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रियाद। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने सऊदी अरब के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिति तथा परस्पर हित के अन्य मुद्दों पर चर्चा की। डोभाल रविवार को रियाद पहुंचे। सऊदी अरब में भारत के राजदूत सुहेल खान और सऊदी अरब के राजनीतिक मामलों के उप मंत्री सऊद अल-सती ने उनका स्वागत किया। डोभाल ने सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान, ऊर्जा मंत्री अब्दुलअजीज बिन सलमान और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मुसैद अल-ऐबान से मुलाकात की। सऊदी अरब में भारतीय दूतावास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि इन बैठकों के दौरान दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय स्थिति और परस्पर हित के अन्य मुद्दों पर चर्चा की। डोभाल की यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में संभवत: दूसरे दौर की चर्चा होगी। पाकिस्तान में 11 और 12 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुई पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी।
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बीजिंग। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को "अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग" बताते हुए इसे जहाजों के सामान्य आवागमन के लिए खोलने का आह्वान किया। ईरान हालांकि इस पर अपना अविभाज्य अधिकार होने का दावा करता है। शी चिनफिंग ने फोन पर बातचीत के दौरान सऊदी के युवराज मोहम्मद बिन सलमान से कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवागमन जारी रहना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हितों की पूर्ति करता है।" ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने और उसके बाद मौजूदा संघर्ष में अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी पर चीनी नेता का यह पहला बयान है। जलडमरूमध्य के बंद होने से दुनिया भर में, विशेष रूप से एशिया में, ऊर्जा की भारी कमी हो गई है, और चीन, जो ईरानी तेल का एक प्रमुख आयातक है, अमेरिका-इजराइल-ईरान युद्ध के लंबे समय तक चलने को लेकर तेजी से चिंतित है। शी ने कहा कि चीन क्षेत्रीय देशों का समर्थन करता है कि वे परस्पर अच्छे पड़ोसी होने, विकास, सुरक्षा और सहयोग के आधार पर अपना भविष्य स्वयं अपने हाथ में रखें, तथा क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा को बढ़ावा दें। उनकी यह टिप्पणी महत्वपूर्ण थी क्योंकि चीन ने पश्चिम एशिया में एक "प्रमुख राजनयिक सफलता" हासिल की, जिसके तहत मार्च 2023 में कट्टर प्रतिद्वंद्वी ईरान और सऊदी अरब को एक साथ लाया गया। परिणामस्वरूप, दोनों देशों ने राजनयिक संबंध बहाल कर लिए। अमेरिका-ईरान संघर्ष ने लेकिन सब कुछ बदल दिया है, ईरान ने सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों पर हमला करने के अलावा, उसके खिलाफ अमेरिकी युद्ध का मुकाबला करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इसके अलावा, चीनी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी नौसेना द्वारा चीन से ईरान के बंदरगाह की ओर जा रहे उस मालवाहक जहाज पर गोलीबारी करने पर चिंता व्यक्त की है, जिसने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी का उल्लंघन किया था। बाद में अमेरिकी नौसेना ने जहाज को जब्त कर लिया।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, "हम अमेरिका द्वारा पोत को जबरन रोके जाने से चिंतित हैं और आशा करते हैं कि संबंधित पक्ष जिम्मेदारी से युद्धविराम समझौते का सम्मान करेंगे, विवादों को बढ़ाने और तनाव को बढ़ने से रोकेंगे और जलडमरूमध्य से सामान्य आवागमन की बहाली के लिए आवश्यक स्थितियां बनाएंगे।" उन्होंने एक ईरानी अधिकारी के इस दावे के जवाब में होर्मुज जलडमरूमध्य को एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग भी कहा कि ईरान इस पर अपना नियंत्रण नहीं छोड़ेगा, और तेहरान का इस पर "अविभाज्य अधिकार" है। गुओ ने कहा, "होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय आवागमन का मार्ग है। इस क्षेत्र को सुरक्षित और स्थिर रखना तथा निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करना क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साझा हित में है"। -
वाशिंगटन. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि अमेरिकी वार्ताकार सोमवार को ईरान के साथ बातचीत के लिए पाकिस्तान पहुंचेंगे। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस्लामाबाद में ईरान के साथ होने वाली दूसरे दौर की वार्ता में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में कौन अधिकारी शामिल होंगे। व्हाइट हाउस और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के कार्यालय, जिन्होंने वार्ता के पहले दौर का नेतृत्व किया था, ने रविवार सुबह इस मामले से जुड़े संदेशों का तुरंत जवाब नहीं दिया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में ईरान पर शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में गोलीबारी करके संघर्षविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और धमकी दी कि अगर ईरान अमेरिका द्वारा प्रस्तावित समझौते को स्वीकार नहीं करता है तो वह ईरान में नागरिक बुनियादी ढांचे को नष्ट कर देगा। ट्रंप ने कहा, ''अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो अमेरिका ईरान के हर एक बिजली संयंत्र और हर पुल को नष्ट कर देगा।''
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नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को किसी दूसरे देश को हस्तांतरित नहीं करेगा और इसे अमेरिका भेजने पर कभी विचार भी नहीं किया गया था।
सरकारी आईआरआईबी टीवी चैनल पर बात करते हुए बघाई ने बताया कि विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के हाल के बयान, 8 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम के दायरे में दिए गए थे। उनका मतलब किसी नई बातचीत या रिश्तों में सुधार का संकेत देना नहीं था। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इससे पहले शुक्रवार को अराघची ने कहा था कि मौजूदा युद्धविराम के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा।=बघाई ने साफ किया कि विदेश मंत्री के बयान का मतलब यह था कि लेबनान में युद्धविराम होने के बाद, तेहरान ने वाशिंगटन के साथ हुए समझौते के तहत जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था लागू की है। उन्होंने कहा, “कोई नया समझौता नहीं हुआ है। वही समझौता लागू है जो 8 अप्रैल को घोषित किया गया था।”बघाई ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि उसने शुरू से ही इस समझौते का पालन नहीं किया, खासकर लेबनान पर भी इसे लागू करने के वादे को पूरा नहीं किया। हालांकि अमेरिका और इजरायल ने इस बात से इनकार किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी, तो ईरान जवाबी कदम उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम बढ़ाने को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है और पाकिस्तान के नेतृत्व में चल रहे मध्यस्थता के प्रयास संघर्ष को समाप्त करने और ईरान के हितों की रक्षा करने पर केंद्रित हैं।