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न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि एच-1बी वीजा के लिए एक लाख अमेरिकी डॉलर का नया शुल्क नये आवेदकों के लिए है और उन्हें इस शुल्क का एकमुश्त भुगतान करना होगा। यह स्पष्टीकरण अमेरिका में काम कर रहे हज़ारों पेशेवरों के लिए बड़ी राहत की बात है जो इस नए नियम से प्रभावित होने को लेकर चिंतित हैं, इनमें बड़ी संख्या में भारतीय हैं । अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने शनिवार को एक बयान में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप का नया एच-1बी वीज़ा शुल्क केवल नये आवेदकों पर लागू होगा। ट्रंप प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 21 सितंबर की प्रभावी घोषणातिथि से पहले जमा किया गया एच1 बी वीजा आवेदन इससे प्रभावित नहीं होगा। इसके अलावा वर्तमान में अमेरिका से बाहर रहने वाले वीज़ा धारकों को भी देश में दोबारा प्रवेश के लिए शुल्क का भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने बताया, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी कामगारों को प्राथमिकता देने का वादा किया था और यह समझदारी भरा कदम उसी का परिणाम है। उन्होंने कहा, ‘‘यह उन अमेरिकी व्यवसायों को भी निश्चितता प्रदान करता है जो वास्तव में हमारे महान देश में बेहद कुशल कामगारों को लाना चाहते हैं, लेकिन प्रणाली की गड़बड़ी के कारण उन्हें आगे नहीं आने दिया जा रहा है।'' व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क एकमुश्त है जो केवल नये आवेदन पर लागू होता है। ‘‘यह केवल नए वीज़ा पर लागू होता है, नवीनीकरण या मौजूदा वीज़ा धारकों पर नहीं...।'' यूएससीआईएस निदेशक जोसेफ एडलो ने एक ज्ञापन में कहा कि ट्रंप की ओर से शुक्रवार को जारी की गई घोषणा केवल उन पर लागू होगी जो अब आवेदन करेंगे। यह घोषणा उन लोगों पर लागू नहीं होती है जो "उद्घोषणा की प्रभावी तिथि से पहले दायर किये गये आवेदनों के लाभार्थी हैं, वर्तमान में स्वीकृत आवेदनों के लाभार्थी हैं, या जिनके पास वैध रूप से जारी एच-1बी गैर-आप्रवासी वीज़ा हैं।
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न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत एच1बी वीजा शुल्क को सालाना 100,000 अमेरिकी डॉलर तक बढ़ा दिया जाएगा। ट्रंप के इस कदम से अमेरिका में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
व्हाइट हाउस के स्टाफ सचिव विल शार्फ ने कहा कि एच1बी गैर-प्रवासी वीजा कार्यक्रम देश की वर्तमान आव्रजन प्रणाली में "सबसे अधिक दुरुपयोग की जाने वाली वीजा" प्रणालियों में से एक है। उन्होंने कहा कि इससे उन उच्च कुशल कामगारों को अमेरिका में आने की अनुमति दी जाती है जो उन क्षेत्रों में काम करते हैं जहां अमेरिकी काम नहीं करते। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि 100,000 डॉलर का शुल्क यह सुनिश्चित करने के लिए लगाया गया है कि देश में लाए जा रहे लोग “वास्तव में अत्यधिक कुशल” हों और अमेरिकी कामगारों का स्थान नहीं लें। इस कदम का उद्देश्य अमेरिकी कामगारों की सुरक्षा और यह सुनिश्चित करना है कि कंपनियों के लिए ‘वास्तव में असाधारण लोगों' को नियुक्त करने और उन्हें अमेरिका लाने का रास्ता साफ हो। ट्रंप ने वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक की मौजूदगी में ओवल ऑफिस में घोषणापत्र पर हस्ताक्षर करते हुए कहा, ‘‘ हमें कामगारों की जरूरत है, हमें बेहतरीन कामगारों की जरूरत है और इससे यह सुनिश्चित होगा की ऐसा ही हो।'' लुटनिक ने कहा कि रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड कार्यक्रम के तहत प्रति वर्ष 281,000 लोगों को प्रवेश मिलता है, तथा वे लोग औसतन प्रति वर्ष 66,000 अमेरिकी डॉलर कमाते हैं, तथा सरकारी सहायता कार्यक्रमों में शामिल होने की उनकी संभावना पांच गुना अधिक होती है। उन्होंने कहा, ‘‘ तो हम निचले चतुर्थक (बॉटम क्वार्टाइल) वर्ग को, औसत अमेरिकी से नीचे दर्जे पर भर्ती कर रहे थे। यह अतार्किक था, दुनिया का एकमात्र देश जो निचले चतुर्थक वर्ग को भर्ती कर रहा था।'' लुटनिक ने कहा,‘‘ हम ऐसा करना बंद करने जा रहे हैं। हम शीर्ष पर केवल असाधारण लोगों को ही लेंगे न कि उन लोगों को जो अमेरिकियों से नौकरियां छीनने की कोशिश कर रहे हैं। वे व्यवसाय शुरू करेंगे और अमेरिकियों के लिए नौकरियां पैदा करेंगे। और इस कार्यक्रम के तहत अमेरिका के खजाने के लिए 100 अरब अमेरिकी डॉलर से ज़्यादा धनराशि जुटाई जाएगी।'' ट्रंप ने कहा कि देश इस राशि का इस्तेमाल करों में कटौती और कर्ज चुकाने में करेगा। ट्रंप ने कहा, ‘‘ हमें लगता है कि यह बहुत सफल होगा।'' लुटनिक ने कहा कि 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क सालाना लिया जाएगा।
इस कदम का उन भारतीय कर्मचारियों पर गहरा असर पड़ेगा जिन्हें प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनी और अन्य कंपनियां एच1बी वीजा पर नियुक्त करती हैं। ये वीज़ा तीन साल के लिए वैध होते हैं और इन्हें अगले तीन साल के लिए नवीनीकृत किया जा सकता है। -
लॉस एंजिलिस. ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित गीतकार ब्रेट जेम्स का नॉर्थ कैरोलिना में एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया। वह 57 वर्ष के थे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अमेरिका के ‘फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए)' ने प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा कि तीन लोगों को लेकर जा रहा छोटा विमान बृहस्पतिवार दोपहर को फ्रैंकलिन के जंगलों में ‘अज्ञात परिस्थितियों में' दुर्घटनाग्रस्त हो गया। नॉर्थ कैरोलिना राज्य राजमार्ग गश्ती दल ने एक बयान में कहा कि इस हादसे में कोई भी जीवित नहीं बचा।
एफएए के अनुसार, जेम्स एक सिरस एसआर22टी विमान में सवार थे, जो उनके कानूनी नाम ब्रेट जेम्स कॉर्नेलियस के नाम से पंजीकृत था। यह पता नहीं चल पाया है कि वह पायलट थे या नहीं। गश्ती दल ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की। जेम्स को 2020 में ‘नैशविले सॉन्ग राइटर्स हॉल ऑफ फ़ेम' में शामिल किया गया था। संगठन ने एक ऑनलाइन बयान पोस्ट कर शोक व्यक्त किया। उन्हें अन्य सम्मानों के अलावा, 2006 में सर्वश्रेष्ठ देशी गीत के लिए ग्रैमी पुरस्कार मिला था। जेम्स की ऑनलाइन ग्रैंड ओले ओप्री जीवनी के अनुसार, उनके 500 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए गए थे। -
