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नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर भारी निर्भरता को कारण बताया है। जारी घोषणा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दवाइयां और उनसे जुड़े घटक “इतनी मात्रा में और ऐसी परिस्थितियों में अमेरिका में आयात किए जा रहे हैं कि वे संयुक्त राज्य की राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचा सकते हैं।”
यह घोषणा पेटेंट दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों (एपीआई) को निशाना बनाती है। ये नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं और सैन्य तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी कि विदेशी उत्पादन पर निर्भरता भू-राजनीतिक या आर्थिक संकट के दौरान “जीवन रक्षक दवाओं” की उपलब्धता को बाधित कर सकती है।आदेश के तहत, अधिकांश आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत का मूल्य-आधारित (एड वैलोरेम) शुल्क लगाया जाएगा। जो कंपनियां उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करने का वादा करेंगी, उन्हें 20 प्रतिशत का कम शुल्क देना होगा, जो चार साल बाद बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा। घोषणा में प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के लिए अलग-अलग शुल्क दरों का भी उल्लेख है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्ज़रलैंड से आयात पर लगभग 15 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा, जबकि अनाथ दवाएँ, परमाणु दवाएँ और जीन थेरेपी जैसी कुछ विशेष श्रेणियाँ इस शुल्क से मुक्त रहेंगी।फिलहाल जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर्स को इस शुल्क व्यवस्था से बाहर रखा गया है। घोषणा में कहा गया, “जेनेरिक दवाएँ और उनसे जुड़े घटक… इस समय शुल्क के अधीन नहीं होंगे।”अधिकारियों ने बताया कि यह नीति घरेलू दवा निर्माण को मजबूत करने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। व्हाइट हाउस में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि ध्यान केवल शुल्क पर नहीं बल्कि उत्पादन के दीर्घकालिक पुनर्गठन पर भी है। उन्होंने कहा, “मुद्दा सिर्फ शुल्क दर का नहीं है बल्कि उन समझौतों का है जो हम देशों और कंपनियों के साथ कर रहे हैं ताकि आपूर्ति शृंखलाएँ सुरक्षित रहें और उत्पादन अमेरिका में हो।”उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनियां पहले से ही इस नीति पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। उन्होंने अमेरिका में हो रहे निवेश की ओर इशारा करते हुए कहा, “हम नए फार्मास्युटिकल संयंत्रों के निर्माण में ठोस प्रगति देख रहे हैं।” ये शुल्क 31 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे और कुछ कंपनियों को मौजूदा समझौतों के आधार पर समयसीमा में छूट दी जाएगी।इस फैसले का वैश्विक दवा व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर उन देशों पर जो तैयार दवाओं और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। भारत और चीन दुनिया में जेनेरिक दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल हैं, जो अमेरिकी बाजार का बड़ा हिस्सा आपूर्ति करते हैं। हालांकि फिलहाल जेनेरिक दवाएं छूट में हैं लेकिन भविष्य में शुल्क बढ़ने पर वैश्विक दवा कीमतों और आपूर्ति शृंखलाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।इस मामले में लागू किया गया ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 अमेरिकी राष्ट्रपति को उन आयातों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देती है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। इस प्रावधान का पहले स्टील और एल्यूमिनियम पर शुल्क लगाने के लिए उपयोग किया गया था और अब इसे दवाओं तक बढ़ाना व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी बल ईरान में जल्द ही ''काम खत्म करेंगे क्योंकि मुख्य रणनीतिक उद्देश्य लगभग पूरे होने वाले हैं।'' ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध में उनके लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और ये लक्ष्य हैं ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता एवं नौसेना को नष्ट करना तथा यह सुनिश्चित करना कि उसके लिए काम करने वाले छद्म संगठन अब क्षेत्र को अस्थिर नहीं कर सकें और ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सके। ट्रंप ने ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में कहा कि यह सैन्य कार्रवाई तेल समेत ईरान के किसी विशाल संसाधन को हासिल करने के लिए नहीं की गई है, बल्कि यह अमेरिका के सहयोगियों की मदद के लिए की गई है। उन्होंने कहा, ''हम पश्चिम एशिया से पूरी तरह अलग हैं लेकिन फिर भी हम मदद करने के लिए वहां हैं। उन्होंने कहा, ''हमें वहां रहने की जरूरत नहीं है। हमें उनके तेल की जरूरत नहीं है। उनके पास जो कुछ भी है, उसकी हमें जरूरत नहीं है लेकिन हम अपने सहयोगियों की मदद करने के लिए वहां हैं।'' ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' के क्रॉस हॉल में बुधवार रात कहा कि पिछले एक महीने में ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' की कार्रवाई से ईरान की ''मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता में उल्लेखनीय कमी आई है और हथियार बनाने वाली उसकी फैक्टरी एवं रॉकेट प्रक्षेपक तहस-नहस किए जा रहे हैं।'' ट्रंप ने कहा कि ईरान की ''नौसेना खत्म हो चुकी है, उसकी वायु सेना तबाह हो चुकी है और उस देश के नेता ''अब मारे जा चुके हैं।'' उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ''इस वक्त हमारी कार्रवाई में बुरी तरह तबाह किया जा रहा है।'' ट्रंप ने इजराइल के साथ मिलकर करीब एक महीने पहले ईरान पर हमला करने के बाद 'प्राइम टाइम' पर पहली बार देश को संबोधित किया है। ट्रंप ने कहा, ''पिछले सप्ताह हमारे सशस्त्र बलों ने युद्धक्षेत्र में कई तेज, निर्णायक और जबरदस्त जीत हासिल की हैं।''
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न्यूयॉर्क. अमेरिका के नेब्रास्का राज्य की विधायिका ने दीपावली उत्सव को मान्यता देने वाला एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसे सिएटल स्थित भारतीय मिशन ने राज्य के हिंदू समुदाय के लिए एक ''ऐतिहासिक'' कदम बताया है। यह प्रस्ताव राज्य सीनेटर जॉन फ्रेडरिकसन द्वारा प्रायोजित किया गया था और 31 मार्च को स्पीकर जॉन आर्च ने इस पर हस्ताक्षर किए। सिएटल स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने एक बयान में कहा कि इस प्रस्ताव को अपनाया जाना अमेरिका के मध्य पश्चिमी क्षेत्र में भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए एक ''ऐतिहासिक'' घटना है और ''कॉर्नहस्कर स्टेट'' (नेब्रास्का का आधिकारिक उपनाम) में रहने वाले लगभग 9,000 हिंदुओं के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। महावाणिज्य दूतावास ने बताया कि फ्रेडरिकसन लंबे समय से हिंदू समुदाय के समर्थक रहे हैं और मंदिरों के कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेते रहे हैं। उनके निर्वाचन क्षेत्र में 1993 में स्थापित 'हिंदू टेम्पल ऑफ ओमाहा' स्थित है। इस प्रस्ताव के तहत इस वर्ष 20 अक्टूबर को राज्यपाल जिम पिलेन द्वारा गवर्नर हाउस में भव्य दीपावली समारोह आयोजित करने की भी योजना है। भारतीय मिशन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''नेब्रास्का में दीपावली की ऐतिहासिक विधायी मान्यता। नेब्रास्का ने राज्य विधायी प्रस्ताव (एसएलआर)-424 को अंगीकार किया है, जो दीपावली के उत्सव और उसके महत्व को मान्यता देता है।'' महावाणिज्य दूतावास ने इस कानून को आगे बढ़ाने के लिए फ्रेडरिकसन का आभार जताया और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि ''दीपावली पर्व एकता का प्रतीक है, क्योंकि इसे भारत के अधिकतर लोग मनाते हैं, चाहे उनका कोई भी धर्म हो और दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग इस उत्सव को मनाते हैं।'' इसमें यह भी कहा गया कि यह पर्व अच्छाई, प्रकाश और ज्ञान की बुराई और अंधकार पर विजय का ''स्थायी'' प्रतीक है।
