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- रायपुर। होमसाइंस कॉलेज से सेवानिवृत्त प्राचार्य, नेपियर टाउन जबलपुर निवासी डॉ. अश्विनी कुमार वर्मा (मूल निवासी कवर्धा) का अस्वस्थता के चलते निधन हो गया है । वे 84 वर्ष के थे। वे डॉ. अचिन और डॉ. यतिन वर्मा के पिता थे। उनका अंतिम संस्कार जबलपुर में किया गया।उल्लेखनीय है कि 60 और 70 के दशक में उन्होंने साइंस कॉलेज रायपुर में फिजिक्स के प्रोफेसर पद पर अपनी सेवाएं दी। वे रायपुर निवासी इंद्रपाल वर्मा (यूको बैंक) और पत्रकार नगेन्द्र वर्मा के चाचा थे ।
- -आप भी इस पहल से जुड़कर ज्ञान के दान में बनें भागीदार-अब तक 7700 से अधिक अधिक दान की पुस्तकरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार जिले में संचालित स्मृति पुस्तकालय योजना के तहत ज्ञान दान की दिशा में जनसहभागिता लगातार बढ़ रही है।इसी क्रम में सृजन एकैडमी के संचालक श्री हरीशंकर वर्मा द्वारा सीजीपीएससी, टेस्ट सीरीज, इंटरनेशनल एवं नेश्नल करंट अफेयर, छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण एवं बजट एवं कम्प्यूटर की 200 पुस्तकें जिला प्रशासन को दान कर प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने उनके इस सराहनीय योगदान की प्रशंसा करते हुए प्रमाण पत्र एवं प्रेरक पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास से जरूरतमंद एवं प्रतिभावान अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में महत्वपूर्ण सहयोग मिलेगा।उल्लेखनीय है कि इस योजना के अंतर्गत अब तक 7700 से अधिक पुस्तकें दान की जा चुकी हैं। इन पुस्तकों का लाभ जिले के अनेक विद्यार्थियों को मिल रहा है। यह अभियान केवल पुस्तक दान तक सीमित नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों को संवारने और उनके भविष्य निर्माण का संकल्प है।जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे भी इस पुनीत कार्य में सहभागी बनें। पुस्तक अथवा इलेक्ट्रॉनिक गैजेट दान करने हेतु इच्छुक नागरिक फोन के माध्यम से श्री प्रभात सक्सेना 94060 49000 एवं श्री केदार पटेल 94255 02970 पर संपर्क कर सकते हैं।इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कुमार बिश्वरंजन एवं जिला रोजगार अधिकारी श्री केदार पटेल सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
- रायपुर, । इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी एक स्वतंत्र मानव समाजसेवी संस्था है, जो आपदा एवं संकट की परिस्थितियों में पीड़ितों की सहायता के लिए समर्पित है। संस्था द्वारा भूकंप, आग, बाढ़ एवं सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के साथ-साथ प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान तथा रक्तदान शिविरों का नियमित आयोजन किया जाता है।संस्था से जुड़ने के लिए विभिन्न श्रेणियों में सदस्यता प्रदान की जाती है, जिसमें संरक्षक सदस्य के लिए 25,000 रुपए, उप संरक्षक सदस्य के लिए 12,000 रुपए, आजीवन सदस्य के लिए 1,000 रुपए तथा वार्षिक सदस्यता के लिए 100 रुपए निर्धारित किए गए हैं।इसी क्रम में जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह द्वारा डिप्टी कलेक्टर उपेन्द्र किण्डो को रेडक्रॉस सोसाइटी की सदस्यता प्रदान की गई। इस अवसर पर रेडक्रॉस के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए अधिक से अधिक लोगों से संस्था से जुड़कर मानव सेवा में योगदान देने का आह्वान किया गया।
- रायपुर । प्रशासनिक पारदर्शिता, शोध सुविधा एवं ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए रायपुर में प्रशासनिक एवं ऐतिहासिक प्रोजेक्ट दस्तावेज ग्रंथालय की स्थापना की गई है। यह पहल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में की गई है।इस पहल के अंतर्गत अविभाजित मध्यप्रदेश काल के ऐतिहासिक नियम-कानून, अधिनियम, विधानसभा एवं विधान परिषद की कार्यवाहियों सहित अन्य महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेजों का सुव्यवस्थित संकलन किया गया है। अब तक 1062 से अधिक पुस्तकों एवं अभिलेखों का संग्रह किया जा चुका है। इनमें वर्ष 1911 से 1971 तक की जनगणना से संबंधित पुस्तकें तथा प्रशासनिक, विधायी एवं ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। इस संग्रह से प्रशासन, शोध एवं विधिक कार्यों में व्यापक लाभ मिलेगा। इसमें राजस्व, वित्त, योजना, कृषि, सिंचाई, अभिलेख, जेल सहित विभिन्न विभागों के अभिलेख, उच्च न्यायालय एवं अन्य न्यायिक संदर्भ सामग्री भी उपलब्ध है। यह संग्रह प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों, विधि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के लिए एक सशक्त संदर्भ केंद्र के रूप में विकसित किया गया है।कलेक्टर डॉ गौरव सिंह एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री कुमार बिश्वरंजन के मार्गदर्शन में जिला पंचायत कार्यालय के द्वितीय तल पर इस प्रोजेक्ट दस्तावेज ग्रंथालय को सुव्यवस्थित किया गया है, जहां पाठकगण अध्ययन हेतु उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह पहल प्रदेश की प्रशासनिक एवं विधायी धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ सुशासन, पारदर्शिता एवं ज्ञान-आधारित प्रशासन को बढ़ावा देने की दिशा में उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है। भविष्य में इन दस्तावेजों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने की भी योजना है, जिससे इतिहासकारों एवं शोधार्थियों को और अधिक सुविधा मिल सके।
- रायपुर, / कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रायपुर डॉ. गौरव सिंह द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 की धारा 5(ख) के तहत राजा राजपूत पिता प्यारे लाल राजपूत उम्र 25 वर्ष साकिन बुद्ध चौक, रामनगर थाना गुढियारी, रायपुर को जिले की सीमाओं से निष्कासित जिला बदर करने का आदेश जारी किया गया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनावेदक के विरूद्ध उसकी अपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की गई जो बेअसर रही। अनावेदक निरंतर अपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने में आम जनता में उसके अपराधिक कृत्य को लेकर आतंक व असुरक्षा की भावना फैली हुई थी। अनावेदक की अपराधिक गतिविधियों से सामान्य जनता एवं लोक सेवकों में भय व्याप्त था। इस हेतु सुरक्षा एवं लोक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन द्वारा आवश्यक गोपनीय साक्ष्य और रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई।जारी आदेश के अनुसार, अनावेदक को आदेश की तिथि से 07 दिवस के भीतर, अर्थात 04 मार्च 2026 तक रायपुर, दुर्ग, गरियाबंद, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार जिलों की राजस्व सीमाओं से बाहर जाना होगा तथा 03 माह अर्थात् 24 मई 2026 तक बिना सक्षम न्यायालय की अनुमति के इन जिलों की सीमाओं में प्रवेश नहीं कर सकेगा। आदेश का उल्लंघन होने पर संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध विधि अनुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
