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- -गड़बड़ी पर नपेंगे अफसर, शत-प्रतिशत व पारदर्शी गिरदावरी के कड़े निर्देश-राजस्व विभाग का फरमान, लापरवाही पर होगी सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाईरायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य में समर्थन मूल्य पर धान, मक्का और प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत उड़द, मूंग, सोयाबीन, मूंगफली व अरहर की खरीदी की तैयारियों के बीच छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने एक बड़ा और कड़ा रुख अपनाया है। विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को खरीफ फसल की शत-प्रतिशत और त्रुटिरहित गिरदावरी (डिजिटल व मैन्युअल) सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। शासन ने साफ कर दिया है कि गिरदावरी कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या हेरफेर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।छत्तीसगढ़ में गिरदावरी प्रक्रिया की शुद्धता, पारदर्शिता और मैदानी फर्जीवाड़े पर प्रभावी लगाम लगाने के लिए शासन ने उच्च अधिकारियों से लेकर मैदानी अमले तक 7-स्तरीय भौतिक सत्यापन की सख्त व्यवस्था लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत पटवारी अपने हल्के के शत-प्रतिशत (100%) रकबे का सत्यापन करेंगे। इसके साथ ही राजस्व निरीक्षक और कृषि विस्तार अधिकारी 25-25 प्रतिशत रकबे की जांच करेंगे, जबकि तहसीलदार व नायब तहसीलदार को 10 प्रतिशत और अनुविभागीय अधिकारी (SDO) को 5 प्रतिशत रकबे के सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।प्रशासनिक कसावट को और मजबूत करते हुए जिला स्तरीय अधिकारी 1प्रतिशत तथा राज्य व संभाग स्तरीय अधिकारी 0.1 प्रतिशत गिरदावरी का औचक (रैंडम) निरीक्षण करेंगे।प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए शासन ने स्पष्ट समय-सीमा तय कर दी है। इसके तहत 20 सितंबर 2026 तक गिरदावरी का कार्य पूर्ण कर खसरा एवं भुईयां सॉफ्टवेयर में प्रविष्टि व त्रुटि सुधार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद 25 सितंबर 2026 को ग्रामवार फसल क्षेत्राच्छादन प्रतिवेदन का प्रारंभिक प्रकाशन होगा, जिसके आधार पर प्राप्त होने वाली दावा-आपत्तियों का निराकरण करते हुए 30 सितंबर 2026 तक खसरा पांचसाला और भुईयां सॉफ्टवेयर में अंतिम संशोधन कर दिया जाएगा।सरकारी रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाने के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि यदि किसी किसान ने धान की जगह अन्य फसल बोई है या जमीन खाली छोड़ी है, तो पटवारी और राजस्व निरीक्षक को मोबाइल से उस खेत का खसरावार फोटो अपलोड करना होगा। राजस्व रिकॉर्ड और वास्तविक बोए गए रकबे में अंतर पाए जाने पर संबंधित मैदानी अमले और पर्यवेक्षण अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय की जाएगी।गिरदावरी की तिथियों से ग्रामीणों को अवगत कराने के लिए गांवों में कोटवारों के जरिए मुनादी कराई जाएगी। गिरदावरी के दौरान स्थानीय जन-प्रतिनिधियों को भी जांच के समय उपस्थित रहने का अवसर दिया जाएगा साथ ही किसान स्वयं उपस्थित होकर अपना फोटो खिंचवा सकते है। इसके अलावा, संभागीय आयुक्त और भू-अभिलेख संचालक हर 15 दिन में गिरदावरी की प्रगति की पाक्षिक समीक्षा करेंगे।
- - गायत्री निर्मलकर सहित ग्रामीणों को गांव में ही मिल रही बैंकिंग, डिजिटल और शासकीय सेवाओं की सुविधारायपुर । कभी बैंक का छोटा-सा काम भी गांव के लोगों के लिए पूरे दिन का सफर बन जाता था। पैसा निकालना हो, जमा करना हो या किसी सरकारी योजना की राशि प्राप्त करनी हो, इसके लिए शहर तक जाना पड़ता था। आने-जाने का खर्च अलग और मजदूरी का नुकसान अलग। लेकिन अब यह तस्वीर बदल रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शुरू किए गए अटल डिजिटल सुविधा केंद्र ग्रामीणों के जीवन में नई सुविधा और नया विश्वास लेकर आए हैं।कबीरधाम जिले के ग्राम राजानवागांव निवासी श्रीमती गायत्री निर्मलकर के जीवन में भी अटल डिजिटल सुविधा केंद्र ने बड़ा बदलाव लाया है। उनके पति श्री नोहर निर्मलकर मजदूरी और कपड़े प्रेस करने का कार्य करते हैं। परिवार की आय सीमित होने के कारण बैंक संबंधी कार्यों के लिए शहर जाना उनके लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन जाता था। कई बार बैंक जाने के कारण पूरे दिन की मजदूरी भी छूट जाती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। गांव में संचालित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र के माध्यम से श्रीमती गायत्री महतारी वंदन योजना की राशि आसानी से प्राप्त कर लेती हैं। जरूरत पड़ने पर बैंक खाते में राशि जमा भी कर देती हैं। कुछ ही मिनटों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध होने से समय, पैसे और मेहनत तीनों की बचत हो रही है।श्रीमती गायत्री मुस्कुराते हुए कहती हैं कि पहले बैंक जाने में पूरा दिन निकल जाता था। किराया भी लगता था और मजदूरी भी छूट जाती थी। अब गांव में ही अटल डिजिटल सुविधा केंद्र से महतारी वंदन योजना का पैसा मिल जाता है। वे बताती हैं कि सिर्फ उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गांव के बुजुर्गों, महिलाओं, किसानों और मजदूरों को इसका लाभ मिल रहा है। अब छोटी-छोटी बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं के लिए शहर नहीं जाना पड़ता। शासन की योजनाओं का लाभ भी समय पर मिल जाता है। आज अटल डिजिटल सुविधा केंद्र गांवों में केवल बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने वाला केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण का मजबूत आधार बन चुका है। यहां आधार आधारित बैंकिंग, नकद निकासी एवं जमा, बिजली बिल भुगतान, मोबाइल और डीटीएच रिचार्ज, यात्रा टिकट बुकिंग, पैन कार्ड, आधार संबंधी सेवाओं सहित अनेक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हैं।
- -नाशक का छिड़काव कर 40 हेक्टेयर में बचाया समय और श्रमरायपुर। बलौदा बाज़ार भाटापारा जिले के किसान अब खेती में तकनीक का इस्तेमाल कर आधुनिक खेती की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इसी कड़ी में विकासखंड भाटापारा के ग्राम पाटन, धौरभठा और खोलवा के किसानों ने खेती में तकनीक का नया उदाहरण पेश किया है। यहां करीब 40 हेक्टेयर रकबे में किसानों ने ड्रोन के माध्यम से खरपतवार नाशक का छिड़काव करवाया।पारंपरिक तरीके से इस रकबे में छिड़काव करने में 10 से 15 दिन लग जाते थे। ड्रोन की मदद से पूरा काम कुछ ही घंटों में पूरा हो गया। इससे किसानों के समय, श्रम और लागत तीनों की बचत हुई।ग्राम धौरभठा के किसान आलोक जायसवाल एवं खोलवा के कृषक गुड्डू चांडक ने बताया कि़ पहले 2से 3 एकड़ में छिड़काव करने के लिए 2 मजदूर पूरे दिन लगते थे। ड्रोन से 40 हेक्टेयर का काम एक दिन में हो गया। पानी भी कम लगी और पीठ पर टंकी ढोने की परेशानी नहीं रही।कृषि विभाग और स्थानीय कृषि तकनीक सेवा प्रदाता के सहयोग से ड्रोन को खेतों में उतारा गया। ड्रोन ने निर्धारित ऊंचाई से एक समान रूप से खरपतवार नाशक का छिड़काव किया। इससे दवा की बर्बादी भी कम हुई और फसल पर असर बेहतर रहा।मैनुअल छिड़काव की तुलना में 80 प्रतिशत समय कम लगा। इसके साथ ही मजदूरी और दवा दोनों में बचत एवं एक समान छिड़काव से खरपतवार नियंत्रण बेहतर हुई।जिला प्रशासन द्वारा सहकरी समिति के माध्यम से किसानों को ड्रोन उपलब्ध कराया जा रहा है जिसमें 4 नग ईफको कम्पनी के भी है। कृषि विभाग के अधिकारियो ने बताया कि़ इस व्यवस्था से अब छोटे किसानों को भी कम दर पर ड्रोन सेवा मिल रही है। भाटापारा क्षेत्र में धान और दलहन की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है।फिलहाल पाटन, धौरभठा और खोलवा के किसान इस प्रयोग से काफी संतुष्ट हैं और आने वाले सीजन में और अधिक रकबे में ड्रोन से छिड़काव करवाने की योजना बना रहे हैं।
