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न्यूयॉर्क. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वैश्विक व्यवधानों के बावजूद भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की "उल्लेखनीय वृद्धि" दर्ज की है और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। सीतारमण ने बुधवार को न्यूयॉर्क में निवेशकों के साथ उच्चस्तरीय कारोबारी बैठक में हिस्सा लिया। इसका आयोजन न्यूयॉर्क स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास ने बैंक ऑफ अमेरिका के साथ मिलकर किया था। वित्त मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा कि निवेशकों को संबोधित करते हुए सीतारमण ने कहा, "वैश्विक व्यवधानों और तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और उसने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है।" सीतारमण उत्तरी कैरोलाइना के एशविल में जी20 सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के बाद यहां पहुंची थीं। सीतारमण ने कहा कि भारत ने मजबूत सुधारोन्मुखी रुख अपनाते हुए दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) सहित कई सुधारों के जरिये नियामकीय व्यवस्था में अधिक निश्चितता भी प्रदान की है।
'एक्स' पर दी जानकारी में कहा गया, "इन सुधारों से अनुपालन को आसान बनाने और कागजी कार्रवाई कम करने में मदद मिली है। एक दशक से अधिक समय पहले केंद्र में सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से यह उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है।" उन्होंने कहा कि सरकार ने जिन प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया है, उनमें पूंजीगत परिसंपत्तियों का निर्माण, बुनियादी ढांचे के विकास के जरिये उद्योग को लगातार समर्थन देना, खासकर विमानन क्षेत्र में निवेश बढ़ाना; अनुकूल व निवेश के लिए सुविधाजनक माहौल तैयार करना; एआई व डेटा केंद्रों के विकास को बढ़ावा देना; वैश्विक क्षमता केंद्रों को समर्थन देना; सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना और बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को कम करना शामिल है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन उपायों से बैंकों और उद्योग के लिए कारोबार के अधिक अनुकूल माहौल तैयार करने में मदद मिली है जिससे वे आगे बढ़ने, विस्तार करने और अधिक मजबूत होकर उभरने में सक्षम हुए हैं। सीतारमण ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने लगातार बनी चुनौतियों के बावजूद भारत पिछले कई वर्षों से राजकोषीय विवेक और राजकोषीय अनुशासन के रास्ते पर निरंतर प्रतिबद्ध रहा है। ये चुनौतियां कोविड-19 वैश्विक महामारी की शुरुआत के बाद से बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत में निवेश के माहौल में काफी सुधार हुआ है। केंद्र तथा राज्य सरकारें अपने-अपने क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करने और उसे सुगम बनाने के लिए पहले की तुलना में अधिक उत्सुकता एवं प्रतिस्पर्धी रवैया दिखा रही हैं। मंत्री ने कहा कि ये प्रयास 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के व्यापक राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा हैं। इससे पहले, स्वागत भाषण में अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाते हैं। वित्त मंत्रालय के अनुसार, उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार एवं निवेश के संबंधों को और मजबूत कर दोनों देश भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक यात्रा का लाभ उठा सकते हैं। -
वॉशिंगटन. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा से मुलाकात की और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य तथा भारत के बदलते वृद्धि परिवेश पर चर्चा की। सीतारमण ने मंगलवार को एशविल में जी20 सदस्य देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नर (एफएमसीबीजी) की बैठक से इतर जॉर्जीवा से मुलाकात की। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, '' बैठक में भारत में जारी संरचनात्मक बदलावों एवं व्यापक आर्थिक आकलन तथा वृद्धि के अनुमानों में इन बदलावों को उचित रूप से शामिल करने के महत्व पर भी चर्चा हुई।'' मंत्रालय ने कहा कि दोनों नेताओं ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और भारत की बदलती विकास यात्रा पर चर्चा की। जॉर्जीवा ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा, ''भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ विचार साझा किए। भारत के शानदार वृद्धि प्रदर्शन, वैश्विक परिदृश्य और साथ मिलकर काम करने के हमारे साझा संकल्प पर विचार किया।'' वित्त मंत्रालय के बयान के अनुसार, आईएमएफ की प्रबंध निदेशक ने भारत के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन की सराहना की तथा कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती हासिल की है। वित्त मंत्री ने भारत की मजबूत व्यापक आर्थिक बुनियाद तथा उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) में हो रहे संरचनात्मक बदलावों को पर्याप्त रूप से दर्शाने वाले मजबूत और साक्ष्य-आधारित निगरानी ढांचे के महत्व पर जोर दिया। बैठक में उभरते बाजारों एवं विकासशील अर्थव्यवस्थाओं (ईएमडीई) में संस्थागत क्षमता, व्यापक आर्थिक नीति निर्माण और सांख्यिकीय प्रणालियों को मजबूत करने के लिए समर्थन सहित आईएमएफ की क्षमता विकास पहलों पर भी चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने विश्लेषणात्मक क्षमताओं को मजबूत करने, मजबूत व्यापक आर्थिक नीतियों को समर्थन देने और वैश्विक आर्थिक मजबूती में योगदान के लिए भारत-आईएमएफ के निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया।
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काठमांडू. नेपाल के एकमात्र अरबपति और समाजसेवी बिनोद चौधरी ने देश में अचानक आई भयानक बाढ़ के बाद त्वरित कार्रवाई के लिये मंगलवार को भारत और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस आपदा का दायरा किसी की भी सोच से कहीं ज्यादा बड़ा था। चौधरी ने फिर से निर्माण के काम को "बहुत बड़ा" बताया और बताया कि कैसे गांव, बाजार, स्कूल और पुल बह गए और 500 मेगावाट से ज्यादा बिजली उत्पादन क्षमता ठप हो गई। चौधरी ने 'पीटीआई-वीडियो' को बताया, "इस तबाही का पैमाना उतना बड़ा है, जितना किसी ने कभी सोचा भी नहीं होगा। इसी जगह पर पहले भी बाढ़ आई थी, यहां तक कि पिछले साल भी, लेकिन वह मौजूदा हालात के मुकाबले कुछ भी नहीं थी।" उन्होंने नुकसान का दायरा बताते हुए कहा, "हमने लगभग एक हजार लोगों को खो दिया है। करीब 4,000 लोग लापता हैं... मेरी पिछली गिनती के अनुसार, हमने लगभग 40 पुल खो दिए हैं।" चौधरी ने कहा, "500 मेगावाट से ज्यादा क्षमता वाले ऊर्जा संयंत्र ठप हो गए। साथ ही, कई परियोजनाओं - खासकर ऊर्जा परियोजना - जो निर्माणाधीन थीं, उन्हें रोकना पड़ा; वे बह गए या उन्हें नुकसान पहुंचा। इसलिए, यह वाकई बहुत दुखद स्थिति है।" मंगलवार को नेपाल में आई भयानक अचानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,000 के पार पहुंच गई।
रुक-रुक कर हो रही बारिश और बाढ़ की नयी चेतावनी के बीच बचावकर्मी फंसे हुए लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 583 विदेशियों समेत लगभग 4,000 लोग लापता हैं, जबकि करीब 12,000 लोगों को बचाया जा चुका है। चौधरी ने आपदा के समय नेपाल सरकार, सुरक्षा एजेंसियों और मित्र पड़ोसी देशों, खासकर भारत की प्रतिक्रिया की तारीफ की। उन्होंने कहा, "मुझे यह मानना होगा कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने, और साथ ही हमारे मित्र पड़ोसी देशों-खासकर भारत-ने राहत सामग्री तुरंत उपलब्ध कराकर बहुत अच्छा काम किया है।" उन्होंने नेपाल का साथ देने के लिए खास तौर पर नयी दिल्ली और प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की—न सिर्फ हालिया आपदा के बाद, बल्कि 2015 के भूकंप के दौरान भारत की मदद को याद करते हुए भी। उन्होंने कहा, "मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि भारत भी उतना ही चिंतित है।
मैंने कई बार ऐसा देखा है। यहां तक कि 2015 के भूकंप के दौरान भी, भारत सबसे आगे था; प्रधानमंत्री मोदी ही सबसे पहले थे जिन्होंने तुरंत बचाव कार्य, मदद, अवसंरचना और साजोसामान का इंतज़ाम किया।" उन्होंने कहा कि भारत ने "वह अहमियत और वह क्षमता" हासिल कर ली है, साथ ही बड़े पैमाने पर जवाब देने की काबिलियत भी पा ली है। चौधरी ने कहा, "भारत ने जिस बड़े पैमाने पर काम किया है और अवसंरचना बनायी है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि पिछले 12 सालों में भारत द्वारा तैयार अवसंरचना की गुणवत्ता में जबरदस्त बदलाव आया है। इसलिए, पूरी प्रणाली ही एक अलग स्तर और क्षमता की है।" उन्होंने कहा, "मैं उम्मीद करता हूं और भारत सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और उन सभी लोगों से अपील करता हूं जो अहम भूमिका निभा सकते हैं, कि वे हर संभव कोशिश करें। मुझे लगता है कि ये ऐसे पल हैं जब भारत बड़ा बदलाव ला सकता है। -
