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-*ग्रामीण क्षेत्र का पहला शिविर हरदीकला में*-लोगों की समस्याओं का मौके पर होगा त्वरित निराकरणबिलासपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में आमजनों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से सुशासन तिहार 2026 का शुभारंभ 1 मई से किया जाएगा। यह अभियान जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चरणबद्ध रूप से संचालित होगा। अभियान के अंतर्गत जिले में कुल 73 शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें नगरीय निकाय क्षेत्रों में 24, नगर पंचायत क्षेत्रों में 18 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 31 शिविर शामिल हैं।कलेक्टर के निर्देशन में आयोजित इन शिविरों में विभिन्न विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी और प्रकरणों का त्वरित निराकरण संभव हो सकेगा।नगर निगम क्षेत्र में 1 मई को वार्ड क्रमांक 1 एवं 2 तथा 4 मई को वार्ड क्रमांक 5, 6, 7 एवं 8 में शिविर लगाए जाएंगे। रतनपुर नगर पालिका परिषद में 01 मई को वार्ड 1 से 05 तक शिविर लगाए जाएंगे। 04 मई को तखतपुर नगर पालिका परिषद में वार्ड 1 से 05 तक शिविर का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में 1 मई को ग्राम पंचायत हरदीकला से अभियान की शुरुआत होगी, इसके पश्चात 2 मई को तखतपुर के रानीडेरा एवं 4 मई को मस्तूरी ब्लॉक के सोंठी में शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिससे ग्रामीणों को अपने ही क्षेत्र में सेवाओं का लाभ मिल सके।एक ही स्थान पर मिलेंगी सभी प्रमुख सेवाएंइन शिविरों में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, स्वास्थ्य सेवाएं तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं सहित अन्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्राप्त आवेदनों का अधिकतम निराकरण मौके पर ही सुनिश्चित किया जाएगा। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे शिविरों में पूर्ण तैयारी के साथ उपस्थित रहें और जनसमस्याओं का प्राथमिकता के साथ समाधान सुनिश्चित करें। कलेक्टर ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे अपने निकटतम शिविर में पहुंचकर अधिक से अधिक संख्या में इसका लाभ उठाएं और शासन की योजनाओं से जुड़कर अपनी समस्याओं का समाधान कराएं। - रायपुर । छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी में सेवानिवृत्ति उपरांत दो कर्मियों को डंगनिया मुख्यालय में आयोजित समारोह में भावभीनी विदाई दी गई। ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र व स्मृति चिन्ह भेंट किया। बिलासपुर के कार्यालय कार्यपालक निदेशक उपकेन्द्र में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी श्री अमरजीत सिंह एवं अधीक्षण अभियंता, अतिरिक्त उच्च दाब निर्माण संभाग रायपुर में कार्यरत दफ्तरी श्री राजकुमार मिश्रा को प्रतीकात्मक भेंट एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल एवं स्वस्थ भविष्य की शुभकामनाएँ व्यक्त कीं।अपने उद्बोधन में श्री शुक्ला ने कहा कि कंपनी के विकास, परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन तथा संगठनात्मक लक्ष्यों की प्राप्ति में सेवानिवृत्त कर्मियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण एवं बहुमूल्य रहा है। इस अवसर पर सेवानिवृत्त कर्मियों द्वारा भी अपने सहयोगी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।इस अवसर पर ईडी सर्वश्री के एस मनोठिया, एमएस चौहान, संजय पटेल, वी.के.दीक्षित, मुख्य अभियंता श्रीमती शारदा सोनवानी, रश्मि वर्मा, डीजीएम अल्पना शरत तिवारी सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रबंधक जनसंपर्क श्री गोविंद पटेल ने किया। आभार प्रदर्शन अधीक्षण अभियंता श्री पंकज चौधरी ने किया।
- रायपुर । निस्तारी पानी की समस्या से जूझ रहे बड़गांव के ग्रामीणों को तालाब में पानी भर राहत दिलाने बड़गांव के युवा जुट गये हैं । दरबा से सोनपैरी के बीच माइनर में विध्नसंतोषी तत्वों द्वारा मनाही के बाद भी किये गये तोड़फोड़ को जहां युवाओं ने मशक्कत कर बांधा वहीं माइनर में चौकसी भी शुरू कर दी है । बड़गांव के ग्रामीणों ने दरबा व सोनपैरी के पंचायत प्रतिनिधियों व ग्राम प्रमुखों से आग्रह किया है कि वे बड़गांव के तालाब को भरने सहयोग प्रदान करें ।ज्ञातव्य हो कि निस्तारी पानी की समस्या को देखते हुये पंचायत ने सिंचाई विभाग से निस्तारी पानी देने की मांग की थी । मांग पर गंगरेल से छोड़े जा पानी मांढर शाखा नहर से निकले वितरक शाखा क्रमांक 10 के सोनपैरी माइनर के अंतिम छोर के ग्राम बड़गांव में पहुंच गया है पर दरबा व सोनपैरी में कतिपय विध्नसंतोषी तत्वों द्वारा माइनर में तोड़फोड़ करने से बड़गांव में नियमित व पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा है ।इसे देखते हुये गुरूवार की सुबह ग्रामीण सभा अध्यक्ष रामजी वर्मा व उपसरपंच बनवारी यादव व रायपुर जिला जल उपभोक्ता संस्था संघ के अध्यक्ष रहे भूपेन्द्र शर्मा के साथ पंचों व ग्रामीण युवाओं की टीम ने पूरे माइनर का निरीक्षण किया और दरबा व सोनपैरी में एक - एक जगह निर्धारित कुलापे वाले स्थल पर तोड़फोड़ कर पानी निकासी होते पाया वहीं सोनपैरी में मुरूम खुदाई की वजह से बने तालाब नुमा गढ्ढे में भी पानी गिरते पाया । युवाओं की टीम ने बोरियों से इन्हें बांधा व दिन और रात में सतत् चौकसी की निर्णय लेने के साथ दरबा व सोनपैरी के ग्रामीणों से सहयोग का आग्रह किया है । इधर युवाओं द्वारा माइनर मरम्मत व चौकसी के चलते शाम होते होते रफ्तार से पानी बड़गांव पहुंच तालाब में गिरना शुरू हो गया है और ग्रामीण जेसीबी लगा ग्रामीण नाली की मरम्मत कर प्रभावी पानी ले जाने के कार्य में जुटे हैं ।
- रायपुर। पश्चिम बंगाल के कोलकाता से पुणे जाने वाली इंडिगो की एक उड़ान में एक महिला यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ने पर विमान को रायपुर के स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर आपात स्थिति में उतरा गया। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि उड़ान संख्या 6ई-135 को एक महिला यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डे पर उतारा गया। उन्होंने बताया कि विमान दोपहर लगभग 12 बजे रायपुर हवाई अड्डे पर सुरक्षित रूप से उतर गया।अधिकारियों ने बताया कि उड़ान के दौरान एक महिला यात्री अचानक बेहोश हो गईं, जिसके बाद चालक दल ने तत्काल मेडिकल सहायता के लिए रायपुर हवाई अड्डे में एटीसी से संपर्क किया और विमान को रायपुर में उतारने का फैसला किया। अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने विमान के उतरते ही महिला यात्री को प्राथमिक सहायता प्रदान की और एम्बुलेंस के जरिये उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने बताया कि आवश्यक औपचारिकताएं और स्थिति सामान्य होने के बाद विमान ने लगभग दोपहर एक बजे फिर से अपने गंतव्य के लिए उड़ान भरी।
