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*अप्रारंभ कार्यों को तत्काल शुरू कर समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश*
*अधिकारी एवं कर्मचारी मैदानी स्तर पर पूरी सक्रियता और मुस्तैदी के साथ कार्य करें-कलेक्टर**शासन की प्राथमिकता वाले कार्यों में यदि अपेक्षित प्रगति नही, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी- जिला पंचायत सीईओ*रायपुर/ कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित रेडक्रॉस सभाकक्ष में पंचायत एवं विकास विभाग की योजनाओं एवं ग्रामीण विकास कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर डॉ सिंह एवं सीईओ जिला पंचायत श्री कुमार बिश्वरंजन ने वीबी-जी राम जी, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण, 15वें वित्त आयोग, समर्थ पंचायत पोर्टल, मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग क्षेत्र विकास प्राधिकरण तथा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अंतर्गत संचालित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की।कलेक्टर ने निर्देश दिए कि शासन की प्राथमिकता वाले ग्रामीण विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को अप्रारंभ कार्यों को तत्काल शुरू कराने, प्रगतिरत कार्यों को गति देने और पूर्ण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करते हुए समय-सीमा में पूर्णता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में वीबी-जी राम जी के तहत स्वीकृत कार्यों की पंचायतवार समीक्षा की गई। स्वीकृत शौचालयों में कार्य प्रारंभ होने की स्थिति की जानकारी लेते हुए कलेक्टर ने जहां कार्य प्रारंभ नहीं हुए हैं, उन्हें तत्काल शुरू कराने के निर्देश दिए। बालिका शौचालय, सोकपिट, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, किचन गार्डन, किचन शेड सहित अन्य स्वीकृत कार्यों की भी समीक्षा की गई।उन्होंने कहा कि स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वीकृत किचन गार्डन के कार्य जहां शुरू नहीं हुए हैं, वहां जल्द कार्य प्रारंभ कराया जाए तथा आवश्यकता के अनुसार स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए। जर्जर एवं अनुपयोगी भवनों और शौचालयों को नियमानुसार डिस्मेंटल करने के निर्देश भी दिए गए।कलेक्टर ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि गुणवत्ता से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा। सीईओ जिला पंचायत श्री कुमार बिश्वरंजन ने भी अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाए।प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की समीक्षा के दौरान स्वीकृत, प्रगतिरत, पूर्ण एवं लंबित आवासों की पंचायतवार जानकारी ली गई। कलेक्टर ने जीरो प्रगति वाले प्रकरणों को गंभीरता से लेते हुए ऐसे मामलों में जल्द प्रगति लाने के निर्देश दिए।उन्होंने कहा कि जिन हितग्राहियों के आवास स्वीकृत हो चुके हैं, उनके घर समय-सीमा में पूर्ण होने चाहिए। यदि किसी हितग्राही ने निर्माण शुरू नहीं किया है या निर्माण बीच में छोड़ दिया है, तो नियमानुसार नोटिस जारी करें तथा उसके बाद आवश्यक वसूली की कार्रवाई की जाए। मृत हितग्राहियों के प्रकरणों में पात्र नामिनी के नाम से आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए।उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के पूर्ण आवासों में आवश्यक पहचान संबंधी विवरण और पीएम आवास योजना का लोगो स्पष्ट रूप से अंकित करने तथा वीबी-जी राम जी से संबंधित सूचना पटल भी निर्धारित स्वरूप में प्रदर्शित करने के निर्देश दिए।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि गांव के अंतिम पंक्ति के अंतिम व्यक्ति तक योजना का लाभ पहुंचना चाहिए। अधिक से अधिक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने, नए महिला स्व-सहायता समूहों के गठन तथा बैंक लिंकेज की प्रगति की भी समीक्षा की गई।स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत ग्राम पंचायतों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, घर-घर कचरा संग्रहण, सामुदायिक शौचालय एवं स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने गांवों में नियमित रूप से कचरा संग्रहण सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।समर्थ पंचायत पोर्टल की समीक्षा के दौरान ग्राम पंचायतों में कर संग्रहण की स्थिति की जानकारी ली गई। क्यूआर कोड के माध्यम से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने तथा पंचायतों की आय के स्रोतों को मजबूत करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना के अंतर्गत स्वीकृत तालाब, चौक सौंदर्यीकरण एवं अन्य विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने स्वीकृत कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करने और मैदानी स्तर पर कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा।प्रोजेक्ट अजा के अंतर्गत संचालित कार्यों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने फेसवाइज कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक हितग्राहियों को योजना का लाभ मिल सके। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में मुक्तिधाम सहित अन्य स्वीकृत कार्यों को भी जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए।सीईओ जिला पंचायत श्री कुमार बिश्वरंजन ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की प्राथमिकता वाले कार्यों में यदि अपेक्षित प्रगति नहीं होती है तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि अप्रारंभ एवं लंबित कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण करना सभी संबंधित अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।बैठक में जनपद पंचायतों के सीईओ, एपीओ, पीओ, पंचायत सचिव, रोजगार सहायक, तकनीकी सहायक सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। -
*योजनाओं और लंबित प्रकरणों की समीक्षा, समय-सीमा में निराकरण के निर्देश*
*बायोमेट्रिक उपस्थिति, डेंगू जांच और पीएम सूर्य घर योजना की भी हुई समीक्षा*रायपुर। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने आज शुक्रवार को कलेक्टोरेट में फॉलोअप टीएल बैठक ली। बैठक में विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं लंबित प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने तथा जनहित से जुड़े मामलों का प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए।बैठक में बकेट क्लेम, नागरिक पट्टों, पी.ओ. पोर्टल, आर.आर.सी., पीएम किसान निधि सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया गया।कलेक्टर ने स्कूलों में फिजिकल ग्राउंड, जाति एवं निवास प्रमाण-पत्र बनाने की स्थिति, अविवादित नामांतरण, बंटवारा प्रकरणों की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि लंबित प्रकरणों का नियमानुसार शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए।कलेक्टर ने सभी विभागों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों की बायोमेट्रिक उपस्थिति की समीक्षा करते हुए नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही मेडिकल चेकअप की स्थिति, डेंगू जांच तथा स्वच्छता से जुड़े कार्यों की जानकारी ली। सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के देयकों के समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।बैठक में ई-ऑफिस, प्रोजेक्ट पुनर्जीवन, नागरिक निकायों में पेंशन प्रकरणों एवं पी.एम. श्री योजना की समीक्षा की गई। सेवा से हटने वाले कर्मचारियों के प्रकरणों को नियमानुसार समय-सीमा में निराकृत करने के निर्देश दिए गए।पी.एम. सूर्य घर योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को अपने अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारियों को घरों पर सोलर पैनल लगाने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा।कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि टीएल बैठक में दिए गए निर्देशों का गंभीरता से पालन करते हुए अगली बैठक से पूर्व प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए।इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन, अपर कलेक्टर श्री कीर्तिमान सिंह राठौर सहित अन्य विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। -
रायपुर। विशेष रोजगार कार्यालय, रायपुर एवं डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन के पीडब्ल्यूडी सेंटर, रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में दिव्यांगजनों के लिए रोजगार मेले का आयोजन 31 अगस्त 2026 को किया जाएगा। यह रोजगार मेला डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन, पीडब्ल्यूडी सेंटर, सुंदर नगर में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक आयोजित होगा।
विशेष रोजगार कार्यालय की उप संचालक डॉ शशीकला अतुलकर ने बताया कि इस रोजगार मेले में निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी इंस्टाकार्ट सर्विस प्राइवेट लिमिटेड (फ्लिपकार्ट) द्वारा असिस्टेंट के कुल 30 पदों पर भर्ती की जाएगी। इसके लिए आवेदक का 10वीं उत्तीर्ण होना और आयु 18 से 30 वर्ष के बीच होना आवश्यक है। चयनित अभ्यर्थियों को 10 हजार से 12 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा।रोजगार मेले में शामिल होने के लिए आवेदकों को छत्तीसगढ़ रोजगार पोर्टल erojgar.cg.gov.in अथवा मोबाइल में ‘छत्तीसगढ़ रोजगार ऐप’ के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है। आवेदक का रोजगार पंजीयन होना आवश्यक है। मेले में शामिल होने के लिए निर्धारित समय पर अपनी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज, रोजगार पंजीयन कार्ड, आधार कार्ड, छायाप्रति, पासपोर्ट साइज फोटो एवं दिव्यांगता प्रमाण-पत्र सहित उपस्थित होना होगा। रोजगार मेला पूर्णतः निःशुल्क है।*दो माह का निःशुल्क प्रशिक्षण भी मिलेगा*इसी दिन डॉ. रेड्डीज फाउंडेशन के पीडब्ल्यूडी सेंटर द्वारा दिव्यांगजनों के लिए दो माह का निःशुल्क प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण में डिजिटल साक्षरता, सॉफ्ट स्किल्स और कम्युनिकेशन जैसी उपयोगी जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान निःशुल्क रहने और भोजन की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। अधिक जानकारी के लिए विशेष रोजगार कार्यालय रायपुर के दूरभाष नंबर 0771-4044081 पर कार्यालयीन समय में संपर्क किया जा सकता है। -
