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- गरियाबंद । छत्तीसगढ़ शासन की सेवा सेतु पहल ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों तक शासकीय सेवाओं की सहज, त्वरित और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित कर रही है। इस व्यवस्था के माध्यम से विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए लोगों को बार-बार शासकीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। इससे समय और धन दोनों की बचत हो रही है।ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर श्री मिथलेश देवांगन ने बताया कि ग्राम मैनपुरकला निवासी नैन सिंह ने अपनी पुत्री तथा ग्राम नहानबिरी निवासी बोध सिंह ने अपने पुत्र के लिए सेवा सेतु केंद्र, तहसील मैनपुर में आय प्रमाण-पत्र हेतु आवेदन किया था। दोनों आवेदकों को 24 घंटे के भीतर आय प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया। आय प्रमाण-पत्र प्राप्त होने पर दोनों हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सेवा सेतु पोर्टल के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। उन्होंने शासन-प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि सेवा सेतु केंद्र के माध्यम से प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया अब सरल, सुगम और समयबद्ध हो गई है।
- -समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने और विभागवार मासिक कार्ययोजना तैयार करने के दिए निर्देशरायपुर। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) 2026-27 के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा किए जा रहे सुधार कार्यों एवं उनके क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बैठक में मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि लंबित कार्यों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से विभागवार मासिक कार्ययोजना तैयार कर उसके अनुसार कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा, ताकि योजना के तहत तय लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जा सके।बैठक में राज्यों को पूंजीगत निवेश हेतु विशेष सहायता योजना (SASCI) 2026-27 के तहत जारी दिशा-निर्देशों एवं विभिन्न परिचालन गाइडलाइंस के अनुरूप विभागवार सुधार कार्यों की प्रगति, अब तक की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध लक्ष्य-पूर्ति तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।बैठक में वित्त विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव, मुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव श्री अंकित आनंद, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस.भारतीदासन, नगरीय प्रशासन विभाग की सचिव सुश्री आर.शंगीता, राजस्व विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव श्री मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव डॉ. सारांश मित्तर, वित्त विभाग के विशेष सचिव श्री चंदन कुमार, प्रबंध संचालक छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल श्री विवेक आचार्य सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
- - चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास, फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के आकर्षक गंतव्य के रूप में विकसित करने पर हुई विस्तृत चर्चारायपुर। छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। रायपुर में आयोजित इस बैठक में छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य से भारत भाग्य विधाता फिल्म के डायरेक्टर श्री मनोज तापड़िया तथा फिल्म निर्माता श्री आदि शर्मा ने सौजन्य भेंट कर राज्य में विकसित की जा रही चित्रोत्पला फिल्म सिटी की अवधारणा, उसकी संभावनाओं तथा भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि छत्तीसगढ़ की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरें, जलप्रपात, वन क्षेत्र, जनजातीय संस्कृति तथा विविध प्राकृतिक लोकेशन राज्य को फिल्म निर्माण के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाते हैं। इन विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माताओं के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर राज्य को फिल्मांकन का आकर्षक गंतव्य बनाने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।चर्चा के दौरान चित्रोत्पला फिल्म सिटी को आधुनिक सुविधाओं से युक्त एक ऐसे समग्र फिल्म परिसर के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया, जहाँ फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ उपलब्ध हों। साथ ही फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने, राज्य में फिल्म निर्माण गतिविधियों का विस्तार करने तथा इस क्षेत्र में निजी और संस्थागत सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तार से मंथन हुआ।प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने कहा कि चित्रोत्पला फिल्म सिटी का विकास छत्तीसगढ़ के फिल्म और पर्यटन क्षेत्र के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगा। इससे राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी, फिल्म निर्माण गतिविधियों को गति मिलेगी तथा स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, रचनात्मक युवाओं और फिल्म से जुड़े अन्य पेशेवरों के लिए रोजगार एवं कौशल विकास के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग के विकास से पर्यटन, आतिथ्य, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को भी व्यापक लाभ मिलेगा, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति प्राप्त होगी।बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि छत्तीसगढ़ को एक उभरते हुए फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए फिल्म उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों, निर्माताओं और निर्देशकों के साथ निरंतर संवाद एवं सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। राज्य की प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता और विकसित की जा रही आधुनिक फिल्म अवसंरचना के समन्वय से छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्म निर्माण के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएंगे। बैठक में चित्रोत्पला फिल्म सिटी के विकास, फिल्म पर्यटन के विस्तार तथा भविष्य में फिल्म निर्माण और पर्यटन संवर्धन के क्षेत्र में पारस्परिक सहयोग की व्यापक संभावनाओं पर सहमति व्यक्त की गई।
- रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका से आज यहां लोकभवन में राज्य के निजी विश्वविद्यालयों के पदाधिकारियों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत नए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित प्रावधानों पर राज्यपाल से विचार-विमर्श किया। श्री डेका ने राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार के सबंद्ध में अपने विचार साझा किए।इस अवसर पर मैट्स विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति श्री गजराज पगारिया, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई दुर्ग के कुलाधिपति श्री आईपी मिश्रा, भारती विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलाधिपति श्री सुशील चंद्राकर, कलिंगा विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति डॉ. संदीप अरोड़ा, आईएसबीएम विश्वविद्यालय, गरियाबंद और रायपुर के कुलपति डॉ. आनंद महलवार, अंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर के कुलाधिपति श्री अभिषेक अग्रवाल, दावड़ा विश्वविद्यालय रायपुर के सीईओ श्री चिन्मय दावड़ा, कोलंबिया विश्वविद्यालय रायपुर के प्रो. कुलाधिपति श्री हरजीत सिंह हूरा उपस्थित थे।
