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-1500 से अधिक बच्चे स्वामी विवेकानंद जी की वेशभूषा में करेंगे राष्ट्रगान : डिप्टी सीएम अरुण साव
-डिप्टी सीएम साव फिर बनवा रहे हैं विश्व रिकॉर्ड, स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में 1500 बच्चों के साथ करेंगे वंदे मातरम् गानबिलासपुर। उप मुख्यमंत्री सह खेल मंत्री श्री अरुण साव ने बताया कि, 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद जी की जयंती को पूरा देश राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाता है। छत्तीसगढ़ में अलग अलग प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। कई स्थानों में स्वदेशी दौड़ का आयोजन होगा। उन्होंने कहा कि, खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा युवा रत्न अवार्ड भी प्रदान किया जाएगा।डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कल 12 जनवरी को उनके नेतृत्व में खेल एवं युवा कल्याण विभाग बिलासपुर में विश्व रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। पुलिस ग्राउंड बिलासपुर में 1500 से अधिक बच्चे विश्व रिकॉर्ड बनाने स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा में इकट्ठे होंगे और वंदे मातरम् का गान करेंगे। एक साथ 1500 स्कूली बच्चे नशा ना करने की शपथ लेंगे। साथ ही कंपनी गार्डन, बिलासपुर में विवेकानंद जी की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जानकारी दी कि पुलिस ग्राउंड बिलासपुर में 5500 स्क्वायर फीट से बड़ी आकर्षक और विशाल रंगोली से भी स्वामी विवेकानंद का चित्र बनाया जा रहा है।राष्ट्रीय युवा दिवस पर इस बार बिलासपुर देश भर में आकर्षण का केंद्र रहने वाला है, ये बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। -
-रविवार को ड्राइंग कंपिटिशन हुआ, जिसमें तीन आयु वर्गों के बालक-बालिकाओं ने कूंचे से अपनी कल्पनाओं में रंग भरे टी सहदेवभिलाई नगर। सेक्टर 05 स्थित बालाजी मंदिर में आंध्र साहित्य समिति के तत्वावधान में हर साल की तरह इस मकर संक्रांति पर भी विविध आयोजन होंगे। चार दिनों तक मनाए जाने वाले तेलुगु भाषियों के सबसे बड़े उत्सव में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कई प्रतियोगिताएं रखी गई हैं। इस कड़ी में रविवार को ड्राइंग कंपिटिशन हुआ, जिसमें तीन आयु वर्गों के बालक-बालिकाओं ने कूंचे से अपनी कल्पनाओं में रंग भरे। सब जूनियर, जूनियर और सीनियर ग्रुप में हुई इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पोंगल, प्रकृति, भगवान बालाजी, बजरंग बली, पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण के दुष्प्रभाव पर आकर्षक चित्रकारी की।मंगलवार को रंगोली व व्यंजन प्रतियोगितामंगलवार को रंगोली प्रतियोगिता रखी गई है। इसी दिन व्यंजन प्रतियोगिता भी होगी, जिसमें प्रतिभागियों को अपने घरों से मैदा या बेसन से बने व्यंजन लाने होंगे। इसके अलावा पुष्पगुच्छ प्रतियोगिता भी रखी गई है, ये पुष्पगुच्छ घरों से तैयार करके ही लाने होंगे। इससे पहले सुबह छह बजे मंदिर में भगवान बालाजी और श्रीदेवी-भूदेवी का अभिषेक कर अलंकरण किया जाएगा।बुधवार को भोगी पर्वअगले दिन यानी बुधवार को भोगी पर्व मनाया जाएगा। जिसमें भगवान बालाजी और भूदेवी की अवतार माता गोदा देवी का सभी रस्मों के साथ कल्याणोत्सव (विवाहोत्सव) भी होगा। दक्षिण भारतीयों में भोगी पर्व का विशेष महत्व है। भोगी पर्व अलाव जलाकर मनाया जाता है, जिसमें प्रतीकात्मक रूप से पुरानी और अवांछित वस्तुओं के साथ बुरी आदतों को आग में झोंक दिया जाता है, ताकि नए एवं सकारात्मक विचारों का मार्ग प्रशस्त हो सके। इस दिन विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे और प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।मकर संक्रांति गुरुवार कोगुरुवार को मकर संक्रांति मनाई जाएगी, इस दिन सुबह छह बजे तिरुप्पावै अनुष्ठान रखा गया है। इसके बाद सहस्रनामार्चना की जाएगी। तत्पश्चात नित्य पूजा होगी, फिर भगवान को नैवेद्य अर्पित किया जाएगा। शाम छह बजे पूजा-अर्चना की जाएगी और उसके बाद सभी भक्तों के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। रात नौ बजे सनातन विधिविधान से शुद्ध भाव से भगवान की एकांत सेवा की जाएगी। एकांत सेवा से पहले विजयनगर के म्यूजिकल ग्रुप सिने संगीत लहरी द्वारा संगीत संध्या आयोजित की जाएगी। - रायपुर - भारत गणराज्य के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लालबहादुर शास्त्री को 60वीं पुण्यतिथि पर सादर नमन करने रायपुर नगर पालिक निगम के संस्कृति विभाग के तत्वावधान में नगर निगम जोन क्रमांक 4 के सहयोग से राजधानी शहर रायपुर के जी ई मार्ग में शास्त्री चौक के किनारे स्थित उनके प्रतिमा स्थल के समक्ष पुष्पांजलि आयोजन रखा गया.नगर निगम रायपुर के तत्वावधान में रखे गए संक्षिप्त पुष्पांजलि आयोजन में पहुंचकर राजधानी शहर की प्रथम नागरिक नगर पालिक निगम रायपुर की महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने समस्त नगरवासियों की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को पुण्यतिथि पर सादर नमन किया.रायपुर नगर निगम संस्कृति विभाग के नगर नगर निगम जोन क्रमांक 4 के सहयोग से रखे गए संक्षिप्त पुष्पांजलि आयोजन में प्रमुख रूप से रायपुर दक्षिण विधायक श्री सुनील सोनी, नगर निगम रायपुर के संस्कृति विभाग अध्यक्ष श्री अमर गिदवानी, एमआईसी सदस्य सर्वश्री अवतार भारती बागल, संतोष सीमा साहू, खेम कुमार सेन , जोन 4 जोन कमिश्नर श्री अरुण ध्रुव सहित बड़ी संख्या में गणमान्यजनों, सामाजिक कार्यकर्त्ताओं नवयुवकों, आमजनों ने प्रतिमा स्थल पर भारत गणराज्य के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न लालबहादुर शास्त्री का 60वीं पुण्यतिथि पर सादर नमन किया.
- रायपुर - नगर पालिक निगम रायपुर क्षेत्र अंतर्गत जोन क्रमांक 4 अंतर्गत होलीक्रॉस स्कूल बैरन बाजार के पास सड़क मार्ग पर बनाये गए बड़े स्पीड ब्रेकर को तोड़कर उसके स्थान पर वहाँ छोटा स्पीड ब्रेकर बना दिया या है. इससे सड़क मार्ग में नागरिकों को यातायात सुगम हो जाने से त्वरित राहत मिली है, वहाँ छोटी उम्र के अनेक बच्चे सड़क किनारे खेलते रहते हैँ, बड़े स्पीड ब्रेकर को तोड़कर छोटा स्पीड ब्रेकर बनाये जाने से उन्हें और नागरिकों को सड़क मार्ग पर आवागमन में सुरक्षा प्राप्त हुई है और इससे वहाँ आकस्मिक सड़क दुर्घटनाओं पर कारगर अंकुश लगा है, जिससे सड़क मार्ग यातायात सुरक्षित हुआ है.
