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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भारोत्तोलन में भारत के लिए एक और पदक जीतने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों के 65 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर राजा मुथुपंडी को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “भारोत्तोलन में भारत के लिए एक और पदक! ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों के 65 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतने पर राजा मुथुपंडी को बधाई। उनकी सफलता से हर भारतीय प्रसन्न और गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उनके आने वाले प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं। #CWG2026”
ग्लासगो में आयोजित हो रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय वेटलिफ्टरों का शानदार प्रदर्शन जारी है। ऋषिकांत सिंह चनंबम के रजत और मीराबाई चानू के स्वर्ण के बाद सोमवार को राजा मुथुपंडी ने रजत पदक जीता। मुथुपंडी ने पुरुषों के 65 किग्रा इवेंट में रजत पदक जीता।राजा मुथुपंडी ने पुरुषों के 65 किग्रा कॉम्पिटिशन में कुल 286 किग्रा वजन उठाते हुए दूसरा स्थान हासिल किया। तमिलनाडु के इस लिफ्टर ने स्नैच में 126 किग्रा उठाया और क्लीन एंड जर्क में 160 किग्रा उठाया। मलेशिया के अजनील बिदिन ने स्वर्ण पदक जीता। कॉमनवेल्थ गेम्स के बिदिन ने रिकॉर्ड कुल 299 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक जीता।राजा के पोडियम फिनिश ने रविवार को भारत की वेटलिफ्टिंग टीम के लिए एक यादगार प्रदर्शन पूरा किया, जो गेम्स के चौथे दिन की सबसे बड़ी हाइलाइट्स में से एक बनकर उभरा। इससे पहले दिन में, ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों की 60 किग्रा कैटेगरी में रजत और मीराबाई चानू ने महिलाओं के 48 किग्रा इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, युवा एवं विद्यार्थीं हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसी को दर्शाता है। उनकी यह टिप्पणी नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) प्रश्नपत्र लीक विवाद को लेकर बढ़ते विरोध के बीच शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद आई। शाह ने शनिवार देर रात सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मोदी सरकार देश के युवाओं की भावनाओं का सम्मान करती है और प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं के खिलाफ आवश्यक सुधार लागू करने के लिए कटिबद्ध है।'' उन्होंने कहा, ''भाजपा के लिए पद से कहीं अधिक महत्वपूर्ण देश, हमारे युवा और विद्यार्थी हैं।''
शाह ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक के दोषियों को कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिए गए फैसले सराहनीय हैं। गृह मंत्री ने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि इन कदमों से नीट परीक्षा में सफल हुए विद्यार्थियों के साथ पूरा न्याय होगा।'' शाह ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने अपने कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की व्यवस्था, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास तथा उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय को मजबूत करने के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार किए। उन्होंने कहा, ''परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में उनके प्रयास भी उल्लेखनीय रहे हैं। उनका कार्यकाल भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है। -
अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने हिंदू पुजारियों (अर्चकों) के प्रशिक्षण और प्रमाणन के लिए एक स्थायी संस्थान स्थापित करने का फैसला किया है। ट्रस्ट का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत ही नहीं, विदेशों में भी प्रशिक्षित पुजारियों की बढ़ती मांग को पूरा करना है। यह कदम न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी हिंदू समुदायों में योग्य 'अर्चक' (पुजारियों) की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है। अयोध्या में ट्रस्ट की बैठक के बाद 22 जुलाई को लिए गए इस निर्णय के तहत यहां एक विशेष प्रशिक्षण केंद्र बनाया जाएगा, जहां हिंदू धार्मिक परंपराओं, संस्कारों और पूजा-पद्धतियों का औपचारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद ही पुजारियों को ट्रस्ट का प्रमाणपत्र मिलेगा। इसी बैठक में मंदिर के धार्मिक मामलों की निगरानी के लिए नौ सदस्यीय संत समिति गठित करने का भी फैसला किया गया। राम वल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास ने कहा कि देशभर के मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में व्यवस्थित रूप से प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ट्रस्ट का यह संस्थान इस कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा, "ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा है कि प्रशिक्षण केंद्र लगातार स्थायी रूप से काम करेंगे। देश भर के मंदिरों, मठों और प्रमुख धार्मिक संस्थानों में व्यवस्थित रूप से प्रशिक्षित अर्चकों की ज़रूरत है, चाहे वे देवी भगवती, भगवान राम या भगवान कृष्ण के मंदिर हों।" उन्होंने कहा, "अगर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के तहत ऐसा कोई ट्रेनिंग सेंटर बनाया जाता है, तो यह ज़रूरत पूरी करने में बहुत मददगार साबित होगा। कोशिश यह होगी कि देश के हर हिस्से तक काबिल पुजारी और आचार्य पहुंच सकें।" विदेशों में बसे भारतीयों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। न्यूयॉर्क में रहने वाले भारतीय मूल के यशू यादव ने कहा कि अमेरिका समेत कई देशों में हिंदू समुदाय तेजी से बढ़ रहा है और धार्मिक अनुष्ठानों, गृह प्रवेश, नामकरण व अन्य संस्कारों के लिए प्रशिक्षित पुजारियों की मांग लगातार बढ़ रही है। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में रहने वाले हर्षित जोशी ने कहा कि वहां हिंदू आबादी बढ़ने के बावजूद प्रशिक्षित पुजारियों की संख्या पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, अयोध्या ट्रस्ट की पहल भविष्य में विदेशों में भी योग्य पुजारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करेगी। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब कई शिक्षण संस्थान भी कर्मकांड और पुरोहित प्रशिक्षण से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू कर चुके हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय और कानपुर देहात का श्री राम जानकी संस्कृत महाविद्यालय पहले से इस दिशा में प्रशिक्षण दे रहे हैं। ट्रस्ट के अनुसार, प्रस्तावित संस्थान का लक्ष्य प्रशिक्षित और प्रमाणित पुजारियों का ऐसा समूह तैयार करना है, जो भारत और विदेशों में मंदिरों तथा श्रद्धालुओं की धार्मिक आवश्यकताओं को पूरा कर सके। इससे अयोध्या की पहचान धार्मिक शिक्षा और प्रशिक्षण के प्रमुख केंद्र के रूप में भी मजबूत होगी।
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जम्मू. जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन का मलबा हटाए जाने के बाद वार्षिक अमरनाथ यात्रा के लिए शनिवार देर रात जम्मू आधार शिविर से 4,474 तीर्थयात्रियों का नया जत्था कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, यह अमरनाथ यात्रियों का 19वां जत्था है, जो कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शनिवार देर रात दो बजकर 40 मिनट पर 166 वाहनों के काफिले के साथ गांदरबल जिले के बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। उन्होंने बताया कि हाल में हुई बारिश से पारंपरिक पहलगाम मार्ग को हुए नुकसान के कारण वहां मरम्मत और रखरखाव का काम जारी है, जिसकी वजह से जम्मू से अनंतनाग जिले के पहलगाम आधार शिविर के लिए तीर्थयात्रियों की आवाजाही नहीं हुई। कश्मीर के संभागीय आयुक्त अंशुल गर्ग ने शनिवार को कहा था, ''हाल में हुई बारिश के कारण श्री अमरनाथ जी यात्रा के पहलगाम मार्ग पर तत्काल मरम्मत और रखरखाव कार्य किए जाने की आवश्यकता है। यात्रा बालटाल मार्ग से जारी रहेगी, जिसके लिए सुचारू और सुरक्षित तीर्थयात्रा सुनिश्चित करने के वास्ते पर्याप्त व्यवस्था की गई है।'' अधिकारियों ने बताया कि 57 दिनों तक चलने वाली वार्षिक अमरनाथ यात्रा सुचारू रूप से जारी है। तीन जुलाई से शुरू हुई इस यात्रा में अब तक चार लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। यात्रा का समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन के अवसर पर होगा। इससे पहले शनिवार शाम को जम्मू श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर रामबन जिले में रामसू इलाके के गांगरू में बड़ा भूस्खलन हुआ था। यह राजमार्ग कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र बारहमासी मार्ग है। यह घटना राजमार्ग को यातायात के लिए फिर से खोले जाने के कुछ ही घंटों बाद हुई। लगातार बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन और मलबा जमा होने से यह मार्ग तीन दिनों तक बंद रहा था।
