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- - 18 जुलाई तक जिलेभर में परिवार नियोजन और मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर चलेंगे व्यापक जनजागरूकता अभियानरायपुर। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर सरगुजा जिले में जनसंख्या स्थिरता पखवाड़े का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण कर नागरिकों को परिवार नियोजन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, छोटे परिवार के महत्व तथा जनसंख्या स्थिरता से जुड़े महत्वपूर्ण संदेशों से जागरूक करेगा।इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि स्वस्थ परिवार ही समृद्ध समाज और विकसित राष्ट्र की सबसे मजबूत आधारशिला है। जनसंख्या स्थिरता केवल जनसंख्या नियंत्रण का विषय नहीं, बल्कि माताओं और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, परिवार की आर्थिक उन्नति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा समाज के संतुलित विकास से जुड़ा एक व्यापक सामाजिक अभियान है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार यदि जिम्मेदारीपूर्वक परिवार नियोजन को अपनाए और बच्चों के जन्म के बीच उचित अंतर रखे, तो आने वाली पीढ़ी अधिक स्वस्थ, शिक्षित और सक्षम बन सकेगी।श्री अग्रवाल ने कहा कि राज्य शासन स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। परिवार नियोजन से संबंधित सभी आवश्यक सेवाएं और साधन स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रांतियों या अफवाहों पर विश्वास न करें और स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही वैज्ञानिक एवं सुरक्षित सेवाओं का लाभ उठाएं।उन्होंने कहा कि छोटा, स्वस्थ और शिक्षित परिवार ही आत्मनिर्भर समाज का आधार है। जनसंख्या स्थिरता के माध्यम से मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर तथा कुपोषण जैसी चुनौतियों में प्रभावी कमी लाई जा सकती है। यह अभियान केवल स्वास्थ्य विभाग का नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सहभागिता से सफल होने वाला जनआंदोलन है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शिक्षकों, युवाओं एवं मीडिया से इस जनहितकारी अभियान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया।जनसंख्या स्थिरता पखवाड़ा 11 जुलाई से 18 जुलाई 2026 तक जिलेभर में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों की उपलब्धता, छोटे परिवार के लाभ तथा जनसंख्या स्थिरता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य संस्थानों, ग्राम पंचायतों तथा नगरीय क्षेत्रों में जनजागरूकता अभियान, परामर्श शिविर, प्रचार-प्रसार गतिविधियां एवं समुदाय आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को परिवार नियोजन का संदेश दिया जाएगा।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को ने बताया कि बच्चों के जन्म के बीच पर्याप्त अंतर रखने से माता एवं शिशु दोनों का स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इससे मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर तथा कुपोषण जैसी समस्याओं में कमी आती है। साथ ही माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं उज्ज्वल भविष्य पर बेहतर ढंग से ध्यान दे पाते हैं, जिससे परिवार का जीवन स्तर भी ऊंचा होता है।उन्होंने कहा कि परिवार नियोजन केवल जनसंख्या नियंत्रण का उपाय नहीं, बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की सुरक्षा, परिवार की आर्थिक मजबूती तथा सतत विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। पखवाड़े के दौरान जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में इच्छुक दंपत्तियों को परिवार नियोजन संबंधी निःशुल्क परामर्श एवं सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कॉपर-टी, गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोम सहित अन्य परिवार नियोजन साधन निःशुल्क वितरित किए जाएंगे तथा आवश्यकतानुसार स्थायी एवं अस्थायी परिवार नियोजन सेवाएं भी उपलब्ध रहेंगी।अभियान के दौरान सही उम्र में विवाह, पहले बच्चे के जन्म में उचित अंतराल तथा दो बच्चों के बीच पर्याप्त समय रखने जैसे विषयों पर विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। मैदानी स्वास्थ्य अमले द्वारा चिन्हांकित हितग्राहियों को घर-घर जाकर परामर्श, प्रचार सामग्री एवं गर्भनिरोधक साधनों का वितरण किया जाएगा। साथ ही पुरुष नसबंदी एवं महिला बंध्याकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे तथा सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।ग्रामीण क्षेत्रों में मितानिनों एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से सास-बहू सम्मेलन आयोजित कर महिलाओं एवं परिवारों को परिवार नियोजन, मातृ स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे जिम्मेदार अभिभावकत्व को अपनाते हुए उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का अधिकतम लाभ लें तथा स्वस्थ, सशक्त और समृद्ध समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पी.एस. मार्को, डॉ. ओ.पी. प्रसाद, जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
- -हर महीने मिलेगा 9 हजार रूपए का वजीफारायपुर। प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के 84 युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास की राह आसान हो गई है। इन युवाओं को देश की प्रतिष्ठित नवरत्न कंपनी राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (NMDC) में निःशुल्क व्यावहारिक प्रशिक्षण (इंटर्नशिप) प्राप्त करने का सुनहरा अवसर मिला है। शनिवार को लाइवलीहुड कॉलेज दंतेवाड़ा में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान सभी चयनित युवाओं को उनके नियुक्ति-पत्र सौंपे गए। यह कार्यक्रम जिला प्रशासन, जिला रोजगार विभाग और माई भारत संगठन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक श्री चैतराम अटामी ने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह पहल जिले के युवाओं को मुख्यधारा के रोजगार से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम है।विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष मई महीने में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर में जिले भर से 480 से अधिक युवाओं ने बढ़-चढ़कर आवेदन किया था। पूरी तरह से पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने के बाद अंतिम रूप से 84 युवाओं का चयन किया गया है।इस इंटर्नशिप कार्यक्रम के दौरान युवाओं को छडक्ब् जैसी बड़ी कंपनी में काम करने का व्यावहारिक (ऑन-फील्ड) अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही, प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रत्येक चयनित युवा को प्रति माह 9 हजार रुपये का स्टायपंड (Stipend) भी दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रशिक्षण से युवाओं के तकनीकी और व्यावसायिक कौशल में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे भविष्य में उनके लिए निजी और सरकारी दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर खुलेंगे। जिला प्रशासन ने पूरी चयन और नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी रखने की बात कही है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि दंतेवाड़ा के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए आने वाले समय में भी रोजगारोन्मुखी शिविर, कौशल विकास प्रशिक्षण और इंटर्नशिप के ऐसे कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि जिले के अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सके।इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री अरविंद कुंजाम, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पायल गुप्ता, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर, जिला रोजगार अधिकारी श्री अमित वर्मा सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में युवा एवं छात्र-छात्राएं मौजूद थे।
