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नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल खुद विकास के नए प्रतिमान गढ़ रहा है, बल्कि वसुधैव कुटुंबकम की भावना के तहत पूरे विश्व को एक परिवार मानते हुए उसके कल्याण के लिए भी निरंतर कार्य कर रहा है मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत विश्व कल्याण की दिशा में भी अपनी ओर से भरसक योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की शासन व्यवस्था का मुख्य ध्येय सामाजिक कल्याण रहा है और यह लगातार विचार किया जा रहा है कि वैश्विक समुदाय के हित में भारत किस प्रकार योगदान दे सकता है।केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत कृषि क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि आज भारत चावल उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर पहुंच चुका है। यह उपलब्धि हरित क्रांति के दौर से भी तेज गति से किए गए कृषि विकास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान कई अहम बिंदु सामने आए, जिन पर कृषि मंत्रालय तेजी से काम कर रहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि घटिया कीटनाशकों के कारण उन्हें भारी नुकसान हो रहा है और उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है। इसे देखते हुए पेस्टिसाइड एक्ट और सीड एक्ट पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसानों के हितों को कोई नुकसान न पहुंचे और उन्हें इसका निरंतर लाभ मिलता रहे। इस संबंध में सुझाव भी मांगे गए हैं, जिन पर आगे कार्रवाई की जा रही है।केंद्रीय कृषि मंत्री ने मनरेगा को लेकर कहा कि सरकार ने इस योजना में कई अहम बदलाव किए हैं। पहले मनरेगा के तहत किसानों और मजदूरों को 100 दिनों का रोजगार मिलता था, जिसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य किसानों और मजदूरों को व्यापक स्तर पर लाभ पहुंचाना और उनके हितों की पूरी तरह रक्षा करना है।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस रूपरेखा के तहत काम करने से आने वाले दिनों में गरीबी मुक्त गांवों का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत और ग्राम विकास से जुड़ी योजनाओं से मजदूरों और किसानों- दोनों को लाभ होगा और गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। -
नई दिल्ली। इंडिया–यूरोपीय यूनियन (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे भारत के वैश्विक व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण और रणनीतिक उपलब्धि बताया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यूरोपीय नेताओं की भारत यात्रा के दौरान आयोजित 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन में इस एफटीए को संपन्न करने की संयुक्त घोषणा की थी। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद और देशवासियों को बधाई दी है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत–यूरोपीय व्यापार समझौता भारत के वैश्विक व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक मंच पर दूरदर्शी कूटनीति का सशक्त उदाहरण है, जो पारस्परिक लाभ और संतुलित साझेदारी को सुनिश्चित करता है।अमित शाह ने कहा कि यह एफटीए सभी पक्षों के लिए लाभकारी समझौतों के माध्यम से भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को और मजबूत करता है। उन्होंने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री मोदी को हार्दिक धन्यवाद दिया और भारत की जनता को बधाई दी।इस एफटीए के जरिए भारत और यूरोपीय संघ खुले बाजारों, पूर्वानुमान-आधारित और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित होंगे। यह समझौता 2022 में वार्ता के पुनः शुरू होने के बाद गहन चर्चा और लंबे संवाद के उपरांत संपन्न हुआ है।एफटीए की घोषणा भारत और यूरोपीय संघ के बीच वर्षों की निरंतर बातचीत और सहयोग की परिणति मानी जा रही है। यह एक संतुलित, आधुनिक और नियम-आधारित आर्थिक व व्यापार साझेदारी के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और साझा दृष्टिकोण को दर्शाता है।यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में शामिल है। वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ वस्तुओं में भारत का द्विपक्षीय व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपए (136.54 बिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा, जिसमें 6.4 लाख करोड़ रुपए (75.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का निर्यात और 5.1 लाख करोड़ रुपए (60.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का आयात शामिल है।सेवा क्षेत्र में भारत–यूरोपीय संघ का व्यापार 2024 में 7.2 लाख करोड़ रुपए (83.10 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया, जो दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ते भरोसे और सहयोग को दर्शाता है।भारत और यूरोपीय संघ क्रमशः दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। दोनों मिलकर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के करीब 25% और वैश्विक व्यापार के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में इन दो बड़ी, विविध और एक-दूसरे की पूरक अर्थव्यवस्थाओं के एक साथ आने से व्यापार और निवेश के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे। -
नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारतीय गणराज्य की असली ताकत इसी में निहित है कि शासन आम नागरिकों के लिए काम करे। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर लिखे अपने लेख में उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र केवल संविधान और चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि तब सार्थक होता है जब उसका लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे।
रक्षा मंत्री ने भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 1952 के ऐतिहासिक भाषण को याद करते हुए कहा कि आजादी और संविधान मिलना कोई अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा की शुरुआत थी। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र का असली उद्देश्य लोगों की मुश्किलों को कम करना और उनके जीवन में खुशहाली लाना होना चाहिए।राजनाथ सिंह ने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ केवल ‘जनता का’ और ‘जनता द्वारा’ शासन नहीं है, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण है ‘जनता के लिए’ शासन। यानी सरकार का हर निर्णय आम नागरिकों के हित में होना चाहिए, विशेषकर गरीबों, वंचितों और कमजोर वर्गों के लिए।उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की वास्तविक परीक्षा यह है कि वह अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ कैसा व्यवहार करता है। केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, जरूरी यह है कि सरकार जमीनी स्तर पर लोगों की जरूरतों को कितनी प्रभावी ढंग से पूरा कर पाती है।रक्षा मंत्री ने भारतीय चिंतन परंपरा का उल्लेख करते हुए योग-क्षेम, महात्मा गांधी के सर्वोदय और दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद को जन-केंद्रित शासन की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ इसी विचारधारा की आधुनिक अभिव्यक्ति है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हुए कार्यों का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि बीते 12 वर्षों में नीतियों को सीधे आम आदमी के जीवन से जोड़ा गया है। श्रम कानूनों में सुधार, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण और सामाजिक न्याय पर जोर इसी दिशा में उठाए गए अहम कदम हैं।उन्होंने विश्व बैंक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पिछले एक दशक में 17 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं। दिव्यांगों और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े कानूनों को भी उन्होंने सम्मान और समानता की दिशा में बड़ा कदम बताया।स्वच्छ भारत मिशन पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह केवल सफाई अभियान नहीं रहा, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक बड़ा आंदोलन बना, जिसने स्वास्थ्य, सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को मजबूती दी। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, जीवन ज्योति बीमा योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना, मुद्रा योजना और कौशल भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने करोड़ों लोगों को सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान प्रदान किया है।राजनाथ सिंह ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलने से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा नीति-निर्माण में महिलाओं की भूमिका और प्रभावी बनेगी।लेख के अंत में रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय गणराज्य कोई एक बार पूरा हो जाने वाला कार्य नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। हर पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह लोकतंत्र को जमीनी हकीकत से जोड़े। उन्होंने कहा कि आज देश में शासन के केंद्र में आम नागरिक हैं और भारत सामाजिक न्याय तथा आर्थिक समावेशन के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रहा है। -
