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 लोकतंत्र के पर्व में दिखा जज्बा, दिव्यांग शबनम ने की होम वोटिंग

-अपने ही हाथों से हस्ताक्षर कर मतपेटी में मतपत्र डाल किया मतदान
-चेहरें में आई खिलखिलाहट, माता श्रीमती इंदिरा ने धन्यवाद देते हुए सभी मतदाताओं से मतदान करने की अपील
 रायपुर  / टवेल्थ फेल फिल्म में एक दृश्य इंटरव्यू का है। फिल्म के नायक यूपीएससी परीक्षा का इंटरव्यू दिलाने बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत होते हैं। बोर्ड उनसे कहता है कि जब हमारे पास आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थानों से पढ़े लोग हैं तो हम एक टवेल्थ फेल कैंडीडेट को क्यों चुने। फिल्म का नायक कहता है कि क्योंकि मैंने कठिन परिस्थितियों का सामना कर यह मुकाम हासिल किया है। आप एवरेस्ट में आक्सीजन सपोर्ट से चढ़ने वाले पर्वतारोही की प्रेरणा को बड़ा मानेंगे या उस पर्वतारोही को जो बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के चढ़ा।
ऐसा ही जज़बा लोकतंत्र के इस पर्व में देखा जा रहा है। निर्वाचन आयोग द्वारा 85 साल से अधिक और दिव्यांग मतदाताओं के लिए होम वोटिंग की सुविधा दी गई है। हमारे दिव्यांगजन अपने हौसले के साथ मतदान प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण ग्राम कांदुल में रहने वाली दिव्यांग बिटिया सुश्री शबनम यादव का है। उसने आज अपने मताधिकार का प्रयोग किया है। पहले की तरह इस बार भी मतदान के अधिकार का उपयोग करने से उनके चेहरे में खिलखिलाहट थी लेकिन एक अंतर था। इस बार मशक्कत काफी कम हो गई थी इसलिए उसकी खुशी कई गुना बढ़ गई। 
लोकतंत्र में मताधिकार का उपयोग जागरूक नागरिक के लिए बहुत मायने रखता है। पहले शबनम को अपने हाथों से गोद में उठाकर उनकी माँ श्रीमती इंदिरा बाई मतदान केंद्र ले जाती थीं। युवा बिटिया को उठाकर ले जाने में उन्हें जाहिर तौर पर कष्ट हुआ होगा, बिटिया को भी मतदान केंद्र तक पहुंचने और वोट डालने में दिक्कत भी आई होगी, लेकिन इनका जज्बा बहुत ऊंचा था। इस बार होम वोटिंग की सुविधा होने से मतदान शबनम के लिए काफी सरल हो गया। उनके घर मतदान दल पहुंचा काफी संक्षिप्त औपचारिता पूर्ण की। इस दौरान  शबनम का हौसला दिखा। सुश्री शबनम ने अपने ही हाथों से हस्ताक्षर किया और अंगुली पर इंक लगवाई। फिर उनके लिए इंक्लोजर लगाया गया उसने अपने पसंद के प्रत्याशी को गोपनीय रूप से चयन किया। यहीं नही शबनम ने मतपेटी में अपने हाथों से बंद लिफाफा अंदर डाल मतदान किया। मतदान की खुशी उनके चेहरे पर छलक रही थी। उन्होंने अपनी ऊंगलियों का इशारा कर विक्ट्री साइन बनाया। शबनम की खुशी उन करोड़ों लोगों की खुशी है जो लोकतंत्र में मिले मतदान के अधिकार से हर्षित हैं और पूरी खुशी के साथ अपने इस अधिकार का उपयोग कर रहे हैं। 
शबनम ने कहा कि पहले मुझे आज घर पर ही वोट देकर अच्छा लगा। इसके लिए मैं निर्वाचन आयोग को धन्यवाद देती हूं। उनकी मां ने श्रीमती इंदिरा बाई ने कहा कि मै अपनी खुशी बयां नही कर सकती। मेरी बेटी ने लोकतंत्र के इस पर्व में हिस्सा लिया वह भी घर में इतनी आसानी से, मैं सभी मतदाताओं से अपील करती हुं कि 07 मई को सभी अपने घरों से निकलें और सबसे पहले मतदान करें।

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