- -मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्थानीय भाषा के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में अभिनव पहलरायपुर । राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप मातृभाषा आधारित शिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में जशपुर जिले में नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम प्रारंभ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्राथमिक शिक्षा को अधिक प्रभावी, समावेशी और बाल-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे इस कार्यक्रम का संचालन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (ैब्म्त्ज्) के नेतृत्व में, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (क्प्म्ज्), जशपुर के मार्गदर्शन तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (स्स्थ्), नई दिल्ली के सहयोग से किया जाएगा।कार्यक्रम के अंतर्गत जशपुर जिले के कुनकुरी और बगीचा विकासखंड के 202 प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 एवं 2 के विद्यार्थियों को उनकी मातृभाषा सादरी के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों की घर की भाषा और विद्यालय की भाषा के बीच सहज सेतु तैयार करना है, जिससे वे विषय-वस्तु को बेहतर ढंग से समझ सकें और सीखने के प्रति उनका आत्मविश्वास बढ़े।कार्यक्रम को स्थानीय परिवेश से जोड़ने के लिए क्प्म्ज्, जशपुर के मार्गदर्शन में शिक्षकों द्वारा विशेष रूप से सादरी भाषा में शिक्षण सामग्री विकसित की गई है। इन सामग्रियों में स्थानीय संस्कृति, लोककथाओं, परिवेश और जीवन अनुभवों को समाहित किया गया है। बिग बुक, चित्र चार्ट, कविता पोस्टर, अभ्यास पुस्तिकाएं तथा कविता-कहानी संग्रह जैसी सामग्री तैयार की गई है। इन सभी शैक्षणिक संसाधनों की अंतिम अकादमिक समीक्षा क्प्म्ज् के विशेषज्ञों द्वारा 7 जुलाई 2026 को पूर्ण की जा चुकी है।कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चयनित विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने हेतु 20 सदस्यीय जिला स्रोत समूह (क्त्ळ) का गठन किया गया। इस समूह का चार दिवसीय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला 8 से 11 जुलाई 2026 तक क्प्म्ज्, जशपुर में आयोजित की गई। प्रशिक्षण में बहुभाषी शिक्षा के सिद्धांतों, सादरी भाषा में विकसित शिक्षण सामग्री के प्रभावी उपयोग तथा गतिविधि आधारित शिक्षण पद्धतियों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रदर्शन और समूह गतिविधियों के माध्यम से कक्षा शिक्षण की नवीन तकनीकों से भी परिचित कराया गया।प्रशिक्षण के समापन अवसर पर क्प्म्ज् जशपुर के प्राचार्य श्री एम.जेड.यू. सिद्दीकी ने कहा कि यह कार्यक्रम जशपुर के बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज, प्रभावी और आत्मविश्वासपूर्ण बनाएगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से विद्यालय स्तर पर कार्यक्रम का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया। नींव बहुभाषी शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से जशपुर जिला मातृभाषा आधारित प्रारंभिक शिक्षा, समावेशी शिक्षण और गुणवत्तापूर्ण अधिगम के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है।
- रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों को खेती के लिए आवश्यक संसाधन समय पर उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ लगातार कार्य कर रही है। खरीफ सीजन में किसानों को खाद, बीज एवं अन्य कृषि आदान सामग्री की सहज उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सहकारी समितियों में पर्याप्त भंडारण एवं नियमित वितरण की व्यवस्था की गई है। इससे किसानों को बिना किसी परेशानी के समय पर कृषि कार्य प्रारंभ करने में सुविधा मिल रही है।कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड के विजयपुर के किसान श्री कन्हैया लाल कंवर, जो लगभग 3 एकड़ भूमि पर धान की खेती करते हैं, इस व्यवस्था से बेहद संतुष्ट हैं। वे खरीफ सीजन के लिए आवश्यक खाद एवं प्रमाणित धान बीज लेने सहकारी समिति कटघोरा पहुंचे। उन्होंने बताया कि समिति में सभी आवश्यक कृषि आदान सामग्री आसानी से उपलब्ध हो गई, जिससे उन्हें अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ा और खेती की तैयारी समय पर पूरी हो सकी।श्री कंवर ने कहा कि खेती की सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि किसानों को समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और उर्वरक उपलब्ध हों। सहकारी समिति में आवश्यक सामग्री सहजता से मिलने के कारण उनकी खरीफ फसल की तैयारी बिना किसी बाधा के पूरी हो रही है।उन्होंने बताया कि पहले किसानों को कई बार कृषि सामग्री के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ता था, जिसमें समय और श्रम दोनों ज्यादा लगता था। लेकिन अब शासन की प्रभावी व्यवस्था के कारण सहकारी समितियों में ही आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो रहे हैं। इससे किसानों का समय बच रहा है, अनावश्यक खर्च कम हो रहा है और वे पूरे मनोयोग से खेती पर ध्यान दे पा रहे हैं। श्री कंवर ने खेती के लिए समय पर खाद एवं बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं राज्य सरकार के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर की गई यह व्यवस्था खेती को सरल और सुगम बना रही है तथा इससे किसानों का उत्साह भी बढ़ा है।
- -ग्रामीणों से जंगल में अकेले न जाने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपीलरायपुर। जशपुर वनमण्डल के चार वन परिक्षेत्रों में इन दिनों लगभग 32 हाथियों का दल सक्रिय रूप से विचरण कर रहा है। हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग पूरी तरह सतर्क है और संभावित मानव-हाथी द्वंद की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार निगरानी एवं सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।वन विभाग के अनुसार वन परिक्षेत्र दुलदुला के धुरीअम्बा, करडेगा, केन्दापानी, धांधअम्बा, बुकना, मधुटोली और कोहड़ापहरी, वन परिक्षेत्र पत्थलगांव के खाडामाचा, हरदीझरिया, पीठाआमा, राजाआमा, खमगढ़ा, महेशपुर, काडरो और झिमकी, वन परिक्षेत्र कांसाबेल के चेटबा, नारायणबहली, मडि़याझरिया और सोनाजोरी तथा वन परिक्षेत्र बगीचा के झिक्की, खंताडांड, टटकेला, परसाडांड, पेटा, कुरडेग, बिमड़ा, सामरबार, दुर्गापारा, सुईकोना, मैनी, बुचीढांड और जुजगु सहित आसपास के क्षेत्रों में हाथियों की आवाजाही दर्ज की गई है।वनमण्डलाधिकारी ने बताया कि हाथियों की गतिविधियों पर रैपिड रिस्पॉन्स टीम (आरआरटी) और वन विभाग का मैदानी अमला 24 घंटे निगरानी रखे हुए है। हाथियों की लोकेशन का लगातार पता लगाकर आसपास के गांवों में तत्काल सूचना दी जा रही है। साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में मुनादी कर ग्रामीणों को सतर्क रहने और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी दी जा रही है।वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि हाथियों के विचरण के दौरान लकड़ी, चारा या अन्य निस्तार कार्यों के लिए जंगल में प्रवेश न करें। किसी भी स्थिति में हाथियों के पास जाने, उन्हें उकसाने, उनका पीछा करने अथवा सेल्फी और वीडियो बनाने का प्रयास न करें, क्योंकि इससे गंभीर दुर्घटना हो सकती है।विभाग ने बताया कि ग्राम स्तर पर जनप्रतिनिधियों, वन सुरक्षा समितियों और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से हाथियों की गतिविधियों की जानकारी लगातार साझा की जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके। साथ ही लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल वन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने का आग्रह किया गया है। वन विभाग ने नागरिकों से अनुरोध किया है कि रात्रि के समय अनावश्यक रूप से जंगल या हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में न जाएं। यदि कहीं हाथियों की मौजूदगी दिखाई दे या उनकी गतिविधियों की जानकारी मिले, तो इसकी सूचना तुरंत निकटस्थ वन अधिकारी, वनकर्मी या आरआरटी को दें। विभाग का कहना है कि ग्रामीणों की सतर्कता, सहयोग और समय पर सूचना से मानव-हाथी द्वंद की घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। file photo
