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- -शून्य दुर्घटना पर कार्यशाला में दिया गया जोररायपुर । औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा बुधवार को बिलासपुर के पं. देवकीनंदन दीक्षित सभागृह में आयोजित एकदिवसीय औद्योगिक सुरक्षा जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बिलासपुर के संभागायुक्त श्री सुनील जैन, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह, आईएचएस के संचालक श्री मनीष श्रीवास्तव ने संबोधित किया। कार्यशाला में औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के डिप्टी डायरेक्टर विजय कुमार सोरी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यशाला का उद्देश्य क्षेत्र की स्पॉन्ज आयरन फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना था।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संभागायुक्त श्री सुनील जैन ने स्पष्ट कहा कि औद्योगिक सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि उद्योगों का उद्देश्य केवल लाभ अर्जित करना नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने के साथ-साथ श्रमिकों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। दुर्घटनाएं भले ही क्षणिक होती हैं, लेकिन उनके दुष्परिणाम लंबे समय तक प्रभावित करते हैं। इसलिए औद्योगिक इकाइयों में जोखिम की पहचान कर समय रहते उचित प्रबंधन, आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की स्थापना, नियमित प्रशिक्षण एवं मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने कहा कि उद्योग देश के विकास और रोजगार सृजन का प्रमुख माध्यम हैं, लेकिन किसी भी दुर्घटना से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि संस्थान की साख भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि प्रबंधन और श्रमिकों के सामूहिक प्रयास से ही सुरक्षित कार्य वातावरण निर्मित किया जा सकता है। श्रमिकों को नियमित प्रशिक्षण देने, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने तथा उनमें स्वामित्व की भावना विकसित करने पर उन्होंने विशेष बल दिया।कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-छोटी लापरवाहियां बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनती हैं। सुरक्षा उपकरणों का उपयोग न करना गंभीर घटनाओं को जन्म देता है, जिसमें मानव लापरवाही प्रमुख कारण होती है। उन्होंने “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनाने तथा किसी भी घटना की स्थिति में उसे छुपाने के बजाय तत्काल प्रशासन को सूचित करने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों द्वारा सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों पर प्रस्तुतियां दी गईं तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से श्रमिकों एवं प्रबंधन को जागरूक किया गया। पावर पॉइंट प्रस्तुति एवं संवादात्मक सत्रों के जरिए प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। कार्यशाला में सुरक्षा की शपथ भी ली गई। इस आयोजन के माध्यम से औद्योगिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।
- -तैराकी में कर्नाटक ने जीते छह में से पांच स्वर्ण पदक-कर्नाटक के मणिकांत एल और मेघांजलि ने जीते दो-दो स्वर्ण-मेजबान छत्तीसगढ़ ने उद्घाटन दिन जीता एक रजत और एक कांस्यरायपुर। कर्नाटक के धनीश एन और ओडिशा की अंजलि मुंडा ने बुधवार को यहां इंटरनेशनल स्विमिंग कॉम्प्लेक्स में पुरुष और महिला 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के पहले दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।स्विमिंग में पहले दिन कर्नाटक का दबदबा रहा, जहां उसने छह में से पांच स्वर्ण पदक जीते। वहीं मेजबान छत्तीसगढ़ ने भी महिला और पुरुष 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में क्रमशः रजत और कांस्य पदक जीतकर अपने अभियान की शुरुआत की।इस पहले संस्करण में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश भाग ले रहे हैं, जिसमें करीब 3800 खिलाड़ी नौ खेलों में प्रतिस्पर्धा करेंगे। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती सहित कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे, जबकि मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है।पहले दिन के बाद कर्नाटक सात पदकों (पांच स्वर्ण सहित) के साथ पदक तालिका में शीर्ष पर है। ओडिशा चार पदकों (एक स्वर्ण) के साथ दूसरे स्थान पर है, जबकि मेजबान छत्तीसगढ़ दो पदकों के साथ चौथे स्थान पर है।KITG 26 Medal Tally URLhttps://tribal.kheloindia.gov.in/medal-tallyपुरुष 200 मीटर फ्रीस्टाइल फाइनल में धनीश ने 2:03.55 सेकंड का समय निकालकर अपने ही राज्य के कीर्तन शरथ (2:10.99 सेकंड) को लगभग सात सेकंड से पीछे छोड़ा। महाराष्ट्र के भक्तिश कुमरे (2:14.73 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता।धनीश ने कहा, “यह मेरा पहला खेलो इंडिया गेम्स है और इन खेलों का पहला स्वर्ण जीतना मेरे लिए बेहद खास है। मुझे लगता है कि मैं इससे बेहतर समय निकाल सकता था, लेकिन मैं खुश हूं।”महिला 200 मीटर फ्रीस्टाइल में ओडिशा ने स्वर्ण और कांस्य जीता। अंजलि मुंडा ने 2:39.02 सेकंड का समय निकालकर बेहद करीबी मुकाबले में कर्नाटक की निधि एस (2:39.09 सेकंड) को पछाड़ा। ओडिशा की श्रिया पडियामी (2:49.04 सेकंड) तीसरे स्थान पर रहीं।इसके बाद कर्नाटक ने बाकी स्पर्धाओं में दबदबा कायम रखा, जहां मणिकांत एल और मेघांजलि ने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई में दो-दो स्वर्ण पदक जीते।मणिकांत ने पुरुष 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में 1:07.41 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण जीता। महाराष्ट्र के पलाश ठाकुर (1:11.69 सेकंड) दूसरे स्थान पर रहे, जबकि छत्तीसगढ़ के निखिल झालको (1:11.77 सेकंड) ने कांस्य पदक जीतकर मेजबान राज्य का खाता खोला।मणिकांत ने इसके बाद 50 मीटर बटरफ्लाई में भी 27.06 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता। असम के फिरमिनो एमोन लालुंग (27.69 सेकंड) और त्रिपुरा के रियाज त्रिपुरा (28.48 सेकंड) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक जीते।महिला वर्ग में मेहानजलि का भी शानदार प्रदर्शन रहा। उन्होंने 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में 1:25.81 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण जीता, जबकि छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत (1:29.10 सेकंड) ने रजत पदक हासिल किया।इसके बाद मेघांजलि ने 50 मीटर बटरफ्लाई में 34.67 सेकंड का समय निकालकर दूसरा स्वर्ण अपने नाम किया। त्रिपुरा की तिलुत्तम जमातिया (34.85 सेकंड) और ओडिशा की रितिका मिन्ज (35.54 सेकंड) क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहीं।परिणाम (फाइनल)तैराकी- महिला वर्ग:-200 मीटर फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – अंजलि मुंडा (ओडिशा) 2:39.02 सेकंड; रजत – निधि एस (कर्नाटक) 2:39.09 सेकंड; कांस्य – श्रिया पडियामी (ओडिशा) 2:49.04 सेकंड-100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक: स्वर्ण – मेघांजलि (कर्नाटक) 1:25.81 सेकंड; रजत – अनुष्का भगत (छत्तीसगढ़) 1:29.10 सेकंड; कांस्य – रिंकी मुर्मू (ओडिशा) 1:34.70 सेकंड-50 मीटर बटरफ्लाई: स्वर्ण – मेघांजलि (कर्नाटक) 34.67 सेकंड; रजत – तिलुत्तम जमातिया (त्रिपुरा) 34.85 सेकंड; कांस्य – रितिका मिन्ज (ओडिशा) 35.54 सेकंड-पुरुष वर्ग:-200 मीटर फ्रीस्टाइल: स्वर्ण – धनीश एन (कर्नाटक) 2:03.55 सेकंड; रजत – कीर्तन शरथ (कर्नाटक) 2:10.99 सेकंड; कांस्य – भक्तिश कुमरे (महाराष्ट्र) 2:14.73 सेकंड-100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक: स्वर्ण – मणिकांत एल (कर्नाटक) 1:07.41 सेकंड; रजत – पलाश मनोज ठाकुर (महाराष्ट्र) 1:11.69 सेकंड; कांस्य – निखिल झालको (छत्तीसगढ़) 1:11.77 सेकंड-50 मीटर बटरफ्लाई: स्वर्ण – मणिकांत एल (कर्नाटक) 27.06 सेकंड; रजत – फिरमिनो एमोन लालुंग (असम) 27.69 सेकंड; कांस्य – रियाज त्रिपुरा (त्रिपुरा) 28.48 सेकंड