लंदन. ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने मंगलवार को लंदन से सांसद पद से इस्तीफा देने की योजना की घोषणा की और कहा कि वह अब ''अंतरराष्ट्रीय मामलों'' पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। स्टार्मर ने पिछले महीने लेबर पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद एंडी बर्नहम ने 10 डाउनिंग स्ट्रीट में प्रधानमंत्री का पद संभाला था। स्टार्मर ने पहले संकेत दिया था कि वह सांसद बने रहेंगे और हाउस ऑफ कॉमन्स में बैठकर सरकार का समर्थन करेंगे। पूर्व वकील स्टार्मर (63) ने संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद मंगलवार को उसके दोबारा शुरू होने के दिन सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि उन्होंने लेबर पार्टी की सक्रिय राजनीति से हटने का फैसला किया है। उनके इस्तीफे से लंदन की होलबोर्न और सेंट पैनक्रास सीट पर उपचुनाव होगा। स्टार्मर ने कहा, ''गर्मियों के दौरान मुझे अपने भविष्य पर विचार करने का समय मिला। मैंने फैसला किया है कि अब होलबोर्न और सेंट पैनक्रास से सांसद पद छोड़ने और यह जिम्मेदारी किसी और को सौंपने का सही समय है।'' उन्होंने कहा, ''महान फ्रैंक डॉबसन से 11 साल पहले यह जिम्मेदारी संभालने के बाद देश के सबसे अच्छे निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात रही है।'' स्टार्मर ने कहा कि अब वह अन्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं, जिनमें तेजी से बदलती दुनिया में अंतरराष्ट्रीय मामले, रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि वह महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा से निपटने के लिए भी अन्य लोगों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा, ''मैं हमेशा इस बात पर बेहद गर्व महसूस करूंगा कि मैंने उस जगह का प्रतिनिधित्व किया, जिसे मेरी पत्नी बच्चे और मैं अपना घर कहते हैं।'' उपचुनाव से ग्रीन पार्टी को लंदन की उस सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करने का मौका मिल सकता है, जहां इस वामपंथी दल को लगता है कि उसका अच्छा-खासा समर्थन है। ऐसी संभावना भी जताई जा रही है कि यह उपचुनाव ग्रीन पार्टी के नेता जैक पोलांस्की के लिए हाउस ऑफ कॉमन्स में सीट हासिल करने की परीक्षा बन सकता है। पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा, ''जैक ने हमेशा स्पष्ट किया है कि वह लंदन से सांसद बनना चाहते हैं। लंदन पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से उनका घर रहा है।'' प्रवक्ता ने इस मुकाबले में उनके उतरने की संभावना से इनकार नहीं किया।
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न्यूयॉर्क. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विविधता में एकता भारत के डीएनए में है और ''इसका उत्सव मनाया जाना चाहिए, इसका सम्मान किया जाना चाहिए और इसे स्वीकार किया जाना चाहिए।'' शनिवार को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन स्थित इन्फोसिस थिएटर में आयोजित एक विशाल कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के 6,000 से अधिक सदस्यों और विभिन्न धर्मों के नेताओं को संबोधित करते हुए भागवत ने विविधता को अपनाने और समुदायों का समर्थन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''जब हम अमेरिका या यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका कहते हैं, तो एक शब्द की अक्सर चर्चा होती है और वह है बहुलतावाद। और जब हम भारत कहते हैं, तो एक और वाक्यांश की चर्चा होती है : विविधता में एकता।'' उनकी इस बात पर वहां उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने यह बात 'अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग' फोरम द्वारा आयोजित 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा, ''भारत के लिए एकता और विविधता, दोनों उसके डीएनए में हैं।'' उन्होंने स्वामी विवेकानंद के एक संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि हर राष्ट्र के सामने एक लक्ष्य होता है, जिसे उसे पूरा करना होता है और एक नियति होती है, जिसे उसे साकार करना होता है। आरएसएस प्रमुख ने कहा, ''भारत को कौन-सी नियति मिली है? भारत का उद्देश्य इस विविधता में एकता को साकार करना और समय-समय पर दुनिया को भी इसका एहसास कराना है। हम एक हैं और हमारी यही विविधता हमारी एकता को और अधिक खूबसूरत बनाती है।'' करीब एक घंटे के अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ''विविधता का उत्सव मनाया जाना चाहिए, उसका सम्मान किया जाना चाहिए और उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। साथ ही हमें एकता की इस भावना को भी ध्यान में रखना चाहिए। यह बहुत सच्ची भावना है।'' 'यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन' कार्यक्रम में अमेरिका के 39 राज्यों और 853 शहरों से लोग शामिल हुए। अमेरिका के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 250 से अधिक छात्र और 250 संगठन भी इसमें शामिल हुए। भागवत ने विविधता को अपनाने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा, ''हम एक-दूसरे के हैं''। उन्होंने समुदाय तथा दुनिया के प्रति अपना योगदान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा, ''हम जो कुछ भी हासिल करते हैं, उसमें दूसरों का योगदान होता है। हम दुनिया से बहुत कुछ लेते हैं, इसलिए हमें भी दुनिया को कुछ वापस देना चाहिए। हम कितना कमाते हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है; महत्वपूर्ण यह है कि हम उसमें से कितना दूसरों के साथ बांटते हैं।'' भागवत (75) ने अमेरिका में रह रहे भारतीय प्रवासियों से अपनी 'कर्मभूमि' यानी जिस देश में वे रहकर काम कर रहे हैं, उसके प्रति वफादार रहने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, ''हमारा कर्तव्य क्या है? हम अमेरिका में हैं। हम अमेरिका में रहते हैं। हम अमेरिका में कमाते हैं। इसलिए हम अमेरिका का हिस्सा हैं और हमें अमेरिका के प्रति सच्ची निष्ठा के साथ व्यवहार करना चाहिए।'' उनकी इस बात पर उपस्थित लोगों ने तालियां बजाईं। उन्होंने कहा, ''भारतीय प्रवासियों का अपनी कर्मभूमि के प्रति एक कर्तव्य है। उन्हें इसे पूरा करना चाहिए। उन्हें अपनी कर्मभूमि के प्रति वफादार रहना चाहिए।'' उन्होंने कहा, ''चूंकि भारत उनकी जन्मभूमि है, अगर उनके मन में कुछ करने की इच्छा है और वे अपनी कर्मभूमि के प्रति अपना कर्तव्य पूरा करने के बाद ऐसा कर सकते हैं, तो इसमें कोई रोक नहीं है, लेकिन यह अनिवार्य भी नहीं है। आपकी जन्मभूमि आपसे अपेक्षा करती है कि आप उन मूल्यों के अनुसार जीवन जिएं, जो उसने आपको दिए हैं। वह मूल्य है एकता।'' उन्होंने कहा, ''भारत आपसे अपेक्षा करता है कि आप उसी तरह जीवन जिएं, जिस तरह भारत ने आपको जीवन जीने की सोच दी है, क्योंकि यही मनुष्य के लिए संतुलित जीवन जीने का एक आदर्श तरीका है।'' आरएसएस प्रमुख ने जोर देकर कहा कि कोई राष्ट्र केवल भौगोलिक जमीन का एक टुकड़ा नहीं होता।
उन्होंने कहा, ''हर राष्ट्र की एक नियति होती है, जिसे उसे पूरा करना होता है। यही भारत की नियति है। आइए, भारतीयों के रूप में उस नियति के प्रति जागरूक हों और अपनी कर्मभूमि के साथ-साथ जन्मभूमि के प्रति भी अपने कर्तव्यों को पूरा करें। अगर हम ऐसा करते हैं, तो यह उन सभी समस्याओं से जूझ रही और हर कदम पर मुश्किलों का सामना कर रही दुनिया के लिए वरदान साबित होगा। हमें दुनिया को सहारा देना है। हमें इस दुनिया को किसी न किसी रूप में अपना सहयोग देना है।'' भागवत के मुख्य संबोधन से पहले विभिन्न धर्मों के नेताओं ने एकता, विविधता में एकजुटता, दयालुता, करुणा और एक-दूसरे की मदद करने की जरूरत का संदेश दिया। कार्यक्रम में रब्बियों के अंतरराष्ट्रीय संगठन रब्बिनिकल असेंबली के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रब्बी जैकब ब्लुमेंथल, न्यूयॉर्क शहर के ऐतिहासिक रिवरसाइड चर्च की आठवीं वरिष्ठ मंत्री और इस पद पर पहुंचने वाली पहली अफ्रीकी-अमेरिकी महिला एड्रिएन थॉर्न और वाशिंगटन डीसी स्थित ऐतिहासिक मस्जिद मुहम्मद के अध्यक्ष एवं इमाम तालिब एम शरीफ भी शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इनमें भारतीय-अमेरिकी बच्चों ने भी प्रस्तुति दी और गीत-संगीत व नृत्य के जरिए भारत तथा दुनिया की संगीत विविधता को प्रदर्शित किया। प्रस्तुतियों में अफ्रीका, लातिन अमेरिका, चीन, यूरोप और पश्चिम एशिया समेत दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों की संस्कृतियों को प्रदर्शित किया गया। इनके जरिए एकता और विविधता तथा 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरी दुनिया एक परिवार है) का संदेश दिया गया। दर्शकों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया और उत्साह बढ़ाने के तौर पर तालियां बजाईं। इनमें ढोल-ताशा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के जरिए संगीत प्रस्तुतियां भी शामिल थीं। इस अवसर पर 30 देशों के करीब 180 धार्मिक नेताओं ने पांच सूत्रीय 'कार्रवाई का आह्वान' जारी किया। इसमें कहा गया कि हमें ''शुरुआत खुद से करनी चाहिए'', ''एक-दूसरे के लिए खड़ा होना चाहिए'', ''जरूरत पड़ने से पहले रिश्ते बनाने चाहिए'', ''मिलकर सेवा करनी चाहिए'' और ''भविष्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।'' भागवत ने ''एकता की भावना के साथ विविधता को अपनाने और उससे समाज को समृद्ध बनाने'' के संदेश पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''विविधता स्वाभाविक है और एकता सत्य है। हमें इसे समझना होगा और इसी के अनुरूप अपने जीवन को ढालना होगा। -
