- Home
- देश
-
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु बुधवार, 15 जुलाई को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार ‘सौश्रुतम् 2026’ का उद्घाटन करेंगी। आयुष मंत्रालय के तहत आयोजित यह सेमिनार 15 से 17 जुलाई तक चलेगा, जबकि 14 जुलाई को पूर्व-कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम शल्य चिकित्सा के जनक आचार्य सुश्रुत की जयंती के अवसर पर आयोजित हो रहा है।
सेमिनार में आयुर्वेद और आधुनिक शल्य चिकित्सा के एकीकरण पर देश-विदेश के विशेषज्ञ विचार-विमर्श करेंगे। कार्यक्रम के दौरान एनसीआईएसएम द्वारा तैयार “आयुर्वेद महिला स्नातकों के पेशेवर करियर का मूल्यांकन” विषयक राष्ट्रीय अध्ययन भी जारी किया जाएगा। इसके अलावा, 14.5 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित अत्याधुनिक 3-टेस्ला हाई-फील्ड एमआरआई प्रणाली का उद्घाटन होगा। इस प्रणाली में एआई-सक्षम वर्कफ्लो, बायोमेट्रिक्स और उन्नत इमेजिंग सुविधाएं उपलब्ध होंगी।चर्चा के प्रमुख विषयतीन दिवसीय कार्यक्रम में मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चाएं, कार्यशालाएं और वैज्ञानिक शोध-पत्र प्रस्तुतियां होंगी। मुख्य विषयों में शामिल हैं:– मलाशय रोग विज्ञान– पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा– एकीकृत ऑन्कोलॉजी– चिकित्सा-कानूनी मुद्दे– सर्जरी में बौद्धिक संपदा– घाव प्रबंधन, अग्निकर्म, क्षारसूत्र और मर्म चिकित्साअंतरराष्ट्रीय भागीदारीसेमिनार में थाईलैंड, इजराइल, ऑस्ट्रिया, यूनाइटेड किंगडम, श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, ग्रीस और भारत के प्रमुख सर्जन, शिक्षाविद और शोधकर्ता भाग लेंगे। उद्घाटन समारोह में केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। यह आयोजन आयुर्वेद की प्राचीन शल्य विद्या को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। कारगिल विजय दिवस 2026 के राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक तक आयोजित 13 दिवसीय ‘शौर्य विजय यात्रा’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस यात्रा में सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षा बलों के 28 बाइक सवार अपने परिवारों के साथ 1,900 किलोमीटर की दूरी तय कर 1999 के कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों के साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। यात्रा का आदर्श वाक्य ‘एक सवारी, एक राष्ट्र, एक सलाम’ रखा गया है।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि 1999 की विजय भारत के उस अटूट संकल्प का प्रतीक है कि देश अपनी भूमि, पहचान और सम्मान पर किसी भी शत्रुतापूर्ण दुस्साहस का पूरी शक्ति से जवाब देगा। उन्होंने कहा कि लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई और माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक के कठिन मौसम में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे से हर चोटी, पहाड़ी और बंकर को वापस हासिल किया और तिरंगे का गौरव कायम रखा। रक्षा मंत्री ने परम वीर चक्र से सम्मानित कप्तान विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) संजय कुमार (सेवानिवृत्त) के योगदान को याद करते हुए कहा कि ये सभी वीर सैनिक देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं और आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। यात्रा के दौरान बाइक सवार चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेजांग ला युद्ध स्मारक और लेह युद्ध स्मारक सहित कई प्रमुख सैन्य स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके अलावा वे वीरांगनाओं से मुलाकात कर उनके साहस और योगदान का सम्मान भी करेंगे। यह अभियान 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास में संपन्न होगा।इस अभियान के दौरान बाइक सवार राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी से भरा कलश अपने साथ लेकर जाएंगे, जिसे कारगिल में शहीदों की स्मृति में अर्पित किया जाएगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक और कारगिल की मिट्टी का मिलन वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और देश के वीर नायकों की अमर गाथा का प्रतीक बनेगा।रक्षा मंत्री ने कहा कि शौर्य विजय यात्रा देश के विभिन्न हिस्सों से आए सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और नागरिकों को एक सूत्र में बांधती है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाएं, परंपराएं और पृष्ठभूमियां होने के बावजूद एक तिरंगा, एक राष्ट्र और वीरों के प्रति साझा सम्मान ही भारत की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान विशेषकर युवाओं में देशभक्ति की भावना को मजबूत करेगा और उन्हें कर्तव्य, सम्मान तथा नि:स्वार्थ सेवा के मूल्यों के प्रति प्रेरित करेगा। -
नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अग्निवीरों को ट्रेनिंग देने की जानकारी साझा की है। भारतीय सेना की ओर से कहा गया कि हर बाधा को पार करना ऑपरेशनल एक्सीलेंस (काम में बेहतरीन प्रदर्शन) की दिशा में एक कदम है। डोगरा रेजिमेंटल सेंटर में अग्निवीरों को कठिन बाधा-पार प्रशिक्षण (ऑब्सटेकल ट्रेनिंग) से गुजरना पड़ता है। इससे उनमें सहनशक्ति, फुर्ती, मानसिक मजबूती और दबाव में काम करने का आत्मविश्वास पैदा होता है।
सेना की ओर से कहा गया कि युद्ध के मैदान की शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का अनुभव कराने के लिए डिजाइन की गई यह ट्रेनिंग तेजी से फैसला लेने, टीमवर्क और मुश्किल हालात में डटे रहने की क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही, यह मिलिट्री ऑपरेशन के लिए जरूरी अनुशासन और लड़ने का जज्बा भी पैदा करती है।सेना ने कहा कि हकीकत के करीब, चरणबद्ध और मिशन पर केंद्रित ट्रेनिंग के जरिए, हेडक्वार्टर मध्य भारत एरिया प्रेरित युवा रंगरूटों को ऐसे आत्मविश्वासी और युद्ध के लिए तैयार सैनिकों में बदल रहा है, जो आधुनिक युद्ध के मैदान की चुनौतियों का हिम्मत और दृढ़ संकल्प के साथ सामना कर सकें। आज पार की गई हर बाधा कल के लिए एक योद्धा को और मजबूत बनाती है।वहीं, भारतीय सेना ने शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स के ‘स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स’ के बारे में जानकारी दी। सेना की ओर से कहा गया कि मिशन की सफलता की शुरुआत जबरदस्त तैयारी से होती है। शत्रुजीत ब्रिगेड के पैराट्रूपर्स ने हाल ही में एक गहन ‘स्पेशल हेलीबोर्न ऑपरेशन्स’ (एसएचबीओ) अभ्यास किया। इसमें उन्होंने ज्यादा जोखिम वाले आतंकवाद-विरोधी मिशनों के लिए अपनी ऑपरेशनल तैयारी को बेहतर बनाने के मकसद से, शहरी इलाके में बंधकों को छुड़ाने जैसे मुश्किल हालात का अभ्यास किया।सेना ने कहा कि इस अभ्यास में टैक्टिकल हेलीकॉप्टर इंसर्शन (जैसे स्लिदरिंग, एसटीआईई और लो-होवर ड्रिल) के जरिए जमीन और हवा के बीच बेहतरीन तालमेल दिखाया गया। इसके बाद छत पर सटीक तरीके से उतरने और कमरे के अंदर तेजी से और सटीक कार्रवाई (सीक्यूबी) करने का अभ्यास किया गया। सेना ने बताया कि हर चरण में असली ऑपरेशन जैसे हालात में तेजी, तालमेल, सटीकता और मजबूत टीमवर्क की जरूरत थी। ऐसे में असल और मिशन पर केंद्रित ट्रेनिंग से तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता मजबूत होती है और लड़ने की कुशलता बढ़ती है। इससे यह भी पक्का होता है कि भारतीय सेना के पैराट्रूपर्स किसी भी आपात स्थिति में तेजी और असरदार ढंग से कार्रवाई करने के लिए तैयार रहें। कड़ी ट्रेनिंग, सटीक हमला, मिशन पूरा करना। - लखनऊ. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोमवार को कहा कि अगले दो वर्षों में उत्तर प्रदेश में पांच लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं पूरी की जाएंगी। उन्होंने राज्य के लिए 50,000-60,000 करोड़ रुपये की नयी सड़क परियोजनाओं की भी घोषणा की।गडकरी ने 4,850 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली तीन राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आश्वस्त करता हूं कि आज अधिकारियों के साथ हुई बैठक में जिन 50,000-60,000 करोड़ रुपये की नयी परियोजनाओं पर चर्चा हुई, उन्हें मंजूरी दे दी गई है। इसके अलावा अगले दो वर्षों में उत्तर प्रदेश में पांच लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं पूरी कर ली जाएंगी।'' उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा आर्थिक विकास की आधारशिला है और बिजली, परिवहन तथा संचार निवेश आकर्षित करने तथा व्यापार एवं उद्योग को बढ़ावा देने के प्रमुख स्तंभ हैं। गडकरी ने कहा, ''जहां अच्छा बुनियादी ढांचा होता है, वहां व्यापार, कारोबार और उद्योग फलते-फूलते हैं। पूंजी निवेश बढ़ता है, रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और गरीबी, भूख तथा बेरोजगारी में कमी आती है।'' उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने से पहले उत्तर प्रदेश का विकास अपेक्षित गति से नहीं हो रहा था, लेकिन उसके बाद इसमें तेजी आई है। गडकरी ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहने के दौरान अपने कार्यालय में प्रदर्शित अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी के एक कथन का उल्लेख करते हुए कहा, ''अमेरिका की सड़कें अच्छी इसलिए नहीं हैं कि अमेरिका समृद्ध है, बल्कि अमेरिका समृद्ध इसलिए है क्योंकि वहां की सड़कें अच्छी हैं।'' उन्होंने कहा, ''45 वर्ष के अपने सार्वजनिक जीवन में मैंने कभी झूठे वादे नहीं किए। यदि कोई परियोजना संभव नहीं होती, तो मैं सार्वजनिक रूप से यह बात कह देता हूं।'' उत्तर प्रदेश को 'भारत का हृदय' बताते हुए गडकरी ने कहा कि देश का विकास राज्य की प्रगति से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, ''यदि उत्तर प्रदेश समृद्ध होगा, प्रति व्यक्ति आय बढ़ेगी, निर्यात में वृद्धि होगी और सड़क अवसंरचना मजबूत होगी तो भारत की विकास दर भी तेज होगी।'' केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यद्यपि मेट्रो परियोजनाएं उनके मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं, फिर भी सरकार रोपवे आधारित प्रणालियों और एलिवेटेड इलेक्ट्रिक बसों सहित विद्युत आधारित जन परिवहन के अन्य विकल्पों पर काम कर रही है। उन्होंने लखनऊ-सीतापुर राजमार्ग को लगभग 1,200 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन का बनाने की घोषणा करते हुए कहा कि इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय दो घंटे से घटकर लगभग 50 मिनट रह जाएगा। गडकरी ने कहा कि उन्होंने कानपुर से लखनऊ तक का सफर मात्र 22 मिनट में पूरा किया।