- रायपुर,। बच्चों में बढ़ते गैर-संचारी रोगों (एनसीडी), विशेषकर बाल मधुमेह, सिकल सेल रोग एवं जन्मजात हृदय रोग की रोकथाम, शीघ्र पहचान तथा प्रभावी प्रबंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रायपुर में श्री संजीव कुमार झा (संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं) की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन किया गया। इस परामर्श का मुख्य उद्देश्य राज्य में बाल स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाना, बहु-विभागीय समन्वय को बढ़ावा देना तथा गुणवत्तापूर्ण उपचार एवं सुदृढ़ रेफरल सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना रहा।कार्यक्रम के दौरान बच्चों में एनसीडी की वर्तमान स्थिति, प्रमुख चुनौतियों एवं भावी प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने शीघ्र पहचान, दवाओं की सतत उपलब्धता, उपचार अनुपालन तथा मजबूत रेफरल तंत्र को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया। सिकल सेल रोग प्रबंधन हेतु जशपुर मॉडल को एक प्रभावी एवं अनुकरणीय पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया।पैनल चर्चाओं में बाल मधुमेह एवं सिकल सेल रोग के समग्र प्रबंधन, निजी क्षेत्र की भागीदारी, सामुदायिक सहयोग तथा सामाजिक कलंक को कम करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। समूह कार्य के माध्यम से प्रतिभागियों ने स्क्रीनिंग बढ़ाने, उपचार अनुपालन सुधारने तथा सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाने हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों के रूप में AIIMS रायपुर एवं पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर के विशेषज्ञों के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा संघ (IMA) एवं भारतीय शिशु रोग अकादमी (IAP) के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का सफल संचालन यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. गजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में, एकम फाउंडेशन के सहयोग से किया गया।तकनीकी सत्रों में डॉ. खेमराज सोनवानी (उप संचालक, सिकल सेल), डॉ. वी.आर. भगत (उप संचालक, शिशु स्वास्थ्य)एवं श्री सुबोध धर शर्मा (राज्य सलाहकार, NP-NCD) सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं सलाहकार उपस्थित रहे।परामर्श में ट्राइबल वेलफेयर विभाग, स्कूल शिक्षा, समाज कल्याण विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधियों की सहभागिता से बहु-विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ किया गया। सहयोगी संस्थाओं की ओर से विश्व स्वास्थ्य संगठन, संगवारी, क्लिंटन फाउंडेशन, NASCO, प्रतिनिधि जुवेनाइल डायबिटीज तथा पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने भी सक्रिय योगदान दिया।इस राज्य स्तरीय परामर्श में कुल 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया। साथ ही राज्य के उच्च प्राथमिकता वाले 8 जिलों—रायपुर, कांकेर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरबा, महासमुंद, रायगढ़ एवं राजनांदगांव से जिला स्तर के प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें जिला एनसीडी नोडल अधिकारी, सिकल सेल नोडल अधिकारी तथा एनसीडी सलाहकार/सहायक नोडल अधिकारी शामिल थे। इन प्रतिनिधियों ने अपने-अपने जिलों के अनुभव साझा करते हुए जमीनी स्तर की चुनौतियों एवं संभावित समाधान प्रस्तुत किए।अंत में प्रतिभागियों ने राज्य में बच्चों हेतु एनसीडी सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने तथा बहु-विभागीय समन्वय के माध्यम से कार्ययोजना को प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने की सहमति व्यक्त की गई। कार्यक्रम को सहयोग करने तथा सफल बनाने के लिए राज्य द्वारा यूनिसेफ की सराहना की गई और भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम को करने के लिए विशेष सहयोग के लिए कहा गया।
- रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका से बुधवार को यहां लोकभवन में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव ने भेंट की। उन्होंने राज्यपाल को विश्वविद्यालय में 4 एवं 5 मई 2026 को आयोजित होने वाले “इनोवेशन महाकुंभ” के संबंध में विस्तृत जानकारी दी । श्री डेका ने कहा कि इस आयोजन से बस्तर के युवाओं में नवाचार और उद्यमशीलता की भावना को बढ़ावा मिलेगा यह पहल युवाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में सराहनीय है। राज्यपाल ने कार्यक्रम का पोस्टर विमोचन भी किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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योजना से आए जीवन में बदलाव की ली जानकारी
बालोद/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के अंतर्गत आयोजित राशि वितरण कार्यक्रम में पंडित चक्रपाणि शुक्ल हायर सेकेंडरी स्कूल मैदान से प्रदेशभर के हितग्राहियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा संवाद किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हितग्राहियों से योजना के लाभ और उनके जीवन में आए बदलावों की जानकारी ली।
संवाद के दौरान बालोद जिला के यादव राम निषाद ने मुख्यमंत्री से संवाद के दौरान कहा कि-वे उनसे बात कर भावुक हो गए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी छोटी किराना दुकान है, जिसे वे इस राशि की सहायता से और विकसित करना चाहते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने सभी हितग्राहियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे और उनके जीवन स्तर में सुधार हो। - - परीक्षा खत्म होते ही बाल कलाकार, अपर्णा कालेले के निर्देशन में पूरे जोश के साथ कर रहे रिहर्सलरायपुर। महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में 28 मार्च से शुरू हो रहे वाल्मिकी रामायण पर आधारित राम कथा के दौरान ही 29 मार्च को बाल नाटक का मंचन किया जाएगा। अपर्णा कालेले के निर्देशन में तैयार हो रहे बाल नाटक ‘उत्तर रामायण प्रसंग’ का मंचन रविवार को शाम 6:30 बजे किया जाएगा।अपर्णा ने बताया कि 15 मिनट के इस नाटक में तनिष्क डोनगांवकर, तन्वी डोनगांवकर, प्रणीश डोनगांवकर, अनय पंडित, अक्षत पंडित, प्रथमेश पुराणिक, कियान महाजन, विहान कालेले, मायरा गुप्ते सहित कई बाल कलाकार भाग ले रहे हैं। अपर्णा ने ही बाल नाटक ‘उत्तर रामायण प्रसंग’ का लेखन भी किया है। नाटक में तकनीकी पक्ष परितोष डोनगांवकर और प्रवीण क्षीरसागर संभालेंगे।अपर्णा के अनुसार नाटक में अध्योध्या में अश्वमेघ यज्ञ उपरांत प्रभु श्रीराम की ओर से छोड़े गए घोड़े को लव और कुश रोककर रघुवंशी परिवार के वीर सदस्यों से युद्ध कर उन्हें परास्त करने के दृश्य मंचित किए जाएंगे। अंत में प्रभु श्रीराम से युद्ध के दौरान माता सीता आती है, और लव और कुश को बताती हैं कि तुम दोनों श्रीराम से युद्ध करते तो अनर्थ हो जाता क्योंकि राजा राम ही तुम्हारे पिता हैं। इसके बाद प्रभु श्रीराम उन्हें अपने साथ अयोध्या स्थित राजमहल ले जाते हैं। नाटक में खूब सारे एक्शन सीन और जोशीले डायलॉग होने के कारण बच्चों में नाटक को लेकर खासा उत्साह और जोश है।सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने कहा कि राम कथा के दौरान बच्चों का नाटक आध्यात्मिक संतुष्टि के साथ एक अलग ही मजा देगा। उन्होंने रंगमंच के दर्शकों से बड़ी संख्या में बाल नाटक देखने का आग्रह किया है। अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि बच्चों को धर्म- आध्यात्म विषय के नाटकों को जोड़ने का बड़ा फायदा उन्हें अपनी संस्कृति की जानकारी देकर इनसे आत्मसात कराना भी है। उन्होंने ‘उत्तर रामायण प्रसंग’ देखने के लिए राम कथा श्रोताओं से उनके बच्चों को भी विशेष रूप साथ लाने का आग्रह किया है, ताकि अपनी संस्कृति के साथ नाटकों के प्रति भी उनका रुझान बढ़े।
