की। मंच व्यवस्था में जयप्रकाश साहू, सुकृत गनोदवाले, रिया परमार, राजेश गनोदवाले, सुमित मोड़क और क्षितिज महोबिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
- 0- विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में सौंपी उपाधिरायपुर। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में महाराष्ट्र मंडल की आजीवन सभासद निधि लाड आंचलिया को एग्जीक्यूटिव एमबीए की उपाधि दी गई। निधि को यह उपाधि विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सौंपी है। उनकी इस सफलता पर मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने अपनी कार्यकारिणी के साथ उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। साथ ही उन्हें महाराष्ट्र मंडल रायपुर का गौरव बताया है।बतात चलें कि निधि ने आईआईएम रायपुर से एग्जीक्यूटिव पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम इन मैनेजमेंट के एकेडेमिक वर्ष 2023-25 की परीक्षा उत्तीर्ण की। वे महाराष्ट्र मंडल रायपुर के आजीवन सदस्य विजय कुमार लाड व पद्मजा लाड की पुत्री, कुमुद लाड की भतीजी और भरत कुमार आंचलिया की पत्नी हैं। वे पूर्व में एचडीएफसी बैंक रायपुर में क्रेडिट मैनेजर के पोस्ट पर पदस्थ थीं। अभी वे इसी बैंक की बंगलौर शाखा में पदस्थ हैं।
- 0- 17 मई को होने वाली वार्षिक सामान्य सभा में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के बाद विभिन्न कार्यक्षेत्रों में होगा मंडल का विस्ताररायपुर। महाराष्ट्र मंडल में अब दो उपाध्यक्ष होंगे और इनमें एक पद महिला सभासद के लिए आरक्षित होगा। इस आशय का निर्णय मंडल में रविवार को आहूत कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। इसके अलावा और भी कई महत्वपूर्ण योजनाओं और प्रकल्पों के विस्तार पर चर्चा कर उन्हें अंतिम रूप दिया गया। पिछले दो वर्षों का कार्यकाल पूरा कर चुके मनोनीत कार्यकारिणी सदस्यों को विदाई भी दी गई।मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि 17 मई को होनी वाली वार्षिक सामान्य सभा में संविधान में संशोधनों से संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएंगे। इन प्रस्तावों के सभा में पारित होने के बाद 2026–28 के कार्यकाल से उन्हें प्रभावी भी किया जाएगा। खंगन के मुताबिक एक पांच सदस्यीय सलाहकार समिति का गठन किया जाएगा। इसमें पूर्व अध्यक्ष, सचिव व ट्रस्ट के पूर्व अध्यक्ष और सचिव शामिल होंगे। उनकी विशिष्ट भूमिका, कर्तव्य और अधिकार को सामान्य सभा की बैठक में परिभाषित किया जाएगा और उस पर सामान्य सभासदों से चर्चा की जाएगी।उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि बैठक में मंडल की विस्तार योजनाओं व प्रकल्पों के विस्तार पर काफी चर्चा की गई। इनमें वृद्धाश्रम, गुरुकुल, गौशाला (गौ-आश्रय), महतारी सदन, वरिष्ठ नागरिक सदन, योग केंद्र और संत ज्ञानेश्वर स्कूल की शाखाएं खोलने के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। गीता ने कहा कि इन योजनाओं को वर्ष 2028 तक साकार किया जाना प्रस्तावित है।अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने इस मौके पर वामन राव लाखे, शहीद आकाश गिरपुंजे और वीर विनायक दामोदर सावरकर की प्रतिमाएं स्थापित करने के संबंध में महाराष्ट्र मंडल के सरकार को प्रस्तुत प्रस्तावों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंडल का यह प्रस्ताव 10 अप्रैल को होने वाली नगर निगम की सामान्य सभा की बैठक के दौरान पारित किया जाना निर्धारित है। इससे पहले यह प्रस्ताव मेयर इन काउंसिल में पारित चुका है। सामान्य सभा में प्रस्ताव के पारित होने के बाद वीर सावरकर की प्रतिमा आयुर्वेदिक कालेज गेट के पास और शहीद गिरपुंजे व वामन राव लाखे की प्रतिमा को लाखे नगर चौक पर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।काले ने कहा कि बैठक में पिछले महीनों में हुए विभिन्न आयोजनों, तीज-त्योहारों के कार्यक्रमों की समीक्षा की गई और सफल आयोजनों के लिए पूरी कार्यकारिणी की प्रशंसा कर बधाई दी गई। इस बैठक में विशाखा तोपखानेवाले, प्रसन्न निमोणकर, दीपक किरवईवाले, आस्था काले, रेणुका पुराणिक, निरंजन पंडित, सुकृत गनोदवाले को कार्यकाल समाप्त होने पर भावभीनी विदाई दी गई।
- 0- महाराष्ट्र मंडल के 17वें केंद्र की महिला सभासदों में विभिन्न आयोजनों को लेकर उत्साहरायपुर। महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों में लगातार कोई न कोई सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। इसी कड़ी में न्यू राजेंद्र नगर- कमल विहार- लालपुर की महिलाओं ने चैत्र गौरी हल्दी कुंकू का आयोजन किया।मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि यह मंडल का नया केंद्र है। केंद्र बनने के बाद से लगातार यहां की महिला सभासद सामाजिक गतिविधियों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। न्यू राजेंद्र नगर- कमल विहार, लालपुर केंद्र द्वारा बीते शनिवार को सदस्य मंगला मिश्रेकर के घर चैत्र गौरी के हल्दी कुंकू का कार्यक्रम किया। इस अवसर पर सभी ने श्रीराम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया।इस अवसर पर ज्योति बनकर, नीलिमा लकपाले, स्मिता कायंदे, मंगला मिश्रेकर, सुखदा लाखे, अंजलि चरपे, सरिता लुलु, अलका बापट और मैथिली ठोके सहित अनेक महिला सदस्य शामिल रहीं।
- 0- स्थापना दिवस समारोह में मुख्य राष्ट्रीय कार्यवाह अमीन व छत्तीसगढ़ कार्यवाह सुबोध टोले सम्मानितरायपुर। बृहन्महाराष्ट्र मंडल एक ऐसी देशव्यापी संस्था है, जिसमें स्थानीय प्रतिभाओं को बड़ा एक्सपोजर मिलता है। यहां का सदस्य बनने के बाद आप अपनी जान पहचान लगभग हर प्रदेश से आने वाले महाराष्ट्र मंडल के प्रतिनिधियों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर कर सकते हैं। ऐसे में यदि आप देशभर में कहीं भी, कभी भी किसी मुसीबत में फंस गए हैं, तो कम से कम आपके पास तत्काल सहायता पहुंचने के लिए आपका कोई अपना परिचित मिल जाता है। बृहन्महाराष्ट्र मंडल का सदस्य बनने से होने वाले लाभ पर चर्चा करते हुए मुख्य राष्ट्रीय कार्यवाह शेखर राव साहेब अमीन ने इस आशय की बात कही।बृहन्महाराष्ट्र मंडल के शताब्दी स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित विशेष समारोह में पूर्व छत्तीसगढ़ कार्यवाह अरविंद जोशी को विशेष अभिनंदन पत्र सौंपा गया। साथी नवनिर्वाचित मुख्य राष्ट्रीय कार्यवाह शेखर राव साहेब अमीन और छत्तीसगढ़ कार्यवाह सुबोध टोले को सूत माला, शाल श्रीफल और स्मृति चिन्ह से वरिष्ठ रंगसाधक अनिल, अपर्णा कालेले, मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने सम्मानित किया गया।