*ईद-ए-मिलाद एवं गणेश चतुर्थी पर्व सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाने का लिया गया निर्णय*
बिलासपुर/आगामी ईद-ए-मिलाद (मिलाद-उन-नबी) एवं गणेश चतुर्थी पर्व को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं एसएसपी श्री रजनेश सिंह की अध्यक्षता में जिला कार्यालय में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक मेें ईद-ए-मिलाद (मिलाद-उन-नबी) एवं गणेश चतुर्थी पर्व को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाने का निर्णय लिया गया।बैठक में नगर निगम को ईदगाह एवं प्रमुख मार्गों की साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था, पुलिस विभाग को यातायात एवं सुरक्षा व्यवस्था तथा सीएसईबी को निर्बाध विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उक्त पर्वाें के दौरान सड़क पर पंडाल लगाकर यातायात बाधित नहीं करने तथा समितियों द्वारा पुलिस को स्वयंसेवकों की सहायता उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। साथ ही ईद-ए-मिलाद पर्व के दौरान भी सड़क पर पंडाल लगाकर यातायात बाधित न हो। इसकी निगरानी रखी जाए। विद्युत तारों से किसी प्रकार की दुर्घटना न हो इसका विशेष ध्यान रखने कहा गया। पंडाल में पर्याप्त स्वयंसेवकों की व्यवस्था हो, इसके निर्देश दिए गए। सभी समितियों, कमिटियों को पर्व के दौरान पंडाल लगाने के लिए संबंधित थाना प्रभारी एवं एसडीएम से अनुमति लेने कहा गया। गणेश विसर्जन के लिए रूट चार्ट एवं पार्किंग स्थल निर्धारित करने के निर्देश दिए गए। समितियों को विसर्जन स्थल एवं रूट की जानकारी संबंधित थाना प्रभारी को देने के निर्देश दिए गए। सभी पूजा पंडाल एवं आसपास सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य होगा। पूजा पंडालों में मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करने के निर्देश दिए गए है।पुलिस विभाग को मंदिरों, मस्जिदों, गणेश पंडालों, संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों तथा विसर्जन स्थल पर पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात करने कहा गया। सभी पूजा पंडालों एवं आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाना तथा मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करना अनिवार्य किया गया। पर्व के दौरान भंडारा एवं लंगर में प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने, दोना-पत्तल एवं डस्टबिन की व्यवस्था रखने तथा सड़क पर वाहन रुकवाकर प्रसाद वितरण नहीं किया जाए। जिला अस्पताल को भी पर्व के दौरान आवश्यक आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित रखने कहा गया। पुलिस विभाग को पर्व के दौरान शहर के समस्त चौक-चौराहों एवं महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा एवं शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश दिए। विद्युत विभाग को पर्व के दौरान निरंतर विद्युत आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए। इसी प्रकार अन्य विभागों को जिम्मेदारी सौंपते हुए सजग रहने कहा गया। समिति के सदस्यों ने शांतिपूर्ण तरीके से पर्व मनाने का भरोसा दिलाया।बैठक में एडीएम श्री शिवकुमार बनर्जी, एडिशनल कमिश्नर नगर निगम श्री खंजाची कुमार, एसडीएम श्री मनीष साहू, संयुक्त कलेक्टर श्री रजनी भगत, सीएसपी सिविल लाईन श्री परमेश्वर तिलकवार, शांति समिति के सदस्य हबीब मेमन, श्री चंचल सलूजा, मनजीत सिंह अरोरा, विकास शर्मा, विक्रांत केशरवानी, राजेश मिश्रा, प्रबीर सेन गुप्ता, प्रदीप कुमार शर्मा, सुधीर खण्डेलवाल, इरशाद अली, अनिल कुमार गौरहा अन्य सदस्य एवं विभागीय अधिकारी मौजूद थे। -
- नवंबर-दिसंबर में लगाया जाएगा सात दिवसीय योग शिविर
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की योग समिति की ओर से मंडल परिसर में प्रत्येक रविवार को योग की क्लासेस लगाई जाएगी। इसके साथ योग के लिए लोगों को जागरूक करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। विगत दिनों मंडल परिसर में हुई योग समिति की बैठक में सामाजिक सरोकार से जुड़े कई मुद्दों, भावी कार्यक्रमों और उनके क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।महाराष्ट्र मंडल कार्यकारिणी की सदस्य तथा आध्यात्मिक, योग और स्वास्थ्य समिति की प्रभारी आस्था काले ने बताया कि योग समिति की बैठक में प्रत्येक रविवार को मंडल परिसर में योग क्लासेस लगाने का निर्णय लिया गया है। योग समिति की बैठक में सालभर के कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई। बैठक की शुरुआत गुरु मंत्र के साथ की गई। आस्था के अनुसार घर-घर योग अभियान के तहत मंडल द्वारा संचालित सियान गुड़ी में समिति के सदस्यों की ओर से घर जाकर योग करवाया जाएगा। इसके साथ ही महीने के प्रत्येक रविवार महाराष्ट्र मंडल में योग क्लास लगेगी। सात दिवसीय योग शिविर का आयोजन नवंबर- दिसंबर में किया जाएगा। इसमें प्रशिक्षित योग ट्रेनर योग सिखाएंगे। इसके साथ प्रत्येक महिला केंद्र की महिलाओं को योग डांस के माध्यम से जोड़ा जाएगा।योग समिति की समन्वयक साक्षी टोले ने बताया कि मराठी सोहळा और संस्कार शिविर में भी बच्चों को योग सिखाया जाएगा। इसके साथ मंडल द्वारा संचालित स्कूल व अन्य स्कूलों में भी बच्चों को योग की ट्रेनिंग दी जाएगी। योग की ऑनलाइन- ऑफलाइन क्लासेस के साथ वरिष्ठ नागरिकों को घर जाकर योग कराया जाएगा और जिला व स्टेट स्तर पर बच्चों को लिए योग स्पर्धा का आयोजन भी किया जाएगा। बैठक में योग समिति प्रमुख भालचंद्र पलसोदकर, योग समिति की महिला प्रमुख दिव्या पात्रीकर ने भी अपने विचार रखें। -
-ओएनजीसी स्मार्ट क्लासरूम और बीईएमएल खेल सुविधाओं का किया उद्घाटन
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), रायपुर ने 21 अगस्त 2026 को नवप्रवेशी प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए "ओरिएंटेशन (दीक्षांत) कार्यक्रम" का आयोजन किया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रेक्षागृह में आयोजित इस समारोह से पूर्व संस्थान परिसर में नवनिर्मित अकादमिक एवं खेल ढांचागत सुविधाओं का उद्घाटन किया गया।उद्घाटन समारोह का नेतृत्व एनआईटी रायपुर के अध्यक्ष (बोर्ड ऑफ गवर्नर्स) डॉ. सुरेश हावरे ने किया। इस अवसर पर भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के निदेशक (माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन) श्री संजय सोम; ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा एनआईटी रायपुर के पूर्व अध्यक्ष (बीओजी) श्री सुधीर वासुदेव; ओएनजीसी के निदेशक (मानव संसाधन) श्री मनीष पाटिल; एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव; एल्युमनी एसोसिएशन जीईसी-एनआईटी रायपुर के अध्यक्ष श्री उमेश चितलांगिया और अधिष्ठाता (कॉर्पोरेट रिलेशंस एंड रिसोर्स मोबिलाइजेशन) डॉ. शुभाशीष सन्याल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।संस्थान को समर्पित की गई सुविधाओं में तेल और प्राकृतिक गैस निगम लिमिटेड (ओएनजीसी) के ₹94 लाख के वित्तीय सहयोग से विकसित स्मार्ट क्लासरूम शामिल हैं, जो वातानुकूलन इकाइयों, स्मार्ट बोर्डों, प्रोजेक्टरों और अन्य आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। इसके अलावा, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के ₹30 लाख के सहयोग से विकसित वॉलीबॉल और बास्केटबॉल मैदानों का भी औपचारिक उद्घाटन किया गया, जिनमें थ्री-लेयर कोटिंग और उच्च गुणवत्ता वाली टर्फ की सुविधा है।स्वागत भाषण देते हुए निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने राष्ट्रीय स्तर पर एनआईटी रायपुर की स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप संचालित स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टरेट पाठ्यक्रमों को मिलाकर संस्थान की कुल प्रवेश क्षमता 5,938 है। उन्होंने नवागत विद्यार्थियों से जिज्ञासा बनाए रखने और कक्षा की सीमाओं से परे जाकर सीखने का आह्वान किया।इस अवसर पर डॉ. सुरेश हावरे द्वारा लिखित पुस्तक "एनआईटी रायपुर: ए लेगेसी ऑफ एक्सीलेंस" का औपचारिक विमोचन भी किया गया। सभा को संबोधित करते हुए डॉ. हावरे ने "आइडिया ही पावर है" का संदेश देते हुए नवाचार पर बल दिया। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए बताया कि स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में एनआईटी रायपुर के 15 प्रोफेसर शामिल हैं। साथ ही, संस्थान के पूर्व छात्रों ने इसरो के चंद्रयान अभियानों और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ओएनजीसी के निदेशक (मानव संसाधन) श्री मनीष पाटिल ने तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ सॉफ्ट स्किल्स, टीम वर्क और व्यावसायिक समझ के महत्व पर प्रकाश डाला। बीईएमएल के निदेशक (माइनिंग एंड कंस्ट्रक्शन) श्री संजय सोम ने कहा कि तकनीकी संस्थान विद्यार्थियों में चरित्र, धैर्य और समस्या-समाधान की क्षमता का निर्माण करते हैं जो औद्योगिक नेतृत्व के लिए आवश्यक हैं। ओएनजीसी के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री सुधीर वासुदेव और एल्युमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री उमेश चितलांगिया ने भी विचार व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों को व्यावहारिक समस्या-समाधान, मार्गदर्शन और निरंतर सीखने पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।दीक्षांत कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में संस्थागत परिचय एवं नियमों की जानकारी दी गई। अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) डॉ. मनोज चोपकर ने रैगिंग के प्रति संस्थान की शून्य-सहनशीलता (जीरो टॉलरेंस) की नीति पर जोर दिया और आचार संहिता के दिशा-निर्देश रेखांकित किए। इसके पश्चात सह-अधिष्ठाता (अकादमिक) डॉ. सुभोजित घोष ने अकादमिक नियमों; डॉ. विवेक कुमार गाबा ने करियर डेवलपमेंट सेंटर और प्लेसमेंट गतिविधियों; डॉ. सुवेंदु रूप ने सांस्कृतिक एवं सामाजिक क्लबों; डॉ. दीपमाला शर्मा एवं डॉ. प्रदीप सिंह ने छात्रावास सुविधाओं; तथा 'बेटरस्पेस' की सह-संस्थापक एवं सीईओ डॉ. शिवली श्रीवास्तव ने मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण सेवाओं के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतियां दीं।