- -आधुनिक प्रशिक्षण, डिजाइन नवाचार और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से बढ़ेगी आजीविका और रोजगाररायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में जशपुर जिले में जिला प्रशासन द्वारा "जशक्राफ्ट" ब्रांड के माध्यम से बांस हस्तशिल्प को नई पहचान देने, स्थानीय कारीगरों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने तथा उनकी आय में वृद्धि के उद्देश्य से विशेष पहल की जा रही है।विकासखंड जशपुर की ग्राम पंचायत झोलांगा में 29 जून से 29 जुलाई तक एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण आयोजित किया जा रहा है। जिला पंचायत एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य बांस हस्तशिल्प से जुड़े लगभग 150 परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाना है। वर्तमान में 46 महिलाओं का प्रथम बैच प्रशिक्षण प्राप्त कर रहा है।प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक मशीनों के उपयोग, नवीन डिजाइनों और वर्तमान बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाले बांस उत्पाद तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए गुजरात के सूरत से विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को आमंत्रित किया गया है। प्रशिक्षण में फैंसी ट्रे, गुलदस्ते, माचिया, सजावटी सामग्री, चटाई, आकर्षक टोकरियां, फर्नीचर, सोफा, पलंग सहित अनेक आधुनिक एवं उपयोगी उत्पाद बनाना सिखाया जा रहा है।जशपुर और मनोरा विकासखंड में लगभग 250 परिवार वर्षों से बांस हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका अर्जित कर रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बिहान स्व-सहायता समूहों की महिलाएं भी सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। इन समूहों को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ), बैंक लिंकेज तथा मुद्रा ऋण जैसी वित्तीय सुविधाओं से जोड़कर उनके उद्यमों को मजबूत बनाया जा रहा है। साथ ही समय-समय पर कौशल उन्नयन एवं उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।जशक्राफ्ट ब्रांड के अंतर्गत तैयार हस्तशिल्प उत्पादों को रूरल मार्ट, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों तथा देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाने के लिए डिजाइन एवं विपणन विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं, ताकि स्थानीय कारीगरों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके और उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध हो।राज्य सरकार की यह पहल पारंपरिक बांस शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ने के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, जनजातीय परिवारों की आय वृद्धि तथा आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। जिला प्रशासन का लक्ष्य आगामी वर्ष तक हस्तशिल्प से जुड़े सभी स्व-सहायता समूहों के सदस्यों को "लखपति दीदी" की श्रेणी में शामिल करना है।
- -जुलाई और अगस्त में लगाए जाएंगे 4 और शिविररायपुर । उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निर्देश पर कबीरधाम जिले के सहसपुर लोहारा तहसील में विशेष राजस्व समस्या निवारण शिविरों की श्रृंखला का शुभारंभ शनिवार को मंगल भवन, सहसपुर लोहारा में हुआ। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित पहले शिविर में राजस्व संबंधी मामलों के त्वरित निराकरण के लिए आमजन से आवेदन प्राप्त कर उनका मौके पर समाधान किया गया।जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू ने कहा कि उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की पहल पर आयोजित इन विशेष शिविरों का उद्देश्य राजस्व संबंधी समस्याओं का शीघ्र और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि सहसपुर लोहारा तहसील मुख्यालय में जुलाई और अगस्त माह के दौरान कुल पांच विशेष राजस्व शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिससे लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण हो सके।कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने अधिकारियों को शिविर में प्राप्त आवेदनों का तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिए। जिन मामलों में न्यायालयीन प्रक्रिया आवश्यक है, उनमें भी त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए आवेदकों को पूरी प्रक्रिया की जानकारी और आवश्यक मार्गदर्शन देने कहा। शिविर के दौरान सिंघनपुरी निवासी श्री रामकुमार तथा पिरचाटोला निवासी श्री खेमसिंह को मौके पर ही ऋण पुस्तिका प्रदान की गई। शिविर में जाति प्रमाण पत्र, अभिलेख सुधार, फौती नामांतरण, जन्म प्रमाण पत्र, ऋण पुस्तिका, भू-अधिकार पट्टा, बिक्री नकल, राशन कार्ड तथा बिजली कनेक्शन सहित विभिन्न विषयों से संबंधित कुल 96 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 85 प्रकरणों का शिविर में ही निराकरण कर दिया गया, जबकि शेष 11 प्रकरणों में न्यायालयीन प्रक्रिया प्रारंभ की गई।अपर कलेक्टर श्री नरेंद्र पैंकरा ने बताया कि सहसपुर लोहारा तहसील में 21 जुलाई, 1 अगस्त, 11 अगस्त और 21 अगस्त को चार और विशेष राजस्व समस्या निवारण शिविर, मंगल भवन सहसपुर लोहारा में आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में अविवादित एवं विवादित नामांतरण-बंटवारा, सीमांकन, ऋण पुस्तिका वितरण, नक्शा अद्यतन एवं बटांकन, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, डिजिटल हस्ताक्षर, आधार एवं मोबाइल नंबर अद्यतन, अभिलेख शुद्धता, त्रुटि सुधार, व्यपवर्तन, स्वामित्व योजना सहित सभी प्रकार के राजस्व प्रकरणों के आवेदन प्राप्त कर उनका निराकरण किया जाएगा।
- रायपुर ।कोरबा जिले के उरगा में अवैध रूप से उर्वरक भंडारण किए जाने की सूचना प्राप्त होने पर कृषि विभाग की टीम द्वारा तत्काल निरीक्षण एवं जांच की गई। निरीक्षण के दौरान सिलियरी भाटा, उरगा स्थित एक गोदाम में 100 बोरी (लगभग 4.5 टन) आईपीएल यूरिया का भंडारण पाया गया। जांच के दौरान संबंधित खाद विक्रेता से उर्वरक क्रय-विक्रय से संबंधित बिल एवं आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया, किंतु वह कोई वैध बिल प्रस्तुत नहीं कर सका। साथ ही, उक्त उर्वरक का भंडारण किस उद्देश्य से किया गया था, इसका भी संतोषजनक एवं स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।जांच में यह पाया गया कि श्याम खाद भंडार, उरगा द्वारा अघोषित गोदाम में 100 बोरी आईपीएल यूरिया का अवैध भंडारण किया गया था। इस पर कृषि विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उर्वरक का नमूना परीक्षण हेतु लिया गया तथा संपूर्ण 100 बोरी यूरिया को जब्त कर लिया गया।जब्त किए गए उर्वरक को अग्रिम वैधानिक कार्रवाई पूर्ण होने तक महावीर अग्रवाल की सुपुर्दगी में सौंपा गया है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि उर्वरकों के अवैध भंडारण एवं कालाबाजारी पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा इस प्रकार के मामलों में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- 0- नवीन बस सहित चार वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर किया रवाना0- प्रदेश का पहला क्यूआर कोड आधारित डिजिटल ट्रैकिंग मालखाना प्रबंधनबिलासपुर. उप मुख्यमंत्री तथा कांकेर जिले के प्रभारी मंत्री श्री अरुण साव ने आज कांकेर सिटी कोतवाली थाने में ई-मालखाना का शुभारंभ किया। उन्होंने इस मौके पर जिला पुलिस को प्राप्त एक नवीन बस सहित चार वाहनों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। कांकेर सिटी कोतवाली में स्थापित ई-मालखाना क्यूआर कोड आधारित प्रदेश का पहला थाना है, जहां डिजिटल ट्रैकिंग प्रबंधन प्रणाली को पारदर्शी, आधुनिकीकरण और सुव्यवस्थित ढंग से सरलीकृत किया गया है। उप मुख्यमंत्री श्री साव ने ई-मालखाना के शुभारंभ के बाद जब्तशुदा सामानों की ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रक्रिया की जानकारी ली। उन्होंने जिला पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए इसे बेहतर व्यवस्था बताया।उप मुख्यमंत्री को पुलिस अधीक्षक श्री निखिल राखेचा ने बताया कि ई-मालखाना प्रणाली एक आधुनिक डिजिटल प्रबंधन व्यवस्था है, जिसके माध्यम से अपराध के दौरान विभिन्न प्रकरणों में जब्त की गई संपत्तियों एवं दस्तावेजों का सुरक्षित, पारदर्शी एवं व्यवस्थित रिकॉर्ड रखा जाएगा। इस प्रणाली का उद्देश्य जब्त संपत्ति के रखरखाव को अधिक सुरक्षित, सुगम एवं जवाबदेह बनाना है, ताकि विवेचना एवं न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान आवश्यक सामग्री को शीघ्रता से खोजकर प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि ई-मालखाना में जब्त किए गए वाहन, मोबाइल फोन, नकदी, हथियार, आभूषण, एनडीपीएस प्रकरणों से संबंधित सामग्री तथा अन्य केस प्रॉपर्टी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाता है, जिससे प्रत्येक वस्तु का सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित डेटा उपलब्ध रहता है।उल्लेखनीय है कि जिला पुलिस कांकेर द्वारा अपराध के दौरान जब्तशुदा हथियारों, उपकरणों व सामानों के रखरखाव की प्रबंधन प्रणाली को पारदर्शी, आधुनिकीकृत और सुव्यवस्थित बनाने के लिए ई-मालखाना शुरू किया गया है, जिसमें संपूर्ण रिकॉर्ड ऑनलाइन किया जा रहा है। प्रत्येक बॉक्स के लिए क्यूआर कोड जनरेट किया गया है। बॉक्स में चस्पा क्यूआर कोड को स्कैन करते ही अपराध प्रकरण का विवरण, बॉक्स में बंद जब्त सामान की जानकारी संख्या और तिथि सहित मिल जाती है।साथ ही जब्त सामान या उपकरण जैसे मोबाइल, नकदी, हथियार, आभूषण, मादक द्रव्य, प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स आदि का डिजिटल रिकॉर्ड क्यूआर कोड की स्कैनिंग से आसानी से उपलब्ध हो जाता है। इससे डिजिटल अभिलेख और पेपरलेस वर्क भी आसान तरीके से मुहैया हो जाएगा।प्रदेश में क्यूआर कोड के जरिए मालखाने के डिजिटाइजेशन का कार्य कांकेर पुलिस द्वारा प्रारंभ किया गया है। प्रदेश के थानों में अब तक बार कोड स्कैनर की सुविधा थी, लेकिन क्यूआर कोड से डिजिटल मालखाना प्रबंधन प्रणाली पहली बार लागू की गई है।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवा देने वाले पुलिस जवानों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री आशाराम नेताम, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती किरण नरेटी तथा कांकेर नगर पालिका के अध्यक्ष श्री अरुण कौशिक, उपाध्यक्ष श्री उत्तम यादव, श्री सतीश लाटिया, श्री महेश जैन, श्री आलोक ठाकुर, पूर्व विधायक श्रीमती सुमित्रा मारकोले, एएसपी श्री आकाश श्रीश्रीमाल और जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी सहित गृह विभाग के अधिकारी और गणमान्य नागरिक भी बड़ी संख्या में कार्यक्रम में मौजूद थे।
