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दुर्ग। जिले में मक्के की खेती के आड़ में अफीम उगाने की घटना सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। घटना के बाद सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने किसान और पार्टी के स्थानीय नेता को पार्टी से निलंबित कर दिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के जेवरा सिरसा पुलिस चौकी के अंतर्गत समोदा गांव में लगभग सात एकड़ मक्के के खेत के बीच में अफीम की खेती का खुलासा होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिया है तथा उनसे पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि मुखबीर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस और स्थानीय प्रशासन का दल शनिवार सुबह खेत पर पहुंचा और वहां जांच की और इस दौरान पता चला कि मक्के के खेत के मध्य अफीम की खेती की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, जमीन मधुमती ताम्रकार और प्रीतिबाला ताम्रकार की है।
दुर्ग की अतिरिक्त तहसीलदार क्षमा यादव ने बताया कि यह पता लगाने के लिए जांच चल रही है कि खेत में अफीम की फसल कैसे उगाई गई। अधिकारी ने बताया कि जमीन पर खेती का काम विनायक ताम्रकार करते हैं। वहीं जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है तथा ताम्रकार समेत कई संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। अधिकारी कथित अफीम की खेती की जांच कर रहे हैं। इस मामले में अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।
विवाद के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने राईस मिल प्रसंस्करण प्रकल्प किसान मोर्चा दुर्ग के प्रदेश संयोजक ताम्रकार को पार्टी से निलंबित कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी आदेश में प्रदेश महामंत्री डॉक्टर नवीन मार्कण्डेय ने कहा है, ''आपके आचरण एवं कृत्य से भारतीय जनता पार्टी की छवि धूमिल हुई है। आपका यह कृत्य पार्टी अनुशासनहीनता करने की श्रेणी में आता है। अतः भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष माननीय किरण सिंह देव जी ने आपको उपरोक्त कृत्य के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। - - मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी प्रदेशवासियों को शुभकामनाएंरायपुर। भारतीय जनता पार्टी के यहाँ एकात्म परिसर स्थित कार्यालय में शनिवार को रायपुर शहर जिला इकाई के तत्वावधान में 'होली मिलन समारोह' का भव्य आयोजन किया गया। इस उत्सव में रंगों और उल्लास के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी।प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह होली प्रदेश के लिए विशेष खुशियां लेकर आई है। श्री साय ने होली के पावन पर्व के परिप्रेक्ष्य में अपनी सरकार की अल्पकाल की बड़ी उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा मोदी की गारंटी को तेजी से पूरा किया गया है। धान खरीदी और बकाया बोनस के भुगतान से किसानों के जीवन में समृद्धि आई है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में क्रांतिकारी काम किया गया है। श्री साय ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि होली का यह पर्व आपसी भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक है। हमारी सरकार प्रदेश के हर नागरिक के जीवन में खुशहाली के रंग भरने के लिए समर्पित है। जिस तरह होली के विभिन्न रंग मिलकर एक सुंदर दृश्य बनाते हैं, उसी तरह हम सबको मिलकर 'समृद्ध छत्तीसगढ़' के संकल्प को पूरा करना है। होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए श्री साय ने सभी के सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।होली मिलन समारोह को विधायक पुरंदर मिश्रा एवं जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से विधायक मोतीलाल साहू, संभाग सह प्रभारी राजीव सिंह, जिला प्रभारी राजेंद्र शर्मा, अमर जीत छाबड़ा, केदार गुप्ता, गुंजन प्रजापति, डॉ सलीम राज, अकबर अली, अर्चना हुकरे, पुष्पेन्द्र उपाध्याय, अनिता देवांगन, रोहित द्विवेदी, अखिलेश कश्यप, रजयन ध्रुव, पंकज जगत, कृतिका जैन उपस्थित थे। कार्यक्रम में पारंपरिक फाग गीतों की प्रस्तुतियों से पूरा एकात्म परिसर उत्सव के माहौल में सराबोर रहा।
- रायपुर। भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष विभा अवस्थी ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (08 मार्च) को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। बस्तर सम्भाग मुख्यालय जगदलपुर स्थित लालबहादुर शास्त्री मिनी स्टेडियम में आयोजित होने जा रहा 'वृहद महतारी वंदन सम्मेलन 2026' केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रदेश की नारी शक्ति के स्वावलंबन और सम्मान का महाकुंभ होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को घर की चारदीवारी से निकालकर नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रही है। श्रीमती अवस्थी ने प्रदेश की सभी माताओं-बहनों से अपील की है कि वे इस भव्य उत्सव में शामिल होकर अपनी शक्ति और एकजुटता का परिचय दें। इसके साथ ही रायपुर के बलबीर जुनेजा स्टेडियम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के शुभ अवसर पर लखपति दीदियों का सम्मान किया।भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अवस्थी ने कहा कि इस सम्मेलन में बस्तर और वनांचल क्षेत्रों से हजारों महिलाओं का जुटना प्रदेश के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है। कार्यक्रम में महिलाओं को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। आत्मनिर्भर बनने की दिशा में महिलाओं को प्रेरित किया जाएगा और उनकी उपलब्धियों का उत्सव मनाया जाएगा। श्रीमती अवस्थी ने महिला सशक्तीकरण हेतु प्रदेश की भाजपा सरकार के ऐतिहासिक कदमों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश की विवाहित महिलाओं को महतारी वन्दन योजना के तहत प्रतिमाह वित्तीय सहायता प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया गया है, जिससे वे अपनी छोटी-मोटी जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनी हैं। इसी प्रकार महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से दीदियों को कौशल विकास और बाजार से जोड़कर उनकी वार्षिक आय 1 लाख रुपए से अधिक करने का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया जा रहा है। प्रदेश भर में महिला सुरक्षा हेतु 'अभिव्यक्ति ऐप' और विशेष हेल्प डेस्क के साथ-साथ बेटियों की उच्च शिक्षा के लिए नि:शुल्क सुविधाओं का विस्तार किया गया है। महतारी जतन योजना और सुपोषण अभियान के माध्यम से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। श्रीमती अवस्थी ने कहा कि बस्तर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि आज छत्तीसगढ़ की महिलाएँ अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हैं। महतारी वंदन योजना जैसी दूरगामी सोच ने महिलाओं के जीवन में खुशहाली और सम्मान की नई किरण जगाई है।
- -इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंबेसेडर ऑर्गेनाइजेशन ने दिया पुरस्कारमहासमुंद / महासमुंद की सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती प्रेमशीला बघेल को आज देश की राजधानी दिल्ली के वाईएमसीए हॉल में आयोजित कार्यक्रम में इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एंबेसेडर ऑर्गेनाइजेशन द्वारा “इंटरनेशनल विमेंस विजनरी अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें श्रीमती रमादेवी पूर्व सदस्य पैनल ऑफ चेयरपर्सन 17 वीं लोकसभा, राजीव मेनन अभिनेता एवं निर्माता, नुज़रथ जहाँ, अभिनेत्री, मनीष गवई सदस्य, जयलक्ष्मी राव अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स एम्बेसडर ऑर्गेनाइजेशन नई दिल्ली द्वारा महिला एवं बाल सशक्तिकरण, डिजिटल वित्तीय समावेशन और ग्रामीण आजीविका विकास के क्षेत्र में उनके तीन दशकों के उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।प्रेमशीला पिछले लगभग 30 वर्षों से गरीब, दलित, आदिवासी तथा ग्रामीण-शहरी महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने वर्ष 1994 में मात्र 300 रुपये मानदेय पर बालवाड़ी शिक्षिका के रूप में अपनी सामाजिक यात्रा शुरू की और अब तक 1,500 स्व-सहायता समूहों का गठन कर 15,000 से अधिक महिलाओं को सशक्त बनाया। उन्होंने 1,000 से अधिक बैंक खाते खुलवाने, 50 लाख रुपये से अधिक माइक्रो-क्रेडिट लिंकिंग कराने तथा 850 महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग व मोबाइल लेन-देन का प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।वर्ष 2005 में उन्होंने “उन्नयन जन विकास समिति” की स्थापना की, जिसके माध्यम से 2,200 से अधिक महिलाओं और युवाओं को साबुन निर्माण, बांस शिल्प, टेराकोटा, हाथकरघा, जैविक खेती एवं अन्य आजीविका कौशलों में प्रशिक्षण दिया गया। उनके प्रयासों से 7,500 से अधिक ग्रामीणों तक जागरूकता अभियान पहुंचा तथा 30 गांवों में बाल विवाह और शराबखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों को कम करने में सफलता मिली।डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में उन्होंने नाबार्ड के ई-शक्ति कार्यक्रम के तहत स्व-सहायता समूहों का डिजिटलीकरण कराया और महिलाओं को UPI, डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैलेंस जांच तथा मोबाइल रिकॉर्ड कीपिंग का प्रशिक्षण दिया। इसके अलावा महासमुंद रेलवे स्टेशन के पास सस्ती दर में भोजन उपलब्ध कराने महिला कैंटीन मां की रोटी स्थापित कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा गया।श्रीमती बघेल वर्ष 2000 में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर महिलाओं की गरीबी और हिंसा से जुड़े मुद्दों को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा चुकी हैं।उन्हें इस वर्ष 2025 में देश के उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य शासन अंतर्गत अलंकरण “वीरांगना अवंतीबाई लोधी पुरस्कार” से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा नाबार्ड , मीडिया समूह, जिला प्रशासन तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया है। वे वर्तमान में श्रम विभाग अंतर्गत जिला स्तरीय टास्क फोर्स समिति की सदस्य भी है।श्रीमती प्रेमशीला बघेल का महिला दिवस पर संदेश है कि नारी शक्ति जब आत्मविश्वास, शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता से जुड़ती है, तब समाज में स्थायी परिवर्तन संभव होता है। उनके कार्यों से हजारों महिलाओं में आत्मनिर्भरता, डिजिटल साक्षरता और नेतृत्व की नई चेतना विकसित होती है।
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- नारी सभ्यता, संस्कृति, साहस और संवेदना की वाहक
- देश की आधी आबादी महिलाओं का देश के विकास में विशेष योगदान
- शासन की योजनाओं से महिलाओं में आयी जागृति
- शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण सहित विभिन्न मुद्दों पर महिलाओं की जागरूकता रोचक
- जिले में महतारी वंदन योजना अंतर्र्गत पात्र महिलाओं को लगभग 578 करोड़ रूपए की राशि उनके खाते की गई अंतरित
- जिले की 4920 महिला स्वसहायता समूह को 133 करोड़ 39 लाख रूपए बैंक लिंकेज के माध्यम से ऋण किया गया प्रदान
- जिले की 829 महिलाओं को 10 करोड़ 11 लाख रूपए मुद्रा लोन दिया गया
- जल संरक्षण के लिए चलाए जा रहे मिशन जल रक्षा अभियान में रही महिलाओं की विशेष सहभागिता
राजनांदगांव । हमारे देश में नारी को शक्ति पुंज माना गया है। नारी सभ्यता, संस्कृति, साहस और संवेदना की वाहक हैं। कहीं कोमल तो कभी फौलादी इरादों जैसी मजबूत भी है। महिलाएं समाज का अभिन्न हिस्सा है और देश की आधी आबादी महिलाओं का देश के विकास में विशेष योगदान है। आज की महिलाएं अपने आत्मविश्वास, लगन एवं मेहनत से विभिन्न क्षेत्रों में न केवल कार्य कर रही हंै, बल्कि सफलता के नए आयाम प्राप्त कर रही हैं। घर की चारदिवारी से बाहर निकलकर यह उनके हौसलों की उड़ान है। स्वामी विवेकानंद के विचार प्रासंगिक है कि किसी राष्ट्र की प्रगति को आंकने का सबसे सही पैमाना वहां की महिलाओं की स्थिति है। भारतीय सेना में भी महिलाएं देश की सेवा कर रही हैं। वहीं राजनीति, प्रशासनिक, प्रेस एवं विभिन्न संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर रही हैं। महिलाएं अपने घर की जिम्मेदारी निभाते हुए भी समानतापूर्वक अपने कार्यों को सफलतापूर्वक कर पा रही हैं। जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में परिवर्तन की बयार दिखाई देती है। शासन की योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषकर एक जागृति आयी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण सहित विभिन्न मुद्दों पर उनकी जागरूकता रोचक है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्व सहायता समूह, मितानिन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से महिला शक्ति के व्यापक विस्तार को उजागर करते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रभावी परिणाम दिखाई देते हैं। शासन की महिला उत्थान से जुड़ी जनहितकारी योजनाएं क्रांतिकारी रही है। शासन की महतारी वंदन योजना से पात्र महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रूपए से लाभान्वित किया जा रहा है। जिले में महतारी वंदन योजना में कुल 24 किस्त जारी की गई है। जिले में पात्र महिलाओं को लगभग 578 करोड़ रुपए की राशि जारी की गई। खाद्यान्न सुरक्षा अधिनियम अंतर्गत महिला सशक्तिकरण के दृष्टिगत विशेष तौर पर प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक परिवार में परिवार की सबसे वरिष्ठ महिला जो 18 वर्ष की आयु से कम न हो राशन कार्ड जारी करने के प्रयोजन के लिए परिवार की मुखिया मानी जाएगी। राशन कार्ड में महिलाओं को प्राथमिकता देना महिला उत्थान के लिए शासन की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। जिला प्रशासन द्वारा शासन की योजनाओं के तहत महिला उन्मुखी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं सफल उद्यमी बनकर उभर रही है और आर्थिक रूप से सशक्त बन नहीं है। जिले की 4920 महिला स्वसहायता समूह को 133 करोड़ 39 लाख रूपए बैंक लिंकेज के माध्यम से ऋण प्रदान किया गया है। वहीं जिले की 829 महिलाओं को 10 करोड़ 11 लाख रूपए मुद्रा लोन के तहत दिया गया है। जिससे वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर आर्थिक दृष्टिकोण से मजबूत बन रही है। जिला प्रशासन द्वारा जल संरक्षण के लिए चलाए जा रहा मिशन जल रक्षा अभियान के कारगर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। जनसहभागिता से संचालित इस अभियान में जल संरक्षण के लिए महिलाओं की भूमिका सराहनीय है। पद्मश्री फूलबासन बाई यादव एवं उनकी टीम द्वारा जल संरक्षण के लिए जागरूकता के लिए विशेष तौर पर प्रयास किया जा रहा है। जिले में किए गए प्रमुख नवाचार-रिचार्ज सॉफ्ट बोरवेल एवं सेंड फिल्टर तकनीक परकुलेशन टैंक में इंजेक्शन वेल तैयार कर वर्षा जल को सीधे वाटर लेबल से जोडऩा, नए बोरवेल के साथ इंजेक्शन वेल का निर्माण, पहाड़ी क्षेत्रों में रिचार्ज संरचनाएं और लो-लाइन क्षेत्रों में जल संरक्षण संरचनाएं, संरचनाओं की मरम्मत, संधारण एवं जीआईएस-आधारित योजना निर्माण, इन कार्यों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाओं की भागीदारी दर्ज की गई। शासन की सुकन्या समृद्धि योजना से बालिकाओं के लिए बचत की प्रवृत्ति बढ़ी है। वहीं प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना से पहली बार माता बनने वाली योजनाओं को 5000 रूपए की सहायता मिल रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से ग्रामीण क्षेत्रों महिलाओं को गैस चुल्हा मिलने से भोजन बनाने में आसानी हो रही है। वहीं जल जीवन मिशन के तहत नल के माध्यम से घर में शुद्ध पेयजल मिलने से महिलाओं की समय एवं ऊर्जा की बचत हुई है।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत प्रतिमाह की 9 एवं 24 तारीख को स्त्री रोग विशेषज्ञों द्वारा प्रसव पूर्व जांच की जाती है। इस योजना के तहत विगत 1 वर्ष से कुल 15386 गर्भवती माताओं की जांच कर हाई रिस्क वाली माताओं को चिन्हांकित कर विशेष देखरेख किया गया। वहीं 45 महिलाओं की नि:शुल्क सोनोग्राफी की गई। जिले में स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिर, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में स्पेसलिस्ट कैम्प एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों के माध्यम से स्पेस्लिस्ट कैम्प आयोजित किए गए। जिले में स्वस्थ्य नारी सशक्त परिवार अभियान अंतर्गत प्रदेश में सर्वाधिक 227107 हितग्राही लाभान्वित हुए है। श्रम विभाग में संचालित योजना अंतर्गत मिनी माता महतारी जतन योजना अंतर्गत 7232 महिलाओं को 14 करोड़ 46 लाख 40 हजार रूपए की राशि से लाभान्वित किया गया है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना अंतर्गत 24 महिलाओं को 24 लाख रूपए की राशि से मदद दी गई है। शासन की विभिन्न महिलाओं पर के केन्द्रित योजनाएं महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर हैं। -
- लखपति दीदी अमृता साहू के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान बनी मददगार
