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स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने की प्रशासनिक पहल

 - संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा को पेंशन प्रकरण लंबित होने की देनी होगी जानकारी
 दुर्ग / जिले की शासकीय स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने की प्रशासनिक पहल की गई है। ऑनलाईन फोटो के माध्यम से स्कूलों में शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति की नियमित मॉनिटरिंग होगी। कलेक्टर श्री पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने आज शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक में विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने में विभागीय पहल की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों के कार्यालयों में संलग्नीकरण की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का कार्य स्कूलों में अध्यापन कराने का है। उनकी सेवाएं स्कूलों में ली जाए ना कि कार्यालयों में। अधिकारियों ने अवगत कराया कि किसी भी कार्यालय में शिक्षक संलग्न नहीं है। विभागीय पेंशन प्रकरण की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि 27 लंबित प्रकरण में से 5 पुराने प्रकरण संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा कार्यालय में लंबित है। कलेक्टर श्री मीणा ने पेंशन के लंबित प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा को जिले के समस्त लंबित पेंशन प्रकरण की विभागवार जानकारी उपलब्ध कराने निर्देशित किया है। उन्होंने कहा कि कोष एवं लेखा कार्यालय में लंबित पेंशन प्रकरणों की साप्ताहिक समीक्षा समय-सीमा की बैठक में होगी। आवश्यक जानकारी के साथ कोष एवं लेखा कार्यालय के अधिकारी/कर्मचारी को समय-सीमा की बैठक में उपस्थिति सुनिश्चित करना होगा। कलेक्टर ने स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति की जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति की नियमित मानिटरिंग ऑनलाईन फोेटो के माध्यम से की जा रही है। जिले के 583 शासकीय प्राथमिक, 337 अपर प्राथमिक, 50 हाई स्कूल, 85 हायर सेकेण्डरी स्कूल व 52 सजेस के प्रधानपाठक/प्राचार्य शिक्षकों एवं स्कूली बच्चों की नियमित उपस्थिति की फोटो अपलोड कर रहे हैं। कलेक्टर ने कहा कि शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति पर विभागीय प्रक्रिया की प्रतिदिन की रिपोर्ट होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से 16 जून 2023 से अब तक की कम्पलायन रिपोेर्ट उपलब्ध कराने कहा। कलेक्टर ने अधिकारियों को विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता परखने मासिक टेस्ट के लिए प्रश्नावली हेतु शिक्षकों का पैनल तैयार करने तथा रिजल्ट ऑनलाईन एन्ट्री कराने कहा। उन्होंने कहा कि सजेस विद्यालयों की उपस्थिति की एन्ट्री पृथक से होनी चाहिए। कलेक्टर ने जिले में समावेशी शिक्षा और सुघ्घर पढ़वइया के संबंध में भी जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि समग्र शिक्षा योजना अंतर्गत जिले में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का आकलन, चिन्हांकन एवं नामांकन पश्चात् कुल 21 प्रकार की विविध बाधिता वाले 3080 बच्चों का चिन्हांकन किया गया है। समस्त दिव्यांग बच्चों के लिए बाधा मुक्त शिक्षा की परिकल्पना करते हुए चिन्हांकित समस्त बच्चों का प्रशस्त एप के माध्यम से यू-डाईस में प्रविष्टि कराया जा चुका है। इसी प्रकार जिले के 918 विद्यालयों में सुघ्घर-पढ़वइया में चुनौती लिया। जिसमें 4 विद्यालय ने प्लेटिनम, एक विद्यालय ने गोल्ड का सर्टिफिकेट प्राप्त किया है। file photo

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