- -श्रम मंत्री ने श्रमवीरों को दी अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस की शुभकामनाएंरायपुर / अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (मई दिवस) के अवसर पर प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने राज्य के श्रमिकों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सभी मेहनतकश श्रमिकों के सुखमय और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि 1 मई का दिन श्रमिकों के परिश्रम, समर्पण और योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है।मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि श्रमिक समाज की आधारशिला हैं और उनके बिना विकास की कल्पना अधूरी है। उन्होंने श्रमिकों की सामाजिक और आर्थिक खुशहाली के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार श्रमिकों सहित सभी जरूरतमंद वर्गों के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों और उनके परिवारों को विभिन्न योजनाओं का लाभ तेजी से उपलब्ध कराया जा रहा है। श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित तीनों मंडलों- भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, संगठित कर्मकार मंडल और राज्य सामाजिक सुरक्षा एवं श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि बीते सवा दो वर्षों में विभिन्न योजनाओं के तहत करीब 800 करोड़ रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे न केवल श्रमिकों बल्कि उनके परिवारों के सामाजिक और आर्थिक स्तर में भी सुधार आया है।
- -सीओआरएस तकनीक से राजमार्ग निर्माण में आएगी तेजी, सेंटीमीटर की सटीकता के साथ होगा डिजिटल सर्वे-जीपीएस की जगह अब रियल-टाइम डॉटा और अत्याधुनिक तकनीक से बनेंगे स्मार्ट राजमार्गरायपुर । भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और भारतीय सर्वेक्षण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में सीओआरएस (CORS - Continuously Operating Reference Stations) नेटवर्क के माध्यम से प्रिसीजन पोजिशनिंग सेवाएं विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक जीपीएस (GPS) प्रणालियों की सीमाओं को पार कर अत्याधुनिक सीओआरएस तकनीक को अपनाना है, ताकि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की योजना और निर्माण को बेहतर बनाया जा सके।एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी श्री प्रदीप कुमार लाल ने कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजमार्ग निर्माण अब और भी स्मार्ट व आधुनिक होने जा रहा है। सीओआरएस तकनीक को अपनाने से हम बुनियादी ढांचे के विकास में वैश्विक मानकों को छू सकेंगे। यह तकनीक न केवल सर्वेक्षण प्रक्रिया को तेज करेगी, बल्कि ठेकेदारों और इंजीनियरों को रियल-टाइम डॉटा उपलब्ध कराकर निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करेगी।भारतीय सर्वेक्षण विभाग के अधीक्षण सर्वेक्षक और छत्तीसगढ़ के प्रभारी श्री राजेश रंजन ने तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि सीओआरएस नेटवर्क एक ऐसी आधुनिक बुनियादी ढांचा प्रणाली है जो पूरे देश में सटीक स्थान की जानकारी प्रदान करती है। राजमार्ग क्षेत्र में इसके उपयोग से जटिल भौगोलिक क्षेत्रों में भी त्रुटिहीन डिजिटल मैपिंग और डॉटा संग्रहण संभव हो पाएगा।कार्यशाला में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के ऑफिसियल सर्वेयर श्री प्रभात कुमार प्रधान ने बताया कि सीओआरएस तकनीक के माध्यम से राजमार्गों के सर्वेक्षण और निर्माण कार्यों में सेंटीमीटर-स्तर की सटीकता प्राप्त की जा सकती है। यह तकनीक न केवल रियल-टाइम मॉनिटरिंग में सहायक है, बल्कि इससे निर्माण की गुणवत्ता में सुधार होगा और परियोजनाओं के समय व लागत में भी भारी बचत होगी। एनएचएआई के परियोजना निदेशक सर्वश्री डी.डी. पार्लावार, दिग्विजय सिंह और मुकेश कुमार तथा सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर श्री रामवीर यादव सहित अनेक अधिकारी-कर्मचारी भी कार्यशाला में उपस्थित थे।
- रायपुर । आदिवासी बहुल नारायणपुर जिले में स्थापित पुनर्वास केंद्र, लाइवलीहुड कॉलेज नारायणपुर, आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए एक नई उम्मीद का केंद्र बन चुका है। यहां न केवल उन्हें सुरक्षा और आश्रय मिल रहा है, बल्कि उन्हें समाज से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल भी की जा रही हैं। जिन्होंने कभी बंदूक का रास्ता अपनाया था, लेकिन आज वही लोग मुख्यधारा में लौटकर सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन जीने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।इसी क्रम में प्रशासन द्वारा पुनर्वासित लोगों को शासकीय सेवाओं का लाभ दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। हाल ही में 8 पुनर्वासित लोगों को वोटर आईडी कार्ड बनाकर वितरित किए गए, जिससे वे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सके। इसके अलावा 25 लोगों का ऑनलाइन पंजीयन किया गया और 40 लोगों के फॉर्म-6 भरवाए गए। यह पहल केवल दस्तावेज बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन्हें एक पहचान देने और समाज में बराबरी का अधिकार दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।कलेक्टर नम्रता जैन के पुनर्वास केंद्र के निरीक्षण के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने इस बदलाव को और भी गहराई से दर्शाया। यहां मौजूद 40 पुनर्वासित आत्मसमर्पित नक्सलियों ने उनसे एक विशेष मांग रखी कि वे ट्रैक्टर चलाना सीखना चाहते थे, साथ ही ट्रैक्टर की मरम्मत और रखरखाव का प्रशिक्षण भी लेना चाहते थे। यह मांग इसलिए भी खास थी क्योंकि इनमें से कई लोग ऐसे थे, जिन्होंने अपने जीवन में कभी साइकिल तक नहीं चलाई थी।कलेक्टर नम्रता जैन ने इस मांग को गंभीरता से लिया और बिना किसी देरी के तत्काल कार्रवाई करते हुए सोमवार से ही प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करवा दिया। अब ये सभी लोग नियमित रूप से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिसमें उन्हें ट्रैक्टर चलाने की बारीकियां, उसकी तकनीकी जानकारी, मरम्मत और रखरखाव के तरीके सिखाए जा रहे हैं।यह प्रशिक्षण केवल एक कौशल विकास कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उनके जीवन को नई दिशा देने का माध्यम बन रहा है। ट्रैक्टर चलाना सीखने के बाद वे खेती-किसानी, परिवहन या अन्य कार्यों के माध्यम से अपनी आजीविका कमा सकेंगे। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि वे आत्मसम्मान के साथ समाज में अपनी नई पहचान भी बना सकेंगे।आज इन पुनर्वासित लोगों के जीवन में स्पष्ट बदलाव देखा जा सकता है। जहां पहले उनके जीवन में अस्थिरता और डर था, वहीं अब उनके चेहरों पर आत्मविश्वास, संतोष और भविष्य के प्रति उम्मीद दिखाई देती है। वे राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं और धीरे-धीरे एक सामान्य नागरिक की तरह जीवन जीने की ओर अग्रसर हैं।नारायणपुर का यह पुनर्वास केंद्र अब केवल एक पुनर्वास स्थल नहीं रहा, बल्कि यह परिवर्तन, विश्वास और नई शुरुआत का प्रतीक बन गया है। यह साबित करता है कि यदि सही दिशा, अवसर और सहयोग मिले, तो कोई भी व्यक्ति अपने अतीत को पीछे छोड़कर एक उज्ज्वल भविष्य की ओर बढ़ सकता है।
