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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को राष्ट्रीय जल विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कहा कि देश की जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्यों को टीम इंडिया की भावना के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में तय किए गए समयबद्ध और क्रियान्वयन योग्य बिंदुओं की लगातार समीक्षा और निगरानी होनी चाहिए।
जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह प्रधानमंत्री की परिकल्पना के तहत आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलनों की पहली श्रृंखला है, जिसका उद्देश्य सहकारी संघवाद को मजबूत करना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर सामूहिक भागीदारी बढ़ाना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक बार होने वाला कार्यक्रम नहीं होना चाहिए, बल्कि इसकी सिफारिशों पर निरंतर समीक्षा और फॉलो-अप की व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।उन्होंने तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जनसंख्या वृद्धि और भविष्य की जल आवश्यकताओं को देखते हुए शहरी स्थानीय निकायों को जल प्रबंधन के प्रति संवेदनशील बनाने पर जोर दिया। साथ ही, शहरी निकायों के लिए भी ऐसे चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया। पीएम मोदी ने जल बचाने वाली आधुनिक तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से परिचित कराने के लिए प्रदर्शनी और कार्यशालाएं आयोजित करने का भी सुझाव दिया, ताकि भारतीय निर्माता और अन्य हितधारक प्रभावी समाधान विकसित कर सकें।जनभागीदारी पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने “जल उत्सव” अभियान चलाने का सुझाव दिया, जिससे लोगों में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े। उन्होंने जलाशयों की नियमित डी-सिल्टिंग (गाद निकालने) को अभियान का हिस्सा बनाने और इसके लिए स्पष्ट मानक एवं एसओपी तैयार करने की बात कही। बांध सुरक्षा के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने हर मानसून से पहले पूरी तैयारी, सुरक्षा मानकों के पालन और स्कूलों के पाठ्यक्रम में भी जल एवं बांध सुरक्षा से जुड़े विषय शामिल करने पर जोर दिया।उन्होंने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन एवं जल शासन से जुड़े ज्ञान और क्षमता निर्माण को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। साथ ही राज्यों के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों के अध्ययन दौरे आयोजित करने का सुझाव दिया, ताकि सफल मॉडलों को अन्य राज्यों में भी अपनाया जा सके।प्रधानमंत्री ने जल क्षेत्र में मजबूत डेटा गवर्नेंस की जरूरत बताते हुए कहा कि जल संबंधी आंकड़ों का व्यवस्थित संग्रह, विश्लेषण और उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने एक समान प्रारूप में डेटा संग्रह और विश्लेषण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। अपने गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सुनियोजित योजना, प्रतिबद्धता और सक्षम अधिकारियों की मदद से जल संकट को अवसर में बदला जा सकता है। समापन सत्र में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने सम्मेलन के चार प्रमुख निष्कर्ष गिनाए। इनमें जल अवसंरचना परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना, जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाना, पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना और ग्रामीण पेयजल योजनाओं के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव को संस्थागत रूप देना शामिल है। -
सशस्त्र बलों में एवीएम रैंक पाने वाली पहली महिला बनीं
नयी दिल्ली. भारतीय वायुसेना की अधिकारी शक्ति शर्मा ने इतिहास रचा है। वह देश के सशस्त्र बलों में एयर वाइस मार्शल (एवीएम) या समकक्ष पद प्राप्त करने वाली पहली महिला अधिकारी (गैर-चिकित्सा) बन गई हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि शर्मा ने एक सितंबर को वायुसेना मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (शिक्षा) का पद संभाला। वायुसेना के एक अधिकारी ने बताया कि बल की अधिकारी शर्मा पूर्व में एयर कमोडोर के पद पर कार्यरत थीं।
रक्षा मंत्रालय ने कहा, ''भारतीय वायु सेना के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा भारतीय रक्षा बलों में एयर वाइस मार्शल (या उसके समकक्ष) का पद हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी (गैर-चिकित्सा) बनीं।'' बयान के मुताबिक एवीएम शर्मा को 18 जून, 1994 को वायुसेना की शिक्षा इकाई में कमीशन मिला था और वह अपनी नयी भूमिका के लिए काफी अनुभव लेकर आई हैं। उन्हें प्रशिक्षण केंद्रों, वायुसेना के अड्डों, कमान मुख्यालयों और वायुसेना मुख्यालयों में अलग-अलग जगहों पर काम करने का अनुभव है। मंत्रालय ने बताया, ''अपने पूरे करियर के दौरान, उन्होंने कई अहम संस्थागत पहलों का नेतृत्व किया है। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर और पुणे विश्वविद्यालय में 'वायुसेना की उत्कृष्टता पीठ' की स्थापना शामिल है, जिनका उद्देश्य शैक्षणिक और रणनीतिक रक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने तीनों सेनाओं की पहली महिला अधिकारी के तौर पर सैनिक स्कूल की कमान संभालकर इतिहास भी रचा। उन्होंने सैनिक स्कूल, कपूरथला में प्रिंसिपल के तौर पर काम किया।'' बयान में कहा गया कि यह अहम उपलब्धि भारतीय रक्षा बलों में महिला अधिकारियों की यात्रा का एक नया अध्याय है। तीन दशकों से अधिक समय की शानदार सेवा के साथ, वह वायुसेना के आदर्श वाक्य पीढ़ियों को 'शान के साथ आसमान छूने' के लिए प्रेरित करती रही हैं। -
मथुरा/ मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर स्थित भागवत भवन सहित सभी मंदिरों में भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानी चार सितंबर को मध्यरात्रि में मनाया जाएगा। इस वर्ष महापर्व का आयोजन 'गौरक्षा-राष्ट्र रक्षा' के संकल्प सूत्र के साथ किया जा रहा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा तथा सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने बताया कि जन्मोत्सव के अवसर पर महाभिषेक के बाद ठाकुरजी भागवत भवन स्थित राधाकृष्ण मंदिर में कलहंस पुष्प बंगले में 'पंचरत्नी' पोशाक धारण कर विराजेंगे। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को भव्य बनाने के लिए सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं।
उन्होंने कहा, ''श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विशाल मंदिर परिसर को और अधिक मनोहारी एवं चित्ताकर्षक स्वरूप दिया जा रहा है। मंदिर के बाहरी हिस्से में आकर्षक सजावट और रोशनी की व्यवस्था की जा रही है। प्रकाश शिखर और पूरा परिसर भी भव्य रूप में दिखाई देगा।'' श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने बताया कि ठाकुरजी रत्न-जड़ित मुकुट, बांसुरी, नवरत्न-जड़ित कंठा सहित विभिन्न शृंगार सामग्री धारण करेंगे। भगवती योगमायाजी विशिष्ट दिव्य स्वर्ण मुकुट धारण करेंगी। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में विराजमान ठाकुर केशवदेव, मां योगमाया, गर्भगृह और ठाकुर राधाकृष्ण युगल सरकार मंदिर में विशिष्ट पूजन, सहस्रार्चन, जन्माभिषेक और आरती के दिव्य दर्शन होंगे। मंदिर की साज-सज्जा और व्यवस्थाएं इस बार नयनाभिराम एवं अभूतपूर्व होंगी। शर्मा ने कहा, ''ठाकुरजी 'पंचरत्नी' पोशाक धारण करेंगे जिस पर पंचरत्नों के रूप में कामधेनु गाय, पांचजन्य शंख, अमृत कलश, समुद्र मंथन से प्राप्त ऐरावत हाथी और कल्पवृक्ष को विशेष रूप से उकेरा गया है। जरी, रेशम और रत्नों की प्रतिकृतियों का प्रयोग कर तैयार की गई इस पोशाक के दर्शन भक्तों को अभिभूत करेंगे।'' जन्माष्टमी के अवसर पर ठाकुरजी को धारण कराई जाने वाली यह पोशाक तीन सितंबर को शाम साढ़े पांच बजे भव्य एवं दिव्य शोभायात्रा के साथ जन्मस्थान परिसर में प्रवेश करेगी। इस अवसर पर पोशाक के साथ काशी विश्वनाथ धाम से प्राप्त प्रसाद और सुगंधित द्रव्य आदि तथा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या धाम से प्राप्त उपहार एवं अभिषेक सामग्री भी प्रदर्शित की जाएगी। उन्होंने कहा, ''अयोध्या, मथुरा और काशी जैसी तीनों पवित्र पुरियों के इस अद्भुत समन्वय से अलौकिक दृश्य त्रिवेणी संगम जैसा भाव प्रस्तुत करेगा। करोड़ों सनातनियों के आस्था केंद्र और कंस के कारागार के रूप में भक्तों के हृदय में विराजमान गर्भगृह को भी विशेष रूप से सजाया जा रहा है।'' शर्मा ने कहा, ''करीब 200 किलोग्राम चांदी का इस्तेमाल कर गर्भगृह के चबूतरे और दीवारों को सुंदर स्वरूप दिया गया है।