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नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने जनता से खास अपील की है। चेतावनी भी दी कि मिडिल ईस्ट के वर्तमान हालात की वजह से तेल संकट गहराएगा और आने वाले महीने “आसान नहीं रहने वाले” हैं। उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, “आने वाले महीने आसान नहीं हो सकते। मैं इस बारे में साफ-साफ कहना चाहता हूं। कोई भी सरकार इस युद्ध से पैदा हो रहे दबाव को खत्म करने का वादा नहीं कर सकती।”
ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा कि वह देश से सीधे बात करना चाहते हैं कि सरकार “इस मुश्किल समय में ऑस्ट्रेलिया को बचाने के लिए” क्या कर रही है, और वे (जनता) देश की मदद के लिए क्या कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, “पक्ष-विपक्ष सभी ऑस्ट्रेलिया को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। ताकि अगर दुनिया भर में हालात और खराब होते हैं और लंबे समय में हमारी फ्यूल सप्लाई में बहुत ज्यादा रुकावट आती है, तो हम अगले कदम मिलकर तय कर सकें।”अल्बनीज ने जनता को बताया कि वर्तमान स्थिति को ध्यान में रख फ्यूल एक्साइज आधा कर दिया गया है और अगले तीन महीनों के लिए हेवी रोड यूजर चार्ज जीरो कर दिया गया है। पीएम ने भरोसा दिलाया, “हम फ्यूल की कीमत कम करने के लिए काम कर रहे हैं। साथ ही यहां अधिक ईंधन लाने और अपने मजबूत ट्रेडिंग रिश्तों का इस्तेमाल कर ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा पेट्रोल, डीजल और फर्टिलाइजर लाने के लिए काम कर रहे हैं।”3 मिनट 17 सेकंड के संबोधन में अल्बनीज ने आगे कहा, “मैं वादा कर सकता हूं कि हम ऑस्ट्रेलिया को इसके सबसे बुरे असर से बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे।” उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई लोगों से अपील की कि वे घबराकर फ्यूल न खरीदें और जहां तक हो सके, कार की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा, “अगर आप सड़क पर निकल रहे हैं, तो जरूरत से ज्यादा फ्यूल न लें—बस वैसे ही भरवाएं जैसे आप आम तौर पर भरवाते हैं। अपने समुदाय, दूरदराज के इलाके में रहने वाले लोग और जरूरी इंडस्ट्रीज से वास्ता रखने वालों के बारे में सोचें।” -
मॉस्को. रूसी उप विदेश मंत्री ने मंगलवार को कहा कि रूस और भारत को ''नियमित, व्यवस्थित'' संपर्क बनाए रखना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस साल अपनी सुविधा के हिसाब सरकारी यात्रा पर आएंगे। उप विदेश मंत्री एंद्री रुदेंको ने सरकारी समाचार एजेंसी 'तास' को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही।
रुदेंको ने कहा, ''रूस और भारत के लिए विभिन्न स्तर पर नियमित और व्यवस्थित संपर्क बनाए रखना बहुत जरूरी है।'' उन्होंने कहा, ''हमें उम्मीद है कि भारत के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर उपयुक्त समय पर रूस की सरकारी यात्रा करेंगे।'' रुदेंको ने यह भी कहा कि इस वर्ष रूस-भारत शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना मॉस्को की बारी है।इससे पहले, पुतिन ने नयी दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिसंबर 2025 में भारत की यात्रा की थी। -
ह्यूस्टन. भारतीय मूल की प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ मंगला कुप्पा को अमेरिका के श्रम मंत्रालय का मुख्य सूचना अधिकारी (सीआईओ) नियुक्त किया गया है। वह पिछले वर्ष अक्टूबर से कार्यवाहक के रूप में यह जिम्मेदारी संभाल रही थीं और अब औपचारिक रूप से उनकी नियुक्ति कर दी गई है। कुप्पा मंत्रालय की मुख्य कृत्रिम मेधा (एआई) अधिकारी भी हैं। उनकी नियुक्ति इसी महीने की शुरुआत में की गई। वह एजेंसी में सूचना प्रौद्योगिकी रणनीति, डिजिटल रूपांतरण और एआई के उपयोग की निगरानी जारी रखेंगी। अपनी नियुक्ति की पुष्टि करते हुए कुप्पा ने पेशेवर मंच 'लिंक्डइन' पर लिखा कि वह '' सेवा जारी रखने व बदलाव लाने का अवसर मिलने के लिए आभारी'' हैं। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की वरिष्ठ अधिकारी कुप्पा के पास 25 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मंत्रालय के आधुनिकीकरण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह 2010 में श्रम मंत्रालय से जुड़ी थीं और तब से वह मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी और 'बिजनेस एप्लीकेशन सर्विसेज' की निदेशक सहित कई वरिष्ठ पदों पर काम कर चुकी हैं। इससे पहले वह एक दशक से अधिक समय तक श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के साथ काम कर चुकी हैं। कुप्पा ने एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है। उनकी नियुक्ति अमेरिका की सरकार में प्रौद्योगिकी नेतृत्व के प्रमुख पदों पर भारतीय मूल के पेशेवरों की बढ़ती उपस्थिति को भी दर्शाती है।
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काठमांडू. नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुए 'जेन जेड' आंदोलन के दमन में कथित भूमिका के लिए काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) छवि रिजाल को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। नेपाल पुलिस के अनुसार, रिजाल उन उच्च अधिकारियों की सूची में शामिल हैं जिन्हें इस आंदोलन को दबाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। इस आंदोलन के दौरान 76 लोगों की मौत हुई थी। उन्हें काठमांडू के सुबिधानगर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। यह घटनाक्रम पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद सामने आया है। 'जेन जेड' आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम की जांच के लिए गठित आयोग ने ओली और लेखक समेत अन्य के खिलाफ आपराधिक मामले में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी। इस बीच, ओली की हिरासत को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बावजूद नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। काठमांडू जिला अदालत ने रविवार को ओली और लेखक को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