- -कांकेर एकलव्य की छात्रा कृतिका टेकाम ने देशभर के एकलव्य विद्यालयों में किया टॉप-10वीं सीबीएसई बोर्ड परीक्षा में हासिल की प्रथम स्थान-राज्य में संचालित 11 एकलव्य विद्यालयों में परीक्षा परिणाम शत्-प्रतिशत-मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और मंत्री श्री नेताम ने दी बधाई एवं शुभकामनाएंरायपुर, / छत्तीसगढ़ के कांकेर निवासी कृतिका टेकाम ने सीबीएसई 10 वीं बोर्ड की परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। होनहार छात्रा कृतिका ने संपूर्ण देश में संचालित लगभग 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। इस बड़ी उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कृतिका को उज्ज्वल भविष्य के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कांकेर की होनहार छात्रा कृतिका टेकाम को सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में देशभर के एकलव्य विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल कृतिका के परिश्रम और प्रतिभा का परिणाम है, बल्कि छत्तीसगढ़ में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जनजातीय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों की सफलता का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के माध्यम से राज्य के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सभी सफल विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी।आदिम जाति विकास मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कांकेर की छात्रा कृतिका टेकाम को सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षा में देशभर के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रदेश के जनजातीय विद्यार्थियों की प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के माध्यम से जनजातीय अंचलों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर संसाधन और अनुकूल वातावरण मिल रहा है, जिसके परिणामस्वरूप वे राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। मंत्री श्री नेताम ने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राज्य सरकार जनजातीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक, बौद्धिक और सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।गौरतलब है कि सीबीएसई द्वारा हाल ही में शैक्षणिक सत्र 2025-26 हेतु 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित किया है, जिसमें छत्तीसगढ़ की छात्रा कु. कृतिका टेकाम देशभर के एकलव्य विज्ञालयों में प्रथम स्थान हासिल की है।आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि कृतिका टेकाम कांकेर जिले में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रही थी। संपूर्ण देश में संचालित लगभग 750 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में 97 प्रतिशत अंक प्राप्त कर देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर प्रदेश के साथ-साथ आदिम जाति विभाग को भी गौरवान्वित किया है। इसके साथ ही अन्य विद्यार्थियों द्वारा भी अच्छा परीक्षा परिणाम प्राप्त किया गया है। प्रदेश में संचालित 75 एकलव्य विद्यालयों में से हाई स्कूल स्तर पर 71 एकलव्य विद्यालय संचालित हैं। इनमें 11 एकलव्य विद्यालयों द्वारा शत्-प्रतिशत परीक्षा परिणाम अर्जित किया गया।उल्लेखनीय है कि प्रदेश में संचालित कुल 75 एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ उनके मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसी का परिणाम है कि शिक्षण सत्र 2025-26 में चौथी एकलव्य विद्यालयों की राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में प्रदेश के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों के दल द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुये देश में द्वितीय स्थान प्राप्त किया गया।आयुक्त डॉ. सारांश मित्तर ने बताया कि इसी प्रकार भारत सरकार, पंचायती राज, मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा आयोजित मॉडल यूथ ग्राम सभा प्रतियोगिता में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, कोसमबुड़ा जिला-गरियाबंद को देश में संचालित 800 विद्यालयों में से राष्ट्रीय विजेता चुना गया। गरियाबंद के चयनित इन विद्यार्थियों को उनके शानदार प्रदर्शन के लिए 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया, साथ ही इस विद्यालय को एक करोड़ रूपए की उपहार राशि प्रदान की गई है।
- - जल प्रबंधन का ऐसा मॉडल जो पूरे देश के लिए बना मिसाल-वैज्ञानिक मैपिंग और सॉल्ट लिक तकनीक से बदला अभयारण्य का परिदृश्य-240 से अधिक जल स्रोतों की हो रही है रियल-टाइम मॉनिटरिंगरायपुर । छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन और जैव-विविधता के केंद्र बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य ने इस भीषण गर्मी में वन्यजीव संरक्षण की एक नई इबारत लिखी है। जब पारा आसमान छू रहा है और प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं, तब बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा अपनाई गई वैज्ञानिक और व्यावहारिक जल प्रबंधन प्रणाली वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है।अभयारण्य प्रबंधन ने पूरे क्षेत्र का विस्तृत मानचित्रण (Mapping) कर 240 से अधिक जल स्रोतों को चिन्हित किया है। इसमें तालाब, स्टॉप डैम, वॉटरहोल और कृत्रिम सॉसर शामिल हैं। रणनीति ऐसी बनाई गई है कि वन्यप्राणियों को पानी के लिए भटकना न पड़े। प्रत्येक 5 वर्ग किलोमीटर के दायरे में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। बारनवापारा का यह मॉडल केवल पानी भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डेटा और तकनीक पर आधारित है। स्थलों का नियमित निगरानी का प्रबंध किया गया है। प्रत्येक 15 दिनों में जल स्तर का आकलन किया जाता है। 'स्टाफ गेज' के माध्यम से जल स्तर मापकर स्रोतों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है, ताकि जहां पानी कम हो, वहां तुरंत कार्रवाई की जा सके।सभी जल स्रोतों की जियो-टैगिंग की गई है, जिससे मुख्यालय से भी इनकी स्थिति पर सटीक नजर रखी जा सके।वन्यजीवों को केवल पानी ही नहीं, बल्कि 'सुरक्षित पानी' मिले, इसके लिए नियमित अंतराल पर pH मान और TDS (Total Dissolved Solids) का परीक्षण किया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि पानी वन्यजीवों के स्वास्थ्य के अनुकूल हो। जिन दुर्गम क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत सूख गए हैं, वहां विभाग द्वारा टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है।वन्यजीवों के समग्र स्वास्थ्य और उनकी खनिज आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जल स्रोतों के पास रणनीतिक रूप से 'साल्ट लिक' (Salt Licks) बनाए गए हैं। इससे जानवरों को पानी के साथ-साथ आवश्यक मिनरल्स भी एक ही स्थान पर मिल रहे हैं, जो गर्मी के तनाव (Heat Stress) को कम करने में सहायक है।वनमंडलाधिकारी ने कहा कि एक ऐसी जवाबदेह प्रणाली विकसित की है जो केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक समाधान प्रदान करती है। लगातार निगरानी और वैज्ञानिक डेटा के कारण हम जल स्तर गिरने से पहले ही वैकल्पिक व्यवस्था करने में सक्षम हैं। यह मॉडल भविष्य के वन्यजीव प्रबंधन के लिए एक मानक स्थापित कर रहा है।"
