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- 5 और 6 सितंबर को आयोजित होगा ‘मॉनसून क्रिएटर्स मीट-अप’रायपुर, छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और युवाओं की प्रतिभा को डिजिटल मंचों के जरिए वैश्विक पहचान दिलाने के उद्देश्य से धमतरी जिला प्रशासन एक अनूठी पहल करने जा रहा है। ‘Dhamtari YUVA’ (युवा स्किल अपग्रेडेशन एंड वैल्यू एडिशन) अभियान के अंतर्गत आगामी 5 और 6 सितंबर को दो दिवसीय ‘मॉनसून क्रिएटर्स मीट-अप’ का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन में प्रदेश भर के युवा डिजिटल क्रिएटर्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और वीडियोग्राफर्स एक मंच पर एकत्र होंगे, जहां वे अपनी कला को निखारने के साथ-साथ एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकेंगे।प्रदेश के चर्चित डिजिटल चेहरे साझा करेंगे अनुभवदो दिवसीय इस समागम में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से जाने-पहचाने डिजिटल क्रिएटर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनमें बस्तर से विशाल सागर, बिलासपुर से दीपक पटेल, जगदलपुर से शुभम, दुर्ग से अनुपम सिन्हा तथा धमतरी के खिलेश्वर एवं दोमेन्द्र निषाद प्रमुख हैं। ये सभी युवा मीट-अप में अपनी सफलता की कहानियां और तकनीकी अनुभव साझा करेंगे।स्थानीय पर्यटन और संस्कृति को मिलेगी वैश्विक पहचानइस मीट-अप का मुख्य उद्देश्य युवाओं को डिजिटल माध्यमों के सकारात्मक और रचनात्मक उपयोग के लिए प्रेरित करना है। इसके माध्यम से धमतरी के प्राकृतिक सौंदर्य, विश्वप्रसिद्ध गंगरेल जलाशय, वनांचल की लोक-परंपराओं और स्थानीय विकास गाथाओं को दुनिया के सामने नए और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा।स्किल डेवलपमेंट और ब्रांडिंग पर रहेगा जोरआयोजन के दौरान प्रतिभागियों को निम्नलिखित विषयों पर विशेषज्ञों से सीखने और समझने का अवसर मिलेगा। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन और प्रभावी स्टोरीटेलिंग, वीडियोग्राफी की बारीकियां, पर्सनल ब्रांडिंग और सोशल मीडिया एल्गोरिदम, प्रशासन का मानना है कि इस नेटवर्किंग आयोजन से युवाओं में डिजिटल उद्यमिता और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।कलेक्टर का वक्तव्य और पंजीयन की जानकारीकलेक्टर ने इस पहल को युवाओं की प्रतिभा को तराशने का सशक्त माध्यम बताते हुए कहा कि युवाओं की तकनीकी दक्षता और नवाचार ही विकास का असली आधार हैं। यह आयोजन प्रदेश की प्रतिभाओं को वैश्विक पहचान दिलाने का महाअभियान साबित होगा। जिला प्रशासन ने राज्य के सभी डिजिटल स्टोरीटेलर्स और युवा क्रिएटर्स को इस मीट-अप में शामिल होने का आमंत्रण दिया है। इच्छुक प्रतिभागी जानकारी और पंजीयन के लिए मोबाइल नंबर $91 78060 83218 पर संपर्क कर सकते हैं।
- खाद्य मंत्री श्री दयालदास बघेल करेंगे अभियान का शुभारंभ, जनप्रतिनिधियों की रहेगी गरिमामयी उपस्थितिरायपुर/जिले में पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित ‘मोर गाँव, मोर पानी’ महाअभियान के अंतर्गत शनिवार, 5 सितंबर को ग्राम पंचायत जेवरा (एन) में वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10 बजे होगा।कार्यक्रम में प्रदेश के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री दयालदास बघेल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। उनके साथ दुर्ग लोकसभा सांसद श्री विजय बघेल, बेमेतरा विधायक श्री दीपेश साहू, साजा विधायक श्री ईश्वर साहू, रजक विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री प्रहलाद रजक, दक्षिण कौशल पीठाधीश्वर एवं छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष स्वामी राजीव लोचन दास जी तथा जनपद पंचायत नवागढ़ के अध्यक्ष श्री खोरबाहरा साहू विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।कार्यक्रम में तेलघानी बोर्ड छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र साहू, जिला पंचायत बेमेतरा की अध्यक्ष श्रीमती कल्पना योगेश तिवारी, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री अजय साहू तथा ग्राम पंचायत जेवरा (एन) के सरपंच श्री प्रमोद साहू भी विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता करेंगे। इसके अलावा जिला पंचायत एवं जनपद पंचायतों के जनप्रतिनिधि, विभिन्न नगर पंचायतों के पदाधिकारी, पार्षद, सरपंच तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन कार्यक्रम में शामिल होंगे।जल संरक्षण और हरित विकास को मिलेगा बढ़ावा‘मोर गाँव, मोर पानी’ महाअभियान के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों के संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और हरियाली बढ़ाने की दिशा में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। वृक्षारोपण कार्यक्रम के जरिए अधिक से अधिक पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी संदेश दिया जाएगा, ताकि भविष्य में जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को और अधिक मजबूती मिल सके।जिला प्रशासन ने जिले के जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और नागरिकों से कार्यक्रम में अधिकाधिक संख्या में उपस्थित होकर अभियान को सफल बनाने की अपील की है।
- मंत्री राजवाड़े की संवेदनशील पहलरायपुर/महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने दिव्यांगजन की समस्या पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए आवेदन के महज 48 घंटे के भीतर सहायता उपलब्ध कराई। सूरजपुर जिले के ग्राम तेलईकछार निवासी दिव्यांग श्री विष्णु लाल यादव को उनकी आवश्यकता को देखते हुए विशेष तीन पहिया इलेक्ट्रिक स्कूटी उपलब्ध कराई गई।श्री विष्णु लाल यादव ने मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े को दिए आवेदन में बताया था कि पिछले वर्ष रायपुर जाते समय वे बस दुर्घटना का शिकार हो गए थे। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद वे दिव्यांग हो गए। घर से अस्पताल की दूरी अधिक होने के कारण इलाज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए आवागमन में उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे स्वयं स्कूटी खरीदने में सक्षम नहीं थे।मंत्री श्रीमती राजवाड़े के संज्ञान में मामला आते ही उन्होंने तत्काल सहायता के निर्देश दिए। निर्देशों के बाद संबंधित विभाग द्वारा आवश्यक कार्रवाई करते हुए महज दो दिनों में विष्णु लाल यादव को तीन पहिया इलेक्ट्रिक स्कूटी उपलब्ध करा दी गई।स्कूटी मिलने से विष्णु लाल यादव को अब अस्पताल जाने, उपचार कराने तथा रोजमर्रा के आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन में सुविधा मिलेगी। उन्होंने सहायता के लिए मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त किया।
- रायगढ़ की बदलेगी तस्वीररिंग रोड, पुल, केलो रिवर फ्रंट, मरीन ड्राइव, ऑक्सीजोन और आधुनिक अधोसंरचना परियोजनाओं को समय-सीमा में पूरा करने के निर्देशआने वाले एक-दो वर्षों में रायगढ़ के विकास की तस्वीर जमीन पर स्पष्ट दिखाई देगी : वित्त मंत्री श्री चौधरीरायपुर/प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को नई गति मिल रही है। इसी क्रम में रायगढ़ शहर को आधुनिक, सुव्यवस्थित और बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त शहर के रूप में विकसित करने की दिशा में वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी ने शुक्रवार को शहर की प्रमुख विकास परियोजनाओं का मैराथन निरीक्षण किया। उन्होंने विभिन्न निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और समय-सीमा की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को कार्यों में तेजी लाने तथा निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने दूध डेयरी ऑक्सीजोन से निरीक्षण की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने गोवर्धनपुर में केलो नदी पर निर्माणाधीन पुल, खर्राघाट स्थित केलो रिवर फ्रंट, नालंदा परिसर, एसईसीएल रोड मरीन ड्राइव, कयाघाट पुल, मिनी स्टेडियम स्थित स्केटिंग रिंग, कौहाकुंडा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, स्टेडियम और एफसीआई ऑक्सीजोन सहित विभिन्न विकास कार्यों का स्थल निरीक्षण किया।*रायगढ़ के सुनियोजित विकास के लिए बड़े अधोसंरचनात्मक कार्यों को प्राथमिकता*वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, इंजीनियरों और निर्माण एजेंसियों के समन्वय से लगातार कार्य किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि शहर की अधोसंरचना को मजबूत करते हुए नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना है। प्रत्येक परियोजना की गहन निगरानी की जा रही है, ताकि विकास कार्य तेजी के साथ उच्च गुणवत्ता में पूरे हों।