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में सोमवार को इंटरनेशनल बॉर्डर पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को मार गिराया।अधिकारियों ने बताया कि रविवार देर रात इंटरनेशनल बॉर्डर पर भारतीय सैनिकों ने एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को गोली मार दी।घुसपैठिया रामगढ़ सेक्टर के माजरा इलाके में एक बॉर्डर चौकी से भारतीय इलाके में घुसने की कोशिश कर रहा था, तभी चौकस बीएसएफ जवानों ने उसकी हरकत देख ली।
अधिकारियों ने बताया कि बीएसएफ जवानों ने घुसपैठिए को चुनौती और चेतावनी दी। हालांकि, जब उसने चेतावनियों को नजरअंदाज किया और अंधेरे का फायदा उठाकर भारतीय सीमा की तरफ बढ़ता रहा, तो सैनिकों ने गोली चला दी, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने आगे बताया, “मारे गए पाकिस्तानी नागरिक का शव इंटरनेशनल बॉर्डर के पास पाकिस्तान की तरफ पड़ा है।”जम्मू और कश्मीर में सांबा, कठुआ और जम्मू जिलों में 240 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल बॉर्डर है। बीएसएफ भारत की तरफ इंटरनेशनल बॉर्डर की रखवाली करती है, जबकि दूसरी तरफ पाकिस्तानी रेंजर्स इसकी रखवाली करते हैं।इस केंद्र शासित प्रदेश में कश्मीर के बारामूला, बांदीपोरा और कुपवाड़ा जिलों और पुंछ, राजौरी और कुछ हद तक जम्मू जिलों में 740 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ कंट्रोल है। सेना लाइन ऑफ कंट्रोल की रखवाली करती है। सेना और बीएसएफ की ड्यूटी बॉर्डर पर घुसपैठ, सीमा पार तस्करी और पाकिस्तान की तरफ से होने वाली ड्रोन गतिविधियों को रोकने के लिए लगाई गई है।इन ड्रोन का इस्तेमाल आतंकी संगठन पाकिस्तानी सेना की मदद से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बनाए रखने के लिए हथियार/गोला-बारूद, कैश और ड्रग्स गिराने के लिए करते हैं। इन पेलोड्स को आतंकी संगठनों के ओवरग्राउंड वर्कर उठाते हैं और आतंकवादियों तक पहुंचाते हैं।जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षा बल अंदरूनी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाते हैं। इन अभियानों में तस्करी विरोधी अभियान भी शामिल हैं। माना जाता है कि ड्रग तस्करी और हवाला मनी रैकेट से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को बनाए रखने के लिए किया जाता है। - नई दिल्ली। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार और लोगों को अपनी और रानी कैमिला की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच स्थायी और घनिष्ठ संबंधों की सराहना की।राष्ट्रपति मुर्मु को लिखे पत्र में किंग ने भारत और ब्रिटेन के बीच पक्की साझेदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह कॉमनवेल्थ को बताने वाले शेयर्ड वैल्यूज और आपसी सम्मान पर आधारित है। उन्होंने दुनिया भर में समझ, सहयोग और मौके को बढ़ावा देने में कॉमनवेल्थ मेंबर देशों की भूमिका पर भी गर्व जताया।पत्र में लिखा गया, “कॉमनवेल्थ की रिच डायवर्सिटी और इसकी युवा जेनरेशन की एनर्जी उम्मीद और विकास को प्रेरित करती रहती है। वैश्विक अस्थिरता के इस समय में, हमारी कलेक्टिव स्ट्रेंथ और यूनिटी पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है। मुझे बहुत खुशी है कि हमारे देश नवंबर में एंटीगुआ और बारबुडा में अगली कॉमनवेल्थ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट मीटिंग में एक साथ आएंगे, जहां हम अपने साझा कमिटमेंट्स की फिर से पुष्टि करेंगे और फ्यूचर के लिए एक कलेक्टिव विज़न सेट करेंगे।”पत्र में आगे कहा गया, “मैं इस साल गर्मियों में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स का भी इंतजार कर रहा हूं और अहमदाबाद में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स को सिक्योर करने के लिए आपको बधाई देता हूं।”किंग चार्ल्स ने क्लीन एनर्जी इनिशिएटिव, क्लाइमेट फाइनेंस पर सहयोग, और क्लीन टेक्नोलॉजी और ग्रीन ग्रोथ पर इनिशिएटिव के ज़रिए क्लाइमेट और सस्टेनेबिलिटी में भारत-ब्रिटेन साझेदारी को गहरा करने का स्वागत किया। उन्होंने कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे इनिशिएटिव के जरिए भारत की इंटरनेशनल क्लाइमेट लीडरशिप की तारीफ की।पत्र के अंत में लिखा था, “भारत इस जरूरी काम के लिए एक मजबूत वैश्विक आवाज है, और हमारा सहयोग एक खुशहाल, सुरक्षित और स्थिर दुनिया बनाने के साझा इरादे को दिखाता है। मैं और मेरी पत्नी आपको और भारत के सभी लोगों को आने वाले शांतिपूर्ण और खुशहाल साल की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देते हैं।”भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है, जो 1950 में संविधान को औपचारिक रूप से अपनाने और लागू करने की याद में है, जिसने देश के एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य में बदलाव को दिखाया। यह मौका संविधान में दिए गए न्याय, बराबरी, आज़ादी और भाईचारे के मुख्य सिद्धांतों को फिर से पक्का करता है।
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नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस समारोह में देश की मजबूत होती स्वदेशी सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता व जन भागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला। कर्तव्य पथ पर शानदार परेड आयोजित की गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया। यूरोपीय यूनियन के दो बड़े नेता एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डर लेयेन मुख्य अतिथि रहे।
इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल, देश की तरक्की, स्वदेशी सैन्य उपकरण, सेना की ताकत, भारत की संस्कृति और आम लोगों की भागीदारी सब कुछ एक साथ देखने को मिला। जहां एक ओर सेना ने गणतंत्र दिवस परेड में स्वदेशी रक्षा प्रणालियां प्रदर्शित की, वहीं दूसरी ओर 10 हजार से ज्यादा विशेष अतिथियों की मौजूदगी ने देश के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व किया। इस वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल हुई झांकियों की थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ तथा ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ रही।कर्तव्य पथ पर समारोह की शुरुआत 100 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति से हुई। इसमें अलग-अलग राज्यों की झलक दिखी। वहीं आसमान से चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर्स ने फूल बरसाए। परेड में भारतीय सेना का युद्ध वाला रूप खास तौर पर दिखाया गया। यहां कर्तव्य पथ पर परेड में स्वदेशी टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक डॉग्स नजर आए। इसके अलावा टी-90 भीष्म और अर्जुन टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टर व स्पेशल फोर्सेज की मौजूदगी ने भी लोगों को रोमांचित किया।एक खास झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ दिखाया गया। इसके माध्यम से बताया गया कि कैसे सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर दुश्मन को जवाब देती हैं। भारतीय नौसेना की झांकी में पुराने जहाजों से लेकर आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत तक की कहानी दिखाई गई। वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने आसमान में शानदार फ्लाई-पास्ट किया। तटरक्षक बल की महिला टुकड़ी भी परेड का हिस्सा बनी। कर्तव्य पथ पर देश के 17 विभिन्न राज्यों और 13 मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां निकाली गईं।इन झांकियों में संस्कृति, आत्मनिर्भर भारत, कृषि, तकनीक और आजादी की कहानी दर्शायी गई। कई झांकियों के माध्यम से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया गया। साथ ही आत्मनिर्भरता के आधार पर देश की प्रगति, सांस्कृतिक विविधता, विरासत, नवाचार और विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया। गणतंत्र दिवस समारोह में इस साल करीब 10,000 खास मेहमान भी आमंत्रित थे। ये मेहमान किसान, वैज्ञानिक, स्टार्ट-अप करने वाले युवा, खिलाड़ी, महिला समूह, आदिवासी प्रतिनिधि और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग थे।इनमें गगनयान, चंद्रयान जैसे इसरो अभियानों से जुड़े उत्कृष्ट वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ, डीप ओशन मिशन तथा समस्थानिक अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, अटल टिंकरिंग लैब्स के उत्कृष्ट विद्यार्थी, किसान व ‘मन की बात’ कार्यक्रम के प्रतिभागी शामिल थे। ये विशिष्ट अतिथि देश के विभिन्न क्षेत्रों से आमंत्रित किए गए थे। इनमें वे नागरिक भी शामिल रहे जिन्होंने रोजगार सृजन, नवाचार, अनुसंधान, खेल, कृषि, विज्ञान, सामाजिक सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।इस पहल का उद्देश्य राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले नागरिकों को सम्मानित करना तथा राष्ट्रीय आयोजनों में जन-भागीदारी को और सशक्त बनाना था। कर्तव्य पथ पर इन विशिष्ट अतिथियों के बैठने की विशेष व्यवस्था की गई थी। वहीं राज्यों की झांकियों की बात करें तो असम की मनमोहक झांकी में आशारिकांडी यानी असम के टेराकोटा शिल्प ग्राम को दर्शाया गया था। गुजरात की झांकी स्वदेशी का मंत्र: आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता – वंदे मातरम् पर आधारित थी। हिमाचल प्रदेश की झांकी में देव भूमि, वीर भूमि के दर्शन हुए। जम्मू-कश्मीर की झांकी जम्मू-कश्मीर के हस्तशिल्प और लोकनृत्य को समर्पित रही।मणिपुर की झांकी ‘समृद्धि की ओर: कृषि क्षेत्रों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक’ की थीम पर केंद्रित थी। ओडिशा अपनी झांकी के माध्यम से मिट्टी से सिलिकॉन तक: परंपरा में निहित, नवाचार के साथ उन्नति को दर्शा रहा था। तमिलनाडु की झांकी में समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाई दी। उत्तर प्रदेश ने इस बार अपनी झांकी में बुंदेलखंड की संस्कृति को प्रदर्शित किया। मध्य प्रदेश की झांकी पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर पर आधारित रही।वहीं, पंजाब की झांकी श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत के 350 वर्ष पर केंद्रित थी। वायु सेना मुख्यालय ने अपनी झांकी में ‘पूर्व सैनिक झांकी: युद्ध के माध्यम से राष्ट्र निर्माण’ को दिखाया। त्रि-सेवा झांकी में ऑपरेशन सिंदूर, संयुक्तता से विजय को प्रदर्शित किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020: विकसित भारत की ओर अग्रसर भारतीय स्कूली शिक्षा पर आधारित झांकी प्रदर्शित की। -
