ब्रेकिंग न्यूज़

 कृष्णा नागर ने स्वर्ण जीता, सुहास ने रजत पदक
तोक्यो।  कृष्णा नागर ने यहां बैडमिंटन में दूसरा स्वर्ण पदक दिलाया जबकि उनसे पहले सुहास यथिराज ने रजत पदक हासिल किया जिससे भारतीय दल के लिये तोक्यो पैरालंपिक में दिन ‘सुपर संडे' साबित हुआ। भारत ने इस तरह पांच स्वर्ण, आठ रजत और छह कांस्य से कुल 19 पदक जीतकर पैरालंपिक में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया जिससे देश पदक तालिका में 24वें स्थान पर रहा। इसमें से निशानेबाजी और बैडमिंटन में दो दो स्वर्ण जबकि एथलेटिक्स में एक स्वर्ण पदक शामिल रहा। भारत ने पिछले रियो चरण में केवल चार पदक जीते थे। भारत ने 1972 में पहली बार पैरालंपिक में हिस्सा लिया था, उसके बाद से पिछले चरण तक भारत की झोली में कुल मिलाकर 12 ही पदक थे। बैडमिंटन खिलाड़ियों ने चार पदक (दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य) जीते।
तोक्यो पहुंचे 54 पैरा खिलाड़ियों में से 17 ने पदक जीते। खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी उनके प्रदर्शन पर कहा, ‘‘भारतीय पैरा खिलाड़ियों का अभूतपूर्व उदय। एक नये युग की शुरूआत हुई है। '' दूसरे वरीय नागर ने हांगकांग के चू मैन काई को पुरूषों की एकल एसएच6 क्लास के तीन गेम तक चले रोमांचक फाइनल में 21-17 16-21 21-17 शिकस्त दी। जयपुर के 22 साल के नागर बैडमिंटन में स्वर्ण पदक जीतने की सूची में हमवतन प्रमोद भगत के साथ शामिल हो गये जिन्होंने शनिवार को एसएल3 क्लास में बैडमिंटन का पहला स्वर्ण पदक जीता था। सुहास पुरूष एकल एसएल4 क्लास बैडमिंटन स्पर्धा के फाइनल में शीर्ष वरीय फ्रांस के लुकास माजूर से करीबी मुकाबले में हार गये जिससे उन्होंने ऐतिहासिक रजत पदक से अपना अभियान समाप्त किया। गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के जिलाधिकारी सुहास पैरालंपिक में पदक जीतने वाले पहले आईएएस अधिकारी भी बन गये हैं। गैर वरीय सुहास के एक टखने में विकार है। उन्हें दो बार के विश्व चैम्पियन माजूर से 62 मिनट तक चले फाइनल में 21-15 17-21 15-21 से पराजय का सामना करना पड़ा। भगत और पलक कोहली की मिश्रित युगल जोड़ी को हालांकि कांस्य पदक के प्लेऑफ में जापान के दाइसुके फुजीहारा और अकिको सुगिनो की जोड़ी से 37 मिनट में 21-23 19-21 से हार का सामना करना पड़ा। नागर को छोटे कद का विकार है, वह अपने चचेरे भाई के प्रोत्साहन के बाद बैडमिंटन खेलने लगे। उन्होंने हालांकि चार साल पहले ही खेल को गंभीरता से खेलना शुरू किया और पैरा एशियाई खेलों में कांस्य जीता। उन्होंने 2019 विश्व चैम्पियनशिप में एकल और युगल में क्रमश: कांस्य और रजत पदक जीते। दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी ने ब्राजील में भी रजत पदक जीता था। पिछले साल पेरू में उन्होंने एकल और युगल में दो स्वर्ण पदक हासिल किये थे। उन्होंने इस साल अप्रैल में दुबई पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में दो स्वर्ण पदक अपनी झोली में डाले। एसएल4 क्लास में वो बैडमिंटन खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जिनके पैर में विकार हो और वे खड़े होकर खेलते हैं।  