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- नयी दिल्ली ।रूसी कच्चे तेल के दूसरे सबसे बड़े खरीदार भारत ने रूसी इकाइयों पर नए प्रतिबंध लगाए जाने से पहले अक्टूबर में रूस से कच्चे तेल की खरीद पर 2.5 अरब यूरो तक खर्च किए हैं। एक यूरोपीय शोध संस्थान ने यह जानकारी दी। अक्टूबर में भारत का रूसी तेल की खरीद पर खर्च सितंबर के समान 2.5 अरब यूरो पर रहा।सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के अनुसार, अक्टूबर में चीन के बाद भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। 22 अक्टूबर को, अमेरिका ने यूक्रेन युद्ध के वित्तपोषण के लिए क्रेमलिन के संसाधनों को कम करने के लिए रूस की दो सबसे बड़े तेल उत्पादक कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकऑयल पर प्रतिबंध लगा दिया था। इन प्रतिबंधों के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड जैसी कंपनियों ने फिलहाल रूसी तेल का आयात रोक दिया है। रूस ने अक्टूबर में छह करोड़ बैरल कच्चा तेल भेजा, जिसमें रोसनेफ्ट और लुकऑयल का कुल मिलाकर 4.5 करोड़ बैरल का योगदान था। सीआरईए ने अपनी मासिक निगरानी रिपोर्ट में कहा, ‘‘भारत रूसी जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना रहा, जिसने कुल 3.1 अरब यूरो का आयात किया। भारत की कुल खरीद में कच्चे तेल का योगदान 81 प्रतिशत (2.5 अरब यूरो) रहा, उसके बाद कोयले का 11 प्रतिशत (35.1 करोड़ यूरो) और तेल उत्पादों का सात प्रतिशत (22.2 करोड़ यूरो) रहा।'' पारंपरिक रूप से मध्य-पूर्वी तेल पर निर्भर भारत ने फरवरी, 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद रूस से अपने आयात में उल्लेखनीय वृद्धि की। पश्चिमी प्रतिबंधों और यूरोपीय मांग में कमी के कारण रूसी तेल भारी छूट पर उपलब्ध हो गया। परिणामस्वरूप, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात थोड़े ही समय में उसके कुल कच्चे तेल आयात के एक प्रतिशत से बढ़कर लगभग 40 प्रतिशत हो गया। सितंबर में, भारत ने कुल 3.6 अरब यूरो खर्च किए थे। इसमें कच्चे तेल पर 2.5 अरब यूरो, कोयले पर 45.2 करोड़ यूरो और तेल उत्पादों पर 34.4 करोड़ यूरो शामिल हैं। सीआरईए के अनुसार, अक्टूबर में भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में माह-दर-माह आधार पर 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जहां निजी रिफाइनरियों का आयात भारत के कुल आयात का दो-तिहाई से अधिक था, वहीं सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने अक्टूबर में माह-दर-माह आधार पर अपने रूसी आयात की मात्रा लगभग दोगुनी कर दी। इसमें कहा गया है कि एक उल्लेखनीय घटनाक्रम में, रोसनेफ्ट के स्वामित्व वाली वाडिनार रिफाइनरी (गुजरात में) - जिस पर अब यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने प्रतिबंध लगा दिया है - ने अक्टूबर में अपना उत्पादन 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। जुलाई में यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बाद, रिफाइनरी केवल रूस से ही कच्चा तेल आयात कर रही है। अक्टूबर में, रूस से उनके आयात में मासिक आधार पर 32 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से उनकी उच्चतम मात्रा थी। रिफाइनरी से निर्यात में उल्लेखनीय गिरावट आई है (पिछले साल इसी महीने की तुलना में 47 प्रतिशत) और यह मई, 2023 के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गया है, सीआरईए ने कहा, ‘‘अक्टूबर में रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली छह भारतीय और तुर्की रिफाइनरियों से प्रतिबंधित देशों के आयात में मासिक आधार पर आठ प्रतिशत की कमी आई, लेकिन यह कमी मुख्य रूप से यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के कारण हुई, जहां मासिक आधार पर क्रमशः नौ प्रतिशत और 73 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके विपरीत, अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया का आयात 140 प्रतिशत बढ़कर 9.3 करोड़ यूरो हो गया और अमेरिका का आयात भी 17 प्रतिशत बढ़कर 12.66 करोड़ यूरो हो गया। इन दोनों देशों ने अभी तक रूसी कच्चे तेल से बने तेल उत्पादों पर प्रतिबंध की घोषणा नहीं की है।''
- नयी दिल्ली । सेंसेक्स की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से आठ के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में बीते सप्ताह सामूहिक रूप से 2,05,185.08 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। सबसे अधिक लाभ में भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज रहीं। पिछले सप्ताह, बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,346.5 अंक या 1.62 प्रतिशत और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 417.75 अंक या 1.64 प्रतिशत चढ़ गया। हाल की कमजोरी के दौर के बाद सप्ताह के दौरान बाजार में जोरदार उछाल आया और अंत में यह मजबूती के साथ बंद हुआ। समीक्षाधीन सप्ताह में भारती एयरटेल का बाजार पूंजीकरण 55,652.54 करोड़ रुपये बढ़कर 11,96,700.84 करोड़ रुपये हो गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की बाजार हैसियत 54,941.84 करोड़ रुपये बढ़कर 20,55,379.61 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) का बाजार मूल्यांकन 40,757.75 करोड़ रुपये बढ़कर 11,23,416.17 करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई बैंक का बाजार पूंजीकरण 20,834.35 करोड़ रुपये बढ़कर 9,80,374.43 करोड़ रुपये रहा। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का बाजार मूल्यांकन 10,522.9 करोड़ रुपये बढ़कर 8,92,923.79 करोड़ रुपये और इन्फोसिस की बाजार हैसियत 10,448.32 करोड़ रुपये बढ़कर 6,24,198.80 करोड़ रुपये हो गई। एचडीएफसी बैंक ने सप्ताह के दौरान 9,149.13 करोड़ रुपये जोड़े और इसका बाजार पूंजीकरण 15,20,524.34 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हिंदुस्तान यूनिलीवर की बाजार हैसियत 2,878.25 करोड़ रुपये बढ़कर 5,70,187.06 करोड़ रुपये रही। इस रुख के उलट बजाज फाइनेंस का बाजार पूंजीकरण 30,147.94 करोड़ रुपये घटकर 6,33,573.38 करोड़ रुपये पर आ गया। भारतीय जीवन बीमा निगम की बाजार हैसियत 9,266.12 करोड़ रुपये घटकर 5,75,100.42 करोड़ रुपये रह गई। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। इसके बाद क्रमश: एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, आईसीआईसीआई बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, बजाज फाइनेंस, इन्फोसिस, भारतीय जीवन बीमा निगम और हिंदुस्तान यूनिलीवर का स्थान रहा।
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नयी दिल्ली. मजबूत वैश्विक संकेतों और कमजोर डॉलर के चलते बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 3,000 रुपये बढ़कर 1,30,900 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। कारोबारियों ने कहा कि अमेरिकी सरकार के ‘शटडाउन' की समाप्ति ने भी सुरक्षित-निवेश का विकल्प मानी जाने वाली परिसंपत्ति की अपील को समर्थन दिया। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत में लगातार तीसरे दिन बढ़त जारी रही, जो बुधवार के 1,27,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के बंद भाव से 3,000 रुपये बढ़कर 1,30,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई। स्थानीय सर्राफा बाजार में, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना पिछले बाजार सत्र में 1,27,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। चांदी की कीमतें बृहस्पतिवार को 7,700 रुपये बढ़कर 1,69,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गईं। बुधवार को यह 5,540 रुपये बढ़कर 1,61,300 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थीं। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला डॉलर इंडेक्स, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा 43 दिन के रिकॉर्ड ‘शटडाउन' को समाप्त करने के लिए विधेयक पारित करने के बाद, 0.20 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.30 पर कारोबार कर रहा था, जिससे सर्राफा कीमतों को समर्थन मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना 41.19 डॉलर या 0.98 प्रतिशत बढ़कर 4,236.84 डॉलर प्रति औंस हो गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘बृहस्पतिवार को सर्राफा बाजार में तेजी जारी रही, जिसे कमजोर डॉलर और दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के कमजोर वृहद आर्थिक आंकड़ों के बाद ब्याज दरों में और कटौती की बढ़ती उम्मीदों का समर्थन मिला।'' उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, फेडरल रिजर्व द्वारा शटडाउन के कारण हुई आंशिक नकदी की कमी को दूर करने के लिए प्रणाली में और अधिक धन डालने की संभावना है, जिसका कीमती धातुओं पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।'' विदेशी व्यापार में हाजिर चांदी 1.13 प्रतिशत बढ़कर 53.86 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
गांधी ने कहा, ‘‘इस सप्ताह चांदी में जोरदार उछाल आया है और अब तक 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। यह उछाल कई तेजी के कारकों से प्रेरित है, जिनमें ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें, आपूर्ति संबंधी चिंताएं, मजबूत औद्योगिक और निवेश मांग, और मजबूत तकनीकी गति शामिल हैं।'' पीएल कैपिटल के रिटेल ब्रोकिंग एवं वितरण के सीईओ और निदेशक संदीप रायचुरा ने कहा कि वैश्विक तनाव कम हो गया है और भारत तथा अन्य प्रमुख देशों के साथ अमेरिका के समझौतों के कारण और भी मुश्किलें आ सकती हैं, जिससे सर्राफा कीमतों पर लगाम लग सकती है। - नयी दिल्ली. । निर्यातक ऋण गारंटी योजना के तहत रियायती दर पर 50 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त कर्ज प्राप्त कर सकते हैं। सरकार ने वित्त के मोर्च पर अल्पकालिक असंतुलन को दूर करने और नए संभावित बाजारों की खोज के लिए निर्यातकों के लिए बुधवार को ऋण गारंटी योजना शुरू की। इसका उद्देश्य अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की आवश्यकता वाले निर्यातकों को दी जाने वाली अतिरिक्त ऋण सुविधा के लिए 100 प्रतिशत गारंटी प्रदान करना है। इस योजना के तहत, निर्यातक स्वीकृत निर्यात कार्यशील पूंजी सीमा के 20 प्रतिशत तक का उपयोग कर सकते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष निर्यातकों को कार्यशील पूंजी सीमा का 20 प्रतिशत तक मिलेगा, जो 50 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होगा। दिशानिर्देश जारी होने की तिथि पर ब्याज दर मौजूदा सुविधा से एक प्रतिशत कम होगी। योजना के तहत ऋण की अवधि पहली वितरण की तिथि से चार वर्ष होगी और इसमें एक वर्ष की ऋण लौटाने को लेकर स्थगन अवधि शामिल होगी। यह योजना राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लि. (एनसीजीटीसी) के दिशानिर्देश जारी करने की तिथि से 31 मार्च, 2026 तक या 20,000 करोड़ रुपये तक की गारंटी जारी होने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्यातकों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से बुधवार को निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसई) शुरू करने को मंजूरी दे दी। इसके तहत एनसीजीटीसी द्वारा सदस्य ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) को 100 प्रतिशत ऋण गारंटी कवरेज प्रदान की जाएगी ताकि एमएसएमई सहित पात्र निर्यातकों को 20,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त ऋण सुविधाएं प्रदान की जा सकें। भारतीय निर्यात पर अमेरिका के भारी शुल्क के कारण निर्यातकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।अमेरिका ने भारत से निर्यात होने वाले सामानों पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाया है। यह 27 अगस्त से प्रभावी है।
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नयी दिल्ली. सरकार के निर्यात का बढावा देने के लिए मंजूर की गई 45,000 करोड़ रुपये की दो योजनाओं से उद्योग को किफायती वित्त, अनुपालन जटिलताओं और ‘ब्रांडिंग' अंतराल जैसी दीर्घकालिक चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। निर्यातकों ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि निर्यात संवर्धन मिशन (25,060 करोड़ रुपये) और ऋण गारंटी योजना (20,000 करोड़ रुपये) भारत के निर्यात परिवेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करेगी। सीआईआई की राष्ट्रीय निर्यात समिति के चेयरमैन एवं पैटन इंटरनेशनल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संजय बुधिया ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य एमएसएमई, पहली बार निर्यात करने वाले और श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सशक्त बनाना है ताकि वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच मजबूती सुनिश्चित हो सके। बुधिया ने कहा, ‘‘ वित्तीय एवं गैर-वित्तीय हस्तक्षेपों को एकीकृत करके यह किफायती वित्त, अनुपालन जटिलताओं और ‘ब्रांडिंग' अंतराल जैसी दीर्घकालिक चुनौतियों का समाधान करता है। साथ ही एमएसएमई के लिए नए अवसरों को खोलता है।" प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में निर्यात संवर्धन मिशन एवं निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना को मंजूरी दी गई। ‘निर्यात संवर्धन मिशन' का उद्देश्य भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करना है खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), पहली बार निर्यात करने वाले और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए...। वहीं निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसई) निर्यातकों के लिए गारंटी-मुक्त ऋण सहायता सुनिश्चित करेगी जिससे वैश्विक बाजार में व्यवधानों से निपटने में मदद मिलेगी। परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) के वाइस चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने कहा कि इन उपायों से उद्योग के सामने आने वाली हालिया चुनौतियों का समाधान करने में मदद मिलेगी। शक्तिवेल ने कहा, ‘‘ इस पहल से वित्त तक पहुंच बढ़ेगी, बाजार की तत्परता में सुधार होगा, भारत का निर्यात परिवेश मजबूत होगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृज्न होगा जिससे भारत की निर्यात वृद्धि को नई गति मिलेगी। '' भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि यह मिशन वैश्विक व्यापार गतिशीलता के लिए आवश्यक निरंतरता, मजबूती और जवाबदेही प्रदान करता है। उन्होंने कहा, यह विशेष रूप से एमएसएमई को सशक्त बनाएगा जिन्हें अक्सर किफायती वित्त एवं अनुपालन सहायता प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
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नई दिल्ली। भारत और नेपाल ने गुरुवार को रेल-आधारित माल ढुलाई को बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार में बढ़ोतरी होगी। यह समझौता जोगबनी (भारत) और विराटनगर (नेपाल) के बीच रेलवे माल ढुलाई को सुगम बनाएगा, जिसमें विस्तारित परिभाषा के तहत बल्क कार्गो भी शामिल है। यह उदारीकरण प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर – कोलकाता-जोगबनी, कोलकाता-नौतनवा (सुनौली) और विशाखापत्तनम-नौतनवा (सुनौली) तक विस्तारित है, जिससे दोनों देशों के बीच मल्टी-मॉडल ट्रेड कनेक्टिविटी और तीसरे देशों के साथ नेपाल के व्यापार को मजबूती मिलेगी।