कार्यक्रम का समापन अधिष्ठाता डॉ. शुभाशीष सन्याल द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसने नए बैच के अकादमिक सत्र के औपचारिक शुभारंभ को चिह्नित किया। - रायपुर । तकनीक का सकारात्मक उपयोग अब समाज के सबसे वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को भी सरल और सम्मानजनक बना रहा है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के अंतर्गत संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (DLC) की सुविधा ने पेंशन सत्यापन की प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और त्वरित बना दिया है। इसका लाभ प्रदेश के हजारों बुजुर्गों के साथ-साथ लाभार्थी श्रीमती गौती बाई को भी निरंतर मिल रहा है।पहले वृद्धजनों को प्रत्येक वर्ष जीवित प्रमाण-पत्र जमा कराने के लिए शासकीय कार्यालयों और बैंकों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे। अधिक उम्र और शारीरिक असुविधाओं के कारण यह प्रक्रिया उनके लिए काफी कठिन होती थी। लेकिन अब डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की सुविधा ने इस परेशानी को लगभग समाप्त कर दिया है।श्रीमती गौती बाई प्रतिवर्ष समय पर 'लाभार्थी सत्यापन एप्लीकेशन' के माध्यम से अपना डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र दर्ज कराती हैं। डिजिटल सत्यापन पूर्ण होने के बाद उनकी पात्रता का सत्यापन सहजता से हो जाता है और उन्हें बिना किसी बाधा के नियमित रूप से वृद्धावस्था पेंशन की राशि प्राप्त होती रहती है।गौती बाई बताती हैं कि अब उन्हें जीवित प्रमाण-पत्र के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। समय पर डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट दर्ज होने से उनकी पेंशन नियमित रूप से खाते में पहुंच जाती है, जिससे दवाइयों, दैनिक आवश्यकताओं और अन्य घरेलू खर्चों की व्यवस्था आसानी से हो जाती है। इससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा के साथ आत्मसम्मान का भी अनुभव होता है। डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जैसी अभिनव पहल सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। यह व्यवस्था न केवल पेंशन वितरण प्रणाली को मजबूत कर रही है, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आवश्यक आर्थिक संबल भी प्रदान कर रही है। प्रदेश सरकार की यह डिजिटल पहल बुजुर्गों के जीवन में सुविधा, विश्वास और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिख रही है।
- -बहनों के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण का आधार बनी महतारी वंदन योजना-30वीं किस्त से वृंदावती और सोनम ने खरीदी राखी, घर-गृहस्थी की जरूरतों में भी मिल रहा सहारारायपुर / महतारी वंदन योजना छत्तीसगढ़ की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है। योजना के तहत हर माह मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं को घरेलू जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और त्योहारों की तैयारियों में सहारा मिल रहा है। रक्षाबंधन से पहले योजना की 30वीं किस्त मिलने से प्रदेश की बहनों की खुशियां और बढ़ गई हैं। रायगढ़ की श्रीमती वृंदावती सिदार और बिलासपुर की श्रीमती सोनम साहू की कहानी इस बात की मिसाल है कि किस तरह यह राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल के साथ आत्मविश्वास का आधार भी बन रही है।रायगढ़ की श्रीमती वृंदावती सिदार बताती हैं कि महतारी वंदन योजना के तहत हर माह मिलने वाली राशि से उन्हें घर की जरूरी जरूरतें पूरी करने में काफी मदद मिलती है। बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और घर-गृहस्थी के छोटे-बड़े खर्चों में यह राशि उनके लिए लगातार सहारा बनी हुई है। इस बार 30वीं किस्त से उन्होंने अपने भाइयों के लिए राखी खरीदी है। उनका कहना है कि रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधते समय इस राशि से मिली आत्मनिर्भरता और सम्मान की भावना भी उनके साथ होगी।बिलासपुर की श्रीमती सोनम साहू के लिए भी महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त रक्षाबंधन से पहले खुशी का खास अवसर लेकर आई। उन्होंने बताया कि प्राप्त राशि से वह अपने भाई के लिए राखी खरीदने के साथ रक्षाबंधन की अन्य तैयारियां करेंगी। उनका कहना है कि त्योहार से पहले खाते में राशि आने से उनकी खुशी दोगुनी हो गई है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बहनों को रक्षाबंधन से पहले आर्थिक संबल मिलना उनके लिए किसी उपहार से कम नहीं है।श्रीमती वृंदावती और श्रीमती सोनम जैसी अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि का उपयोग अपनी और परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में कर रही हैं। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं को छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम करने और परिवार के खर्चों में अपनी भूमिका निभाने का अवसर मिल रहा है। इससे उनमें आत्मविश्वास और आर्थिक निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत हो रही है। दोनों महिलाओं ने कहा कि महतारी वंदन योजना उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सम्मान, आत्मनिर्भरता और परिवार की जिम्मेदारियों में भागीदारी का माध्यम बन गई है। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। रक्षाबंधन के अवसर पर मिली 30वीं किस्त ने उनके लिए भाई-बहन के स्नेह के इस पर्व की खुशियों को और खास बना दिया है।
- -विकास कार्यों में गुणवत्ता और गति सुनिश्चित करें, अधिकारी मैदानी क्षेत्रों में जाकर करें योजनाओं की निगरानी : श्रीमती राजवाड़े-निर्माणाधीन स्कूल भवनों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश, हर घर मुनगा रोपण पर जोररायपुर / महिला एवं बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री तथा बलरामपुर जिले की प्रभारी मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने समीक्षा बैठक में कहा कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और विकास कार्यों का प्रभाव मैदानी स्तर पर दिखाई देना चाहिए। अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी के लिए मैदानी क्षेत्रों में जाएं तथा कार्यों में गुणवत्ता और गति सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय से ही क्षेत्र का समग्र विकास संभव है। सभी विभाग अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन करते हुए निर्धारित समय-सीमा में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करें।बैठक में मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने न्यायालय में लंबित प्रकरणों, अविवादित एवं विवादित खाता विभाजन, सीमांकन तथा एग्रीस्टेक पंजीयन की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने किसानों का एग्रीस्टेक एवं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि कोई पात्र किसान शासन की योजनाओं से वंचित न रहे। खाद-बीज के भंडारण एवं वितरण की समीक्षा करते हुए उन्होंने किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए।मंत्री ने आंगनबाड़ी केन्द्रों में सुपोषण वृक्ष मुनगा के रोपण की जानकारी लेते हुए हर घर मुनगा वृक्ष लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मुनगा पौष्टिकता का अच्छा स्रोत है, इसलिए इसे पोषण अभियान से जोड़कर अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाया जाए। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को जैविक खेती एवं सब्जी उत्पादन से जोड़ने पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया, ताकि महिलाओं की आय बढ़ने के साथ परिवार के पोषण स्तर में भी सुधार हो।स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने निर्माणाधीन स्कूल भवनों में गुणवत्तापूर्ण निर्माण सुनिश्चित करने तथा मरम्मत योग्य भवनों की समय पर मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने न्योता भोज के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने तथा आश्रम-छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने पर भी जोर दिया। स्कूलों में सामुदायिक शौचालयों में पर्याप्त पानी, साफ-सफाई एवं समुचित संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।मंत्री ने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, महतारी वंदन योजना में ई-केवाइसी, निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन तथा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की समीक्षा की। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का समय पर लाभ दिलाने के निर्देश दिए। जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने, खराब हैंडपंपों का तत्काल सुधार तथा जलस्रोतों के संरक्षण एवं जलसंचय कार्यों को प्राथमिकता देने को कहा।स्वास्थ्य सुविधाओं की समीक्षा करते हुए मंत्री ने जिला चिकित्सालय में साफ-सफाई एवं आवश्यक व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। पशुपालन विभाग की समीक्षा में उन्होंने कृत्रिम गर्भाधान, पशु टीकाकरण, गौधाम योजना सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली और अधिक से अधिक पशुपालकों को योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया।राष्ट्रीय राजमार्ग, लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई एवं पीएम जनमन सड़क निर्माण कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने तथा नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का चिन्हांकन एवं सीमांकन कर नियमानुसार कार्रवाई करने को भी कहा।बैठक में कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने वर्षा एवं बोवाई की स्थिति, एग्रीस्टेक पंजीयन, वीबी-जी रामजी, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास, पीएम जनमन आवास एवं सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान सहित विभिन्न योजनाओं की प्रगति से मंत्री को अवगत कराया। पुलिस अधीक्षक श्री वैभव बैंकर ने अपराध, एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई, सड़क दुर्घटनाओं एवं हेलमेट जागरूकता अभियान की जानकारी दी।वनमण्डलाधिकारी श्री आलोक वाजपेयी ने विभागीय कार्यों की जानकारी दी। इस दौरान मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने हाथी प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने, नियमित मुनादी कराने तथा ग्रामीणों को समय पर सचेत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जनहानि रोकने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जाएं। बैठक में सामरी विधायक श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा, प्रतापपुर विधायक श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हीरामुनी निकुंज, विधायक प्रतिनिधि श्री बलवंत सिंह सहित जिले के अधिकारी उपस्थित रहे।
