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- 0- शिविर में लोगो को आयुष्मान कार्ड पंजीयन की दी जा रही है सुविधा0- 15 जुलाई को गुरूर विकासखण्ड के ग्राम बड़भूम एवं डौण्डी विकासखण्ड के मंगलतराई में आयोजित होगा शिविरबालोद. केन्द्र सरकार के द्वारा आदिवासी क्षेत्रों मंे सेवाओं और अन्य बुनियादी ढाँचों को परिपूर्णता प्रदान करने तथा उनके व्यक्तिगत अधिकारों से परिपूर्ण करने के उद्देश्य से जिले के विभिन्न ग्रामों में धरती आबा जनभागीदारी अभियान के अंतर्गत लाभ संतृप्ति शिविर का आयोजन किया जा रहा है। जिसके अंतर्गत सोमवार को जिले के गुरूर विकासखण्ड के ग्राम कोचवाही एवं डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम भर्रीटोला 36 में आयोजित लाभ संतृप्ति शिविर ग्रामीणों एवं हितग्राहियों के लिए सौगातों भरा रहा। आज आयोजित शिविर में आदिवासी वर्ग के हितग्राहियों को नया आयुष्मान कार्ड, जनधन खाता, आय, जाति एवं किसान सम्मान निधि योजना आदि की सौगात मिलने के अलावा इन वर्गों के हितग्राहियों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया गया।उल्लेखनीय है कि गुरूर विकासखण्ड के ग्राम कोचवाही में आयोजित लाभ संतृप्ति शिविर में 10 हितग्राहियों का आयुष्मान कार्ड, 17 हितग्राहियों का आय एवं जाति प्रमाण पत्र से लाभान्वित किया गया। इसी तरह डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम भर्रीटोला 36 में आयोजित लाभ संतृप्ति शिविर में 38 हितग्राहियोें का आयुष्मान कार्ड योजना से लाभान्वित किया गया। आज आयोजित शिविर में पहुँचे लोगों का सिकलिन टेस्ट करने के अलावा ग्रामीणों एवं हितग्राहियों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें दवाइयां भी वितरित की गई। उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन द्वारा गुरूर एवं डौण्डी विकासखण्ड के विभिन्न ग्रामों में शिविर आयोजन हेतु जारी की गई तिथि के अनुसार 15 जुलाई को गुरूर विकासखण्ड के ग्राम बड़भूम एवं डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम मंगलतराई में शिविर का आयोजन किया गया है।
- 0- बालोद जिले में वनांचल के अनेक ग्रामों में कृषकों द्वारा की जा रही है कोदो की खेतीबालोद. कम दाम में अधिक लाभ प्राप्त होने तथा कोदो फसल की महत्ता एवं उपयोगिता के मद्देनजर बालोद जिले के कृषकांे में भी कोदो की खेती के प्रति रूझान बढ़ता जा रहा है। कम खर्च एवं मेहनत से समुचित लाभ मिलने के अलावा कोदो फसल की बढ़ती मांग के कारण जिले के गुरूर विकासखण्ड के वनग्राम बड़भूम, पेटेचुवा, दुग्गा बाहरा, कर्रेझर आदि गांवों के अनेक किसानों द्वारा कोदो की खेती की जा रही है। कोदो की खेती से हो रहे लाभ एवं इसकी उपयोगिता के कारण गुरूर विकासखण्ड के वनग्राम दुग्गा बाहरा के कृषक श्री धनीराम के द्वारा खरीफ वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (रफ्तार) के सहयोग से मिले 03 एकड़ भूमि में कोदो की खेती की जा रही है। कृषि विभाग के द्वारा भी किसानों को कोदो की खेती करने के लिए प्रेरित करने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत किसानों को धान के बदले अन्य फसल के लिए पे्ररित करने हेतु प्रति एकड़ 11 हजार रुपये का अनुदान भी दिया जा रहा है। किसान धनीराम के द्वारा पूर्व में खरीफ सीजन के दौरान केवल धान की खेती की जाती थी। किंतु कोदो की खेती से मिल रहे लाभ इसकी उपयोगिता एवं कृषि विभाग के द्वारा किए गए समुचित प्रचार-प्रसार के फलस्वरूप किसान धनीराम द्वारा वर्तमान में 03 एकड़ भूमि पर कोदो की खेती की जा रही है। उल्लेखनीय है कि धान फसल की अपेक्षा कोदो की खेती में दवाई एवं खाद की कम आवश्यकता होती है। इसके साथ ही कोदो की खेती के लिए किसान उच्चहन भूमि का उपयोग कर कम लागत में अधिक लाभ ले सकते है। इसके अलावा कोदो खाने के अनेक फायदे भी है। भोजन में कोदो का अनाज लेने से वजन कम करने, हृदय रोग एवं मधुमेह को भी नियंत्रित करने में अत्यंत कारगर साबित होता है। इसके अलावा कोदो एक पौष्टिक अनाज है जिसमें फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक विटामिन व खनिज भरपूर मात्रा में पाए जाते है।
- बालोद, कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने सोमवार को अधिकारियों के साथ रविवार, 20 जुलाई को संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में आयोजित होने वाली वृहद वृक्षारोपण सह वनमहोत्सव कार्यक्रम के तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने संयुक्त जिला कार्यालय परिसर स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने पौधरोपण हेतु निर्धारित स्थल के अलावा वन महोत्सव कार्यक्रम के लिए मंच निर्माण हेतु निर्धारित स्थल का निरीक्षण किया। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने अधिकारियों को आयोजन के दौरान आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु दिशा-निर्देश भी दिए। इस मौके पर वनमण्डलाधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल, एसडीएम बालोद श्री नूतन कंवर, डिप्टी कलेक्टर श्रीमती प्राची ठाकुर सहित विभिन्न विभाग के अधिकारीगण उपस्थित थे।
- बिलासपुर. एकीकृत बाल विकास परियोजना मस्तूरी अंतर्गत ग्राम मनवा के आंगनबाड़ी केंद्र मनवार 2 में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पद की पूर्ति हेतु आवेदन मंगाए गए थे। प्राप्त आवेदनों की जांच कर अनंतिम सूची जारी कर दी गई है, जिसे परियोजना कार्यालय एवं जनपद पंचायत मस्तूरी के सूचना पटल में चस्पा किया गया है। जारी सूची के संबंध में दावा-आपत्ति 21 जुलाई तक प्रस्तुत किये जा सकते है। निर्धारित समय के पश्चात कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- 0- एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन की अंतिम तिथि 30 अगस्तबिलासपुर, आगामी धान खरीदी खरीफ 2025-26 के लिए राज्य शासन ने एग्रीस्टेक प्रोजेक्ट के अंतर्गत एग्रीस्टेक पोर्टल में फार्मर आईडी किसान पंजीयन को सभी किसानों के लिए अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत प्रदेश भर के सभी किसानों को एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीकृत किया जाएगा, जिससे कि समर्थन मूल्य पर धान विक्रय पारदर्शिता के साथ आसानी से कर पायेंगे। जिले में एग्रीस्टेक पोर्टल पर फार्मर आईडी किसान पंजीयन की अंतिम तिथि 30 अगस्त 2025 निर्धारित की गई है, तहसीलवार फार्मर आईडी पंजीयन बेलगहना 3939, बेलतरा 5852, बिलासपुर 4226, बिल्हा 6822, बोदरी 4326, कोटा 7396, मस्तुरी 8289, पचपेड़ी 11121, रतनपुर 4898, सकरी 10195, सीपत 6408, तखतपुर 13511 बिलासपुर जिले के कुल 86983 किसानों ने फॉर्मर आईडी बनवा लिए हैं।जबकी पूर्व वर्ष 2024-25 में धान विक्रय के लिए तहसीलवार बेलगहना 5987, बेलतरा 10175, बिलासपुर 8929, बिल्हा 11435, बोदरी 7014, कोटा 9550, मस्तुरी 18224, पचपेड़ी 13026, रतनपुर 6726, सकरी 16043, सीपत 10111, तखतपुर 20553 बिलासपुर जिले के कुल 137773 किसानों ने पंजीयन कराया था। फसल बीमा कराने हेतु एग्रीस्टेक पोर्टल में फार्मर आईडी किसान पंजीयन अनिवार्य किया गया है तथा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की आगामी किस्त का हस्तांतरण फार्मर आईडी (किसान कार्ड) के आधार पर किये जाने के निर्देश पीएम किसान सम्मान निधी योजना में हैं। जिले के 155366 किसानों का पंजीयन है, इसमें से अब तक केवल 67861 (43.68ः) किसानों ने एग्रीस्टेक पोर्टल में फार्मर आईडी किसान पंजीयन कराया है। शेष 87505 किसान यदि एग्रीस्टेक पोर्टल में फार्मर आईडी नहीं बनवाते हैं तो पीएम किसान सम्मान निधी योजना के किस्त से वंचित हो सकते हैं। एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसान स्वयं पंजीयन कर सकते हैं अथवा अपने क्षेत्र के सहकारी समिति अथवा निकटतम लोक सेवा केन्द्र (ब्ैब्) मंे जाकर पंजीयन करा सकते हैं। फॉर्मर आईडी बनवाने के लिए किसान को अपने सभी कृषि भूमि का बी-1, ऋण पुस्तिका, अधार कार्ड और आधार से लिंक मोबाईल नम्बर (जिसमें आधार सत्यापन ओटीपी प्राप्त होती हो) की आवश्यकता होगी।