भारत और नेपाल ने ट्रांजिट समझौते के प्रोटोकॉल में संशोधन करते हुए एक विनिमय पत्र का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और उनके नेपाली समकक्ष अनिल कुमार सिन्हा भी मौजूद थे।यह विनिमय पत्र कंटेनरयुक्त और थोक माल, दोनों के लिए जोगबनी-विराटनगर रेल संपर्क के साथ सीधी रेल कनेक्टिविटी को सक्षम बनाता है, जिससे कोलकाता और विशाखापत्तनम बंदरगाहों से नेपाल के विराटनगर के पास मोरंग जिले में स्थित नेपाल सीमा शुल्क यार्ड कार्गो स्टेशन तक परिवहन सुगम हो जाता है। भारत सरकार की अनुदान सहायता से निर्मित इस रेल संपर्क का उद्घाटन 1 जून 2023 को भारत और नेपाल के प्रधानमंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।बैठक में एकीकृत चेक पोस्ट और अन्य बुनियादी ढांचे के विकास सहित सीमा पार संपर्क और व्यापार सुविधा को बढ़ाने के लिए चल रही द्विपक्षीय पहलों का भी स्वागत किया गया। भारत नेपाल का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश भागीदार बना हुआ है, जो उसके बाहरी व्यापार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन नए उपायों से दोनों देशों और उसके बाहर आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों को और मजबूत करने की उम्मीद है।यह समझौता 29 अक्टूबर को भारत-नेपाल समझौतों पर हस्ताक्षर के तुरंत बाद हुआ है, जिसके तहत दोनों देशों के बीच उच्च क्षमता वाली क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइनों के विकास के लिए दो ज्वाइंट वेंचर संस्थाएं शुरू करने का फैसला लिया गया है। भारत के सरकारी कंपनी पावरग्रिड और नेपाल विद्युत प्राधिकरण के बीच संयुक्त उद्यम और शेयरधारकों के समझौतों पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल और नेपाल के ऊर्जा, जल संसाधन एवं सिंचाई मंत्री कुलमन घीसिंग की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने के लिए दो ज्वाइंट वेंचर – एक भारत में और एक नेपाल में – के गठन का प्रावधान है। -
नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से टैरिफ लगाए जाने के बावजूद भारत 2027 तक 6.5 प्रतिशत की विकास दर के साथ जी20 देशों में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। यह जानकारी रेटिंग एजेंसी मूडीज की ओर से दी गई।
मूडीज की ‘ग्लोबल मैक्रो आउटलुक रिपोर्ट 2026-27’ के अनुसार, भारत की विकास दर मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, घरेलू मांग और निर्यात विविधता से संचालित हैमूडीज ने अपनी ‘ग्लोबल मैक्रो आउटलुक रिपोर्ट 2026-27’ में कहा कि भारत की विकास दर मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश, मजबूत घरेलू मांग और निर्यात विविधता से से संचालित हो रही है।रिपोर्ट में कहा गया, “भारतीय निर्यातक कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ का सामना कर रहे हैं और अपने निर्यात को दूसरे देशों में रिडायरेक्ट करने में सफल हुए हैं, जिससे सितंबर में देश के कुल निर्यात में 6.75 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। हालांकि, अमेरिका को निर्यात में 11.9 प्रतिशत की गिरावट हुई है।”रिपोर्ट के अनुसार, सकारात्मक निवेशक भावना से बढ़े अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह ने बाहरी झटकों को कम कर तरलता बनाए रखी हैरिपोर्ट में कहा गया कि आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी ने देश को विकास के स्थिर रास्ते पर रखा है। आरबीआई ने अक्टूबर में अपनी रेपो दर को स्थिर रखा, जिससे पता चलता है कि वह मुद्रास्फीति कम होने और विकास मजबूत होने के साथ नीति को लेकर सतर्क है।रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सकारात्मक निवेशक भावना से प्रेरित मजबूत अंतरराष्ट्रीय पूंजी प्रवाह ने बाहरी झटकों को कम करने और तरलता बनाए रखने में मदद की है। हालांकि, घरेलू मांग विकास का प्राथमिक इंजन बनी हुई है, लेकिन निजी क्षेत्र को अभी भी बड़े पैमाने पर व्यावसायिक निवेश के लिए पूरी तरह से विश्वास हासिल करना बाकी है।रिपोर्ट के अनुसार, एडवांस अर्थव्यवस्थाओं की धीमी वृद्धि के बीच वैश्विक विकास स्थिर रहेगा, जबकि उभरते बाजार मजबूत बने रहेंगेरिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक विकास स्थिर लेकिन धीमा रहेगा, क्योंकि एडवांस अर्थव्यवस्थाएं मामूली रूप से बढ़ रही हैं और अधिकतर उभरते बाजार मजबूत गति बनाए रखेंगे। रिपोर्ट में 2026 और 2027 में वैश्विक विकास दर लगभग 2.5 से 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में स्थिर लेकिन असमान विस्तार को दर्शाता है।एडवांस अर्थव्यवस्थाओं में लगभग 1.5 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है, जबकि उभरते बाजारों में 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने की संभावना हैएडवांस अर्थव्यवस्थाओं में लगभग 1.5 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है, जबकि उभरते बाजारों में 4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका में धीमी लेकिन स्थिर गति देखी जा रही है, जिसे मामूली उपभोक्ता खर्च और एआई-संबंधित निवेश से समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट में बताया गया कि चीन की विकास दर 2025 में 5 प्रतिशत से घटकर 2027 तक 4.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।( -
नई दिल्ली। भारत के वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर ने 2025 की तीसरी तिमाही में 9.2 मिलियन वर्ग फुट के अब्सॉर्प्शन के साथ क्रमिक आधार पर आगे बढ़ते हुए 64 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करवाई है।
वर्कप्लेस सॉल्यूशन फर्म वेस्टियन की एक रिपोर्ट बताती है कि देश भर में अब्सॉर्प्शन को लेकर मुंबई का 4.29 मिलियन वर्ग फुट अब्सॉर्प्शन यानी 47 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक योगदान रहा, जो कि तिमाही आधार पर 377 प्रतिशत और सालाना आधार पर 10 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।फर्म ने कहा कि इस मजबूत वृद्धि के बावजूद नेशनल लेवल अब्सॉर्प्शन को लेकर एक वर्ष की समान अवधि की तुलना में 36 प्रतिशत की गिरावट रही। रिपोर्ट में बताया गया है कि रिन्यूड ऑक्यूपायर्स ने मुंबई के माइक्रो मार्केट्स भिवंडी और पनवेल को लेकर मांग बढ़ाई, जिससे दोनों ने मिलकर कुल अब्सॉर्प्शन के 96 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शहर की रिकवरी को लेकर योगदान दर्ज करवाया।वेस्टियन में फ्रिक्स सीईओ श्रीनिवास राव ने कहा, “वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर ने 2025 की तीसरी तिमाही में रिवाइवल के संकेत दिए हैं। इस तिमाही के प्रदर्शन को लेकर मुंबई, कोलकाता और एनसीआई अब्सॉर्प्शन को लीड कर रहे हैं।”महत्वपूर्ण माइक्रो-मार्केट्स में ऑक्यूपायर मांग को लेकर बढ़त और ई-कॉमर्स एंड 3पीएल सेगमेंट में रिन्यूड गति सेक्टर की बढ़ती गहनता और डायवर्सिफिकेशन को दर्शाता है।मुंबई के बाद एनसीआर ने 1.28 वर्ग फीट अब्सॉर्प्शन के साथ दूसरा स्थान हासिल किया, जिसने तिमाही आधार पर 83 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसी तरह, चेन्नई ने 1.13 वर्ग फीट अब्सॉर्प्शन के साथ 7 तिमाहियों में अपना सबसे उच्च लीजिंग लेवल हासिल किया, जो कि क्रमिक आधार पर 151 प्रतिशत और सालाना आधार पर 38 प्रतिशत की वृद्धि थी।रिपोर्ट के अनुसार, कोलकाता ने 1.26 मिलियन वर्ग फुट अब्सॉर्प्शन के साथ अपना सबसे उच्च तिमाही अब्सॉर्प्शन दर्ज किया, जो कि पिछली तिमाही की तुलना में 950 प्रतिशत और सालाना आधार पर 186 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। -
नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार के कारोबार सत्र में सपाट बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 12.16 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 84,478.67 और निफ्टी 3.35 अंक की मामूली तेजी के साथ 25,879.15 पर बंद हुआ।