- -देशभर की संस्कृति एक मंच पर देखने का मिला अवसरबालोद । दुधली में आयोजित प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी 2026 में देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर रेंजर्स उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। इसी क्रम में हरियाणा से जंबूरी में शामिल होने आईं नीतू रानी, अंशिका एवं मंदीप ने इस आयोजन को एक बेहतरीन और यादगार अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के माध्यम से देशभर की विविध संस्कृति, कला और परंपराओं को एक ही मंच पर देखने व समझने का अवसर मिला है। यहां विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों से मिलने, संवाद करने और एक-दूसरे की संस्कृति को जानने का अनुभव काफी महत्वपूर्ण हैं। प्रतिभागियों ने बताया कि जंबूरी में कल्चरल एक्टिविटी, एडवेंचर गेम्स एवं विविध रचनात्मक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिनमें भाग लेना उनके लिए नया और रोमांचक अनुभव रहा।सभी गतिविधियां अनुशासन और समन्वय के साथ संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जंबूरी स्थल पर सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है। भोजन, आवास, कैंपिंग एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं बहुत अच्छी हैं। नीतू रानी एवं अंशिका ने बताया कि वे अपनी टीम के साथ हरियाणा की संस्कृति एवं लोककला को प्रस्तुत कर रही हैं, वहीं अन्य राज्यों की ऐसी प्रस्तुतियां भी देखने को मिल रही हैं, जो सुखद अनुभव हैं। उन्होंने कहा कि दुधली में आयोजित यह जंबूरी न केवल सीखने का अवसर प्रदान कर रही है, बल्कि आपसी भाईचारे, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता की भावना को भी मजबूत कर रही है।
- -मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, लोगों ने चखे देशभर के व्यंजनबालोद । राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के तीसरे दिन दुधली में देशभर की संस्कृति, परंपरा और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। जंबूरी परिसर में विभिन्न राज्यों के खान-पान की खुशबू ने सभी को आकर्षित किया और प्रतिभागियों व दर्शकों को जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के जायकों से रूबरू कराया। प्रतिभागियों ने बताया कि जंबूरी उनके राज्य की संस्कृति एवं पारंपरिक खान-पान को पहचान दिलाने का प्रभावी मंच बना है। साथ ही यह आयोजन एक-दूसरे की सांस्कृतिक विविधता को समझने और आत्मसात करने का भी बेहतर माध्यम सिद्ध हो रहा है। इस दौरान उत्तराखंड की लाल चावल की खीर, भटकी चूड़कानी एवं बाल मिठास, उत्तर प्रदेश की बाटी-चोखा, तमिलनाडु की स्वीट पोंगल, कर्नाटक की चुरमुरे, गन पाउडर एवं हुलीगुथी, मध्यप्रदेश की मालिदा, हरियाणा की पारंपरिक सब्जी, जम्मू-कश्मीर की कश्मीरी कहवा एवं कांगड़ी, पश्चिम बंगाल की नारियल-कद्दू व खजूर-गुड़, ओडिशा की चना साग, तथा केरल की विभिन्न चावल आधारित पारंपरिक व्यंजन लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। इन व्यंजनों के स्वाद ने दर्शकों को अपनी ओर खींच लिया और हर स्टॉल पर उत्साह देखने को मिला।पारंपरिक लोकवेश और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्रबालोद के दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी में पारंपरिक लोकवेश एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखते ही बन रही थीं। उत्तराखंड, ओडिशा, साउथ ईस्ट रेलवे, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर साउथ ईस्ट रेलवे द्वारा प्रस्तुत नाल्लामला फॉरेस्ट ट्राइबल डांस, उत्तराखंड का पारंपरिक पहाड़ी नृत्य, राजस्थान की रंग-बिरंगी वेशभूषा में लोकनृत्य, तथा हिमाचल प्रदेश की देवता झलक के साथ सामूहिक नृत्य ने जंबूरी मंच को जीवंत कर दिया। इन मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरा जंबूरी परिसर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया। प्रतिभागियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी अत्यंत बेहतर, यादगार अनुभव प्रदान कर रही है।
- -12 जनवरी को किया जाएगा इस भव्य एवं विशाल कार्यक्रम का समापन, 13 जनवरी को किया जाएगा बिदाई समारोह का आयोजन-युवा, संवाद एवं कैरियर कांउसलिंग कार्यक्रम में नव युवकों से मुखातिब होंगे वित्त मंत्री ओपी चैधरी और डाॅ. केके खण्डेलवालबालोद। जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में 09 से 13 जनवरी तक आयोजित प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी का समापन समारोह सोमवार 12 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मुख्य आतिथ्य में इस भव्य एवं विशाल नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी का रंगारंग समापन किया जाएगा। समापन समारोह की अध्यक्षता पूर्व राज्य सभा सांसद एवं भारत स्काउट गाडड के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ. अनिल जैन करेंगे। कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश के स्कूली शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव, कांकेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद श्री भोजराज नाग भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डाॅ. केके खण्डेलवाल, संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा, डौण्डीलोहारा विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती अनिला भेड़िया, गुण्डदेही विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्री कंुवर सिंह निषाद के अलावा कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेन्द्र चंद्राकर, भारत स्काउट गाइड के राज्य मुख्य आयुक्त श्री इन्द्रजीत सिंह खालसा, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य श्री यशवंत जैन, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि श्री चेमन देशमुख, नगर पालिका परिषद बालोद की अध्यक्ष श्रीमती प्रतिभा चैधरी, नगर पालिका परिषद दल्लीराजहरा के अध्यक्ष श्री तोरण लाल साहू, भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डाॅ. केके मिश्रा, सेकेटरी जनरल प्रेसिडेंट इन काउंसिल श्री पीआर सिंघानिया, कार्यकारी निदेशक श्री अमर वी छेत्री, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील चंद्रवंशी एवं वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. प्रदीप जैन उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस पर सोमवार 12 जनवरी को सुबह 09 बजे युवा संवाद एवं कैरियर काउंसलिंग कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं वित्त मंत्री श्री ओपी चैधरी तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय आयुक्त डाॅ. केके खण्डेलवाल जंबूरी में उपस्थित रोवर रेंजरों से मुखातिब होकर उनके कैरियर निर्माण के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। चतुर्थ दिवस 12 जनवरी को सांध्यकालीन बेला पर शाम 08 बजे महाशिविर ज्वाल का भी आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंदरजीत सिंह खालसा, भारत स्काउट गाइड के जिला मुख्य आयुक्त श्री राकेश यादव एवं कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगी। यह प्रेरणादायी कार्यक्रम युवाओं में अनुशासन, सेवा, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक दायित्वों की भावना को सुदृढ़ करते हुए जंबूरी को स्मरणीय बनाएगा।