ब्रसेल्स. यूरोप में ‘चेक-इन' और ‘बोर्डिंग प्रणाली' को निशाना बनाकर किए गए एक साइबर हमले से हवाई यातायात बाधित हुआ जिससे यूरोप के कुछ शीर्ष हवाई अड्डों पर यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। ब्रसेल्स हवाई अड्डे की तरफ से बताया गया कि इस हमले का मतलब है कि वहां केवल हस्तचालित माध्यम से ‘चेक-इन' और ‘बोर्डिंग' ही संभव थी, और इस घटना का उड़ान कार्यक्रमों पर ‘बड़ा प्रभाव' पड़ रहा है। एक बयान में कहा गया, ‘‘शुक्रवार रात 19 सितंबर को चेक-इन और बोर्डिंग प्रणाली के सेवा प्रदाता के खिलाफ एक साइबर हमला हुआ, जिससे ब्रसेल्स हवाई अड्डे सहित कई यूरोपीय हवाई अड्डे प्रभावित हुए।'' बर्लिन के ब्रैंडेनबर्ग हवाई अड्डे के अधिकारियों ने कहा कि यात्री प्रबंधन प्रणाली से जुड़े एक सेवा प्रदाता पर शुक्रवार शाम को (साइबर) हमला हुआ, जिससे हवाई अड्डा संचालकों को प्रणाली से कनेक्शन काट देना पड़ा। यूरोप के सबसे व्यस्त लंदन स्थित हीथ्रो हवाई अड्डे ने कहा कि एक तकनीकी समस्या के कारण चेक-इन और बोर्डिंग प्रणाली से जुड़ा एक सेवा प्रदाता प्रभावित हुआ। हीथ्रो ने एक बयान में कहा, ‘‘कोलिन्स एरोस्पेस, जो दुनिया भर के कई हवाई अड्डों पर कई एयरलाइन के लिए चेक-इन और बोर्डिंग प्रणाली प्रदान करता है, एक तकनीकी समस्या का सामना कर रहा है जिससे रवाना होने वाले यात्रियों को देरी हो सकती है।'' हवाई अड्डों ने यात्रियों को उनकी उड़ान की स्थिति जांचने की सलाह दी है और किसी भी असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया। वर्ष 2018 में स्थापित, कोलिन्स एक अमेरिकी विमानन और रक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी है जो आरटीएक्स कॉर्प की सहायक कंपनी है, जिसे पहले रेथियॉन टेक्नोलॉजीज के नाम से जाना जाता था। कंपनी की प्रणाली यात्रियों के लिए सीधे चेक-इन की सुविधा प्रदान नहीं करती है, बल्कि ऐसी तकनीक प्रदान करती है जिससे यात्री एक कियोस्क से स्वयं चेक-इन कर सकते हैं, बोर्डिंग पास और बैग टैग प्रिंट कर सकते हैं तथा अपना सामान स्वयं भेज सकते हैं। लंदन के दूसरे सबसे व्यस्त हवाई अड्डे ‘गैटविक' के पास स्थित कोलिन्स के ब्रिटिश बेस पर टिप्पणी के लिए अभी कोई उपलब्ध नहीं था।
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काठमांडू. नेपाली सेना की सुरक्षा में नौ दिन बिताने के बाद अपदस्थ प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली सैन्य बैरक से निकलकर एक निजी आवास चले गए। ‘जेन-जेड' का विरोध प्रदर्शन हिंसक होते ही ओली बैरक में चले गए थे और उन्होंने नौ सितंबर को पद छोड़ दिया था। यह बैरक संभवतः काठमांडू के उत्तर में शिवपुरी वन क्षेत्र में है।
‘जेन जेड' उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है।नेपाल सेना के सूत्रों ने पुष्टि की है कि नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) (सीपीएन-यूएमएल) के अध्यक्ष नौ दिन सेना की सुरक्षा में रहने के बाद एक निजी स्थान पर चले गए हैं। हालांकि अभी उनके रहने के स्थान की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। मीडिया की खबरों के अनुसार, ओली काठमांडू से 15 किलोमीटर पूर्व में भक्तपुर जिले के गुंडू इलाके में एक निजी घर में रहने चले गए हैं। विरोध प्रदर्शन के दूसरे दिन नौ सितंबर को ‘जेन जेड' प्रदर्शनकारियों ने भक्तपुर के बालकोट में उनके आवास को जलाकर राख कर दिया था। ‘जेन जेड' प्रदर्शनकारियों द्वारा नौ सितंबर को ही बालकोट में प्रधानमंत्री कार्यालय को आंशिक रूप से जला दिया था और उस समय ओली नेपाल के प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर थे। हालांकि नेपाल की सेना की मदद से ओली सुरक्षित बच निकले और सेना ने उन्हें बचाने के लिए एक हेलीकॉप्टर भेजा था। -
ह्यूस्टन/ भारत और अमेरिका ने वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में अंतरिक्ष साझेदारी के नए चरण की शुरुआत का संकेत दिया, जहां अधिकारियों और अंतरिक्ष यात्रियों ने इस पर जोर दिया कि कैसे दशकों का सहयोग अब चंद्रमा और मंगल मिशनों का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। ‘‘भारत-अमेरिका अंतरिक्ष साझेदारी : भविष्य की भागीदारी की सीमाएं'' शीर्षक से यह कार्यक्रम सोमवार को इंडिया हाउस में आयोजित हुआ। इसमें हाल की उपलब्धियों का जश्न मनाया गया, जिनमें नासा-इसरो के संयुक्त निसार उपग्रह और एक्सिओम मिशन-4 शामिल हैं, जिसने भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचाया। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने इस साझेदारी को ‘‘वैज्ञानिक अन्वेषण, प्रौद्योगिकी विकास और वाणिज्यिक सहयोग को आगे बढ़ाने वाला एक गतिशील मंच'' बताया। उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम कम लागत में नवोन्मेष में एक वैश्विक अग्रणी के रूप में उभरा है और अमेरिका के साथ संयुक्त प्रयास आने वाले दशकों में मानव अंतरिक्ष उड़ानों की सीमाओं को और आगे ले जा सकते हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की अर्थ साइंस डिवीजन की निदेशक डॉ. कैरन सेंट जर्मेन ने निसार मिशन को ‘‘अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक आदर्श उदाहरण'' बताया, जिसने यह दिखाया कि विशेषज्ञता के सहयोग से कैसे वैज्ञानिक उपलब्धियों को आगे बढ़ाया जा सकता है। कार्यक्रम में नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स, निक हेग और बुच विलमोर के साथ शुभांशु शुक्ला भी वर्चुअल रूप से शामिल हुए। शुक्ला ने कहा कि उनकी यात्रा ‘‘अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की शक्ति और वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती भूमिका का प्रमाण है।'' दूतावास की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कार्यक्रम में सरकार, अंतरिक्ष एजेंसियों, उद्योग, शिक्षाविदों और विचारक समूहों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- मॉस्को.।'' रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जन्मदिन की बधाई दी और भारत एवं रूस के बीच साझेदारी को मजबूत करने में उनके ‘विपुल व्यक्तिगत योगदान' की सराहना की। पुतिन ने रूसी मंत्रिमंडल के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में कहा,‘‘मैंने अभी-अभी भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी से बात की। मैंने आप सभी की ओर से हमारे मित्र, भारत के प्रधानमंत्री को उनके 75वें जन्मदिन पर बधाई दी।'' पुतिन ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी की सरकार पूरी तरह से स्वतंत्र और संप्रभु नीति पर चल रही है। और, इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आर्थिक क्षेत्र में उत्कृष्ट परिणाम हासिल कर रही है।'' टेलीविजन पर प्रसारित खबर में पुतिन ने ‘‘दोनों देशों में द्विपक्षीय मैत्रीपूर्ण संबंधों पर राष्ट्रीय सहमति" का उल्लेख किया, जो विभिन्न दलीय सीमाओं से ऊपर है। पुतिन ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों से कहा, ‘‘मैं यह बताना चाहूंगा कि आधुनिक और समकालीन इतिहास में, सटीक रूप से कहें तो, सोवियत संघ के समय से लेकर नए रूस के युग तक, भारत और रूस के बीच संबंध असाधारण रूप से भरोसेमंद और मैत्रीपूर्ण रहे हैं।'' उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार मास्को और नयी दिल्ली के बीच मैत्री की नीति को जारी रख रही है और उसका विस्तार कर रही है। अपने कैबिनेट सहयोगी को यह बताने के बाद कि उन्होंने “आप सभी की ओर से” मोदी को बधाई दी, पुतिन ने कहा, “और उनकी (मोदी की) ओर से, मैं पूरे रूसी नेतृत्व को शुभकामनाएं देना चाहता हूं।” इस बातचीत के बाद मोदी ने कहा कि भारत दोनों देशों के बीच विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मोदी ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया, ‘‘मेरे 75वें जन्मदिन पर आपके फोन कॉल और हार्दिक शुभकामनाओं के लिए मेरे दोस्त राष्ट्रपति पुतिन आपको धन्यवाद।'' उन्होंने लिखा, ‘‘हम अपनी विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए हर संभव योगदान देने को तैयार है।''