केप कैनावेरल (अमेरिका). नासा की सबसे नयी और अत्याधुनिक अंतरिक्ष दूरबीन रविवार को अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गई। इसका उद्देश्य दूसरे तारों के आसपास मौजूद ग्रहों की खोज करना, रहस्यमयी 'डार्क एनर्जी' का अध्ययन करना और ब्रह्मांड का अब तक का सबसे व्यापक सर्वेक्षण करना है। 'नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन' (नासा) में विज्ञान मिशन निदेशक निक्की फॉक्स ने कहा, ''यह दूरबीन हजारों सुपरनोवा, दसियों हजार ग्रहों, अरबों आकाशगंगाओं और खरबों तारों की खोज करने में सक्षम होगी। अपने विशाल दृश्य क्षेत्र के कारण यह ऐसे काम कर पाएगी, जो हम पहले कभी नहीं कर सके।
स्पेसएक्स ने केनेडी स्पेस सेंटर से सुबह 4.3 अरब डॉलर की लागत वाले 'रोमन स्पेस टेलीस्कोप' (रोमन अंतरिक्ष दूरबीन) को अत्यधिक शक्तिशाली फाल्कन हेवी रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया। यह दूरबीन 16 लाख किलोमीटर दूर उस स्थान के लिए रवाना हुई जहां नासा की एक अन्य प्रमुख अंतरिक्ष दूरबीन 'जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप' पहले से मौजूद है। बस के आकार वाली इस दूरबीन का नाम नासा की पहली मुख्य खगोलशास्त्री दिवंगत नैंसी ग्रेस रोमन के नाम पर रखा गया है। इसे अपने गंतव्य तक पहुंचने में तीन महीने से अधिक का समय लगेगा। वहां पहुंचने के बाद यह अंतरिक्ष के छिपे हुए हिस्सों की अब तक की सबसे व्यापक तस्वीर पेश करेगी और ब्रह्मांड के अनजाने रहस्यों का पता लगाएगी। 'रोमन स्पेस टेलीस्कोप' का दृश्य क्षेत्र नासा की 'हबल स्पेस टेलीस्कोप' की तुलना में 100 गुना से भी अधिक बड़ा है। हबल 36 वर्षों से कक्षा में रहते हुए अंतरिक्ष की शानदार तस्वीरें भेज रही है। वहीं, जेम्स वेब दूरबीन ने कुछ वर्षों पहले इस अभियान में शामिल होकर ब्रह्मांड की शुरुआत से जुड़े बेहद पुराने खगोलीय पिंडों का अध्ययन शुरू किया था। ये तीनों अंतरिक्ष दूरबीनें यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के यूक्लिड अंतरिक्ष यान और चिली स्थित वेरा सी. रुबिन वेधशाला के साथ मिलकर ब्रह्मांड के कई बड़े रहस्यों को उजागर करने में मदद करेंगी। रोमन परियोजना की वरिष्ठ वैज्ञानिक जूली मैकएनेरी ने कहा, ''रोमन की विशाल पहुंच हमें अजीब, दुर्लभ और असामान्य चीजों को खोजने में मदद करेगी। यह भूसे के ढेर में सुई खोजने की हमारी परिभाषा को बदल देगी।'' वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि रोमन दूरबीन ब्रह्मांड के अधिकांश हिस्से को बनाने वाले 'डार्क मैटर' और 'डार्क एनर्जी' के बारे में भी नयी जानकारी देगी। ये दोनों अब तक वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बने हुए हैं। रोमन द्वारा तैयार आकाशगंगाओं की सूची से वैज्ञानिक को यह समझने में मदद मिलेगी कि इन अदृश्य शक्तियों के कारण ब्रह्मांड कितनी तेजी से फैल रहा है। रोमन की सबसे बड़ी खासियत उसकी गति होगी। मैकएनेरी के अनुसार, रोमन जितने मिल्की वे (आकाशगंगा) के अवलोकन एक महीने में कर लेगी, उन्हें पूरा करने में हबल को करीब एक सदी लग सकती है। उन्होंने कहा कि रोमन हमारी आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद हिस्से का अब तक का सबसे गहरा अध्ययन कर सकेगी। इस दूरबीन में एक अत्याधुनिक इन्फ्रारेड कैमरा लगाया गया है, जिसकी संवेदनशीलता हबल जैसी है, लेकिन यह हबल से करीब 1,000 गुना तेजी से काम करेगा। इसके अलावा इसमें ऐसा उपकरण भी है, जो तारों की रोशनी को रोक सकेगा। इससे रोमन उन बेहद हल्के ग्रहों की सीधी तस्वीर लेने में सक्षम हो सकती है, जो किसी तारे की परिक्रमा कर रहे हों। इस दूरबीन को भविष्य में ईंधन भरने के लिए भी डिजाइन किया गया है। यदि आने वाले दशक में कोई रोबोटिक ईंधन टैंकर उपलब्ध होता है, तो इससे रोमन का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है। -
वाशिंगटन. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को कहा कि भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशों में हो रहे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखते हुए और देश की अपनी जरूरतों को ध्यान में रखकर मजबूती से स्थिति का सामना किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शिकागो में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए कहा, ''इसके परिणामस्वरूप भारतीय किसानों, भारतीय परिवारों और भारत की रसद व्यवस्था को नुकसान नहीं उठाना पड़ा।'' उन्होंने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं गड़बड़ा गईं, लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण माहौल में अपने नागरिकों की रक्षा करने में सफलता हासिल की। सीतारमण ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद से भारत ने सात प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि बनाए रखी है और इस साल भी वृद्धि इसी दायरे में रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह वृद्धि कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, शुल्क संबंधी अनिश्चितताओं और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच हासिल हुई है। वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखने के साथ-साथ घरेलू जरूरतों को समझने की भारत की क्षमता ने देश को अनिश्चित माहौल में मजबूती से आगे बढ़ने में मदद की। राजकोषीय अनुशासन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''हमने एक लक्ष्य तय किया है कि 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 50 प्रतिशत के स्तर तक लाना है। इसलिए मैं उसी दिशा में काम करूंगी।'' उन्होंने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं का कर्ज अभी भी उनके जीडीपी के 200 प्रतिशत से अधिक है। भारत ने राजकोषीय घाटे को लेकर भी अनुशासन का रास्ता अपनाया है और उसने तय लक्ष्य की दिशा में प्रगति की है। सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान और देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनके राजकोषीय अनुशासन को दुनिया ने देखा है। क्रेडिट रेटिंग के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें सुधार हो रहा है। यह सुधार सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों में कटौती करके नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के बेहतर प्रबंधन से हो रहा है। सीतारमण ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए कहा कि अब इसके लिए करीब 20 वर्ष ही बचे हैं। उन्होंने कहा कि जिस गति और स्तर पर सुधार हो रहे हैं, उसके लिए अधिक समर्थन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे प्रतिभाशाली और अनुभवी लोगों से अधिक सहयोग चाहिए, जो आगे की दिशा के लिए सुझाव दे सकें। वित्त मंत्री ने कहा कि इसके अलावा देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पूंजी के रूप में समर्थन भी बेहद जरूरी है।
- वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नयी सैन्य अंतरिक्ष एकेडमी बनाने की घोषणा की और ह्यूस्टन स्थित नासा के मिशन नियंत्रण केंद्र के दौरे के दौरान अंतराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (स्टेशन) पर मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों से बातचीत की, जिनमें अनिल मेनन भी शामिल हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को 'जॉनसन स्पेस सेंटर' के मिशन नियंत्रण केंद्र से आईएसएस पर मौजूद अंतरिक्षयात्रियों से फोन पर बात करते हुए कहा, ''यह बहुत बड़े सम्मान की बात है, आपके साथ होना बहुत बड़ा सम्मान है और मैं बस जेसिका, अनिल तथा जैक का धन्यवाद व्यक्त करना चाहता हूँ - ये महान अमेरिकी, महान देशभक्त और बहादुर लोग हैं।'' नासा के अंतरिक्ष यात्री जैक हैथवे, अनिल मेनन और जेसिका मीर आईएसएस के लिए एक्सपिडिशन 75' का हिस्सा हैं। ट्रंप ने अंतरिक्ष खोज में प्रयासों के लिए संबंधित अंतरिक्षयात्रियों को ''अग्रदूतों का समूह'' करार दिया। उन्होंने नयी अंतरिक्ष एकेडमी बनाने की भी घोषणा की।
