नड्डा ने केंद्र की मातृ स्वास्थ्य पहल के 10 वर्ष पूरे होने पर देशव्यापी समारोहों की शुरुआत की
नयी दिल्ली।. केंद्र की प्रमुख मातृ स्वास्थ्य पहल 'प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान' (पीएमएसएमए) के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा देशभर में मृत्यु दर से जुड़े संकेतकों में तेज गिरावट लाने में इस अभियान की भूमिका को रेखांकित किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नौ जून, 2016 को पीएमएसएमए की शुरुआत की थी। इसके तहत गर्भवती महिलाओं को प्रत्येक माह की नौ तारीख को विशेषज्ञ चिकित्सकों के जरिये मुफ्त, व्यापक और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। नड्डा ने 'पीएमएसएमए के 10 वर्ष-देखभाल का एक दशक' विषय के तहत देशव्यापी समारोहों की शुरुआत करते हुए कहा कि यह उपलब्धि ''पूरे देश के लिए गर्व और संतोष का क्षण'' है। उन्होंने कहा, ''पिछले एक दशक में पीएमएसएमए का सफल क्रियान्वयन देश के प्रत्येक परिवार के लिए सुरक्षित मातृत्व और स्वस्थ नवजात सुनिश्चित करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को पूरा करने की दिशा में सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।'' मंत्री ने कहा कि पीएमएसएमए ने न केवल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है, बल्कि एक स्वस्थ और अधिक सक्षम भारत की नींव भी रखी है। नड्डा ने कहा, ''माताओं का स्वास्थ्य और कल्याण सुनिश्चित करना स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण और स्वस्थ भारत के दृष्टिकोण को साकार करने का आधार है।'' उन्होंने इस कार्यक्रम के तहत सरकार के साथ भागीदारी करने वाले निजी अस्पतालों और चिकित्सा विशेषज्ञों के योगदान की सराहना की। मंत्री ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत की प्रगति को रेखांकित करते हुए संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु आकलन अंतर-एजेंसी समूह की नवीनतम रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर 48 प्रतिशत की औसत गिरावट की तुलना में भारत ने 1990 से मातृ मृत्यु दर में 86 प्रतिशत की कमी हासिल की है। उन्होंने कहा कि 1990 से 2024 के बीच पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 79 प्रतिशत और नवजात मृत्यु दर में 70 प्रतिशत की कमी आई है।

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