- मॉस्को/लंदन।. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सहित कई विश्व नेताओं ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके 75वें जन्मदिन पर बधाई दी। प्रधानमंत्री मोदी का जन्म 17 सितंबर, 1950 को गुजरात के वडनगर के एक छोटे से कस्बे में हुआ था।रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मोदी को जन्मदिन पर बधाई दी और मॉस्को तथा नयी दिल्ली के बीच साझेदारी को मज़बूत करने में उनके ‘‘अत्यंत व्यक्तिगत योगदान'' की सराहना की। क्रेमलिन वेबसाइट पर प्रकाशित एक संदेश में रूसी नेता ने कहा, ‘‘आपने सरकार के प्रमुख के रूप में अपने कार्यों के माध्यम से अपने देशवासियों का उच्च सम्मान और विश्व मंच पर अत्यधिक अधिकार अर्जित किया है।'' उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत ने सामाजिक, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में भी प्रभावशाली उपलब्धियां हासिल की हैं। पुतिन ने कहा, ‘‘आप हमारे देशों के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने तथा विभिन्न क्षेत्रों में पारस्परिक रूप से लाभकारी रूसी-भारतीय सहयोग विकसित करने में बड़ा व्यक्तिगत योगदान दे रहे हैं।'' इससे एक दिन पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया तथा उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। इसे शुल्क (टैरिफ) के मुद्दे पर दोनों देशों के मध्य तनाव के बीच भारत के साथ संबंध सुधारने के अमेरिकी प्रयासों के हिस्से के रूप में एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि मोदी बहुत अच्छा काम कर रहे हैं और उन्होंने यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने में प्रधानमंत्री के सहयोग के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें ‘‘अच्छा मित्र'' बताया। उन्होंने कहा, ‘‘आपने अपने जीवन में भारत के लिए बहुत कुछ किया है, और हमने मिलकर भारत और इज़राइल की दोस्ती में बहुत कुछ हासिल किया है।'' ‘डीडी न्यूज' द्वारा ‘एक्स' पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में इजराइली प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं आपसे जल्द ही मिलने की उम्मीद करता हूं, क्योंकि हम अपनी साझेदारी और दोस्ती को और भी ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं। जन्मदिन मुबारक हो मेरे दोस्त।'' एक वीडियो संदेश में माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने प्रधानमंत्री के ‘‘अच्छे स्वास्थ्य और निरंतर शक्ति'' की कामना की और कहा कि वह भारत की ‘‘शानदार प्रगति'' का नेतृत्व कर रहे हैं और ‘वैश्विक विकास'' में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गेट्स फाउंडेशन भारत सरकार के साथ हमारी साझेदारी को बहुत महत्व देता है।उन्होंने कहा, ‘‘हम सब मिलकर विकसित भारत की दिशा में प्रगति का समर्थन कर रहे हैं और वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए सीख और नवाचार साझा कर रहे हैं।'' भारतीय मूल के पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने कहा कि ‘‘प्रधानमंत्री मोदी को उनके 75वें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है।'' उन्होंने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘इस अनिश्चित समय में, हम सभी को अच्छे दोस्तों की जरूरत है और मोदी जी हमेशा मेरे और ब्रिटेन के अच्छे दोस्त रहे हैं। मुझे ब्रिटेन-भारत संबंधों को लगातार मजबूत होते देखकर खुशी हो रही है।'' उन्होंने कहा, ‘‘एक ब्रिटिश-भारतीय परिवार से होने के नाते, इस रिश्ते का मेरे दिल में हमेशा एक खास स्थान रहेगा।'' उन्होंने कहा कि वह जी20 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री के रूप में 2023 की अपनी भारत यात्रा को ‘‘स्नेहपूर्वक'' याद रखेंगे। सुनक ने कहा, ‘‘यह विश्व मंच पर भारत की प्रतिष्ठा के अनुरूप एक शानदार आयोजन था। मोदी जी, मैं आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं और जल्द ही आपसे मिलने के लिए उत्सुक हूं।'' मोदी को शुभकामनाएं देते हुए आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि उनके देश को भारत के साथ इतनी मजबूत मित्रता साझा करने पर गर्व है। उन्होंने कहा, ‘‘हम आस्ट्रेलिया में भारतीय समुदाय के योगदान के लिए आभारी हैं।'' भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके ‘‘अच्छे स्वास्थ्य, खुशहाली और दीर्घायु'' की कामना की। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन, म्यांमा के राष्ट्रपति मिन आंग हलिंग, गुयाना के राष्ट्रपति इरफान अली और डोमिनिका के प्रधानमंत्री रूजवेल्ट स्केरिट सहित अन्य नेताओं ने भी मोदी को जन्मदिन पर शुभकामनाएं दीं।
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काठमांडू. नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नवनियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की से यहां सिंह दरबार स्थित उनके कार्यालय में मंगलवार को मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बधाई संदेश दिया। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने ‘एक्स' पर पोस्ट किया कि राजदूत श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री मोदी की ओर से अपने नेपाली समकक्ष को अंतरिम सरकार की नेता के रूप में उनकी नियुक्ति पर दिया गया बधाई संदेश दिया। अपने बधाई संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘‘दोनों पड़ोसी देशों के बीच सहयोग और मैत्री के घनिष्ठ संबंधों को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने की भारत की प्रतिबद्धता व्यक्त की।" कार्की रविवार को नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। इसके साथ ही, भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर सरकारी प्रतिबंध को लेकर युवाओं के विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के इस्तीफे के पश्चात कई दिनों से जारी राजनीतिक अनिश्चितता का अंत हो गया। नयी सरकार को पांच मार्च, 2026 को नया चुनाव कराना है।