उन्होंने कहा कि रायगढ़ औद्योगिक विकास के क्षेत्र में प्रदेश के महत्वपूर्ण शहरों में शामिल है। औद्योगिक गतिविधियों के अनुरूप शहर में जिस स्तर की अधोसंरचना विकसित होनी चाहिए थी, वह लंबे समय तक अपेक्षित गति से नहीं बन पाई। इसके चलते यातायात, भारी वाहनों के दबाव, दुर्घटनाओं, धूल और प्रदूषण जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। अब इन चुनौतियों के स्थायी समाधान के लिए सुनियोजित ढंग से बड़े अधोसंरचनात्मक कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है।*रिंग रोड परियोजना से यातायात व्यवस्था होगी सुगम*वित्त मंत्री श्री चौधरी ने रिंग रोड परियोजना को रायगढ़ के भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। घरघोड़ा रोड से झारसुगुड़ा रोड को जोड़ने के लिए प्रथम चरण में कार्य किया जा रहा है। इस परियोजना पर 400 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि भविष्य में रायगढ़ से घरघोड़ा तक सड़क को फोरलेन करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।*हरित क्षेत्र और आधुनिक सार्वजनिक सुविधाओं पर भी जोर*वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में बेहतर सड़कों और पुलों के साथ-साथ हरित क्षेत्रों, खेल सुविधाओं, आधुनिक सार्वजनिक सुविधाओं और नागरिक अधोसंरचना के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। केलो रिवर फ्रंट, मरीन ड्राइव, ऑक्सीजोन, नालंदा परिसर और खेल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाएं शहर के स्वरूप को नया आयाम देंगी। उन्होंने कहा कि आने वाले एक-दो वर्षों में रायगढ़ के विकास की तस्वीर जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा आपसी समन्वय से आने वाली बाधाओं का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान महापौर श्री जीवर्धन चौहान, सभापति श्री डिग्रीलाल साहू, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, नगर निगम आयुक्त श्री बृजेश सिंह क्षत्रिय, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, विभागीय अधिकारी, इंजीनियर तथा संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
- आज 10 गायों के साथ आत्मनिर्भर बने 75 वर्षीय परशुराम गुप्ता’दो-दो हजार रुपए की किस्तों को जोड़कर जुटाई पूंजी, गौ-पालन से प्रतिदिन बेच रहे लगभग 100 लीटर दूध’रायपुर/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना कई किसानों के लिए नई संभावनाओं का आधार बन रही है। ग्राम पंचायत महापल्ली के 75 वर्षीय किसान श्री परशुराम गुप्ता ने भी योजना के तहत प्राप्त राशि को केवल दैनिक जरूरतों में खर्च करने के बजाय बचत कर गौ-पालन की शुरुआत की और आज वे सफलतापूर्वक अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं। श्री परशुराम गुप्ता ने वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली दो-दो हजार रुपए की किस्तों को बचाकर लगभग 10 हजार रुपए की पूंजी जुटाई। इसी राशि से उन्होंने पहली गाय खरीदी और गौ-पालन की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपनी आय और संसाधनों को बढ़ाते हुए एक-एक कर गायों की संख्या में वृद्धि की। आज उनके पास 10 गाय हैं और वे नियमित रूप से दूध उत्पादन कर रहे हैं। वर्तमान में श्री गुप्ता प्रतिदिन लगभग 100 लीटर दूध बेचते हैं। वे दूध को स्थानीय डेयरी में 40 रुपए प्रति लीटर की दर से विक्रय करते हैं। इससे उनके गौ-पालन व्यवसाय का मासिक कारोबार लगभग 1 लाख 20 हजार रुपए तक पहुंच रहा है। खर्च निकालने के बाद होने वाली आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।75 वर्ष की आयु में भी श्री परशुराम गुप्ता पूरी लगन के साथ गौ-सेवा और गौ-पालन से जुड़े हुए हैं। वे बताते हैं कि बचपन से ही उन्हें पशुपालन का शौक था और गायों की सेवा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से प्राप्त राशि ने उन्हें अपने इस अनुभव और रुचि को आय के बेहतर माध्यम में बदलने की प्रारंभिक पूंजी उपलब्ध कराई। श्री गुप्ता कहते है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाली छोटी-छोटी आर्थिक सहायता का योजनाबद्ध उपयोग कर ग्रामीण क्षेत्र के किसान आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि से शुरू हुआ उनका छोटा प्रयास आज एक सफल गौ-पालन व्यवसाय के रूप में विकसित हो चुका है। यदि अनुभव, मेहनत और उपलब्ध संसाधनों का सही दिशा में उपयोग किया जाए तो उम्र कभी भी आत्मनिर्भर बनने की राह में बाधा नहीं बनती।
- ’गांव के अन्य किसान भी हुए प्रेरित’रायपुर/ धान की खेती करने वाले किसान श्री आनंद राम ने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और एनएचएम गेंदा क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लेते हुए 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में गेंदा फूल की खेती की। इससे उन्हें लगभग 44 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन प्राप्त हुआ और बिक्री से 3 लाख 96 हजार रुपये की आय हुई।लैलूंगा विकासखण्ड के ग्राम-कोड़केल निवासी किसान श्री आनंद राम सिदार पहले अपने खेत में धान की खेती करते थे। 0.400 हेक्टेयर क्षेत्र में धान से उन्हें लगभग 10 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, जिसे बेचने पर करीब 31 हजार रुपये की आय होती थी। विभिन्न लागतों को घटाने के बाद उनका कुल लाभ लगभग 22 हजार रुपये रहता था। वर्ष 2025-26 में उद्यानिकी विभाग द्वारा किसान को गेंदा फूल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया गया। विभाग की आवश्यक तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन के आधार पर किसान ने अपने 0.400 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में गेंदा की खेती की। बेहतर प्रबंधन एवं देखरेख के परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 44 क्विंटल गेंदा फूल का उत्पादन प्राप्त हुआ। उत्पाद की बिक्री से उन्हें 3 लाख 96 हजार रुपये प्राप्त हुए।लागत के बाद भी 3.41 लाख रुपये का लाभगेंदा की खेती में किसान को इनपुट लागत के रूप में लगभग 20 हजार रुपये, श्रमिक लागत 20 हजार रुपये तथा अन्य खर्च के रूप में करीब 15 हजार रुपये व्यय करना पड़ा। इस प्रकार कुल लागत लगभग 55 हजार रुपये रही। कुल बिक्री आय में से लागत घटाने के बाद किसान को लगभग 3 लाख 41 हजार रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। इस प्रकार परंपरागत धान की खेती से प्राप्त लगभग 22 हजार रुपये के लाभ की तुलना में गेंदा फूल की खेती से किसान की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।दूसरे किसानों के लिए भी बना प्रेरणा का माध्यमकिसान आनंद राम सिदार की गेंदा खेती की सफलता को देखकर गांव के अन्य किसान भी प्रभावित हुए हैं। किसानों में अब पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाने और अपनी आय बढ़ाने के प्रति रुचि बढ़ी है। कई किसान भविष्य में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत गेंदा क्षेत्र विस्तार जैसी योजनाओं का लाभ लेने के इच्छुक हैं। अधिकारियोे ने बताया कि विभागीय योजनाओं का लाभ लेकर, तकनीकी मार्गदर्शन के साथ पारंपरिक खेती में विविधता लाकर किसान अपनी आमदनी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
- श्याम मंदिर, गौरी शंकर मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख-शांति एवं समृद्धि की कामनारायपुर/श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ स्थित विभिन्न मंदिरों में पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन एवं पूजा-अर्चना की। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के साथ ही प्रदेश की खुशहाली की कामना की।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने रायगढ़ के श्याम मंदिर एवं गौरी शंकर मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से प्रत्येक घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो, यही उनकी प्रार्थना है।इसके पश्चात श्री चौधरी ने रायगढ़ के बड़े रामपुर स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में भी भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन-पूजन किए। उन्होंने प्रदेशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना की।जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का विशेष वातावरण देखने को मिला। भगवान श्रीकृष्ण के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री चौधरी ने सभी प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पावन पर्व हमें धर्म, सत्य, प्रेम और कर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