- -आधार में गलत नाम के कारण हो रही थी परेशानी, अब ऑनलाइन सुविधा से मिली राहतरायपुर। सेवा सेतु पोर्टल नागरिकों के लिए सरकारी योजनाओं और प्रमाण-पत्रों की प्रक्रिया को बेहद सरल बनाता है। अब लोग घर बैठे मोबाइल या ऑनलाइन माध्यम से आय, निवास, विवाह पंजीयन व अन्य जरूरी सेवाएं तय समय-सीमा में प्राप्त कर सकते हैं, जिससे कार्यालयों के चक्कर काटने की जरूरत खत्म हो गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित सेवा सेतु पहल नागरिकों के लिए बड़ी राहत बनकर उभर रही है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को घर के नजदीक सरल, सुगम और पारदर्शी शासकीय सेवाएं उपलब्ध कराना है। दंतेवाड़ा जिले की निवासी श्रीमती धिन्नो कड़ियामी को भी इस पहल का सीधा लाभ मिला है। आधार कार्ड में नाम गलत दर्ज होने के कारण श्रीमती धिन्नो कड़ियामी को लंबे समय से विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ मिलने में कठिनाई हो रही थी। महतारी वंदन योजना सहित अन्य योजनाओं की राशि भी उनके खाते में नहीं पहुंच पा रही थी। पहले आधार कार्ड में नाम सुधार कराने के लिए राजपत्र (गजट) में नाम प्रकाशित कराना आवश्यक था। इसके लिए दस्तावेज जमा करने राजनांदगांव जाना पड़ता था, जिससे समय, धन और श्रम तीनों की काफी हानि होती थी।सेवा सेतु के माध्यम से अब यह सुविधा ऑनलाइन उपलब्ध हो गई है। श्रीमती धिन्नो कड़ियामी ने आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर राजपत्र में नाम संशोधन की प्रक्रिया शुरू कराई। इससे राजपत्र में नाम प्रकाशित होने की प्रक्रिया सरल हुई और आधार कार्ड में नाम सुधार का रास्ता भी आसान हो गया। उन्होंने बताया कि सेवा सेतु की ऑनलाइन सुविधा से उन्हें बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिली है। अब पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी हो गई है। श्रीमती धिन्नो कड़ियामी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सेवा सेतु जैसी पहल दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों के लिए बेहद उपयोगी है। इससे समय और धन की बचत होने के साथ-साथ शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया भी आसान हुई है। यह सफलता की कहानी बताती है कि सेवा सेतु पहल आम नागरिकों तक शासकीय सेवाएं सरल और प्रभावी ढंग से पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है तथा जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।
- -बेनूर समिति को मिले शेष डीएपी वितरण के निर्देशरायपुर। प्रदेश में सुशासन, जवाबदेही और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण की दिशा में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के जरिए आम नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे शासन के प्रति लोगों का विश्वास और मजबूत हो रहा है ।सुशासन की दिशा में सीएम हेल्पलाइन किसानों के लिए एक भरोसेमंद माध्यम साबित हो रही है। नारायणपुर जिले के बेनूर सेवा सहकारी समिति अंतर्गत आने वाले ग्राम के किसान अस्मलाल साहू की डीएपी उर्वरक से जुड़ी समस्या का विभाग ने प्राथमिकता के आधार पर निराकरण कर दिया है।कृषि कार्य के लिए आवश्यक खाद समय पर न मिलने से परेशान किसान अस्मलाल साहू ने अपनी समस्या को लेकर 16 जुलाई 2026 को सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। अस्मलाल साहू का कहना था कि एक हेक्टेयर भूमि के लिए पर्याप्त डीएपी खाद की आवश्यकता थी, लेकिन निर्धारित कोटा पूरा न होने के कारण खेती-किसानी प्रभावित हो रही थी। शिकायत मिलते ही कृषि और सहकारिता विभाग हरकत में आया। मार्कफेड द्वारा पहले ही बेनूर समिति को पर्याप्त मात्रा में 326.16 टन यूरिया और 245 टन डीएपी उपलब्ध कराया जा चुका था। समस्या की वस्तुस्थिति जानने के लिए अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से मोबाइल नंबर पर सीधा संपर्क साधा। प्रकरण के त्वरित निपटारे के लिए विभाग ने किसान अस्मलाल साहू और बेनूर सोसायटी के प्रभारी उमेश नायक के बीच कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए संवाद कराया। चर्चा के दौरान सोसायटी प्रभारी ने स्पष्ट किया कि किसान को पहले ही आंशिक मात्रा में खाद दी जा चुकी है। विभागीय निर्देशों के बाद समिति प्रभारी ने शेष आवश्यक डीएपी खाद नियमानुसार तत्काल उपलब्ध कराने की सहमति दी।विभागीय तत्परता और समस्या के समयबद्ध समाधान पर किसान अस्मलाल साहू ने पूर्ण संतोष व्यक्त किया।आउटबाउंड सत्यापन कॉल में शिकायतकर्ता की सहमति मिलने के बाद सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरण को सफलतापूर्वक बंद कर दिया गया। इस पहल ने एक बार फिर साबित किया है कि सरकार किसानों की हर समस्या के त्वरित समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
- -शिकायत मिलने पर कृषि विभाग ने की कार्रवाईरायपुर। अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) एवं कांकेर जिले में कृषि विभाग के उप संचालक श्री जितेन्द्र कोमरा ने कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के पखांजूर में अधिक कीमत पर उर्वरक विक्रय किए जाने की शिकायत के विरूद्ध जांच दल द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित एजेंसी का उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। भानुप्रतापपुर के अनुविभागीय कृषि अधिकारी की अध्यक्षता में गठित जांच दल से प्राप्त प्रतिवेदन के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) एवं उप संचालक कृषि ने बताया कि पखांजूर के कृषक श्री रवीन मजूमदार निवासी पीव्ही 14 एवं सुदाम गाईन पीव्ही 12 को मेसर्स देवनाथ एजेंसी के प्रोप्राइटर श्री शतदल देवनाथ नया बाजार पखांजूर द्वारा कृषि सामग्री (खाद) को उचित मूल्य से अधिक कीमत पर विक्रय किए जाने के संबंध में लिखित शिकायत प्राप्त हुई थी। इस संबंध में अनुविभागीय कृषि अधिकारी भानुप्रतापपुर की अध्यक्षता में जांच दल गठित की गई तथा संबंधित कृषकों के लिखित बयान एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच दल द्वारा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। उक्त शिकायत को सही पाए जाने पर अधिसूचित प्राधिकारी (उर्वरक) एवं उप संचालक कृषि ने उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक य मिश्रण) (नियंत्रण) आदेश, 1985 के खण्ड-31(1) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए मेसर्स देवनाथ एजेंसी प्रोप्राइटर श्री शतदल देवनाथ नया बाजार पखांजूर विकासखण्ड कोयलीबेड़ा को जारी उर्वरक विक्रय प्राधिकार पत्र को अंतरिम उपाय के रूप में निलंबित करने का आदेश जारी किया है।
- -147 टीबी मरीजों की पहचान कर त्वरित उपचार से जोड़ा गयारायपुर। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान देश से क्षय रोग (टीबी) को खत्म करने का एक जन-आंदोलन है। इसके तहत मरीजों को पोषण, चिकित्सीय और व्यावसायिक सहायता दी जाती है। इसमें 'निक्षय मित्र' बनकर लोग या संस्थाएं टीबी रोगियों की मदद करते हैं। प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिले में संचालित 100 दिवसीय सघन टीबी जांच अभियान जिला प्रशासन नारायणपुरऔर स्वास्थ्य विभाग के समन्वित प्रयासों से तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिले को टीबी मुक्त बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत जनवरी से जुलाई 2026 तक 2,470 लोगों के बलगम नमूनों की जांच की गई, जिसमें 147 टीबी मरीजों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत त्वरित उपचार से जोड़ा गया है।नारायणपुर जिले के 87 हाई रिस्क गांवों को चिन्हित कर विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 68 गांवों में आधुनिक एआई (AI) आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के जरिए शिविर आयोजित कर 5,801 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इनमें से 1,101 संदिग्ध मरीजों के बलगम नमूने सीबीएनएएटी (CBNAAT) जांच के लिए भेजे गए हैं। इस आधुनिक तकनीक से सुदूर व दुर्गम क्षेत्रों में भी संभावित मरीजों की पहचान आसान हुई है। कलेक्टर नारायणपुर की विशेष अपील पर जिले के 93 अधिकारियों, कर्मचारियों और सीएसआर सहयोगियों ने आगे आकर 93 टीबी मरीजों को निक्षय मित्र के रूप में गोद लिया है। ये निक्षय मित्र मरीजों को नियमित रूप से फूड बास्केट और पौष्टिक आहार उपलब्ध करा रहे हैं। कलेक्टर ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में निक्षय मित्र बनकर इस अभियान में योगदान देने का आह्वान किया है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नारायणपुर ने अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, वजन या भूख में कमी और रात में पसीना आने जैसे लक्षण हों, तो वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि समय पर जांच और नियमित दवा से टीबी का पूरी तरह से इलाज संभव है।