मुख्य राष्ट्रीय कार्यवाह अमीन ने कहा कि हर वर्ष अलग- अलग राज्यों के शहरों में आने वाले तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशनों के माध्यम से आपको पूरे देश भ्रमण का मौका मिलता रहता है। जब आपके बच्चों को बेंगलुरु, हैदराबाद, जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ जैसे शहरों में पढ़ाई या रोजगार के सिलसिले में जाना पड़ता है, जब यही जान पहचान और भी उपयोगी साबित होती है। अमीन ने सीख दी कि जब भी हम किसी संस्था से जुड़ते हैं तो हमारे विचार संस्था के माध्यम से लोगों की सेवा करने के होने चाहिए, न कि संस्था से फायदा उठाने के।इस अवसर पर सुबोध टोले ने कहा कि उन्हें छत्तीसगढ़ के अलावा झारखंड, ओडिशा, बिहार और पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। अपने तीन वर्षीय कार्यकाल में उनकी पहली प्राथमिकता व्यापक पैमाने पर सदस्यता अभियान चलाकर बृहन्महाराष्ट्र मंडल को और भी बृहद करने की है। उन्होंने कहा कि गत माह देवास में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में महाराष्ट्र मंडल की विशेष से प्रशंसा की गई कि वहां बड़ी संख्या में युवाओं को मंडल से जोड़ा गया है। बाकी मंडलों में भी ऐसे ही प्रयास होने चाहिए।उल्लेखनीय कार्यों की वजह से सम्मानित किए गए पूर्व छत्तीसगढ़ कार्यवाह अरविंद जनार्दन जोशी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बहुत सी मराठी संगठन व संस्थाएं बृहन्महाराष्ट्र मंडल से कट गईं हैं। उन्हें फिर से जोड़ना बृहन्महाराष्ट्र मंडल के पदाधिकारियों की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। जोशी ने इस बात पर भी जोर दिया कि अब संस्था की अंदरुनी राजनीति के वजह से दूर हो चुके सदस्यों को मनाने और उन्हें सक्रिय करने की जिम्मेदारी भी हमें ही निभानी चाहिए।अध्यक्षीय संबोधन में मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि शताब्दी वर्ष मना रहा बृहन्महाराष्ट्र मंडल और 90 वर्ष पूरे कर चुका महाराष्ट्र मंडल दो भाइयों की तरह बड़े और विकसित हुए हैं। बृहन्महाराष्ट्र मंडल ने धमतरी सहित अनेक महाराष्ट्र मंडलों को स्थापित करने व आगे बढ़ाने में आर्थिक मदद देकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी तरह नियमों से परे महाराष्ट्र मंडल को बृहन्महाराष्ट्र मंडल ने नई दिल्ली व मुंबई में आयोजित भव्य समारोह में सर्वश्रेष्ठ महाराष्ट्र मंडल का पुरस्कार भी दिया। मराठी भाषा और संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण की दिशा में मंडल के कार्यों को बृहन्महाराष्ट्र मंडल का सहयोग हमेशा मिला है। उन्हें विश्वास है कि आगे भी और अधिक मिलेगा।इस मौके पर सुबोध टोले और शेखर राव साहेब अमीन का सपत्नीक सम्मान वरिष्ठ रंगसाधक अनिल व अपर्णा कालेले व मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने किया। कार्यक्रम का संचालन टोले ने व मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने आभार प्रदर्शन किया।--
- 0- पुणे के सुप्रसिद्ध कथावाचक- कीर्तनकार से कीर्तन सुनकर मंत्रमग्ध हुए भक्तगणरायपुर। पुणे के कथावाचक- कीर्तनकार रामनाथ रामचंद्र अय्यर ने हनुमान जयंती के अवसर पर चौबे कालोनी स्थित राम मंदिर में नारदीय कीर्तन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन दंडवते, आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले, अजय देशपांडे, सृष्टि दंडवते, अतुल गद्रे, निखिल मुकादम, श्यामल जोशी, अवंती अग्निहोत्री, अपर्णा कालेले, परितोष डोनगांवकर, अंजलि मुकादम, सौ. बल्की, सौ. आप्टे, कल्पना बड़वाइक, अरविंद देशपांडे, आकांक्षा गद्रे, अर्चना मुकादम, अभिषेक बक्षी, राजश्री वैद्य सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। इस अवसर पर भक्तजनों ने नारदीय कीर्तन का लाभ लिया।कथावाचक अय्यर ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित हनुमानजी बल, बुद्धि, विद्या और निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च प्रतीक हैं, जो रामकाज के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। वे न केवल परम भक्त हैं, बल्कि वेदों के ज्ञाता, चतुर कूटनीतिज्ञ और संकटमोचक भी हैं, जिन्होंने सीता माता की खोज और लक्ष्मण के प्राण बचाकर महा शक्तिशाली की भूमिका निभाई। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हनुमान जी का चरित्र प्रबंधन, अटूट समर्पण और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य व साहस के साथ समाधान खोजने की प्रेरणा देता है, जो वर्तमान युग में बेहद जरूरी है।आचार्य रामनाथ रामचंद्र ने कहा कि वाल्मिकी रामायण के अनुसार हनुमान जी का जन्म वानर राज केसरी और माता अंजनी के पुत्र के रूप में हुआ था। मान्यता है कि माता अंजनी ने शिव के अंशावतार पुत्र की प्राप्ति के लिए 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें वरदान दिया, जिसके फलस्वरूप पवनदेव के माध्यम से यज्ञ का प्रसाद मिलने पर अंजनी ने हनुमानजी को जन्म दिया। यह तपस्या उन्हें एक श्राप से मुक्ति दिलाने के लिए भी महत्वपूर्ण थी।
- बिलासपुर. आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं जनजाति विद्यार्थी उत्कर्ष योजना के अंतर्गत राज्य में संचालित उत्कृष्ट आवासीय शिक्षण संस्थानों के इम्पैनलमेंट हेतु ‘‘रूचि की अभिव्यक्ति’’ 23 अप्रैल 2026, शाम 5 बजे तक आमंत्रित की गई है। इच्छुक संस्थाओं को निर्धारित प्रपत्र में आवेदन सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास कार्यालय बिलासपुर में जमा करना होगा।योजना के दिशा-निर्देश एवं मापदंड विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.tribal.cg.gov.in पर उपलब्ध हैं। सहायक आयुक्त संजय चंदेल ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के ग्रामीण प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना, उन्हें बेहतर करियर के अवसर उपलब्ध कराना तथा प्रतिस्पर्धी वातावरण में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। योजना के तहत चयनित विद्यार्थियों को कक्षा 6वीं से 12वीं तक राज्य के उत्कृष्ट आवासीय विद्यालयों में निःशुल्क शिक्षा की सुविधा दी जाएगी। साथ ही चयनित संस्थानों को निर्धारित मानदेय के अनुसार शुल्क की प्रतिपूर्ति भी की जाएगी।