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- काठमांडू.। नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की ओर से नियुक्त तीन मंत्रियों को पद की शपथ दिलाई। देश की पहली महिला प्रधानमंत्री कार्की (73) ने रविवार को पदभार संभाला था। उन्होंने उसी दिन कुलमन घीसिंग, रामेश्वर खनाल और ओम प्रकाश आर्यल को अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया था। तीन मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह यहां महाराजगंज क्षेत्र में शीतल निवास स्थित राष्ट्रपति कार्यालय में आयोजित किया गया। पूर्व वित्त सचिव खनल को वित्त मंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई है, जबकि नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व प्रबंध निदेशक घीसिंग ने तीन विभागों ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई; भौतिक अवसंरचना एवं परिवहन; और शहरी विकास का कार्यभार संभाला है। पेशे से वकील आर्यल ने गृह मंत्री और विधि, न्याय एवं संसदीय मामलों के मंत्री के रूप में शपथ ली है।शपथ ग्रहण समारोह के तुरंत बाद, उन्होंने अपने-अपने पदभार ग्रहण कर लिए।सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जेन जेड' समूह के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली ने गत मंगलवार को इस्तीफा दे दिया जिससे पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता कार्की द्वारा 12 सितंबर को शपथ लिए जाने साथ ही समाप्त हो गई थी। ओली के इस्तीफे की मांग करते सैकड़ों प्रदर्शनकारियों द्वारा उनके कार्यालय में घुस जाने के कुछ ही देर बाद मंगलवार को उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। देशव्यापी विरोध प्रदर्शन में कम से कम 72 लोग मारे गए हैं। ‘जेन जेड' उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है। यह वह युवा वर्ग है जो तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ा हुआ है। इन्हें डिजिटल नेटिव्स भी कहा जाता है क्योंकि ये लोग आधुनिक प्रौद्योगिकी के तहत अने वाले स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग में महारथ रखते हैं।
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ह्यूस्टन/न्यूयॉर्क. । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय मूल के होटल प्रबंधक चंद्र मौली ‘बॉब' नागमल्लैया को एक ‘‘सम्मानित व्यक्ति'' बताया, जिनकी पिछले सप्ताह डलास में सिर कलम कर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। ट्रंप ने कहा कि अपराधी पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। ट्रंप ने कहा कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ ‘फर्स्ट-डिग्री मर्डर' का मुकदमा चलाया जाएगा।
टेक्सास प्रांत में 10 सितंबर को ‘डाउनटाउन सुइट्स' होटल में वॉशिंग मशीन को लेकर हुए विवाद के बाद, मूल रूप से कर्नाटक निवासी चंद्र मौली ‘बॉब' नागमल्लैया की उनके सहकर्मी योर्डानिस कोबोस-मार्टिनेज (37) ने उनकी पत्नी और बेटे के सामने सिर कलम कर हत्या कर दी थी। इस घटना पर अपनी पहली प्रतिक्रिया में ट्रंप ने जो बाइडन नीत पूर्ववर्ती सरकार की आव्रजन नीतियों की कड़ी आलोचना की और हमलावर को ‘‘अवैध अप्रवासी'' बताया, जिसे उनके अनुसार देश से पहले ही निकाल देना चाहिए था। ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट कर कहा, ‘‘टेक्सास के डलास में चंद्र नागमल्लैया की हत्या की भयावह खबर मिली। वह एक सम्मानित व्यक्ति थे, जिन्हें उनकी पत्नी और बेटे के सामने बेरहमी से मार दिया गया। यह हत्या क्यूबा से आए एक अवैध प्रवासी ने की, जिसे कभी हमारे देश में होना ही नहीं चाहिए था।” उन्होंने आगे कहा कि पुलिस हिरासत में मौजूद इस अपराधी पर “कानून के अनुसार सबसे सख्त कार्रवाई की जाएगी और उस पर ‘फर्स्ट-डिग्री मर्डर' का मुकदमा चलेगा।” ट्रंप ने बताया कि आरोपी पहले भी बच्चों के यौन शोषण, कार चोरी और जबरन बंधक बनाने जैसे गंभीर अपराधों में गिरफ्तार हो चुका है। उन्होंने कहा कि क्यूबा ने इस ‘‘खतरनाक अपराधी'' को अपने देश में वापस लेने से इनकार कर दिया जिसके बाद उसे अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क विभाग (आईसीई) की हिरासत से रिहा कर दिया गया। ट्रंप ने इसके लिए पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन को जिम्मेदार ठहराया और कहा, “निश्चित रहें, मेरे कार्यकाल में इन अवैध प्रवासी अपराधियों के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी। गृह मंत्री क्रिस्टी नोएम, अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी, बॉर्डर प्रमुख टॉम होमन और मेरी सरकार के कई अन्य लोग अमेरिका को फिर से सुरक्षित बनाने के लिए बेहद प्रभावी तरीके से काम कर रहे हैं।” सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने नागमल्लैया की हत्या पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि यह घटना बेहद चौंकाने वाली है। उन्होंने कहा कि नागमल्लैया एक मेहनती भारतीय-अमेरिकी नागरिक थे। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी गहरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं। अपराधी को कानून के अनुसार सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।'' - काठमांडू. नेपाल में पिछले सप्ताह हुए सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान विभिन्न जेलों से भागे 3,700 से अधिक कैदियों को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता, उप महानिरीक्षक (डीआईजी) बिनोद घिमिरे ने बताया कि रविवार दोपहर तक 3,723 कैदियों को वापस जेलों में लाया जा चुका है। हालांकि, उन्होंने 10,320 कैदियों के अब भी फरार रहने के मद्देनजर लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। उप महानिरीक्षक ने बताया कि कुछ कैदी स्वेच्छा से लौट आए, जबकि भारतीय पुलिस ने भारत में प्रवेश करने की कोशिश करने वालों को गिरफ्तार करने में मदद की। डीआईजी घिमिरे ने बताया कि नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल जेल से फरार हुए कैदियों को गिरफ्तार करने के लिए अभियान चला रहे हैं।
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काठमांडू. नेपाल के प्रमुख राजनीतिक दलों और वकीलों के शीर्ष निकाय ने राष्ट्रपति के संसद भंग करने के फैसले की कड़ी आलोचना की और इस कदम को ‘‘असंवैधानिक, मनमाना'' तथा लोकतंत्र के लिए एक गंभीर झटका बताया है। यह आलोचना शुक्रवार को अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की अध्यक्षता में पहली कैबिनेट बैठक में प्रतिनिधि सभा को भंग करने की सिफारिश किए जाने और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा इसे तुरंत मंजूरी दिए जाने के बाद आई। राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक नोटिस के अनुसार, प्रतिनिधि सभा 12 सितंबर, 2025 की रात 11 बजे से भंग हो गई है। इसमें कहा गया कि राष्ट्रपति ने नए संसदीय चुनाव कराने की तारीख 21 मार्च, 2026 तय की है। सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने संसद भंग करने के इस कदम की निंदा की है।
इस कदम को अस्वीकार करते हुए, देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी, नेपाली कांग्रेस ने चेतावनी दी कि संविधान का उल्लंघन करने वाली कोई भी कार्रवाई अस्वीकार्य होगी। समाचार पोर्टल ‘माय रिपब्लिका' की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को नेपाली कांग्रेस की केंद्रीय कार्यकारी समिति की बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि संसद भंग करने के फैसले ने देश की लोकतांत्रिक उपलब्धियों को खतरे में डाल दिया है।'' नेपाली कांग्रेस के महासचिव विश्व प्रकाश शर्मा ने कहा कि संविधान का कोई भी उल्लंघन गंभीर सवाल खड़े करता है। सीपीएन-यूएमएल के महासचिव शंकर पोखरेल ने इस कदम को ‘'चिंताजनक'' बताया।
नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेता के हवाले से समाचार पोर्टल ने कहा, ‘‘अतीत में, संसद को भंग करने के अधिकतर सरकारों के प्रयासों को असंवैधानिक बताकर चुनौती दी गई थी। विडंबना यह है कि वही आवाजें अब संसद को भंग करने का समर्थन कर रही हैं। हमें सतर्क रहना चाहिए।'' सीपीएन (माओवादी केंद्र) ने भी प्रतिनिधि सभा को भंग करने के फैसले पर असहमति व्यक्त की।