- -डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में बड़ा बदलाव, अब घर बैठे मिलेंगी 441 शासकीय सेवाएंरायपुर। डिजिटल सुशासन की दिशा में राज्य शासन ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए पुराने लोक सेवा केंद्रों को आधुनिक “सेवा सेतु केंद्र” के रूप में विकसित किया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू किए गए “सेवा सेतु पोर्टल” के माध्यम से अब प्रदेश के नागरिकों को घर बैठे 441 से अधिक शासकीय सेवाओं का लाभ मिल रहा है। यह पोर्टल शासन और जनता के बीच एक मजबूत डिजिटल सेतु के रूप में कार्य कर रहा है, जिससे सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सरल, पारदर्शी और तेज हो गई हैं।सुकमा जिला ई-गवर्नेंस विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहले ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं। नागरिकों की आवश्यकताओं और तकनीकी प्रगति को ध्यान में रखते हुए सेवा सेतु पोर्टल का विस्तार किया गया। अब इस एकीकृत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, विवाह प्रमाण पत्र, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राजस्व प्रकरण तथा नाम परिवर्तन के लिए राजपत्र प्रकाशन जैसी 441 महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध हैं। इससे आम नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने से बड़ी राहत मिली है और पूरी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह एवं व्यवस्थित हो गई है।सेवा सेतु पोर्टल का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों को मिल रहा है। अब लोग घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और अपने आवेदन की स्थिति को भी आसानी से ट्रैक कर सकते हैं। प्रत्येक सेवा के लिए निर्धारित समय-सीमा तय होने से कार्यों में तेजी आई है और पारदर्शिता बढ़ी है। इससे भ्रष्टाचार पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित हुआ है।डिजिटल तकनीक पर आधारित यह पहल न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बना रही है, बल्कि आम जनता के जीवन को भी सरल और सुविधाजनक बना रही है। सेवा सेतु पोर्टल छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक सफल और जनहितकारी मॉडल के रूप में उभर रहा है, जिससे शासन की सेवाएं अब हर नागरिक की पहुंच में और अधिक सहजता से उपलब्ध हो रही हैं।
- -कच्चे मकान से पक्के आशियाने तक का प्रेरणादायक सफररायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) जरूरतमंद परिवारों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन का आधार बन रही है। मुंगेली जिले के जनपद पंचायत पथरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत संकरा की हितग्राही कौशिल्या बाई की सफलता की कहानी इसका सशक्त उदाहरण है।कुछ समय पहले तक कौशिल्या बाई अपने परिवार के साथ कच्चे एवं जर्जर मकान में रहने को मजबूर थीं। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकता था और हर मौसम में परिवार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण स्वयं पक्का मकान बनाना उनके लिए संभव नहीं था।प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने आवेदन किया। पात्रता के आधार पर उनका चयन हुआ और योजना के तहत स्वीकृति मिलने के पश्चात किस्तों की राशि प्राप्त होते ही उन्होंने अपने नए पक्के मकान का निर्माण शुरू कराया। स्थानीय प्रशासन एवं पंचायत के मार्गदर्शन में निर्माण कार्य समय पर पूरा हुआ। कौशिल्या बाई का परिवार सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक पक्के मकान में रह रहा है। अब उन्हें बरसात में पानी टपकने या अन्य असुविधाओं की चिंता नहीं रहती। उनका नया घर परिवार के लिए सुरक्षा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद लेकर आया है।कौशिल्या बाई ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने उनके परिवार का जीवन बदल दिया है। उन्होंने कहा कि अब उनका सपना साकार हो चुका है और उनके बच्चों को भी सुरक्षित एवं बेहतर वातावरण मिल रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का उद्देश्य प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को सुरक्षित एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है। कौशिल्या बाई की यह सफलता अन्य जरूरतमंद परिवारों के लिए भी प्रेरणा है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
- -अब बिजली बिल शून्य, सोलर रिबेट से हो रही अतिरिक्त आयरायपुर । भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए आर्थिक बचत और स्वच्छ ऊर्जा का प्रभावी माध्यम बन रही है। खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिले के छुईखदान विकासखंड के कनक नगर निवासी श्री इब्राहिम खान इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपने बिजली खर्च से मुक्त हुए हैं, बल्कि अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।श्री इब्राहिम खान ने योजना के तहत अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित कराया। इससे पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग 1,500 रुपये आता था, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था। सोलर प्लांट लगने के बाद अब उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य (0) हो गया है।हाल ही में उनके सोलर रूफटॉप सिस्टम से 208 यूनिट बिजली का उत्पादन हुआ, जिसके एवज में उन्हें 425 रुपये का सोलर रिबेट भी प्राप्त हुआ। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह योजना बिजली की बचत के साथ अतिरिक्त आर्थिक लाभ का भी अवसर प्रदान कर रही है।श्री इब्राहिम खान का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ने उनके परिवार की मासिक बिजली लागत को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। अब वे स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा का उपयोग करते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी अपनी महत्वपूर्ण भागीदारी निभा रहे हैं। उनका मानना है कि यह योजना प्रत्येक परिवार के लिए अत्यंत लाभकारी है और भविष्य में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। योजना से मिले सकारात्मक अनुभव के बाद श्री इब्राहिम खान अपने आसपास के लोगों को भी अपने घरों में सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका संदेश है कि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठाकर बिजली खर्च में बचत करें, अतिरिक्त आय अर्जित करें तथा स्वच्छ एवं हरित भारत के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।
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राजनांदगांव । नगर पालिक निगम राजनांदगांव द्वारा बारिश के दौरान नागरिक सुविधाओं को सुचारू बनाए रखने के लिए शहर में व्यापक स्तर पर सफाई, जलनिकासी, पेयजल आपूर्ति, सड़क मरम्मत तथा सौंदर्यीकरण संबंधी कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जा रहे हैं। नया बस स्टैंड परिसर की नियमित साफ-सफाई एवं नालियों की सफाई कराई जा रही है। जनप्रतिनिधियों एवं उच्च अधिकारियों द्वारा नया बस स्टैण्ड का निरीक्षण कर परिसर में आवश्यक मरम्मत एवं सफाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए गए है। बस स्टैंड एवं अन्य जलभराव वाले क्षेत्रों में नियमित रूप से पानी की निकासी भी कराई जा रही है। नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर अस्थायी मुक्कड़ बनाकर कचरे का संग्रहण कर उसी दिन जेसीबी एवं टिप्पर के माध्यम से उसका उठाव कराया जा रहा है। रानी सागर से जिला अस्पताल मार्ग, डोंगरगढ़ रोड, मोहारा, चिखली, म्यूनिसिपल स्कूल मैदान तथा अन्य बाहरी क्षेत्रों में यह व्यवस्था संचालित की जा रही है। साथ ही आसपास के नागरिकों को खुले स्थानों पर कचरा नहीं डालने के लिए लगातार समझाइश दी जा रही है। लगातार वर्षा के कारण शहर के अनेक क्षेत्रों एवं निचली बस्तियों में जलभराव की स्थिति निर्मित होने पर निगम द्वारा बड़े नालों एवं नालियों की जेसीबी एवं सफाई गैंग के माध्यम से सफाई कराई गई तथा आवश्यक स्थानों पर कच्ची नालियां खोदकर पानी की निकासी सुनिश्चित की गई। जलभराव वाले क्षेत्रों में मच्छरों की रोकथाम के लिए दवा का छिड़काव भी कराया जा रहा है। बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की मरम्मत का कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है। निगम सीमाक्षेत्र की लगभग 20 से अधिक सड़कों पर पेचवर्क किया जा रहा है तथा मेडिकल कॉलेज रोड, कॉलेज परिसर के सामने एवं अन्य प्रभावित मार्गों पर भी शीघ्र मरम्मत की जाएगी। अन्य विभागों के अधीन आने वाली क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के लिए संबंधित विभागों को पत्र भेजा गया है। बारिश समाप्त होने के बाद डामरीकरण का कार्य कराया जाएगा।