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द्रास/ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह दिखाया है कि आतंकवाद के जरिए भारत को धमकाने की कोशिश करने वालों का क्या हश्र होगा। सिंह ने यह भी कहा कि भारत पाकिस्तान की हर दुस्साहसपूर्ण हरकत का ऐसे तरीके से जवाब देने में सक्षम है जो उसकी ''कल्पना से भी परे'' है। सिंह ने यहां कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर कारगिल युद्ध स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पाकिस्तान की आलोचना की और कहा कि उसने आतंकवाद को ''अपनी सरकारी नीति का हिस्सा'' बना लिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के अलावा किसी अन्य मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं होगी, जो कि ''भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने अवैध कब्जा कर रखा है।'' रक्षा मंत्री ने 1999 के कारगिल युद्ध में भारत की जीत को ''भारत माता के मुकुट में जड़ा हीरा'' बताया। उन्होंने 22 अप्रैल, 2025 को हुए पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में मई 2025 में चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकवाद के आकाओं और उनके समर्थकों को करारा झटका दिया। सिंह ने कहा, ''ऑपरेशन सिंदूर ने दिखा दिया कि आतंकवाद के जरिए भारत को धमकाने की कोशिश करने वालों का क्या हश्र होगा।'' उन्होंने कहा कि भारत और उसकी सशस्त्र सेनाएं पाकिस्तान की हर दुस्साहसपूर्ण हरकत का ऐसे तरीके से जवाब देने में सक्षम हैं जो उसकी ''कल्पना से भी परे'' है। उन्होंने कहा, ''भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ उठाया गया कोई भी दुर्भावनापूर्ण कदम उसी अंजाम तक पहुंचेगा।'' रक्षा मंत्री ने कहा कि जब भारत जहाजों का डिजाइन तैयार करने में जुटा है, तब पाकिस्तान आतंकवाद की रूपरेखा बनाने में व्यस्त है। उन्होंने कहा, ''जहां हम नवोन्मेष के नए-नए रास्ते तलाश रहे हैं, वहीं पाकिस्तान घुसपैठ के नए तरीके खोजने में लगा है।'' कारगिल विजय दिवस भारत के 'ऑपरेशन विजय' की सफलता की स्मृति में मनाया जाता है। यह वह सैन्य अभियान था, जिसे पाकिस्तान की घुसपैठ के बाद कारगिल की रणनीतिक चोटियों पर दोबारा नियंत्रण लेने के लिए चलाया गया था और जिसका सफल समापन 1999 में आज के दिन हुआ था।
- नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय स्टार भारोत्तोलक मीराबाई चानू को बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय भारोत्तोलन के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है। प्रधानमंत्री ने पुरुष भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह को भी रजत पदक जीतने पर शुभकामनाएं दीं। मीराबाई ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय भारोत्तोलन में उनका दबदबा बरकरार है। ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई ने स्नैच में राष्ट्रमंडल और राष्ट्रमंडल खेलों के रिकॉर्ड तोड़े, जबकि क्लीन एंव जर्क और कुल वजन में भी नए खेल रिकॉर्ड स्थापित कर भारतीय भारोत्तोलन की महानतम खिलाड़ियों में अपनी पहचान और मजबूत कर ली।प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''भारतीय भारोत्तोलन के इतिहास में एक और गौरवशाली अध्याय!'' उन्होंने लिखा, ''प्रतिभाशाली मीराबाई चानू ने 48 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता। लगातार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक और कुल मिलाकर चौथा राष्ट्रमंडल पदक जीतने वाली मीराबाई देश के हर नागरिक के लिए प्रेरणा हैं। उन्हें हार्दिक बधाई। उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी शुभकामनाएं। ''वहीं घुटने की चोट से जूझने के बावजूद 28 वर्षीय ऋषिकांता ने इतिहास रचते हुए राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष भारोत्तोलक बनने का गौरव हासिल किया। उन्हें बधाई देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऋषिकांता के जज्बे और दृढ़ संकल्प ने पूरे देश को गर्व और खुशी का अवसर दिया है। उन्होंने लिखा, ''भारतीय भारोत्तोलक ऋषिकांता सिंह चानाम्बम पर हमें बेहद गर्व है। उन्होंने रजत पदक जीतने के साथ अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया है। उनका दृढ़ संकल्प और शानदार प्रदर्शन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। वह आगे भी नई ऊंचाइयों को छूते रहें और युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करते रहें। उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं। '' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मीराबाई को बधाई देते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक स्वर्ण वर्षों की अथक मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, ''ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारोत्तोलन में स्वर्ण पदक जीतने पर मीराबाई चानू को हार्दिक बधाई। उनका अटूट संकल्प और उत्कृष्टता हासिल करने का निरंतर प्रयास देश के लिए गौरव का विषय है। '' उन्होंने कहा, ''यह शानदार उपलब्धि धैर्य, समर्पण और कठिन परिश्रम की उस भावना को दर्शाती है जो देश के लाखों युवाओं को प्रेरित करती है। मैं उनके उज्ज्वल भविष्य और आने वाले वर्षों में और अधिक सफलताओं की कामना करता हूं। ''केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी मीराबाई की लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने की उपलब्धि की सराहना की। मीराबाई ने इससे पहले 2018, 2022 और अब 2026 में भी स्वर्ण पदक जीतकर दुर्लभ स्वर्णिम हैट्रिक पूरी की है। मांडविया ने 'एक्स' पर लिखा, ''स्वर्ण पदकों की हैट्रिक। ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर मीराबाई चानू को हार्दिक बधाई। आपका अटूट समर्पण, अद्भुत निरंतरता और असाधारण ताकत भारत को वैश्विक मंच पर लगातार गौरवान्वित कर रही है। ''
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में सुधार के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त कार्यबल के गठन की रविवार को घोषणा की। मोदी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में कहा कि सरकार कार्यबल के सुझावों को लागू करेगी, जिससे यह पक्का होगा कि परीक्षा प्रणाली भरोसेमंद हो और प्रौद्योगिकी का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करके उसमें पारदर्शिता लाई जा सके। इस कार्यबल में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों का एक समूह शामिल होगा।नीलेकणि के अलावा कार्यबल के अन्य सदस्यों में इसरो के पूर्व निदेशक एस. सोमनाथ, आसूचना ब्यूरो (आईबी) के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। नीलेकणि 'आधार' के निर्माता थे और भारत की डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना प्रणाली को लाने वाले मुख्य व्यक्ति थे। प्रधानमंत्री की यह घोषणा 36 दिनों तक चले उस आंदोलन के समाप्त होने के एक दिन बाद आई, जिसका नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने किया था। यह आंदोलन धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के साथ समाप्त हुआ था। मोदी ने कहा, ''परीक्षा सुधारों के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कार्यबल का गठन किया गया है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार त्रुटिरहित और पूरी तरह सुरक्षित परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए कार्यबल के सुझावों पर काम करेगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यबल विशेष रूप से प्रौद्योगिकी के दृष्टिकोण से एनटीए की परीक्षाओं को नया स्वरूप देने और परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक सुधार लाने में मदद करेगा। मोदी ने कहा कि छात्रों के भविष्य के लिए भारत सरकार लगातार कई तरह के कदम उठा रही है।उन्होंने कहा कि ''जिन्होंने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया'', उन्हें जेल भेज दिया गया है और सरकार सोमवार को संसद में परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ़ कड़ा कानून लाने के लिए एक नया विधेयक पेश करने जा रही है। मोदी ने कहा, ''लेकिन हमें भविष्य के बारे में सोचना होगा। यह पक्का करने के लिए कि हमारी परीक्षा प्रणाली भरोसेमंद और पारदर्शी हो और टेक्नोलॉजी का सही तरीके से इस्तेमाल हो, हमने दुनिया के जाने-माने प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति बनाने का फ़ैसला किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्यबल का गठन किया गया है।उन्होंने कहा, ''यह परीक्षा सुधारों पर केंद्रित होगा। जैसे ही हमें रिपोर्ट मिलेगी, हम भविष्य की परीक्षाओं को विश्वसनीय बनाने के लिए इसके सुझावों को लागू करेंगे।'
- नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को लोगों से वर्षा जल का संरक्षण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज बारिश की बचाई गई हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी पूंजी है। मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय के 'कैच द रेन' अभियान में जनता की सक्रिय भागीदारी की सराहना की।'कैच द रेन' जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन के लिए भारत सरकार का एक राष्ट्रव्यापी अभियान है।प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि चार जुलाई से जारी इस अभियान में गांवों, शहरों, पंचायतों और सामाजिक संगठनों के लोगों की भारी भागीदारी देखकर उन्हें बहुत खुशी हुई है। मोदी ने कहा कि 'मन की बात' के पिछले संस्करण में उन्होंने 'कैच द रेन' अभियान की चर्चा की थी और लोगों से इसे जन-आंदोलन बनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा, '' 'कैच द रेन' का संदेश बहुत सरल है-जहां और जब भी बारिश हो, वहीं वर्षा जल का संरक्षण करें। इस पहल के तहत वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जलाशयों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण को नयी गति दी जा रही है। मुझे बहुत खुशी है कि गांव हों या शहर, पंचायतें हों या सामाजिक संस्थाएं हर जगह लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की है।'' देशभर में किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कहीं पुराने तालाबों से गाद निकाली जा रही है, तो कहीं कुओं और बावड़ियों को फिर से जीवन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो बोरवेल अब उपयोग में नहीं हैं, उनका भूजल पुनर्भरण के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के विभिन्न हिस्सों में उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ''मध्यप्रदेश के सीधी जिले में लगभग डेढ़ हजार तालाब बनाए गए हैं। नरसिंहपुर में 'अमृत सरोवरों' को संवारा गया है। महाराष्ट्र के नासिक में बड़ी मात्रा में पानी सहेजने की क्षमता विकसित हुई है।'' मोदी ने कहा, ''आंध्र-प्रदेश के नंद्याल में सभी ग्राम पंचायतें इस अभियान से जुड़ी हैं और पुराने तालाबों को फिर से उपयोगी बनाया गया है। हमारे शहर भी पीछे नहीं हैं। छत्तीसगढ़ के कोरबा, ओडिशा के भुवनेश्वर और आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में इस अभियान के उत्साहजनक परिणाम दिखाई दे रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''आइए, हम भी अपने आसपास किसी एक तालाब, कुएं या बावड़ी की जिम्मेदारी लें - पानी की हर बूंद बचाएं। आज बचाई गई हर बूंद, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।'' भाषा देवेंद्र नेत्रपाल
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात” 136वें एपिसोड में कश्मीर की पारंपरिक चटाई वगू पर चर्चा की। इसके साथ ही इस चटाई बनाने की परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए श्रीनगर के गुलाम हुसैन और उनकी बेटी की तारीफ की। जब हुनर भी हो और कुछ करने का जज्बा भी हो, तो हर राह आसान हो जाती है। कश्मीर की पारंपरिक चटाई ‘वगू’ को लेकर आज जो प्रयास हो रहे हैं, उसमें इसी की झलक मिलती है। इसे सरकंडे और धान के पुआल, घास से से तैयार किया जाता है। इस चटाई को बनाने की परंपरा बरसों पुरानी है। इसके लिए कश्मीर के दलदली इलाकों की घास और सरकंडे की कटाई की जाती है। धूप में सुखाने के बाद छंटाई होती है और फिर शुरू होता है हाथों से बुनाई का काम। दो कारीगरों को एक चटाई बनाने में करीब 4 दिन लगते हैं। यह चटाई अनूठी भी है और इकोफ्रेंडली भी है। एक बड़ी खासियत यह है कि आपको गर्मियों में इससे ठंडक और सर्दियों में गर्माहट मिलेगी।” प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “पहले वगू चटाई हर घर में दिखती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका उपयोग कम होने लगा था। श्रीनगर के गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तंजीला ने एक संकल्प लिया। दोनों ‘वगू’ क्राफ्ट की परंपरा को एक नया जीवन देने में जुट गए। गुलाम हुसैन बहुत ही साधारण परिवार से आते हैं, उनको इस काम में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन वगु के सरंक्षण का उनका संकल्प अडिग था। देखते-देखते ही उनके इस प्रयास से बहुत सारे लोग जुड़ते चले गए।” प्रधानमंत्री ने कहा, “गुलाम हुसैन ने इस कौशल को खूभ बढ़ाया। अपने मिशन में स्थानीय स्तर पर सरकारी सहयोग भी मिला। आज तेजी से लोकप्रिय हो रहा वगु देश के अन्य हिस्सों में भी पहुंच रहा है। मुझे इस प्रयास से जुड़े सभी लोगों पर गर्व है। आज सभी का वोकल फॉर लोकल पर जोर है। हम लोकल फॉर वोकल के मंत्र को लेकर चल रहे हैं। ऐसे में कश्मीर का वगु भी आपके घर का हिस्सा बने, इस पर एक बार जरूर सोचिएगा।”
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में विक्रम-1 के सफल लॉन्च के बारे में बात की। उन्होंने कहा विक्रम-1 लॉन्च से हर देशवासी गौरवान्वित हुआ। हम सभी भारतीय स्पेस सेक्टर के इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। पीएम मोदी ने कहा कि ये प्राइवेट सेक्टर द्वारा विकसित भारत का पहला रॉकेट है। उन्होंने कहा कि देश के युवा इनोवेटर्स ने वो कर दिखाया, जिसकी कल्पना तक मुश्किल थी। पीएम मोदी ने युवाओं के कौशल, जुनून और धैर्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक हमारा स्पेस सेक्टर निजी क्षेत्र के लिए बंद रहा था। इस सेक्टर में रुचि रखने वाले काफी युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर नहीं मिल पा रहा था। युवा हित को देखते हुए हमने स्पेस सेक्टर को को निजी क्षेत्र के लिए खोला। आज इसका परिणाम दुनिया देख रही है। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे युवा साथी विज्ञान में भी भारत का मस्तक ऊंचा कर रहे हैं। विज्ञान ओलंपियाड (Science Olympiads) दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगितायों में से एक हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र हिस्सा लेते हैं। मन की बात में उन्होंने आगे कहा कि इसी महीने फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और गणित का ओलंपियाड हुआ। इन प्रतियोगिताओं में भारतीय दल शानदार प्रदर्शन कर रहा है। फिजिक्स ओलंपियाड में हमारे सभी पांच छात्रों ने गोल्ड मेडल जीता और भारत ने पहली रैंक हासिल की। पिछले एक दशक में हर फिजिक्स ओलंपियाड में हमारे देश के छात्रों ने गोल्ड या सिल्वर मेडल जरूर जीते हैं। केमिस्ट्री ओलंपियाड में भी हमारे सभी छात्रों ने गोल्ड मेडल जीते। ये अब तक की बेस्ट परफॉर्मेंस रही है। पीएम मोदी ने बताया कि बायोलॉजी ओलंपियाड में भी हमारे सभी छात्रों ने मेडल जीते, इनमें एक गोल्ड मेडल भी शामिल है। वहीं, गणित ओलंपियाड में हमारे छात्रों ने दो स्वर्ण और चार रजत पदक अपने नाम किये। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे देश की युवा शक्ति पर बहुत गर्व है। यह देखकर खुशी होती है कि भारत में ओलंपियाड और हैकथॉन की संस्कृति लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा की मुझे विश्वास है कि देश के बारे में अधिक से अधिक युवा ऐसे मंचों पर अपनी रुचि दिखाएंगे और भारत का परचम भी लहराएंगे।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में रविवार को बिहार के सीतामढ़ी जिले की एक अनूठी पहल की देशभर में सराहना की। उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण जैसी गंभीर वैश्विक पर्यावरणीय चुनौती का जिक्र करते हुए बताया कि सीतामढ़ी ने इसका एक आसान और प्रभावी समाधान पेश किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘वेस्ट टू वेल्थ’ पहल के तहत जिले में सिंगल-यूज प्लास्टिक कचरे को रिसाइकिल कर मजबूत, टिकाऊ, आरामदायक और पर्यावरण अनुकूल बेंच तैयार की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि एक बेंच बनाने में करीब 40 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। ये बेंच आकर्षक होने के साथ-साथ लंबे समय तक उपयोग में रहने योग्य हैं और इन्हें सरकारी स्कूलों, पार्कों तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जा रहा है।