- 0- कलेक्टर-एसएसपी की अध्यक्षता में त्रिनेत्र सेवा समिति की बैठक में लिए गए अहम निर्णयबिलासपुर. शहर में अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से त्रिनेत्र सेवा समिति की अहम बैठक इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमाण्ड सेंटर, तारबाहर में आयोजित की गई। बैठक की संयुक्त अध्यक्षता कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह ने की। बैठक में निर्णय लिया गया कि शहर में अधिक से अधिक स्थानों पर जनसहभागिता के माध्यम से सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिससे अपराधों पर त्वरित नियंत्रण और अपराधियों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित की जा सके। साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, सुगम यातायात व्यवस्था और नशे में वाहन चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई को भी प्राथमिकता दी जाएगी।समिति के संरचनात्मक विस्तार के तहत सांसद एवं विधायकों के साथ आयुक्त बिलासपुर संभाग और पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज को पदेन मुख्य संरक्षक बनाया जाएगा। वहीं कलेक्टर, एसएसपी, नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत सीईओ, रेलवे, एसईसीएल, एनटीपीसी, अपोलो अस्पताल और रेडक्रॉस के वरिष्ठ अधिकारियों को पदेन संरक्षक बनाए जाने का निर्णय लिया गया। तकनीकी समिति में साइबर सेल के अधिकारियों के साथ स्मार्ट सिटी के प्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों को शामिल किया गया है।प्रबंध कार्यकारिणी में श्री रामावतार अग्रवाल को अध्यक्ष, श्री नवदीप अरोरा को कार्यकारी अध्यक्ष, श्री सतीश शाह को सचिव, श्री मनीष सखूजा को कोषाध्यक्ष तथा श्री ललित अग्रवाल को सह-कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया। करीब 60 सामाजिक एवं व्यावसायिक संगठनों के प्रतिनिधियों को समिति का सदस्य बनाया गया है। बैठक में समिति का कार्यालय इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमाण्ड सेंटर में ही संचालित करने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों ने शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों की वर्तमान निगरानी प्रणाली की जानकारी भी साझा की, जिसकी उपस्थित सदस्यों ने सराहना की। बैठक में यह सुझाव भी सामने आया कि बड़े उद्योगों के साथ-साथ छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए, जिससे योजना का लाभ शहर के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।इस बैठक में श्री रामावतार अग्रवाल, श्री सौरभ सक्सेना, श्री प्रकाश सोनथालिया, ललित अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, शंकर राव, सुनील सोनथालिया, अमित सुलतानिया, डॉ. नवदीप सिंह अरोरा, आर के केडिया, अशीष अग्रवाल, शरद सक्सेना, बीबी नेताम, दीपक गोयल, राजीव कुमार छुरा, मनीष सखूजा, श्रीमती जयश्री शुक्ला मौजूद रहे। अंत में श्री सुरेन्द्र गुम्बर ने आभार व्यक्त किया।--
- बिलासपुर. जिले में संचालित 4 डीएव्ही मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल देवरीखुर्द, गोढ़ी, वेदपरसदा, गोबरीपाट में केजी 1 में शिक्षा के अधिकार के तहत एवं शासन कोटा की रिक्त सीट पर प्रवेश दिया जा रहा है। आरटीई के तहत प्रवेश के लिए संबंधित नोडल अधिकारी के समक्ष एवं शासन कोटा अंतर्गत प्रवेश हेतु आवेदन पुराना कम्पोजिट बिल्डिंग बिलासपुर में स्थित कार्यालय समग्र शिक्षा, कक्ष क्रमांक 21 में 13 अप्रैल 2026 शाम 5 बजे तक जमा किये जा सकते है।शिक्षा के अधिकार के तहत गरीबी रेखा तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र-छात्रा पात्र होंगे एवं शासन कोटा में गरीबी रेखा, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति, निःशक्तजन, निर्धन वर्ग, परित्यक्ता, मातृ-पितृहीन के छात्र-छात्रा आवेदन के लिए पात्र हैं।
- बिलासपुर. संभागीय अनुज्ञापन समिति (विद्युत) बिलासपुर द्वारा तारमिस्त्री परीक्षा जुलाई माह में आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए बिलासपुर, मुंगेली, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, कोरबा, जांजगीर-चांपा एवं सक्ती जिले के इच्छुक आवेदनकर्ता निःशुल्क फार्म प्राप्त करने एवं परीक्षा से संबंधित जानकारी के लिए यू.डी.एम. हॉस्पिटल बिल्डिंग, होमगार्ड कैम्पस के पास स्थित कार्यालय कार्यपालन अभियंता (विद्युत सुरक्षा) एवं संभागीय विद्युत निरीक्षक के कार्यालय से प्राप्त कर सकते है। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2026 तक है।
- 0- ‘टुगैदर फॉर हेल्थ, स्टैंड विद साइंस’ थीम पर वैज्ञानिक सोच और जनस्वास्थ्य पर जोरबिलासपुर। विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 7 अप्रैल को सिम्स के पी.एस.एम. (कम्युनिटी मेडिसिन) विभाग द्वारा “टुगैदर फॉर हेल्थ, स्टैंड विद साइंस” विषय पर एक प्रभावी सीएमई (कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन) कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, प्रमाण आधारित चिकित्सा तथा जनजागरूकता के महत्व पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. रमणेश मूर्ति, विशिष्ट अतिथि डॉ. लखन सिंह, विभागाध्यक्ष कम्युनिटी मेडिसिन डॉ. हेमलता ठाकुर, निश्चेतना विभागाध्यक्षडॉ. मधुमिता मूर्ति एवं अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा सरस्वती वंदना और दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।डब्ल्यूएचओ की इस वर्ष की थीम “Together for Health: Stand with Science” पर स्नातकोत्तर छात्र डॉ. जी. मनीष राव तथा स्नातक छात्राएं आकृति गुप्ता एवं हेमा नायक ने सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने बताया कि आधुनिक चिकित्सा में विज्ञान आधारित निर्णय, अनुसंधान और जनभागीदारी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाते हैं। कार्यक्रम के दौरान डब्ल्यूएचओ क्विज प्रतियोगिता के विजेताओं को डॉ. रमणेश मूर्ति द्वारा पुरस्कार वितरित कर सम्मानित किया गया।इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि “बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए वैज्ञानिक सोच, शोध और प्रमाण आधारित उपचार पद्धति को अपनाना समय की आवश्यकता है। विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें यह संदेश देता है कि समाज और विज्ञान साथ मिलकर ही स्वस्थ भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।”चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “सामुदायिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के लिए चिकित्सकों, विद्यार्थियों और आमजन के बीच वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार के सीएमई कार्यक्रम चिकित्सा शिक्षा और सेवा गुणवत्ता को नई दिशा देते हैं।” विभागाध्यक्ष कम्युनिटी मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. हेमलता ठाकुर ने कहा कि “डब्ल्यूएचओ की थीम के अनुरूप समाज को स्वास्थ्य संबंधी मिथकों से बाहर निकालकर विज्ञान आधारित जानकारी देना ही आज की सबसे बड़ी जरूरत है। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी इस दिशा में सकारात्मक संकेत है।”कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ जे. पी स्वाइन डॉ शिक्षा जांगड़े डॉ केशव कश्यप डॉ. विवेक शर्मा, डॉ. समीर, डॉ. श्रुति, डॉ. सुचिता, डॉ. सचिन, डॉ. प्रवीण, डॉ. डेविन, डॉ. आशीष, डॉ. सुमित सहित अन्य स्टाफ का विशेष योगदान रहा।