लखनऊ से सांसद एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले लखनऊ के लिए सड़क परियोजनाओं की मांग रखी, इसलिए उन्हें यह परियोजनाएं मिल सकीं। उन्होंने कहा, ''मैं सबसे पहले बोलने के लिए इसलिए खड़ा हुआ, क्योंकि मुझे लगा कि यदि बाद में बोलूंगा तो शायद लखनऊ के लिए इन परियोजनाओं की मांग करने का अवसर नहीं मिलेगा। इसी कारण मैंने पहले बोलने का आग्रह किया।'' सिंह ने कहा कि कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की मांग लंबे समय से की जा रही थी। ''जैसे ही मैंने नितिन गडकरी जी के समक्ष यह प्रस्ताव रखा, उन्होंने बिना देर किए इसे मंजूरी दे दी।'' उन्होंने बताया कि उन्होंने लखनऊ हवाई अड्डे से शहीद पथ होते हुए आउटर रिंग रोड तक 23 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण का भी प्रस्ताव रखा था, जिसे तत्काल मंजूरी मिल गई। सिंह ने कहा, ''शहीद पथ का निर्माण उस समय शुरू हुआ था, जब अटल जी प्रधानमंत्री थे और मैं सड़क परिवहन मंत्री था। उसके शिलान्यास समारोह में भी मैं मौजूद था। आज यह लखनऊ की जीवनरेखा बन चुका है। यदि यह नहीं होता तो शहर में यातायात का दबाव कितना बढ़ जाता, इसकी कल्पना की जा सकती है।'' उन्होंने कहा कि जिले में एलिवेटेड सड़क के ऊपर मेट्रो परियोजना को भी मंजूरी मिल गई है।रक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने विकास परियोजनाओं को मंजूरी देने में कभी हिचकिचाहट नहीं दिखाई। उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई की स्थापना का श्रेय भी मुख्यमंत्री को दिया। सिंह ने कहा, ''ब्रह्मोस मिसाइल इकाई यहां पहले ही स्थापित हो चुकी है। वह दिन दूर नहीं, जब लखनऊ के आसपास कई और बड़े उद्योग भी स्थापित होंगे।''
-
कोलकाता. पश्चिम बंगाल सरकार इस साल 16 जुलाई को होने वाले रथ यात्रा उत्सव से पहले राज्य की 60 रथ यात्रा समितियों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को यह घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य राज्य की धार्मिक विरासत को संरक्षित करना है।
उन्होंने कहा, ''कोलकाता में हर साल कई रथ यात्रा समारोह आयोजित किए जाते हैं। लेकिन पिछली सरकार केवल पुलिसकर्मियों की तैनाती करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर देती थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर हमारी सरकार ने इस वर्ष की रथ यात्रा में सक्रिय रूप से भाग लेने का निर्णय लिया है। सरकार ने 60 प्रतिष्ठित रथ यात्रा समितियों को पांच-पांच लाख रुपये का अनुदान देने का फैसला किया है। साथ ही, राज्य भर में लगने वाले 75 पारंपरिक रथ यात्रा मेलों में श्रद्धालुओं की सहायता के लिए सेवा केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे।'' उन्होंने कहा कि ये सेवा केंद्र उत्सव के दौरान मेलों में आने वाले श्रद्धालुओं को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएंगे। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि लाभार्थियों की सूची पहली बार तैयार की गई है। उन्होंने अपील की कि यदि कोई योग्य समिति छूट जाए तो कृपया सहयोग और समझदारी का परिचय दें। उन्होंने कहा, ''यदि इस वर्ष की सूची में कोई त्रुटि हो, तो मैं सभी से क्षमाशील दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध करता हूं। हम आने वाले वर्षों में त्रुटिहीन सूची तैयार करेंगे। यह पहल आगे बढ़ेगी। आज लगाया गया पौधा कल एक विशाल वृक्ष बनेगा और अंततः एक परंपरा बन जाएगा।'' मुख्यमंत्री वार्षिक रथ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्य सचिवालय में आयोजित समन्वय बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आगामी 'श्रावण मेले' के बारे में भी जानकारी देते हुए कहा कि इस दौरान श्रद्धालुओं के मार्गों पर निश्चित अंतराल पर ऐसे ही सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा, ''सरकार शेउड़ाफुलि से तारकेश्वर तक हर पांच किलोमीटर पर 'सेवा केंद्र' स्थापित कर रही है। श्रावण मेले के दौरान भी मार्गों पर निश्चित अंतरालों पर 'सेवा केंद्र' स्थापित किए जाएंगे ताकि कंधों पर पवित्र जल लेकर चलने वाले लोग आवश्यकता पड़ने पर आवश्यक सेवाओं का लाभ उठा सकें।'' उन्होंने कहा, ''हम तारकेश्वर धाम में 15 करोड़ रुपये के विकास कार्य करवा रहे हैं।''
सोमवार को हुई समन्वय बैठक 16 जुलाई को होने वाली रथ यात्रा के मद्देनजर व्यवस्थाओं की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। शुभेंदु अधिकारी ने आगे आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने त्योहारों में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं की थीं। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीन बड़े तीर्थ स्थलों - तारकेश्वर, जलपाईगुड़ी जिले में जलपेश मंदिर और भूटान सीमा के पास जयंती इलाके में एक मंदिर को चुना है, जहां तीर्थयात्रियों के लिए खास सुविधाएं दी जाएँगी। उन्होंने कहा कि इन जगहों पर पुलिस सहायता शिविर, अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र, पीने का पानी, ओआरएस और आराम करने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अधिकारी ने कहा, ''दूसरे राज्यों में मैंने देखा है कि सरकारें ऐसी धार्मिक परंपराओं का सक्रिय रूप से समर्थन करती हैं। पश्चिम बंगाल को सालों से ऐसा समर्थन नहीं मिला। यह सरकार वह समर्थन देगी।'' उन्होंने कहा कि अगर मौसम ठीक रहा, तो सावन के पवित्र महीने में हर सोमवार को तीर्थयात्रियों पर हेलीकॉप्टर से गुलाब की पंखुड़ियां बरसाई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह मंगलवार को तारकेश्वर में मौजूद रहेंगे।
उन्होंने कहा कि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाली जगहों को संरक्षित करने की सरकारी कोशिशों के तहत राज्य के बजट में एक ''तीर्थ सर्किट'' विकसित करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत सेवाश्रम संघ द्वारा चलाए जा रहे अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के तहत लाया गया है। अधिकारी ने यह भी घोषणा की कि सरकार ने स्वामी विवेकानंद की जन्मस्थली 'सिमला स्ट्रीट' के लिए पांच करोड़ रुपये के स्थायी कोष को मंजूरी दी है। -
कोलकाता. पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार ने संगठित अपराध और हिंसक विरोध-प्रदर्शनों पर अंकुश लगाने के मकसद से सोमवार को दो विवादित कानून लागू कर दिए, जिनके तहत अधिकारियों को बिना मुकदमे के संदिग्धों को हिरासत में रखने और दंगाइयों की संपत्ति कुर्क करके नुकसान की भरपाई करने का अधिकार दिया गया है। पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026, जिसे 'गुंडा रोधी कानून' भी कहा जाता है तथा पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 सोमवार से प्रभावी हो गए। इन दोनों विधेयकों को राज्य विधानसभा ने 29 जून को पारित किया था। अधिकारियों के अनुसार, गुंडा रोधी कानून जिलाधिकारियों और पुलिस आयुक्तों को यह अधिकार देता है कि यदि किसी व्यक्ति के असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने की आशंका हो, तो उसे अधिकतम 12 महीने तक एहतियाती (निवारक) हिरासत में रखने का आदेश दिया जा सकता है। हिरासत से जुड़े आदेश को 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार को मंजूरी देनी होगी और तीन सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि इस कानून में 'गुंडा' की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब इसमें केवल आदतन हिंसक अपराधी ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े लोग, ऐसे अपराधों का वित्तपोषण या सहयोग करने वाले, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी प्रदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत बार-बार अपराध करने वाले तथा समाज के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है। इस कानून में 'असामाजिक गतिविधियां' की परिभाषा का भी काफी विस्तार किया गया है। अब इसमें ऐसी गतिविधियां शामिल होंगी जो लोगों में भय या दहशत फैलाती हों और लोक व्यवस्था को खतरे में डालती हो। इसके अलावा, वैध व्यापार या कारोबार में बाधा उत्पन्न करने, संपत्ति पर अवैध कब्जा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां भी इसमें शामिल की गई हैं। अवैध खनन, बिना अनुमति रेत खनन, वन एवं वन्यजीव अपराध जैसे आर्थिक और पर्यावरण संबंधी अपराधों को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है। नये प्रावधानों के तहत जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त तड़ीपार करने के आदेश भी जारी कर सकेंगे, जिसके तहत संदिग्ध अपराधियों को एक वर्ष तक किसी निर्धारित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, जिससे पुलिस को बिना वारंट तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तारी करने का अधिकार मिलेगा। पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत सरकार को दंगों या हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क कर उनकी नीलामी करने का अधिकार दिया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में इन विधेयकों का समर्थन करते हुए कहा था कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध गिरोहों और तोड़फोड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए राज्य को कड़े कानूनी प्रावधान करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि मौजूदा कानून पर्याप्त रूप से निरोधक नहीं हैं। वहीं, विपक्ष, विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस, ने इन कानूनों की आलोचना करते हुए इन्हें दमनकारी बताया और आरोप लगाया कि इन प्रावधानों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और असहमति जताने वालों के खिलाफ किया जा सकता है।