किसान को मिलेगा 11 अंकों की विषिष्ट पहचानपंजीयन पश्चात् किसानों कोे ’’आधार’’ के जैसे 11 अंकों की एक यूनिक फॉर्मर आईडी (विशिष्ट किसान आईडी) मिलेगी, जिससे किसान डिजिटल रूप से अपनी पहचान प्रमाणित कर सकंेगे।एग्रीस्टेक, भारत सरकार द्वारा विकसित एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य भारतीय कृषि क्षेत्र को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना है। यह किसानों के लिए एक व्यापक डेटाबेस बनाने पर केंद्रित है, जिसमें उनकी पहचान, भूमि रिकॉर्ड, वित्तीय जानकारी, फसल की जानकारी और बीमा इतिहास शामिल है। एग्रीस्टेक पोर्टल में किसानों को प्राथमिक सहकारी समितियों तथा कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के माध्यम से पंजीकरण करने की सुविधा प्रदान करता है। एग्रीस्टेक पोर्टल, छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है, जो उन्हें डिजिटल रूप से सशक्त बनाने और उनकी आय बढ़ाने में मदद करेगी।एग्रीस्टेक पोर्टल के माध्यम से किया गया फार्मर आईडी पंजीयन ई-केवाईसी युक्त होता है, जिससे दोहराव की संभावना समाप्त हो जाती है और किसानों की वास्तविक पहचान सुनिश्चित होती है। राज्य शासन द्वारा यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि कृषकों को शासकीय योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके। इसके लिए राज्य शासन द्वारा एकीकृत किसान पोर्टल विकसित किया गया है, सभी प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को निर्देशित किया गया है कि वे एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से किसानों का नवीन पंजीयन एवं फसल रकबे का संशोधन कार्य प्राथमिकता के आधार पर संपादित करें। जिसमें पंजीयन की प्रक्रिया प्रतिवर्ष । 01जुलाई से 31अक्टूबर तक संचालित की जाती है। इस वर्ष भी खरीफ मौसम के लिए यह प्रक्रिया निर्धारित अवधि में पूर्ण की जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस बार कृषक पंजीयन के लिए कृषि विभाग, खाद्य विभाग और राजस्व विभाग के बीच इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को सुदृढ़ किया गया है। खाद्य विभाग ने धान खरीदी पोर्टल पर किसानों का डाटा एग्रीस्टेक की फार्मर रजिस्ट्री से एपीआई के माध्यम से लिया जाएगा, जो पूरी तरह से ई-केवाईसी आधारित होगा।इसी के साथ राजस्व विभाग ने संधारित भुइयाँ पोर्टल में दर्ज किसानों की भूमि जानकारी और गिरदावरी रिकॉर्ड को भी आधार सीडिंग के माध्यम से एकीकृत किया जा रहा है। वर्तमान में 85 प्रतिशत भूमि रिकॉर्ड का आधार सीडिंग हो चुका है। शेष कार्य को प्राथमिकता के साथ जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि खरीदी प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न उत्पन्न हो। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि वे कृषकों के पंजीयन और आधार सीडिंग के कार्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए तय समय-सीमा में पूर्ण करें, जिससे जिले के सभी पात्र किसान समय पर पंजीकृत होकर समर्थन मूल्य पर धान विक्रय कर सकें। इस नई व्यवस्था से पारदर्शिता सुनिश्चित होगी, दोहराव रहित पंजीयन संभव होगा और किसानों को समय पर योजनाओं का लाभ प्राप्त होगा।एग्रीस्टेक के मुख्य उद्देश्य - किसानों का डेटाबेस, किसानों की पहचान, भूमि रिकॉर्ड, वित्तीय जानकारी, फसल की जानकारी और बीमा इतिहास को एक ही स्थान पर एकत्रित करना।डिजिटल सेवाएंः- किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करना।वित्तीय समावेशन- किसानों को किफायती ऋण और अन्य वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करना। पूर्व चेतावनी प्रणाली- कीटों के हमले, सूखा, बाढ़ आदि जैसी आपदाओं के लिए स्थानीयकृत और अनुकूलित पूर्व चेतावनी प्रणालियाँ प्रदान करना। निजी भागीदारी- निजी क्षेत्र की भागीदारी को सक्षम करना, जिससे किसानों के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध हो सकें। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने जिले के सभी किसानों से अपील है कि 30 अगस्त 2025 तक एग्री स्टेक पोर्टल में पंजीयन कराकर डिजिटल फॉर्मर आईडी (किसान कार्ड) बनवाएं और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लें।
- 0- प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि मिलेगी0- कृषि विभाग ने जारी किए विस्तृत दिशा-निर्देशबिलासपुर, राज्य सरकार की कृषक उन्नति योजना का फायदा धान के अलावा दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य फसल, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास फसल लेने वाले किसानों को भी मिलेगा। उन्हें प्रति एकड़ 10 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी। राज्य शासन के कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग ने योजना के क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए है।कृषि विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश के अनुसार राज्य का अधिकांश क्षेत्र वर्षा आधारित होने से मौसमीय प्रतिकूलता एवं कृषि आदान लागत में वृद्वि के कारण कृषि आय में अनिश्चितता बनी रहती है। इसके फलस्वरूप कृषक फसल उत्पादन के लिए आवश्यक आदान जैसे उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक, यांत्रिकीकरण एवं नवीन कृषि तकनीकी में पर्याप्त निवेश नहीं कर पाते है। राज्य सरकार द्वारा कृषि में पर्याप्त निवेश एवं काश्त लागत मंे राहत देने के लिये कृषक उन्नति योजना प्रारंभ की गई गई है। फसल विविधिकरण को प्रोत्साहन देने, दलहन तिलहन फसलों के क्षेत्र विस्तार तथा इनके उत्पादन में आत्म निर्भरता के लक्ष्य के साथ चिन्हित अन्य फसलों पर आदान सहायता राशि दिये जाने का निर्णय लिया गया है।कृषक उन्नति योजना का लाभ केवल उन्ही कृषकों को मिलेगा जिन्होने एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन कराया है। विगत खरीफ मौसम में एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीकृत ऐसे कृषक जिन्होने धान फसल लगाये हों तथा प्रदेश की सहकारी समितियों में समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया हों, धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल हेतु किसान पोर्टल में पंजीकृत किसानों का पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राशि रूपये 11000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जावेगी। खरीफ मौसम में दलहन, तिलहन, मक्का, लघु धान्य फसल, कोदो, कुटकी, रागी एवं कपास फसल लेने वाले किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि उपरान्त मान्य रकबे पर राशि 10000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जावेगी। योजना के दिशा-निर्देश अनुसार विधिक व्यक्तियों जैसे ट्रस्ट, मण्डल, प्राईवेट लिमिटेड, समिति, केन्द्र एवं राज्य शासन के संस्था, महाविद्यालय आदि संस्थाओं को योजना से लाभ लेने की पात्रता नहीं होगी।जो कृषक प्रमाणित धान बीज उत्पादन कार्यक्रम लेते हैं, और सामान्य धान भी सहकारी समितियों में विक्रय करते है, उनके द्वारा कुल विक्रय की जाने वाली धान की मात्रा, उनके कुल धारित रकबे की सीमा से अधिक नही होना चाहिये। इसे छ.ग. राज्य सहकारी विपणन संघ मर्या. एवं छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमि. द्वारा आपसी समन्वय से सुनिश्चित किया जाएगा। कृषकों को आदान सहायता राशि का भुगतान कृषि भूमि सिलिंग कानून के प्रावधानों के अध्याधीन किया जाएगा। कृषकों को आदान सहायता राशि कृषकों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से की जावेगी । खरीफ 2025 में प्रदेश के किसानों से उपार्जित धान की मात्रा पर धान (कॉमन) पर राशि रू. 