इस वर्ष नवनिर्मित रजत-कमल में विराजमान श्रीगोपालजी का जन्माभिषेक भक्तों को निश्चित रूप से अभिभूत करेगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान समिति के सदस्यों ने कहा, ''भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, शिव और अनेक देवताओं के प्राकट्य की साक्षी रही भारत की पवित्र भूमि पर सनातन की आत्मा मानी जाने वाली गौमाता पर हो रहे अत्याचार से प्रत्येक सनातनी और कृष्णभक्त व्यथित है।'' उन्होंने कहा, ''गौमाता की रक्षा और सम्मान के लिए गोपाल की जन्मभूमि, लीलाभूमि और ब्रजभूमि से करोड़ों कृष्णभक्तों को उसकी रक्षा का संकल्प दिलाया जाएगा।'' भगवान के जन्मोत्सव की शुरुआत चार सितंबर को सुबह साढ़े पांच बजे शहनाई की सुमधुर धुन और नगाड़ों के वादन के साथ मंगला आरती से होगा। इसके बाद सुबह आठ बजे भगवान का दिव्य पंचामृत अभिषेक पवित्र स्तोत्रों के पाठ और पुष्पार्चन के साथ संपन्न होगा। मंगलाचरण और वेदमंत्रों के सस्वर उच्चारण के बीच भगवान का पुष्पार्चन किया जाएगा। इस अवसर पर ब्रज के उत्कृष्ट गायक ठाकुरजी के समक्ष दिव्य भजन-गायन की प्रस्तुति देंगे। जन्म महाभिषेक का मुख्य कार्यक्रम रात दस बजे श्रीगणेश-नवग्रह पूजन से शुरू होगा। इसके बाद 1008 कमल-पुष्पों से ठाकुरजी का सहस्रार्चन करते हुए उनका आह्वान किया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान समिति ने सदस्यों ने कहा कि मध्यरात्रि ठीक 12 बजे भगवान के प्राकट्य के साथ पूरा मंदिर परिसर ढोल-नगाड़ों, झांझ-मंजीरों और मृदंग की ध्वनि से गूंज उठेगा। इसी समय भगवान के जन्म की महाआरती शुरू होगी, जो रात 12:10 बजे तक चलेगी। उन्होंने बताया कि इसके बाद केसर आदि सुगंधित द्रव्यों से अभिषिक्त भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह 'रजत सूप' में विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पधारेंगे। इसके बाद कामधेनु स्वरूपा स्वर्णमंडित रजत गो अपने पयोधर से भगवान के श्रीविग्रह का प्रथम अभिषेक करेंगी। उन्होंने बताया कि इसके बाद ठाकुरजी का श्रीविग्रह अभिषेक स्थल पर रजत कमल में विराजमान होगा। जन्माभिषेक के बाद रात 12 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 50 मिनट तक ठाकुरजी की शृंगार आरती होगी। जन्माष्टमी के दिन सभी श्रद्धालुओं का प्रवेश पूर्व की भांति उत्तरी द्वार (गोविंद नगर की ओर) से होगा, जबकि निकासी पूर्व दिशा में स्थित दक्षिणी द्वार (मुख्य द्वार) से होगी। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर स्थित लीलामंच पर शाम सात बजे से रात नौ बजे तक एक सितंबर से पांच सितंबर तक विभिन्न लीलाओं का मंचन किया जाएगा। इनमें 'माखन चोर गोपाल लीला', 'मीरा बाई चरित्र लीला', 'श्यामा-श्याम मिलन लीला', 'श्रीकृष्ण जन्म लीला' तथा 'गिरिराज पूजा व छप्पनभोग दर्शन' प्रमुख हैं। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी(भाजपा)ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च राजकीय सम्मान दिए जाने को 'हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण' करार देते हुए रविवार को कहा कि यह उनके नेतृत्व और भारत के बढ़ते प्रभाव की 'वैश्विक मान्यता' को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी को रविवार को उज्बेकिस्तान के प्रतिष्ठित सम्मान 'ओली दराजाली दोस्तलिक' से नवाजा गया। उन्होंने यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के अटूट संबंधों को समर्पित किया। मोदी व्यापार, स्वच्छ ऊर्जा, संपर्क समेत कई क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत करने के लिए उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री को यह सम्मान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने प्रदान किया।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री को सम्मान मिलने पर बधाई देते हुए सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर जारी एक पोस्ट में कहा, '' प्रत्येक भारतीय के लिए यह गर्व का एक शानदार क्षण है, क्योंकि कूटनीति का 'मोदी सिद्धांत' नयी ऊंचाइयों को छू रहा है, 'ग्लोबल साउथ' की आवाज को मजबूत कर रहा है और देशों के बीच संबंधों को मजबूत करके मानवता के कल्याण के हमारे सभ्यतागत लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है।'' रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रधानमंत्री मोदी के 'दूरदर्शी नेतृत्व' और भारत तथा उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चली आ रही मित्रता को और प्रगाढ़ करने की उनकी 'दृढ़ कोशिशों' को मान्यता है। उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट में कहा, ''यह भारत के बढ़ते वैश्विक रुतबे, प्रभाव और दुनिया भर में 'नए भारत' द्वारा बनाई जा रही मजबूत साझेदारियों की गर्व भरी पुष्टि भी है। यह 1.4 अरब भारतीयों के लिए बहुत गर्व का क्षण है।'' विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह सम्मान भारत-उज्बेकिस्तान की दोस्ती को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की 'निरंतर कोशिशों' को मिली मान्यता है। उन्होंने 'एक्स' पर लिखा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विदेशी नेताओं के लिए उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान 'ओली दराजाली दोस्तलिक' से सम्मानित होते हुए देखकर खुशी हुई। पूरा विश्वास है कि यह सम्मान और यह ऐतिहासिक यात्रा हमारे संबंधों को नयी गति देगी।'' भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा, ''माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय सम्मान 'ओली दराजाली दोस्तलिक' से सम्मानित किया जाना हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।'' उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को दिया गया यह 36वां अंतरराष्ट्रीय राजकीय सम्मान उनके नेतृत्व और भारत की बढ़ती वैश्विक पहचान को दर्शाता है, साथ ही यह भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दोस्ती और साझेदारी के मजबूत रिश्ते का भी जश्न है।'' केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 'एक्स' पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को यह प्रतिष्ठित सम्मान मिलना भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को मजबूत करने की उनकी कोशिशों को दर्शाता है और भारत के ''बढ़ते वैश्विक रुतबे' को रेखांकित करता है। केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के लिए 35वां वैश्विक सम्मान है, जो उनके नेतृत्व, वैश्विक शांति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और विकास के दृष्टिकोण के लिए दुनिया की प्रशंसा को दर्शाता है। उन्होंने 'एक्स' पर कहा, ''भारत के वैश्विक उदय को मान्यता मिली है! यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए गर्व का क्षण है और भारत तथा उज्बेकिस्तान के बीच अटूट दोस्ती का प्रमाण है।'' भाजपा के कई अन्य नेताओं ने भी मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च राजकीय सम्मान दिए जाने की सराहना की। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह मोदी के 'दूरदर्शी नेतृत्व' और भारत तथा उज़्बेकिस्तान के बीच 'दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी के ऐतिहासिक संबंधों' को और मजबूत करने की उनकी दृढ़ कोशिशों को दर्शाता है। योगी आदित्यनाथ ने 'एक्स' पर कहा,''यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है और वैश्विक मंच पर 'नए भारत' की बढ़ती साख की एक और पहचान है। भारत की वैश्विक साझेदारियों को मजबूत करने में माननीय प्रधानमंत्री जी की निरंतर सफलता की कामना करता हूं। -
फिरोजपुर. पंजाब पुलिस के कांस्टेबल गुरप्रीत सिंह के लिए नियमित रूप से लॉटरी का टिकट खरीदना जिंदगी बदल देने वाली खुशखबरी में बदल गया। सिंह ने पंजाब स्टेट डियर राखी बंपर लॉटरी के ड्रॉ में सात करोड़ रुपये का प्रथम पुरस्कार जीत लिया। गुरप्रीत सिंह (28) मालवाल कदीम गांव के निवासी हैं और वर्तमान में फिरोजपुर में '112' आपातकालीन हेल्पलाइन ड्यूटी पर तैनात हैं। सिंह ने कहा, "मैंने शहर की नियमित यात्रा के दौरान यह टिकट खरीदा था। मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि इससे मेरी किस्मत बदल जायेगी। यह किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।" उन्होंने बताया कि रविवार सुबह गुरुद्वारा वाजिदपुर साहिब में 'सेवा' करते समय उन्हें अपनी जीत के बारे में पता चला। सिंह 2022 में कांस्टेबल के रूप में पंजाब पुलिस में शामिल हुए थे। उनकी दो बहनों की शादी हो चुकी है और एक भाई है। उनके पिता दर्शन सिंह 2019 में सेवानिवृत्त होने से पहले रेलवे में ट्रेन गार्ड के रूप में कार्यरत थे। इस खबर से उनके घर में जश्न का माहौल है और रिश्तेदार, दोस्त तथा गांव के लोग उनके घर पहुंचने लगे।
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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ताशकंद में कहा कि उज्बेकिस्तान मध्य एशिया के केंद्र में स्थित होने के साथ इस क्षेत्र के साथ भारत के जुड़ाव का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ बातचीत के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि दोनों देशों की आकांक्षाओं और सोच में गहरी समानता है। युवा, इनोवेशन, समावेशी विकास और आधुनिक तकनीक ‘यांगी उज्बेकिस्तान’ और ‘विकसित भारत 2047’ के केंद्र में हैं। इसी साझा विजन के आधार पर दोनों देश अपने लोगों की भलाई के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान आने वाले समय में दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा देंगे। इसके साथ संयुक्त उत्पादन और संयुक्त विकास के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का करीबी सहयोग आपसी विश्वास को दर्शाता है।प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। भारत और उज्बेकिस्तान इन तीनों चुनौतियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का साझा संकल्प रखते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। पीएम मोदी ने ताशकंद में अपने और अपने प्रतिनिधिमंडल के गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और उज्बेकिस्तान के लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह उज्बेकिस्तान की उनकी चौथी यात्रा है, जो दोनों देशों के करीबी संबंधों, आपसी तालमेल और गहरी दोस्ती को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ करीब एक दशक तक काम करने और इस दौरान उनसे 10 से अधिक बार मिलने का अवसर मिला है। उन्होंने मिर्जियोयेव की सकारात्मकता, दूरदर्शी सोच और कुछ नया सीखने की निरंतर इच्छा की सराहना की। साथ ही भारत के प्रति उनकी गहरी दोस्ती और अटूट प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया।पीएम मोदी ने बताया कि 2026 में भारत और उज्बेकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी की 15वीं वर्षगांठ है। इसी अवसर पर दोनों पक्षों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच आपसी व्यापार 1 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर चुका है। दोनों देशों ने 2030 तक इसे 5 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बाजार तक पहुंच, कनेक्टिविटी, बैंकिंग और पेमेंट के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इसके साथ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में भी दोनों देशों के लिए लाभकारी सहयोग विकसित करने पर काम होगा।पीएम मोदी ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में हुए समझौते दोनों देशों के संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान की साझेदारी केवल दोनों देशों की राजधानियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसी उद्देश्य से दोनों देशों के शहरों और राज्यों के बीच भी साझेदारी विकसित की जा रही है। इन साझेदारियों के माध्यम से शहरी प्रबंधन, उद्योग, शिक्षा, पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में लोगों और संस्थानों के बीच सीधे संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान की विकास प्राथमिकताओं में कई समानताएं हैं। दोनों देश युवा शक्ति, इनोवेशन, समावेशी विकास और आधुनिक तकनीक को महत्व देते हैं। उन्होंने कहा कि साझा विजन और आपसी विश्वास के आधार पर दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान की साझा सांस्कृतिक विरासत और दोनों देशों के बीच दोस्ती की झलक देखने को मिली। प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुति देने वाले स्थानीय कलाकारों और भारतीय समुदाय के सदस्यों में इस खास मौके को लेकर उत्साह और गर्व का माहौल रहा। कलाकारों ने पीएम मोदी के सामने प्रस्तुति देने को सम्मान और सौभाग्य का क्षण बताया, जबकि भारतीय समुदाय के एक सदस्य ने प्रधानमंत्री से मुलाकात को अपने जीवन के बड़े सपने के पूरा होने जैसा बताया।
प्रधानमंत्री मोदी के सामने प्रस्तुति देने वाले एक म्यूजिशियन ने कहा कि वह इस अवसर को लेकर बेहद खुश हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने परफॉर्म करने को अपने लिए सम्मान और सौभाग्य का विषय बताया। कलाकार ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक समानताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों की संस्कृतियों में कई ऐसी समानताएं हैं, जो दोनों देशों के लोगों को एक-दूसरे के करीब लाती हैं।एक अन्य कलाकार ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय संस्कृति बेहद पसंद है। प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुति देने से पहले कलाकारों में उत्साह के साथ थोड़ी घबराहट भी थी, लेकिन मंच पर प्रस्तुति के दौरान उनका आत्मविश्वास बढ़ गया। उन्होंने कहा कि प्रस्तुति के बाद उन्हें लगा कि उनका डांस अच्छा रहा।भारतीय समुदाय से जुड़े एक कलाकार ने प्रधानमंत्री के सामने प्रस्तुति देने के अनुभव को शब्दों में बयां करना मुश्किल बताया। उन्होंने कहा कि वह खुद को बेहद सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं। प्रस्तुति से पहले वह उत्साहित होने के साथ-साथ थोड़े नर्वस भी थे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के सामने अपनी कला प्रस्तुत करना उनके लिए गर्व का क्षण रहा।उज्बेकिस्तान में रहने वाले एक भारतीय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात को अपने जीवन का खास पल बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से मिलना उनका एक बड़ा सपना था, जो इस मौके पर पूरा हो गया। उन्होंने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंधों का भी उल्लेख किया और दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों पर खुशी जताई।प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान कलाकारों की प्रस्तुतियों और भारतीय समुदाय की भागीदारी ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सामने रखा। स्थानीय कलाकारों का भारतीय संस्कृति के प्रति आकर्षण और उज्बेकिस्तान में रह रहे भारतीय समुदाय का प्रधानमंत्री मोदी के प्रति उत्साह भारत-उज्बेकिस्तान के संबंधों के मानवीय पक्ष को दर्शाता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ की 137वीं कड़ी में युवाओं, महिलाओं, किसानों, स्वच्छता कार्यकर्ताओं और देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने छोटे प्रयासों से बदलाव ला रहे लोगों का उल्लेख करते हुए समाज की भागीदारी से विकसित भारत के निर्माण का संदेश दिया। उन्होंने नशा मुक्त भारत अभियान को जनांदोलन बनाने, स्वच्छता को व्यवहार का हिस्सा बनाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और युवाओं को अनुसंधान एवं नवाचार से जोड़ने पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री ने मुंबई के कृष्णा शेषाद्री की पहल का उल्लेख किया, जिन्होंने इतिहास को तकनीक के जरिए रोचक और सरल बनाने के उद्देश्य से ‘भारत राज्य’ नाम की वेबसाइट तैयार की है। इस वेबसाइट पर किसी भी वर्ष का चयन कर यह जाना जा सकता है कि उस समय भारत के किस हिस्से पर किसका शासन था। प्रधानमंत्री ने कृष्णा शेषाद्री से बातचीत में भारतीय इतिहास के उन पहलुओं को सामने लाने के उनके प्रयास की सराहना की, जिन्हें अपेक्षाकृत कम चर्चा मिलती है। कृष्णा ने चोल, पल्लव, कर्कोट और अहोम जैसे साम्राज्यों के इतिहास को लोगों तक पहुंचाने की जरूरत बताई।कृष्णा शेषाद्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि इतिहास में उनकी रुचि बचपन से रही है। उन्होंने तकनीक और इतिहास को जोड़कर ऐसी वेबसाइट बनाने का प्रयास किया है, जिससे इतिहास को कहानी की तरह समझना आसान हो सके। उन्होंने राजराज चोल, राजेंद्र चोल, हेमू और त्रिभुवन महादेवी जैसी ऐतिहासिक हस्तियों के बारे में जानने की इच्छा भी व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने उनके प्रयास को नई पीढ़ी के लिए उपयोगी बताते हुए शुभकामनाएं दीं। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत’ अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में युवा इससे जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे की लत का असर केवल व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है। उन्होंने युवाओं, संगीतकारों, विद्यार्थियों, थिएटर समूहों और कंटेंट क्रिएटर्स से नशे के खिलाफ प्रभावी स्लोगन, गीत, लघु नाटक और अन्य रचनात्मक सामग्री तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि कई बार रचनात्मक प्रयास औपचारिक अभियानों से ज्यादा प्रभावी साबित होते हैं।प्रधानमंत्री ने अगस्त महीने में देशभर में दिखाई देने वाली देशभक्ति की भावना का उल्लेख करते हुए नेशनल हैंडलूम डे, भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ, विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, स्वतंत्रता दिवस और नेशनल स्पेस डे का जिक्र किया। उन्होंने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान और ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने को भी विशेष बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार 8 करोड़ से अधिक तिरंगा सेल्फी अपलोड की गईं। उन्होंने ‘सूर्यपथ तिरंगा’ का उल्लेख करते हुए बताया कि फिजी के सुवा से शुरू होकर तिरंगा एशिया, अफ्रीका और यूरोप होते हुए अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को तक पहुंचा।पीएम मोदी ने रेहड़ी-पटरी के कारोबार से जुड़ी महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने में पीएम स्वनिधि योजना की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि योजना के लाभार्थियों में करीब 46% महिलाएं हैं और लगभग 35 लाख महिलाएं इससे जुड़कर अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने गाजियाबाद की बबीता शर्मा का उदाहरण दिया, जो पूजा सामग्री का छोटा स्टॉल लगाती थीं। पीएम स्वनिधि से आर्थिक मदद मिलने के बाद उन्होंने अपने स्टॉल पर सामान बढ़ाया और कारोबार का विस्तार किया। धीरे-धीरे उनका सड़क किनारे का छोटा स्टॉल दुकान में बदल गया।प्रधानमंत्री ने बेंगलुरु की टी.एस. निन्गम्मा का भी उल्लेख किया। निन्गम्मा और उनके पति ने इडली, डोसा और सांभर बेचने का छोटा कारोबार शुरू किया था। पीएम स्वनिधि से मिली सहायता के बाद उन्होंने अपनी कार्ट बेहतर की, सामान थोक में खरीदना शुरू किया और मेन्यू में नई चीजें जोड़ीं। कारोबार बढ़ने से उनकी आय में इजाफा हुआ और वह अपने तीन बच्चों को बेहतर शिक्षा देने में सक्षम हुईं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब किसी महिला का कारोबार आगे बढ़ता है तो उसके साथ पूरे परिवार का भविष्य भी आगे बढ़ता है।पीएम नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पटवाई गांव के आकाश और रोहन की पहल की सराहना की। दोनों युवाओं ने अपने आसपास फैली गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। धीरे-धीरे दूसरे युवा भी उनसे जुड़ गए और ‘क्लीन-अप पटवाई’ टीम तैयार हो गई। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस टीम ने अब तक चार गंगा घाटों की सफाई की है और एक टन से अधिक प्लास्टिक कचरा हटाया है। युवाओं ने कई तालाबों और सार्वजनिक स्थलों की भी सफाई की है।प्रधानमंत्री ने अमरनाथ यात्रा के दौरान स्वच्छता कर्मियों और श्रद्धालुओं की भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष यात्रा के दौरान 400 मीट्रिक टन से ज्यादा कचरे को एकत्र कर प्रोसेस किया गया। उन्होंने कहा कि 16 हजार से अधिक यात्रियों ने स्वच्छता का संकल्प लिया और 10 हजार से ज्यादा यात्रियों को ‘रिस्पॉन्सिबल यात्री’ प्रमाणपत्र दिया गया। यात्रा के दौरान घोड़ों और खच्चरों के गोबर से बायोगैस तैयार कर उसी स्वच्छ ऊर्जा से ‘स्वच्छ ज्योत’ प्रज्ज्वलित की गई।पीएम मोदी ने नागालैंड के फेक जिले की वेसालु पुरो की कहानी भी साझा की। किसान परिवार में पली-बढ़ी वेसालु को बचपन से फूलों से लगाव था। वर्ष 2021 में उन्होंने छोटे स्तर पर फूलों की खेती शुरू की। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने एक चौथाई एकड़ जमीन पर ग्लैडियोलस के हजारों पौधे लगाए। पहले ही प्रयास में 5 हजार से ज्यादा फूल खिले। इसके बाद उन्होंने फूलों की खेती का विस्तार किया और आज उनके फूल नागालैंड से दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों तक पहुंच रहे हैं।ओडिशा के देबरीगढ़ के धोड़रोकुसुम गांव की मैथिली भुए की कहानी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि पहले वह जंगल से जलावन की लकड़ी, महुआ, केंदु पत्ता और अन्य वन उपज एकत्र करती थीं। बाद में वह देबरीगढ़ इको-टूरिज्म से जुड़ीं और जंगल संरक्षण के साथ अपनी आजीविका को जोड़ लिया। मैथिली के प्रयास से प्रेरित होकर 60 से अधिक महिलाएं जंगल संरक्षण से जुड़ चुकी हैं। इनमें कुछ वन्यजीवों की सुरक्षा, कुछ घास के मैदानों के विकास और अन्य महिलाएं इको-टूरिज्म गतिविधियों में योगदान दे रही हैं। प्रधानमंत्री ने बेटियों की अंतरिक्ष और विज्ञान के क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए मिशन शक्तिSAT की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मिशन के जरिए 108 देशों की 12 हजार छात्राओं को सैटेलाइट तकनीक और नवाचार सीखने का अवसर मिल रहा है। 23 अगस्त को नेशनल स्पेस डे के अवसर पर ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय में मिशन शक्तिSAT के दूसरे चरण की शुरुआत का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस पहल के तहत छात्राओं की भागीदारी से तैयार एक सैटेलाइट को चंद्रमा की कक्षा में भेजने की तैयारी है। प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के कडपा के वरदराज का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने यूट्यूब से जानकारी लेकर एवोकाडो की खेती शुरू की। अब तक वह करीब 4 टन एवोकाडो का उत्पादन कर चुके हैं और स्थानीय दुकानों को सीधे इसकी आपूर्ति कर रहे हैं। तमिलनाडु के कोडाइकनाल के किसान चंद्रशेखरन ने आधे हेक्टेयर जमीन पर एवोकाडो उगाना शुरू किया। वहीं, कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में कुछ किसानों ने कॉफी के बागान के बीच एवोकाडो की खेती शुरू की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों ने इस नई फसल के जरिए आय बढ़ाने का नया रास्ता खोजा है।पीएम नरेंद्र मोदी ने महानायक उत्तम कुमार की आगामी जन्म-शताब्दी का उल्लेख करते हुए उनके अभिनय और व्यक्तित्व को याद किया। उन्होंने कहा कि उत्तम कुमार बहुमुखी प्रतिभा के अभिनेता थे और अपने अभिनय से लोगों के दिलों में जगह बनाने में सफल रहे। उन्होंने फिल्म ‘नायक’ का उल्लेख करते हुए कहा कि फिल्म प्रेमियों का मानना है कि सत्यजीत रे ने इसकी पटकथा उत्तम कुमार को ध्यान में रखकर लिखी थी। प्रधानमंत्री ने उनके शुरुआती संघर्ष और सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी जिंदगी कभी हार न मानने की प्रेरणा देती है।आने वाले जन्माष्टमी और विश्वकर्मा पूजा जैसे त्योहारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों का सम्मान करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि त्योहारों के मौसम में ‘वोकल फॉर लोकल’ के संदेश को और मजबूत किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाने का मतलब केवल मिट्टी के दीये खरीदना नहीं है, बल्कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं में भी यह देखना चाहिए कि वे भारत में बनी हों। उन्होंने कंटेंट क्रिएटर्स, इंफ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज से भी स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की।प्रधानमंत्री ने अंत में देशवासियों से अपने आसपास बदलाव लाने वाले लोगों और उनके छोटे-छोटे प्रयासों की जानकारी साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का अनुभव देश के किसी दूसरे हिस्से में रहने वाले व्यक्ति के लिए नई प्रेरणा बन सकता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ‘ओली दराजली दोस्तलिक’ से सम्मानित किए जाने पर राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव और उज्बेकिस्तान की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी मित्रता की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर खुशी जताते हुए इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सदियों पुरानी दोस्ती और साझा विरासत को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि ‘दोस्तलिक’ का अर्थ दोस्ती है और यही शब्द भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों की वास्तविक भावना को सबसे बेहतर तरीके से व्यक्त करता है। पीएम मोदी ने कहा कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान है। उन्होंने भारत के लोगों की ओर से उज्बेकिस्तान की जनता, सरकार और राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव का आभार व्यक्त किया।पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत के प्रति उनकी मित्रता की भावना से दोनों देशों के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि भारत उज्बेकिस्तान के साथ अपनी मित्रता को और मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दोनों देश भविष्य में भी आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी सम्मान से खुशी और गर्व की अनुभूति होती है, लेकिन उसके साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। उन्होंने उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक धरती से वहां के लोगों को भरोसा दिलाया कि भारत अपनी जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटेगा और दोनों देशों की दोस्ती को हमेशा मजबूती से निभाएगा।पीएम मोदी ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ ग्लोबल साउथ की एकजुट आवाज बनेंगे। दोनों देश ग्लोबल साउथ के लोगों के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और पूरी मानवता के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर काम करेंगे। भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिया जाना दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह साझेदारी आपसी विश्वास, मित्रता और साझा विरासत की मजबूत नींव पर आगे बढ़ेगी। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे के दौरान ताशकंद में हुए प्रमुख कार्यक्रमों की झलकियां साझा करते हुए कहा कि यात्रा का हर पड़ाव भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मजबूत होते संबंधों और गहरी मित्रता को दर्शाता है। उन्होंने भारतीय समुदाय से मुलाकात, ‘यांगी उज्बेकिस्तान स्मारक’ पर पुष्पांजलि और विशेष योग सत्र का उल्लेख करते हुए दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक जुड़ाव को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर ताशकंद में बिताए समय का एक वीडियो साझा किया। उन्होंने लिखा कि विशेष स्वागत, ‘यांगी उज्बेकिस्तान स्मारक’ पर पुष्पांजलि अर्पित करने, भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात और अन्य प्रमुख कार्यक्रमों की खास झलकियां वीडियो में शामिल हैं।
ताशकंद में भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान ‘मोदी-मोदी’, ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए गए। भारतीय समुदाय की कुछ महिलाओं ने प्रधानमंत्री को राखी भी बांधी। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसे प्रधानमंत्री ने ध्यान से देखा और कार्यक्रम के बाद बच्चों से मुलाकात भी की। प्रधानमंत्री ने भारतीय समुदाय के स्नेह के लिए आभार जताते हुए कहा कि प्रवासी भारतीय भारत और उज्बेकिस्तान के बीच एक जीवंत सेतु की तरह काम कर रहे हैं और दोनों देशों की दोस्ती को मजबूत बना रहे हैं।स्वागत समारोह में भारतीय और उज्बेक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों की संगीत परंपराओं का मेल उनके गहरे सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने तबला प्रस्तुति की एक झलक भी साझा की। इसमें तबले के साथ उज्बेकिस्तान के पारंपरिक वाद्ययंत्र डोइरा और चांग का इस्तेमाल किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे भारतीय और उज्बेक संगीत परंपराओं का मनमोहक संगम बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव के साथ ‘यांगी उज्बेकिस्तान स्मारक’ का दौरा किया और वहां पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक उज्बेक लोगों की आकांक्षाओं और प्रगति का प्रतीक है। इसके बाद दोनों नेताओं ने यांगी उज्बेकिस्तान पार्क में उज्बेक संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाली कलाकृतियों का भी अवलोकन किया।प्रधानमंत्री मोदी रविवार को ताशकंद में आयोजित विशेष योग सत्र में भी शामिल हुए। उन्होंने उज्बेकिस्तान के 52 योग साधकों की प्रस्तुति देखी और सभी उम्र के लोगों की भागीदारी की सराहना की। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव का आभार जताते हुए कहा कि उन्होंने उज्बेकिस्तान को योग से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेष योग सत्र में उज्बेकिस्तान योग फेडरेशन के छह सदस्य भी शामिल हुए। इन साधकों ने जून 2026 में अहमदाबाद में आयोजित पहले विश्व योगासन चैंपियनशिप में उज्बेकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था। उन्होंने विभिन्न स्पर्धाओं में कुल 18 पदक जीते, जिनमें एक स्वर्ण, 14 रजत और तीन कांस्य पदक शामिल हैं। अहमदाबाद में उज्बेकिस्तान की पूरी टीम ने विभिन्न श्रेणियों में कुल 25 पदक हासिल किए थे। इसके बाद ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में इन खिलाड़ियों का योग प्रदर्शन भारत और उज्बेकिस्तान के बीच खेल, योग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की मजबूत होती कड़ी के रूप में सामने आया।