- काठमांडू. नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में मदद के लिए भारत की 11 सदस्यीय तकनीकी टीम ने शनिवार को प्रभावित क्षेत्रों में मौके पर जाकर निरीक्षण किया। शुक्रवार को काठमांडू पहुंची इस टीम में चिकित्सक, चिकित्सा सहायक और अभियंता शामिल थे।यह टीम शनिवार को नुवाकोट जिले के त्रिशूली पहुंची, ताकि एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे श्रमिकों को बचाने के प्रयासों में मदद की जा सके। भारतीय दूतावास ने शनिवार को काठमांडू में 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''आज भारत की विशेषज्ञ तकनीकी टीम ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र में जलविद्युत सुरंगों का मौके पर जाकर जायजा लिया, ताकि वहां फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में मदद की जा सके।'' राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, चिलीमे और लांगटांग क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण पूरा करने के बाद भारतीय टीम ने सुरंग के आसपास बचाव कार्य से जुड़े आवश्यक काम शुरू कर दिए। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले में स्थित त्रिशूली-3ए जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे लोगों तक पहुंचने और मलबा हटाने के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के 82 सदस्यीय संयुक्त सुरक्षा दल ने शुक्रवार रात अभियान शुरू किया। सुरंग के प्रवेश द्वार पर जमा मिट्टी व मलबे और खराब मौसम के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। नेपाल सेना के अनुसार, नेपाली सुरक्षा बलों ने अब तक विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों से 191 श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया है। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 'बेली ब्रिज' बनाने में मदद का अनुरोध किया था। बेली ब्रिज ऐसे पुल होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है।
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काठमांडू. नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद स्थानीय अधिकारियों की सहायता के लिए 11 सदस्यीय भारतीय टीम शनिवार को काठमांडू पहुंची। इस प्राकृतिक आपदा में 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 2,000 लोग अब भी लापता हैं। भारतीय दूतावास के सूत्रों के अनुसार, नेपाल सरकार के अनुरोध पर इस टीम को भेजा गया है, जिसमें चिकित्साकर्मी और बचाव विशेषज्ञ शामिल हैं। टीम को नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, जहां व्यापक स्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। बुधवार को रसुवा और मध्य नेपाल के अन्य हिस्सों में आई भीषण बाढ़ के कारण 500 से अधिक लोगों की जान चली गई और मानव बस्तियों, सड़कों, पुलों तथा जलविद्युत बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। नेपाल ने शुक्रवार को कहा था कि वह अपने सुरक्षाबलों की अधिकतम तैनाती को ''प्राथमिकता'' देना चाहता है, जो स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और दुर्गम इलाकों से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार उन जटिल मामलों में अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने के लिए तैयार है, जहां अत्यंत कठिन संरचनाओं के लिए विशेष तकनीकी कौशल की आवश्यकता है। नेपाल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परिवहन सेवाएं फिर से शुरू करने के लिए भारत और चीन से 42 'बेली ब्रिज' बनाने में मदद का अनुरोध किया था। बेली ब्रिज ऐसे पुल ऐसे होते हैं जिन्हें भारी मशीनरी या विशेष उपकरणों के बिना भी तेजी से जोड़कर तैयार किया जा सकता है।
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ताशकंद. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार को उज्बेकिस्तान पहुंचे। अपने दौरे के दौरान वह दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान की चौथी यात्रा के दौरान हवाई अड्डे पर पहुंचने पर राष्ट्रपति मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। मोदी दो देशों उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की यात्रा के पहले चरण में ताशकंद पहुंचे हैं। इस यात्रा का उद्देश्य मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक साझेदारियों को मजबूत करना और इस क्षेत्र के साथ सभ्यतागत संबंधों को और गहरा करना है। प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान की अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार, निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा करेंगे। मोदी ने रवाना होने से पहले कहा, ''मैं राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ व्यापार और निवेश, डिजिटल संपर्क, रक्षा तथा ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने तथा 'विकसित भारत' और 'नया उज्बेकिस्तान' के हमारे साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के उपायों पर चर्चा के लिए उत्सुक हूं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि वह ताशकंद में शास्त्री स्मारक और 'ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ऑरिएनटल स्टडी' स्थित महात्मा गांधी केंद्र का भी दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि ये दोनों देशों के बीच कायम घनिष्ठ सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंधों के प्रति सम्मान के प्रतीक हैं। ताशकंद से प्रधानमंत्री किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव के निमंत्रण पर बिश्केक जाएंगे, जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उनके देश ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल तेल भंडार पर नियंत्रण हासिल करने के लिए एक समझौता किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए इस समझौते के संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि इस समझौते के लिए अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने बातचीत की थी। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा, "अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला के साथ एक समझौता किया है जो दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा तेल सौदा है!'' वेनेजुएला सरकार के प्रेस कार्यालय से संपर्क किया गया लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी सेना द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़कर अमेरिका लाने और उन पर मादक पदार्थ तस्करी से जुड़े संघीय आरोपों में मुकदमा चलाने के लिए की गई कार्रवाई के करीब नौ महीने बाद इस समझौते की घोषणा हुई है। ट्रंप ने शुक्रवार शाम सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में संकेत दिया कि वेनेजुएला के साथ हुआ यह समझौता एक निजी साझेदारी का हिस्सा है। 'व्हाइट हाउस' (अमेरिकी राष्ट्रपति का अधिकारिक आवास एवं कार्यालय) ने इस सौदे में शामिल निजी क्षेत्र के साझेदारों के बारे में टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। साथ ही, यह व्यवस्था किस तरह काम करेगी, इसके बारे में भी कोई विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शुक्रवार को 'एक्स' पर कहा कि यह समझौता वेनेजुएला में 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निजी निवेश का रास्ता खोलेगा और अमेरिका में गैस की कीमतों में कमी लाएगा। रूबियो ने पोस्ट में कहा, "यह समझौता अमेरिकी और वेनेजुएला के लोगों, दोनों के लिए एक बड़ी जीत है। -
काठमांडू/ मध्य नेपाल में और शव बरामद होने के बाद अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 675 हो गई है, जबकि आपदा के बाद 2,400 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। नेपाल पुलिस ने बताया कि तलाश एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी रहने के दौरान, प्रभावित सभी आठ जिलों से शव बरामद किये गये। नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट हिमनद के टूटने के बाद हिमस्खलन जैसी घटना से पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर आया, जिससे बुधवार को मध्य नेपाल में कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया और जलविद्युत केंद्रों को नष्ट कर दिया। नेपाल पुलिस के एक बयान के अनुसार, अब तक भोटेकोशी बाढ़ के पीड़ितों के 675 शव आठ जिलों से बरामद किए जा चुके हैं। बयान के मुताबिक, बचावकर्मियों ने चितवन से 246, नवलपरासी पूर्व से 165, नवलपरासी पश्चिम से 63 और गोरखा से 57 शव बरामद किए हैं। इसके अनुसार इसी तरह, धादिंग जिले से 45, नुवाकोट से 51, तनहूं से 35 और रसुवा जिले से 13 शव बरामद किए गए हैं। शनिवार तक 2,400 से अधिक लोग लापता थे। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार नेपाल में बचाव दलों ने शनिवार को अभियान के चौथे दिन लगभग 2,500 फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। बचाव अभियान के लिए 11,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है, जिनमें 5,000 से अधिक नेपाली सेना के जवान शामिल हैं।