पीएम मोदी ने कहा कि यह पहल केवल लोगों को बैठने की सुविधा ही नहीं दे रही बल्कि छात्रों और आम नागरिकों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रही है। बच्चे सीख रहे हैं कि जिस प्लास्टिक को वे पहले बेकार समझकर फेंक देते थे, वही सही तकनीक और बेहतर प्रबंधन के जरिए समाज के लिए उपयोगी संसाधन बन सकता है। उन्होंने कहा कि इससे ‘रिड्यूस, रीयूज और रिसाइकिल’ का सिद्धांत अब केवल नारा नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है।प्रधानमंत्री ने इस पहल में जिला प्रशासन की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने स्थानीय इकाई के साथ मिलकर इस अभियान को सफल बनाया है। जिलेभर से प्लास्टिक कचरा एकत्र किया जाता है, फिर उसकी सफाई, छंटाई और प्रोसेसिंग के बाद उसे बेंच का रूप दिया जाता है। इस परियोजना के एक चरण में डुमरा, रीगा, बाजपट्टी और रुन्नीसैदपुर समेत चार प्रखंडों से करीब 8,000 किलोग्राम सिंगल-यूज प्लास्टिक एकत्र किया गया। इनमें से 4,000 किलोग्राम प्लास्टिक को रिसाइकिल कर 85 आकर्षक बेंच तैयार की गईं। इस मॉडल में राजस्व साझा करने की व्यवस्था भी शामिल है, जिससे प्रशासन और औद्योगिक साझेदार दोनों को लाभ मिलता है। साथ ही प्लास्टिक के संग्रह, छंटाई, परिवहन और प्रोसेसिंग के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं। -
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के करीब आते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण के लिए देशवासियों को विचार और सुझाव साझा करने के लिए आमंत्रित किया है। उन्होंने यह भी अपील की कि देशवासी इस साल भी ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की भावना को बेमिसाल उत्साह और गर्व के साथ आगे बढ़ाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड को संबोधित किया। इस दौरान, उन्होंने कहा, “कुछ ही सप्ताह बाद हम अपनी स्वतंत्रता का महापर्व भी मनाएंगे। 15 अगस्त हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है। ये उन असंख्य वीरों को याद करने का दिन है, जिन्होंने ‘भारत माता’ की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। उनके त्याग और तपस्या की वजह से आज हमारे हाथ में तिरंगा है। इस तिरंगे में हमारे संविधान के आदर्श हैं।”
उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान ने पूरे देश को एक अद्भुत भावना से जोड़ा है। हर घर-हर गली में तिरंगे का उत्सव दिखाई देता है। इस साल भी हमें ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ाना है। अपने घर पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराना है।” इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ने देशवासियों को आमंत्रित करते हुए कहा, “हर वर्ष 15 अगस्त से पहले आप मुझे बहुत से विचार और सुझाव भेजते हैं। इस वर्ष भी आप अपने विचार ‘माईगव’ पर जरूर साझा कीजिए। मुझे आपके सुझावों का इंतजार है। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को याद किया। उन्होंने कहा, “27 जुलाई को, भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि है। डॉ. कलाम के व्यक्तित्व में कई प्रेरक रूप थे, लेकिन, उनके हृदय के सबसे करीब एक शिक्षक की भूमिका थी। वे बच्चों और युवाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे।” उन्होंने कहा, “संयोग से, इसी हफ्ते हम ‘गुरु पूर्णिमा’ का पावन पर्व मनाएंगे। हमारे माता-पिता हमारे पहले गुरु होते हैं। स्कूल के शिक्षक हमें अक्षर ज्ञान देते हैं। गुरु पूर्णिमा ऐसे सभी गुरुओं के प्रति कृतज्ञता जताने का अवसर है। मैं देश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं।” -
नई दिल्ली। ‘कारगिल विजय दिवस’ पर भारतीय सेना के वीर जवानों के शौर्य और साहस को पूरा देश नमन कर रहा है। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कारगिल विजय दिवस पर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर योद्धाओं को मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। उनका अद्वितीय पराक्रम, अडिग संकल्प और अनन्य राष्ट्रभक्ति हमारी सेना की गौरवशाली परंपरा के अप्रतिम उदाहरण हैं। देश, सदैव उनका ऋणी रहेगा। हमारे उन पराक्रमी वीरों की शौर्यगाथा, आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा और कर्तव्यनिष्ठा के पथ पर चलने के निरंतर प्रेरित करती रहेगी।”उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने पोस्ट किया, “कारगिल विजय दिवस पर, देश भारतीय सशस्त्र बलों के उन बहादुर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करता है, जिनकी असाधारण वीरता, अटूट संकल्प और सर्वोच्च बलिदान ने कारगिल युद्ध में भारत की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित की और हमारे देश की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की।”उन्होंने आगे लिखा, “यह जीत भारत की सैन्य शक्ति, राष्ट्रीय एकता और अपनी मातृभूमि के चप्पे-चप्पे की रक्षा करने के अटूट संकल्प का प्रमाण है। देश हमारे इन बहादुर सैनिकों और उनके परिवारों का सदैव ऋणी रहेगा। जय हिंद।”वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “कारगिल विजय दिवस पर, हमारा देश उन वीर सैनिकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है, जिन्होंने भारत की सुरक्षा के लिए अदम्य साहस और समर्पण का परिचय दिया। सबसे कठिन परिस्थितियों में भी उनका अदम्य साहस हमेशा राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बना रहेगा। उनकी अटूट देशभक्ति और कर्तव्य-निष्ठा पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने लिखा, “26 जुलाई 1999 – भारतीय सेना के शौर्य, पराक्रम और अदम्य साहस का स्वर्णिम अध्याय। कारगिल की दुर्गम चोटियों पर अपने प्राणों की आहुति देकर भारत माता की आन, बान और शान की रक्षा करने वाले अमर वीरों को ‘कारगिल विजय दिवस’ पर कोटि-कोटि नमन। राष्ट्र की रक्षा के लिए कारगिल के वीरों का समर्पण सदैव राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा। जय हिंद।”विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पोस्ट किया, “कारगिल विजय दिवस पर, देश की रक्षा करने वाले हमारे बहादुर सैनिकों के साहस और वीरता को नमन। उनकी सेवा और बलिदान हमेशा याद रखे जाएंगे।” -
नई दिल्ली। कारगिल विजय दिवस पर आज रविवार को गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने वीर सैनिकों को नमन किया है। इसके साथ ही कहा कि कारगिल विजय दिवस हमारी सेना के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अजेय शौर्य का विजयोत्सव है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, “कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी वीर सैनिकों को शत-शत नमन। वर्ष 1999 में कारगिल की दुर्गम चोटियों पर असाधारण पराक्रम का परिचय देने वाले सभी वीर सैनिकों के प्रति देशवासी सदैव कृतज्ञ एवं ऋणी रहेंगे। भारतीय सेना का अदम्य साहस, त्याग और अटूट संकल्प आने वाली पीढ़ियों को देशप्रेम, कर्तव्यनिष्ठा और मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा देता रहेगा।”केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक्स पर लिखा, “‘कारगिल विजय दिवस’ भारतीय सेना के अदम्य शौर्य और अद्भुत पराक्रम का प्रतीक है। वर्ष 1999 में हिमालय की दुर्गम बर्फीली चोटियों पर विषम परिस्थितियों और शत्रु के ऊंचाई पर स्थित मोर्चों के बावजूद, हमारे वीर जवानों ने ‘ऑपरेशन विजय’ के माध्यम से दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। ‘कारगिल विजय दिवस’ पर उन सभी वीर सपूतों का स्मरण कर नमन करता हूं, जिन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान देकर देश की अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखा।”केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स पर पोस्ट किया, “अतुलनीय शौर्य एवं साहसपूर्ण प्रदर्शन से भारत के स्वाभिमान की विजय पताका फहराने वाले वीर जवानों की गौरवगाथा के स्वर्णिम पृष्ठ कारगिल विजय दिवस के अवसर पर समस्त वीर जवानों को कोटि-कोटि नमन।”केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्स पर पोस्ट किया, “आज कारगिल विजय दिवस पर, पूरा देश हमारे उन बहादुर नायकों को सलाम करता है जिन्होंने देश की रक्षा करते हुए कारगिल युद्ध में अपनी जान गंवाई। कारगिल विजय दिवस 1999 में पाकिस्तान पर भारतीय सशस्त्र बलों की निर्णायक जीत की याद दिलाता है।”केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक्स पर पोस्ट किया, “आप सभी को कारगिल विजय दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह गौरवपूर्ण दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य, अटूट संकल्प और राष्ट्र के प्रति सर्वोच्च समर्पण का प्रतीक है। कारगिल की दुर्गम चोटियों पर हमारे वीर जवानों ने अपने अद्भुत पराक्रम से विजय का स्वर्णिम इतिहास रचते हुए तिरंगे की आन, बान और शान को अक्षुण्ण रखा। आज इस पावन अवसर पर मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं तथा राष्ट्र की सुरक्षा में सदैव तत्पर सभी वीर सैनिकों को प्रणाम करता हूं। हमारे जांबाज सपूतों का त्याग, बलिदान और राष्ट्र के प्रति अतुलनीय समर्पण युगों-युगों तक प्रत्येक भारतीय, विशेषकर युवा पीढ़ी को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा।”केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने एक्स पर लिखा, “कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य शौर्य, अद्वितीय पराक्रम, अटूट साहस और मातृभूमि के प्रति सर्वोच्च समर्पण की अमर गाथा है। कारगिल के रणबांकुरों ने अपने अद्वितीय पराक्रम, अडिग संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से राष्ट्र की अस्मिता की रक्षा करते हुए इतिहास में अमिट स्वर्णिम अध्याय अंकित किया। आज उन सभी अमर वीरों को कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से शत-शत नमन, जिनकी वीरता, त्याग और बलिदान की गूँज आज भी भारत के कण-कण में प्रतिध्वनित होती है। हमारे वीर जवानों का अमर बलिदान प्रत्येक भारतीय को सदैव राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा।”( -
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। कार्यभार संभालने के बाद शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक भी की। जोशी को यह जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा चल रही है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्वारा पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी ने तुरंत ही शिक्षा मंत्रालय के कामकाज से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की। शिक्षा मंत्रालय देश के भविष्य से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालय है। नए शिक्षा मंत्री के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ उच्च शिक्षा, विद्यालयी शिक्षा, कौशल विकास और अनुसंधान को भी नई गति देने महत्वपूर्ण माना जा रहा है।प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में गिने जाते हैं। वह वर्तमान में उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी पहले से ही संभाल रहे हैं। इससे पहले वह संसदीय कार्य मंत्री, कोयला मंत्री और खान मंत्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों का का कार्यभार संभाल चुके हैं। उनकी पहचान एक अनुभवी संसदीय रणनीतिकार और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में रही है। कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं।लंबे संसदीय अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के कारण उन्हें सरकार में कई अहम जिम्मेदारियां मिलती रही हैं। फिलहाल जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रहे सुधारों को गति देना भी उनकी प्राथमिकता है। इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहने की संभावना है। शिक्षा मंत्रालय की कमान संभालने के साथ ही मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उनकी प्रारंभिक बैठकें शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में मंत्रालय परीक्षा सुधार, तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित विषयों पर तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम करेगा। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों और विद्यार्थियों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि नए शिक्षा मंत्री इन चुनौतियों से किस प्रकार निपटते हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की प्रक्रिया को किस गति से आगे बढ़ाते हैं। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति मुर्मु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया। संविधान के अनुच्छेद 75(2) के तहत उनका इस्तीफा मंजूर किया गया। साथ ही राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री प्रल्हाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपने की मंजूरी दे दी।राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रल्हाद जोशी अब अपने वर्तमान मंत्रालयों के साथ शिक्षा मंत्रालय का भी अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैधर्मेंद्र प्रधान ने पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दिया। उन्होंने कहा कि उनका यह फैसला छात्रों के हितों की रक्षा करने और देश के युवाओं को “भ्रम के जाल” में फंसने से बचाने के उद्देश्य से लिया गया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने इस्तीफा पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा क्षेत्र के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि वह छात्रों और देश के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए अपने पद से इस्तीफा दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में सुधार और युवाओं के भविष्य को मजबूत बनाने की दिशा में अपने प्रयास जारी रखेगी।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को 'विकसित वाइब्रेंट विलेज' (वीवीवी) कार्यक्रम-2026 के प्रतिभागियों से डिजिटल माध्यम से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट गांवों को शामिल किया गया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम को 'माय भारत' के माध्यम से लागू किया जा रहा है। इसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए की गई है, जिसके तहत भारत के सीमावर्ती गांवों को देश के प्रथम गांव मानते हुए उन्हें विकसित भारत की यात्रा का सक्रिय भागीदार बनाया जा रहा है। 'माय भारत' युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है।
विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2026 का आयोजन दो चरणों में चार जून से 30 जून 2026 तक किया गया। इस दौरान लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट गांवों को शामिल किया गया। इस कार्यक्रम के लिए देशभर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक युवाओं का चयन किया गया। इन प्रतिभागियों का चयन एक राष्ट्रव्यापी ऑनलाइन प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के माध्यम से हुआ, जिसमें तीन लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों ने स्थानीय समुदायों के साथ रहकर स्वच्छता अभियान, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता अभियान, युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम, वृक्षारोपण अभियान, 'मिनी मॉडल' पंचायत का अभ्यास, स्थानीय कारीगरों से संवाद तथा रणनीतिक महत्व वाले संस्थानों का भ्रमण जैसी विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया। -
नयी दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि महिलाएं सक्षम हैं, उन पर हर जिम्मेदारी नहीं डाल दी जानी चाहिए। भागवत ने साथ ही कहा कि परिवार को एक टीम की तरह कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवार में जिम्मेदारियों का बंटवारा होना चाहिए और यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि महिलाओं की आकांक्षाएं कहीं खो न जाएं। शुक्रवार को यहां विश्वमांगल्य सभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में 'युगानुकूल मातृत्व' विषय पर व्याख्यान के बाद प्रश्नोत्तर सत्र को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि घर की जिम्मेदारियों में पुरुषों की भागीदारी भी बढ़नी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जहां महिलाओं को समान सम्मान और सहयोग मिले। उन्होंने कहा, ''जैसा कि मैंने पहले भी कहा, सभी 18 जिम्मेदारियां केवल महिला पर नहीं डाली जानी चाहिए। आज के समय में काम का बंटवारा होना चाहिए। यदि पूरा परिवार एक टीम की तरह काम करे, तो यह पूरी तरह संभव है।'' भागवत ने कहा कि शांति और संतोष तभी मिलता है, जब व्यक्ति वह कर सके जो वह वास्तव में करना चाहता है। परिवार को आपसी सहमति से अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और सामंजस्य बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ''परिवार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इन सभी जिम्मेदारियों के बीच महिला की अपनी आकांक्षाएं और इच्छाएं दम न तोड़ दें। परिवार को स्वयं से पूछना चाहिए कि वह उसे ऐसे