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- -भोरमदेव शक्कर कारखाना के अंशधारी सदस्य बनने पर बोले-अब यह कारखाना सचमुच हमारा अपना हैरायपुर ।वर्षों से भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना में गन्ना बेचने वाले ग्राम सूरजपुरा के किसान श्री रामरतन जायसवाल का अंशधारी सदस्य बनने का सपना आखिरकार साकार हो गया। शेयर प्रमाण पत्र मिलने के बाद उन्होंने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें ऐसा लगता है जैसे यह कारखाना वास्तव में उनका अपना कारखाना है। उनका कहना है कि अंशधारी सदस्य बनने से उन्हें सम्मान के साथ-साथ कारखाना से मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं का लाभ भी मिलेगा।श्री रामरतन जायसवाल पिछले कई वर्षों से गन्ने की खेती कर रहे हैं और अपनी उपज कबीरधाम जिले के भोरमदेव सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना राम्हेपुर में विक्रय करते रहे हैं। वे लंबे समय से कारखाना के अंशधारी सदस्य बनने की इच्छा रखते थे। जब सरकार की पहल पर गैर-अंशधारी किसानों को भी शेयर प्रमाण पत्र देकर सदस्य बनाया गया, तब उनकी वर्षों पुरानी यह इच्छा पूरी हो गई। वे बताते हैं कि शेयर प्रमाण पत्र मिलने के बाद मुझे ऐसा लग रहा है कि अब यह कारखाना सचमुच हमारा अपना कारखाना है। अब हम केवल गन्ना बेचने वाले किसान नहीं, बल्कि कारखाना के अंशधारी सदस्य भी हैं। इससे कारखाना के विकास में हमारी भागीदारी और जिम्मेदारी दोनों बढ़ी हैं। श्री जायसवाल ने बताया कि अंशधारी सदस्य बनने से अब उन्हें कारखाना की ओर से मिलने वाली विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिलेगा। साथ ही, उन्हें रियायती दर पर शक्कर भी उपलब्ध होगी, जिससे परिवार को सीधा लाभ मिलेगा। उनका मानना है कि यह निर्णय हजारों गन्ना उत्पादक किसानों के हित में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से लंबित किसानों की मांग पूरी होने से उनमें नया उत्साह आया है। अब किसान अधिक गन्ना उत्पादन कर कारखाना को मजबूत बनाने के लिए और अधिक प्रेरित होंगे।
- - प्रति एकड़ 15 हजार रूपए आदान सहायता से मिला प्रोत्साहन- मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभारराजनांदगांव । राज्य शासन द्वारा किसानों को फसल चक्र अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत धान के स्थान पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15 हजार रूपए की आदान सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना से प्रेरित होकर राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम रीवागहन (घुमका) के किसान श्री गोकुल वर्मा ने इस वर्ष अपने खेत में सोयाबीन की खेती शुरू की है। लगभग 9 एकड़ कृषि भूमि के स्वामी श्री गोकुल वर्मा पहले मुख्य रूप से धान की खेती करते थे। इस वर्ष उन्होंने ढाई एकड़ क्षेत्र में सोयाबीन की बुआई की है।किसान श्री गोकुल वर्मा ने बताया कि उनके खेत के कुछ हिस्सों में अल्प वर्षा एवं अन्य कारणों से धान की फसल को नुकसान पहुंचा था। पिछले वर्ष करीब 4 एकड़ धान की फसल खराब हो गई थी। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारियों ने उन्हें फसल चक्र अपनाने और सोयाबीन की खेती करने की सलाह दी। किसान श्री वर्मा ने बताया कि उन्हें कृषि विभाग के अधिकारियों से योजना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने शासन की फसल चक्र प्रोत्साहन योजना का लाभ लेने का निर्णय लिया। उन्हें सोयाबीन का बीज भी कृषि विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराया गया, जिससे उन्हें खेती शुरू करने में सुविधा मिली। उन्होंने बताया कि सोयाबीन की खेती वाले खेत में पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था की गई है, जिससे अधिक वर्षा होने पर भी फसल को नुकसान की संभावना नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण से खेती अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनेगी।किसान श्री वर्मा ने बताया कि खरीफ के बाद वे रबी मौसम में लगभग 4 से 5 एकड़ क्षेत्र में चना की खेती करते हैं। इस वर्ष कुछ क्षेत्र में सरसों की खेती करने की भी योजना है। उन्होंने कहा कि एक ही फसल पर निर्भर रहने के बजाय फसल चक्र अपनाने से जोखिम कम होता है और आय के नए अवसर प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा प्रति एकड़ 15 हजार रूपए की आदान सहायता किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोत्साहन है। जिन किसानों के खेतों में धान की खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां नहीं हैं, उन्हें भी फसल चक्र अपनाकर सोयाबीन जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करनी चाहिए और शासन की योजना का अधिक से अधिक लाभ लेना चाहिए। राज्य सरकार की इस किसान हितैषी पहल की सराहना करते हुए किसान श्री गोकुल वर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह योजना किसानों को खेती में नवाचार अपनाने तथा उनकी आय बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
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- ग्राम करियाटोला सहित अन्य ग्रामों में रेत के अवैध उत्खनन पर की गई कार्रवाई
- खनिज रेत के अवैध परिवहन, उत्खनन एवं भण्डारण के कुल 52 प्रकरणों में कार्रवाई कर 18 लाख 95 हजार 600 रूपए का अर्थदण्ड वसूला गया
राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव के निर्देशानुसार जिले में खनिज का अवैध उत्खनन, भण्डारण एवं परिवहन करने वालों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में खनिज एवं राजस्व विभाग के संयुक्त दल द्वारा डोंगरगांव विकासखंड के ग्राम करियाटोला सहित अन्य ग्रामों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान ग्राम करियाटोला में शमशान घाट के पास डोंगरगांव निवासी यशवंत साहू के स्वामित्व के ग्रीन नेटजाली से घिरे भूमि पर लगभग 9 टैक्टर ट्राली रेत रखा हुआ पाया गया। भूमि स्वामी यशवंत साहू द्वारा रेत के संबंध में कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करने पर नोटिस जारी किया। इसी तरह डोंगरगांव क्षेत्र से लगे ग्राम करियाटोला-कोहका रोड मटिया के पास शासकीय व निजी भूमि पर अवैध रूप से भण्डारित लगभग 5 हाईवा रेत 3 स्थानों पर रखा पाया गया। जिसे जेसीबी एवं हाईवा के माध्यम से लोड कर शिवनाथ नदी में खुज्जी पुल के पास डाला गया।