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काठमांडू. नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 359 हो गई है। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बृहस्पतिवार को बताया कि बचाव दलों ने प्रभावित जिलों से अन्य शवों को बरामद किया, जिसके बाद मृतकों की संख्या में इजाफा हुआ। तिब्बत से अचानक आयी भीषण बाढ़ ने बुधवार को मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई। बाढ़ के तेज बहाव में महत्वपूर्ण पुल बह गए और करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं ठप हो गईं।
बाढ़ का पानी कई जिलों में फैल गया। नेपाल सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां रसुवा, धादिंग, नुवाकोट और चितवन समेत बाढ़ प्रभावित जिलों में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अभि नारायण काफले के अनुसार, चितवन जिले से सबसे अधिक 132 शव बरामद किए गए हैं। बाढ़ रसुवा और अन्य जिलों से होते हुए त्रिशूली और नारायणी नदी के रास्ते निचले इलाकों में पहुंची, जिससे जलविद्युत परियोजनाओं, बस्तियों, सड़कों, पुलों तथा अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के आंकड़ों के अनुसार, अचानक आई बाढ़ में करीब 826 लोग लापता हैं, जिनमें से 590 पर्यटक हैं। नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने बताया कि लापता लोगों में 288 भारतीय शामिल हैं।
नेपाल के अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के संशोधित विश्लेषण के अनुसार, ग्लेशियर के ढहने या हिमस्खलन के कारण यह विनाशकारी बाढ़ आई। हिमस्खलन के कारण भोटे कोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के बहाव में रुकावट पैदा होने के बाद यह बाढ़ आई और सबसे पहले चीन की सीमा के पास रसुवागढ़ी स्थित तिमुरे इलाके में बाढ़ का कहर टूटा। -
-133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता
काठमांडू/ तिब्बत की सीमा के निकट मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई और करीब 160 लोगों की मौत हो गई तथा 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई, कई महत्वपूर्ण पुल बह गए और कम से कम एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया और उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी। अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने बताया कि नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि अचानक आई बाढ़ में 157 लोगों की मौत हुई है।
नेपाल सरकार ने कहा कि करीब 500 लोग लापता हैं, जबकि चीन के सरकारी न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से सीमावर्ती क्षेत्र में बहता दिखाई दिया। तेज बहाव को इमारतों और वाहनों की ओर बढ़ते देख लोग भागते नजर आए। एक वीडियो में चार मंजिला इमारत को तेज बहाव में बहते देखा गया, जबकि एक अन्य वीडियो में रसुवा में एक कार बाढ़ के तेज पानी में बहती नजर आई। एक और वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में तेज बहाव के कारण पुल ढहते और बहते नजर आए। धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद वह ढहकर बह गया।
एक अन्य वीडियो में कीचड़ भरा पानी तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेता और करीब 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाता नजर आया। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेन्द्र शाह से फोन पर बात की और उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नयी दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए। 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने 'एक्स' पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (एनआरआई) शामिल हैं। इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं।
गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। इसके संस्थापक सद्गुरु ने कहा, आव्रजन कार्यालय में मौजूद लोगों में से किसी के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।'' उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि इस आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं।
उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं। भारतीयों और अप्रवासी भारतीयों के अलावा लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के एक बयान के अनुसार, अचानक आई बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा जिलों में कुल 354 मेगावाट क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और पांच निर्माणाधीन परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त प्रमुख चालू जलविद्युत परियोजनाओं में रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना (111 मेगावाट), संजेन खोला जलविद्युत परियोजना (78 मेगावाट) और अपर त्रिशूली-3ए (60 मेगावाट) शामिल हैं। जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बुधवार को आई बाढ़ रसुवा में बारिश की वजह से नहीं आई।
नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग ने दोपहर में 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''चीन से मिली जानकारी के मुताबिक, नदी के बहाव में रुकावट वाली जगह पर बनी झील का पानी अभी पूरी तरह से नहीं निकला है, इसलिए भोटे कोशी और त्रिशूली इलाकों में खतरा बना हुआ है।'' उसने लोगों से नदियों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा।
एनडीआरआरएमए ने बाद में 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''भोटे कोशी और त्रिशूली इलाकों में खतरा बना हुआ है। लोगों से अपील की जाती है कि वे नदी से दूर रहें और अगली सूचना मिलने तक सुरक्षित जगहों पर ही रहें।'' 'काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई। सरकार ने बाद में बताया कि बुधवार को अचानक आई बाढ़ में 19 पुल बह गए।
हालात का जायजा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया। सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई, साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।
नेपाल सेना के एक बयान के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। नेपाल सेना ने त्रिशूली स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्र संख्या एक में एक उपचार केंद्र भी स्थापित किया है, जहां सेना के चिकित्साकर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सहायता दे रहे हैं। बयान में कहा गया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लापता लोगों की तलाश और बचाव के लिए हरसंभव प्रयास करने का आदेश दिया। आपातकालीन राहत कार्यों में मदद के लिए पीपुल्स आर्म्ड पुलिस की शिगाजे टुकड़ी के कुल 145 अधिकारियों और जवानों को प्रभावित सीमावर्ती क्षेत्र में भेजा गया है। शी ने खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने और घायलों को समय पर इलाज मुहैया कराने को कहा ताकि जनहानि कम से कम हो। उन्होंने निगरानी और अग्रिम चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने, वैज्ञानिक तरीके से बचाव अभियान चलाने और बाढ़ के बाद पैदा होने वाली अन्य आपदाओं से बचाव पर भी जोर दिया। -