उज्बेकिस्तान में योग के प्रति बढ़ती रुचि भारत और वहां के लोगों के बीच विकसित हो रहे सांस्कृतिक संबंधों को भी दर्शाती है। अहमदाबाद में 4 से 8 जून 2026 तक आयोजित पहले विश्व योगासन चैंपियनशिप में विभिन्न देशों की भागीदारी ने योगासन को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में नई पहचान दी। उज्बेकिस्तान के खिलाड़ियों का चैंपियनशिप में प्रदर्शन और इसके बाद ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी के सामने उनका योग सत्र में शामिल होना दोनों देशों के बीच खेल और सांस्कृतिक सहयोग की निरंतरता को रेखांकित करता है।प्रधानमंत्री मोदी अपनी दो दिवसीय राजकीय यात्रा के तहत ताशकंद पहुंचे थे। राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव स्वयं हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने पहुंचे। प्रधानमंत्री ने इस विशेष सम्मान के लिए राष्ट्रपति का आभार जताते हुए कहा कि यह उज्बेकिस्तान की उनकी चौथी यात्रा है और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गहराई तथा बढ़ती गति को दर्शाती है। भारत और उज्बेकिस्तान के बीच राजनीतिक एवं आर्थिक संबंधों के साथ-साथ लोगों के बीच संपर्क और सांस्कृतिक आदान-प्रदान भी लगातार मजबूत हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान भारतीय समुदाय की भागीदारी और योग तथा संगीत से जुड़े कार्यक्रमों ने इस रिश्ते के मानवीय और सांस्कृतिक पक्ष को प्रमुखता से सामने रखा। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शनिवार को ताशकंद में भारतीय समुदाय ने गर्मजोशी और उत्साह के साथ स्वागत किया। उनके आगमन पर लोगों ने ‘मोदी-मोदी’, ‘वंदे मातरम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। प्रधानमंत्री जब भारतीय समुदाय के लोगों का अभिवादन कर रहे थे, तभी कुछ महिलाओं ने उनके हाथ पर राखी बांधी। इस दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को और खास बना दिया। पीएम मोदी ने बच्चों के नृत्य प्रदर्शन को भी ध्यान से देखा और प्रस्तुति के बाद बच्चों से हाथ मिलाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय समुदाय के इस गर्मजोशी भरे स्वागत पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ताशकंद में भारतीय समुदाय का प्यार और स्नेह उन्हें बहुत खुशी देता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों को भारत और उज्बेकिस्तान के बीच एक पुल बताते हुए कहा कि वे दोनों देशों के बीच दोस्ती के संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।विदेश मंत्रालय ने भी ताशकंद में भारतीय समुदाय के साथ प्रधानमंत्री की मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। मंत्रालय ने कहा कि उज्बेकिस्तान में 16,000 से ज्यादा भारतीय छात्रों सहित जीवंत भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच दोस्ती का एक पुल है। समुदाय की मौजूदगी ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ते मानवीय और सांस्कृतिक संबंधों को भी रेखांकित किया।स्वागत कार्यक्रम में कलाकारों ने भारतीय और उज्बेक संस्कृति की झलक पेश करने वाली सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। प्रधानमंत्री मोदी बच्चों के नृत्य प्रदर्शन को ध्यान से देखते नजर आए। प्रस्तुति समाप्त होने के बाद उन्होंने बच्चों से हाथ मिलाया और उनका उत्साह बढ़ाया। इस दौरान भारतीय समुदाय के लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।पीएम नरेंद्र मोदी के स्वागत के दौरान भारतीय समुदाय की कुछ महिलाओं ने उनके हाथ पर राखी बांधी। इस आत्मीय पल ने कार्यक्रम को भावनात्मक और पारिवारिक रंग दे दिया। महिलाओं ने प्रधानमंत्री के प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त किया, वहीं पीएम मोदी ने भी उनका अभिवादन स्वीकार किया। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव के साथ यांगी उज्बेकिस्तान स्मारक का दौरा किया और पुष्पांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्मारक उज्बेक लोगों की आकांक्षाओं और प्रगति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अपनी यात्रा की शुरुआत इस स्मारक से करना उनके लिए खुशी की बात है।यांगी उज्बेकिस्तान पार्क में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव ने उज्बेक संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाली कलाकृतियों का अवलोकन किया। दोनों नेताओं की मौजूदगी में हुए इस कार्यक्रम ने भारत और उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक जुड़ाव को भी सामने रखा। दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर ताशकंद पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी का हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव ने गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने इस विशेष स्वागत के लिए उज्बेक राष्ट्रपति का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान की यह उनकी चौथी यात्रा है, जो दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की गहराई और बढ़ती गति को दर्शाती है। - लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं और उनके सहयात्रियों को दी गई निशुल्क बस यात्रा सुविधा का प्रदेशभर में बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ उठाया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, 28 अगस्त को ही 49.96 लाख से अधिक महिलाओं और उनके सहयात्रियों ने बिना किराया दिए यात्रा की। बयान के मुताबिक, वहीं, 29 अगस्त की शाम पांच बजे तक यह संख्या बढ़कर करीब 80 लाख पहुंच गई।निशुल्क यात्रा सुविधा शनिवार रात 12 बजे तक जारी रहेगी।उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के अनुसार, 27 अगस्त को 9.26 लाख से अधिक महिलाओं और सहयात्रियों ने इस योजना का लाभ उठाया, इनमें 6.03 लाख से अधिक महिलाएं और 3.22 लाख से अधिक सहयात्री शामिल थे। रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को निशुल्क यात्रा करने वालों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई।बयान के मुताबिक, इस दिन 49.96 लाख से अधिक निशुल्क टिकट जारी किए गए, जिनमें 32.47 लाख से अधिक महिलाएं और 17.48 लाख से अधिक सहयात्री शामिल रहे। परिवहन निगम के आंकड़ों के मुताबिक, 27 और 28 अगस्त को मिलाकर कुल 59.23 लाख से अधिक टिकट जारी किए गए, जिनमें 38.51 लाख से अधिक महिलाएं और 20.71 लाख से अधिक सहयात्री शामिल हैं। सरकार के अनुसार, निशुल्क बस यात्रा योजना से बड़ी संख्या में परिवारों को त्योहार पर आर्थिक राहत मिली और महिलाओं को अपने भाइयों तक पहुंचने में सुविधा हुई। शुक्रवार से 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना' के तहत 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए भी परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा सुविधा शुरू की गई है। बयान के मुताबिक, 28 अगस्त को यात्रा करने वाली महिलाओं में बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल थीं। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) के प्रधान प्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार ने बताया कि रक्षाबंधन पर संभावित भीड़ को देखते हुए पहले से व्यापक तैयारियां की गई थीं। उन्होंने बताया कि अधिक बसों का संचालन, प्रमुख बस अड्डों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और यात्रियों की सुविधा के लिए विशेष निगरानी की गई। अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों और कर्मचारियों ने भीड़ प्रबंधन, बसों के संचालन और यात्रियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाई।
- भुवनेश्वर. ओडिशा मेडिकल सर्विसेज (डेंटल) कैडर के तहत कार्यरत स्नातकोत्तर डिग्रीधारी दंत चिकित्सकों के लिए राज्य सरकार ने शनिवार को 20,000 रुपये मासिक प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। एक आधिकारिक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। यह प्रोत्साहन राशि 29 अगस्त से प्रभावी होगी। इसका लाभ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत कार्यरत उन दंत चिकित्सकों को मिलेगा, जिनके पास राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) से मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज की स्नातकोत्तर डिग्री होगी। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने कहा कि यह प्रोत्साहन राशि स्नातकोत्तर दंत चिकित्सकों को सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में अपनी सेवाएं जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
- नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को पार्टी नेताओं के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें युवाओं तक पहुंच बनाने संबंधी पार्टी की योजना पर चर्चा हुई। सूत्रों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात समेत सात राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की तैयारी भी इस बैठक का एक मुख्य एजेंडा था। बैठक में भाजपा युवा मोर्चा के नवनियुक्त अध्यक्ष हेमांग जोशी शामिल हुए। पार्टी युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्षों अनुराग ठाकुर, पूनम महाजन और तेजस्वी सूर्या भी बैठक में मौजूद थे। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव, युवा मामलों एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया बैठक में शामिल हुए। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा की नवनियुक्त राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी, गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी बैठक में शामिल नेताओं में शामिल थे। सूत्रों के अनुसार भाजपा ने देशभर से पार्टी के 40 से अधिक नेताओं को बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। बैठक में क्या हुआ, इस पर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।यह बैठक उस वक्त हुई जब भाजपा 17 सितंबर से देशभर में एक महीने तक चलने वाला 'सेवा संकल्प अभियान' शुरू करेगी। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने और सरकार के प्रमुख के रूप में उनके योगदान को रेखांकित करने के लिए शुरू किया जाएगा। यह निर्णय 22 अगस्त को पार्टी के सभी 67 नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ हुई पहली बैठक में लिया गया था। इस बैठक में भाजपा की राज्य इकाइयों के अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों के साथ-साथ पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता भी शामिल हुए थे। इस देशव्यापी अभियान के दौरान, भाजपा विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पहुंचेगी।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान और एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए किर्गिस्तान की यात्रा पर रवाना हुए। उन्होंने कहा कि वह इस संगठन के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने और आतंकवाद के अभिशाप से मुक्त क्षेत्र के लिए साथी सदस्यों के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं। मोदी पहले 29 से 30 अगस्त तक उज्बेकिस्तान की यात्रा पर रहेंगे। इसके बाद वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 30 अगस्त से एक सितंबर तक होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि उनकी यह यात्रा मध्य एशिया के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने तथा इस क्षेत्र के साथ भारत के सभ्यतागत संबंधों को और गहरा करने में मदद करेगी। अपनी यात्रा से पहले जारी बयान में मोदी ने कहा कि यह यात्रा शांति, स्थिरता और समृद्धि के साझा प्रयासों को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि यही वे मूल्य हैं, जो दुनिया के साथ भारत के संबंधों के केंद्र में रहे हैं। मोदी ने कहा, "भारत 2017 से एससीओ का सक्रिय और रचनात्मक सदस्य रहा है। मैं सुरक्षा, संपर्क और अवसर पर आधारित क्षेत्र के लिए भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने तथा सदस्य देशों के साथ मिलकर ऐसे क्षेत्र के निर्माण के लिए काम करने को उत्सुक हूं, जो आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के अभिशाप से मुक्त हो। ये चुनौतियां हमारे पड़ोस के साथ-साथ दुनिया के अन्य हिस्सों में भी शांति और स्थिरता के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के निमंत्रण पर वह 29 से 30 अगस्त तक ताशकंद यात्रा पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
मोदी ने कहा, "मैं राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा तथा ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने तथा 'विकसित भारत' तथा 'नए उज्बेकिस्तान' के हमारे साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा के लिए उत्सुक हूं।" प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ताशकंद में शास्त्री स्मारक और 'ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ऑरियंटल स्टडी' स्थित महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि ये दोनों देशों के बीच कायम घनिष्ठ सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंधों के प्रति सम्मान के प्रतीक हैं। ताशकंद से प्रधानमंत्री किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक जाएंगे, जहां वह 26वें एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन इस महत्वपूर्ण संगठन की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। मोदी ने कहा, "मैं राष्ट्रपति जापारोव और एससीओ के अन्य नेताओं से मिलने तथा छठे 'वर्ल्ड नोमैड गेम्स' के उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए भी उत्सुक हूं। यह समारोह मध्य एशिया की समृद्ध जीवंत विरासत का उत्सव है, जिसका भारत बेहद सम्मान करता है।" अधिकारियों ने बताया कि मोदी एससीओ शिखर सम्मेलन को संबोधित करेंगे, और सुरक्षा, संपर्क तथा अवसर से जुड़ी भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शिखर सम्मेलन से इतर एससीओ के सदस्य देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे। -
नयी दिल्ली. अभिनेता अमिताभ बच्चन ने नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ''तबाही का यह मंजर देखना असहनीय है।'' बुधवार को तिब्बत सीमा से लगे रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई अचानक और भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इस आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हो गई और मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत बुनियादी ढांचे को व्यापक नुकसान पहुंचा है। बच्चन ने शनिवार को अपने ब्लॉग पर एक पोस्ट साझा करते हुए इस प्राकृतिक आपदा पर बात की। उन्होंने लिखा, ''एक गंभीर विषय पर बात करूं तो नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही का मंजर देखना असहनीय है।'' बच्चन ने लिखा, ''प्रकृति के प्रकोप से कभी मुकाबला नहीं किया जा सकता... उसके आगे नतमस्तक होने के लिए ईश्वरीय शक्ति की उपस्थिति जरूरी है।...हम प्रार्थना करते हैं, क्योंकि अंततः उससे बढ़कर कुछ नहीं है।'' मध्य नेपाल में शनिवार को अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो गई। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने बताया कि नेपाल के विभिन्न जिलों से शव बरामद किए गए हैं।
- नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) नेपाल में आई बाढ़ को लेकर अपनी मदद का दायरा बढ़ा रहा है, जिसके तहत तत्काल 150,000 अमेरिकी डॉलर की धनराशि जारी की गई है। आवश्यकता आकलन जारी रहने के साथ-साथ अतिरिक्त संसाधन जारी किए जाने की उम्मीद है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक ने टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि आपदा शुरू होने के कुछ ही घंटों के भीतर, डब्ल्यूएचओ ने आपातकालीन आपूर्ति भेजी, जिसमें अंतर-एजेंसी आपातकालीन स्वास्थ्य आपूर्ति भी शामिल थी, जो लगभग 10,000 लोगों को 3 महीने तक आवश्यक सामग्री प्रदान कर सकती है। इसके अलावा, इसमें टेंट, 10,000 मास्क, दस्ताने और हैंड सैनिटाइजर भी शामिल थे।उन्होंने कहा कि हमारी तत्काल प्राथमिकता प्रभावित समुदायों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का समर्थन करना और बाधित स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल करना है। इसके अतिरिक्त, डब्ल्यूएचओ नेपाली सरकार के नेतृत्व में जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए साझेदारों के बीच महत्वपूर्ण समन्वय, निगरानी और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित समुदायों के सामने भारी चुनौतियां हैं, ऐसे में सभी साझेदारों का निरंतर समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। डब्ल्यूएचओ इस कठिन समय में नेपाल सरकार और जनता के साथ खड़ा है और देश की बदलती जरूरतों के आधार पर सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।इससे पहले भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि 10 टन से अधिक मानवीय सहायता सामग्री और डॉक्टरों और पैरामेडिकल कर्मियों की टीम लेकर तीसरी विशेष उड़ान नई दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना हुई है। भारत बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पड़ोसी हिमालयी देश नेपाल की मदद के लिए अपने प्रयास तेज कर रहा है।विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि 10 टन मानवीय सहायता सामग्री लेकर तीसरी उड़ान काठमांडू के लिए रवाना हो गई है। इस सहायता सामग्री में पोर्टेबल जनरेटर सेट, डिग्निटी किट, खाद्य पैकेट और जल शोधन की गोलियां शामिल हैं। 11 सदस्यीय डॉक्टरों, पैरामेडिकल कर्मियों की टीम और सुरंग बचाव अभियान के लिए एक रेकी टीम भी उड़ान में सवार है। भारत नेपाल के चल रहे राहत एवं बचाव प्रयासों में अपना सहयोग जारी रखेगा।
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नई दिल्ली। नेपाल प्रशासन ने संक्रमण के खतरे और शवों की खराब होती हालत को देखते हुए, दक्षिणी चितवन जिले में भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मिले 229 अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने का फैसला किया है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, शनिवार सुबह 10 बजे तक बाढ़ से कुल 626 शव बरामद किए गए थे। इनमें से सबसे ज्यादा 233 शव चितवन में मिले थे।
26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद शवों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी, और चितवन जिले के अस्पतालों में पर्याप्त जगह और सुविधाओं की कमी के कारण शवों को बचाने में मुश्किल हो रही थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि अस्थायी व्यवस्था के तहत रखे गए शवों से आने वाली दुर्गंध से संक्रमण और महामारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसके बाद, चितवन की जिला सुरक्षा समिति ने शनिवार को सभी अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने का फैसला किया।चितवन जिला प्रशासन कार्यालय ने एक नोटिस में कहा कि लावारिस शवों को शनिवार से भरतपुर मेट्रोपॉलिटन सिटी के वार्ड नंबर 1 में देवघाट के एक खुले इलाके में दफनाया जाएगा। नेपाली अधिकारियों ने कहा कि दफनाने से पहले सभी शवों से डीएनए सैंपल लिए जाएंगे और भविष्य में पहचान आसान बनाने के लिए पहचान या रेफरेंस नंबर का इस्तेमाल करके रिकॉर्ड रखा जाएगा।डीएओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि चितवन के अस्पतालों में एक बार में लगभग 30 शवों को ही लंबे समय तक रखने की पर्याप्त सुविधा है। अधिकारी ने कहा, “जैसे-जैसे शवों की संख्या बढ़ती गई, हमने एक घर का इस्तेमाल कूलिंग सेंटर के तौर पर किया, जहां शव रखे गए थे। जब उस घर में भी जगह खत्म हो गई, तो हमारे पास उन्हें दफनाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा।” अधिकारी ने कहा कि दफनाने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार होगी और ‘अज्ञात और लावारिस शव प्रबंधन (पहला संशोधन) निर्देश, 2083’ के तहत जरूरी प्रावधानों का पालन किया जाएगा। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा आयोजित होने वाली परीक्षाओं सहित सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन, इन्हें सुरक्षित रूप से कराने तथा प्रशासनिक उपायों की समीक्षा और व्यापक सिफारिश के लिए श्री नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कार्य बल (एचपीटीएफ) का गठन किया है।