खनि अधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में खनिज रेत के अवैध परिवहन, उत्खनन एवं भण्डारण के कुल 52 प्रकरणों में कार्रवाई कर 18 लाख 95 हजार 600 रूपए का अर्थदण्ड वसूला गया है। जिसमें खनिज रेत के अवैध परिवहन के 41 प्रकरणों में 10 लाख 33 हजार 200 रूपए, अवैध उत्खनन के 9 प्रकरणों में 7 लाख 20 हजार 600 रूपए तथा अवैध भंडारण के 2 प्रकरणों में 1 लाख 41 लाख 800 रूपए का अर्थदण्ड वसूला गया है। प्रकरणों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है। खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन, भण्डारण की रोकथाम के लिए लगातार गस्त व निगरानी की जा रही है। - -21 राज्यों के बीच छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अभिनव पवेलियन को मिला राष्ट्रीय सम्मान- तीन दिवसीय आयोजन में निवेश, पर्यटन साझेदारी और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मिली नई ऊंचाईरायपुर । ट्रैवल एंड टूरिज्म फेयर (टीटीएफ) कोलकाता-2026 में छत्तीसगढ़ पर्यटन ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति के साथ राष्ट्रीय स्तर पर एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। तीन दिवसीय इस प्रतिष्ठित पर्यटन आयोजन के सफल समापन पर छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड को देश के 21 राज्यों की सहभागिता के बीच उसके आकर्षक, सृजनात्मक एवं प्रभावशाली पवेलियन के लिए “बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस” सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय जीवन, प्राकृतिक पर्यटन, धार्मिक धरोहरों और आधुनिक पर्यटन दृष्टिकोण को राष्ट्रीय मंच पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के सफल प्रयासों की महत्वपूर्ण पहचान है।10 से 12 जुलाई तक कोलकाता के विश्व बंगला प्रांगण में आयोजित देश के प्रतिष्ठित पर्यटन व्यापार मेले में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड का पवेलियन तीनों दिनों तक आगंतुकों, पर्यटन विशेषज्ञों, टूर ऑपरेटर्स और निवेशकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना रहा। बस्तर की जनजातीय संस्कृति, चित्रकोट एवं तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, सिरपुर, भोरमदेव, धार्मिक एवं इको-टूरिज्म, पर्यटन रिसॉर्ट्स तथा राज्य के विविध पर्यटन परिपथों को आधुनिक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदर्शित किया गया, जिसे व्यापक सराहना मिली।आयोजन के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, पर्यटन विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव श्री एस भारतीदासन तथा छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर्स, ट्रैवल एजेंसियों, होटल समूहों, पर्यटन विशेषज्ञों और निवेशकों के साथ अनेक महत्वपूर्ण बी-टू-बी बैठकों में सहभागिता की। इन बैठकों में पर्यटन निवेश, संयुक्त पर्यटन पैकेजों के विकास, विपणन सहयोग, नए पर्यटन बाजारों तक पहुंच तथा छत्तीसगढ़ में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इन संवादों से राज्य के पर्यटन क्षेत्र में भविष्य की नई साझेदारियों और निवेश के अवसरों को भी मजबूती मिली।मेले में छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ राज्य तथा अन्य राज्यों के लगभग 28 पंजीकृत टूर ऑपरेटर्स, होटल संचालकों, होम-स्टे संचालकों और पर्यटन उद्यमियों ने भी सक्रिय सहभागिता की। इससे राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने तथा नए व्यावसायिक संबंध स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ।आयोजन के उद्घाटन अवसर पर गोवा के पर्यटन मंत्री श्री रोहन ए. खंवटे, उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज, पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री डॉ. शंकर घोष तथा थाईलैंड की महावाणिज्य दूत सुश्री सिरीपोर्न तांतीपन्याथेप सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने छत्तीसगढ़ पवेलियन का अवलोकन किया था। सभी अतिथियों ने राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति, धार्मिक विरासत और पर्यटन विकास की संभावनाओं की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ को उभरते हुए पर्यटन गंतव्य के रूप में रेखांकित किया।छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में राज्य पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीटीएफ जैसे राष्ट्रीय मंच राज्य की पर्यटन संभावनाओं को देश और दुनिया के सामने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इस सम्मान ने यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ आज अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक वैभव और उत्कृष्ट पर्यटन संसाधनों के बल पर राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।पर्यटन एवं संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सचिव श्री एस भारतीदासन ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन को आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छत्तीसगढ़ की प्रभावी सहभागिता से राज्य में पर्यटन निवेश, पर्यटकों की संख्या और निजी क्षेत्र की भागीदारी में सकारात्मक वृद्धि होगी।छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने कहा कि पर्यटन बोर्ड राज्य के पर्यटन उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि टीटीएफ-2026 में मिली सफलता और राष्ट्रीय सम्मान राज्य के पर्यटन उद्योग से जुड़े सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है तथा इससे छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने के अभियान को नई गति मिलेगी। टीटीएफ कोलकाता-2026 में प्राप्त “बेस्ट डेकोरेशन ऑफ स्टॉल एंड अपीयरेंस” सम्मान छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, जनजातीय विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन विकास की संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर मिली सशक्त पहचान का प्रतीक है। यह उपलब्धि आने वाले समय में राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने, निवेश आकर्षित करने तथा देश-विदेश के अधिकाधिक पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- रायपुर - आज नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे एवं आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर नगर निगम जोन 2 जोन कमिश्नर श्री संतोष पाण्डेय के मार्गदर्शन में स्थल पर कार्यपालन अभियता श्री पीडी घृतलहरे उपअभियता नगर निवेश श्रीमती अंजलि बारले की उपस्थिति में नगर निगम जोन 2 क्षेत्र अतर्गत पंडरी में होटल पुनीत एवं उसके आस पास दुकानो के सामने नाले पर अवैध कब्जा जमाकर नालो को पाटकर बनाये गये आधा दर्जन से अधिक अवैध पाटो को जेसीबी मशीन की सहायता से अभियान चलाकर तोडने एवं सफाई की बाधा हटाने की कार्यवाही नगर निगम जोन 2 नगर निवेश विभाग द्वारा की गई। अवैध पाटो के कारण सफाई पूरी तरह बाधित हो चुकी थी एवं बारिश में जल भराव की समस्या आ रही थी।जलभराव की समस्या दूर करने नाले की सफाई करवाने एवं गंदे पानी का निकास सुगमता से कायम करने अवैध पाटो को हटाने कार्यवाही की गई, जो लगातार आगे भी जारी रहेगी एव नाले पर बनाये गये सभी अवैध पाटो को अभियान चलाकर तोडने के निर्देश दिये गये है।