ये गिरफ्तारियां बालेंद्र शाह के नेतृत्व में बनी नयी सरकार द्वारा अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जांच आयोग की रिपोर्ट लागू करने के फैसले के बाद हुई हैं। 'जेन जेड' वे युवा हैं जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ। युवाओं के नेतृत्व में हुए 'जेन जेड' आंदोलन में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए थे, जिसके कारण ओली को प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा था। -
नई दिल्ली। अमेरिकी सरकार की तरह से बार-बार इस बात को दोहराया जा रहा है कि वह लक्ष्य पूरा करने में तय समय से आगे चल रहे हैं और जल्द ही खत्म कर देंगे। अब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य महीनों में नहीं, बल्कि हफ्तों में पूरा कर लेगा।
इस बीच अमेरिकी विदेश सचिव ने लड़ाई खत्म करने के लिए वाशिंगटन की शर्तें बताईं और तेहरान को होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी।स्थानीय समयानुसार, सोमवार को अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि सैन्य ऑपरेशन जारी रहने के बावजूद, “ईरान और अमेरिका के अंदर कुछ लोगों के बीच खासकर बिचौलियों के जरिए मैसेज और कुछ सीधी बातचीत चल रही थी।”उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन की मुख्य मांगें वैसी ही हैं, “ईरानी सरकार के पास कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकते और उन्हें आतंकवाद को स्पॉन्सर करना बंद करना होगा और उन्हें ऐसे हथियार बनाना बंद करना होगा जो उनके पड़ोसियों के लिए खतरा बन सकते हैं।”रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने बताए गए मकसद को पाने में बहुत आगे या तय समय से आगे है, जिसमें ईरान की एयर फोर्स और नेवी को खत्म करना और “उनके पास मौजूद मिसाइल लॉन्चर की संख्या में काफी कमी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम ये मकसद, हफ्तों में हासिल कर लेंगे, महीनों में नहीं।” उन्होंने साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोई भी कोशिश मंजूर नहीं होगी। दुनिया का कोई भी देश इसे स्वीकार नहीं कर सकता है।रुबियो ने चेतावनी दी कि ऐसा कदम दूसरे देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर दावा करने का एक उदाहरण बनेगा। रुबियो ने आगे कहा, “अमेरिका यह शर्त नहीं मानेगा। वे जो मांग रहे हैं, वह एक गैर-कानूनी शर्त है। ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है।” उन्होंने कहा कि स्ट्रेट किसी न किसी तरह से खुला रहेगा, या तो ईरान के अंतरराष्ट्रीय कानून मानने से या देशों के एक साथ आकर कार्रवाई करने से।रुबियो ने ईरान पर पूरे इलाके में आवासीय और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “उन्होंने दूतावास, डिप्लोमैटिक फैसिलिटी, एयरपोर्ट, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया है।”ईरान को 10 सालों में सबसे कमजोर बताते हुए, उन्होंने कहा कि भविष्य में बड़े खतरों को रोकने के लिए अभी उसकी सैन्य क्षमताओं को कम करना जरूरी है। डिप्लोमेसी को लेकर रुबियो ने कहा कि तेहरान को न्यूक्लियर हथियार रखने की किसी भी इच्छा को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाने और मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम छोड़ने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, “अगर ईरान ऐसा करता है, तो देश का भविष्य अच्छा हो सकता है। दशकों से उस देश की सरकार ने इस रास्ते को नहीं अपनाया है।”इस दौरान रुबियो ने ऑपरेशन के दौरान एयरस्पेस और बेस एक्सेस न देने का जिक्र करते हुए कुछ नाटो सहयोगियों से भी निराशा जताई और कहा, “अगर नाटो का मकसद सिर्फ यूरोप की रक्षा करना है, लेकिन फिर जब हमें जरूरत हो तो हमें बुनियादी अधिकार देने से मना करना, तो यह बहुत अच्छा इंतजाम नहीं है। इन संबंधों को फिर से देखना होगा।”रुबियो ने कहा कि अमेरिका के मकसद में ईरान में शासन बदलना शामिल नहीं था। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को माना कि अगर ईरान के नेतृत्व में बदलाव होता है तो वाशिंगटन इसका विरोध नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “इस ऑपरेशन का मकसद यह नहीं था।” - काठमांडू/नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुए 'जेन जेड' विरोध-प्रदर्शनों की जांच करने वाले उच्चस्तरीय आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने के नवगठित सरकार के फैसले के एक दिन बाद शनिवार को देश के पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया। नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 'बालेन' की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई नवगठित मंत्रिमंडल की बैठक में आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का फैसला किया गया था। पुलिस ने बताया कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) के अध्यक्ष ओली को शनिवार तड़के काठमांडू से 12 किलोमीटर पूर्व भक्तपुर जिले के गुंडू इलाके से गिरफ्तार किया गया। उसने बताया कि पूर्व गृह मंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के नेता रमेश लेखक को भी भक्तपुर जिले की सूर्यविनायक नगरपालिका के कटुंजे स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। ओली और लेखक को पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए 'जेन जेड' आंदोलन को दबाने में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस आंदोलन में कई युवाओं सहित 76 लोग मारे गए थे। 'जेन जेड' आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम की जांच के लिए गठित आयोग ने ओली और लेखक सहित अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है। बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नेपाल की नवगठित सरकार ने शुक्रवार को अपनी पहली मंत्रिमंडल बैठक में जांच आयोग की सिफारिशों को तत्काल लागू करने का निर्णय लिया। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने ओली की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ''कानून से ऊपर कोई नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''हमने पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को हिरासत में ले लिया है। ऐसा किसी से बदला लेने के लिए नहीं किया गया बल्कि यह न्याय की शुरुआत है।'' उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि अब देश को एक नयी दिशा मिलेगी।''पुलिस ने कहा कि ओली और लेखक को भद्रकाली स्थित काठमांडू जिला पुलिस सर्किल में हिरासत में रखा गया है। जांच आयोग ने इस अपराध के लिए तीन से 10 साल तक की जेल की सजा की सिफारिश की है।काठमांडू जिला पुलिस सर्किल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि शनिवार को अवकाश होने के कारण उन्हें रविवार को काठमांडू जिला अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू होगी। ओली को हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद चिकित्सकीय जांच के लिए त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल ले जाया गया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह जांच की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।इस बीच, सीपीएन-यूएमएल ने स्थिति पर चर्चा के लिए ललितपुर स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में सचिवालय की आपात बैठक बुलाई है।