शहर के गौरव पथ की बंद स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत निगम की विद्युत टीम द्वारा की जा रही है। मेडिकल कॉलेज रोड के डिवाइडर की मरम्मत भी निर्माण कार्य के साथ शीघ्र कराई जाएगी। वर्षा के कारण डिवाइडरों में उगी झाडिय़ों एवं खरपतवार की सफाई की जा रही है तथा आगामी पौधरोपण अभियान के अंतर्गत डिवाइडरों में भी पौधरोपण किया जाएगा। सर्किट हाउस रोड की दीवारों पर बनी चित्रकारी का रंग फीका पड़ जाने के कारण शहर के चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण अभियान के तहत पुन: रंग-रोगन कराया जाएगा। नगर निगम द्वारा पेयजल व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए मोहारा जल संयंत्र स्थित 17 एमएलडी फिल्टर प्लांट की सफाई कराई गई। सफाई कार्य के दौरान कुछ क्षेत्रों में शाम के समय पेयजल आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित रही, जिसे अगले दिन सुबह से सामान्य कर दिया गया। इसी जल संयंत्र में क्लोरीन गैस रिसाव की घटना को प्लांट कर्मियों की सतर्कता एवं फायर ब्रिगेड की त्वरित सहायता से समय रहते नियंत्रित कर लिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही निगम आयुक्त एवं अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा अगले दिन महापौर ने भी स्थल का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। संबंधित सप्लायर एवं निजी प्लांट संचालक को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला अस्पताल क्षेत्र में जलभराव की समस्या के समाधान हेतु नियमित सफाई एवं जलनिकासी कराई जा रही है। अस्पताल परिसर की पुरानी पार्किंग का मरम्मत कार्य लोक निर्माण विभाग द्वारा कराया जाएगा। वहीं अस्पताल के समीप नाली के बीच स्थित विद्युत पोल को हटाने के लिए पूर्व में भेजे गए पत्र के आधार पर विद्युत विभाग द्वारा पोल हटा दिया गया है। नगर निगम द्वारा मवेशी धरपकड़ अभियान भी नियमित रूप से संचालित किया जा रहा है। प्रतिदिन विभिन्न क्षेत्रों से आवारा मवेशियों को पकड़कर कांजी हाउस भेजा जा रहा है तथा रात्रिकालीन हांकने की कार्रवाई भी की जा रही है। रेवाडीह स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी सहित विभिन्न वार्डों में नियमित साफ-सफाई कराई जा रही है। बूढ़ा सागर में गंदे पानी की निकासी की समस्या के समाधान के लिए सीवरेज प्लांट निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी कर प्रकरण शासन को भेजा गया है। शासन से स्वीकृति प्राप्त होने के बाद पुन: निविदा जारी कर सीवरेज प्लांट का निर्माण कराया जाएगा। नगर निगम द्वारा कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया भी जारी है। वर्तमान में मई माह का वेतन कर्मचारियों को वितरित किया जा रहा है। राजस्व वसूली के आधार पर प्राथमिकता से भुगतान किया जाता है। नवीन संपत्तिकर निर्धारण के आधार पर जुलाई माह में डेढ़ करोड़ रूपए से अधिक की राजस्व वसूली प्राप्त हुई है। प्रत्येक सप्ताह समीक्षा कर वसूली में तेजी लाने के निर्देश दिए जा रहे हैं। प्लेसमेंट कर्मचारियों के नियमित वेतन भुगतान सुनिश्चित करने हेतु संबंधित ठेकेदारों को ईपीएफ जमा करने के संबंध में मौखिक निर्देशों के साथ नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं। नगर निगम द्वारा नागरिकों से स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करने, सार्वजनिक स्थानों पर कचरा नहीं डालने तथा बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था सुचारू बनाए रखने की अपील की गई है। - -17 अगस्त को होगा मॉप-अप दिवस, छूटे हुए बच्चों को भी खिलाई जाएगी दवारायपुर ।राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस भारत सरकार द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य सुधार के लिए वर्ष में दो बार आमतौर पर 10 फरवरी और 10 अगस्त को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अभियान है। इसके तहत 1 से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों को एल्बेंडाजोल की निःशुल्क गोली खिलाई जाती है। यह अभियान सरकारी स्कूलों, सहायता प्राप्त स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से चलाया जाता है। इससे बच्चों के पेट के कीड़े (कृमि) खत्म होते हैं, पोषण में सुधार होता है, और उनकी सीखने की क्षमता व रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के तहत 10 अगस्त 2026 को जिलेभर में व्यापक -मिनाशन अभियान चलाया जाएगा। अभियान के अंतर्गत 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को शासकीय एवं निजी विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, महाविद्यालयों तथा विद्यालय नहीं जाने वाले बच्चों तक पहुंचकर एल्बेंडाजोल की निःशुल्क दवा खिलाई जाएगी।स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बच्चों की आयु के आधार पर दवा का सेवन कराया जाएगा। 1 से 2 वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली (200 मि.ग्रा.) चूरा बनाकर, 2 से 3 वर्ष तक के बच्चों को एक पूरी गोली (400 मि.ग्रा.) चूरा बनाकर तथा 3 से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को एक पूरी गोली (400 मि.ग्रा.) चबाकर पानी के साथ दी जाएगी। दवा का वितरण प्रशिक्षित शिक्षकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की निगरानी में किया जाएगा। मुख्य अभियान के दौरान यदि कोई पात्र बच्चा दवा नहीं ले पाता है, तो उसे 17 अगस्त 2026 को आयोजित मॉप-अप दिवस पर एल्बेंडाजोल की दवा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि कोई भी पात्र बच्चा कृमिनाशन से वंचित न रहे। जशपुर कलेक्टर ने जिले के सभी अभिभावकों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों एवं नागरिकों से अभियान में सक्रिय सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि 1 से 19 वर्ष आयु वर्ग का प्रत्येक बच्चा एवं किशोर-किशोरी इस अभियान का लाभ अवश्य प्राप्त करे।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जी. एस. जात्रा ने बताया कि पेट में कृमि होने से बच्चों में एनीमिया, कुपोषण, कमजोरी, भूख कम लगना, पेट दर्द, पढ़ाई में एकाग्रता की कमी तथा शारीरिक एवं मानसिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि एल्बेंडाजोल एक सुरक्षित एवं प्रभावी कृमिनाशक दवा है, जिसे प्रशिक्षित कर्मियों की देखरेख में आयु के अनुसार दिया जाता है। नियमित कृमिनाशन से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार होने के साथ उनके समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास को भी बढ़ावा मिलता है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी विभागों, शिक्षण संस्थानों, आंगनबाड़ी केंद्रों, पालकों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें तथा सभी पात्र बच्चों को 10 अगस्त को एल्बेंडाजोल की दवा अवश्य दिलाएं। जो बच्चे मुख्य दिवस पर दवा नहीं ले सकें, उन्हें 17 अगस्त को आयोजित मॉप-अप दिवस पर दवा अवश्य दिलाई जाए।
- -वैज्ञानिक सोच, नवाचार और तकनीकी कौशल को बढ़ावा देने की दिशा में अभिनव पहलरायपुर । एयरोमॉडलिंग प्रशिक्षण छोटे आकार के विमानों, ग्लाइडर्स और रेडियो-कंट्रोल्डएयरक्राफ्ट को डिजाइन करने, बनाने और उड़ाने की कला व विज्ञान सिखाता है। यह एनसीसी, तकनीकी संस्थानों और विशेष निजी कार्यशालाओं के माध्यम से प्रदान किया जाता है। प्रदेश के विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तार्किक सोच एवं नवाचार आधारित सीखने की संस्कृति विकसित करने के उद्देश्य से जशपुर स्थित संकल्प शिक्षण संस्थान में आयोजित पाँच दिवसीय आवासीय एयरोमॉडलिंग प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को विमानन विज्ञान, एयरोडायनामिक्स तथा एयरोमॉडलिंग के सिद्धांतों को व्यवहारिक गतिविधियों के साथ समझने और सीखने का अवसर मिला।इस प्रशिक्षण में जशपुर जिले के कक्षा 9वीं से 12वीं तक के 40 विद्यार्थियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि बढ़ाना तथा उन्हें आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना था।पाँच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों ने विमान उड़ान के वैज्ञानिक सिद्धांत, विमान की संरचना, उड़ान नियंत्रण प्रणाली, एयरफॉइल, लिफ्ट, ड्रैग, थ्रस्ट, सेंटर ऑफ ग्रैविटी तथा आधुनिक विमानन तकनीकों का अध्ययन किया। साथ ही 3डी वर्चुअल रियलिटी तकनीक के माध्यम से उन्हें कॉकपिट एवं विमान संचालन का आभासी अनुभव भी कराया गया, जिससे उनकी सीखने की प्रक्रिया अधिक रोचक एवं प्रभावी बनी।