- रायपुर । प्रदेश में बढ़ती गर्मी और लू के प्रकोप के बीच जिला प्रशासन ने एक पीड़ित परिवार को बड़ी राहत प्रदान की है। प्राकृतिक आपदा के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए कलेक्टर ने लू लगने से जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों के लिए 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत की है।यह सहायता राशि राजस्व पुस्तक परिपत्र (RBC) की धारा 6-4 के निहित प्रावधानों के अंतर्गत प्रदान की गई है। कलेक्टर ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए प्रकरण का त्वरित निराकरण किया और संबंधित तहसीलदार को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सहायता राशि सीधे हितग्राही के बैंक खाते में RTGS के माध्यम से अंतरित की जाय।ज्ञात हो कि मृतक मोजीराम साहू निवासी ग्राम ओड़ान, तहसील पलारी का अत्यधिक गर्मी और लू की चपेट में आने से आकस्मिक मृत्यु हो गई। मृतक की पत्नी दुलारी बाई को यह राशि प्रदान की जाएगी। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे भीषण गर्मी में सावधानी बरतें। साथ ही, राजस्व विभाग को निर्देशित किया गया है कि प्राकृतिक आपदा से जुड़ी जनहानि के मामलों में बिना किसी विलंब के पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान किया जाए।
- -हजारों हितग्राहियों को बड़ी राहत, 31 मई तक ले सकते है योजना का लाभरायपुर । प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना कबीरधाम जिले के आम नागरिकों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। इस योजना के तहत कबीरधाम जिले के कुल 13 हजार 868 उपभोक्ताओं को लाभ मिला है, जिन्हें अब तक 11 करोड़ 75 लाख 38 हजार 570 रुपये की छूट प्रदान की जा चुकी है। यह योजना बीपीएल, निम्नदाब घरेलू एवं कृषि श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए शुरू की गई है, ताकि वे अपने पुराने बकाया बिजली बिलों के बोझ से मुक्त हो सकें। योजना के अंतर्गत सक्रिय और निष्क्रिय दोनों प्रकार के उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता ने बताया कि जिले में योजना का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए विशेष ’समाधान शिविरों’ का भी लगाई गई। विभाग की टीमें न केवल इन शिविरों में उपस्थित रहकर सहायता प्रदान कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में घर-घर जाकर भी लोगों को योजना की जानकारी दे रही हैं। उपभोक्ताओं को पात्रता, छूट की प्रक्रिया और आवेदन संबंधी जानकारी सरल भाषा में समझाई जा रही है। उन्होंने बताया कि 31 मई तक इस योजना का लाभ उठा सकते है। उन्होंने बताया कि जिन उपभोक्ताओं के बिजली बिल 31 मार्च 2023 से पूर्व के बकाया हैं, वे इस योजना का लाभ लेकर अपने बकाया का निपटारा कर सकते हैं। इसके लिए उपभोक्ता अपने नजदीकी बिजली वितरण केंद्र या जोन कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। बकाया बिजली बिलों का समय पर निपटारा कर उपभोक्ता न केवल आर्थिक बोझ से राहत पा सकते हैं, बल्कि भविष्य में निर्बाध बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित कर सकते हैं। साथ ही, यह कदम बिजली कंपनी के सुदृढ़ीकरण में भी सहायक होगा।उन्होंने बताया कि कवर्धा सर्कल के 5 हजार 63 उपभोक्ताओं के 3 करोड़ 75 लाख 97 हजार 706 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसके तहत कृषि के 566 उपभोक्ताओं के 22 लाख 67 हजार 926, एपीएल के 538 उपभोक्ताओं के 48 लाख 62 हजार 408 रूपए और बीपीएल के 3 हजार 959 उपभोक्ताओं के 3 करोड़ 4 लाख 67 हजार 371 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसी तरह पंडरिया सर्कल के 8 हजार 805 उपभोक्ताओं के 7 करोड़ 99 लाख 40 हजार 864 रुपये की छूट प्रदान की गई है। इसके तहत कृषि के 340 उपभोक्ताओं के 27 लाख 35 हजार 629, एपीएल के 1881 उपभोक्ताओं के 1 करोड़ 9 लाख 97 हजार 435 रूपए और बीपीएल के 7 हजार 284 उपभोक्ताओं के 6 करोड़ 62 लाख 7 हजार 801 रुपये की छूट प्रदान की गई है।
- -मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026: संवेदनशील शासन, सशक्त नागरिकरायपुर। जनकल्याणकारी योजनाओं की सफलता का पैमाना वह मुस्कान है, जो किसी गरीब के चेहरे पर तब आती है, जब उसे उम्मीद की नई किरण दिखाई देती है। छत्तीसगढ़ शासन की ‘मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026’ आज प्रदेश के हजारों परिवारों के लिए ऐसी ही एक उम्मीद बनकर उभरी है। धमतरी जिले की कुसुम बाई सतनामी की कहानी इस योजना की संवेदनशीलता और प्रभावशीलता का जीवंत उदाहरण है।धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम चरमुडिया की निवासी श्रीमती कुसुम बाई सतनामी का परिवार पिछले काफी समय से आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा था। सीमित आय और परिवार की अन्य अनिवार्य जरूरतों के बीच बिजली बिल का भुगतान पीछे छूटता गया। देखते ही देखते बकाया राशि का पहाड़ खड़ा हो गया और कुल राशि 37 हज़ार 70 रुपए तक जा पहुँची। भारी भरकम बिल और ऊपर से बढ़ता अधिभार (सरचार्ज) कुसुम बाई के लिए मानसिक और आर्थिक बोझ बन चुका था। जब कुसुम बाई को शासन की नई समाधान योजना की जानकारी मिली, तो उन्होंने बिना देर किए आवेदन किया। विद्युत विभाग के सहयोग से प्रक्रिया इतनी सरल रही कि उन्हें शीघ्र ही योजना का लाभ मिल गया।कुसुम बाई को कुल बकाया राशि: 37 हज़ार 70 रुपए में से 28 हज़ार 640 रुपए की छूट प्रदान की गई।इसमें विशेष लाभ के रूप में अधिभार (सरचार्ज) में 100% की माफी दी गई। इस प्रकार शेष राशि के भुगतान हेतु आसान किस्तों का विकल्प मिलने से बिल पटाने की चिंता से मुक्ति मिली। इस पर श्रीमती कुसुम बाई ने कहा कि बकाया बिल को लेकर मैं हमेशा चिंता में रहती थी। समझ नहीं आ रहा था कि इतनी बड़ी राशि कहाँ से लाऊंगी। लेकिन इस योजना ने मेरा 28 हज़ार रुपए से ज्यादा का बोझ कम कर दिया। अब मैं नियमित रूप से बिल जमा कर पा रही हूँ। मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद।कुसुम बाई केवल एक उदाहरण हैं, धमतरी के कुरूद विकासखंड और पूरे जिले में यह योजना एक जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। अब तक जिले में 4,652 हितग्राहियों की पहचान की गई है, जिनमें से 4,115 उपभोक्ता आवेदन की प्रक्रिया पूर्ण कर चुके हैं। कुल 537 उपभोक्ताओं को अब तक प्रत्यक्ष लाभ मिल चुका है। यह योजना विशेष रूप से राज्य के उन वर्गों को लक्षित कर बनाई गई है जो किन्हीं कारणों से विकास की मुख्यधारा से पीछे छूट गए थे।बी.पी.एल. एवं घरेलू उपभोक्ताओं के आर्थिक बोझ कम करने हेतु विशेष प्रावधान किया गया है। इसी तरह अन्नदाताओं कृषकों को बकाया से मुक्ति दी गई है। इस योजना के तहत मूल बकाया राशि पर 50 से 75 प्रतिशत तक की छूट और सरचार्ज की पूरी माफी दी गई है।मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 केवल एक वित्तीय राहत की योजना नहीं है, बल्कि यह शासन की पारदर्शिता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है। यह योजना लोगों को डिफॉल्टर की श्रेणी से बाहर निकालकर उन्हें एक 'नियमित और सम्मानित उपभोक्ता' के रूप में नई शुरुआत करने का अवसर दे रही है। धमतरी की कुसुम बाई जैसी हजारों माताओं-बहनों के घरों में आज जो बिजली की रोशनी है, उसके पीछे शासन की इसी कल्याणकारी सोच का हाथ है।
- -लिपिकों को लेखा, वित्तीय प्रबंधन और लेखापरीक्षा में सक्षम बनानारायपुर / छत्तीसगढ़ में संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन, लिपिक वर्गीय कर्मचारियों के लिए लेखा प्रशिक्षण आयोजित करता है, जिसका उद्देश्य वित्तीय नियमों और ट्रेजरी कार्यों में दक्षता बढ़ाना है। 3 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके नियमित लिपिक आवेदन कर सकते हैं, जो रायपुर/बिलासपुर में आयोजित आगामी लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026 के लिये 01 मई 2026 से 29 मई 2026 के मध्य आवेदन स्वीकार किये जायेंगें।संचालनालय कोष, लेखा एवं पेंशन के आदेशानुसार सरकारी विभागों के लिपिकों को लेखा संबंधी नियमों, वित्तीय प्रबंधन और लेखापरीक्षा में सक्षम बनाना है। ऐसे लिपिक वर्गीय कर्मचारी जिन्होंने 3 वर्ष की नियमित सेवा पूर्ण कर ली हो। प्राचार्य शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार लेखा प्रशिक्षण सत्र जुलाई 2026 से अक्टूबर 2026 के लिए 3 वर्ष की नियमित सेवा पूरी कर चुके लिपिक वर्गीय कर्मचारी अपने कार्यालय प्रमुख के माध्यम से निर्धारित प्रपत्र में के आवेदन पत्र भेज सकते हैं। इस तिथि के पूर्व एवं पश्चात प्राप्त आवेदन- पत्रों पर विचार नही किया जाएगा। निर्धारित प्रपत्र में आवेदन पत्र ही मान्य होगा।यह आवेदन शासकीय लेखा प्रशिक्षण शाला,नगर घड़ी चौक रायपुर को 29 मई 2026 तक कार्यालयीन समय में प्राप्त हो जाना चाहिए। मानक आवेदन पत्र पर ही आवेदन स्वीकार किये जायेंगें। आवेदन जिस सत्र के प्रशिक्षण हेतु किया गया है, उस सत्र के लिये ही मान्य होगा। पूर्व प्रचलित आवदेन पत्र स्वीकार नही किये जायेगें। आवेदन पत्र के साथ अन्य आवश्यक सुसंगत दस्तावेज संलग्न होना चाहिए। आवेदन का निर्धारित प्रारूप एवं निर्देश रायपुर संभाग के समस्त जिला कोषालयों के सूचना पटल पर अवलोकन किये जा सकते हैं।
- रायपुर /जिला अस्पताल बीजापुर के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया गया है।ग्राम कोरसागुड़ा कोरसागुड़ा, बासागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। जांच में शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है। यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है।शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की। उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं। शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया। इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे। साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. आर. पुजारी एवं सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के मार्गदर्शन में उपचार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस उपलब्धि में कलेक्टर श्री संबित मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन एवं सतत प्रशासनिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में मदद मिली।शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया। उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।यह सफलता दर्शाती है कि अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं और जिला अस्पताल बीजापुर का SNCU क्षेत्रवासियों के लिए आशा का केंद्र बनकर उभर रहा है।
- रायपुर / राज्य शासन द्वारा बीते वर्ष आयोजित सुशासन तिहार के सकारात्मक परिणाम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है, जहाँ प्रशासन की तत्परता दूरस्थ वनांचलों में रहने वाले ग्रामीणों के जीवन में स्वावलंबन का नया अध्याय लिख रही है। इसी कड़ी में बस्तर जिले के सुदूर जनपद पंचायत बास्तानार अंतर्गत ग्राम पंचायत छोटे किलेपाल से एक हृदयस्पर्शी सफलता की कहानी सामने आई है, जिसने शासन की संवेदनशीलता और जनहितैषी दृष्टिकोण को सिद्ध किया है।दंतेवाड़ा जिले की सीमा से लगे इस सुदूर ग्राम छोटे किलेपाल के निवासी श्री सामनाथ ठाकुर और रीता ठाकुर, जो एक ही परिवार के सदस्य हैं, दिव्यांग होने के कारण लंबे समय से गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे। शारीरिक अक्षमता के चलते उन्हें अपनी हर छोटी-बड़ी आवश्यकता और दैनिक वस्तुओं के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर पूरी तरह आश्रित होना पड़ता था। इस निर्भरता के कारण न केवल उनका आत्मसम्मान प्रभावित हो रहा था, बल्कि आर्थिक तंगी के दौर में वे परिवार पर भी एक अतिरिक्त बोझ महसूस कर रहे थे। वर्षों से अपनी विवशता को ही नियति मान चुके इन ग्रामीणों के लिए पिछले वर्ष आयोजित सुशासन तिहार आशा की एक नई किरण बनकर आया।शिविर के दौरान जब इन दिव्यांगों ने पेंशन योजना के लाभ हेतु अपनी मांग रखी, तो प्रशासन ने इसे महज एक औपचारिक आवेदन के रूप में न लेते हुए सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की। जनपद पंचायत बास्तानार के अधिकारियों ने तत्काल सक्रियता दिखाई और ग्राम पंचायत के समन्वय से उनके आधार कार्ड, बैंक पासबुक और राशन कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेजों का संकलन कर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की। पात्र पाए जाने पर उन्हें तत्काल पेंशन की स्वीकृति प्रदान की गई, जिसकी जानकारी मिलते ही पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
- रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए भूमि और राजस्व संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 'सुशासन' के संकल्प को साकार करते हुए, अब नागरिकों को खसरा-बी-1, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण आम आदमी के समय और श्रम की बचत सुनिश्चित करेगा। यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है।राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तकनीक के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। 'डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम' (DILMP) के माध्यम से हम राज्य को अत्याधुनिक राजस्व तंत्र प्रदान कर रहे हैं, जिससे नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का विवरण प्राप्त कर सकें। राजस्व विभाग द्वारा दी जा रही प्रमुख ऑनलाइन सुविधाओं में नागरिक अब निःशुल्क खसरा और बी-1 की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति राज्य के किसी भी कोने से कभी भी बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा या बी-1 में किसी भी संशोधन या बदलाव की सूचना सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम SMS अलर्ट के माध्यम से प्राप्त होती है, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में सहायक है।कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे खरीद-बिक्री के समय पारदर्शिता बनी रहती है। अब नामांतरण के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ता। उप पंजीयक कार्यालय में पंजीयन होते ही स्वतः नामांतरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी तरह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक कहीं से भी अपने स्मार्टफोन से जमीन का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकते हैं। राजस्व विभाग के इन नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य राजस्व प्रशासन में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है।अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित राजस्व प्रशासन DILMP के तहत राज्य की सभी तहसीलों में 'मॉडर्न रिकॉर्ड रूम' स्थापित कर राजस्व प्रशासन को पूरी तरह अत्याधुनिक और पेपरलेस बनाना है। इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और समय की बचत करना है। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILMP) वर्ष 2008-09 में शुरू हुई। यह केंद्र-प्रवर्तित योजना 1 अप्रैल 2016 से पूर्णतः केंद्रीय योजना के रूप में संचालित है। वर्तमान में राज्य के 20 हज़ार 286 गांवों के खसरा और 19 हज़ार 694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसके साथ ही, 'प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना' के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कर उन्हें अत्याधुनिक बनाया गया है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे काम में गति और सटीकता आई है।राज्य के 1 हज़ार 89 ग्रामों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रथम चरण में 717 गांवों का और 454 गांवों का द्वितीय चरण में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही 233 गांवों का डेटा 'भुईयां' एवं 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है।इसी तरह राज्य की 50 तहसीलों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर राजस्व सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 252 में से 172 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हैं, जिनमें से 155 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के राजस्व कार्यालयों का डिजिटलीकरण एवं इंटरकनेक्टिविटी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को ऑनलाइन कर उन्हें तहसील कार्यालयों के साथ इंटरनेट के माध्यम से जोड़ दिया गया है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत राज्य के सभी राजस्व ग्रामों के खसरा नक्शों का जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 19,694 गांवों में से 18,959 गांवों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है।इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और सुगमता आई है, जो निश्चित रूप से राज्य के चहुंमुखी विकास में सहायक सिद्ध होगी।
- -विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल- पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीररायपुर। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है।इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है।निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं।प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है। इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।
- -धनेश्वरी बनीं रोजगार प्रदाता, भगवती बनीं ‘लखपति दीदी’—प्रदेशभर में दिख रहा सशक्तिकरण का असररायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में व्यापक बदलाव का माध्यम बन रही है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेशभर में महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि स्वरोजगार के जरिए दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रही हैं। सरगुजा जिले की धनेश्वरी साहू और भगवती सिंह इसकी प्रेरक उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने परिश्रम और योजना के सहयोग से सफलता की नई मिसाल कायम की है।सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम गुमगराकला की धनेश्वरी साहू ने ‘जय संतोषी मां स्वयं सहायता समूह’ से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी। समूह के माध्यम से प्राप्त 1 लाख रुपये के ऋण से उन्होंने एक एकड़ भूमि पर आधुनिक तरीके से खीरे की खेती शुरू की। मेहनत और तकनीकी मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उन्हें अच्छी पैदावार मिल रही है, जिसे वे अंबिकापुर मंडी में बेचकर बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।आज धनेश्वरी न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अपने खेत में 2 से 4 स्थानीय मजदूरों को रोजगार भी उपलब्ध करा रही हैं। उनका यह प्रयास उन्हें एक सफल महिला उद्यमी और रोजगार प्रदाता के रूप में स्थापित कर रहा है।ग्राम पंचायत गुमगरा खुर्द की भगवती सिंह ने ‘रेखा महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी। प्रारंभ में 15 हजार रुपये की सहायता से सब्जी की खेती शुरू की और बाद में 30 हजार रुपये का निवेश कर ईंट निर्माण का कार्य आरंभ किया। उन्होंने लगभग 50 हजार ईंटों का निर्माण कर अच्छा लाभ अर्जित किया।इसके बाद भगवती ने 50 हजार रुपये का बैंक ऋण लेकर किराना और कपड़े की दुकान शुरू की। विभिन्न आय स्रोतों के चलते उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई और वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जाने लगीं। आज वे अपने परिवार के लिए पक्का घर भी बनवा चुकी हैं और बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं।दोनों महिलाओं का कहना है कि ‘बिहान’ योजना से उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला, बल्कि आत्मविश्वास और समाज में पहचान भी मिली है। वे अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं को देते हुए आभार व्यक्त करती हैं।प्रदेश में ‘बिहान’ योजना के माध्यम से हजारों महिलाएं आज स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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सफलता की कहानी
