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बस्तर को नक्सलमुक्त बनाने की मांग को लेकर राष्ट्रपति, गृहमंत्री से मुलाकात करेंगे पीड़ित

नयी दिल्ली. छत्तीसगढ़ के बस्तर को नक्सली समस्या से मुक्त करने की मांग को लेकर ऐसी हिंसा के पीड़ितों का एक समूह इस हफ्ते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करेगा। बस्तर शांति समिति के बैनर तले करीब 50 पीड़ितों का यह समूह मंगलवार को दिल्ली पहुंचा। एक न्यूज़ एजेंसी को समिति ने बताया कि ये पीड़ित 19 सितंबर को राष्ट्रपति से और संभवत: 21 सितंबर को शाह से मुलाकात कर अपनी मांगें रखेंगे। समिति की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के मुताबिक इसके अतिरिक्त वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे, दिल्ली में प्रेस वार्ता का आयोजन करेंगे और दिल्ली यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में भी कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। विज्ञप्ति के मुताबिक, पीड़ित इन कार्यक्रमों के जरिए देश को बताना चाहते हैं कि कैसे माओवादियों ने उनके जीवन को नर्क बना दिया है। इसमें कहा गया, ‘‘ 'केंजा नक्सली - मनवा माटा' (सुनो नक्सली - हमारी बात) कहते हुए ये पीड़ित अपनी आवाज़ दिल्ली में उठाएंगे और मांग करेंगे कि बस्तर को माओवाद-नक्सलवाद से मुक्त किया जाए।'' समिति ने कहा कि बीते चार दशकों से बस्तर माओवाद का जो दंश झेल रहा है, वह अब एक कैंसर बन चुका है और इसका जल्द से जल्द इलाज आवश्यक है। उसने कहा, ‘‘इस माओवाद-नक्सलवाद ने ना सिर्फ बस्तर की पीढ़ियों को बर्बाद किया बल्कि बस्तर के विकास की गति को भी लगभग रोक दिया। माओवादी आतंक के कारण बस्तर के युवाओं का भूत-भविष्य-वर्तमान आतंक के साये में रहा, वहीं बस्तर की पहचान भी लाल आतंक और रक्तरंजित भूमि के रूप में होने लगी।'' समिति के मुताबिक बीते ढाई दशकों में बस्तर क्षेत्र में माओवादियों ने 8,000 से अधिक ग्रामीणों की हत्या की है और हजारों लोग नक्सली हिंसा में दिव्यांग हो गए। समिति ने कहा, ‘‘इन्हीं सब कारणों को लेकर बस्तरवासी न्याय की गुहार लगाने दिल्ली पहुंचे हैं। बस्तरवासी चाहते हैं कि देश उनके दुःख, दर्द और पीड़ा को समझे, उसका भी समाधान निकाले और बस्तरवासियों को भी बारूद के ढेर की नहीं, बल्कि आजादी की सांस लेने दें।'' समिति ने कहा कि वह दिल्ली में अपनी प्रस्तावित मुलाकातों और कार्यक्रमों के दौरान मांग उठाएंगे कि जैसे देश के अन्य हिस्सों में सभी नागरिक आजादी से अपना जीवन व्यतीत करते हैं, वैसे इन्हें भी बस्तर में स्वच्छन्दता से जीवन जीने का अवसर मिले। दिल्ली पहुंचने से पहले इन नक्सल पीड़ितों ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से मुलाक़ात की थी।

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