नई दिल्ली। कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह में वायुसेना का फ्लाई पास्ट इस बार बेहद महत्वपूर्ण रहा। वायुसेना के जांबाज फाइटर पायलटों ने कर्तव्य पथ के ऊपर आसमान में ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन बनाया। यह फॉर्मेशन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को समर्पित था। फ्लाई-पास्ट गणतंत्र दिवस परेड के सबसे ज्यादा इंतजार वाले कार्यक्रमों में से एक है। इस वर्ष फ्लाई-पास्ट में कुल 29 विमान शामिल हुए। फ्लाई-पास्ट करने वाले विमानों में 16 फाइटर विमान भी शामिल थे। वहीं वायुसेना के चार ट्रांसपोर्ट विमान और नौ हेलीकॉप्टर भी इस शानदार फ्लाई-पास्ट में शामिल हुए।
गणतंत्र दिवस समारोह में किए गए फ्लाई-पास्ट में वायुसेना के राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिग-29 और जगुआर विमान शामिल रहे। साथ ही रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण सी-130 और आधुनिक सी-295 सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान भी इसका हिस्सा बने। आसमान में इन विमानों की गर्जना ने यहां मौजूद लोगों को रोमांचित कर दिया। वायुसेना के विमानों ने फ्लाई-पास्ट के दौरान अर्जन फॉर्मेशन, वज्रांग फॉर्मेशन, वरुण फॉर्मेशन और विजय फॉर्मेशन भी बनाया।वहीं ‘सिंदूर’ फॉर्मेशन में 2 राफेल, 2 मिग 29, दो सुखोई-30 और एक जैगुआर विमान नजर आए।बताते चलें कि भारतीय सेनाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत बीते साल पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कुल नौ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था। पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को नष्ट करने वाले ये भारतीय लड़ाकू विमान अब इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड के अवसर पर उड़ान भरते हुए दिखाई दिए।गौरतलब हो, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत इन भारतीय लड़ाकू विमानों ने ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। फ्लाई पास्ट में भारतीय वायुसेना के चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर ध्वज फॉर्मेशन में नजर आए। ये हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज, आर्मी, नेवी और भारतीय वायुसेना के ध्वज लहराते हुए नजर आए। अपने इस बेहतरीन प्रदर्शन के जरिए भारतीय वायुसेना ने गणतंत्र दिवस समारोह में अनुशासन, नेतृत्व और पेशेवर उत्कृष्टता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से लेकर कर्तव्य पथ पर होने वाली भव्य परेड तक, वायुसेना के अधिकारी एवं बैंड महत्वपूर्ण भूमिकाओं में उपस्थित रहे। श्रद्धांजलि समारोह में स्क्वाड्रन लीडर हेमंत सिंह कन्यार गार्ड ऑफ ऑनर के कमांडर रहे। मुख्य गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान फ्लाइट लेफ्टिनेंट अक्षिता ढांकर ने कर्तव्य पथ पर ध्वजारोहण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।गणतंत्र दिवस 2026 ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली 150 वर्षों को समर्पित रहा। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की स्पष्ट व प्रभावी छाप दिखाई दी। वायुसेना के बैंड ने इससे जुड़ी धुनें बजाईं। परेड में विभिन्न सर्विसिस की कुल 18 मार्चिंग टुकड़ियां और 13 बैंड शामिल हुईं। परेड के तुरंत बाद वायुसेना के राफेल, सुखोई-30, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच, एमआई-17 जैसे विमान व हेलीकॉप्टर फ्लाईपास्ट करते हुए दिखाई दिए। गणतंत्र दिवस परेड में तीनों सेनाओं के स्वदेशी उपकरण एवं हथियार भी प्रदर्शित किए गए। -
नई दिल्ली। भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। 77वें गणतंत्र दिवस के आयोजन समारोह में यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। उर्सुला ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान बताया।
कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “गणतंत्र दिवस समारोह में चीफ गेस्ट बनना जिंदगी का सबसे बड़ा सम्मान है। एक सफल भारत दुनिया को ज्यादा स्थिर, खुशहाल और सुरक्षित बनाता है और हम सभी को फायदा होता है।”बता दें, ईयू के दोनों बड़े नेता भारत पहुंचे हुए हैं, जहां 27 जनवरी को 16वें ईयू-भारत शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जिसकी मेजबानी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस मौके पर दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते का ऐलान भी हो सकता है।यूरोपीय देश परंपरागत तौर पर अमेरिका के करीब रहे हैं। ईयू-यूएस मिलकर वैश्विक आर्थिक उत्पादन के 40 फीसदी से ज्यादा और विश्व व्यापार के लगभग एक तिहाई हिस्से के साझेदार हैं। हालांकि, अमेरिकी सत्ता में राष्ट्रपति ट्रंप की वापसी के बाद से ‘टैरिफ बम’ ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित किया है। आज यूरोप यूएस से इतर भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के लिए उत्साहित है और वह एक स्थिर साझेदार के रूप में भारत की ओर उम्मीद की नजरों से देख रहा है।दिल्ली में रविवार को दोनों ईयू नेताओं को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके अलावा सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने से पहले उर्सुला और कोस्टा ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की थी।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुलाकात की तस्वीरें साझा कर लिखा, “ईयू काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और ईयू कमीशन की अध्यक्ष वॉन डेर लेयेन का भारत में स्वागत करते हुए बहुत खुशी हो रही है। 77वें रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन के लिए उन्हें चीफ गेस्ट के तौर पर बुलाना हमारे लिए बहुत खुशी की बात है। मुझे यकीन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी आने वाली बातचीत भारत-यूरोपियन यूनियन के संबंधों में एक नया अध्याय शुरू करेगी।”बता दें, इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारत-ईयू: भरोसे और भरोसे की साझेदारी। यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा का भारत के राजकीय दौरे पर नई दिल्ली पहुंचने पर दिल से स्वागत है। वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनका स्वागत किया। -
नई दिल्ली। कर्तव्य पथ पर सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान वायु सेना के हेलीकॉप्टरों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का झंडा दिखाकर दुनिया को भारत की उस बहादुरी की याद दिलाई, जो पिछले साल आतंकियों के खिलाफ दिखाई गई थी। इस मौके पर भारतीय रक्षा बलों की ट्राई-सर्विसेज झांकी भी दिखाई गई, जिसकी थीम थी ‘ऑपरेशन सिंदूर: एकजुटता से जीत’। यह झांकी देश की सुरक्षा की रक्षा में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की सामूहिक ताकत, एकता और बेहतरीन तालमेल का प्रतीक थी।