प्रशिक्षक श्री सुभाष देवांगन एवं श्री राजेश राजपूत ने विद्यार्थियों को वायुगतिकी एवं एयरोमॉडलिंग का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। प्रायोगिक सत्रों में विद्यार्थियों ने पेपर प्लेन, बूमरैंग, एयरक्राफ्ट पज़ल्स तथा एयरोमॉडल निर्माण जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की। प्रशिक्षण के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने एयरोमॉडल के संतुलन, नियंत्रण एवं उड़ान परीक्षण की प्रक्रिया को प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में व्यवहारिक रूप से समझा। जशपुर के नोडल अधिकारी श्री विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण विद्यार्थियों को विज्ञान की सैद्धांतिक जानकारी के साथ-साथ व्यावहारिक प्रयोग, समस्या समाधान, टीमवर्क और नवाचार आधारित सोच विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को भविष्य की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित चुनौतियों के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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राजनांदगांव । दाऊ श्री वासुदेव चन्द्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग अंतर्गत जगदलपुर, महासमुंद, राजनांदगांव एवं सूरजपुर जिले में संचालित वेटनरी पॉलीटेक्निक में डिप्लोमा इन एनिमल हसबेन्ड्री पाठ्यक्रम तथा राजपुर धमधा में संचालित मात्स्यिकी पॉलीटेक्निक में डिप्लोमा इन फिशरिस सांइस पाठ्यक्रम संचालित है। व्यापम द्वारा आयोजित पीएटी व पीवीपीटी 2026 परीक्षा परिणाम की प्रावीण्य सूची के आधार पर शैक्षणिक सत्र 2026-27 में इन संस्थानों में राज्य के मूल निवासी छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाएगा। पॉलीटेक्निक में प्रवेश के लिए काउंसलिंग हेतु ऑनलाईन पंजीयन 6 सितम्बर 2026 तक आमंत्रित की गई है। तृतीय चरण में पीएटी व पीवीपीटी 2026 की परीक्षा परिणाम की प्रावीण्य सूची के आधार पर प्रवेश पश्चात सीट रिक्त होने की स्थिति में कक्षा 12वीं में बायोलॉजी ग्रुप से उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं को मेरिट के आधार पर ऑफलाईन काउंसलिंग एवं प्रवेश 26 अक्टूबर 2026 को पशु चिकित्सा एवं पशु पालन महाविद्यालय अंजोरा दुर्ग में आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में अन्य जानकारी एवं सूचना प्राप्त करने के लिए समय-समय पर विश्वविद्यालय की वेबसाईट का अवलोकन कर सकते है।
- -स्वाति आदित्य को समयबद्ध तरीके से मिला आय, जाति और निवास प्रमाण पत्ररायपुर ।छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी पहल सेवा सेतु आम नागरिकों को विभिन्न शासकीय सेवाएं सरल, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराने में एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है। इस जनहितैषी पहल की बदौलत सक्ती जिले के जैजैपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोटेतरा की निवासी स्वाति आदित्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उनके आवश्यक प्रमाण पत्र प्राप्त हो गए हैं।आवश्यक दस्तावेज न होने के कारण स्वाति को कई शासकीय कार्यों और महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। सही जानकारी और उचित मार्गदर्शन के अभाव में बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने के बाद भी उनका काम पूरा नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान उन्हें श्सेवा सेतु केंद्रश् के बारे में जानकारी मिली, जिसके बाद वे अपने पिता श्री लक्ष्मण प्रसाद के साथ केंद्र पहुंचीं और आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र के लिए आवेदन दिया।सेवा सेतु केंद्र द्वारा स्वाति के आवेदन का तुरंत ऑनलाइन पंजीयन कर उसे संबंधित विभाग को प्रेषित किया गया। केंद्र के कर्मचारियों ने आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण करते हुए पूरी प्रक्रिया में उचित मार्गदर्शन और समन्वय सुनिश्चित किया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद जैजैपुर तहसीलदार द्वारा स्वाति आदित्य का स्थायी जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। समयबद्ध प्रक्रिया के तहत सभी दस्तावेज मिल जाने से अब स्वाति को भविष्य में शासकीय योजनाओं और सुविधाओं का लाभ लेने में कोई बाधा नहीं आएगी।समय पर पारदर्शी तरीके से काम पूरा होने पर स्वाति आदित्य और उनके पिता श्री लक्ष्मण प्रसाद ने सेवा सेतु की त्वरित और सुगम कार्यप्रणाली की सराहना की। उन्होंने इस राहत के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है।
- -पालक कनेक्ट अभियान से संवर रहा बच्चों का भविष्यरायपुर । छत्तीसगढ़ में पालक कनेक्ट (पालक-शिक्षक संवाद) अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य संवर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अनूठी पहल पर शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य पालकों (अभिभावकों) और शिक्षकों के बीच बेहतर तालमेल बनाना है, जिससे बच्चों के शैक्षणिक स्तर और उनके सर्वांगीण विकास में सुधार लाया जा सके।कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब शिक्षा के क्षेत्र में एक नई और प्रेरक मिसाल पेश कर रहा है। जिला प्रशासन की विशेष पहल और कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे ‘पालक कनेक्ट’ अभियान के जरिए दूरस्थ वनांचल के ड्रॉपआउट बच्चों को पुनरू स्कूल की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।इस अभियान की मुख्य रीढ़ जिले के समर्पित शिक्षक, प्राचार्य और संकुल समन्वयक हैं। ये शिक्षक केवल कक्षाओं तक सीमित न रहकर जंगल, पहाड़ियों और कठिन रास्तों को पार करते हुए सीधे बच्चों के घर-आंगन तक पहुंच रहे हैं। वे अभिभावकों से व्यक्तिगत संवाद कर उन्हें शिक्षा के महत्व से अवगत करा रहे हैं और बच्चों को नियमित स्कूल भेजने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।पोटाकेबिन चिंतागुफा की पहलरू शासकीय बालक आवासीय हाई स्कूल (पोटाकेबिन) चिंतागुफा के शिक्षकों ने सुदूर गांव बोदीगुड़ा और टेटरई पहुंचकर परिजनों से संवाद किया। एक छात्र को शिक्षक स्वयं अपने साथ पोटाकेबिन लेकर आए, ताकि उसकी पढ़ाई तुरंत शुरू हो सके। खेतों तक पहुंचे शिक्षक कक्षा 7वीं की एक छात्रा के लंबे समय से अनुपस्थित रहने पर शिक्षक उसे खोजते हुए खेत तक जा पहुंचे और परिजनों से बेटी की पढ़ाई जारी रखने का आग्रह किया। डिजिटल संपर्क के माध्यम से जिन सुदूर क्षेत्रों तक सीधे पहुंचना संभव नहीं हो सका, वहां शिक्षकों ने मोबाइल के माध्यम से अभिभावकों से संपर्क साधकर बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई। पालक कनेक्ट अभियान के तहत जिले भर से उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। हाई स्कूल पाकेला के शिक्षकों ने पेदापारा पहुंचकर छात्र कृष्णा नाग, गणेश, सुमन और मोहित के परिजनों को नियमित पढ़ाई के लिए सहमत किया। वहीं आदगुड़ा की शाला त्यागी बालिका ज्योति सोड़ी का निकटतम स्कूल में पुनरू दाखिला कराया गया। भेज्जी क्षेत्र के माड़वी हिड़मा (कक्षा 8वीं), माड़वी जोगा (कक्षा 7वीं) और माड़वी संदीप (कक्षा 9वीं) की स्कूल वापसी कराई गई। रेगडगट्टा, गेडापाड़, इंजरम, मैलासुर और पालाचलमा क्षेत्रों में व्यापक मोबाइल संपर्क अभियान चलाकर बच्चों को नियमित स्कूल भेजने का आश्वासन प्राप्त किया गया। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वनांचल का कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे। संवेदनशील प्रशासन, समर्पित शिक्षकों और जागरूक अभिभावकों के त्रिकोणीय प्रयास ने सुकमा की तस्वीर बदल दी है। जिस क्षेत्र में कभी भय और अनिश्चितता का माहौल हुआ करता था, वहां अब बच्चों के हाथों में किताबें, कॉपियां और उज्ज्वल भविष्य के नए सपने दिखाई दे रहे हैं।