- रायपुर। खरीफ सीजन में मानसून के देर से सक्रिय होने के कारण अनेक किसान समय पर धान की बुवाई या रोपाई नहीं कर सके हैं। ऐसी स्थिति में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. डी.के. चन्द्राकर ने किसानों को चिंता न करने की सलाह देते हुए फसल प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, नर्सरी, रोपाई एवं लेही पद्धति से बुवाई को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, ताकि समय पर बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सके।डॉ. चन्द्राकर के अनुसार, जिन किसानों ने वर्षा के बाद धान की बुवाई या रोपाई कर ली है, उन्हें फसल की 20 से 25 दिन की अवस्था में खरपतवार नियंत्रण को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि खेत में खरपतवारों का प्रकोप बढ़ जाता है तो धान की उपज में 25 से 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। ऐसे क्षेत्रों में जहां श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं, वहां निंदानाशकों का उपयोग कर खरपतवार नियंत्रण किया जा सकता है, जबकि श्रमिक उपलब्ध होने पर 25 और 40 दिन की अवस्था में निंदाई करना अधिक प्रभावी रहता है।उन्होंने बताया कि जिन किसानों की धान की नर्सरी 22 से 25 दिन की हो चुकी है, वे पानी की उपलब्धता के अनुसार खेतों की मचाई कर समय पर रोपाई करें। वहीं, लगातार वर्षा के कारण जो किसान नर्सरी तैयार नहीं कर सके हैं, वे लेही (वेट सीडिंग) पद्धति से अंकुरित बीजों का मचे हुए खेतों में छिड़काव कर सकते हैं। इसके बाद 20 से 25 दिन की अवस्था में निंदाई या खरपतवार नियंत्रण करते हुए फसल की नियमित देखभाल करना आवश्यक है।डॉ. चन्द्राकर ने कहा कि मानसून भले ही कुछ देर से सक्रिय हुआ हो, लेकिन अभी खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं। प्रदेश में हरेली पर्व तक धान की बुवाई और रोपाई का कार्य सामान्य माना जाता है। आने वाले दिनों में मानसून के और सक्रिय होने तथा अच्छी वर्षा की संभावना है। ऐसे में किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि सभी कृषि कार्य समय पर किए जाएं और फसल का वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन किया जाए, तो अच्छी पैदावार मिलने की पूरी संभावना है।
- 0- जिला प्रशासन और आम जनता के भागीदारी से बनाए गए 02 लाख 84 हजार से अधिक जल संरचनाओं में बारिश की पानी रोकने की क्षमता में हुई बेहतरीन वृद्धि0- जनभागीदारी माॅडल ने दी कैच द रेन अभियान को नई रफ्तारबालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के कुशल नेतृत्व एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी के मार्गदर्शन में बालोद जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों के फलस्वरूप जिले को मिल रहे उपलब्धियों की फेहरिस्त में निरंतर नई कड़ियां जुड़ रही है। इसके अंतर्गत जनभागीदारी के माध्यम से वर्षा जल के संचयन, भूजल पुनर्भरण और तालाबों के पुनरूद्धार के माध्यम से जल संरक्षण के उपाय सुनिश्चित करने हेतु बालोद जिला प्रशासन द्वारा चलाए गए जल संचय, जनभागीदारी अभियान 2.0 के तहत बालोद जिले को एक और महत्वपूर्ण उलपब्धि हासिल हुई है। उल्लेखनीय है जल संचय, जनभागीदारी अभियान के तहत बालोद जिला प्रशासन और आम जनता की भागीदारी से जून 2025 से मई 2026 के मध्य जिले में बनाए गए 02 लाख 84 हजार 917 जल संरक्षण और रिचार्ज ढांचे के माध्यम से बारिश के पानी को रोकने की क्षमता में बेहतरीन वृद्धि हुई है। ज्ञातव्य हो कि जल संचय, जनभागीदारी अभियान 2.0 के अंतर्गत बालोद जिले में ग्राम पंचायतों, स्थानीय एवं जिला प्रशासन की सक्रिय भागीदारी से वर्षा जल संचयन और जल पुनर्भरण के उपाय सुनिश्चित करने हेतु अनेक कार्य किए गए हैं। जिसका परिणाम मौजूदा मानसून सीजन में दिखने लगा है।जिला प्रशासन द्वारा जल संचय, जनभागीदारी अभियान 2.0 के तहत किए गए बेहतरीन कार्यों का असर जिले के गांवों में साफ दिखलाई दे रही है। इसके अंतर्गत बालोद जिले में किए गए नये प्रयोगों ने सूखी जमीन को पानी के बड़े स्त्रोत में बदल दिया है। इस अभियान के तहत गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम पंचायत मुंडेरा के बोरवेल के पास बने रिचार्ज पिट भूजल स्तर को बढ़ाने में अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इस कार्य के अंतर्गत ग्राम पंचायत मंुडेरा में बंद पड़े बोरवेलों में रिचार्ज शाफ्ट लगाकर उन्हें फिर से चालू किया गया है। इसी तरह गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम पंचायत कोंगनी में बने रिचार्ज पिट के माध्यम से बहते हुए पानी को रोककर जमीन के अंदर पहुँचाने का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा ग्राम ओडारसकरी और खुटेरी ग्राम पंचायत में बने चेक डैम मानसून के पानी को भारी मात्रा में रोकने में अत्यंत मददगार साबित हो रहा है, साथ इसके माध्यम से ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी मिल रहा है। इसके अलावा भाठागांव आर में कंटूर ट्रेंच (खाइयों) से पानी का बहना कम हुआ है और मिट्टी में नमी भी बनी हुई है। इसके साथ ही वृक्षारोपण में भी अत्यंत मददगार साबित हो रहा है। इस अभियान के अंतर्गत पूरे जिले में बने सामुदायिक चेक डेमों से खेती और आस-पास के गाँवों को सीधा फायदा मिल रहा है। मानसून से पहले जो ढांचे सूखे पड़े थे, वे अब पानी से लबालब हैं।तवेरा नाले के पुनरुद्धार हेतु मिसाल बना जन भागीदारी अभियानइस अभियान के अंतर्गत बालोद जिले की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गुंडरदेही विकासखण्ड के भाठागांव (आर) में स्थित तवेरा नाला का पुनरुद्धार कार्य है। कैच द रेन और जल संचय जन भागीदारी के तहत 14.3 किमी लंबे इस नाले को फिर से जीवित किया गया है। इसके लिए चेक डेम, खाइयां, मैजिक पिट, सोखता गड्ढे, इंजेक्शन वेल और वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जैसे 6,250 से अधिक ढांचे बनाए गए हैं। इस महत्वपूर्ण प्रयास से 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल का संचय होगा और भूजल स्तर में 05 से 10 फीट तक सुधार होने की उम्मीद है। इससे अंचल की सिंचाई व्यवस्था मजबूत हुई है और पर्यावरण को भी फायदा पहुँचा है।उल्लेखनीय है कि जल संरक्षण के कार्य में बालोद जिला सदैव अग्रणी रहा है। जल संचय, जनभागीदारी 1.0 अभियान में बालोद जिले में 1.06 लाख से अधिक जल संरक्षण ढांचे बनाए थे। इस बेहतरीन काम के लिए बालोद जिले को कैच द रेन अभियान के तहत देश में तीसरा और पूर्वी क्षेत्र में पहला स्थान मिला था। इस महत्वपूर्ण उलपब्धि के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा बालोद जिले को सम्मानित भी किया गया था। बालोद की यह सफलता ’जन भागीदारी से जल संरक्षण’ की सोच को सच साबित करती है और यह दिखाता है कि कैसे समाज के सामूहिक प्रयास से पानी की समस्या को दूर किया जा सकता है। इस तरह से बालोद जिले में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ’पानी के हर बूंद को बचाने’ के संदेश को आत्मसात कर जल संरक्षण के पुनीत कार्य को एक बड़े जन आंदोलन में बदलने का कार्य किया है।
- 0- नगर निगम ने जोन 10 के वार्ड 53 क्षेत्र में डुमरतराई श्मशानघाट से पोकलेन मशीन से कच्चा नाला खोदकर जल की निकासी की व्यवस्था की गयीरायपुर. डुमरतराई क्षेत्र में बारिश में जलभराव की समस्या उत्पन्न ना होने पाए, इस हेतु रायपुर नगर निगम जोन 10 स्वास्थ्य विभाग द्वारा जोन क्षेत्र में वार्ड 53 क्षेत्र अंतर्गत डुमरतराई श्मशानघाट से पोकलेन मशीन की सहायता से कच्चा नाला खोदकर जल की निकासी की सुगम व्यवस्था नगर निगम जोन 10 जोन कमिश्नर श्री मोनेश्वर शर्मा के निर्देश पर जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री अमित बेहरा की उपस्थिति में की गयी.