- रायगढ़ में 2,495 ग्रामीण परिवारों के घरों में बनेंगे शौचालय, 299.40 लाख रुपये की स्वीकृतिस्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) से सुरक्षित स्वच्छता सुविधा का विस्तार, जियो-टैगिंग एवं सत्यापन के बाद डीबीटी से होगा भुगतानरायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और स्वच्छ एवं स्वस्थ जीवन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसी क्रम में रायगढ़ जिले में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत 2,495 पात्र ग्रामीण परिवारों के घरों में व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (आईएचएचएल) निर्माण के लिए 299.40 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह पहल ग्रामीण परिवारों को स्वच्छता, स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ओडीएफ प्लस गांवों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशन में स्वीकृत कार्यों को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप समयबद्ध रूप से पूर्ण कराने की कार्ययोजना तैयार की गई है। योजना के तहत जनपद पंचायत तमनार के 394, खरसिया के 357, घरघोड़ा के 45, पुसौर के 748 तथा धरमजयगढ़ के 951 परिवार लाभान्वित होंगे।*घर-घर शौचालय से बढ़ेगी स्वच्छता और गरिमा*व्यक्तिगत घरेलू शौचालय की सुविधा मिलने से ग्रामीण परिवारों को घर पर ही सुरक्षित एवं स्वच्छ शौचालय उपलब्ध होगा। इससे खुले में शौच की प्रवृत्ति को रोकने के साथ महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए अधिक सुरक्षित एवं सुविधाजनक वातावरण सुनिश्चित होगा। स्वच्छता की यह सुविधा ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में भी सकारात्मक बदलाव लाएगी।*जियो-टैगिंग और सत्यापन के बाद डीबीटी से भुगतान*शौचालय निर्माण कार्य निर्धारित मापदंडों एवं गुणवत्ता मानकों के अनुसार कराया जाएगा। निर्माण पूर्ण होने के बाद प्रत्येक शौचालय की जियो-टैगिंग एवं आवश्यक सत्यापन किया जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में नियमानुसार प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाएगा। इससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।*ओडीएफ प्लस रायगढ़ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम*जिले में 2,495 परिवारों को शौचालय सुविधा मिलने से स्वच्छ एवं स्वस्थ ग्रामों के निर्माण को गति मिलेगी। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के साथ स्वच्छ, सुंदर एवं ओडीएफ प्लस रायगढ़ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।जिला प्रशासन द्वारा संबंधित जनपद पंचायतों को स्वीकृत कार्यों में तेजी लाने, पात्र परिवारों को समय पर योजना का लाभ दिलाने और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। शासन की मंशा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता केवल एक अभियान न रहकर प्रत्येक परिवार की दैनिक जीवनशैली का स्थायी हिस्सा बने और लोगों को स्वच्छता के साथ स्वस्थ, सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिले।
- सिंचाई के साथ मछली पालन और सब्जी उत्पादन की राह हुई आसानरायपुर/ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण और आजीविका संवर्धन को बढ़ावा देने में रोजगार गारंटी योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह विकासखंड के ग्राम बघौदा निवासी श्री मनमोहन हंशराज के खेत में निर्मित व्यक्तिगत आजीविका डबरी इसका प्रेरक उदाहरण है। डबरी बनने से जहां उनके खेतों में सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है, वहीं मछली पालन, दलहन-तिलहन एवं सब्जी उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आय के अवसर भी विकसित हो रहे हैं।श्री मनमोहन के खेत में लगभग 0.30 एकड़ क्षेत्रफल में वर्ष 2024-25 में व्यक्तिगत आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया। इसके लिए 2.76 लाख रुपये की स्वीकृत राशि में से 2.53 लाख रुपये मजदूरी और 0.23 लाख रुपये सामग्री पर व्यय किए गए। डबरी निर्माण से लगभग 1003 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ। इस परिसंपत्ति ने एक ओर ग्रामीण परिवार को रोजगार उपलब्ध कराया, वहीं दूसरी ओर जल संरक्षण और जल संचयन की क्षमता बढ़ाते हुए खेती के लिए सिंचाई का स्थायी आधार तैयार किया।*बारिश पर निर्भर खेती को मिला सिंचाई का सहारा*आजीविका डबरी बनने से पहले श्री मनमोहन के खेतों में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पाता था। वर्षा पर अधिक निर्भरता के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होता था और खेती में कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। डबरी निर्माण के बाद वर्षा जल का संचयन होने से अब खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध है। इससे खेती को स्थायित्व मिला है और बेहतर उत्पादन की संभावनाएं बढ़ी हैं।*एक डबरी, आजीविका के कई साधन*श्री मनमोहन ने डबरी के आसपास अरहर और हल्दी की खेती भी शुरू कर दी है। वर्तमान में डबरी में मछली पालन किया जा रहा है। वहीं आगामी गर्मी के मौसम में डबरी के पानी का उपयोग कर सब्जी उत्पादन शुरू करने की तैयारी है। इस प्रकार एक ही परिसंपत्ति का उपयोग सिंचाई, मत्स्य पालन और कृषि गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, जिससे परिवार के लिए आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो रहे हैं।श्री मनमोहन बताते हैं कि आजीविका डबरी बनने से खेती के लिए पानी की समस्या काफी हद तक दूर हो गई है। अब वे मछली पालन के साथ डबरी के आसपास विभिन्न फसलों की खेती कर रहे हैं और आने वाले समय में सब्जी उत्पादन की भी तैयारी है। उनके अनुसार, डबरी ने खेती को सहारा देने के साथ अतिरिक्त आजीविका के रास्ते भी खोले हैं।*विकसित भारत जी राम जी योजना से रोजगार का विस्तार*श्री मनमोहन ने बताया कि विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत अब ग्रामीण परिवारों को गांव में ही 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी और 125 दिवस का रोजगार मिलने से आर्थिक स्थिति को और मजबूती मिलेगी। रोजगार और आजीविका आधारित परिसंपत्तियों का यह संयोजन ग्रामीण परिवारों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के साथ स्थायी आय के साधन विकसित करने में मददगार साबित हो रहा है।आजीविका डबरी का यह उदाहरण बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार योजनाओं के माध्यम से निर्मित उपयोगी परिसंपत्तियां केवल तत्काल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि लंबे समय तक जल संरक्षण, सिंचाई, कृषि उत्पादन, मत्स्य पालन और आय संवर्धन का आधार बन सकती हैं। मनमोहन के खेत की डबरी इसी सोच को साकार करते हुए ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रभावी मॉडल बन रही है।
- रायपुर/ राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर रायपुर के सदर बाजार स्थित पेठा गली में श्री बांके बिहारी मंदिर पहुंचकर भगवान श्री बांके बिहारी जी के दर्शन एवं पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर राज्य की प्रथम महिला श्रीमती रानी डेका काकोटी भी उपस्थित थीं।राज्यपाल श्री डेका ने भगवान श्रीकृष्ण से प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, शांति एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने प्रदेशवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
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नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सामुदायिक सहभागिता के लिए ओमकुमारी पटेल एवं आरती साहू का चयन
माताओं को विद्यालय से जोड़कर शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और बच्चों के सर्वांगीण विकास में निभाई अहम भूमिका
रायपुर/शिक्षक दिवस के अवसर पर रायगढ़ जिले की दो शिक्षिकाएं श्रीमती ओमकुमारी पटेल एवं श्रीमती आरती साहू राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित होंगी। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गतिविधि आधारित शिक्षण, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास तथा सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए वर्ष 2025 में दोनों शिक्षिकाओं के सम्मान की घोषणा की गई थी। 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्यपाल के हाथों दोनों शिक्षिकाओं को सम्मानित किया जाएगा। वर्तमान में दोनों शिक्षिकाएं विकासखंड पुसौर स्थित शासकीय प्राथमिक शाला सेमरा में सहायक शिक्षक के पद पर पदस्थ हैं।
*नवाचार और समर्पण से शिक्षा को बनाया प्रभावी*
श्रीमती ओमकुमारी पटेल ने 27 जून 2009 को शिक्षक के रूप में अपनी सेवा यात्रा शुरू की। उनकी पहली पदस्थापना प्राथमिक शाला हिरीं, सारंगढ़ में हुई। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने गतिविधि आधारित शिक्षण, शिक्षण-अधिगम सामग्री और नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों में सीखने की रुचि, आत्मविश्वास और रचनात्मकता विकसित करने पर विशेष जोर दिया।