- कांकेर । छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने आज जिला एवं सत्र न्यायालय कांकेर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, परिवार न्यायालय, प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायालय, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, व्यवहार न्यायाधीश के न्यायालयों एवं सेंट्रल प्रोसेस अनुभाग, अभिलेखागार, सर्वर, लीगल एंड डिफेंस काउंसिल सिस्टम, मालखाना, लेखा अनुभाग, ग्रंथालय, डिजिटलीकरण एवं स्कैनिंग केंद्र, पीड़िता विश्राम कक्ष, किलकारी कक्ष सहित विभिन्न अनुभागों का निरीक्षण किया। इस अवसर पर माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर के रजिस्ट्रार जनरल रजिस्ट्री के अधिकारी एवं कर्मचारी, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कांकेर श्री संजीव कुमार टामक, श्री रमाशंकर प्रसाद न्यायाधीश परिवार न्यायालय, कलेक्टर कांकेर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर, प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश पखांजूर श्री विजय मिंज एवं प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश भानुप्रतापपुर श्री दीपक गुप्ता, प्रथम जिला एवं सत्र न्यायाधीश कांकेर श्रीमती विभा पांडेय, मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट श्री भास्कर मिश्र, सचिव जिला विधिक प्राधिकरण श्रीमती शांति प्रभु, सिविल जज सीनियर डिवीजन पखांजूर श्रीमती अंकिता तिग्गा, सिविल जज जुनियर डिवीजन पखांजूर श्री धु्रवराज ग्वाल, सिविल जज जुनियर डिवीजन श्री निखिल साहू, सुश्री आयुषी शुक्ला, श्री हिमांशु चंद्राकर, श्री मयंक धु्रव, एसपी श्री निखिल राखेचा सहित जिला न्यायालय कांकेर के समस्त स्टाफ उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान मुख्य न्यायाधीश श्री सिन्हा द्वारा सभी न्यायालयों में व्यवस्था को बेहतर रूप में और अधिक व्यवस्थित करने के निर्देश दिए गए। निरीक्षण उपरांत माननीय न्यायमूर्ति श्री सिन्हा ने जिला न्यायालय कांकेर के कांफ्रेंस हॉल में न्यायिक अधिकारीगण एवं अधिवक्तागणों से चर्चा की एवं समस्त न्यायालयीन कर्मचारियों से भेंट की। मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा के जिला सत्र न्यायालय कांकेर पहुंचने पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री संजीव कुमार टामक एवं श्री रमाशंकर प्रसाद न्यायाधीश परिवार न्यायालय सहित न्यायालय के सभी न्यायाधीशों के द्वारा पुष्प गुच्छ भेंटकर आत्मीय स्वागत किया गया।‘एक पेड़ मां के नाम’ पौधरोपणछत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने न्यायालय परिसर कांकेर में ‘एक पेड़ मां के नाम’ सागौन पौधा का रोपण भी किया।
- कांकेर । जिले में संचालित समस्त शासकीय तथा अशासकीय महाविद्यालयों, मेडिकल कॉलेज, पॉलिटेक्निक एवं आईटीआई में अध्ययनरत अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थी जो आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की पात्रता रखते हैं। उनके लिए शिक्षा सत्र 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 के बैंक खाता एवं आधार सीडिंग संबंधी संशोधन की कार्यवाही वेबसाइटhttps://postmatric-scholarship.cg.nic.in/ ऑनलाइन की जा रही है। ऑनलाइन वेबसाइट पर जिन विद्यार्थियों का बैंक खाता गलत है, उसमें सुधार कर सकते हैं तथा जिनके बैंक खाते से आधार सीडिंग नहीं हुई है, वे इसे भी पूर्ण करा सकते हैं। बैंक खाता संशोधन एवं आधार सीडिंग कराने की अंतिम तिथि 28 जुलाई निर्धारित की गई है। उक्त तिथि पश्चात इस संबंध में किसी प्रकार का अतिरिक्त अवसर प्रदान नहीं किया जाएगा। निर्धारित तिथि पश्चात् ऑनलाइन संशोधन एवं आधार सीडिंग की प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद संबंधित दस्तावेज सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय कांकेर में जमा करना होगा।
- दुर्ग. राज्य शासन कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा उद्यानिकी फसलों में पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत खरीफ मौसम में फसल बीमा कराने हेतु 31 जुलाई 2026 तक समय सीमा तय किया गया है।उद्यानिकी फसलों की खेती कर रहे किसानों को विपरीत मौसम जैसे कम तापमान, अधिक तापमान, बीमारी अनुकूल मौसम, कीट व्याधियो का प्रकोप, लगातार अवर्षा की स्थिति निर्मित होना ओला वृष्टि आदि से होने वाले नुकसान से बचाने पुर्नगठित मौसम आधारित फसल बीमा लागू की गई है। खरीफ वर्ष 2026 में दुर्ग जिले अन्तर्गत बीमा कराने वाले कृषकों को अधिसूचित फसल के अनुसार निर्धारित कुल बीमित राशि का अधिकतम 5 प्रतिशत अथवा वास्तविक प्रीमियम जो भी कम हो राशि कृषक अंश के रूप में ऋणि एवं अऋणि दोनो प्रकार के कृषको को जमा करने होंगें। अऋणि कृषक फसल लगाने का स्वघोषित प्रमाण पत्र, नक्शा खसरा, आधार कार्ड अपने बैंक पासबुक की छाया प्रति जिसमें आईएफएससी कोड इत्यादि का उल्लेख हो, जमा कर बीमा करा सकते है।योजना के अंतर्गत ऋणी कृषकों के लिये विकल्प चयन के आधार पर क्रियान्वित होगी। ऋणी कृषक जो योजना में शामिल नही होना चाहते, उन्हें भारत सरकार द्वारा जारी चयन प्रपत्रानुसार हस्ताक्षरित घोषणा पत्र बीमा आवेदन की अंतिम तिथि के 07 दिवस पूर्व तक संबंधित वित्तीय संस्थान में अनिवार्य रूप से जमा करना होगा। निर्धारित समय-सीमा में हस्ताक्षरित घोषणा पत्र जमा नही करने पर संबंधित बैंक द्वारा संबंधित मौसम के लिये स्वीकृत/नवीनीकृत की गई अल्पकालीन कृषि ऋण को अनिवार्य रूप से बीमाकृत किया जाएगा। इस मामले में बैंक द्वारा किसी भी प्रकार की चूक/त्रुटि होने पर संबंधित बैंक किसानों के स्वीकार्य दावो के भुगतान करने के लिये उत्तरदायी होगा।मुख्य/मूल कवरेज अंतर्गत फसल टमाटर हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 1,20,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 6,000 रूपए। फसल बैंगन हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 77,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 3850 रूपए। फसल मिर्च हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 68,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 3400 रूपए। फसल अदरक हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 1,50,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 7500 रूपए। फसल केला हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 85,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 4,250 रूपए। फसल पपीता हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 87,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 4,350 रूपए। फसल अमरूद हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 45,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 2,250 रूपए निर्धारित है। अतिरिक्त/एड-ऑन-कवरेज अंतर्गत फसल मिर्च हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 22,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 1100 रूपए। फसल केला हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 80,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 4,000 रूपए। फसल पपीता हेतु प्रति हेक्टेयर बीमित राशि 38,000 रूपए, किसान देय प्रीमियम राशि 1900 रूपए निर्धारित है।