आपको बता दें, ईरान ने 28 फरवरी से इस जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर दी थी। उसने इजराइल और अमेरिका से जुड़े जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता बंद कर दिया था, क्योंकि दोनों देशों ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे।वहीं इसके जवाब में अमेरिका ने भी नाकाबंदी कर दी और ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को इस रास्ते से गुजरने से रोक दिया। यह कदम तब उठाया गया जब इस्लामाबाद में शांति वार्ता असफल हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दौर इस हफ्ते पाकिस्तान में होने की उम्मीद है, जो संभवतः रविवार को हो सकता है। - वाशिंगटन ।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान एक जरूरी ग्लोबल शिपिंग रूट को फिर से खोलने पर राजी हो गया है। इसके साथ ही चेतावनी दी कि जब तक कोई बड़ा समझौता तय नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सैन्य दबाव जारी रहेगा। एरिजोना में टर्निंग पॉइंट यूएसए की एक मीटिंग में ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से खुला है और बिजनेस और पूरे रास्ते के लिए तैयार है। इससे दुनिया के सबसे सेंसिटिव एनर्जी कॉरिडोर में से एक में तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं।इसके साथ ही, उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिकी सेना मजबूत मौजूदगी बनाए रखेगी। उन्होंने कहा, “नेवल ब्लॉकेड ईरान के मामले में तब तक पूरी तरह से लागू रहेगा जब तक ईरान के साथ हमारा ट्रांजैक्शन 100 फीसदी पूरा और पूरी तरह से डील पर हस्ताक्षर नहीं हो जाता।”ट्रंप ने अपने भाषण में ‘न्यूक्लियर डस्ट’ को वापस लाने की योजना के बारे में भी बताया। यह डस्ट असल में ईरान में हुए पुराने अमेरिकी हमलों का बचा हुआ मलबा है। इस पर ट्रंप ने कहा, “हम इसे हासिल करेंगे और वापस अमेरिका ले जाएंगे।” इसके लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ने खुदाई वाले जॉइंट ऑपरेशन का सुझाव दिया है।राष्ट्रपति ट्रंप ने इन डेवलपमेंट को बड़ी क्षेत्रीय कूटनीति से जोड़ा। उन्होंने दावा किया, “हाल की अमेरिका की कोशिशों ने ईरान के बाहर तनाव को स्थिर किया है। इजरायल और लेबनान के बीच एक ऐसा सीजफायर हुआ है जो पहले कभी नहीं हुआ। ऐसा डेवलपमेंट 78 सालों में नहीं हुआ था।” उन्होंने सहयोग के लिए कई देशों को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा, “मैं पाकिस्तान को धन्यवाद देना चाहता हूं और उसके महान फील्ड मार्शल को, मैं सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कुवैत को भी धन्यवाद देना चाहता हूं। इन सभी ने बहुत मदद की है।”ट्रंप ने यूरोप में अमेरिका के सहयोगियों की कड़ी आलोचना की और कहा कि वाशिंगटन को पारंपरिक साझेदारी पर कम भरोसा करना चाहिए। नाटो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “जब हमें उनकी जरूरत थी, तब वे बिल्कुल बेकार थे। हमें खुद पर भरोसा करना होगा।” उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी सेना बनाई है और भविष्य के एंगेजमेंट में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।ट्रंप ने खुद को एक ग्लोबल डीलमेकर के तौर पर भी दिखाया और एक बार फिर से कई संघर्षों को खत्म करने का क्रेडिट लिया। उन्होंने कहा, “मैंने आठ युद्ध खत्म किए। आगे के समझौते से यह संख्या बढ़ सकती है। अगर हम ईरान और लेबनान को जोड़ लें, तो दस युद्ध खत्म हो जाएंगे।”
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नई दिल्ली। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि उनका देश और फ्रांस मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक रक्षात्मक मिशन चलाएंगे। उन्होंने कहा कि यह मिशन पूरी तरह शांतिपूर्ण होगा और इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि इस होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने पर कोई टैक्स या टोल न लगे और यह पूरी तरह खुला रहे।
स्टार्मर यह बात कल शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कह रहे थे, जहां करीब 50 देशों के प्रतिनिधि (कुछ सामने, कुछ ऑनलाइन) इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एकजुट हुए थे कि इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही बिना रुकावट जारी रहे। होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। स्टार्मर ने कहा कि अगले हफ्ते लंदन में एक और बैठक होगी, जिसमें आगे की योजना तय की जाएगी।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो पहले ही सहयोगी देशों पर आरोप लगा चुके थे कि वे इस रास्ते को खुला रखने में मदद नहीं कर रहे, उन्होंने ब्रिटेन-फ्रांस की इस पहल को खारिज कर दिया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा, “मुझे नाटो से कॉल आया कि क्या हमें मदद चाहिए। मैंने उन्हें कहा कि दूर रहें, जब तक कि वे सिर्फ अपने जहाज तेल से भरना नहीं चाहते। जरूरत के समय वे बेकार थे, सिर्फ कागजी शेर।”ईरान ने यह घोषणा की कि युद्धविराम के दौरान यह होर्मुज स्ट्रेट व्यापारिक जहाजों के लिए खुला रहेगा, जिससे पेरिस में मौजूद नेताओं को हैरानी हुई। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह रास्ता पूरी तरह खुला है। ट्रंप ने भी ‘थैंक यू’ पोस्ट करके इसकी पुष्टि की, लेकिन साथ ही कहा कि ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी।ट्रंप ने एक और पोस्ट में कहा, “ईरान, अमेरिका की मदद से, समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगें हटा रहा है या हटा चुका है।” हालांकि, तेहरान की ओर से इसकी कोई पुष्टि नहीं हुई। वहीं अराघची ने इस रास्ते के खुलने को लेबनान-इजरायल के बीच हुए युद्धविराम से जोड़ा, जो गुरुवार से लागू हुआ, लेकिन ट्रंप ने कहा कि इसका इससे कोई संबंध नहीं है। -
वाशिंगटन. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि एशिया वैश्विक वृद्धि का मुख्य चालक बना रहेगा, जिसमें भारत और चीन क्षेत्रीय विस्तार में 70 प्रतिशत का योगदान देंगे। साथ ही संगठन ने यह भी कहा कि खाड़ी संकट के कारण ऊर्जा का झटका इस क्षेत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। आईएमएफ ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर अपनी रिपोर्ट में कहा कि अमेरिकी शुल्क और व्यापारिक अनिश्चितता के चलते क्षेत्रीय वृद्धि दर के 2026 में घटकर 4.4 प्रतिशत और 2027 में 4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा 2025 में पांच प्रतिशत था। आईएमएफ के एशिया प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने यहां पत्रकारों से कहा, ''एशिया ने 2026 में एक मजबूत स्थिति के साथ प्रवेश किया है और अमेरिकी शुल्कों तथा बढ़ती अनिश्चितता का खामियाजा भुगतने के बावजूद क्षेत्र की वृद्धि दर जुझारू बनी हुई है।'' हालांकि, उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की जीवाश्म ईंधन पर उच्च निर्भरता और प्रमुख वस्तुओं के लिए संघर्ष वाले क्षेत्रों पर निर्भरता को देखते हुए, ऊर्जा का नया झटका उन्हें नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा कि इस संकट के कारण मुद्रास्फीति बढ़ रही है, बाहरी संतुलन कमजोर हो रहा है और वित्तीय मोर्चे पर सख्ती बढ रही है। आईएमएफ के अनुसार, एशिया दुनिया के लगभग 38 प्रतिशत तेल और 24 प्रतिशत प्राकृतिक गैस की खपत करता है।