731 प्रति क्वि. की दर से अधिकतम राशि रू. 15351 प्रति एकड़ तथा धान (ग्रेड-ए) पर राशि रू. 711 प्रति क्वि. की दर से अधिकतक राशि रू. 14931 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान किया जाएगा।बीज उत्पादक कृषकों द्वारा छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड को विक्रय किये गये धान बीज पर निर्धारित आदान सहायता राशि की कृषकवार मांग का विवरण बीज निगम द्वारा संचालक कृषि को प्रेषित किया जाएगा। संचालक कृषि द्वारा मांग अनुसार राशि छ.ग. राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड को उपलब्ध कराई जाएगी। उप संचालक कृषि श्री पी.डी. हथेश्वर ने बताया कि जिले में धान के अलावा अन्य फसलों में खेती लिए अरहर, कोदो, उड़द, आदि फसलों के बीजों का भंडारण समितियों में किया गया है। योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा कृषि विभाग के विकास खण्डों में स्थित कार्यालयों से जानकारी प्राप्त कर सकते है।
- बिलासपुर. समावेशी शिक्षा अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के चिन्हांकन, आवश्यक उपकरण एवं उपचार का आकंलन एवं प्रमाणीकरण के लिए 21 जुलाई से 29 जुलाई तक शिविर का आयोजन किया जा रहा है। विकासखण्ड स्तरीय शिविर के तहत विकासखण्ड स्त्रोत केंद्र मस्तूरी में 21 जुलाई, कोटा में 22 जुलाई, तखतपुर में 23 जुलाई को शिविर का आयोजन किया जाएगा।इसी प्रकार बिल्हा ग्रामीण एवं शहरी के लिए 25 जुलाई को पंडित देवकीनंदन दीक्षित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलासपुर में एवं समस्त विकासखण्ड हेतु 29 जुलाई को पंडित देवकीनंदन दीक्षित कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिलासपुर में जिला स्तरीय मेगा शिविर का आयोजन किया जाएगा। उक्त शिविर निर्धारित तिथियों को सवेेरे 9 बजे से प्रारंभ होगी। शिविरों में दिव्यांगता प्रमाण पत्र, नवीनीकरण एवं यूडीआईडी कार्ड जारी किये जायेंगे।
- भिलाई नगर। महापौर नीरज पाल एवं आयुक्त राजीव पांडेय के नेतृत्व में नगर पालिक निगम भिलाई द्वारा एक नई पहल की गई है, जो निगम क्षेत्रांतर्गत निवासरत लोगो के लिए स्वच्छता के क्षेत्र में अनूठा है। रिवॉल्विंग (घूमती हुई) ट्राफी के तहत भिलाई शहर के श्रेष्ठ वार्ड, श्रेष्ठ स्कूल, श्रेष्ठ महाविद्यालयों हेतु प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार दिया जाएगा। घूमती हुई (रिवालविंग) ट्राफी प्रतिमाह जो श्रेष्ठ रहेगा, उनको पूर्व विजेता से प्राप्त होगा। जिस प्रकार वार्डो में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, पृथक्करण कचरा संग्रहण, मैनुअल/मेकेनिकल स्वीपिंग, नाला सफाई, बैकलेन सफाई, जी.व्ही.पी. पांईट, सार्वजनिक/सामुदायिक शौचालय, पार्क स्वच्छता, निदान 1100, स्वास्थ्य जांच शिविर, सामुदायिक भागीदारी, सीवर निराकरण, पेयजल लाईन एवं मुख्य मार्ग पर पैच रिपेयर में प्रथम विजेता होगा, उस वार्ड के पार्षद को रिवॉल्विंग ट्राफी दिया जाएगा।इसी प्रकार अन्य वार्डो में अलग-अलग विजेता होने पर उस वार्ड के पार्षदो को पूर्व विजेता पार्षद से विजेता वार्ड पार्षद को ट्राफी प्रदान किया जाएगा। यह ट्राफी प्रतिमाह अलग-अलग विजेताओं के पास से होकर गुजरता रहेगा। इसके लिए एक समिति का गठन भी किया गया है। स्वच्छता के क्षेत्र में अलग-अलग कार्यो के लिए अंक का निर्धारण किया गया है, गठित समिति द्वारा अंको की गणना कर प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार घोषित किया जाएगा। उसके आधार पर ही रिवॉल्विंग ट्राफी प्रदान किया जाएगा। साथ ही स्वच्छता के क्षेत्र में अच्छे कार्य करने वाले स्वच्छता प्रहरी के लिए मेडल भी प्रदान किया जाएगा। इस ट्रॉफी के लिए कोटक महिंद्रा बैंक का विशेष योगदान है । कोटक महिंद्रा बैंक की इस प्रयास से शहर वासियों को स्वच्छता का नया सौगात मिलेगा। नगर निगम में आयुक्त से चर्चा के दौरान प्रवीण उपाध्याय एवं कोटक महिंद्रा बैंक टीम के सदस्य शामिल रहे।
- 0- जुलाई को प्रातः 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक 12 वर्ष से कम आयु वर्ग के बच्चों का परीक्षण किया जाएगारायपुर.मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के निर्देशानुसार "सभी के लिए बेहतर स्वास्थ्य" अभियान के अंतर्गत रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के नेतृत्व में 18 जुलाई 2025 को जिला अस्पताल पंडरी में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए एक विशेष स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जा रहा है।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश चौधरी ने बताया कि इस शिविर का मुख्य उद्देश्य जिलेवासियों को थैलेसीमिया, इसकी रोकथाम और उपचार के विषय में जानकारी प्रदान करना है। शिविर में नि:शुल्क एच.एल.ए परीक्षण, विशेष चिकित्सा परामर्श एवं उपचार की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। रोगियों एवं उनके परिवारजनों को देखभाल व उपचार से संबंधित मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा।इस शिविर में जिला अस्पताल पंडरी के विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ-साथ फोर्टिस मेमोरियल इंस्टिट्यूट, गुरुग्राम के विशेषज्ञ डॉ. विकास दुआ (अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण विशेषज्ञ) और डॉ. परमिंदरपाल सिंह (रक्त विकार विशेषज्ञ एवं ऑन्कोलॉजिस्ट) तथा कॉस फाउंडेशन रायपुर की टीम भी उपस्थित रहेगी। जिले में थैलेसीमिया के लक्षणों वाले सभी मरीज इस नि:शुल्क शिविर का लाभ उठा सकते हैं। पंजीयन हेतु टोल-फ्री नंबर 0771-3519250 पर संपर्क किया जा सकता है।--
- रायपुर। कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने सोमवार को रेडक्रॉस सभाकक्ष में ई-ऑफिस प्रणाली का विधिवत शुभारंभ किया। डॉ. सिंह ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप ज़िले के सभी शासकीय कार्यालयों एवं विभागों की कार्यप्रणाली को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए ई-ऑफिस एक अहम कदम है।उन्होंने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली से न केवल दस्तावेजों की डिजिटल ट्रैकिंग और प्रसंस्करण आसान होगा, साथ ही इस पहल से शासकीय कार्यों में पारदर्शिता के साथ-साथ समयबद्धता और दक्षता सुनिश्चित होगी, कार्य प्रक्रिया में तेजी आएगी और कार्य निष्पादन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।ई-ऑफिस प्रणाली के सुचारू संचालन हेतु जिले में अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है, ताकि इस प्रणाली का गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। शासकीय कर्मचारी अपनी एनआईसी लॉगिन आईडी के माध्यम से वेबसाइट्स http:/eoffice-district.gov.in तथा https://access.nic.in के जरिए ई-ऑफिस प्रणाली में कार्य करेंगे।