इसके अलावा फसल केला के लिए ओलावृष्टि हेतु दिनांक 1 जनवरी 2027 से 31 मई 2027, चक्रवाती हवाएं हेतु दिनांक 1 मार्च 2027 से 31 मई 2027, फसल पपीता के लिए ओलावृष्टि हेतु दिनांक 1 जनवरी 2027 से 30 अप्रैल 2027, चक्रवाति हवाएं हेतु दिनांक 1 मार्च 2027 से 31 मई 2027, फसल मिर्च के लिए ओलावृष्टि हेतु दिनांक 1 जनवरी 2027 से 31 मार्च 2027 जोखिम अवधि निर्धारित है।उद्यानिकी फसलों के बीमा हेतु इच्छुक कृषक च्वाइस सेंटर/ भारतीय कृषि बीमा कम्पनी के प्रतिनिधी/ लोक सेवा केन्द्र/ बैंक शाखा/ सहकारी समिति /ऑनलाइन पंजीयन/ विकासखंड में स्थापित विभागीय शासकीय उद्यान रोपणी विकासखंड दुर्ग (श्री रविश कुमार साहू, प्रभारी वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी,मो. नं 9993146452), विकासखंड धमधा (श्री कमलेश सिन्हा, प्रभारी वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी, मो. नं 9340113341) एवं वि.ख. पाटन (श्रीमती सुरभि श्रीवास्तव, प्रभारी वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी, मो. नं 9011648203) में संपर्क कर सकते है।
- 0- 3 किलोवाट रूफटॉप सोलर प्लांट ने दुर्ग के संतोष मेहता को बनाया ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरदुर्ग. प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम नागरिकों के लिए आर्थिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम बनकर सामने आई है। योजना का उद्देश्य प्रत्येक पात्र परिवार को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ते हुए बिजली बिल के बोझ को कम करना तथा अतिरिक्त बिजली उत्पादन के माध्यम से आय का अवसर उपलब्ध कराना है। दुर्ग शहर के गिरधारी नगर, वार्ड क्रमांक 9 की निवासी संतोष मेहता इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपने परिवार का बिजली खर्च लगभग समाप्त करने में सफल हुए हैं, बल्कि अब अतिरिक्त बिजली उत्पादन कर आर्थिक लाभ की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।श्री संतोष मेहता बताते हैं कि कुछ समय पहले तक उनके परिवार को हर माह बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था। गर्मी के मौसम में बिजली की खपत बढ़ने से बिल भी अधिक आता था, जिससे घरेलू बजट प्रभावित होता था। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना की पूरी प्रक्रिया समझी और अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कराया।उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए केंद्र सरकार से ₹78,000 तथा छत्तीसगढ़ शासन से ₹30,000 की सब्सिडी प्राप्त हुई। कुल ₹1.08 लाख की सरकारी सहायता मिलने से सोलर प्लांट की स्थापना आसान और किफायती हो गई।सोलर प्लांट स्थापित होने के बाद उनके घर की अधिकांश बिजली आवश्यकता सूर्य की ऊर्जा से पूरी होने लगी। अब उन्हें पहले की तरह हर महीने बिजली बिल की चिंता नहीं रहती। इसके साथ ही सोलर प्लांट से घर की आवश्यकता से अधिक बिजली का उत्पादन भी हो रहा है। यह अतिरिक्त बिजली नेट मीटरिंग प्रणाली के माध्यम से विद्युत वितरण कंपनी के ग्रिड में भेजी जा रही है। निर्धारित अवधि के बाद इस अतिरिक्त बिजली का आर्थिक लाभ भी उन्हें प्राप्त होगा।श्री मेहता का कहना है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना ने उनके परिवार को केवल बिजली बिल से राहत ही नहीं दी, बल्कि भविष्य के लिए बचत का एक नया माध्यम भी उपलब्ध कराया है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा अपनाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि इससे स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ता है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होती है। उन्होंने जिले के अन्य नागरिकों से भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि जिनके घरों की छत उपलब्ध है, वे इस योजना का लाभ अवश्य लें। सरकार द्वारा दी जा रही आकर्षक सब्सिडी के कारण सोलर प्लांट लगाना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और किफायती हो गया है।प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना आज दुर्ग सहित पूरे देश में हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह योजना आर्थिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को साकार करने के साथ-साथ विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। दुर्ग के संतोष मेहता की सफलता इस बात का सशक्त उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं की सही जानकारी और उनका समय पर लाभ उठाकर आम नागरिक अपने जीवन में स्थायी सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
- 0- डॉ वर्णिका शर्मा के प्रयास से शिक्षा की मुख्यधारा से दोबारा जुड़े दो भाईरायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में संचालित बाल चौपाल 2.0 अभियान केवल बच्चों की समस्याएं सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी पहल भी कर रहा है। हाल ही में तिल्दा विकासखंड के ग्राम सिनोधा में आयोजित बाल चौपाल 2.0 के दौरान बच्चों ने खुलकर अपने विचार और समस्याएं साझा कीं। इस अवसर पर अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों को बाल श्रम, शिक्षा का अधिकार तथा बाल संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी। संवाद के दौरान बच्चों ने बताया कि उनका एक मित्र, जो अत्यंत मेधावी छात्र रहा है, पारिवारिक परिस्थितियों के कारण पिछले लगभग दो वर्षों से बाल श्रम करने को विवश है और इसी वजह से वह शिक्षा के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो गया है।बच्चों द्वारा दी गई जानकारी को गंभीरता से लेते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने बाल चौपाल के पश्चात संबंधित क्षेत्र का स्वयं भ्रमण किया तथा बालक एवं उसके परिजनों से मुलाकात कर उनकी परिस्थितियों की जानकारी प्राप्त की। आयोग द्वारा स्थानीय प्रशासन एवं ग्राम पंचायत के समन्वय से आवश्यक पहल की गई। आयोग की सक्रिय पहल एवं ग्राम पंचायत के सहयोग से संबंधित बालक तथा उसके बड़े भाई, जो अन्य स्थान पर कार्यरत थे, दोनों का पुनः विद्यालय में प्रवेश सुनिश्चित कराया गया। वर्तमान में दोनों बच्चे नियमित रूप से विद्यालय जाकर अपनी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल चौपाल 2.0 का उद्देश्य केवल बच्चों की समस्याओं को सुनना नहीं, बल्कि उनके समाधान तक पहुंचना है। आयोग 'समस्या से संवाद, संवाद से समाधान' की कार्यसंस्कृति पर कार्य करते हुए प्रत्येक बच्चे को उसके अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह अभियान केवल संकल्प का नहीं, बल्कि सिद्धि और सकारात्मक परिवर्तन का अभियान बन चुका है, जिसके माध्यम से बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सभी नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी भी बच्चे के बाल श्रम, शिक्षा से वंचित होने अथवा बाल अधिकारों के उल्लंघन की जानकारी मिले, तो तत्काल इसकी सूचना संबंधित प्रशासन अथवा आयोग को दें, ताकि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और शिक्षित भविष्य प्रदान किया जा सके।