- रायपुर । देखभाल एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों को सुरक्षित एवं पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने हेतु पोषण देखरेख (फोस्टर केयर) योजना प्रभावी रूप से संचालित की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के आदेश से बच्चों को ऐसे परिवार में रखा जाता है, जो उनके जैविक अथवा दत्तक माता-पिता नहीं होते, परंतु उन्हें परिवार जैसा स्नेह, संरक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।पोषण देखरेख में बच्चे का सर्वोत्तम हित सर्वोपरि रखा जाता है। प्रयास किया जाता है कि बच्चे को उसके सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश के अनुरूप ही परिवार में रखा जाए। प्रत्येक बच्चे को परिवार जैसे वातावरण में बड़े होने का अधिकार है। सभी निर्णय बच्चे की सुरक्षा, आवश्यकता एवं उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए केस-टू-केस आधार पर लिए जाते हैं।बच्चे को अपनी राय देने का अधिकार है तथा उसकी आयु एवं समझ के अनुसार उसकी बात का सम्मान किया जाता है। सगे भाई-बहनों को यथासंभव एक ही परिवार में रखा जाता है। यदि अलग करना आवश्यक हो, तो दोनों की सहमति (जहाँ आवश्यक हो) तथा बाल कल्याण समिति की अनुमति अनिवार्य होती है।इस योजना के अंतर्गत 6 वर्ष से अधिक आयु के वे बच्चे पात्र होते हैं, जो बाल देखरेख संस्थाओं (सीबीआई) में निवासरत हों, जिनसे मिलने कोई नहीं आता हो, जिनके अभिभावक अयोग्य हों अथवा जिन्हें देशीय या अंतरदेशीय दत्तक ग्रहण में स्थान न मिल पाया हो तथा ‘हार्ड टू प्लेस’ या विशेष आवश्यकता श्रेणी में आते हों।फोस्टर केयर दो प्रकार की होती है :- अल्पकालीन : अधिकतम 1 वर्ष तक, दीर्घकालीन : 1 वर्ष से अधिक, अधिकतम 18 वर्ष की आयु तक, जिसे बाल कल्याण समिति द्वारा समय-समय पर समीक्षा कर बढ़ाया जा सकता है।रायपुर जिले के 12 वर्षीय योगेश के सिर से कम उम्र में ही माता-पिता का साया उठ गया था। वह भिक्षावृत्ति कर जीवन यापन कर रहा था। जिला बाल संरक्षण इकाई, रायपुर द्वारा 8 वर्ष की आयु में उसका रेस्क्यू कर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के आदेशानुसार उसे बाल देखरेख संस्था में संस्थागत किया गया।संस्था में रहते हुए बालक का चयन पोषण देखरेख कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया। पोषक अभिभावक का गृह अध्ययन पूर्ण होने के उपरांत संबंधित अनुमोदन समिति द्वारा बालक को फोस्टर केयर में दिए जाने की अनुशंसा की गई। उचित मिलान के पश्चात बालक को पोषक परिवार में स्थापित किया गया।वर्तमान में योगेश अपने पोषक परिवार के साथ सुरक्षित वातावरण में रहकर कक्षा 7वीं में अध्ययन कर रहा है। यह उदाहरण दर्शाता है कि पोषण देखरेख योजना बच्चों के जीवन में नई आशा, सुरक्षा एवं उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर रही है।जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जरूरतमंद बच्चों को परिवार जैसा स्नेह एवं संरक्षण देने के लिए आगे आएं और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सहभागी बनें।
- रायपुर, / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट दक्षिचि के तहत मानवता और जनसेवा की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल करते हुए बैरन बाजार स्थित जिला वेटनरी हॉस्पिटल में पदस्थ कम्पाउण्डर सपना नाग ने अंगदान का संकल्प लेकर समाज के समक्ष अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। जिले में संचालित प्रोजेक्ट दधीचि के अंतर्गत उन्होंने अंग दान के लिए पंजीयन कर जनजागरूकता का संदेश दिया। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने सम्मान पत्र प्रदान कर उनके इस पुनीत कार्य की सराहना की तथा कहा कि अंगदान मानवता की सर्वाेच्च सेवा है, जिससे कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है।सपना नाग ने अपने संकल्प के बारे में कहा कि “मेरे जाने के बाद यदि मेरे अंगों से किसी को स्वस्थ जीवन मिल सके, तो इससे बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती।” उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट दधीचि के तहत अब तक 87 से अधिक लोगों ने अंग एवं संपूर्ण शरीर दान का संकल्प लिया है, जिससे समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे भी इस पुनीत कार्य से जुड़कर अंगदान का संकल्प लें। अधिक जानकारी एवं पंजीयन हेतु 9406049000 संपर्क नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी कुमार बिश्वरंजन, संयुक्त संचालक पशु स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. शंकरलाल उइके तथा लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता श्री प्रभात सक्सेना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
- -होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर निःशुल्क पेयजल उपलब्ध कराए जाने पर जोररायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देशन एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन द्वारा “Water for All” अभियान के अंतर्गत जिले के समस्त होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में नागरिकों को निःशुल्क शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराए जाने हेतु नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण, स्टिकर सत्यापन एवं शपथ पत्र प्राप्त करने की कार्यवाही सतत रूप से की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रत्येक प्रतिष्ठान में “Water for All” का स्टिकर प्रदर्शित हो तथा ग्राहकों को बिना किसी शुल्क के स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।नियमित निगरानी एवं सघन कार्यवाही के परिणामस्वरूप अब जिले के विभिन्न होटल एवं रेस्टॉरेंट्स में ग्राहकों को निःशुल्क शुद्ध पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो रहा है। इस पहल से आम नागरिकों को विशेष राहत मिली है तथा जनहित के इस अभियान को सकारात्मक प्रतिसाद प्राप्त हो रहा है।जिला प्रशासन द्वारा आग्रह किया गया है कि “Water for All” अभियान की मॉनिटरिंग निरंतर जारी रहेगी तथा शिकायत या समस्या पाए जाने पर जिला कॉल सेंटर के नंबर 9977222564 पर शिकायत करें।
- -राज्य के विकास के लिए संकल्प का बजट प्रस्तुत किया गया
-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व वित्त मंत्री ओपी चौधरी जी का आभार
रायपुर । भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक हेमंत पाणिग्रही ने कहा कि राज्य के विकास के लिए संकल्प का बजट प्रस्तुत किया गया जिसकी सर्वत्र चर्चा हो रही है। हमारे मुख्यमंत्री विनम्र विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में और हमारे अध्ययनशील वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी जी के मार्गदर्शन में यह बजट पेश किया गया है। यह बजट राज्य के विकास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। जिस पर कांग्रेस को सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है। कांग्रेस ने राज्य के विकास के लिए जब भी बजट पेश किया है वह हमेशा राज्य के विकास को रिवर्स गियर में ले जाने वाला रहा है।