- रायपुर। केन्द्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने स्वामी विवेकानंद विमानतल रायपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश बदल रहा है। विकसित भारत की दिशा में देश आगे बढ़ रहा है। नए भारत का निर्माण हो रहा है विकसित भारत के राह पर देश मजबूती से कदम आगे बढ़ा रहा है। ऐसी स्थिति में आने वाले दिनों में दस साल के स्पोर्ट्स का विजन रखते हुए प्रधानमंत्री श्री मोदी जी स्पोर्ट्स सेक्टर को 1 से 10 के क्रम में लाने के लिए संकल्पित है। उन्होंने कहा कि जब देश आजादी का शताब्दी वर्ष मना रहा है भारत दुनिया में 1 से 5 क्रम में स्पोर्ट्स नेशन में कैसे शामिल हो इस दिशा में प्रयास हो रहा है, जिसके फलस्वरूप देश में टैलेंट को आयडेंटिफाई करना, टैलेंट को लांच करना और स्पोर्ट्स के लिए इको सिस्टम तैयार करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी ने कई कार्यक्रम चलाए हैं। उसमें से खेलो इंडिया के द्वारा देश में खेलो इंडिया स्कूल गेम्स, खेलो इंडिया यूनिवर्ससिटी गेम्स, खेलो इंडिया ट्राइबल्स गेम्स , खेलों इंडिया बिच गेम्स, खेलो इंडिया स्नो गेम्स अलग-अलग खेलों को खेलो इंडिया की श्रेणी में रखा है ।केन्द्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया की श्रेणी में खेलो इंडिया ट्राइबल्स गेम्स की शुरूआत देश में सबसे पहली बार छत्तीसगढ़ से हो रही है। जो आनेवाले दिनों में प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित की जाएगी। देश के सभी ट्राइबल स्टेट से ट्राइबल एथिलिट्स 27 से 3 अप्रेल तक खेलेंगे। 3 हजार से अधिक प्रतिभागी भाग लेंगे। सरगुजा, बस्तर और रायपुर में प्रतियोगिता आयोजित होगी और इन तीनों स्थानों पर खेलो इंडिया की टैलेंट आईडेंटिफाई करने के लिए खेल विशेषज्ञों की टीम उपस्थित रहेगी ।इस दौरान उप मुख्यमंत्री अरुण साव, प्रदेश महामंत्री डॉ नवीन मार्कंडेय, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, विधायक मोतीलाल साहू, सुशांत शुक्ला, अपेक्स बैंक अध्यक्ष केदार नाथ गुप्ता, प्रदेश प्रवक्ता नलिनीश ठोकने, लाभचंद बाफना, संजू नारायण सिंह ठाकुर उपस्थित रहे।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई का विशेष बजट सम्मिलन सभागार कक्ष में राष्ट्रगान के साथ प्रारंभ किया गया। राष्ट्रगान के पश्चात महापौर नीरज पाल ने अपना अभिभाषण के साथ बजट सभापति गिरवर बंटी साहू एवं सदन के समक्ष प्रस्तुत किया। जिसमें अपने कार्यकाल की उपलब्धि एवं आगामी वित्तीय वर्ष हेतु जनहितैषी योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दिये।निगम का अनुमानित बजट वर्ष 2026-27 में प्रारंभिक शेष राशि 180 करोड़ 60 लाख 74 हजार एवं आय 670 करोड़ 67 लाख 73 हजार, इस प्रकार कुल आय 851 करोड़ 67 लाख 47 हजार के विरूद्व 740 करोड़ 23 लाख 32 हजार का व्यय अनुमानित है, एवं 111 करोड़ 05 लाख 15 हजार अंतिम शेष का अनुमान है।नगर पालिक निगम भिलाई हेतु भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा महत्वपूर्ण प्रयोजना स्वीकृति प्रदान की गई है । जिससे शहर नए आयाम एवं विकसित दिशा में कार्य करेगी । पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता को सुदृढ़ बनाने के उददेश्य से कचांदुर में 189.57 करोड़ की लागत से सिवरेज ट्रिटमेंट प्लांट प्रगतिरत है। सी.पी.जी प्लांट की स्थापना हेतु 60 करोड़ की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इस संयंत्र की छमता प्रतिदिन 100-150 टन कचरे के प्रसंस्करण की होगी। लगभग 22 करोड़ 50 लाख रूपये की लागत से अत्याधुनिक साइंस सेंटर की स्थापना प्रस्तावित है। शहर में 4 करोड़ 97 लाख की लागत से स्वीमिंग पुल का निर्माण, रनिंग ट्रेक 4 करोड़ 99 लाख, 1 करोड़ 99 लाख की लागत से स्केटिंग ट्रेक निर्माण किया जा रहा है। शहर की स्वच्छता एवं सीवरेज व्यवस्था हेतु 21 करोड़ 56 लाख से कार्य हुड़को क्षेत्र में प्र्रस्तावित है। शहर के व्यावसायिक एवं शैक्षणिक विकास को ध्यान में रखते हुए 6 करोड़ 38 लाख की लागत से जवाहर मार्केट का उन्नयन एवं 11 करोड़ 42 लाख की लागत से नालंदा परिसर का विकास किया जा रहा है।बजट में नगर निगम भिलाई क्षेत्र के सर्वांगीण विकास हेतु नवीन सड़क, सड़क चौड़ीकरण, सीवरेज लाइन, नाला निर्माण, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, बेहतर पेयजल आपूर्ति, ठोस अपशिष्ठ प्रबंधन, दूषित जल निकासी, उद्यानों का सौंदर्यीकरण एवं अन्य कार्य शामिल किए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के व्यय को लेकर कई विषयों पर सम्मानित पार्षदों द्वारा आपत्ति किया गया, जिसका निगम आयुक्त एवं लेखाधिकारी द्वारा जानकारी प्रदान किया गया । विस्तृत चर्चा पश्चात् सदन द्वारा आय की बजट सर्व सम्मति से पारित किया गया है, जिसे आगामी समय में राज्य शासन को भेजा जाएगा। सभा की बैठक में मुख्य रूप से निगम आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय, नेता प्रतिपक्ष भोजराज सिन्हा, महापौर परिषद के सभी सम्मानित सदस्य, उप नेता प्रतिपक्ष दया सिंह, सभी सम्मानित पार्षदगण, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया एवं निगम सचिव सहित अधिकारी कर्मचारी की उपस्थिति रही।
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--कुल क्षमता 12एमटीपीए हुई
रायपुर। जिन्दल स्टील ने ओडिशा के अंगुल स्थित अपने स्टील प्लांट में 6 एमटीपीए का विस्तार पूरा कर लिया है। 3 एमटीपीए का तीसरा बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस (BOF-3) शुरू होने के बाद प्लांट की कुल स्टील बनाने की क्षमता अब 12 एमटीपीए हो गई है। इससे यह भारत के सबसे बड़े एक ही जगह पर बने स्टील प्लांट्स में शामिल हो गया है। इस विस्तार में BOF-2 और BOF-3 के साथ-साथ कई जरूरी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं, जैसे कोक ओवन, CRM कॉम्प्लेक्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर, जिससे उत्पादन बढ़ाना आसान हो गया है।
अब कंपनी ने तय समय में अंगुल प्लांट की क्षमता 6 MTPA से बढ़ाकर 12 MTPA कर दी है। इस विस्तार के बाद कंपनी की कुल स्टील उत्पादन क्षमता 15.6 MTPA हो गई है, जिसमें रायगढ़ प्लांट की 3.6 MTPA क्षमता भी शामिल है। इस बढ़ी हुई क्षमता से उत्पादन और बेहतर होगा और प्लांट का इस्तेमाल भी ज्यादा अच्छे से हो सकेगा। इससे कंपनी की कमाई बढ़ने और खर्च कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, कंपनी देश में स्टील उत्पादन को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी योगदान देगी। -
- छै आगर छै कोरी तरिया में पानी भरने के प्राकृतिक प्रणाली को देखा
- कांसा उद्योग, त्रिमूर्ति महामाया मंदिर व राजा किला
धमधा। ऐतिहासिक नगर धमधा सांस्कृतिक विरासत को जानने-समझने के उद्देश्य से “धमधागढ़ हेरिटेज वॉक – पुरखौती विरासत यात्रा का भ्रमण” का आयोजन धर्मधाम गौरवगाथा समिति ने किया। इसमें धमधा के प्राचीन कांसा उद्योग, ऐतिहासिक मकान, मंदिर और तालाबों को संरक्षित करने के लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
इसमें एक हजार साल पुराने मंदिर और राजा किले से पर्यटक रुबरु हुए। वहीं छै आगर छै कोरी तरिया (126 तालाब) की श्रृंखला को देखकर अचंभित हुए। सैकड़ों साल से संचालित हस्तशिल्प कांसा उद्योग और वहां बने मिट्टी व बेशकीमती इमारती लकड़ी से बने मकानों को देखकर वे प्रफुल्लित हो गए।
इसमें दो पूर्व कुलपति डॉ. एसके पांडेय एवं डॉ. एसके पाटिल समेत 20 प्रोफेसर, प्रिंसिपल व कवि लेखक सहित भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत न्यास (INTACH) भिलाई-दुर्ग के प्रतिनिधि शामिल हुए। सर्वप्रथम पंडितवा तालाब से यात्रा आरंभ हुई, जहां बताया गया कि धमधा छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक नगर था, जिसके बारे में ब्रिटिश गजेटियर में लिखा गया है कि धमधा इतना प्रसिद्ध था कि रायपुर की दिशा बताने के लिए धमधा-रायपुर कहकर इंगित किया जाता था।
यात्रा में कबीर पंथ के पांचवे गुरु केवल मुनि नाम साहेब की समाधि, दानी तालाब, नईया तालाब और उनसे जुड़े प्राचीन बुढ़वा नरवा को पर्यटकों ने बारिकी से देखा और समझा की पुराने समय में 126 तालाबों में पानी भरने के लिए प्राकृतिक ढलान का उपयोग करते हुए बारिश के पानी को बिना किसी पंप या बिजली की सहायता से लाया जाता था। त्रिमूर्ति महामाया मंदिर, बूढ़ादेव और राजा किला की सुरक्षा के लिए बनाए बूढ़ा तालाब व टार तालाब को उन्होंने देखा। राज्य संरक्षित स्मारक विष्णु मंदिर, चौखड़िया और शीतला मंदिर का प्रतिमाओं का भी पर्यटकों ने अवलोकन किया। तमेर पारा में अशोक कसार के कांसा उद्योग में गर्म भट्टी और सांचे से लोटा ढालते और उसे चमकाते हुए दिखाया गया। विमलचंद ताम्रकार के सौ साल पुराने पठऊंवा वाले मकान को देखकर पर्यटक काफी प्रभावित हुए। वहां ठंडक और इमारती लकड़ी की कारीगरी से वे प्रभावित हुए। शिक्षक विष्णु प्रसाद ताम्रकार की बनाई मूर्तियों ने पर्यटकों का मन मोह लिया। मूर्तियां ऐसी थी मानों जीवंत हों।
विश्राम गृह में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें जानव अपन धमधागढ़, तरिया अऊ पुरखौती धरोहर ल विषय पर चर्चा हुई। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एसके पाण्डेय ने कहा कि किसी भी विरासत को संजोकर रखना आज बहुत बड़ी चुनौती है। धमधा में कांसे का लोटा बनाने के उद्योग इसी कठिन चुनौती से जूझ रहे हैं। किसी जमाने में ये हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आत्मनिर्भरता की पहचान होती थी। यहां के प्राचीन स्मारक, मंदिर, पुरातात्विक अवशेष धमधा की ऐतिहासिक नगर होने की पहचान हैं। किसी एक स्थान पर इतने बड़े-बड़े तालाब होने अपने आप में चौंकाने वाला है। इन्हें संभालकर और सहेजकर रखना होगा, तभी भावी पीढ़ी खुशहाल जीवन जी सकेगी।