- रायपुर - आज नगर पालिक निगम रायपुर के आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर नगर निगम जोन 5 नगर निवेश विभाग की टीम ने जोन 5 कमिश्नर श्री खीरसागर नायक के मार्गदर्शन एवं कार्यपालन अभियंता श्री लाल महेन्द्र प्रताप सिंह, सहायक अभियंता श्री नागेश्वर रामटेके, उपअभियंता नगर निवेश श्री टिकेन्द्र चंद्राकर की उपस्थिति में नगर निगम जोन 5 क्षेत्र अंतर्गत भाठागांव आवासीय कालोनी में आवासीय भवन का अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग करते हुए संचालित लघु वाटर फिल्टर प्लांट के संबंध में प्राप्त जनशिकायत पर स्थल निरीक्षण उपरांत पूर्व में सबंधित संचालक श्री दिनेश वधानी को नोटिस जारी कर निर्धारित अवधि में व्यावसायिक गतिविधि बंद करने के निर्देश दिये गये थे।किंतु नोटिस की शर्तों का पालन ना किये जाने एवं आवासीय भवन में अवैध व्यावसायिक गतिविधि का सवालन पाये जाने पर नगर निगम जोन 5 नगर निवेश विभाग द्वारा संबंधित स्थल पर पहुंचकर लघु वाटर फिल्टर प्लाट को तत्काल सीलबंद करने की कड़ी नियमानुकुल कार्यवाही की गई। नगर निगम जोन 5 नगर निवेश विभाग द्वारा सीलबंदी की कार्यवाही छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 एवं प्रचलित नियमों के अंतर्गत की गई। भविष्य में बिना सक्षम अनुमति से सील हटाकर व्यावसायिक गतिविधि सचालित किये जाने पर प्रकरण में नियमानुसार कठोर वैधानिक कार्यवाही की जायेगी।
- रायपुर - आज नगर पालिक निगम रायपुर के जोन क्रमांक 6 नगर निवेश विभाग की टीम द्वारा नगर निगम जोन 6 क्षेत्र में डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी वार्ड क्रमांक 61 के क्षेत्र के अंतर्गत भर्री खार भाठागांव में अवैध रूप से लगभग 1200 वर्गफीट क्षेत्र में निर्मित 4 अवैध दुकानो को जेसीबी मशीन की सहायता से नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर जोन 6 जोन कमिश्नर श्री हितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन एव स्थल पर कार्यपालन अभियंता श्री दिनेश सिन्हा, सहायक अभियंता श्री आशीष श्रीवास्तव, उपअभियंता श्री सागर ठाकुर की उपस्थिति में तोडने की कार्यवाही सम्बंधित निर्माणकर्ता श्री दुर्गेश सोनकर को नियमानुसार प्रक्रिया के अंतर्गत नोटिस देने के उपरांत की गई।
- -रोजाना 39 हजार लीटर से अधिक दूध का हो रहा संग्रहणमहासमुंद / महासमुंद जिला आज छत्तीसगढ़ के प्रमुख दुग्ध उत्पादक क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना रहा है। जिले में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत दुग्ध उत्पादन को विशेष प्राथमिकता दिए जाने से हजारों किसानों और ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। वर्तमान में 15 हजार से अधिक किसान एवं ग्रामीण डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और इसे अपनी आजीविका का प्रमुख साधन बना चुके हैं।ग्राम जोरातराई की महिला पशुपालक श्रीमती भगवती ध्रुव ने बताया कि उन्हें शत प्रतिशत अनुदान में गिर और साहीवाल नस्ल की गाय पशुधन विकास विभाग के द्वारा दी गई है। इसके साथ ही गायों के लिए मैट भी दिया गया है, जिसमें वे बैठते है। दोनों ही गाय 10-10 लीटर दूध देती हैं। जिसका कुछ भाग वे अपने घर में उपयोग के लिए रखती हैं तो शेष को गांव के सहकारी समिति में बेंच देती है। इससे उन्हें आर्थिक लाभ भी होता है। इसी तरह जोरातराई की श्रीमती जया बाई ध्रुव को भी शत प्रतिशत अनुदान में गिर नस्ल की 2 गाय मिली। जिनसे पर्याप्त मात्रा में दूध मिल जाता है। घरेलू आवश्यकता की पूर्ति के लिए कुछ मात्रा में दूध वे रख लेती हैं और बाकि को दुग्ध समिति में विक्रय करती है। इस तरह से उनके परिवार को आर्थिक मजबूती भी मिल गई है।दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति सम्हर के सचिव श्री बोधराम पटेल ने बताया कि जोरातराई गांव में दुग्ध उत्पादन को बढ़ता देख साल 2021 में दुग्ध सहकारी समिति का गठन किया गया। जहां आसपास के गांव सम्हर, बिराजपाली, कौहाकुड़ा, मुड़ागांव, मोंगरापली, लमकेनी, कोटनपाली और सरायपाली से दूध आता है। जिन्हें बीएमसी कौहाकुड़ा भेजा जाता है। वहां से इसको सीलिंग कर देवभोग रायपुर भेज दिया जाता है। जिले के पांचों विकासखंडों से प्रतिदिन हजारों लीटर दूध का संग्रहण किया जा रहा है। देवभोग सहकारी समिति सहित विभिन्न डेयरियों को रोजाना 39 हजार लीटर से अधिक दूध की आपूर्ति हो रही है, जिससे किसानों को नियमित आय का स्रोत मिला है।पशु चिकित्सा सेवाएं की उप संचालक श्रीमती अंजना नायडू ने बताया कि पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन और पशुधन विकास विभाग लगातार प्रयास किया जा रहा हैं। इसी कड़ी में बागबाहरा विकासखंड के ग्राम जोरातराई में आदिवासी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से स्वयं सहायता समूह की 19 महिलाओं को शत-प्रतिशत अनुदान पर डेयरी इकाइयां स्थापित कराई गईं। महिलाओं को आधुनिक पशुपालन और डेयरी प्रबंधन का तकनीकी एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण भी दिया गया। साथ ही उन्हें सफल डेयरी मॉडल का अवलोकन के लिए धमतरी जिले का अध्ययन भ्रमण कराया गया। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। जोरातराई की महिलाएं अब डेयरी व्यवसाय के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। दूध के बेहतर विपणन के लिए गांव में नई दुग्ध सहकारी समिति भी शुरू की गई है, जिससे स्थानीय उत्पादकों को सीधा लाभ मिल रहा है।वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. आर. जी. यादव ने बताया कि दूध महासंघ देवभोग के माध्यम से जिले की 156 दुग्ध सहकारी समितियां किसानों से दूध खरीद रही हैं। वहीं पशुधन विकास विभाग द्वारा दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा बढ़ाने के लिए पशुओं का टीकाकरण, नस्ल सुधार (सेक्स सॉर्टेड सीमेन) तथा पौष्टिक पशु आहार की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
- महासमुन्द, / जिले के पिथौरा विकासखंड के ग्राम बरतुंगा के कृषक दम्पति श्रीमती कौशिल्या बाई यदु और उनके पति कभी पारंपरिक धान की खेती करते थे, उन्होंने समय के साथ अपनी सोच बदली और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में करेला की आधुनिक खेती अपनाया। साथ ही ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी नई तकनीकों का उपयोग कर उन्होंने अपनी आय में इजाफा किया।कृषक श्रीमती कौशिल्या बाई यदु बताती है कि पूर्व में वे अपने 0.40 हेक्टेयर सिंचित भूमि में मुख्य रूप से धान की खेती करती थीं। धान की खेती से उन्हें अपेक्षाकृत कम आय प्राप्त होती थी, जिससे परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। बेहतर आय की तलाश में उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने राष्ट्रीय बागवानी मिशन अंतर्गत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना के तहत करेला की खेती शुरू करने का निर्णय लिया।उ द्यानिकी विभाग की तकनीकी सलाह के अनुसार उन्होंने ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया। इन तकनीकों से सिंचाई जल की बचत हुई, खरपतवार नियंत्रण में सुविधा मिली, पौधों की बेहतर वृद्धि हुई तथा उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार आया। विभाग द्वारा करेला फसल एवं सपोर्ट सिस्टम के लिए 13,600 रुपये की अनुदान राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से उनके बैंक खाते में प्रदान की गई, जिससे खेती की प्रारंभिक लागत में भी सहायता मिली।श्रीमती यदु बताती है कि करेला की खेती से उन्हें अपेक्षा से अधिक उत्पादन प्राप्त हुआ। स्थानीय बाजार एवं पिथौरा मंडी में करेला की अच्छी मांग और उचित मूल्य मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। खेती में लगभग 40 हजार रुपए की लागत के मुकाबले उन्हें लगभग 1 लाख 45 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। श्रीमती यदु की उपलब्धि ने ग्राम बरतुगा सहित आसपास के क्षेत्रों के किसानों को भी प्रेरित किया है। इससे क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिल रहा है।