दिन के दौरान बैंकिंग शेयरों में तेजी देखने को मिली और निफ्टी बैंक ने नया ऑल-टाइम हाई 58,615.95 बनाया। हालांकि, बाद में इसमें गिरावट देखने को मिली और यह 107.30 अंक या 0.18 प्रतिशत की मजबूती के साथ 58,381.95 पर बंद हुआ।सेंसेक्स पैक में एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, एलएंडटी, पावर ग्रिड, बजाज फिनसर्व, भारती एयरटेल, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट और एचसीएल टेक गेनर्स थे। इटरनल (जोमैटो), एमएंडएम, टाटा स्टील, बीईएल, टीसीएस, एचयूएल, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा और एसबीआई लूजर्स थे।लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में कमजोरी देखी जा रही है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 210.25 अंक या 0.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 60,692.05 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 66.80 अंक या 0.37 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 18,183.65 पर था।बाजार के जानकारों ने कहा कि भारतीय इक्विटी बाजारों में वैश्विक और घरेलू बाजार कारकों के कारण तेजी देखने को मिली थी, लेकिन मुनाफावसूली के कारण यह सपाट बंद हुआ है। अक्टूबर में महंगाई दर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के कारण मेटल और रियल्टी में तेजी देखी गई।आने वाले समय में निवेशकों की निगाहें बिहार चुनाव के नतीजों और भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर होंगी।भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत हल्की गिरावट के साथ हुई थी। सुबह 9:24 पर सेंसेक्स 116 अंक या 0.13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 84,349 और 34 अंक या 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,851 पर था।इसके अतिरिक्त, दिन के दौरान रुपए ने भी एक सीमित दायरे में काम किया और यह डॉलर के मुकाबले 88.67 के स्तर के करीब बना रहा। - नयी दिल्ली. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत व्यापार समझौतों में किसानों, डेयरी और श्रमिकों के हितों से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि भारत अपने मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए रूस जैसे नए बाजारों की तलाश कर रहा है, जो अमेरिका में भारी शुल्क के कारण समस्याओं का सामना कर रहा है। उन्होंने यहां उद्योग समागम-2025 में कहा, ‘‘ हम एक अच्छे व्यापार समझौते के लिए काम कर रहे हैं। भारत किसानों, डेयरी और श्रमिकों के हितों से समझौता नहीं करेंगे... हम एक निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं।'' यह राज्यों के उद्योग और वाणिज्य मंत्रियों का सम्मेलन है।मंत्री ने कहा, ...यह (व्यापार समझौता) कल हो सकता है, अगले महीने हो सकता है, अगले साल हो सकता है... हालांकि, एक सरकार के रूप में हम किसी भी आकस्मिक स्थिति का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं।''
- मुंबई. देश में अगस्त-अक्टूबर के दौरान भर्तियों में सालाना आधार पर 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई। उपभोक्ता भावना में सुधार, आकर्षक त्योहारी पेशकशों और भौगोलिक विस्तार के दम पर यह वृद्धि दर्ज की गई। कार्यबल समाधान प्रदाता एडेको इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 की समान अवधि की तुलना में इस वर्ष ‘गिग' (अल्पकालिक) और अस्थायी नौकरियों में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आंतरिक आंकड़ों एवं बाहरी रिपोर्ट के विश्लेषण पर आधारित इस रिपोर्ट में कहा गया कि दशहरा से पहले और उसके बाद के हफ्तों में खुदरा, ई-कॉमर्स, बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा), लॉजिस्टिक्स तथा आतिथ्य क्षेत्रों में अस्थायी कर्मचारियों की मांग में तेज उछाल देखने को मिला। एडेको ने 2025 में 2.16 लाख ‘गिग' और अस्थायी नौकरियों का अनुमान लगाया था लेकिन सिर्फ तीन महीनों में ही इस क्षेत्र में अस्थायी भर्ती में 37 प्रतिशत और ‘गिग वर्कर' की तैनाती में 15-20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जो मौसमी मांग की मजबूती को दर्शाता है। 'गिग वर्कर' से तात्पर्य काम के आधार पर भुगतान पाने वाले अल्पकालिक कर्मचारियों से है।एडेको इंडिया के निदेशक एवं प्रमुख (जनरल स्टाफिंग) दीपेश गुप्ता ने कहा, ‘‘ इस वर्ष भारत में त्योहारों के दौरान भर्ती आर्थिक विश्वास और ‘गिग' अर्थव्यवस्था की परिपक्वता दोनों को दर्शाती है। भर्ती का परिमाण एवं पारिश्रमिक भुगतान पिछले तीन वर्ष से अधिक रहे हैं जिससे 2025, कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद सबसे मजबूत वर्ष बन गया है।'' उन्होंने कहा, ‘‘ 2024 की तुलना में ‘गिग' और अस्थायी भर्ती में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि महिला कार्यबल की भागीदारी 30-35 प्रतिशत बढ़ी है खासकर खुदरा, ग्राहक सेवा, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाओं से जुड़े कार्यों में...।'' रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर), मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे महानगर की कुल भर्ती में सबसे अधिक 75-80 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। हालांकि, मझोले एवं उभरते शहरों में मांग में अधिक तेजी आई जहां सालाना आधार पर 21-25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। एडेको के आंकड़ों के अनुसार लखनऊ, जयपुर, कोयंबटूर, भुवनेश्वर, नागपुर और मैसूर जैसे शहरों में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो महानगरों में दर्ज 14 प्रतिशत वृद्धि से अधिक है। इसके अलावा कानपुर, कोच्चि, विजयवाड़ा और वाराणसी जैसे नए बाजार भी 18-20 प्रतिशत के साथ अल्पकालिक रोजगार के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं जो भारत के मजबूत कार्यबल के भौगोलिक विस्तार को दर्शाते हैं।
- नयी दिल्ली. घरेलू उपभोग का दैनिक सामान बनाने वाली कंपनी बजाज कंज्यूमर केयर लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 33 प्रतिशत बढ़कर 42.3 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी का गत वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 31.85 करोड़ रुपये था। बजाज कंज्यूमर केयर लिमिटेड ने सोमवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि समीक्षाधीन तिमाही में उसकी परिचालन आय बढ़कर 265.27 करोड़ रुपये हो गई जो एक साल पहले इसी अवधि में 233.98 करोड़ रुपये थी। कंपनी ने कहा कि वस्तुओं की बिक्री से प्राप्त राजस्व 261.41 करोड़ रुपये रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी तिमाही में यह 230.63 करोड़ रुपये था। जुलाई–सितंबर 2025 तिमाही में कंपनी का कुल व्यय 221.7 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 204 करोड़ रुपये था।