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के पूर्व कुलपति डॉ. एसके पाटिल ने कहा कि मेरी प्रारंभिक शिक्षा धमधा में ही हुई है। यहां के तालाब और आम के बगीचे, मंदिर स्मृति में हैं। आज पुरखौती विरासत यात्रा से धमधा की खासियत का ओर पता चला। पूरे भारत में छै आगर छै कोरी तरिया यानी 126 तालाब बहुत कम स्थानों पर हैं। यहां ये मोतियों की माला की तरह एक दूसरे से जुड़े हुए थे। बारिश का पानी खेतों से बहकर इन तालाबों को भर देता था। उस पुरानी नहर प्रणाली को और भी वैज्ञानिक पद्धति से अध्ययन करने की आवश्यकता है। इसके आधार पर यहां के 126 तालाबों को पुनर्जीवित करने की योजना बनी जानी चाहिए। इसमें धर्मधाम गौरवगाथा समिति का प्रयास सराहनीय है। सभी को साथ मिलकर वैज्ञानिक ढंग से एक विस्तृत कार्ययोजना बनानी चाहिए। मैं भी इसमें अपने अनुभव और सुझाव साझा करना चाहूंगा। ताकि धमधा की यह विरासत हमें जल संरक्षण के प्रति सदैव जागरुक करता रहे।
छत्तीसगढ़ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष श्री रवि श्रीवास्तव ने कहा कि धमधा के प्राचीन कांसा उद्योग और यहां के पुराने मकान वास्तव में धरोहर हैं, जहां निवास, गोदाम और दुकान एकसाथ होते थे। बिना बिजली के ठंडक और रोशन रहने वाले मकान देखकर बहुत अच्छा लगा। नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती श्वेता प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि धमधा की प्राचीन विरासत को बचाने के लिए पुरातात्विक नियमों के अनुसार कार्य किया जाएगा ताकि हमरी धरोहर पर आने वाली पीढ़ी गर्व कर सके। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष श्री राजीव गुप्ता ने कहा कि धर्मधाम गौरवगाथा समिति सबका सहयोग लेते हुए बीते 10 वर्षों से प्राचीन धरोहर और तालाबों के संरक्षण के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य कर रही है।
समाजसेवी श्री रमेश पटेल ने कहा कि धर्मधाम गौरवगाथा समिति ने सामूहिक प्रयास से विलुप्त हो चुके सात तालाब को फिर से पुनर्जीवित करने में योगदान दिया। शासन इस समिति को विलुप्त हो चुके अन्य 32 शासकीय तालाबों को प्रदान करे, ताकि उन्हें भी समिति पुनर्जीवित कर सके।
छत्तीसगढ़ राज्य साक्षरता प्राधिकरण के पूर्व सदस्य सचिव डॉ. डीएन शर्मा ने कहा कि धमधा के विरासत को देखकर लगता है कि इसे राष्ट्रीय मानचित्र पर लाना चाहिए। इसे लेकर स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर पर सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। स्वागत भाषण श्री वीरेंद्र देवांगन ने दिया। मंच संचालन श्री गोविन्द पटेल ने किया। आभार प्रदर्शन सामर्थ्य ताम्रकार साजन ने किया। इसमें उत्कृष्ठा स्वयंसेवी संस्था की अध्यक्ष श्रीमती शालू मोहन, संडे कैंपस के संपादक श्री दीपकरंदन दास, संपूर्णानंद महाविद्यालय की प्राचार्य एवं इंटैक संयोजक डॉ. हंसा शुक्ला, कवयित्री श्रीमती विद्या गुप्ता, श्रीमती शानू मोहनन, छायाचित्रकार श्री कांतिकुमार सोलंकी, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डॉ. प्रज्ञा सिंह, सुप्रसिद्ध कलाकार डॉ. महेश चतुर्वेदी, सामाजिक कार्यकर्ता सुश्री ममता जोगी, भिलाई महिला कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. संध्या मदन मोहन, बाल साहित्यकार श्री कमलेश चंद्राकर, अभिनव जीवन कल्याण समिति दुर्ग के अध्यक्ष श्री जगमोहन सिन्हा, मातृशक्ति फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. अलका दास, शिक्षक डॉ. प्रज्ञा सिंह, नवनीत तिवारी, जुगल किशोर साहू, धर्मेंद्र साहू, सुनील साहू मड़ियापार, केशर सिंह दीक्षित देवकर शामिल हुए। धमधा से सर्वश्री मुखराज किशोर यादव, डीपी शर्मा, ईश्वरी निर्मलकर, अशोक देवांगन, अशोक धीवर, तुलेश्वर कहार, संतोष उमरे, धर्मेंद्र यादव, उमेश सोनी, आनंद यादव, विकास राजपूत, लोकेंद्र ब्रम्हभट्ट, पीयूष ताम्रकार, रेखराम साहू, देवीलाल धीवर, केशव देवांगन, विवेकानंद ताम्रकार, किशोर कुमार साहू, अरविंद ताम्रकार, रामदेव शर्मा, भुवनेश्वर धीवर, डोमार वर्मा, सुयश ताम्रकार, किशोर साहू, दुष्यंत साहू करेली उपस्थित थे। - - कुछ केंद्रों ने महिला दिवस मनाते हुए आयोजित किए मजेदार खेलरायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से हर शनिवार को होने वाला सामूहिक राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ इस सप्ताह भी उत्साह के साथ जारी रहा। मंडल के रोहिणीपुरम, बूढ़ापारा, चौबे कालोनी, अमलीडीह, कमल विहार- लालपुर सहित अनेक केंद्रों की महिलाओं में भारी संख्या में जुटकर पाठ किया गया।आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि बूढ़ापारा केंद्र की महिलाओं ने सुहासिनी पट्टलवार के घर पर राम रक्षा स्त्रोत व हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया। इस दौरान अर्चना मोघे, दीपाली बर्वे, अपर्णा काले, नमिता शेष, सुनिता साठे, सुष्टि दंडवते, सुचिता काले, रीता लोखंडे, गीता दलाल, दीपाली करकशे, साधना गायकवाड़, सौ करकशे, शिवानी पट्टलवार, सहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं।इसी तरह रोहिणीपुरम केंद्र की महिलाओं ने एक साथ हनुमान चालीसा पाठ किया। इस मौके पर महिलाओं ने महाराष्ट्र मंडल में 28 मार्च से होने वाले वाल्मिकी राम कथा को लेकर भी आपस में चर्चा की। इस दौरान प्राची गनोदवाले, वनिता गनोदवाले, अपर्णा जोशी, चित्रा बल्की, अचला मोहरीकर, अपर्णा वराडपांडे, प्रांजल बल्लाल, मंगला पुराणकर, अलका कुलकर्णी, साधना बहिरट, मीरा कुपटकर सहित अन्य महिला सभासद उपस्थित रहीं।इसी तरह चौबे कॉलोनी केंद्र की ओर से चैत्र नवरात्रि के उपलक्ष्य में सुंदर कांड, हनुमान चालीसा, राम रक्षा स्तोत्र का मिलकर पाठ केंद्र की वरिष्ठ सदस्य अपर्णा कालेले के घर पर किया गया। इस दौरान चारुशीला देव, अक्षता पंडित, स्वाति डबली, कुंतल कालेले, नूपुर गुप्ते, सुषमा आप्टे, अनुपमा बोधनकर, संगीता निमोणकर, अल्का मराठे, श्रुति बर्वे, रोहिणी नेने, संध्या पांडे, सुधा बक्षी, माधुरी डबली, शालिनी शर्मा, सविता शर्मा, अवंती अग्निहोत्री, मंजूषा वैशंपायन, प्रभा वैशंपायन, कीर्ति हिशीकर, अंजलि वैद्य, मृदुल कालेले सहित कई श्रद्धालु महिलाएं उपस्थित रहीं।रोचक खेल में अर्चना विजेता, रेणु उप विजेताअमलीडीह केंद्र की महिलाओं ने अपराजिता शर्मा के निवास पर पाठ किया। इस दौरान हल्दी कुंकू का आयोजन भी महिलाओं ने किया। एक- दूसरे को गजरा चने की ओटी भेंट की। रोचक खेल में अर्चना भाकरे प्रथम और रेणु सिंह द्वितीय रही। इस अवसर पर अर्चना भाकरे, सरिता फड़के, अपराजिता शर्मा, अक्षरा भगाडे, विशाखा तोपखनेवाले, प्रिया काडू, रेणु सिंह, प्रेरणा मोरे, अपर्णा देशमुख, अर्चना धर्माधिकारी, मेघा जोशी, प्रेरणा सप्रे, शोभा सोनाये, कविता शर्मा, अरुणा अय्यर, प्रीति टोमे, रेणुका टोमे, रेखा पिंपलगांवकर, संध्या फुलझेले और अनेक महिलाएं इसमें उपस्थित थीं।पाठ से पहले महिला दिवस में खेले मजेदार खेलन्यू राजेंद्र नगर- कमल विहार- लालपुर केंद्र की महिलाओं ने महिला दिवस का विशेष आयोजन किया। इसमें मनोरंजक खेल खेले गए। राम रक्षा स्त्रोत और हनुमान चालीसा का सभी ने मिलकर पाठ किया गया। इस मौके पर केंद्र की ज्योति बनकर, सरिता लुलु, सुखदा लाखे, साधना धागमवार, मैथिली ठोके, तृप्ति करमरकर, मनीषा चौखंडे, मंगला मिश्रेकर, अंजलि चरपे, अलका बापट, स्मिता कायदे, नीलिमा लखपाले व कई महिला सभासद शामिल रहीं।
- बिलासपुर /जिले में बर्ड फ्लू की पुष्टि होते ही पशु चिकित्सा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। संयुक्त संचालक, पशु चिकित्सा विभाग बिलासपुर के निर्देशन में रैपिड रिस्पांस टीम का गठन कर प्रभावित क्षेत्र में तत्काल कार्रवाई की गई।टीम द्वारा संक्रमित एवं संदिग्ध क्षेत्र में मौजूद शेष बचे कुल 22,808 पक्षियों, 25,896 अंडों तथा लगभग 79 क्विंटल दाने का वैज्ञानिक विधि से नष्टीकरण किया गया, ताकि संक्रमण की श्रृंखला को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। यह कार्रवाई शासन के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सावधानीपूर्वक की गई।जिला प्रशासन द्वारा स्थिति की सतत निगरानी के लिए कलेक्टोरेट परिसर में बर्ड फ्लू कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, जो 24 घंटे सक्रिय रहेगा। आमजन से अपील की गई है कि बर्ड फ्लू से संबंधित किसी भी प्रकार की सूचना, संदेह या मृत पक्षियों की जानकारी तत्काल कंट्रोल रूम के लैंडलाइन नंबर 07752-251000 पर दें।संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा विभाग डॉक्टर जीएसएस तंवर ने बताया कि जिले में अलर्ट जारी कर दिया गया है और पशुपालकों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पोल्ट्री फार्मों की निगरानी बढ़ा दी गई है तथा संक्रमण प्रभावित क्षेत्र में आवाजाही पर भी नियंत्रण रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि समय रहते उठाए गए इन कदमों से बर्ड फ्लू के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और आमजन को घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सावधानी और जागरूकता बनाए रखने की जरूरत है।