- -दो दिव्यांग हितग्राहियों को मिली बैटरी चालित ट्राइसायकल, आवागमन हुआ आसान और आत्मनिर्भरता को मिला बलरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन और संवेदनशील प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आई है। हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए समाज कल्याण विभाग ने दो दिव्यांग हितग्राहियों को बैटरी चालित ट्राइसायकल उपलब्ध कराई, जिससे उनके जीवन में नई सहजता और आत्मनिर्भरता आई है। रायपुर जिला के विकासखंड आरंग के ग्राम निवारी निवासी श्री नंद किशोर टंडन तथा ग्राम सेजा निवासी श्री खिलेन्द्र कुमार साहू (वर्मा) दोनों 80 प्रतिशत दिव्यांग हैं। आवागमन में होने वाली गंभीर कठिनाइयों के कारण उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत प्राप्त होने के बाद समाज कल्याण विभाग ने दोनों प्रकरणों का त्वरित परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें बैटरी चालित ट्राइसायकल प्रदान की। बैटरी चालित ट्राइसायकल मिलने से अब दोनों हितग्राहियों के लिए दैनिक आवागमन, शासकीय कार्यालयों तक पहुंच, आवश्यक कार्यों का निष्पादन तथा सामाजिक गतिविधियों में भागीदारी पहले की अपेक्षा कहीं अधिक आसान हो गई है। इससे उनकी आत्मनिर्भरता बढ़ी है और जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक सुधार आया है।दोनों हितग्राहियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से उनकी समस्या का त्वरित समाधान हुआ। इस सहायता से अब वे बिना किसी पर निर्भर हुए अपने आवश्यक कार्य आसानी से कर सकेंगे। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्रदेशभर में पात्र हितग्राहियों की शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। यह व्यवस्था नागरिकों को त्वरित राहत प्रदान करने के साथ-साथ शासन की जनहितैषी और जवाबदेह कार्यप्रणाली को भी सशक्त बना रही है।
- एमसीबी/ बदलते कृषि परिदृश्य में जिले के किसान अब आधुनिक तकनीकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विकासखंड भरतपुर के ग्राम खमरौध निवासी प्रगतिशील किसान जगबंधन सिंह इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने खरीफ सीजन में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, कोटाडोल शाखा जनकपुर से इफको नैनो डीएपी प्राप्त कर वैज्ञानिक खेती की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।जगबंधन सिंह वर्षों से खेती-किसानी से जुड़े हुए हैं। बढ़ती खेती की लागत और संतुलित पोषण की आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने इस वर्ष पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो डीएपी का उपयोग करने का निर्णय लिया। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक अपनाकर ही खेती को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है। किसान ने बताया कि कृषि विभाग एवं इफको के विशेषज्ञों द्वारा नैनो डीएपी के संबंध में दी गई जानकारी से प्रेरित होकर उन्होंने इसे अपनाया है। उन्हें विश्वास है कि इसके उपयोग से फसल को आवश्यक फॉस्फोरस अधिक प्रभावी ढंग से मिलेगा, पौधों की शुरुआती बढ़वार बेहतर होगी, जड़ें मजबूत बनेंगी तथा फसल का समुचित विकास होगा। इससे खेती की लागत में कमी आने के साथ उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार की उम्मीद है।जगबंधन सिंह का कहना है कि समय के साथ खेती में नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक हो गया है। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह के अनुसार आधुनिक उर्वरकों का उपयोग करें तो कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की कि वे पारंपरिक खेती के साथ-साथ नई कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करें।कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार इफको नैनो डीएपी आधुनिक नैनो तकनीक पर आधारित उर्वरक है, जो पौधों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता को अधिक प्रभावी बनाता है। इसके संतुलित उपयोग से उर्वरकों की दक्षता बढ़ती है, अनावश्यक बर्बादी कम होती है तथा पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।
- -सूडा और नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों की परिचयात्मक बैठक लेकर विभागीय कार्यों एवं योजनाओं की जानकारी लीरायपुर । राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के नए सीईओ भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2021 बैच के अधिकारी श्री सुमीत अग्रवाल ने आज अपना कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने नवा रायपुर में इंद्रावती भवन स्थित सूडा मुख्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के बाद सूडा और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अधिकारियों की परिचयात्मक बैठक लेकर विभागीय कार्यों एवं योजनाओं की जानकारी ली। श्री अग्रवाल इससे पहले दुर्ग नगर निगम के आयुक्त के रूप में कार्यरत थे। सूडा के नए सीईओ श्री सुमीत अग्रवाल ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद अधिकारियों से कहा कि राज्य के शहरी क्षेत्रों का समग्र विकास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुँचाना हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता होगी। हम सभी विभागीय अधिकारियों और तकनीकी टीम के साथ मिलकर छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए काम करेंगे। उनके कार्यभार ग्रहण करने के दौरान सूडा के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री दुष्यंत कुमार रायस्त, नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक श्री पुलक भट्टाचार्य, उप संचालक श्रीमती अर्पिता पाठक, अधीक्षण अभियंता श्री रमेश सिंह, सूडा के उप मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील अग्रहरि और श्री सचित कुमार साहू सहित अनेक विभागीय अधिकारी मौजूद थे।
