कामाक्षी मंदिर और माताधाम से निकलीं भव्य कलशयात्राएं
- टी सहदेव
भिलाई नगर। ट्विनसिटी स्थित आंध्रवासियों के दो प्रमुख धार्मिक स्थलों कामाक्षी मंदिर और माताधाम मंदिर में आयोजित शारदीय नवरात्र महोत्सव के अंतिम दिन सोमवार को भव्य कलशयात्राएं निकाली गईं। दोनों कलशयात्राएं शाम को निकाली गईं, जिसमें बड़ी संख्या में शामिल कन्याएं और महिलाएं अपने सर पर कलश रखकर पैदल निकलीं। भक्ति गीतों और गाजे बाजे की धुन पर झूमते-नाचते श्रद्धालु इस दौरान माता के जयकारे भी लगाए। दोनों कलशयात्राएं सेक्टरों के प्रमुख मार्गों से होते हुए, वापस मंदिर परिसरों में समाप्त हो गईं।
कन्याओं को उपहार देकर विदा किया
एक ओर सेक्टर 05 स्थित कामाक्षी मंदिर में नवरात्र के अंतिम दिन हरे रंग के नूतन वस्त्र में सुसज्जित माता जी का सुबह अभिषेक कराया गया और उसके बाद कन्याभोज कराया गया, तो वहीं दूसरी तरफ सेक्टर 07 स्थित माताधाम मंदिर में भी माता जी का अभिषेक कराने के पश्चात कन्याभोज कराया गया। इन कन्याओं को पूड़ी-सब्जी खिलाने के बाद उपहार के रूप में चॉकलेट, चुनरी और श्रीफल दिए गए। इस अवसर पर यजमान के रूप में नीलम चन्ना केशवुलु दंपति बैठे। माता के दरबार में भाजयुमो के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मनीष पांडे ने भी पूजा-अर्चना की। कन्याभोज के बाद दोपहर को महाभंडारा आयोजित किया गया। जबकि कामाक्षी मंदिर प्रांगण में रात को कलशयात्रा के बाद महाभंडारा रखा गया। दोनों ही परिसरों में आयोजित महाभंडारे में सैकड़ों की तादाद में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। कामाक्षी मंदिर में तो पूरे नौ दिनों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली।
गरबा पंडालों में दिखा युवाओं का जोश
छग अग्निकुल क्षत्रिय समाज और मां मंकिनम्मा जनकल्याण सेवा समिति के बैनर तले आयोजित दोनों महोत्सवों में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। जिनमें माता जी की गोदभराई, कुमकुम पूजा, यज्ञ-हवन, अक्षराभ्यास, नव दुर्गा अवतार का नाट्यमंचन, शास्त्रीय नृत्य, चित्र कला तथा रंगोली प्रतियोगिताएं, ऑर्केस्ट्रा और संगीत कार्यक्रम प्रमुख रूप से शामिल रहे। हरदिन रात को रास-गरबा भी आयोजित किया गया। जिसमें युवाओं का जोश इतना ज्यादा था कि वे शाम ढलते ही गरबा पंडाल में जमा हो जाते थे। रास-गरबा तथा प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत भी किया गया।




.jpg)










Leave A Comment