- -पिछड़ा वर्ग के सामाजिक विसंगतियों को दूर करना- छ.ग.पि. वर्ग आयोग अध्यक्ष श्री निषादरायपुर /मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग के आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए व्यापक सर्वेक्षण अत्यंत आवश्यक है, जिसे सांख्यिकीय विभाग को सौंपा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि पंचायत स्तर पर प्रतिवर्ष सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा देशभर के पिछड़ा वर्ग आयोगों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर साझा मुद्दों और प्रस्तावों पर चर्चा की जाए। छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सभागार में आज एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मध्यप्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया मुख्य अतिथि के रूप में उक्त विचार व्यक्त किए। उन्होंने अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान आयोग के कार्यों की समीक्षा की तथा विभिन्न महत्वपूर्ण सुझाव दिए।छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री नेहरू राम निषाद ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल विभिन्न जातियों की सामाजिक स्थिति, ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में विविध रूप में देखने को मिलती है। उन्होंने सामाजिक विसंगतियों को दूर करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया।बैठक में पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के अध्यक्ष श्री आर.एस. विश्वकर्मा, उपाध्यक्ष श्रीमती चंद्रकांति वर्मा, मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष श्री भरत लाल मटियारा, उपाध्यक्ष डॉ. लखन धीवर, रजककार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सचिव द्वारा पावर पाइंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से प्रस्तुतीकरण के माध्यम से छत्तीसगढ़ में पिछड़ा वर्ग के हितों के संरक्षण और संवर्धन हेतु किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने आयोग की संरचना, शक्तियों तथा प्राप्त शिकायतों एवं जाति समावेशन से जुड़े प्रकरणों की विस्तृत जानकारी दी गई। बैठक में अन्य पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे और पिछड़ा वर्ग के उत्थान के लिए समन्वित प्रयासों पर बल दिया।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ में प्रयोगशाला परिचारक भर्ती-2023 की प्रक्रिया के बाद अंततः अंतिम चयन सूची जारी कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा कुल 430 पदों पर भर्ती के लिए जारी इस प्रक्रिया में एक लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने भाग लिया था ।भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत 4 अगस्त 2023 को हुई थी, जब रिक्त पदों को भरने की स्वीकृति दी गई। इसके बाद 5 अक्टूबर 2023 को भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया, जिसमें 1,28,685 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। परीक्षा का आयोजन 3 अगस्त 2025 को किया गया, जिसमें 1,12,792 परीक्षार्थी शामिल हुए।परीक्षा परिणाम 18 सितंबर 2025 को घोषित किया गया, जिसके बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 8 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 23 फरवरी 2026 तक चली। सत्यापन के आधार पर 2106 अभ्यर्थियों को आगे की प्रक्रिया के लिए चयनित किया गया।इसके बाद 13 मार्च से 23 मार्च 2026 तक अभ्यर्थियों से दावा-आपत्ति मंगाई गई। कुल 53 अभ्यर्थियों ने आपत्तियां दर्ज कराईं, जिनका निराकरण कर 24 मार्च 2026 को अंतिम सूची तैयार की गई। अंततः 25 मार्च 2026 को जारी अंतिम चयन सूची के अनुसार 430 अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। इनमें विभिन्न वर्गों के साथ-साथ दिव्यांगजनों के लिए भी 30 पद आरक्षित रखे गए हैं, जिनमें 15 पद OL (वन लेग) और 15 पद HH (हियरिंग हैंडीकैप्ड) श्रेणी के लिए निर्धारित हैं।चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग 30 मार्च और 2 अप्रैल 2026 को आयोजित की जाएगी, जिसके बाद उन्हें प्रदेश के 285 महाविद्यालयों में आवश्यकता के अनुसार पदस्थ किया जाएगा। नियुक्ति आदेश शीघ्र जारी किए जाने की जानकारी विभाग ने दी है। इस भर्ती प्रक्रिया के पूर्ण होने से लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
- -उपमुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों का किया भूमिपूजन और लोकार्पणरायपुर। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने नगर पंचायत बोड़ला को विकास की नई दिशा देते हुए 6 करोड़ रुपए से अधिक से विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों की बड़ी सौगात दी। स्थानीय हॉकी खेल मैदान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना कर विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर भवन पहुंचकर कार्यों का लोकार्पण भी किया।इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि नगरीय क्षेत्रों को सुविधाओं से सुसज्जित करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि खेल सुविधाओं के विस्तार, बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण और सामुदायिक विकास को गति देने के उद्देश्य से किए जा रहे ये कार्य क्षेत्र के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने कहा कि यह सौगात बोड़ला के आने वाले वर्षों को विकास की दिशा प्रदान करेगी। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पंचायत बोड़ला के अध्यक्ष श्री विजय पाटिल, श्री नितेश अग्रवाल, उपाध्यक्ष नगर पंचायत श्री लव निर्मलकर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्री विदेशी राम धुर्वे, श्री नन्द श्रीवास, श्री मोहन धुर्वे, श्री राम किंकर वर्मा, श्री एम. डी. ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि बोड़ला नगर में अब बांध से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की गई है, जहां पानी फिल्टर प्लांट के माध्यम से शुद्ध होकर घर-घर तक पहुंचेगा। उन्होंने इसे नगरवासियों की लंबे समय से चली आ रही महत्वपूर्ण मांग की पूर्ति बताया और कहा कि ग्रेविटी आधारित यह जल व्यवस्था न केवल सुविधाजनक है, बल्कि टिकाऊ और प्रभावी भी है। पेयजल की बेहतर व्यवस्था और नगर को उन्नत बनाना शासन की प्राथमिकता है।उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में कभी नक्सली जंगलों में बंदूक लेकर घूमते थे, लेकिन अब नक्सल पुनर्वास नीति के तहत वे मुख्यधारा में लौट रहे हैं। उन्होंने बताया कि जो लोग पहले हिंसा के रास्ते पर थे, वे आज लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझने के लिए विधानसभा तक पहुंच रहे हैं और वहां की कार्यवाही देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की घोषणा और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद समाप्त करने के संकल्प को प्रदेश में मजबूती से लागू किया गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस दिशा में कार्य करने के लिए पूरी स्वतंत्रता दी है। उन्होंने बताया कि अब तक 600 से अधिक पुनर्वासित नक्सली विधानसभा का भ्रमण कर चुके हैं और लोकतंत्र की प्रक्रिया को करीब से समझ रहे हैं, जबकि ढाई हजार से अधिक नक्सली पुनर्वास योजना के तहत मुख्यधारा में लौट चुके हैं।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद पहली बार बाहरी व्यक्ति की पहचान के लिए सुनियोजित प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत प्रत्येक जिले में टास्क फोर्स का गठन किया गया और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर भी जारी किया गया। उन्होंने बताया कि प्राप्त सूचनाओं के आधार पर बाहरी व्यक्ति का चिन्हांकन कर उनकी पहचान सुनिश्चित करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने नगर पंचायत बोड़ला में 512.56 लाख रुपए की लागत से विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इनमें वार्ड क्रमांक 02 में 146.83 लाख रुपए की लागत से उन्नत (हॉकी) खेल मैदान निर्माण प्रमुख है। इसके अलावा वार्ड क्रमांक 10 में विवेकानंद तालाब से निकासी नाला तक 48.95 लाख रुपए की आर.सी.