श्रीनिवासन ने कहा कि 2025 के अंत में अधिकांश एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि दर उम्मीद से अधिक रही। इसका श्रेय निर्यात और खपत को जाता है जो अनुमान से बेहतर रहे। उन्होंने कहा, ''अमेरिका को एशिया का निर्यात घटा है, लेकिन दुनिया के बाकी हिस्सों में यह बढ़ा है।'' -
नई दिल्ली। इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आखिरकार राहत की खबर सामने आई है। शुक्रवार को दोनों देशों के बीच 10 दिनों का युद्धविराम लागू हो गया। इस सीजफायर की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही कर दी थी। इस कदम का उद्देश्य पिछले एक महीने से जारी हिंसक संघर्ष को रोकना है, जिसमें 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
जैसे ही युद्धविराम लागू हुआ, अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इसका स्वागत किया और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के मुख्य प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि हम उन सभी कदमों का स्वागत करते हैं जो ‘ब्लू लाइन’ के दोनों ओर हिंसा और पीड़ा को समाप्त करने में मदद करें। उन्होंने संबंधित पक्षों से इस युद्धविराम का पूरी तरह पालन करने की अपील भी की।गुटेरेस ने एक्स पोस्ट में लिखा, “मैं इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष-विराम की घोषणा का स्वागत करता हूं और इसे संभव बनाने में अमेरिका की भूमिका की सराहना करता हूं। मुझे उम्मीद है कि इससे इस संघर्ष के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में बातचीत का रास्ता खुलेगा और इस क्षेत्र में स्थायी और व्यापक शांति की दिशा में चल रहे प्रयासों में मदद मिलेगी। मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे संघर्ष-विराम का पूरी तरह सम्मान करें और हर समय अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करें।”वहीं, अरब लीग के महासचिव अहमद अबुल-गीत ने इस समझौते को लेबनान के लोगों की पीड़ा कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने सभी पक्षों से तुरंत इसका पालन करने और स्थायी शांति के लिए गंभीर बातचीत शुरू करने का आग्रह किया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने भी इस युद्धविराम का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुए ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम समझौते का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य युद्ध को रोकना है।मिस्र ने इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने और इजरायली हमलों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। मिस्र के विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे इस युद्धविराम को स्थायी बनाने, मानवीय सहायता पहुंचाने और विस्थापित लोगों की घर वापसी सुनिश्चित करने में अपनी जिम्मेदारी निभाएं।संयुक्त अरब अमीरात और कतर ने भी इस पहल का समर्थन किया और उम्मीद जताई कि यह क्षेत्र में स्थिरता और स्थायी शांति की दिशा में एक मजबूत आधार बनेगा।बता दें कि नवंबर 2024 से लागू पिछला युद्धविराम भी पूरी तरह सफल नहीं रहा था और लगभग रोजाना हमले जारी रहे। यह संघर्ष 2 मार्च को फिर भड़क गया, जब हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट दागे, जिसके जवाब में लेबनान में भारी हवाई हमले किए गए। -
नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हिजबुल्लाह के साथ युद्धविराम लागू होने के बाद भी इजरायल दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर का सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगा। उनका यह बयान उस समय आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम की घोषणा की। यह समझौता नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन के बीच हुआ है और इसे अमेरिकी पूर्वी समय के अनुसार शाम 5 बजे से लागू किया जाना है।
नेतन्याहू ने बताया कि उन्होंने हिजबुल्लाह की उस मांग को ठुकरा दिया, जिसमें इजरायली सेना को अंतरराष्ट्रीय सीमा तक पीछे हटने के लिए कहा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि इजरायली सेना लेबनान के अंदर बनाए गए इस सुरक्षा क्षेत्र में ही तैनात रहेगी उनका कहना है कि यह सुरक्षा क्षेत्र उत्तरी इजरायल के इलाकों को हमलों और टैंक रोधी हथियारों से बचाने में मदद करेगा।नेतन्याहू ने यह भी कहा कि लेबनान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौता करने का मौका है। उन्होंने बताया कि ट्रंप इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए उन्हें और लेबनान के राष्ट्रपति को बातचीत के लिए आमंत्रित करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री नेतन्याहू के अनुसार, यह मौका इसलिए बना है क्योंकि इजरायल ने लेबनान में ताकत का संतुलन अपने पक्ष में बदल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक महीने में लेबनान की ओर से सीधे शांति वार्ता के संकेत मिले हैं।उन्होंने बताया कि इन बातचीतों में इजरायल की दो मुख्य शर्तें होंगी- पहली, हिजबुल्लाह को पूरी तरह हथियार छोड़ने होंगे, और दूसरी, एक स्थायी शांति समझौता होना चाहिए।वहीं ईरान के मुद्दे पर नेतन्याहू ने दावा किया कि ट्रंप ने उन्हें भरोसा दिया है कि वे समुद्री नाकेबंदी जारी रखेंगे और ईरान की बची हुई परमाणु क्षमता को खत्म करने के लिए दृढ़ हैं। नेतन्याहू ने इन कदमों को बहुत महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इससे आने वाले वर्षों में सुरक्षा और राजनीतिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।इस बीच, ट्रंप ने गुरुवार को इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम की घोषणा की, जिसका उद्देश्य तनाव को कुछ समय के लिए कम करना है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू और जोसेफ आउन से बातचीत के बाद दोनों पक्ष 10 दिन के युद्धविराम पर सहमत हुए हैं, जो वाशिंगटन समय के अनुसार शाम 5 बजे से शुरू होगा।यह युद्धविराम उस संघर्ष को रोकने की कोशिश है, जो तब बढ़ गया था जब इजरायल ने ईरान से जुड़े हिजबुल्लाह के खिलाफ नया मोर्चा खोल दिया था। हालांकि लेबनान और इजरायल के बीच औपचारिक युद्ध नहीं है, लेकिन हिजबुल्लाह दक्षिणी लेबनान के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखता है और उसने इज़राइल पर कई हमले किए हैं, जिसके जवाब में इजराइल ने भी कार्रवाई की है। - वाशिंगटन। अमेरिका ने वीजा प्रतिबंध नीति को आगे बढ़ा दिया है। अमेरिकी राज्य डिपार्टमेंट ने घोषणा की है कि वह पश्चिमी क्षेत्र में अपनी वीजा प्रतिबंध नीति को बढ़ा रहा है और 26 लोगों पर रोक लगाई है। राज्य विभाग ने एक बयान में कहा कि यह नीति उन लोगों को टारगेट करती है जो अमेरिका के दुश्मनों की तरफ से अमेरिकी हितों को कमजोर करने के लिए काम कर रहे हैं।