हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति मामले में एसबीआई के अधिकारियों को 2 लाख रुपये हर्जाना देने का आदेश दिया
- अदालत ने बैंक प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई
इंदौर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अनुकंपा नियुक्ति के एक मामले में भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों के "अमानवीय रवैये" की आलोचना करते हुए उन्हें याचिकाकर्ता महिला को दो लाख रुपये का हर्जाना चुकाने का आदेश दिया है। उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने मीना ढाईगुड़े की रिट याचिका मंजूर करते हुए सोमवार को यह आदेश जारी किया। महिला ने भारतीय स्टेट बैंक के इंदौर में पदस्थ महाप्रबंधक और मुख्य प्रबंधक (कार्मिक प्रशासन) के खिलाफ वर्ष 2012 में याचिका दायर की थी। एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा, "मेरे सुविचारित मत में यह प्रतिवादियों के अमानवीय रवैये के लिए उन पर हर्जाना लगाने का एकदम सटीक मामला है।" बैंक प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता महिला को उचित रोजगार के अभाव में दूसरों के घर में काम करना पड़ा ताकि वह अपने बेटों का लालन-पालन कर सके। उच्च न्यायालय ने बैंक अधिकारियों को यह आदेश भी दिया कि वे महिला की अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर विचार करें। याचिकाकर्ता मीना के वकील आनंद अग्रवाल ने बताया कि उनकी मुवक्किल के पति अशोक ढाईगुड़े तत्कालीन स्टेट बैंक ऑफ इंदौर (इस बैंक को भारतीय स्टेट बैंक में मिलाया जा चुका है) में चपरासी के पद पर काम करते थे। उन्होंने कहा कि ढाईगुड़े 19 दिसंबर 1998 को घर से बैंक के लिए रवाना हुए थे, लेकिन वह लापता हो गए।
अग्रवाल ने बताया कि पुलिस को शिकायत करने के बाद भी जब सात साल तक ढाईगुड़े का कोई पता नहीं चल सका, तो उनकी पत्नी ने अनुकंपा के आधार पर बैंक में नौकरी दिए जाने का अनुरोध किया। लेकिन बैंक प्रबंधन ने इस पर वर्षों तक कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि ढाईगुड़े को 21 अक्टूबर 2005 को मृत मान लिया गया था।


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