- सिलाई कार्य एवं फैंसी स्टोर्स प्रारंभ करने से मिला फायदा- शासन की विभिन्न योजनाओं का मिल रहा लाभराजनांदगांव । उम्मीदों के जुगनू झिलमिलाते हैं, मन में हौसला हो तो ख्वाब पूरे होते हैं। कुछ ऐसे ही जज्बे और जुनून से राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम खुटेरी की लखपति दीदी श्रीमती अमृता साहू ने अपनी मेहनत एवं लगन से नई राह बनाई। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से उन्हें बहुत मदद मिली। जय मां शारदा स्व सहायता समूह से जुड़कर उन्होंने बचत जमा किया और समूह, ग्राम संगठन तथा कलस्टर संगठन के माध्यम से बैंक से ऋण लेकर सिलाई मशीन खरीदी तथा फैंसी स्टोर प्रारंभ किया। कई तरह की चुनौतियों के बावजूद उद्यमी होने तथा लखपति दीदी बनने का उनका सफर रोचक रहा है। उन्होंने बताया कि सिलाई का कार्य सीखने का फायदा मिला। जिसके कारण आर्डर मिलने लगा। फैंसी स्टोर में श्रृंगार की वस्तुएं, अन्य उपयोगी सामग्री रखने से बिक्री बढऩे से लाभ मिला। उनकी मासिक आय 8 हजार रूपए है तथा वार्षिक आय 1 लाख 20 हजार रूपए है। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम होने से बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला रही हूं और परिवार को आर्थिक मदद मिल रही है। स्वयं का व्यवसाय स्थापित होने से गांव में एक विशेष पहचान बनी है। उन्होंने बताया कि वे शासन की योजनांतर्गत राशन कार्ड, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, आयुष्मान कार्ड, महतारी वंदन योजना से भी लाभान्वित हो रही हैं।लखपति दीदी श्रीमती अमृता साहू ने बताया कि जय मां शारदा स्व सहायता समूह से जुडऩे से पहले वे मजदूरी का कार्य करती थी। उनके पति कृषि कार्य पर निर्भर थे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। फैंसी स्टोर खोलने, सिलाई का कार्य प्रारंभ करने से वे आर्थिक रूप से सशक्त हुई है। उन्होंने बताया कि लखपति दीदी के माध्यम से शासन की योजनाओं की जानकारी मिली तथा बिहान से जुडऩे के बाद विभिन्न तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ मिला। लखपति दीदी श्रीमती अमृता साहू ने कहा कि भविष्य में अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान कराना चाहती है और अपनी आजीविका मूलक गतिविधियों को बढ़ाते हुए कपड़े की दुकान का विस्तार करना चाहती है। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत सहयोग मिलने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया। - -रंगपंचमी महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएँरायपुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर के अश्वनी नगर स्थित सोनकर बाड़ी में आयोजित रंगपंचमी महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को रंगपंचमी की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश देने वाला पर्व है, जो समाज को आपसी एकता और समरसता के सूत्र में पिरोता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि इस वर्ष प्रदेश के किसानों के लिए होली का त्योहार विशेष खुशियां लेकर आया है। राज्य सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत धान उपार्जन के अंतर की राशि के रूप में किसानों के खातों में 10 हजार 324 करोड़ रुपये की बड़ी राशि होली से पहले ही अंतरित की गई है। इससे प्रदेश के अन्नदाताओं के घरों में खुशियों का माहौल है और होली का उत्साह भी दोगुना हो गया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली आपसी मतभेदों को भुलाकर प्रेम और मित्रता का संदेश देने वाला पर्व है। यह पर्व समाज में सौहार्द, सद्भाव और एकजुटता की भावना को और मजबूत करता है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विधायक श्री राजेश मूणत द्वारा प्रतिवर्ष रंगपंचमी के अवसर पर होली मिलन समारोह का आयोजन किया जाता है। ऐसे आयोजन समाज में आपसी मेल-मिलाप और सद्भाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को रंगपंचमी पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं तथा सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।इस अवसर पर विधायक श्री मोतीलाल साहू, महापौर श्रीमती मीनल चौबे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
- -महिला सशक्तिकरण की नयी मिसालें, स्व-सहायता समूहों से जुड़कर बन रहीं आत्मनिर्भररायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रभावी पहल की जा रही हैं। मातृशक्ति के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य सरकार ने इस वर्ष को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रदेश की महिलाएँ आर्थिक रूप से सशक्त बनते हुए समाज में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।प्रदेश की महिलाएं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों से जुड़कर कई महिलाओं ने अपने जीवन की दिशा बदली है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के विकासखंड करतला के ग्राम सरगबुंदिया निवासी शासन के सहयोग से कपड़ा व्यवसाय के माध्यम से श्रीमती सावित्री उरांव आज ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं। सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के बीच जीवनयापन करने वाली सावित्री उरांव ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया और आज अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की श्रीमती पूनम देवी, गणेश महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं और वे आज “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं। पहले वे घर-गृहस्थी के कामकाज तक सीमित थीं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मेहनत-मजदूरी का काम करती थी। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार के अवसर मिले, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया। उन्होंने मछली पालन, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित करते देख उन्हें भी प्रेरणा मिली। उन्होंने मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने छोटे से किराना दुकान के विस्तार कर आत्म निर्भरता की ओर आगे बढ़ रही है।कांकेर जिले के ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला श्रीमती सगो तेता भी शासन की योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बनी हैं। प्रशिक्षण और सहयोग के माध्यम से उन्होंने अपने हुनर को आगे बढ़ाया और आज वह खेती-किसानी कर “लखपति दीदी” के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।इसी तरह गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की श्रीमती बृहस्पति धुर्वे ने भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर मशरूम उत्पादन और सब्जी-भाजी की खेती शुरू की। कड़ी मेहनत और लगन से आज उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुँच गई है। वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर अपने परिवार की जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं।कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बुडार में श्रीमती अंजनि, हीरामनी, लीलावती और मित्तल स्वच्छता दीदी के रूप में कार्य करते हुए गाँव को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ये महिलाएँ सप्ताह में दो दिन घर-घर जाकर कचरा संग्रहण करती हैं और ग्रामीणों को गीले एवं सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए जागरूक करती हैं।बस्तर जिले के ग्राम पंचायत मामड़पाल मुनगा की दशमी नाग भी महिला सशक्तिकरण की एक प्रेरक कहानी बन चुकी हैं। पहले मजदूरी पर निर्भर रहने वाली दशमी नाग आज स्व-सहायता समूह से जुड़कर खेती, पशुपालन और सब्जी उत्पादन के माध्यम से “लखपति दीदी” के रूप में अपनी नई पहचान बना चुकी हैं।प्रदेश में मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में जनकल्याणकारी योजनाओं और महिला समूहों की सामूहिक पहल से सामाजिक क्षेत्र में भी सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कोरिया जिले के बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम आनी में ज्योति महिला स्व-सहायता समूह और माँ शारदा स्व-सहायता समूह की महिलाएँ “कोरिया मोदक” नामक पौष्टिक लड्डू तैयार कर रही हैं, जिन्हें गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार और कम वजन वाले शिशुओं के जन्म की समस्या को कम करने में मदद मिल रही है।इसी प्रकार कोंडागांव के नहरपारा निवासी फरिदा बेगम भी महतारी वंदन योजना का लाभ लेकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। यह योजना महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च के अवसर पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर प्रदेश की महिलाएँ आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से वे न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई मिसाल भी स्थापित कर रही हैं।