सी. नाली एवं कांस कल्वर्ट निर्माण, 28.53 लाख रुपए की लागत से शौचालय निर्माण, 6.00 लाख रुपए से सामुदायिक भवन के पास प्रवेश द्वार निर्माण तथा 18.20 लाख रुपए से सामुदायिक भवन का अतिरिक्त निर्माण एवं नवीनीकरण कार्य शामिल हैं। इसी क्रम में 97.42 लाख रुपए से राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्ग मंदिर से स्टेडियम तक सी.सी. रोड एवं आर.सी.सी. नाली निर्माण, 13.80 लाख रुपए से ओवरहेड टैंक निर्माण, 4.62 लाख रुपए से शेड निर्माण, 8.90 लाख रुपए से पेवर ब्लॉक (फुटपाथ) निर्माण, 6.40 लाख रुपए से विवेकानंद तालाब के पास हॉल निर्माण, 9.27 लाख रुपए से हाई मास्ट लाइट स्थापना, 72.74 लाख रुपए से एन.एच.-30 पुलिया से विवेकानंद सरोवर तक नाली एवं रोड चौड़ीकरण, 46.90 लाख रुपए से बाउंड्रीवाल निर्माण तथा वार्ड क्रमांक 06 में 4.00 लाख रुपए से चौक निर्माण कार्य शामिल हैं।उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने इस अवसर पर 90 लाख रुपए से अधिक की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण भी किया। इसके अंतर्गत 73.44 लाख रुपए से निर्मित डॉ. भीमराव अंबेडकर सर्वसुविधायुक्त भवन का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही 10.00 लाख रुपए की लागत से यादव समाज के पास निर्मित सामुदायिक भवन तथा 6.50 लाख रुपए से वार्ड क्रमांक 14 में साहू समाज के पास पानी टंकी के समीप निर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण भी किया गया। इन कार्यों के पूर्ण होने से नगर पंचायत बोड़ला में नागरिकों को बेहतर आधारभूत एवं सामुदायिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
- रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज लोकभवन में यूनीसेफ के इमेजिन वेंचर के प्रथम भारतीय पुरस्कार विजेता एवं एलियन इनोवेशन्स हैदराबाद के संस्थापक श्री रवि किरण ने सौजन्य भेंट की। इस दौरान उन्होंने दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए विकसित नवीनतम सहायक उपकरण का प्रदर्शन किया और इसकी विशेषताओं की जानकारी दी।श्री रवि किरण ने बताया कि यह उपकरण दृष्टिबाधित लोगों को दैनिक जीवन में अधिक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनने में सहायता करेगा। भेंट के दौरान उन्होंने राज्य में दृष्टिबाधितजनों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आगामी लॉन्च कार्यक्रम के लिए राज्यपाल को आमंत्रित भी किया।राज्यपाल ने इस नवाचार की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस अवसर पर एलियन इनोवेशन्स की प्रमुख सुश्री हर्षिता भी उपस्थित थी।
- -बलरामपुर में मधुमक्खी पालन जिला स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्नरायपुर / मधुमक्खी पालन शहद, मोम और पराग उत्पादन के लिए एक अत्यंत लाभदायक कृषि-आधारित व्यवसाय है। भारत में वैज्ञानिक तकनीक से मधुमक्खियों को बक्सों में पालकर, मौसमी फूलों के अनुसार स्थानांतरित कर बड़े पैमाने पर शहद निकाला जाता है, जो किसानों की आय बढ़ाने का एक प्रमुख साधन है। मधुमक्खी पालन अपनाने पर किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।कृषि आधारित आय को सुदृढ़ करने और किसानों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य स्तर पर मधुमक्खी पालन एवं शहद उत्पादन विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले भर से आए किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।जिला पंचायत सीईओ बलरामपुर श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर ने कहा कि वर्तमान समय में किसानों को पारंपरिक एकल फसल पद्धति को आगे बढ़ते हुए फसल विविधिकरण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन एवं मधुमक्खी पालन जैसे कृषि आधारित व्यवसाय अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।उप संचालक कृषि श्री रामचंद्र भगत ने फसल चक्र एवं विविधिकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इससे उत्पादन लागत कम होती है तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी कम किया जा सकता है। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रमुख डॉ. जी. के. निगम ने बताया कि मधुमक्खी पालन एक लाभकारी व्यवसाय है, जिसे कम पूंजी और सीमित श्रम में शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जलवायु इस व्यवसाय के लिए अनुकूल है, जिससे लघु एवं सीमांत किसानों को आय का बेहतर विकल्प मिल सकता है।प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञ प्राध्यापक डॉ. जी. पी. पैकरा ने वैज्ञानिक पद्धति से मधुमक्खी पालन एवं गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन की विस्तृत जानकारी दी। उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता श्री परमेश्वर गोरे ने बताया कि मधुमक्खी पालन से शहद के अलावा मोम, रॉयल जेली और प्रोपोलिस जैसे बहुमूल्य उत्पाद भी प्राप्त होते हैं, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। विशेषज्ञ डॉ. सचिन जायसवाल ने बताया कि पारंपरिक खेती के साथ मधुमक्खी पालन अपनाने पर किसानों की आय में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है। वैज्ञानिक श्री अनिल कुमार सोनपाकर ने तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।अनुभवी मधुमक्खी पालक कृषक श्री बैद्यनाथ ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किसान अपने खेत में 5 से 10 मधुमक्खी पेटियां स्थापित कर आसानी से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों को भी इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षण में भाग लेने वाले किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस जिला स्तरीय प्रशिक्षण में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, वैज्ञानिकों सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
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-दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए पेश की 'Navinaut' और 'SignX' तकनीक
रायपुर। यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा सम्मानित 'ग्लोबल यूथ इनोवेटर' और 'एलियन इनोवेशंस' के 21 वर्षीय संस्थापक रवि किरण ने छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाक़ात में उनके साथ स्टार्टअप में ऑपरेशंस और पार्टनरशिप की जिम्मेदारी संभाल रहीं हर्षिता भी उपस्थित थीं। विशेष बात यह है कि ये दोनों ही युवा अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ-साथ इस नवाचार के जरिए समाज में बदलाव ला रहे हैं।इस अहम मुलाक़ात का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों (PwDs) को सशक्त बनाने और उनके दैनिक जीवन को अधिक स्वतंत्र व सुलभ बनाने के लिए विकसित किए गए अत्याधुनिक उपकरणों— 'नेविनॉट' (Navinaut) और 'साइनएक्स' (SignX)— का प्रदर्शन करना था।बैठक के दौरान सचिव श्री यादव के समक्ष इन 'मेड इन इंडिया' तकनीकों की कार्यप्रणाली और हजारों दिव्यांगों के जीवन में इनके सकारात्मक प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई। रवि ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए भारत का पहला टॉर्च के आकार का कॉम्पैक्ट सहायक उपकरण 'नेविनॉट' प्रस्तुत किया। यह उपकरण बिना पारंपरिक छड़ी के बाधा-मुक्त और सुरक्षित रूप से चलने में मदद करता है। इसमें सटीक रूप से बाधाओं का पता लगाने के लिए एडवांस्ड लिडार (LiDAR) सेंसर और अलर्ट के लिए टैक्टाइल वाइब्रेशन की सुविधा है। इसके साथ ही श्रवण एवं वाक् बाधित (मूक-बधिर) व्यक्तियों के लिए 'साइनएक्स' (SignX) का भी प्रदर्शन किया गया। यह स्मार्ट डेस्क-आधारित एआई (AI) उपकरण बिना किसी दुभाषिए के रीयल-टाइम संवाद को संभव बनाता है। यह 97.6 प्रतिशत सटीकता के साथ सांकेतिक भाषा को पहचानकर उसे तुरंत आवाज में बदल देता है, और 'स्पीच-टू-टेक्स्ट' फीचर के जरिए सामने वाले की बातों को स्क्रीन पर दिखाता है।समाज कल्याण सचिव श्री भुवनेश यादव ने इन नवाचारों की गहरी सराहना करते हुए बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के माध्यम से दिव्यांगजनों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना शासन की प्राथमिकताओं में से एक है। श्री यादव ने इन उपकरणों की व्यावहारिक उपयोगिता को देखते हुए भविष्य में इन्हें प्रोत्साहित करने और सार्वजनिक स्थानों, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों व शिक्षण संस्थानों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी सार्थक विचार-विमर्श किया। यह बैठक तकनीकी नवाचारों और सरकारी प्रयासों के समन्वय से दिव्यांग समुदाय के लिए एक समावेशी, समान और सुलभ वातावरण तैयार करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है। -