- नयी दिल्ली. वाहनों के लिए टायर बनाने वाली कपंनी जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने सोमवार को भारत के यात्री वाहन खंड के लिए देश के पहले 'एम्बेडेड स्मार्ट' टायर पेश किए। कंपनी ने यह भी कहा कि वह अगले पांच से छह वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की योजना बना रही हैं। इस निवेश का मकसद टायर विनिर्माण की क्षमता बढ़ाना है। कंपनी के अनुसार, मध्य प्रदेश स्थित बानमोर (मध्य प्रदेश) संयंत्र में डिजाइन और विकसित किए गए इन टायरों में टायर की संरचना के भीतर उन्नत सेंसर लगाए गए हैं। ये सेंसर लगातार वायु दाब, तापमान और संभावित वायु रिसाव जैसे महत्वपूर्ण मानकों की निगरानी करते हैं और चालक को त्वरित जानकारी उपलब्ध कराते हैं जिससे वाहन की सुरक्षा, प्रदर्शन और ईंधन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होता है।जेके टायर का कहना है कि यह तकनीकी उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत' और ‘मेक इन इंडिया' अभियानों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाती है। टायरों के पेश करने के अवसर पर कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक डॉ. रघुपति सिंघानिया ने कहा, “एम्बेडेड स्मार्ट टायर को पेश करना जेके टायर की नवाचार यात्रा में एक मील का पत्थर है। हमारी मजबूत शोध एवं विकास (आरएंडडी) और विनिर्माण क्षमताओं के बल पर हम भारत में मोबिलिटी को और अधिक स्मार्ट, सुरक्षित और टिकाऊ बना रहे हैं। यह हमारी प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता और कनेक्टेड यातायात के भविष्य को नेतृत्व देने के दृष्टिकोण का प्रतीक है।” कंपनी ने बताया कि एम्बेडेड स्मार्ट टायरों को जेके टायर के विक्रय केंद्रों के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा। प्रारंभिक चरण में ये टायर 14 से 17 इंच के आकारों में प्रस्तुत किए जाएंगे।डॉ. सिंघानिया ने कहा, “अगले पांच से छह वर्षों के लिए हम अब 5,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की योजना बना रहे हैं, ताकि कार और ट्रक टायरों दोनों की क्षमता बढ़ाई जा सके। इसमें से कुछ इकाइयां विशेष रूप से निर्यात के लिए होंगी।” वर्तमान में कंपनी के कुल राजस्व में 14 प्रतिशत हिस्सेदारी निर्यात की है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजारों में भारत के लिए अच्छे अवसर दिखाई दे रहे हैं और कंपनी इन अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहती है।
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नई दिल्ली। भारी उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। बाजार की तेजी में सबसे अधिक योगदान आईटी, मेटल और ऑटो सेक्टर ने दिया।
दिन के दौरान सेंसेक्स ने 83,936.47 का उच्चतम स्तर और 83,124.03 का न्यूनतम स्तर छुआ और 335.97 अंक या 0.40 प्रतिशत बढ़कर 83,871.32 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी ने 25,715.80 के उच्चतम स्तर और 25,449.25 के न्यूनतम स्तर को छुआ और 120.60 अंक या 0.47 प्रतिशत की तेजी के साथ 25,694.95 पर था।सेंसेक्स पैक में बीईएल, एमएंडएम, अदाणी पोर्ट्स, एचसीएल टेक, इटरनल, इन्फोसिस, भारती एयरटेल, सन फार्मा, एलएंडटी, एचयूएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, ट्रेंट, टेक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, मारुति सुजुकी और एनटीपीसी टॉप गेनर्स थे। बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, कोटक महिंद्रा बैंक, पावरग्रिड और टाटा स्टील लूजर्स थे।लार्जकैप की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप का प्रदर्शन मिलाजुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 302.75 अंक या 0.50 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,427 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 37.20 अंक या 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,101.40 पर था।बाजार के जानकारों ने कहा कि दिल्ली ब्लास्ट की चिंताओं के चलते घरेलू शेयर बाजार लाल निशान में खुला। हालांकि, मजबूत वैश्विक संकेतों और अमेरिका में शटडाउन समाप्त होने के चलते बाजार में रिकवरी देखने को मिली है। वहीं, दूसरी तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर आने के कारण बाजार में तेजी देखी जा रही है।उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में निवेशकों का फोकस महंगाई के आंकड़ों पर होगा, जिससे बाजार की आगे की दिशा तय होगी।भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी। सुबह 9:32 पर सेंसेक्स 191 अंक या 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,332 और निफ्टी 55 अंक या 0.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,518 पर था। -
चांदी 2,460 रुपये चढ़ी
नयी दिल्ली/ मजबूत वैश्विक संकेतों और कमजोर डॉलर के बीच सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 1,300 रुपये बढ़कर 1,25,900 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत शुक्रवार के 1,24,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की तुलना में 1,300 रुपये बढ़कर 1,25,300 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) हो गई। स्थानीय सर्राफा बाजार में, पिछले बाजार सत्र में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,24,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘सुरक्षित निवेश की मौजूदा मांग और कमजोर अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों के कारण सोने में सकारात्मक रुख के साथ कारोबार फिर से शुरू हुआ, जिससे अगले महीने होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें बढ़ गई है।'' उन्होंने कहा कि कमजोर डॉलर ने सर्राफा को और समर्थन दिया है।
एसोसिएशन के अनुसार, इसके अलावा, सोमवार को चांदी की कीमतें 2,460 रुपये बढ़कर 1,55,760 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) हो गईं। शुक्रवार को यह 1,53,300 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। वैश्विक स्तर पर, हाजिर सोना 83.12 डॉलर या 2.08 प्रतिशत बढ़कर 4,082.84 डॉलर प्रति औंस हो गया, जबकि हाजिर चांदी 3.30 प्रतिशत बढ़कर 49.93 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी। एलकेपी सिक्योरिटीज के जिंस और मुद्रा के उपाध्यक्ष (शोध विश्लेषक) जतिन त्रिवेदी ने कहा, ‘‘कमजोर डॉलर और अमेरिकी सरकार के कामकाज फिर से शुरू होने के बाद सकारात्मक धारणा के कारण सोने की कीमतों में तेजी आई। अब ध्यान अमेरिका में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और भारत में सीपीआई और डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति के आंकड़ों सहित प्रमुख मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर केंद्रित है, जो अल्पकालिक बाजार की दिशा तय करेंगे।'' एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘हालिया अमेरिकी व्यापक आर्थिक आंकड़ों से पता चला है कि नवंबर में उपभोक्ता धारणा लगभग 3.5 साल के निचले स्तर पर आ गई है, और निजी रिपोर्ट अक्टूबर में नौकरियों के नुकसान का संकेत दे रही हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में आर्थिक और नीतिगत अनिश्चितता कीमती धातुओं के लिए अनुकूल बनी हुई है। आने वाले सप्ताह में, हमें उम्मीद है कि सोना और चांदी सकारात्मक रुझान के साथ व्यापक दायरे में मजबूत रहेंगे।'' - नयी दिल्ली। केंद्र ने अक्टूबर से शुरू होने वाले 2025-26 चीनी सत्र के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने का फैसला किया है। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने यह जानकारी दी। जोशी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया को सात नवंबर को लिखे पत्र में कहा कि केंद्रीय खाद्य मंत्रालय ने शीरा पर से 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क हटाने का भी निर्णय लिया है। देश में गन्ना किसानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए निर्यात संबंधी निर्णय की जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई। जोशी ने कहा, ''चालू चीनी सत्र के लिए भी केंद्र सरकार ने 15 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति देने का फैसला किया है और शीरे पर 50 प्रतिशत निर्यात शुल्क हटा दिया गया है।'' भारत ने सितंबर में समाप्त हुए 2024-25 चीनी सत्र के दौरान 10 लाख टन आवंटन के मुकाबले लगभग आठ लाख टन चीनी का निर्यात किया।
