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 सेवा की कहानी- छोटे कमरे से बड़े कारोबार तक का सफर

0- मशरूम उत्पादन ने प्रेमलता साहू को बनाया आत्मनिर्भर
0- बिहान योजना से मिला आर्थिक संबल, मेहनत और लगन से बनीं ‘लखपति दीदी’
0- परिवार को मिला खुशहाली और सम्मान का नया आधार
बालोद. कभी कच्चे मकान में रहने वाले परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करने वाली ग्राम मुल्ले की श्रीमती प्रेमलता साहू आज अपनी मेहनत और लगन से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन गई हैं। घर के एक छोटे से कमरे से मशरूम उत्पादन की शुरुआत करने वाली प्रेमलता आज बड़े हॉल में मशरूम का उत्पादन कर रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर उन्होंने अपने छोटे से प्रयास को आजीविका के मजबूत साधन में बदल दिया है। उनकी मेहनत का ही परिणाम है कि आज वे प्रतिमाह लगभग 60 से 70 हजार रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।
प्रेमलता साहू की यह कहानी केवल आर्थिक तरक्की की कहानी नहीं है, बल्कि एक ग्रामीण महिला के आत्मविश्वास, संघर्ष, स्वाभिमान और अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए किए गए प्रयासों की प्रेरणादायक मिसाल भी है।
छोटे कमरे से शुरू हुआ सफर, आज बड़े हॉल में हो रहा मशरूम उत्पादन
जिले के बालोद विकासखंड के ग्राम मुल्ले निवासी श्रीमती प्रेमलता साहू ने मशरूम उत्पादन की शुरुआत घर के एक छोटे से कमरे से की थी। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत के साथ इस काम को लगातार आगे बढ़ाती रहीं। धीरे-धीरे उन्हें मशरूम उत्पादन में सफलता मिलने लगी और उनकी आमदनी भी बढ़ने लगी।
इस दौरान छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से मिले सहयोग और ऋण का उपयोग उन्होंने मशरूम उत्पादन के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने में किया। इससे उनके व्यवसाय का विस्तार हुआ और वे बड़े हॉल में व्यवस्थित रूप से मशरूम का उत्पादन करने लगीं।
आज प्रेमलता साहू का यह प्रयास उनकी आर्थिक मजबूती का आधार बन चुका है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, मेहनत और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी अपने छोटे से व्यवसाय को बड़े आजीविका के साधन में बदल सकती हैं।
बिहान योजना से मिला सहारा, अपने पैरों पर खड़ी हुईं प्रेमलता
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महिला स्व-सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। बिहान योजना से जुड़ने के बाद प्रेमलता साहू को भी अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। समूह के माध्यम से प्राप्त ऋण ने उन्हें मशरूम उत्पादन की व्यवस्था बढ़ाने और अपनी उत्पादन क्षमता में सुधार करने में मदद की।
आज वे अपने व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 60 से 70 हजार रुपए की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। इस आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उन्हें अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में पहले से अधिक सहूलियत मिली है।
प्रेमलता की सफलता यह संदेश देती है कि महिलाओं को आर्थिक अवसर और उचित सहयोग मिले, तो वे न केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निभा सकती हैं, बल्कि अपने व्यवसाय के माध्यम से समाज में भी एक नई पहचान बना सकती हैं।
बालोद के मशरूम की बढ़ी मांग, दूसरे शहरों तक पहुंच रहा उत्पाद
प्रेमलता साहू द्वारा उत्पादित ताजा मशरूम की मांग स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के शहरों में भी है। उनके उगाए गए मशरूम दुर्ग, चारामा, गुरूर और दल्लीराजहरा के बाजारों तक पहुंच रहे हैं। इससे उन्हें अपने उत्पादों के लिए व्यापक बाजार मिला है और व्यवसाय को आगे बढ़ाने का प्रोत्साहन भी मिल रहा है।
उनका अपना अनुभव बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और बाजार की मांग के अनुसार छोटे व्यवसाय शुरू करके भी अच्छी आमदनी अर्जित की जा सकती है। मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियां महिलाओं के लिए घर और गांव के आसपास ही रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित हो सकती हैं।
कच्चे मकान से पक्के घर तक, परिवार के सपनों को मिले नए पंख
प्रेमलता साहू के जीवन में आया बदलाव केवल उनकी आमदनी तक सीमित नहीं है। एक समय उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान मिलने से उनके परिवार को सुरक्षित और बेहतर आवास की सुविधा मिली। आज उनका परिवार पांच कमरों के पक्के मकान में रह रहा है। घर में नल-जल योजना के माध्यम से पेयजल की सुविधा भी उपलब्ध है।
आर्थिक स्थिति में सुधार आने से प्रेमलता अपने बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए भी प्रयास कर रही हैं। वे चाहती हैं कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और जीवन में आगे बढ़ें। अपने परिवार को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का उनका सपना अब धीरे-धीरे साकार हो रहा है।
एक महिला के लिए अपने परिवार को सुरक्षित घर, बच्चों को बेहतर शिक्षा और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध करा पाना बड़ी उपलब्धि है। प्रेमलता साहू की कहानी इसी आत्मविश्वास और संतोष को दर्शाती है।
महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बनीं प्रेमलता
श्रीमती प्रेमलता साहू की सफलता बताती है कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल आमदनी बढ़ाना नहीं, बल्कि महिलाओं को अपने फैसले लेने, अपने पैरों पर खड़े होने और परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर देना भी है।
बिहान योजना के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को मिलने वाला सहयोग ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते खोल रहा है। प्रेमलता जैसी महिलाएं अपनी मेहनत से न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार अपनाने और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे रही हैं।
अपनी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्रीमती प्रेमलता साहू ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं और बिहान समूह से मिले सहयोग ने उन्हें अपना व्यवसाय आगे बढ़ाने तथा परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में बड़ी मदद की है।
प्रेमलता साहू की कहानी उन सभी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को पूरा करने में कठिनाई महसूस करती हैं। उनका सफर बताता है कि छोटा सा प्रयास भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकता है। मेहनत, आत्मविश्वास और सही अवसरों के सहारे एक महिला न केवल अपनी तकदीर बदल सकती है, बल्कि अपने पूरे परिवार के जीवन में खुशहाली ला सकती है। आज प्रेमलता साहू की पहचान एक ऐसी आत्मनिर्भर महिला के रूप में है, जिन्होंने मशरूम उत्पादन को अपनी ताकत बनाया और ‘लखपति दीदी’ बनकर महिला सशक्तिकरण की नई ईबारत लिखी है।

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