कौन-से अवसर दे सकता है, जिनसे वह अपने सपनों को पूरा कर सके।'' उन्होंने कहा कि इस विषय पर पुरुषों और महिलाओं दोनों में जागरुकता आवश्यक है और बदलाव की शुरुआत परिवार से ही होनी चाहिए। आरएसएस सरसंघचालक ने कहा, '' आपसे बेहतर कौन जानता है कि कड़वी दवा भी प्रेम से कैसे दी जाती है। शुरुआत वहीं से कीजिए। धीरे-धीरे वातावरण बदलने लगता है।'' पुरुषों की भूमिका पर भागवत ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के लिए पुरुषों में भी जागरुकता लाना उतना ही जरूरी है। उन्होंने उपस्थित पुरुषों से अपील करते हुए कहा, ''मैं यहां मौजूद सभी पुरुषों से भी आग्रह करता हूं कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करें। शुरुआत स्वयं से करें। अपने घर में सही माहौल बनाएं। इसके बिना बदलाव संभव नहीं होगा।'' भागवत ने कहा कि पहले के समय में परिवार आपसी सलाह-मशविरा से चलते थे। महिलाएं परिवार की वित्तीय व्यवस्था और महत्वपूर्ण निर्णयों में प्रमुख भूमिका निभाती थीं। उन्होंने कहा कि साझेदारी की उसी भावना को फिर से जीवित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ''हमें वही वातावरण दोबारा बनाना होगा। आज 'मैं' और 'मेरा' की भावना यानी व्यक्तिवाद अत्यधिक बढ़ गया है। हमें अपने अहंकार को नियंत्रित करना फिर से सीखना होगा और यह केवल संवाद के माध्यम से ही संभव है।'' महिलाओं की सुरक्षा पर भागवत ने कहा कि महिलाओं को सुरक्षित महसूस कराने की जिम्मेदारी पूरे समाज की है। उन्होंने कहा, '' समाज को स्वयं महिलाओं के लिए खतरा नहीं बनना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं अपनी सुरक्षा करने में सक्षम हैं, लेकिन वे समाज से सुरक्षित वातावरण की अपेक्षा करती हैं। राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर भागवत ने कहा, ''महिलाएं हमारे समाज का आधा हिस्सा हैं। जब तक समाज का यह आधा हिस्सा अपनी पूरी क्षमता से योगदान नहीं देगा, तब तक विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। -
नयी दिल्ली. लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन करने वाला एक विधेयक सोमवार को संसद में पेश किए जाने की संभावना है, जिसमें प्रश्नपत्र लीक से संबंधित अपराधों के लिए कारावास की अवधि को 10 साल तक और जुर्माने को 10 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। विधेयक को पेश किए जाने से पहले सदस्यों को वितरित की गयी इसकी प्रति के अनुसार, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक या अनुचित साधनों का प्रयोग करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। संगठित अपराधों के लिए विधेयक में कम से कम सात वर्ष की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है। विधेयक के अनुसार, सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया जाएगा, जो मुकदमों की सुनवाई तेजी से करेंगी और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करेंगी। -
जम्मू. जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में हर वर्ष आयोजित होने वाली मचैल माता यात्रा को खराब मौसम के कारण तीन दिन के लिए स्थगित कर दिया गया है। एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि अब यह यात्रा 28 जुलाई से शुरू होगी लेकिन यह भी मौसम की अनुकूल स्थिति पर निर्भर करेगा। किश्तवाड़ की खूबसूरत पद्दर घाटी में समुद्र तल से 9,705 फुट की ऊंचाई पर स्थित मचैल माता मंदिर की 304.7 किलोमीटर लंबी यात्रा जम्मू से शुरू होती है। श्रद्धालु लगभग पूरी दूरी सड़क मार्ग से तय करते हैं और मंदिर तक पहुंचने के लिए अंतिम 1.7 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल करते हैं। अधिकारियों ने बताया कि यात्रा को सुरक्षित और सुचारु रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन ने तय किया है कि श्रद्धालुओं को सुबह पांच बजे से शाम पांच बजे के बीच ही यात्रा करने की अनुमति होगी। इसके अलावा प्रतिदिन अधिकतम 8,000 श्रद्धालुओं को ही यात्रा की अनुमति दी जाएगी। अधिकारी ने बताया कि ये निर्णय किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए। उन्होंने कहा कि यात्रा के लिए पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन और अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही पर नजर रखने के लिए आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) प्रणाली लागू की गई है।
मचैल माता मंदिर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले चिसोटी गांव में 14 अगस्त 2025 को बादल फटने की भीषण घटना हुई थी। इस हादसे में 63 लोगों की मौत हो गयी थी जिनमें अधिकतर श्रद्धालु थे। इस दौरान कई लोग घायल हुए थे और करीब 30 लोग लापता हो गए थे। उपायुक्त ने बताया कि धार्मिक परंपराओं के अनुसार 25 जुलाई को मंदिर के पवित्र कपाट खोले जाएंगे। इस अवसर पर मचैल में पुजारी और स्थानीय लोग पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान करेंगे। इसके बाद मौसम की स्थिति का आकलन करने के बाद यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 28 जुलाई से श्रद्धालुओं के लिए यात्रा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से यात्रा शुरू करने से पहले अपना पंजीकरण अनिवार्य रूप से पूरा करने की अपील की। उपायुक्त ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए किश्तवाड़ के सरकूट स्थित गौरी शंकर मंदिर आधार शिविर में दो आरएफआईडी यात्रा पंजीकरण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा गुलाबगढ़ में भी करीब छह पंजीकरण केंद्र बनाए गए हैं। किश्तवाड़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नरेश सिंह ने बताया कि यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), सेना तथा विशेष पुलिस चौकियां तैनात की गई हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसका सख्ती से पालन करें, निर्धारित यात्रा समय का अनुपालन करें तथा प्रशासन के साथ पूरा सहयोग करें। -
जम्मू. वार्षिक अमरनाथ यात्रा खराब मौसम के कारण छह दिन तक स्थगित रहने के बाद शनिवार को जम्मू से फिर शुरू हो गई और 6,000 से अधिक तीर्थयात्रियों का नया जत्था भगवती नगर आधार शिविर से कश्मीर घाटी स्थित बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। जम्मू कश्मीर में लगातार बारिश और खराब मौसम के कारण यात्रा 19 जुलाई को एहतियातन स्थगित कर दी गई थी। मौसम का 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर तक जाने वाले दोनों मार्गों पर विशेष रूप से असर पड़ा था। इन मार्गों में अनंतनाग जिले का पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले का अपेक्षाकृत छोटा 14 किलोमीटर लंबा बालटाल मार्ग शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि 1,470 महिलाओं, 25 बच्चों और 54 साधुओं समेत कुल 6,269 तीर्थयात्रियों का 18वां जत्था कड़ी सुरक्षा के बीच 223 वाहनों के काफिले में शनिवार तड़के दो बजकर 40 मिनट पर बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। उन्होंने बताया कि पहलगाम मार्ग के लिए कोई काफिला रवाना नहीं किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि मौसम में सुधार और जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बहाल होने के बाद यात्रा फिर शुरू की गई। उधमपुर-रामबन मार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन और पहाड़ों से पत्थर गिरने के कारण राजमार्ग तीन दिन तक बंद रहा था। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने घाटी में वार्षिक यात्रा शुरू होने से एक दिन पहले दो जुलाई को भगवती नगर आधार शिविर से तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। यात्रा का समापन रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को होगा।