राज्य विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी साफ करती है: यह सरकार दुश्मन ताकतों को जरूरी संपत्तियों पर मालिकाना हक या कंट्रोल करने या हमारे इलाके में अमेरिकी सुरक्षा और खुशहाली को खतरा पहुंचाने की काबिलियत से दूर रखेगा। राज्य विभाग देश में अमेरिकी लीडरशिप को आगे बढ़ाने, हमारे देश की रक्षा करने और हमारे पूरे इलाके में जरूरी रास्तों और इलाकों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है।”अमेरिकी राज्य विभाग ने मौजूदा वीजा प्रतिबंध नीति में एक बड़े बदलाव का ऐलान किया। राज्य विभाग ने कहा, “यह बढ़ी हुई नीति हमें अपने इलाके के उन देशों के नागरिकों के लिए अमेरिकी वीजा पर रोक लगाने में मदद करती है, जो पश्चिमी गोलार्ध के देशों में रहते हुए और जानबूझकर दुश्मन देशों, उनके एजेंटों या कंपनियों की तरफ से काम करते हुए, ऐसी गतिविधियों में शामिल होते हैं, मंजूरी देते हैं, उनकी फंडिंग करते हैं, उन्हें बड़ा समर्थन देते हैं, जो अमेरिका के हितों के खिलाफ हैं और उन्हें कमजोर करती हैं। ये लोग और उनके करीबी परिवार के सदस्य आम तौर पर अमेरिका में एंट्री के योग्य नहीं होंगे।”अमेरिकी राज्य विभाग ने बताया कि इन गतिविधियों में जरूरी संपत्ति और रणनीतिक संसाधन हासिल करने या कंट्रोल करने में दुश्मन ताकतों की मदद करना; क्षेत्रीय सुरक्षा की कोशिशों को अस्थिर करना; अमेरिकी आर्थिक हितों को कमजोर करना और हमारे इलाके के देशों की संप्रभुता और स्थिरता को कमजोर करने के लिए डिजाइन किए गए प्रभावी ऑपरेशन चलाना शामिल हैं।अमेरिकी राज्य विभाग ने 26 लोगों के वीजा पर प्रतिबंध लगाए हैं और कहा, “हमने देश में 26 ऐसे लोगों पर वीजा बैन लगाए हैं जो इन गतिविधियों में शामिल रहे हैं। ट्रंप सरकार देश की सेफ्टी और खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए हर मौजूद टूल का इस्तेमाल करेगा।”
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वाशिंगटन. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बृहस्पतिवार को ईरान से समझौता करने की अपील की। हेगसेथ ने पेंटागन में संवाददाताओं से कहा, ''आखिरकार, उन्हें (ईरान को) मेज पर आना ही होगा और समझौता करना ही होगा।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान के पास भविष्य में भी कभी परमाणु हथियार न हो।
हेगसेथ ने कहा, ''हम इसे अपने महान उपराष्ट्रपति और बातचीत करने वाली टीम के नेतृत्व में एक समझौते के माध्यम से अच्छे तरीके से करना पसंद करेंगे, अन्यथा हम इसे दूसरे तरीके से कर सकते हैं।'' ईरान ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा है और उसका कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। बाद में प्रेसवार्ता में, हेगसेथ ने ईरान की सरकार से कहा, ''मैं प्रार्थना करता हूं कि आप एक ऐसा समझौता चुनें, जो आपके लोगों की भलाई और दुनिया की भलाई के लिए आपकी समझ में हो। - लंदन. ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) ने बुधवार को कहा कि वह अगले दो वर्षों में अपने वार्षिक बजट का करीब 10 प्रतिशत, यानी लगभग 50 करोड़ पाउंड (करीब 67.7 करोड़ डॉलर) बचाने के लिए लगभग 2,000 नौकरियां खत्म करने की योजना बना रही है। कर्मचारियों के साथ हुई एक बैठक में घोषित योजना बीते एक दशक से अधिक समय में संस्था की सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है। कार्यवाहक महानिदेशक रोडरी टालफन डेविस ने कर्मचारियों को भेजे ईमेल में कहा, "मुझे पता है कि इससे अनिश्चितता पैदा होगी, लेकिन हम इस चुनौती को लेकर पारदर्शी रहना चाहते हैं।" डेविस ने कहा कि यह कटौती महंगाई, लाइसेंस शुल्क और वाणिज्यिक आय पर बढ़ते दबाव, तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था में अस्थिरता के कारण की जा रही है। बीबीसी ने इस साल की शुरुआत में ही संकेत दिया था कि वह "काफी वित्तीय दबाव" का सामना कर रहा है और 2029 तक अपने बजट में लगभग 10 प्रतिशत की कटौती करना चाहता है।
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संयुक्त राष्ट्र. भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कोई भी सुधार, यदि वीटो शक्ति वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी में विस्तार के साथ नहीं किया जाता है, तो संयुक्त राष्ट्र की इस इकाई में मौजूदा असंतुलन और असमानताएं बनी रहेंगी। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने मंगलवार को सुरक्षा परिषद सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वीटो के साथ या उसके बिना एक नयी श्रेणी पर विचार करने से व्यापक विचारों वाली पहले से जारी चर्चा "जटिल" हो जाएगी। उन्होंने कहा, ''दो मूलभूत कारण हैं, जिनकी वजह से संरचना असंतुलित बनती है और परिषद की वैधता व प्रतिनिधित्व पर सवाल उठते हैं-ये हैं सदस्यता और वीटो अधिकार।'' हरीश ने कहा, ''संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर व्यापक सहमति है। 80 साल से अधिक पहले बनी इसकी संरचना आज की बदलती वैश्विक-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं है।'' भारतीय राजदूत ने याद किया कि 1960 के दशक में परिषद में किये गए उस एकमात्र सुधार से वीटो का अधिकार रखने वाले देशों की ताकत और बढ़ गई जिसके तहत केवल अस्थायी श्रेणी में विस्तार किया गया था। तुलनात्मक रूप से देखें तो पहले वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों और अस्थायी सदस्यों का अनुपात 5:6 था, जिसे बाद में बदलकर 5:10 कर दिया गया। इससे वीटो का अधिकार रखने वाले देशों को अपेक्षाकृत अधिक फायदा मिला। उन्होंने कहा, "कोई भी सुधार जिसके साथ वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार नहीं किया जाता, वह इस अनुपात को और बिगाड़ देगा और इस प्रकार मौजूदा असंतुलन और असमानताओं को कायम रखेगा। इसलिए, वीटो अधिकार वाले स्थायी सदस्यों की श्रेणी का विस्तार सुरक्षा परिषद के वास्तविक सुधार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।" हरीश ने यह भी कहा कि वीटो अधिकार के साथ या उसके बिना, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधार के ढांचे के तहत एक नई श्रेणी पर विचार करने से व्यापक विचारों वाली पहले से चल रही चर्चा "जटिल" हो जाएगी। उन्होंने कहा, "सुधारों के मार्ग को सुव्यवस्थित और त्वरित करने के लिए सुधारों के दायरे को मौजूदा ढांचे तक सीमित रखना महत्वपूर्ण है।" भारत दशकों से सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग कर रहा है, जिसमें इसके स्थायी और अस्थायी दोनों वर्गों का विस्तार शामिल है। भारत का कहना है कि 1945 में स्थापित 15 देशों की यह परिषद 21वीं सदी के लिए उपयुक्त नहीं है और समकालीन भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है। भारत ने इस बात पर जोर दिया है कि वह परिषद में स्थायी सीट का हकदार है। उन्होंने कहा, "अतीत में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहां निर्वाचित सदस्यों ने केवल अपने संकीर्ण स्वार्थों को पूरा करने के लिए अपने प्रभावी वीटो का प्रयोग करके बाधाएं उत्पन्न की हैं।"