- बिलासपुर । एनटीपीसी सीपत में देश की सबसे बड़ी विद्युत उत्पादक कंपनी, नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (NTPC) का 51वां स्थापना दिवस उत्साह, गर्व और उल्लास के साथ मनाया गया। समारोह की शुरुआत कार्यकारी निदेशक एवं परियोजना प्रमुख श्री विजय कृष्ण पाण्डेय को केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवानों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान करने से हुई। तत्पश्चात् उन्होंने एनटीपीसी ध्वज फहराकर स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ किया।अपने संबोधन में श्री पाण्डेय ने एनटीपीसी के गौरवशाली 50 वर्षों की यात्रा को स्मरण करते हुए सभी कर्मचारियों को 51वें स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी लिमिटेड आज देशभर में लगभग 108 विद्युत स्टेशनों के माध्यम से करीब 85,000 मेगावाट की स्थापित क्षमता के साथ कार्य कर रही है और देश के हर चौथे बल्ब को रोशन करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है।परियोजना प्रमुख ने छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी 2,980 मेगावाट की सीपत सुपर थर्मल पावर परियोजना की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि निर्माणाधीन 800 मेगावाट की स्टेज-III इकाई का कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि एनटीपीसी सीपत न केवल विद्युत उत्पादन में बल्कि नैगम सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), पर्यावरण संरक्षण और नवाचार के क्षेत्रों में भी सराहनीय योगदान दे रही है।स्थापना दिवस के अवसर पर एनटीपीसी सीपत द्वारा पर्यावरण संरक्षण और हरित भारत के लक्ष्य को साकार करने के उद्देश्य से एक विशेष पौधारोपण अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान के अंतर्गत एक ही दिन में कुल 4,000 पौधे लगाए गए, जिनमें से 2,000 पौधे ग्राम करमा में तथा 2,000 पौधे परियोजना परिसर में रोपे गए। इसी अवसर पर 160 किलोवाट क्षमता के रूफटॉप सोलर पैनल का भी शुभारंभ किया गया, जो हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एनटीपीसी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।इसके साथ ही हाल ही में मनाए गए सतर्कता जागरूकता सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी इस अवसर पर सम्मानित किया गया।समारोह में मुख्य अतिथि ने एनटीपीसी सीपत की सफलता में सहयोग दे रहे केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, संगवारी महिला समिति, विभिन्न यूनियन एवं एसोसिएशन, बाल भारती पब्लिक स्कूल, संस्कृति क्लब, वैशाली क्लब, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, डाकघर, इंडियन कॉफी हाउस तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं के समर्पित योगदान की सराहना की और सभी को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं।कार्यक्रम में मुख्य महाप्रबंधक, महाप्रबंधकगण, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी, यूनियन एवं एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से केक काटकर स्थापना दिवस का उत्सव मनाया। समारोह का समापन एनटीपीसी के थीम रंगों से सजे रंग-बिरंगे गुब्बारों के आकाश में उड़ान भरने के साथ हुआ, जिसने उत्साह और एकता का सुंदर संदेश दिया।इसके पश्चात् कर्मचारियों ने एनटीपीसी के इंजीनियरिंग ऑफिस कॉम्प्लेक्स, नोएडा में आयोजित केंद्रीय स्थापना दिवस समारोह का सीधा प्रसारण देखा, जहां एनटीपीसी लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री गुरदीप सिंह ने समस्त कर्मचारियों को शुभकामनाएं दीं और कंपनी की उल्लेखनीय उपलब्धियों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की।यह आयोजन न केवल एनटीपीसी की दीर्घकालीन उपलब्धियों का उत्सव रहा, बल्कि हरित ऊर्जा, नवाचार और राष्ट्र निर्माण के प्रति संगठन की सतत प्रतिबद्धता का भी प्रतीक बना।
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भिलाई |सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहले सात माह (अप्रैल से अक्टूबर 2025) के दौरान उत्पादन के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज की हैं। इस अवधि में संयंत्र ने हॉट मेटल, क्रूड स्टील, सेलेबल स्टील और रेल उत्पादन व रेल लोडिंग सहित प्रमुख क्षेत्रों में अपने पिछले रिकॉर्डों को पार करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। सर्वश्रेष्ठ अप्रैल से अक्टूबर रिकॉर्ड के साथ ही संयंत्र ने अक्टूबर माह में उत्पादन के प्रमुख मापदंडों में भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है|
अप्रैल से अक्टूबर अवधि में संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेस-8 ने 16,27,246 टन हॉट मेटल का उत्पादन कर वित्त वर्ष 2024-25 के इसी अवधि में दर्ज 15,85,796 टन के पिछले सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड को पार किया।संयंत्र के रेल एवं स्ट्रक्चरल मिल ने लॉन्ग रेल उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज करते हुए 13 वर्ष पूर्व के रिकॉर्ड को पार किया| आरएसएम ने वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से अक्टूबर अवधि में 1,03,661 टन उत्पादन दर्ज करते हुए वित्त वर्ष 2012-13 में दर्ज 88,072 टन के रिकॉर्ड को ध्वस्त किया| सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र की माॅडेक्स इकाई, यूआरएम ने इस अवधि में 5,55,856 टन फिनिश्ड रेल, 5,35,414 टन प्राइम रेल तथा 5,18,056 टन लाँग रेल उत्पादन रिकॉर्ड दर्ज करते हुए क्रमशः वित्त वर्ष 2024-25 के इसी अवधि में दर्ज 5,15,744 टन फिनिश्ड रेल, 4,88,445 टन प्राइम रेल तथा वर्ष 2023-24 में दर्ज 4,54,059 टन लाँग रेल उत्पादन रिकॉर्ड को पार किया। इसी क्रम में कुल फिनिश्ड रेल उत्पादन 8,33,422 टन तथा कुल प्राइम रेल उत्पादन 7,62,652 टन दर्ज किया गया।भिलाई इस्पात संयंत्र के सभी फिनिशिंग मिलों ने मिलकर वित्त वर्ष 2025-26 की पहले सात माह (अप्रैल से अक्टूबर 2025) के दौरान कुल 27,49,741 टन फिनिश्ड स्टील उत्पादन किया जो वर्ष 2024-25 में दर्ज 27,29,269 टन से अधिक है। संयंत्र ने 31,66,980 टन सेलेबल स्टील उत्पादन कर वर्ष 2023-24 में दर्ज 30,26,672 टन के रिकाॅर्ड को पार किया।सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने अप्रैल से अक्टूबर 2025 अवधि के दौरान कुल क्रूड स्टील उत्पादन 33,39,021 टन दर्ज करते हुए वित्त वर्ष 2023-24 के 32,96,837 टन के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा| संयंत्र की माॅडेक्स इकाई, एसएमएस-3 ने कुल इस्पात उत्पादन के साथ-साथ इसी अवधि में सर्वश्रेष्ठ कास्ट स्टील उत्पादन 20,46,028 टन तथा बिलेट उत्पादन 13,91,193 टन का रिकाॅर्ड बनाया है, जो कि वर्ष 2024-25 में दर्ज किए गए 20,04,640 टन कास्ट स्टील और 13,39,079 टन बिलेट उत्पादन रिकाॅर्ड से अधिक है।अप्रैल से अक्टूबर 2025 अवधि के दौरान रेल डिस्पैच के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज करते हुए संयंत्र के आरएसएम और यूआरएम ने लॉन्ग रेल लोडिंग का रिकॉर्ड बनाया| इस क्रम में आरएसएम से 1,02,553 टन और यूआरएम से 5,31,445 टन लोडिंग रिकॉर्ड दर्ज किया गया जो कि वित्त वर्ष 2023-24 के इसी अवधि में दर्ज क्रमशः 87,141 टन व 4,66,063 टन लोडिंग रिकॉर्ड से कहीं अधिक है| साथ ही कुल लॉन्ग रेल लोडिंग 6,33,998 टन दर्ज किया गया, जो कि वर्ष 2023-24 में दर्ज 5,53,204 टन से बेहतर है तथा कुल प्राइम रेल लोडिंग 7,43,560 टन करते हुए वर्ष 2020-21 के सर्वश्रेष्ठ लोडिंग रिकॉर्ड 7,05,658 टन को पार किया| इसके अतिरिक्त सेलेबल स्टील लोडिंग 31,94,329 टन दर्ज किया गया, जो कि वर्ष 2023-24 में दर्ज 29,89,466 टन से कहीं अधिक है|अप्रैल से अक्टूबर 2025 में संयंत्र ने उत्पादन के साथ-साथ तकनीकी-आर्थिक मापदंडों के क्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया है| संयंत्र की ब्लास्ट फर्नेसों ने हाॅट मेटल के उत्पादन में 428 किलोग्राम प्रति टन कोक दर प्राप्त किया जो वर्ष 2024-25 में दर्ज किए गए 433 किलोग्राम प्रति टन हाॅट मेटल (टीएचएम) से बेहतर है। ब्लास्ट फर्नेस-6 ने सर्वश्रेष्ठ 108 किलोग्राम प्रति टीएचएम सीडीआई दर दर्ज कर वित्त वर्ष 2022-23 के 104 किलोग्राम प्रति टीएचएम के पिछले सर्वश्रेष्ठ स्तर को पार किया। संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेसों (बीएफ 1-8) की उत्पादकता 2 टन/एम³/दिन दर्ज की गई, जो कि वर्ष 2024-25 में दर्ज 1.88 टन/एम³/दिन से अधिक है। श्रम उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि 748 टी/एम/वाई दर्ज की गई, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 650 टी/एम/वाई से बेहतर है। -