इस प्रदर्शन में, इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को उजागर किया, जिसमें मिशन के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के समन्वित और तालमेल वाले प्रयासों पर जोर दिया गया। इस ऑपरेशन की योजना राष्ट्रीय और सैन्य नेतृत्व द्वारा प्रभावी ढंग से बनाई गई। इस मिशन की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह सेनाओं के बीच का आपसी तालमेल और वहां के स्थानीय लोगों का भरपूर साथ था।‘विरासत, विविधता और विकास’ के मेल को ऑपरेशन सिंदूर की एक खास पहचान के तौर पर दिखाया गया।जहां ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम ने दुश्मन के ठिकानों पर निर्णायक हमले किए, वहीं आकाश मिसाइल सिस्टम और एस-400 एयर डिफेंस नेटवर्क ने ‘सुदर्शन चक्र’ की अवधारणा के तहत आम नागरिकों को एक मज़बूत सुरक्षा कवच दिया।झांकी के कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट्स सेगमेंट में, दिव्यास्त्र को शक्तिबाण के साथ दिखाया गया। हाई मोबिलिटी व्हीकल्स पर लगे ये प्लेटफॉर्म भारतीय सेना का स्वदेशीकरण और तकनीकी आधुनिकीकरण पर बढ़ते जोर को दिखाते हैं। सर्विलांस और टारगेटिंग के इंटीग्रेटेड कॉन्सेप्ट पर बने ये सिस्टम सेना के टेक्नोलॉजी-आधारित और सटीक युद्ध की ओर बढ़ने में एक बड़ी छलांग हैं।शक्तिबाण और दिव्यास्त्र में झुंड वाले ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित हाइब्रिड लगे हैं, जो तोपखाने की फायरिंग की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्लेटफॉर्म ग्रुप ड्रोन, सटीक हमले के मिशन के लिए लंबी दूरी के ड्रोन और प्रभावी युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए लोइटरिंग म्यूनिशन की तैनाती को संभव बनाते हैं।शक्तिबाण वाहन की कमान 161 मीडियम रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट रमन मिश्रा ने संभाली थी, जबकि दिव्यास्त्र वाहन की कमान उसी रेजिमेंट के सूबेदार किरण मेदार ने संभाली थी, जो इसमें शामिल भारतीय सेना के जवानों की ऑपरेशनल तैयारी और प्रोफेशनलिज्म को दिखाता है।ज्ञात हो, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 100 से ज़्यादा आतंकवादियों को मार गिराया गया था – यह सैन्य कार्रवाई मई 2025 में की गई थी, जिसे 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में लॉन्च किया गया था, जिसमें 26 बेगुनाह लोगों की जान चली गई थी। - नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस परेड में सोमवार को पहली बार भारतीय सेना ने ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट का प्रदर्शन किया। ‘बैटल एरे’ यानी रणभूमि व्यूह रचना। इसके माध्यम से दिखाया गया कि कैसे जंग के समय सेना आगे बढ़ती है, हमला कैसे किया जाता है और कैसे दुश्मन को जवाब देते हैं।कर्तव्य पथ पर यह सब कुछ एक ही जगह देखने को मिला। यहां ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक भी दिखाई दी। यह पूरा प्रदर्शन ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की सफलता को भी एक गर्व भरा सलाम था। वहीं सेना के खास टैब्लो ने एक इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस सेंटर को दिखाया। यहां से पूरी जंग की योजना बनती है। इसमें दिखाया गया कि कैसे रियल-टाइम में टारगेट तय होते हैं, हमला होता है और ‘सुदर्शन चक्र’ जैसी वायु रक्षा से देश की सुरक्षा होती है। वहीं इसमें हवाई घटक भी शामिल रहे।रेकी एलिमेंट में 61 कैवलरी एक्टिव कॉम्बैट यूनिफॉर्म में रही। इसके बाद हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल था, जो भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल है। हवाई सहायता के रूप में स्वदेशी ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर और इसका आर्म्ड वर्जन रुद्र प्रहार फॉर्मेशन था। यह युद्धक्षेत्र में निर्णायक पहल का प्रदर्शन करता है। इसके बाद कॉम्बैट एलिमेंट्स यानी युद्ध में अग्रणी भूमिका निभाने वाले टैंक आए। इनमें टी-90 भीष्म और मेन बैटल टैंक अर्जुन सलामी मंच के सामने से गुजरे। वहीं अपाचे एएच-64 ई और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर से इन्हें हवाई सहायता मिली। अन्य मैकेनाइज्ड कॉलम में बीएमपी-2 इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल, साथ में नाग मिसाइल सिस्टम (ट्रैक्ड) एमके-2 शामिल रही।अब तक परेड में सैन्य मार्चिंग टुकड़ियां और हथियार अलग-अलग नजर आते रहे हैं। हालांकि इस बार जंग के असली क्रम जैसी तैयारी देखने को मिली। यानी दुश्मन पर नजर रखने वाले सिस्टम, टैंक और पैदल सेना, उसके साथ ही तोपखाना, मिसाइलें, हेलीकॉप्टर और अंत में सप्लाई व सुरक्षा व्यवस्था। इससे साफ दिखा कि भारतीय सेना कितनी तैयार, मजबूत और फुर्तीली है। यहां सेना द्वारा हाई-टेक और स्वदेशी ताकत का प्रदर्शन किया गया। इसके बाद स्पेशल फोर्सेज की टुकड़ी कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ी। इस टुकड़ी में अजयकेतु ऑल-टेरेन व्हीकल, रणध्वज रग्ड टेरेन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और धवंशक लाइट स्ट्राइक व्हीकल शामिल थे।इनके बाद वाहनों पर लगे रोबोटिक डॉग, मानवरहित ग्राउंड व्हीकल और चार ऑटोनॉमस मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (निग्रह, भैरव, भुविरक्षा और कृष्णा) नजर आए। कॉम्बैट सपोर्ट एलिमेंट में भारत की नई पीढ़ी के मानवरहित वॉरहेड हथियार शामिल थे। उन्हें शक्तिबाण और दिव्यास्त्र के जरिए दिखाया गया, जो खास हाई मोबिलिटी व्हीकल्स पर लगे हुए थे। अत्याधुनिक तकनीकों से लैस, ये एक साथ झुंड में ड्रोन, टेथर्ड ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी रूप से विकसित टैक्टिकल हाइब्रिड यूएवी जोल्ट के जरिए एडवांस्ड सर्विलांस दिखाते हैं। इनका इस्तेमाल तोपखाने की फायरिंग को निर्दिष्ट करने के लिए किया जाता है।बैटल एरे में यह भी दिखाया गया कि आज की भारतीय सेना सिर्फ बंदूक और टैंक तक सीमित नहीं है। अब जंग डेटा, ड्रोन और टेक्नोलॉजी से लड़ी जाती है। सेना ने दिखाया कि कैसे वह दूर बैठकर भी दुश्मन पर नजर रखती है, सही वक्त पर फैसला लेती है और फिर सटीक हमला करती है। खास बात यह है कि यह हमला पूरी तरह स्वदेशी हथियारों और सिस्टम के दम पर किया जाता है। इस बार परेड में कई नए यूनिट और हथियार पहली बार नजर आए, जैसे कि पहली बार भैरव बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी परेड में शामिल हुए। 155 मिमी एटीएजीएस तोप, लंबी दूरी तक मार करने वाला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, ड्रोन, रोबोटिक डॉग, बिना चालक वाले वाहन और लुटेरिंग म्यूनिशन भी पहली बार देश की जनता के सामने आए।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली में नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीद नायकों को श्रद्धांजलि देकर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत की। समारोह में पीएम मोदी ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और देश के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने में देश का नेतृत्व किया। इंटर-सर्विसेज गार्ड्स, जिसमें एक अधिकारी और 21 इनर गार्ड्स (हर सर्विस से सात) शामिल थे ने सम्मान देने के लिए ‘सलामी शस्त्र’ और उसके बाद ‘शोक शस्त्र’ की परंपराओं का पालन किया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी भी मौजूद थे। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ भी पुष्पांजलि समारोह के दौरान मौजूद थे। इस अवसर पर पीएम मोदी ने डिजिटल नोटबुक में अपने विचार भी व्यक्त किए।इससे पहले दिन, प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि यह राष्ट्रीय त्योहार नागरिकों में नई ऊर्जा और उत्साह भरेगा और विकसित भारत बनाने के सामूहिक संकल्प को और मजबूत करेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई। भारत की आन-बान और शान का प्रतीक यह राष्ट्रीय महापर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और नए उत्साह का संचार करे। विकसित भारत का संकल्प और अधिक सुदृढ़ हो, यही कामना है।”इस दिन के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने एक अन्य संदेस में कहा, “गणतंत्र दिवस हमारी आजादी, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक मजबूत प्रतीक है। यह त्योहार हमें राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा देता है।” यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस साल की गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि होंगे।इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो शो ‘मन की बात’ के प्रतिभागी, कर्तव्य भवन के निर्माण मज़दूर, लखपति दीदी और अलग-अलग क्षेत्रों के लगभग 10 हजार अन्य खास मेहमान गणतंत्र दिवस परेड देखेंगे।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, खास मेहमानों की लिस्ट में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने इनकम और रोजगार पैदा करने में बेहतरीन काम किया है, बेस्ट इनोवेटर्स, रिसर्चर्स और स्टार्टअप्स, सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स और सरकार की मुख्य पहलों के तहत सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले लोग शामिल हैं।इस साल की गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम’ के 150 साल, भारत की सैन्य शक्ति, जिसमें ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलें शामिल हैं, और 30 शानदार झांकियों के ज़रिए समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के बाद होने वाली यह पहली गणतंत्र दिवस परेड है, जिसमें अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और 29 विमानों के शानदार फ्लाईपास्ट के जरिए सैन्य शक्ति का खास प्रदर्शन किया जाएगा। गणतंत्र परेड में अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और 2,500 कलाकारों द्वारा शानदार सांस्कृतिक प्रदर्शन होगा, जो वंदे मातरम और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जश्न मनाएंगे। -
नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। ‘स्वतंत्रता का मंत्र- वंदे मातरम्’ थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती नजर आई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रियों और विशिष्ट अतिथियों ने झांकी को उत्सुकता के साथ देखा और तालियां बजाकर सराहना की। दर्शक दीर्घा में मौजूद लाखों लोगों ने भी तालियों की गड़गड़ाहट के साथ छत्तीसगढ़ की झांकी का स्वागत किया। झांकी के समक्ष छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थापित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की झलक दिखाई गई, जहां छत्तीसगढ़ सहित देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों के माध्यम से संरक्षित किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया। धुर्वा समाज के इस महान योद्धा ने अन्यायपूर्ण अंग्रेजी शासन के विरुद्ध जनजातीय समाज को संगठित किया। विद्रोह के प्रतीक के रूप में आम की टहनियां और सूखी मिर्च को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। विद्रोह की तीव्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे।झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया। उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई। पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती रही और गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर देश के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व किया। जैसे ही तिरंगा फहराया गया, राष्ट्रगान की मधुर धुन गूंजी और स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गनों से 21 तोपों की सलामी दी गई, जिससे पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में रंग गया।
इस अवसर पर राष्ट्रपति के साथ यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों अतिथियों का सलामी मंच पर स्वागत किया। परंपरा के अनुसार, राष्ट्रपति और मुख्य अतिथियों को भारतीय सेना की सबसे वरिष्ठ रेजिमेंट ने कर्तव्य पथ तक पहुंचाया। पीएम मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का भी स्वागत किया।इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्षों की झलक, देश की सैन्य ताकत और भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। परेड में ब्रह्मोस और आकाश मिसाइलों जैसे आधुनिक हथियारों के साथ 30 रंग-बिरंगी झांकियां भी शामिल होंगी।यह परेड पिछले वर्ष हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पहली बार आयोजित की जा रही है, जिसमें अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म और 29 विमानों की भव्य फ्लाईपास्ट विशेष आकर्षण होगी। फ्लाईपास्ट में राफेल, सुखोई-30, पी-8आई, सी-295, मिग-29, अपाचे, एलसीएच, एएलएच, और एमआई-17 जैसे विमान अलग-अलग संरचनाओं में आसमान में करतब दिखाएंगे।गणतंत्र दिवस परेड में करीब 2,500 कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुति देंगे, जो ‘वंदे मातरम’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की भावना को दर्शाएंगे। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के प्रतिभागी, कर्तव्य भवन के निर्माण कार्य में लगे श्रमिक, लखपति दीदी और लगभग 10,000 विशेष अतिथि भी परेड देखने पहुंचे हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन अतिथियों में रोजगार सृजन, नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप, स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोग शामिल हैं। -
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांति कालीन वीरता सम्मान ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।
शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन की यात्रा की और 2025 में अपनी स्पेस फ्लाइट पूरी की थी। विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद वह अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने थे। इस मिशन के दौरान उन्होंने असाधारण साहस, त्वरित निर्णय क्षमता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण का परिचय दिया, जिसके लिए उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान मिला है।अंतरिक्ष में अपने प्रवास के दौरान शुक्ला ने कई वैज्ञानिक प्रयोग किए और कृषि से जुड़े परीक्षण भी किए। उन्होंने अंतरिक्ष में मेथी और मूंग के बीज को सफलतापूर्वक उगाया, जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।विशेषज्ञों का मानना है कि उनका यह सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और यह संदेश देगा कि मजबूत इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। उनकी पेशेवर दक्षता, नेतृत्व क्षमता और शांत निर्णय लेने की कला को इस सम्मान के जरिए सराहा गया है।इस उपलब्धि को भारतीय वायुसेना और पूरे देश के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। उनका साहस और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है। इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देश की रक्षा में असाधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान दिखाने के लिए 70 सशस्त्र बलों के जवानों को वीरता पुरस्कार देने की मंजूरी दी है। इनमें से छह पुरस्कार मरणोपरांत दिए जाएंगे।वीरता पुरस्कारों में एक अशोक चक्र, तीन कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र (एक मरणोपरांत), एक बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना मेडल (वीरता) (पांच मरणोपरांत), छह नौसेना मेडल (वीरता), और दो वायुसेना मेडल (वीरता) शामिल हैं।इसके अलावा, ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया जाएगा। वे एक प्रतिष्ठित फाइटर टेस्ट पायलट हैं और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हैं। उनके नाम 3,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है और वे 2019 से इसरो के साथ गगनयान कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण ले रहे हैं। -
नई दिल्ली। उत्तराखंड के बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों में जल्द ही गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीएस) के अनुसार, सदियों पुराने मंदिरों में सिर्फ हिंदुओं की एंट्री होगी। यह प्रस्तावित पाबंदी समिति द्वारा चलाए जा रहे सभी मंदिरों पर लागू होगी, जिसमें बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम भी शामिल हैं।
इस बात की पुष्टि करते हुए बीकेटीएस के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि इस फैसले को लागू करने के लिए एक औपचारिक प्रस्ताव मंदिर समिति बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा।बद्रीनाथ मंदिर सर्दियों के मौसम में छह महीने बंद रहने के बाद 23 अप्रैल को फिर से खुलेगा। केदारनाथ मंदिर के फिर से खुलने की तारीख महाशिवरात्रि के मौके पर घोषित की जाएगी। चार धाम में केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिरों के अलावा गंगोत्री और यमुनोत्री भी शामिल हैं। इन दोनों तीर्थस्थलों के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के त्योहार के साथ फिर से खुलने वाले हैं।यह घोषणा उत्तराखंड में प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने को लेकर चल रही एक बड़ी बहस के बीच आई है।इस महीने की शुरुआत में हरिद्वार के हर की पौड़ी को ‘गैर-हिंदुओं के लिए वर्जित’ घोषित करने वाले पोस्टर विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर दिखाई दिए, जिससे विवाद खड़ा हो गया। इन पोस्टरों में हर की पौड़ी क्षेत्र को पूरी तरह से ‘हिंदू क्षेत्र’ बताया गया था, जिससे सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक पहुंच को लेकर बहस और तेज हो गई।श्री गंगा सभा द्वारा लगाए गए पोस्टरों पर लिखा था, “गैर-हिंदुओं के लिए प्रवेश वर्जित क्षेत्र”। हालांकि, संगठन ने दावा किया कि इस कदम का मकसद सिर्फ लोगों को जानकारी देना है और इसका कोई गलत इरादा नहीं है।श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने इस घटनाक्रम के बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “हर नागरिक के लिए कानून की बुनियादी जानकारी जरूरी है। हाल ही में सामने आई कुछ घटनाओं के बाद गंगा सभा को लगा कि लोगों को नियमों और विनियमों के बारे में जागरूक करना बहुत जरूरी है। इसी मकसद से हरिद्वार के प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता बोर्ड लगाए गए हैं ताकि आम जनता, श्रद्धालु और पर्यटक कानून के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें और संबंधित अधिकारियों से भी जानकारी ले सकें।”नितिन गौतम ने आगे कहा कि हाल के दिनों में दो-तीन घटनाएं हुई हैं, जिनसे पता चलता है कि सही जानकारी की कमी ही विवाद और झगड़े की असली वजह थी।उन्होंने बताया था कि इन बैनरों का मकसद लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक करना है ताकि कानून-व्यवस्था मजबूत हो और समाज में शांति और सद्भाव बना रहे। -
नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस की भव्य परेड के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्तव्य पथ से जुड़े कई खूबसूरत और गौरवपूर्ण पल साझा किए। उन्होंने कहा कि इस शानदार आयोजन ने भारत की लोकतांत्रिक शक्ति, राष्ट्रीय गर्व और एकता को पूरे विश्व के सामने मजबूती से प्रदर्शित किया। इस साल का गणतंत्र दिवस उत्साह, आत्मविश्वास और नए भारत की झलक से भरा रहा।