- रायपुर. कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के पुनः उन्मुखीकरण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय में लागू स्नातक पाठ्यक्रमों में नई शिक्षा नीति की एक वर्ष की सफलता और आवश्यक सुधारों पर विचार-विमर्श करना था। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति एवं संभागायुक्त श्री महादेव कावरे ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति न केवल नए रोजगार के अवसर पैदा करेगी, बल्कि युवाओं को उनकी स्थानीय ज्ञान एवं परंपरा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कौशल और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर देगी, जिससे वे भविष्य में देश के विकास में सक्रिय योगदान दे सकें। उन्होंने कार्यशाला की पूर्ण सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं भी व्यक्त की।प्रथम तकनीकी सत्र में उच्च शिक्षा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) डॉ. डी.के. श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विभिन्न पहलुओं और बारीकियों को बताया। उन्होंने कहा कि यह नीति विभिन्न विषयों को एकीकृत कर एक विशाल ज्ञान पूल बनाने की प्रक्रिया पर केंद्रित है। एनईपी 2020 का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम को बदलना नहीं है, बल्कि छात्रों को बहु-विषयक शिक्षा प्रदान करना है ताकि वे विभिन्न क्षेत्रों के ज्ञान को आपस में जोड़ सकें। जिसमें छात्रों को अपनी रुचि और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार विषयों का चयन करने की स्वतंत्रता मिलती है।द्वितीय तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा के संयुक्त संचालक डॉ. जी.ए. घनश्याम ने भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ भारत दर्शन पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि एनईपी 2020 केवल आधुनिक शिक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान को भी छात्रों तक पहुंचाने का एक माध्यम है। डॉ. घनश्याम ने कहा कि यह नीति विद्यार्थियों को भारत के ज्ञान से अवगत कराने वाली है, जिससे वे अपनी जड़ों से जुड़ सकें और देश के गौरवशाली इतिहास तथा चिंतन परंपरा को समझ सकें। भारतीय ज्ञान परंपरा का समावेश छात्रों में नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय भावना को सुदृढ़ करेगा, जिससे वे जिम्मेदार नागरिक बन सकें।विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति सीधे तौर पर बाजार की मौजूदा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। एनईपी का लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं है, बल्कि छात्रों को ऐसे व्यावहारिक कौशल और ज्ञान से लैस करना है जो उन्हें स्नातक होते ही रोजगार के योग्य बना सके। श्री शर्मा ने कहा कि यह नीति छात्रों को विभिन्न उद्योगों में आवश्यक क्षमताओं को विकसित करने में मदद करेगी, जिससे वे बदलते बाजार में आसानी से समायोजित हो पाएंगे और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में भी सक्षम होंगे।विश्वविद्यालय के एनईपी 2020 के संयोजक श्री पंकज नयन पाण्डेय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने पिछले एक वर्ष में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एनईपी 2020 के तहत शुरू की गई पाठ्यक्रम संरचना और वैकल्पिक विषयों के चुनाव से छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार अध्ययन करने का अवसर मिला है।कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति संयोजक श्री पंकज नयन पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष श्री शैलेन्द्र खंडेलवाल, डॉ. नृपेंद्र कुमार शर्मा, डॉ. आशुतोष मांडवी, डॉ. राजेंद्र मोहंती, उप कुलसचिव श्री सौरभ शर्मा के साथ विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यगण, प्राध्यापकगण तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।विश्वविद्यालय परिसर में बिहान केन्टीन का शुभारंभविश्वविद्यालय परिसर में आज बिहान कैंटीन का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति एवं संभागायुक्त श्री महादेव कावरे ने किया। कैंटीन का संचालन जिला पंचायत, रायपुर के माध्यम से बिहान स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा है। इस अवसर पर कुलसचिव श्री सुनील कुमार शर्मा, सहायक कुलसचिव डॉ.देव सिंह पाटिल एवं कर्मचारी उपस्थित थे.
- रायपुर, प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में खरीफ 2025 के लिए कृषक उन्नति योजना के तहत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कृषि में निवेश बढ़ाने और किसानों की लागत में राहत देने के उद्देश्य से यह योजना प्रारंभ की गई है। राज्य सरकार ने फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए दलहन, तिलहन और अन्य वैकल्पिक फसलों के क्षेत्र विस्तार तथा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के साथ चिन्हित फसलों पर आदान सहायता राशि देने का निर्णय लिया है। योजना का लाभ उन्हीं किसानों को मिलेगा, जिन्होंने एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन कराया हो। विगत खरीफ मौसम में पोर्टल में पंजीकृत ऐसे किसान, जिन्होंने धान की खेती कर सहकारी समितियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान विक्रय किया है, वे इस योजना के पात्र होंगे।यदि वे इस बार धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलें (जैसे—दलहन, तिलहन आदि) लेते हैं, और पोर्टल पर पंजीयन तथा गिरदावरी में रकबे की पुष्टि हो जाती है, तो उन्हें ₹11,000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता दी जाएगी। वहीं, यदि किसान दलहन, तिलहन, कोदो, कुटकी, रागी अथवा कपास जैसी फसलें लेते हैं, तो ₹10,000 प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि मिलेगी—पंजीयन और गिरदावरी की पुष्टि के आधार पर।उप संचालक कृषि श्री सतीश अवस्थी ने बताया कि जिले में धान के अतिरिक्त वैकल्पिक फसलों जैसे अरहर, उड़द, कोदो आदि के बीजों का भंडारण जिले के सभी विकासखंड स्तरीय कृषि कार्यालयों में कर लिया गया है।योजना से संबंधित अधिक जानकारी के लिए किसान क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी या विकासखंड स्तरीय कृषि विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
- -डीएपी की कमी को पूरा करने एनपीके, एसएसपी और नैनो डीएपी का भरपूर स्टॉक-राज्य में 1 लाख 79 हजार बॉटल नैनो डीएपी भंडारित, निरंतर आपूर्ति जारीरायपुर / राज्य में रासायनिक उर्वरको कोई कमी नहीं हैं। खरीफ सीजन 2025 के लिए सभी प्रकार के रासायनिक उर्वरक सहकारी समितियों एवं नीजि विक्रय केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं। वैश्विक परिस्थिति के चलते डीएपी खाद के आयात में कमी को देखते हुए प्रदेश सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में अन्य रासायनिक उर्वरकों की भरपूर आपूर्ति एवं वितरण की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।राज्य में डीएपी की आपूर्ति में कमी से किसानों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा इसके विकल्प के रूप में 179000 बॉटल नैनो डीएपी, एनपीके उर्वरक का लक्ष्य से 25 हजार मेट्रिक टन अधिक तथा एसएसपी का निर्धारित लक्ष्य से 50 हजार मेट्रिक टन का अतिरिक्त भंडारण किया गया है। पोटाश के निर्धारित लक्ष्य 60 हजार मेट्रिक टन के विरूद्ध अब तक 77 हजार मेट्रिक टन से अधिक म्यूरेट ऑफ पोटाश का भंडारण किया गया है। नैनो डीएपी जो कि ठोस डीएपी के विकल्प के रूप में बीज/थरहा, जड़ उपचार एवं बोआई/रोपाई के पश्चात खड़ी फसल में छिड़काव के लिए उपयोगी है। नैनो डीएपी की निरंतर आपूर्ति राज्य में सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई है।चालू खरीफ सीजन के लिए डीएपी उर्वरक के निर्धारित 3.10 लाख मेट्रिक टन लक्ष्य के विरूद्ध अब तक 1 लाख 63 मेट्रिक टन से अधिक का भंडारण हो चुका है। डीएपी की आपूर्ति निरंतर जारी है। अभी जुलाई माह में 48 हजार मेट्रिक टन डीएपी उर्वरक की आपूर्ति राज्य को होगी। राज्य के सहकारी क्षेत्र में उर्वरकों का भंडारण प्राथमिकता के आधार पर कराया गया है। राज्य के सहकारी क्षेत्र में डीएपी उर्वरक की उपलब्धता राज्य की कुल उपलब्धता का 62 प्रतिशत है।कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक कुल 13.18 लाख मेट्रिक टन का भंडारण किया जा चुका है, जो गत वर्ष इसी अवधि में भंडारित 12.79 लाख मेट्रिक टन से लगभग 38 हजार मेट्रिक टन अधिक है। इस वर्ष एनपीके और एसएसपी का लक्षित मात्रा से क्रमशः 25,266 मेट्रिक टन एवं 71,363 मेट्रिक टन अधिक भंडारण किया गया है, जो डीएपी के विकल्प के रूप में उपयोग किया जा रहा है। राज्य में यूरिया 6 लाख मेट्रिक टन अधिक का भंडारण हुआ है। जुलाई एवं आगामी माह में यूरिया के शेष मात्रा की आपूर्ति होगी।यहां यह उल्लेखनीय है कि धान में यूरिया का उपयोग तीन बार किया जाता है। प्रथम बार बोआई/रोपाई के समय में, दूसरी बार कंसा निकलने के समय में बोआई/रोपाई से तीन चार सप्ताह बाद एवं तीसरी बार गभोट अवस्था में बोआई/रोपाई के 7 से 8 सप्ताह बाद, इस प्रकार यूरिया का सितम्बर माह के मध्य तक उपयोग किया जाता है। डीएपी उर्वरक का 1.63 लाख मेट्रिक टन भंडारण हुआ है। जुलाई माह के सप्लाई प्लान के अनुसार राज्य को 48 हजार 850 मेट्रिक टन डीएपी और मिलेगी।कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जुलाई माह में 25 हजार टन एनपीके की आपूर्ति संभावित है। एनपीके की अतिरिक्त आपूर्ति को मिलाकर कुल अतिरिक्त एनपीके 50 हजार 266 मेट्रिक टन से 22 हजार मेट्रिक टन डीएपी प्रतिपूर्ति होगी। इसी तरह एसएसपी की कुल अतिरिक्त आपूर्ति 1.47 लाख मेट्रिक टन से 50 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति होगी। इस प्रकार राज्य में एनपीके और एसएसपी के अतिरिक्त आपूर्ति से 72 हजार मेट्रिक टन डीएपी की प्रतिपूर्ति सुनिश्चित होगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि डीएपी खाद की कमी को लेकर किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके विकल्प के रूप में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा अन्य रासायनिक उर्वरक जैसे- नैनो डीएपी, एनपीके और एसएसपी की भरपूर व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इंदिरा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विभाग के अधिकारियों के सुझाव के अनुरूप किसान डीएपी के बदले उक्त उर्वरकों का प्रयोग कर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। सोसायटियों से किसानों को उनकी डिमांड के अनुसार खाद-बीज का पर्याप्त भंडारण किया गया है।
- रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सोमवार को नवा रायपुर स्थित नवीन विधानसभा परिसर में विधिवत पूजा-अर्चना कर गुलमोहर का पौधा रोपित किया। मुख्यमंत्री श्री साय 'एक पेड़ मां के नाम 2.0' वृक्षारोपण कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, वन मंत्री श्री केदार कश्यप सहित मंत्रिपरिषद के अन्य सदस्य एवं विधानसभा के सभी सदस्यों ने भी गुलमोहर का पौधारोपण किया। कार्यक्रम में मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, विधानसभा सचिव श्री दिनेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव (वन) श्रीमती ऋचा शर्मा, छत्तीसगढ वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोंपज संघ श्री अनिल साहू, प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण कुमार पाण्डेय,मुख्य वन संरक्षक श्री राजू अगासमणि भी उपस्थित थे।
- -नवा रायपुर में वेटलैण्ड एवं जैव विविधता संरक्षण पर उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजनरायपुर, / जैव विविधता एवं आर्द्रभूमियों (वेटलैण्ड्स) के संरक्षण के उद्देश्य से आज नवा रायपुर स्थित दण्डकारण्य अरण्य भवन में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्रीद्वय श्री अरुण साव एवं श्री विजय शर्मा सहित कैबिनेट के सभी मंत्री एवं विधायकगण उपस्थित थे।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना केवल आधारभूत ढांचे के विकास से नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और जैविक विविधता की रक्षा से ही पूर्ण होती है। उन्होंने आह्वान किया कि हर जनप्रतिनिधि व नागरिक जैव विविधता एवं वेटलैण्ड संरक्षण के लिए व्यक्तिगत दायित्व समझें और 'वेटलैण्ड मित्र' बनकर इस अभियान को जनांदोलन में परिवर्तित करें।कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि जैव विविधता और वेटलैण्ड्स का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि यह हमारी भावी पीढ़ियों की सुरक्षा का सवाल भी है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से जैव विविधता के संरक्षण में भागीदारी सुनिश्चित करने और “वेटलैण्ड मित्र” बनकर जनजागरण फैलाने का आग्रह किया।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष श्री राकेश चतुर्वेदी ने व्यापक प्रस्तुति दी। उन्होंने 1992 के अर्थ सम्मिट, जैव विविधता अधिनियम 2002, राष्ट्रीय जैव विविधता बोर्ड की भूमिका और जैव विविधता प्रबंधन समितियों की संरचना एवं कार्यों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि छत्तीसगढ़ देश का तीसरा राज्य है, जहां जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ प्रभावी रूप से कार्य कर रही हैं।आर्द्रभूमि संरक्षण के संदर्भ में प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री अरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि वेटलैण्ड्स पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और जिला स्तरीय आर्द्रभूमि संरक्षण समितियों के गठन की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि इन समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर वेटलैण्ड्स की निगरानी एवं संरक्षण को मजबूती मिल रही है।कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई कि राज्य का गिधवा-परसदा पक्षी अभ्यारण्य अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित रामसर साइट बनने की पात्रता रखता है। इसके अतिरिक्त, बलौदाबाजार जिले के खोखरा ग्राम को छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट के रूप में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया प्रगति पर है।कार्यशाला के अंत में सभी जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से “वेटलैण्ड मित्र” के रूप में जुड़कर जैव विविधता और आर्द्रभूमियों के संरक्षण हेतु सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई। यह भागीदारी राज्य में पर्यावरणीय चेतना को जनआंदोलन का रूप देने में सहायक होगी।इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव (वन) श्रीमती ऋचा शर्मा, छत्तीसगढ़ वन बल प्रमुख श्री व्ही. श्रीनिवास राव, जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव श्री राजेश कुमार चंदेले सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित थे।
- -विधानसभा भ्रमण पर आए प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव, मानव सेवा के कार्यों में समाज की भूमिका की दी जानकारीरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा परिसर में दुर्ग जिले से आए जैन समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को जैन समाज द्वारा मानव सेवा एवं सामाजिक उत्थान के लिए संचालित विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी।प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने विधानसभा परिसर के भ्रमण और सदन की कार्यवाही के अवलोकन के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि यह उनके लिए एक प्रेरणादायक अवसर रहा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को निकट से देखने का अवसर मिलना गौरवपूर्ण अनुभव है। मुख्यमंत्री श्री साय ने जैन समाज की सेवा भावना की सराहना करते हुए कहा कि समाज की सकारात्मक गतिविधियाँ प्रदेश के समावेशी विकास में सहायक सिद्ध हो रही हैं। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को उनके सामाजिक कार्यों के लिए शुभकामनाएँ दीं। इस अवसर पर दुर्ग विधायक श्री गजेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।