- -गुण्डरदेही में विभिन्न विकास कार्यों की देंगे सौगात-प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर्स दुधली होंगे शामिलबालोद । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 12 जनवरी 2026 को बालोद जिले के प्रवास पर रहेंगे। दौरे के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री श्री साय 12 जनवरी को दोपहर 12.30 बजे पुलिस ग्राण्उड रायपुर से हेलीकाॅप्टर द्वारा प्रस्थान कर दोपहर 12.55 बजे जिले के गुण्डरदेही स्थित हेलीपेड पहुॅचेंगे। वहाॅ वे दोपहर 01 बजे से 02 बजे तक विभिन्न विकास कार्यों के भूमिपूजन एवं लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल होंगे। दोपहर 02.05 बजे गुण्डरदेही से प्रस्थान कर दोपहर 02.20 बजे दुधली स्थित हेलीपेड पहुॅचेंगे। दोपहर 02.20 से 02.55 बजे तक आरक्षित। दोपहर 03 बजे से 04 बजे तक प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जम्बूरी कार्यक्रम में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री श्री साय कार्यक्रम पश्चात शाम 04.05 बजे हेलीकाॅप्टर द्वारा रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे।
- -सांस्कृतिक विविधता का उत्सव, लोक- नृत्यों ने बंधा समा, दर्शक हुए मंत्रमुग्धबालोद। बालोद जिले के ग्राम दुधली के प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर्स जंबूरी में हर प्रांत की लोक-संस्कृति, वेशभूषा, संगीत और नृत्य ने ऐसा समां बांधा कि “विविधता में एकता” का संदेश हर पल जीवंत दिखाई दिया। जिसमें खास कर राजस्थान की प्रस्तुतियों में पारंपरिक परिधान, लोकधुनें और गीतों की उमंग-ऊर्जा से भरे कार्यक्रमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकनृत्यों और गीतों के माध्यम से मरुधरा की सांस्कृतिक शान झलकी। वहीं पंजाब की प्रस्तुति में जोश, फुर्ती और आत्मविश्वास साफ नजर आया। “सारी दुनिया तों अन्नदाता होन्दा” जैसे संदेशों के साथ भांगड़ादृगिद्दा ने कृषि संस्कृति और श्रम की महत्ता को रेखांकित किया। इसी प्रकार दिल्ली को “शहरों का शहर नहीं, बल्कि देश की धड़कन” के रूप में प्रस्तुत किया गया। फिल्मी गीतों, आधुनिक रैंप प्रस्तुतियों और सांस्कृतिक कोलाज ने राजधानी की बहुरंगी पहचान को उभारा।तेलंगाना राज्य की प्रस्तुतियों में लोकनृत्य, वाद्य और समकालीन रंगमंच का सुंदर समन्वय देखने को मिला, जिसने दक्षिण भारतीय सांस्कृतिक धारा को प्रभावी ढंग से सामने रखा। छत्तीसगढ़ लोकनृत्यों की मिठास भरी प्रस्तुति में सुआ, मदार और ददरिया जैसे लोकनृत्यों का समावेश रहा। सादगी, सामूहिकता और लोकजीवन की खुशबू से भरे इन नृत्यों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। मध्य प्रदेश की लोककलाओं ने अपनी विशिष्टता से मंच को समृद्ध किया, जहाँ पारंपरिक नृत्य-गीतों के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक गहराई दिखाई दी। उड़ीसा की प्रस्तुति में पारंपरिक ओडिसी नृत्य की मोहक मुद्राओं और भाव-भंगिमाओं ने शास्त्रीय कला की गरिमा और सौंदर्य को उजागर किया। हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक नृत्य ने पहाड़ों की सरलता, उत्सवधर्मिता और सामूहिक आनंद का संदेश दिया। इसी प्रकार उत्तराखंड की प्रस्तुतियों में पहाड़ी लोकसंस्कृति, गीत-संगीत और परंपराओं की सजीव झलक देखने को मिली।उत्तर प्रदेश की प्रस्तुति में फागुन माह की होली का उल्लास छाया रहा। “फागुन माह में होली खेले सांवरा, राधा संग” जैसे होली गीतों ने पूरे कार्यक्रम को रंगों से सराबोर कर दिया। वहीं साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया। इसी प्रकार अन्य राज्यों ने भी राज्यों से जुड़े सांस्कृतिक झलक प्रस्तुत कर लोगो का मन मोह लिया। “भारत मां आजाद रहे, यही हमारा नारा हैय सभी धर्मों के लोग कहें, भारत देश हमारा हैं के नारे के एकता, समरसता और राष्ट्रप्रेम को और सुदृढ़ परिलक्षित किया। लोकनृत्य, गीत, परंपराएं और समकालीन प्रस्तुतियाँ मिलकर इस जंबूरी को सांस्कृतिक महाकुंभ बना दी। जहाँ हर प्रतिभागी ने भारत की बहुरंगी आत्मा को करीब से महसूस किया।एथनिक फैशन शो में विभिन्न राज्यों के पारंपरिक परिधान को दिखाया आकर्षकलोक नृत्य के पश्चात एथनिक फैशन शो में विभिन्न राज्यों से आए रोवर रेंजर्स ने आकर्षक ढंग से अपने पारम्परिक पहनावे का प्रदर्शन रैंप वॉक के माध्यम से किया। जिसमें दर्शकों ने इस अद्भुत रैम्प वॉक को खूब सराहा।
- - सकल जैन समाज की ओर से दो भाषाओं में पुस्तक प्रकाशन की पहल को पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सराहारायपुर। जैन धर्म की महान विभूतियों पर आधारित अनुसंधान जनित प्रस्तावित पुस्तक 'भारत के दिव्य चरित्र : जैनत्व से प्रेरणा' के संदर्भ में सकल जैन समाज के समन्वयक मंडल ने सुप्रसिद्ध अधिवक्ता व पूर्व केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी से मुलाकात कर उनका मार्गदर्शन प्राप्त किया।भेंट के दौरान प्रतिनिधि मंडल ने पुस्तक की अवधारणा, उद्देश्य, सामाजिक व राष्ट्रीय उपयोगिता से उन्हें अवगत कराया। यह कृति सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य से लेकर डॉ. विक्रम साराभाई तक जैन परंपरा से प्रेरित 13 महान विभूतियों के जीवन, त्याग व राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को शोधपरक रूप में प्रस्तुत करेगी।संयोजक प्रवीण सिंगी ने इस अवसर पर पुस्तक की विस्तृत विषय-सूची का संपूर्ण विवरण प्रस्तुत करते हुए प्रत्येक अध्याय की वैचारिक रूपरेखा से उन्हें अवगत कराया।मीनाक्षी लेखी ने इस अवसर पर कहा कि प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव द्वारा प्रतिपादित 'असि-मसि-कृषि' आधारित इकोलॉजिकल जीवन प्रणाली व जैन दर्शन के सिद्धांत आज के ग्लोबल वार्मिंग और युद्ध के लिए आतुर युग में सर्वाधिक प्रासंगिक हो चुके हैं। उनके अनुसार यह अनुसंधान जनित पुस्तक समय की आवश्यकता है। यह कृति वैश्विक स्तर पर विशेष रूप से युवा पीढ़ी के लिये प्रेरक संसाधन सिद्ध होगी। उन्होंने पुस्तक को दो भाषाओं (हिंदी और अंग्रेज़ी) में प्रकाशित करने की योजना की सराहना करते हुए इसके व्यापक सामाजिक प्रचार-प्रसार के लिए भी उपयोगी सुझाव दिये।प्रतिनिधि मंडल ने उनके मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि यह पुस्तक जैन दर्शन को आधुनिक भारत और विश्व की चुनौतियों से जोड़ने वाली एक सशक्त वैचारिक सेतु बनेगी। प्रतिनिधि मंडल में विकास दुग्गड़ (सीए), चंद्रकांत लुंकड़, प्रवीण कुमार जैन, उत्तम संखलेचा, हर्ष बैद व गगन बरड़िया शामिल थे।
- -डिजिटल टोकन, त्वरित प्रक्रिया और बेहतर सुविधाओं से आसान व धान विक्रयरायपुर ।जिले के धान उपार्जन केन्द्रों में पारदर्शी एवं किसान-हितैषी व्यवस्था से धान विक्रय की प्रक्रिया सुगम, सरल और आसान हो गई है। डिजिटल सुविधाओं, सुव्यवस्थित व्यवस्थाओं और त्वरित सेवाओं के कारण किसानों को राहत मिल रही है। इसका प्रत्यक्ष अनुभव बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुनिया कला के निवासी श्री अजय राजवाड़े ने साझा किया।श्री अजय राजवाड़े ने बताया कि उनके पिता श्री शिवधारी राजवाड़े, लघु वर्ग के किसान हैं, जिनके पास कुल 95 क्विंटल धान का रकबा है। उन्होंने बताया कि किसान तुहंर टोकन ऐप के माध्यम से घर बैठे उन्होंने 92.50 क्विंटल धान का टोकन आसानी से काट लिया था। डिजिटल प्रणाली के चलते टोकन कटाने में किसानों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हुई और पूरी प्रक्रिया सरल एवं पारदर्शी रही।उन्होंने बताया कि नवानगर धान उपार्जन केन्द्र पहुंचते ही किसानों को तत्काल गेट पास, नमी परीक्षण तथा बारदाना उपलब्ध करा दिया गया, जिससे धान विक्रय में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आई। उपार्जन केन्द्र पर किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। समिति केन्द्र में पेयजल एवं छाया में बैठने की व्यवस्था उपलब्ध है, वहीं समिति के कर्मचारियों द्वारा किसानों को हर स्तर पर सहयोग प्रदान किया जा रहा है।श्री अजय राजवाड़े ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन में प्रदेश में धान का सर्वाधिक मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है तथा प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। इससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है और जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्ष धान विक्रय से प्राप्त आय से उन्होंने गेहूं, तिलहन, सब्जी सहित अन्य फसलों की खेती की, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हुई। उन्होंने कहा कि वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था अत्यंत सराहनीय है और इससे किसान बहुत संतुष्ट एवं खुश हैं।श्री राजवाड़े ने धान उपार्जन व्यवस्था की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि धान का सर्वाधिक मूल्य मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और किसानों का जीवन स्तर बेहतर हो रहा है।