- रायपुर - जिला प्रशासन के निर्देशन में रायपुर नगर पालिक निगम क्षेत्र सहित “वाटर फॉर आल” अभियान के अंतर्गत सम्पूर्ण रायपुर जिले के समस्त होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा एवं अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में नागरिकों को नि:शुल्क शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराए जाने हेतु नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है।अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु संबंधित अधिकारियों द्वारा स्थलीय निरीक्षण, स्टीकर सत्यापन एवं शपथ पत्र प्राप्त करने की कार्यवाही सतत रूप से की जा रही है। जिला प्रशासन के निर्देशन में रायपुर नगर निगम क्षेत्र सहित सम्पूर्ण रायपुर जिले में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक प्रतिष्ठान में “वाटर फॉर आल" का स्टीकर प्रदर्शित हो तथा ग्राहकों को बिना किसी शुल्क के स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।नियमित निगरानी एवं सघन कार्यवाही के परिणामस्वरूप अब जिले के विभिन्न होटल एवं रेस्टोरेंट्स में ग्राहकों को नि:शुल्क शुद्ध पेयजल सहज रूप से उपलब्ध हो रहा है। जिला प्रशासन की इस पहल से आम नागरिकों को विशेष राहत मिली है तथा जनहित के इस अभियान को सकारात्मक प्रतिसाद प्राप्त हो रहा है।जिला प्रशासन द्वारा स्पष्ट किया गया है कि “वाटर फॉर आल ” अभियान की मॉनिटरिंग निरंतर जारी रहेगी तथा उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
- -उद्धाटन मैच निगम जोन 7 और 10 की टीमों के मध्य खेला गया-जोन 10 के लिए नकुल ने लगाया शानदार शतक-उद्धाटन मैच जोन 7 की टीम ने जीता-25 फरवरी को दो मैच, मेयर कप क्रिकेट का ग्रेंड फिनाले 1 मार्च को होगा-प्रत्येक टीम में 2 महिला खिलाड़ी, 2 प्लेसमेंट कर्मचारी खेलेंगे, पहली गेंद महिला खिलाड़ी डालेंगी और वह पहली गेंद महिला खिलाड़ी खेलेंगी-नेता प्रतिपक्ष श्री आकाश तिवारी और आयुक्त श्री विश्वदीप ने की बल्लेबाजी-जोन 7 के गोपाल 22:गेंदों में 68 रन बनाकर बने मैन ऑफ द मैचरायपुर - महापौर श्रीमती मीनल चौबे ने रायपुर नगर निगम मेयर कप क्रिकेट स्पर्धा का विधिवत शुभारम्भ बल्लेबाजी करते हुए कर दिया. रायपुर नगर निगम मेयर कप क्रिकेट स्पर्धा नगर निगम के नेताजी सुभाषचन्द्र बोस स्टेडियम में रायपुर नगर निगम खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है. इस अवसर पर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष श्री आकाश तिवारी और आयुक्त श्री विश्वदीप ने भी बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया.उद्धाटन के दौरान नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप, खेलकूद एवं युवा कल्याण विभाग के अध्यक्ष श्री नंदकिशोर साहू, वित्त विभाग अध्यक्ष श्री महेन्द्र खोडियार, नगरीय नियोजन एवं भवन अनुज्ञा विभाग के अध्यक्ष श्री मनोज वर्मा, संस्कृति विभाग अध्यक्ष श्री अमर गिदवानी, राजस्व विभाग अध्यक्ष श्री अवतार भारती बागल, जल कार्य विभाग अध्यक्ष श्री संतोष सीमा साहू, पर्यावरण एवं उद्यानिकी विभाग के अध्यक्ष श्री भोलाराम साहू, लोक कर्म विभाग अध्यक्ष श्री दीपक जायसवाल, जोन 4 अध्यक्ष श्री मुरली शर्मा, जोन 5 जोन अध्यक्ष श्री अम्बर अग्रवाल, जोन 7 जोन अध्यक्ष श्रीमती श्वेता विश्वकर्मा, जोन 10 जोन अध्यक्ष श्री सचिन बी. मेघानी,पार्षद सर्वश्री आनंद अग्रवाल, राजेश गुप्ता, प्रमोद कुमार साहू, कैलाश बेहरा, राजेश देवांगन, अजय साहू, कृष्णा सोनकर, वार्ड पार्षद प्रतिनिधिगण , नगर निगम अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय, अधीक्षण अभियंता श्री राजेश राठौर, जोन 4 जोन कमिश्नर श्री अरुण ध्रुव, कार्यपालन अभियंता श्री गजाराम कँवर सहित नगर निगम रायपुर के अन्य अधिकारी, कर्मचारीगण, क्रिकेटप्रेमी आमजनों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही.नगर निगम मेयर कप क्रिकेट स्पर्धा में प्रत्येक टीम में 2 महिला खिलाड़ी और 2 प्लेसमेंट खिलाड़ी खेलेंगे. क्रिकेट खेलने वाले नियमित अधिकारी और कर्मचारी सहित वार्ड पार्षद जनप्रतिनिधि टीम में सम्मिलित होंगे. यह नियमावली मेयर कप क्रिकेट स्पर्धा के प्रत्येक मैच में लागू रहेगी.पहला उद्घाटन मैच नगर निगम जोन 7 और जोन 10 की टीमों के मध्य खेला गया. पहले मैच में जोन 10 की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 10 ओवरों में 139 रन बनाये, इसमें जोन 10 के लिए नकुल ने शानदार शतक लगाया. पहला मैच जोन 7 ने जोन 10 की टीम को हराकर जीता.जोन 7 के खिलाडी गोपाल ने 22 गेंदों पर 68 रन बनाये. वे पहले मैच में मैन ऑफ द मैच रहे.नगर निगम मेयर कप क्रिकेट स्पर्धा में 25 फरवरी को जोन 3 और जोन 2 और जोन 6 और जोन 9 की टीमों के मध्य दो मैच खेले जायेंगे. यह मैच संध्या 6 बजे और रात्रि 8 बजे से खेले जायेंगे. स्पर्धा में प्रत्येक मैच 10 सीमित ओवरों का होगा.स्पर्धा में 26 और 27 फरवरी को दो - दो कवार्टर फाइनल मैच और 28 फरवरी को दो सेमीफाइनल मैच खेले जायेंगे. स्पर्धा का ग्रेंड फिनाले 1 मार्च को खेला जायेगा. सभी मैच संध्या 6 बजे से खेले जायेंगे.
- बालोद । छत्तीसगढ़ शासन, सामान्य प्रशासन एवं जनशिकायत निवारण विभाग के निर्देशानुसार जिला प्रशासन बालोद द्वारा आम जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण हेतु जिला स्तरीय ’जनसमस्या निवारण शिविरों’ का आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत डौण्डीलोहारा विकासखण्ड के ग्राम कमकापार में 26 फरवरी को सुबह 10.30 बजे से शाम 05 बजे तक जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर के सफल आयोजन हेतु ग्राम कमकापार में अनुविभागीय अधिकारी डौण्डीलोहारा श्री शिवनाथ बघेल नोडल अधिकारी एवं जनपद पंचायत डौण्डीलोहारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहायक नोडल अधिकारी होंगे।उल्लेखनीय है कि कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जिले में प्रत्येक माह न्यूनतम दो जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे। जिनमें सभी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनता की समस्याओं, मांगों और शिकायतों का मौके पर ही प्रभावी ढंग से निराकरण करना है। जिससे राज्य शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए शिविर स्थल पर सभी विभागों के सुव्यवस्थित स्टॉल लगाए जाएंगे और योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
- रायपुर - रायपुर नगर पालिक निगम के आयुक्त श्री विश्वदीप के आदेशानुसार और अपर आयुक्त राजस्व श्रीमती कृष्णा खटीक, उपायुक्त राजस्व श्रीमती जागृति साहू और जोन 4 जोन कमिश्नर श्री अरुण ध्रुव के निर्देशानुसार नगर निगम जोन 4 राजस्व विभाग की टीम द्वारा सहायक राजस्व अधिकारी श्री अमरनाथ साहू के नेतृत्व में रायपुर नगर पालिक निगम के हित में लगातार प्रयास करने पर आज जामा मस्जिद ने सीरत मैदान की बकाया राशि का नगर निगम जोन 4 राजस्व विभाग को 515911 रू. के धनादेश के रूप में भुगतान कर दिया.
- रायपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने तीन दिवसीय मुंबई प्रवास के दौरान प्रसिद्ध फिल्मकार व चित्र भारती पटल से जुड़े श्री आकाश आदित्य लामा के निवास जाकर उनकी स्वर्गीय माता श्रीमती रत्ना लामा को श्रद्धांजलि अर्पित की और ईश्वर से उनकी पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। इस दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री द्वय यशवंत जैन व डॉ नवीन मार्कंडेय, प्रदेश कार्यालय मंत्री अशोक बजाज, सोशल मीडिया प्रदेश सह संयोजक दिनेश सुंदरानी भी मौजूद थे।
- -प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कहा : कांग्रेस की नियुक्तियाँ 'डूबते जहाज' को बचाने का आखिरी और नाकाम प्रयास, पदों की बंदरबाँट से संगठन में जान नहीं फूँकी जा सकतीरायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता देवलाल ठाकुर ने कांग्रेस पार्टी में की जा रही संगठनात्मक नियुक्तियों पर तंज कसते हुए कहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज अब अपने फेयरवेल से पहले अंतर्कलह से जूझ रही कांग्रेस में अब कितनी भी नियुक्तियाँ कर लें, जनता के बीच अपनी खोई हुई साख कांग्रेस वापस नहीं पा सकती। श्री ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस की नई नियुक्तियाँ संगठन की मजबूती के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही सिरफुटौवल और गुटबाजी को शांत करने के लिए की गई हैं। यह कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं, बल्कि बड़े नेताओं को खुश रखने का प्रयास है।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की जनता ने जिन्हें चुनाव में नकार दिया, कांग्रेस उन्हीं चेहरों को पदों से नवाज कर कौन सा संदेश देना चाहती है? यह नियुक्तियाँ दर्शाती हैं कि कांग्रेस के पास नए विचारों और ऊर्जावान चेहरों का भारी अभाव है और वह 'नई बोतल में पुरानी शराब' की कहावत चरितार्थ करने विवश है। कांग्रेस आज एक ऐसे डूबते जहाज के समान है, जिसमें छेद इतने बड़े हैं कि कप्तान बदलने या नए नाविक तैनात करने से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। कांग्रेस के कार्यकर्ता तक अब अब अपने बड़े नेताओं के झूठ, पाखण्ड और दिखावे की राजनीति को समझ चुके हैं। श्री ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस में मची भगदड़ और शीर्ष नेताओं के बीच के अविश्वास को ये नियुक्तियाँ ढँक नहीं सकतीं। जिस पार्टी का आधार ही खिसक चुका हो, वहाँ पदों की बंदरबाँट से संगठन में जान नहीं फूँकी जा सकती।
- -'कांग्रेस का प्रलाप केवल हताशा और राजनीतिक दीवालिएपन का प्रतीक, विकास विरोधी चरित्र एक बार फिर हुआ उजागर'रायपुर। छत्तीसगढ़ के वन व सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा मंगलवार को प्रस्तुत बजट पर कांग्रेस की नकारात्मक प्रतिक्रिया को राजनीतिक दीवालियापन बताया है। श्री कश्यप ने कहा कि जिस कांग्रेस ने पाँच साल तक छत्तीसगढ़ को केवल लूट और भ्रष्टाचार का केंद्र बनाए रखा, उन्हें आज विकास का यह बजट समझ नहीं आ रहा है। दरअसल, प्रदेश की भाजपा सरकार का बजट समाज के सभी वर्गों की भलाई के लिए है, जबकि पिछली कांग्रेस सरकार के बजट एक ही परिवार के लिए रहे हैं।प्रदेश के वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ के सर्वतोमुखी कल्याण की दृष्टि से कारगर बजट प्रावधान करके विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का 'संकल्प' व्यक्त किया गया है, लेकिन कांग्रेस के लोग उन योजनाओं, कार्यक्रमों को शुतुरमुर्ग की तरह अपने विरोध की रेत में मुँह छिपाकर अनदेखा करने में लगे हैं। कांग्रेस द्वारा इसका विरोध करना यह सिद्ध करता है कि वे प्रदेश के विकास में केवल बाधा डालना जानते हैं। कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ को दिवालियेपन के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया था। श्री कश्यप ने कटाक्ष किया कि जिस कांग्रेस के शासनकाल में गोबर और कोयले तक में घोटाला हुआ हो, उस कांग्रेस के नेताओं पारदर्शिता और जनकल्याण का यह बजट 'नकारात्मक' ही लगेगा। कांग्रेस को दुःख इस बात का है कि इस बजट में 'कमीशन' के लिए कोई जगह नहीं छोड़ी गई है।प्रदेश के वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि आज जब हमारी सरकार प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सुधार रही है और हर हाथ को काम व हर खेत को पानी दे रही है, तो कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख अनर्गल विलाप कर रही है। विष्णुदेव साय की सरकार ने 'मोदी की गारंटी' के हर संकल्प को इस बजट के माध्यम से जमीन पर उतारने का काम किया है। महतारी वंदन योजना से लेकर किसानों को दिए जा रहे बोनस तक, हर वर्ग का सशक्तीकरण कांग्रेस को रास नहीं आ रहा है। श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता कांग्रेस के इस नकारात्मक रवैये को देख रही है और जनता ही कांग्रेस के प्रलाप का करारा जवाब देगी। भाजपा सरकार 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के साथ छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- दुर्ग। दुर्ग शहर विधानसभा से दुर्ग नगर निगम के पार्षदो ने आज छत्तीसगढ़ विधानसभा का भ्रमण किया। इस दौरान पार्षदो ने विधानसभा में बजट सत्र की कार्यवाही को नजदीक से देखा और संसदीय प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त किये।भ्रमण के दौरान पार्षदो ने विधानसभा परिसर दर्शक दीर्घा, पुस्तकालय तथा केबिनेट मंत्री गजेन्द्र यादव के कक्ष पहुँचे और उनसे सौजन्य मुलाकात कर विभागीय कार्यों की जानकारी लिए। राज्य की राजनीति, विधायी प्रक्रिया और उनके महत्व के बारे में जानकारी लिए। उन्होंने सभी पार्षदो को अपने क्षेत्र में कार्य के साथ-साथ समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा दी। इस दौरान शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने दुर्ग निगम के पार्षदो को विधानसभा में बजट सत्र, मानसून सत्र और शीत सत्र में होने वाले कार्यवाही की जानकारी दिए। इसके पश्चात् विधानसभा सत्र की कार्यवाही से अवगत कराये।इस अवसर पर दुर्ग निगम के पार्षदो ने कहा कि यह भ्रमण उनके लिए सीखने और अनुभव प्राप्त करने का अनूठा अवसर था। इससे उन्हें राज्य की राजनीतिक संरचना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को गहराई से समझने में मदद मिलेगी। मंत्री गजेन्द्र यादव ने विधानसभा भ्रमण के दौरान प्रश्नकाल में सवाल पूछने और आने की प्रक्रिया, ध्यानाकर्षण में जनता के मुद्दों को सदन में रखने की जानकारी साझा किये।विधानसभा भ्रमण के दौरान महापौर श्रीमति अलका बाघमार, पार्षद देवनारायण चंद्राकर, चंद्रशेखर चंद्राकर, ज्ञानेश्वर ताम्रकार, नीलेश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, श्रीमति रंजीता पाटिल, श्रीमति सुरुचि उमरे, युवराज कुंजाम, श्रीमति हर्षिता जैन, श्रीमति सावित्री दामाहे, जैन सहित अन्य पार्षदगण उपस्थित रहे।
