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 श्रोता ही हैं 'मन की बात' के असली सूत्रधार, सकारात्मक बातें लोगों को पसंद हैं: प्रधानमंत्री मोदी

 नयी दिल्ली।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रोताओं को ‘मन की बात' कार्यक्रम का असली 'सूत्रधार' करार देते हुए रविवार को कहा कि इस रेडियो कार्यक्रम ने साबित किया है कि देश के लोगों में सकारात्मक जानकारी की कितनी भूख है और सकारात्मक बातें एवं प्रेरणादायी उदाहरण उन्हें बहुत पसंद आते हैं। आकाशवाणी के इस मासिक रेडियो कार्यक्रम की 114वीं कड़ी को संबोधित करते हुए मोदी ने जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता अभियान के महत्व को भी रेखांकित किया और लोगों से इसमें भाग लेने का आह्वान किया। ‘मन की बात' की इस कड़ी के साथ ही इसके 10 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इस कार्यक्रम की लंबी यात्रा में ऐसे कई पड़ाव आए जिन्हें वह कभी भूल नहीं सकते। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी इस यात्रा के कई ऐसे साथी हैं जिनका हमें निरंतर सहयोग मिलता रहा है। देश के कोने-कोने से उन्होंने जानकारियां उपलब्ध कराईं। ‘मन की बात' के श्रोता ही इस कार्यक्रम के असली सूत्रधार हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आमतौर पर एक धारणा ऐसी गढ़ी गई है कि जब तक किसी कार्यक्रम में चटपटी और नकारात्मक बातें ना हों तब तक उसे ज्यादा तवज्जो नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मन की बात ने साबित किया है कि देश के लोगों में सकारात्मक जानकारी की कितनी भूख है। सकारात्मक बातें एवं प्रेरणादायी उदाहरण लोगों को बहुत पसंद आते हैं।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वह कार्यक्रम से जुड़ी चिट्ठियों को पढ़ते हैं और पाते हैं कि देश में कितने प्रतिभावान लोग हैं और उनमें देश एवं समाज की सेवा करने का कितना जज्बा है तो उन्हें गर्व होता है। उन्होंने कहा, ‘‘ ‘मन की बात' की यह पूरी प्रक्रिया मेरे लिए ऐसी है जैसे मंदिर जाकर ईश्वर के दर्शन करना।'' उन्होंने इस कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों के अलावा इसके प्रचार प्रसार में योगदान देने वाले मीडिया समूहों का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, ‘एक पेड़ मां के नाम' और स्वच्छता अभियान के महत्व को भी रेखांकित किया। मोदी ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया' कार्यक्रम के 10 साल पूरे हो रहे हैं और हर क्षेत्र में निर्यात बढ़ रहा है तथा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में बढ़ोतरी इसकी सफलता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय निर्माताओं को काफी मदद मिली है।
प्रधानमंत्री ने लोगों से त्योहारों के आगामी मौसम में स्वदेशी उत्पाद खरीदने का आग्रह किया।
अमेरिका की अपनी हाल की यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में करीब 300 प्राचीन वस्तुओं को वापस भेजने की व्यापक चर्चा हो रही है। मोदी ने कहा कि जब लोग अपनी विरासत पर गर्व करना शुरू करते हैं तो दुनिया भी उनकी भावनाओं का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल में विभिन्न देशों ने भारत की कई प्राचीन कलाकृतियां उसे लौटाई हैं।
कार्यक्रम में, उन्होंने ‘स्वच्छ भारत अभियान' की सफलता पर प्रकाश डाला और इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को एक उचित श्रद्धांजलि बताया। उन्होंने दोहराया कि गांधी जी ने अपने पूरे जीवन में स्वच्छता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘दो अक्टूबर को ‘स्वच्छ भारत मिशन' के 10 साल पूरे हो रहे हैं। यह उन लोगों की सराहना करने का अवसर है जिन्होंने इसे जन आंदोलन में बदल दिया। यह महात्मा गांधी के लिए भी एक उचित श्रद्धांजलि है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन इस उद्देश्य के लिए समर्पित कर दिया।'' गांधी की जयंती दो अक्टूबर को है।
मानसून के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में हो रही बारिश का जिक्र करते हुए मोदी ने जल संरक्षण की दिशा में देश के अलग-अलग क्षेत्रों में किए जा रहे प्रयासों के बारे में बताया। इस क्रम में उन्होंने मध्य प्रदेश के झांसी में किए जा रहे सामूहिक प्रयासों के बारे में श्रोताओं को विस्तृत जानकारी दी और लोगों से भी इस दिशा में काम करने का अनुरोध किया।

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