- -मुख्यमंत्री के नेतृत्व में धान खरीदी की प्रक्रिया सुव्यवस्थित : किसान मोहम्मद अजीज ने पारदर्शी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री का जताया आभाररायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पारदर्शिता के साथ धान खरीदी सुव्यवस्थित तरीके से चल रही है। इसी कड़ी में जशपुर जिले में भी धान खरीदी पारदर्शी एवं सुचारू रूप से संचालित की जा रही है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन हेतु जिले के विभिन्न खरीदी केंद्रों में निरंतर धान की आवक हो रही है।जिले के धान उपार्जन केंद्र महुआ टोली, कुनकुरी में अपनी उपज विक्रय करने पहुंचे ग्राम लोधमा के कृषक श्री मोहम्मद अजीज ने बताया कि केंद्र में धान विक्रय की प्रक्रिया अत्यंत सरल एवं सुविधाजनक रही। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन टोकन प्रणाली के माध्यम से उन्हें बिना किसी परेशानी के समय पर टोकन प्राप्त हुआ। पर्ची कटने से लेकर तौल प्रक्रिया तक सभी कार्य सुचारू एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुए। केंद्र पर स्वच्छ एवं पर्याप्त बारदाना उपलब्ध कराया गया तथा वजन कार्य पूर्णतः पारदर्शी तरीके से किया गया।कृषक श्री अजीज ने बताया कि ऑनलाइन टोकन व्यवस्था से किसानों को अब काफी सहूलियत मिल रही है, जिससे समय की बचत हो रही है और अनावश्यक प्रतीक्षा से भी राहत मिली है। उन्होंने शासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी से किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे न केवल उनका आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा भी मिला है।
- -रीवा उत्खनन के परिणाम उत्साहजनक : संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल-रीवांगढ़ पुरातात्विक उत्खनन स्थल में मिले उत्तर वैदिक काल से पूर्व मानव सभ्यता के अवशेष-छत्तीसगढ़ में 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थी मानव सभ्यता-छत्तीसगढ़ में उत्तर वैदिक काल में ही लौह युगीन संस्कृति हो चुकी थी विकसित-उत्खनन में मौर्य, शुंग, सातवाहन, शक-क्षत्रप, कुषाण और स्थानीय शासकों के सिक्के मिलेरायपुर ।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने आज रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व स्थित ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन स्थल का दौरा किया। यहां आयोजित “छत्तीसगढ़ के प्राचीन सिक्के एवं मुद्रा प्रणाली” विषयक द्वि-दिवसीय संगोष्ठी के समापन समारोह के मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री छत्तीसगढ़ शासन श्री राजेश अग्रवाल ने देशभर से पधारे विद्वानों, विषय विशेषज्ञों, विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा की रीवां उत्खनन के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक हैं। उन्होंने कहा कि यहां आहत सिक्कों से लेकर कल्चुरी कालीन सिक्कों तक की एक अविच्छिन्न श्रृंखला प्राप्त हुई है, जो इस क्षेत्र की ऐतिहासिक निरंतरता को प्रमाणित करती है। श्री अग्रवाल ने बताया कि हालिया उत्खनन में प्राप्त लौह प्रगलन केंद्र तथा रेडियोकार्बन तिथि निर्धारण के आधार पर रीवां की प्राचीनता 9 वीं सदी ईसा पूर्व (उत्तर वैदिक काल) तक निर्धारित की गई है, जो छत्तीसगढ़ के प्राचीन इतिहास और तकनीकी परंपरा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ की धरती एक अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और गौरवशाली सभ्यता की साक्षी रही है। हमारी संस्कृति और इतिहास की जड़ें अत्यंत गहरी हैं, जिन्हें वैज्ञानिक दृष्टि से उजागर करना हम सभी का दायित्व है। यह खोज छत्तीसगढ़ की प्राचीन तकनीकी दक्षता, आर्थिक व्यवस्था और सांस्कृतिक निरंतरता को सशक्त रूप से प्रमाणित करती है।छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगभग 25 किलोमीटर पूर्व स्थित ग्राम रीवां (रीवांगढ़) में चल रहे पुरातात्विक उत्खनन ने प्रदेश के प्राचीन इतिहास को लेकर नई और महत्वपूर्ण जानकारी सामने रखी है। संस्कृति विभाग के पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय द्वारा कराए जा रहे इस उत्खनन में वैज्ञानिक ए.एम.एस. रेडियोकार्बन (कार्बन-14) डेटिंग के माध्यम से यह प्रमाणित हुआ है कि इस क्षेत्र में मानव सभ्यता उत्तर वैदिक काल यानी 800 ईसा पूर्व से भी पहले विकसित हो चुकी थीरीवां का यह प्राचीन स्थल कोलहान नाला और बंधवा तालाब के बीच स्थित है। स्थानीय जनमानस में यहां लोरिक-चंदा की लोककथा पीढ़ियों से प्रचलित रही है। क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक बनावट के कारण इसे मृत्तिकागढ़ या मडफोर्ट भी कहा जाता है। चंडी मंदिर के समीप लगभग 75 एकड़ में फैले मृत्तिकागढ़, उसके चारों ओर खाई और परकोटे के अवशेष आज भी इसकी प्राचीनता के साक्ष्य देते हैंइस क्षेत्र से पहले भी ऐतिहासिक सामग्री मिलने के संकेत मिले थे। वर्ष 1975 में 35 स्वर्ण सिक्के प्राप्त हुए थे, जबकि नेशनल हाईवे के किनारे स्थित एक बड़े टीले को इतिहासकारों ने स्तूप होने की संभावना से जोड़ा था। इन्हीं तथ्यों के आधार पर वर्ष 2019 में व्यवस्थित उत्खनन शुरू किया गया। वर्तमान में यह कार्य संचालनालय के उप संचालक डॉ. पी.सी. पारख के निर्देशन और डॉ. वृषोत्तम साहू के सह-निर्देशन में किया जा रहा है। दो प्रमुख टीलों पर लगभग 7 मीटर गहराई तक खुदाई में विभिन्न कालों के सांस्कृतिक स्तर सामने आए हैं।काल निर्धारण की जटिलता को सुलझाने के लिए उत्खननकर्ताओं ने अलग-अलग सांस्कृतिक स्तरों से चारकोल के तीन सैंपल लेकर अमेरिका की फ्लोरिडा स्थित विश्व प्रसिद्ध और आएसओ प्रमाणित प्रयोगशाला बीटा एनालिटिक्स भेजे। रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।पहला सैंपल: 650 - 543 ईसा पूर्व, बुद्ध के समकालीन महाजनपद कालदूसरा सैंपल: 806 - 748 ईसा पूर्व, बुद्ध के जन्म से लगभग 200 वर्ष पूर्व (उत्तर वैदिक/लौह युग)तीसरा सैंपल: 541 - 392 ईसा पूर्व, महाजनपद से मौर्य काल तकइन निष्कर्षों से यह स्पष्ट हुआ कि छत्तीसगढ़ में उत्तर वैदिक काल में ही लौह युगीन संस्कृति विकसित हो चुकी थी और यहां मानव बसावट की निरंतरता सदियों तक बनी रहीउत्खनन में मौर्य, शुंग, सातवाहन, शक-क्षत्रप, कुषाण और स्थानीय शासकों के सिक्के मिले हैं, जो प्राचीन व्यापारिक गतिविधियों की पुष्टि करते हैं। हाल ही में यहां से 2606 ताम्र सिक्कों की एक विशाल मुद्रा निधि प्राप्त हुई है, जिससे रीवां भारत के उन चुनिंदा स्थलों में शामिल हो गया है, जहां सर्वाधिक सिक्का निधि मिली है। ये सिक्के पहली-दूसरी शताब्दी ईस्वी के बीच प्रचलित गज-देवी प्रकार के स्थानीय ताम्र सिक्के हैंइसके साथ ही, उत्खनन में लोहे के उपकरण बनाने की कार्यशाला के भी साक्ष्य मिले हैं, जो छत्तीसगढ़ के पुरातात्विक इतिहास में पहली बार दर्ज किए गए हैं। पुरातत्वविदों के अनुसार, 800 से 400 ईसा पूर्व के बीच रीवां में सुदृढ़ मानव बस्ती थी, जिसकी निरंतरता लगभग 700 ईस्वी तक रही। इस आधार पर रीवां की तुलना देश के प्राचीन नगरों जैसे कौशांबी और अहिछत्र से की जा सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह उत्खनन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि मध्य भारत के लौह युगीन सांस्कृतिक इतिहास को समझने में एक मील का पत्थर साबित होगा। रेडियोकार्बन परीक्षण से तैयार होने वाली यह कालक्रमिक रूपरेखा भविष्य में होने वाले अन्य उत्खननों के लिए भी मार्गदर्शक बनेगी। रीवांगढ़ क्षेत्र में और विस्तृत खुदाई कराई जाएगी। छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग द्वारा रींवागढ़ के अलावा अब तक गढ़धनौरा, पचराही, ताला, भोंगापाल, सिरपुर महेशपुर, पचराही, तरीघाट, डमरू, मदकूद्धीप, राजिम, देवरी, जमराव आदि स्थलो पर खुदाई कराई जा चुकी है।