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काहिरा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि चीन, ईरान को हथियार नहीं देने पर सहमत हो गया है। उनका दावा ऐसे समय आया है जब खबरें है कि चीन हथियारों की आपूर्ति पर विचार कर रहा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा कि चीन ''मेरे द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को स्थायी रूप से खोलने से बहुत खुश है।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''उन्होंने(चीन ने) ईरान को हथियार न भेजने पर सहमति जताई है।'' ऐसा प्रतीत होता है कि वह इन दोनों बातों को आपस में जोड़ना चाह रहे थे। राष्ट्रपति ने मंगलवार को एक साक्षात्कारकर्ता को बताया था कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ईरान को हथियार भेजने से इनकार किया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने हाल के दिनों में कई बार इन दावों का खंडन किया है कि देश ईरान को किसी भी प्रकार की सैन्य सहायता प्रदान कर रहा है।
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वाशिंगटन. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में "भारी गिरावट" आएगी। ट्रंप ने रविवार को 'फॉक्स न्यूज' की संवाददाता मारिया बार्टिरोमो के साथ साक्षात्कार में कहा था कि नवंबर में होने वाले अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के चुनावों तक तेल-गैस की कीमतें समान रह सकती हैं या "शायद थोड़ी बढ़ सकती हैं।" हालांकि, मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय 'व्हाइट हाउस' में बार्टिरोमो के साथ एक अन्य साक्षात्कार में ट्रंप ने दावा किया कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया। इस साक्षात्कार का प्रसारण बुधवार को किया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस बात से खुश हैं कि तेल की कीमत 92 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। उन्होंने ईरान युद्ध का जिक्र करते हुए कहा, "जैसे ही यह खत्म होगा, इसमें (तेल की कीमतों) भारी गिरावट आएगी। और मुझे लगता है कि यह बहुत जल्द खत्म हो सकता है।" ट्रंप ने कहा कि गैस की कीमतें, जो मौजूदा समय में औसतन चार अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन से थोड़ी अधिक हैं, चुनाव तक "काफी कम" हो जाएंगी। उन्होंने ईरान युद्ध का फिर से जिक्र करते हुए कहा, "जब यह मामला सुलझ जाएगा, तो गैस की कीमतों में जबरदस्त गिरावट आएगी।" -
नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी रखने की अपील की है। यह जानकारी उनके प्रवक्ता ने दी। प्रवक्ता स्टेफान दुजारिक ने बताया कि पाकिस्तान में आयोजित इस्लामाबाद वार्ता में संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता नहीं हो सका, लेकिन बातचीत से यह साफ हुआ कि दोनों पक्ष गंभीरता से संवाद कर रहे हैं। इसे आगे की बातचीत के लिए एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम माना गया।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हैं, इसलिए कोई समझौता तुरंत नहीं हो सकता। ऐसे में बातचीत को जारी रखना जरूरी है ताकि धीरे-धीरे समाधान निकल सके। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि कई हफ्तों से चल रही तबाही और तनाव के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है।प्रवक्ता ने कहा कि हफ्तों की तबाही और संकट के बाद, अब यह साफ हो गया है कि मौजूदा संघर्ष का कोई भी सैन्य समाधान नहीं है।समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, दुजारिक ने यह भी कहा कि संघर्ष-विराम (सीजफायर) को हर हाल में बनाए रखा जाना चाहिए, और इसका उल्लंघन करने वाली सभी गतिविधियों को तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि महासचिव इस बात पर जोर देते हैं कि इस संघर्ष से जुड़े सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य सहित सभी समुद्री मार्गों पर आवाजाही की स्वतंत्रता का सम्मान करना चाहिए।प्रवक्ता ने बताया कि इस जलडमरूमध्य से समुद्री व्यापार में रुकावट आने का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है और कई क्षेत्रों में असुरक्षा बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उर्वरक और उसके कच्चे माल की आपूर्ति में आई रुकावटों के कारण दुनिया भर में लाखों कमजोर लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का संकट और भी गहरा गया है; इसके अलावा, ईंधन, परिवहन और आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं के चलते जीवन-यापन की लागत भी लगातार बढ़ती जा रही है।होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। इस बीच अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों को रोकने की योजना लागू करने का ऐलान किया, जो सोमवार से लागू हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, फारस की खाड़ी में करीब 20,000 नाविक अभी भी जहाजों पर फंसे हुए हैं और उन्हें हर दिन बढ़ती मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। -
वाशिंगटन. अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने मंगलवार को कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था वर्ष 2026 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। आईएमएफ ने अपनी 'वैश्विक आर्थिक परिदृश्य' रिपोर्ट में यह अनुमान जताते हुए कहा कि इस साल 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ भारत प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। मुद्राकोष ने भारत के संदर्भ में कहा, ''वर्ष 2026 के लिए वृद्धि अनुमान में 0.3 प्रतिशत अंक की हल्की बढ़ोतरी की गई है। इसके पीछे 2025 के मजबूत प्रदर्शन का असर और भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क को 50 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत किए जाने जैसे कारक हैं। इन कारकों ने पश्चिम एशिया संघर्ष के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है।'' रिपोर्ट के मुताबिक, यदि पश्चिम एशिया संघर्ष अपेक्षाकृत अल्पकालिक रहता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में हल्की गिरावट आ सकती है। इसके साथ ही मुद्राकोष ने वर्ष 2027 में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर के 6.5 प्रतिशत पर बने रहने का अनुमान जताया। साथ ही आईएमएफ ने 2026 में वैश्विक वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत और 2027 में 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया, जो 2025 के अनुमानित 3.4 प्रतिशत से कम है। बाजार विनिमय दरों के आधार पर वैश्विक उत्पादन 2026 और 2027 दोनों वर्षों में 2.6 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है। आईएमएफ ने कहा कि जनवरी, 2026 की तुलना में इस बार वैश्विक वृद्धि के अनुमान में सीमित कटौती करने का यह कारण है कि संघर्ष से उत्पन्न नकारात्मक झटकों का असर कुछ हद तक सकारात्मक कारकों- जैसे कम शुल्क, पहले से लागू नीतिगत समर्थन और 2025 के अंत एवं 2026 की पहली तिमाही में अपेक्षा से बेहतर आर्थिक प्रदर्शन से नियंत्रित हो रहा है।