एसएल4 के कांस्य पदक के प्लेऑफ में दूसरे वरीय तरुण ढिल्लों को इंडोनेशिया के फ्रेडी सेतियावान से 32 मिनट तक चले मुकाबले में 17-21 11-21 से हार का सामना करना पड़ा। कर्नाटक के सुहास के कोर्ट के भीतर और बाहर कई उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं और साथ ही कम्प्यूटर इंजीनियर है और प्रशासनिक अधिकारी भी। वह 2020 से नोएडा के जिलाधिकारी हैं और कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में मोर्चे से अगुवाई कर चुके हैं । उन्होंने 2017 में बीडब्ल्यूएफ तुर्की पैरा बैडमिंटन चैम्पियनशिप में पुरुष एकल और युगल स्वर्ण जीता । इसके अलावा 2016 एशिया चैम्पियनशिप में स्वर्ण और 2018 पैरा एशियाई खेलों में कांस्य पदक हासिल किया । वहीं कोई भी भारतीय निशानेबाज मिश्रित 50 मीटर राइफल प्रोन एसएच1 स्पर्धा के फाइनल्स के लिये क्वालीफाई नहीं कर सका जबकि स्टार अवनि लेखरा क्वालीफिकेशन में 28वें स्थान पर रहीं। इससे भारत का निशानेबाजी में ऐतिहासिक अभियान भी समाप्त हो गया जिसमें देश के नाम पांच (दो स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य) पदक रहे। सिद्धार्थ बाबू क्वालीफाई करने के करीब पहुंचे लेकिन वह मामूली 0.2 के अंतर से पिछड़ गये जिससे वह क्वालीफिकेशन दौर में नौंवे स्थान पर रहे। वहीं 10 मीटर राइफल में स्वर्ण और 50 मीटर राइफल थ्री पॉजिशंस में कांस्य पदक जीतकर स्टार बनीं अवनि लेखरा ने 612 अंक का स्कोर बनाया जिससे वह 28वें स्थान पर रहीं। इस 19 साल की निशानेबाज लेखरा ने अपने पदार्पण में खेलों में शानदार प्रदर्शन किया जो निशानेबाजी का पदक और खेलों का स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी। तीसरे भारतीय निशानेबाज दीपक 602.2 के स्कोर से 46वें स्थान पर रहे।
एसएच1 राइफल स्पर्धा में वही एथलीट हिस्सा लेते हैं जिनके पैरों में विकार हो। लेखरा के अलावा 19 साल के मनीष नरवाल ने पुरूषों की 50 मीटर पिसटल एसएच1 स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीता है। सिंघराज अडाना ने भी प्रतिस्पर्धा में दो पदक जीते हैं, उन्होंने 50 मीटर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा का रजत और 10 मीटर एयर पिस्टल एसएच1 स्पर्धा का कांस्य पदक जीता। एथलेटिक्स में पैरालंपिक के छठे दिन भारत को भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल ने पुरूषों के एफ64 वर्ग में पांच बार अपना ही रिकार्ड तोड़ते हुए 68.55 मीटर की दूरी से विश्व रिकार्ड से स्वर्ण पदक दिलाया था। ट्रैक एवं फील्ड में देश ने सबसे ज्यादा आठ पदक (एक स्वर्ण, पांच रजत और दो कांस्य) हासिल किये। प्रवीण कुमार ने ऊंची कूद में एशियाई रिकार्ड से रजत पदक हासिल कर देश के सबसे युवा पदकधारी भी बने। अनुभवी देवेंद्र झाझरिया (भाला फेंक) स्वर्ण की हैट्रिक करने से भले ही चूक गये हों, लेकिन इस चरण का रजत पदक उनके लिये सबसे ज्यादा अहमियत रखता है। एक और अनुभवी मरियप्पन थांगवेलु (ऊंची कूद) ने भी रजत पदक जीता। सुंदर सिंह गुर्जर भी झाझरिया के बाद तीसरे स्थान पर रहे। टेबल टेनिस में भाविनाबेन पटेल ने क्लास 4 में रजत पदक दिलाया जिससे देश के पदकों का खाता खुला था। तीरंदाजी में एकमात्र पदक हरविंदर सिंह ने कांस्य पदक के रूप में जीता।
=

Related Post

Leave A Comment

Don’t worry ! Your email address will not be published. Required fields are marked (*).

Chhattisgarh Aaj

Chhattisgarh Aaj News

Today News

Today News Hindi

Latest News India

Today Breaking News Headlines News
the news in hindi
Latest News, Breaking News Today
breaking news in india today live, latest news today, india news, breaking news in india today in english