इस अवसर पर विषय विशेषज्ञों में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ इतिहासकार आचार्य रमेंद्र नाथ मिश्र, श्री जी. एल. रायकवार, मुद्राशास्त्री डॉ. जी. एस. ख्वाजा (नागपुर), प्रो. सुष्मिता बसु मजूमदार (कोलकाता), प्रो. आलोक श्रोतरीय (अमरकंटक), डॉ. देवेन्द्र कुमार सिंह (अमरकंटक), डॉ. विशि उपाध्याय (पटना) तथा डॉ. राजीव मिंज की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में पुरातत्त्व संचालनालय के अधिकारी एवं कर्मचारी, न्यूमिस्मेटिक एंड फिलेटली सोसाइटी ऑफ छत्तीसगढ़ के पदाधिकारी श्री कमल बैद, रीवा के सरपंच श्री घसिया राम साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत डॉ. पी. सी. पारख, उप संचालक द्वारा किया गया तथा संचालन प्रभात कुमार सिंह, पुरातत्ववेत्ता द्वारा किया गया। इस अवसर पर संगोष्ठी की स्मारिका पुस्तिका का भी विमोचन किया गया। उल्लेखनीय है कि संगोष्ठी के अंतर्गत अध्येताओं ने रीवा उत्खनन स्थल एवं वहां प्राप्त पुरावशेषों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। शोध परिभ्रमण कार्य में डॉ. वृषोत्तम साहू, श्री प्रवीण तिर्की एवं अमर भरतद्वाज ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। संगोष्ठी का समापन शैक्षणिक विमर्श, शोध निष्कर्षों और भावी अनुसंधान की संभावनाओं पर सार्थक संवाद के साथ हुआ।
- -ग्राम पंचायत चकेरी में 1.99 लाख रुपये की लागत से हुआ डबरी निर्माणरायपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के साधनों को सुदृढ़ करने तथा किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एण्ड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी जी राम जी) के अंतर्गत सरगुजा जिले में विभिन्न हितग्राही मूलक कार्य कराए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जनपद पंचायत उदयपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत चकेरी में हितग्राही श्री ननकू के खेत में आजीविका डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किया गया है।इस कार्य के लिए शासन द्वारा 1.99 लाख रुपये की स्वीकृत राशि प्रदान की गई है, जिसमें से अब तक 1.82568 लाख रुपये की राशि व्यय की जा चुकी है। आजीविका डबरी निर्माण कार्य का प्रारंभ दिनांक 17 दिसंबर 2025 प्रारंभ हुआ था जिसका कार्य प्रगति पर है और निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया जा रहा है।आजीविका डबरी के निर्माण से हितग्राही को वर्षा जल संचयन की सुविधा मिलेगी, जिससे सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा। इससे फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी तथा मछली पालन, सब्जी उत्पादन एवं अन्य आयवर्धक गतिविधियों के अवसर भी सृजित होंगे। साथ ही, वीबी जी राम जी के तहत स्थानीय श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध होने से ग्रामीण परिवारों की आय में भी वृद्धि हो रही है।हितग्राही श्री ननकू ने बताया कि डबरी निर्माण से खेत में पानी की समस्या का स्थायी समाधान होगा और इससे कृषि के साथ-साथ अन्य आजीविका गतिविधियां भी संभव हो सकेंगी। उन्होंने शासन की इस योजना को ग्रामीणों के लिए उपयोगी बताते हुए इसके लिए आभार व्यक्त किया।उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन एवं जनपद पंचायत उदयपुर द्वारा वीबी जी राम जी के माध्यम से जल संरक्षण एवं आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है और गांवों में सतत विकास को बढ़ावा मिल रहा है।
- -प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के संवर्धन में जनजातीय समाज की ऐतिहासिक भूमिका-‘जनजातीय गौरव पथ’ के निर्माण और महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा-गौरा पूजा एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में मुख्यमंत्री श्री साय की सहभागितारायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज कोरबा जिले के महर्षि वाल्मीकि आश्रम, आईटीआई रामपुर में आयोजित गौरा पूजा महोत्सव एवं बैगा पुजेरी सम्मेलन में शामिल हुए। उन्होंने गौरा-गौरी पूजन तथा बैगा पुजारी सम्मेलन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आदिवासी समाज का अपना गौरवशाली इतिहास, विशिष्ट संस्कृति और समृद्ध परंपराएं हैं। बैगा और पुजेरी समाज आज भी इन परंपराओं के संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर आईटीआई चौक से बालको रोड का नाम ‘जनजातीय गौरव पथ’ रखने तथा इस मार्ग के प्रारंभिक बिंदु पर जनजातीय महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित करने की घोषणा की।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण इसलिए किया था ताकि यहां की सर्वाधिक जनसंख्या वाले आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाया जा सके। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय समाज का मान-सम्मान बढ़ाने के लिए 15 नवंबर शहीद बिरसा मुंडा जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित करते हुए धरती आबा उत्कर्ष योजना प्रारंभ की। इसके साथ ही पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को विकास के दायरे में लाने का कार्य किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि आज देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आदिवासी समाज की बेटी राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आसीन हैं और छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री भी एक साधारण किसान परिवार से आने वाला आदिवासी समाज का बेटा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के लिए 80 हजार करोड़ रुपये तथा पीएम जनमन योजना के लिए 24 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छत्तीसगढ़ के 6,691 गांव लाभान्वित हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि पहाड़ी कोरवा, बिरहोर सहित अन्य पीवीटीजी समुदायों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। आदिवासी अंचलों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके लिए राज्य में प्राधिकरण का गठन कर आदिवासी एवं पिछड़े क्षेत्रों में विकास कार्यों को और अधिक गति दी जा रही है।मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने स्वयं भी वनवासी कल्याण आश्रम में कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज आदिकाल से भगवान गौरागौरी के रूप में शिव-पार्वती के उपासक रहे हैं।उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के महापुरुषों के योगदान को स्मरणीय बनाने, उनकी स्मृतियों को सहेजने और नई पीढ़ी को उनके बारे में जानकारी देने के उद्देश्य से नवा रायपुर में विशाल डिजिटल जनजातीय संग्रहालय स्थापित किया गया है, जिसमें महापुरुषों की जीवन-गाथाओं का सचित्र वर्णन किया गया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को प्रोत्साहित करने हेतु बैगा, गुनिया और सिरहा को प्रतिवर्ष 5,000 रुपये की सम्मान निधि प्रदान की जा रही है। साथ ही सरना स्थलों का संरक्षण किया जाएगा, जो न केवल सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करेगा बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।सम्मेलन को संबोधित करते हुए उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी विकसित भारत का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं, उसी प्रकार मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।उन्होंने कहा कि जिले में अनेक प्राचीन देवी-देवताओं के स्थल हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में विकसित कर पर्यटन के रूप में नई पहचान दी जा रही है।कार्यक्रम में कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी श्री पनतराम भगत एवं श्री बीरबल सिंह ने भी संबोधन दिया। इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत, पूर्व मंत्री श्री ननकी राम कंवर, वनवासी कल्याण आश्रम के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