- - राज्य भर में 355 जन औषधि केंद्र स्वास्थ्य देखभाल के वित्तीय बोझ को कम करने में निभा रहे हैं महत्वपूर्ण भूमिकारायपुर। जिले के कोटा में आज 8वें जन औषधि दिवस 2026 का राज्य स्तरीय कार्यक्रम बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) के परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, जो आम जनता को उच्च गुणवत्ता वाली और सस्ती जेनेरिक दवाएं प्रदान कर सभी के लिए सुलभ स्वास्थ्य देखभाल के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। कार्यक्रम में राज्य भर से विभिन्न जन औषधि केंद्र प्रभारी शामिल हुए।योजना की सफलता पर व्यापक परिप्रेक्ष्य रखते हुए, यह उल्लेख किया गया कि 31 दिसंबर 2025 तक देश भर में कुल 17,990 जन औषधि केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। इस नेटवर्क का और विस्तार करने के सरकारी रणनीतिक लक्ष्य के तहत, मार्च 2027 तक 25,000 केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में, छत्तीसगढ़ राज्य में 355 ऐसे केंद्र हैं, जो हजारों परिवारों के स्वास्थ्य देखभाल के वित्तीय बोझ को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, रायपुर के सीएमएचओ डॉ. मिथिलेश चौधरी ने जेनेरिक दवाओं के संबंध में आम जनता की भ्रांतियों को संबोधित किया। उन्होंने "सस्ती दवाओं का मतलब कम गुणवत्ता" होने की धारणा को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन औषधि केंद्रों (JAKs) में दवाओं की कम लागत का कारण केवल बड़ी फार्मा कंपनियों द्वारा किए जाने वाले भारी-भरकम ब्रांडिंग और मार्केटिंग खर्चों का खत्म होना है। परिणामस्वरूप, लागत बचत का लाभ सीधे उपभोक्ताओं को मिलता है, जिन्हें बड़ी फार्मा कंपनियों द्वारा दी जाने वाली समान दवाओं की तुलना में वही दवाएं बहुत कम कीमत पर प्राप्त होती हैं।डॉ. चौधरी ने इस बात पर जोर दिया कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रत्येक नागरिक इन सस्ती स्वास्थ्य समाधानों का लाभ उठा सके, आक्रामक जन जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। जिले में प्रगति को प्रदर्शित करते हुए, उन्होंने क्षेत्र के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य की घोषणा की, जिसमें कहा गया कि रायपुर में संचालित जन औषधि केंद्रों की संख्या इस वर्ष के भीतर 50 के पार पहुंच जाएगी।समारोह का समापन एक सम्मान समारोह के साथ हुआ, जहां विभिन्न जन औषधि केंद्रों के समर्पित प्रभारियों को उनकी सेवा के लिए सम्मानित किया गया। इन केंद्रों के संचालन में उनके प्रयास यह सुनिश्चित करने में सहायक रहे हैं कि जीवन रक्षक दवाएं समाज के सबसे कमजोर वर्गों तक सुलभ रहें।
- बिलासपुर। एनटीपीसी लिमिटेड की सीपत परियोजना में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2026 उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर परियोजना में कार्यरत महिला कर्मचारियों तथा सहयोगी एजेंसियों के साथ कार्यरत महिला कर्मियों के कार्यों और संगठन की निरंतर प्रगति में उनके योगदान की सराहना की गई। कार्यक्रम में संविदा महिला श्रमिकों के प्रयासों को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट कर इस विशेष दिवस की शुभकामनाएँ दी गईं।समारोह में परियोजना प्रमुख स्वपन कुमार मंडल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि फौजिया मिर्ज़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न विभागों की महिला कर्मचारियों ने अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए सशक्त महिला होने का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।समारोह के दौरान कई महिला कर्मचारियों ने कविता, गीत और नृत्य के माध्यम से सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि एनटीपीसी सीपत की महिलाएँ न केवल इंजीनियर, चिकित्सक और विभिन्न विभागों की पेशेवर भूमिकाओं में सक्रिय हैं, बल्कि नवाचार और रचनात्मक गतिविधियों में भी अग्रणी भूमिका निभाते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही हैं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए परियोजना प्रमुख स्वपन कुमार मंडल ने इस वर्ष की थीम ‘गिव टू गेन’ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज की महिलाएँ सशक्त समाज के निर्माण के साथ-साथ देश के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रचालन एवं अनुरक्षण (Operation and Maintenance), सुरक्षा, अभियांत्रिकी तथा सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) जैसे विभागों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह सिद्ध करती है कि विकसित राष्ट्र के निर्माण में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है।अपने संबोधन में फौजिया मिर्ज़ा ने एनटीपीसी सीपत द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने महिलाओं की आर्थिक एवं सामाजिक स्वतंत्रता, उनके अधिकारों और उनकी क्षमता के प्रभावी उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला तथा अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने एनटीपीसी में महिला कर्मचारियों से संबंधित विभिन्न नीतियों की जानकारी प्राप्त की और उनकी प्रशंसा की। विशेष रूप से गर्भवती महिला कर्मचारियों के लिए संचालित कल्याणी योजना की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहल को अन्य संस्थानों में भी व्यापक रूप से अपनाया जाना चाहिए।इस अवसर पर कोमल कृति उरांव को भी सम्मानित किया गया, जिनका चयन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक सेवा परीक्षा 2024–25 में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के पद पर हुआ है। वह एनटीपीसी सीपत में वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में कार्यरत एस. आर. उरांव की पुत्री हैं।कार्यक्रम को एनटीपीसी सीपत परिवार की महिला कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने और अधिक जीवंत और यादगार बना दिया। इस अवसर पर महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण) सुरोजित सिन्हा, महाप्रबंधक (प्रचालन एवं फ्यूल मैनेजमेंट) अशोक सरकार, महाप्रबंधक (अभियांत्रिकी) विकास खरे सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
- -अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में बना रहीं नई पहचानरायपुर। छत्तीसगढ की लाखों महिलाएं सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल बन रही हैं। स्व-रोजगार के माध्यम से वे न केवल अपने परिवार की मजबूत आधार स्तंभ बन रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास की नई राह भी गढ़ रही हैं। आर्थिक रूप से सशक्त होती महिलाएं अब विकसित छत्तीसगढ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। महिला सशक्तिकरण का यह अध्याय केवल परिवर्तन का संकेत नहीं, बल्कि समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ की मजबूत आधार है।जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की श्रीमती पूनम देवी, जो गणेश महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं, आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं। कभी सीमित संसाधनों के साथ घर-परिवार की जिम्मेदारियों में लगी रहने वाली पूनम देवी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की दिशा बदल दी। पूनम देवी बताती हैं कि पहले वे घर-गृहस्थी के कामकाज तक ही सीमित थीं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था। आर्थिक स्थिति सामान्य थी, जिससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो जाता था। इसी दौरान उन्होंने गणेश महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली।समूह की अन्य महिलाओं को मछली पालन, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित करते देख उन्हें भी प्रेरणा मिली। वर्ष 2025 के मार्च माह में उन्होंने मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने छोटे से किराना दुकान के विस्तार में किया।श्रीमती पूनम देवी ने अपने किराना दुकान को व्यवस्थित और बड़ा करने के बाद उनके व्यवसाय में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगी। वर्तमान में उनकी दुकान से हर माह लगभग 30 से 35 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती है। इस आय से वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी तरह से कर पा रही हैं। पूनम देवी का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता दोनों आए हैं। आज वे न केवल अपने परिवार के लिए सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं विभिन्न योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की श्रीमती पूनम देवी भी इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं।
- -रायगढ़ जिले में 3 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित-फरवरी तक 24 किश्तों में 663.96 करोड़ रुपये सीधे खातों में अंतरितरायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना रायगढ़ जिले की लाखों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के तहत हर महीने मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल बन रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही है। जिले में इस योजना से 3 लाख से अधिक महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। फरवरी 2026 तक इन महिलाओं के खातों में 24 किश्तों के माध्यम से 663 करोड़ 96 लाख 91 हजार 400 रुपये की राशि सीधे अंतरित की जा चुकी है।महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिलने वाली राशि से महिलाएं घर की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ छोटी-छोटी बचत भी कर पा रही हैं। कई महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों और अन्य जरूरी खर्चों के लिए कर रही हैं, जिससे परिवार को आर्थिक सहारा मिल रहा है। योजना से लाभान्वित महिलाओं का कहना है कि नियमित रूप से मिलने वाली राशि से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और अब वे अपनी जरूरतों के लिए पूरी तरह दूसरों पर निर्भर नहीं रहतीं। कई महिलाएं इस राशि को बीज पूंजी के रूप में उपयोग कर छोटे-छोटे स्वरोजगार भी शुरू कर रही हैं। सिलाई-कढ़ाई, किराना दुकान, सब्जी बिक्री और हस्तशिल्प जैसे कार्यों से जुड़कर वे अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं।राज्य सरकार की इस पहल से महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है और वे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। महतारी वंदन योजना महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत आधार बन रही है, जिससे सशक्त महिला, सशक्त परिवार और सशक्त समाज की अवधारणा को बल मिल रहा है। महिला दिवस के अवसर पर जिले की महिलाओं ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई यह योजना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
