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  चिकित्सा और दंत चिकित्सा पाठ्यक्रम में अन्य पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण की घोषणा

नई दिल्ली।  सरकार ने चालू शिक्षण वर्ष- 2021-22 से, अंडर ग्रेज्युएट और पोस्टग्रेज्युएट मेडिकल और डेटल पाठ्यक्रमों में अखिल भारतीय कोटा योजना में, आर्थिक रूप से पिछडे वर्गों को दस प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्गों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि इस फैसले से हर वर्ष अन्य पिछडा वर्ग के लगभग एक हजार पांच सौ विद्यार्थी एमबीबीएस में और दो हजार पांच सौ विद्यार्थी पोस्ट ग्रेज्युएशन में दाखिला ले सकेंगे। इससे आर्थिक रूप से पिछडे वर्गों के लगभग 550 विद्यार्थी एमबीबीएस में और लगभग एक हजार  विद्यार्थी पोस्ट ग्रेज्युएशन पाठ्यक्रम में दाखिला ले सकेंगे। मंत्रालय ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने सोमवार को हुई बैठक में सभी संबंद्ध केंद्रीय मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वे काफी समय से  लंबित इस मुद्दे का प्रभावशाली समाधान निकालने का प्रयास करें।
 अखिल भारतीय कोटा योजना की शुरूआत 1986 में की गई थी। इसे किसी दूसरे राज्य में स्थित अच्छे मेडिकल कॉलेज में पढाई के इच्छुक विद्यार्थियों को निवास प्रमाण-पत्र के बिना मैरिट के आधार पर दाखिला लेने का अवसर प्रदान करने के लिए शुरू किया गया था। अखिल भारतीय कोटे में कुल उपलब्ध अंडर ग्रेज्युएट सीटों का 15 प्रतिशत और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेज्युएशन की उपलब्ध कुल सीटों का 50 प्रतिशत शामिल है। मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा सरकार पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को यथोचित आरक्षण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में 2014 से किए गए महत्वपूर्ण सुधारों के अनुरूप भी है।
 पिछले छह वर्षों के दौरान, देश में एमबीबीएस सीटों की संख्या 56 प्रतिशत बढ़कर, 2014 की 54 हजार तीन सौ 48 के मुकाबलें 2020 में 84 हजार छह सौ 49 हो गई हैं। 2020 में पोस्टग्रेज्युएट सीटों की संख्या भी 2014 के बाद 80 प्रतिशत बढ़कर 54 हजार 275 हो गई है। 2014 में यह संख्या 30 हजार 191 थी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इसी अवधि में 179 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं और अब देश में 558 मेडिकल कॉलेज हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा है कि  इस फैसले से हर साल हजारों युवाओं को बेहतर अवसर प्राप्त करने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि  इससे देश में सामाजिक न्याय का एक नया प्रतिमान स्थापित होगा। इसी बीच, गृह मंत्री अमित शाह ने चिकित्सा शिक्षा में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक फैसला बताया और इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है। गृह मंत्री ने कहा कि लम्बे समय से की जा रही इस मांग को पूरा करके श्री मोदी ने पिछड़े वर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दिखाई है।

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