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 आईटी अधिनियम एआई के दौर से पहले का, अब नए कानून की जरूरत: वैष्णव

 नयी दिल्ली.। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून को कृत्रिम मेधा (एआई) के उभरने से बहुत पहले बनाया गया था और बदलते तकनीकी परिदृश्य से निपटने के लिए अब नए कानूनी ढांचे की आवश्यकता पड़ सकती है। वैष्णव ने  कहा कि उद्योग जगत के साथ बातचीत की जा रही है और सरकार नवाचार तथा विनियमन के बीच संतुलन बनाने का प्रयास करेगी। यह पूछे जाने पर कि क्या भारत एआई के लिए एक प्रतिबद्ध कानून पर विचार करेगा या दुनिया भर के देशों में एआई सुरक्षा पर जारी बहस के बीच आईटी अधिनियम में संशोधन के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान करेगा, वैष्णव ने कहा कि यह एक जटिल मुद्दा है। उन्होंने कहा, ''यह एक बहुत ही जटिल विषय है। आईटी अधिनियम के ढांचे के तहत कुछ चीजें की गई हैं, लेकिन मुझे लगता है कि एक नए कानून की आवश्यकता है क्योंकि एआई की दुनिया 2000 में आईटी अधिनियम लागू किए जाने वाली दुनिया से बहुत अलग है।'' मंत्री ने कहा, ''हम उद्योग जगत के साथ चर्चा कर रहे हैं...हमेशा की तरह, हमारा उद्देश्य और दृष्टिकोण नवाचार तथा विनियमन को इस तरह से संतुलित करना होगा कि नवाचार जारी रहे, साथ ही हमारे नागरिक सुरक्षित रहें।'' यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि दुनिया भर के नीति निर्माता एआई द्वारा उत्पन्न चुनौतियों से जूझ रहे हैं, जिनमें गलत सूचना और ऑनलाइन नुकसान शामिल हैं।

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