- 0- तालाबों की धरती पर खुलेगी समृद्धि की नई राह, किसानों और मछुआरों की आय बढ़ाने का बन सकता है बड़ा माध्यमरायपुर. छत्तीसगढ़ को वर्षों से "धान का कटोरा" कहा जाता है, लेकिन अब यह राज्य मखाना उत्पादन के क्षेत्र में भी अपनी नई पहचान बनाने की क्षमता रखता है। प्रदेश में हजारों तालाब, सिंचाई जलाशय, अनुकूल जलवायु और मेहनतकश मछुआरा समुदाय मखाना खेती के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। यदि योजनाबद्ध तरीके से प्रयास किए जाएं तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख मखाना उत्पादक राज्यों में शामिल हो सकता है।मखाना आज केवल एक पारंपरिक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि देश-विदेश में लोकप्रिय "सुपरफूड" बन चुका है। उच्च पोषण मूल्य, स्वास्थ्य लाभ और बढ़ती बाजार मांग के कारण इसकी खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनती जा रही है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 में मखाना विकास के लिए 476.03 करोड़ रुपये की केंद्रीय क्षेत्र योजना शुरू की है, जिसमें छत्तीसगढ़ को भी शामिल किया गया है।छत्तीसगढ़ के लिए क्यों है सुनहरा अवसर?प्रदेश के अधिकांश जिलों में बड़े और छोटे तालाबों का विशाल नेटवर्क मौजूद है। इनमें से अनेक जलाशयों का अभी भी पूर्ण उपयोग नहीं हो पा रहा है। यदि मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए, तो एक ही जलाशय से दोहरी आय प्राप्त की जा सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।विशेषज्ञों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की कन्हार मिट्टी, पर्याप्त जल उपलब्धता और जलवायु मखाना उत्पादन के लिए बेहद उपयुक्त हैं। वैज्ञानिक खेती तकनीकों को अपनाकर यहां बड़े पैमाने पर उत्पादन संभव है।मखाना मिशन से बदल सकती है तस्वीरकेंद्र सरकार की मखाना विकास योजना के प्रमुख उद्देश्य गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, मखाना क्षेत्र का विस्तार, किसानों का प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास, वैज्ञानिक खेती तकनीकों का प्रसार, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और विपणन को बढ़ावा, निर्यात को प्रोत्साहन तथा अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देना है।यदि इन उद्देश्यों के अनुरूप प्रदेश में कार्य किया जाए, तो मखाना खेती किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और मछुआरा सहकारी समितियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खोल सकती है।नवाचार से मिली नई दिशाछत्तीसगढ़ में मखाना खेती को बढ़ावा देने में कृषि वैज्ञानिक डॉ. गजेंद्र चंद्राकर के प्रयास उल्लेखनीय रहे हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रदेश की परिस्थितियां मखाना उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। उनके तकनीकी मार्गदर्शन में बालोद जिले में सफल मखाना खेती का प्रयोग किया गया है।केवल खेती ही नहीं, बल्कि लगभग 1.35 करोड़ रुपये की लागत से राज्य का पहला मखाना प्रोसेसिंग सेंटर भी स्थापित किया गया, जिससे उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की सुविधाएं उपलब्ध हो सकीं। "दाऊजी मखाना" ब्रांड ने भी बाजार में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी है।मछली और मखाना: दोहरी कमाई का मॉडलफिश-कम-मखाना फार्मिंग मॉडल छत्तीसगढ़ के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। मछली पालन के साथ मखाना उत्पादन करने से एक ही जलाशय से दोहरी आय, मछुआरा समुदाय की आर्थिक स्थिति मजबूत, जल संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव, महिला स्व-सहायता समूहों को रोजगार मिलेगा।ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योग विकसित हो सकेंगे।महिला समूहों के लिए रोजगार के अवसरमखाना खेती केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसके साथ जुड़े कई कार्य रोजगार सृजन के बड़े माध्यम बन सकते हैं, जैसे बीज प्रसंस्करण, मखाना भूनना और फोड़ना, ग्रेडिंग एवं पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंगमूल्य संवर्धित उत्पादों का निर्माणमखाना आधारित लघु उद्योग स्थापित कर स्थानीय स्तर पर स्थायी रोजगार के अवसर विकसित किए जा सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में एक समर्पित "छत्तीसगढ़ मखाना मिशन" शुरू किया जाना चाहिए। इसके तहत कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सिंचाई और पंचायत विभागों को मिलकर कार्य करना होगा। साथ ही किसानों, युवाओं, महिला समूहों और मछुआरा समितियों को प्राथमिकता देकर उन्हें प्रशिक्षण, अनुदान और बाजार से जोड़ना होगा।छत्तीसगढ़ के पास वह सब कुछ है, जो मखाना उत्पादन के लिए आवश्यक है जल, भूमि, श्रमशक्ति और संभावनाएं। यदि सरकार, वैज्ञानिक संस्थान और किसान मिलकर योजनाबद्ध तरीके से काम करें, तो आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ केवल "धान का कटोरा" ही नहीं, बल्कि "देश का उभरता हुआ मखाना राज्य" भी कहलाएगा।मखाना खेती किसानों की आय बढ़ाने, महिला सशक्तिकरण, मछुआरा समुदाय के आर्थिक उत्थान और ग्रामीण उद्योगों के विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती है। अब आवश्यकता है दूरदर्शी सोच और ठोस पहल की।
- 0- भू-अर्जन, किसान पंजीयन एवं स्वामित्व योजना की प्रगति की समीक्षा0- बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों एवं पुल-पुलियों का सर्वे कर कार्ययोजना बनाने के निर्देशबिलासपुर. कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने आज जिला कार्यालय के मंथन सभा कक्ष में आयोजित राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक में राजस्व विभाग के विभिन्न प्रकरणों एवं शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने राजस्व अधिकारियों को सभी लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा कि राजस्व सेवाओं का लाभ आम नागरिकों को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए। बैठक में नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे एवं एडीएम श्री शिवकुमार बनर्जी मौजूद थे।बैठक में कलेक्टर ने राष्ट्रीय राजमार्ग, रेल परियोजनाओं, आपसी सहमति से भूमि क्रय एवं भू-अर्जन अधिनियम के अंतर्गत लंबित प्रकरणों की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि भू-अर्जन से जुड़े सभी मामलों का समय पर निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा विधिवत भू-अर्जन की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाए। निर्माण एजेंसियों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों एवं पुल-पुलियों का सर्वे कर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त संरचनाओं के सुधार एवं पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। धान खरीदी की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि किसानों का पंजीयन एक जुलाई से प्रारंभ हो चुका है तथा एग्रीस्टैक के माध्यम से पंजीयन किया जा रहा है। उन्होंने इस कार्य को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए आरईओ एवं तहसीलदारों को समन्वय बनाकर पंजीयन कार्य में गति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों के पंजीयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। एफआरए (वनाधिकार) पट्टों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने पात्र हितग्राहियों को शीघ्र पट्टों का वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। वहीं स्वामित्व योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि यह शासन की प्राथमिकता वाली योजना है, इसलिए इसके सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं।बैठक में कलेक्टर ने नक्शा बंटांकन, आधार सीडिंग, डिजिटल हस्ताक्षरित खसरा, अभिलेख शुद्धता, अविवादित एवं विवादित नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन सहित अन्य राजस्व प्रकरणों की भी समीक्षा की तथा सभी मामलों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), निर्माण एजेंसी के अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