- -पालकों से संवाद, समझाइश और सहयोग से छात्रा का दोबारा विद्यालय में प्रवेशरायपुर । शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और किसी भी परिस्थिति में बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए शासन स्तर पर निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी दिशा में सूरजपुर जिले में शिक्षक की पहल से शाला त्याग चुकी एक छात्रा को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की प्रेरणादायी मिसाल सामने आई है। शिक्षक के निरंतर प्रयास, पालकों से संवाद और समझाइश के बाद ग्राम दवना की छात्रा दुर्गावती ने दोबारा विद्यालय में प्रवेश लिया और अब वह पूरे उत्साह के साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए तैयार है।विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्री अवधेश कुमार साहू के मार्गदर्शन में छात्रा को विद्यालय में प्रवेश दिलाया गया। पतरापाली से लगे ग्राम दवना स्थित प्राथमिक शाला भरूहमूड़ा से वर्ष 2025 में कक्षा 5वीं उत्तीर्ण करने के बाद छात्रा दुर्गावती, पिता भंवर सिंह ने आगे की पढ़ाई के लिए विद्यालय में प्रवेश नहीं लिया था। इस दौरान माध्यमिक शाला पतरापाली के शिक्षक श्री योगेश साहू ने छात्रा और उसके पालकों से संपर्क कर पढ़ाई जारी नहीं रखने का कारण जाना। पालकों ने बताया कि छात्रा विद्यालय जाने के लिए तैयार नहीं थी और वह अपनी नानी के घर चली गई थी। इसके अलावा जन्म प्रमाण पत्र एवं आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण भी आगे विद्यालय में प्रवेश कराने में परेशानी आ रही थी।शिक्षक श्री योगेश साहू ने छात्रा और उसके परिजनों से लगातार संवाद करते हुए उन्हें शिक्षा के महत्व तथा बच्चों की शिक्षा के अधिकार एवं अनिवार्य शिक्षा के प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने पालकों को समझाया कि किसी भी परिस्थिति में बच्चे की पढ़ाई रुकनी नहीं चाहिए और आवश्यक दस्तावेजों की व्यवस्था कर बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजना चाहिए।शिक्षक की समझाइश और निरंतर संपर्क का सकारात्मक असर हुआ। दुर्गावती ने दोबारा पढ़ाई शुरू करने की इच्छा जताई और उसका विद्यालय में प्रवेश कराया गया। पुनः विद्यालय पहुंचने के बाद छात्रा में पढ़ाई को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। छात्रा के पुनः प्रवेश के अवसर पर प्रधान पाठक श्री के.के. यादव एवं शिक्षिका श्रीमती अनिता सिंह ने उसे निःशुल्क पुस्तक एवं गणवेश प्रदान किया। वहीं शिक्षक श्री योगेश साहू ने अपने स्तर पर छात्रा को कॉपी एवं पेन उपलब्ध कराकर उसका उत्साहवर्धन किया, ताकि शिक्षण सामग्री के अभाव में उसकी पढ़ाई प्रभावित न हो।दुर्गावती की कहानी यह बताती है कि शाला त्यागने वाले बच्चों को केवल विद्यालय में प्रवेश दिलाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उनके परिवारों से निरंतर संपर्क और संवाद भी जरूरी है। शिक्षक की संवेदनशील पहल से न केवल छात्रा को दोबारा पढ़ाई का अवसर मिला, बल्कि उसके परिवार में भी शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है। विद्यालय परिवार ने दुर्गावती को नियमित रूप से विद्यालय आने और मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया। वहीं दुर्गावती भी लंबे अंतराल के बाद विद्यालय लौटकर नई ऊर्जा और उत्साह के साथ अपनी पढ़ाई शुरू करने को लेकर उत्साहित है। शिक्षक और विद्यालय परिवार का यह प्रयास शिक्षा से वंचित बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण है।
- -शिक्षा से आत्मनिर्भरता की ओर कदम-“भाई का स्नेह, बहनों का अधिकार—विष्णु भैया का मिला साथ, आत्मनिर्भर बना परिवार”रायपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के खड़कागांव की रहने वाली कांति दुग्गा (पिता श्री घसिया दुग्गा) के जीवन में समाज कल्याण विभाग की पहल से एक नया मोड़ आया है। श्रवण बाधित होने के कारण कांति को दैनिक जीवन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। दूसरों पर निर्भरता और बातचीत में असमर्थता के चलते उन्हें 10वीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई भी अधूरी छोड़नी पड़ी थी।कांति की इस समस्या को दूर करने के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सहायक उपकरण प्रदाय योजना के तहत उन्हें श्रवण यंत्र (Hearing Aid) प्रदान किया गया। इस छोटी सी मदद ने कांति के जीवन को पूरी तरह बदलकर रख दिया। अब वे न केवल अपने परिवार और समाज के लोगों की बातें सहजता से सुन और समझ पा रही हैं, बल्कि अपने दैनिक काम भी पूरे आत्मविश्वास के साथ करने लगी हैं। श्रवण यंत्र मिलने से कांति का खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौट आया है। पढ़ाई छोड़ चुकी कांति अब एक बार फिर अपनी शिक्षा पूरी करने और आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं।अपने जीवन में आए इस सकारात्मक बदलाव और सशक्तिकरण के लिए कांति ने जिला प्रशासन एवं समाज कल्याण विभाग का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विष्णु भैया के सुशासन में हर बहन को उसका अधिकार मिल रहा है। यह श्रवण यंत्र सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि एक बड़े भाई का स्नेह और संबल है, जिसने मुझे फिर से आगे बढ़ने का हौसला दिया है। 'भाई का स्नेह, बहनों का अधिकार—विष्णु भैया के साथ आत्मनिर्भर परिवार' की यह सोच आज मेरे जैसे कई परिवारों के सपनों को सच कर रही है।
- -मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल का असर: महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में लगभग 51 प्रतिशत की बढ़ोतरी-पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत छूट से नागरिकों को मिला 76.95 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ-महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत से बढ़कर हुई 41 प्रतिशत-प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धिरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और संपत्ति स्वामित्व में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए लिए गए निर्णय के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट दिए जाने से प्रदेश में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन का रुझान बढ़ा है। इससे महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व को बढ़ावा मिलने के साथ ही नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ भी प्राप्त हुआ है।पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा किए गए तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार, 06 मई से 27 जुलाई 2026 की अवधि में महिलाओं के नाम 30 हजार 720 दस्तावेज पंजीकृत किए गए, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 20 हजार 319 थी। इस प्रकार महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या में लगभग 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।32 प्रतिशत से बढ़कर 41 प्रतिशत हुई महिलाओं की हिस्सेदारीविभागीय आंकड़ों के अनुसार, 06 मई से 27 जुलाई 2025 की अवधि में कुल 63 हजार 174 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए थे, जिनमें 20 हजार 319 दस्तावेजों में महिलाएं खरीदार थीं। महिलाओं के पक्ष में पंजीकृत विक्रय विलेखों की हिस्सेदारी 32 प्रतिशत थी। इसी अवधि में वर्ष 2026 में कुल 74 हजार 424 विक्रय विलेख पंजीकृत हुए, जिनमें 30 हजार 720 दस्तावेजों में महिलाएं खरीदार थीं। इससे महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई है। यानी एक वर्ष में महिलाओं की हिस्सेदारी में 9 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।यह वृद्धि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए किए गए सुधार के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है। संपत्ति में महिलाओं का बढ़ता स्वामित्व उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ परिवार में उनकी निर्णयात्मक भूमिका को भी मजबूत करता है।प्रदेशभर में दिख रहा असर, लगभग 75 प्रतिशत जिलों में उल्लेखनीय वृद्धिपंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का प्रभाव प्रदेश के विभिन्न जिलों में दिखाई दे रहा है। विभागीय विश्लेषण के अनुसार प्रदेश के लगभग 75 प्रतिशत जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में 20 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। जांजगीर-चांपा, बालोद, कोरिया, रायपुर और कांकेर सहित अनेक जिलों में महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।जिला-वार आंकड़ों में रायपुर में महिलाओं के नाम पंजीकृत दस्तावेजों की संख्या 4,220 से बढ़कर 6,038, बिलासपुर में 1,894 से बढ़कर 2,958 तथा जांजगीर-चांपा में 1,239 से बढ़कर 2,302 हुई है। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के संपत्ति स्वामित्व के प्रति बढ़ते रुझान का पता चलता है।76.95 करोड़ रुपये का मिला प्रत्यक्ष आर्थिक लाभमहिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा पंजीयन शुल्क में दी जा रही 50 प्रतिशत की छूट से नागरिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक राहत मिली है। 06 मई से 27 जुलाई 2026 की अवधि में इस छूट के माध्यम से नागरिकों को 76 करोड़ 95 लाख 33 हजार 689 रुपये, यानी लगभग 76.95 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ प्राप्त हुआ है।महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और स्वावलंबन हमारी प्राथमिकता : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव सायमुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि महिला सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें परिवार तथा समाज में समान अवसर उपलब्ध कराना है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने का निर्णय लिया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस निर्णय के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि यह पहल परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति स्वामित्व के लिए प्रोत्साहित कर रही है। संपत्ति का स्वामित्व महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान करता है तथा परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में उनकी भूमिका को और सशक्त बनाता है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। शासन की नीतियों के केंद्र में माताओं-बहनों की आर्थिक सुरक्षा और विकास में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना है।