वर्ष 2013 में शासकीय प्राथमिक शाला शंकरपाली, पुसौर में पदस्थापना के बाद उन्होंने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा दिया। उनके मार्गदर्शन में सत्र 2019-20 में विद्यार्थी निखिल साहू का चयन जवाहर नवोदय विद्यालय के लिए हुआ। कोविड-19 के चुनौतीपूर्ण समय में भी उन्होंने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यमों से बच्चों की पढ़ाई जारी रखी और उन्हें डिजिटल शिक्षा से जोड़े रखा।
शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट एवं नवाचारी कार्यों के लिए वर्ष 2020 में उन्हें ‘शिक्षा दूत पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। विद्यालय विकास को सामाजिक दायित्व मानते हुए उन्होंने समुदाय के सहयोग से हरित परिसर, स्वच्छता अभियान और विद्यालय उन्नयन से जुड़े विभिन्न कार्य किए। जरूरतमंद विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन जैसी चुनौतियों के बीच बच्चों की शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
*माताओं की सहभागिता से बच्चों की शिक्षा में आया सकारात्मक बदलाव*
श्रीमती आरती साहू ने 30 जून 2009 को शिक्षक के रूप में सेवा प्रारंभ की। स्नातकोत्तर (वाणिज्य), छत्तीसगढ़ी भाषा, बी.एड. एवं केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा की योग्यता रखने वाली श्रीमती साहू वर्तमान में शासकीय प्राथमिक शाला सेमरा में सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।
वे शिक्षण-अधिगम सामग्री, रचनात्मक गतिविधियों और गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से बच्चों को रोचक एवं नवाचारी शिक्षा प्रदान कर रही हैं। विद्यार्थियों को जवाहर नवोदय विद्यालय और एकलव्य विद्यालय जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने के साथ खेलकूद, योग-व्यायाम, स्वच्छता, नैतिक शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से उनके सर्वांगीण विकास पर भी विशेष ध्यान देती हैं।
उनकी प्रमुख पहल ‘माता उन्मुखी कार्य’ रही है। उनका मानना है कि शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि उसके सफल विद्यार्थी होते हैं और बच्चों की सफलता में माताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। इसी सोच के साथ उन्होंने घर-घर संपर्क कर बच्चों के लिए लर्निंग कॉर्नर तैयार करवाए और माताओं को विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों से जोड़ा।
माताओं को कहानी सुनाने, शिक्षण सामग्री तैयार करने, स्थानीय त्योहारों को सामूहिक रूप से मनाने और समर कैंप जैसी गतिविधियों में सहभागी बनाया गया। इससे बच्चों की शिक्षा के प्रति माताओं की सक्रिय भागीदारी बढ़ी और विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सकारात्मक सुधार आया। समर कैंप के माध्यम से बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा और विभिन्न उपयोगी कौशलों से जोड़ने का प्रयास भी किया जा रहा है।
*रायगढ़ के लिए गौरव का अवसर*
दोनों शिक्षिकाओं ने शिक्षा को केवल कक्षा तक सीमित न रखते हुए नवाचार, सामुदायिक सहभागिता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जोड़ा है। राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान के लिए उनका चयन उनके समर्पण, नवाचार और उत्कृष्ट शिक्षकीय कार्यों की पहचान है। शिक्षक दिवस पर राज्यपाल के हाथों मिलने वाला यह सम्मान दोनों शिक्षिकाओं के साथ-साथ रायगढ़ जिले के लिए भी गौरव का अवसर है। - वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने ग्रहण किया प्रसादरायपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर रायगढ़ शहर में श्रद्धा, भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। विभिन्न स्थानों पर सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों द्वारा महाभंडारे और निःशुल्क भोजन शिविर आयोजित किए गए। वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी इन आयोजनों में शामिल हुए और श्रद्धालुओं के साथ प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही प्रसाद वितरण में भी सहभागिता की।इस अवसर पर वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करते हुए कहा कि “जन्माष्टमी का पर्व रायगढ़ में बहुत उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। रायगढ़ संस्कारों, संस्कृति और मूल्यों की राजधानी है।” उन्होंने कहा कि रायगढ़ में हर पर्व, उत्सव, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक आयोजन को पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाने की परंपरा रही है।श्री चौधरी ने कहा कि रायगढ़ की विशेषता यहां की सामाजिक सहभागिता और सेवा भावना है। लोग समाज सेवा और एक-दूसरे से जुड़ने की भावना के साथ बड़े हृदय से आगे आते हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर शहर में जगह-जगह भंडारे आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें विभिन्न एसोसिएशन, सामाजिक संगठन और समाज के लोग मिलकर भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धा और उल्लास के साथ मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमारी सनातन परंपरा की जीवंतता के साथ-साथ समाज में सेवा, समरसता और आपसी भाईचारे की भावना को भी मजबूत करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा सभी प्रदेशवासियों पर बनी रहे और हर घर में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास हो, यही मंगलकामना है।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने जन्माष्टमी के पावन अवसर पर रायगढ़ सहित समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
- रायपुर/पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहीं सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्रा कला निवासी बिंदिया ने शासन की सक्षम योजना का लाभ लेकर अपने जीवन को नई दिशा दी है। महिला एवं बाल विकास विभाग की सक्षम योजना के तहत मिले एक लाख रुपये के ऋण से उन्होंने किराना दुकान शुरू की। मेहनत और लगन से आज उनका व्यवसाय अच्छी तरह संचालित हो रहा है और इसकी आय से वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ बच्चों की शिक्षा का खर्च भी उठा रही हैं।बिंदिया बताती हैं कि पति के निधन के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई थी। ऐसे समय में पर्यवेक्षक दीदी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें सक्षम योजना की जानकारी दी तथा योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। आवश्यक दस्तावेज तैयार कर उन्होंने आवेदन किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें एक लाख रुपये की ऋण राशि प्राप्त हुई।ऋण राशि का उपयोग कर बिंदिया ने अपने गांव में किराना दुकान शुरू की। नियमित मेहनत और बेहतर प्रबंधन से उनका व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ा। दुकान से होने वाली आमदनी से वे परिवार की दैनिक जरूरतें पूरी कर रही हैं। उन्होंने अपनी आय को व्यवस्थित रखने के लिए बैंक खाता भी खुलवाया है, जिसमें वे व्यवसाय से प्राप्त राशि जमा करती हैं।*बच्चों की शिक्षा को बनाया प्राथमिकता*बिंदिया ने अपने दोनों बच्चों की शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके दोनों बच्चों ने कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई पूरी कर ली है और वर्तमान में स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। किराना दुकान से होने वाली नियमित आमदनी ने बिंदिया को बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च उठाने में भी आर्थिक रूप से सक्षम बनाया है।वह बताती हैं कि पहले आर्थिक जरूरतों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन सक्षम योजना के माध्यम से मिले ऋण ने उन्हें स्वरोजगार का अवसर दिया। आज वे अपने व्यवसाय के माध्यम से स्वयं परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इससे उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हुई है।*ऋण ने दिया आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का आधार*बिंदिया का कहना है कि सक्षम योजना के माध्यम से मिला ऋण उनके लिए सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर साबित हुआ है। किराना दुकान से प्राप्त आमदनी को वे व्यवस्थित रूप से बैंक खाते में जमा कर रही हैं और अपनी आर्थिक स्थिति को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हैं।उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। आर्थिक सहयोग और मार्गदर्शन मिलने से महिलाएं आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हुए आत्मनिर्भर बन रही हैं।*“विष्णु भैया को बहुत-बहुत धन्यवाद”*बिंदिया ने सक्षम योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “सक्षम योजना से मुझे अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर मिला। आज मैं किराना दुकान चला रही हूं और अपने परिवार की जिम्मेदारी स्वयं उठा रही हूं। महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने वाली इस योजना के लिए विष्णु भैया को बहुत-बहुत धन्यवाद।”बिंदिया की कहानी बताती है कि शासन की योजनाओं से मिलने वाला आर्थिक सहयोग, सही मार्गदर्शन और स्वरोजगार का अवसर महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। सक्षम योजना के माध्यम से मिली सहायता ने बिंदिया को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी दिया है। उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा है।
- रायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव आज मानस मंच लोरमी में सर्व यादव समाज एवं यदुवंशी सेना द्वारा आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने भव्य शोभायात्रा में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि यादव समाज सनातन संस्कृति और परंपराओं की मजबूत पहचान है। समाज राउत नाचा जैसी समृद्ध लोक परंपराओं को आज भी सहेजकर आगे बढ़ा रहा है। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हमें एकजुटता, प्रेम और उल्लास के साथ अपनी संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश देता है।जन्माष्टमी उत्सव पर मानस मंच से बाइक रैली निकाली गई। रैली शिवपाट होते हुए लोरमी शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरी। इसके बाद शीतला मंदिर, बाजारपारा से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो मेन रोड होते हुए मानस मंच पहुंची।मानस मंच में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। छत्तीसगढ़ रत्न प्रसिद्ध लोकगायिका आरु साहू ने शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। इसके साथ ही 'महादेव तांडव' रोड शो और बाइक रैली निकली। बड़ी संख्या में समाज के लोग और श्रद्धालु कार्यक्रम में शामिल हुए।श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सर्व यादव समाज लोरमी द्वारा निःशुल्क रक्तदान शिविर भी आयोजित किया गया। शिविर में समाज के साथ इच्छुक लोगों ने भी स्वेच्छा से रक्तदान किया। लोरमी नगर पालिका के अध्यक्ष श्री सुजीत वर्मा, उपाध्यक्ष डॉ. अशोक जायसवाल, जनपद पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती वर्षा सिंह, श्री विक्रम सिंह, श्री गुरमीत सलूजा, श्री धनीराम यादव और श्री संजय यादव सहित यादव समाज तथा यदुवंशी सेना के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक भी बड़ी संख्या में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव में शामिल हुए।
- गुरुजनों से आत्मीय आग्रह: अभाव, संकोच या किसी कारण पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ अवश्य थामिएशिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को बताया अपने जीवन की पूँजीरायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पत्र में अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए बचपन के संघर्ष, उस दौर में शिक्षा प्राप्त करने की कठिनाइयों और आज शिक्षा के क्षेत्र में आए व्यापक बदलाव का भावपूर्ण उल्लेख किया है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे प्रत्येक बच्चे के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानें और विशेष रूप से उन बच्चों का हाथ थामें, जो अभाव, संकोच अथवा किसी अन्य कारण से पीछे छूट रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने लिखा है कि आज मुख्यमंत्री के दायित्व का निर्वहन करते हुए जब उन्हें प्रदेश के बच्चों के भविष्य और उनकी शिक्षा से जुड़े निर्णय लेने का अवसर मिलता है, तब अपने बचपन और विद्यार्थी जीवन के वे दिन और अधिक याद आते हैं। जीवन कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति आदर और कृतज्ञता का भाव कभी कम नहीं होता।बगिया के छोटे से स्कूल से शुरू हुआ शिक्षा का सफरमुख्यमंत्री श्री साय ने पत्र में अपने बचपन को याद करते हुए बताया है कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गाँव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ और गाँव के स्कूल से ही उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई। जीवन ने बहुत छोटी उम्र में उनकी कठिन परीक्षा ली। जब वे लगभग दस वर्ष के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तभी पिता का साया सिर से उठ गया। परिवार, खेती और छोटे भाइयों की चिंता कम उम्र में ही उनके जीवन का हिस्सा बन गई।गाँव में पाँचवीं तक पढ़ने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहाँ लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में एक छोटे से कमरे में रहकर पढ़ाई की। आगे भी पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा का क्रम जारी नहीं रख सके। उन्होंने खेती की जिम्मेदारी संभाली और अपने छोटे भाइयों की पढ़ाई को आगे बढ़ाया।मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय गाँव के एक बच्चे के लिए शिक्षा तक पहुँचना आज जितना सहज नहीं था। विद्यालय दूर होते थे, आवागमन के साधन सीमित थे, पढ़ाई के संसाधनों का अभाव था और आर्थिक कठिनाइयाँ भी कई बच्चों के सपनों की राह में बाधा बन जाती थीं।स्लेट-तख्ती से स्मार्ट क्लास तक:मुख्यमंत्री ने याद किया शिक्षा का बदलता दौरमुख्यमंत्री श्री साय ने अपने विद्यार्थी जीवन और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि आज पीछे मुड़कर देखने पर यह सुखद अनुभूति होती है कि शिक्षा की दुनिया कितनी बदल गई है। जिस समय उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, आज उसी छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास में पढ़ रहे हैं। डिजिटल माध्यमों से दुनिया भर के ज्ञान तक उनकी पहुँच बनी है और वे विज्ञान एवं आधुनिक तकनीक से जुड़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि कभी दूरस्थ अंचलों में विद्यालय तक पहुँचना भी बच्चों के लिए चुनौती हुआ करता था, वहीं आज इन क्षेत्रों में बेहतर विद्यालय, आधुनिक शैक्षणिक संसाधन और नए अवसर बच्चों के द्वार तक पहुँच रहे हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा में आए इस व्यापक परिवर्तन के बावजूद एक बात तब भी सत्य थी और आज भी उतनी ही सत्य है- शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार शिक्षक ही है।तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन शिक्षक ही बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाता हैमुख्यमंत्री श्री साय ने गुरुजनों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है, पुस्तकें उन्हें ज्ञान दे सकती हैं और आधुनिक संसाधन सीखने की राह आसान कर सकते हैं, लेकिन किसी बच्चे के भीतर आत्मविश्वास जगाने, उसके संस्कार गढ़ने, उसकी प्रतिभा पहचानने और उसे एक अच्छा मनुष्य बनाने का सामर्थ्य एक संवेदनशील शिक्षक में ही होता है। उन्होंने कहा कि उनके अपने जीवन में भी गुरुजनों से मिली सीख ने कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का साहस दिया। यही कारण है कि वे शिक्षक को केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि जीवन की दिशा दिखाने वाला पथ-प्रदर्शक मानते हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि जिन अभावों और कठिनाइयों के कारण कभी किसी बच्चे की पढ़ाई रुक जाती थी, वे आज किसी बच्चे के सपनों के रास्ते में बाधा न बनें। कोई बच्चा केवल इसलिए पीछे न रह जाए कि उसका जन्म किसी छोटे गाँव, वनांचल अथवा दूरस्थ क्षेत्र में हुआ है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इसी सोच के साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक सहज, आधुनिक, व्यावहारिक और बच्चों की प्रतिभा के अनुकूल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में सीखने के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। कौशल और व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है तथा डिजिटल शिक्षा, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार हो रहा है।मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन क्षेत्रों में भी विद्यालयों की घंटियाँ फिर सुनाई दे रही हैं, जहाँ परिस्थितियों के कारण वर्षों तक स्कूल बंद रहे थे। यह बदलाव केवल भवन, तकनीक और सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके केंद्र में प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का समान अवसर देने का संकल्प है।मुख्यमंत्री ने कहा कि हम ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहते हैं, जहाँ किसी बच्चे की परिस्थितियाँ उसके सपनों की सीमा तय न करें।