- 0- विधायक राजेश मूणत ने किया विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण0- विधायक बोले- जनता की आवश्यकता ही हमारे विकास का आधार0- नाली, आंगनबाड़ी, सामुदायिक भवन और जनसुविधाओं के विस्तार से बदलेगी वार्ड की तस्वीररायपुर। रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और सुनियोजित अधोसंरचना विकास की दिशा में शुक्रवार को एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। शहीद भगत सिंह वार्ड क्रमांक 21 में ₹133.08 लाख की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण रायपुर पश्चिम के विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेश मूणत की उपस्थिति में संपन्न हुआ।टाटीबंध यदुवंशी चौक स्थित गायत्री मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में नगर निगम रायपुर के सभापति सूर्यकांत राठौर, क्षेत्रीय पार्षदगण, भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्तागण, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में स्थानीय क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।कार्यक्रम के दौरान टाटीबंध रायपुर में निर्मित सामुदायिक भवन तथा टाटीबंध यदुवंशी चौक स्थित अपूर्ण रंगमंच के पूर्णता कार्य का लोकार्पण किया गया। वहीं वार्ड के विभिन्न क्षेत्रों में नाली निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्र निर्माण, विद्यालय में बाउंड्रीवाल, शौचालय एवं अन्य निर्माण कार्यों सहित अनेक जनोपयोगी विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन संपन्न हुआ।विकास कार्यों के शुभारंभ को लेकर स्थानीय नागरिकों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। क्षेत्रवासियों ने वर्षों से महसूस की जा रही बुनियादी आवश्यकताओं के समाधान की दिशा में इन कार्यों को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।“विकास मेरे लिए घोषणा नहीं, जनता के प्रति निभाया जाने वाला दायित्व है” — राजेश मूणतइस अवसर पर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेश मूणत ने कहा कि रायपुर पश्चिम का सर्वांगीण, संतुलित और दूरगामी विकास उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विकास का अर्थ केवल भवन, सड़क या नाली का निर्माण नहीं, बल्कि नागरिकों के दैनिक जीवन को सरल, सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानपूर्ण बनाना है।मूणत ने कहा, “विकास मेरे लिए किसी घोषणा, शिलापट्ट अथवा आंकड़ों का विषय नहीं है। यह जनता द्वारा दिए गए विश्वास के प्रति निभाया जाने वाला दायित्व है। जब किसी मोहल्ले की वर्षों पुरानी जल निकासी की समस्या दूर होती है, बच्चों को बेहतर आंगनबाड़ी केंद्र मिलता है, विद्यालय की सुविधाएं मजबूत होती हैं और समाज को अपने आयोजनों के लिए व्यवस्थित स्थान उपलब्ध होता है, तभी विकास का वास्तविक अर्थ धरातल पर दिखाई देता है।”उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह वार्ड में जिन कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण हुआ है, वे स्थानीय नागरिकों से सतत संवाद तथा क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं के आधार पर प्राथमिकता में लिए गए हैं।मूणत ने कहा, “रायपुर पश्चिम का कोई वार्ड, कोई मोहल्ला और कोई बस्ती विकास की मुख्यधारा से पीछे न रहे—इसी संकल्प के साथ हम निरंतर कार्य कर रहे हैं। मेरा प्रयास है कि विकास की गति अंतिम गली और अंतिम नागरिक तक पहुंचे। जनता ने जो विश्वास और जिम्मेदारी मुझे सौंपी है, उसे विकास और जनसेवा के रूप में लौटाना मेरा कर्तव्य है।”उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता सर्वोपरि रहेगी।संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि स्वीकृत कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं तथा गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो।मूणत ने कहा, “विकास कार्यों की घोषणा कर देना हमारा उद्देश्य नहीं है। कार्य समय पर और पूरी गुणवत्ता के साथ धरातल पर पूर्ण हो तथा उसका लाभ सीधे जनता तक पहुंचे—यही हमारी कार्यसंस्कृति है।”“वार्ड स्तर की मजबूत अधोसंरचना ही विकसित शहर की वास्तविक नींव”नगर निगम रायपुर के सभापति सूर्यकांत राठौर ने कहा कि किसी भी शहर के विकास का वास्तविक मूल्यांकन उसके वार्डों और मोहल्लों में उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं से होता है।उन्होंने कहा, “एक विकसित शहर की कल्पना तभी सार्थक होती है, जब उसकी प्रत्येक बस्ती और प्रत्येक वार्ड में नागरिक सुविधाएं मजबूत हों। नाली निर्माण से लेकर आंगनबाड़ी केंद्र, विद्यालयीन अधोसंरचना और सामुदायिक भवन तक—ये सभी कार्य सीधे आम नागरिक के जीवन और उसकी दैनिक आवश्यकताओं से जुड़े हैं।”राठौर ने कहा कि विधायक राजेश मूणत लगातार रायपुर पश्चिम की स्थानीय आवश्यकताओं को गंभीरता के साथ उठाते हुए विकास कार्यों को धरातल पर उतारने के लिए सक्रिय हैं।₹133.08 लाख की लागत से हुए लोकार्पण एवं प्रारंभ किए गए विकास कार्य शहीद भगत सिंह वार्ड की अधोसंरचना को नई मजबूती प्रदान करेंगे।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, नगर निगम और स्थानीय नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय से विकास की गति को और अधिक परिणाममूलक बनाया जा सकता है।₹133.08 लाख के कार्यों से नागरिक सुविधाओं को मिलेगी नई मजबूतीकार्यक्रम में कुल ₹133.08 लाख की लागत के विकास कार्यों की सौगात वार्डवासियों को मिली। इनमें जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न स्थानों पर नाली निर्माण, बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र, विद्यालयीन अधोसंरचना का विस्तार, सामुदायिक भवन तथा अन्य जनोपयोगी निर्माण कार्य शामिल हैं।इन कार्यों के पूर्ण होने से क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था में सुधार होगा, बच्चों और महिलाओं से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार होगा तथा सामाजिक एवं सार्वजनिक गतिविधियों के लिए बेहतर अधोसंरचना उपलब्ध होगी।कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय नागरिकों ने विकास कार्यों का स्वागत करते हुए कहा कि क्षेत्र की वास्तविक आवश्यकताओं को समझकर उन्हें योजनाओं में शामिल करना और फिर धरातल पर कार्य प्रारंभ करना जनभावनाओं के सम्मान का परिचायक है।इस अवसर पर पार्षदगण, भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं कार्यकर्तागण, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में स्थानीय क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
- 0- निगम जोन 3 ने वीरांगना अवन्ति बाई लोधी चौक के समीप नाली पर बनाये 5 पाटों को तोड़ा0- आधा दर्जन फल ठेलों को हटाकर कब्जामुक्त कर अवरुद्ध बड़ी नाली को दुरूस्त कराया 0-0- पोकलेन मशीन से सफाई करवाकर लगभग 1 डम्पर कचरा बाहर निकला गया0- होंडा शो रूम एवं अस्पताल प्रबंधन को नाली पर बनाये पाटों को हटाने की दी कड़ी हिदायतरायपुर. रायपुर नगर पालिक निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे एवं आयुक्त श्री संबित मिश्रा के निर्देश पर नगर निगम जोन 3 नगर निवेश विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जोन 3 क्षेत्र के अंतर्गत नगर निगम जोन 3 जोन कमिश्नर श्रीमती प्रीति सिंह के मार्गनिर्देशन एवं कार्यपालन अभियंता श्री ईश्वर लाल टावरे, सहायक अभियंता श्री नरेश कुमार साहू, उप अभियंता नगर निवेश विभाग श्रीमती पूनम साहू, जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री पूरन कुमार ताण्डी की उपस्थिति में जोन 3 क्षेत्र अंतर्गत लोधीपारा पंडरी में वीरांगना अवन्ति बाई लोधी चौक के समीप बड़ी नाली पर कब्जा कर बनाये गए लगभग 5 अवैध पाटों को तोड़कर वहाँ कब्जा कर व्यवसायरत लगभग 5-6 फल ठेले वालों को हटाकर बड़ी नाली को कब्जामुक्त करवाने एवं सफाई की बाधा दूर करने कार्रवाई की गयी. बड़ी नाली को कब्जामुक्त करवाकर छोटी पोकलेन मशीन की सहायता से बड़ी नाली की सफाई करवाई गयी. सफाई में लगभग 1 डम्पर कचरा बाहर निकला.बड़ी नाली के कब्जामुक्त होने एवं सफाई होने से अवन्ति बाई चौक एवं आसपास बारिश में जलभराव होने की समस्या का निदान हो सकेगा एवं नागरिकों को त्वरित राहत मिल सकेगी.नगर निगम जोन 3 की टीम ने मोवा ओवरब्रिज के नीचे होंडा शोरूम एवं अस्पताल प्रबंधन को नाली पर निर्मित पाटों को स्वतः हटा लेने की कड़ी हिदायत दी है एवं नाली क्रासिंग एरिया पर किये कब्जे को भी स्वतः हटा लेने एवं वहाँ सुगम निकास हेतु बड़े आकार की नाली क्रासिंग करवाने के सख्त निर्देश दिए हैँ, अन्यथा की स्थिति में अभियान चलाकर नाली पर बनाये पाटों को तोड़ने की कड़ी चेतावनी बारिश में होने वाले जलभराव की समस्या दूर करने हेतु सम्बंधित संस्था प्रबंधकों को दी है.