सामाजिक और आर्थिक सोच में सकारात्मक बदलाव : वित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री श्री ओ.पी. चौधरीवित्त एवं वाणिज्यिक कर (पंजीयन) मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में हुई उल्लेखनीय वृद्धि राज्य में सामाजिक एवं आर्थिक सोच में आ रहे सकारात्मक परिवर्तन को दर्शाती है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट ने परिवारों को महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीकृत कराने के लिए प्रोत्साहित किया है।नारी सशक्तिकरण को आर्थिक आधार दे रही सरकार की पहलछत्तीसगढ़ सरकार महिला सशक्तिकरण को आर्थिक स्वावलंबन और संपत्ति स्वामित्व से जोड़कर आगे बढ़ा रही है। पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं के नाम संपत्ति पंजीयन में दर्ज हुई वृद्धि और नागरिकों को मिले 76.95 करोड़ रुपये के प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ से इस पहल के सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं।महिलाओं के नाम संपत्ति का स्वामित्व उनके भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के साथ परिवार और समाज में उनकी भागीदारी को सशक्त बना रहा है। यह पहल सशक्त परिवार और सशक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
- -लखपति दीदियों की आजीविका डबरियों से बढ़ेगी अतिरिक्त आयरायपुर । ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों तथा महिला स्व-सहायता समूहों की आय बढ़ाने की दिशा में कोरिया जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन के प्रयासों से वीबी-ग्राम-जी योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) एवं मत्स्य पालन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में जिले के 174 किसानों को 1020 बैग उन्नत मत्स्य बीज वितरित किए गए।ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से बिहान महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्यों को ‘आजीविका डबरी योजना’ से जोड़ा गया है। योजना के तहत निर्मित डबरियों में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव के निर्देश पर मत्स्य विभाग द्वारा हितग्राहियों को अनुदान आधारित मत्स्य बीज उपलब्ध कराया गया। कुल 174 हितग्राहियों में 68 आजीविका डबरी हितग्राही तथा 106 अन्य किसान शामिल हैं। अन्य हितग्राहियों के पास तालाब, अमृत सरोवर अथवा व्यक्तिगत डबरी उपलब्ध है। मत्स्य पालन से इन्हें कृषि के साथ अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।मत्स्य बीज वितरण कार्यक्रम विकासखंड बैकुंठपुर के गेज प्रक्षेत्र तथा विकासखंड सोनहत के अमहर प्रक्षेत्र में आयोजित किया गया। योजना के तहत हितग्राहियों द्वारा मात्र 140 रुपये प्रति बैग की दर से स्वैच्छिक अंशदान राशि जमा कराई गई। जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए क्लस्टर लेवल एप्रोच तैयार की जा रही है। इसके तहत मत्स्य उत्पादक किसानों एवं महिला समूहों के क्लस्टर बनाकर उन्हें बड़े व्यापारियों और बाजारों से सीधे जोड़ा जाएगा। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और उत्पादकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। सामूहिक रूप से मत्स्य उत्पादन एवं विपणन को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। जिला प्रशासन की इस पहल से कृषि, महिला स्व-सहायता समूहों और मत्स्य पालन को एक साथ जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती भी मिलेगी।
- -स्थानीय सामग्री से तैयार आकर्षक राखियों की बाजार में भारी मांगरायपुर। रक्षाबंधन पर्व बिहान से जुड़ी ग्रामीण दीदियों के लिए भाई-बहन के स्नेह के साथ स्वावलंबन और आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर भी लेकर आया है। गरियाबंद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं स्थानीय एवं पारंपरिक सामग्री से आकर्षक राखियों का निर्माण कर रही हैं। राखियों के विक्रय से महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है और वे स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। मैनपुर विकासखंड में स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा राखी निर्माण एवं विक्रय की गतिविधि संचालित कर रही है। समूह द्वारा 5 हजार 340 रुपये की लागत से राखियां तैयार कर अब तक 11 हजार 258 रुपये की बिक्री कर चुकी है।इसी प्रकार विकासखंड गरियाबंद में संजीवनी संकुल संगठन जोबा से संबद्ध गायत्री स्व-सहायता समूह सढ़ौली की चार महिला सदस्य विभिन्न प्रकार की आकर्षक राखियों का निर्माण कर रही हैं। समूह द्वारा धान चावल, मूंगा, मटर, झरगा, सेमी, अरहर सहित अन्य स्थानीय सामग्री से राखियों की विभिन्न वैरायटी तैयार की गई है। इन राखियों की कीमत 5 रुपये से 60 रुपये तक निर्धारित की गई है। विकासखंड छुरा के ग्राम जामली स्थित जय भवानी स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने भी बांस से निर्मित राखियों को बाजार तक पहुंचाने की पहल की है। समूह की महिलाओं द्वारा पूर्व वर्षों में भी राखियों का निर्माण किया गया था।वर्ष 2026 में इस गतिविधि को बढ़ाते हुए वर्तमान में लगभग 1 हजार राखियों का स्टॉक तैयार किया गया है, जिन्हें रक्षाबंधन पर्व पर विक्रय किया जाएगा। विकासखंड फिंगेश्वर के ग्राम पंचायत रोहिना अंतर्गत जय मां घटारानी स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती कोयल साहू, विजय विकास महिला संकुल संगठन कौंदकेरा से जुड़कर आकर्षक एवं गुणवत्तापूर्ण राखियों का निर्माण कर रही हैं। उन्होंने इस वर्ष लगभग 5 हजार राखियां तैयार की हैं। इनमें 5 रुपये से 40 रुपये तक की विभिन्न डिजाइनों वाली राखियां शामिल हैं। समूह द्वारा 10 हजार रुपये की लागत से राखियां तैयार कर अब तक 12 हजार रुपये की बिक्री दर्ज की गई है। वर्तमान में लगभग 4 हजार राखियां उपलब्ध हैं, जिनके विक्रय से अनुमानित रूप से 16 हजार रुपये तक लाभ अर्जित कर सकते है।जिले में स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित राखियों को बाजार उपलब्ध कराने और उनके उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सभी जनपद पंचायतों में केनोपी के माध्यम से राखी विक्रय स्टॉल लगाए जा रहे हैं। इन स्टॉलों के माध्यम से नागरिकों को आकर्षक एवं हस्तनिर्मित राखियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही महिला समूहों के उत्पादों को व्यापक बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है इसी क्रम में जिला प्रशासन गरियाबंद द्वारा आकांक्षा हाट के माध्यम से राखी विक्रय के लिए विशेष स्टॉल लगाया जा रहा है।
- -कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन और जैव ईंधन से खुलेंगे निवेश और हरित रोजगार के नए अवसर-छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 से स्वच्छ ऊर्जा और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति-बायोमास को कृषि अवशेष नहीं, ऊर्जा और आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करने पर जोर-क्लस्टर आधारित मॉडल से किसानों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों की बढ़ेगी आय-फीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन और निजी निवेश के लिए मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने पर विशेषज्ञों ने किया मंथनरायपुर / छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कृषि अवशेष, वन संसाधन, पशुधन अपशिष्ट और नगरीय जैव अपशिष्ट को स्वच्छ ऊर्जा में परिवर्तित कर प्रदेश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में रोजगार और आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं। कम्प्रेस्ड बायोगैस, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोएथेनॉल और अन्य जैव ईंधनों के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं का योजनाबद्ध उपयोग छत्तीसगढ़ को देश की उभरती जैव ऊर्जा अर्थव्यवस्था में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर सकता है।इन्हीं संभावनाओं और भावी कार्ययोजना पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र, इसके टेक्निकल पार्टनर सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) तथा छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में अरण्य भवन, नवा रायपुर अटल नगर के सभागार में ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक विकास में जैव ऊर्जा की भूमिका पर केंद्रित कार्यशाला आयोजित की गई।कार्यशाला में शासन के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के उद्योगों, वित्तीय एवं तकनीकी संस्थानों, शिक्षाविदों और नागरिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया। विशेषज्ञों ने कहा कि राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों की मजबूत वैल्यू चेन विकसित कर उन्हें स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने पर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने के साथ उद्योगों के डीकार्बोनाइजेशन, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को गति मिलेगी।कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 से जैव ऊर्जा क्षेत्र को नई दिशाकार्यशाला में बताया गया कि राज्य शासन ने जैव ऊर्जा क्षेत्र की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी पहल के रूप में छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 लागू की है। यह नीति प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन, हरित औद्योगिकीकरण, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।