- 0- जिले में चलाए जाएंगे नशा मुक्त जन जागरुकता अभियान0- कलेक्टर की अध्यक्षता में रेडक्रॉस प्रबंध समिति की बैठक संपन्नबिलासपुर. भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी की जिला शाखा बिलासपुर की प्रबंध समिति की बैठक आज कलेक्टर एवं अध्यक्ष संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में स्वास्थ्य, जनजागरूकता और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में पंचायत स्तर पर फर्स्ट एड एवं सीपीआर प्रशिक्षण आयोजित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए चिकित्सकों की नियुक्ति की जाएगी, जो विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को प्रशिक्षण देंगे। साथ ही महाविद्यालयों में भी सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को आपातकालीन स्थिति में सहायता प्रदान करने के लिए प्रशिक्षित किया जा सके।शहर को नशा मुक्त बनाने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने का निर्णय भी लिया गया। इस अभियान के अंतर्गत सामाजिक संस्थाओं और यूथ रेडक्रॉस के सहयोग से नुक्कड़ नाटक एवं वीडियो के माध्यम से जागरूकता फैलाई जाएगी। “चेन सिस्टम” के जरिए प्रत्येक व्यक्ति को दो अन्य लोगों को इस अभियान से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। इस अभियान के संचालन के लिए सुनील सोनथालिया की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है, जिसमें डॉ. राजीव अवस्थी को नोडल अधिकारी बनाया गया है।भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी जिला शाखा बिलासपुर के जिला समन्वयक श्री सौरभ सक्सेना ने बैठक पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। पालन प्रतिवेदन पर चर्चा उपरांत प्रबंध समिति के सदस्यों ने पंचायत स्तर पर फर्स्ट एड ट्रेनिंग एवं सीपीआर ट्रेंनिंग करने का निर्णय लिया। कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कहा कि दो डॉक्टर इसके लिए निर्धारित किए जाएं जो की जाकर प्रशिक्षण देंगे साथ ही महाविद्यालय में भी सीपीआर प्रशिक्षण आयोजित करने का निर्णय समिति के सदस्यों के द्वारा लिया गया। प्रबंध समिति के सदस्यों ने नशा मुक्त बिलासपुर बनाने का निर्णय लिया जिसके अंतर्गत शहर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ जोड़कर यूथ रेड क्रॉस के सदस्यों के साथ जोड़कर नुक्कड़ नाटक वन टाइम वीडियो बनाकर जागरूकता अभियान निरंतर चलाई जाने का निर्णय लिया गया। इसके अंतर्गत नशा मुक्ति हेतु फार्म भरवाना और दो-दो लोगों से फार्म भरवा कर उनसे निवेदन करना कि वह भी दो लोगों का फॉर्म भरे ताकि नशा मुक्ति चैन का निर्माण किया जा सके।इसके लिए श्री सुनील सोनथालिया की अध्यक्षता में समिति का निर्माण किया गया। जो की पूरा कार्यक्रम बनाकर कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करेगी। समिति में डॉ राजीव अवस्थी नोडल अधिकारी श्री सुरेंद्र गुम्बर एड्स एवं डॉ. बीपी सिंह को रखा गया है। साथ ही कलेक्टर श्री अग्रवाल ने निर्देश दिया की वीडियो एवं बिहान कार्यकर्ताओं को इसमें जोड़ा जावे एवं समय-समय पर आयोजित धार्मिक रैलियों में नशा मुक्ति का प्रचार प्रसार किया जावे।सदस्यता अभियान पर श्री प्रमोद शर्मा वॉइस चेयरमैन के प्रस्ताव पर चर्चा उपरांत निर्णय लिया गया कि प्रबंध समिति के सभी 10 सदस्य 31 जुलाई तक कम से कम 1000 आजीवन सदस्य बनाएंगे। साथ ही वार्ड नंबर 37 आंगनवाड़ी केंद्र इंदिरा नगर वार्ड एवं जेल में मुक्तांगन में अध्ययनरत छात्र तथा स्कूल जाने वाले छात्रों के लिए रेडक्रॉस से व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने का निर्णय सर्वसम्मति से सदस्यों के द्वारा लिया गया कलेक्टर महोदय के निर्देश पर पुराना बस स्टैंड चौक में गर्मी के समय एक प्याऊ घर संचालित करने का निर्णय लिया गया।अन्य प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए निर्णय लिया गया कि जन औषधि सिम्स में एक अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति किया जाना है तथा सभी सदस्य एक-एक दुकान में जाएंगे और वहां की समस्याओं से कलेक्टर एवं अध्यक्ष महोदय का अवगत कराएंगे रतनपुर शॉपिंग कांप्लेक्स के संबंध में कलेक्टर महोदय के साथ श्री सुनील संथालिया एवं श्री सुरेंद्र गुम्बर जाकर कार्य योजना को अंतिम रूप देंगे जिसके अनुसार रतनपुर में कार्य किया जाएगा।बैठक में जिला चिकित्सालय को 25 गद्दे सेंट्रल जेल के चिकित्सालय को दे एवं जिला चिकित्सालय एसएनसीयू में फ्लोर मेट लगाने का निर्णय सर्व सम्मति से लिया गया साथ ही सिम्स चिकित्सालय को 10 नग व्हील चेयर प्रदान करने का निर्णय भी समिति के द्वारा सदस्य लिया गया अंत में डॉक्टर श्रीमती शोभा गरेवाल सचिव रेडक्रॉस के आभार प्रदर्शन के साथ बैठक समाप्त हुई आज की इस बैठक में सर्वश्री डॉ बीएल गोयल चेयरमैन, प्रमोद शर्मा वाइस चेयरमैन, सुरेंद्र गुंबर, श्रीकांत सहारे, सुनील सोनथालीया, सैय्यद जफर एएलई, डॉ राजीव अवस्थी,सदस्य प्रबंध समिति खामोश मंडावी सेंट्रल जेल बिलासपुर, डॉ बीपी सिंह सिम्स बिलासपुर, श्रीकांत मोहरे सहायक संचालक उच्च शिक्षा, डॉ एमए जीवानी नोडल अधिकारी, सौरभ सक्सेना जिला समन्वयक, आदित्य पांडेय, लक्ष्मीनारायण मिश्रा, सुशील राजपूत, गीतेश्वरी चन्द्रा, पूजा कैवर्त, उपस्थित थे।सदस्यता अभियान के तहत यह निर्णय लिया गया कि प्रबंध समिति के सभी सदस्य 31 जुलाई तक कम से कम 1000 आजीवन सदस्य बनाएंगे। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्र इंदिरा नगर और सेंट्रल जेल के मुक्तांगन में अध्ययनरत बच्चों के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। गर्मी को देखते हुए पुराना बस स्टैंड चौक में प्याऊ घर संचालित करने का भी निर्णय लिया गया।स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जिला चिकित्सालय को 25 गद्दे, सीआईएमएस अस्पताल को 10 व्हीलचेयर, एसएनसीयू में फ्लोर मैट तथा सेंट्रल जेल चिकित्सालय को आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। बैठक के अंत में सचिव रेडक्रॉस डॉ. श्रीमती शोभा गरेवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया।--
- -मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना बनी ग्रामीणों के लिए वरदानरायपुर /कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जिन गांवों के लोग अपने ही क्षेत्र में सीमित रहने को विवश थे, आज वही ग्रामीण निर्भय होकर शहरों तक आवागमन कर रहे हैं। माओवाद के खात्में और सुरक्षा व्यवस्था के सुदृढ़ होने के साथ-साथ शासन की जनहितकारी योजनाओं ने सुकमा जिले के दूरस्थ अंचलों में विकास की नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है।इसी परिवर्तन का सशक्त उदाहरण मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के रूप में सामने आया है, जिसने वनांचल और अंदरूनी क्षेत्रों के जनजीवन को नई गति प्रदान की है। सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम सहित आसपास के गांवों के लिए अब दोरनापाल तक पहुंचना सहज और सुरक्षित हो गया है।पूर्व में ग्रामीणों को मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए 8 से 10 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था। ग्राम लखापाल के निवासी श्री कूड़ाम जोगा बताते हैं कि बस सेवा प्रारंभ होने से पहले चिंतलनार तक पैदल जाना उनकी मजबूरी थी। कई बार बस छूट जाने के कारण पूरा दिन व्यर्थ चला जाता था और आवश्यक कार्य अधूरे रह जाते थे। अब दोरनापाल-नागाराम मार्ग पर नियमित बस सेवा प्रारंभ होने से यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है।मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के अंतर्गत संचालित बस सेवा अब पोलमपल्ली, कांकेरलंका, चिंतागुफा, चिंतलनार, लखापाल, केरलापेंदा और नागाराम जैसे गांवों के समीप से गुजर रही है। इससे ग्रामीण अब आसानी से बस के माध्यम से दोरनापाल पहुंचकर अपने दैनिक कार्य समय पर पूर्ण कर रहे हैं और उसी दिन सुरक्षित वापस भी लौट पा रहे हैं। यह सुविधा विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, विद्यार्थियों एवं श्रमिकों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रही है।जहां पहले नक्सलियों के भय के कारण ग्रामीणों का बाहर निकलना भी कठिन था, वहीं अब सुरक्षा वातावरण में सुधार के चलते वे निर्भय होकर रोजगार, व्यापार, शिक्षा और उपचार के लिए शहरों की ओर अग्रसर हो रहे हैं। बस सुविधा ने न केवल आवागमन को सुगम बनाया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान की है।इरकमपल्ली निवासी श्री मोहनरंजन ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन रही है। इससे न केवल कनेक्टिविटी बढ़ी है, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिला है।कलेक्टर श्री अमित कुमार के अनुसार, पूर्व में नक्सल प्रभावित एवं दूरस्थ क्षेत्रों में वर्तमान में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना के तहत 10 बसों का संचालन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 5 ‘हक्कुम मेल’ बसें भी नियमित रूप से संचालित हो रही हैं। बस संचालन को प्रोत्साहित करने हेतु शासन द्वारा सब्सिडी प्रदान की जा रही है तथा तीन वर्षों के लिए रोड टैक्स में छूट भी दी गई है।मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अब केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि सुकमा जिले के ग्रामीण अंचलों में विश्वास, सुरक्षा और विकास का प्रतीक बन चुकी है। नक्सलवाद के अंधकार से निकलकर यह क्षेत्र अब प्रगति और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर अग्रसर है, जहां हर सफर अब नई संभावनाओं की ओर ले जा रहा है।
- -पीएम आवास, उज्ज्वला और महतारी वंदन से मिला संबलरायपुर / शासन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं ग्रामीण अंचलों में न केवल आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं, बल्कि आमजन के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय भी जोड़ रही हैं। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिले के विकासखंड पामगढ़ के ग्राम लोहर्सी की निवासी श्रीमती ज्योति कश्यप की जीवन यात्रा परिवर्तन की एक प्रेरक मिसाल है।कभी अभाव और कठिनाइयों से जूझ रही श्रीमती ज्योति कश्यप का जीवन आज शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से पूरी तरह बदल चुका है। पूर्व में उनका कच्चा मकान हर मौसम में चुनौती बन जाता था। वर्षा के दौरान छत टपकना, घर में पानी भरना और असुरक्षित वातावरण में रहना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। इसके साथ ही लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते समय उठने वाले धुएं से आंखों में जलन और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं उनके स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रही थीं।परिस्थितियों में सकारात्मक बदलाव तब आया, जब उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली। उन्होंने आशा और विश्वास के साथ आवेदन किया और आवास स्वीकृत होने के बाद उनके जीवन में जैसे नई रोशनी का संचार हुआ। पक्के मकान के निर्माण से अब उनका परिवार सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण में निवास कर रहा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्राप्त होने से उनकी रसोई धुएं से मुक्त हो गई है, जिससे स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ समय और श्रम की भी बचत हो रही है।श्रीमती ज्योति कश्यप के जीवन में आत्मनिर्भरता का एक नया आयाम महतारी वंदन योजना से जुड़ा है। इस योजना के तहत प्रतिमाह प्राप्त होने वाली 1000 रुपये की सहायता राशि से वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति स्वयं कर पा रही हैं। जहां पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं अब वे आत्मसम्मान के साथ अपने निर्णय लेने में सक्षम हुई हैं। आज श्रीमती ज्योति कश्यप का जीवन इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाएं यदि सही पात्र तक पहुंचें, तो वे न केवल जीवन स्तर को सुधारती हैं, बल्कि आत्मविश्वास और स्वाभिमान को भी नई ऊंचाई प्रदान करती हैं।
- -गृह उद्योग और हस्तशिल्प से संवर रहा भविष्यरायपुर / राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के प्रभावी क्रियान्वयन से रायगढ़ जिले की ग्रामीण महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। यह योजना महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, कौशल और सामाजिक पहचान भी प्रदान कर रही है।रायगढ़ जिले के ग्राम बड़ेभंडार की निवासी श्रीमती मथुरा कुर्रे इसकी उदाहरण हैं। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के पश्चात उन्हें रिवॉल्विंग फंड एवं कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड के तहत आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उन्होंने घर पर ही अचार, पापड़, बड़ी एवं मसाला निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। आज वे अपने उत्पादों का बाजार में विक्रय कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और वे आत्मनिर्भर बन सकी हैं।इसी क्रम में ग्राम रूमकेरा, तहसील घरघोड़ा की श्रीमती जमुना सिदार की कहानी भी प्रेरणादायक है। पूर्व में वे एक गृहिणी थीं, किन्तु बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने बांस शिल्प का प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण उपरांत उन्होंने टोकरी, सूपा एवं अन्य हस्तशिल्प उत्पादों का निर्माण प्रारंभ किया। उन्हें विभिन्न मेलों, विशेषकर ‘सरस मेला’ में अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विक्रय का अवसर प्राप्त हुआ, जिससे वे अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आया है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि कौशल विकास, उद्यमिता और आत्मगौरव का अवसर भी प्रदान कर रहा है। जिले में अनेक महिलाएं इस योजना से जुड़कर स्वरोजगार के माध्यम से अपने जीवन को नई दिशा दे रही हैं।शासन के मंशानुरूप जिला प्रशासन रायगढ़ द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न योजनाओं से जोड़कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जा रहा है, जिससे वे न केवल अपने परिवार की आय में वृद्धि कर रही हैं, बल्कि समाज में एक सशक्त भूमिका भी निभा रही हैं। बिहान योजना आज जिले में महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हुए आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