- काठमांडू/ नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भारत के साथ रिश्तों को नई गति देने की इच्छा जाहिर करते हुए शनिवार को कहा कि वह भारत संग "घनिष्ठता के साथ काम करने को उत्सुक" हैं और शपथ ग्रहण के बाद शुभकामनाएं देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया। शुक्रवार को शपथ ग्रहण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शाह को बधाई देते हुए कहा था कि वह नेपाल के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत करने के लिए काम करने के उत्सुक हैं। मोदी के संदेश के जवाब में नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। मैं हमारे दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने और हमारी जनता की साझा समृद्धि के लिए आपके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं।" क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टि से नेपाल, भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण देश माना जाता है, और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग को इस परिप्रेक्ष्य में खास अहमियत दी जाती है। नेपाल सामान और सेवाओं के परिवहन के लिए बड़े पैमाने पर भारत पर निर्भर है। चारों तरफ से जमीन से घिरे होने के कारण समुद्र तक उसकी पहुंच भारत के रास्ते ही संभव है, और वह अपनी अधिकांश जरूरतों का आयात भी भारत से या भारत के माध्यम से ही करता है।
- जानिए नेपाल के प्रधानमंत्री की परी जैसी पत्नी के बारे मेंनेपाल. नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रैपर से मेयर और फिर पीएम बनने का सपना पूरा कर लिया है। बालेन शाह ने शपथ ग्रहण भी किया। बालेन शाह एक फेमस रैपर हैं। इसलिए, शपथ ग्रहण के मौके पर जय महाकाली गाना भी गाया। बालेन की राजनीतिक जिंदगी फिल्मी कहानी की तरह है। इसके अलावा इनकी लव स्टोरी भी कमाल की है। आइए, बालेन शाह की गर्लफ्रेंड से पत्नी बनी सबीना काफले के बारे में जानते हैं।बालेन शाह की पत्नी की नाम सबीना काफले है। सबीना क्रिएटिव महिला हैं। एक महिला लेखिका भी हैं। वो कविता और कहानियां लिखती हैं। यही, बात बालेन को सबीना के करीब लेकर आई थी। इन दोनों के मिलने की कहानी भी एकदम फिल्मी कहानी की तरह है। सबीना पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल हैं।बताया जाता है कि साल 2017 में बालेन शाह और सबीना की मुलाकात सबसे पहले एक कविता के लिए ऑनलाइन हुई थी। उसी दौरान बालेन दिल बैठे थे। फिर दोनों के बीच मेल-मुलाकात बढ़ते गए। इस तरह से दोनों लाइफ में आगे बढ़ने का फैसला लिया।इस तरह से दोनों के बीच प्यार बढ़ता गया। बात साल 2018 की है यानी आज से करीब 7 साल पहले दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। दोनों ने बेहद साधारण तरीके से शादी कर ली थी।बालेन शाह का परिवारबालेन शाह के पिता नेपाल सरकार में आयुर्वेदिक चिकित्सक थे। उनका नाम राम नारायण शाह था। बता दें, पिछले साल 2025 में बालेन के पिता की मृत्यु हो गई। इनकी माता का नाम ध्रुवादेवी शाह है। बालेन शाह की एक बेटी भी है। बता दें, 2023 में बालेन और सबीना माता-पिता बने।बालेन शाह - रैपर, बिजनेस से प्रधानमंत्री तक का सफरबालेन शाह नेपाल में बतौर रैपर फेमस हैं। बतौर रैपर वो कंस्ट्रक्शन के बिजनेस को भी चलाते रहे। इसके बाद वो 2022 में काठमांडू मेयर का चुनाव जीतकर राजनीति में अपनी एंट्री मारी। इसके साथ ही वो एक बागी के तौर पर आगे बढ़ते रहे। कहा जाता है कि नेपाल में जेन-जी आंदोलन के पीछे भी इनका हाथ था और फिर नेपाल की जनता है इनको चुनकर नेपाल की गद्दी पर बैठा दिया।
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वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर जल्द ही अमेरिकी मुद्रा (डॉलर) पर दिखाई देंगे और यह 1861 में डॉलर की शुरुआत के बाद से पहली बार होगा जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर मुद्रा पर अंकित किए जाएंगे। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने यह निर्णय ऐसे वक्त लिया है जब अमेरिका इस वर्ष देश की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकारी ब्रैंडन बीच ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा ''अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप के हस्ताक्षर वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हस्ताक्षर के साथ जल्द ही अमेरिकी मुद्रा पर दिखाई देंगे। ऐसा इतिहास में पहली बार होगा और यह राष्ट्रपति के नेतृत्व एवं हमारे महान राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।'' इस महीने की शुरुआत में, एक संघीय कला आयोग ने अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर ट्रंप की छवि वाले 24 कैरेट सोने के स्मारक सिक्के के अंतिम डिजाइन को मंजूरी दी थी। बेसेंट ने एक बयान में कहा, ''राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में, हम अभूतपूर्व आर्थिक विकास, डॉलर के स्थायी प्रभुत्व और राजकोषीय मजबूती एवं स्थिरता की राह पर हैं।" उन्होंने कहा, "हमारे महान देश और राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप की ऐतिहासिक उपलब्धियों को मान्यता देने का इससे अधिक प्रभावशाली तरीका कोई नहीं हो सकता कि अमेरिकी डॉलर पर उनका नाम अंकित हो और यह पूरी तरह उचित है कि यह ऐतिहासिक मुद्रा स्वतंत्रता के 250वें वर्ष के अवसर पर जारी की जाए।'' ब्रैंडन बीच ने कहा कि अमेरिका के 'गोल्डन एज' आर्थिक पुनरुत्थान के वास्तुकार के रूप में राष्ट्रपति ट्रंप की छवि निर्विवाद है और अमेरिकी मुद्रा पर उनके हस्ताक्षर छापना न केवल उचित है, बल्कि पूरी तरह से न्यायसंगत भी है।
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दुबई (यूएई). इजराइल ने शुक्रवार को ईरान पर नये सिरे से हमले शुरू किए जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध खत्म करने के लिए सार्थक बातचीत जारी है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरुमध्य खोलने के लिए ईरान को दी गई समय-सीमा आगे बढ़ा दी, हालांकि ईरान के झुकने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इजराइल की सेना ने कहा कि शुक्रवार को तेहरान में हमले करते हुए बैलिस्टिक मिसाइल और अन्य हथियार बनाने के ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेना ने कहा कि इसके अलावा पश्चिमी ईरान में मिसाइल लॉन्चर और भंडारण स्थलों पर भी हमले किए गए।
इजराइल में भी हवाई हमले के सायरन बजे और सेना ने कहा कि वह ईरान की मिसाइलों को रोकने की कोशिश कर रही है। वहीं, ईरान ने खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे, जिसकी वजह से बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अलर्ट जारी किया गया। कुवैत ने कहा कि शुवेख बंदरगाह को हमले में "भौतिक नुकसान" हुआ है, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