- -मिशन मोड में सरकार का अभियान, ‘शून्य मलेरिया’ की ओर बढ़ते निर्णायक कदम-मलेरिया से जंग अब केवल इलाज की नहीं, यह रणनीति और जनसहभागिता की लड़ाई है – स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवालरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और जनस्वास्थ्य के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ ने मलेरिया के स्थायी उन्मूलन की दिशा में एक निर्णायक अभियान फिर से प्रारंभ किया है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के मार्गदर्शन में, विभाग ने मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ एक अनुकरणीय रणनीतिक पहल करते हुए जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है। ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 12वें चरण ने न केवल अपने दायरे का विस्तार किया है, बल्कि अपने प्रभाव से यह स्पष्ट कर दिया है कि जब सरकार दृढ़ संकल्प और नीति आधारित कार्रवाई के साथ काम करती है, तो नतीजे ज़मीन पर दिखते हैं।25 जून से जारी इस चरण के अंतर्गत राज्य के 10 जिलों में गहन जांच, उपचार और जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अब तक 19,402 घरों का दौरा किया गया है और 98,594 लोगों की रक्त जांच की गई है। इनमें से 1,265 लोग मलेरिया पॉजिटिव पाए गए। सबसे अहम बात यह रही कि सभी संक्रमित व्यक्तियों को मौके पर ही दवा की पहली खुराक उपलब्ध कराई गई, वह भी पूरी सावधानी के साथ—पहले मरीजों को स्थानीय खाद्य पदार्थ खिलाया गया, ताकि दवा का प्रभाव सुरक्षित और प्रभावशाली रहे। प्रत्येक मरीज को उपचार कार्ड दिया गया है, ताकि फॉलोअप के जरिए पूरी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।इस अभियान का सकारात्मक असर सबसे अधिक बस्तर संभाग में देखा जा रहा है। 2015 की तुलना में यहां मलेरिया मामलों में 71 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। यह कोई सामान्य उपलब्धि नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित, सतत और वैज्ञानिक रणनीति का परिणाम है। राज्य का वार्षिक परजीवी सूचकांक (API) भी 27.40 से घटकर 7.11 तक आ गया है, जो दर्शाता है कि मलेरिया पर राज्य ने प्रभावी नियंत्रण पाया है।स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अभियान की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि मलेरिया से जंग अब केवल इलाज की नहीं, यह रणनीति और जनसहभागिता की लड़ाई बन गई है। उनका मानना है कि सरकार ने जो लक्ष्य तय किया है—2027 तक ‘शून्य मलेरिया’ और 2030 तक ‘पूर्ण मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़’—उसे केवल दस्तावेज़ी नहीं, बल्कि यथार्थ के रूप में साकार किया जा रहा है।स्वास्थ्य विभाग की आयुक्त सह संचालक डॉ. प्रियंका शुक्ला ने बताया कि प्रदेश में मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभाव से बस्तर संभाग में मलेरिया के मामलों में गिरावट आयी है। “हर संक्रमित व्यक्ति तक पहुंचना, उसका समय पर इलाज करना और भविष्य में संक्रमण की कोई गुंजाइश न रहे — यही हमारी प्राथमिकता है।” उन्होंने कहा कि हमारा फोकस लक्षणरहित मलेरिया मामलों पर है, ताकि बीमारी को जड़ से मिटाया जा सके।इस अभियान की सफलता में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही है। यह केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं, बल्कि अब एक जनआंदोलन बन चुका है। जांच और इलाज के साथ-साथ लोगों को मच्छरदानी के नियमित उपयोग, जलजमाव की रोकथाम और साफ-सफाई जैसे व्यवहारिक उपायों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह ठोस और संवेदनशील प्रयास, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की दूरदर्शिता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम है, जो न केवल राज्य को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में एक मजबूत और टिकाऊ कदम है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक प्रेरक मॉडल भी बन रहा है। आने वाले वर्षों में यह रणनीति अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय उदाहरण के रूप में स्थापित होगी।
- -विशेष ट्रेन 15 जुलाई को रायपुर से होगी रवाना — मुख्यमंत्री श्री साय हरी झंडी दिखाकर करेंगे शुभारंभरायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के रजत जयंती वर्ष में प्रदेशवासियों को श्रीराम लला के दर्शन का सौभाग्य प्रदान करने की दिशा में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की पहल से ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ जन जन के जीवन से जुड़ रही है।इस योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली विशेष ट्रेन दिनांक 15 जुलाई 2025 को रायपुर रेलवे स्टेशन से अयोध्या धाम के लिए रवाना होगी। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय स्वयं इस विशेष दर्शन यात्रा को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ करेंगे। रायपुर संभाग के श्रद्धालुओं को लेकर रवाना होने वाली इस ट्रेन के प्रस्थान अवसर पर मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य, वरिष्ठ अधिकारीगण एवं दक्षिण पूर्व-मध्य रेलवे रायपुर मंडल के डीआरएम श्री दयानंद, सीनियर डीसीएम श्री अवधेश त्रिवेदी तथा आईआरसीटीसी – साउथ सेंट्रल ज़ोन के ग्रुप महाप्रबंधक श्री पी. राजकुमार भी उपस्थित रहेंगे।उल्लेखनीय है कि प्रदेशवासियों को उनके जीवनकाल में एक बार प्रभु श्रीराम लला के अयोध्या धाम दर्शन का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से 23 फरवरी 2024 को छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता (एमओयू) संपादित किया गया था।उक्त एमओयू के क्रियान्वयन की श्रृंखला में योजना की विधिवत शुरुआत रायपुर संभाग के श्रद्धालुओं के साथ 5 मार्च 2024 को हुई थी, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने वरिष्ठ मंत्रीगणों एवं जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में रायपुर रेलवे स्टेशन से पहली विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था।इसके पश्चात् 11 मार्च को बिलासपुर संभाग के श्रद्धालुओं के लिए विशेष ट्रेन को उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसी क्रम में 19 जून को सरगुजा संभाग की विशेष ट्रेन को सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने विधायकगण एवं जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में शुभारंभ किया। 26 जून को दुर्ग एवं बस्तर (संयुक्त) संभाग की पहली विशेष ट्रेन, जिसमें 850 श्रद्धालु शामिल थे, दुर्ग रेलवे स्टेशन से अयोध्या के लिए रवाना हुई। इन सभी अवसरों पर श्रद्धालुओं में अत्यंत उत्साह और आस्था का भाव देखने को मिला। साथ ही मीडिया प्रतिनिधिगण, आम नागरिक, जिला प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड एवं आईआरसीटीसी के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।उल्लेखनीय है कि विगत वित्तीय वर्ष में ‘श्री रामलला दर्शन योजना’ के अंतर्गत लगभग 22,100 श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ। योजना के तहत विशेष साप्ताहिक ट्रेनें आगे भी रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग-बस्तर (संयुक्त) संभागों के श्रद्धालुओं को श्रीराम लला के दर्शन हेतु नियमित रूप से अयोध्या धाम ले जाती रहेंगी।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की यह पहल न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती प्रदान कर रही है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना को भी गौरवपूर्ण स्थान दिला रही है।