- -अदरक की खेती से दोगुना मुनाफा कमायारायपुर / सरकार की “एक जिला एक उत्पाद” योजना अब धरातल पर किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसी क्रम में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम बघमरा के युवा प्रगतिशील किसान श्री आकाश चंद्राकर ने अदरक की खेती के माध्यम से सफलता की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है।पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ते हुए आकाश चंद्राकर ने “एक जिला एक उत्पाद” योजना से प्रेरित होकर अपने लगभग ढाई एकड़ खेत में अदरक की खेती की शुरुआत की। वैज्ञानिक पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन के साथ की गई इस खेती से उन्हें उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त हुआ। साथ ही बाजार में अदरक की अच्छी मांग के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिला, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।किसानों को प्रोत्साहित करने और खेती की लागत को कम करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासन के उद्यानिकी विभाग द्वारा राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत आकाश चंद्राकर को लगभग 49 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। इस वित्तीय सहयोग से उन्हें आधुनिक कृषि संसाधन जुटाने, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं तकनीकों का उपयोग करने में सहायता मिली, जिसका सीधा लाभ उत्पादन और गुणवत्ता में दिखाई दिया।आकाश चंद्राकर बताते हैं कि अदरक की खेती उनके लिए समृद्धि का नया द्वार बनकर आई है। शासन से प्राप्त अनुदान ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनका मानना है कि सही मार्गदर्शन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है।“एक जिला एक उत्पाद” के अंतर्गत अदरक को चयनित किए जाने के बाद जिले के अन्य किसान भी इस नगदी फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पारंपरिक फसलों की तुलना में अदरक से प्राप्त अधिक शुद्ध लाभ ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। जिला प्रशासन बालोद और उद्यानिकी विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही तकनीकी सलाह एवं अनुदान से खेती अब घाटे का सौदा नहीं, बल्कि लाभ का माध्यम बनती जा रही है। श्री चंद्राकर ने केंद्र एवं राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि शासन की इस पहल से बालोद जिला अदरक उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित करेगा।
- रायपुर / छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित अंचल में बदलाव की कई कहानियां उभर रही हैं। इन्हीं में से एक कहानी है बीजापुर जिले के छोटे से गांव चेरली के युवक मनकू कड़ती की, जिनका जीवन संघर्ष, भटकाव और फिर सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण बनकर सामने आया है।बीजापुर जिले के चेरली गांव में जन्मे मनकू कड़ती का बचपन बेहद कठिन परिस्थितियों में बीता। गरीबी, असुरक्षा और सीमित संसाधनों के बीच उनका परिवार लगातार चुनौतियों से जूझता रहा। पारिवारिक स्थिति उस समय और भी गंभीर हो गई, जब उनके पिता को जेल जाना पड़ा। इस घटना ने मनकू के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला और उनका बचपन अभाव और अस्थिरता के माहौल में बीता।इन्हीं परिस्थितियों और नकारात्मक माहौल के प्रभाव में मनकू धीरे-धीरे भटकाव की ओर बढ़ने लगे। उन्हें लगा कि गलत रास्ता ही उन्हें पहचान और सुरक्षा दिला सकता है। हालांकि, उनके भीतर एक द्वंद्व लगातार बना रहा। क्या यही उनका भविष्य है ? यह सवाल उनके मन में बार-बार उठता रहा। समय के साथ मनकू के भीतर आत्मचिंतन की प्रक्रिया शुरू हुई। उन्होंने महसूस किया कि हिंसा और भय के रास्ते पर चलकर वे अपने जीवन को अंधकार की ओर ले जा रहे हैं। यही एहसास उनके जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। उन्होंने ठान लिया कि अब वे अपनी दिशा बदलेंगे और एक नई शुरुआत करेंगे।अप्रैल 2025 में मनकू कड़ती ने साहसिक कदम उठाते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। यह निर्णय उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन यही उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सही फैसला साबित हुआ। इस कदम ने उनके लिए मुख्यधारा में लौटने और एक सम्मानजनक जीवन जीने के रास्ते खोल दिए। आत्मसमर्पण के बाद उन्हें पुनर्वास प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने ट्रैक्टर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षण लिया, जहां उन्होंने न केवल भारी मशीनों का संचालन सीखा, बल्कि अनुशासन, जिम्मेदारी और आत्मविश्वास को भी अपने जीवन में अपनाया। निरंतर मेहनत और सीखने की इच्छा ने उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाया। आज मनकू कड़ती एक बदले हुए इंसान के रूप में सामने आए हैं। वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हैं और समाज के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे हैं। जहां पहले उनके जीवन में डर और अस्थिरता थी, वहीं अब आत्मविश्वास और नई उम्मीद ने जगह ले ली है। मनकू कड़ती के जीवन की यह नई शुरूआत इस बात का प्रमाण है कि विपरीत परिस्थितियों और गलत दिशा में बढ़ते कदमों के बावजूद, यदि व्यक्ति दृढ़ निश्चय कर ले तो जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है।
- -वन मंत्री ने जिले को दी 17.59 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात-नालंदा परिसर से युवाओं को मिलेगा आधुनिक अध्ययन का सशक्त मंचरायपुर /वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार बस्तर सहित पूरे प्रदेश के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने नारायणपुर जिले के एक दिवसीय प्रवास के दौरान नारायणपुर को 17 करोड़ 59 लाख 57 हजार रुपए से अधिक लागत के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन कर जिले के विकास को नई गति प्रदान की।वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि नालंदा परिसर के निर्माण से जिले के विद्यार्थियों को अध्ययन के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा और अबूझमाड़ सहित नारायणपुर के बच्चे भी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़कर इंजीनियर, डॉक्टर एवं शासकीय सेवाओं में स्थान प्राप्त कर सकेंगे। नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि इस अवसर पर नेशनल हाईवे 130डी के मजबूतीकरण कार्य, नालंदा परिसर (सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन) सहित डीएमएफ और नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत स्वीकृत कुल 11 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया।कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने राष्ट्रीय परिवार सहायता राशि के 03 हितग्राहियों को 20-20 हजार रुपए का चेक, प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 अंतर्गत 25 हितग्राहियों को अनुज्ञा प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। उन्होंने गढ़बेंगाल चौक से बखरूपारा मार्ग के मध्य राष्ट्रीय राजमार्ग 130 डी के मजबूतीकरण कार्य को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे आवागमन सुगम होगा और क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग एवं जनप्रतिनिधियों के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी तरह टीमवर्क के साथ कार्य करते रहने का आह्वान किया। वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश को नक्सल मुक्त बनाने का संकल्प साकार हुआ है, जिससे अब नारायणपुर और अबूझमाड़ के विकास का मार्ग और अधिक सुगम हो गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों, महिलाओं, बच्चों और युवाओं सहित सभी वर्गों के विकास एवं समृद्धि के लिए सतत प्रयासरत है।कार्यक्रम में राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री रूपसाय सलाम, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण मरकाम, नगर पालिका अध्यक्ष श्री इंद्रप्रसाद बघेल, उपाध्यक्ष श्रीजयप्रकाश शर्मा, संध्या पवार, गौतम एस. गोलछा, बृजमोहन देवांगन सहित पार्षदगण एवं जनप्रतिनिधिगण, पुलिस अधीक्षक रॉबिनसन गुड़िया, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत , वन मंडल अधिकारी, अपर कलेक्टर, एसडीएम, मुख्य नगर पालिका अधिकारी रामचंद्र यादव सहित जिला स्तरीय अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
- -सरकार को है किसानों के हितों की चिंता: कृषि मंत्री रामविचार नेताम-उर्वरक की नहीं होगी कमी, जैविक खेती के लिए किसानों को रहे हैं प्रोत्साहित-अधिकारियों को नवाचार और फसल परिवर्तन पर जोर देने के निर्देश-विकसित भारत संकल्प अभियान 5 मई से 20 मई तक: अधिकारियों को प्राथमिकता और गंभीरता से सहभागी बनने के निर्देश-कृषि मंत्री ने रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर विभागीय योजनाओं एवं खरीफ तैयारियों की गहन समीक्षारायपुर /छत्तीसगढ़ में रासायनिक उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई तय है। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि खाद की जमाखोरी या अधिक मूल्य पर बिक्री करने वालों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे जेल भी भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया संकट के कारण रासायनिक उर्वरकों की कमी की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार पूरी तरह सजग है। खाद की कमी नहीं होगी। इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आपूर्ति और बेहतर होगी, इसलिए किसानों को किसी भी प्रकार से घबराहट या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। कृषि मंत्री श्री नेताम ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित समेति कक्ष में रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान इस आशय के वक्तव्य दिए।मंत्री श्री नेताम ने बताया कि राज्य सरकार खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर पूरी तरह सक्रिय है और उर्वरक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। जिलों के संबंधित विभागीय अमले को नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आते ही तत्काल कार्रवाई की जा सके।श्री नेताम ने बैठक में आगामी 5 मई से 20 मई तक पूरे प्रदेश में “विकसित भारत संकल्प अभियान” की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और मैदानी अमले की टीम गांव-गांव जाकर किसानों, किसान समूहों और संगठनों से सीधे संवाद करेगी। इस दौरान किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, वैकल्पिक उर्वरकों और आधुनिक खेती के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। अभियान के दौरान कृषि के साथ-साथ अन्य विभाग जैसे-मछली पालन, उद्यानिकी, पशुपालन, कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञ भाग लेंगे, जिसमें विभिन्न विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार तथा विभागीय प्रकरण तैयार करने हेतु निर्देशित किया।मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अभियान को प्राथमिकता और गंभीरता के साथ संचालित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंच सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौके पर ही किसानों की समस्याओं का समाधान और योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाएगी।बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पिछले वर्ष डीएपी की आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए इस बार एनपीके, एसएसपी और अन्य वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। सरकार का फोकस केवल उर्वरक उपलब्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और आधुनिक बनाने पर है। किसानों की आय बढ़ाने और लागत घटाने के उद्देश्य से दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।बैठक में फार्मर आई डी के तहत एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन हेतु शेष बचे हुए कृषकों का एक सप्ताह के भीतर पंजीयन करने हेतु निर्देश दिए गए ताकि कोई भी किसान पी.एम.किसान योजना से लाभान्वित होने से वंचित न रहे। उन्होंने खरीफ सीजन में किसानों को सुगमतापूर्वक उर्वरक व्यवस्था हेतु दूरस्थ अंचलों में प्राथमिकता के आधार पर उर्वरक का भण्डारण करने हेतु निर्देशित किया।मंत्री श्री नेताम ने विभागीय योजनाओं में वर्ष 2025-26 में हुए व्यय की समीक्षा के दौरान विशेष रूप से फसल प्रदर्शन योजना एवं ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन-तिलहन को बढावा देने हेतु समीक्षा की, जिसमें रायपुर संभाग के अधीन जिलों में और अधिक प्रयास कर ग्रीष्मकालीन धान के रकबे को कम करके दलहन तिलहन एवं मक्का फसल को बढावा देने हेतु निर्देशित किया गया साथ ही धमतरी जिले में विगत् दो वर्षाे में दलहन तिलहन के रकबे में वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की गई तथा अन्य जिलों में भी दलहन एवं तिलहन के रकबे में वृद्धि करने हेतु निर्देशित किया गया।मंत्री श्री नेताम ने रायपुर और दुर्ग संभाग के पी.एम.आशा की समीक्षा के दौरान पाया कि धमतरी जिले को छोडकर अन्य जिलों में प्रगति नगण्य है आगामी एक सप्ताह के भीतर मार्कफेड, नाफेड एवं समिति स्तर पर समन्वय करके दलहन तिलहन की खरीदी हेतु और अधिक प्रयास करने पर बल दिया।मंत्री श्री नेताम ने बैठक में वाटर बॉडी में मखाना एवं सिंघाडा की खेती के लिए उद्यानिकी विभाग को विशेष कार्ययोजना बना कर कृषक एवं कृषक समूहों से आवश्यक चर्चा कर उन्हें प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मखाना की खेती हेतु जिला धमतरी में किए गए कार्य की सराहना की गई। मखाना की खेती के साथ-साथ मछली पालन के लिए किसानों को जागरूक करने निर्देश दिए।बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार, कृषि, छत्तीसगढ़ राज्य बीज निगम के संचालक श्री अजय अग्रवाल, मत्स्य पालन विभाग के संचालक श्री एस.एस. नाग, पशुधन विकास विभाग के संचालक श्री चन्द्रकांत वर्मा, उद्यानिकी विभाग के संचालक श्री लोकेश चन्द्राकर, रायपुर के संयुक्त संचालक श्री गयाराम और दुर्ग की संयुक्त संचालक श्रीमती गोपिका गबेल सहित जिले एवं राज्य के अधिकारी उपस्थित थे।