शेयर बाजारों में गिरावट और पश्चिम एशिया के बाहर युद्ध का आर्थिक प्रभाव फैलने के बाद ट्रंप पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह होर्मुज जलडमरुमध्य से ईरान का नियंत्रण खत्म करवाएं। यह एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए आमतौर पर दुनियाभर में 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है। अमेरिका ने युद्धविराम के लिए ईरान के सामने 15 बिंदुओं का प्रस्ताव पेश करने का दावा किया है, जिनमें इस जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण खत्म करना भी शामिल है। साथ ही, अमेरिका ने क्षेत्र में हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश भी दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि वह इस अहम समुद्री मार्ग पर सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है। ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर 48 घंटे में जलमार्ग नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर दिया जायेगा। बाद में उन्होंने इस समय-सीमा को बढ़ाकर पांच दिन कर दिया था। बृहस्पतिवार को उन्होंने इसे छह अप्रैल तक बढ़ा दिया और कहा कि सार्थक बातचीत हो रही है। हालांकि, ईरान का कहना है कि वह किसी भी तरह की बातचीत में शामिल नहीं है।
इस बीच, युद्ध शुरू होने के बाद वॉल स्ट्रीट में सबसे खराब गिरावट देखी गई, और एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई। तनाव कम होने की संभावनाओं पर संदेह बढ़ने के कारण तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं। 'ब्रेंट क्रूड' की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 28 फरवरी को ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद से 45 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्शाती है। ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि अमेरिका ने युद्धविराम की संभावना के लिए ईरान को 15 बिंदुओं की एक सूची सौंपी है। इस सूची में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरुमध्य को फिर से खोलने जैसी शर्तें शामिल हैं। ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और अपनी ओर से पांच बिंदुओं का प्रस्ताव रखा है, जिसमें युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और होर्मुज जलडमरुमध्य पर उसकी संप्रभुता को मान्यता देने की मांग शामिल है। कई देशों के राजनयिक अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच सीधी वार्ता कराने की कोशिश कर रहे हैं। यह वार्ता संभवतः पाकिस्तान में आयोजित की जा सकती है। - काठमांडू। 'जेन जेड' आंदोलन के आदर्श 35 वर्षीय बालेंद्र शाह 'बालेन' ने शुक्रवार को लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया। रैपर, इंजीनियर और फिर नेता बने बालेंद्र शाह नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक बन गए हैं। बालेन मधेस क्षेत्र से देश के 47वें प्रधानमंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति भी हैं। बालेन ने नेपाल के झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में के.पी. शर्मा ओली को लगभग 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया था। ओली चार बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। बालेन ने 2022 में काठमांडू के महापौर पद के लिए हुए चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। पिछले साल सितंबर में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हिंसक प्रदर्शनों के बाद ओली नीत गठबंधन सरकार गिर गई थी। इसके बाद 'जेन जेड' के युवाओं ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए 35 वर्षीय इंजीनियर बालेन को लोकप्रिय उम्मीदवार माना था। लेकिन बालेन ने उस समय अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह संसदीय चुनाव लड़कर पूर्ण कार्यकाल के लिए सरकार का नेतृत्व करना पसंद करेंगे। 'जेन जेड' 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी है।जनवरी में, बालेन रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए और जल्द ही उन्हें पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। काठमांडू के महापौर के रूप में, बालेन को व्यापक सुधारों और महानगर के सौंदर्यीकरण का श्रेय दिया जाता है। देश की राजधानी काठमांडू में जन्मे बालेन आयुर्वेद चिकित्सक राम नारायण शाह और गृहिणी ध्रुवदेवी शाह के सबसे छोटे पुत्र हैं। उन्हें बचपन से ही संगीत और कविता में रुचि थी तथा शिक्षा के दौरान उन्होंने रैप संगीत की ओर रुख किया। काठमांडू से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद, बालेन ने कर्नाटक के विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। बालेन ने 2018 में सबीना काफले से शादी की और इस दंपति की एक बेटी है। बालेन के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 10 लाख से अधिक 'सब्सक्राइबर' हैं।
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता बालेंद्र शाह ने शुक्रवार को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। महज 35 साल की उम्र में पीएम बनने वाले बालेंद्र शाह के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स अकाउंट का बायो चेंज हो गया। पीएम बालेंद्र शाह के एक्स अकाउंट के बायो में “नेपाल के प्रधानमंत्री, रैपर/स्ट्रक्चरल इंजीनियर/पूर्व मेयर, काठमांडू मेट्रोपॉलिटन हमसे संपर्क करें: +977 9851279900” लिखा है।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संविधान के आर्टिकल 76(1) के तहत बालेंद्र शाह को नियुक्त करने के बाद दिन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस समारोह में देश के उपराष्ट्रपति राम सहाय प्रसाद यादव, चीफ जस्टिस प्रकाश मान सिंह राउत, नेशनल असेंबली के चेयरमैन नारायण प्रसाद दहल, पूर्व प्रधानमंत्री, सीनियर अधिकारी, सिक्योरिटी चीफ और डिप्लोमैटिक कम्युनिटी के सदस्य शामिल हुए।पीएम बालेंद्र शाह का शपथग्रहण समारोह हिंदू रीति-रिवाज से पूरा हुआ। पहली बार वैदिक-सनातन परंपरा में हुए शपथ समारोह में सात शंख बजाए गए। यह पहली बार है जब मधेसी समुदाय का कोई नेता प्रधानमंत्री बना है।बालेंद्र शाह ने पीएम पद की शपथ लेने से कुछ घंटे पहले गुरुवार को अपना नया रैप सॉन्ग रिलीज किया। यह गाना नेपाल के भविष्य को लेकर उम्मीदों से भरा है। इस गाने को रिलीज होने के कुछ ही घंटों के भीतर बीस लाख से ज्यादा बार देखा गया।इस गाने में उनके अब तक के सफर की एक झलक है, जब वे ‘अंडरग्राउंड रैप’ की दुनिया में सक्रिय थे और संगीत के जरिए नेपाल में भ्रष्टाचार और दूसरी सामाजिक समस्याओं पर आवाज उठाते थे। बालेंद्र शाह ने पूर्वी नेपाल के झापा-5 में पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली को 49,614 वोटों के बड़े अंतर से हराया। उन्हें 68,348 वोट मिले, जबकि ओली को 18,734 वोट मिले। यह 1991 के बाद से नेपाल के संसदीय चुनावों में किसी भी उम्मीदवार को मिले सबसे ज्यादा वोट हैं।