यह कार्य बल संस्थागत प्रणालियों और प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने, परीक्षाओं की सत्यनिष्ठा और इन्हें सुरक्षित रूप से संचालित करने के लिए उपयुक्त प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल, परीक्षा आधारिक संरचना बढ़ाने, सुलभता और समावेशिता को बढ़ावा देने और विद्यार्थियों के हित संबंधी उपायों की गहन विवेचना कर रहा है। इसका उद्देश्य एक सुदृढ़, सुरक्षित, पारदर्शी, न्यायसंगत और भविष्योन्मुखी सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली विकसित करना है।इसी के सिलसिले में उच्च स्तरीय कार्य बल ने सभी हितधारकों के अनुभव, ज्ञान और दृष्टिकोण को अत्यंत उपयोगी मानते हुए निम्नलिखित पक्षों से सुझाव मांगें हैं:विद्यार्थी और उम्मीदवार;अभिभावक;शिक्षक और शैक्षणिक संस्थान;परीक्षा आयोजित करने और परीक्षा सामग्री जारी करने वाली संस्थाएं;विषय विशेषज्ञ और प्रौद्योगिकी पेशेवर;उद्योग संगठन;नागरिक समाज संगठन; औरअन्य संबंधित हितधारकसुझाव निम्नलिखित क्षेत्रों से संबंधित हो सकते हैं:सार्वजनिक परीक्षाओं को सुरक्षित रूप से संचालित करनापरीक्षा की संरचना और मूल्यांकन पद्धतिशासन, दायित्व और संस्थागत व्यवस्थापरीक्षाओं में कदाचार की रोकथाम, पता लगाना और उनका निवारणसुरक्षित कंप्यूटर-आधारित परीक्षा सहित प्रौद्योगिकी का इस्तेमालपरीक्षा अवसंरचना निर्माण और उन्नयनसामाजिक, आर्थिक, क्षेत्रीय और भाषाई समूहों में बेहतर पहुंच के लिए समावेशी परीक्षा ढांचापारदर्शिता, शिकायत निवारण और हितधारकों के साथ संचारसमूची परीक्षा प्रक्रिया के दौरान विद्यार्थियों के हित को बढ़ावा देने के उपायपरीक्षा प्रणाली बेहतर बनाने संबंधी अन्य उपायसभी हितधारकों से अनुरोध है कि वे 13 सितंबर, 2026 तक अपने सुझाव निम्नलिखित माध्यम से प्रस्तुत करें :वेबसाइट : https://examreforms-taskforce.dopt.gov.inफ़ोन: 1800-180-4747 WhatsApp: “hptf” +917827042830 पर भेजें या https://wa.me/917827042830?text=hptf पर क्लिक करेंईमेल: [email protected]सुझाव अंग्रेजी, हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भेजे जा सकते हैं।सार्वजनिक परामर्शों से प्राप्त सुझाव उच्च स्तरीय कार्य बल- एचपीटीएफ को सरकार को भेजने वाली सिफारिशें तैयार करने में सहायक होंगे।एचपीटीएफ सभी हितधारकों से सक्रिय, रचनात्मक और व्यापक भागीदारी की उम्मीद करता है।अधिक जानकारी और सुझाव के लिए, कृपया नीचे दिए लिंक पर जाएं: https://examreforms-taskforce.dopt.gov.inसुझाव भेजने की अंतिम तिथि: 13 सितंबर, 2026 है।
- अस्पतालों के लिए इमरजेंसी एडवाइजरी जारीनई दिल्ली। गौतमबुद्ध नगर में मौसम में बदलाव के साथ मौसमी बीमारियों का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। जिले में स्वाइन फ्लू के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जिले में अब तक स्वाइन फ्लू के कुल 192 मरीज सामने आ चुके हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए इमरजेंसी एडवाइजरी जारी की है। वहीं, जिले में डेंगू के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अब तक 48 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को निर्देश दिया है कि स्वाइन फ्लू और डेंगू के संदिग्ध मरीजों की पहचान को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाए। अस्पतालों में आने वाले ऐसे मरीज, जिनमें तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी, बदन दर्द या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो उनकी चिकित्सकीय जांच प्राथमिकता के आधार पर की जाए। गंभीर लक्षण वाले मरीजों की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन को संक्रमण से बचाव के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कहा गया है। चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ को भी संदिग्ध मरीजों के उपचार के दौरान आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अस्पतालों में दवाओं, जांच सुविधाओं और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।दूसरी ओर, डेंगू के 48 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मच्छरों की रोकथाम और लार्वा नियंत्रण अभियान को भी तेज करने की तैयारी की है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें ऐसे स्थानों का निरीक्षण कर रही हैं, जहां पानी जमा होने के कारण डेंगू फैलाने वाले मच्छरों के पनपने की आशंका रहती है। साथ ही लोगों से घरों और आसपास पानी जमा न होने देने की अपील की जा रही है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बदलते मौसम में वायरल संक्रमण तेजी से फैल सकता है। ऐसे में लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष सावधानी बरतने, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकने तथा हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है। बुखार या फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करने को कहा गया है।स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्वाइन फ्लू और डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए निगरानी लगातार बढ़ाई जा रही है। अस्पतालों से मरीजों की जानकारी जुटाई जा रही है और स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग ने लोगों से अपील की है कि घबराने के बजाय सावधानी बरतें और लक्षण दिखाई देने पर समय रहते चिकित्सकीय सलाह लें।
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नई दिल्ली। सावन पूर्णिमा के पावन अवसर पर अयोध्या में आस्था का सैलाब देखने को मिला। गुरुवार सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी के घाटों पर पहुंचने लगे। लोगों ने सरयू में आस्था की डुबकी लगाई और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन की कामना की।सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। पूरे महीने शिव भक्त मंदिरों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन पूर्णिमा इस धार्मिक माह का महत्वपूर्ण पड़ाव है। अयोध्या में भी इस दिन श्रद्धालुओं ने सरयू स्नान के बाद मंदिरों में जाकर पूजा-पाठ किया और शिवलिंग पर जल अर्पित किया।
एक पुजारी ने बात करते हुए बताया कि सावन पूर्णिमा का दिन भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ को जल चढ़ा रहे हैं, जलाभिषेक कर रहे हैं और शिव की आराधना में जुटे हैं। मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।उन्होंने कहा कि सावन पूर्णिमा के दिन धार्मिक आस्था के साथ रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का यह पर्व देशभर में उत्साह के साथ मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं में राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी कथा भी इस दिन से जोड़ी जाती है। इस दिन माता लक्ष्मी ने गरीब स्त्री का वेश धारण कर राजा बलि को राखी बांधी थी। उधर, बिहार के बांका में भी सावन पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। प्रसिद्ध मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव को जल चढ़ाने पहुंचे। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।( -
नई दिल्ली। पूरे भारत में शुक्रवार को राखी का त्योहार मनाया गया। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बच्चों के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाया, जबकि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी में ‘लाड़ली’ बहनों के साथ रक्षाबंधन मनाया। वहीं, इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने राखी बांधी।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन मनाया। बच्चों ने उपराष्ट्रपति को राखी बांधी, जो प्यार, भरोसे और सुरक्षा के खूबसूरत बंधन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ संवाद करने से उपराष्ट्रपति भवन में गर्मजोशी और खुशी का माहौल रहा, जिससे यह त्योहार का मौका वाकई खास बन गया। वहीं, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने संसदीय क्षेत्र कोटा-बूंदी की ‘लाड़ली बहनों’ के साथ रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया। इस अवसर पर बहन वीरांगना मधुबाला ने भी रक्षा-सूत्र बांधा।ओम बिरला ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “कलाई पर बंधी यह राखी केवल स्नेह और विश्वास की डोर नहीं, बल्कि नारी सम्मान, स्वाभिमान और सुरक्षित भविष्य के प्रति संकल्प का पवित्र प्रतीक है। बहनों का स्नेह मेरे लिए आशीर्वाद है और उनके सुख-दुख में सदैव सहभागी बनना मेरा दायित्व।” उन्होंने कहा कि हमारी बहनें परिवार की आत्मीय धुरी होने के साथ-साथ समाज और राष्ट्र निर्माण की सशक्त आधारशिला भी हैं। ईश्वर से कामना है कि मेरी हर बहन का जीवन सम्मान, प्रसन्नता और आत्मनिर्भरता से परिपूर्ण हो तथा उनके सपनों को निरंतर नई ऊंचाइयां मिलें। स्नेह, विश्वास और अटूट अपनत्व के इस पावन पर्व रक्षाबंधन की सभी बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं। उधर, भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने नितिन नवीन से मुलाकात की और उन्हें राखी बांधी। नितिन नवीन ने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा, “भरोसे और स्नेह का एक पवित्र धागा। मैं उन भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं का आभारी हूं, जिन्होंने आज मेरे नई दिल्ली स्थित आवास पर मुझे राखी बांधी।” -