- -सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहीरायपुर / भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, शिक्षित और समान अधिकार संपन्न बनाना है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना और महिला आरक्षण जैसे प्रयासों से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हालांकि, पितृसत्तात्मक सोच और सुरक्षा चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन शिक्षा व कानूनी सुधारों से बदलाव आ रहा है।भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की सोच अब एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण में विकसित हो चुकी है, जहाँ जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और नेतृत्व तक महिलाओं की आवश्यकताओं को समग्र रूप से संबोधित किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएँ अब केवल कल्याण तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। यह बदलाव “वेलफेयर” से “एम्पावरमेंट” और अब “वूमेन-लेड डेवलपमेंट” की ओर भारत की विकास यात्रा को दर्शाता है।स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में मिशन पोषण 2.0, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण सुधार सुनिश्चित किए हैं। वर्ष 2017 से फरवरी 2026 तक प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत लगभग 4.27 करोड़ महिलाओं को 20,101 करोड़ रूपये की सशर्त सहायता प्रदान की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 7.26 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई है। देशभर में 14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 8.97 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पोषण सेवाएँ पहुँच रही हैं, जबकि मिशन इंद्रधनुष के प्रभाव से बाल मृत्यु दर 48 से घटकर 28 और नवजात मृत्यु दर 28 से घटकर 17 हो गई है।“पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत 8.55 लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है तथा सक्षम आंगनवाड़ी योजना के माध्यम से 1.03 लाख केंद्रों को उन्नत किया जा चुका है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है।प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 57.93 करोड़ खातों में से 32.29 करोड़ खाते महिलाओं के नाम हैं, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वितरित कुल ऋणों में लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि 14.72 लाख करोड़ रूपये से अधिक है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत स्वीकृत ऋणों में 83 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं, जिनकी राशि 47,704 करोड़ रूपये से अधिक है।दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 10.05 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं, जबकि “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से 3.07 करोड़ महिलाएँ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं। “नमो ड्रोन दीदी योजना” के तहत 1,094 ड्रोन वितरित कर महिलाओं को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।दैनिक जीवन में गरिमा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने व्यापक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 2.90 करोड़ से अधिक घर महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है। उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे महिलाओं को धुएँ से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ मिला है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12.11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है, जिससे महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। जल जीवन मिशन के माध्यम से 15.83 करोड़ से अधिक घरों तक नल जल की सुविधा पहुँचाई गई है, जिससे महिलाओं के दैनिक श्रम में उल्लेखनीय कमी आई है।शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय जैसी पहलों ने सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित किया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के परिणामस्वरूप जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हो गया है। सुकन्या समृद्धि योजना के अंतर्गत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जिनमें 3.40 लाख करोड़ रूपये से अधिक की राशि जमा है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के 5,316 स्कूलों में 7.58 लाख से अधिक छात्राएँ अध्ययनरत हैं। उच्च शिक्षा में महिलाओं का सकल नामांकन अनुपात 30.2 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जबकि पीएचडी में महिलाओं के नामांकन में 135.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। । AICTE प्रगति योजना के तहत 35,998 छात्राएँ लाभान्वित हुई हैं तथा विज्ञान ज्योति योजना से 80,000 से अधिक छात्राओं को प्रोत्साहन मिला है।महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए मिशन शक्ति के अंतर्गत “सम्बल” और “समर्थ्य” दो स्तंभों पर कार्य किया जा रहा है। वन स्टॉप सेंटरों की संख्या 926 तक पहुँच चुकी है, जहाँ 13.90 लाख से अधिक महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है। महिला हेल्पलाइन (181 और 112) के माध्यम से 99.09 लाख महिलाओं को सहयोग मिला है। SHe-Box पोर्टल से 1.63 लाख कार्यस्थल जुड़े हैं, जिससे कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। वहीं “समर्थ्य” घटक के अंतर्गत 416 शक्ति सदन और 531 सखी निवास संचालित किए जा रहे हैं, जो महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और पुनर्वास प्रदान कर रहे हैं।अंततः भारत में महिला सशक्तिकरण अब केवल योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का आधार बन चुका है। महिलाएँ आज न केवल अपने परिवार और समाज की धुरी हैं, बल्कि वे देश की आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी प्रगति की दिशा तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। यही “Women-Led Development” का वास्तविक स्वरूप है, जहाँ नारी शक्ति ही राष्ट्र शक्ति का आधार बनती है।



