- -स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से आसान हुआ बिजली प्रबंधन-रियल टाइम बिजली खपत की जानकारी से बढ़ी पारदर्शिता, ऊर्जा बचत की आदत भी हुई विकसितरायपुर । आधुनिक तकनीक के उपयोग से अब बिजली उपभोक्ताओं के लिए बिजली की खपत पर नजर रखना और खर्च का प्रबंधन करना पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है। स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ मोबाइल ऐप उपभोक्ताओं को वास्तविक समय में बिजली उपयोग की जानकारी उपलब्ध कराकर न केवल पारदर्शिता बढ़ा रहे हैं, बल्कि ऊर्जा संरक्षण और आर्थिक बचत के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। दुर्ग शहर के वार्ड क्रमांक 9, गिरधारी नगर निवासी श्री रितेश कुमार सोनी इसका सफल उदाहरण हैं, जिनके घर में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल को लेकर होने वाली चिंता लगभग समाप्त हो गई है।श्री रितेश कुमार सोनी बताते हैं कि पहले उन्हें पूरे महीने बिजली उपयोग का सही अनुमान नहीं लग पाता था। बिजली बिल आने के बाद ही वास्तविक खपत का पता चलता था और कई बार अपेक्षा से अधिक बिल आने पर परेशानी होती थी। लेकिन स्मार्ट मीटर लगने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब वे ‘मोर बिजली’ मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रतिदिन और प्रति घंटे अपने घर की बिजली खपत की जानकारी आसानी से देख सकते हैं। ऐप पर यह भी स्पष्ट दिखाई देता है कि किस समय बिजली की खपत अधिक हुई और किस समय कम, जिससे वे अनावश्यक बिजली उपयोग की पहचान कर उसे तुरंत नियंत्रित कर लेते हैं।रितेश कुमार सोनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर का सबसे बड़ा लाभ यह है कि अब बिजली बिल को लेकर अनिश्चितता नहीं रहती। मोबाइल ऐप पर प्रतिदिन बिजली की खपत दिखाई देने से उन्हें पहले ही यह अनुमान हो जाता है कि महीने का बिजली बिल कितना आ सकता है। इससे वे अपनी आवश्यकता के अनुसार बिजली उपयोग को नियंत्रित कर आर्थिक बचत भी कर रहे हैं।‘मोर बिजली’ ऐप की एक विशेष सुविधा यह भी है कि इसमें पिछले वर्ष की समान अवधि की बिजली खपत की जानकारी उपलब्ध रहती है। इससे उपभोक्ता आसानी से तुलना कर सकते हैं कि उनकी बिजली खपत बढ़ी है या कम हुई है। रितेश कुमार सोनी इस सुविधा का उपयोग कर ऊर्जा संरक्षण के उपाय अपनाते हैं। वे अनावश्यक लाइट और पंखे बंद रखते हैं, ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग करते हैं तथा बिजली का सोच-समझकर उपयोग करते हैं।रितेश बताते हैं कि स्मार्ट मीटर और मोबाइल ऐप के उपयोग से उनके पूरे परिवार में बिजली बचाने की आदत विकसित हुई है। परिवार के सदस्य अब ऊर्जा संरक्षण के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। बच्चे भी समझने लगे हैं कि छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर बिजली की बचत की जा सकती है और इससे मासिक खर्च भी कम होता है।श्री रितेश कुमार सोनी का मानना है कि स्मार्ट मीटर केवल बिजली मापने का उपकरण नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं को जागरूक बनाने वाला प्रभावी माध्यम है। वास्तविक समय में उपलब्ध जानकारी से उपभोक्ता अपनी बिजली खपत पर नियंत्रण रख सकता है, अनावश्यक उपयोग कम कर सकता है और ऊर्जा संरक्षण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
- -तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता एवं प्रवेश क्षमता बढ़ाने वाले संस्थानों के प्राचार्यों को संचालक श्री हेमंत रमेश नंदनवार ने किया सम्मानितरायपुर । तकनीकी शिक्षा विभाग के संचालक श्री हेमंत रमेश नंदनवार ने 05 अगस्त 2026 को शासकीय पॉलिटेक्निक संस्थाओं एवं छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (सीजीआईटी) के शैक्षणिक स्तर, छात्र प्रवेश, अधोसंरचना विकास तथा विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्थानों के प्राचार्यों को छात्र प्रवेश क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि एवं संस्थागत विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।संचालक श्री हेमंत रमेश नंदनवार ने इस अवसर पर कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद नवाचार, प्रभावी जनसंपर्क एवं सतत प्रयासों के माध्यम से छात्र प्रवेश क्षमता बढ़ाने वाले संस्थान अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण, रोजगारोन्मुख एवं उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना विभाग की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसके लिए सभी संस्थानों को निरंतर नवाचार एवं उत्कृष्टता की दिशा में कार्य करना होगा।संचालक श्री नंदनवार ने प्राचार्यों से संस्थानों में शैक्षणिक गुणवत्ता, कौशल विकास, उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय, आधुनिक प्रयोगशालाओं के प्रभावी उपयोग तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थानों को सम्मानित करने से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण बनेगा तथा तकनीकी शिक्षा के स्तर में और अधिक सुधार होगा।सम्मानित प्राचार्यों ने इस सम्मान के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग एवं संचालक श्री हेमंत रमेश नंदनवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने-अपने संस्थानों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने, गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने तथा छात्र हित में और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प दोहराया।
- -दो आबकारी उपनिरीक्षक निलंबित-सहायक जिला आबकारी अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसारायपुर / छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों में अधिक कीमत पर बिक्री और अन्य गंभीर अनियमितताओं के मामलों में आबकारी विभाग ने एक ही दिन तीन बड़ी कार्रवाई की है। विभाग ने बलौदाबाजार-भाटापारा और बालोद के दो आबकारी उपनिरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जबकि 53 पेटी अवैध शराब प्रकरण में बालोद की सहायक जिला आबकारी अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा शासन को भेजी गई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।आबकारी आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की रोहासी देशी कम्पोजिट शराब दुकान में अधिक कीमत पर शराब बिक्री की शिकायत पर मूल शिकायत के अनुरूप कार्रवाई नहीं करने तथा दुकान के सीसीटीवी सिस्टम को अद्यतन नहीं रखने के कारण आबकारी उपनिरीक्षक पी. माधव राव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।वहीं, धमतरी जिले के अर्जुनी थाना क्षेत्र में 25 जुलाई को जब्त 53 पेटी अवैध देशी एवं विदेशी शराब की जांच में होलोग्राम के आधार पर शराब का स्रोत बालोद जिले की अरकार देशी कम्पोजिट शराब दुकान पाया गया। जांच में निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में थोक बिक्री सामने आने पर संबंधित वृत्त प्रभारी आबकारी उपनिरीक्षक आशा राम शाक्य को भी निलंबित कर दिया गया है।इसी प्रकरण में अरकार शराब दुकान की प्रभारी एवं सहायक जिला आबकारी अधिकारी निलोफर जैन के शिथिल नियंत्रण और कर्तव्य के प्रति लापरवाही को गंभीर मानते हुए आबकारी आयुक्त ने उनके विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग को भेज दी है। आबकारी विभाग ने स्पष्ट किया है कि शराब दुकानों के संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता, अधिक मूल्य पर बिक्री अथवा नियमों के उल्लंघन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा भविष्य में भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
- -बस्तर एवं सरगुजा में पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण पर रहेगा विशेष फोकसरायपुर / विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में पोषण एवं बाल कल्याण को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग में आज उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा की अध्यक्षता में यूनिसेफ (UNICEF) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य में पोषण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य एवं बाल कल्याण से जुड़े प्रयासों को प्रभावी बनाने तथा नवाचारों को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई।बैठक को संबोधित करते हुए राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि पोषण और बाल कल्याण किसी भी विकसित एवं सशक्त समाज की आधारशिला हैं। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर एवं सरगुजा जैसे क्षेत्रों में पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए प्रभावी, व्यावहारिक एवं नवाचारी उपायों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यूनिसेफ के विशेषज्ञों से आग्रह किया कि ऐसे समाधान विकसित किए जाएं, जिनका लाभ प्रत्येक बच्चे, गर्भवती महिला एवं परिवार तक प्रभावी रूप से पहुंच सके।बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न नवाचारों पर भी सार्थक चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के लिए पहले जहां पांच इंजेक्शन (खुराक) की आवश्यकता होती थी, वहीं अब एक ही इंजेक्शन से समतुल्य लाभ संभव है। इसे माताओं के लिए अधिक सुविधाजनक तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण नवाचार बताया गया। इसके साथ ही बच्चों एवं महिलाओं में एनीमिया (रक्ताल्पता) तथा कुपोषण की समस्या के प्रभावी समाधान पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि राज्य नीति आयोग नीति-परामर्श, प्रभावी मॉनिटरिंग तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभा रहा है। आयोग, यूनिसेफ जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के सहयोग से बस्तर सहित पूरे राज्य में पोषण एवं बाल कल्याण संबंधी कार्यक्रमों के लिए साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, अंतर-विभागीय समन्वय और निगरानी तंत्र को और मजबूत करेगा।