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद 320 भारतीय नागरिक लापता हैं, जबकि चीन की सीमा पर फंसे 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि त्रिशुली-वन जलविद्युत परियोजना में कार्यरत 63 भारतीय नागरिकों सहित 84 भारतीय नागरिकों को अब तक बचाया जा चुका है। उन्होंने आगे बताया कि चीन की सीमा पर फंसे 96 भारतीय नागरिक सड़क मार्ग से सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच गए हैं।
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की स्थिति के बारे में जायसवाल ने कहा कि पहली अच्छी खबर! बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से कल काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक आज दिल्ली पहुंच गए हैं। कल हमारे राजदूत ने काठमांडू में उनसे मुलाकात की और उनका हालचाल पूछा। उन्होंने आगे कहा कि इन 21 और 63 के अलावा, हमें पता चला है कि चीन की सीमा में फंसे 96 भारतीय नागरिक सड़क मार्ग से सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच गए हैं और उन्हें निकालने के प्रयास जारी हैं। जैसे ही हमें उनके बारे में और जानकारी मिलेगी, हम आपको सूचित करेंगे।जायसवाल ने बताया कि भारतीय मूल के लगभग 100 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। जिन लोगों से हम संपर्क नहीं कर पा रहे हैं या जो लापता हैं, उनकी संख्या इस समय 320 है। लेकिन कृपया ध्यान रखें कि स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए संख्याएं घटती-बढ़ती रहती हैं। साथ ही, हमें कई सूचियों का मिलान करना है। भारतीय मूल के लगभग 100 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। ये वे लोग हैं जो भारतीय मूल के हैं और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए हो सकते हैं, लेकिन उनके पास अन्य राष्ट्रीयताएं हैं। विदेश मंत्रालय का हमारा नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे काम कर रहा है, जैसा कि काठमांडू और बीजिंग स्थित हमारे दूतावासों के नियंत्रण कक्ष भी कर रहे हैं।विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि चीन की सीमा पर मौजूद 400 भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं और अपने परिवारों से संपर्क करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि चीन में भारतीय दूतावास स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर चीनी सीमा पर फंसे 400 लोगों को निकालने के लिए काम कर रहा है।उन्होंने आगे कहा कि चीनी सीमा पर हमारे 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। वे सुरक्षित हैं। वे अपने परिवार के संपर्क में हैं क्योंकि मुझे बताया गया है कि वहां फोन आदि सेवाएं काम कर रही हैं। हमारा दूतावास उनमें से कई लोगों के संपर्क में है, वास्तव में उनके टीम लीडर और उनके ट्रैवल एजेंट से भी। उनके कई परिवार के सदस्यों ने भी बीजिंग में हमारे दूतावास द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबरों के माध्यम से हमसे संपर्क किया है… जैसा कि मैंने पहले कहा था कि स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए हम आपको बाद में अपडेट आंकड़े देंगे, लेकिन फिलहाल हम लगभग 400 लोगों की बात कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि हमारा दूतावास चीन के स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और वे यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वहां फंसे लोगों को कैसे निकाला जाए। आपको बता दें कि ये सभी 400 से अधिक लोग सुरक्षित हैं। -
जबलपुर (मप्र) . रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को यहां स्थित 'व्हीकल फैक्टरी जबलपुर' (वीएफजे) में टी-सीरीज के युद्धक टैंक की मरम्मत के लिए 472 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना की आधारशिला रखी। अधिकारियों ने बताया कि प्रस्तावित सुविधा में हर साल 'टी-72' और 'टी-90' के 80 टैंक की मरम्मत व रखरखाव किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना को हर साल ऐसे करीब 230 टैंक की मरम्मत की आवश्यकता होती है।
अधिकारियों ने बताया कि चेन्नई के अवाडी स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्टरी में फिलहाल हर साल करीब 150 टैंक की मरम्मत की जाती है। उन्होंने कहा कि जबलपुर की 57 साल पुरानी वीएफजे में बनने वाली नई सुविधा इस कमी को पूरा करेगी। वीएफजे, आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड और रक्षा मंत्रालय के अधीन संचालित एक प्रमुख सैन्य वाहन विनिर्माण इकाई है। अधिकारियों ने बताया कि 1969 में स्थापित इस फैक्टरी में शुरुआत में जर्मनी की एम.ए.एन. के सहयोग से 'शक्तिमान 3टी' वाहन तथा जापान की निसान मोटर्स कंपनी के सहयोग से 'निसान 1टी' और जोंगा वाहनों का उत्पादन किया जाता था। उन्होंने बताया कि फैक्टरी परिसर 330 एकड़ में फैला है, जबकि इससे लगा एस्टेट 600 एकड़ में है। -
नयी दिल्ली. नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कम से कम 288 भारतीय अब भी लापता हैं, जबकि लगभग 200 अन्य चीन की ओर फंसे हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। मंत्रालय ने कहा कि भारत दोनों देशों के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है, ताकि बचाव अभियान में समन्वय किया जा सके। इसने कहा कि बचाव अभियान में तेजी आने के साथ भारत नेपाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और संकट से निपटने में उसकी मदद कर रहा है। नेपाल में बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने तीन जिलों में भारी तबाही मचाई है। बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 270 हो गई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शीर्ष अधिकारियों तथा काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूतों के साथ उच्चस्तरीय बैठक के बाद कहा कि भारत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए "पुरजोर प्रयास" कर रहा है। भारत ने बुधवार रात से दो सैन्य परिवहन विमानों के जरिए कुल 47.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी है और अधिक राहत सामग्री भेजने की प्रक्रिया जारी है। एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि भारत की तत्काल प्राथमिकता लापता भारतीयों का पता लगाना और उन्हें बचाना तथा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा कि नेपाल में लापता भारतीयों में जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले लोग और तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों के पर्यटक समूह शामिल हैं। उन्होंने कहा, ''288 भारतीय नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इनमें वे 73 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जो त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे थे। काठमांडू स्थित हमारा दूतावास इन लोगों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए परियोजना प्रमुख के संपर्क में है।'' उन्होंने कहा, ''इसके अलावा, तमिलनाडु के 37 और 49 भारतीय नागरिकों के दो अलग-अलग समूह हैं, जो सम्राट और फ्लाई एवरेस्ट ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए थे।'' जायसवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल के 32 भारतीय नागरिकों का एक अलग समूह भी था, जो सम्राट ट्रैवल्स की मदद से रसुवा जिले के तिमुरे गया था। उन्होंने कहा कि वहीं, कुछ अन्य राज्यों के 61 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था। उन्होंने कहा कि केरल के 33 भारतीय नागरिकों का एक और समूह भी था।
उन्होंने कहा, ''हमने तमिलनाडु के 21 भारतीय नागरिकों को बचा लिया है... हमें जानकारी मिली है कि मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय नागरिक चीन के क्षेत्र में फंसे हुए हैं।'' जायसवाल ने कहा कि तिब्बत की ओर फंसे लगभग 200 भारतीय नागरिकों ने सुरक्षित निकाले जाने के लिए सहायता मांगी है। उन्होंने कहा कि इनमें से 95 लोग गारचेन में हैं और नेपाल में प्रवेश करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं, जबकि चार लोग जिलॉन्ग शहर में और 13 लोग जुतुलपुक में हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बाढ़ से तबाह हुए क्षेत्रों में स्थिति लगातार बदल रही है और भारत भारतीय नागरिकों को बचाने के लिए संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद जयशंकर ने कहा, ''बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सभी भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं।" जयशंकर ने कहा कि उनका मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटर और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। उन्होंने कहा, ''हम इस मामले के साथ-साथ राहत प्रयासों को लेकर भी नेपाली पक्ष के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।'' भारत ने बृहस्पतिवार को सैन्य परिवहन विमान से 37.5 टन राहत सामग्री की दूसरी खेप नेपाल भेजी।
भारत ने बुधवार को 10 टन एचएडीआर (मानवीय सहायता और आपदा राहत) सामग्री भेजी थी।
उन्होंने कहा, ''भारत नेपाली अधिकारियों के साथ लगातार और करीबी संपर्क में है। हम जारी राहत प्रयासों को मजबूती से समर्थन देते रहेंगे।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से बात की थी और वहां बाढ़ से हुई जान-माल की क्षति पर संवेदना व्यक्त की थी। साथ ही, उन्होंने कहा था कि भारत पड़ोसी देश को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। मोदी ने कहा था कि भारत के लोग इस कठिन समय में नेपाल के अपने भाइयों और बहनों के साथ एकजुटता से खड़े हैं।


























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