- -प्रधानमंत्री की कूटनीतिक सौगात में शामिल हुई बस्तर की जनजातीय कला, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को मिली वैश्विक प्रतिष्ठारायपुर। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि उस समय दर्ज हुई, जब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफर लक्सन को छत्तीसगढ़ के बस्तर की विश्वविख्यात ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) धातु शिल्पकृति भेंट की। प्रधानमंत्री की इस विशिष्ट कूटनीतिक सौगात ने न केवल बस्तर की हजारों वर्ष पुरानी जनजातीय कला को वैश्विक पहचान दिलाई है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक समृद्धि, पारंपरिक शिल्प कौशल और आदिवासी विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा प्रदान की है।यह अवसर पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। राज्य की जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराएं और पारंपरिक हस्तशिल्प आज वैश्विक मंच पर भारत की सांस्कृतिक पहचान का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। प्रधानमंत्री द्वारा विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को भेंट के लिए बस्तर की ढोकरा शिल्पकृति का चयन इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ की लोककला आज विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर चुकी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न योजनाओं और पहलों के माध्यम से कलाकारों तथा शिल्पकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका सकारात्मक परिणाम है कि आज बस्तर की ढोकरा कला जैसी पारंपरिक विरासत वैश्विक कूटनीतिक उपहार का हिस्सा बनकर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ा रही है।संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ भी राज्य की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, प्रदर्शन और प्रचार-प्रसार के लिए लगातार प्रयासरत है। संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में विभाग लोककला, जनजातीय परंपराओं और पारंपरिक शिल्प को नई पीढ़ी से जोड़ने तथा उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में अनेक पहल कर रहा है। ढोकरा शिल्पकृति का वैश्विक स्तर पर सम्मानित होना इन प्रयासों की सार्थकता को भी रेखांकित करता है।बस्तर की ढोकरा कला विश्व की सबसे प्राचीन धातु शिल्प परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसका निर्माण लॉस्ट वैक्स कास्टिंग अर्थात मोम सांचा ढलाई तकनीक से किया जाता है, जिसे विश्व की सबसे पुरानी धातु ढलाई विधियों में शामिल किया जाता है। कुशल जनजातीय शिल्पकार प्रत्येक कलाकृति को पूरी तरह हाथ से तैयार करते हैं, इसलिए हर शिल्पकृति अपनी बनावट, सौंदर्य और कलात्मक अभिव्यक्ति में अद्वितीय होती है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित यह शिल्प परंपरा बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और जनजातीय जीवन-दर्शन का जीवंत स्वरूप है।प्रधानमंत्री द्वारा भेंट की गई ट्री ऑफ लाइफ (जीवन वृक्ष) शिल्पकृति केवल एक कलात्मक वस्तु नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की भावना का सशक्त प्रतीक है। यह परस्पर जुड़ाव, नवजीवन, समृद्धि और मानव तथा प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश देती है। भारतीय परंपरा में यह कल्पवृक्ष की अवधारणा का प्रतिनिधित्व करती है, वहीं न्यूजीलैंड के माओरी समुदाय की व्हाकापापा की अवधारणा से भी सामंजस्य स्थापित करती है, जो जीवन, प्रकृति और वंश परंपरा के गहरे संबंध को व्यक्त करती है। इस प्रकार यह शिल्पकृति सांस्कृतिक संवाद और वैश्विक मानवीय मूल्यों का भी प्रतीक बन गई है।बस्तर की ढोकरा कला केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, लोकविश्वास, प्रकृति के प्रति सम्मान और सतत जीवनशैली की अभिव्यक्ति है। यह कला स्थानीय शिल्पकारों की आजीविका को सशक्त बनाते हुए पर्यावरण-अनुकूल हस्तनिर्मित उत्पादों की परंपरा को भी आगे बढ़ाती है। प्रत्येक कलाकृति में जनजातीय समाज की सृजनात्मकता, प्रकृति से आत्मीय संबंध और सांस्कृतिक निरंतरता की झलक दिखाई देती है।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस शिल्पकृति को अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक उपहार के रूप में चयनित किया जाना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति की वैश्विक स्वीकार्यता का महत्वपूर्ण प्रमाण है। इससे राज्य के जनजातीय कलाकारों और शिल्पकारों का उत्साह बढ़ेगा, स्थानीय हस्तशिल्प को नए बाजार मिलेंगे तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और जनजातीय विरासत को विश्वभर में नई पहचान प्राप्त होगी।बस्तर की ढोकरा ट्री ऑफ लाइफ शिल्पकृति आज केवल एक उपहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता, जनजातीय गौरव, पारंपरिक शिल्प कौशल और भारत की अमूल्य विरासत का ऐसा वैश्विक दूत बन गई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ का नाम और अधिक गौरवपूर्ण ढंग से स्थापित कर दिया है।
- -29 किस्तों में महिलाओं के खातों में पहुँचे 18,805 करोड़ रुपये से अधिक, आत्मनिर्भरता और सम्मान का बढ़ा विश्वासरायपुर । छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में महतारी वंदन योजना एक ऐतिहासिक पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित यह योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दे रही, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और सम्मानजनक जीवन जीने की नई शक्ति भी प्रदान कर रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश के हर जिले में दिखाई दे रहे हैं।11 जुलाई 2026 को योजना की 29वीं किस्त जारी होने के साथ ही प्रदेश की लाखों पात्र महिलाओं के बैंक खातों में एक-एक हजार रुपये की सहायता राशि सीधे अंतरित की गई।योजना के प्रारंभ से अब तक 29 किस्तों के माध्यम से 18 हजार 805 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं को सीधे उनके खातों में उपलब्ध कराई जा चुकी है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में योजना के लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाई प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल मिलने से वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में प्रभावी भागीदारी निभा रही हैं और अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण पर अधिक ध्यान दे पा रही हैं।प्रदेशभर से मिल रही प्रतिक्रियाएं इस योजना की सफलता की सशक्त कहानी कह रही हैं। बालोद जिले की ग्राम बघमरा निवासी श्रीमती देवकी विश्वकर्मा योजना से प्राप्त राशि का उपयोग घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों की खरीद तथा सिलाई-कढ़ाई के कार्यों में करती हैं।श्रीमती जामवंती विश्वकर्मा बताती हैं कि यह राशि उनके परिवार के लिए हर महीने एक मजबूत आर्थिक सहारा बन गई है। वहीं श्रीमती राधिका सोनवानी कहती हैं कि योजना की सहायता से वे अपने बच्चों की स्कूल फीस समय पर जमा कर पा रही हैं, जिससे परिवार पर आर्थिक बोझ कम हुआ है।जशपुर जिले की श्रीमती ज्योति पांडेय के अनुसार अब उन्हें छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। श्रीमती रेहाना खातून ने योजना से मिली राशि के सहारे अपना छोटा घरेलू व्यवसाय शुरू किया और आज वे स्वयं आय अर्जित कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। श्रीमती कविता शर्मा और श्रीमती अंजू शर्मा का कहना है कि नियमित सहायता राशि ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास दिया है तथा सम्मानपूर्वक जीवन जीने का नया आधार प्रदान किया है।इसी प्रकार गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम डुमरिया की श्रीमती बसंती धुर्वे बताती हैं कि महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त मिलने से घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति में काफी सहायता मिली है। उनका मानना है कि यह योजना महिलाओं को केवल आर्थिक सहयोग नहीं देती, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी देती है।योजना का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि महिलाओं को प्रतिमाह मिलने वाली सहायता राशि उनके हाथों में आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत कर रही है। इससे परिवारों में महिलाओं की सहभागिता बढ़ी है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है तथा छोटे-छोटे स्वरोजगार और बचत की संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिला है।प्रदेश की लाखों लाभार्थी महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि महतारी वंदन योजना उनके जीवन में सम्मान, आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा का नया आधार बनी है।