- रायपुर ।जहाँ चाह वहां राह इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है,कोंडागांव जिले के विकासखंड फरसगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत बानगांव की रहने वाली श्रीमती राशोबाई मरकाम ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत स्व सहायता समूह से जुड़कर न केवल अपने जीवन को नई दिशा दी, बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी कायम की है। राशोबाई आज विभिन्न आजीविका गतिविधियां शुरूकर 01 लाख रूपए से अधिक की आमदनी प्राप्त कर रही हैं।जय माता दी स्व सहायता समूह की सदस्य राशोबाई स्व सहायता समूह से जुड़ने से पहले कृषि मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं और घर के कार्यों तक ही सीमित थी। आय के सीमित साधन होने के कारण परिवार की वार्षिक आय केवल 48 हजार रुपये थी, जिससे दैनिक जरूरतों को पूरा करना काफी मुश्किल होता था और परिवार का पालन पोषण बेहतर ढंग से नहीं हो पाता था।स्व सहायता समूह से जुड़ने के पश्चात उन्हें समूह के माध्यम से आरएफ अनुदान राशि 15 हजार रुपये और सीआईएफ ऋण राशि 60 हजार रुपये प्राप्त हुई। इस सहयोग से उन्होंने कृषि कार्य के साथ-साथ किराना दुकान संचालन एवं मछली पालन जैसी विभिन्न आजीविका गतिविधियां शुरू कीं। जिला प्रशासन की एनआरएलएम टीम के मार्गदर्शन से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उक्त आजीविका गतिविधियों के सफल संचालन से आज श्रीमती राशोबाई मरकाम की वार्षिक आय बढ़कर लगभग 1 लाख 67 हजार रुपये हो गई है। वर्तमान में वे पूर्व की तुलना में दोगुना आय अर्जित कर रही हैं। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है तथा जीवन स्तर में सुखद बदलाव आया है। आज श्रीमती राशोबाई मरकाम ने अपनी मेहनत, लगन और समूह के सहयोग से न केवल आत्मनिर्भर हुई हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए एक मजबूत आर्थिक सहारा भी बनी है। उन्होंने शासन की योजनाओं से मिली सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।उल्लेखनीय है कि एनआरएलएम ‘बिहान’ योजना के अंतर्गत स्व सहायता समूहों एवं टीम के सतत प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बनकर आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें।
- -राम नारायण बिजली उपभोक्ता से बने ऊर्जादातारायपुर, / शासन की महत्वाकांक्षी पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह योजना न केवल बढ़ते बिजली बिल से राहत दे रही है, बल्कि लोगों को स्वच्छ, सस्ती और हरित ऊर्जा से भी जोड़ रही है। योजना का लाभ लेकर आम उपभोक्ता अब आत्मनिर्भर बन रहे हैं और बिजली उपभोग के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन में भी सहभागी बन रहे हैं।इस योजना की सफलता का जीवंत उदाहरण अंबिकापुर नगर के भिट्ठी कला निवासी राम नारायण गुप्ता हैं। उन्होंने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप पैनल स्थापित किया और महज एक माह के भीतर उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया। पहले जहां अधिक बिजली खपत के कारण हर माह भारी-भरकम बिल आता था, वहीं अब सौर ऊर्जा के उपयोग से उन्हें राहत मिली है।श्री राम नारायण गुप्ता ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने तुरंत इसका लाभ लेने का निर्णय लिया। योजना के अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा कुल 1 लाख 8 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है, जिससे सोलर रूफटॉप पैनल लगाना आम नागरिकों के लिए सरल और किफायती हो गया है। सब्सिडी मिलने से प्रारंभिक लागत में काफी कमी आई और उनका निर्णय और भी आसान हो गया।उन्होंने बताया कि सोलर पैनल लगाए अभी एक ही महीना हुआ है और इस अवधि में बिजली बिल पूरी तरह से शून्य आ गया है। इतना ही नहीं, यह योजना उन्हें केवल बिजली उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बना रही है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत विद्युत विभाग के साथ एक एग्रीमेंट किया जाता है, जिसके अनुसार सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली पहले घर की जरूरतों में उपयोग होती है। इसके बाद जो अतिरिक्त बिजली बचती है, वह ग्रिड के माध्यम से विद्युत विभाग को भेज दी जाती है, जिसका भुगतान वित्तीय वर्ष के अंत में उपभोक्ता को किया जाता है।राम नारायण ने कहा कि यह योजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है। सौर ऊर्जा के उपयोग से ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा मिल रहा है और जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम हो रही है। साथ ही सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी आम नागरिकों को इस योजना से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।उन्होंने पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को जनहितकारी बताते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया और अन्य नागरिकों से भी अपील की कि वे इस योजना का लाभ उठाकर न केवल अपने बिजली बिल को कम करें, बल्कि स्वच्छ और सतत ऊर्जा अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दें।
- -युवा संसद में डॉ. रमन सिंह बने अध्यक्ष और बच्चे बने सांसद, लोकहित के मुद्दों पर हुई चर्चा-यूथ पार्लियामेंट में दिखी भविष्य के नेतृत्व की सशक्त झलकरायपुर / नेशनल रोवर - रेंजर जंबूरी का आयोजन पूरे उत्साह, अनुशासन और जीवंत सहभागिता के साथ बालोद जिले के ग्राम दुधली में सम्पन्न किया रहा है। आयोजन के तीसरे दिन जंबूरी परिसर लोकतांत्रिक चेतना का केंद्र बन गया, जब रोवर–रेंजरों एवं उपस्थित नागरिकों को लोकसभा की वास्तविक कार्यवाही का प्रत्यक्ष और व्यावहारिक अनुभव कराया गया। यूथ पार्लियामेंट के मंच पर रोवर–रेंजरों ने सांसदों की भूमिका निभाई वहीं विधानसभा के अध्यक्ष संसद के अध्यक्ष की भूमिका का निर्वहन किया। युवाओं ने जिस आत्मविश्वास, विषयगत समझ और मर्यादित संवाद शैली का प्रदर्शन किया, वह दर्शनीय था। यह मंच भावी जनप्रतिनिधियों को गढ़ने का सशक्त माध्यम गया था।अनुशासन और आत्मविश्वास की मिसाल बने रोवर–रेंजरविधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने की आयोजित युवा संसद की सराहना करते हुए कहा कि यूथ पार्लियामेंट के दौरान रोवर–रेंजरों जिस प्रकार आत्मविश्वास और अनुशासन के साथ अपनी भूमिका को निभाया है, उससे देश के उज्ज्वल भविष्य की कल्पना साकार नजर आती है। आज के युवा कल के हमारे समाज के प्रतिनिधि हैं। इनके कंधों पर हमारी विरासतों को आगे ले जाने का जिम्मा है, जिसे वे बखूबी निभाएंगे इसका हम सभी को भरोसा है। उन्होंने सभी की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं और जिम्मेदार नागरिकता की मजबूत नींव पड़ती है।इस अवसर पर स्कूली शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने भी युवाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि आज के रोवर - रेंजर देश का आने वाला भविष्य है।भारतीय स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. के. के. खंडेलवाल, राज्य मुख्य आयुक्त श्री इंद्रजीत सिंह खालसा, जिला मुख्य आयुक्त श्री राकेश यादव, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा, पुलिस अधीक्षक श्री योगेश कुमार पटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी, रोवर–रेंजर, स्काउट–गाइड्स एवं बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे।सीख, सेवा और साहस से भरा रहा तीसरा दिनजंबूरी का तृतीय दिवस प्रतिभागियों के लिए विविध और प्रेरक गतिविधियों का आयोजन किया गया। जागरण और शारीरिक जांच के साथ फ्लैग सेरेमनी के साथ अनुशासन और एकता का संदेश दिया जाएगा। डॉग शो में कुत्तों की बेहतरीन कलात्मक प्रदर्शन के साथ मार्च पास्ट प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ी प्रतियोगिताओं में भी युवाओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लेते हुए सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूक किया।आज जम्बूरी में आदिवासी संस्कृति परंपरा के साथ आधुनिकता की अनूठी प्रस्तुति दी गयी। आदिवासी वेशभूषा में पारंपरिक व्यंजनों के निर्माण के साथ लोकवाद्यों की भी प्रस्तुति की गई। आदिवासी नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच पारंपरिक भोजन के साथ ही हॉर्स राइडिंग, बाइक रेस और वाटर एक्टिविटी जैसी साहसिक गतिविधियां का भी प्रदर्शन किया गया।युवाओं को आपदा प्रबंधन और ग्लोबल डेवलपमेंट विलेज से जुड़ी प्रतियोगिताओं के साथ वृक्षारोपण भी किया गया। कंटीजेंट लीडर मीटिंग, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, एच डब्लू बी रीयूनियन, नाइट हाईक तथा पायोनियरिंग प्रोजेक्ट प्रतियोगिताओं के भी आयोजित की जाएगी। एरिना में आयोजित इंटरनेशनल नाइट कार्यक्रम में विभिन्न संस्कृतियों की रंगारंग प्रस्तुतियां जंबूरी को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया जाएगा।
- -विद्यालयों–महाविद्यालयों में जागरूकता, ऑनलाइन शपथ और डिजिटल प्रमाण पत्र के माध्यम से जनभागीदारीरायपुर ।छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त राज्य बनाने के लक्ष्य के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा “बाल विवाह मुक्त भारत” एवं “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। मिशन वात्सल्य के अंतर्गत जिला बाल संरक्षण इकाइयों के माध्यम से विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में लगातार जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।अभियान के तहत विद्यार्थियों एवं आम नागरिकों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, कानूनी प्रावधानों तथा इसकी रोकथाम में समाज की भूमिका के प्रति जागरूक किया जा रहा है। कार्यक्रमों के दौरान ऑनलाइन लिंक एवं क्यूआर कोड के माध्यम से लोगों को “बाल विवाह मुक्त” रहने की शपथ दिलाई जा रही है तथा सहभागियों को डिजिटल प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक इस अभियान में सहभागिता निभाई है।जागरूकता सत्रों में बताया गया कि वर्तमान में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अंतर्गत विवाह के लिए लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष एवं लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है। कम उम्र में विवाह कराने पर दो वर्ष तक का कठोर कारावास एवं एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। शासन द्वारा 17 जनवरी 2025 से ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी नियुक्त किया गया है तथा पंचायतों में विवाह पंजीयन को अनिवार्य किया गया है।कार्यक्रमों में यह भी स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह कराना कानूनन अपराध है और इसे क्रूरता की श्रेणी में रखा गया है, जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने निर्णय में स्पष्ट किया है। यदि कहीं बाल विवाह की सूचना मिले, तो इसकी तत्काल जानकारी पंचायत सचिव, संबंधित विभाग अथवा चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 एवं 181 पर देने की अपील की गई।राज्य सरकार का लक्ष्य सभी ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करना है। इस दिशा में निरंतर चल रहे जागरूकता अभियानों से समाज में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है और बाल विवाह के विरुद्ध सामूहिक संकल्प मजबूत हो रहा है।
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्वामी विवेकानंद जयंती (12 जनवरी) ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ के अवसर पर प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद युवा शक्ति के अमर प्रेरणास्रोत हैं। उनके ओजस्वी विचारों, मानवता से परिपूर्ण दर्शन ने न केवल भारत, बल्कि सम्पूर्ण विश्व को आत्मविश्वास, सेवा और आध्यात्मिक जागरण की नई दिशा दी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन युवाओं को यह सिखाता है कि आत्मबल, चरित्र और सेवा-भाव से ही राष्ट्र का निर्माण होता है। उनके विचार आज भी युवाओं को आत्मनिर्भर, कर्तव्यनिष्ठ और राष्ट्रहित में समर्पित बनने के लिए प्रेरित करते हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए यह विशेष गौरव का विषय है कि स्वामी विवेकानंद जी के जीवनकाल का एक महत्वपूर्ण समय राजधानी रायपुर में व्यतीत हुआ। उनसे जुड़ी स्मृतियाँ न केवल रायपुर की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करती हैं, बल्कि प्रदेशवासियों को निरंतर प्रेरणा भी प्रदान करती हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वामी विवेकानंद जी के दार्शनिक और वैचारिक मूल्य आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनते रहेंगे और छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश की युवा शक्ति को राष्ट्र सेवा और मानव कल्याण के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे। file photo
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने महर्षि महेश योगी की जयंती (12 जनवरी) के अवसर पर उन्हें नमन करते हुए कहा कि वे विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु, दार्शनिक एवं योगाचार्य थे, जिन्होंने भावातीत ध्यान (ट्रान्सेंडेंटल मेडिटेशन) के माध्यम से भारत की प्राचीन वैदिक चेतना को वैश्विक पहचान दिलाई।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पावन भूमि राजिम के समीप पांडुका ग्राम में जन्मे महर्षि महेश योगी ने भारतीय अध्यात्म को आधुनिक विज्ञान और वैश्विक संवाद से जोड़ते हुए मानव कल्याण का एक नया मार्ग प्रशस्त किया। उनका संपूर्ण जीवन साधना, अनुशासन और मानवता की सेवा को समर्पित रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि महेश योगी का यह संदेश कि मनुष्य के भीतर असीम ऊर्जा, ज्ञान एवं संभावनाएँ निहित हैं, आज के तनावपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक युग में अत्यंत प्रासंगिक है। उनकी शिक्षाएँ आत्मबोध, मानसिक शांति और संतुलित जीवनशैली के लिए समाज को निरंतर प्रेरित करती हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महर्षि महेश योगी द्वारा स्थापित संस्थाएँ, वैदिक विश्वविद्यालय, ध्यान केंद्र और आयुर्वेदिक परंपराएँ शिक्षा, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं। उनके विचारों से प्रेरित होकर विश्वभर में लाखों लोग मानवता, शांति और समरसता के लिए कार्य कर रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि महर्षि महेश योगी की दिव्य शिक्षाएँ आने वाली पीढ़ियों को आत्मविकास, आंतरिक शांति और वैश्विक सद्भाव के मार्ग पर निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करती रहेंगी।
