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 अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहले दीपोत्सव को लेकर संतों और आमजन में खुशी की लहर

 लखनऊ/अयोध्या (उप्र),। अयोध्या में बुधवार को आयोजित होने वाले दीपोत्सव के आठवें संस्करण को लेकर राम नगरी के निवासी और संतगण खुशी से झूम रहे हैं, क्योंकि यहां नवनिर्मित भव्य मंदिर में श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहला दिवाली समारोह होगा। अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत राजू दास ने  कहा, ‘‘पहले हमें दुख होता था कि हमारे रामलला टेंट में हैं...लेकिन अब हर कोई खुश है कि पहली बार प्रभु (भगवान राम) भव्य नए मंदिर में दीपावली उत्सव में भाग लेंगे।'' उन्होंने कहा, ‘‘हमें भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली पर भी इसी तरह की दीपावली मनाने की उम्मीद है।''
पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान केंद्रित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि उसका लक्ष्य इस दिवाली पर सरयू नदी के तट पर 28 लाख दीये जलाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाना है। राम मंदिर को पर्यावरण के अनुकूल विशेष दीपक से रोशन किया जाएगा। ये दीपक मंदिर की संरचना पर दाग और कालिख के प्रभाव को रोकने के लिए बनाए गए हैं और इनकी लौ लंबे समय तक जलते रहेगी। राम मंदिर परिसर को पुष्प से सजाया जाएगा। सजावट के लिए इसे विभिन्न खंडों में विभाजित किया गया है।
राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, ‘‘मुझे बहुत खुशी हो रही है क्योंकि इस साल दीपोत्सव अद्वितीय, विलक्षण और अद्भुत होने जा रहा है। लोगों और भगवान राम के भक्तों का उत्साह बढ़ा है।'' उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से लोगों का उत्साह देखा जा रहा है, उससे पता चलता है कि इस साल का दीपोत्सव वास्तव में अद्भुत होगा।'' हनुमानगढ़ी मंदिर के महंत ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति साधुवाद प्रकट किया और कहा, ‘‘अगर वह नहीं होते तो दीपोत्सव नहीं होता, राम मंदिर नहीं बन पाता और न ही प्राण प्रतिष्ठा संभव हो पाती।'' उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी सराहना की, जिन्होंने ‘‘अयोध्या के विकास के लिए बड़ा बजट आवंटित किया और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि प्रत्येक मंदिर और मठ रोशन रहें।'' अयोध्या के महापौर गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि लोगों और श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है। अयोध्या के अधिकारी और लोग ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं, जिससे दीपोत्सव के दिन माहौल त्रेता युग जैसा हो जाए। त्रेता युग में भगवान राम लंका विजय के बाद अयोध्या लौटे थे।'' अयोध्या के महापौर ने कहा, ‘‘दीपोत्सव एक ऐसा त्योहार है, जो भगवान राम के अयोध्या आगमन का प्रतीक है। एक शानदार परंपरा शुरू हो गई है। इन दिनों लगभग एक लाख लोग भगवान राम के दर्शन करने आते हैं।'' श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, ‘‘दीपोत्सव के कारण पूरी दुनिया अयोध्या की ओर आकर्षित हुई है। हर कोई अयोध्या में दीपोत्सव देखना चाहता है।'' स्थानीय निवासी प्रज्वल सिंह ने कहा, ‘‘हम इस साल के दीपोत्सव का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि भगवान राम की भव्य प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहला भव्य उत्सव है। घाट सजे हुए दिख रहे हैं और अयोध्या में भक्ति की हवा बह रही है। मैं इस नगरी का निवासी होने के नाते वास्तव में धन्य और गौरवान्वित महसूस करता हूं।''  

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