- -सहकारी समिति की सुचारू व्यवस्था से खेती की तैयारियां हुईं आसानरायपुर ।किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराने के जिला प्रशासन के प्रयासों का लाभ अब सीधे खेतों तक पहुंच रहा है। खैरागढ़ जिले के ग्राम अवेली के किसान श्री गेंद लाल भी उन किसानों में शामिल हैं, जिन्हें खरीफ सीजन के दौरान आवश्यक उर्वरक समय पर प्राप्त हुआ। इससे उनकी खेती की तैयारियां बिना किसी बाधा के पूरी हो सकीं।श्री गेंद लाल ने बताया कि उन्हें समिति सलोनी से उनकी पात्रता अनुसार 6 बोरी यूरिया, 3 बोरी डीएपी, 2 बोरी सुपर फॉस्फेट तथा 1 बोरी पोटाश प्राप्त हुआ। आवश्यक उर्वरक आसानी से उपलब्ध होने के कारण उन्होंने समय पर बुवाई और फसल प्रबंधन का कार्य शुरू कर दिया है।उन्होंने कहा कि पहले किसानों को खाद की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन इस वर्ष समिति में पर्याप्त भंडारण और सुव्यवस्थित वितरण व्यवस्था के कारण उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। समय पर खाद मिलने से खेती के प्रति उनका उत्साह बढ़ा है और वे बेहतर उत्पादन की उम्मीद कर रहे हैं। जिले में कलेक्टर श्री इंद्रजीत सिंह चंद्रवाल के मार्गदर्शन में उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। इसी का परिणाम है कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप समय पर खाद उपलब्ध हो रही है। इससे न केवल कृषि कार्यों को गति मिली है, बल्कि किसानों का सहकारी व्यवस्था और प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत हुआ है।
- -18 जुलाई तक 14 वर्ष की बेटियों को लगेगा निःशुल्क जीवनरक्षक टीकारायपुर । धमतरी जिले में बेटियों को सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। जिले में आज से 18 जुलाई 2026 तक विशेष एचपीवी (HPV) टीकाकरण सप्ताह का आगाज हो गया है। इस महाअभियान के तहत 14 वर्ष की आयु की सभी पात्र बालिकाओं को स्वास्थ्य विभाग द्वारा निःशुल्क जीवनरक्षक HPV टीका लगाया जा रहा है।स्वास्थ्य विभाग ने इसके लिए स्कूलों से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों तक व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने अभियान की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण ही सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि समय पर लगाया गया HPV टीका इस गंभीर कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित माध्यम है। यह टीका भविष्य में कैंसर के जोखिम को लगभग समाप्त कर देता है, इसलिए सभी पात्र बालिकाओं का टीकाकरण बेहद जरूरी है। अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। जिला अस्पताल एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC),प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) एवं स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC),जिले के चिन्हित विद्यालय (स्कूल्स) और निर्धारित विशेष टीकाकरण सत्र स्थल पर निःशुल्क उपलब्ध होगा।धमतरी कलेक्टर ने जिले के सभी माता-पिता और अभिभावकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।कलेक्टर ने अपने संदेश में कहा कि बेटियों का स्वस्थ भविष्य हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। HPV टीका पूरी तरह सुरक्षित है। सभी अभिभावकों से आग्रह करता हूँ कि किसी भी प्रकार की भ्रांति या अफवाह पर ध्यान न दें और स्वास्थ्य विशेषज्ञों पर भरोसा रखकर अपनी 14 वर्ष की बेटियों को यह टीका अवश्य लगवाएं। आपका यह एक छोटा सा निर्णय आपकी बेटी को जीवनभर की सुरक्षा दे सकता है। उन्होंने जिले के सभी जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों, स्वयंसेवी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इसे एक जन-आंदोलन का रूप दें। उन्होंने संकल्प दोहराया कि जिले की एक भी पात्र बालिका इस जीवनरक्षक टीके से वंचित नहीं रहनी चाहिए।
- -पुनर्वास केंद्र पहुंचकर खाद्य विभाग ने किया राशन कार्डों का ई-केवाईसीरायपुर। पुनर्वासित (विस्थापित या स्थानांतरित) परिवारों को खाद्य सुरक्षा का निर्बाध लाभ सुनिश्चित करने के लिए, उन्हें आधार-सीडेड राशन कार्ड (आधार और ई-केवाईसी अपडेटेड) के माध्यम से राष्ट्रीय और राज्य खाद्य सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाता है। इसके तहत उन्हें हर महीने पात्र श्रेणी के अनुसार 5 किलो से 35 किलो तक मुफ्त खाद्यान्न का अधिकार प्राप्त है।बीजापुर जिले में पुनर्वासित परिवारों को खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ बिना किसी परेशानी के मिले, इसके लिए जिला प्रशासन ने मैदानी स्तर पर पहल की है। कलेक्टर श्री विश्वदीप के निर्देशन और जिला खाद्य अधिकारी के मार्गदर्शन में खाद्य विभाग की टीम ने पुनर्वास केंद्र पहुंचकर सभी पात्र हितग्राहियों के राशन कार्डों का ई-केवाईसी पूरा किया।अभियान के दौरान विभागीय अधिकारियों ने हितग्राहियों के जरूरी दस्तावेजों का मौके पर ही सत्यापन किया और ई-केवाईसी की प्रक्रिया पूरी कराई। इससे पुनर्वासित परिवारों को ई-केवाईसी के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। यह अभियान राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र परिवारों को नियमित राशन उपलब्ध कराने और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया गया। खाद्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ई-केवाईसी पूरा होने से राशन कार्ड अद्यतन रहेंगे। इससे हितग्राहियों को उचित मूल्य की दुकानों से समय पर खाद्यान्न लेने में कोई दिक्कत नहीं होगी। विभाग लोगों को समय पर ई-केवाईसी कराने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम संचालित कर रहा है। विभाग ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप हर पात्र परिवार तक खाद्य सुरक्षा का लाभ पहुंचाना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसी कड़ी में आगे भी जिले के दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाकर पात्र हितग्राहियों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