हर बच्चे में छिपी हैं अनगिनत संभावनाएँमुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि इस संकल्प को धरातल पर उतारने की सबसे बड़ी शक्ति प्रदेश के शिक्षक हैं। शिक्षक के सामने कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने भीतर अनगिनत संभावनाएँ लेकर आता है। कोई भविष्य का वैज्ञानिक हो सकता है, कोई खिलाड़ी, डॉक्टर, किसान, शिक्षक, कलाकार या जनसेवक।उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे को स्वयं अपनी क्षमता का पता नहीं होता, लेकिन शिक्षक की पारखी दृष्टि उसकी प्रतिभा पहचान लेती है। शिक्षक द्वारा कहा गया प्रोत्साहन का एक वाक्य भी किसी बच्चे को जीवन भर आगे बढ़ने की शक्ति दे सकता है।मुख्यमंत्री का गुरुजनों से विशेष आग्रह:पीछे छूट रहे बच्चे का हाथ थामिएमुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षक दिवस पर गुरुजनों से अत्यंत आत्मीय आग्रह करते हुए कहा कि हर बच्चे के भीतर छिपी संभावना को पहचानिए। विशेषकर उस बच्चे का हाथ अवश्य थामिए, जो अभाव में है, संकोच में है या किसी कारण पीछे छूट रहा है। हो सकता है आपका थोड़ा-सा विश्वास उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दे।उन्होंने कहा कि एक शिक्षक का विश्वास किसी बच्चे के लिए जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा बन सकता है। इसलिए शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, संस्कार और उसकी क्षमताओं को विकसित करना भी है।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने पत्र में अत्यंत भावपूर्ण ढंग से गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस पर वे मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं, बल्कि कभी गाँव के एक छोटे से स्कूल में पढ़ने वाले उस विद्यार्थी के रूप में भी सभी गुरुजनों के प्रति कृतज्ञ हैं, जिसने अपने शिक्षकों से मिले संस्कार और सीख को जीवन की पूँजी माना है।मुख्यमंत्री ने कहा कि समय बदल गया है, स्कूल बदल रहे हैं और पढ़ाने तथा सीखने के साधन भी बदल रहे हैं। आने वाले समय में आधुनिक तकनीक इन्हें और अधिक बदलेगी, लेकिन गुरु और शिष्य के बीच विश्वास, स्नेह और संस्कार का जो संबंध भारतीय परंपरा की आत्मा है, उसका महत्व कभी कम नहीं होगा।हर स्कूल बने सपनों का द्वार, हर कक्षा संभावनाओं का संसारमुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेश के शिक्षकों से आह्वान किया कि हम सब मिलकर ऐसा छत्तीसगढ़ गढ़ें, जहाँ हर स्कूल सपनों का द्वार बने, हर कक्षा संभावनाओं का संसार बने और हर शिक्षक अपने विद्यार्थी के जीवन में आशा का दीप जलाए।उन्होंने कहा कि शिक्षकों के ज्ञान से बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो, उनके संस्कारों से समाज समृद्ध हो और उनके मार्गदर्शन से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाए, यही उनकी कामना है।मुख्यमंत्री श्री साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी गुरुजनों को सादर नमन करते हुए उनके स्वस्थ, सुखी और यशस्वी जीवन की कामना की तथा सभी शिक्षकों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं।

- केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से नई दिल्ली में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने की मुलाकातमुख्यमंत्री ने कहा - नई औद्योगिक नीति में टेक्सटाइल को थ्रस्ट सेक्टर का दर्जा, निवेश के साथ बड़े पैमाने पर खुलेंगे रोजगार के अवसररायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार, निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति में टेक्सटाइल सेक्टर को दिए गए विशेष प्रोत्साहनों तथा इस क्षेत्र में आ रहे निवेश की जानकारी दी। दोनों नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ को मध्य भारत के प्रमुख टेक्सटाइल और अपैरल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने तथा आधुनिक तकनीक, डिजाइन और नवाचार को राज्य के पारंपरिक वस्त्र कौशल से जोड़ने को लेकर भी चर्चा हुई।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल सेक्टर के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में टेक्सटाइल सेक्टर को थ्रस्ट सेक्टर के रूप में शामिल किया है। इसके अंतर्गत इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन एवं अनुदान का प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों के परिणामस्वरूप टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है और प्रदेश में नई इकाइयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है।मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की औद्योगिक नीति का प्रमुख उद्देश्य निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है। इसी दृष्टि से एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग श्रम आधारित होने के कारण बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। नई नीति के इन प्रावधानों से छत्तीसगढ़ टेक्सटाइल निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में तेजी से उभर रहा है।नवा रायपुर में आकार ले रहा टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग इको-सिस्टममुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि नवा रायपुर अटल नगर में टेक्सटाइल क्षेत्र की नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को गति मिल रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि यहां केवल उत्पादन इकाइयां ही स्थापित न हों, बल्कि टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र का एक समग्र इको-सिस्टम विकसित हो, जिसमें डिजाइन, उत्पादन, कौशल विकास, आधुनिक तकनीक और बाजार की सुविधाएं एक-दूसरे से जुड़ी हों।मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग की विशेषता यह है कि अपेक्षाकृत बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ इसमें महिलाओं और युवाओं के लिए भी व्यापक अवसर उपलब्ध होते हैं। इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और सहायक उद्योगों तथा स्थानीय उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलेगा।छत्तीसगढ़ की परंपरा और आधुनिक फैशन टेक्नोलॉजी का होगा संगमबैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश का कोसा सिल्क देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। विशेष रूप से चांपा और आसपास के क्षेत्रों की कोसा परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि इस पारंपरिक कौशल को आधुनिक डिजाइन, तकनीक, ब्रांडिंग और व्यापक बाजार से जोड़कर नई ऊंचाई दी जाए।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (छप्थ्ज्) की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के युवाओं को फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी और इससे जुड़े आधुनिक क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे। साथ ही स्थानीय बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों को डिजाइन एवं तकनीकी नवाचार का लाभ मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।छप्थ्ज् जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान और नई टेक्सटाइल इकाइयों के बीच समन्वय से राज्य में डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक मजबूत वैल्यू चेन विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वस्त्र कला को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप नए उत्पादों और डिजाइनों से जोड़ने का अवसर मिलेगा।सेंट्रल इंडिया के बड़े टेक्सटाइल हब के रूप में उभरने की क्षमताकेंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ वैश्विक स्तर पर भी टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के लिए उपलब्ध संसाधन, राज्य सरकार की निवेश-अनुकूल नीति और रोजगार आधारित प्रोत्साहन इसे इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य बना सकते हैं।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल यूनिट्स के विस्तार से छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है। राज्य जिस प्रकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता देकर आगे बढ़ रहा है, उससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सेंट्रल इंडिया के एक प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है।तकनीक और नवाचार में केंद्र देगा सहयोगश्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार के लिए हरसंभव सहयोग करेगी। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और टेक्सटाइल सेक्टर में नई संभावनाओं के विस्तार के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय पर जोर दिया।