- -बस्तर का युवा अब विश्व के पटल पर आगे बढ़ रहा है – उपमुख्यमंत्री विजय शर्मारायपुर । बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के छोटे से ग्राम गुदमा के युवा अंकित सकनी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 816वीं रैंक प्राप्त कर पूरे बस्तर संभाग सहित प्रदेश का मान बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि पर उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने अंकित सकनी और उनके पिता श्री चंद्रैया सकनी से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर उन्हें हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।इस दौरान उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने अंकित से आत्मीय संवाद करते हुए उनकी मेहनत, लगन और संघर्ष की सराहना की। उन्होंने कहा कि बीजापुर जैसे दूरस्थ और आदिवासी अंचल के छोटे से गांव गुदमा से निकलकर यूपीएससी जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करना अत्यंत प्रेरणादायी उपलब्धि है। यह उपलब्धि न केवल अंकित के परिवार बल्कि पूरे बस्तर और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने अंकित से बातचीत के दौरान कहा कि आपने पूरे देश की उम्मीद को जगा दिया है, लोग मुझसे पुछते थे जब नक्सलवाद खत्म होगा तो क्या होगा?... आपकी सफलता इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि जब नक्सलवाद खत्म होगा तो बस्तर में शांति और विकास का वातावरण बनेगा तो यहां के युवा अपनी प्रतिभा के बल पर देश ही नहीं बल्कि विश्व के पटल पर आगे बढ़कर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।उन्होंने आगे कहा कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा में सफलता प्राप्त कर अंकित जैसे युवा देश की प्रशासनिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और समाज तथा राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देंगे। अंकित की उपलब्धि बस्तर के युवाओं के लिए एक नई प्रेरणा है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद भी दृढ़ संकल्प और मेहनत से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।इस अवसर पर अंकित के पिता श्री चंद्रैया सकनी के द्वारा बीजापुर में उनसे हुई आत्मीय भेंट की याद भी साझा की। उनके पिता ने भी अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बेटे की इस सफलता से परिवार और गांव का नाम रोशन हुआ है। वहीं अंकित सकनी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को देते हुए कहा कि उनका सपना देश की सेवा करना है। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने इसे बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बताते हुए अंकित को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
- - पीएम आवास निर्माण में प्रगति लाने, जल संरक्षण एवं ग्रामीण स्वरोजगार पर ज्यादा फोकस करने के निर्देशबलौदाबाजार / कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने शनिवार को जिला पंचायत सभागार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कार्यो की समीक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत निर्माणाधीन एवं अप्रारम्भ आवासों को शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिये। उन्होंने बैठक में योजनाओं, निर्माण कार्यों सहित रोजगार सृजन पर विस्तृत समीक्षा की।कलेक्टर ने कहा कि द्वितीय किश्त जारी हुए आवासों को अप्रैल तक पूरा कराने 15 -15 दिन की प्रगति रिपोर्ट बनाएं। विकासखंड समन्वयक एवं तकनिकी सहायक आपसी समन्वय एवं फिल्ड विजिट करें।कहीं पर दिक्क़त हो तो सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक की भी सहयोग लें। हितग्राहियों के पलायन के कारण अप्रारम्भ आवासों को शुरू करने के लिये हितग्राहियों से संपर्क करने कहा। इसीतरह मुख्यमंत्री आवास योजना अंतर्गत आवासों को भी तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश दिये।कलेक्टर ने मनरेगा अंतर्गत पंचायतों में कम से कम 2 काम स्वीकृत कर जल संरक्षण के कार्य कराने कहा।हैंडपम्प, टेप नल के पास सोखता गड्ढा का निर्माण एवं सभी पीएम आवास व सरकारी भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग संरचना निर्माण के निर्देश दिये।उन्होंने तालाब व डबरी निर्माण के काम जल्द शुरू करने के साथ ही डबरी निर्माण में उपयुक्त स्थल का चयन करने के निर्देश दिये ताकि पानी का ठहराव हो। इसीतरह सामुदायिक तालाब निर्माण से पूर्व ग्राम सभा में प्रस्ताव पर चर्चा कर स्थल चयन करने कहा। उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत समूह की महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिये ऋण राशि एवं आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के निर्देश दिये।मनरेगा में भी महिलाओं की अधिक भागीदारी पर जोर दिये।कलेक्टर ने स्वच्छ भारत मिशन अंतर्गत ग्राम पंचायतों में समूह की महिलाओं द्वारा कचरा कलेक्शन के कार्य को सक्रिय करने, यूजर चार्ज का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने कहा। गांव को साफ सुथरा रखने टीम फिल्ड विजिट करें और लोगों को जागरूक करें। उन्होंने गिरौदपुरी धाम में पूरे मेला परिसर में स्थायी डास्ट बीन की सुविधा हेतु सीमेंट का कूड़ादान निर्माण के भी निर्देश दिये।बैठक में सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल सहित जनपद सीईओ, मनरेगा पीओ, ब्लॉक कोआर्डिनेटर, तकनीकी सहायक उपस्थित थे।
- बलौदाबाजार / कलेक्टर कुलदीप शर्मा शुक्रवार को कसडोल विकासखंड भ्रमण के दौरान ग्राम अमोदी में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत नव निर्मित आवास में हितग्राही लता यादव के परिवार को गृहप्रवेश कराया और उन्हें आवास की चाबी सौंपी।कलेक्टर श्री शर्मा ने योजना के तहत सुन्दर मकान बनाने एवं गृहप्रवेश के लिये हितग्राही लता यादव पति पदुम यादव एवं उनके बच्चों को शुभकामनायें दीं। उन्होने शासन की योजनाओं का इसी तरह लाभ लेकर जीवन को खुशहाल बनाने की बात कही। लता यादव ने बताया कि पहले कच्चे मकान में रहते आ रहे थे जिसमें कई तरह की समस्याओ का सामना कराना पडता था। वर्ष 2024-25 में प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुआ और कुल राशि 120000 तीन किश्तों में मिला। प्रधानमंत्री आवास योजना से गरीबों का पक्के मकान का सपना पूरा हो रहा है।कलेक्टर श्री शर्मा ने आंगनबाड़ी केन्द्र अमोदी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यकर्त्ता मलाती केवट से बच्चों की उपस्थिति, पूरक पोषण आहार, कुपोषण की स्थिति, भोजन की गुणवत्ता आदि की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने आंगनबाड़ी में बच्चों के लिये बनाए गए भोजन की गुणवत्ता को चख कर देखा और सुधार के निर्देश दिये। उन्होंने बच्चों को खेल- खेल में सीखने के गुण विकसित करने, रंगों व आकृतियों की पहचान कराने कहा। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल, एसडीएम आर.आर.दुबे,सीएमएचओ डॉ राजेश कुमार अवस्थी, डीईओ संजय गुहे सहित अन्य अधिकारीव ग्रामवासी मौजूद थे।
- बलौदाबाजार / कलेक्टर कुलदीप शर्मा शुक्रवार को कसडोल विकासखंड के दौरा पर रहे। इस दौरान ग्राम अमोदी के प्राथमिक कृषि साख समिति परिसर पहुंचे। उन्होंने कार्यालय के पास मोर गांव मोर पानी अभियान 2.0 अंतर्गत सोखता गड्ढा निर्माण हेतु श्रमदान किया और उपस्थित ग्रामीणों को जल संरक्षण में सहभागिता के लिये प्रोत्साहित किया।कलेक्टर ने कहा कि पानी जीवन का आधार है और भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन होने के कारण वाटर लेवल घटते जा रहा है। उन्होंने कहा कि पानी को व्यर्थ बहने न दें, नल के पास सोखता गड्ढा बनाएं। गांव के सभी हैंडडपम्प सड़करी भवनो के पास अनिवार्य रूप से जनसहभागिता से सोखता गड्ढा का निर्माण कराएं। उन्होंने सरपंच व सचिव से ग्राम पंचायत में सोखता गड्ढा निर्माण की जानकारी ली। सरपंच ने बताया कि गांव में 7 हैंडपम्प के पास सोखता गड्ढा बनाया गया है।इसके पश्चात कलेक्टर ने सहकारी समिति का निरीक्षण किया और धान उठाव, सूखत, केसीसी, पैक्स में एंट्री, खाद भण्डारण,माइक्रो एटीएम से राशि निकासी आदि की जानकारी ली।समिति प्रबंधक ने बताया कि धान का शतप्रतिशत उठाव कर लिया गया है एवं पैक्स में सभी जानकारी इंट्री हो गया है। किसानों को मैक्रो एटीएम से राशि निकासी की सुविधा है।सहकारी समिति कार्यालय के बगल में संचालित हो रहे पीडीएस दुकान के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने चावल की गुणवत्ता, खाद्यन्न भण्डारण की जानकारी ली। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणो से नियमित एवं समय पर दुकान खुलने व राशन प्राप्त करने के सम्बन्ध में पूछताछ की। ग्रामीणों ने बताया कि दुकान समय पर नियमित खुलता है और कोई दिक्कत नहीं होती। अभी चावल और शक्कर ही मिलता है। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत सुश्री दिव्या अग्रवाल, एसडीएम आर.आर.दुबे, खाद्य अधिकारी पुनीत वर्मा, उपायुक्त साहकारिता उमेश गुप्ता सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