- -सेवा सेतु आम नागरिकों के लिए वरदान, धमतरी के सागर को मिला सीधा लाभ-“सेवा सेतु - जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” पहल से सरकारी दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति, समय और पैसे दोनों की हो रही बचतरायपुर। सेवा सेतु छत्तीसगढ़ के नागरिकों तक डिजिटल सेवाएँ लाने का एक खास पहल है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य हर एक नागरिक, विशेषतरू दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में रहने वालों, तक सरकार की योजनाएँ और सुविधाएँ पहुंचाना हैं। सेवा सेतु सरकार की डिजिटल परिवर्तन यात्रा में एक महत्वपूर्ण अध्याय हैं। छत्तीसगढ़ शासन की सुशासन और डिजिटल गवर्नेंस की महत्वाकांक्षी पहल “सेवा सेतु - जनता के द्वार, डिजिटल सरकार” आम नागरिकों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने न केवल सरकारी सेवाओं को पारदर्शी और त्वरित बनाया है, बल्कि नागरिकों का सिस्टम पर भरोसा भी मजबूत किया है। अब विभिन्न शासकीय प्रमाण पत्रों के लिए लोगों को दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ रही है। घर बैठे ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल सत्यापन और समयबद्ध डिलीवरी से प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। डिजिटल सेवा के सुगम क्रियान्वयन का ताजा उदाहरण धमतरी जिले के कुरूद तहसील में देखने को मिला। यहाँ के निवासी श्री सागर को अपने एक जरूरी शासकीय कार्य के लिए तत्काल निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता थी। पारंपरिक प्रक्रिया को याद करते हुए वे बताते हैं कि पहले प्रमाण पत्र बनवाने का मतलब था,कई दिनों की भागदौड़, लंबी लाइनें, दैनिक काम का नुकसान और मानसिक परेशानी। लेकिन सेवा सेतु ने इस पूरी तस्वीर को बदल दिया है।जब सागर को सेवा सेतु पोर्टल की जानकारी मिली, तो उन्होंने घर बैठे ही ऑनलाइन आवेदन किया और जरूरी दस्तावेज अपलोड कर दिए। विभाग द्वारा त्वरित डिजिटल सत्यापन के बाद उनका आवेदन स्वीकृत हुआ और डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त निवास प्रमाण पत्र ऑनलाइन जारी कर दिया गया, जिसे उन्होंने आसानी से डाउनलोड कर प्रिंट निकाल लिया। सेवा सेतु के तीन मुख्य स्तंभ जिससे जनता को राहत मिली।आवेदन से लेकर प्रमाण पत्र जारी होने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो गई है। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों के लिए यह योजना अत्यंत हितकारी साबित हो रही है, क्योंकि अब उन्हें जिला या तहसील मुख्यालय आने-जाने का किराया और समय नहीं गंवाना पड़ता। डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू होने से शासकीय कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ कम हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यक्षमता में भी सुधार आया है। सेवा सेतु पोर्टल केवल एक तकनीकी माध्यम नहीं है, बल्कि यह नागरिक-केंद्रित शासन (Citizen-Centric Governance) की दिशा में राज्य सरकार का एक बड़ा कदम है। सुशासन और पारदर्शिता की इस प्रतिबद्धता ने यह साबित कर दिया है कि यदि तकनीक का सही इस्तेमाल किया जाए, तो सरकार सचमुच जनता के द्वार तक पहुँच सकती है। धमतरी के सागर जैसे लाखों नागरिक आज इस व्यवस्था की सराहना कर रहे हैं।
- -उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी-लंबित भुगतानों के साथ ही मरम्मत व संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में मिलेगी सहायतारायपुर ।नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी 194 नगरीय निकायों में विभिन्न मदों में कुल 58 करोड़ 43 लाख 14 हजार रुपए आबंटित किए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद आज विभाग ने सभी निकायों को राशि आबंटन के आदेश जारी कर दिए हैं।नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 14 नगर निगमों को कुल 27 करोड़ 82 लाख 45 हजार रुपए आबंटित किए हैं। वहीं 56 नगर पालिकाओं को कुल 18 करोड़ 71 लाख 39 हजार रुपए तथा 124 नगर पंचायतों को कुल 11 करोड़ 89 लाख 30 हजार रुपए आबंटित किए गए हैं। विभाग द्वारा निकायों को अनिवार्य निधि, चुंगी क्षतिपूर्ति, उत्पाद कर, यात्री कर, बार तथा मुद्रांक मद के अंतर्गत यह राशि आबंटित की गई है। विभाग द्वारा जारी इस राशि से नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर लंबित भुगतानों के साथ ही मरम्मत व संधारण कार्यों तथा अतिवृष्टि जैसी परिस्थितियों से निपटने में भी सहायता मिलेगी।
- -उप मुख्यमंत्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राशि स्वीकृति का परिपत्र जारीरायपुर ।राज्य शासन ने जांजगीर-चांपा जिले के पामगढ़ से लाहौद मार्ग के डोंगाकोहरौद बस्ती में सड़क निर्माण के लिए 6 करोड़ 5 लाख रुपए स्वीकृत किए हैं। इस राशि से 4.34 किमी सड़क का निर्माण किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव के अनुमोदन के बाद राज्य शासन ने मंत्रालय से राशि स्वीकृति के संबंध में प्रमुख अभियंता को परिपत्र जारी कर दिया है।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्य में प्रयुक्त की जाने वाली सामग्रियों एवं संपूर्ण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं। किसी भी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता में कमी पाये जाने पर उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।लोक निर्माण विभाग ने प्रमुख अभियंता को कार्य की निविदा समय-सीमा में करने, निर्माण कार्य प्राक्कलन व कार्य संपादित करने में मितव्ययिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने निर्माण एजेंसी से अनुबंधित समय-सीमा में काम पूर्ण किया जाना सुनिश्चित कराने को कहा है। कार्य पूर्ण किये जाने के लिए अनावश्यक समय-सीमा वृद्धि नहीं किए जाने के भी निर्देश विभाग ने दिए हैं। अपरिहार्य एवं नियंत्रण से बाहर मान्य कारणों के आधार पर ही सक्षम अधिकारी द्वारा समय-सीमा में वृद्धि की जा सकेगी।
- गौरेला पेंड्रा मरवाही । ग्राम पंचायत डुमरिया विकासखंड गौरेला की श्रीमती बसंती धुर्वे के जीवन में महतारी वंदन योजना सकारात्मक बदलाव लेकर आई है। उन्होंने बताया कि उन्हें महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो गई है, जिससे उन्हें अपनी दैनिक आवश्यकताओं और घरेलू खर्चों को पूरा करने में सहायता मिल रही है। श्रीमती बसंती धुर्वे का कहना है कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रही है। नियमित रूप से मिलने वाली सहायता राशि से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे पा रही हैं। उन्होंने इस जनकल्याणकारी योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे महिलाओं को आगे बढ़ने, आत्मनिर्भर बनने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा मिल रही है।