इसके साथ ही छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में बायोएनर्जी परियोजनाओं के लिए विभिन्न प्रोत्साहनों और सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इन नीतिगत पहलों के माध्यम से प्रदेश में जैव ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अनुकूल निवेश वातावरण तैयार करने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जैव ऊर्जा का विस्तार केवल ऊर्जा उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे कृषि अवशेषों और अपशिष्ट का आर्थिक उपयोग संभव होगा, किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे और सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूती मिलेगी।बायोमास को अपशिष्ट नहीं, आर्थिक संसाधन के रूप में देखने की जरूरत : श्री सुमित सरकारछत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित सरकार ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा तथा सामाजिक और पर्यावरणीय विकास के लक्ष्यों को एक साथ हासिल किया जा सकता है। इसके लिए बायोमास को केवल कृषि अवशेष अथवा अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय ऊर्जा आधारित आर्थिक विकास और हरित रोजगार के महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में विकसित करना होगा।उन्होंने कहा कि कम्प्रेस्ड बायोगैस, बायोएथेनॉल और अन्य बायोफ्यूल जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इनके उपयोग से उद्योगों के कार्बन उत्सर्जन को कम करने के साथ संसाधनों के पुनः उपयोग पर आधारित सर्कुलर इकोनॉमी को भी मजबूत किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की कृषि और वन आधारित अर्थव्यवस्था जैव ऊर्जा के विकास के लिए अनुकूल आधार उपलब्ध कराती है। उपलब्ध संसाधनों को तकनीक, निवेश और प्रभावी बाजार व्यवस्था से जोड़कर प्रदेश में जैव ऊर्जा आधारित नए आर्थिक अवसर तैयार किए जा सकते हैं।क्लस्टर आधारित मॉडल से कम होगी लागत, स्थानीय समुदायों की बढ़ेगी आयवन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सीसीएफ, एचआरडी-आईटी श्री आलोक तिवारी (आईएफएस) ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रमुख कृषि फसलों, वन एवं पशुधन संसाधनों तथा नगरीय निकायों से निकलने वाले अपशिष्ट की उपलब्धता को देखते हुए जैव ऊर्जा के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल प्रभावी सिद्ध हो सकता है।उन्होंने कहा कि क्लस्टर आधारित व्यवस्था से बायोमास के परिवहन की लागत कम की जा सकती है और जैव ऊर्जा संयंत्रों के लिए फीडस्टॉक की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। इस व्यवस्था से किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों को भी सीधे आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि की जा सकती है।विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर कन्वर्जेन्स आवश्यक : श्री रमापति कुमारसेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री रमापति कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बायोएनर्जी क्षमता को वास्तविक धरातल पर उतारने के लिए कृषि, ग्रामीण विकास, ऊर्जा, उद्योग, पर्यावरण और वित्त विभाग के साथ छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण, छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर कन्वर्जेन्स आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उद्योगों, वित्तीय संस्थानों, किसानों और नागरिक संगठनों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ना होगा। प्राकृतिक संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता और दीर्घकालिक नीतिगत पहलों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को बायोएनर्जी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि सीड राज्य के प्रयासों में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है और फीडस्टॉक प्रबंधन, बायोमास वैल्यू चेन तथा अभिनव समाधानों की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।कार्यक्रम में श्री अमिताभ वाजपेयी (आईएफएस), सदस्य-सचिव, छत्तीसगढ़ स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड ने भी भाग लिया।तकनीकी सत्र में बायोएनर्जी की वैल्यू चेन और व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चाकार्यशाला के तकनीकी सत्रों में जैव ऊर्जा उत्पादन के लिए कच्चे माल की उपलब्धता, फीडस्टॉक प्रबंधन, परिवहन, संग्रहण, तकनीक, बाजार, वित्तपोषण और उद्योगों में जैव ईंधन के उपयोग सहित विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।तकनीकी सत्र में श्री संतोष वार्ष्णेय, जनरल मैनेजर-बायोफ्यूल, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड; डॉ. प्रवीण डी. चेंडगे, सीनियर मैनेजर-कृषि, बरगढ़, ओडिशा, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड; श्री योगेश कुमार काडू, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर एवं नोडल ऑफिसर, स्वच्छ भारत मिशन, रायपुर नगर निगम; डॉ. अनिल श्रीवास्तव, प्रोजेक्ट साइंटिस्ट, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र; श्री विशाल प्रसाद गुप्ता, डायरेक्टर, एनर्जी कोर इंडिया एंड पावर लिमिटेड; श्री चंद्रमौली सिंह, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड; श्री विशाल जाधव, जिंदल पावर लिमिटेड, तमनार; श्री पुलकित श्रोत्रय, सेक्टर एक्सपर्ट; श्री अश्वनी अशोक, डायरेक्टर-जस्ट ट्रांजिशन, सीड; डॉ. देवयानी शर्मा, एसोसिएट डायरेक्टर-क्लाइमेट, सीड तथा श्री तुषार शर्मा, सीड सहित विभिन्न विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत के प्रतिनिधियों ने किया मंथनकार्यशाला में कृषि, वन एवं जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, स्टेट अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी तथा रायपुर नगर निगम के अधिकारियों ने भाग लिया। इसके साथ ही महिन्द्रा पावर, जायसवाल नेको, नाकोडा इस्पात, गोदावरी तथा बायो-एनर्जी और सीएनजी आधारित विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि भी चर्चा में शामिल हुए।आईआईएम रायपुर और कलिंगा यूनिवर्सिटी के शिक्षाविदों तथा विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी जैव ऊर्जा के विकास से जुड़े तकनीकी, आर्थिक, पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं पर सुझाव दिए।बायोमास कॉरिडोर और मजबूत फीडस्टॉक नेटवर्क पर जोरकार्यशाला और तकनीकी सत्रों से जैव ऊर्जा क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। विशेषज्ञों ने राज्य में उपलब्ध बायोमास संसाधनों का मानकीकृत आकलन और विश्वसनीय डेटा बेस तैयार करने की आवश्यकता बताई। इसके साथ ही एकीकृत बायोमास कॉरिडोर विकसित करने, संग्रहण एवं एकत्रीकरण की मजबूत व्यवस्था बनाने और उत्पादों की बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।निजी निवेश आकर्षित करने के लिए अनुकूल वित्तीय और नियामकीय व्यवस्था विकसित करने तथा फीडस्टॉक के संग्रहण और प्रबंधन में किसान उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों और सहकारी समितियों की भूमिका बढ़ाने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।कार्यशाला में इस बात पर सहमति रही कि नीति, तकनीक, निवेश और स्थानीय समुदायों को एक साझा मंच पर लाकर छत्तीसगढ़ में बायो-रिसोर्स आधारित अर्थव्यवस्था का मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है। इससे कृषि और वन आधारित संसाधनों का बेहतर मूल्य संवर्धन होने के साथ किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अतिरिक्त आय, स्थानीय स्तर पर हरित रोजगार और उद्योगों के लिए स्वच्छ ऊर्जा के नए विकल्प उपलब्ध होंगे।राज्य में उपलब्ध प्राकृतिक और जैव संसाधनों के वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी बायोएनर्जी राज्यों में स्थापित करने की दिशा में यह कार्यशाला एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।
- -स्थानीय और घरेलू संसाधनों से तैयार कर रहीं आकर्षक राखियां, सीजनल गतिविधियों से बढ़ा आजीविका का दायरारायपुर । छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अपनी पारंपरिक दक्षता और स्थानीय संसाधनों को आजीविका के अवसरों में बदल रही हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं कृषि एवं अन्य गतिविधियों के साथ-साथ मौसम और त्योहारों के अनुरूप सीजनल व्यवसाय अपनाकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत किशुन नगर की जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल हैं।रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए समूह की 12 महिलाएं इन दिनों घरेलू एवं स्थानीय संसाधनों से आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। कम लागत में तैयार इन राखियों को स्थानीय बाजार में स्टॉल लगाकर और घर से विक्रय किया जा रहा है। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है और उनकी आजीविका को मजबूती मिल रही है।समूह की सदस्य सुश्री सोनाली सिंह ने बताया कि समूह की महिलाएं वर्षभर मौसम और त्योहार के अनुसार अलग-अलग आजीविका गतिविधियां अपनाती हैं। वर्तमान में राखी निर्माण का कार्य किया जा रहा है। राखियां तैयार करने में चावल, गेहूं, मक्का, कोहड़े के बीज सहित घर में उपलब्ध अन्य सामग्री का उपयोग किया जाता है। इन सामग्रियों को रंग एवं सजाकर आकर्षक डिजाइन तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा रेशमी धागे, ऊन और अन्य सजावटी सामग्री आवश्यकतानुसार बाजार से खरीदी जाती है।सुश्री दीप्ति चौधरी ने बताया कि घरेलू सामग्री के उपयोग से राखियों की उत्पादन लागत कम रहती है। समूह की महिलाएं अपने खाली समय में एक साथ बैठकर राखियां तैयार करती हैं। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर उत्पादन भी बढ़ाया जाता है। तैयार उत्पादों की बिक्री स्टॉल और घर से की जाती है। उन्होंने बताया कि बिहान योजना से प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिलने के बाद महिलाओं को कम लागत में आजीविका गतिविधि संचालित करने का अवसर मिला है। इससे वे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी आय भी अर्जित कर पा रही हैं।समूह की सदस्य सुश्री आशा रवि ने बताया कि महिलाएं पिछले लगभग तीन वर्षों से घरेलू सामग्री से राखियां तैयार कर रही हैं। समूह की सभी सदस्य मिलकर उत्पादन और बिक्री में भागीदारी करती हैं। सामूहिक रूप से कार्य करने से उन्हें एक-दूसरे का सहयोग मिलता है और नई गतिविधियां सीखने का अवसर भी प्राप्त होता है।जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं केवल राखी निर्माण तक सीमित नहीं हैं। वे वर्षभर मौसम और त्योहारों के अनुरूप अलग-अलग आजीविका गतिविधियों का चयन करती हैं। इससे उन्हें किसी एक व्यवसाय पर निर्भर रहने के बजाय पूरे वर्ष आय के नए अवसर मिलते हैं। समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, उत्पादन, बाजार और बिक्री के स्तर पर भी महिलाओं को आपसी सहयोग प्राप्त होता है।बिहान से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाओं में आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाएं घर में उपलब्ध सामग्री और अपने हुनर का उपयोग कर उन्हें आय के साधन में परिवर्तित कर रही हैं। राखी निर्माण जैसी गतिविधियां कम निवेश में स्वरोजगार शुरू करने का अवसर प्रदान कर रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही हैं।जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। महिलाओं ने कहा कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनने, नई गतिविधियां सीखने और समाज में अपनी अलग पहचान बनाने का अवसर मिला है।