- 0- महाराष्ट्र मंडल के प्रियदर्शिनी नगर स्थित स्कूल में विद्यार्थियों के लिए बढ़ रही सुविधाएंरायपुर। प्रियदर्शिनी नगर स्थित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में 12वीं कॉमर्स के बच्चों के लिए फ्री टैली क्लासेस का शुभारंभ शनिवार को प्राचार्य मनीष गोवर्धन और ट्रेनर जगदीश हबलानी ने कंप्यूटर लैब कक्ष का फीता काटकर किया। यहां के 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को फ्री में टैली का प्रशिक्षण दिया जाएगा।उप प्राचार्य राहुल वोड़ितेलवार ने बताया कि हमारे स्कूल में बच्चों को किताबी ज्ञान देने के साथ व्यवहारिक और अन्य शैक्षणिक ज्ञान भी प्रदान किया जाता है। खेल में रुचि रखने वाले बच्चों के लिए सुबह कराते क्लासेस के साथ कॉमर्स की पढ़ाई कर आगे इसे क्षेत्र में कैरियर बनाने वाले छात्रों को टैली का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिक्षण सत्र 2026-27 की क्लासेस शनिवार को शुरू कर दी गई है।उप प्राचार्य वोड़ितेलवार के अनुसार आज से 12वीं के बच्चों के लिए टैली क्लासेस भी शुरू की गई। जल्द ही इसमें 11वीं बच्चों को भी सिखाना शुरू किया जाएगा। बच्चों को टैली सिखाने के लिए 'कैरियर की पाठशाला' कोचिंग सेंटर के संचालक जगदीश हबलानी बच्चों को ट्रेनिंग देंगे। वे बच्चों को कंपनी क्रिएशन, जर्नल लेजर एंट्री, की-बोर्ड हैंडलिंग आदि सिखाएंगे। शाला के कंप्यूटर शिक्षक वर्षा गिरीभट्ट, रोशन सिंह राजपूत, शेफाली ठाकुर इसमें उनकी मदद करेंगे।
- दुर्ग. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशों के परिपालन में विश्व जनसंख्या दिवस के उपलक्ष्य में आज जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा शासकीय माध्यमिक शाला, कोलिहापुरी एवं पुलगांव उच्च माध्यमिक शाला में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए। इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी विरेन्द्र सिंह, व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी आरती ध्रुव एवं व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी प्रियंका गोस्वामी तथा लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (LADCS) के दो काउंसलर विशेष रूप से उपस्थित रहे।पुलगांव उच्च माध्यमिक शाला में आयोजित कार्यक्रम में न्यायाधीशों का विद्यालय परिवार द्वारा भव्य स्वागत किया गया। तत्पश्चात उन्होंने विद्यार्थियों को विश्व जनसंख्या दिवस के इतिहास, उद्देश्य एवं महत्व से अवगत कराया। इसके साथ ही कानून के प्रति जागरूकता, यातायात नियमों के पालन, कैरियर निर्माण तथा पॉक्सो अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी प्रदान की। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक और ओटीपी साझा करने के खतरों के बारे में भी जागरूक किया गया तथा साइबर फ्रॉड से बचाव के उपाय बताए गए।शासकीय माध्यमिक शाला, कोलिहापुरी में आयोजित शिविर में LADCS के काउंसलरों ने विद्यार्थियों को विश्व जनसंख्या दिवस के महत्व, नशामुक्ति, गुड टच एवं बैड टच तथा बाल संरक्षण संबंधी कानूनों के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को यातायात नियमों का पालन करने, बिना हेलमेट एवं वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन न चलाने तथा साइबर अपराधों से सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उपस्थित न्यायाधीशों एवं काउंसलरों ने सरल एवं प्रेरणादायक ढंग से उत्तर दिया। इसके अतिरिक्त विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के अध्यक्ष के० विनोद कुजूर एवं सचिव उमेश कुमार भागवतकर के मार्गदर्शन में पैरालीगल वालेंटियर्स द्वारा दुर्ग जिले के विभिन्न क्षेत्रों में भी जागरूकता शिविर आयोजित कर नागरिकों को जनसंख्या संतुलन एवं उससे जुड़े सामाजिक विषयों के प्रति जागरूक किया गया।समग्र रूप से यह अभियान विद्यार्थियों एवं आमजन में विधिक जागरूकता, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सुरक्षित एवं स्वस्थ जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ।
- 0- बेटियों को साईकिल वितरण, समय पर सिलेबस पूर्ण करने के दिए निर्देशरायपुर। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार जिला शिक्षा अधिकारी ने शनिवार 11 जुलाई 2026 को धरसींवा विकासखण्ड के शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्कूलों में साफ सफाई, शिक्षकों की उपस्थिति, वीएसके एप में दर्जी और शैक्षणिक व्यवस्थाओं को लेकर नाराजगी जताते हुए आवश्यक निर्देश दिए।डीईओ ने सर्वप्रथम भनपुरी स्थित काशीराम शर्मा शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय सेजेस पहुंचकर बच्चों की असेम्बली में भाग लिया। उपस्थिति पंजी जांच के दौरान तीन शिक्षकों के मैनुअल छुट्टी आवेदन पाए गए। इस पर डीईओ ने प्राचार्य को फटकार लगाते हुए ऑनलाइन छुट्टी आवेदन नहीं करने का कारण पूछा। साथ ही अनुपस्थित शिक्षकों की रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।निरीक्षण में एक व्याख्याता के लंबे समय से अनुपस्थित रहने का मामला भी सामने आया। डीईओ ने इस संबंध में प्राचार्य से कार्यालय को अवगत कराने और जांच रिपोर्ट भेजने को कहा।डीईओ ने कक्षा 10वीं और 12वीं के बच्चों से चर्चा कर बोर्ड परीक्षा में शत प्रतिशत परिणाम लाने के लिए तैयारी पर फोकस करने को कहा। उन्होंने बायो और गणित जैसे विषयों में बेहतर तैयारी की बारीकियां भी बच्चों को बताईं।इसके पश्चात डीईओ मांढर कॉलोनी स्थित शहीद योगेन्द्र शर्मा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पहुंचे। यहां शाला प्रवेशोत्सव में शामिल होकर बेटियों को साईकिल वितरण की गई। उन्होंने शाला प्रांगण में वृक्षारोपण भी किया। शिक्षकों को समय सीमा में सिलेबस पूर्ण कराने का लक्ष्य दिया गया।
- 0- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने नगर पंचायत समोदा में किया था लोकार्पण0- 66.20 लाख की लागत से हुआ निर्मित, राजस्व सेवाओं में आएगी और तेजीरायपुर. प्रशासनिक सेवाओं को आमजन के और अधिक निकट, सुलभ और प्रभावी बनाने की उद्देश्य से मंदिर हसौद में नए तहसील कार्यालय का निर्माण किया गया है जिसका लोकार्पण नगर पंचायत समोदा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किया था, जिसका आज शुभारम्भ रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा किया गए। श्री अग्रवाल ने कहा कि मंदिर हसौद का यह नया तहसील कार्यालय शुरू होने से क्षेत्र के नागरिकों को राजस्व संबंधी कार्यों में अब अधिक सुविधा और तेजी मिलेगी।नवनिर्मित तहसील कार्यालय में 13 कक्ष है और 3 कोर्ट बनाए गए है। इसके अलावा नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्वच्छ पेयजल सहित अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक तहसील कार्यालय का निर्माण 66.20 लाख रुपये की लागत से किया गया है, जो क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा और सेवाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।इस अवसर पर छग चर्म शिल्पकार विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री ध्रुव कुमार मिर्धा संदीप जैन अध्यक्ष नगर पालिका परिषद आरंग, श्री प्रतीक बैस अध्यक्ष नगर पंचायत चंदखुरी, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन, अपर कलेक्टर श्री कीर्तिमान सिंह राठौर, एसडीएम आरंग श्रीमती अभिलाषा पैकरा तथा तहसीलदार मंदिर हसौद श्री विक्रांत सिंह राठौर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित थे।
- -महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद होमियोपैथी डॉक्टर ने कहा- हल्दी वाला दूध, तुलसी, अदरक, आंवला का करें सेवनरायपुर। बारिश का मौसम शुरू होने के साथ हमें अपने और अपनों के लिए थोड़ी सतर्कता और सावधानी रखनी चाहिए। बारिश के मौसम में हमेशा स्वच्छ उबला हुआ और फिल्टर पानी ही चाहिए। पानी के बर्तनों को खुला बिल्कुल नहीं रखना चाहिए। खाना खाने के पहले, शौचालय से आने के बाद और बाहर से घर आने पर हाथ को साबुन से धोना चाहिए। छत्तीसगढ़ राज्य होम्योपैथिक परिषद और महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद डॉ. दिलीप पिंपले ने आमजनों को मानसून को लेकर सचेत करते हुए इस आशय के विचार व्यक्त किए।डॉ. पिंपले रायपुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल में बतौर प्रोफेसर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि मौसमी बीमारी से बचने के लिए एलोपैथी, आयुर्वेदिक के साथ होम्योपैथी की दवाएं भी कारगर होती हैं। होम्योपैथी दवाएं धीरे, लेकिन बीमारी का जड़ से नाश करतीं हैं। डॉ. पिंपले के अनुसार घर पर ताजा भोजन करें, कटे हुए या खुले में रखे खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। घर के आसपास जलभराव न होने दें, इसमें मच्छरों का प्रजनन हो सकता है। कचरा डस्टबीन में ही डाले। बारिश के पानी से भींगने से बचें और सड़कों पर बह रहे नालियों के गंदे पानी के संपर्क में आने से बचने का प्रयास करें।डा. पिंपले ने आगे कहा कि बारिश में जगह-जगह जलभराव होने से मच्छर पनपने लगते हैं। ऐसे में घरों में मच्छरदानी का उपयोग करें। फूल स्लीव वाले कपड़े पहनें। मच्छर भगाने वाली क्रीम और लिक्विड का भी प्रयोग कर सकते हैं। बारिश में अगर जूता या चप्पल गीली हो जाए, तो उसे पहनने से बचें। बारिश के मौसम में हल्के, सूती और आरामदायक कपड़े पहनने चाहिए। इन सभी चीजों के साथ पर्याप्त नींद जरूर लें, योग और व्यायाम अवश्य करें। हल्दी वाला दूध, तुलसी, अदरक, आंवला जैसे घरेलू उपायों का सेवन करें।इन बातों का रखें विशेष ध्यानडा. पिंपले के मुताबिक बारिश के मौसम में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जैसे बाहर के खुले और तले-भुने खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए। ठहरे हुए पानी में बच्चों को बिल्कुल भी खेलने न दें। बारिश में अगर कपड़े गीले हो जाएं, तो उसे ज्यादा देर तक न पहनें बल्कि तत्काल बदलने का प्रयास करें। आंतरिक कपड़े तो बिल्कुल भी गीले नहीं पहनने चाहिए। ठंडे पेय पदार्थ और आइसक्रीम का सेवन करने से बचना चाहिए। इसके साथ ही बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा अपने हिसाब या अनुमान से न खाएं।