- 0- जहां बहता था पानी, वहीं अब बह रही है खुशहालीबिलासपुर. कभी हर बारिश के बाद ठरकपुर गांव का पानी नालों से बहकर दूर निकल जाता था। खेतों में नमी नहीं टिकती थी, कुएं और नलकूप सूख जाते थे, किसान एक फसल तक सीमित रहते थे लेकिन आज वही ठरकपुर गांव जल संरक्षण की ताकत से आत्मनिर्भरता और समृद्धि की नई मिसाल बन चुका है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित सामुदायिक सीसी चेक डैम ने न केवल वर्षा जल को सहेजने का काम किया, बल्कि किसानों के जीवन में ऐसा सकारात्मक बदलाव लाया, जिसने खेती, पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा प्रदान की।जिले के मस्तूरी विकासखंड के ग्राम पंचायत ठरकपुर में वर्ष 2025-26 के दौरान 19.01 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से निर्मित सामुदायिक सीसी चेक डैम आज ग्रामीण विकास, जल संरक्षण और कृषि समृद्धि का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। इस चेक डैम के निर्माण से गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। जहां पहले वर्षा का अधिकांश पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, वहीं अब उसका संरक्षण होने से खेतों, कुओं और नलकूपों में वर्षभर पानी उपलब्ध रहने लगा है। इससे किसानों को सिंचाई, पशुपालन और आजीविका के नए अवसर प्राप्त हुए हैं। ठरकपुर गांव लंबे समय से जल संकट और मिट्टी कटाव जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। वर्षा का पानी तेजी से बह जाने के कारण भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा था और रबी सीजन में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए ग्राम पंचायत ने मनरेगा के तहत नाले पर सीसी चेक डैम निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया, जिसे स्थानीय ग्रामीणों और मनरेगा श्रमिकों की सक्रिय भागीदारी से सफलतापूर्वक पूरा किया गया।चेक डैम बनने के बाद वर्षा जल का संचयन होने लगा और पानी धीरे-धीरे जमीन में समाने लगा। इससे आसपास के कुओं और नलकूपों का जलस्तर बढ़ा तथा गांव में सिंचाई की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। अब किसान वर्ष में दो से तीन फसलें लेने लगे हैं। टमाटर, मिर्च जैसी नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ा है और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मिट्टी का कटाव कम होने से खेतों की उर्वरता भी बनी हुई है। जल उपलब्धता बढ़ने से पशुपालन को भी नई दिशा मिली है। वर्षभर नाले में पानी रहने से पशुओं के लिए पेयजल और चारे की समस्या काफी हद तक समाप्त हो गई है, जिससे दुग्ध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि अब खेती और पशुपालन दोनों पहले की तुलना में अधिक लाभकारी हो गए हैं। गांव के एक किसान बताते हैं, पहले हमारी खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर थी। चेक डैम बनने के बाद सिंचाई की सुविधा मिलने से अब हम टमाटर और मिर्च जैसी नकदी फसलें उगा रहे हैं। हमारी वार्षिक आय लगभग दोगुनी हो गई है और अब खेती लाभ का सौदा बन गई है। यह जल संरक्षण की संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गया है।
- 0- जल संसाधन विभाग ने जारी किया अलर्टबिलासपुर. आगामी वर्षाकाल के दौरान आवश्यकता होने पर मिनीमाता बांगो बांध माचाडोली से हसदेव नदी में जल प्रवाहित किया जाएगा। वर्तमान में मिनीमाता बांगो बांध में लगभग 59.42 प्रतिशत जल भराव है। वर्षाकाल में आगामी दिनों में अत्यधिक वर्षा के कारण यदि मिनीमाता बांगो बांध जलाशय का जल स्तर तेजी से बढ़ेगा, तो तत्कालीन परिस्थिति के अनुसार मिनीमाता बांगो बांध का जलद्वार खोलकर हसदेव नदी में जल प्रवाहित किया जा सकता है। अतः सर्वसाधारण एवं कार्य एजेंसियों को सूचित किया जाता है कि बांध से नीचे, हसदेव नदी के किनारे, बाढ़ क्षेत्र में स्थापित चल-अचल संपत्ति सुरक्षित स्थानों पर ले जावें। बाढ़ क्षेत्र में स्थापित खनिज खदान, ठेकेदार, औद्योगिक इकाईयों, संस्थानों आदि को भी सूचित किया जाता है कि वह अपनी परिसंपत्तियों को बाढ़ क्षेत्र से बाहर कर लेवें। अकस्मात बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग उत्तरदायी नहीं होगा।बाढ़ क्षेत्रों में आने वाले संभावित ग्रामों में बांगो, चर्रा, पोंड़ी उपरोड़ा, कोनकोना, लेपरा, टुनियाकछार, पाथा, गाड़ाघाट, छिनमेर, कछार, कल्मीपारा, सिलयारीपारा, जुनापारा, तिलाईडांड, डुगुपारा, टुंगुमाड़ा, छिर्रापारा, मछलीबाटा, कोरियाघाट, धनगांव, डोंगाघाट, नरमदा, औराकछार, सोनगुड़ा, जेल गांव, झाबू, नवांगांव, तिलसाभाटा, लोतलोता, स्याहीमुड़ा, कोडा, हथमार, झोरा, सिरकीकला आदि शामिल है।
- बिलासपुर. महालेखाकार, रायपुर के निर्देशानुसार सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) से संबंधित लंबित प्रकरणों के त्वरित एवं समयबद्ध निराकरण के लिए 27 से 29 जुलाई 2026 तक जिला कोषालय, बिलासपुर में विशेष शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से सायं 5:30 बजे तक संचालित होगा।शिविर में जीपीएफ के ऋणात्मक शेष (निगेटिव बैलेंस), मिसिंग क्रेडिट तथा फुल/ पार्ट वांट क्रेडिट डेबिट से संबंधित लंबित प्रकरणों का निराकरण किया जाएगा। इसके लिए संबंधित विभागों के आहरण एवं वितरण अधिकारियों को निर्धारित तिथि पर आवश्यक अभिलेखों के साथ उपस्थित होकर लंबित प्रकरणों का निराकरण कराने की सुविधा उपलब्ध रहेगी।वरिष्ठ कोषालय अधिकारी श्री बसंत गुलेरी ने जिले के सभी आहरण एवं वितरण अधिकारियों से अपील की है कि वे निर्धारित तिथि पर आवश्यक दस्तावेजों सहित अनिवार्य रूप से शिविर में उपस्थित होकर अपने विभाग से संबंधित लंबित जीपीएफ प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि इस विशेष पहल का उद्देश्य कर्मचारियों के लंबित मामलों का शीघ्र और प्रभावी ढंग से निस्तारण कर उन्हें समय पर लाभ उपलब्ध कराना है।