- -नियमित मासिक चुंगी क्षतिपूर्ति के 11.14 करोड़ का भी आबंटनबिलासपुर । होली के पहले निकाय कर्मियों को वेतन भुगतान के लिए मानवीय सरोकार के साथ पहल करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदेश के नगरीय निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति मद से कुल 62.85 करोड़ रुपए का आबंटन आज जारी किया गया है। इसमें वेतन भुगतान के लिए कुल 51 करोड़ 71 लाख 21 हजार रुपये आबंटित किए गए हैं। इसके साथ ही सभी नगरीय निकायों को प्रतिमाह नियमित रूप से दी जा रही चुंगी क्षतिपूर्ति के अंतर्गत कुल 11 करोड़ 14 लाख 38 हजार 492 रुपये का भी आबंटन किया गया है।फरवरी-2026 की स्थिति में नगरीय निकायों में वेतन के लिए लंबित राशि के आधार पर नगरीय निकायों को चुंगी क्षतिपूर्ति मद से आबंटन किया गया है, ताकि नगरीय निकायों में वित्तीय संतुलन बनाए रखा जा सके और लंबित देयकों एवं वेतन का निराकरण हो सके।11 नगर निगमों को वेतन के लिए 25.05 करोड़प्रदेश के 11 नगर निगमों को कुल 25 करोड़ 5 लाख 34 हजार रुपये की राशि वेतन एवं चुंगी क्षतिपूर्ति मद में प्रदान की गई है। नगर पालिक निगम भिलाई को 4 करोड़, बिलासपुर को 5 करोड़, दुर्ग को 1 करोड़ 65 लाख 92 हजार, राजनांदगाँव को 3 करोड़, जगदलपुर को 1 करोड़ 50 लाख, अंबिकापुर को 3 करोड़, चिरमिरी को 2 करोड़, रिसाली को 2 करोड़, बीरगांव को 54 लाख 55 हजार, धमतरी को 1 करोड़ 7 लाख एवं भिलाई-चरोदा को 1 करोड़ 27 लाख 87 हजार रुपये जारी किए गए हैं। नगर निगमों में यह राशि मुख्य रूप से नियमित कर्मचारियों, स्वच्छता कर्मियों एवं संविदा कर्मचारियों के वेतन भुगतान तथा चुंगी समाप्त होने से उत्पन्न राजस्व अंतर की भरपाई हेतु उपयोग की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश के सभी 14 नगर निगमों को चुंगी क्षतिपूर्ति के अंतर्गत 7 करोड़ 51 लाख 55 हज़ार 420 रुपये भी आबंटित किए गए हैं।वेतन के लिए नगर पालिकाओं को 16.48 करोड़ व नगर पंचायतों को 10.17 करोड़नगरीय प्रशासन विभाग ने प्रदेश के 38 नगर पालिका परिषदों में 16 करोड़ 48 लाख की राशि तथा 85 नगर पंचायतों को कुल 10 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक की राशि होली के पूर्व निकाय कर्मियों को वेतन भुगतान के लिए आबंटित की है। छोटे एवं मध्यम नगरीय निकायों के लिए यह वित्तीय सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश के सभी 54 नगर पालिकाओं को भी चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि दी गई है। इसके लिए 2 करोड़ 8 लाख 52 हजार 17 रुपए का आबंटन जारी किया गया है। इसके अलावा सभी 124 नगर पंचायतों को एक करोड़ 54 लाख 31 हजार 55 रुपए की मासिक चुंगी क्षतिपूर्ति राशि दी गई है।ज्ञातव्य हो कि राज्य में चुंगी समाप्त होने के बाद नगरीय निकायों को राजस्व में कमी का सामना करना पड़ा था। इस स्थिति में राज्य सरकार द्वारा चुंगी क्षतिपूर्ति मद के माध्यम से निकायों को नियमित अंतराल पर राशि प्रदान की जाती है, ताकि वे अपने प्रशासनिक एवं सेवा संबंधी दायित्वों का निर्वहन सुचारू रूप से कर सकें। यह मद विशेष रूप से वेतन भुगतान, स्वच्छता व्यवस्था, जलप्रदाय सेवाओं एवं दैनिक संचालन व्यय को संतुलित करने में सहायक होती है।विभाग द्वारा आज आबंटित राशि से नगरीय निकायों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को होली के पूर्व वेतन प्राप्त होगा। इससे निकायों में स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति, प्रकाश व्यवस्था एवं अन्य शहरी सेवाओं में निरंतरता बनी रहेगी। नगरीय प्रशासन विभाग ने स्पष्ट किया है कि आबंटित राशि का उपयोग निर्धारित मदों में ही किया जाएगा। सभी निकायों को वित्तीय नियमों का पालन करते हुए व्यय विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। चुंगी क्षतिपूर्ति मद से वेतन के लिए 51.71 करोड़ एवं नियमित चुंगी क्षतिपूर्ति के रूप में 11.14 करोड़, इस प्रकार कुल 62.85 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का होली के पहले आबंटन नगरीय निकायों के लिए बड़ी राहत है।“चुंगी क्षतिपूर्ति मद के माध्यम से निकायों को समस्त कर्मचारियों के वेतन भुगतान करने में स्थिरता आएगी और शहरी प्रशासन को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार की यह पहल शहरी सेवाओं को निरंतर और प्रभावी बनाए रखने की दिशा में एक सशक्त कदम है।’’ - श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री
- -अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ किर्सी ह्यवैरिनेन के प्रवास से छत्तीसगढ़ पर्यटन को नई दिशा-सामुदायिक पर्यटन मॉडल एवं यूएन बेस्ट टूरिज्म विलेज मानकों की दिशा में बढ़ते कदमरायपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में इन दिनों पर्यटन विकास की एक नई और सकारात्मक इबारत लिखी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और हिवा कोचिंग एंड कंसल्टिंग की संस्थापक सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास ने राज्य के पर्यटन क्षेत्र को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण गति प्रदान की है। उनका यह दौरा केवल औपचारिक भ्रमण नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय आधारित सतत पर्यटन मॉडल को वैश्विक मानकों से जोड़ने की ठोस रणनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।दौरे के दूसरे दिन सुश्री किर्सी बस्तर जिले के ग्राम धुड़मारास पहुंचीं, जहां धुरवा डेरा होमस्टे में उनका पारंपरिक ढंग से स्वागत किया गया। सिहाड़ी और महुए की माला पहनाकर तथा धुरवा नृत्य और स्वागत गीतों के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की। आत्मीय स्वागत से अभिभूत सुश्री किर्सी ने कहा कि इस प्रकार का अनुभव उनके लिए अत्यंत विशेष और अविस्मरणीय है। यह स्वागत केवल सांस्कृतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि बस्तर की सामाजिक एकजुटता और आत्मीयता का सशक्त परिचय था।प्रवास के दौरान उन्होंने बस्तर के पारंपरिक एवं जैविक व्यंजनों का स्वाद भी लिया। कलम भाजी, सेमी और बोदई की सब्जी, केले की सब्जी, उड़द दाल, इमली की चटनी, कोसरा भात तथा मंडिया पेज जैसे स्थानीय व्यंजनों से सजी थाली ने उन्हें यहां की जीवनशैली और खाद्य परंपरा से परिचित कराया। वैश्विक पर्यटन परिदृश्य में स्थानीय खान-पान एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है और बस्तर की जैव विविधता आधारित खाद्य संस्कृति विदेशी पर्यटकों के लिए विशिष्ट पहचान बना सकती है।यह प्रवास विशेष रूप से यूनाइटेड नेशन से जुड़े ‘बेस्ट टूरिज्म विलेज अपग्रेड प्रोग्राम’ के मानकों के अनुरूप धुड़मारास और आसपास के क्षेत्रों को विकसित करने पर केंद्रित है। सुश्री किर्सी धुरवा डेरा होमस्टे में रहकर स्थानीय समुदाय, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और पर्यटन हितधारकों से संवाद कर सेवा गुणवत्ता, स्वच्छता प्रबंधन, डिजिटल प्रचार, ब्रांडिंग और होमस्टे संचालन के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर मार्गदर्शन दे रही हैं। यह भ्रमण जिला प्रशासन तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के समन्वय से आयोजित किया गया है।