रायपुर / पलाश (टेसू या ढाक) का फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और स्वास्थ्य के लिए एक बहुमूल्य संसाधन है। इसके नारंगी-लाल फूलों को जंगल की आग भी कहा जाता है, जो वसंत ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाते हैं। पलाश के फूल, बीज और गोंद (कमरकस) आयुर्वेद में चर्म रोग, पेट के कीड़े, डायबिटीज, और यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रयुक्त होते हैं। इन औषधीय उत्पादों को बेचकर भी ग्रामीण अपनी आय बढ़ाते हैं।पलाश फूल (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा), जिसे टेसू, ढाक या “जंगल की आग” (फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट) भी कहा जाता है, भारत का एक महत्वपूर्ण औषधीय और सांस्कृतिक फूल है। बसंत ऋतु में खिलने वाले इसके आकर्षक नारंगी फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि औषधीय उपयोग, प्राकृतिक होली रंग और त्वचा की देखभाल में भी काम आते हैं। छत्तीसगढ़ के वन मण्डल कटघोरा में पलाश के वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, कटघोरा, चौतमा और पाली जैसे क्षेत्रों में इसकी भरपूर उपलब्धता है। यहां के आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए लघु वनोपज संग्रहण आजीविका का प्रमुख साधन है। पलाश फूल का संग्रहण मुख्यत मार्च-अप्रैल माह में किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया। यह दर संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में मददगार साबित हुई है।वर्ष 2022-23 में 116 संग्राहकों से 402 क्विंटल, वर्ष 2023-24 में 40 संग्राहकों से 58 क्विंटल,वर्ष 2024-25 में 107 संग्राहकों से 147 क्विंटल और वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों से 76 क्विंटल संग्रहण किया गया इसके साथ ही साथ पलाश के मूल्य में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में 900 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला पलाश वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके बाद संघ मुख्यालय द्वारा इसे 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जिससे संग्राहकों को बेहतर लाभ मिला।वन धन विकास केंद्र पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसियां और मानिकपुर के माध्यम से संग्रहण कार्य को संगठित रूप दिया गया है। इन केंद्रों ने स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, संग्रहण और विपणन में सहयोग प्रदान किया। वर्ष 2025-26 में पलाश फूल संग्रहण करने वाले 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सुधार आया। यह पहल शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें लघु वनोपज के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं।पलाश के फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इन्हें पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इन्हें तिजोरी में रखने से धन-समृद्धि बढ़ती है। पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने शादियों और अन्य आयोजनों में इको.फ्रेंडली विकल्प के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं, जो ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन है। आगामी सीजन में कटघोरा वनमण्डल के सभी समितियों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को पलाश फूल संग्रहण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल आजीविका के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वन संसाधनों का सतत और समुचित उपयोग भी सुनिश्चित होगा। पलाश सिर्फ फूलों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता,आजीविका और समृद्धि की नई उड़ान की कहानी है।पलाश के फूलों का सबसे बड़ा व्यावसायिक उपयोग होली के लिए प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग बनाने में होता है। आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं पलाश ब्रांड के माध्यम से इन फूलों से इको-फ्रेंडली रंग तैयार कर अपनी आजीविका बढ़ा रही हैं। - -छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक--डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर उप संचालक (जनसंपर्क)रायपुर। हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है।
- -स्कूल के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर गर्मियों के लिए वैकल्पिक रनिंग वाटर की व्यवस्था की जाएगी, सहायक अभियंता को व्यवस्था के निर्देश-कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में होती है जल की आपूर्ति, ग्रीष्म ऋतु के कारण अभी नहीं भर पा रही टंकीरायपुर. । बस्तर जिले के पिपलावंड ग्राम पंचायत के जामगुड़ा बसाहट में अभी 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ग्रीष्म काल में रनिंग वाटर की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्कूल परिसर के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर 2 हॉर्स-पॉवर का पंप लगाकर स्कूल के साथ ही जामगुड़ा बसाहट में कनेक्शन के निर्देश सहायक अभियंता को दिए हैं।जल जीवन मिशन के अंतर्गत कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में पाइपलाइन से जल की आपूर्ति होती है। पहले से संचालित समूह जलप्रदाय योजना में रेट्रोफिटिंग के माध्यम से पिपलावंड में जल आपूर्ति की व्यवस्था बनाई गई है। रेट्रोफिटिंग योजना के तहत यहां 70 लाख 29 हजार रुपए की लागत से 3530 मीटर पाइपलाइन बिछाकर और दो सोलर जलापूर्ति सिस्टम स्थापित कर 237 एफ.एच.टी.सी. (Functional Household Tap Connection) प्रदान किए गए हैं, जिनके काम पूर्ण किए जा चुके हैं। पिपलावण्ड कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना का अंतिम छोर का गांव है, जिसके कारण ग्रीष्म काल में दो महीने टंकी नहीं भरने के कारण पेयजल व्यवस्था बाधित रहती है।लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जगदलपुर परिक्षेत्र के अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने आज पिपलावंड एवं जामगुड़ा का दौरा कर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाएं देखीं तथा मैदानी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पेयजल के लिए एक हजार की आबादी वाले पिपलावंड में अभी 14 कार्यरत हैंडपंप, दो पॉवर पंप और दो सोलर पंप हैं। वहीं 300 जनसंख्या वाले गांव के जामगुड़ा बसाहट में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है।अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने गांव पहुंचकर सरपंच श्री केशवराम बघेल और दुलाय कश्यप से मिलकर पेयजल व्यवस्था की जानकारी ली। दुलाय कश्यप ने बताया कि अमूमन रोड के पार बसे रिश्तेदार द्वारा लूज पाइप से पानी उनके घर तक पहुंचाया जाता है। वह कभी-कभी रोड पार कर पानी लाने जाती है। उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग से उसे बैटरीचलित ट्राइसिकल मिली है। इसका उपयोग कर वह पेयजल एवं निस्तारी के लिए अपने रिश्तेदार के निजी नलकूप या 200 मीटर दूर स्कूल के पॉवर पम्प से पानी लाती थी। उनका ट्राइसिकल पिछले दो माह से खराब है। समाज कल्याण विभाग और सरपंच को उन्होंने यह बात बताई है, परंतु सुधार नहीं हो पाने के कारण परेशानी हो रही है।