पार्टी प्रवक्ता और उपाध्यक्ष अग्नि प्रसाद सपकोटा ने कहा कि यह फैसला देश के संवैधानिक ढांचे के खिलाफ है। नेपाल बार एसोसिएशन (एनबीए) ने शुक्रवार देर रात एक बयान में कहा कि ‘‘मनमाने'' तरीके से संसद को भंग करना संवैधानिक सर्वोच्चता को कमजोर करता है और संविधानवाद के मूल पर प्रहार करता है।
- नई दिल्ली। रूस के कामचटका क्षेत्र के पूर्वी तट के पास आज सुबह 7.4 तीव्रता का एक ज़बरदस्त भूकंप आया। इसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई। संयुक्त राज्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार, भूकंप कामचटका क्षेत्र के प्रशासनिक केंद्र, पेट्रोपावलोव्स्क-कामचत्स्की से 111 किलोमीटर पूर्व में, 39. 5 किलोमीटर की गहराई पर आया। भूकंप के बाद, कामचटका क्षेत्र के स्थानीय अधिकारियों ने सुनामी की चेतावनी जारी की। इस बीच, जापान मौसम विज्ञान एजेंसी के हवाले से, जापानी आधिकारिक मीडिया ने बताया कि कामचटका में आए भूकंप से जापान के तट पर मामूली ज्वार-भाटा आ सकता है, लेकिन देश में किसी तरह के नुकसान का खतरा नहीं है।
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काठमांडू | नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने नेपाल के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल द्वारा शपथ दिलाई गई। यह कदम प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद उठाया गया है, जिन्होंने युवाओं के नेतृत्व में चल रहे बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों के कारण पद छोड़ा। शपथ ग्रहण समारोह आज शाम 8:45 बजे स्थानीय समय पर राष्ट्रपति भवन शीतल निवास में आयोजित हुआ। प्रमुख राजनीतिक दलों और विरोध प्रदर्शन करने वाले समूहों के बीच बनी आम सहमति के बाद नेपाली राष्ट्रपति कार्यालय ने शुक्रवार को उनके नाम का ऐलान किया। इसके बाद कार्की ने शुक्रवार रात को ही पद की पद की शपथ ली।
नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की इससे पहले जुलाई 2016 में तब सुर्खियों में आईं जब वह नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं थीं। बता दें कि सुशीला कार्की का चयन जन-जेड आंदोलन के युवाओं ने किया, जिन्होंने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को गिराया था। उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डिस्कॉर्ड पर हुई वोटिंग में सबसे अधिक समर्थन मिला।कार्की का चयन नेपाल की राजनीति में सहमति का दुर्लभ क्षण माना जा रहा है। उन्हें न केवल युवाओं का बल्कि परंपरागत राजनीतिक दलों का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। उनका लक्ष्य व्यवस्था बहाल करना, चुनाव कराना और नेपाल के विकास को गति देना है। उन्हें न्यायपालिका में स्वतंत्रता बनाए रखने और ईमानदारी के लिए जाना जाता है। सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को बिराटनगर के शंकरपुर में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और 1978 में त्रिभुवन विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई पूरी की। 1979 से वकालत शुरू करने के बाद उन्होंने कोशी जोनल बार एसोसिएशन और बिराटनगर अपीलीय बार की अध्यक्षता की। 2009 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 2016 में वह पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई बड़े भ्रष्टाचार मामलों पर सख्त फैसले सुनाए।हालांकि उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नेपाली कांग्रेस कोटे से लाया गया था, लेकिन उनके सहयोगियों का कहना है कि उन्होंने हमेशा स्वतंत्रता बनाए रखी और कभी राजनीतिक दबाव में नहीं आईं। 2017 में उनके खिलाफ तत्कालीन शेरबहादुर देउबा सरकार द्वारा महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, जिसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई माना गया क्योंकि वह उस समय पुलिस प्रमुख की नियुक्ति पर फैसला देने वाली थीं। कार्की को साहसी और ईमानदार नेता माना जाता है। उनका जीवन सादा और गांधीवादी है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज आनंद मोहन भट्टाराय ने कहा कि कार्की और उनके पति दुर्गा सुबेदी ने नेपाल के लोकतांत्रिक आंदोलन में अहम योगदान दिया है। दुर्गा सुबेदी कांग्रेस नेता हैं और 1973 में हुए एक विमान अपहरण में शामिल रहे थे, जिसे पंचायती शासन विरोधी आंदोलन को सहयोग देने के लिए किया गया था।वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता बिपिन अधिकारी का कहना है कि सुशीला कार्की हमेशा से ईमानदार रही हैं और अब उन्हें सरकार चलाने के लिए एक मजबूत टीम की आवश्यकता होगी। हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि नई पीढ़ी की सोच के साथ तालमेल बिठाना उनके लिए मुश्किल हो सकता है, लेकिन उनके समर्थकों का विश्वास है कि वह संक्रमण काल में लोकतांत्रिक सिद्धांतों के साथ सफल नेतृत्व करेंगी।
- काठमांडू:। नेपाल में छात्रों के नेतृत्व में हाल ही में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान देशभर में लगभग दो दर्जन होटल में तोड़फोड़, लूटपाट या आगजनी की घटनाएं दर्ज की गईं। इससे पर्यटन आधारित नेपाली अर्थव्यवस्था के राजस्व अर्जित करने वाले महत्वपूर्ण घटक होटल उद्योग को 25 अरब रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। शुक्रवार को प्रकाशित एक खबर में यह जानकारी दी गई है।समाचार पोर्टल 'माई रिपब्लिका' की खबर में होटल एसोसिएशन नेपाल (एचएएन) के हवाले से कहा गया है कि काठमांडू का हिल्टन होटल हिंसा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां आठ अरब रुपये से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया है।शुरुआत में तो ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया के प्रतिबंध जैसे मुद्दों को लेकर किया जा रहा था, लेकिन कुछ ही समय में इसने हिंसक रूप ले लिया, जिससे इस देश के कई हिस्सों में तोड़फोड़, आगजनी और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं. इस हिंसा और प्रदर्शन का सबसे बड़ा नुकसान नेपाल के होटल इंडस्ट्री को हुआ है. एक रिपोर्ट के अनुसार पिछसे एक सप्ताह के भीतर इस देश के होटल इंडस्ट्री को लगभग 25 अरब रुपये का भारी नुकसान हुआ है. इस हिंसक प्रदर्शन में खासकर काठमांडू, पोखरा और अन्य बड़े शहरों के होटल तबाह हो गए, जिससे हजारों लोगों की नौकरी खतरे में आ गई है.इस जेन-जी आंदोलन से सबसे ज्यादा काठमांडू का मशहूर हिल्टन होटल प्रभावित हुआ, जहां अकेले 8 अरब रुपये का नुकसान हुआ है. इसके अलावा पोखरा, बुटवल, झापा, विराटनगर जैसे शहरों के होटलों को भी भारी नुकसान हुआ. होटल एसोसिएशन नेपाल ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए इस आंदोलन में लगभग 24 होटलों को नुकसान पहुंचा है. इस नुकसान की वजह से कई होटल अभी बंद पड़े हैं और काम फिर से शुरू करने के लिए मरम्मत और इसे फिर से बनाने की जरूरत है. इतना ही नहीं उन्होंने बताया कि होटल बुकिंग में 50% की गिरावट से होटल मालिकों में भारी चिंता है.