यूनिसेफ की चीफ ऑफ फील्ड ऑफिस सुश्री सीमा कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर संभाग के बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में राज्य शासन के साथ मिलकर कार्य करना यूनिसेफ की प्राथमिकता है। यूनिसेफ के सामाजिक नीति विशेषज्ञ डॉ. बाल परितोष दाश ने कहा कि पोषण एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में स्थायी परिणाम तभी प्राप्त किए जा सकते हैं, जब विभिन्न विभाग समन्वित रूप से कार्य करें और नीतियां साक्ष्य आधारित हों।बैठक में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं सुपोषित बचपन ही विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत की मजबूत नींव है। बस्तर सहित पूरे राज्य में बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं संरक्षण को सुनिश्चित कर भविष्य की पीढ़ी को सशक्त बनाया जा सकता है, जो समावेशी एवं सतत विकास का आधार बनेगा।बैठक के समापन पर पोषण, बाल कल्याण एवं सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में ठोस, नवाचारी एवं परिणाम-आधारित रणनीति पत्र तैयार करने पर सहमति बनी, ताकि "हर बच्चा स्वस्थ, हर भविष्य उज्ज्वल" के संकल्प को साकार करते हुए छत्तीसगढ़ विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में अग्रणी भूमिका निभा सके।बैठक में राज्य नीति आयोग एवं यूनिसेफ के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- -रामलला दर्शन योजना से बुजुर्गों, महिलाओं एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का वर्षों पुराना सपना हो रहा है साकाररायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जनआस्था, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन को जनकल्याण से जोड़ते हुए प्रदेशवासियों के वर्षों पुराने सपनों को साकार कर रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित रामलला दर्शन योजना प्रदेश के हजारों श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा, सेवा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुकी है। इसी कड़ी में अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालुओं को लेकर भारत गौरव ट्रेन श्री अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला तथा श्री काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन के लिए श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में रवाना हुई।रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही भक्ति और उल्लास का अनूठा वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयघोष के साथ स्टेशन पहुंचे। पूरा परिसर जय श्रीराम, हर-हर महादेव और जय सियाराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर अपने आराध्य के दर्शन का उत्साह और भावनात्मक खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। अनेक परिवार पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे, जहां परिजनों ने तिलक लगाकर और पुष्पवर्षा कर यात्रियों को शुभ यात्रा की मंगलकामनाओं के साथ विदा किया।भारत गौरव ट्रेन को जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर श्रीमती मंजूषा भगत (महापौर), श्री हरविंदर सिंह टिनी (सभापति), श्रीमती नीरूपा सिंह (जिला पंचायत अध्यक्ष) सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, जिला प्रशासन तथा भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हुए यात्रा की शुभकामनाएं दीं।रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं को श्री अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला के दिव्य दर्शन तथा श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन एवं पूजन का सौभाग्य प्राप्त होगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा गया है। पूरी यात्रा का संचालन पर्यटन विभाग एवं आईआरसीटीसी के समन्वय से सुव्यवस्थित रूप से किया जा रहा है।यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को आरामदायक रेल यात्रा, स्वच्छ एवं सुरक्षित आवास, पौष्टिक शुद्ध शाकाहारी भोजन, पेयजल, स्थानीय परिवहन, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा व्यवस्था तथा अनुभवी एस्कॉर्ट दल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं तथा दिव्यांग यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूर्ण कर सके।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सोच है कि आर्थिक स्थिति किसी भी श्रद्धालु की आस्था के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसी भावना के अनुरूप रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के हजारों श्रद्धालुओं को निःशुल्क धार्मिक यात्रा का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यह योजना केवल दर्शन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशवासियों को उनकी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन गई है।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने श्रद्धालुओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि रामलला दर्शन योजना मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व की ऐसी जनकल्याणकारी पहल है, जिसके माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम और बाबा विश्वनाथ के पावन दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। यह यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को सशक्त बनाने का अभियान है। मैं सभी श्रद्धालुओं से प्रार्थना करता हूं कि वे प्रभु श्रीराम और बाबा विश्वनाथ से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सभी नागरिकों के कल्याण की कामना करें तथा यात्रा से लौटकर अपने अनुभव समाज के साथ साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित हों।यात्रा पर रवाना होने वाले श्रद्धालुओं ने भी भावुक होकर राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। अनेक बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने कहा कि जीवनभर इच्छा होने के बावजूद आर्थिक परिस्थितियों के कारण अयोध्या और काशी की यात्रा संभव नहीं हो पाई थी, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की इस योजना ने उनका वर्षों पुराना सपना पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें सम्मानपूर्वक भगवान श्रीराम और बाबा विश्वनाथ के दर्शन का अवसर देकर उनके जीवन की सबसे बड़ी मनोकामना पूर्ण कर दी है।एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि इतनी अच्छी व्यवस्था के साथ अयोध्या और काशी की यात्रा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने हम जैसे सामान्य परिवारों की भावनाओं का सम्मान किया है। हम सभी उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।एक वरिष्ठ श्रद्धालु ने कहा कि सरकार ने हमारी पूरी यात्रा की चिंता अपने ऊपर ले ली है। भोजन, आवास, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सभी व्यवस्थाएं होने से हम पूरी निश्चिंतता और श्रद्धा के साथ यात्रा कर रहे हैं। यह योजना वास्तव में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व तथा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल के सतत प्रयासों से संचालित रामलला दर्शन योजना आज प्रदेशवासियों की आस्था को सम्मान देने वाली एक ऐतिहासिक पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह योजना श्रद्धालुओं को केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन ही नहीं करा रही, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकात्मता से भी जोड़ रही है। सरगुजा संभाग से रवाना हुई भारत गौरव ट्रेन इसी जनसेवा, सुशासन और जनआस्था के सशक्त समन्वय का प्रेरक उदाहरण है।
