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प्रभु श्रीराम का जीवन आदर्श जीवन संहिताः डॉ. मंजूषा

 0- महाराष्ट्र मंडल में नवरात्रि के पहले ही दिन से रामायण के पात्रों पर चर्चा

0-  पहले दिन राजा दशरथ, कौशल्या, प्रभु राम व धोबी के चरित्र पर वक्ताओं ने डाला प्रकाश
 
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में नवरात्रि में रामायण के पात्रों की चर्चा के दौरान डॉ. मंजूषा वैशंपायन ने कहा कि रामायण हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। प्रभु श्रीराम के जीवन को आदर्श जीवन संहिता कहा जाता है।एक अन्य वक्ता अभिषेक बक्षी ने कहा कि रामायण में धोबी का पात्र हमें किसी भी काम को करने के पहले सोचने और उसे समझने की सलाह देता है। दूसरे के कहने पर न चलें, बल्कि संपूर्ण जानकरी हासिल कर स्वयं निर्णय लें। आरती ठोंबरे ने माता कौशल्या और छत्तीसगढ़ के परिदृश्य में कहा कि छत्तीसगढ़ से भगवान श्रीराम को गहरा नाता है। पहला तो यह कि छत्तीसगढ़ उनका ननिहाल है। दूसरा यह कि अपने वनवास काल में श्रीराम ने सर्वाधिक समय दण्यकारण्य यानी हमारे बस्तर के जंगलों में बिताया। 
आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में रामनवमी उत्सव पर राम कथा के विभिन्न पात्रों पर 30 मार्च से 6 अप्रैल तक व्याख्यान माला आयोजित किया गया है। इसके पहले दिन डाॅ. मंजूषा वैशंपायन ने कहा कि आज के युग में जहां भाई- भाई से धन संपत्ति के लिए लड़ रहे हैं। वहीं श्रीराम और भरत का त्याग यह सिखाता है कि एक- दूसरे के सुख में सुखी कैसे रहना चाहिए। श्रीराम का जन्म केवल रावण का वध करने के लिए नहीं, बल्कि पृथ्वी पर पुनः धर्म की स्थापना करने के लिए हुआ था। 
*10 चक्कों के रथ पर चलने वाले राजा कहलाए दशरथ*
10 चक्कों के रथ पर चलने वाले राजा अयोध्या नरेश दशरथ कहलाए। हालांकि उनका नाम दशरथ रखे जाने की सविस्तार कथा अभिषेक बक्षी ने बताई। बक्षी ने एक साथ 10 दिशाओं में युद्ध करने की क्षमता रखने वाले राजा दशरथ के जन्म से लेकर मृत्यु तक कई अहम् जानकारियां प्रचलित कथाओं के माध्यम से दी।
*छत्तीसगढ़ में भांजा रामतुल्य*
प्रभु श्रीराम की मां कौशल्या पर चर्चा करते हुए आरती ठोमरे कहतीं हैं कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का ननिहाल दक्षिण कोसल है। यह दक्षिण कोसल असल में हमारा छत्तीसगढ़ ही है। यहां राजधानी रायपुर के निकट चंदखुरी यानी कौशल्याधाम में माता कौशल्या का प्रदेश का इकलौता मंदिर स्थित है। यहां प्रभु श्रीराम माता की गोद में बाल रूप में विराजमान है। छत्तीसगढ़ में भगवान राम का ननिहाल होने के कारण यहां की संस्कृति में बहन के बेटे यानी भांजे को रामतुल्य माना जाता है, इसलिए यहां के लोग अपने भांजे का पैर छूते है। आरती ने कौशल्या के विभिन्न स्वरूपों के गुणों की चर्चा कर उनके व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। 
 आस्था काले ने बताया कि रामायण के पात्रों की चर्चा से पहले श्रीराम का पूजन, राम रक्षा स्त्रोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। वहीं अंत में धनश्री पेंडसे ने सुमधुर भजन प्रस्तुत कर सभी को राम नाम पर झूमने पर मजबूर कर दिया। आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।

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