प्रवास के दौरान उन्होंने विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात में नौका विहार कर वहां की पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन किया और मेंदरी घूमर क्षेत्र में स्थानीय हितग्राहियों के साथ पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने पर चर्चा की। चित्रकोट जलप्रपात पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है, किंतु अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ की उपस्थिति इसे वैश्विक प्रचार अभियानों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर सकती है।सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन के छह दिवसीय प्रवास का प्रभाव बहुआयामी होगा। एक ओर यह बस्तर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध हो सकता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के स्थायी अवसर भी सृजित करेगा। सामुदायिक पर्यटन को संस्थागत आधार मिलने से आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी और सतत विकास की अवधारणा को बल मिलेगा। कभी नक्सल प्रभाव की पहचान से जुड़े रहे बस्तर की छवि अब प्रकृति, संस्कृति और सामुदायिक समृद्धि के मॉडल के रूप में उभर रही है। यदि धुड़मारास ‘यूएन बेस्ट टूरिज्म विलेज’ मानकों पर सफलतापूर्वक आगे बढ़ता है, तो यह मॉडल देश के अन्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। सुश्री किर्सी ह्यवैरिनेन का यह प्रवास छत्तीसगढ़ के पर्यटन इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होने की संभावना रखता है, जो राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा।
- -एक्सपोजर विजिट में सीखीं इंटीग्रेटेड फार्मिंग की बारीकियांजगदलपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में आजीविका के नए आयाम गढ़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बिलासपुर जिले के बिल्हा ब्लॉक से आए 50 सदस्यीय दल ने बस्तर जिले का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण किया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत आयोजित इस एक्सपोजर विजिट का मुख्य उद्देश्य बस्तर के जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और तोकापाल ब्लॉकों में संचालित सफल कृषि और पशुपालन मॉडल्स का गहन अध्ययन करना था। इस भ्रमण कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत जनपद पंचायत के सभागार में आयोजित एक विस्तृत तकनीकी सत्र से हुई, जहाँ पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के क्रियान्वयन, किसानों के चयन की वैज्ञानिक प्रक्रिया और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान बिलासपुर से आए प्रतिभागियों, समूह सदस्यों और कार्यालय स्टाफ को उप-समिति के कार्यों के साथ-साथ आजीविका सेवा केंद्रों द्वारा महिला किसानों को दिए जा रहे तकनीकी सहयोग की जानकारी दी गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कैसे एक व्यवस्थित कार्ययोजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बना सकती है।सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त करने के पश्चात दल ने क्षेत्र का भ्रमण कर जमीनी स्तर पर संचालित गतिविधियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। सदस्यों ने विशेष रूप से ब्रुडिंग सेंटर और उन्नत मुर्गी पालन की बारीकियों को समझा, जिसमें मुर्गियों के आहार प्रबंधन से लेकर टीकाकरण की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके साथ ही दल ने क्लस्टर के भीतर मछली पालन और बकरी पालन जैसे आजीविका के पूरक माध्यमों का भी अध्ययन किया। भ्रमण के दौरान बस्तर की दीदियों द्वारा अपनाई गई उन्नत सब्जी उत्पादन तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और कीट-रोग नियंत्रण के तरीकों ने बिलासपुर के दल को खासा प्रभावित किया। केवल उत्पादन ही नहीं, बल्कि कटाई के बाद होने वाली ग्रेडिंग, पैकेजिंग और स्थानीय मंडियों के माध्यम से सीधे बाजार से जुड़कर बेहतर मूल्य प्राप्त करने की रणनीति भी साझा की गई।बस्तर की दीदियों के द्वारा बुक्स ऑफ रिकॉर्ड के सटीक संधारण और उनके आत्मविश्वास ने आगंतुक दल के भीतर एक नया उत्साह भर दिया। 24 से 25 फरवरी तक आयोजित यह दो दिवसीय दौरा न केवल ज्ञानवर्धन का माध्यम बना, बल्कि दो अलग-अलग जिलों के महिला समूहों के बीच तकनीकी कौशल और अनुभवों को साझा करने का एक सशक्त मंच भी साबित हुआ। इस पूरी यात्रा ने प्रतिभागियों को यह विश्वास दिलाया कि समेकित खेती और आधुनिक मार्केटिंग के तालमेल से ग्रामीण जीवन में आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोले जा सकते हैं।
- -जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता: सांसद श्री चिंतामणि-केंद्रीय भू-जल बोर्ड रायपुर से पहुंचे भू-गर्भ वैज्ञानिकों द्वारा जल संचय व प्रबंधन को लेकर जिले से आये सरपंच, उपसरपंच, जनप्रतिनिधियों का दी गई विस्तृत जानकारीसूरजपुर। जल संचय जन भागीदारी अभियान को लेकर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी ऑडिटोरियम तिलसिवां सूरजपुर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप मे सरगुजा सांसद श्री चिंतामणि महराज ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। जहां उन्होने वैज्ञानिक खेती और जल संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद चिंतामणि महाराज ने कहा कि पहले लोग नदी, नालों, तालाब, कुओं जैसे जल स्रोतों का पानी का उपयोग पीने एवं दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए करते थे, परंतु अधिकांश जलस्रोतों के सूखने या कम होने से भूजल का उपयोग होने लगा। इससे बोरिंग का प्रचलन बढ़ गया किंतु अधिकाधिक उपयोग से अब भूजल स्तर निरंतर गिर रहा है। ऐसे में जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।उन्होंने कहा कि हम सभी को न केवल जल का बेहतर एवं सीमित उपयोग करना होगा बल्कि निरंतर उसका संरक्षण भी करना होगा। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा जल संरक्षण, मृदा संरक्षण, मृदा परीक्षण तथा सिंचाई प्रबंधन से जुड़ी अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सभी सरपंचों को योजनाओं की जानकारी होना आवश्यक है ताकि वे ग्रामवासियों तक इनका लाभ पहुंचा सकें।उन्होंने आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि जल उपलब्धता के अनुसार फसल चयन करना चाहिए। वैज्ञानिक विधियों से खेती कर हम आने वाली पीढ़ी को बेहतर भविष्य दे सकते हैं। अच्छी शिक्षा और वैज्ञानिक सोच से ही कृषि क्षेत्र में समृद्धि लाई जा सकती है। इस कार्यक्रम में “विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन” की भी जानकारी दी गई।