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संसदीय समिति ने स्मारकों के लिए अधिक आवंटन, विशेष संरक्षण कोष की सिफारिश की

नयी दिल्ली. संसद की एक समिति ने संरक्षित स्मारकों के संरक्षण के लिए अधिक वित्तीय आवंटन और धरोहर स्थलों पर नियमों के उल्लंघन से जुड़े मामलों के लिए त्वरित अदालतें गठित करने की सिफारिश की है। समिति ने पांच वर्षों में 500 करोड़ रुपये की धनराशि के साथ विशेष धरोहर संरक्षण कोष बनाने की भी सिफारिश की है, जिसमें पर्यटन राजस्व, सीएसआर (कंपनी सामाजिक दायित्व) पहल और राष्ट्रीय संस्कृति कोष ढांचे के जरिए सरकारी अनुदान के माध्यम से योगदान दिया जाएगा। परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘यह निधि विशेष रूप से संरक्षित स्मारकों पर आपातकालीन संरक्षण आवश्यकताओं और जलवायु के प्रभाव के शमन से जुड़े उपायों के लिए होगी।'' संस्कृति मंत्रालय की अनुदान मांगों (2025-26) पर समिति की रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई।
 संस्कृति मंत्रालय के तहत आने वाला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल एवं अवशेष (एएमएएसआर) अधिनियम, 1958 के अंतर्गत 3,698 केंद्रीय संरक्षित स्मारकों की देखरेख करता है, जिनमें मंदिर, किले, मकबरे और प्रागैतिहासिक स्थल शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल के प्रयासों के बावजूद, जिसमें 2023-24 में बजट में 70 प्रतिशत की वृद्धि कर उसे 443.53 करोड़ रुपये करना और दिल्ली के बाराखम्बा कब्रिस्तान और हरियाणा के कोस मीनार नंबर 13 जैसे 18 अज्ञात स्मारकों को सूची से हटाना शामिल है, ‘‘अतिक्रमण, जलवायु खतरे और संसाधन में कमी जैसी चुनौतियां बरकरार हैं।'' इन मुद्दों का हल करने के लिए, संसदीय समिति ने ‘‘बहुआयामी रणनीति'' की सिफारिश की है।
 समिति ने संरक्षित स्मारकों, विशेषकर विश्व धरोहर स्थलों के संरक्षण, पुनरुद्धार और रखरखाव के लिए ‘‘अधिक वित्तीय आवंटन'' की सिफारिश की है।

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