-
जम्मू. कश्मीर घाटी में वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच सोमवार को 7,700 से अधिक श्रद्धालुओं का 12वां जत्था जम्मू में दो आधार शिविरों से रवाना हुआ। अब तक, 2,52,000 से अधिक तीर्थयात्री 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर में भगवान शिव के 'हिमलिंगम' के दर्शन कर चुके हैं। अधिकारियों ने बताया कि कुल 7,754 तीर्थयात्री 303 वाहनों में रवाना हुए जिनमें 5,383 पुरुष, 2,071 महिलाएं, 222 साधु, 58 साध्वियां, 16 बच्चे और चार ट्रांसजेंडर व्यक्ति शामिल थे। काफिले को दो अलग-अलग समूहों में बांटा गया था। बालटाल मार्ग का काफिला तड़के 3:30 बजे रवाना हुआ जिसमें 133 गाड़ियां और 2,896 तीर्थयात्री शामिल थे, जबकि पहलगाम मार्ग का काफिला तड़के सुबह 4:05 बजे निका जिसमें 170 गाड़ियों में 4,858 तीर्थयात्री सवार थे। शुक्रवार को रवाना हुए श्रद्धालुओं के साथ दो जुलाई को यात्रा शुरू होने के बाद से कुल 87,701 तीर्थयात्री जम्मू आधार शिविर से कश्मीर के लिए रवाना हो चुके हैं। श्रद्धालुओं ने ''बम बम भोले'', ''हर हर महादेव'' और ''जय बर्फानी बाबा की'' के जयकारों के बीच भगवती नगर आधार शिविर से अपनी यात्रा शुरू की। कई तीर्थयात्रियों ने यात्रा के सुचारू संचालन के लिए की गई व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। गुफा मंदिर की 57 दिनों की यह वार्षिक तीर्थयात्रा 28 अगस्त को संपन्न होने वाली है।
- नागपुर. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) गरीबों, वंचितों, शोषितों और दलितों की सेवा में विश्वास रखती है तथा इन वर्गों को आत्मसम्मान के साथ जीवन-यापन का अवसर देना पार्टी का मिशन है। यहां महर्षि सुदर्शन वाल्मीकि वसाहत आवासीय परिसर के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए गडकरी ने 'सफाई कामगारों' के कल्याण के लिए विशेष प्रयास करने को लेकर नागपुर महानगरपालिका और राज्य की देवेंद्र फडणवीस सरकार की सराहना की। उन्होंने कहा, ''भारतीय जनता पार्टी गरीबों, वंचितों, शोषितों और दलितों की सेवा करना चाहती है तथा उन्हें भोजन, वस्त्र और आवास उपलब्ध कराना चाहती है। यह भाजपा का मिशन है कि वे आत्मसम्मान के साथ जीवन-यापन करें।'' स्थानीय सांसद गडकरी ने कहा कि भाजपा सफाई कामगारों के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के वास्ते प्रतिबद्ध है, ताकि वे खुशहाल जीवन जी सकें। उन्होंने कहा, ''यही हमारा सपना है।'' गडकरी ने बताया कि उनकी मां की याद में नागपुर में हाल में शुरू किए गए एक स्वास्थ्य जांच केंद्र ने पिछले नौ महीनों में करीब 53 हजार जरूरतमंद लोगों को बेहद किफायती दरों पर मेडिकल सेवाएं उपलब्ध कराई हैं। उन्होंने कहा कि 11 साल पहले उन्होंने दोपहिया वाहन आधारित ऐप टैक्सी सेवा से जुड़ी एक फाइल को मंजूरी दी थी, जिससे करीब 3.5 करोड़ युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिन राज्यों में यह योजना शुरू नहीं हुई है, उनसे इसे शुरू करने का आग्रह किया जाएगा। इससे पहले दिन में, गडकरी ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ नागपुर में महाराष्ट्र रेल अवसंरचना विकास निगम (महारेल) द्वारा निर्मित चार रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी), चार अंडरपास और एक रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) का उद्घाटन किया। गडकरी ने मुख्यमंत्री के साथ-साथ स्थानीय पार्षदों और विधायकों को बधाई देते हुए कहा, ''फडणवीस के नेतृत्व में महारेल ने बेहतरीन काम किया है।''
- अयोध्या (उप्र) . राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने रविवार को कहा कि राम मंदिर और निर्माणाधीन राम कथा संग्रहालय की कुल लागत 1,600 करोड़ रुपये से 1,800 करोड़ रुपये के बीच होगी। इसमें संग्रहालय के निर्माण पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मिश्रा ने अयोध्या में पत्रकारों से कहा, ''मैं सटीक राशि नहीं बता सकता, लेकिन मंदिर और संग्रहालय की कुल लागत 1,600 करोड़ रुपये से 1,800 करोड़ रुपये के बीच रहेगी।'' उन्होंने बताया कि राम मंदिर का निर्माण कार्य 15 अगस्त तक पूरा होने की संभावना है।शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे मिश्रा ने मंदिर निर्माण और राम कथा संग्रहालय से संबंधित कई बैठकों की अध्यक्षता की। उन्होंने उम्मीद जताई कि संग्रहालय अगले छह से आठ महीने में तैयार हो जाएगा। मिश्रा ने कहा, ''इस बार संग्रहालय के लिए हमारा लक्ष्य विभिन्न दीर्घाओं और बजट को अंतिम रूप देना था। आगंतुकों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।'' उन्होंने कहा, ''स्मारिका दुकान और कॉफी कॉर्नर जैसी सुविधाओं से युक्त विश्राम क्षेत्र पहले ही तैयार किया जा चुका है। प्रवेश शुल्क को लेकर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। इस बात पर विस्तार से चर्चा हुई कि प्रवेश टिकट व्यवस्था लागू की जाए या संग्रहालय में प्रवेश निशुल्क रखा जाए। अंतिम फैसला ट्रस्ट करेगा।'' मिश्रा ने बताया कि भगवान राम का देश की नदियों से जुड़ाव दर्शाने वाली एक दीर्घा की योजना को अंतिम रूप दे दिया गया है। उन्होंने कहा, ''एक ऐसी पटकथा तैयार की जाएगी, जिसमें सरयू नदी से शुरू होकर गुप्तार घाट पर समाप्त होने वाली भगवान राम की यात्रा को दर्शाया जाएगा। इसमें उनके वनवास की कथा के साथ उन स्थानों और संदेशों का भी उल्लेख होगा, जहां-जहां वह ठहरे थे। यह भी तय किया गया है कि पूरी प्रस्तुति के मुख्य पात्र भगवान राम ही होंगे।'' मिश्रा ने कहा, ''निर्माण एजेंसियों के बिल और वेंडर के भुगतान की समीक्षा की जा रही है। साथ ही ट्रस्ट को संपत्ति रजिस्टर सौंपने की प्रक्रिया भी जारी है। इसमें निर्माण कार्य का पूरा विवरण, खर्च और भविष्य के लिए आवश्यक सावधानियां दर्ज होंगी। संबंधित एजेंसियों ने भरोसा दिलाया है कि यह कार्य 30 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा।'' उन्होंने बताया कि मंदिर में 24 घंटे प्रज्ज्वलित रहने वाली 'ज्वाला' के डिजाइन को शनिवार को अंतिम रूप दे दिया गया है और अगले 15 दिन में इस पर काम शुरू हो जाएगा। राम कथा संग्रहालय के संबंध में मिश्रा ने कहा कि पटकथा लेखन का काम पूरा हो चुका है और दीर्घाओं की रूपरेखा भी लगभग अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा, ''पटकथा के साथ प्रौद्योगिकी को जोड़ने की योजना तैयार कर ली गई है। इसके आधार पर एक महीने के भीतर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा और प्रत्येक दीर्घा के निर्माण के लिए निविदाएं जारी की जाएंगी।
- कोटा। राजस्थान के बारां जिले में सो रहे एक युवक पर अज्ञात हमलावर ने कथित तौर पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। हमले में कुल्हाड़ी का धारदार हिस्सा उसके सिर में गहराई तक धंस गया, जिसे रविवार को कोटा के एक अस्पताल में तीन घंटे से अधिक समय तक चली जटिल सर्जरी के बाद निकाला गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, बारां जिले के भंवरगढ़ थाना क्षेत्र निवासी 30-वर्षीय रामजीलाल सहरिया पर 11-12 जुलाई की दरमियानी रात उस समय हमला किया गया, जब वह अपने घर में पत्नी ममता और बेटी के साथ सो रहे थे। पुलिस ने बताया कि कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनकर उनकी पत्नी रात करीब दो बजे जगीं। उन्होंने देखा कि रामजीलाल फर्श पर खून से लथपथ पड़े हैं और उनके सिर के बाईं ओर कुल्हाड़ी का धारदार हिस्सा गहराई तक धंसा हुआ है। पड़ोसियों की मदद से उन्हें तुरंत भंवरगढ़ के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने उन्हें बारां जिला अस्पताल रेफर कर दिया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए कोटा भेज दिया गया। रविवार सुबह करीब पांच बजे परिजन उन्हें न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एनएमसीएच) लेकर पहुंचे। उस समय कुल्हाड़ी का हिस्सा उनके सिर में धंसा हुआ था। एनएमसीएच के न्यूरोसर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. एस. एन. गौतम ने बताया कि मरीज को अत्यंत गंभीर अवस्था में अस्पताल लाया गया था। कुल्हाड़ी का धारदार हिस्सा सिर में करीब 2.5 सेंटीमीटर तक धंसा हुआ था। उनका रक्तचाप बहुत कम था और काफी मात्रा में रक्त बह चुका था। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन से पहले मरीज की स्थिति और रक्तचाप को स्थिर किया गया तथा चोट की गंभीरता का आकलन करने के लिए आवश्यक चिकित्सकीय जांच की गई। हालांकि, सिर में धंसी कुल्हाड़ी के कारण सीटी स्कैन करना भी काफी चुनौतीपूर्ण था।डॉ. गौतम ने बताया कि अपराह्न करीब तीन बजे चिकित्सकों की टीम ने सर्जरी शुरू की, जो तीन घंटे से अधिक समय तक चली। इस दौरान कुल्हाड़ी के धारदार हिस्से को अत्यंत सावधानी से निकाला गया, ताकि मस्तिष्क की कोशिकाओं को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। उन्होंने कहा कि मरीज की हालत फिलहाल नाजुक बनी हुई है और खतरा टला नहीं है। अगले आठ से दस दिन उसकी सेहत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इस बीच, भंवरगढ़ के क्षेत्राधिकारी गोपीचंद आर्य ने बताया कि पुलिस ने अज्ञात हमलावर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर लिया है और उसकी तलाश की जा रही है। उन्होंने बताया कि पीड़ित ट्रैक्टर चालक के रूप में काम करता है। उस पर हुए इस जानलेवा हमले के पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चल सका है।