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ह्यूस्टन. कमीशन-मुक्त व्यापार मंच रॉबिनहुड के सह-संस्थापक और भारतीय-अमेरिकी उद्यमी बैजू भट्ट को साल 2025 की फोर्ब्स 400 सूची में अमेरिका के 10 सबसे युवा अरबपतियों में शामिल किया गया है। भट्ट (40) इस प्रतिष्ठित सूची में जगह बनाने वाले भारतीय मूल के एकमात्र व्यक्ति हैं। उन्हें सोशल मीडिया कंपनी मेटा के मार्क जुकरबर्ग जैसे तकनीकी दिग्गजों के साथ फोर्ब्स 400 सूची में शामिल किया गया है। भट्ट की कुल अनुमानित संपत्ति छह से सात अरब अमेरिकी डॉलर के बीच है, जो मुख्य रूप से रॉबिनहुड में उनकी लगभग छह प्रतिशत हिस्सेदारी पर आधारित है। भट्ट के माता-पिता भारत के गुजरात राज्य से अमेरिका के वर्जीनिया प्रांत में जाकर बस गए थे। उन्होंने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से भौतिकी और गणित विषयों में उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद 2013 में व्लाद टेनेव के साथ मिलकर रॉबिनहुड की स्थापना की। इस मंच अमेरिका में खुदरा निवेश की सूरत बदल दी है, कमीशन-मुक्त व्यापार की पेशकश की है और बेहतर बचत की संभावनाएं उपलब्ध कराई हैं। फोर्ब्स 400 सूची में भट्ट का शामिल होना युवा तकनीकी उद्यमियों के उदय और अमेरिका के वित्तीय एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोगों के बढ़ते दबदबे को रेखांकित करता है।
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ह्यूस्टन. भारत के महावाणिज्य दूतावास ने शहर में प्रवासी संगठनों के सहयोग से दिल्ली के हिंदी 'रॉक फ्यूजन' बैंड 'अंतरिक्ष' का एक संगीत कार्यक्रम आयोजित किया। इस बैंड का नेतृत्व संगीतकार, गायक और गिटारवादक वरुण राजपूत कर रहे थे। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित, अंतरिक्ष-बॉलीवुड लाइव में हिंदी फिल्मों के गीतों की धुनों और वैश्विक रॉक का मिश्रण प्रस्तुत किया गया, जिसमें सांस्कृतिक कूटनीति और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने में संगीत की भूमिका को दर्शाया गया। राजपूत द्वारा 2012 में स्थापित ‘अंतरिक्ष' बैंड ने भारत में एक प्रमुख स्वतंत्र हिंदी रॉक बैंड के रूप में अपनी पहचान बनाई है। यह बैंड रॉक, जैज, फंक और विश्व संगीत को हिंदी फिल्मों के मशहूर गीतों के साथ मिश्रित करता है। इसने पूर्व मेगाडेथ गिटारवादक मार्टी फ्रीडमैन के साथ भी काम किया है। बॉलीवुड गायिकाओं शिल्पा राव और हर्षदीप कौर के साथ राजपूत की साझेदारी और ‘जी ले जरा' व ‘तस्वीरें' जैसे लोकप्रिय गीत बैंड की बहुआयामी पहचान को दर्शाते हैं। ह्यूस्टन में आयोजित इस संगीत कार्यक्रम में भारतीय-अमेरिकी प्रवासी समुदाय की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली। दर्शकों ने बैंड की ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुति और आधुनिक व शास्त्रीय संगीत के बेहतरीन मिश्रण की सराहना की। हाल ही में सिएटल में प्रस्तुति के बाद, ‘अंतरिक्ष' बैंड इस बृहस्पतिवार को डलास में अपना ‘डबल बॉलीवुड धमाका' कार्यक्रम लेकर आ रहा है।
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काठमांडू. नेपाल सरकार के लिए अंतरिम प्रमुख के चयन को लेकर गतिरोध बृहस्पतिवार को भी जारी रहा, वहीं राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शांति की अपील करते हुए कहा कि उनका लक्ष्य संवैधानिक ढांचे के भीतर राजनीतिक संकट का समाधान ढूंढना है। अंतरिम सरकार के लिए राजनीतिक बातचीत जारी रहने के बीच काठमांडू और देश के अन्य हिस्सों में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है, जहां सेना संवेदनशील इलाकों में गश्त कर रही है। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार से शुरू हुए दो दिनों के हिंसक प्रदर्शनों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों का नेतृत्व करने वाले ‘जेन जेड' के प्रतिनिधियों ने अंतरिम सरकार के संबंध में शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक की, लेकिन वार्ता में इस मुद्दे पर गतिरोध उत्पन्न हो गया कि इसका नेतृत्व कौन करेगा। वर्ष 1997 से लेकर 2012 तक के बीच जन्में युवाओं को प्राय: ‘जेन जेड' पीढ़ी के नाम से जाना जाता है।
सूत्रों ने बताया कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश सुशीला कार्की, काठमांडू के महापौर बालेन्द्र शाह, नेपाल विद्युत प्राधिकरण के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कुलमन घीसिंग और धरान के महापौर हरका उन लोगों में शामिल हैं, जिनके नाम पर प्रदर्शनकारी ‘जेन जेड' समूह सरकार का नेतृत्व करने के लिए विचार कर रहा है। खबरों के अनुसार, सोमवार को हिंसा शुरू होने के बाद से 25 से अधिक जेलों से 15,000 से अधिक कैदी भाग चुके हैं। नेपाल में हालात धीरे धीरे सामान्य होने के बीच सेना ने बृहस्पतिवार को काठमांडू घाटी के तीन जिलों में निषेधाज्ञा बढ़ा दी, तथा कुछ निश्चित समयावधि के लिए लोगों की आवाजाही की अनुमति दे दी। राष्ट्रपति पौडेल ने कहा, "मैं कानून-व्यवस्था बनाए रखने, लोकतंत्र की रक्षा करने और संवैधानिक ढांचे के भीतर मौजूदा राजनीतिक गतिरोध से बाहर निकलने का हरसंभव प्रयास कर रहा हूं।'' पौडेल वर्तमान में सैन्य सुरक्षा में हैं।
मंगलवार को ‘जेन जेड' के प्रदर्शनकारी समूहों द्वारा राष्ट्रपति कार्यालय और उनके निजी आवास पर आगजनी के बाद से उन्हें सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया। प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद पहली टिप्पणी में पौडेल ने कहा, "मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वे इस बात पर विश्वास रखें कि आंदोलनकारी नागरिकों की मांगों को पूरा करने के लिए समस्या का जल्द से जल्द समाधान निकाला जा रहा है और संयम के साथ देश में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।" सेना के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की कि विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत जारी है। हालांकि, उन्होंने किसी का नाम नहीं बताया। उन्होंने कहा, "हम विभिन्न हितधारकों के साथ कई दौर की बातचीत कर रहे हैं। बातचीत मुख्य रूप से मौजूदा गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता खोजने और साथ ही देश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर केंद्रित है।" सूत्रों का कहना है कि महापौर शाह ने कार्की के प्रति अपना समर्थन जताया है, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि नए मंत्रिमंडल का नेतृत्व कौन करेगा। कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्की के प्रति समर्थन जताया, जबकि कुछ ने घीसिंग के पक्ष में आवाज़ उठाई। इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि सोमवार और मंगलवार को हुए जबरदस्त विरोध प्रदर्शनों में अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश भर के अस्पतालों में 1,338 लोग भर्ती हैं, जबकि 949 को पहले ही छुट्टी दे दी गई है। अधिकारियों ने बताया कि बृहस्पतिवार को मधेस प्रांत के रामेछाप जिला जेल में कैदियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच हिंसक झड़प में तीन कैदियों की मौत हो गई और 13 अन्य घायल हो गए। मंगलवार से भड़की हिंसा के दौरान सुरक्षा बलों के साथ हुई झड़पों में मरने वाले कैदियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। अखबार ‘द काठमांडू पोस्ट' ने पुलिस के हवाले से कहा, ‘‘जेल से भागने की घटनाएं तब शुरू हुईं जब युवा प्रदर्शनकारियों ने कई जेलों में धावा बोल दिया, प्रशासनिक भवनों में आग लगा दी और जेल के दरवाज़े जबरन खोल दिए। बुधवार शाम तक प्रारंभिक रिपोर्ट से पुष्टि हुई कि 25 से ज़्यादा जेलों से 15,000 से ज़्यादा कैदी भाग गए थे, जिनमें से केवल कुछ ही स्वेच्छा से लौटे या फिर से गिरफ्तार किए गए।'' ‘जेन जेड' समूह के कुछ नेताओं ने काठमांडू में एक प्रेस वार्ता आयोजित की, जहां उन्होंने कहा कि संसद को भंग कर देना चाहिए और जनता की इच्छा के अनुरूप संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए। उन्होंने बातचीत और सहयोग के ज़रिए समाधान निकालने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने पुराने राजनीतिक दलों को चेताया कि वे अपने निहित स्वार्थों के लिए उनका इस्तेमाल न करें। एक कार्यकर्ता ने कहा, "यह पूरी तरह से नागरिक आंदोलन है, इसलिए इसमें राजनीति करने की कोशिश न करें।" कार्यकर्ता दिवाकर दंगल ने कहा, "हमारे सामने राष्ट्रीय संप्रभुता, एकता की रक्षा और आत्म-सम्मान बनाए रखने की चुनौती है। हम सभी नेपालियों को इस मुश्किल हालात में नेपाली जनता के कल्याण और हितों की रक्षा के लिए एकजुट होना चाहिए।" एक कार्यकर्ता ने कहा कि संसद को भंग कर देना चाहिए और लोगों की भावना के अनुसार संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमारा संविधान को ख़त्म करने का कोई इरादा नहीं है, लेकिन हम चाहते हैं कि लोगों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ बड़े संशोधन किए जाएं।" एक कार्यकर्ता ने कहा, "हम सरकार में भाग नहीं लेंगे, बल्कि एक प्रहरी बने रहना चाहते हैं।"