- -हर जरूरतमंद परिवार को सम्मानजनक आवास दिलाना हमारा संकल्प - उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव-छत्तीसगढ़ के लिए 263 परियोजनाएं स्वीकृत, 36 माह में पूरे होंगे काम-रतनपुर में डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट, आधुनिक और उन्नत तकनीकों से बीएमटीपीसी बनाएगी 40 आवासरायपुर। छत्तीसगढ़ में शहरी गरीबों के लिए बड़े पैमाने पर आवास निर्माण की राह खुल गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति ने राज्य की 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी है।प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत राज्य में 28 हजार 461 नए पक्के आवासों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपए से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। हाल ही में 23 फरवरी को केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति (Central Sanction & Monitoring Committee) की बैठक में इसकी मंजूरी दी गई। इससे राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के हजारों परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना मिल सकेगा।प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सभी के लिए आवास’ के संकल्प को साकार करने देशभर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का क्रियान्वयन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के मार्गदर्शन में शहरी गरीबों को किफायती और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने सक्रियता से काम किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव नियमित समीक्षा कर आवासों के आबंटन और इनके निर्माण में तेजी व पारदर्शिता सुनिश्चित करने विभागीय अधिकारियों को लगातार निर्देशित कर रहे हैं।केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में छत्तीसगढ़ द्वारा प्रस्तुत 263 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें 211 लाभार्थी आधारित निर्माण परियोजनाएं (Beneficiary-led Construction) और 52 किफायती आवास साझेदारी परियोजनाएं (Affordable Housing Projects) शामिल हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेशभर के नगरीय निकायों में कुल 28 हजार 461 आवासों का निर्माण किया जाएगा।लाभार्थी आधारित निर्माण घटक के तहत 13 हजार 058 आवासों को स्वीकृति दी गई है, जिनमें पात्र हितग्राही अपनी स्वयं की भूमि पर पक्का घर बना सकेंगे। प्रथम बैच में 52 परियोजनाओं के माध्यम से 3844 आवासों को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 57 करोड़ 66 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। वहीं द्वितीय बैच में 159 परियोजनाओं के अंतर्गत 9214 आवासों के निर्माण को मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 138 करोड़ 21 लाख रुपए की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। इन आवासों की प्रति इकाई परियोजना लागत लगभग 3 लाख 89 हजार रुपए निर्धारित की गई है।किफायती आवास साझेदारी घटक के तहत 15 हजार 363 आवासों का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत शासकीय भूमि पर सार्वजनिक एजेंसियों के माध्यम से सर्वसुविधायुक्त आवासीय परिसर विकसित किए जाएंगे, जिनमें स्लम पुनर्विकास और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए किफायती आवास उपलब्ध होंगे। इस घटक के प्रथम बैच में 24 परियोजनाओं के जरिए 6996 आवासों को मंजूरी दी गई है, जबकि दूसरे बैच में 28 परियोजनाओं के माध्यम से 8367 आवासों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है। इन आवासों की प्रति इकाई लागत 5 लाख 75 हजार रुपए तय की गई है। ये सभी परियोजनाएं 36 महीनों में पूर्ण की जाएंगी।भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 तक 50 हजार आवासों के प्रस्ताव प्रस्तुत करने का लक्ष्य दिया था। छत्तीसगढ़ ने 52 हजार 588 आवासों के प्रस्ताव भेजकर लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में राज्य की इस सक्रियता और तत्परता की सराहना भी की गई। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा सभी परियोजनाओं के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, भू-अभिलेख, लाभार्थी सूची और यूनिफाइड वेब पोर्टल पर आवश्यक प्रविष्टियां केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी की गई हैं। सभी पात्र हितग्राहियों को केंद्रीय सहायता आधार आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाएगी। यूनिफाइड वेब पोर्टल के जरिए पारदर्शी तरीके से यह पूरी प्रक्रिया संचालित की जाएगी।केंद्रीय स्वीकृति एवं निगरानी समिति की बैठक में बिलासपुर जिले के रतनपुर में एक अभिनव डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट (Demonstration Housing Project) को भी मंजूरी मिली है। यह परियोजना भारत सरकार की नवाचार आधारित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसे देश के चुनिंदा राज्यों में ही स्वीकृत किया जा रहा है। इसके अंतर्गत आधुनिक और उन्नत तकनीकों का उपयोग कर 40 आवास बनाए जाएंगे। इनका निर्माण भवन निर्माण सामग्री एवं प्रौद्योगिकी संवर्धन परिषद (Building Materials & Technology Promotion Council) द्वारा किया जाएगा। राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) इन आवासों को पात्र लोगों को किराये पर उपलब्ध कराएगा। राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थल रतनपुर में आकार लेने वाली यह परियोजना सामाजिक उपयोग के साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा देने में सहायक होगी। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव की विशेष कोशिशों से रतनपुर को यह परियोजना मिली है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के तहत छत्तीसगढ़ को बड़ी उपलब्धि मिली है। राज्य में 28,461 नए पक्के घरों के निर्माण के लिए 435 करोड़ रुपये से अधिक की केंद्रीय सहायता स्वीकृत हुई है। इससे हजारों जरूरतमंद परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार होगा। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की 263 परियोजनाओं को मंजूरी मिली है और अगले 36 महीनों में इन आवासों का निर्माण किया जाएगा। बिलासपुर जिले के रतनपुर में आधुनिक तकनीक से 40 आवासों का एक विशेष प्रोजेक्ट भी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास मिल सके।उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार शहरी गरीबों को आवासीय सुरक्षा प्रदान करने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन कर रही है। विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है। नगरीय निकायों के सहयोग से पात्र हितग्राहियों की पहचान कर उन्हें समयबद्ध तरीके से योजना से जोड़ने की प्रक्रिया जारी है, ताकि अधिक से अधिक परिवारों को पक्के आवास दिए जा सके। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दी जा रही 435 करोड़ रुपए की सहायता से आवास निर्माण में और तेजी आएगी।
- बलौदाबाजार / वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर के निर्देशानुसार शनिवार को वन परिक्षेत्र देवपुर अंतर्गत वन अग्नि से सुरक्षा एवं सावधानी के संबंध में व्यापक जनजागरूकता के उद्देश्य से बाइक रैली का आयोजन किया गया।बाइक रैली के माध्यम से परिवृत्त देवपुर के अंतर्गत ग्राम देवपुर, तेंदुचुवा, धमलपुरा, कोसमसरा, पकरीद, गिधपुरी, मेटकुला, कुरकुटी एवं नवाडीह में ग्रामीणों एवं स्कूली विद्यार्थियों को वन अग्नि से बचाव के संबंध में जागरूक किया गया। इस दौरान बैनर एवं पोस्टर के माध्यम से लोगों को जंगलों में आग न लगाने, जंगल से लगे खेतों में पराली न जलाने, महुआ संग्रहण के समय आग न लगाकर झाड़ू से साफ कर महुआ बिनने, ज्वलनशील वस्तुएं लेकर जंगल में प्रवेश न करने तथा जंगल में आग की घटना होने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही वन अग्नि से पर्यावरण, वन्यजीवों एवं वन संपदा को होने वाली क्षति के बारे में भी बताया गया।इस जनजागरूकता रैली में परिक्षेत्र अधिकारी देवपुर संतोष कुमार पैकरा,चंद्रहास ठाकुर, रामेश्वर साहू सहित समस्त फायर वाचर, समिति सुरक्षा श्रमिक, वन प्रबंधन समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य तथा गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से आए छात्र-छात्राओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।