- -16 वर्षीय बालिका को सुरक्षित रेस्क्यू कर रुकवाया विवाह, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल को मिल रहा जमीनी रूपरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ सरकार बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल विवाह की रोकथाम के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी क्रम में सुकमा जिले के तोंगपाल क्षेत्र में प्रशासन की तत्परता से एक 16 वर्षीय बालिका का बाल विवाह रुकवाकर उसे सुरक्षित संरक्षण प्रदान किया गया।सुकमा जिले के मासापारा कावराकोपा क्षेत्र में बाल विवाह की सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड लाइन और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम तत्काल मौके पर पहुंची। टीम ने दोनों पक्षों को बाल विवाह से होने वाले नुकसान और बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के प्रावधानों की जानकारी दी। समझाइश के बाद युवक पक्ष ने विवाह स्थगित करने पर सहमति जताई।जानकारी के अनुसार सुकमा जिले के महारापारा हमीरगढ़ निवासी 16 वर्षीय बालिका को विवाह के उद्देश्य से युवक अपने साथ लेकर आया था। प्रशासनिक टीम ने बालिका की सुरक्षा और सर्वाेत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए उसे उसके गृहग्राम पहुंचाया। वहां परिजन उपस्थित नहीं मिलने पर बालिका को सुरक्षित रूप से सुकमा लाया गया। बाल कल्याण समिति के समक्ष आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने तक उसे सखी सेंटर में सुरक्षित आश्रय दिया गया है। कार्रवाई के दौरान घोषणा-पत्र लिया गया और पंचनामा तैयार किया गया। संबंधित पक्षों को बाल विवाह करने पर होने वाली वैधानिक कार्रवाई से भी अवगत कराया गया।जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुकमा और जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई में संरक्षण अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, चाइल्ड लाइन परियोजना समन्वयक सहित संबंधित अधिकारी-कर्मचारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्राम सचिव और रोजगार सहायक शामिल रहे।प्रशासन की इस त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई ने न केवल एक नाबालिग बालिका को बाल विवाह से बचाया, बल्कि उसके सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार और वन एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में जिले में बाल अधिकारों की रक्षा, बाल विवाह की रोकथाम और सुरक्षित बचपन के लिए प्रशासन लगातार सक्रियता से कार्य कर रहा है।
- रायपुर। रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि स्नेह, सुरक्षा और आत्मीयता का पावन संकल्प है। छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए यह पर्व दोगुनी खुशियां लेकर आया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’ प्रदेश की लाखों महिलाओं के जीवन में आर्थिक संबल, आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का नया सवेरा लिख रही है।धमतरी जिले के मुजगहन गांव की रहने वाली मंजू यादव के लिए इस बार का रक्षाबंधन बेहद खास है। महतारी वंदन योजना की राशि खाते में पहुंचते ही उनके चेहरे पर एक सहज मुस्कान तैर उठी। मंजू खुशी व्यक्त करते हुए कहती हैं, कि इस बार रक्षाबंधन पर अपने लिए नई साड़ी खरीदूंगी। एक नई साड़ी की यह खरीदारी केवल कपड़ों का चयन भर नहीं है—यह मंजू के अपने स्वाभिमान, निर्णय लेने की आजादी और अपनी छोटी-छोटी खुशियों को खुद पूरा करने के सुखद एहसास का प्रतीक है। अब उन्हें अपने व्यक्तिगत खर्चों या पर्व-त्योहारों की तैयारियों के लिए किसी और पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली नियमित सहायता राशि ने महिलाओं को केवल व्यक्तिगत खुशियां ही नहीं दी हैं, बल्कि उन्हें परिवार की निर्णय प्रक्रिया में भी मजबूत भागीदार बनाया है। धमतरी जिले की महिलाएं इस राशि का उपयोग वह घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने, बच्चों की शिक्षा एवं जरूरतों का ध्यान रखने,स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत देखभाल की वस्तुएं खरीदने, और तीज-त्योहारों की तैयारियों को उत्साहपूर्वक मनाने में कर रही हैं। इससे न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण व स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नया सहारा मिला है।त्योहार के इस अवसर पर धमतरी की बहनों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विष्णु भैया की सरकार हर कदम पर बहनों के साथ खड़ी है। रक्षाबंधन पर जहां बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा का धागा बांधती हैं, वहीं राज्य सरकार की इस संवेदनशील पहल ने बहनों को सुरक्षा, सम्मान और संबल का वास्तविक एहसास कराया है। शासन और जनता के बीच बने इस अटूट विश्वास ने यह साबित कर दिया है कि जब योजनाएं सीधे और पारदर्शी तरीके से हितग्राहियों तक पहुंचती हैं, तो वे केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं रहतीं, बल्कि जीवन को बदलने का माध्यम बन जाती हैं। धमतरी की बहनों की खिलखिलाती मुस्कान आज पूरे प्रदेश के लिए एक संदेश है। जब सरकार का साथ और संबल मिलता है, तो सपनों और खुशियों को सच में नई उड़ान मिलती है।
- रायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली प्रवास के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर दोनों मुख्यमंत्रियों के बीच विभिन्न समसामयिक विषयों पर आत्मीय चर्चा हुई।
- -प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त-पोस्ट-मैट्रिक एवं टॉप क्लास हायर एजुकेशन छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबरमहासमुंद / दिव्यांगजन केंद्रीय छात्रवृत्ति योजना के तहत शिक्षा सत्र 2026-27 में नियमित रूप से अध्ययनरत दिव्यांग छात्र-छात्राओं के ऑनलाइन पंजीयन के लिए पोर्टल शुरू हो गया है। योजना के अंतर्गत कक्षा 9वीं एवं 10वीं के विद्यार्थियों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, कक्षा 11वीं एवं 12वीं सहित आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्नातक, तकनीकी एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रम, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी में अध्ययनरत विद्यार्थियों को पोस्ट-मैट्रिक एवं टॉप क्लास हायर एजुकेशन छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती संगीता सिंह ने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे अधिक होना आवश्यक है तथा उसके पास सक्षम चिकित्सा प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र होना चाहिए। आवेदक छत्तीसगढ़ का मूल निवासी और विगत वर्ष की परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए। विद्यार्थी किसी अन्य छात्रवृत्ति योजना का लाभ नहीं ले रहा हो। प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए पालक या अभिभावक की वार्षिक आय 2.50 लाख रुपए तथा टॉप क्लास हायर एजुकेशन के लिए 8 लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।पात्र विद्यार्थी राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल https://scholarships.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 और संस्था सत्यापन की अंतिम तिथि 15 सितंबर 2026 निर्धारित है। वहीं पोस्ट-मैट्रिक एवं टॉप क्लास हायर एजुकेशन छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 तथा संस्था सत्यापन की अंतिम तिथि 15 नवंबर 2026 है।ऑनलाइन आवेदन के बाद विद्यार्थी आवेदन का प्रिंट निकालकर निर्धारित तिथि से पहले संबंधित संस्था के प्रधान पाठक या प्राचार्य की अनुशंसा सहित आवेदन प्रक्रिया पूर्ण कराएं। पोर्टल पर पंजीयन, संस्था पंजीयन अथवा संस्था केवायसी से संबंधित किसी भी समस्या के लिए समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया जा सकता है।
- -बारिश के बीच ग्रामीणों को मिली राहत-सीएम हेल्पलाइन से कार्रवाईमहासमुंद / महासमुंद विकासखंड के ग्राम पंचायत खट्टा अंतर्गत क्षतिग्रस्त पुल एवं सड़क की समस्या को लेकर ग्रामीणों और स्कूली बच्चों द्वारा की गई मांग पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत क्षतिग्रस्त सड़क एवं पुल की अस्थायी मरम्मत का कार्य कराया गया है, जिससे क्षेत्र में आवागमन सुगम हुआ है और ग्रामीणों तथा स्कूली बच्चों को राहत मिली है।लगातार बारिश के दौरान पुल के ऊपर से पानी बहने के कारण यहां आवागमन प्रभावित होता था। यह मार्ग पटेवा से महासमुंद आने-जाने के साथ-साथ कोकड़ी शासकीय स्कूल, खट्टा प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल तथा रामखेड़ा प्राथमिक एवं मिडिल स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण है।ग्रामीणों द्वारा सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराते हुए सड़क एवं पुल की समस्या के निराकरण की मांग की गई थी। शिकायत पर संबंधित विभाग द्वारा मौके की स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत तत्काल अस्थायी मरम्मत कराई गई। स्थानीय ग्रामीणों ने त्वरित मरम्मत कार्य के लिए प्रशासन एवं संबंधित विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है।