- 0- विद्युत तार से टकरा रही पेड़ की डालियां हटाईं, संभावित दुर्घटना टलीबिलासपुर. बिलासपुर के मंगला स्थित दीनदयाल कॉलोनी निवासी अक्षत सिंह ठाकुर की सतर्कता और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत से एक संभावित दुर्घटना टल गई। उनके घर के पास से गुजर रहे विद्युत तारों से पेड़ की बड़ी डालियां लगातार टकरा रही थीं, जिससे बार-बार बिजली आपूर्ति बाधित हो रही थी। साथ ही, शॉर्ट सर्किट और जन-धन की हानि का भी खतरा बना हुआ था।अक्षत सिंह ठाकुर ने बताया कि उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए पहले संबंधित विद्युत विभाग के अधिकारियों से मौखिक रूप से संपर्क किया था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत दर्ज कराई।शिकायत दर्ज होने के बाद विद्युत विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर विद्युत तारों से सटी पेड़ की डालियों की छंटाई कराई। इससे न केवल विद्युत आपूर्ति में आ रही बाधा दूर हुई, बल्कि संभावित दुर्घटना का खतरा भी समाप्त हो गया।अक्षत सिंह ठाकुर ने बताया कि विभाग द्वारा की गई त्वरित कार्रवाई से वे पूरी तरह संतुष्ट हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही है। समय पर हुई कार्रवाई से उनकी समस्या का स्थायी समाधान हुआ और क्षेत्र के लोगों को भी राहत मिली।
- बिलासपुर. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत रिक्त संविदा पदों द्वितीय एनएनएम, स्टॉफ नर्स एसएनसीयू एवं एनआरसी, काउंसलर, नर्सिंग ऑफिसर-एनयूएचएम एवं हाउस कीपिंग स्टॉफ की पात्रता सूची जा कर दी गई है। सूची के संबंध में दावा आपत्ति निर्धारित प्रपत्र में 29 जुलाई 2026 तक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, बिलासपुर छ.ग. के नाम से कार्यालय के आवक जावक शाखा में जमा कर सकते है। अन्य किसी माध्यम से दावा आपत्ति आवेदन स्वीकार नहीं होंगे। सूची एवं दावा आपत्ति का प्रारूप जिले की वेबसाईट www.bilaspur.gov.in पर उपलब्ध है।
- बिलासपुर. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति द्वारा अतिरिक्त परियोजना संचालक डॉक्टर खेमराज सोनवानी के मार्गदर्शन में एचआईवी/एड्स के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘कनेक्ट’ कार्यशाला का आयोजन बिलासपुर में किया गया। कार्यशाला का विषय“एचआईवी/एड्स के प्रति जन जागरूकता में सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स की भूमिका” रहा। कार्यशाला में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और जनसंचार के क्षेत्र में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करते हुए एचआईवी संक्रमण की रोकथाम, नियंत्रण तथा जागरूकता संबंधी गतिविधियों में इंफ्लूएंसर्स की सहभागिता को आवश्यक बताया गया।विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को एचआईवी संक्रमण के कारणों, इसके फैलने के तरीकों, बचाव के उपायों तथा समय पर जांच और उपचार के महत्व और ब्रेकफ्री इंडिया और एच आई वी से जुड़े एक्ट के विषय में विस्तृत जानकारी दी। विशेषज्ञों ने बताया कि एचआईवी/एड्स से जुड़ी भ्रांतियों और भेदभाव को दूर करने के लिए सही एवं वैज्ञानिक जानकारी का व्यापक प्रसार आवश्यक है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से युवाओं और आमजन तक प्रभावी संदेश पहुंचाकर संक्रमण के प्रसार को रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य एड्स नियंत्रण समिति के सहायक संचालक, युवा मामले,सहायक संचालक आईसी व सहायक संचालक डॉक्यूमेंटेशन पब्लिकेशन द्वारा प्रतिभागियों को एचआईवी नियंत्रण कार्यक्रमों की जानकारी दी गई व सोशल मीडिया के माध्यम से जनहितकारी संदेशों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। कार्यशाला मेंजिले के नोडल अधिकारी डॉ. रक्षित जोगी ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया और एचआईवी/एड्स के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सोशल मीडिया की प्रभावी भूमिका पर प्रकाश डाला।कार्यशाला में प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। कार्यशाला में संभाग के विभिन्न जिलों के सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर्स, कंटेंट क्रिएटर्स तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिभागियों ने भाग लिया और एचआईवी/एड्स जागरूकता अभियान में सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया।कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का विशेषज्ञों द्वारा समाधान किया गया।
- 0- कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने महतारी वंदन योजना से लाभान्वित हितग्राहियों को ’एक पेड़ महतारी के नाम’ से पौधरोपण कर उनका समुचित देखभाल सुनिश्चित करने की अपील की0- महतारी वंदन योजना से लाभान्वित जिले के 02 लाख 50 हजार महिलाओं को उपयुक्त स्थानों पर अपने बच्चों के सुरक्षित भविष्य की कामना के साथ पौध रोपण करने को कहाबालोद. बालोद जिला प्रशासन द्वारा पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन सुनिश्चित करने हेतु समाज के सभी वर्गों की सहभागिता से जिले में अधिक से अधिक पौधरोपण करने हेतु गुरूवार 30 जुलाई को वृहद वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे इस महती अभियान में जिले के महतारी वंदन योजना से लाभान्वित हितग्राहियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु इस वृहद वृक्षारोपण अभियान के अवसर पर गुरूवार 30 जुलाई को महतारी वंदन वृक्षारोपण अभियान का भी आयोजन किया गया है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने महतारी वंदन योजना से लाभान्वित बालोद जिले के लगभग 02 लाख 50 हजार हितग्राहियों को गुरूवार 30 जुलाई को जिला प्रशासन द्वारा आयोजित महतारी वंदन वृक्षारोपण अभियान के अंतर्गत ’एक पेड़ महतारी (मां)’ के नाम से पौधरोपण कर रोपे गए पौधों का समुचित देखभाल सुनिश्चित करने की अपील की है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण का संरक्षण एवं संर्वधन करना हम सबकी प्राथमिक जवाबदारी है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जलशक्ति अभियान कार्यक्रम ’कैच द रैन’ के अंतर्गत वृक्षारोपण को बढ़ावा देकर जल संचयन का जो लक्ष्य हमें दिया है। उसे पूरा करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए उन्होंने जिले के महतारी वंदन योजना से लाभान्वित जिले के लगभग 02 लाख 50 हजार महिलाओं से गुरूवार 30 जुलाई को एक पेड़ महतारी मां के नाम से अनिवार्य रूप से पौध रोपण करने को कहा है। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कहा कि गुरूवार 30 जुलाई को सुबह 11 बजे जिला प्रशासन द्वारा जिला प्रशासन द्वारा आयोजित महतारी वंदन वृक्षारोपण अभियान ’एक पेड़ मां के नाम’ अभियान का एक हिस्सा है। इस अवसर पर उन्होंने जिले के महतारी वंदन योजना से लाभान्वित हितग्राहियों के अलावा जिले के सभी मातृ शक्तियों एवं बालिकाओं से भी जिला प्रशासन द्वारा पर्यावरण के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु चलाए जा रहे इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की है।इसके अंतर्गत उन्होंने जिले के सभी मातृ शक्तियों से अपने घर, बाड़ी एवं अपने खेत के आसपास के शासकीय भूमि, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन पर अपने मां के नाम पर या अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के नाम पर अनिवार्य रूप से पौधा लगाकर उनकी समुचित सुरक्षा लेने को कहा है। कलेक्टर ने कहा कि इस दौरान पौधरोपण हेतु सभी पौधे जिला प्रशासन द्वारा निःशुल्क आपके पंचायतों तक पहुँचाकर वितरित किए जाएंगे। कलेक्टर श्रीमती मिश्रा ने कहा कि पौधरोपण के दौरान पौधों के साथ अपनी फोटो सेल्फी लिंक पर अगर आप अपलोड करते है तो पर्यावरण की संरक्षण में किए गए योगदानों के लिए आपको एक प्रमाण पत्र भी प्राप्त होगा। श्रीमती मिश्रा ने कहा कि आपका छोटा सा प्रयास पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा और आने वाली पीढ़ी के लिए मिसाल बनेगा।