संयुक्त राष्ट्र. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सामूहिक रूप से सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया और कहा कि सुरक्षित व सुचारु समुद्री व्यापार मार्ग खाद्य पदार्थों, उर्वरकों और ईंधन की निर्बाध आवाजाही के लिए बेहद जरूरी हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा, ''खाद्य असुरक्षा सशस्त्र संघर्षों के सबसे गंभीर मानवीय परिणामों में से एक है। आज के संघर्षों का असर उस इलाके से कहीं दूर तक पड़ता है, जहां वास्तव में युद्ध या संघर्ष चल रहा होता है।'' पर्वतनेनी ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 'फूड अंडर फायर: वैश्विक और स्थानीय खाद्य संकटों को कम करने में सुरक्षा परिषद की भूमिका' शीर्षक वाली आम चर्चा को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा बाजारों, उर्वरक आपूर्ति, समुद्री परिवहन, मानवीय सहायता और कृषि व्यापार में व्यवधान ने दिखाया है कि क्षेत्रीय संघर्ष किस तरह पूरी दुनिया की खाद्य सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। इसका सबसे अधिक असर उन विकासशील देशों पर पड़ता है, जो खाद्य और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए आयात पर काफी निर्भर हैं। भारत ने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ''तत्काल प्राथमिकता'' संघर्षों के मानवीय प्रभावों को कम करना होनी चाहिए। इसके लिए सुरक्षित, तेज और बिना किसी बाधा के मानवीय सहायता पहुंच सुनिश्चित करना और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सुरक्षा परिषद के अपने उपाय, जिनमें प्रतिबंध व्यवस्था भी शामिल है, अनजाने में मानवीय सहायता या वैध खाद्य एवं कृषि व्यापार में बाधा न बनें। वाणिज्यिक जहाजों के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए पर्वतनेनी ने कहा, ''सुरक्षित और सुचारू समुद्री व्यापार मार्ग खाद्य पदार्थों, उर्वरकों, ईंधन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही के लिए अनिवार्य हैं।'' उन्होंने कहा कि इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और समुद्री बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना चाहिए, साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वैध वाणिज्यिक व्यापार और मानवीय सहायता की खेप बिना किसी अनुचित बाधा के अपने गंतव्य तक पहुंच सके। चर्चा में भाग लेते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि 2025 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सशस्त्र संघर्षों की संख्या सबसे अधिक रही। इसी दौरान दुनिया में गंभीर खाद्य संकट का स्तर भी रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब रहा और कम से कम 26.6 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 2025 इस सदी का पहला ऐसा वर्ष भी रहा, जब सूडान और गाजा में एक साथ दो अकाल की पुष्टि हुई। गुतारेस ने इसे ''शर्मनाक'' बताया। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध जारी रहने का उल्लेख करते हुए गुतारेस ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की करीब पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति और वैश्विक उर्वरक व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, ''प्रतिबंधों और मार्गों के बंद होने से वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं और उनकी उपलब्धता में भारी गिरावट आई है। लाल सागर में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले खाद्य और अन्य वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए और खतरा पैदा कर रहे हैं।''
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नई दिल्ली। नेपाल में तिब्बत सीमा से लगे रसुवा और आसपास के जिलों में बुधवार तड़के भोटे कोशी नदी में अचानक आई भीषण बाढ़ से कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और कई बस्तियों में भारी तबाही हुई। बाढ़ से आठ चालू और पांच निर्माणाधीन समेत 13 जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ का कारण अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन तिब्बत की ओर भारी बारिश, हिमस्खलन या ग्लेशियर से जुड़ी घटना की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब नौ बजे भोटे कोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इससे तिब्बत सीमा से लगे रसुवा और धादिंग के साथ काठमांडू के दक्षिण-पश्चिम में स्थित नुवाकोट जिला भी प्रभावित हुआ। रसुवा में बाढ़ स्थानीय बारिश के कारण नहीं आई, बल्कि तिब्बत की ओर हुई भारी बारिश या हिमस्खलन को संभावित कारण माना जा रहा है।
बागमती प्रांत पुलिस कार्यालय के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं प्रवक्ता के अनुसार, नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका से तीन पुरुषों और एक महिला के शव बरामद किए गए हैं। बाढ़ के तुरंत बाद उनके शव त्रिशूली नदी के पास मिले। काठमांडू से करीब 125 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में तिब्बत सीमा के पास स्थित रसुवा सबसे अधिक प्रभावित जिला है। नेपाल सेना के अनुसार, तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाके में अचानक जलस्तर बढ़ने से वाहन, सामान और अन्य संपत्ति बह गई। रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ का स्तर असामान्य रूप से बहुत अधिक था और दोनों बस्तियों में काफी नुकसान हुआ है।रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना के अनुसार, सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान बाढ़ में बह गए। हाल में बनाया गया एक पुल भी नष्ट हो गया। यह इलाका तिब्बत के साथ नेपाल के व्यापारिक आवागमन के लिए महत्वपूर्ण है। जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के सूचना अधिकारी दिनकर कायस्थ ने कहा कि रसुवा में हुई बारिश से बाढ़ आने की संभावना नहीं दिखती। उन्होंने किसी नए हिमनद के बनने या पुराने ग्लेशियर के फटने की आशंका जताई। अधिकारियों के मुताबिक, वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए अध्ययन किया जा रहा है। ‘द हिमालयन टाइम्स’ के अनुसार, अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि यह घटना ग्लेशियर झील के फटने से आई बाढ़ (GLOF) या किसी अन्य कारण से हुई।नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा में नदी किनारे रहने वाले लोगों को अगली सूचना तक हाई अलर्ट पर रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि तिब्बत की ओर से बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन नेपाल (आईपीपीएएन) के अनुसार, बाढ़ से नुवाकोट और रसुवा में 354 मेगावाट की कुल क्षमता वाली आठ चालू जलविद्युत परियोजनाएं और निर्माणाधीन पांच परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। प्रमुख प्रभावित परियोजनाओं में 111 मेगावाट की रसुवागढ़ी जलविद्युत परियोजना, 78 मेगावाट की संजेन खोला जलविद्युत परियोजना और 60 मेगावाट की अपर त्रिशूली-3ए शामिल हैं।‘द काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, स्याफ्रुबेसी, बेत्रावती, मेलुंग, सल्लेतार, शांतिबाजार, पाइरेबेसी, खल्ती बस्ती, सोले, त्रिशूली और बट्टार समेत करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुई हैं। कई इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने से जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की अध्यक्षता में हुई आपात बैठक के बाद नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है।नेपाल सेना ने बताया कि बाढ़ के बाद खोज एवं बचाव अभियान के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। सेना ने रसुवा के स्याफ्रुबेसी से छह, मेलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को सुरक्षित निकाला। त्रिशूली में सैन्य प्रशिक्षण केंद्र नंबर-1 में उपचार केंद्र भी स्थापित किया गया है, जहां सेना के चिकित्सा कर्मी प्रभावित लोगों को आपात चिकित्सा सुविधा दे रहे हैं।स्थानीय मीडिया के अनुसार, तिमुरे स्थित क्षेत्र पुलिस कार्यालय, स्याफ्रुबेसी की पुलिस चौकी और रसुवागढ़ी की पुलिस चौकी भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता नेत्र बहादुर कार्की ने बताया कि बाढ़ के बाद रसुवा से सशस्त्र पुलिस बल के चार जवान लापता हैं। घायलों के इलाज के लिए पांच चिकित्सकों समेत 16 स्वास्थ्यकर्मियों की टीम रसुवा के प्रभावित क्षेत्र में भेजी गई है। सेना के एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर को आपात चिकित्सा बचाव दल के साथ त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है।धादिंग जिले के गजुरी में बाढ़ से एक पुल बह गया है। बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए पांच ड्रोन तैनात किए गए हैं। लापता लोगों का पता लगाने के लिए तीन स्निफर डॉग भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजे गए हैं।भोटे कोशी नदी में पिछले साल भी बाढ़ आई थी, जिससे रसुवा में भारी तबाही हुई थी। उस घटना में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई थी। इस बार भी अचानक आई बाढ़ ने नदी किनारे बसे इलाकों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है। -