- -जिला प्रशासन की पहल रंग लाई, स्थानीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन का अनुभव लेने पर्यटकों का बढ़ रहा रुझानरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल में जशपुर जिले में पर्यटन विकास को ग्रामीण आजीविका से जोड़ने की दिशा में उल्लेखनीय पहल की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों एवं प्रमुख पर्यटन स्थलों पर विकसित किए जा रहे होमस्टे अब स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय का नया माध्यम बनने के साथ ही जशपुर की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, पारंपरिक खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली को देश-दुनिया के पर्यटकों तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं।जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरे गांव में विकसित ग्रामीण होमस्टे ने विशेष पहचान बनाई है। यहां 4 फरवरी 2026 को अंतरिक्ष यात्री एवं अशोक चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन श्री शुभांशु शुक्ला तथा 4 अप्रैल 2026 को राज्यपाल श्री रमेन डेका ने होमस्टे का अवलोकन किया। दोनों विशिष्ट अतिथियों ने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार व्यंजनों का स्वाद लिया और स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन तथा आतिथ्य परंपरा का अनुभव किया। इससे ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान मिली है।जशपुर में ग्रामीण एवं सामुदायिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए Homestays of India टीम द्वारा जिला प्रशासन के साथ मिलकर निरंतर कार्य किया जा रहा है। 25 जनवरी 2026 को Homestays of India, छत्तीसगढ़ सरकार एवं जशपुर जिला प्रशासन के बीच हुए समझौते के तहत केरे गांव को मॉडल कम्युनिटी टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित करने की पहल की गई है।इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को केवल पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराने तक सीमित न रखते हुए उन्हें स्थानीय ग्रामीण जीवन, खान-पान, परंपराओं, संस्कृति और प्रकृति से सीधे जोड़ना है। इससे पर्यटन का लाभ सीधे ग्रामीण समुदाय तक पहुंच रहा है।जिले में वर्तमान में केरे, छिछली र, दनगरी, मयाली और घोघरा (बलाझार) सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों पर होमस्टे विकसित एवं सूचीबद्ध हैं। इन होमस्टे के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आवास एवं आतिथ्य सेवाओं के साथ स्थानीय भोजन, गाइडिंग, प्रकृति भ्रमण और अन्य पर्यटन गतिविधियों से आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।पर्यटकों के बढ़ते रुझान से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को कम करने में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।जशपुर के होमस्टे पर्यटकों को प्रकृति के करीब रहने का अनूठा अवसर प्रदान कर रहे हैं। यहां ट्रेकिंग, नेचर वॉक, बर्ड वॉचिंग, कैंपिंग, रॉक क्लाइंबिंग, ग्राम भ्रमण, कृषि कार्यों में सहभागिता, पारंपरिक भोजन एवं जनजातीय संस्कृति का अनुभव जैसी गतिविधियां उपलब्ध हैं।इन गतिविधियों के माध्यम से पर्यटक जशपुर के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ यहां की लोक परंपराओं, खान-पान, रहन-सहन और सामुदायिक जीवन को करीब से जान पा रहे हैं।जशपुर अपनी हरी-भरी वादियों, पहाड़ों, जलप्रपातों, नदियों, जंगलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति के कारण छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। होमस्टे मॉडल ने इस पर्यटन विकास को स्थानीय आजीविका से जोड़कर इसे अधिक समावेशी और टिकाऊ स्वरूप प्रदान किया है। जिला प्रशासन की इन पहलों से जशपुर में पर्यटन केवल घूमने-फिरने तक सीमित न रहकर ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उद्यमिता और सांस्कृतिक संरक्षण का माध्यम बन रहा है। आने वाले समय में होमस्टे एवं सामुदायिक पर्यटन के विस्तार से जशपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के और अधिक अवसर सृजित होने की उम्मीद है।
- -बलौदाबाजार में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की जगी उम्मीद, जल्द लिया जाएगा निर्णय-उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा के प्रयास ला रहे रंग-नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से की महत्वपूर्ण मुलाकातरायपुर / बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा के प्रयास अब सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जिले में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना को लेकर मंत्री श्री वर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर इस विषय पर विस्तार से चर्चा की।मुलाकात के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री श्री वर्मा ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में केंद्रीय विद्यालय की महत्ता और स्थानीय विद्यार्थियों के हित से जुड़े विभिन्न पहलुओं से केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया। उन्होंने प्रक्रिया को गति देते हुए जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आश्वस्त किया कि इस विषय पर जल्द ही आवश्यक निर्णय लिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री के इस आश्वासन से जिले में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विद्यालय की स्थापना को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर बेहद सकारात्मक चर्चा हुई है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी जी द्वारा जल्द निर्णय लेने का आश्वासन मिलना पूरे जिले के लिए सुखद और उत्साहजनक है।बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना लंबे समय से क्षेत्रवासियों की प्रमुख मांग रही है। वर्तमान में बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए विद्यार्थियों को बड़े शहरों या अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है। जिले में विद्यालय खुलने से स्थानीय विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर का शैक्षणिक माहौल उपलब्ध हो सकेगा।राज्य सरकार द्वारा विद्यालय के संचालन के लिए शुरुआती दौर में अस्थायी भवन की व्यवस्था के साथ-साथ भविष्य में स्थायी भवन निर्माण हेतु भूमि चिह्नित एवं आरक्षित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा की पहल पर जिले में शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर और आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ी यह पहल जिले के समग्र शैक्षणिक विकास को एक नई गति प्रदान करेगी।
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बालोद/जिले के गुरूर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत अरमरीकला में ग्राम पंचायत से प्रस्ताव व ग्रामीणों की सहमति से माता तालाब में गहरीकरण एवं साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा है। जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि माता तालाब में विगत 50 वर्ष से पानी भरे रहने के कारण साफ-सफाई नहीं हुआ था तथा पिचिंग का कार्य भी किया गया था एवं गर्मी में रोजगार गारंटी का कार्य भी कराया गया है। कार्यालयीन अभिलेखों के आधार पर माता तालाब खसरा नंबर 1232 कुल रकबा 19.73 हेक्टर में से 0.80 हेक्टर क्षेत्र का परिवहन अनुमति श्री सेवा सिंह ओबेराय को 2400 घनमीटर हेतु 1 माह के लिए, जो 21 जुलाई 2026 को समाप्त हुआ है। 2400 घनमीटर के विरूद्ध 800 घनमीटर मात्रा अनुमति दिया गया है। 20 जुलाई 2026 को ठेकेदार द्वारा खुदाई वाले जगह को समतल किया जा रहा था। ग्रामीणों और सरपंचों ने बताया गया कि ठेकेदार द्वारा स्वीकृत अवधि समाप्ति पश्चात परिवहन व गहरीकरण का कार्य नहीं किया गया। मौके पर कुछ हिस्से पर मिट्टी इकटठा करके रखा गया, जिसे समतल करने के लिए कहा गया है, जिसे बारिश बंद होने के पश्चात ठेकेदार से कराने हेतु निर्णय लिया गया है। जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि किसी भी प्रकार से राॅयल्टी की हानि नही हुई है।
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-'आनंदी कुटुम्ब समृद्ध ग्राम' कार्यक्रम में साझा किए विकास के अनुभव
बालोद। आदर्श ग्राम हिवरे बाजार (महाराष्ट्र) में 18 से 23 अगस्त 2026 तक आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय 'आनंदी कुटुम्ब समृद्ध ग्राम' कार्यक्रम में बालोद जिले की दो महिला सरपंचों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। ग्राम पंचायत गुजरा की सरपंच श्रीमती पार्वती मंडावी और ग्राम पंचायत दुधली की सरपंच श्रीमती पिलेश्वरी नेताम ने राष्ट्रीय मंच पर जिले के ग्रामीण विकास और महिला स्वावलंबन के अनुभवों को साझा कर क्षेत्र का नाम रोशन किया।राष्ट्रीय मंच पर साझा किए नवाचार के अनुभवकार्यक्रम के दौरान परिवार व समाज में महिलाओं की भूमिका, महिला सशक्तिकरण, आर्थिक समृद्धि और ग्रामीण महिलाओं के जीवन स्तर को सुरक्षित व बेहतर बनाने पर गहन मंथन हुआ। दोनों महिला जनप्रतिनिधियों ने पद्मश्री पोपटराव पवार तथा आत्मीयता यूनिवर्सिटी (राजकोट) के चेयरमैन स्वामी त्यागवल्लभ जी की गरिमामयी उपस्थिति में मंच साझा किया। उन्होंने न केवल अपने गांव के विकास मॉडल की प्रस्तुति दी, बल्कि देश भर से आए प्रतिभागियों के प्रश्नों के सटीक उत्तर भी दिए।श्रीमती पार्वती मंडावी (सरपंच, गुजरा): उन्होंने स्व-सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में उनके समूह द्वारा व्यापक स्तर पर आम के वृक्षारोपण का कार्य किया जा रहा है। साथ ही, उन्होंने अपनी समूह की अन्य बहनों को भी हिवरे बाजार के विकास मॉडल का अध्ययन भ्रमण कराने की इच्छा जताई।श्रीमती पिलेश्वरी नेताम (सरपंच, दुधली): उन्होंने शासन द्वारा संचालित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना करते हुए बताया कि इससे युवाओं और युवतियों को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के बेहतरीन अवसर मिल रहे हैं। यह पहल महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।प्रशासनिक मार्गदर्शन से मिली नई पहचानकलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ श्री सुनील चंद्रवंशी के कुशल मार्गदर्शन और निरंतर प्रोत्साहन के चलते जिले के पंचायत प्रतिनिधि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं। हिवरे बाजार में दोनों महिला सरपंचों की इस सहभागिता को जिले में पंचायती राज और महिला नेतृत्व की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।



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