- -’लैम्पस समितियों से जारी है खाद-बीज का वितरण’रायपुर। बस्तर संभाग में खरीफ सीजन- 2025 के तहत अब तक एक लाख 14 हजार 929 किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर 600 करोड़ 74 लाख रुपए का अल्पकालीन कृषि ऋण वितरित किया जा चुका है। यह ऋण जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, जगदलपुर द्वारा “सहकार से समृद्धि” योजना के अंतर्गत वितरित किया गया है। बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बताया कि बस्तर संभाग के किसानों को खरीफ के लिए 950 करोड़ का ऋण वितरित किए जाने का लक्ष्य है।बस्तर संभाग में आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के माध्यम से कृषकों को 58 हजार 159 मैट्रिक टन उर्वरक एवं 33 हजार 62 क्विंटल बीज का वितरण किया गया है। बस्तर जिले में 13,963 मैट्रिक टन, कोंडागांव में 14,679, नारायणपुर में 2,105, कांकेर में 23,884, सुकमा में 1,615 और बीजापुर जिले में 1,913 मैट्रिक टन उर्वरक का वितरण किया गया है। जैविक खेती जिला होने के कारण दंतेवाड़ा में उर्वरक प्रदाय नहीं किया गया। इसी प्रकार बीज वितरण के तहत बस्तर जिले में 7,645 क्विंटल, कोंडागांव में 3,674, नारायणपुर में 1,337, कांकेर में 8,397, दंतेवाड़ा में 2,184, सुकमा में 2,372 और बीजापुर जिले में 7,453 क्विंटल बीज कृषकों को उपलब्ध कराए गए हैं।अल्पकालीन कृषि ऋण वितरण कार्यक्रम के तहत बस्तर जिले के 24,256 किसानों को 162.53 करोड़, कोंडागांव के 23,301 को 122.63 करोड़, नारायणपुर के 4,351 को 25.66 करोड़, कांकेर के 45,921 को 186.93 करोड़, दंतेवाड़ा के 1,943 को 12.79 करोड़, सुकमा के 7,359 को 41.04 करोड़ तथा बीजापुर जिले के 7,798 किसानों को 49.16 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया है।डीएपी खाद की कमी को देखते हुए नैनो डीएपी, एसएसपी और एनपीके जैसे वैकल्पिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण भी किया गया है। सुगंधित धान, कोदो-कुटकी, रागी, मक्का, मूंग, उड़द, अरहर, मूंगफली, तिल व उद्यानिकी फसलों के लिए अब तक 30 करोड़ 74 लाख रुपए ऋण दिया गया है। ऋण और आदान सामग्री के वितरण की यह प्रक्रिया लगातार जारी है।
- धान उठाव में तेजी लाने के दिए निर्देश, सड़क मरम्मत के भी निर्देशमहासमुंद। कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह ने आज पिथौरा स्थित धान संग्रहण केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने धान के भंडारण, सुरक्षा, परिवहन और उठाव की स्थिति का जायजा लिया। कलेक्टर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को निर्देशित किया कि बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए धान का शीघ्रता से उठाव सुनिश्चित किया जाए, जिससे धान की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण रखरखाव किया जा सके। उन्होंने कहा कि धान भीगने या खराब होने की स्थिति में संभावित नुकसान को रोकना सुनिश्चित करें।मौके पर डीएमओ श्री राठौर ने बताया कि यहां कुल 2 लाख 53 हजार क्विंटल धान का भंडारण किया गया है। जिसमें 50 हजार क्विंटल धान का डी.ओ. (डिलिवरी ऑर्डर) पहले ही कट चुका है, इस पर कलेक्टर ने संबंधित परिवहन एजेंसी और फूड विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस धान का तत्काल उठाव प्रारंभ किया जाए और परिवहन में किसी भी प्रकार की देरी न हो।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने संग्रहण केंद्र तक पहुंचने वाले मार्ग की स्थिति देखते हुए कहा कि बरसात में कीचड़ और जलभराव से उठाव कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए सड़क की मरम्मत मुरूम या गिट्टी से शीघ्र की जाए। कलेक्टर ने गोदामों की साफ-सफाई, तिरपाल व्यवस्था, नमी नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंधों का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केंद्र में कार्यरत सभी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाया जाए और उठाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखी जाए। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक दिवस उठाव की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और कार्य में लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पिथौरा श्री ओंकारेश्वर सिंह, खाद्य अधिकारी श्री अजय यादव, डीएमओ श्री राठौर एवं नान के अधिकारी उपस्थित रहे।
- महासमुंद। संचालक पेंशन एवं भविष्य निधि रायपुर द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से अवगत कराया गया कि छत्तीसगढ़ शासन वित्त विभाग द्वारा लंबित पेंशन प्रकरणों एवं आपत्तियां वाले पेंशन प्रकरणों की निरंतर समीक्षा की जा रही है।बैठक में निर्णय लिया गया कि कार्यालय से संबंधित पेंशन प्रकरण जिसमे संभागीय संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन रायपुर द्वारा दस्तावेजों की कमियों के कारण (रेगुलर केस/रिवाइज्ड केस) आपत्ति लगाए गए है। उन प्रकरणों में नियमानुसार आपत्ति, दस्तावेजों की कमियों को पूर्ति कर प्रकरण पुनः प्रेषित करें। संभागीय संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन रायपुर द्वारा पेंशन भुगतान आदेश जारी किये जा चुके है किन्तु विभागीय जानकारी के अभाव में पेंशन प्रकरण कोषालय स्तर पर लंबित है उक्त प्रकरणों में जानकारी पूर्ण कर पेंशन प्रकरणों का निराकरण कराने के निर्देश दिए हैं। आगामी दो माहों में सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों के पेंशन प्रकरण यथाशीघ्र तैयार कर शासन के मंशानुरूप संभागीय संयुक्त संचालक कोष लेखा एवं पेंशन रायपुर को प्रेषित किए जाने कहा गया है।समय सीमा बैठक में उक्त पेशन प्रकरणां की समीक्षा की जाएगी। इस हेतु समस्त आहरण एवं संवितरण अधिकारी वस्तु स्थिति की जानकारी मंगलवार 15 जुलाई तक जिला कोषालय अधिकारी महासमुंद के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करेंगे। विभाग से संबंधित पेंशन प्रकरण / आपत्तिकृत पेंशन प्रकरण आभार पोर्टल पर प्रदर्शित है। आभार पोर्टल का अवलोकन कर नियमानुसार निराकरण की कार्यवाही करेंगें। निराकरण में किसी भी प्रकार की समस्या एवं दिक्कत होने की स्थिति में जिला कोषालय अधिकारी महासमुंद से सम्पर्क कर कर सकते है।
- 5 ग्राम पंचायतों में चयनित तालाबों में होगा झींगा पालन,ग्रामीणों को मिलेगा आजीविका का नया स्रोतरायपुर/ प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता से समृद्ध छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब कृषि क्षेत्र में एक नई क्रांति की ओर अग्रसर है। परंपरागत खेती से आगे बढ़ते हुए सुकमा के किसान अब मछली पालन के साथ-साथ झींगा पालन को भी अपनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, सुकमा के सहयोग से जिले के किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक और लाभकारी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।कलेक्टर के मार्गदर्शन में समन्वित कृषि प्रणाली को प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा मछली पालन विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंह राठौर एवं मत्स्य विभाग के अधिकारी श्री डी.एल. कश्यप के नेतृत्व में सुकमा विकासखंड की पांच ग्राम पंचायतों कृ भेलवापाल, झापरा, गोंगला, मूर्तोंडा एवं गादीरास कृ के तहत आने वाले 40 तालाबों का गहन निरीक्षण किया गया। इन तालाबों को झींगा पालन के लिए उपयुक्त पाया गया है। निकट भविष्य में कृषि विज्ञान केंद्र की मत्स्य इकाई, विशेषज्ञों की निगरानी और जिला मत्स्य विभाग के समन्वय से इन तालाबों में झींगा पालन की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। यह पहल न केवल जिले में मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी।झींगा: पोषण और आमदनी का समृद्ध स्रोतझींगा एक सर्वाहारी मीठे जल का जलीय जीव है, जो ब्रीडिंग के समय थोड़े खारे पानी की ओर प्रवास करता है। यह प्राकृतिक रूप से जल में मौजूद सूक्ष्म जीवों, कीटों और जैविक अवशेषों का सेवन करता है। झींगा प्रोटीन और आवश्यक वसा का उत्तम स्रोत है। इसके नियमित सेवन से न केवल मस्तिष्क का तीव्र विकास होता है, बल्कि यह हृदय स्वास्थ्य और कुपोषण निवारण में भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।किसानों को होगा व्यापक लाभझींगा पालन से किसानों को पारंपरिक फसलों की तुलना में तीव्र और अधिक आमदनी होने की संभावना है। इसके साथ ही यह स्व रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा, जिससे युवा वर्ग भी खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित होगा। उल्लेखनीय है कि यह योजना सुकमा जिले में ग्रामीण आजीविका सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। जिला प्रशासन, कृषि विज्ञान केंद्र और मत्स्य विभाग के संयुक्त प्रयास से सुकमा अब झींगा पालन के क्षेत्र में राज्य का अग्रणी जिला बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