-बस्तर अब भय और हिंसा के अतीत से बाहर निकलकर शांति, विकास और संभावनाओं की नई दिशा में आगे बढ़ रहा- उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा
-बस्तर की जल, जंगल और जमीन बस्तर के लोगों की है, उसका संरक्षण एवं विकास में स्थानीय समुदाय की प्रमुख भूमिका होगी
रायपुर / जगदलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने दृढ़ विश्वास के साथ कहा कि राज्य सरकार, केंद्रीय एजेंसियों और सुरक्षा बलों के समन्वित एवं सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूर्णतः मुक्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि बस्तर और समूचे छत्तीसगढ़ के सामाजिक, आर्थिक और मानवीय पुनर्जागरण की दिशा में एक ऐतिहासिक परिवर्तन है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर नारायणपुर विधायक एवं मंत्री श्री केदार कश्यप, जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंहदेव, डीजीपी श्री अरुण देव गौतम, पुलिस महानिदेशक एंटी नक्सल ऑपरेशन श्री विवेकानंद, नक्सल उन्मूलन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, एडीजी सीआरपीएफ, बस्तर कमिश्नर, आईजी सुंदरराज पी., बीजापुर के पुलिस अधीक्षक सहित विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य सुरक्षा बलों के अधिकारी उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि अगस्त 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा घोषित समय-सीमा के अनुरूप राज्य सरकार ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत कार्य किया, जिसका सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है। इसी क्रम में हाल ही में डीकेजेडसी स्तर के नक्सली पापा राव ने अपने साथियों एवं हथियारों सहित पुनर्वास कर मुख्यधारा में वापसी की है। यह घटना न केवल सुरक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि अब नक्सल संगठन का शीर्ष ढांचा भी कमजोर पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि बस्तर के समाज ने भी खुले मन से इन पुनर्वासित लोगों को स्वीकार कर सामाजिक समरसता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है।उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में लगभग 3 हजार से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर पुनर्वास किया है, जिसमें सीसी मेंबर से लेकर विभिन्न स्तरों के कैडर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 2 हजार से अधिक नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है तथा लगभग 500 से अधिक नक्सली मुठभेड़ों में निष्प्रभावी (न्यूट्रलाइज) किए गए हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर 5000 से अधिक सशस्त्र कैडर में कमी आई है, जो नक्सल संगठन की रीढ़ को कमजोर करने वाला निर्णायक कारक सिद्ध हुआ है। वर्तमान स्थिति में डीकेजेडसी स्तर का कोई सक्रिय माओवादी छत्तीसगढ़ में शेष नहीं है और केवल 30 से 40 की सीमित संख्या में नक्सली उत्तर एवं दक्षिण के दूरस्थ क्षेत्रों में बचे हैं, जिनके भी शीघ्र पुनर्वास करने की संभावना व्यक्त की गई है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल सुरक्षा अभियानों का परिणाम नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और पुनर्वास नीति की सफलता का भी परिचायक है।
उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि बस्तर संभाग सहित कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद जैसे जिले, जो कभी नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहे थे, अब पूरी तरह इस समस्या से मुक्त हो चुके हैं। बस्तर का लगभग 95 प्रतिशत से अधिक भौगोलिक क्षेत्र अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुका है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के अद्वितीय साहस, रणनीतिक दक्षता और कठिन परिस्थितियों में निरंतर किए गए प्रयासों का परिणाम है। केंद्रीय और राज्य के सुरक्षा बलों के जवानों ने विषम परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए अद्भुत पराक्रम का परिचय दिया है, जिसके लिए पूरा प्रदेश उनका ऋणी है। उन्होंने इस अभियान में समाज की सहभागिता को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हमारे बस्तर के पत्रकार साथियों द्वारा किए गए प्रयास, पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका तथा बस्तर के स्थानीय मुरिया, मारिया, गोंड और हलबा समाज के प्रमुखों का सहयोग इस अभियान की सफलता के प्रमुख आधार रहे हैं। इसके साथ ही पत्रकारों ने भी जनजागरण, संवाद और विश्वास निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इन सभी प्रयासों के कारण बड़ी संख्या में नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा को अपनाया, जिससे अनेक जिंदगियां बच सकीं और बस्तर को भय और रक्तपात के वातावरण से बाहर निकालने में सफलता मिली। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार केवल नक्सलवाद के उन्मूलन तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर के सर्वांगीण विकास के लिए भी समान रूप से प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि पुनर्वास नीति के तहत बस्तर ओलंपिक का आयोजन कर युवाओं को खेल के क्षेत्र में अवसर प्रदान किया गया, जिससे उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा मिली। इसी प्रकार बस्तर पंडुम के माध्यम से स्थानीय संस्कृति, परंपरा और लोकजीवन को संरक्षित और प्रोत्साहित करने का कार्य किया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बस्तर के युवा आने वाले समय में राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराएंगे।उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर के आंतरिक क्षेत्रों में स्थापित लगभग 400 सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से विकास केंद्रों में परिवर्तित किया जाएगा। भविष्य में ये कैंप थाना, स्कूल, अस्पताल तथा लघु वनोपज संग्रहण एवं प्रसंस्करण केंद्रों के रूप में कार्य करेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध होंगे तथा क्षेत्र में स्थायी विकास की आधारशिला मजबूत होगी।उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के 'लाल आतंक से मुक्ति' के संकल्प, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा निर्धारित समय-सीमा और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में यह अभियान निरंतर सफलता की ओर अग्रसर है। उन्होंने इसरो, एनटीआरओ, आईटीबीपी और एनएसजी जैसी संस्थाओं द्वारा प्राप्त तकनीकी सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया, जिसने अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया।अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि बस्तर अब भय और हिंसा के अतीत से बाहर निकलकर शांति, विकास और संभावनाओं की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या भ्रामक प्रचार से बचें और विकास की इस यात्रा में सहभागी बनें। उन्होंने दोहराया कि जल, जंगल और जमीन बस्तर के लोगों का है और उसके संरक्षण एवं विकास में स्थानीय समुदाय की ही प्रमुख भूमिका होगी। उपमुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास के साथ कहा कि निर्धारित समय-सीमा तक छत्तीसगढ़ सशस्त्र नक्सलवाद से मुक्त होकर देश के लिए शांति, विकास और सुशासन का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगा।
- -सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष किया आत्मसमर्पणजगदलपुर । नक्सली लीडर पापा राव अपने अन्य साथियों के साथ आज 25 मार्च को बस्तर संभाग मुख्यालय, जगदलपुर स्थित शौर्य भवन, पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर लालबाग, जगदलपुर में दोपहर लगभग 1:30 बजे आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए।पूना मारगेम ''पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के अंतर्गत डीकेएसजेडसी सदस्य पापा राव, डीवीसीएम प्रकाश मड़वी, डीवीसीएम अनिल ताती सहित कुल 18 माओवादी कैडर, सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों तथा डीजीपी अरूण देव गौतम एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, बस्तर रेंज के आईजी सुन्दरराज पी. एवं बीएसएफ के एडीजी तथा सीआरपीएफ के आई सहित अन्य पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों अधिकारियों तथा बस्तर संभाग आयुक्त डोमन सिंह के समक्ष 18 घातक हथिारों के साथ आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल गए।आज आत्मसमर्पण करने वाले पापा राव सहित अन्य 17 माओवादियों को छत्तीसगढ़ पुलिस एवं केन्द्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों ने संविधान की पुस्तक भेंटकर आत्मसमर्पण कराया तथा समाज प्रमुखों ने इन माओवादियों को गुलाब के पुष्प भेंट कर समाज की मुख्यधारा में स्वागत किया।उल्लेखनीय है कि हिंसा त्याग कर समाज की मुख्यधारा में प्रवेश करने वाले कैडरों द्वारा पुनर्वास की प्रक्रिया के दौरान 8 एके-47, 01 इंसास राइफल, 01 एलएलआर राइफल, 04 नग .303, 02 सिंगल शॉट, 01 नग 9 एमएम पिस्टल, तथा 01 बीजीएल लॉंचर तथा 5 पांच रूपये नकदी सहित भारी संख्या के उक्त हथियारों के गोलियां भी पुलिस अधिकारियों को सौंपे।