अब तक करीब चार लाख तीर्थयात्री मंदिर के दर्शन कर चुके हैं। इनमें से लगभग 1.20 लाख तीर्थयात्रियों ने जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से अपनी यात्रा शुरू की। जम्मू आधार शिविर का विकल्प चुनने वाले तीर्थयात्रियों को व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच काफिलों में कश्मीर ले जाया जाता है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने उनके योगदान की सराहना की। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का सार्वजनिक जीवन और छात्र कल्याण के प्रति आजीवन समर्पण उनकी यात्रा का ''प्रमाण'' है। जितेंद्र सिंह, पीयूष गोयल, वीरेंद्र कुमार, गिरिराज सिंह और जी. किशन रेड्डी समेत कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने भी धर्मेंद्र प्रधान के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका (प्रधान का) कार्यकाल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का परिचायक रहा। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने और ऐतिहासिक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को सफलतापूर्वक लागू करने सहित कई योजनाओं में 'अहम भूमिका' निभाई। नितिन नवीन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "बड़े हितों को प्राथमिकता देते हुए उनका (प्रधान का) पद छोड़ने का फैसला सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च मानकों को दर्शाता है। पार्टी इस फैसले में धर्मेंद्र प्रधान जी के साथ मजबूती से खड़ी है।" केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दृढ़ प्रतिबद्धता का परिचायक रहा और यह कार्य 'दृढ़ विश्वास, ऊर्जा व स्पष्ट उद्देश्य' के साथ किया गया। उन्होंने कहा कि प्रधान ने शिक्षा क्षेत्र की जटिल चुनौतियों का सामना करते हुए हमेशा विद्यार्थियों को केंद्र में रखा। जितेंद्र सिंह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "धर्मेंद्र प्रधान के भारत के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के साथ यह उनके विद्यार्थियों और सार्वजनिक जीवन से गहरे तथा लंबे जुड़ाव को स्वीकार करने का अवसर है। बहुत कम नेता ऐसे रहे हैं, जिनका युवा भारत की आकांक्षाओं और चिंताओं से इतना गहरा रिश्ता रहा हो।" उन्होंने कहा, "अब जब वह आगे बढ़ रहे हैं, तो वह भारत में शिक्षा के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण और लगातार आगे बढ़ने वाली चर्चा की विरासत छोड़कर जा रहे हैं।" संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि सच्चे नेतृत्व का आकलन दशकों के काम से होता है और धर्मेंद्र प्रधान का सफर सार्वजनिक जीवन तथा छात्र कल्याण के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने कहा, "केंद्रीय मंत्रिमंडल में उनके (प्रधान के) साथ काम करते हुए मैंने भारत की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और करोड़ों युवा विद्यार्थियों को हर फैसले के केंद्र में रखने के प्रति उनकी सच्ची प्रतिबद्धता देखी है। इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र का नेतृत्व करने के लिए अपार धैर्य की जरूरत होती है और उन्होंने साहस तथा स्पष्ट सोच के साथ इस जिम्मेदारी को निभाया।" रीजीजू ने एक पुराने कार्यक्रम की अपनी और धर्मेंद्र प्रधान की साथ वाली तस्वीर भी साझा की।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि छात्र आंदोलनों से अपने शुरुआती जुड़ाव से लेकर सार्वजनिक जीवन और शासन में निभाई गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों तक, धर्मेंद्र प्रधान ने हमेशा प्रतिबद्धता, अनुशासन और लोगों, खासकर भारत के युवाओं की आकांक्षाओं, से "गहरा जुड़ाव" दिखाया है। उन्होंने कहा, "शिक्षा सुधार कोई अल्पकालिक प्रक्रिया नहीं है। इसके लिए निरंतर प्रयास, व्यापक विचार-विमर्श और शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति में अटूट विश्वास की जरूरत होती है। प्रधान जी ने पूरी निष्ठा और स्पष्ट उद्देश्य के साथ इन गुणों को मंत्रालय में उतारा।" भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा कि किसी भी मजबूत राष्ट्र की पहचान उसकी शिक्षा व्यवस्था से होती है और धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में इस विचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। प्रधान ने कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेतृत्व में देशभर में हुए छात्रों के प्रदर्शन तथा नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर उन्हें पद से हटाने की मांग के बीच, शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। तावड़े ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का सार्वजनिक जीवन छात्र आंदोलनों से शुरू हुआ था और देश के शिक्षा मंत्री का दायित्व संभालना उनकी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने कहा, ''अपने कार्यकाल के दौरान प्रधान ने शिक्षा के महत्व को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में बनाए रखने का लगातार प्रयास किया।'' तावड़े ने कहा, ''मैं आपके सार्वजनिक जीवन की भावी जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं देता हूं और आशा करता हूं कि 'राष्ट्र प्रथम' की आपकी भावना 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में हमेशा बनी रहेगी।'' भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए प्रधान के इस्तीफे को देश के युवाओं और 'जेनरेशन-जेड' (जेन-जेड) के प्रति संवेदनशीलता का अभूतपूर्व उदाहरण बताया। 'जेन-जेड' से अभिप्राय 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी से है। तिवारी ने कहा कि (प्रधान का) यह इस्तीफा कठिन समय में छात्रों के साथ खड़े रहने की सत्तारूढ़ दल की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। -
गुवाहाटी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को असम सरकार को राज्य में बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। राज्य में अधिकतर हिस्सों में बारिश कम होने के बाद बाढ़ की स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिले हैं। केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के राहत शिविरों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं, भोजन, पेयजल तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है और प्रशासन दिन के दौरान लगभग सभी प्रभावित इलाकों तक पहुंचने में सफल रहा। उन्होंने 'एक्स' पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें फोन करके राज्य में बाढ़ की मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। शर्मा ने कहा, "उन्होंने (मोदी ने) तबाही की स्थिति, जारी राहत कार्यों और जमीन पर आ रही चुनौतियों के बारे में जानकारी मांगी।" मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों और प्रत्येक प्रभावित परिवार तक पहुंचने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जान-माल के नुकसान पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए असम के लोगों को आश्वासन दिया कि इस आपदा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और केंद्र सरकार राहत, पुनर्वास तथा पुनर्निर्माण कार्यों में हरसंभव सहायता देगी। शर्मा ने कहा कि कठिन समय में मिले प्रधानमंत्री के समर्थन और आश्वासन के लिए असम के लोग उनके आभारी हैं। राज्य में अब तक बाढ़ से 62 लोगों की मौत हो चुकी है और नौ जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। सोनोवाल ने दिन के समय शिवसागर जिले के कुछ राहत शिविरों का दौरा किया, विस्थापित परिवारों से बातचीत की और अधिकारियों को सतर्क रहने तथा यह सुनिश्चित करने को कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को जरूरी सुविधाएं मिलने में कोई परेशानी न हो। उन्होंने राहत शिविरों में मौजूद लोगों से कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रत्येक प्रभावित व्यक्ति तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए मिलकर काम कर रही हैं। सोनोवाल ने कहा, "भारत सरकार इस कठिन समय में असम के लोगों के साथ मजबूती से खड़ी है। हम हर जीवन की सुरक्षा और जरूरतमंद परिवारों तक राहत, स्वास्थ्य सेवा, भोजन और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।" उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं लोगों की सहनशीलता की परीक्षा लेती हैं, लेकिन साथ ही एकता और करुणा की भावना को भी सामने लाती हैं। मंत्री ने कहा, "सरकारों, स्वयंसेवी संगठनों व नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हम इस कठिन दौर से बाहर निकलेंगे और प्रत्येक प्रभावित परिवार को सम्मान के साथ अपना जीवन फिर से पटरी पर लाने में मदद करेंगे।" इससे पहले सोनोवाल ने डिब्रूगढ़ से असम ओलंपिक संघ के बाढ़ राहत अभियान को रवाना किया, जो चराइदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों के प्रभावित परिवारों के लिए है। मुख्यमंत्री ने शाम को मंत्रिमंडल की एक बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि ऊपरी असम के जिलों में बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र की एक टीम राज्य पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा, "आज (शनिवार को) बाढ़ की स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है। हम शिवसागर और चराइदेव जिलों के हर गांव और इलाके तक पहुंचने में सफल रहे हैं।" शर्मा ने बताया कि जहां प्रशासन पहले नहीं पहुंच सका था, वहां राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हवाई मार्ग का इस्तेमाल किया जा रहा है और सेना की मदद ली जा रही है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा और स्वास्थ्य शिविरों में तेजी आई है और उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति और बेहतर होगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल बाढ़ में अब तक 62 लोगों की मौत हुई है।