न्यूयॉर्क. न्यूयॉर्क स्थित 'टाइम्स स्क्वायर' उस वक्त भारतीय साड़ियों के रंगों और विविध रूपों से सराबोर हो उठा प्रवासी भारतीय समुदाय की महिलाओं ने एक विशेष आयोजन में साड़ी की कालजयी खूबसूरती, समृद्ध विरासत और भारत की सांस्कृतिक विविधता को गर्व के साथ पेश किया। 'टाइम्स स्क्वायर' पर रविवार को 'साड़ी गोज ग्लोबल' कार्यक्रम का तीसरा संस्करण आयोजित किया गया। न्यूयॉर्क स्थित परोपकारी संस्था उमा ग्लोबल की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं और युवतियों ने कढ़ाई, चित्रकारी और आकर्षक सजावट वाली साड़ियों में अपनी खूबसूरती बिखेरी। इनमें असम की पारंपरिक बुनाई, लखनऊ की चिकनकारी, बनारसी रेशम और शानदार कांजीवरम जैसी साड़ियां शामिल थीं। अलग-अलग रंगों और शिल्प की इन साड़ियों ने भारत के कोने-कोने में मौजूद इस नौ गज के परिधान की समृद्ध विविधता को खूबसूरती से सामने रखा। खूबसूरत कढ़ाई, नायाब डिजाइनों और अलग-अलग तरह के कपड़ों से सजी रंग-बिरंगी साड़ियों में महिलाएं अपनी पारंपरिक पोशाक को गर्व के साथ प्रदर्शित करती नजर आईं। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे उन्होंने साथ मिलकर नृत्य किया, तस्वीरें खिंचवाईं और अपनी साड़ियों से जुड़ी कहानियां साझा कीं। इस दौरान उन्होंने अपनी संस्कृति और समृद्ध विरासत के रंग भी बिखेरे। न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होकुल ने कार्यक्रम में पढ़े गए अपने संदेश में कहा कि यह आयोजन उन महिलाओं के सम्मान और उत्सव का अवसर है, जो "टाइम्स स्क्वायर में अपनी विरासत का गर्व के साथ जश्न मनाते हुए साड़ी पहनकर हमारे समुदायों में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।" होकुल ने उमा ग्लोबल की सराहना करते हुए उसे महिलाओं, अल्पसंख्यकों और कारोबारी पेशेवरों के लिए "बेहद महत्वपूर्ण सहारा" बताया। उनके संदेश में कहा गया, "विविधता और समावेशन से जुड़े कार्यक्रमों, कारोबारी परामर्श और मार्गदर्शन के अवसरों के जरिए उमा लोगों और संस्थानों को अपने लक्ष्य तय करने और उन्हें हासिल करने में मदद करती है। जब हम हर व्यक्ति और हर पृष्ठभूमि के पेशेवरों को आगे बढ़ने और सफल होने का अवसर देते हैं, तो हम ऐसा भविष्य बनाने में मदद करते हैं, जो हम सभी के लिए बेहतर हो।" इस मौके पर न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में वाणिज्य दूत (व्यापार) राजलक्ष्मी अप्पासाहेब कदम ने अपने संदेश में कहा कि साड़ी भारतीय कला, परंपरा, संस्कृति और मेहनती बुनकरों की जीवंत विरासत है। कदम ने कहा, "साड़ी हमारी ऐसी पेशाक है जिसे सिलाई की जरूरत नहीं होती और यह हमारी विरासत का सम्मान करने के पारंपरिक और सतत हथकरघा परंपराओं के जरिए स्थानीय कारीगरों को सशक्त बनाती है। यह समृद्ध होती आधुनिक फैशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखती है। साथ ही, यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही हमारे पूर्वजों की समृद्ध कहानियों को भी संजोए रखती है।"
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बीजिंग. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल सोमवार को बीजिंग पहुंचेंगे और सीमा विवाद पर भारत-चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बातचीत में चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ हिस्सा लेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, डोभाल और वांग मंगलवार को विशेष प्रतिनिधि वार्ता के 25वें दौर में शामिल होंगे। डोभाल और वांग दोनों ही सीमा वार्ता प्रक्रिया के लिए तय विशेष प्रतिनिधि हैं। यह प्रक्रिया 2003 में 3,488 किलोमीटर लंबी भारत-चीन सीमा के जटिल मुद्दे को पूरी तरह से सुलझाने के लिए शुरू की गई थी। हालांकि, सीमा विवाद को सुलझाने में इसे सफलता नहीं मिली, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी इस व्यवस्थित प्रक्रिया को अलग-अलग मोर्चों पर दोनों देशों के बीच बार-बार होने वाले तनाव को दूर करने के लिए एक उपयोगी साधन मानते हैं। यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि यह चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा से ठीक पहले हो रही है। वह 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने आ रहे हैं। शी की यात्रा के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी चीनी नेता के शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं। शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ उनकी बैठक भी हो सकती है, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की पहलों पर चर्चा हो सकती है। दोनों नेता पिछले साल अगस्त में तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान मिले थे।
बीजिंग में डोभाल-वांग की बातचीत से पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शनिवार को फिर कहा कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता जरूरी है। उनकी यह टिप्पणी हाल के हफ्तों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी इलाके में चीनी सैनिकों के आक्रामक रवैये की खबरों के बीच आई है। जयशंकर ने शनिवार को नई दिल्ली में 'इकोनॉमिक टाइम्स वर्ल्ड लीडर्स फोरम' में कहा, ''मुझे लगता है कि हमने 2020 की गर्मियों और 2024 की शरद ऋतु के बीच एक बहुत मुश्किल दौर देखा, और यह मुख्य रूप से सीमावर्ती इलाकों की स्थिति का नतीजा था।'' उन्होंने कहा, ''आखिरकार, सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता अच्छे संबंधों के लिए जरूरी है, और सीमा की स्थिति ही काफी हद तक संबंधों की स्थिति तय करेगी।'' अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों की खबरों पर, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमा की स्थिति ''फिलहाल आम तौर पर स्थिर'' है। गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-भारत सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए कार्य प्रणाली की 36वीं बैठक की। उन्होंने कहा, ''दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य चैनलों के जरिए बातचीत बनाए रखने और सीमावर्ती इलाकों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए सहमत हुए।'' विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि भारत चीन के साथ सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों को 'बहुत गंभीर' मानता है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना ''सबसे जरूरी'' है, क्योंकि सीमा की स्थिति ही दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करेगी। इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और भौगोलिक विशेषताओं को उनके मानक नामों से औपचारिक रूप से पहचानने के अपने फैसले पर बीजिंग की आलोचना को भी खारिज कर दिया था। भारत ने इस बात पर जोर दिया कि यह राज्य भारत का ''अटूट और अभिन्न'' हिस्सा है तथा कोई भी चीज इस ''निर्विवाद वास्तविकता'' को बदल नहीं सकती। -
जोहानिसबर्ग. पूर्व विश्व चैंपियन मुक्केबाज ज़ोलानी टेटे की दक्षिण अफ्रीका में स्थित उनके आवास के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई। दक्षिण अफ्रीका के खेल, कला और संस्कृति मंत्री गेयटन मैकेंजी ने कहा कि 38 वर्षीय टेटे की उनकी कार में ही हत्या कर दी गई। उनके साथ वाहन में मौजूद 27 वर्षीय महिला को कई गोलियां लगीं और वह अस्पताल में भर्ती है। टेटे ने 2007-2008 में डब्ल्यूबीएफ फ्लाईवेट श्रेणी में और 2017 और 2019 में डब्ल्यूबीओ बैंटमवेट श्रेणी में विश्व मुक्केबाजी खिताब जीते थे। पुलिस ने बताया कि यह घटना तब घटी जब टेटे पूर्वी केप के मडांटसेन में अपने आवास पर गेट खुलने का इंतजार कर रहे थे। उसी समय दो नकाबपोश व्यक्तियों ने उन पर हमला कर दिया।
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नई दिल्ली। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूस के खिलाफ लंबी दूरी के हमलों को जारी रखने का दावा किया है। उन्होंने बताया कि गुरुवार रात यूक्रेनी हमलों में रूस की पर्म तेल रिफाइनरी, मैरिनोवका सैन्य हवाई अड्डे और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”हम युद्ध के परिणामों को वहीं वापस पहुंचाने के लिए अपनी लंबी दूरी वाली प्रतिबंध और जवाबी कार्रवाई की रणनीति जारी रखे हुए हैं, जहां से यह युद्ध शुरू हुआ था। बीती रात हमारे लंबी दूरी के हमलों ने सीमा से 1,600 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित ‘पर्म’ की तेल रिफाइनरी और रूस के वोल्गोग्राद क्षेत्र में मौजूद ‘मैरिनोवका’ सैन्य हवाई अड्डे को निशाना बनाया। काला सागर के क्षेत्र में भी हमें कुछ परिणाम मिले हैं।”