- वार्ड 70 पार्षद कार्यालय के सामने सामुदायिक भवन में ठेका सफाई कामगारों की गिनती करवाई, कम संख्या में उपस्थिति मिलने पर सम्बंधित ठेकेदार को नोटिस देकर जुर्माना करने दिए निर्देशरायपुर / नगर पालिक निगम रायपुर के आयुक्त श्री विश्वदीप के निर्देश पर अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय ने नगर निगम जोन 8 जोन कमिश्नर श्री राजेश्वरी पटेल, कार्यपालन अभियंता स्वच्छ भारत मिशन श्री रघुमणि प्रधान, नगर पालिक निगम भिलाई के उप अभियंता श्री भूपेन्द् कुमार दिली, जोन 8 जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री गोपीचंद देवांगन, स्वच्छता निरीक्षक रितेश झा की उपस्थिति में जोन 8 क्षेत्र अंतर्गत माधव राव सप्रे वार्ड अंतर्गत तृतीय लिंग समुदाय हेतुगरिमा गृह, वार्ड 69 अंतर्गत भईया तालाब, यादवपारा, अग्रोहा सोसायटी मुक्कड़ सहित नगर निगम जोन 8 अंतर्गत वार्ड 69 और 70 क्षेत्र के अंतर्गत तालाब, उद्यान, नालियों, मुक्कड़ों की सफाई व्यवस्था का विभिन्न स्थानों पर प्रत्यक्ष निरीक्षण कर स्थल समीक्षा कर जोन के सम्बंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए.अपर आयुक्त ने जोन 8 जोन कमिश्नर को निर्देशित किया है कि कार्य में लापरवाही किये जाने पर सम्बंधितों को नोटिस दी जाये और व्यवस्था सुधारने आवश्यक कार्यवाही की जाये.अपर आयुक्त श्री विनोद पाण्डेय ने जोन 8 जोन कमिश्नर श्रीमती राजेश्वरी पटेल, कार्यपालन अभियंता स्वच्छ भारत मिशन श्री रघुमणि प्रधान, जोन स्वास्थ्य अधिकारी श्री गोपीचंद देवांगन की उपस्थिति में वार्ड 70 के वार्ड पार्षद कार्यालय के सामने सामुदायिक भवन में ठेका सफाई कामगारों की गिनती करवाई. निर्धारित से कम संख्या में उपस्थिति मिलने पर सम्बंधित सफाई ठेकेदार को नोटिस देकर जुर्माना करने की कार्यवाही करने के निर्देश अपर आयुक्त और जोन 8 जोन कमिश्नर द्वारा दिए गए.
- रायपुर/ छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 373.6 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा स्थापित राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष से प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक बलरामपुर जिले में सर्वाधिक 567.4 मि.मी. वर्षा रिकार्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 181.7 मि.मी. वर्षा दर्ज हुई है।राज्य स्तरीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार सरगुजा में 280.5 मि.मी., सूरजपुर में 463.4 मि.मी., जशपुर में 486.6 मि.मी., कोरिया में 402.8 मि.मी. और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 369.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। रायपुर जिले में 351.9 मि.मी., बलौदाबाजार में 353.1 मि.मी., गरियाबंद में 321.2 मि.मी., महासमुंद में 335.2 मि.मी. और धमतरी में 323.0 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज हुई है। बिलासपुर में 387.3 मि.मी., मुंगेली में 388.0 मि.मी., रायगढ़ मंे 520.6 सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 365.0 मि.मी., जांजगीर-चांपा में 491.4 मि.मी., सक्ती में 430.6 मि.मी., कोरबा में 469.9 मि.मी. और गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही 385.1 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। दुर्ग जिले में 306.2 मि.मी., कबीरधाम में 265.4 मि.मी., राजनांदगांव में 300.0 मि.मी., मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 484.9 मि.मी., खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 247.0 मि.मी., बालोद में 380.4 मि.मी. और बस्तर जिले में 442.3 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड हुई है। कोंडागांव में 263.3 मि.मी., कांकेर में 366.9 मि.मी., नारायणपुर में 315.7 मि.मी., दंतेवाड़ा में 400.1 मि.मी., सुकमा में 232.0 मि.मी. और बीजापुर में 451.1 मि.मी. औसत वर्षा रिकार्ड की जा चुकी है।
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केन्द्रीय मंत्री ने जनजातीय संग्रहालय का किया अवलोकन
रायपुर/ छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली पर आधारित जनजातीय संग्रहालय का केन्द्रीय जनजातीय राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके ने अवलोकन किया और नवा रायपुर में बनाए गए इस संग्रहालय में आदिवासी जीवन शैली के प्रस्तुतीकरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृति विरासत विश्व पटल पर स्थापित होगी। इससे जनजातीय युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति आत्मगौरव का भाव जगेगा। इस अवसर पर आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग मंत्री श्री राम विचार नेताम भी उपस्थित थे।
केन्द्रीय जनजातीय राज्यमंत्री श्री दुर्गादास ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा जनजातीय वर्ग के हित में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। पीएम जनमन एवं धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से जनजातियों के संर्वागीण विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्री मोदी के 2047 तक विकसित भारत की संकल्पना में यह प्रयास मील का पत्थर साबित होंगे। उन्होंने संग्रहालय के निकट ही बनाए जा रहे शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक सह संग्रहालय के निर्माण की समीक्षा की। इस संग्रहालय के लिए केन्द्र सरकार ने 45 करोड़ रूपए की राशि मंजूर की है। इस संग्रहालय को आगामी 30 सितम्बर तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रमुख सचिव श्री बोरा ने इस दौरान संग्रहालय में प्रयुक्त डिजीटल एवं एआई तकनीक के संबंध में जानकारी दी। बैठक में टीआरटीआई के संचालक श्री जगदीश कुमार सोनकर सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
संग्रहालय में 14 गैलरियों में जनजातीय जीवनशैली के विभिन्न अवसरों का है झलकियां
जनजातीय संग्रहालय में जनजातीय संस्कृति, जीवनशैली और परंपरा को प्रदर्शित करने के लिए 14 गैलरियों का निर्माण किया गया है। संग्रहालय के अलग-अलग गैलरियों में जनजातीयों के परंपरागत वाद्ययंत्रों, आवास एवं घरेलू उपकरण, शिकार उपकरण, उनमें कृषि की परंपरागत तकनीकें एवं उपकरणों का जीवंत प्रदर्शन किया गया है। इसी प्रकार लौह निर्माण, रस्सी निर्माण, फसल मिंजाई, कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई निर्माण, मंद आसवन, अन्न कुटाई व पिसाई, तेल प्रसंस्करण हेतु उपयोग में लाने जाने वाले उपकरणांे व परंपरागत तकनीकों को दर्शाया गया है। संग्रहालय में सांस्कृतिक विरासत के अंतर्गत अबुझमाड़िया में गोटुल, भुंजिया जनजाति में लाल बंगला, जनजातियों में परम्परागत कला कौशल जैसे बांसकला, काष्ठकला, चित्रकारी, गोदनाकला, शिल्पकला आदि प्रदर्शित किए गए हैं।



