कार्यक्रम में केंद्रीय भू-जल बोर्ड रायपुर से भू-गर्भ वैज्ञानिक श्री बी अभिषेक व श्री साईं प्रसन्ना पहुचे थे। जिन्होने जिले से उपस्थित सरपंच, उपसरपंच व अन्य जनप्रतिनिधियों के समक्ष जल संचय को लेकर जागरूकता का प्रचार प्रसार किया। उन्होने “डेटा आधारित जलभृत प्रबंधन योजना अंतर्गत जल प्रबंधन से लाभकारी खेती” विषय पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अनियमित वर्षा, गिरता भूजल स्तर और बढ़ती सिंचाई मांग के कारण पारंपरिक जल प्रबंधन पद्धतियां अब पर्याप्त नहीं रह गई हैं। ऐसे में डाटा ड्रिवन वाटर प्लानिंग सतत कृषि के लिए प्रभावी समाधान है। उन्होंने चेक डैम, परकोलेशन टैंक, फार्म पॉन्ड, माइक्रो इरिगेशन (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर), फसल विविधीकरण तथा रिचार्ज संरचनाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही वैज्ञानिको द्वारा भूमिगत जल दोहन के संबध मे जानकारी देते हुए बताया कि भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए जल संरक्षण क्यों आवश्यक है। उन्होने उपस्थितजनों को वर्षा जल संचय के तरीको के संबंध मे विस्तार पूर्वक जानकरी दी गई और जिले से आए हुए जनप्रतिनिधियों के सवाल व समस्याओं का वैज्ञानिक पद्धति से निदान बताया गया। इसके साथ ही उन्होने जल वृत प्रबंधंन एवं वाटर बजटिंग को लेकर विस्तृत चर्चा की।कलेक्टर एस जयवर्धन ने कहा कि समाज के निचले स्तर तक जल संरक्षण एवं जल संचयन के उपायों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने जल खपत कम करने और संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सभी को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों में संचालित योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग आवश्यक है। सरपंचों के सहयोग से आंगनबाड़ी, स्कूल, स्वास्थ्य विभाग आदि की सेवाओं और बेहतर किया जा सकता है। बेहतर सेवा वितरण के लिए आपसी समन्वय बेहद जरूरी है।इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर ने कानून व्यवस्था, साइबर अपराध एवं सड़क सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। लोग लालच या झांसे में आकर अपनी गोपनीय जानकारी साझा कर देते हैं। जिससे उनके बैंक खातों से राशि निकाली जा रही है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे ग्रामीणों को इस प्रकार की ठगी से बचने के लिए जागरूक करें। उन्होंने नशामुक्ति अभियान, अवैध मादक पदार्थों के विरुद्ध कार्रवाई में सहयोग तथा हेलमेट पहनने के महत्व पर भी जोर दिया। किसी भी अपराध की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 9575770004 पर देने की अपील की गई, जहां शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाता है।कार्यक्रम के अंत में वीबी राम जी के महत्वपूर्ण बिंदुओ के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। “बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़” बनाने के लिए सभी उपस्थितजनों को शपथ दिलाई गई। इसके अलावा कार्यक्रम में सभी उपस्थितजनों को कृषि, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, स्वास्थ्य, वन, विद्युत, महिला एवं बाल विकास, उद्यान, आदिवासी विकास तथा मनरेगा के अधिकारियों द्वारा योजनाओं की जानकारी विस्तार से दी गई।कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती रेखा राजवाड़े, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती स्वाति संत सिंह, जिला पंचायत सदस्यगण, जिला अध्यक्ष सरपंचगण अध्यक्ष, सरपंचगण, उपसरपंचगण, श्री शशिकांत गर्ग, श्री संदीप अग्रवाल, श्री अजय अग्रवाल, जनप्रतिनिधिगण, जिला पंचायत सीईओ श्री विजेंद्र सिंह पाटले, जिला स्तरीय अधिकारी इत्यादि उपस्थित थे।
- रायपुर । बकावण्ड ब्लॉक के ग्राम जामगुड़ा (धनपुर) में रहने वाले महेश भारती के घर जब बेटी रंजना का जन्म हुआ, तो खुशियों के साथ-साथ एक गहरी चिंता ने भी दस्तक दी। मासूम रंजना जन्मजात क्लेफ्ट लिप (कटे होंठ) की समस्या से ग्रसित थी। जैसे-जैसे रंजना बड़ी हो रही थी, माता-पिता के मन में अपनी बेटी के भविष्य, उसकी पढ़ाई और समाज में उसे मिलने वाली स्वीकार्यता को लेकर डर गहराता जा रहा था। सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक तंगी थी। एक साधारण परिवार के लिए निजी अस्पतालों में ऑपरेशन का भारी-भरकम खर्च उठा पाना असंभव सा था, जिससे माता-पिता स्वयं को असहाय महसूस कर रहे थे।उनकी इस मायूसी के बीच उम्मीद की पहली किरण 19 जून 2025 को तब जगी, जब चिरायु दल बकावण्ड की टीम आँगनबाड़ी केंद्र पहुँची। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान टीम ने रंजना की स्थिति को पहचाना और माता-पिता को ढांढस बंधाते हुए उसे जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र रेफर किया। इसके बाद की राह जिला स्वास्थ्य समिति के सहयोग से आसान होती गई। 06 नवंबर 2025 को बच्ची को रायपुर के मेडिसाईन अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ विशेषज्ञों ने रंजना का सफल ऑपरेशन किया।सबसे बड़ी राहत की बात यह रही कि जाँच, ऑपरेशन और अस्पताल में रहने का समस्त खर्च शासन द्वारा वहन किया गया, जिससे महेश भारती का परिवार आर्थिक बोझ से मुक्त रहा। 13 फरवरी को जब स्वास्थ्य विभाग की टीम फॉलो-अप के लिए पहुँची, तो रंजना को पूरी तरह स्वस्थ पाया गया। बेटी के चेहरे की बनावट में आए इस सुखद बदलाव और उसकी खिलखिलाती मुस्कान ने माता-पिता के सालों पुराने डर को खत्म कर दिया है। शासन की इस कल्याणकारी योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए परिजनों ने बताया कि अब वे अपनी बेटी के सुनहरे और सामान्य भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।
- -प्रधानमंत्री आवास योजना से बना आत्मनिर्भररायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग अंतर्गत जिला कोंडागांव के ग्राम पंचायत बड़े कनेरा निवासी श्री चमन लाल पवार का परिवार आज शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी रहा है। कभी कच्चे मकान में रहने वाला उनका परिवार अब पक्के, सुरक्षित एवं सौर ऊर्जा से रोशन घर में निवास कर रहा है।यह उपलब्धि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुसार शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है। जिला प्रशासन के सतत मॉनिटरिंग एवं जागरूकता के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से पहुँचाया जा रहा है। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण श्री पवार वर्षों तक कच्चे मकान में रहने को मजबूर थे। बरसात में छत से पानी टपकना और दीवारों का कमजोर होना आम समस्या थी। प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण) के अंतर्गत आवास की स्वीकृति प्राप्त होने के साथ उन्हें आवास निर्माण में मनरेगा के अंतर्गत 95 मानव दिवस का भी लाभ प्राप्त हुआ, जिससे निर्माण कार्य में आर्थिक संबल मिला और मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित हुआ। आज उनका घर सुरक्षित, स्वच्छ और सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त है।