जिला अस्पताल प्रबंधन के कठिन निर्णय से, रेफरल करने से सुरक्षित हुई कई प्रसूताओं की सेहत
बालोद. जिला मातृ-शिशु अस्पताल (MCH) में प्रबंधन की संवेदनशीलता और बेहतर निर्णय से अस्पताल की सेवाएं निरंतर चालू है, जिससे किसी भी प्रसूता की स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा नहीं आ रही है । तकनीकी नियमों का पालन करते हुए प्रशासन ने एक संक्रमित महिला को बेहतर उपचार के लिए रायपुर भेजा, ताकि अस्पताल की सेवाएं निरंतर चालू रह सकें।
सिविल सर्जन डॉ आर के श्रीमाली ने बताया कि अस्पताल में भर्ती एक प्रसूता की रिपोर्ट 'पॉजिटिव' आने के बाद प्रबंधन के सामने दो रास्ते थे। मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार, संक्रमित मरीज के ऑपरेशन के बाद ओटी (OT) को 24 घंटे के लिए फ्यूमिगेट (संक्रमण मुक्त) करना अनिवार्य होता है। अस्पताल में वर्तमान में एक ही ओटी क्रियाशील है। यदि वहां संक्रमित मरीज का ऑपरेशन किया जाता, तो ओटी अगले 24 घंटे के लिए सील हो जाता। इससे अस्पताल में भर्ती अन्य प्रसूताओं के ऑपरेशन रुक जाते और उन्हें भी आपात स्थिति में रेफर करना पड़ता।
प्रबंधन ने अन्य महिलाओं के आपरेशन को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया कि अस्पताल की सेवाएं ठप न हों। 'पॉजिटिव' मरीज को उच्च स्तरीय सुविधाओं वाले मेकाहारा अस्पताल (रायपुर) रेफर किया गया, जहाँ संक्रमित मरीजों के लिए पृथक व्यवस्था उपलब्ध है। इस निर्णय से बालोद अस्पताल का ओटी सील होने से बच गया और वहां भर्ती अन्य महिलाओं का समय पर सफल ऑपरेशन संपन्न हो सका। इससे न केवल संसाधनों का सही संतुलन बना, बल्कि कई परिवारों को अनावश्यक परेशानी से भी बचा लिया गया।













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