भारत ने अपना 77वां गणतंत्र दिवस नई सैन्य ताकत और स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के प्रभावशाली प्रदर्शन के साथ मनाया। परेड में भारतीय सेना की ओर से ‘बैटल एरे’ फॉर्मेट में आधुनिक युद्ध तैयारियों को दिखाया गया, जिसमें युद्ध के समय अपनाई जाने वाली रणनीतियों और ऑपरेशन्स की पूरी झलक देखने को मिली। यह प्रदर्शन न केवल तकनीकी रूप से उन्नत था, बल्कि यह भी दिखाता है कि देश अपनी सुरक्षा को लेकर कितना सतर्क और सक्षम है।कर्तव्य पथ पर आयोजित इस ऐतिहासिक परेड में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और राज्यों की झांकियों ने भी सभी का मन मोह लिया। अलग-अलग राज्यों की झांकियों में भारत की विविध संस्कृति, परंपराएं और लोककलाएं जीवंत रूप में नजर आईं। नृत्य, संगीत और रंग-बिरंगे परिधानों ने यह साबित कर दिया कि विविधता में एकता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि भारत ने गणतंत्र दिवस को बड़े जोश और गर्व के साथ मनाया। कर्तव्य पथ पर हुई परेड ने हमारी लोकतांत्रिक मजबूती, समृद्ध विरासत और राष्ट्रीय एकता को खूबसूरती से दर्शाया। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर राष्ट्रीय गौरव का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की मौजूदगी भारत के लिए सम्मान की बात है। उनकी उपस्थिति भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ती साझेदारी और साझा मूल्यों को दर्शाती है। यह दौरा भारत और यूरोप के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने में मदद करेगा।प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन देश की तैयारियों, तकनीकी क्षमता और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमारी सेनाएं वास्तव में देश का गौरव हैं। उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की तारीफ करते हुए कहा कि गणतंत्र दिवस परेड ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को बेहद जीवंत और रंगीन तरीके से सामने रखा। ( -
नई दिल्ली। 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पगड़ी एक बार फिर चर्चा का मुख्य विषय बन गई, जिसने पूरे देश में खूब तारीफें बटोरीं, मीडिया का ध्यान खींचा और सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा हुई। दिन की शुरुआत में नेशनल वॉर मेमोरियल में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते समय पीएम मोदी ने गहरे मैरून रंग की राजस्थानी स्टाइल की पगड़ी पहनी थी, जिसने लोगों और मीडिया का ध्यान खींचा।
पगड़ी में बारीक सुनहरे जरी के डिजाइन, चमकीले पीले रंग के शेड्स और क्लासिक बांधनी (टाई-डाई) पैटर्न के हल्के एलिमेंट्स थे, जो अक्सर राजस्थान की समृद्ध टेक्सटाइल विरासत और पारंपरिक कारीगरी से जुड़े होते हैं।गहरा मैरून रंग, जो बहादुरी, बलिदान और वीरता का प्रतीक है, उस मौके के गंभीर और देशभक्ति वाले माहौल के साथ पूरी तरह मेल खा रहा था, जबकि सुनहरे मोर पंख के डिजाइन और सरसों-पीले रंग की हाइलाइट्स ने शाही अंदाज और सांस्कृतिक गहराई का एहसास कराया। हल्के नीले बंद गला कोट, नेवी ब्लू कुर्ते और सफेद ट्राउजर के साथ, यह पगड़ी परंपरा, प्रतीकवाद और समकालीन स्टाइल का एक अनोखा मिश्रण लग रही थी।कई लोगों ने इसे राजस्थान की योद्धा विरासत और भारत की सेना को सम्मान देने के तौर पर देखा। कुछ रिपोर्ट्स में ऐतिहासिक वीरता, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव को श्रद्धांजलि देने की बात कही गई, जो इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य विषय थे। यह पगड़ी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गई। यूजर्स ने इसकी कारीगरी, रंग संयोजन और सुंदरता की तारीफ की। कई पोस्ट में पगड़ी को भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं के प्रतिबिंब के रूप में दिखाया गया।न्यूज आउटलेट्स ने भी इसे दिन के कार्यक्रमों के सबसे खास एलिमेंट्स में से एक बताया। हेडलाइंस में बताया गया कि कैसे गहरे मैरून, सुनहरे डिजाइन वाली पगड़ी ने समारोह के दौरान सबका ध्यान खींच लिया।पीएम मोदी के पिछले गणतंत्र दिवस के लुक्स- चमकीले लाल बांधनी स्टाइल से लेकर कई रंगों की पगड़ियों तक- से तुलना ने राष्ट्रीय अवसरों पर भारतीय क्षेत्रीय कारीगरी को शामिल करने की उनकी पुरानी परंपरा को दिखाया।फैशन विश्लेषक ने क्लासिक राजस्थानी स्टाइल में पगड़ी के बेदाग तरीके से बांधने पर ध्यान दिया, कर्तव्य पथ पर सैन्य परेड की भव्यता के बीच सांस्कृतिक गौरव को दिखाने में इसकी भूमिका पर जोर दिया।जैसे ही तस्वीरें डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर फैलीं, पगड़ी इस बात का प्रतीक बन गई कि कैसे व्यक्तिगत स्टाइल राष्ट्रीय विरासत, एकता और सामूहिक पहचान का सम्मान कर सकता है। -
नई दिल्ली। देश 26 जनवरी को 77वां गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाने जा रहा है। इस मौके पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर शानदार परेड होगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गणतंत्र दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगी और इस बार यूरोपीय यूनियन के दो बड़े नेता एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डर लेयेन मुख्य अतिथि होंगे।
इस साल का गणतंत्र दिवस समारोह इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल, देश की तरक्की, स्वदेशी सैन्य उपकरण, सेना की ताकत, भारत की संस्कृति और आम लोगों की भागीदारी सब कुछ एक साथ देखने को मिलेगा। गणतंत्र दिवस कार्यक्रम की शुरुआत 26 जनवरी सुबह 10.30 बजे से होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे। उसके बाद वे कर्तव्य पथ पर परेड देखेंगे। राष्ट्रपति और विदेशी मेहमान पारंपरिक बग्घी में आएंगे। फिर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा और 21 तोपों की सलामी के साथ राष्ट्रगान होगा।समारोह की शुरुआत 100 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति से होगी, जिसमें अलग-अलग राज्यों की झलक दिखेगी। वहीं, आसमान से चार एमआई-17 हेलीकॉप्टर फूल बरसाएंगे। इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने वाली झांकियों की व्यापक थीम ‘स्वतंत्रता का मंत्र: वंदे मातरम्’ तथा ‘समृद्धि का मंत्र: आत्मनिर्भर भारत’ है। इस बार परेड में भारतीय सेना का युद्ध वाला रूप खास तौर पर दिखाया जाएगा। टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां, मिसाइल सिस्टम, ड्रोन, और रोबोटिक डॉग्स यह सब कुछ परेड में नजर आएगा। इसके अलावा टी-90 भीष्म और अर्जुन टैंक, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टर, और स्पेशल फोर्सेज की मौजूदगी भी लोगों को रोमांचित करेगी।वहीं, एक खास झांकी में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ दिखाया जाएगा, जिसमें बताया जाएगा कि कैसे सेना, नौसेना और वायुसेना मिलकर दुश्मन को जवाब देती हैं। इस बार सेना परेड में ‘बैटल ऐरे’ यानी रणभूमि व्यूह रचना प्रदर्शित करेगी। इसका अर्थ है कि जंग के वक्त सेना कैसे आगे बढ़ती है, कैसे हमला करती है और कैसे दुश्मन को जवाब देती है, सब कुछ एक ही जगह देखने को मिलेगा। यहां ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की झलक दिखाई देगी। यह पूरा प्रदर्शन ऑपरेशन ‘सिंदूर’ की सफलता को भी एक सलाम होगा।भारतीय नौसेना की झांकी में पुराने जहाजों से लेकर आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत तक की कहानी दिखाई जाएगी। वायुसेना के लड़ाकू विमान आसमान में शानदार फ्लाई-पास्ट करेंगे। तटरक्षक बल की महिला टुकड़ी भी परेड का हिस्सा होगी। देश के 17 विभिन्न राज्यों और 13 मंत्रालयों की कुल 30 झांकियां होंगी। इनमें कहीं संस्कृति दिखेगी, कहीं आत्मनिर्भर भारत, कहीं खेती, कहीं तकनीक, और कहीं आजादी की कहानी दर्शायी जाएगी। अनेक झांकियों के माध्यम से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जाएगा।साथ ही आत्मनिर्भरता के आधार पर देश की प्रगति, सांस्कृतिक विविधता, विरासत, नवाचार और विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। गणतंत्र दिवस समारोह में इस साल करीब 10,000 खास मेहमान बुलाए गए हैं। ये मेहमान किसान, वैज्ञानिक, स्टार्ट-अप करने वाले युवा, खिलाड़ी, महिला समूह, आदिवासी प्रतिनिधि और समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग हैं। समारोह के अंत में राष्ट्रगान होगा, आसमान में गुब्बारे छोड़े जाएंगे और ‘वंदे मातरम्’ का संदेश पूरे कर्तव्य पथ पर गूंजेगा। - नरसिंहपुर । मध्य प्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली मां नर्मदा की रविवार को जयंती पर अद्भुत नजारा देखने को मिला। नरसिंहपुर जिले से होकर बहती यह नदी न सिर्फ इलाके की उर्वरा भूमि को समृद्ध बनाती है, बल्कि पूरे प्रदेश की सुंदरता और जीवन धारा भी इसी से जुड़ी हुई है। अवतरण दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पदयात्राओं और शोभायात्राओं के साथ नर्मदा की ओर उमड़ पड़े।नरसिंहपुर के सतधारा समेत सभी घाटों पर भक्तों का सैलाब देखने को मिला। इस मौके पर गणतंत्र दिवस की झलक भी देखने को मिली, जहां स्कूली छात्र-छात्राएं तिरंगे की चूनर मां नर्मदा को अर्पित कर रहे थे। मां नर्मदा का यह पर्व केवल आस्था का ही नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भी संदेश देता है। उनके जल से ही प्रदेश के लोगों की प्यास बुझती है और जमीन उर्वरा बनती है। इसलिए उनकी निर्मलता और पवित्रता बनाए रखना हर भक्त के लिए जरूरी है। आज के दिन भक्त केवल पूजा ही नहीं करते, बल्कि यह संकल्प भी लेते हैं कि वे मां नर्मदा के जल और घाटों को साफ और स्वच्छ रखेंगे।इस अवसर पर सैकड़ों किलोमीटर दूर से भी श्रद्धालु पैदल चलकर घाटों पर पहुंचे। सिवनी जिले की लखनादौन तहसील के आदेगांव से आए गोलू कुशवाहा ने बताया कि वह 2017 से हर साल पैदल नर्मदा जयंती में शामिल हो रहे हैं। उनका कहना है कि मां नर्मदा की कृपा इतनी बड़ी है कि मांगने से पहले ही मां अपने भक्तों के भंडार भर देती हैं। इस साल घाटों पर इतनी बड़ी भीड़ थी कि गांवों के रास्ते खाली हो गए।गोलू ने आशीर्वाद की कामना करते हुए कहा कि मां नर्मदा की कृपा हमेशा सबके ऊपर बनी रहे और वे भविष्य में भी इसी भक्ति के साथ आते रहेंगे। कार्यक्रम में स्वच्छता का संदेश भी दिया गया। स्वच्छता अभियान की मेंटर शिवानी विश्वकर्मा ने बताया कि घाटों पर आने वाले लोग अक्सर पाउच, पानी की बोतल या पॉलिथीन छोड़ जाते हैं। जन-जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को बताया जा रहा है कि श्रद्धा के साथ स्वच्छता भी जरूरी है।उन्होंने कहा कि अगर हम मां के जल और घाटों में कचरा डालते हैं, तो वह आस्था और श्रद्धा के विपरीत है। श्रद्धा अच्छी है, लेकिन स्वच्छता उससे भी ज्यादा जरूरी है।स्वच्छता अभियान के अन्य मेंटर, भगवान उपाध्याय ने कहा, “त्वदीय पाद पंकजम, नमामि देवी नर्मदा।” उनका कहना था कि नर्मदा जयंती पर नारियल फोड़ना या स्नान करना केवल दिखावे का पुण्य नहीं है। असली पुण्य तब मिलता है, जब हम मां के आंचल को पवित्र बनाए रखें और वहां गंदगी न फैलाएं।उन्होंने लोगों से कहा कि हर व्यक्ति आज संकल्प ले कि घाट पर आने के बाद भी कचरा अपने साथ ले जाएगा और कोई भी पॉलीथिन या गंदगी न छोड़ेंगे। ऐसा करने से न केवल घाट और नदी का वातावरण स्वच्छ रहेगा, बल्कि हमारी आस्था भी और मजबूत होगी।