-
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार, असामाजिक गतिविधियों और संगठित अपराध पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से बनाया गया ‘पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण अधिनियम, 2026’ सोमवार आधी रात से लागू हो गया। यह विधेयक 29 जून को पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश किया गया था और पारित होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी मिलने पर इसे कानून का दर्जा मिला।
नए कानून के तहत पुलिस और प्रशासन को असामाजिक गतिविधियों, कानून-व्यवस्था बिगाड़ने और संगठित अपराध से निपटने के लिए अधिक अधिकार दिए गए हैं। साथ ही दोषियों के लिए कड़ी सजा और दंड का भी प्रावधान किया गया है।कानून की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था निवारक हिरासत (प्रिवेंटिव डिटेंशन) है। यदि किसी व्यक्ति को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है, तो उसे एक वर्ष तक निवारक हिरासत में रखा जा सकेगा।इस प्रावधान को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे पुलिस को मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार मिल सकता है।हालांकि राज्य सरकार का कहना है कि निवारक हिरासत केवल तय प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही लागू होगी। इसके लिए एक सलाहकार बोर्ड बनाया जाएगा, जो यह तय करेगा कि किसी व्यक्ति की हिरासत उचित है या नहीं।यह बोर्ड कलकत्ता हाईकोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में काम करेगा और इसमें दो अन्य ऐसे सदस्य होंगे, जो हाईकोर्ट के न्यायाधीश बनने की योग्यता रखते हों। हिरासत में लिए गए व्यक्ति को बोर्ड के समक्ष अपना पक्ष रखने का अधिकार भी होगा।कानून के तहत राज्य सरकार को ऐसे मामलों में दोषी पाए गए लोगों की संपत्ति जब्त करने का भी अधिकार मिलेगा। इसके अलावा पुलिस किसी व्यक्ति के किसी विशेष क्षेत्र में प्रवेश पर रोक लगा सकती है या उसे वहां से हटाने का आदेश दे सकती है, यदि उससे शांति भंग होने की आशंका हो। नए कानून में “एक्सटर्नमेंट ऑर्डर” का भी प्रावधान है। इसके तहत जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी किसी व्यक्ति को अधिकतम एक वर्ष तक किसी क्षेत्र या पूरे जिले से बाहर रहने का आदेश दे सकते हैं, यदि उससे कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो। - नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 13 से 17 जुलाई तक स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड का दौरा करेंगे। यहां केंद्रीय मंत्री एक उच्च स्तरीय भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह यात्रा व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार और स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करते हुए, पूरे यूरोप में आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।इस प्रतिनिधिमंडल में उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, रत्न और आभूषण, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सेवा और डिजाइन सहित विभिन्न क्षेत्रों की अग्रणी भारतीय कंपनियां शामिल हैं।13 जुलाई को स्पेन की अपनी यात्रा के दौरान, केंद्रीय मंत्री गोयल द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने और प्रस्तावित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से उत्पन्न अवसरों का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित करेंगे। वे स्पेन सरकार के प्रथम वाइस-प्रेसिडेंट और अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं व्यवसाय मंत्री कार्लोस कुएर्पो कैबलेरो; उद्योग एवं पर्यटन मंत्री जोर्डी हेरेउ बोहर; और विदेश मामलों, यूरोपीय संघ एवं सहयोग मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ब्यूनो के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। वे भारत के निवेश के अवसरों को प्रदर्शित करने और व्यापार-से-व्यापार साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख स्पेनिश कंपनियों और उद्योग संघों के साथ एक भारत-स्पेन व्यापार गोलमेज सम्मेलन की अध्यक्षता भी करेंगे।इस दौरान केंद्रीय मंत्री स्पेन के चैंबर ऑफ कॉमर्स, सीईओई और आईसीईएक्स स्पेन ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट के साथ एक बिजनेस राउंडटेबल में भाग लेंगे। इस सत्र में भारतीय और स्पेनिश उद्योग जगत के नेता ऑटोमोटिव, नवीकरणीय ऊर्जा, रेलवे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, खाद्य प्रसंस्करण और पर्यटन क्षेत्रों में अवसरों का पता लगाने के लिए एक साथ आएंगे।इबरड्रोला, एक्सियोना, सीएएफ, टैल्गो, गेस्टैम्प और इंद्रा जैसी स्पेनिश कंपनियों की भारत में पहले से ही मजबूत उपस्थिति है, जबकि टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, टेक महिंद्रा और एलएंडटी जैसी भारतीय कंपनियां डिजिटलीकरण और उद्योग 4.0 को बढ़ावा देने के लिए स्पेन में अपने परिचालन का विस्तार कर रही हैं। यह यात्रा स्पेन-भारत द्विपक्षीय वर्ष 2026 के साथ भी मिलती है, जो राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिसमें व्यापार-से-व्यापार साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है।वहीं केंद्रीय मंत्री 14 और 15 जुलाई को बेल्जियम में एंटवर्प बंदरगाह और एंटवर्प विश्व हीरा केंद्र का दौरा करेंगे। एंटवर्प बंदरगाह का दौरा यूरोप के प्रमुख लॉजिस्टिक हब की जानकारी प्रदान करेगा और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, ग्रीन लॉजिस्टिक्स और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं में सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित करेगा। एंटवर्प विश्व हीरा केंद्र का दौरा वैश्विक हीरा मूल्य श्रृंखला, प्रमाणन, जिम्मेदार सोर्सिंग और भारत के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र के लिए अवसरों पर प्रकाश डालेगा।केंद्रीय मंत्री थैल्स ग्रुप के एलेन क्वेवरिन और सिलॉक्स ग्रुप के जीन-क्रिस्टोफ बोगार्ट के साथ सीईओ स्तर की बैठक भी करेंगे। थैल्स एयरोस्पेस, रक्षा, साइबर सुरक्षा और डिजिटल पहचान के क्षेत्र में एक वैश्विक अग्रणी कंपनी है, जिसकी भारत में महत्वपूर्ण साझेदारियां हैं, जबकि सिलॉक्स एक विशेष रसायन और पुनर्चक्रण समूह है, जिसका गुजरात में प्रमुख परिचालन है और बैटरी पुनर्चक्रण और सतत विनिर्माण में सहयोग है।भारत-ईयू बिजनेस राउंडटेबल और ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल (टीटीसी) प्लेनरी में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के अवसरों, व्यापार सुगमता, टिकाऊ प्रौद्योगिकियों और सरल आपूर्ति श्रृंखलाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।ब्रसेल्स की अपनी यात्रा के दौरान, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल विदेश मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री के साथ मिलकर तीसरी भारत-ईयू व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता करेंगे। भारत-ईयू टीटीसी व्यापार, विश्वसनीय प्रौद्योगिकी और आर्थिक सुरक्षा पर सहयोग के लिए सर्वोच्च संस्थागत तंत्र के रूप में कार्य करता है।टीटीसी के दौरान, मंत्री यूरोपीय संघ के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करेंगे, जिनमें यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और बेल्जियम के प्रधानमंत्री शामिल हैं। वे बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री और रोजगार, अर्थव्यवस्था और कृषि मंत्री महामहिम श्री डेविड क्लारिनवाल और व्यापार एवं आर्थिक सुरक्षा के लिए यूरोपीय आयुक्त मारोस शेफकोविच से द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। साथ ही केंद्रीय मंत्री गोयल भारत-बेल्जियम व्यापार गोलमेज सम्मेलन के माध्यम से उद्योग जगत के नेताओं से भी जुड़ेंगे और प्रमुख यूरोपीय कंपनियों के साथ बातचीत करेंगे।इसके बाद केंद्रीय मंत्री गोयल 16 और 17 जुलाई को फिनलैंड के प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर वहां का दौरा करेंगे। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य नवाचार, उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकियों और औद्योगिक अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है। मंत्री फिनलैंड के आर्थिक मामलों के मंत्री डॉ. सकारी पुइस्तो के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे और डिजिटलीकरण, स्वच्छ ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और चक्रीय अर्थव्यवस्था में कार्यरत फिनिश कंपनियों के साथ भारत-फिनलैंड व्यापार गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगे। संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के लिए सीआईआई और बिजनेस फिनलैंड के बीच एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए जाएंगे।इस दौरान केंद्रीय मंत्री नोकिया कॉर्पोरेशन, वीटीटी रिसर्च सेंटर, कोने कॉर्पोरेशन और केम्पी ग्रुप सहित फिनलैंड की अग्रणी कंपनियों और नवाचार संस्थानों का दौरा करेंगे, ताकि दूरसंचार अवसंरचना, 6जी अनुसंधान, स्मार्ट मोबिलिटी, उन्नत विनिर्माण, औद्योगिक मशीनरी, ईवी चार्जिंग अवसंरचना, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, सतत गतिशीलता, औद्योगिक नवाचार और निवेश में सहयोग के अवसरों का पता लगाया जा सके।भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल में बोरोसिल रिन्यूएबल्स, मदरसन ग्रुप, ट्रिविट्रॉन हेल्थकेयर, हरि कृष्णा एक्सपोर्ट्स और नेक्कंती सीफूड्स जैसी कंपनियां शामिल होंगी, जो एआई और स्वच्छ प्रौद्योगिकी से लेकर रत्न और आभूषण, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सेवा और डिजाइन तक के क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं। स्पेन, बेल्जियम और फिनलैंड में, यह दौरा उन्नत विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा और स्थिरता, डिजिटल और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, रत्न और आभूषण, और खाद्य और उपभोक्ता उद्योगों के प्रमुख विषयों पर प्रकाश डालेगा।भारत-यूरोपीय संघ संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर यह यात्रा हो रही है, जब दोनों पक्ष आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र कार्यान्वयन की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस संदर्भ में, केंद्रीय मंत्री गोयल की यात्रा इस साझा दृष्टिकोण को ठोस परिणामों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह भारत की अपने सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक, यूरोपीय संघ के साथ अपने संबंधों को गहरा करने और एक महत्वाकांक्षी, संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते को आगे बढ़ाने की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जो लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं, सतत विकास और नियम-आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली में योगदान देता है।इस यात्रा से व्यापार और निवेश को बढ़ावा देकर, उभरती प्रौद्योगिकियों, स्वच्छ ऊर्जा, नवाचार और उन्नत विनिर्माण में सहयोग को मजबूत करके, व्यवसायों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्रों के बीच घनिष्ठ साझेदारी को बढ़ावा देकर और नवाचार, विनिर्माण और स्थिरता के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करके यूरोप के साथ भारत की भागीदारी को नई गति मिलने की भी आशा है।
-
नई दिल्ली। श्री अमरनाथ यात्रा (एसएएनजेवाई)-2026 को सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए जम्मू पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने सुरक्षा तैयारी तेज कर दी है। इसी क्रम में जम्मू जोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजीपी) भीम सेन टूटी (आईपीएस) ने आईजी सीआरपीएफ जम्मू सेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कठुआ और सांबा जिलों में यात्रा सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण किया।
आईजीपी जम्मू ने लखनपुर, कठुआ और सांबा में यात्रा मार्ग, सुरक्षा तैनाती, निगरानी व्यवस्था और विभिन्न सुरक्षा उपायों की समीक्षा की। इस दौरान सुरक्षा ग्रिड को और मजबूत करने, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने और यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।लखनपुर में आईजीपी ने लखनपुर रिसेप्शन सेंटर का दौरा कर वहां तैनात सुरक्षा बलों की स्थिति, यात्रियों की जांच प्रक्रिया, तलाशी व्यवस्था और अन्य सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। इसके बाद, उन्होंने एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कठुआ के उपायुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक; सीआरपीएफ की 121वीं बटालियन और बीएसएफ की 159वीं बटालियन के कमांडिंग अधिकारी; एडीसी कठुआ; एसपी ऑपरेशन; अतिरिक्त एसपी सहित एसएएनजेवाई ड्यूटी में तैनात विभिन्न जोनल अधिकारियों; और सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।बैठक के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुरक्षा प्रबंधन, यातायात नियंत्रण, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई। आईजीपी ने अधिकारियों को 24 घंटे निगरानी बनाए रखने, पूरी सतर्कता के साथ ड्यूटी निभाने और श्रद्धालुओं को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।इससे पहले सांबा जिला पुलिस कार्यालय में भी उच्चस्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता आईजीपी जम्मू जोन भीम सेन टूटी और आईजी सीआरपीएफ जम्मू सेक्टर अमोल वी. होमकर (आईपीएस) ने की। बैठक में डीआईजी जेएसके रेंज श्रीधर पाटिल, डीआईजी सीआरपीएफ अवधेश पाठक, सांबा के एसएसपी अनुज कुमार सहित सीआईएसएफ, सीआरपीएफ, बीएसएफ, एसएसबी और पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में सांबा जिले में यात्रा सुरक्षा योजना की समीक्षा की गई। इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग सुरक्षा, सीमा क्षेत्र निगरानी, प्रवेश बिंदुओं की सुरक्षा, लंगर स्थलों, ठहरने के स्थानों, क्विक रिस्पॉन्स टीमों (क्यूआरटी), निगरानी प्रणाली और यात्रा काफिले की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा हुई। -
विदेशी मुद्रा जमा अभियान पर होगी चर्चा
नयी दिल्ली. देश में विदेशी मुद्रा जमा का प्रवाह बढ़ाने और बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करेंगी। इस बैठक में विदेशी मुद्रा प्रवासी (बी) यानी (एफसीएनआर)-बी जमा, विदेशी मुद्रा बॉन्ड तथा बाह्य वाणिज्यिक कर्ज (ईसीबी) के माध्यम से विदेशी पूंजी जुटाने के मामले में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी। हाल ही में भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने प्रवासी भारतीयों (एनआरआई), विदेश में रहने वाले भारतीयों (ओसीआई) तथा भारतीय मूल के लोगों (पीआईओ) से अधिक विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए तीन से पांच वर्ष की अवधि वाली नई एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा को 30 सितंबर, 2026 तक हटा दिया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब एफसीएनआर (बी) जमा के शुद्ध प्रवाह में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2024-25 में जहां इन जमाओं के माध्यम से 7.1 अरब अमेरिकी डॉलर का शुद्ध प्रवाह हुआ था, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह घटकर केवल 94.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गया। सूत्रों ने बताया कि बैठक में आईडीबीआई बैंक सहित विभिन्न सरकारी बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुख भाग लेंगे। वित्त मंत्री विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के प्रयासों के साथ-साथ अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों में कर्ज का प्रवाह बढ़ाने पर भी जोर दे सकती हैं। केंद्रीय बैंक ने बैंकों के लिए तीन से पांच वर्ष की अवधि वाले एफसीएनआर (बी) जमा पर रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा भी उपलब्ध कराई है। इससे बैंकों की विदेशी मुद्रा जोखिम की 'हेजिंग' की लागत कम होगी और वे अधिक प्रतिस्पर्धी दरों पर विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) को ईसीबी के लिए भी 30 सितंबर, 2026 तक रियायती विदेशी मुद्रा अदला-बदली सुविधा प्रदान की गई है। आमतौर पर ये उपक्रम हर वर्ष लगभग 10–12 अरब अमेरिकी डॉलर ईसीबी जुटाते हैं। मौजूदा रियायत और लगभग तीन प्रतिशत लागत लाभ के कारण कई उपक्रम अपने कर्ज कार्यक्रमों को समय से पहले पूरा करने की योजना बना सकते हैं। एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह रियायती सुविधा सार्वजनिक उपक्रमों को वैश्विक बाजारों से कम लागत पर धन जुटाने में मदद करेगी। उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2025-26 में ईसीबी लगभग 30 प्रतिशत घटकर 42.9 अरब अमेरिकी डॉलर पर आ गया था। इस पहल से कुल ईसीबी और विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड (एफसीसीबी) प्रवाह में फिर से तेजी आने की संभावना है।
-