उन्होंने बताया कि हमें पहले किए गए हमलों के भी पुष्टि किए गए नतीजे मिले हैं। ‘अख्तुबिंस्क’ हवाई अड्डे पर रूस का एक एसयू-34 लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त हुआ है। यह स्थान अग्रिम मोर्चे से लगभग 600 किलोमीटर दूर है। जेलेंस्की ने कहा कि इसके अलावा, प्रिमोर्स्को-अख्तार्स्क में, जो लगभग 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, हमला करने वाले ड्रोन के भंडारण, तैयारी और लॉन्च केंद्र को निशाना बनाया गया। रूस इन्हीं ड्रोन का इस्तेमाल हमारे लोगों पर हमले करने के लिए करता है।उन्होंने बताया कि रूस के घातक हमले लगातार जारी हैं। बुधवार देर रात भी रूस ने यूक्रेन में भारी तबाही मचाई। उन्होंने बताया कि रूस लंबे समय से इसकी तैयारी कर रहा था और उसने बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन जैसे अलग-अलग हथियारों का एक साथ इस्तेमाल किया, ताकि नागरिक बुनियादी ढांचे को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके। कीव और उसके आसपास के इलाके, साथ ही ओडेसा और चेर्निहीव क्षेत्रों में काफी नुकसान हुआ है। जेलेंस्की ने रूस से संबंध रखने वाले लोगों पर कार्रवाई की। राष्ट्रपति ने रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे और रूस का समर्थन करने वाले लोगों के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन अपने प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ तालमेल में आगे बढ़ाएगा। -
नई दिल्ली। अमेरिका में ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास की इच्छा रखने वाले प्रवासियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि ट्रंप प्रशासन ने ‘पब्लिक चार्ज’ (सरकार पर निर्भरता) की परिभाषा को व्यापक बना दिया है, जिससे सरकार से स्वास्थ्य सेवा, ‘फूड स्टैम्प’ (मुफ्त राशन) या किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता लेने वाले आवेदकों के आवेदन खारिज किए जा सकेंगे।
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) द्वारा अंतिम रूप दिया गया यह नया नियम 18 सितंबर से प्रभावी होगा। इस फैसले का असर ग्रीन कार्ड पाने की उम्मीद लगाए भारतीय प्रवासियों पर भी पड़ेगा। इससे पहले लागू नियम के तहत केवल दो तरह के सरकारी लाभों को ग्रीन कार्ड आवेदन खारिज करने का आधार माना जाता था, जिनमें गुजारा भत्ते के लिए नकद सरकारी सहायता और सरकारी खर्चे पर लंबे समय तक किसी सरकारी संस्थान या आश्रम में रहना शामिल है।एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘‘पब्लिक चार्ज के आधार पर अयोग्यता तय करने के लिए यूएससीआईएस अधिकारी आवेदक की स्थिति का आकलन करेंगे। इसमें आवेदक द्वारा नकद सहायता, आवास सहायता, मुफ्त राशन, कॉलेज के लिए वित्तीय मदद या ऐसी ही अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने की संभावना पर विचार किया जाएगा।’’यह दिशानिर्देश गृह सुरक्षा विभाग द्वारा बाइडन प्रशासन के 2022 के ‘पब्लिक चार्ज’ नियमों को रद्द करने के फैसले के बाद आए हैं। इस नियम को 16 जुलाई को घोषित किया गया था और 20 जुलाई को ‘फेडरल रजिस्टर’ में प्रकाशित किया गया था। यह नया नियम 18 सितंबर को या उसके बाद डाक द्वारा भेजे जाने वाले या ऑनलाइन जमा किए जाने वाले ‘फॉर्म आई-485’ (स्थायी निवास या स्थिति के समायोजन के आवेदन) पर लागू होगा।नए नियमों के तहत अधिकारियों को आवेदक की उम्र, स्वास्थ्य, पारिवारिक स्थिति, वित्तीय स्थिति, शैक्षणिक योग्यता और यहां तक कि आवेदक के आश्रितों द्वारा ली जाने वाली सरकारी सुविधाओं को भी आवेदन खारिज करने का आधार बनाने का अधिकार होगा। यदि कोई अधिकारी यह पाता है कि आवेदक के भविष्य में सरकार सहायता पर निर्भर बनने की संभावना है, तो वह आवेदक को ‘पब्लिक चार्ज बॉन्ड’ जमा करने के लिए कह सकता है।आव्रजन वकीलों साइरस मेहता और दमीरा जानातोवा के विश्लेषण के अनुसार, ‘‘यह नया नियम अधिकारियों को ग्रीन कार्ड आवेदनों को खारिज करने के लिए और अधिक अधिकार प्रदान करेगा।’’ -
बुडापेस्ट. हंगरी में रविवार तड़के राजमार्ग पर जा रही एक यात्री बस सड़क से फिसल कर खाई में गिर गई जिससे 12 लोगों की मौत हो गई तथा कई अन्य घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पोलैंड के पर्यटकों के एक समूह को ले जा रही बस रविवार देर रात करीब एक बजे हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से लगभग 140 किलोमीटर पूर्व में एम3 मोटरवे पर मेजोकेरेज्त्स शहर के पास पूर्व की ओर जाने वाली सड़क पर पलट गई। पुलिस ने एक बयान में कहा कि प्रारंभिक जांच के अनुसार, हादसा संभवत: चालक को नींद आ जाने के कारण हुआ। उसने बताया कि चालक को हिरासत में ले लिया गया है। हंगरी के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन निदेशालय ने बताया कि हादसे के समय बस में 57 यात्री और दो चालक सवार थे। बस पलटने के बाद कई यात्री उसके नीचे फंस गए थे। पोलैंड के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैसिएज वेवियर ने रविवार को पोलिश समाचार एजेंसी पीएपी को बताया कि बस में सवार सभी लोग पोलैंड के नागरिक थे। हंगरी के प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने फेसबुक पर एक बयान में कहा कि हादसे में कम से कम 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घटनास्थल पर भेजे गए बचावकर्मियों का आभार जताया। पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने भी हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर लिखा "मैं पीड़ितों के परिवारों और उनके चाहने वालों के साथ प्रार्थना और गहरी संवेदना में शामिल हूं"।
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लीबिया में बनाया विश्व कीर्तिमान
दुबई. संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)में रहने वाले तीन भारतीय उन 65 'स्काईडाइवर्स' में शामिल थे, जिन्होंने 13,000 फुट की ऊंचाई पर एक विमान से छलांग लगाई और अपने-अपने देश का झंडा फहराकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। स्थानीय मीडिया ने यह खबर दी है। शनिवार को 'गल्फ न्यूज' अखबार में शनिवार को प्रकाशित खबर के मुताबिक सात अगस्त को लीबिया में इस आयोजन में केवल तीन भारतीयों, केरल के कन्नूर से जमशीर थनालोट, उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से अभिषेक रावत और बिहार के पटना से ईशा राज ने हिस्सा लिया था। खबर के मुताबिक 65 लोगों के पूरे समूह ने एक ही विमान से राष्ट्रीय झंडों के साथ एक साथ कूदने वाले सबसे ज़्यादा स्काईडाइवर्स का नया रिकॉर्ड बनाया। गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने 14 अगस्त को आधिकारिक तौर पर इस कीर्तिमान की पुष्टि की। अखबार के मुताबिक सेना के इल्यूशिन आईएल-76टीडी विमान से छलांग लगाते समय हर स्काईडाइवर ने अपने-अपने देश का झंडा साथ लिया हुआ था। खलीज टाइम्स की खबर के मुताबिक इस समूह में करीब 38 देशों के स्काईडाइवर्स शामिल थे। -
नई दिल्ली। स्थानीय अधिकारियों और मीडिया ने शुक्रवार सुबह बताया कि गुरुवार शाम को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) के दो जहाजों पर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते समय हमला किया गया। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में, यूएई के विदेश मंत्रालय ने ईरान के हमलों की निंदा की और ईरान से इन हमलों को रोकने की जरूरत पर जोर दिया।विदेश मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि यह हमला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का खुला उल्लंघन है, जिसमें नेविगेशन की आजादी के महत्व की पुष्टि की गई थी और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने या अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में बाधा डालने को अस्वीकार किया गया था।मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना और होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल आर्थिक दबाव या ब्लैकमेल के हथियार के तौर पर करना, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा समुद्री डकैती जैसा काम है। साथ ही, यह क्षेत्र की स्थिरता, वहां के लोगों और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है।मंत्रालय ने आगे कहा, “यूएई ने इस बात पर भी जोर दिया कि ईरान को बिना उकसावे के किए गए हमलों को रोकना चाहिए, सभी तरह की शत्रुता को तुरंत खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध होना चाहिए और क्षेत्रीय सुरक्षा की रक्षा के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह और बिना किसी शर्त के फिर से खोलना चाहिए।” सरकारी समाचार एजेंसी ‘एमिरेट्स न्यूज एजेंसी’ के हवाले से सिन्हुआ ने बताया कि कंपनी ने पुष्टि की है कि किसी के घायल होने की खबर नहीं है और स्थिति को नियंत्रण में ले लिया गया है। एक बयान में, एडीएनओसी ने नाविकों की सुरक्षा और भलाई की रक्षा करने के साथ-साथ नेविगेशन की आजादी और समुद्री सुरक्षा बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। रिपोर्ट में शामिल विशिष्ट जहाजों या हमलों से हुए नुकसान की सीमा के बारे में और जानकारी नहीं दी गई। सरकारी स्वामित्व वाली एडीएनओसी दुनिया की सबसे बड़ी तेल और गैस उत्पादक कंपनियों में से एक है और यूएई की अर्थव्यवस्था को चलाने में मुख्य भूमिका निभाती है।(
