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-चार माह से बंद पड़ी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल हुई दुरुस्त, फिर मिली आत्मनिर्भरता
रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन प्रदेश के जरूरतमंद नागरिकों के लिए भरोसेमंद सहारा बनकर उभर रही है। जशपुर जिले के बाबू सजबहार निवासी दिव्यांग प्रफुल्ल बेक की समस्या का त्वरित समाधान इसकी संवेदनशील और प्रभावी कार्यप्रणाली का प्रेरक उदाहरण है।प्रफुल्ल बेक चलने-फिरने में असमर्थ हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा उन्हें गत वर्ष मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई थी, जिससे उनका दैनिक जीवन काफी आसान हो गया था। लेकिन तकनीकी खराबी के कारण पिछले चार माह से ट्राइसाइकिल बंद पड़ी थी। इससे उनका घर से बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था और छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।अपनी परेशानी से राहत पाने के लिए प्रफुल्ल बेक ने 28 जून 2026 को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही समाज कल्याण विभाग ने बिना विलंब कार्रवाई करते हुए संबंधित एजेंसी को उनके घर भेजा। आवश्यक मरम्मत के बाद कुछ ही दिनों में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल फिर से सुचारु रूप से चलने लगी।प्रफुल्ल बेक ने बताया कि यह ट्राइसाइकिल उनके लिए केवल एक साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर जीवन का आधार है। इसके बंद होने से उनका दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया था। अब ट्राइसाइकिल ठीक होने के बाद वे फिर से अपने जरूरी कार्य स्वयं कर पा रहे हैं और पहले की तरह स्वतंत्र रूप से आवागमन कर रहे हैं।उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, ष्सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करने के कुछ ही दिनों में मेरी समस्या का समाधान हो गया। अब मेरी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल फिर से चलने लगी है और मैं दोबारा आत्मनिर्भर महसूस कर रहा हूं। मुख्यमंत्री जी की संवेदनशील पहल और प्रशासन की तत्परता ने मेरी बड़ी परेशानी दूर कर दी।प्रफुल्ल बेक की यह कहानी बताती है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी मंच बन चुकी है। समयबद्ध कार्रवाई, संवेदनशील प्रशासन और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के साथ शासन आम नागरिकों के जीवन को सरल और सम्मानजनक बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। - -पक्के घर से मिला सुरक्षित आशियाना, महतारी वंदन योजना की राशि से बच्चों की पढ़ाई को मिल रहा संबलरायपुर। शासन की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर नगर पालिक निगम क्षेत्र के मठपारा निवासी श्रीमती फूलमती देवी का परिवार इसका प्रेरक उदाहरण है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत पक्का मकान मिलने और महतारी वंदन योजना से प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलने से उनके परिवार के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और नई उम्मीद का संचार हुआ है। श्रीमती फूलमती देवी ने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली मासिक सहायता राशि का उपयोग वे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में करती हैं। उन्होंने बताया कि उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। परिवार का मुख्य आधार मेहनत-मजदूरी है, लेकिन सीमित आय के बावजूद वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उनके अनुसार यह सहायता राशि बच्चों के भविष्य को संवारने में महत्वपूर्ण सहयोग दे रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलना उनके परिवार के लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। पहले वे कच्चे और छप्पर वाले मकान में रहते थे, जहां विशेषकर बरसात के मौसम में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब सुरक्षित और पक्के आवास में रहने से पूरे परिवार का जीवन अधिक सहज और सम्मानजनक हो गया है। फूलमती देवी के पति श्री संजय चौधरी ने बताया कि उनकी पत्नी के नाम से स्वीकृत आवास मिलने से परिवार की वर्षों पुरानी चिंता समाप्त हो गई। उन्होंने कहा कि पहले शौचालय और स्नानघर जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में परिवार, विशेषकर महिलाओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब पक्के मकान के साथ सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होने से जीवन अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन गया है।उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं ने उनके परिवार को नई पहचान, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की उम्मीद दी है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित हैं। श्रीमती फूलमती देवी और श्री संजय चौधरी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) तथा महतारी वंदन योजना के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की ऐसी जनहितकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों तक निरंतर पहुंचना चाहिए।
- -छत्तीसगढ़ की बेटियों की राह अब न तो लंबी होगी और न ही थकाऊरायपुर । सरस्वती साइकिल योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना और उन्हें स्कूल तक आवागमन की सुविधा प्रदान करना है। इसके तहत शासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और गरीबी रेखा (BPL) से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की छात्राओं को निःशुल्क साइकिल दी जाती है lमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सुशासन सरकार ने एक ऐसी पहल की है, जिससे बेटियों के हौसलों को नए पंख मिल गए हैं। शिक्षा सत्र शुरू होने के मात्र एक महीने के भीतर, जुलाई माह में ही, पात्र छात्राओं को सरस्वती सायकल योजना के तहत निशुल्क सायकल का वितरण किया जा रहा है। यह त्वरित फैसला पालकों, शिक्षिकाओं और स्वयं छात्राओं के लिए एक बड़ी सौगात साबित हो रहा है।सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सारंगढ़ की कक्षा 9वीं की छात्रा छोटी यादव की कहानी जिले की सैकड़ों बेटियों का प्रतिनिधित्व करती है। छोटी को अपने गांव झरपडीह से 3 किलोमीटर दूर स्कूल आने के लिए हर रोज पैदल सफर तय करना पड़ता था। तपती धूप और बारिश में पैदल चलना थका देने वाला होता था, लेकिन अब उसकी यह परेशानी दूर हो चुकी है। निशुल्क सायकल पाकर छोटी के चेहरे पर आई मुस्कान उसकी खुशी और राहत को साफ बयां करती है। छोटी की तरह ही ग्राम बासीनबहरा की छात्रा आकांक्षा रात्रे और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाली दीक्षा सिदार जैसी अनेक बालिकाओं के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। अब इन्हें 2 से 5 किलोमीटर का सफर पैदल तय नहीं करना पड़ेगा। छात्राओं का कहना है कि सायकल मिलने से समय भी बचेगा और मैं बिना थके अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। सरकार की इस मदद के लिए हम सभी छात्रा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देती हूँ।जुलाई का महीना किसानों के लिए खेती-किसानी और धान बोआई का समय होता है। ऐसे वक्त में गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई और सायकल खरीदने का अतिरिक्त खर्च उठाना एक बड़ी चिंता होती थी। सरकार द्वारा सत्र के शुरुआत में ही सायकल उपलब्ध करा देने से पालकों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। अब उन्हें बेटी की पढ़ाई या आवागमन के साधनों के लिए कर्ज लेने या अनावश्यक खर्च करने की चिंता से मुक्ति मिल गई है।जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में सारंगढ़, बरमकेला और बिलाईगढ़ ब्लॉक में सायकल के पार्ट्स को असेंबल (फिटिंग) कर स्कूलों के माध्यम से सीधे छात्राओं तक पहुँचाया जा रहा है। इसी कड़ी में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारंगढ़ में 150 पात्र बालिकाओं को सायकल का वितरण किया जा चुका है।शासकीय एवं अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कक्षा 9 वीं में अध्ययनरत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और गरीबी रेखा के नीचे (BPL) परिवार की छात्राएं को सायकल वितरण किया जाना है। इसका मुख्य उद्देश्य सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को शाला तक आवागमन की सुगम सुविधा प्रदान करना है। इससे स्कूल ड्रॉप-आउट दर में कमी आएगी और बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की इस संवेदनशील पहल से न सिर्फ बेटियां समय पर स्कूल पहुँच रही हैं, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। 'सरस्वती सायकल योजना' छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और सुशासन की एक जीवंत मिसाल बनकर उभर रही है।