शर्मा ने कहा कि तीन कैबिनेट मंत्री—बिमल बोरा, केशब महंत और सुशांत बरगोहेन—चराइदेव और शिवसागर जिलों में रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने शुक्रवार को कहा था कि लगातार बारिश के कारण कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि प्रशासन अब भी कम से कम 80,000 बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने में सफल नहीं हो पाया है। शर्मा ने कहा, "हम लोगों से नए कपड़े दान करने की भी अपील करते हैं, पुराने कपड़े नहीं। इसके अलावा, शैक्षणिक सामग्री भी दी जा सकती है, क्योंकि बाढ़ के पानी ने पढ़ाई से जुड़ी सभी सामग्री नष्ट कर दी है।" उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अगस्त तक अपना नुकसान आकलन पूरा करने का लक्ष्य रख रही है, ताकि जल्द से जल्द पुनर्वास कार्य शुरू किया जा सके। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, पिछले 24 घंटे में बाढ़ के कारण 14 और लोगों की मौत हुई। दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, होजाई, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, नगांव और शिवसागर जिलों में 7,05,100 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बृहस्पतिवार की तुलना में स्थिति में मामूली सुधार हुआ है, जब 11 जिलों में 7.21 लाख से अधिक लोग प्रभावित थे। एएसडीएमए ने बताया कि करीब 856 गांव अब भी जलमग्न हैं और राज्य में 56,606.78 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के पानी से विभिन्न जिलों में तटबंध, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
प्राधिकरण के अनुसार, सात जिलों में प्रशासन 363 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र चला रहा है, जहां वर्तमान में 1,15,205 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया गया है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को देश में तीन समर्पित रासायनिक पार्कों की स्थापना के लिए भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य-रसायन योजना) को मंजूरी दे दी है। वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में घोषित इस योजना के तहत रासायनिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को आधुनिक बुनियादी ढांचे, निवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिहाज से नई मजबूती देने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि भव्य-रसायन योजना को मिली मंजूरी भारत के रासायनिक और पेट्रोकेमिकल पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचे, साझा सुविधाओं और मजबूत पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ रासायनिक पार्क विकसित किए जाएंगे। इससे लॉजिस्टिक और उत्पादन लागत घटेगी, निवेश आकर्षित होगा, निर्यात बढ़ेगा, आयात प्रतिस्थापन को बढ़ावा मिलेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।सरकार ने योजना के लिए कुल 3,030 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। इसमें 3,000 करोड़ रुपए पार्कों की आंतरिक अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताओं के विकास पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 30 करोड़ रुपए प्रशासनिक व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू रहेगी। योजना के तहत संबंधित राज्य सरकार को प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 500 करोड़ रुपए का योगदान करना होगा। इसके बाद केंद्र सरकार प्रत्येक पार्क के विकास के लिए अधिकतम 1,000 करोड़ रुपए तक का अनुदान देगी। पार्कों का चयन प्रतिस्पर्धी और प्रदर्शन आधारित वित्त पोषण तंत्र (चैलेंज रूट) के माध्यम से किया जाएगा। सरकार के अनुसार, इस योजना से कच्चे माल की उपलब्धता, विनिर्माण, आपूर्ति शृंखला और सहायक उद्योगों सहित रसायन क्षेत्र की पूरी मूल्य शृंखला को मजबूती मिलेगी। साझा बुनियादी ढांचे और आधुनिक सुविधाओं से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा तथा परिवहन और प्रबंधन लागत में कमी आएगी, जिससे भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।योजना के माध्यम से भारतीय रसायन उद्योग को वैश्विक मूल्य शृंखलाओं से बेहतर तरीके से जोड़ने का लक्ष्य है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में घरेलू और विदेशी निवेश भी आकर्षित होगा। भव्य-रसायन योजना के तहत विकसित होने वाले पार्कों में साझा अपशिष्ट उपचार संयंत्र, उपचार, भंडारण एवं निपटान सुविधाएं तथा खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन अवसंरचना जैसी केंद्रीकृत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे पर्यावरणीय मानकों का बेहतर अनुपालन सुनिश्चित होगा और रसायन उद्योग का सतत विकास संभव हो सकेगा।सरकार का कहना है कि रसायन और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र का विस्तार कृषि, वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अनेक क्षेत्रों को भी गति देगा। इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिलेगा। यह पहल वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।योजना के तहत विकसित किए जाने वाले प्रत्येक रासायनिक पार्क में कम से कम आठ वर्ग किलोमीटर (करीब 2,000 एकड़) का निर्बाध भूमि क्षेत्र होगा। इन पार्कों में रसायन उद्योग की जरूरतों के अनुरूप साझा अवसंरचना और मूलभूत उपयोगिताएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उद्योगों को एकीकृत और आधुनिक औद्योगिक वातावरण मिल सके। -
नई दिल्ली। भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को 17 जुलाई, 2026 को दिल्ली क्षेत्र के जींद–सोनीपत रेलखंड पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। शुरुआत के बाद से यह ट्रेन 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर चुकी है, जिससे 3,200 लीटर से अधिक डीज़ल की बचत हुई है। यह ट्रेन शून्य टेलपाइप कार्बन उत्सर्जन के साथ केवल जलवाष्प छोड़ती है और भारतीय रेल के स्वच्छ एवं सतत परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया के माध्यम से फ्यूल सेल के भीतर ही बिजली उत्पन्न करती है। इसी विद्युत ऊर्जा से ट्रेन संचालित होती है। इस पूरी प्रक्रिया में उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प निकलती है। न धुआँ निकलता है और न ही टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे यह वर्तमान रेल प्रणोदन तकनीकों में सबसे स्वच्छ विकल्प बनकर उभरी है। भारतीय रेल के नेतृत्व में विकसित यह परियोजना पूरी तरह स्वदेशी पहल है। 10 कोच वाली इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार लगाई गई हैं, जो संयुक्त रूप से 2,400 किलोवाट शक्ति प्रदान करती हैं। इसके अलावा ट्रेन में लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियां और हाइड्रोजन सिलेंडर भी लगाए गए हैं, जो इसकी ऊर्जा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। इस परियोजना के तहत जींद में भारतीय रेल की पहली समर्पित हाइड्रोजन भंडारण सुविधा स्थापित की गई है। यहां 500 Bar तक के दाब पर ग्रीन हाइड्रोजन का भंडारण किया जा सकता है, जबकि 350 Bar के दाब पर ईंधन भरने की व्यवस्था उपलब्ध है। इस सुविधा की कुल भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम है। ट्रेन में हाइड्रोजन रिसाव, अधिक तापमान, आग और धुएँ का स्वतः पता लगाने वाली कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां लगाई गई हैं। इसके साथ स्वचालित शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का अनुपालन तथा सभी आवश्यक परीक्षण और सत्यापन भी सुनिश्चित किए गए हैं। जींद–सोनीपत रेलखंड पर सफल परिचालन के बाद जल्द ही इसका परीक्षण दिल्ली मार्ग पर भी शुरू किया जाएगा।
भारत की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वदेशी हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की स्थापना की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। यह परियोजना सतत और शून्य-उत्सर्जन रेल परिवहन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है तथा भविष्य में इसके व्यापक विस्तार और स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की मजबूत आधारशिला रखती है।






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