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बीजिंग. चीन ने अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए नए नाम प्रकाशित करने के अपने कदम का बचाव करते हुए मंगलवार को कहा कि भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने की उसकी नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत ने चीन द्वारा भारतीय क्षेत्र को "काल्पनिक नाम" देने के प्रयासों को रविवार को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि इस तरह के "बेबुनियाद विमर्श" गढ़ने की कोशिशें "वास्तविकता" को नहीं बदल सकतीं और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों को पटरी से उतार सकती हैं। भारत की तीखी प्रतिक्रिया बीजिंग द्वारा अक्साई चिन में एक तीसरा नया प्रशासनिक क्षेत्र स्थापित करने की पृष्ठभूमि में आई है। इस इलाके को भारत अपना संप्रभु क्षेत्र मानता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ''चीन की ओर से भारत के क्षेत्रों का काल्पनिक नाम देने के किसी भी प्रयास को भारत सिरे से खारिज करता है।'' जायसवाल की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां प्रेस वार्ता में कहा कि जांगनान चीन का क्षेत्र है, और चीन ने कभी भी ''तथाकथित अरुणाचल प्रदेश'' को मान्यता नहीं दी है। जांगनान अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा होने का दावा करता है। गुओ ने कहा कि जांगनान क्षेत्र में कुछ स्थानों के नामों को मानकीकृत करना पूरी तरह से चीन की संप्रभुता के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा, ''वर्तमान में चीन-भारत संबंध सामान्यतः स्थिर हैं। चीन-भारत संबंधों को बेहतर बनाने और विकसित करने के लिए चीन की नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।'' गुओ ने कहा, ''हम आशा करते हैं कि दोनों पक्ष एक ही दिशा में काम करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के लिए अधिक अनुकूल कदम उठाएंगे।" चीन के शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र ने 26 मार्च को सेनलिंग काउंटी के गठन की घोषणा की, जो पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और अफगानिस्तान के निकट स्थित एक रणनीतिक क्षेत्र है। यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पश्चिमी क्षेत्र के भी करीब है। काराकोरम पर्वत श्रृंखला के निकट स्थित सेनलिंग, मुख्य रूप से मुस्लिम उइगुर बहुल क्षेत्र शिनजियांग में चीन द्वारा स्थापित तीसरा नया काउंटी है। भारत ने पिछले साल हेआन और हेकांग काउंटी के गठन को लेकर चीन के समक्ष विरोध दर्ज कराते हुए कहा था कि उनके अधिकार क्षेत्र का कुछ हिस्सा उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अंतर्गत आता है। चीन वर्ष 2017 से अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए अपने नाम प्रकाशित करता रहा है, जिस पर भारत लगातार आपत्ति जताता आया है। भारत का कहना है कि भारतीय क्षेत्र को दिए गए ''काल्पनिक नाम'' ''वास्तविकता'' को नहीं बदल सकते।
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इस्लामाबाद. अमेरिका ने घोषणा की है कि वह सोमवार को पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे से ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू करेगा। 'यूएस सेंट्रल कमांड' ने कहा कि यह नाकेबंदी ''सभी देशों के जहाजों के खिलाफ निष्पक्ष रूप से लागू की जाएगी'' जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से बाहर जा रहे हैं। इसमें कहा गया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के बीच यात्रा करने वाले जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। युद्धविराम के बाद भी जलडमरूमध्य में यातायात सीमित रहा है। जानकारों के अनुसार युद्धविराम शुरू होने के बाद से 40 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों ने जलडमरूमध्य पार किया है।
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बीजिंग. वैश्विक ऊर्जा संकट के गहराने के बीच, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव पश्चिम एशिया संघर्ष के बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य की अमेरिकी नाकेबंदी पर चीनी नेतृत्व के साथ वार्ता के लिए मंगलवार को बीजिंग आएंगे। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां प्रेस वार्ता में बताया कि लावरोव चीन के विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर बीजिंग का दौरा करेंगे। उनकी दो-दिवसीय यात्रा चीन और अन्य देशों को ईरान की तेल आपूर्ति को बाधित करने के प्रयास के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के परिप्रेक्ष्य में हो रही है। चीन वर्षों से अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए ईरान से बड़ी मात्रा में तेल आयात करता रहा है। ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के कदम का बीजिंग पर दीर्घकालिक असर पड़ने की आशंका है। चीन, रूस के तेल और गैस का भी एक बड़ा आयातक है।
गुओ ने कहा कि लावरोव की यात्रा के दौरान, दोनों देशों के विदेश मंत्री द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के साथ ही अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि पाकिस्तान में ईरान के साथ शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त होने के बाद, अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के प्रवेश या निकास को रोकने के लिए ''तत्काल'' नाकेबंदी शुरू करेगी। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ''नौसेना को निर्देश दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरान को शुल्क (टोल) चुकाने वाले प्रत्येक जहाज की तलाश करे और उसे रोके। अवैध टोल चुकाने वाले किसी को भी समुद्र में सुरक्षित आवागमन की अनुमति नहीं होगी।'' उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में हुई वार्ता में कोई समझौता नहीं होने के बाद अमेरिका ''उपयुक्त समय'' पर ईरान को ''खत्म करने'' को तैयार है।
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लंदन. मुंबई में रविवार को दिग्गज गायिका आशा भोसले के निधन की खबर के बाद उनके सम्मान में श्रद्धांजलियों का सिलसिला जारी है। ब्रिटेन में प्रवासी समूहों और कलाकारों ने उनकी संगीत विरासत को याद किया। ब्रिटेन की मीडिया ने 92 वर्षीय गायिका को "बॉलीवुड की आवाज" बताते हुए आठ दशक से अधिक लंबे करियर और हजारों यादगार गीतों के जरिए उनके सांस्कृतिक प्रभाव को रेखांकित किया। बीबीसी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, " आशा भोसले की मखमली आवाज ने बेशुमार फिल्मी गीतों में जान डाली । बॉलीवुड में उनके व्यापक प्रभाव के कारण 1997 का हिट गीत ब्रिमफुल ऑफ आशा बना, और उन्हें ब्रिटिश संगीतकार बॉय जॉर्ज के साथ काम करने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पहचान मिली। बीबीसी ने लिखा, "उनकी आवाज में एक ऐसा आकर्षण था जो प्रशंसकों को नाचने और गुनगुनाने पर मजबूर कर देता था, जिसकी वजह से उनकी गायकी पीढ़ियों की पहचान बन गई।" शुक्रवार को लंदन के एलेक्जेंड्रा पैलेस में अपने हालिया कॉन्सर्ट का समापन 'चुरा लिया है तुमने जो दिल को' जैसे गीतों के साथ करने वाले लंदन बॉलीवुड ऑर्केस्ट्रा (एलबीओ) ने बताया कि वह अपने आगामी ब्रैडफोर्ड, मैनचेस्टर और लीसेस्टर दौरे में भोसले के गीतों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि देगा। एलबीओ के संगीत निर्देशक टिम पोटियर ने कहा, "आशा के गीत कॉन्सर्ट हॉल के माहौल को भावनात्मक रूप से बदल देते थे। हम उन्हें प्रस्तुति देते समय दर्शकों के और करीब महसूस करते थे।