- -आयुष्मान आरोग्य मंदिर बना ग्रामीणों के लिए भरोसे का केंद्र, तीन महीने में 23 सुरक्षित संस्थागत प्रसवरायपुर । दूरस्थ गांवों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगा है। दंतेवाडा कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना, नए स्वास्थ्य भवनों का निर्माण, जिला अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार और मेडिकल कॉलेज की स्थापना जैसे कदमों से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से अधिक सशक्त हुई है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर में तीन महीने में 23 सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गयाकटेकल्याण विकासखंड के अंतर्गत स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर जंगमपाल इसका प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। यह जिला मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर दूर स्थित जिले के अंतिम उप स्वास्थ्य केंद्रों में से एक है। पहले यहां के लोगों को इलाज के लिए जिला अस्पताल या सुकमा जाना पड़ता था, लेकिन अब गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।आयुष्मान आरोग्य मंदिर में निःशुल्क लैब जांच, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता, टीकाकरण और प्राथमिक उपचार सहित 12 प्रकार की जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। सबसे बड़ा बदलाव मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में आया है। अब गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। गांव के स्वास्थ्य केंद्र में ही उनकी नियमित जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान, लगातार निगरानी और सुरक्षित संस्थागत प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि पिछले तीन महीनों में जंगमपाल आयुष्मान आरोग्य मंदिर में 23 गर्भवती महिलाओं का सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराया गया है। यह उपलब्धि ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर गुणवत्ता को दर्शाती है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अजय रामटेके ने बताया कि जंगमपाल आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ग्रामीणों को नियमित रूप से प्राथमिक उपचार, गर्भवती महिलाओं की जांच, टीकाकरण, स्वास्थ्य परामर्श और अन्य आवश्यक सेवाएं प्रदान की जा रही हैं।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और जंगमपाल की सफलता जिले की मजबूत होती स्वास्थ्य व्यवस्था की एक प्रेरणादायक मिसाल है। सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से जंगमपाल जैसे दूरस्थ गांवों में भी अब सुरक्षित मातृत्व और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का नया भरोसा बना है।
- -केवल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करेंरायपुर । छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा गृह (पुलिस) विभाग के अंतर्गत आयोजित सूबेदार, उप-निरीक्षक (SI) संवर्ग और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2024 के प्रारंभिक लिखित परीक्षा परिणाम 04 अगस्त 2026 को घोषित किए गए। परिणाम जारी होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों के नामों को लेकर भ्रामक व तथ्यहीन जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं।सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (रील्स और शॉर्ट्स वीडियो) पर कुछ अभ्यर्थियों के नामों को लेकर उनका उपहास उड़ाया जा रहा है और परीक्षा परिणाम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रही इन रील्स और वीडियो में प्रदर्शित दावों का सख्ती से खंडन किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा परिणाम में अभ्यर्थियों के वही नाम प्रदर्शित किए गए हैं, जो उन्होंने स्वयं अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में दर्ज कर अंतिम रूप से सबमिट किए थे। इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन, शारीरिक परीक्षण (PST) और प्रारंभिक लिखित परीक्षा संपन्न हुई थी। अभ्यर्थियों के प्रवेश-पत्र (Admit Card) में भी यही नाम अंकित थे। इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन किया गया। अवर सचिव छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सभी अभ्यर्थियों और जनसामान्य से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही ऐसी किसी भी असत्य, भ्रामक और तथ्यहीन जानकारी या अफ़वाहों पर विश्वास न करें। परीक्षा से जुड़ी किसी भी अधिकृत जानकारी के लिए केवल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।
- -बुनकरों को मिलेगी करोड़ों की सौगातरायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर बुनकर समुदाय को प्रोत्साहित करने, पारंपरिक कला को बढ़ावा देने और उत्कृष्ट कार्य करने वाले बुनकरों व विद्यार्थियों को सम्मानित करने के लिए राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में छात्र प्रोत्साहन पुरस्कार, शिल्पियों का सम्मान और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनियां मुख्य आकर्षण होंगी।हाथकरघा उद्योग के संवर्धन, स्वदेशी की भावना को बढ़ावा देने और बुनकरों के योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से 7 अगस्त को राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर रायपुर के दीनदयाल ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, कार्यक्रम की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में ग्रामोद्योग एवं स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव उपस्थित रहेंगे।समारोह के दौरान छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ की कई नई पहलों की शुरुआत की जाएगी। हाथकरघा संघ के नए प्रीमियम ब्रांड ‘कोशल फेब’ का भव्य शुभारंभ किया जाएगा और ‘बिलासा’ लोगो का अनावरण किया जाएगा। इन्वेंटरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का प्रस्तुतीकरण व शुभारंभ के साथ पुरस्कृत बुनकरों की डायरेक्टरी तथा टाई-डाई व बांधनी रंगाई पर आधारित पुस्तक का विमोचन किया जाएगा।कार्यक्रम में ग्रामोद्योग विभाग के विभिन्न घटकों द्वारा हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के तहत राशि एवं सामग्री वितरित की जाएगी। कक्षा 10वीं व 12वीं के 935 मेधावी विद्यार्थियों को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा 17 वरिष्ठ बुनकरों को 1.87 लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। स्व. बिसाहूदास महंत सर्वश्रेष्ठ बुनकर पुरस्कार और राजराजेश्वरी करुणा माता बुनकर पुरस्कार के तहत चयनित 8 बुनकरों को 1-1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे। 49 बुनकरों को आवास निर्माण के लिए 122.50 लाख रुपये, 5 बुनकर समितियों को भवन निर्माण हेतु 75 लाख रुपये और 85 बुनकरों को उन्नत उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 14.92 लाख रुपये की स्वीकृति दी जाएगी। रेशम कृषकों को 15 लाख रुपये की किश्त, माटीशिल्पियों को विद्युत चाक, हस्तशिल्पियों को टूल-किट और जशपुर के ग्राम गोरिया में ग्लेजिंग यूनिट हेतु 2.86 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की जाएगी। साथ ही बुनकर नेत्र परीक्षण अभियान के तहत पात्र बुनकरों को चश्मे बांटे जाएंगे।समारोह का मुख्य आकर्षण छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक विरासत को समर्पित एक विशेष फैशन शो होगा। इसमें कोसा सिल्क और हैंडवुवन कॉटन के परिधानों को प्रदर्शित किया जाएगा। इस फैशन शो की खासियत बस्तर की युवा प्रतिभागियों की सहभागिता होगी, जो पेशेवर मॉडलों और मिस इंडिया अर्थ 2026 अनुष्का सोने के साथ रैंप पर अपनी चमक बिखेरेंगी। इस राज्य स्तरीय आयोजन में प्रदेश भर से बुनकर, हस्तशिल्पी, रेशम कृषक, माटीशिल्पी और जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में हिस्सा लेंगे।
- रायपुर ।प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ा रही है। इसी कड़ी में राजनांदगांव जिले के छुरिया विकासखंड की ग्राम पंचायत धरमूटोला के सचिव मोहन साहू ने अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कर हरित ऊर्जा अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाई है। अब उन्हें बिजली बिल में उल्लेखनीय बचत होने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देने का अवसर मिलेगा।मोहन साहू का कहना है कि योजना के तहत सोलर संयंत्र लगाने की पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक रही। उनका मानना है कि सौर ऊर्जा न केवल स्वच्छ, सुरक्षित और अक्षय ऊर्जा का विश्वसनीय स्रोत है, बल्कि यह बढ़ती बिजली लागत से राहत दिलाने का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि यदि अधिक से अधिक लोग अपनी क्षमता के अनुसार सोलर रूफटॉप अपनाएं, तो बिजली की बचत के साथ कार्बन उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने जिले के नागरिकों से प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि यह योजना आर्थिक बचत के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती दे रही है। राजनांदगांव जिले में योजना के विस्तार से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है और हरित, टिकाऊ तथा पर्यावरण-अनुकूल भविष्य की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार हो रहा है।

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