श्री चमन लाल पवार को पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी उस समय प्राप्त हुई जब ग्राम पंचायत में आए बिजली विभाग के कर्मचारियों द्वारा ग्रामीणों को प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी दी गई। कर्मचारियों ने सोलर रूफटॉप योजना, शासकीय अनुदान एवं आवेदन प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। जानकारी मिलने के बाद श्री पवार ने योजना के तहत आवेदन किया और अपने नव-निर्मित आवास की छत पर 3 किलोवाट का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कराया। इस हेतु उन्हें 1 लाख 8 हजार रुपये का शासकीय अनुदान प्राप्त हुआ। सोलर प्लांट स्थापित होने से अब उनके घर में नियमित एवं पर्याप्त बिजली उपलब्ध है। घर में रूफटॉप सोलर लगने के बाद बिजली बिल में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे मासिक बचत बढ़ी है। इस बचत का अब वे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य पारिवारिक आवश्यकताओं में उपयोग कर रहे हैं।चमन लाल के परिवार को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्शन प्राप्त हुआ, जिससे अब उनका परिवार धुएँ से मुक्त रसोई में खाना बना रहा है। वहीं, नल-जल योजना के तहत घर में नल कनेक्शन मिलने से स्वच्छ पेयजल की सुविधा सुनिश्चित हुई है। इससे परिवार की दिनचर्या सरल हुई है और स्वास्थ्य सुरक्षा भी मजबूत हुई है l प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, मनरेगा, उज्ज्वला योजना, नल-जल योजना एवं पीएम सूर्य घर योजना का समन्वित लाभ श्री चमन लाल पवार के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लेकर आया है। उनका घर अब पक्का, स्वच्छ, सुरक्षित और सौर ऊर्जा से रोशन हो रहा है।
- -राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाएं हो रहीं हैं आत्मनिर्भररायपुर । सामाजिक परिवेश में केवल गृहिणी की भूमिका तक सीमित रहने वाली महिलाएं अब अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से सफल व्यवसायी के रूप में पहचान स्थापित कर रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से महिलाओं को न केवल सामूहिक मंच मिला है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह भी मिली है। छत्तीसगढ के कोरिया जिले के विकासखंड सोनहत अंतर्गत ग्राम पंचायत कटगोड़ी की श्रीमती रेणुबाला जायसवाल आज इसी बदलाव की मिसाल बन चुकी हैं। रेणुबाला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं और बाद में सत्यम महिला स्व-सहायता समूह में अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। आर्थिक स्थिति सुधारने के उद्देश्य से उन्होंने समूह के माध्यम से बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया और कपड़ा दुकान का व्यवसाय प्रारंभ किया। इस पहल से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वे आत्मनिर्भर बनीं।रेणुबाला ने बताया कि शुरुआत में वे समूह की सदस्य के रूप में छोटे लेनदेन से जुड़ी रहीं। बाद में समूह को आरएफ राशि तथा सीआईएफ के रूप में 60 हजार रुपये प्राप्त हुए। सफल संचालन के बाद बैंक से 3 लाख रुपये का ऋण लेकर उन्होंने कपड़ा व्यवसाय को विस्तार दिया। पहले उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 70 हजार रुपये थी, जो अब बढ़कर 2 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।आर्थिक रूप से सशक्त होने के बाद उनके सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव आया है। पहले वे केवल गृहिणी के रूप में जिम्मेदारी निभाती थीं, लेकिन अब परिवार के हर महत्वपूर्ण निर्णय में उनकी सक्रिय भागीदारी होती है। वे परिवार के सदस्यों के साथ आसपास के हाट-बाजारों में भी कपड़े का व्यवसाय कर रही हैं। रेणुबाला अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
- -विभिन्न रंगों और आकर्षक पैकेजिंग के साथ समूह द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल-हर्बल गुलाल से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदमरायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ी कबीरधाम ज़िले की महिला स्व-सहायता समूह महिला सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। जनपद पंचायत बोडला के ग्राम राजा नवागांव की जय गंगा मैया स्व-सहायता समूह से जुड़ी दीदियों ने रंगोत्सव त्योहार होली के लिए हर्बल गुलाल का निर्माण किया है। महिला समूह ने हर्बल गुलाल के व्यवसाय से जुड़कर आजीविका के नए रास्ते खोले है। इस गतिविधि में 10 महिलाओं की प्रत्यक्ष भागीदारी है, जो उनके आय का अच्छा स्रोत है। लाल, गुलाबी, पीले सहित अन्य रंगों और प्रकृति खुशबू से भरपूर हर्बल गुलाल बाजार में आने के लिए उपलब्ध है।कलेक्टर कबीरधाम श्री गोपाल वर्मा ने बताया कि प्रत्येक वर्ष होली के अवसर पर जिले की विभिन्न महिला समूह द्वारा हर्बल गुलाल का निर्माण किया जाता है। कलेक्टोरेट, सभी जनपद पंचायत कार्यालय एवं अन्य स्थानों पर उनके द्वारा स्टॉल लगाकर हर्बल गुलाल की बिक्री की जाती है। समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक होने के साथ-साथ बाजार में मिलने वाले अन्य रंगों की तुलना में सस्ता होता है। हर्बल गुलाल की पैकेजिंग बहुत आकर्षक है और यह उपहार देने के भी बहुत अच्छा है। हर्बल गुलाल अनेक रंगो के साथ अलग-अलग मात्रा में पैकेजिंग सहित उपलब्ध है। गतवर्ष भी हमने देखा है कि समूह की दीदियों द्वारा बनाए गए हर्बल गुलाब को क्षेत्रवासियों ने बहुत पसंद किया है और इस व्यवसाय से जुड़कर हमारी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर हो रही है।जिला पंचायत सीईओ ने बताया कि प्रत्येक वर्ष बहुत से समूह इसका निर्माण करते है। प्रत्येक समूह को इस व्यवसाय द्वारा 50 से 60 हजार रुपए का लाभ हो जाता है। हर्बल गुलाल की अच्छी गुणवत्ता और आकर्षक पैकिंग सभी को पसंद आती है। योजना से जुड़े मैदानी कर्मचारियों द्वारा समूह को मौसमी व्यवसाय करने के लिए प्रेरित करते हुए हर्बल गुलाल का निर्माण करने प्रोत्साहित किया जाता है। इसके निर्माण में उपयोग होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता के लिए समूह को सहायता प्रदान की जाती है।हर्बल गुलाल प्राकृतिक सामग्री जैसे फूल-पत्तियों आदि से बनाए जाते हैं और त्वचा के लिए यह पूरी तरह से सुरक्षित होते हैं। इसके साथ हर्बल गुलाल के और भी कई फायदे हैं। हर्बल गुलाल में प्राकृतिक रंग होता हैं और इसके निर्माण में कोई अतिरिक्त मिलावट नही की जाती। हर्बल गुलाल पर्यावरण अनुकूल होता हैं। अन्य रंगों की तरह इसे छुड़ाने में मेहनत नहीं लगती बल्कि पानी द्वारा आसानी से धो कर साफ किया जा सकता है। इससे पानी की बचत भी होती है। हर्बल गुलाल में हानिकारक रसायन नहीं होते और यह त्वाचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है। हर्बल गुलाल का निर्माण प्राकृतिक सामग्रियों से होने के कारण शरीर पर एलर्जी नहीं होती। हर्बल गुलाल में प्राकृतिक सुगंध होता है। खुशबू के लिए कोई केमिकल का उपयोग नहीं होने के कारण यह पूरा तरह सुरक्षित है।




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