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इस्लामाबाद. अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस ने रविवार को बताया कि अमेरिका और ईरान इस्लामाबाद में हुई लंबी वार्ता के बाद पश्चिम एशिया संघर्ष को समाप्त करने के लिए किसी समझौते पर पहुंचने में विफल रहे। वेंस ने कहा कि 21 घंटे से अधिक समय के अथक प्रयासों के बावजूद दोनों पक्ष मतभेदों की खाई पाटने में असमर्थ रहे। वेंस ने कहा, ''हम 21 घंटे से इस पर काम कर रहे हैं और अच्छी खबर यह है कि हमारे बीच कई सार्थक चर्चाएं हुई हैं।'' उन्होंने कहा, ''बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके।''
अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने कहा, ''हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं कि हम किन बातों पर समझौता करने को तैयार हैं और किन पर नहीं।'' उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने ''हमारी शर्तों को स्वीकार न करने का विकल्प चुना है।''
जब उनसे यह बताने को कहा गया कि विवाद के प्रमुख मुद्दे क्या थे और ईरानियों ने किन बातों को ठुकराया तो उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया। वेंस ने कहा, ''मैं अधिक विस्तार से नहीं बताऊंगा क्योंकि 21 घंटे तक बंद कमरे में बातचीत करने के बाद मैं सार्वजनिक रूप से बात नहीं करना चाहता लेकिन सीधी सी बात यह है कि हमें उनकी ओर से इस बात की स्पष्ट प्रतिबद्धता दिखनी चाहिए कि वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही ऐसे साधन हासिल करने की कोशिश करेंगे, जिनसे वे बहुत जल्दी परमाणु हथियार हासिल कर सकें।'' वेंस ने कहा, ''हमने अभी तक ऐसा नहीं देखा है, हमें उम्मीद है कि हम ऐसा देखेंगे।'' ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका को ''अत्यधिक मांगें और अनुचित अनुरोध'' नहीं करने चाहिए।
पाकिस्तान की मध्यस्थता से हुई इस वार्ता पर दुनिया भर की नजर थी। अमेरिका और ईरान के बीच यह 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद पहली प्रत्यक्ष, उच्च स्तरीय बातचीत थी। वेंस ने कहा, ''हमने कई मुद्दों पर चर्चा की लेकिन हम ऐसी स्थिति तक नहीं पहुंच सके जहां ईरानी हमारी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार हों।'' अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ''काफी लचीला और सहयोगी'' था लेकिन ''दुर्भाग्य से, हम आगे नहीं बढ़ सके।'' उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य शीर्ष अमेरिकी अधिकारियों के संपर्क में थे।
वेंस ने कहा, ''हम नेक नीयत से बातचीत कर रहे थे और हम अपनी टीम के साथ लगातार संपर्क में थे। हम एक बहुत ही सरल प्रस्ताव के साथ विदा लेते हैं: आपसी सहमति का एक तरीका जो हमारा अंतिम और सबसे अच्छा प्रस्ताव है। हम देखेंगे कि ईरानी इसे स्वीकार करते हैं या नहीं।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ''मुख्य लक्ष्य'' ईरान को ''परमाणु हथियार'' हासिल करने से रोकना है और ''हमने इन वार्ताओं के जरिये यही हासिल करने की कोशिश की है।'' वेंस ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एवं सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सराहना की और उन्हें ''बेहतरीन मेजबान'' बताया। उन्होंने कहा, ''वार्ता में जो भी कमियां रहीं, वे पाकिस्तानियों की वजह से नहीं थीं। उन्होंने शानदार काम किया और हमारे एवं ईरानियों के बीच मतभेदों को पाटकर समझौते तक पहुंचने में मदद करने की वाकई कोशिश की।'' वेंस वार्ता के बाद वाशिंगटन रवाना हो गए और उन्होंने चर्चा को आगे बढ़ाने का कोई संकेत नहीं दिया।
ईरान और अमेरिका दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा किए जाने के चार दिन बाद शनिवार को बातचीत के लिए इस्लामाबाद पहुंचे थे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर भी शामिल थे जबकि ईरानी पक्ष का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने किया। ईरानी पक्ष में विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत अन्य लोग शामिल थे। सूत्रों ने बताया कि विशेषज्ञ स्तर की बातचीत में आर्थिक, सैन्य, कानूनी और परमाणु मुद्दों पर चर्चा हुई तथा लिखित प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया गया। उन्होंने बताया कि विवाद के प्रमुख मुद्दों में ईरान का परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील, संपत्ति फ्रीज करना और लेबनान में इजराइली हमले के मुद्दे शामिल रहे। ईरान ने बातचीत के लिए 10 सूत्री योजना पेश की थी, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी बलों की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने और उसे होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की अनुमति देने की मांग शामिल थी। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की अगुवाई की।
इस युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमले किए जाने के बाद हुई थी जिससे वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार ठप पड़ गए हैं और व्यापक पैमाने पर व्यापार प्रभावित हुआ है। इस बीच, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी 'एक्स' पर एक संदेश में पुष्टि की कि दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके और ''दोनों पक्षों के बीच कई संदेशों'' का आदान-प्रदान हुआ। उन्होंने लिखा, ''पिछले 24 घंटों में होर्मुज जलडमरूमध्य, परमाणु मुद्दे, युद्ध क्षतिपूर्ति, प्रतिबंध हटाने और ईरान के खिलाफ एवं क्षेत्र में युद्ध की पूर्ण समाप्ति सहित वार्ता के मुख्य विषयों के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई।'' उन्होंने कहा, ''इस कूटनीतिक प्रक्रिया की सफलता विरोधी पक्ष की गंभीरता एवं सद्भावना, अत्यधिक मांगों और अनुचित आग्रहों से परहेज करने तथा ईरान के वैध अधिकारों एवं हितों को स्वीकार करने पर निर्भर करती है।'' बकाई ने वार्ता की मेजबानी करने और इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में किए गए सद्भावनापूर्ण प्रयासों के लिए ''पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य की सरकार और गर्मजोशी से भरे उसके नेक लोगों'' के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