- बलौदाबाजार / ज़िला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 8 मार्च रविवार को राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा के मुख्य आतिथ्य में महतारी वंदन सम्मेलन का आयोजन किया गया जा रहा है। यह कार्यक्रम जिला ऑडिटोरियम. बलौदाबाजार में सुबह 11से आयोजित होगा। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नारी शक्ति उपस्थित रहेंगे। file photo
- रायपुर । बृहस्पति धुर्वे बताती है कि यदि स्वयं की मेहनत, सही मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं का सहयोग मिल जाए, तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी कोई महिला सफलता और आत्मनिर्भरता की ऊँचाइयों तक पहुँच सकता है। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करने वाली पेन्ड्रा-गौरेला-मरवाही जिला के गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की श्रीमती बृहस्पति धुर्वे आज पूरे क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के सहयोग से बृहस्पति धुर्वे ने अपने जीवन की दिशा बदल दी और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन में संचालित ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर बृहस्पति धुर्वे ने महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से अपने सपनों को साकार करने की शुरुआत की। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। शुरुआत में यह काम छोटे स्तर पर था, लेकिन मेहनत और लगन से धीरे-धीरे उनका उत्पादन बढ़ता गया। मशरूम उत्पादन के साथ-साथ उन्होंने सब्जी-भाजी की खेती भी शुरू की, जिससे उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से 2 लाख रुपए तक हो जाती है। आज उनकी मेहनत का परिणाम यह है कि वह आर्थिक रूप से सशक्त बन चुकी हैं और अपने परिवार की जरूरतों को आत्मविश्वास के साथ पूरा कर रही हैं।बृहस्पति धुर्वे बताती हैं कि शासन की अनेक योजनाओं का लाभ भी उन्हें मिला है। उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत रसोई गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान तथा पीडीएस योजना से 35 किलो निःशुल्क चावल की सुविधा भी प्राप्त हो रही है। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान की है। आज बृहस्पति धुर्वे न केवल स्वयं आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वह अपने अनुभव साझा करते हुए आसपास की महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देती हैं और उन्हें भी स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करती हैं। समूह के माध्यम से ऋण लेकर उन्होंने अपने उत्पादों के विक्रय के लिए एक दुकान भी बनवाई है, जहाँ भविष्य में मशरूम और अन्य उत्पाद बेचकर अपनी आय को और बढ़ाने की योजना है।
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विशेष आलेख : धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
तारा शंकर सिन्हा , सहायक संचालक जनसंपर्करायुपर। श्रीमती सगो तेता स्व-सहायता समूह और बिहान से जुड़कर न केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अपने स्वाभिमान और आत्मविश्वास को भी नई पहचान दी है। आज कांकेर जिला के गांव ग्राम गढ़पिछवाड़ी की अन्य महिलाएं भी उनसे प्रेरणा लेकर आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं। श्रीमती तेता ने अपनी इस सफलता का श्रेय भारत सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना और छत्तीसगढ़ शासन की पहल बिहान को देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और ‘लखपति दीदी’ बनने का अवसर प्रदान किया है। बिहान योजना ने श्रीमती सगो तेता के जीवन में नवा बिहान ला दिया।कुछ कर गुजरने का जुनून और उस इच्छाशक्ति को शासन की छोटी सी मदद मिल जाए, तो कामयाबी की बुलंदी को फर्श से अर्श तक पहुंचने में देर नहीं लगती। कांकेर जिले की महिलाएं शासन के सहयोग से प्रशिक्षण तथा सहायता प्राप्त कर अपने हुनर को अंजाम दे रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल जिला मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम गढ़पिछवाड़ी की आदिवासी महिला श्रीमती सगो तेता आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी पृथक् पहचान स्थापित कर चुकी हैं। उनकी कामयाबी यह साबित करती है कि मेहनत, लगन, आत्मविश्वास और उचित अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी खुद के दम पर अपने समूह, परिवार और समाज के लिए मिसाल कायम कर सकती हैं।एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण श्रीमती सगो को छोटी-छोटी जरूरतों को पूरी करने के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना पड़ता था। आजीविका के एकमात्र साधन के रूप में खेती-बाड़ी तो थी, लेकिन सीमित संसाधनों और पारंपरिक तरीकों के कारण आय बहुत कम होती थी। वहीं बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्चों की चिंता उन्हें अक्सर परेशान करती थी। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की जानकारी मिली। इससे प्रेरित होकर सगो बाई ने गांव की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर गायत्री स्व-सहायता समूह बनाया, जिसमें 10 महिलाएं शामिल हैं।समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बिहान के अंतर्गत 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश राशि प्राप्त हुई, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दे दी। श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि पहले उनके खेत में मोटरपंप (बोरवेल) नहीं था, जिसके कारण खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी और साल में धान की केवल एक ही फसल ले पाती थीं। फिर उन्होंने स्व-सहायता समूह से ऋण लेकर अपने खेत में बोर करवाया, जिससे अब उन्हें सिंचाई की सुविधा मिल गई है। इसका सकारात्मक परिणाम यह रहा कि अब वे अपने खेतों में साल में दोनों फसलें (खरीफ और रबी) ले रही हैं, जिससे उनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।इसके साथ ही सगो बाई ने कई आजीविकामूलक गतिविधियां भी शुरू कीं। उन्होंने मशरूम पालन, छेना (कंडा) निर्माण, गोबर से जैविक खाद तैयार करना, रुई से तकिये बनाना, सब्जी उत्पादन, ईंट निर्माण और कपड़ों के विक्रय जैसे कार्य प्रारंभ किए। उनकी सतत् मेहनत रंग लाई और आज वे इन अलग-अलग गतिविधियों से प्रतिमाह लगभग 18 से 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। इसी निरंतर आय और बचत के कारण पूरे क्षेत्र में वह आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जा रही हैं।लखपति दीदी श्रीमती सगो तेता बताती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। इसी आय के सहारे उन्होंने अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई करवाई, साथ ही अपने दो बच्चों की शादी भी करवा ली है। इसके बाद अब वे अपनी आजीविका से होने वाली आय से अपनी छोटी बेटी की शादी करने की तैयारी कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह महतारी वंदन योजना का भी लाभ ले रही हैं, जिससे मिली रकम को वह बेटी के विवाह में किसी बड़े खर्च के लिए बचत कर रही हैं। - -वनांचल क्षेत्र में आय के नए स्रोत- मखाना खेती से सशक्त होंगे महिला समूह-नगरी क्षेत्र की जलवायु बनी उपयुक्त, मखाना उत्पादन से बढ़ेगी किसानों की आय-महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा नया आयाम, मखाना उत्पादन से जुड़ेंगे किसानरायपुर /मखाना एक ऐसा पौधा है जो तालाबों, दलदलों और आर्द्रभूमि जैसे स्थिर जल निकायों में उगाया जाता है। इसका प्रसार बीजों द्वारा होता है और अंकुरण के लिए पूर्णतः परिपक्व बीजों की आवश्यकता होती है। मखाना की खेती में न्यूनतम खर्च आता है क्योंकि पिछले फसल से बचे हुए बीजों से नए पौधे आसानी से अंकुरित हो जाते हैं। पोषक तत्वों से भरपूर होने और नकदी फसल के रूप में किसानों की आय को दोगुना करने की अपार क्षमता को देखते मिलता है। मखाना खेती से धमतरी की ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक तस्वीर बदलेगी । छोटी छोटी डबरी से समृद्धि तक धमतरी की महिलाओं को मखाना खेती में आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई राह दिखायी दे रही है । शासकीय प्रयासों का प्रतिफल है कि मखाना खेती से धमतरी में आर्थिक सशक्तिकरण होगा ।उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कृषिमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने धमतरी प्रवास के दौरान जिले को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा की थी। इस घोषणा के बाद जिला प्रशासन द्वारा मखाना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की गई है।