नयी दिल्ली. भारत में पढ़ाई करने के लिए आने वाले विदेशी छात्रों में सबसे अधिक संख्या नेपाल के विद्यार्थियों की है और कर्नाटक विदेशी छात्रों का सबसे पसंदीदा राज्य है। शिक्षा मंत्रालय के एक सर्वेक्षण में यह जानकारी सामने आई है। वर्ष 2023-24 के लिए अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (एआईएसएचई) के अनुसार, इस शैक्षणिक वर्ष में भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में 173 देशों के छात्रों ने पढ़ाई की। देश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कुल 58,134 विदेशी छात्रों ने दाखिला लिया था। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण के तहत देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों से वेब आधारित 'डेटा कैप्चर फॉर्मेट' (डीसीएफ) के जरिये विस्तृत जानकारी एकत्र की जाती है। संस्थान छात्रों के नामांकन, शिक्षकों एवं कर्मचारियों, बुनियादी ढांचे और परीक्षा परिणामों समेत अन्य विवरण सर्वेक्षण के पोर्टल पर अपलोड करते हैं। यह सर्वेक्षण भारत में उच्च शिक्षा से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों का प्रमुख स्रोत है और इससे इस क्षेत्र में नीतियां बनाने, योजनाएं तैयार करने तथा उनकी निगरानी करने में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। वर्ष 2023-24 में विदेशी छात्रों में सबसे अधिक 24.1 प्रतिशत छात्र नेपाल से थे। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात से सात प्रतिशत, अमेरिका से 5.9 प्रतिशत, बांग्लादेश से 5.9 प्रतिशत, नाइजीरिया से 5.5 प्रतिशत और जिम्बाब्वे से चार प्रतिशत छात्र भारत आए थे। रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक विदेशी छात्रों के लिए सबसे पसंदीदा राज्य रहा, जहां उच्च शिक्षण संस्थानों में 7,914 विदेशी छात्रों ने दाखिला लिया। इसके बाद पंजाब का स्थान रहा जहां 7,902 विदेशी छात्रों ने पढ़ाई की। महाराष्ट्र में 6,190, उत्तर प्रदेश में 5,953 और तमिलनाडु में 5,694 विदेशी छात्रों ने पढ़ाई की। विदेशी छात्रों में सबसे अधिक 73.6 प्रतिशत ने स्नातक पाठ्यक्रमों जबकि 16.8 प्रतिशत छात्रों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया। कुल 42,779 विदेशी विद्यार्थियों ने स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया। इनमें 27,849 छात्र और 14,930 छात्राएं थीं। इसके अलावा, 9,845 छात्रों ने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया और अपेक्षाकृत कम संख्या में विदेशी छात्रों ने डिप्लोमा, पीएचडी, प्रमाणपत्र और एकीकृत पाठ्यक्रमों की पढ़ाई की। भारत में विदेशी छात्रों की संख्या 2019-20 के 48,898 से बढ़कर 2023-24 में 58,134 हो गई। पांच वर्षों में इसमें 9,236 यानी 18.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस दौरान छात्र और छात्राओं दोनों की संख्या बढ़ी। छात्रों की संख्या 32,386 से बढ़कर 37,295 हो गई, जबकि छात्राओं की संख्या 16,512 से बढ़कर 20,839 हो गई। शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में लेबनान, बुर्किना फासो, मंगोलिया, मेक्सिको, कजाखस्तान, बेलारूस और चिली समेत कई अन्य देशों के छात्र भी भारत में पढ़ाई करने आए। शिक्षा मंत्रालय ने विदेशी छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से 2018 में 'स्टडी इन इंडिया' कार्यक्रम शुरू किया था।
-
नयी दिल्ली. विदेशों में होने वाली भारतीय शादियों के लिए 2025 में श्रीलंका सबसे तेजी से उभरते गंतव्य के रूप में सामने आया है और इसकी लोकप्रियता में 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया। वहीं, पश्चिम एशिया में जारी संकट के बावजूद वर्ष 2026 में भारतीय जोड़ों के अपनी विशेष समारोह की योजनाओं में बड़ी कटौती करने की संभावना कम है। शादी की योजना बनाने वाले मंच 'वेडमीगुड' की 'डेस्टिनेशन वेडिंग रिपोर्ट 2026' के अनुसार, आसान पहुंच, भारत से नजदीकी, शानदार आतिथ्य सुविधाओं और यादगार अनुभवों वाले आयोजनों के कारण श्रीलंका तेजी से एक प्रमुख विवाह गंतव्य के रूप में उभर रहा है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि आने वाले वर्षों में श्रीलंका में भारतीय शादियों की बुकिंग में सालाना 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। हालांकि, थाईलैंड अब भी भारतीयों के लिए सबसे लोकप्रिय विदेशी विवाह गंतव्य बना हुआ है। वर्ष 2025 में वहां करीब 25 लाख पर्यटक पहुंचे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत अधिक है। यह रिपोर्ट 'वेडमीगुड' के उपभोक्ता और उद्योग नेटवर्क के माध्यम से किए गए सर्वेक्षण पर आधारित है। इसमें करीब 2.5 लाख उपभोक्ताओं और लगभग 24,000 शादी उद्योग से जुड़े पेशेवरों एवं सेवा प्रदाताओं को शामिल किया गया। शांगरी-ला कोलंबो और शांगरी-ला हंबनटोटा की क्षेत्रीय संचार निदेशक चेरंका मेंडिस ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि श्रीलंका अब केवल एक उभरता हुआ विकल्प नहीं रह गया है, बल्कि भारतीय जोड़ों के लिए एक प्रमुख कम दूरी वाले लक्जरी विवाह गंतव्य के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। वेडमीगुड के अनुसार, श्रीलंका पर्यटन विकास प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, श्रीलंका आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या वर्ष 2023 में 3,02,844 थी, जो 2024 में बढ़कर 4,16,974 हो गई और वर्ष 2025 में यह संख्या 5,30,000 से अधिक पहुंच गई। वेडमीगुड के अनुसार, श्रीलंका और थाईलैंड के अलावा इंडोनेशिया का बाली, वियतनाम और मलेशिया भारतीय शादियों के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय गंतव्य रहे। भारत में विवाह आयोजनों के लिए देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश, शिमला और जिम कॉर्बेट प्रमुख पांच स्थानों में शामिल रहे। इनके बाद उदयपुर, जयपुर, जैसलमेर, जोधपुर और गोवा का स्थान रहा।
- जम्मू. जम्मू जिले के बाहरी इलाके में हुई एक दुखद घटना में मूल रूप से राजस्थान की रहने वाली एक लड़की समेत तीन बच्चे डूब गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि अखनूर के जौरिया इलाके के धनवाल गांव में नहाने के लिए कथित तौर पर तालाब में उतरे बच्चे डूब गए। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान चांद (12), अभिषेक (11) और भगवान सहाय (8) के तौर पर हुई है।अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने तीनों के शव तालाब से बाहर निकाल लिये हैं। उन्होंने बताया कि मृतकों के माता-पिता गांव में एक ईंट भट्ठे में काम करते हैं।
- अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने राम मंदिर में दान में 'वित्तीय हेराफेरी' पर शनिवार को दुख जाहिर करते हुए कहा कि यह एक तरह का कलंक है और इससे हर कोई बहुत अपमानित महसूस कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि व्यवस्था में सुधार होगा और भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।मिश्रा ने यहां पत्रकारों से बातचीत में 'दान में गबन' पर कहा, ''यह घटना राम मंदिर पर एक तरह का कलंक है। इसे लेकर हम सभी न केवल क्षमाप्रार्थी हैं बल्कि शर्मिंदा और निराशा भी महसूस कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा,''यह मंदिर प्रबंधन से जुड़ा मामला है। व्यवस्था में सुधार होगा और ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होंगी।'' मिश्रा ने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के तहत कठोर सजा दिलाई जाएगी। राम मंदिर के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति की मांग उठाने में सबसे आगे रहे मिश्रा ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए सीईओ की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है और अंतिम निर्णय वही समिति करेगी। ऐसी अटकलें हैं कि ट्रस्ट एक महिला सीईओ की नियुक्ति के लिए तैयार हो सकता है लेकिन मिश्रा ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा, "आप जानते हैं, एक (सेवानिवृत्त) न्यायाधीश सीईओ की नियुक्ति के लिए समिति का नेतृत्व कर रहे हैं। यह अपनी सिफारिशें ट्रस्ट को सौंपेंगे, जो इस मुद्दे पर फैसला करेगा।" मिश्रा शुक्रवार को अयोध्या पहुंचे और हनुमानगढ़ी मंदिर में पूजा की।चढ़ावे की कथित चोरी विवाद के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार करने के बाद ट्रस्ट मंदिर प्रबंधन प्रणाली में सुधार के उपायों पर निर्णय लेने के लिए 22 जुलाई को फिर से बैठक करेगा। मिश्रा ने कहा कि उन्हें 22 जुलाई की बैठक के (एजेंडे) बारे में कोई जानकारी नहीं है।मिश्रा ने पत्रकारों से कहा मैंने निर्माण कार्य का जायजा लिया। एक स्मारक के रूप में विकसित किये जा रहे पुराने मंदिर का काम लगभग पूरा हो चुका है। बस उस लौ की व्यवस्था बाकी है जो 24 घंटे जलती रहेगी।'' उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण का आखिरी चरण 30 जुलाई तक पूरा हो जाएगा।मिश्रा ने यह भी कहा कि कुछ अन्य परियोजनाएं, जैसे चार किलोमीटर लंबी चहारदीवारी का निर्माण और मंदिर परिसर के बाहर ऑडिटोरियम का कार्य, नवंबर-दिसंबर तक पूरे हो सकती हैं। उन्होंने राम कथा संग्रहालय को लेकर बताया कि संग्रहालय की 20 गैलरी की 'स्टोरी लाइन' तैयार हो चुकी है और अब तकनीकी प्रस्तुति, 'डिजिटल इंस्टॉलेशन' और वीडियो सामग्री को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि आधुनिक एवं आकर्षक संग्रहालय श्रद्धालुओं और पर्यटकों को यादगार अनुभव प्रदान कर सके। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन भी शुक्रवार को हुई समिति की बैठक में शामिल हुए।मिश्रा ने अयोध्या मंदिर को 'अनोखा' बताते हुए कहा कि यह एक लंबे आंदोलन का नतीजा है।उन्होंने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, यह जगह राम लला के दर्शन का एक अनोखा अनुभव देती है- ऐसा अनुभव जो दुनिया में बेजोड़ है। सभी मंदिर हमारी पूजा और श्रद्धा के पात्र हैं लेकिन राम लला का मंदिर अनोखा है। यह एक लंबे आंदोलन का नतीजा है।" मिश्रा ने भगवान राम की उनके 'मूल निवास' में 'वापसी' का स्वागत किया और कहा, "यह अपने आप में एक शानदार मंदिर है। निश्चिंत रहें, यहां आने वाले भक्तों की संख्या कभी कम नहीं होगी। सनातन धर्म का हर अनुयायी निश्चित रूप से कम से कम एक बार इस जगह पर आना चाहेगा।"