नई दिल्ली। कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में सपाट बंद हुआ। बाजार के अंत में सेंसेक्स 94.73 अंक या 0.11 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,216.28 और निफ्टी 17.40 अंक या 0.07 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,492.30 पर बंद हुआ।
लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप स्टॉक्स में मजबूत खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 374.55 अंक या 0.63 प्रतिशत की मजबूती के साथ 59,843.15 पर था। हालांकि, स्मॉलकैप शेयरों में हल्की गिरावट हुई और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 29.05 अंक या 0.16 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,075.95 पर था।सेक्टोरल आधार पर, निफ्टी मेटल (1.41 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.76 प्रतिशत), निफ्टी पीएसयू बैंक (0.87 प्रतिशत), निफ्टी प्राइवेट बैंक (0.44 प्रतिशत) और निफ्टी कमोडिटीज (0.39 प्रतिशत) तेजी के साथ बंद हुए। दूसरी तरफ, निफ्टी आईटी (0.62 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (0.36 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (0.49 प्रतिशत) और निफ्टी इन्फ्रा (1.00 प्रतिशत) गिरावट के साथ बंद हुए।सेंसेक्स पैक में बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, एमएंडएम, बजाज फिनसर्व, आईसीआईसीआई बैंक, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, पावर ग्रिड, एशियन पेंट्स, सन फार्मा, कोटक महिंद्रा बैंक और मारुति सुजुकी गेनर्स थे। भारती एयरटेल, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, एचसीएल टेक, एचयूएल, आईटीसी, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई और एक्सिस बैंक लूजर्स थे।बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार में शुरुआती नुकसान के बाद सपोर्ट स्तरों से रिकवरी देखने को मिली। इसमें वित्तीय शेयरों विशेषकर सरकारी बैंकों ने अच्छा प्रदर्शन किया।जानकारों ने आगे कहा कि बाजार में निवेशकों की निगाहें यूएस शटडाउन और अमेरिका-भारत एवं अमेरिका-चीन ट्रेंड डील पर है, जिससे बाजार की आगे की दिशा तय होगी।भारतीय बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी। सुबह करीब 9 बजकर 27 मिनट पर सेंसेक्स 571 अंक या 0.69 प्रतिशत की गिरावट के साथ 82,739.75 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 169.10 अंक या 0.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,340.60 स्तर पर बना हुआ था। -
नई दिल्ली। भारत में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में अक्टूबर में कुल 850 मिलियन डॉलर का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है, जिससे इस साल कुल इनफ्लो रिकॉर्ड 3.05 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो गोल्ड ईटीएफ में निवेश का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह जानकारी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्लूजीसी) की ओर से जारी किए गए डेटा में दी गई।
हालांकि, अक्टूबर में दर्ज किया गया इनफ्लो सितंबर में आए 911 मिलियन डॉलर के मुकाबले 6 प्रतिशत कम है, लेकिन एशिया में यह दूसरा सबसे बड़ा मासिक इनफ्लो रहा है।डेटा के मुताबिक, यह लगातार पांचवां महीना है, जब गोल्ड में इनफ्लो सकारात्मक रहा है, जिसे कुल एयूएम 11.3 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। वैश्विक स्तर पर बीते महीने ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ इनफ्लो 8.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।अक्टूबर के दौरान गोल्ड ईटीएफ निवेश में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर रहा। वहीं, अमेरिका 6.33 अरब डॉलर के निवेश के साथ पहले स्थान और 4.51 अरब डॉलर के साथ चीन दूसरे स्थान पर रहा। जापान 499.5 मिलियन डॉलर के साथ चौथे और फ्रांस 312 मिलियन डॉलर के साथ पांचवें स्थान पर था।दूसरी तरफ, बीते महीने कई यूरोपीय बाजारों में गोल्ड ईटीएफ से निकासी देखने को मिली, जिसमें 3.5 अरब डॉलर के साथ यूके शीर्ष पर था। इसके बाद जर्मनी और इटली का स्थान था।ग्लोबल गोल्ड ईटीएफ एयूएम मासिक आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर 503 अरब डॉलर हो गया है और कुल होल्डिंग 1 प्रतिशत बढ़कर 3,893 टन रह गई है। इस साल सोने की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है, जिसने बड़ी संख्या में निवेशकों को आकर्षित किया है।इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 1,20,231 रुपए है। हाल के महीनों में सोने में आई तेजी की अहम वजह वैश्विक अस्थिरता, रूस-यूक्रेन एवं हमास-इजरायल युद्ध और अमेरिकी टैरिफ हैं। -
नई दिल्ली। भारत के ऑटो सेक्टर ने इस साल के त्योहारी सीजन में अब तक का रिकॉर्डतोड़ बिक्री की है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के अनुसार, इस बार 42 दिनों के त्योहारी सीजन में गाड़ियों की रिटेल बिक्री 21% बढ़कर 52,38,401 यूनिट्स पर पहुंच गई, जो पिछले साल के 43,25,632 यूनिट्स से कहीं अधिक है। इस दौरान पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री 23 फीसदी बढ़कर 7,66,918 यूनिट्स तक पहुंच गई। जबकि, टू-व्हीलर बिक्री में 22% की बढ़त दर्ज की गई, जो 40,52,503 यूनिट्स रही।
फाडा अध्यक्ष सी. एस. विग्नेश्वर ने बताया कि यह त्योहारी सीजन भारत के ऑटो रिटेल इतिहास में एक “मील का पत्थर” साबित हुआ है। GST 2.0 ने वह किया जो लंबे समय से अपेक्षित था। इससे मिडिल क्लास के लिए गाड़ियां खरीदना किफायती और आसान हुआ। कॉम्पैक्ट और सब-4 मीटर कारों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।Auto Sales: GST 2.0 बना गेमचेंजर , EVs का बढ़ा क्रेजफाडा रिपोर्ट के अनुसार, टू-व्हीलर सेगमेंट में सुधार बेहतर रूरल सेंटीमेंट, बेहतर लिक्विडिटी और जीएसटी में कमी की वजह से आया। स्कूटर और कम्यूटर बाइक्स की बिक्री मजबूत रही, वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर भी उपभोक्ताओं की दिलचस्पी बढ़ी है। थ्री-व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट ने क्रमशः 9% और 15% की वृद्धि दर्ज की।विग्नेश्वर ने कहा कि ऑटोमोबाइल्स की रिकॉर्ड बिक्री से साफ है कि जीएसटी 2.0 केवल टैक्स सुधार नहीं, बल्कि उपभोग आधारित विकास का इंजन है। इससे गाड़ी खरीदना सस्ता हुआ है। अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा आई है और उपभोक्ताओं में उम्मीदें फिर जाग उठी हैं।अक्टूबर में भी रिकॉर्ड Auto Salesअक्टूबर महीने में, ऑटोमोबाइल खुदरा बिक्री साल-दर-साल 41 फीसदी बढ़कर 40,23,923 यूनिट्स हो गई, जो पैसेंजर और टू-व्हीलर्स दोनों की रिकॉर्ड मंथली बिक्री के चलते हुई। पिछले महीने पैसेंजर व्हीकल्स का रजिस्ट्रेशन बढ़कर 5,57,373 यूनिट्स हो गया, जो अक्टूबर 2024 में बेची गई 5,00,578 यूनिट्स की तुलना में 11 फीसदी ज्यादा है। इसी प्रकार, टूव्हीलर्स की बिक्री साल-दर-साल 52 फीसदी बढ़कर अक्टूबर में 31,49,846 यूनिट्स हो गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 20,75,578 थी।विग्नेश्वर ने कहा कि पैसेंजर व्हीकल्स और टूव्हीलर्स, दोनों ने अपना आल टाइम हाई बनाया है। जिससे कुल खुदरा बिक्री में जबरदस्त उछाल आया। यह कंज्यूमर कॉन्फिडेंस और मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत है। सितंबर के शुरुआती 21 दिनों में GST 2.0 ट्रांजिशन के चलते बिक्री धीमी रही, लेकिन अक्टूबर में मांग ने जबरदस्त वापसी की।