बैकयार्ड कुक्कुट योजना से बदली ग्रामीण पशुपालक की किस्मत
*अभनपुर के पशुपालक श्री रजनीश कोसले ने मुर्गी पालन से पाई आर्थिक मजबूती, रोज़ाना हो रही है नियमित आय*
रायपुर/ छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित बैकयार्ड कुक्कुट ईकाई वितरण योजना छोटे एवं गरीब पशुपालकों के लिए वरदान साबित हो रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य कम लागत में उन्नत तकनीक से कुक्कुट पालन को बढ़ावा देना, अंडा व मांस उत्पादन में वृद्धि करना तथा हितग्राहियों के परिवारों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।
योजना का लाभ लेकर अभनपुर विकासखंड के ग्राम छछानपैरी निवासी पशुपालक श्री रजनीश कोसले ने अपनी आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाया है। जिला प्रशासन द्वारा प्रदाय 90 चूज़ों एवं दाना से उन्होंने मुर्गी पालन प्रारंभ किया। अब तक वे 50 मुर्गियों के विक्रय से लगभग 20 हजार रुपए की आमदनी प्राप्त कर चुके हैं। साथ ही वे प्रतिदिन 30 अंडे 10 रुपए प्रति नग की दर से बेचकर 300 रुपए की नियमित आय अर्जित कर रहे हैं।
लगातार हो रही आमदनी से श्री कोसले के जीवन स्तर में सुधार आया है और वे आत्मविश्वास के साथ मुर्गी पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। उन्होंने इस सफलता के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की यह योजना ग्रामीण युवाओं और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उल्लेखनीय है कि बैकयार्ड कुक्कुट इकाई वितरण योजना के तहत 28 दिवसीय उन्नत नस्ल के मुर्गी/बतख चूजे अथवा बटेर चूजे, दाना एवं परिवहन सहित 3000 रुपए की इकाई उपलब्ध कराई जाती है। इसमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग को 90 प्रतिशत तथा सामान्य एवं अन्य पिछड़ा वर्ग को 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।


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