- -महिला पत्रकारों ने नारी शक्ति वंदन के संकल्प को महिला सशक्तिकरण की ओर बताया ऐतिहासिक कदमरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित कार्यालय कक्ष में पत्रकार श्रीमती नीरा साहू द्वारा गुजरात यात्रा पर लिखी गई पुस्तक ‘अविस्मरणीय यात्रा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीमती साहू को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र एवं शासकीय संकल्प के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा-वृत्तांत पर्यटन प्रेमियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होगा।इस अवसर पर सुश्री निशा द्विवेदी, सुश्री चित्रा पटेल, सुश्री लवलीना शर्मा, जनसंपर्क विभाग की उप संचालक डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक सुश्री संगीता लकड़ा एवं सुश्री आमना खातून सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
- रायपुर । दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना भूमिहीन परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है, जिससे उनकी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं को भी मजबूती मिल रही है। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कन्हाईबंद की निवासी श्रीमती सावित्री यादव इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में उनका जीवन अत्यंत कठिन परिस्थितियों में व्यतीत हो रहा था। भूमिहीन होने के कारण उनके पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था और वे पूर्णतः मजदूरी कार्य पर निर्भर थीं। सीमित आय के कारण परिवार का भरण-पोषण एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती था।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण हेतु प्रभावी एवं संवेदनशील पहल की जा रही है। साथ ही श्रमवीरों एवं भूमिहीन कृषि मजदूरों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित योजनाएं उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता था, लेकिन योजना के तहत प्राप्त होने वाली वार्षिक सहायता राशि ने उनके जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन लाया है। अब वे इस राशि का उपयोग घरेलू खर्चों एवं अन्य आवश्यक जरूरतों की पूर्ति में कर रही हैं, जिससे उन्हें काफी राहत मिली है। श्रीमती सावित्री यादव ने कहा कि यह योजना उनके जैसे भूमिहीन परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि उनके जीवन में आत्मविश्वास एवं सुरक्षा की भावना भी विकसित की है।
- रायपुर।छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित वर्ष 2026 के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम में रायपुर जिले के प्रयास आवासीय विद्यालयों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इन विद्यालयों के कुल 8 विद्यार्थियों ने राज्य की टॉप-10 मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया, जिससे जिले का नाम गौरवान्वित हुआ है।प्रमुख रूप से दीपांशि बौद्ध ने कक्षा 10वीं में प्रदेश में द्वितीय स्थान हासिल कर विशेष उपलब्धि मेरिट सूची में स्थान दर्ज की। इसके अलावा अन्य सफल विद्यार्थियों में आदित्य बसु, विशाल यादव, कोमल कुमार पटेल, दिव्यांश साहू, तोषण दास साहू, हिमांशु कश्यप तथा भारती जैसे नाम शामिल हैं। रायपुर जिले में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालय सड्डू (बालक), गुढ़ियारी (बालिका), नवीन गुढ़ियारी (अनुसूचित जाति बालिका) एवं ओबीसी सड्डू (बालक) के विद्यार्थियों ने अनुशासन, मेहनत और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन के बल पर यह सफलता हासिल की है। इन परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रयास विद्यालय राज्य में शैक्षणिक उत्कृष्टता के मजबूत केंद्र बन चुके हैं और आने वाले समय में भी इसी प्रकार बेहतर परिणाम देते रहेंगे।
- -22 पावर प्लांटों के अधिकारियों की बैठक में सुरक्षा मानकों, प्रशिक्षण और इमरजेंसी प्लान की गहन समीक्षारायपुर । राज्य में औद्योगिक दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के उद्देश्य से संचालनालय, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, श्रम विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा नवा रायपुर स्थित इन्द्रावती भवन में पावर प्लांट प्रबंधन के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बुधवार 29 अप्रैल को प्रातः 11 बजे कॉन्फ्रेंस हॉल क्रमांक-2, तृतीय तल में आयोजित इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित 22 पावर प्लांटों के यूनिट हेड एवं सेफ्टी ऑफिसर उपस्थित रहे।बैठक में विगत वर्षों में घटित औद्योगिक दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस रणनीति पर चर्चा की गई। इस दौरान कारखानों द्वारा अपनाई जा रही मानक संचालन प्रक्रिया, सुरक्षित कार्य पद्धति, जोखिम प्रबंधन उपायों और कार्यस्थल पर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने के प्रयासों की विस्तार से समीक्षा की गई।संचालनालय के अधिकारियों ने विशेष रूप से श्रमिकों को प्रदान किए जाने वाले सुरक्षा प्रशिक्षण, नियमित सुपरविजन, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनके प्रभावी उपयोग पर जोर दिया। साथ ही प्रत्येक पावर प्लांट में ऑन-साइट इमरजेंसी प्लान की तैयारी, उसकी समय-समय पर समीक्षा तथा मॉकड्रिल के आयोजन की स्थिति का भी आंकलन किया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।प्रभारी संचालक ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि औद्योगिक सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी कारखाना प्रबंधन को निर्देशित किया कि वे निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। निर्देशों की अवहेलना करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।उन्होंने यह भी कहा कि “शून्य दुर्घटना” केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई की जिम्मेदारी है। इसके लिए प्रबंधन और श्रमिकों के बीच बेहतर समन्वय, सतत प्रशिक्षण और सुरक्षा के प्रति जागरूकता आवश्यक है। बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि सुरक्षा ऑडिट को नियमित बनाया जाए और संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। बैठक के अंत में सभी पावर प्लांट प्रबंधन से अपेक्षा की गई कि वे सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्यस्थलों पर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें, ताकि श्रमिकों के जीवन की रक्षा के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन भी निर्बाध रूप से जारी रह सके।




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