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न्यूयॉर्क/ह्यूस्टन. अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा कि भारत की आर्थिक विकास यात्रा उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए एक बड़ा अवसर है और इस बात पर बल दिया कि अमेरिका इस साझेदारी में ''सबसे आगे और केंद्र में'' है तथा भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है। क्वात्रा ने ये टिप्पणियां शनिवार को कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स (एसआईपीए) के 'दीपक और नीरा राज सेंटर ऑन इंडियन इकोनॉमिक पॉलिसीज' द्वारा आयोजित कोलंबिया इंडियन इकोनॉमी समिट 2026: 'द क्वेस्ट फॉर ए डेवलप्ड इंडिया' में एक विशेष संबोधन के दौरान कीं। उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और भारतीय प्रवासी समुदाय के प्रमुख सदस्यों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में कहा, ''भारत का आर्थिक विकास हमारी अपनी यात्रा है जो न केवल आर्थिक विकास और समृद्धि के हमारे मूलभूत सिद्धांतों के लिए है बल्कि यह हमारे अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के लिए भी एक बड़ा अवसर है। अमेरिका हमारे सबसे महत्वपूर्ण व अहम साझेदारों में से एक है।'' द्विपक्षीय संबंधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए क्वात्रा ने कहा कि साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने और बदलते वैश्विक परिवर्तनों से निपटने में भारत-अमेरिका साझेदारी ''सबसे महत्वपूर्ण और सबसे निर्णायक'' साझेदारियों में से एक है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए अपने लोगों के लिए आर्थिक विकास और समृद्धि को आगे बढ़ाना जारी रखेगा। राजदूत ने कहा, ''हम भारत में अपनी यात्रा, अपने आर्थिक विकास, अपने समाज के विकास के एक परिवर्तनकारी दौर में हैं... साथ ही, हम वैश्विक बदलावों के संबंध में सीखने के लिहाज से एक अनूठे दौर में भी जी रहे हैं।'' उन्होंने यह दोहराया कि भारत अपनी प्राथमिकताओं को लेकर आश्वस्त है और 2047 तक विकसित राष्ट्र का दर्जा हासिल करने पर दृढ़ता से केंद्रित है। मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के ''महत्व और सार'' पर बल देते हुए क्वात्रा ने कहा कि भारत-अमेरिका साझेदारी में सरकार-से-सरकार, सरकार-से-व्यापार, व्यापार-से-व्यापार और लोगों-से-लोगों के संबंध शामिल हैं। उन्होंने कहा, ''इन चार श्रेणियों के भीतर क्षेत्रीय विस्तार के संदर्भ में हमारे लिए एक प्रमुख खंड रणनीतिक राजनीतिक और सुरक्षा है।'' उन्होंने क्वाड (चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद), भारत-पश्चिम एशिया आर्थिक गलियारे और अमेरिका के साथ व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी जैसी पहलों के माध्यम से चुनौतियों और अवसरों की पुनर्कल्पना करने के प्रयासों का उल्लेख किया। क्वात्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में ''नेतृत्व स्तर का ध्यान'' रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को मौजूदा वैश्विक बदलावों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की विकास यात्रा घरेलू स्तर पर संचालित होती है लेकिन यह एक बदलते हुए अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के भीतर आगे बढ़ रही है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि क्वात्रा ने पिछले एक दशक में भारत के शासन सुधारों पर प्रकाश डाला है, जिन्होंने पारदर्शिता, व्यापार सुगमता और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। सम्मेलन को कई प्रख्यात अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने संबोधित किया। इनमें अर्थशास्त्र के प्रोफेसर और राज सेंटर के निदेशक अरविंद पनागरिया, विश्व बैंक समूह के मुख्य अर्थशास्त्री और विकास अर्थशास्त्र के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इंदरमित गिल, वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन और कोलंबिया के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग में कंप्यूटर विज्ञान के आरकेएस फैमिली प्रोफेसर विशाल मिश्रा शामिल थे। इससे पहले, भारतीय वाणिज्य दूतावास ने क्वात्रा और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों और समुदाय के नेताओं के बीच एक विशेष संवाद का आयोजन किया। क्वात्रा ने व्यापार, प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत-अमेरिका की बढ़ती साझेदारी पर अपने विचार साझा किए और भारत के निरंतर आर्थिक परिवर्तन पर प्रकाश डाला। भारतीय दूतावास ने बताया कि उन्होंने ''समुदाय को एकजुट करने में'' प्रवासी संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशंस (एफआईए) के कार्यों की सराहना की और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को स्वीकारा। 'द ग्रोथ ट्रायंगल' शीर्षक से एक सत्र में भाग लेते हुए ह्यूस्टन में भारत के महावाणिज्यदूत डी सी मंजुनाथ ने कहा कि सरकार, व्यापार और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव के माध्यम से भारत-अमेरिका संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने भारत और टेक्सास के बीच बढ़ते सहयोग को व्यापक द्विपक्षीय साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया। इस कार्यक्रम में भारत के बदलते नीतिगत परिदृश्य और विकास प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी प्रदान की गई जो देश की विकास गाथा में अकादमिक रुचि में वृद्धि को दर्शाता है।
- ह्यूस्टन । आर्टेमिस-2 के अंतरिक्ष यात्रियों के शुक्रवार को प्रशांत महासागर में उतरने के साथ ही आधी सदी से अधिक समय बाद मनुष्य की पहली चंद्र यात्रा पूरी हो गई। चार अंतरिक्ष यात्रियों वाला दल सफल चंद्र मिशन के बाद पृथ्वी पर लौटा। इस मिशन के दौरान उन्होंने चंद्रमा के उस हिस्से को देखा, जिसे पहले कभी इतने करीब से नहीं देखा गया था और इसने मानव इतिहास में सबसे ज्यादा दूरी तय करने का नया रिकॉर्ड भी बनाया। इस दौरान पूर्ण सूर्य ग्रहण भी दिखाई दिया। आर्टेमिस-2 चंद्रमा पर नहीं उतरा और न ही उसकी परिक्रमा की लेकिन उसने अपोलो 13 के दूरी के रिकॉर्ड को तोड़ दिया और पृथ्वी से मानव द्वारा की गई अब तक की सबसे लंबी यात्रा का उस समय रिकॉर्ड बनाया, जब चालक दल 252,756 मील (406,771 किमी) की दूरी तक पहुंचा। कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और कनाडा के जेरेमी हैनसेन 'मैक 33' यानी ध्वनि की गति से 33 गुना अधिक रफ्तार से वायुमंडल में दाखिल हुए। 'इंटीग्रिटी' नामक उनका ओरियन कैप्सूल स्वचालित प्रणाली के सहारे समुद्र में उतरा। मिशन नियंत्रण कक्ष में उस समय तनाव बढ़ गया जब अत्यधिक ताप के दौरान कैप्सूल लाल गर्म प्लाज्मा से घिर गया और तय योजना के अनुसार कुछ समय के लिए उससे संपर्क टूट गया। सबकी निगाहें कैप्सूल की जीवनरक्षक ऊष्मा-रोधी ढाल पर थीं, जिसे पुन: प्रवेश के दौरान हजारों डिग्री तापमान सहना था। मिशन नियंत्रण कक्ष के दर्शक कक्ष में अंतरिक्ष यात्रियों के परिजन भी मौजूद थे। संचार अवरोध की अवधि समाप्त होने के बाद जब कैप्सूल फिर दिखाई दिया और करीब 2,000 मील (3,219 किलोमीटर) दूर समुद्र में उतरा तो लोग खुशी से झूठ उठे।





















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