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भारत इस साल गर्मियों में नौ-10 प्रतिशत अधिक बिजली मांग के लिए तैयार रहेः विशेषज्ञ

नयी दिल्ली. देश में इस साल अधिक गर्मी पड़ने के मौसमी अनुमानों को देखते हुए विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि भारत को इस गर्मी में बिजली की अधिकतम मांग में नौ से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। पिछले साल अखिल भारतीय स्तर पर बिजली की अधिकतम मांग 30 मई को 250 गीगावाट को पार कर गई थी जो अनुमान से 6.3 प्रतिशत अधिक थी। जलवायु परिवर्तन से प्रेरित गर्मी का तनाव बिजली की मांग को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। वर्तमान में उद्योग, घरेलू उपभोग और कृषि क्षेत्र की कुल बिजली खपत में क्रमशः 33 प्रतिशत, 28 प्रतिशत और 19 प्रतिशत हिस्सेदारी है। दिल्ली स्थित शोध संस्थान ‘काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर' में वरिष्ठ कार्यक्रम प्रमुख दिशा अग्रवाल के मुताबिक, पिछले एक दशक में घरेलू बिजली की मांग सबसे तेजी से बढ़ी है। घरेलू बिजली की खपत का हिस्सा 2012-13 में 22 प्रतिशत से बढ़कर 2022-23 में 25 प्रतिशत हो गया। यह तेजी आर्थिक वृद्धि और बढ़ते तापमान के कारण घरों एवं दफ्तरों को ठंडा रखने की बढ़ती जरूरतों के कारण है। अग्रवाल ने कहा कि 2024 की गर्मियों में रिकॉर्डतोड़ तापमान के बीच कमरे के एयर कंडीशनर की बिक्री में सालाना आधार पर 40-50 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। उन्होंने कहा, ‘‘भारत को अब लंबी गर्मी और 9-10 प्रतिशत की बिजली की मांग में वृद्धि के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि, हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि यह चरम मांग केवल थोड़े समय तक ही रहेगी।'' अग्रवाल ने कहा कि भारत की बिजली की खपत 2020-21 से सालाना लगभग नौ प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, जबकि इससे पहले के दशक में यह पांच प्रतिशत प्रति वर्ष थी। पिछले सप्ताह नैचुरल रिसोर्स डिफेंस काउंसिल की तरफ से आयोजित एक सम्मेलन में विशेषज्ञों ने गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के कारण एयर कंडीशनिंग की मांग बढ़ने को लेकर चिंता जताई। विश्व बैंक में दक्षिण एशिया के लिए ढांचागत नीति एवं वित्त के प्रबंधक आभास झा ने कहा कि मध्यम उत्सर्जन परिदृश्य के तहत, भारत में लू चलने के मामले तिगुना होने के आसार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘भारत वैश्विक स्तर पर एयर कंडीशनर (एसी) का सबसे बड़ा बाजार बनने के लिए तैयार है। हर 15 सेकंड में भारत में एक एसी बेचा जाता है। देश में एसी की पहुंच वर्तमान में लगभग आठ प्रतिशत है जबकि विकसित देशों में यह 90 प्रतिशत है। ऐसे में भारत में एसी की पहुंच बढ़ने जा रही है।'' ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ऑक्सफोर्ड इंडिया सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट की शोध निदेशक ऋषिका खोसला ने कहा, ‘‘संख्या बढ़ने के बावजूद 2050 में दो से पांच अरब लोगों की एयर कंडीशनर तक पहुंच नहीं होगी।'' मौसम विज्ञान विभाग ने मार्च से मई तक चलने वाले गर्मी के मौसम के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम और न्यूनतम तापमान का अनुमान लगाया है। 

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