शाह ने 2022 में राजनीति में कदम रखा, जब उन्होंने काठमांडू के मेयर का चुनाव लड़ा और एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीते। 27 अप्रैल 1990 को काठमांडू में एक मधेसी परिवार में जन्मे बालेंद्र शाह ने भारत में विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री ली थी। इंजीनियरिंग में उनके एकेडमिक बैकग्राउंड ने उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर, शहरी विकास और पब्लिक वर्क्स की प्रैक्टिकल समझ दी, जिससे काठमांडू मेट्रोपॉलिटन सिटी के मेयर के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान उनके गवर्नेंस के तरीके को बनाने में मदद मिली। (I -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर कहा कि ईरानी नेताओं को ''बहुत देर होने से पहले बातचीत शुरू कर देनी चाहिए, क्योंकि एक बार ऐसा हो जाने पर, पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं होगा।'' यह पोस्ट ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद की गई है जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देश समझौते के करीब हैं। ट्रंप ने बृहस्पतिवार को फिर कहा कि अमेरिका द्वारा प्रस्तावित 15 सूत्री युद्धविराम योजना को ईरान द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद तेहरान ''हमसे समझौता करने की भीख मांग रहा है।''
- ढाका.। बांग्लादेश में एक बस के परिवहन नौका पर चढ़ने की कोशिश के दौरान नदी में गिर जाने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य लोग लापता हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि बस दक्षिण-पश्चिमी राजबारी जिले में दौलाडिया टर्मिनल पर बुधवार शाम करीब सवा पांच बजे पद्मा नदी में गिर गई। दमकल सेवा के अधिकारी सोहेल राणा ने घटनास्थल पर संवाददाताओं से कहा, '' हमजा (बचाव पोत) ने क्रेन की मदद से बस को बाहर निकाला और उसके भीतर से 14 शव मिले।'' उन्होंने बताया कि गोताखोरों ने इससे पहले दो महिलाओं के शव बरामद किए थे और शेष 14 शव खराब मौसम के बीच छह घंटे के प्रयास के बाद बस को नदी से बाहर निकाले जाने पर बुधवार मध्यरात्रि के आस पास मिले। राणा ने बताया कि दमकल सेवा और तटरक्षक बल के गोताखोर सेना और पुलिस की मदद से लापता लोगों की तलाश कर रहे हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि ढाका जा रही इस बस में बच्चों समेत करीब 40 यात्री सवार थे और उनमें से अधिकतर ईद की छुट्टियां मनाकर राजधानी लौट रहे थे। राजबारी जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बचाव अभियान की अद्यतन जानकारी लेने के लिए उनसे फोन पर बात की और हादसे की जांच के आदेश दिए। पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों ने पहले बताया था कि करीब 11 यात्री तैरकर किनारे पहुंचने में सफल रहे या उन्हें बचा लिया गया लेकिन अधिकतर अन्य लोग अब भी लापता हैं। टर्मिनल के पर्यवेक्षक मोनिर हुसैन ने कहा, ''जब बस पोंटून (जलाशय में तैरता पुल) से नौका की ओर बढ़ रही थी तभी एक छोटी सहायक नौका पोंटून से टकरा गई और बस चालक के स्टीयरिंग पर से नियंत्रण खो देने के कारण बस नदी में जा गिरी।'' उन्होंने कहा, ''बस हमारी आंखों के सामने नदी में गिर गई लेकिन हम कुछ नहीं कर सके।''दौलाडिया स्वास्थ्य परिसर के चिकित्सकों ने कहा कि दो महिलाओं के शव लाए गए जबकि एक अन्य महिला का उपचार किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों में से कई एक ही परिवार के सदस्य थे और उनमें से कई लोग बाहर खड़े होने के कारण बच गए लेकिन उनके रिश्तेदार बस डूबने के समय उसके भीतर थे।
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वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में युद्ध में जीत का दावा करते हुए कहा कि ईरान परमाणु हथियार कभी नहीं रखने पर सहमत हो गया है और उसने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी एक ''महत्वपूर्ण सौगात'' भेजी है। ट्रंप ने मंगलवार को 'ओवल ऑफिस (अमेरिका के राष्ट्रपति का कार्यालय) में संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि ईरान ''समझौता करने'' का इच्छुक है और उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रूबियो, पश्चिम एशिया के मामलों के लिए विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान के मौजूदा नेतृत्व में पहले ही बड़े बदलाव हो चुके हैं।
उन्होंने कहा, ''असल में यह वही है, जिसे हम सत्ता परिवर्तन कह सकते हैं। आप जानते हैं कि यह सत्ता परिवर्तन है क्योंकि अब सत्ता में बैठे लोग उन लोगों से बिल्कुल अलग हैं, जिनके साथ हमने शुरुआत की थी और जिन्होंने वे सारी समस्याएं पैदा की थीं।'' इससे पहले, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट साझा करते हुए मंगलवार को कहा था कि उनका देश अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त कराने के लिए ''सार्थक और निर्णायक वार्ता'' की मध्यस्थता के लिए तैयार है। इसके कुछ घंटों बाद ट्रंप ने शरीफ की पोस्ट को अपने सोशल मीडिया मंच 'ट्रुथ सोशल' पर साझा किया था। ट्रंप ने नए गृह मंत्री के रूप में मार्कवेन मुलिन के शपथ ग्रहण समारोह के बाद संवाददाताओं से कहा, ''मैं पहले से यह नहीं कहना चाहता लेकिन वे इस बात पर सहमत हो गए हैं कि वे कभी परमाणु हथियार नहीं रखेंगे।'' ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल की आपूर्ति से जुड़ी एक ''महत्वपूर्ण सौगात'' अमेरिका को दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ''वे समझौता करने जा रहे हैं। उन्होंने कल कुछ ऐसा किया जो वास्तव में हैरान करने वाला था। उन्होंने हमें एक तोहफा दिया और वह तोहफा आज पहुंच गया। वह बहुत बड़ा तोहफा है जिसकी कीमत बहुत ज्यादा है।'' उन्होंने कहा, ''मैं आपको यह नहीं बताऊंगा कि वह तोहफा क्या है, लेकिन वह बहुत बड़ी सौगात है।''
ट्रंप ने कहा, ''तो मेरे लिए उसका एक ही मतलब है कि हम सही लोगों से बातचीत कर रहे हैं। नहीं, यह (तोहफा) परमाणु हथियार से जुड़ा नहीं है। यह तेल और गैस से जुड़ा है।'' अमेरिकी राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध जीत लिया गया है।
ट्रंप ने कहा, ''हम इसे जीत चुके हैं। यह युद्ध जीता जा चुका है... ऐसा नहीं है कि हम कोई ऐसा युद्ध जीत रहे हैं जहां उनके पास नौसेना नहीं है और उनके पास वायुसेना नहीं है और उनके पास कुछ भी नहीं है। हमारे विमान वास्तव में तेहरान और देश के अन्य हिस्सों के ऊपर उड़ रहे हैं। वे इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।'' उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान की उस परमाणु क्षमता को पूरी तरह नष्ट कर दिया जिसका इस्तेमाल पश्चिम एशिया में अमेरिका के सहयोगियों के खिलाफ किया जा सकता था। ट्रंप ने कहा, ''हमने उसे तबाह कर दिया। उनकी परमाणु क्षमता को बिल्कुल तबाह कर दिया। अगर हमने (बी-2 बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल करते हुए) हमला नहीं किया होता तो उस हमले के दो हफ्ते बाद उनके पास परमाणु हथियार होता। वे निश्चित रूप से उसका इस्तेमाल करते और वे उसका इस्तेमाल इजराइल समेत पूरे पश्चिम एशिया में करते।'' अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि इतिहास में कभी भी किसी आधुनिक सेना को इतनी तेजी से और इस तरह पूरी तरह तबाह नहीं किया गया। हेगसेथ ने कहा, ''ईरान के पास आधुनिक सेना थी। उसके पास आधुनिक नौसेना, आधुनिक वायुसेना, आधुनिक हवाई रक्षा प्रणाली, नेतृत्व, विशाल बंकर था। इतिहास में पहले कभी किसी आधुनिक सेना को इतनी तेजी से और ऐतिहासिक तरीके से तबाह नहीं किया गया, किसी को पहले ही दिन भारी मारक क्षमता के साथ पराजित नहीं किया गया।'' -