- -स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के NSS और इको क्लब के स्वयंसेवकों ने निकाली भव्य जागरूकता रैली-ग्रामीणों को परिवार नियोजन व मातृ स्वास्थ्य के प्रति किया जागरूकरायपुर । बढ़ती जनसंख्या के प्रति वैश्विक चिंताओं और उसके समाधानों को रेखांकित करने के लिए आज 11 जुलाई को 'विश्व जनसंख्या दिवस' के अवसर पर जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा मनाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य समुदाय में परिवार नियोजन के साधनों, छोटे परिवार के महत्व तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है lविश्व जनसंख्या दिवस' के अवसर पर स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, कोरबा जिले के चैतमा में जन-जागरूकता के कई प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर के रासेयो प्रकोष्ठ के मार्गदर्शन में विद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई और इको क्लब के स्वयंसेवकों ने 'जनसंख्या स्थिरीकरण पखवाड़ा' के तहत पूरे क्षेत्र में जागरूकता की अलख जगाई।कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय परिसर में आयोजित एक वृहद चित्रकला प्रतियोगिता से हुई। इसमें छात्र-छात्राओं ने अपनी तूलिका के माध्यम से बढ़ती जनसंख्या के दुष्परिणामों, जैसे—गरीबी, बेरोजगारी, और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को बेहद संजीदगी से चार्ट पेपर पर उकेरा। साथ ही, बच्चों ने छोटे परिवार के लाभ और लैंगिक समानता पर भी सुंदर संदेश दिए।चित्रकला प्रतियोगिता के बाद स्वयंसेवक विद्यार्थी ग्राम पंचायत चैतमा के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र 'बुधवारी बाजार' पहुंचे। यहाँ विद्यार्थियों ने एक बेहद प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का मंचन किया। नाटक के माध्यम से परिवार नियोजन के साधन, मातृ स्वास्थ्य (Maternal Health) की महत्ता और अंधविश्वासों को दूर करने की अपील की गई, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठा हुए। इसके बाद विद्यार्थियों और शिक्षकों ने मिलकर बाजार चौक पर एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई, जो एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक बनी।छोटा परिवार-सुखी परिवार" और "जनसंख्या पर रोक लगाएं, देश को खुशहाल बनाएं" जैसे गगनभेदी नारों के साथ स्वयंसेवकों ने चैतमा के प्रमुख मार्गों पर भव्य जन-जागरूकता रैली निकाली। रैली में तख्तियां पकड़े बच्चे ग्रामीणों को यह समझाने में सफल रहे कि जनसंख्या स्थिरीकरण केवल सरकार की नहीं, बल्कि हर नागरिक का मानवाधिकार और कर्तव्य है।इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षकों और रासेयो कार्यक्रम अधिकारी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस विशेष दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य केवल आबादी की गिनती करना नहीं है, बल्कि बढ़ती जनसंख्या से जुड़े गंभीर मुद्दों जैसे गरीबी, मातृ स्वास्थ्य में कमी और लैंगिक असमानता के प्रति समाज को सचेत करना है। जब तक हर नागरिक जागरूक नहीं होगा, तब तक देश में सतत विकास की कल्पना अधूरी है।इस गरिमामयी और उद्देश्यपूर्ण कार्यक्रम के सफल आयोजन पर अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय रासेयो प्रकोष्ठ, बिलासपुर और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय चैतमा के प्राचार्य, NSS टीम और इको क्लब के स्वयंसेवकों की सराहना की है।
- -कृषि विज्ञान केंद्र की अनूठी पहल, 225 एकड़ में रामतिल और तिल के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन-कम लागत, अधिक मुनाफा और फसल विविधीकरण को मिलेगा बढ़ावा-प्राकृतिक परागण बढ़ने से धान उत्पादन को भी होगा लाभरायपुर। बस्तर जिले में किसानों की आय बढ़ाने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने की दिशा में कृषि विज्ञान केंद्र ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। खरीफ सीजन में जिले के विभिन्न विकासखंडों में 225 एकड़ क्षेत्र में रामतिल (नाइजर) और तिल (सेसमे) के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य मक्का जैसी पारंपरिक फसलों के विकल्प के रूप में कम लागत और अधिक लाभ देने वाली तिलहनी फसलों को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिल सके।कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा तैयार कार्ययोजना के अनुसार बस्तानार, बस्तर, दरभा तथा चित्रकोट के गुरिया क्षेत्र में कुल 200 एकड़ में रामतिल का प्रदर्शन किया जाएगा। इस कार्यक्रम से लगभग 100 से 200 प्रगतिशील किसानों को जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक किसान को न्यूनतम एक एकड़ और अधिकतम दो एकड़ क्षेत्र के लिए उन्नत किस्म के बीज तथा आधुनिक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। अगस्त माह में बुआई प्रस्तावित है और इसके लिए किसानों का चयन अंतिम चरण में है। इसी प्रकार तोकापाल और बस्तर विकासखंड में 25 एकड़ क्षेत्र में तिल का प्रदर्शन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में 15 से 25 किसानों को शामिल किया गया है तथा अधिकांश क्षेत्रों में बुआई की प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो चुकी है।कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार यह कार्यक्रम शासन की फसल विविधीकरण नीति के अनुरूप संचालित किया जा रहा है। रामतिल और तिल ऐसी तिलहनी फसलें हैं, जिनमें रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है तथा कीट एवं रोगों का प्रकोप भी बहुत कम देखने को मिलता है। इससे किसानों की उत्पादन लागत घटती है और उन्हें अधिक शुद्ध लाभ प्राप्त होता है।विशेषज्ञों का मानना है कि रामतिल के आकर्षक पीले फूल बड़ी संख्या में मधुमक्खियों को आकर्षित करते हैं। धान में फूल आने के समय मधुमक्खियों की सक्रियता बढ़ने से प्राकृतिक परागण बेहतर होता है, जिसका सकारात्मक प्रभाव आसपास के धान के खेतों की उत्पादकता पर भी पड़ता है। इस प्रकार रामतिल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि कृषि पारिस्थितिकी को भी मजबूत बनाता है।खाद्य तेलों की बढ़ती मांग और बाजार में बेहतर मूल्य को देखते हुए बस्तर के किसानों का रुझान एक बार फिर तिलहनी फसलों की ओर बढ़ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र की यह पहल किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने, लागत कम करने और आय बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगी। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में बस्तर में तिलहनी फसलों का रकबा बढ़ेगा और जिले में टिकाऊ एवं लाभकारी कृषि का नया मॉडल विकसित होगा।
- -कलेक्ट्रेट परिसर में शुरू हुई सार्वजनिक ई-व्हीकल चार्जिंग सुविधा, हरित परिवहन को मिलेगा बढ़ावा-7.2 किलोवाट क्षमता का चार्जर हुआ स्थापित, मात्र 15 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलेगी चार्जिंग सुविधा-जिले के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर 60 किलोवाट के फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की तैयारीरायपुर । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के हरित विकास और स्वच्छ ऊर्जा आधारित परिवहन के विजन को साकार करने की दिशा में बालोद जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया है। यह पहल जैविक ईंधनों पर निर्भरता कम करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने तथा जिले में ई-वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।जिला प्रशासन द्वारा शासकीय कार्यों में वाहनों की पूलिंग व्यवस्था को बढ़ावा देने के साथ-साथ अधिकारियों, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। इसी क्रम में संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त 7.2 किलोवाट क्षमता का सार्वजनिक ईवी चार्जर स्थापित किया गया है।जिला खनिज संस्थान न्यास के सहायक नोडल अधिकारी ने बताया कि इस चार्जिंग स्टेशन का उपयोग वाहन स्वामी 'टाटा पावर ईज़ेड चार्ज' मोबाइल ऐप के माध्यम से कर सकेंगे। चार्जिंग की दर मात्र 15 रुपये प्रति यूनिट निर्धारित की गई है, जिससे ई-वाहन चालकों को किफायती एवं सुविधाजनक चार्जिंग सुविधा उपलब्ध होगी।जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कलेक्ट्रेट परिसर में स्थापित यह चार्जिंग स्टेशन जिले में हरित ऊर्जा आधारित परिवहन व्यवस्था विकसित करने की शुरुआत है। आगामी चरण में जिले के प्रमुख सार्वजनिक एवं व्यावसायिक स्थलों पर 60 किलोवाट क्षमता वाले फास्ट चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे, जिससे ई-वाहनों की आवाजाही और अधिक सुगम होगी तथा जिले में चार्जिंग अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी।जिला प्रशासन का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलने से पेट्रोल एवं डीजल जैसे जैविक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी, वायु प्रदूषण में कमी आएगी तथा आम नागरिकों के ईंधन व्यय में भी उल्लेखनीय बचत होगी। यह पहल स्वच्छ, हरित और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



























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