- - लिटिया सेमरिया 220/132 केवी उपकेंद्र में 320 एमवीए ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी के दो पावर ट्रांसफार्मरों का सफल ऊर्जीकरण- औद्योगिक विकास के लिये पारेषण व्यवस्था होगी और अधिक सुदृढ़,- सेमीकंडक्टर पार्क एवं नए औद्योगिक क्षेत्र को मिलेगी गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्तिरायपुर । छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश की पारेषण अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला के करकमलों द्वारा 220/132 केवी लिटिया सेमरिया उपकेंद्र में स्थापित 160-160 एमवीए क्षमता के दो 220/132 केवी पावर ट्रांसफार्मरों का सफलतापूर्वक ऊर्जीकरण किया गया। प्रथम ट्रांसफार्मर का ऊर्जीकरण सायं 5:22 बजे तथा द्वितीय ट्रांसफार्मर का ऊर्जीकरण सायं 5:27 बजे किया गया। दोनों ट्रांसफार्मरों के सफल ऊर्जीकरण से उपकेंद्र में 320 एमवीए की अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी (Transformation Capacity) उपलब्ध हो गई है।इस परियोजना से राजनांदगांव एवं दुर्ग क्षेत्र की पारेषण व्यवस्था को उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी। बढ़ती विद्युत मांग के अनुरूप विद्युत भार का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा तथा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पारेषण तंत्र भी अधिक सक्षम बनेगा।प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने इस उपलब्धि पर परियोजना से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास एवं उपभोक्ताओं को विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पारेषण नेटवर्क का निरंतर विस्तार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है। लिटिया सेमरिया उपकेंद्र में उपलब्ध हुई अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी से न केवल वर्तमान विद्युत मांग को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप भी पर्याप्त क्षमता उपलब्ध रहेगी।उन्होंने बताया कि 220/132 केवी लिटिया सेमरिया उपकेंद्र से 132 केवी वोल्टेज स्तर पर राजनांदगांव जिले के पटेवा में प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी-2.0/सेमीकंडक्टर पार्क) तथा राजनांदगांव जिले के बिजेभाट में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही इस परियोजना का लाभ दुर्ग जिले से लेकर राजनांदगांव तक प्राप्त होगा। इससे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ घरेलू, कृषि एवं अन्य उपभोक्ताओं को भी अधिक विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (लाइन) श्री संजय पटेल, कार्यपालक निदेशक (पीसी एंड आरए) श्री के. एस. मिनोठिया, कार्यपालक निदेशक (ट्रांसमिशन) श्री वी. के. दीक्षित, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के कार्यपालक निदेशक (ओ एंड एम) श्री संजय आर. बी. खंडेलवाल, कार्यपालक निदेशक, दुर्ग क्षेत्र श्री शिरीष सालेट, ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य अभियंता (सब-स्टेशन) श्री अब्राहम वर्गीज, मुख्य अभियंता (परियोजना) श्री प्रसन्ना गोसावी,अतिरिक्त मुख्य अभियंता श्री पी. पी. सिंह, श्री आर. के. तिवारी एवं श्री आर. के. मिश्रा, अधीक्षण अभियंता श्री करुणेश यादव एवं श्री सुनील भुआर्य सहित कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता तथा परियोजना से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
- रायपुर - रायपुर नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 4 क्षेत्र के अंतर्गत राजधानी शहर रायपुर शहर में जयस्तम्भ चौक के समीप नाले के खुले चेम्बर के सम्बन्ध में जनशिकायत मिलते ही उसे तत्काल संज्ञान में लेते हुए नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 4 की टीम ने नाले के चेम्बर को तत्काल आवश्यक सुधार एवं मरम्मत कार्य करवाते हुए ढक्कन लगाकर कव्हर किया एवं प्राप्त जनशिकायत का जोन के स्तर पर त्वरित निदान किया.
- रायपुर -रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे एवं आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर आज रायपुर नगर पालिक निगम जोन क्रमांक 9 स्वास्थ्य विभाग द्वारा जोन क्षेत्र के अंतर्गत महात्मा गाँधी वार्ड क्रमांक 8 क्षेत्र में जलभराव क्षेत्र में डेकथलान के समीप मार्ग में नाले पर कब्जा जमाकर निर्मित अवैध पाटा जेसीबी मशीन की सहायता से तोड़ने एवं सफाई में आ रही बाधा को हटाने की कार्रवाई जोन 9 जोन कमिश्नर श्री राकेश शर्मा के मार्गनिर्देशन एवं कार्यपालन अभियंता श्री शरद ध्रुव, जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री बारोन बंजारे, श्री उमेश नामदेव, स्वच्छता निरीक्षक श्री भोला तिवारी की उपस्थिति में की गयी.नाले पर निर्मित अवैध पाटे को हटाने से गंदे पानी की निकासी का प्रबंधन सुगम बनेगा एवं बारिश में क्षेत्र में जलभराव की समस्या नहीं आएगी.नगर निगम जोन 9 स्वास्थ्य विभाग द्वारा नाले पर निर्मित अवैध पाटा तोड़ने के पश्चात नाले की सफाई करवाई एवं जलनिकास सुगम बनाया.
- -गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों सहित कुल 250 सीटों को मिली स्वीकृति-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा का जताया आभाररायपुर / राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से गीदम (दंतेवाड़ा), कुनकुरी (जशपुर), मनेन्द्रगढ़, जांजगीर-चांपा एवं कबीरधाम में 50-50 एमबीबीएस सीटों वाले 5 नए शासकीय मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके साथ ही प्रदेश में एक साथ कुल 250 नई एमबीबीएस सीटों का विस्तार होगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास का ऐतिहासिक पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में स्वास्थ्य और शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा सुदृढ़, समावेशी और आधुनिक स्वास्थ्य तंत्र विकसित करना है, जहाँ प्रदेश का कोई भी युवा डॉक्टर बनने के अपने सपने से वंचित न रहे और किसी भी नागरिक को बेहतर उपचार के लिए दूर-दराज़ के शहरों का रुख न करना पड़े।मुख्यमंत्री ने कहा कि कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे गीदम (दंतेवाड़ा) से लेकर उत्तर छत्तीसगढ़ के आदिवासी वनांचल कुनकुरी (जशपुर) तक नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार विकास के अवसरों को प्रदेश के अंतिम छोर तक पहुँचा रही है। यह केवल नए संस्थानों की स्थापना नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को नई उड़ान देने और दूरस्थ अंचलों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव रखने की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन ला रही है। प्रदेश के दूरस्थ, आदिवासी और आकांक्षी क्षेत्रों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और क्षेत्रीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में भी व्यापक सुधार आएगा।मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा के प्रति समस्त छत्तीसगढ़वासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य अधोसंरचना का तेजी से विस्तार हो रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि नए मेडिकल कॉलेज केवल शैक्षणिक संस्थान नहीं होंगे, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय मानव संसाधन विकास के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार होगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर उपचार की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी, प्रदेश के युवाओं के सपनों को नई दिशा देगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक सशक्त बनाएगी।

























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