नई दिल्ली। अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (एएए) के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका के कैलिफोर्निया में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि कैलिफोर्निया में डीजल की औसत कीमत मंगलवार को 7.018 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई, जो एएए के डेटाबेस में दर्ज सबसे ऊंचा स्तर है। इसकी तुलना में, डीजल की मौजूदा यूएस नेशनल औसत कीमत लगभग 5.345 डॉलर प्रति गैलन है।
यूएस मीडिया रिपोर्ट्स ने डीजल की बढ़ती कीमतों की वजह तेल-रिफाइनिंग कैपेसिटी में कमी और ईरान में युद्ध के बीच ग्लोबल एनर्जी शिपमेंट में रुकावट को बताया। कैलिफोर्निया की दो रिफाइनरियां अक्टूबर 2025 में बंद हो गई थीं, जिससे उसकी रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 20 फीसदी खत्म हो गया। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से परिवहन का खर्चा बढ़ रहा है, जिसका असर डीजल से चलने वाले ट्रकों से भेजे जाने वाले खाने-पीने की चीजों, बिल्डिंग मटीरियल और रिटेल सामान पर पड़ सकता है।ईरान में चल रहे युद्ध के बीच कैलिफोर्निया को अभी भी सीमित रिफाइनरी क्षमता का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ग्लोबल शिपमेंट में रुकावट आ रही है। सैन जोकिन फार्म ब्यूरो के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू गेनास्की ने कहा, “बहुत सारी रातें बिना सोए गुजर रही हैं। बहुत तनाव है, और लोग बस अपना बेहतरीन करने की कोशिश कर रहे हैं। फार्म पर आने वाली या फार्म से जाने वाली कोई भी चीज अब ज्यादा महंगी हो गई है।” एएए के मुताबिक, इस नई कीमत ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जिसमें 2022 में यूक्रेन में रूस के युद्ध के पहले कुछ महीने भी शामिल हैं। मिडिल ईस्ट में होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से बहुत सारा तेल रुका हुआ है। अगर स्ट्रेट अभी खुल भी जाता है, तो भी उस सारे तेल को रिफाइनरियों से गुजरना होगा, जिसका मतलब है कि कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी।( - नई दिल्ली। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ बनाए रखी है, इसलिए जापान की सरकार गुरुवार से अपने सरकारी रिजर्व से 30 दिनों का तेल निकालना शुरू करेगी। यह एक बड़े प्लान का हिस्सा है, जिसमें कुल मिलाकर 45 दिनों का तेल निकाला जाएगा। यह अब तक का सबसे बड़ा तेल का हिस्सा है, जो निकाला जाएगा। इसके साथ ही, प्राइवेट सेक्टर के स्टॉक से और तेल निकाला जाएगा ताकि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में बिना किसी रुकावट के काम किया जा सके।जापान के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल स्टॉक में से एक है, जिसमें सरकारी और प्राइवेट रिजर्व मिलाकर लगभग 254 दिनों की खपत है। लेकिन, यह अभी भी अपना 90 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल मिडिल ईस्ट से आयात करता है, जिससे ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल की लड़ाई के दौरान जापान को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि, सरकार ने अब तक एनर्जी बचाने के सख्त नियमों से परहेज किया है, लेकिन सप्लाई की चिंताओं के बीच टॉयलेट पेपर की तेजी से बढ़ती मांग के खिलाफ चेतावनी दी है। जैसे ही फ्यूल की कीमतें 190 येन (1.20 डॉलर) प्रति लीटर के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गईं, जापान ने फ्यूल प्रोडक्ट्स पर सब्सिडी शुरू कर दी है ताकि गैसोलीन की कीमत लगभग 170 येन (1.07 डॉलर) प्रति लीटर पर सीमित रहे।जब एनर्जी की कमी की बात आती है तो जापान अपने कई पड़ोसियों की तुलना में बेहतर तरीके से तैयार है। इसके लिए उसने 1970 के दशक के तेल के झटकों से सीख ली है। 1970 के दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था स्टैगफ्लेशन से प्रभावित हुई थी, जो 1973 के तेल संकट से शुरू हुई थी। योम किप्पुर युद्ध के बाद, अरब तेल प्रोड्यूसर्स ने सप्लाई में कटौती की और कीमतें बढ़ा दीं। कच्चे तेल की कीमतें कुछ ही महीनों में लगभग चार गुना बढ़ गईं, जिससे जापान जैसी इंपोर्ट पर निर्भर अर्थव्यवस्था में दिक्कतें बढ़ गईं।इसका असर बहुत बुरा था। जापान अपने लगभग सारे तेल के लिए आयात पर निर्भर था और युद्ध के बाद उसकी आर्थिक विकास में अचानक से रुकावट देखने को मिली। पैनिक बाइंग फैल गई और 1974 में, दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार जापान की अर्थव्यवस्था सिकुड़ गई, जिससे धीमी ग्रोथ की शुरुआत हुई। दूसरी बार, 1979 के तेल संकट ने कीमतों को फिर से बढ़ा दिया। लेकिन तब तक, जापान ने खुद को ढालना शुरू कर दिया था, एनर्जी एफिशिएंसी में निवेश करना, एनर्जी सोर्स को अलग-अलग करना और रणनीतिक रिजर्व बनाना।
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बगोटा/ कोलंबिया के प्यूर्तो लेग्विजामो में सोमवार को एक सैन्य विमान उड़ान भरने के थोड़ी देर बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिससे कम से कम 66 लोगों की मौत हो गई। कोलंबिया के सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल ह्यूगो अलेजांद्रो लोपेज बरेटो ने कहा, ''दुर्भाग्यवश, इस भयावह दुर्घटना में हमारे 66 सैन्यकर्मियों की मौत हो गई।'' उन्होंने कहा कि चार सैन्यकर्मी लापता हैं। विमान में सैनिकों समेत कुल 121 लोग सवार थे।
इससे पहले प्यूर्तो लेग्विजामो के उपमहापौर कार्लोस क्लेरोस ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि शवों को शवगृह ले जाया गया है और घायलों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्यूर्तो लेग्विजामो इक्वाडोर और पेरु से सटे पुतुमायो प्रांत में स्थित है।
रक्षा मंत्री पेद्रो सांचेज ने 'एक्स' पर कहा कि सैनिकों को पुतुमायो प्रांत के एक अन्य शहर ले जाया जा रहा था। कोलंबिया के मीडिया संस्थानों की ओर से जारी तस्वीरों में घटनास्थल पर धुएं का गुबार उठता हुआ दिख रहा है। वायुसेना ने कहा कि हर्क्यूलिस सी-130 विमान में 110 सैनिक और चालक दल के 11 सदस्यों समेत कुल 121 लोग सवार थे। कोलंबिया वायुसेना के कमांडर कार्लोस फर्नांडो सिल्वा ने कहा कि दुर्घटना कैसे हुई, इसके बारे में विस्तृत जानकारी नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि केवल यह पता चला है कि विमान में कुछ दिक्कत आई और यह हवाई अड्डे से लगभग दो किलोमीटर दूर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। -