- 0- पानी फैक्ट्रियों में मिली गंदगी, कर्मचारियों के लिए हेड कैप और ग्लव्स अनिवार्य0- पानी और जूस के नमूनों की जांच, 180 बोरी पानी पाऊच जप्तदुर्ग. भीषण गर्मी के आगमन को देखते हुए जिला खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा जिले की पानी फैक्ट्रियों में सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के निर्देशानुसार खाद्य नियंत्रक एवं औषधि प्रशासन के मार्गदर्शन में विभाग ने विभिन्न क्षेत्रों में औचक निरीक्षण किया। इस कार्यवाही के दौरान विगत 19 मार्च को आर.एस. इंटरप्राइसेस जामुल और पाल एक्वा छावनी भिलाई से पानी की बोतलों के नमूने लिए गए। वहीं, 20 मार्च को कुम्हारी स्थित आई.बी. साल्युसन में नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर 180 बोरी पानी पाऊच जप्त किए गए।इसके अतिरिक्त, 23 मार्च को अमर बेवरेजेस कैलाश नगर भिलाई से पानी की बोतल और ज्योति इंडस्ट्रीज जेवरा सिरसा से लीची जूस के नमूने संकलित कर जांच हेतु राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे गए हैं। जांच के दौरान वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्रीमती रिचा शर्मा और खाद्य सुरक्षा अधिकारी श्री नारद राम कोमरे ने फर्मों के संचालकों को कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र और पानी की शुद्धता की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। साथ ही, स्वच्छता बनाए रखने और कार्य के दौरान कर्मचारियों को हैंड ग्लव्स व हेड कैप अनिवार्य रूप से पहनने की हिदायत दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांत खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 (विनियम 2011) के तहत कड़ी कार्यवाही की जाएगी। गर्मी के सीजन को देखते हुए नमूनों के संकलन और निरीक्षण का यह कार्य आने वाले दिनों में भी निरंतर जारी रहेगा।--
- 0- दूध व्यवसाय से हो रही अच्छी आमदनीदुर्ग. ग्राम पंचायत महमरा की रहने वाली श्रीमती अनारकली यादव एक साधारण ग्रामीण महिला हैं, पति श्री रामेश्वर यादव के साथ वे वर्षों से पशुपालन और कृषि कार्य के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही थीं। श्रीमती अनारकली के पास पहले से कुछ गौधन था, जो उनके जीवनयापन का मुख्य आधार था। लेकिन पशुओं के लिए उचित व्यवस्था न होने के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। पशुओं को कच्चे शेड में रखा जाता था, जहां न तो साफ-सफाई संभव थी और न ही मौसम से सुरक्षा। बारिश के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती थी। पशुओं को कभी खुले में रखना पड़ता, तो कभी कीचड़ और गंदगी में। इससे पशुओं का स्वास्थ्य बिगड़ता और दूध उत्पादन भी प्रभावित होता था।अनारकली लंबे समय से एक पक्के पशु शेड का सपना देख रही थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। आखिरकार उन्होंने हिम्मत जुटाई और अपनी समस्या ग्राम सभा में रखी। उनकी बात को गंभीरता से लेते हुए ग्राम पंचायत ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत उनके लिए पशु शेड निर्माण को स्वीकृति दी। करीब 0.95 लाख रुपये की लागत से पक्का पशु शेड बनाया गया। निर्माण के दौरान ग्राम पंचायत का पूरा सहयोग मिला और इस प्रक्रिया में अनारकली को मजदूरी भी प्राप्त हुई, जिससे उनकी आय में तुरंत सहारा मिला। शेड बनने के बाद जैसे उनकी जिंदगी बदल गई। अब उनके पशुओं को सुरक्षित, साफ और व्यवस्थित आश्रय मिलने लगा। इसका सीधा असर पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर पड़ा। पहले जहां उनके पास लगभग 11 पशु थे, वहीं अब उनकी संख्या बढ़कर 35 के करीब पहुंच गई है।आज अनारकली केवल खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूध व्यवसाय से भी अच्छी आमदनी कमा रही हैं। उनकी वार्षिक आय अब 2 लाख रुपये से अधिक हो गई है। श्रीमती अनारकली बताती है कि पहले हर समय पशुओं की चिंता बनी रहती थी। बारिश, ठंड, हर मौसम में परेशानी होती थी। पक्का शेड बनवाने का सपना था, लेकिन पैसों की कमी आड़े आती थी। मनरेगा योजना से यह संभव हुआ। शेड का निर्माण होने से पशु सुरक्षित हैं, उनकी संख्या भी बढ़ रही है और आमदनी भी। इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया।
- दुर्ग. कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए विधानसभा क्षेत्र साजा में विकास कार्य के लिए प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। साजा विधानसभा क्षेत्र विधायक श्री ईश्वर साहू द्वारा अनुशंसित इस कार्य के लिए 6.00 लाख रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वीकृत राशि से विकास खण्ड धमधा के अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरिया में सेन भवन के पास अहाता निर्माण का कार्य कराया जाएगा। इस कार्य के संपादन के लिए क्रियान्वयन एजेंसी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत धमधा को नियुक्त किया गया है।--
- दुर्ग. कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने विभिन्न दुर्घटनाओं में असमय मृत्यु का शिकार हुए व्यक्तियों के परिजनों के लिए कुल 16 लाख रूपए की आर्थिक सहायता अनुदान राशि स्वीकृत की है । प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुभाग दुर्ग के अंतर्गत ग्राम मतवारी निवासी श्री पप्पू लाल चौधरी की 07 फरवरी 2025 को शिवनाथ नदी के महमरा एनीकेट में नहाते समय डूबने से मृत्यु हो गई थी । इसी प्रकार, भिलाई-03 अनुभाग के ग्राम लिमतरा निवासी श्री जगतराम यादव की 27 सितम्बर 2021 को गांव के डबरी तालाब में डूबने से मृत्यु हुई।अन्य प्रकरणों में, ग्राम सिकोला निवासी श्री गुरुप्रकाश साहू की 27 मार्च 2024 को सिकोला तालाब में डूबने से और सुपेला भिलाई निवासी श्री लोहित राव की 01 नवम्बर 2018 को रायपुर के महादेव घाट स्थित खारून नदी में नहाते समय डूबने से मृत्यु हो गई थी। कलेक्टर श्री सिंह द्वारा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के प्रावधानों के अनुरूप स्व. पप्पू लाल चौधरी की पत्नी श्रीमती रेखा चौधरी, स्व. जगतराम यादव के पुत्र श्री कोमल यादव, स्व. गुरुप्रकाश साहू की पत्नी श्रीमती शालिनी साहू और स्व. लोहित राव की माता श्रीमती वेंकट रत्ना को क्रमशः 4-4 लाख रूपए की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है ।
- बिलासपुर. औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग द्वारा औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने एवं दुर्घटनाओं की संभावनाओं को शून्य करने के उद्देश्य से 25 मार्च 2026 को सवेरे 10 बजे से देवकीनंदन सभागृह, बिलासपुर में एकदिवसीय जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुक्त बिलासपुर संभाग सुनील जैन करेंगे। इस अवसर पर कलेक्टर संजय अग्रवाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे तथा आईएचएस रायपुर के संचालक मनीष श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न स्पंज आयरन एवं औद्योगिक इकाइयों द्वारा सुरक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं सकारात्मक पहलुओं पर प्रस्तुति दी जाएगी। साथ ही नुक्कड़ नाटक के माध्यम से श्रमिकों एवं प्रबंधन को सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं के प्रति जागरूक किया जाएगा। इस एक दिवसीय प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य औद्योगिक इकाइयों में “शून्य दुर्घटना” की अवधारणा को साकार करना है। पावर पॉइंट प्रस्तुतियों एवं संवादात्मक सत्रों के माध्यम से उपस्थित प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिससे वे अपने कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन कर सकें। कार्यक्रम में बिलासपुर सहित छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से औद्योगिक इकाइयों के प्रबंधन एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में भाग लेंगे, जिससे औद्योगिक सुरक्षा के प्रति व्यापक जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।--



