- -अतिरिक्त अनुदान से किसानों की आय बढ़ाने की पहल-खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता और कृषकों की दीर्घकालीन आय वृद्धि की दिशा में बड़ा कदमरायपुर ।खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने तथा किसानों की आय में दीर्घकालीन और स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल-ऑयल पाम योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत ऑयल पाम की खेती को प्रोत्साहित करने हेतु केंद्र सरकार के अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन द्वारा विभिन्न घटकों में टॉप-अप अनुदान प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक संबल मिल सके।सहायक संचालक उद्यानिकी मुंगेली ने बताया कि ऑयल पाम की खेती में प्रारंभिक लागत अधिक होने तथा 03 से 04 वर्षों की गेस्टेशन अवधि को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार द्वारा देय न्यूनतम 1.30 लाख प्रति हेक्टेयर अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन किसानों को टॉप-अप अनुदान प्रदान कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक कृषक इस फसल की ओर आकर्षित हों।ऑयल पाम एक दीर्घकालीन, कम श्रम वाली और उच्च उत्पादकता वाली फसल है। इसमें रोग प्रकोप की संभावना अत्यंत कम होती है। एक बार रोपण के पश्चात चौथे वर्ष से उत्पादन प्रारंभ हो जाता है और यह फसल 25 से 30 वर्षों तक निरंतर उपज देती है। पारंपरिक तिलहन फसलों की तुलना में ऑयल पाम प्रति हेक्टेयर 4 से 6 गुना अधिक तेल उत्पादन क्षमता रखती है, जिससे किसानों को स्थायी एवं सुनिश्चित आय का लाभ प्राप्त होता है।राज्य शासन द्वारा ऑयल पाम रोपण करने वाले पात्र किसानों को निम्नानुसार अतिरिक्त अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है, इनमें रखरखाव मद में पूर्व निर्धारित 05 हजार 250 प्रति हेक्टेयर की 01 हजार 500 रूपए की वृद्धि कर कुल 06 हजार 750 रूपए प्रति हेक्टेयर, अंतरवर्तीय फसलों हेतु वृद्धि के साथ कुल 10 हजार 250 रूपए प्रति हेक्टेयर, ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने वाले किसानों को 08 हजार 635 रूपए की अतिरिक्त सहायता सहित कुल 22 हजार 765 रूपए प्रति हेक्टेयर, रोपित पौधों एवं अंतरवर्तीय फसलों को जानवरों से बचाने हेतु फेंसिंग के लिए 54 हजार 485 रूपए प्रति हेक्टेयर का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इस प्रकार राज्य शासन द्वारा रखरखाव, फेंसिंग, अंतरवर्तीय फसल एवं ड्रिप सिंचाई मद में कुल 69 हजार 620 रूपए तक का अतिरिक्त अनुदान ऑयल पाम रोपण करने वाले किसानों को प्रदान किया जा रहा है।यह अनुदान केवल उन्हीं कृषकों को देय होगा, जो योजना के अंतर्गत ऑयल पाम का रोपण करेंगे। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी, पात्रता, आवेदन प्रक्रिया एवं तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किसान उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों अथवा अधिकृत प्रतिनिधि कंपनियों से संपर्क कर सकते हैं। ऑयल पाम की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाएगी, बल्कि देश को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने के राष्ट्रीय संकल्प को भी मजबूती प्रदान करेगी।
- -सोलर ऊर्जा से रोशन हो रहा पूरा घररायपुर । आम नागरिकों को स्वच्छ, सस्ती एवं टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला रही है। इस योजना के माध्यम से जिले के अनेक घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं और लोग बिजली खर्च से मुक्त होकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह योजना न केवल नागरिकों को आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है।इसी क्रम में मुंगेली शहर के शिक्षक नगर निवासी श्री जितेन्द्र शर्मा ने अपने घर की छत पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कर योजना का लाभ लिया है। सोलर सिस्टम लगने के बाद उनका घर पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित हो रहा है, जिससे बिजली की खपत लगभग शून्य हो गई है। परिणामस्वरूप उन्हें अब मासिक बिजली बिल की चिंता नहीं करनी पड़ रही है। श्री शर्मा बताते हैं कि पहले हर महीने बिजली बिल एक बड़ा खर्च होता था, लेकिन सोलर सिस्टम लगने के बाद यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई है। उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल आर्थिक राहत दे रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक भी कर रही है। उन्होंने इस जनहितकारी योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सहित शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।गौरतलब है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने पर योजना के तहत उपभोक्ताओं को रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने पर केन्द्र एवं राज्य शासन द्वारा आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है। 01 किलोवाट रूफटॉप सोलर सिस्टम पर केंद्र से 30 हजार एवं राज्य से 15 हजार मिलाकर 45 हजार रुपए की सब्सिडी, वहीं 02 किलोवाट पर कुल 90 हजार और 03 से 04 किलोवाट तक की क्षमता पर 01 लाख 08 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके साथ ही कम ब्याज दर पर आसान किश्तों में बैंक फायनेंस की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे मध्यम वर्ग और आम नागरिकों के लिए यह योजना और अधिक सुलभ बन गई है।
- रायपुर ।रायपुर प्रेस क्लब की निर्वाचन प्रक्रिया के अंतर्गत मतदाता सूची का प्रारंभिक प्रकाशन दिनांक 01 जनवरी 2026 को किया गया था। मतदाता सूची पर दावा–आपत्ति प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 03 जनवरी 2026 निर्धारित थी। इस अवधि में कुल 114 सदस्यों से दावा–आपत्ति प्राप्त हुई, जिनका विधिवत निराकरण कर दिनांक 05 जनवरी 2026 को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन किया गया।निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार दिनांक 06 जनवरी से 08 जनवरी 2026 तक नाम निर्देशन पत्र प्राप्त किए गए। विभिन्न पदों के लिए प्राप्त नाम निर्देशन पत्रों का विवरण इस प्रकार है :- अध्यक्ष पद हेतु – 06, उपाध्यक्ष पद हेतु – 08, कोषाध्यक्ष पद हेतु – 06, महासचिव पद हेतु – 08, संयुक्त सचिव पद हेतु – 10 इस प्रकार कुल 38 नाम निर्देशन पत्र प्राप्त हुए।दिनांक 09 जनवरी 2026 को नाम निर्देशन पत्रों की संवीक्षा की गई, जिसमें सभी नाम निर्देशन पत्र वैध पाए गए। इसके पश्चात दिनांक 10 जनवरी 2026 को नाम वापसी की प्रक्रिया में संयुक्त सचिव पद हेतु 01 नाम निर्देशन पत्र वापस लिया गया। नाम वापसी उपरांत अब कुल 37 प्रत्याशी, 05 पदों के लिए निर्वाचन मैदान में शेष हैं।मतदान 13 जनवरी 2026 को प्रातः 8 बजे से शाम 4 बजे तक प्रेस क्लब रायपुर में संपन्न होगा। मतदान समाप्ति के तत्काल पश्चात् उसी दिन मतगणना भी प्रेस क्लब रायपुर में की जाएगी।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई जोन-1 अंतर्गत उद्यान एवं एस.एल.आर.एम. सेंटर का निरीक्षण आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय द्वारा किया गया।निगम आयुक्त नेहरू नगर स्थित योगा उद्यान का निरीक्षण उद्यान अधिकारी तिलेश्वर साहू के साथ किये। उद्यान के साफ-सफाई व्यवस्था को देखे साथ ही उपस्थित कर्मचारियों से चर्चा कर रोपित पौधो में पर्याप्त सिंचाई और बेहतर करने कहा गया। नेहरू नगर पूर्व में एस.एल.आर.एम. सेंटर निर्मित है, जिसका अवलोकन आयुक्त द्वारा किया गया। एसएलआरएम सेंटर में कार्यरत महिलाओं द्वारा वेस्ट से बेस्ट और ब्यूटीफिकेशन करने का कार्य किया गया है, जो बहुत ही आकर्षक है। साथ ही वहां फौव्वारा का भी निर्माण किया गया है, जो संचालित है। नागरिको द्वारा अपने घरो से कपड़ा दिया जाता है, जिससे सेंटर की महिलाएं झोला एवं अन्य सामग्री बनाने का कार्य कर रही हैं। वर्टिकल रूप में एस एल आर एम सेंटर लिखा हुआ है जो महिलाओं द्वारा मिटटी के दिये से आकर्षक सजावट किया गया है।सेंटर परिसर में कचरे की छटाई हेतु नया मशीन स्थापित किया गया है। ठोस अपशिष्ट पृथक्करण हेतु निर्माण एवं मशीनों का स्थापना कार्य जारी है, जिससे आगामी समय में पृथक्करण हेतु सुविधा होगी। शौचालय का निरीक्षण किए साफ सुथरा और व्यवस्थित मिला। संपूर्ण व्यवस्था में सुधार देखकर आयुक्त ने महिलाओं को प्रोत्साहित किये, और बेहतर कार्य करने को कहा गया है। निरीक्षण के दौरान जोन स्वास्थ्य अधिकारी अंकित सक्सेना, क्रिस्टोफर पॉल एवं समूह की महिलाएं उपस्थित रहे।







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