कीव. रूस की ओर से यूक्रेन के नागरिक इलाकों पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम 27 लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मॉस्को की सेना ने यूक्रेनी अग्रिम पंक्ति की रक्षा पंक्ति को भेदने के प्रयासों को तेज कर दिया है, जो वसंत ऋतु में होने वाले संभावित जमीनी आक्रमण की शुरुआत हो सकती है। यूक्रेन की वायुसेना के अनुसार, रूस ने रात भर में लगभग 400 लंबी दूरी के ड्रोन दागे, जो हाल के हफ्तों में सबसे बड़ा हमला है। यह हमला मंगलवार सुबह तक जारी रहा, जब दिन के उजाले में भी कई ड्रोन ने राजधानी कीव को निशाना बनाया। यूक्रेन की वायुसेना ने बताया कि इसके अलावा, रूस ने रात में 23 क्रूज मिसाइल और सात बैलिस्टिक मिसाइलें भी दागीं, जिनसे देशभर में कम से कम 10 स्थान प्रभावित हुए। चार साल से भी अधिक समय पहले रूस द्वारा अपने पड़ोसी देश पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू करने के बाद से यूक्रेनी नागरिक लगातार बमबारी का सामना कर रहे हैं। पिछले एक साल में अमेरिका की मध्यस्थता में मॉस्को और कीव के बीच हुई वार्ताओं से कोई राहत नहीं मिली है। रूस ने यूक्रेन के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, वहीं हाल के हफ्तों में ईरान से जुड़े संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के ध्यान को यूक्रेन से हटा दिया है। पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन में फैली लगभग 1,250 किलोमीटर लंबी अग्रिम पंक्ति पर तैनात यूक्रेनी सैनिक बेहतर मौसम के साथ रूस के नए हमले के लिए तैयार हैं। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के प्रमुख जनरल ओलेक्सांद्र सिरस्की ने कहा कि हाल के दिनों में रूसी सैनिकों ने कई रणनीतिक क्षेत्रों में एक साथ रक्षा पंक्तियों को तोड़ने की कोशिश की है।
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एनापोलिस (अमेरिका) .इतालवी खोजकर्ता क्रिस्टोफर कोलंबस की एक प्रतिमा को अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यालय एवं आवास व्हाइट हाउस के पास स्थित आइजनहावर सरकारी कार्यालय परिसर में स्थापित किया गया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा इस कथित विवादित खोजकर्ता को सम्मान देने के प्रयास का हिस्सा है। यह उस प्रतिमा की प्रतिकृति है, जिसे 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान देशभर में संस्थागत नस्लवाद के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच बाल्टीमोर के बंदरगाह में फेंक दिया गया था। ट्रंप पारंपरिक रूप से कोलंबस को 1492 के उस अभियान के नेता के रूप में देखते हैं, जिसे अमेरिका में यूरोपीय उपनिवेशवाद की अनौपचारिक शुरुआत और आधुनिक आर्थिक-राजनीतिक व्यवस्था के विकास का आधार माना जाता है। हालांकि, हाल के वर्षों में कोलंबस को पश्चिमी यूरोप द्वारा 'न्यू वर्ल्ड' उसके संसाधनों और मूल निवासियों के दमन और शोषण के प्रतीक के रूप में भी देखा जाने लगा है। 'न्यू वर्ल्ड' से तात्पर्य अमेरिका (उत्तरी, दक्षिणी और मध्य अमेरिका) और आसपास के द्वीपों से है व्हाइट हाउस ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''इस व्हाइट हाउस में क्रिस्टोफर कोलंबस एक नायक हैं और राष्ट्रपति ट्रंप यह सुनिश्चित करेंगे कि आने वाली पीढ़ियों तक उन्हें इसी रूप में सम्मानित किया जाए।'' मुख्यतः संगमरमर से बनी यह प्रतिमा मैरीलैंड के सेंटरविल स्थित मूर्तिकार विल हेम्सली ने बनाई है।
मूल प्रतिमा को चार जुलाई 2020 को प्रदर्शनकारियों ने गिराकर बाल्टीमोर के इनर हार्बर में फेंक दिया था। यह घटना पुलिस हिरासत में जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद भड़के गुस्से के बीच हुई थी। उसी समय देशभर में कोलंबस की कई प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचाया गया, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि यह इतालवी अन्वेषक अमेरिका के मूल निवासियों के नरसंहार और शोषण के लिए जिम्मेदार था। ट्रंप ने अपने 2024 के चुनावी अभियान के दौरान लगाए आरोप को दोहराया कि ''डेमोक्रेट सदस्यों ने क्रिस्टोफर कोलंबस की छवि और उन्हें पसंद करने वाले इतालवी समुदाय को नुकसान पहुंचाने की हरसंभव कोशिश की है। - काहिरा. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को चेतावनी दी कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके ऊर्जा संयंत्रों को ''नेस्तनाबूद'' कर देगा। ट्रंप ने यह चेतावनी फ्लोरिडा में सप्ताहांत बिताने के दौरान सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए दी।उन्होंने कहा कि ईरान को इस अहम जलमार्ग को खोलने के लिए ठीक 48 घंटे का समय दिया जा रहा है, अन्यथा उसे नए हमलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका ''विभिन्न ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर देगा और इसकी शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।'' तेल की कीमतों में तेजी के बीच ट्रंप पर इस जलडमरूमध्य को सुरक्षित कराने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
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नई दिल्ली। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया है कि उनका देश मुस्लिम देशों के साथ किसी भी तरह का युद्ध या टकराव नहीं चाहता। उन्होंने यह बात ईद-उल-फितर और नवरोज के अवसर पर दिए गए अपने संदेश में कही। ईद-उल-फितर जहां रमजान के महीने के समापन का प्रतीक है, वहीं नवरोज 21 मार्च को मनाया जाने वाला ईरानी नववर्ष है।
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार,राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने हाल के दिनों में ईरान और कुछ अरब देशों के बीच बढ़ते तनाव पर भी बात की। उन्होंने कहा, “हम मुस्लिम देशों के साथ किसी भी तरह का मतभेद नहीं चाहते। हम न तो संघर्ष चाहते हैं और न ही युद्ध। वे हमारे भाई हैं।” उन्होंने इन तनावों के लिए संयुक्त राज्य और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया।उन्होंने आगे कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ सभी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने मध्य पूर्व में मुस्लिम देशों का एक साझा सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव भी रखा, जिससे क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।परमाणु हथियारों के मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में नहीं बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि देश के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही एक धार्मिक आदेश जारी कर चुके हैं, जिसमें परमाणु हथियारों पर रोक लगाई गई है। ऐसे में कोई भी अधिकारी इस दिशा में कदम नहीं उठा सकता।हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका दुनिया को यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है।बता दें कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और आम नागरिकों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों की शृंखला शुरू कर दी, जिसमें इजरायल और मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया गया।














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