कर्फ्यू हटते ही लोग ज़रूरी सामान खरीदने के लिए बाज़ारों, दुकानों और किराने की दुकानों की ओर दौड़ पड़े। सड़कों पर इक्का-दुक्का वाहन ही दिखे। बृहस्पतिवार शाम 7 बजे से शुक्रवार सुबह 6 बजे तक रात्रि कर्फ्यू लागू रहेगा। देश भर में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद मंगलवार रात से सुरक्षा का नियंत्रण अपने हाथ में लेने वाली सेना ने चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, तोड़फोड़, आगजनी या व्यक्तियों और संपत्ति पर हमले को आपराधिक कृत्य माना जाएगा और उसके अनुसार ही निपटा जाएगा। काठमांडू के कुछ हिस्सों में प्रदर्शन कर रहे प्रमुख दलों के छात्रों के एक छोटे समूह ने चेतावनी दी है कि नयी सरकार के गठन के समय संविधान को संरक्षित किया जाना चाहिए तथा लोकतंत्र और मानवाधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। आव्रजन विभाग ने एक नोटिस में कहा कि जिन लोगों का वीजा आठ सितंबर के बाद समाप्त हो गया है और वे नेपाल में रह रहे हैं, वे बिना किसी शुल्क के निकास परमिट प्राप्त कर सकते हैं। नोटिस में कहा गया है, "जिन विदेशी नागरिकों का वीजा आ सितंबर तक वैध था और जिन्हें कर्फ्यू अवधि के दौरान प्रस्थान करना आवश्यक है, उन्हें संबंधित प्रस्थान बिंदुओं पर आव्रजन कार्यालयों से अतिरिक्त शुल्क के बिना वीजा नियमितीकरण और निकास की अनुमति दी जाएगी।" इसी प्रकार, उन विदेशी नागरिकों के लिए भी वीजा हस्तांतरण की आवश्यक व्यवस्था की गई है, जिन्होंने अशांति के दौरान अपना पासपोर्ट खो दिया और अपने संबंधित दूतावासों से यात्रा दस्तावेज या आपातकालीन पासपोर्ट प्राप्त कर लिया है। नेपाल के केंद्रीय बैंक, नेपाल राष्ट्र बैंक ने सभी वाणिज्यिक बैंकों को पूर्वाह्न 10 बजे से दोपहर दो बजे तक ग्राहकों के लिए अपनी सेवाएं बहाल करने का निर्देश दिया है। ‘जेन जेड' समूह के प्रदर्शन के कारण बैंक बंद रहे। नेपाल सेना ने काठमांडू से लगभग 60 किलोमीटर पूर्व में बनेपा नगर पालिका के नयाबस्ती इलाके से बरामद आठ देशी बम को नष्ट कर दिया है। सुरक्षा बलों ने देश भर की विभिन्न जेलों से भागे 166 कैदियों को काबू कर लिया है। साथ ही, देश के विभिन्न हिस्सों से 97 अवैध हथियार भी बरामद किए हैं। ये हथियार प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षाकर्मियों से कुछ लोगों ने लूटे थे। -
ओरेम (अमेरिका). अमेरिका में उताह के एक कॉलेज में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और रूढ़िवादी कार्यकर्ता चार्ली किर्क की गोली मारकर हत्या कर दी गई। किर्क अपने गैर-लाभकारी राजनीतिक संगठन ‘टर्निंग पॉइंट यूएसए' द्वारा ‘उताह वैली विश्वविद्यालय' के ‘सोरेंसन सेंटर' प्रांगण में आयोजित एक बहस में बोल रहे थे। गोलीबारी से ठीक पहले, किर्क एक दर्शक द्वारा भीड़ पर गोलीबारी करने और हिंसा के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। तभी हमलावर ने कुछ दूरी से परिसर की एक छत से गोली चलाई।
अधिकारियों का कहना है कि हमलावर चीख-पुकार और छात्रों में मची भगदड़ के बीच फरार हो गया। संघीय, राज्य और स्थानीय अधिकारी बृहस्पतिवार तड़के तक अज्ञात हमलावर की तलाश में जुटे रहे। उताह के जन सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को दो लोगों को हिरासत में लिया गया था, लेकिन किसी की भी गोलीबारी से कोई संलिप्तता नहीं पाई गई और उन्हें रिहा कर दिया गया। अधिकारियों को अभी तक इस हत्या के मकसद का पता नहीं चल पाया है लेकिन इस घटना ने अमेरिका में बढ़ती राजनीतिक हिंसा को लेकर चिंता को फिर से बढ़ा दिया है, जो पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न विचारधाराओं के लोगों के बीच देखी गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने 31 वर्षीय चार्ली किर्क की मृत्यु की खबर सोशल मीडिया पर साझा की। ट्रंप ने किर्क की प्रशंसा करते हुए उन्हें ‘‘महान व्यक्ति'' बताया। किर्क युवा संगठन 'टर्निंग प्वाइंट यूएसए' के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया, ‘‘चार्ली से बेहतर अमेरिका के युवाओं को कोई नहीं समझता था और न ही उनसे दिल से जुड़ पाता था।'' वहीं, उताह के गवर्नर स्पेंसर कॉक्स ने इस घटना को ‘‘राजनीतिक हत्या'' करार दिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे राज्य के लिए एक काला और देश के लिए एक दुखद दिन है। मैं इसे स्पष्ट रूप से एक राजनीतिक हत्या ही कहूंगा।'' सोशल मीडिया पर उपलब्ध एक वीडियो में देखा जा सकता है कि ‘उताह वैली यूनिवर्सिटी' में किर्क एक सफेद टेंट के नीचे माइक हाथ में लेकर बोल रहे थे। टेंट पर ‘‘द अमेरिकन कमबैक'' और ‘‘प्रूव मी रॉन्ग'' जैसे नारे लिखे हुए थे। तभी एक गोली चली, और किर्क को अपना दाहिना हाथ ऊपर उठाते हुए देखा गया, जबकि उनकी गर्दन के बाईं ओर से काफी खून बह रहा था। -
न्यूयॉर्क/वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता के ‘‘सफल निष्कर्ष'' पर पहुंचने में ‘‘कोई मुश्किल'' नहीं होगी और वह जल्द ही ‘‘अपने अच्छे दोस्त'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बात करेंगे। इसे भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार को ‘ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में जो बाधाएं हैं, उन्हें दूर करने के लिए बातचीत जारी है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं आने वाले हफ्तों में अपने सबसे अच्छे दोस्त, प्रधानमंत्री मोदी से बात करने के लिए उत्सुक हूं। मुझे भरोसा है कि हमारे दोनों देशों के बीच वार्ता ठीक तरह से पूरी हो जाएगी, कोई मुश्किल नहीं आएगी।'' ट्रंप की यह टिप्पणी द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण सुधार का संकेत देती है। अमेरिका की ओर से शुल्क (टैरिफ) लगाए जाने और भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर दोनों देशों के बीच संबंध दो दशकों में संभवत: सबसे खराब दौर से गुजर रहे हैं। ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क और रूसी तेल की खरीद के लिए अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क लगाया है। इससे भारत पर कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। भारत ने इन शुल्कों को ‘‘अनुचित और विवेकहीन'' बताया है।
रूसी कच्चे तेल की अपनी खरीद का बचाव करते हुए भारत का कहना है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हित और बाजार की परिस्थितियों से प्रेरित है। कई महीनों तक भारत की आलोचना करने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले हफ्ते कहा था कि दोनों देशों के बीच ‘विशेष संबंध' हैं और चिंता की कोई बात नहीं है। ट्रंप ने ‘व्हाइट हाउस' में अपने कार्यालय ‘ओवल ऑफिस' में शुक्रवार को कहा, ‘‘मैं हमेशा (नरेन्द्र) मोदी का दोस्त रहूंगा... वह शानदार प्रधानमंत्री हैं लेकिन मुझे इस समय उनके द्वारा किए जा रहे काम पसंद नहीं आ रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच विशेष संबंध है, चिंता की कोई बात नहीं है। बस कभी-कभी कुछ ऐसे पल आ जाते हैं।'' इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को कहा कि वह भारत-अमेरिका संबंधों के सकारात्मक आकलन के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सराहना करते हैं। मोदी ने कहा, "हम राष्ट्रपति ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों को लेकर उनकी सकारात्मक राय की सराहना करते हैं और उसका पूरी तरह से समर्थन करते हैं।"