- 0- सियान गुड़ी में वृद्धजनों से मिलने पहुंचे शिक्षा विभाग के रिटायर्ड अफसररायपुर। बचपन में हम अपने मां- बाप की सुना करते थे, युवा हुए तो जिम्मेदारियों का दौर चला। अब रिटायरमेंट के बाद बच्चे कहते हैं, बाबा... आप ये मत करो- वो मत करो, ऐसा करो- वैसा करो। मैं कहता हूं कि रिटायरमेंट के बाद अब मैं खुद के लिए जीना चाहता हूं। अब अपना समय समाजसेवा, सियान गुड़ी में आप लोगों के साथ मनोरंजन और यह जिंदगी अपने लिए जीना चाहता हूं। महाराष्ट्र मंडल की ओर से संचालित और समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित सियान गुड़ी में वृद्धजनों से मिलने आए शिक्षा विभाग के रिटायर्ड अफसरों से महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक और सियान गुड़ी के प्रभारी श्याम सुंदर खंगन ने कहीं।श्याम सुंदर खंगन ने कहा कि हम खुद को वृद्ध न समझें, जीवन का काफी लंबा समय नौकरी करने के बाद अब हमने नए जीवन की शुरूआत की है। जीवन का यह समय मेरी तरह सभी को समाज को देना चाहिए। हमने समाज से बहुत कुछ लिया है। हमारा पद और प्रतिष्ठा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इसी समाज की देन है। महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ सभासद विनोद कुमार शेष और रमेश भास्कर राव पालकर ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। इस अवसर पर पालकर ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। इसके बाद सभी वृद्धजनों का स्वागत- सत्कार किया गया। इस दौरान सभी वरिष्ठजनों ने अपने विचार रखे और एक- दूसरे को समाजसेवा और सियान गुड़ी में आने के लिए प्रेरित किया।विनोद शेष ने कहा कि तात्यापारा का निवासी होने के कारण मैं तो बचपन से महाराष्ट्र मंडल से जुड़ा रहा। मंडल की सारी योजनाएं जनकल्याणकारी हैं। बात संत ज्ञानेश्वर स्कूल की हो या दिव्यांग बालिका विकास गृह की। मंडल से जुड़ा हर एक सदस्य समय- समय पर अपनी सेवाएं देता है। निःसंदेह सियान गुड़ी बुजुर्गों के लिए एक अच्छी योजना है। आप सभी लोगों को यहां आकर अपना समय व्यतीत करना चाहिए। मैं उम्र के इस पड़ाव में भी सप्ताह में चार दिन अपने गांव जाकर खेती- किसानी का काम देखता हूं। वहां भी सिर्फ कुर्सी पर नहीं बैठता, जरूरत पड़ने पर खेतों में भी उतरता हूं।छत्तीसगढ़ में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की प्रमुख नेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता लीना मोहन एंटी ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल से मेरा बरसों पुराना नाता है। मैं रायपुर आने पर मंडल के कामकाजी महिला वसती गृह में निवास करती थी। उस समय भी वह लड़कियों और महिलाओं के लिए जितना सुरक्षित था, उतना ही सुरक्षित आज भी है। महाराष्ट्र मंडल अब अपने सेवाभावी कार्यों का विस्तार तो कर ही रहा है, साथ ही पुराने कार्यों को भी अपग्रेड करते हुए उसे विस्तार भी दे रहा है।इस अवसर पर महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल, साधु राम साहू, केके पाठक, नंदकिशोर अग्रवाल, गोपाल प्रसाद अग्रवाल, अलका पटवा, लखनलाल साहू, डा. ओसी बिसेन, चित्रा बल्की, डा. कमल वर्मा, डा. ओपी बिसेन, श्यामल जोशी, सुशील कुमार श्रीवास्तव, मदन तोपखानेवाले, विवेक राहटगांवकर, रमेश कुमार शर्मा, नीलिमा साठे, कुमुद लाड, मालती मिश्रा, नमिता शेष, रेखा जोशी, अजीत शर्मा, विमला मिश्रा, मोहन एंटी, सरिता नासरे, शैल दुलारी, संध्या खंगन, श्याम दलाल, ओपी कटारिया, मुकुंद सगवई, रामराव सेंदरे, अनिल पांडे, हेमंत मार्डीकर, सुधा शर्मा, ज्योत्सना श्रवणे, दीपांजलि भालेराव, पद्मजा तिवारी, जेएस उरकुरकर प्रमुख वरिष्ठ जन विशेष रूप से उपस्थित रहे।
- दुर्ग. इंडियन रेडक्रॉस सोसायटी दुर्ग द्वारा जिला चिकित्सालय में संचालित ब्लड बैंक में रक्त की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने और नियमित रक्तदान शिविरों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 25 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे कला मंदिर, सिविक सेंटर, भिलाई में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई है। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष श्री अभिजीत सिंह करेंगे। बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, समाज प्रमुखों, शैक्षणिक संस्थानों, पुलिस एवं अर्धसैनिक बल, शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संघ, औद्योगिक संस्थानों, राजनीतिक दलों तथा स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, दुर्ग भिलाई प्रेस क्लब के समस्त सदस्य को आमंत्रित किया गया है। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित संस्थाओं एवं नागरिकों से अभियान में सक्रिय सहभागिता की अपील की है।
- भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई की आयुक्त सुरूचि सिंह ने गुरुवार को निगम के विभिन्न विकास, निर्माण, सौंदर्यीकरण एवं नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। निगम मुख्य कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य कार्यालय सहित सभी जोन कार्यालयों के अधिकारी उपस्थित रहे। आयुक्त ने बैठक में निगम के कार्यों को गति देने के साथ-साथ नागरिकों से जुड़ी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए सभी कार्य निर्धारित समय.सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए।समीक्षा बैठक में आयुक्त ने सबसे पहले निगम की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने के लिए ई-ऑफिस प्रणाली को प्राथमिकता से लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शत प्रतिशत नस्तियों को डिजिटल सिग्नेचर के साथ ई-ऑफिस के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए, ताकि शासकीय कार्यों में तेजी आए और फाइलों के निराकरण में अनावश्यक विलंब न हो। आयुक्त ने सभी जोन आयुक्त एवं संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों का प्रतिदिन भ्रमण कर जमीनी स्थिति का जायजा लेने तथा क्षेत्र में पाई जाने वाली समस्याओं और कमियों की तत्काल जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समाधान कार्यालय स्तर पर ही नहीं, बल्कि मौके पर पहुंचकर भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सीएम हेल्पलाइन से प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण करने तथा शिकायतों के लंबित रहने की स्थिति को गंभीरता से लेने के निर्देश भी दिए गए।आयुक्त ने लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं की उपस्थिति में नंदिनी रोड से अवंति बाई चौक तक लगभग 5 किलोमीटर सड़क निर्माण के सम्बन्ध में चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिये। इसके साथ ही मुख्य मार्गों की सड़कों पर हुए गड्ढों को तत्काल भरने और आवश्यक सुधार कार्य कराने के निर्देश दिए गए, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना को कम किया जा सके। आयुक्त ने प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए मकानविहीन परिवारों को योजना का लाभ समय पर दिलाने के लिए निर्माण कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों को आवास का लाभ जल्द से जल्द मिलना चाहिए और निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। शहर की प्रकाश व्यवस्था को लेकर आयुक्त ने अधिकारियों को प्रमुख मार्गों पर बंद स्ट्रीट लाइटों का तत्काल संधारण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने एलईडी लाइट की सप्लाई एवं रिपेयरिंग का कार्य व्यवस्थित रूप से कराने तथा प्रमुख चौक-चौराहों पर हाईमास्ट लाइट लगाने की दिशा में कार्यवाही करने को कहा, जिससे रात्रि के समय शहर में अंधेरा समाप्त हो और नागरिकों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।