थ्रीव्हीलर्स की खुदरा बिक्री अक्टूबर में साल-दर-साल 5 फीसदी बढ़कर 1,29,517 यूनिट्स हो गई, जबकि कॉमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री में पिछले महीने की इसी अवधि की तुलना में 18 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई।पैसेंजर व्हीकल्स सेगमेंट में मारुति शीर्ष परपैसेंजर व्हीकल्स सेगमेंट में मारुति सुजुकी ने 18 फीसदी की ग्रोथ के साथ 2.39 लाख यूनिट्स बेचकर शीर्ष पर रही। इसके बाद टाटा मोटर्स 13 फीसदी बढ़कर 75,352 यूनिट्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा 9 फीसदी बढ़कर 67,918 यूनिट्स पर पहुंच गई। हालांकि, हुंडई मोटर इंडिया की खुदरा बिक्री में 7 फीसदी की गिरावट देखी गई, जो अक्टूबर 2025 में घटकर 65,442 यूनिट्स रह गई।टूव्हीलर्स में हीरो मोटोकॉर्प शीर्ष पर रही। इसकी बिक्री 72 फीसदी बढ़कर 994,787 यूनिट्स हो गई, जबकि अक्टूबर 2024 में यह 577,678 यूनिट्स थी। होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया की बिक्री भी 48 फीसदी बढ़कर 821,976 यूनिट्स और टीवीएस मोटर की बिक्री 58 फीसदी बढ़कर 558,075 यूनिट्स हो गई।अगले 3 महीने में अच्छी ग्रोथ की उम्मीदफाडा के अनुसार, अगले तीन महीनों में ऑटो रिटेल का रुझान सकारात्मक रहेगा। जीएसटी 2.0 का प्रभाव, स्थिर रूरल इनकम और शादियों व फसलों से होने वाली सीजनल डिमांड से खुदरा बिक्री को बूस्ट मिला है। रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारी सीजन में बुकिंग, बेहतर स्टॉक उपलब्धता और नए मॉडल लॉन्च से खुदरा बिक्री में तेजी बनी रहने की उम्मीद है, जिसे साल के अंत में ऑफर और नए साल के रजिस्ट्रेशन से सपोर्ट मिलेगा। -
नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी एलआईसी का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 32 प्रतिशत बढ़कर 10,053 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 की जुलाई- सितंबर तिमाही में 7,621 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने बृहस्पतिवार को शेयर को दी जानकारी में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में उसका कुल आय बढ़कर 2,39,614 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान में 2,29,620 करोड़ रुपये थी। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी की शुद्ध प्रीमियम आय बढ़कर 1,26,479 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,19,901 करोड़ रुपये थी। समीक्षाधीन तिमाही के दौरान नवीकरण प्रीमियम बढ़कर 64,996 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 61,910 करोड़ रुपये था। हालांकि, इस अवधि के दौरान प्रथम वर्ष का प्रीमियम घटकर 10,836 करोड़ रुपये रह गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 11,201 करोड़ रुपये था। सरकार द्वारा 22 सितंबर से व्यक्तिगत जीवन बीमा प्रीमियम को 18 प्रतिशत के माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से छूट दिए जाने के बावजूद प्रथम वर्ष के प्रीमियम में गिरावट देखी गई। एलआईसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) और प्रबंध निदेशक आर दुरईस्वामी ने कहा, ‘‘हम एलआईसी में सरकार द्वारा सितंबर, 2025 में बीमा उद्योग के लिए घोषित जीएसटी बदलाव के सकारात्मक प्रभाव को लेकर बेहद उत्साहित हैं। हमें दृढ़ विश्वास है कि ये परिवर्तन ग्राहकों के सर्वोत्तम हित में हैं और भारत में जीवन बीमा उद्योग की विकास गति को और तेज करेंगे।'
- नयी दिल्ली. मारुति सुजुकी इंडिया ने घरेलू बाजार में तीन करोड़ इकाइयों की संचयी बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है। देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी ने बुधवार को बयान में कहा कि उसने 28 साल दो महीने में पहली बार एक करोड़ संचयी बिक्री का आंकड़ा पार किया था। फिर एक करोड़ इकाइयां सात साल पांच महीने में बेची गईं। इसमें कहा गया कि घरेलू बाजार में इसके बाद एक करोड़ इकाइयां छह वर्ष चार महीने के रिकॉर्ड समय में बेची गईं। भारत में बेची गई तीन करोड़ इकाइयों में से ऑल्टो सबसे लोकप्रिय मॉडल बनकर उभरी जिसकी 47 लाख से अधिक इकाइयां बिकीं। इसके बाद 34 लाख इकाइयों के साथ वैगन आर दूसरे स्थान और 32 लाख से अधिक इकाइयों के साथ स्विफ्ट तीसरे स्थान पर रही।वाहन विनिर्माता ने बताया कि कॉम्पैक्ट एसयूवी ब्रेजा और फ्रोंक्स भी कंपनी के खंड में सबसे अधिक बिकने वाले शीर्ष दस वाहनों में शामिल हैं। मारुति सुजुकी इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिसाशी ताकेउची ने कहा, ‘‘ प्रति 1,000 व्यक्तियों पर लगभग 33 वाहनों की कार उपलब्धता के साथ, हम जानते हैं कि हमारी यात्रा अभी समाप्त नहीं हुई है।'' उन्होंने कहा कि कंपनी अधिक से अधिक लोगों तक परिवहन का आनंद पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास करती रहेगी। मारुति सुजुकी ने 14 दिसंबर 1983 को अपने पहले ग्राहक को मारुति 800 की आपूर्ति की थी। यह वर्तमान में 19 मॉडल में 170 से अधिक संस्करण पेश करती है।
- नयी दिल्ली. ओला इलेक्ट्रिक ने अपने 4680 भारत सेल से चलने वाले एस1 प्रो प्लस स्कूटर की डिलिवरी शुरू कर दी है। कंपनी बुधवार को यह जानकारी दी। कंपनी ने कहा कि एस1 प्रो प्लस (5.2 किलोवाट घंटा) उसका पहला ऐसा स्कूटर है जिसमें पूरी तरह भारत में बनी 4680 भारत सेल बैटरी लगी है। यह बैटरी पहले से ज्यादा रेंज, बेहतर प्रदर्शन और बढ़ी हुई सुरक्षा प्रदान करती है। ओला ने बताया कि अपनी खुद की बैटरी सेल और पैक बनाकर अब वह भारत की पहली कंपनी बन गई है जो पूरी तरह से घरेलू स्तर पर बैटरी निर्माण करती है। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘4680 भारत सेल से चलने वाले वाहनों की डिलिवरी शुरू होना भारत के लिए वास्तविक ऊर्जा स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ा कदम है।'
- नयी दिल्ली. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि भारत वैश्विक मंच पर आज एक तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है और शीघ्र ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। सीतारमण ने यहां दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत आज अपनी आर्थिक ताकत के दम पर अपने पैरों पर खड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘ हमें जो सबसे अलग बनाता है, वह 2014 में 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से अब पांचवीं और फिर चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बनना है। संभवतः जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने वाले हैं।'' उन्होंने कहा कि सरकार अब तक 2.5 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी की स्थिति से बाहर निकालने में सफल रही है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन-स्तर जैसे कई मानदंड शामिल होते हैं। वित्त मंत्री ने बैंकों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के बही-खाते सात-आठ साल पहले की ‘दोहरी बही-खाता समस्या' की तुलना में काफी मजबूत हो चुके हैं। दोहरी बही-खाता समस्या का मतलब बैंकों और उद्योगों दोनों पर भारी वित्तीय दबाव होने से है। इसमें जहां अधिक कर्ज के कारण कंपनियां ऋण चुकाने में चूक करती हैं, वहीं इससे बैंकों का एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) बढ़ती है। इसके साथ ही सीतारमण ने भरोसा जताया कि सरकार चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत राजकोषीय घाटे के निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहेगी। केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए राजकोषीय घाटा देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.4 प्रतिशत यानी 15.69 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है।

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