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नई दिल्ली। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 77 वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सशस्त्र बल कर्मियों को 98 प्रशस्ति पत्र स्वीकृत किए हैं। जिनमें पांच मरणोपरांत प्रशस्ति पत्र शामिल हैं। इनमें से 81 भारतीय सैन्य कर्मियों को दिए गए हैं - 17 ऑपरेशन रक्षक के लिए, 11 ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के लिए, 11 ऑपरेशन हिफाज़त के लिए, पांच ऑपरेशन ऑर्किड के लिए, दो ऑपरेशन मेघदूत के लिए, एक ऑपरेशन राइनो के लिए, दो ऑपरेशन सिंदूर के लिए, तीन बचाव अभियान के लिए, चार ऑपरेशन कैजुअल्टी इवैक्यूएशन के लिए, एक ऑपरेशन सोफैन के लिए, 24 विभिन्न अभियानों के लिए, जिनमें तीन मरणोपरांत प्रशस्ति पत्र शामिल हैं, 15 भारतीय नौसेना कर्मियों के लिए; और दो सीमा सड़क विकास बोर्ड के कर्मियों के लिए (मरणोपरांत प्रशस्ति पत्र)। प्रशस्ति पत्र प्राप्तकर्ताओं की पूरी सूची इस प्रकार है:
भारतीय सेनाऑपरेशन रक्षकIC-72845P लेफ्टिनेंट कर्नल गुरइकबाल सिंह, तोपखाना रेजिमेंट, 662 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-75641N लेफ्टिनेंट कर्नल आदित्य जसरोटिया, 666 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-76028N लेफ्टिनेंट कर्नल अभिजीत सिंह, 662 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)JC-432776P सूबेदार रंजीत सिंह, पंजाब रेजिमेंट, 53 राष्ट्रीय राइफल्सजेसी-492296पी सूबेदार प्रवीण कुमार, 7 जाटजेसी-595709एन सूबेदार मोहम्मद यूनिस, जम्मू और कश्मीर लाइट इन्फैंट्री, 20 राष्ट्रीय राइफल्सJC-523993Y नायब सूबेदार राकेश कुमार, 18 डोगराJC-596382M नायब सूबेदार बशारत हुसैन, 6 जम्मू कश्मीर लाइट इन्फैंट्री3205810Y हवलदार जितेंद्र, 7 जाट4487338L हवलदार दर्शन सिंह, 4 पैरा (विशेष बल)20006014L लांस नायक सूरज सिंह, पैराशूट रेजिमेंट, विशेष समूह7787355एम लांस नायक यतीश एच, 4 पैरा (विशेष बल)14950345K सिपाही मुकेश कुमार, मशीनीकृत पैदल सेना, 42 राष्ट्रीय राइफल्स3021054X सिपाही विकास सिंह, 6 राजपूत6502060F सिपाही नीतीश कुमार, 898 पशु परिवहन बटालियन, सेना सेवा कोर16130019एल सैपर श्याम सेतुमाधवन, कोर ऑफ इंजीनियर्स, 44 राष्ट्रीय राइफल्सए1600052के अग्निवीर अनमोल चौधरी, 18 डोगराऑपरेशन स्नो लेपर्डIC-74706K लेफ्टिनेंट कर्नल गगनदीप सिंह, 16 पंजाबजेसी-414773वाई सूबेदार सुरेश कुमार डांगी, 7 पैरा (विशेष बल)जेसी-472530वाई सूबेदार पूना राम, 14 राजपुताना राइफल्सJC-415197M नायब सूबेदार विजय कुमार, 9 पैरा (विशेष बल)16021168H Havildar Harlal Kaler, 14 Rajputana Rifles9427929X नायक बुद्धि राज राय, 11 वीं गोरखा राइफल्स, 1 सिक्किम स्काउट्स9427963X नायक झानु प्रसाद छेत्री, 11 वीं गोरखा राइफल्स, 1 सिक्किम स्काउट्स9428019W नायक पुकार कट्टल, 11th गोरखा राइफलस, 1 सिक्किम स्काउट्स4383276K लांस नायक लोबजंग वांगचू नामसा, 9 पैरा (विशेष बल)2626473A सिपाही लक्ष्मीकांत गोदी, मद्रास रेजिमेंट, 38 राष्ट्रीय राइफल्स16125221P सैपर बिलिंग मोहना राव, 11 इंजीनियर रेजिमेंटऑपरेशन हिफाज़तIC-77663L लेफ्टिनेंट कर्नल नितिन शर्मा, सेना वायु रक्षा, 5 असम राइफल्सIC-82093K मेजर भावेश पुरी, तोपखाना रेजिमेंट, 8 असम राइफल्सआईसी-84418एल मेजर मृदुल त्रिपाठी, तोपखाना रेजिमेंट, 3 असम राइफल्सIC-85171F मेजर आदित्य जैन, द्वितीय महारएसएस-48583एल मेजर अनुपम वशिष्ठ, सेना वायु रक्षा, 21 असम राइफल्सएमएस-22035डब्ल्यू कैप्टन अभिषेक धाकड़, आर्मी मेडिकल कोर, 1 असम राइफल्सएआर-496ए सहायक कमांडेंट रमेश चंद, 37 असम राइफल्सJC-562404N सूबेदार जितेंद्र सिंह, 8 बिहार5852956एफ हवलदार सुभाष पौडेल, 5/9 गोरखा राइफल्सजी/0111068डब्ल्यू हवलदार सोम दत्त तिवारी, 1 असम राइफल्सजी/5003287एच राइफलमैन लालमहारुइया, 3 असम राइफल्सऑपरेशन आर्किडIC-76617K लेफ्टिनेंट कर्नल विशाल कुमार यादव, 11 पैरा (विशेष बल)IC-82626F मेजर देवेश कुमार तुशीर, 11 पैरा (विशेष बल)13630582X नायक सुमित सिन्हा, 21 पैरा (विशेष बल)16128372वाई लांस नायक सुनीला ईश्वर मारनुरा, 21 पैरा (विशेष बल)4103678एम पैराट्रूपर मनदीप सिंह, 21 पैरा (विशेष बल)ऑपरेशन मेघदूतएसएस-50393एक्स कप्तान आदित्य श्रीनिवास प्रसाद, 20 मद्रास4373812एन नाइक लुनमिनलेन चोंगलोई, 10 असमऑपरेशन राइनो15213868P हवलदार नेत्र पाल, 1831 मीडियम रेजिमेंटऑपरेशन सिंदूरआईसी-66870एक्स कर्नल अमित कुमार यादव, 615 खुफिया एवं फील्ड सुरक्षा इकाईआईसी-69553एफ कर्नल विनय कुमार पांडे, 357 खुफिया एवं फील्ड सुरक्षा इकाईबचाव अभियानIC-77598W लेफ्टिनेंट कर्नल प्रभप्रीत सिंह मारवाहा, 670 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन। (आर एंड ओ)IC-82235W मेजर अर्जुन नायर, 205 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (UH)16134143के सैपर बुद्धे लोकेश, 201 इंजीनियर रेजिमेंटहताहत निकासी अभियानIC-70425W लेफ्टिनेंट कर्नल बापनपल्ली श्रीनिवास, 669 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-71382Y लेफ्टिनेंट कर्नल वरुण पाराशर, 669 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-72084P लेफ्टिनेंट कर्नल अमन दीप शर्मा, 671 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)एसएस-50607एच कैप्टन नीरज चौधरी, 661 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)ऑपरेशन सोफेन19004504W नायक गुरजंत सिंह, 1 पैरा (विशेष बल)अन्य अभियानआईसी-79075डब्ल्यू मेजर नागेंद्र सिंह, इंजीनियर कोर, 93 आरसीसी (जीआरईएफ)एमएस-21757डब्ल्यू कैप्टन देवम त्रिवेदी, सेना चिकित्सा कोर, 55 इंजीनियर रेजिमेंट00065904N कंपनी लीडर त्सेरिंग न्येधोन, मुख्यालय विशेष सीमा बलIC-67565X कर्नल शौर्य सिंह, 662 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-68548K कर्नल शिंदे संजोग ए, 670 आर्मी एवीएन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-62499W लेफ्टिनेंट कर्नल राजेश मलकाय, जैक एलआई, मुख्यालय 112 माउंटेन ब्रिगेडIC-71442H लेफ्टिनेंट कर्नल अनुराग, 659 आर्मी एवीएन स्क्वाड्रन (आर एंड ओ)IC-72080Y लेफ्टिनेंट कर्नल आशीष झा, 21 पैरा (एसएफ)आईसी-72290वाई लेफ्टिनेंट कर्नल राकेश सिंह, 6 राजपूतIC-77063H लेफ्टिनेंट कर्नल आदर्श टी, 14 राज राइफलIC-81420X मेजर सिमरनजीत सिंह रैना, 2 MAHARIC-83377A मेजर गुरजंत सिंह, ग्रेनेडियर्स, मुख्यालय एसएफएफआईसी-83583के मेजर दीपक फोगाट, इंजीनियर, 37 असम राइफलIC-84372N मेजर गौरव तिवारी, जम्मू कश्मीर राइफल्स, 4 असम राइफल्सआईसी-85191पी मेजर आकाश जोशी, 7 जाटSS-50795P मेजर भारत शंकर गांठी , 14 गढ़वाल राइफल्सIC-86176M कैप्टन परमिंदर सिंह , 20 मद्रास15194504L आर एच एम टीकराम, 136 फील्ड रेजिमेंट15815675एल हवलदार याकूब मसीह, 8 एमटीएन डिवी ऑर्ड यूनिट (मरणोपरांत)2504441H हवलदार संदीप कुमार, 27 पंजाब4378341पी नायक रोहित बस्नेत, 9 पैरा (एसएफ)5459271X नायक नवीन पौडेल, 5/5 जीआर (मरणोपरांत)13632145डब्ल्यू सिपाही बिपुल बोरो, 10 असमए1102443एल अग्निवीर अजीत सिंह राजपूत, 14 राज आरआईएफ (मरणोपरांत)भारतीय नौसेना06043-एच कमांडर रोशन जॉर्ज06365-आर कमांडर ज्ञानेश्वर खानेकर06669-एफ कमांडर अमित तिवारी07966-बी लेफ्टिनेंट कमांडर विकास गांगस08071-टी लेफ्टिनेंट कमांडर जोस बाबू05567-A Captain Sahil Makkar08358-W लेफ्टिनेंट कमांडर संदीप सिंह09527- लेफ्टिनेंट कमांडर उत्कर्ष कटियार222608-बी राजपाल सी पी ओ (जी डब्लू )06030-बी कमांडर राहुल पटनायक246626-आर अंकित कुमार, एलए (एफडी)04763-जेड कप्तान अमिताभ रॉय04914-टी कमोडोर एमसी मौदगिल256297-डब्ल्यू सैंट्राम एलएस (सीडी)506880-ए ज्ञानेंद्र सिंह सिंगर ईआरए -4सीमा सड़क विकास बोर्डपी-2496 सीपी स्किल्ड गणेश सिंह ( मरणोपरांत )पी-2623 सीपी एमएजेड धुन्ना टुडू ( मरणोपरांत ) -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय तटरक्षक बल के उत्कृष्ट कर्मियों को विशिष्ट पुरस्कार प्रदान करने की स्वीकृति दी। पुरस्कार प्राप्तकर्ताओं के नाम इस प्रकार हैं:
अति विशिष्ट सेवा पदक• एडीजी डॉनी माइकल, पीटीएम, टीएमविशिष्ट सेवा पदकडीआईजी के.एस. सीतारामराष्ट्रपति तटरक्षक पदक (विशिष्ट सेवा)आईजी इक़बाल सिंह चौहान, टीएमआईजी दतविन्दर सिंह सैनी, टीएमउत्तम जीवन रक्षा पदकपी/एनवीके/(एमई) सौम्यरंजन बेहेरातटरक्षक पदक (वीरता) – मरणोपरांतस्व. कमांडेंट राकेश कुमार राणास्व. कमांडेंट (जेजी) विपिन बाबूस्व. पी/एनवीके(आरपी) करण सिंहतटरक्षक पदक (वीरता)कमांडेंट (जेजी) शैलेन्द्र सिंह बिष्टपी/एनवीके(आरपी) गौतम यादवपी/एनवीके(आरपी) बांती कुमारतटरक्षक पदक (उत्कृष्ट सेवा)डीआईजी विनोद कुमार परमारडीआईजी अरुण कुमार भारद्वाजडीआईजी सुधाकर पाटिलकमांडेंट इंदु पीपी/एडीएच(आरओ) तपस कुमार बनर्जी - नयी दिल्ली ।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उत्सव मनाये जा रहे हैं और इसे ''राष्ट्र-वंदना'' का एक स्वर बताया जो हर भारतीय में देशभक्ति की भावना पैदा करता है। मुर्मू ने 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों का आयोजन पिछले साल सात नवंबर से किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ''भारत माता के दैवी स्वरूप की वंदना का यह गीत, जन-मन में राष्ट्र-प्रेम का संचार करता है।'' राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीयता के महाकवि सुब्रमण्य भारती ने तमिल भाषा में 'वन्दे मातरम् येन्बोम्' अर्थात 'हम वन्दे मातरम् बोलें' इस गीत की रचना करके वन्दे मातरम् की भावना को और भी व्यापक स्तर पर जनमानस के साथ जोड़ा। उन्होंने बताया कि समय के साथ-साथ वंदे मातरम् के अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी लोकप्रिय हो गए, जिससे इसका संदेश पूरे देश में और अधिक फैल गया। मुर्मू ने दार्शनिक एवं स्वतंत्रता सेनानी श्री अरबिंदो की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिन्होंने गीत का अंग्रेजी में अनुवाद किया, जिससे इसके सार का व्यापक स्तर पर प्रसार करने में मदद मिली। राष्ट्रपति ने कहा, ''बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सांस्कृतिक चेतना में एक अद्वितीय स्थान रखता है और यह हमारी राष्ट्र-वंदना का स्वर है।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2026 के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। यह कार्यक्रम का 130वां एपिसोड था। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने समाज, खेती, सेहत और तकनीक जैसे अहम विषयों पर बात की और लोगों के प्रयासों की खुलकर सराहना की। उन्होंने मिलेट्स यानी श्रीअन्न को लेकर देश में बढ़ते उत्साह को प्रेरणादायक बताया और इसे भारत की सांस्कृतिक और पोषण परंपरा से जोड़ा।
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”मैं आप सभी की मिलेट्स के लिए सराहना करना चाहता हूं। 2023 को हमने ‘मिलेट वर्ष’ घोषित किया था, लेकिन आज तीन साल बाद भी इसे लेकर देश और दुनिया में जो पैशन है, वो उत्साहित करने वाला है। आज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में श्रीअन्न के प्रति लगाव लगातार बढ़ रहा है और यह सेहत के साथ-साथ किसानों की आमदनी के लिए भी फायदेमंद साबित हो रहा है।”अपने संबोधन में पीएम मोदी ने तमिलनाडु के कल्ल-कुरिची जिले का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, ”यहां महिला किसानों का एक समूह पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गया है। ‘पेरियापलायम मिलेट’ एफपीसी से करीब 800 महिला किसान जुड़ी हुई हैं। मिलेट की बढ़ती मांग को देखते हुए इन महिलाओं ने मिलेट प्रोसेसिंग यूनिट शुरू की। अब ये महिलाएं मिलेट से बने उत्पादों को खुद तैयार कर सीधे बाजार तक पहुंचा रही हैं। इससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बनी हैं।”पीएम मोदी ने राजस्थान के रामसर क्षेत्र में हो रहे नवाचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”यहां एक कंपनी से 900 से ज्यादा किसान जुड़े हुए हैं, जो बाजरे की खेती करते हैं। ये किसान बाजरे से लड्डू तैयार करते हैं, जिनकी बाजार में काफी मांग है।”प्रधानमंत्री ने बताया, ”कई मंदिर ऐसे भी हैं, जहां प्रसाद के रूप में केवल मिलेट से बने उत्पादों का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। श्रीअन्न परंपरा, सेहत और रोजगार को एक साथ जोड़ रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा, ”मिलेट्स से जहां किसानों की आय बढ़ रही है, वहीं आम लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार देखने को मिल रहा है। सर्दियों के दिनों में हमें श्रीअन्न का सेवन जरूर करना चाहिए।”अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आने वाले कार्यक्रमों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फरवरी महीने में ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें दुनिया भर से विशेषज्ञ भारत आएंगे। पीएम मोदी ने इस समिट में शामिल होने वाले सभी लोगों का स्वागत किया और कहा कि अगले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। आखिर में उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और एकजुट होकर आगे बढ़ने का संदेश दिया। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 130वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भजन और कीर्तन हमारी संस्कृति की आत्मा हैं। हम सभी ने बचपन में मंदिरों में भजन सुने हैं, कथाएं सुनी हैं और हर पीढ़ी ने भक्ति को अपने अंदाज में अपनाया है। अब नई पीढ़ी ने इसे और भी खास अंदाज में अपने जीवन और अनुभवों के साथ जोड़ दिया है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी ने भक्ति को एक नई शैली दी है और इसके चलते एक नया चलन सामने आया है जिसे ‘भजन क्लबिंग’ कहा जा रहा है। यह जेन जी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने कहा कि आप सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो जरूर देखते होंगे। बड़े शहरों में युवा इकट्ठा होते हैं, मंच सजता है, रोशनी होती है, संगीत बजता है और माहौल किसी बड़े कॉन्सर्ट से कम नहीं लगता। लेकिन यहां जो गाया जाता है, वो भजन होता है और वो भी पूरे मन से, पूरी लगन से और पूरी तन्मयता के साथ।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस नए चलन में भजन की गरिमा और शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है। भक्ति को हल्के में नहीं लिया जाता, शब्दों और भाव दोनों की मर्यादा बनी रहती है। मंच चाहे आधुनिक हो, संगीत की प्रस्तुति अलग हो, लेकिन भावना वही रहती है। वहां एक तरह का आध्यात्मिक प्रवाह महसूस होता है, जो हर किसी को भीतर तक छू जाता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि भजन क्लबिंग सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि संस्कृति और भक्ति का एक नया रूप पेश कर रहा है। युवाओं की इस कोशिश से साफ लगता है कि हमारी परंपराएं अब भी जीवित हैं और उन्हें नई पीढ़ी अपनी समझ और रचनात्मकता के साथ आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भजन क्लबिंग जेन जी के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह न केवल संगीत और भक्ति का संगम है, बल्कि युवा संस्कृति का भी हिस्सा बनता जा रहा है। - नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2026 के पहले ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश के युवाओं की प्रशंसा की है। ‘स्टार्टअप इंडिया’ के 10 साल की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ‘स्टार्टअप इकोसिस्टम’ बन चुका है।‘मन की बात’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “दस साल पहले जनवरी 2016 में हमने एक महत्वपूर्ण सफर शुरू किया। तब हमें इस बात का एहसास था कि भले ही ये एक छोटा क्यों ना हो, लेकिन ये युवा पीढ़ी और देश के भविष्य के लिए काफी अहम है। यह ‘स्टार्टअप इंडिया’ की यात्रा है और इस अद्भुत यात्रा के ‘हीरो’ हमारे युवा साथी हैं।”उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित हो चुका है। यह इकोसिस्टम पारंपरिक सोच से अलग है और ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहा है, जिनकी दस वर्ष पहले तक कल्पना भी कठिन थी। आज भारतीय स्टार्टअप्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन और बायोटेक्नोलॉजी जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मैं अपने उन सभी युवा-साथियों को सेल्यूट करता हूं, जो किसी-न-किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं या फिर अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं।पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों, खासकर इंडस्ट्री और स्टार्टअप से जुड़े युवाओं से आग्रह करते हुए कहा, “भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत पर दुनिया की नजरें हैं। ऐसे समय में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। वह जिम्मेदारी है गुणवत्ता पर जोर देने की। इस वर्ष हम पूरी ताकत से गुणवत्ता को प्राथमिकता दें।”उन्होंने आगे कहा, “हम सबका एक ही मंत्र हो, ‘गुणवत्ता, गुणवत्ता और सिर्फ गुणवत्ता।’ हम जो भी उत्पादन कर रहे हैं, उसकी गुणवत्ता को बेहतर बनाने का संकल्प लें। हमारे टेक्सटाइल, टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स, यहां तक कि पैकेजिंग भी, भारतीय उत्पाद का मतलब ‘उच्च गुणवत्ता’ होना चाहिए।”




















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