धमतरी जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र में आजीविका संवर्धन की दिशा में एक नई पहल के तहत मखाना खेती की तैयारी स्व-सहायता समूहों के माध्यम से प्रारंभ की गई है। जिले में कुल 100 एकड़ भूमि मखाना उत्पादन के लिए चिन्हांकित की गई है। प्रारंभिक चरण में संकरा क्षेत्र में 25 एकड़ रकबे में मखाना की खेती की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।विशेषज्ञों के अनुसार नगरी क्षेत्र की जलवायु, पर्याप्त जल उपलब्धता एवं प्राकृतिक वातावरण मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल है। इससे स्थानीय किसानों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त होंगे। इस पहल से वनांचल क्षेत्र में कृषि विविधीकरण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।कलेक्टर धमतरी बीते दिनों संकरा पहुंचकर मखाना खेती की तैयारियों का अवलोकन किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “मखाना खेती नगरी वनांचल क्षेत्र के लिए आय वृद्धि का प्रभावी माध्यम बन सकती है। स्व-सहायता समूहों को तकनीकी प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज एवं विपणन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। हमारा प्रयास है कि धमतरी जिला प्रदेश में मखाना उत्पादन का मॉडल विकसित करे।”कलेक्टर ने यह भी निर्देशित किया कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग समन्वय बनाकर किसानों को प्रशिक्षण प्रदान करें तथा जल प्रबंधन एवं फसल संरक्षण पर विशेष ध्यान दें। आने वाले समय में चरणबद्ध रूप से रकबे का विस्तार कर अधिक से अधिक समूहों को इस पहल से जोड़ा जाएगा। जिला प्रशासन की इस पहल से नगरी वनांचल क्षेत्र में आर्थिक सशक्तिकरण की नई संभावनाएं साकार होती दिखाई दे रही हैं।
- बलौदाबाजार-भाटापारा /बलौदाबाजार -भाटापारा जिले के ग्राम बम्हनमुड़ी निवासी मीनाक्षी जोशी के लिए प्रदेश सरकार की 'महतारी वंदन योजना' संबल बनकर उभरी है। हर माह उनके खाते में आने वाली एक हजार रुपए की सहायता राशि ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारा है, बल्कि परिवार की छोटी-छोटी दैनिक आवश्यकताओं को बिना किसी चिंता के पूरा करने का मार्ग भी प्रशस्त किया है।मीनाक्षी के पति श्री भूपेंद्र जोशी एक ऑटो पार्ट्स की दुकान में कार्य करते हैं, जिनसे होने वाली सीमित आय में दो छोटे बच्चों—तीन वर्षीय पुत्री और एक वर्षीय पुत्र—के साथ परिवार का भरण-पोषण करना एक बड़ी चुनौती थी। घर की आर्थिक स्थिति बेहतर न होने के कारण छोटी-बड़ी घरेलू जरूरतों के लिए अक्सर समझौता करना पड़ता था, लेकिन इस योजना ने उनकी राह आसान कर दी है।मीनाक्षी बताती हैं कि इस योजना के लाभ से मिनाक्षी के जीवन में एक सकारात्मक बदलाव आया है। उनका मानना है कि महतारी वंदन योजना केवल एक वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और समाज में उन्हें सम्मान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। नियमित रूप से मिलने वाली इस राशि से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे अब खुद को पहले से अधिक आर्थिक रूप से सशक्त महसूस कर रही हैं। मीनाक्षी ने महिलाओं के हितों का ध्यान रखने और उन्हें यह मजबूती प्रदान करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि यह योजना उनके जैसे मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिसने घर की खुशहाली में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- -नेट की परीक्षा में 33 वाँ रैंक हासिल कर सूरजपुर की बेटी निधि गुप्ता ने रोशन किया जिले का नामरायपुर। महिलाएं अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा, मेहनत और समर्पण के साथ करते हुए प्रशासनिक और विकासात्मक कार्यों को नई दिशा देने आगे आ रही हैं। यह स्थिति न केवल महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, बल्कि समाज में उनके प्रति बदलती सोच का भी स्पष्ट संकेत है। निधि गुप्ता ने यह साबित किया है कि शासकीय शिक्षा भी उत्कृष्टता की नींव बन सकती है, बशर्ते इरादा पक्का हो। निधि ने देश की अत्यंत कठिन सीएसआईआर नेट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 33 वाँ रैंक अर्जित की और सूरजपुर का नाम राष्ट्रीय मानचित्र पर गौरव के साथ अंकित किया।अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जब हम उन महिलाओं की बात करते हैं जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सपनों को जीवित रखा, तो सूरजपुर जिले की बेटी निधि गुप्ता का नाम स्वाभाविक रूप से सामने आता है। शासकीय विद्यालय की पढ़ाई से लेकर देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में शीर्ष रैंक तक उनका सफर संघर्ष, संकल्प और सफलता की एक अनूठी मिसाल है। निधि की प्रारंभिक शिक्षा सूरजपुर जिले के शासकीय कन्या विद्यालय में हुई। संसाधनों की कमी एक वास्तविकता थी, पढ़ाई के दौरान कई उतार-चढ़ाव भी आए लेकिन निधि ने कभी हौसला नहीं खोया। उनके मज़बूत इरादों के आगे हर बाधा बौनी साबित होती रही।स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए उन्होंने शासकीय रेवती रमण मिश्र महाविद्यालय, सूरजपुर में प्रवेश लिया, जहाँ के प्रोफेसरों ने उनके जीवन को एक नई दिशा दी। रसायन विज्ञान के प्रोफेसर डॉ. विकेश कुमार झा का मार्गदर्शन उनके जीवन का अहम मोड़ बना। उनकी प्रेरणा और दिशा-निर्देशन से निधि ने देश की अत्यंत कठिन सीएसआईआर नेट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 33 वाँ रैंक अर्जित की और सूरजपुर का नाम राष्ट्रीय मानचित्र पर गौरव के साथ अंकित किया। निधि के शब्दों में उनकी पूरी यात्रा का सार समाया है -’’महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि उन सपनों को जीने का दिन है, जो हमने खुली आँखों से देखे हैं।’’ निधि गुप्ता की यह सफलता जिले की उन तमाम बेटियों के लिए एक प्रकाश-स्तंभ ह,ै जो सीमित संसाधनों के बीच अपने सपनों को पालती हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि शासकीय शिक्षा भी उत्कृष्टता की नींव बन सकती है कि बशर्ते इरादा पक्का हो।
- - मजदूरी छोड़ लखपति दीदी बनीं दशमीरायपुर। असाधारण मेहनत, अटूट आत्मविश्वास और त्याग से बुनी गई एक ऐसी सच्ची यात्रा है, जो दिखाती है कि सीमित संसाधनों और विकट परिस्थितियों के बावजूद सफलता संभव है। यह साधारण शुरुआत से असाधारण ऊंचाइयों तक पहुँचने की कहानी है, मोंगरा फूल महिला स्वयं सहायता समूह से जुडे़ दशमी नाग की, जिसमें संघर्ष, लगन और हार न मानने का जज्बा शामिल होता है। आज दशमी नाग अपनी मेहनत एवं लगन के बूते धान, मक्का, सब्जी उत्पादन सहित मुर्गी पालन और बकरीपालन जैसी विविध गतिविधियों के माध्यम से सालाना लगभग दो लाख रुपए से ज्यादा की आय अर्जित कर रही हैं। यह उनके पुराने जीवन की तुलना में एक बड़ी उपलब्धि है। आर्थिक लाभ के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व में भी एक अदभुत परिवर्तन आया है।बस्तर के सुदूर अंचलों में महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिखी जा रही है, जिसका जीता-जागता उदाहरण बस्तर जिला के ग्राम पंचायत मामड़पाल मुनगा की रहने वाली दशमी नाग हैं। कभी मजदूरी के भरोसे अपना जीवन बसर करने वाली दशमी आज लखपति दीदी के रूप में अपनी एक नई पहचान बना चुकी हैं। मोंगरा फूल महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद दशमी के जीवन में जो बदलाव आया, वह आज पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरक बन गया है। समूह से जुड़ने से पूर्व दशमी नाग की आर्थिक स्थिति अत्यंत सामान्य थी। वे खेती और पशुपालन तो करती थीं, लेकिन तकनीकी मार्गदर्शन और पूंजी के अभाव में उनकी आय कम ही हो पाती थी। धान, मक्का और सब्जी बाड़ी से होने वाली सीमित कमाई के साथ-साथ उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था। लेकिन महिला संगठन मुनगा और तीरथधारा महिला संगठन संकुल छिंदावाड़ा के साथ जुड़ने के बाद उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल गई।ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद समूह के माध्यम से मिली कुल 41 हजार 500 रुपए की वित्तीय सहायता जिसमें डेढ़ हजार रूपए रिवॉल्विंग फंड, 15 हजार रूपए सीआईएफ और 25 हजार रूपए का बैंक लिंकेज शामिल था। यह सहायता दशमी के लिए एक मजबूत आधार साबित हुई। इस राशि का सही नियोजन करते हुए उन्होंने खेती और पशुपालन को वैज्ञानिक तरीके से विस्तार दिया। परिणाम यह हुआ कि जिस धान की खेती से वे पहले 50 हजार रुपए कमाती थीं, वह बढ़कर 65 हजार रूपए हो गया। इसी तरह बकरी पालन में उन्होंने लंबी छलांग लगाते हुए अपनी आय को 25 हजार रुपए से बढ़ाकर सीधे 55 हजार रूपए तक पहुँचाया।जो दशमी पहले मजदूरी के लिए संघर्ष करती थीं, आज वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, यही नहीं समाज में लोगों के साथ खुलकर आत्मविश्वास के साथ संवाद करती हैं। उनकी यह सफलता की कहानी साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर और मंच मिले, तो वे अपनी तकदीर खुद बदल सकती हैं। वह कहती है कि मेहनत के बल पर सफलता के शिखर हासिल किया जा सकता है।



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