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग तेजी से बदल रहा है और आधुनिक तकनीक तथा नवाचार इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के महत्वपूर्ण आधार हैं। केंद्र सरकार इस दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में ऐसा टेक्सटाइल इको-सिस्टम विकसित करना है, जिसमें निवेश और रोजगार के साथ स्थानीय कौशल, पारंपरिक वस्त्र कला, आधुनिक डिजाइन और तकनीक का समन्वय हो। नई औद्योगिक नीति के प्रोत्साहन, नवा रायपुर में विकसित हो रहे औद्योगिक वातावरण और छप्थ्ज् जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के माध्यम से छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल और अपैरल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में देश के प्रमुख केंद्रों में अपनी जगह बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- 0- श्री टेमार्य के सुखद एवं स्वस्थ भविष्य की दीं शुभकामनाएंबालोद. संयुक्त जिला कार्यालय बालोद में पदस्थ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी श्री नरोत्तम सिंह टेमार्य के अर्द्धवार्षिकी आयु पूर्ण होने पर जिला कार्यालय सभाकक्ष में सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें भावभीनी विदाई दी गई। इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने अपनी संवेदनशीलता एवं उदारता का परिचय देते हुए श्री टेमार्य को सम्मानपूर्वक अपने साथ बिठाया तथा अवकाश नगदीकरण एवं भविष्य निधि की राशि भेंट कर उनके सुखद एवं स्वस्थ भविष्य की शुभकामनाएं दीं। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने श्री टेमार्य की दीर्घ शासकीय सेवा, कर्तव्यनिष्ठा एवं समर्पित कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि ईमानदारी, अनुशासन और निष्ठा के साथ लंबे समय तक शासकीय सेवा करना सराहनीय है। उन्होंने जिला कार्यालय परिवार की ओर से श्री टेमार्य को प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। समारोह में अपर कलेक्टर श्री चन्द्रकांत कौशिक, श्री अजय किशोर लकड़ा सहित जिला कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने श्री टेमार्य के भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।
- 0- दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर शासन के महत्वाकांक्षी योजना से किया जाएगा लाभान्वितबालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार समाज कल्याण विभाग, स्वास्थ्य विभाग एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वाधान में बाल दिव्यांग प्रमाणीकरण अभियान 2026 अंतर्गत ’हर पात्र बच्चे तक प्रमाण-पत्र और अधिकार कार्यक्रम अंतर्गत शिविर आयोजित किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के उप संचालक श्री अजय गेडाम ने बताया कि बालोद जिले में शिक्षा विभाग द्वारा कुल 4447 संभावित दिव्यांग छात्र-छात्रा अध्ययनरत् है। जिन्हें उक्त शिविर के माध्यम से दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाकर शासन के महत्वाकांक्षी योजना से लाभान्वित किया जाएगा।शिविर स्थल में जिला मेडिकल बोर्ड बालोद द्वारा परीक्षण कर दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाया जाएगा। जिसमें 06 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कक्षा पहली से कक्षा बारहवीं के दिव्यांग बच्चों का नवीन दिव्यांग प्रमाण पत्र, प्रमाण-पत्रों का नवीनीकरण, यूनिक आई डी कार्ड, कृत्रिम अंग निर्माण हेतु माप, पेंशन पंजीयन, उपकरण पंजीयन, दिव्यांग छात्रवृत्ति पंजीयन, दिव्यांगजन विवाह प्रोत्साहन हेतु पंजीयन एवं घरौंदा गृह से संबंधित जानकारी प्रदाय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिविर का आयोजन समाज कल्याण विभाग सिवनी के कार्यालय परिसर में किया जाएगा। जिसमें 07 सितंबर को बालोद विकासखण्ड, 08 सितंबर को गुरूर विकासखण्ड, 09 सितंबर को गुण्डरदेही विकासखण्ड, 11 सितंबर को डौण्डी विकासखण्ड एवं 12 सितंबर को डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के दिव्यांगजनों का परीक्षण कर दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों को शिविर स्थल तक लाने एवं परीक्षण उपरांत उन्हें संकुल केन्द्रों तक छोड़ने हेतु बसों की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक बस में दिव्यांगजनों के साथ संबंधित जनपद पंचायत, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग एवं समाज कल्याण विभाग जिला बालोद के नामित कर्मचारी उपस्थित रहेंगे। साथ ही शिविर में उपस्थित दिव्यांगजनों एवं उनके सहायकों हेतु चाय, नास्ता, पानी एवं भोजन की व्यवस्था की गई है।
- 0- 03 नियोजकों के द्वारा तकनीकी एवं गैर तकनीकी के 185 पदों पर की जाएगी भर्तीबालोद. जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र बालोद के तत्वावधान में 11 सितंबर 2026 को जिला रोजगार कार्यालय सिवनी, बालोद में एक दिवसीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र बालोद के जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि रोजगार मेले में 03 नियोजकों द्वारा कुल 185 तकनीकी एवं गैर-तकनीकी पदों पर भर्ती की जाएगी। जिसमें 10वीं, 12वीं, इंजीनियर, आईटीआई, बी.एससी. एग्रीकल्चर, स्नातक एवं स्नातकोत्तर योग्यताधारी अभ्यर्थी भाग ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि पुस्कल एग्रोटेक लिमिटेड रायपुर के द्वारा 40 पद, फाइंड दक्ष प्रायवेट लिमिटेड रायपुर के द्वारा 108 एवं यूपीडीटी एजुकेशन टेक्नोलाॅजी प्रायवेट लिमिटेड रायपुर के द्वारा 37 पदों पर भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि रोजगार मेले में शामिल होने के लिए आवेदकों को रोजगार विभाग के पोर्टल https://erojgar.cg.gov.in अथवा रोजगार ऐप के माध्यम से केवल ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही अभ्यर्थियों को रोजगार मेले में अपने समस्त शैक्षणिक योग्यता के मूल प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और रोजगार पंजीयन कार्ड की छायाप्रति लाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में अधिक जानकारी रोजगार ऐप एवं विभागीय वेबसाइट https://erojgar.cg.gov.in अथवा दूरभाष क्रमांक 07749-299509 पर संपर्क किया जा सकता है।
- बालोद. अपर कलेक्टर ने आदेश जारी कर राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड 06 क्रमांक 04 के तहत् जिले में प्राकृतिक आपदा नैसर्गिक विपत्तियों के कारण जिले के मृत व्यक्ति के परिवार (निकटतम वारिस) को आर्थिक सहायता अनुदान दिए जाने के प्रावधानों अनुसार 04 लाख रूपए आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत किया है। अपर कलेक्टर ने संबंधित तहसीलदारों को निर्देशित किया है कि वे स्वीकृत राशि का आहरण एवं भुगतान मृतकांे के निकटतम वारिस को करने के निर्देश दिए हैं। जारी आदेश में अर्जुंदा तहसील के ग्राम मटेवा के मृतक निर्भय राम यादव के पुत्र एवं पौत्र को 04 लाख रूपये स्वीकृत किया गया है। इसी तरह बालोद विकासखण्ड के ग्राम पोण्डी के मृतक श्री बन्नूराम भुआर्य के पत्नी श्रीमती रूखमणी भुआर्य को 04 लाख रूपये स्वीकृत किया गया है।
- 0- दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा जिले के 10 लाख 09 हजार से अधिक कनेक्शनों का होगा सत्यापनबालोद. छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत उपभोक्ताओं के कनेक्शनों एवं उनके रिकॉर्ड को अधिक प्रमाणिक, अद्यतन और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विद्युत रीजन दुर्ग के अंतर्गत दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा जिले कें लगभग 10 लाख 09 हजार 521 निम्नदाब उपभोक्ताओं को ई-केवाईसी कराया जाएगा। जिसकी शुरुआत 01 सितंबर 2026 से हो चुकी है। यह प्रक्रिया उपभोक्ता डेटाबेस को सटीक बनाने और यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि कनेक्शन का उपयोग करने वाला व्यक्ति वास्तविक एवं वैध है। ई-केवाईसी के माध्यम से विद्युत कनेक्शन से संबंधित उपभोक्ता की पहचान का सत्यापन किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी कि विद्युत कनेक्शन जिस व्यक्ति के नाम पर दर्ज है, वह वास्तविक एवं वैध उपभोक्ता है तथा वर्तमान में कनेक्शन का उपयोग कौन कर रहा है। इस प्रक्रिया से विद्युत कंपनी को अपने उपभोक्ता रिकॉर्ड को व्यवस्थित एवं अद्यतन करने के साथ वास्तविक उपभोक्ताओं का प्रमाणिक डेटाबेस तैयार करने में मदद मिलेगी।उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ई-केवाईसी के लिए तीन आसान विकल्प उपलब्ध कराए गए हैं। उपभोक्ता ’मोर बिजली मोबाइल ऐप’ के माध्यम से स्वयं ऑनलाइन ई-केवाईसी कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी वितरण केंद्र अथवा जोन कार्यालय में उपस्थित होकर अधिकृत कर्मचारियों के माध्यम से ई-केवाईसी कराया जा सकता है अथवा मीटर रीडर उपभोक्ता के घर पहुंचकर मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करेगा। ई-केवाईसी के दौरान उपभोक्ता की पहचान का सत्यापन आधार ऑथेंटिकेशन के माध्यम से ओटीपी, फिंगरप्रिंट अथवा फेस ऑथेंटिकेशन से किया जा सकेगा। यदि किसी उपभोक्ता का नाम विद्युत कनेक्शन एवं आधार कार्ड मंे अलग है, तो पहले विद्युत कनेक्शन में नाम सुधार करना होगा, जिसके लिए केवल नाम में त्रुटि होने पर कोई प्रोसेसिंग शुल्क नहीं लिया जाएगा, जबकि मालिकाना हक में परिवर्तन होने पर नियमानुसार शुल्क और दस्तावेज देने होंगे।विद्युत कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है और इसके लिए उपभोक्ता से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि ई-केवाईसी के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति को राशि न दें। उपभोक्ता केवल अधिकृत माध्यमों से ही ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी करें और किसी संदिग्ध लिंक या अनधिकृत ऑनलाइन माध्यम का उपयोग न करें।ई-केवाईसी केवल पहचान सत्यापन की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह विद्युत कंपनी के उपभोक्ता डेटाबेस को सटीक, प्रमाणिक एवं अद्यतन बनाने की महत्वपूर्ण पहल है। इससे वैध उपभोक्ताओं की पहचान सुनिश्चित होने के साथ-साथ मृत उपभोक्ताओं के नाम पर दर्ज कनेक्शनों, अनधिकृत उपयोग और अवैध विद्युत कनेक्शनों की पहचान करने में भी सहायता मिलेगी। विद्युत वितरण कंपनी ने सभी उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे 01 सितंबर 2026 से प्रारंभ ई-केवाईसी प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग प्रदान करें और अपने विद्युत कनेक्शन का ई-केवाईसी अवश्य कराएं।
- 0- धान के बदले दूसरी फसल लेने पर मिलेगा 15 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदानबालोद. छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग ने जिले के किसानों के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाओं को लेकर राहत और प्रोत्साहन से जुड़ी जानकारी जारी की है। खरीफ 2026 बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 सितंबर 2026 कर दी गई है। वहीं, कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर अन्य फसल लेने वाले किसानों को 15,000 रुपए प्रति एकड़ तक की आदान सहायता दी जाएगी।15 सितंबर तक करा सकेंगे बीज उत्पादन कार्यक्रम में पंजीयनबालोद जिले के वे किसान, जिन्होंने बीज प्रक्रिया केंद्र झलमला या जिले की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से खरीफ फसलों का बीज खरीदा है, वे बीज उत्पादन कार्यक्रम के अंतर्गत अपना पंजीयन करा सकते हैं। किसानों की सुविधा को देखते हुए पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अगस्त से बढ़ाकर 15 सितंबर 2026 कर दी गई है। इस योजना में पंजीकृत किसानों को उनके द्वारा उत्पादित बीज का उपार्जन मूल्य सहकारी समिति के माध्यम से समर्थन मूल्य से अधिक प्राप्त होगा।पंजीयन के लिए किसानों को बीज क्रय की रसीद, आधार कार्ड, ऋण पुस्तिका (बी-1) और एग्रीस्टैक कृषक आईडी की छायाप्रति प्रस्तुत करनी होगी। किसान निर्धारित पंजीयन शुल्क के साथ बीज प्रक्रिया केंद्र, झलमला (बालोद) या अपनी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में जाकर पंजीयन करा सकते हैं।धान की जगह दूसरी फसल, तो 15 हजार प्रति एकड़ सहायताकृषकों को धान के स्थान पर अधिक लाभकारी और विविध फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना संचालित की जा रही है। खरीफ वर्ष 2026 में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी या कपास की फसल लेने वाले किसानों को 15,000 रुपए प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि दी जाएगी। वहीं, जो किसान पहले से ही दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी या कपास जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं, उन्हें 10,000 रुपए प्रति एकड़ की सहायता मिलेगी।खाते में सीधे पहुंचेगी सहायता राशियोजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से भेजी जाएगी। योजना का लाभ लेने के लिए किसानों का एकीकृत किसान पोर्टल और एग्रीस्टैक पर पंजीयन होना अनिवार्य है।समय सीमा का रखें ध्यानकृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें और निर्धारित समय-सीमा का विशेष ध्यान दें। 15 सितंबर 2026 तक बीज उत्पादन कार्यक्रम में पंजीयन कराकर किसान अतिरिक्त लाभ प्राप्त कर सकते हैं। समय पर पंजीयन कराएं, फसल में विविधता लाएं और शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं यही किसानों की समृद्धि की ओर एक मजबूत कदम है।
- 0- अपर कलेक्टर श्री वीरेन्द्र सिंह नोडल अधिकारी नियुक्तदुर्ग. छत्तीसगढ़ राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने एवं इसके प्रारूप को तैयार करने के लिए शासन द्वारा उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों की उपस्थिति में समान नागरिक संहिता के प्रावधानों एवं इसके प्रभावों पर समूह चर्चा एवं परिचयात्मक बैठक का आयोजन 8 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे से किया लोक निर्माण विभाग दुर्ग के सभाकक्ष में आयोजित किया गया है।संभागायुक्त श्री एस.एन.राठौर ने दुर्ग, बालोद एवं बेमेतरा जिले के संगठन प्रमुखों को शामिल होने तथा उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। संभागायुक्त के आदेशानुसार बैठक के लिए श्री वीरेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर दुर्ग को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
- दुर्ग. छत्तीसगढ़ राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू किए जाने एवं इसके प्रारूप को तैयार करने के लिए शासन द्वारा उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों की उपस्थिति में समान नागरिक संहिता के प्रावधानों एवं इसके प्रभावों पर समूह चर्चा एवं परिचयात्मक बैठक का आयोजन 9 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे से किया जिला पंचायत राजनांदगांव के सभाकक्ष में आयोजित किया गया है।संभागायुक्त श्री एस.एन.राठौर के आदेशानुसार इसमें राजनांदगांव, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई तथा मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिलों के संगठन प्रमुखों को शामिल होने एवं उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक के लिए अपर कलेक्टर राजनांदगांव श्री सी.एल. मार्कण्डेय, को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
- दुर्ग. जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग दुर्ग के सहयोग से एग्रीकल्चर इन्श्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एआईसी) के सीएसआर योजनांतर्गत तथा भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), जबलपुर के माध्यम से जिले के दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठजनों को निःशुल्क सहायक उपकरण प्रदान करने हेतु मूल्यांकन, परीक्षण एवं चिन्हांकन शिविर आयोजित किया जाएगा।उप संचालक समाज कल्याण से प्राप्त जानकारी अनुसार शिविरों का आयोजन 6 सितंबर को भक्त माता कर्मा सांस्कृतिक भवन लाल बहादुर शास्त्री चिकित्सालय के पास सुपेला भिलाई में होगा, जिसमें नगर पालिक निगम दुर्ग, भिलाई, जनपद पंचायत दुर्ग के समस्त ग्राम पंचायत शामिल होंगे। सुपेला में 7 सितंबर को मंगल भवन, नगर पालिक निगम भिलाई-चरोदा के पीछे होगा, जिसमें नगर पालिक निगम भिलाई-चरोदा, नगर पालिका परिषद कुम्हारी, जामुल, अहिवारा, नगर पंचायत धमधा एवं जनपद पंचायत धमधा के समस्त ग्राम पंचायत शामिल होंगे। इसी प्रकार 8 सितंबर को नगर पालिक निगम रिसाली सभागार में होगा, जिसमें नगर पालिका निगम रिसाली, नगर पंचायत पाटन, जनपद पंचायत पाटन के समस्त ग्राम पंचायत, नगर पालिका परिषद अमलेश्वर एवं नगर पंचायत उतई के क्षेत्र सम्मिलित होंगे। शिविर का समय प्रातः 10 बजे से शाम 4.30 बजे तक रहेगा।इन शिविरों में संबंधित नगरीय निकायों एवं जनपद पंचायत क्षेत्रों के पात्र दिव्यांगजन और वरिष्ठजन शामिल हो सकेंगे। सहायक उपकरण प्राप्त करने के लिए पात्र हितग्राहियों का परीक्षण एवं चिन्हांकन किया जाएगा।हितग्राहियों को शिविर में दिव्यांगता प्रमाण पत्र, यूडीआईडी कार्ड, आधार कार्ड, आय प्रमाण पत्र एवं वर्तमान पासपोर्ट साइज फोटो की छायाप्रति साथ लाना अनिवार्य होगा। जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों एवं नागरिकों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के पात्र दिव्यांगजनों एवं वरिष्ठजनों को शिविर तक पहुंचाने में सहयोग करें, ताकि अधिक से अधिक पात्र हितग्राही इस निःशुल्क सुविधा का लाभ उठा सकें।




