- बनिहाल/जम्मू. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने रामबन जिले में अमरनाथ यात्रा कर रहे तीन श्रद्धालुओं का एक बैग बरामद कर उन्हें सौंप दिया जिसमें 1.32 लाख रुपये नकद और कुछ जरूरी दस्तावेज थे। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। महाराष्ट्र के ये श्रद्धालु बनिहाल में यात्री शिविर में पहुंचने से पहले टैक्सी में अपनी सीट के नीचे बैग भूल गए थे। उन्हें रविवार को दक्षिण कश्मीर में अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए आगे बढ़ना था। अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने पर, बनिहाल के थाना प्रभारी आशिक हुसैन लोन की अगुवाई में एक टीम ने सोपोर पुलिस के साथ मिलकर टैक्सी और उसके चालक का पता लगाया। उन्होंने बताया कि उचित जांच-पड़ताल के बाद बरामद नकदी और दस्तावेज श्रद्धालुओं को सौंप दिए गए। सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धालुओं ने तुरंत कार्रवाई करने के लिए पुलिस के प्रति आभार जताया।
- नागपुर. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को ब्रिक्स देशों से ऐसी परिवहन प्रणाली बनाने के लिए और ज्यादा सहयोग करने का आह्वान किया जो टिकाऊ, मजबूत, समावेशी और भविष्य के लिए तैयार हों। उन्होंने कहा कि इस समूह की सामूहिक ताकत नवोन्मेष, साझेदारी और साझा जिम्मेदारी के जरिए वैश्विक गतिशीलता के भविष्य को आकार देने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में आयोजित तीसरी ब्रिक्स परिवहन मंत्रियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। ब्रिक्स सदस्य देशों के परिवहन मंत्रियों, प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों, वरिष्ठ अधिकारियों और प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए गडकरी ने बैठक को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच परिवहन सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता, जिसका विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" है, 'वसुधैव कुटुंबकम' के शाश्वत दर्शन से प्रेरित एक जन-केंद्रित, "मानवता सर्वोपरि" दृष्टिकोण को दर्शाती है। गडकरी ने ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत संबंधों का आह्वान करते हुए कहा, "ब्रिक्स विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। यह स्वच्छ, सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल परिवहन प्रणालियों के विकास का नेतृत्व करने के साथ-साथ सतत आर्थिक विकास और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देने में सक्षम है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि अवसंरचना वित्तपोषण, भीड़-भाड़, उत्सर्जन, सड़क सुरक्षा और अंतिम छोर तक पहुंच से जुड़ी आम चुनौतियों के लिए सामूहिक समाधान की जरूरत है। केंद्रीय मंत्री ने हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक परिवहन, वैकल्पिक ईंधन, डिजिटल परिवहन प्रणालियों और सतत मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में ज्ञान साझा करने, क्षमता विकास, तकनीकी सहयोग और संयुक्त अनुसंधान के माध्यम से सहयोग को और गहरा करने की भारत की तत्परता दोहराई। बैठक के परिणामों पर भरोसा व्यक्त करते हुए गडकरी ने कहा कि विचार-विमर्श से ब्रिक्स परिवहन सहयोग और मजबूत होगा तथा व्यावहारिक, नवोन्मेषी और जन-केंद्रित परिवहन समाधानों में योगदान मिलेगा। उन्होंने ब्रिक्स देशों से समावेशी विकास को बढ़ावा देने, क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने, पर्यावरण की रक्षा करने और सभी के लिए अधिक सतत और समृद्ध भविष्य में योगदान देने वाली परिवहन प्रणालियों के निर्माण के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों - ब्राजील, रूस, इंडोनेशिया, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
-
चेन्नई/ वियतनाम घूमने गए दक्षिण भारत के मोबाइल फोन कंपनी के कारोबारी सहयोगियों की यात्रा शनिवार को एक दर्दनाक हादसे में बदल गई जहां नाव पलटने की घटना में 15 भारतीयों की मौत हो गई। तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली निवासी शेख अब्दुल्ला अब्दुल मजीद भी मृतकों में शामिल हैं।
मजीद के एक रिश्तेदार ने बताया, उन्होंने सुबह अपनी नन्हीं सी पोती का चेहरा वीडियो कॉल पर देखा और पत्नी व बेटे से बात की। किसी को नहीं पता था कि यह परिवार से उनकी आखिरी बातचीत होगी।'' अब्दुल्ला एक मोबाइल फोन कंपनी के चैनल पार्टनर थे। कंपनी ने अपने बिजनेस सहयोगियों के लिए यह विदेश यात्रा प्रायोजित की थी। हनोई में भारतीय दूतावास के अनुसार, वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास नाव पलटने से तमिलनाडु के दस लोगों और आंध्र प्रदेश व केरल के क्रमशः तीन और दो लोगों की मौत हो गई। दक्षिणी राज्यों की सरकारों ने कहा कि वे शव को जल्द से जल्द अपने-अपने राज्यों में लाने और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद देने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने घटना पर शोक व्यक्त किया। नाव में कुल 36 लोग सवार थे, जिनमें 32 भारतीय पर्यटक और स्थानीय चालक दल के चार सदस्य शामिल थे। इक्कीस लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया। फू क्वोक वियतनाम का सबसे बड़ा द्वीप है, जो अपने सफेद रेतीले समुद्र तटों, कोरल रीफ और द्वीप पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। अब्दुल्ला के रिश्तेदार ने कहा, वह सामान्यतः यात्रा पर नहीं जाते थे। पहले उन्होंने अपने बेटे को भेजने का विचार किया था, लेकिन अंततः स्वयं चले गए। वह 9 जुलाई को वियतनाम गए थे और 13 जुलाई को लौटने वाले थे।'' शनिवार सुबह उन्होंने बेटे से कारोबार के संबंध में बात की और पत्नी को बताया कि वे एक ऐसे द्वीप पर जा रहे हैं जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं होगा। उन्होंने कहा था कि वापस आने के बाद फोन करेंगे। उन्होंने अपनी नवजात पोती को वीडियो कॉल पर देखा। वही उनके परिवार से आखिरी संवाद साबित हुआ। मोदी, राष्ट्रपति मुर्मू और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल की सरकारों ने कहा कि वे केंद्र सरकार के साथ मिलकर मृतकों के पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाने और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए कार्य कर रही हैं। वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीय पर्यटकों की पहचान भी जारी कर दी है। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक न्यूज़ीलैंड यात्रा के दौरान शनिवार को भारत और न्यूज़ीलैंड ने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक पहुंचाते हुए रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्यटन, खेल, संस्कृति और वैज्ञानिक अनुसंधान समेत विभिन्न क्षेत्रों में 10 समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने ‘इंडिया-न्यूज़ीलैंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप एंड रोडमैप-2030’ को भी अपनाया, जिसके तहत सहयोग को नई दिशा देने का संकल्प लिया गया। दोनों देशों ने समुद्री सहयोग (Maritime Cooperation) पर समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संवाद, सूचना साझा करने, समन्वय और संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। हाइड्रोग्राफी और नौवहन मानचित्रण पर भी समझौते हुए, जिनके तहत हाइड्रोग्राफिक डेटा साझा करने, संयुक्त नौवहन चार्ट तैयार करने और क्षमता निर्माण पर सहयोग किया जाएगा। इसके अलावा भारतीय नौसेना और न्यूज़ीलैंड डिफेंस फोर्स के बीच म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट अरेंजमेंट (MLSA) पर भी सहमति बनी।भारत और न्यूज़ीलैंड ने आतंकवाद से मुकाबले के लिए संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group on Counter-Terrorism) गठित करने का फैसला किया। इसके तहत आतंकवाद विरोधी सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और समन्वय को मजबूत किया जाएगा। वहीं, भारत की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और न्यूज़ीलैंड की नेशनल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (NEMA) के बीच हुए समझौते के तहत भूकंप, सुनामी, तटीय आपदाओं, नीति संवाद और क्षमता निर्माण पर मिलकर काम किया जाएगा।दोनों देशों ने पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में तकनीकी सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने पर सहमति जताई। पर्यटन सहयोग समझौते के तहत दोनों देशों के बीच पर्यटकों की आवाजाही बढ़ाने और आर्थिक व सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। भारत और न्यूज़ीलैंड ने संयुक्त खेल कार्ययोजना (Joint Action Plan on Sport) को अपनाया। इसके तहत उच्च प्रदर्शन वाले खेल, खेल विज्ञान, खेल चिकित्सा और खिलाड़ियों के विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा सांस्कृतिक सहयोग और समुद्री विरासत संरक्षण के तहत गुजरात के लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (NMHC) और न्यूज़ीलैंड मैरीटाइम म्यूज़ियम के बीच सहयोग स्थापित करने पर सहमति बनी।दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देते हुए रोडमैप-2030 अपनाया। इसके तहत अगले चार वर्षों में व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, पर्यटन, खेल, संस्कृति, कृषि प्रौद्योगिकी, जन-से-जन संपर्क और बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा दी जाएगी। हाल ही में संपन्न मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के आधार पर वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 7 अरब न्यूज़ीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी तय किया गया। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए मैरीटाइम सिक्योरिटी डायलॉग शुरू करने पर सहमति बनी। न्यूज़ीलैंड ने इंडो-पैसिफिक ओशन्स इनिशिएटिव (IPOI) के तहत समुद्री सुरक्षा को प्राथमिकता देने और अवैध, अनियंत्रित एवं अनियमित (IUU) मछली पकड़ने पर रोक लगाने के लिए सहयोग बढ़ाने की घोषणा की। वहीं, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में न्यूज़ीलैंड ने ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस में शामिल होने का ऐलान किया।कृषि उत्पादकता साझेदारी के तहत दोनों देशों ने कीवीफ्रूट एक्शन प्लान लॉन्च किया। साथ ही नागालैंड और उत्तराखंड में कीवीफ्रूट के लिए दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में गोवा स्थित नेशनल सेंटर फॉर पोलर एंड ओशन रिसर्च (NCPOR) और यूनिवर्सिटी ऑफ कैंटरबरी के बीच अंटार्कटिका अनुसंधान पर सहयोग स्थापित किया गया। इसके अलावा निफ्टेम-कुंडली (NIFTEM) और मैसी यूनिवर्सिटी के बीच शोध, छात्र आदान-प्रदान और शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने के लिए भी समझौता किया गया।
- 0- भारतीय रेलवे ने इसे बनाने के लिए 175 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी0- अवसंरचना संवर्धन की यह पहल मौजूदा परिसंपत्तियों को अनुकूलित करने, बेड़े का विस्तार करने और रखरखाव क्षमता को बढ़ाने के लिए हैनई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने लोकोमोटिव रखरखाव अवसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके अंतर्गत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) के अंतर्गत रायपुर स्थित हाई हॉर्स पावर (एचएचपी) डीजल शेड में 250 थ्री फेज इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के लिए अतिरिक्त होमिंग सुविधाएं बनाने के उद्देश्य से 175 करोड़ रुपए की परियोजना को मंजूरी दी है।होमिंग का तात्पर्य किसी लोकोमोटिव को एक निर्दिष्ट लोकोमोटिव शेड में जगह देने से है, जो उसके प्राथमिक रखरखाव केंद्र के रूप में कार्य करता है। होमिंग शेड की सुविधा लोकोमोटिव के निर्धारित रखरखाव, सुरक्षा निरीक्षण, मरम्मत और समग्र देखभाल के लिए होती है ताकि उसका सुरक्षित और कुशल संचालन सुनिश्चित हो सके।यह परियोजना भारतीय रेलवे द्वारा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बेड़े के तेजी से विस्तार और पूरे नेटवर्क में माल ढुलाई तथा यात्री परिचालन में वृद्धि के अनुरूप रखरखाव बुनियादी ढांचे को बढ़ाने की दिशा में चल रहे प्रयासों के तहत स्वीकृत की गई है।इन अतिरिक्त होमिंग सुविधाओं से भारतीय रेलवे को रायपुर डिपो में मौजूदा बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलेगी, साथ ही भविष्य में तकनीकी विस्तार के लिए आवश्यक स्थान भी उपलब्ध होगा।
-
नई दिल्ली। संचार मंत्रालय के डाक विभाग (DoP) और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने शुक्रवार को नई दल्ली में देशभर के 5.68 लाख से अधिक गांवों में मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण भारत में दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता का वास्तविक आकलन करना, डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करना और डिजिटल इंडिया अभियान को गति देना है।
एमओयू के तहत डाक विभाग के 1.40 लाख से अधिक ग्रामीण शाखा डाकघरों के नेटवर्क का उपयोग किया जाएगा। ग्रामीण डाक सेवक (GDS) अपनी नियमित डाक वितरण गतिविधियों के दौरान ट्राई द्वारा विकसित एंड्रॉयड आधारित मोबाइल ऐप के जरिए मोबाइल नेटवर्क की गुणवत्ता का सर्वे करेंगे। इस सर्वे में भारती एयरटेल, रिलायंस जियो, वोडाफोन आइडिया और बीएसएनएल सहित प्रमुख दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के नेटवर्क का आकलन किया जाएगा।यह सर्वे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गांवों को कवर करेगा। इससे मोबाइल नेटवर्क के प्रदर्शन से जुड़े विश्वसनीय जमीनी आंकड़े उपलब्ध होंगे, जिनके आधार पर दूरसंचार सेवाओं की कमियों की पहचान, नेटवर्क अवसंरचना को मजबूत करने और साक्ष्य आधारित नीतिगत निर्णय लेने में मदद मिलेगी।डाक विभाग की महाप्रबंधक (नागरिक-केन्द्रित सेवाएं एवं ग्रामीण व्यवसाय) मनीषा बंसल बादल ने कहा कि डाक विभाग ने अपनी व्यापक पहुंच और लोगों के विश्वास के बल पर विभिन्न सरकारी संस्थाओं के साथ मिलकर नागरिक-केन्द्रित सेवाओं का विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि ट्राई के साथ यह साझेदारी मजबूत और विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना तैयार करने के साथ ‘डिजिटल इंडिया’ के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को और सशक्त करेगी। ट्राई के प्रधान सलाहकार (एनएसएल) अरुण अग्रवाल ने कहा कि डाक विभाग के व्यापक फील्ड नेटवर्क के जरिए जमीनी स्तर पर नेटवर्क प्रदर्शन का व्यवस्थित और विश्वसनीय आकलन संभव होगा। इससे तथ्य आधारित नियामकीय निर्णय लेने और उपभोक्ताओं के लिए दूरसंचार सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने में मदद मिलेगी।एक वर्ष की इस साझेदारी के तहत डाक विभाग देशव्यापी फील्ड सर्वे करेगा, जबकि ट्राई मोबाइल ऐप, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और केंद्रीकृत निगरानी उपलब्ध कराएगा। इस पहल से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल संपर्क की कमियों की पहचान कर उनका समाधान करने और डिजिटल रूप से सशक्त एवं समावेशी भारत के निर्माण को गति मिलने की उम्मीद है। -
नई दिल्ली। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि ‘नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA)’ राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण पहल है। अभियान की छठी वर्षगांठ पर 18 अगस्त 2026 को देशभर में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ सामूहिक संकल्प दिलाया जाएगा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का लक्ष्य ऑफलाइन और ऑनलाइन माध्यमों से 12 करोड़ से अधिक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का नेतृत्व करने की संभावना है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव (मादक पदार्थ निवारण) डॉ. संदीप रेवाजी राठौड़ की अध्यक्षता में राष्ट्रीय राजधानी में उच्चस्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने देशव्यापी संकल्प कार्यक्रम की कार्ययोजना और समन्वित रणनीति पर चर्चा की।बैठक में अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, अभिभावकों, स्वयंसेवकों और अन्य हितधारकों को अभियान से जोड़ने की रणनीति पर विचार किया गया। रेल, रक्षा, पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF), आयुष मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, राजस्व विभाग, सामाजिक एवं आध्यात्मिक संगठनों, सोशल इन्फ्लुएंसर्स, शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों और क्षेत्रीय इकाइयों में संकल्प समारोह आयोजित करने पर सहमति बनी। बैठक में सभी संबंधित मंत्रालयों और विभागों में नोडल अधिकारी नियुक्त करने तथा प्रतिभागियों की संख्या और जन-जागरूकता गतिविधियों की निगरानी के लिए एक समान रिपोर्टिंग तंत्र विकसित करने पर भी चर्चा की गई। इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की गई।मंत्रालय ने नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 के व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया। साथ ही नागरिकों को विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ‘नशा मुक्ति मित्र’ के रूप में पंजीकरण कराने और नशे से प्रभावित लोगों की मदद के लिए स्वयंसेवी भावना विकसित करने पर भी जोर दिया गया। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने 15 अगस्त 2020 को ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ की शुरुआत की थी। पहले यह अभियान 272 संवेदनशील जिलों में शुरू किया गया था, जो अब पूरे देश में फैल चुका है। अब तक अभियान के माध्यम से 29.26 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई जा चुकी है। इनमें 11.17 करोड़ से अधिक युवा, 7.90 करोड़ महिलाएं तथा 28.30 लाख से अधिक लोगों का उपचार एवं पुनर्वास शामिल है। देशभर के 21.34 लाख से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में भी जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने कहा कि यह अभियान स्वस्थ, जागरूक और अनुशासित युवा शक्ति के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है, जो विभिन्न एजेंसियों और संगठनों को एक साझा मंच पर लाकर नशामुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने इसे साक्ष्य-आधारित राष्ट्रीय अभियान बताया, जबकि राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा ने कहा कि यह अभियान युवाओं, महिलाओं और समुदाय की भागीदारी के माध्यम से नशामुक्त और स्वस्थ समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।



