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वाशिंगटन. अमेरिका की एक संघीय अदालत ने मंगलवार को फैसला दिया कि फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक अपने पद पर बनी रह सकती हैं। यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के फेडरल रिजर्व पर नियंत्रण के प्रयासों के लिए झटका है। फेडरल रिजर्व एक स्वतंत्र संस्था है जो कम अवधि के लिए ब्याज दरें तय करती है ताकि कीमतें स्थिर रहें और ज्यादा से ज्यादा लोगों को नौकरी मिले। कुक के वकीलों ने कहा कि उन्हें हटाना गलत है क्योंकि राष्ट्रपति फेडरल गवर्नर को काम में लापरवाही, जिम्मेदारी न निभाना या पद पर रहते हुए कोई गलत काम करने जैसे ठोस कारणों से ही हटा सकते हैं। वकीलों ने यह भी कहा कि कुक को आरोपों पर जवाब देने का मौका और सुनवाई का मौका मिलना चाहिए था लेकिन उन्हें यह नहीं दिया गया। दायर याचिका में लिसा ने आरोपों से इनकार किया है लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। ट्रंप ने 25 अगस्त को कहा था कि वह कुक को हटा रहे हैं। उन्होंने कहा था कि वह कुक को इसलिए बर्खास्त कर रहे हैं क्योंकि उन पर संपत्ति ऋण धोखाधड़ी का आरोप है। कुक पर यह आरोप ऋण क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों ‘फैने मेई' और ‘फ्रेडी मैक' को नियंत्रित करने वाली एजेंसी में ट्रंप द्वारा नियुक्त बिल पुल्टे ने कई हफ्तों पहले लगाए थे। कुक को पद से हटाने का यह कदम तब उठाया गया जब उन्होंने कहा कि ट्रंप द्वारा इस्तीफा मांगे जाने के बावजूद वह अपना पद नहीं छोड़ेंगी।
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पेरिस. फ्रांस में प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरू की सरकार गिरने के एक दिन बाद राजधानी पेरिस और अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कें अवरुद्ध कर दीं, आगजनी की और पुलिस ने उन पर आंसू गैस के गोले दागे। गृह मंत्री ने राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन के शुरुआती घंटों में लगभग 200 लोगों की गिरफ्तारी की घोषणा की। विरोध प्रदर्शन हालांकि ऑनलाइन शुरू हुआ था लेकिन बाद में यह तीव्र होता गया और 80,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती को चुनौती देते हुए प्रदर्शनकारियों ने अवरोधकों को तोड़ दिया जिसके बाद पुलिस ने तेजी से गिरफ्तारियां कीं। गृह मंत्री ब्रूनो रिटेलेउ ने कहा कि पश्चिमी शहर रेन्नेस में एक बस में आग लगा दी गई और दक्षिण-पश्चिम में एक बिजली लाइन को नुकसान पहुंचने से रेलगाड़ियां बाधित हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी “विद्रोह का माहौल” बनाने का प्रयास कर रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मंगलवार देर रात रक्षा मंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू को देश का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। लगभग एक साल में देश को चौथी बार नया प्रधानमंत्री मिला है।
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नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने न्यूयॉर्क में आज बुधवार को आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह कदम इजरायल द्वारा कतर की राजधानी दोहा में हमास नेताओं पर किए गए हवाई हमले के बाद उठाया गया है। यह हमला ऐसे समय हुआ जब हमास प्रतिनिधि अमेरिकी समर्थन वाले युद्धविराम प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे थे।
वहीं इजरायल के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत डैनी डैनन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि यह बैठक आज बुधवार को दोपहर 3 बजे (स्थानीय समयानुसार) होगी। डैनन ने कहा कि इजरायल आतंकवादियों को कहीं भी सुरक्षित नहीं रहने देगा और निर्णायक कार्रवाई जारी रखेगा। उन्होंने लिखा, “दोहा में हमास नेतृत्व पर हुए हमले के बाद UNSC आज आपात बैठक करेगा। मैं परिषद को स्पष्ट संदेश दूंगा कि आतंकियों को गाजा, लेबनान या कतर कहीं भी छिपने की जगह नहीं मिलेगी।”वहीं सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को इजराइल ने “समिट ऑफ फायर” नामक अभियान के तहत दोहा के वेस्ट बे लगून इलाके में हमास के ठिकानों को निशाना बनाया। यह क्षेत्र एक उच्चस्तरीय आवासीय इलाका है, जहां कतर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक हमास का राजनीतिक ब्यूरो रह रहा था। हमले में हमास के छह सदस्य मारे गए जिनमें मुख्य वार्ताकार खलील अल-हैया के बेटे और उनके कार्यालय के निदेशक शामिल थे। इसके अलावा एक कतरी सुरक्षा अधिकारी की भी मौत हो गई। हालांकि, अल-हैया खुद इस हमले में सुरक्षित बच गए।हमले के तुरंत बाद कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे “कायरतापूर्ण” और “आपराधिक” हमला बताते हुए कड़ी निंदा की। मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और मानदंडों का उल्लंघन है और कतर की संप्रभुता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि जांच उच्च स्तर पर शुरू कर दी गई है और सभी जिम्मेदार एजेंसियां हालात को नियंत्रित करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी हैं।कतर ने चेतावनी दी कि वह इस तरह के “लापरवाही भरा इजरायली व्यवहार” को बर्दाश्त नहीं करेगा और क्षेत्रीय शांति को बिगाड़ने वाली किसी भी कार्रवाई का विरोध करेगा। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया को भी जन्म दिया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इजराइल के इस हमले की निंदा करते हुए कहा, “आज कतर पर हुए इजरायली हमले किसी भी कारण से स्वीकार्य नहीं हैं। मैं कतर और उसके अमीर शेख तमीम अल थानी के साथ एकजुटता व्यक्त करता हूं। किसी भी हालत में यह युद्ध पूरे क्षेत्र में नहीं फैलना चाहिए।”यह हमला खास तौर पर इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि कतर गाजा युद्धविराम वार्ताओं में अमेरिका का प्रमुख साझेदार और मध्यस्थ रहा है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस आपात बैठक और उसमें लिए जाने वाले निर्णयों पर टिकी हैं। - -
नई दिल्ली। नेपाली सेना ने देश में जारी अशांत स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू की अवधि बढ़ाने की घोषणा की है। सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि वह देश में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस कठिन समय में नागरिकों के सहयोग के लिए सेना ने उन्हें धन्यवाद दिया है। साथ ही, हाल के आंदोलन के दौरान हुई जानमाल की हानि पर गहरा दुख व्यक्त किया।
सेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक, विभिन्न अराजक तत्व और समूह अभी भी घुसपैठ कर रहे हैं और आंदोलन का फायदा उठाकर तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट, हिंसक हमले और महिलाओं पर अत्याचार की कोशिश जैसी गतिविधियों में लिप्त हैं।सेना ने सभी नागरिकों से सहयोग की अपील कीइन घटनाओं को रोकने के लिए सेना ने सभी नागरिकों से सहयोग की अपील की है। शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान कर्फ्यू को 10 सितंबर शाम 5 बजे तक पूरे देश में लागू रखा जाएगा। इसके बाद, कर्फ्यू अगली सुबह 6 बजे तक जारी रखा जाएगा। आगे की स्थिति का आकलन करने के बाद नई जानकारी जारी की जाएगी।नेपाल में बीते कुछ दिनों से जेन-जी के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शननेपाल में पिछले कुछ दिनों से जेन-जी (Gen Z) के नेतृत्व में प्रदर्शन हो रहे हैं, जो सरकार के भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ हैं। इन प्रदर्शनों में अब तक कई लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों घायल हुए हैं। हिंसा के कारण काठमांडू का त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी बंद करना पड़ा, जिससे उड़ानें प्रभावित हुई हैं।कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास जारीसेना ने कहा कि वह स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रख रही है और कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। सेना ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और शांति बनाए रखने में सहयोग करें। वहीं, आपात स्थिति में लोगों को सेना और पुलिस से संपर्क करने की सलाह दी गई है। (





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