बैठक में डॉग हाउस एवं एमआरएफ प्लांट से संबंधित कार्यों को समय पर पूर्ण कर प्रारंभ कराने के निर्देश भी दिए गए। वहीं अनुष्ठा रेसिडेंसी क्षेत्र में सड़क एवं नाली निर्माण के लिए उपलब्ध आवास शुल्क का उचित उपयोग करने के निर्देश दिए गए। शासन द्वारा सौंपे गए पट्टा सर्वे कार्य की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने इसे निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सर्वे कार्य पूर्ण होने से पात्र नागरिकों को शासन की योजनाओं और सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में आसानी होगी। आयुक्त ने जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए शहर में अधिक से अधिक रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित कराने के लिए नागरिकों एवं व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्षाजल का संरक्षण भविष्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। निगम क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के साथ भवन एवं भूमि मालिकों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित किया जाए।नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आयुक्त ने बोरवेल का परीक्षण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच एवं आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। शहर के उद्यानों की सुरक्षा एवं बेहतर रखरखाव के लिए आवश्यकतानुसार बाउंड्रीवाल निर्माण कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही नागरिकों को पेंशन भुगतान से संबंधित कार्यों का पोर्टल के माध्यम से समय पर निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि पात्र हितग्राहियों को पेंशन का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। बैठक में अपर आयुक्त राजेंद्र दोहरे, मुख्य अभियंता अजीत कुमार तिग्गा, अधीक्षण अभियंता वेशराम सिन्हा, जोन आयुक्त, कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, लेखाधिकारी, स्वास्थ्य अधिकारी, राजस्व अधिकारी, उप अभियंता सहित निगम के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
- 0- अनुपस्थित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस, वेतन कटौती की होगी कार्रवाईबिलासपुर. संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर श्री ए.के. भारद्वाज ने शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं अनुशासित बनाने के उद्देश्य से विकासखंड तखतपुर के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमसेना, शासकीय हाई स्कूल कुरेली, शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लाखासार तथा विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में शैक्षणिक गतिविधियों, मध्यान्ह भोजन, साफ-सफाई, विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा शिक्षकों की नियमितता का जायजा लिया गया। शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमसेना में परिसर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए तथा मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई।।शासकीय हाई स्कूल कुरेली एवं शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लाखासार के निरीक्षण के दौरान कई शिक्षक एवं कर्मचारी बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित शिक्षकों एवं कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा नियमानुसार अनुपस्थित अवधि का वेतन काटने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। विद्यालय में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक मॉनिटरिंग में कमी पाए जाने पर संस्था प्रमुख को भी कड़ी फटकार लगाते हुए व्यवस्था में तत्काल सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।संयुक्त संचालक ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय तखतपुर का भी निरीक्षण किया। इस दौरान सेवा पुस्तिकाओं के संधारण, लंबित पेंशन प्रकरणों के निराकरण, मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन, बायोमेट्रिक उपस्थिति तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतों के त्वरित निराकरण की समीक्षा की गई। आवश्यक अभिलेखों के संधारण एवं कार्यों में कमियां पाए जाने पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी को भी कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिए गए।निरीक्षण के दौरान सभी संस्था प्रमुखों को विद्यालयों में नियमित शैक्षणिक गतिविधियां संचालित करने, पाठ्यक्रम समयबद्ध रूप से पूर्ण कराने, शिक्षा की गुणवत्ता में सतत सुधार लाने तथा विद्यार्थियों के हितों से जुड़े सभी कार्य प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। साथ ही जिन विद्यालयों में पाठ्यपुस्तक एवं गणवेश का वितरण शेष है, उसे शीघ्र पूर्ण करने तथा शासकीय हाई स्कूल कुरेली में साइकिल वितरण तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। संयुक्त संचालक श्री भारद्वाज ने स्पष्ट कहा कि विद्यालयों में अनुशासन, नियमित उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण का उद्देश्य शैक्षणिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
- रायपुर। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली से मानवाधिकार शिक्षा एवं लैंगिक समानता के विशेष पर्यवेक्षक प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने बुधवार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर का दौरा किया। उन्होंने कुलपति प्रोफेसर डॉ. मनोज दयाल से भेंट कर मानवाधिकार संरक्षण, पत्रकारों के हितों, उनके उत्थान एवं कल्याण तथा मानवाधिकार शिक्षा को सुदृढ़ करने अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए।प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने कहा कि पत्रकारिता लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ है। इसलिए पत्रकारिता का मानवाधिकारों, संवैधानिक मूल्यों और लैंगिक समानता, सामाजिक न्याय और जनहित के प्रति प्रतिबद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। जिससे वे समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।कांफ्रेंस रुम में प्राध्यापक, अधिकारी एवं कर्मचारियों से बैठक में मानवाधिकार, लैंगिक समानता और पत्रकारिता के विभिन्न आयामों पर प्रो. त्रिपाठी ने विस्तार से बात की। उन्होंने विश्वविद्यालय में पत्रकारिता और मानवाधिकार विषय पर नवीन पाठ्यक्रम, मानवाधिकार प्रकोष्ठ के गठन, विद्यार्थियों के लिए ह्यूमन राइट्स क्लब की स्थापना और जनसंचार एवं मानवाधिकार विषयक द्विभाषी शोध पत्रिका के प्रकाशन का प्रस्ताव दिया तथा केटीयू को मानवाधिकार जागरूकता, शोध एवं प्रशिक्षण गतिविधियों का केंद्र बनाने सुझाव दिए।विशेष पर्यवेक्षक प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने अध्ययन संकाय, प्रशासनिक प्रभाग सहित परिसर का निरीक्षण किया। प्रो. त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि पुस्तकालय के आधुनिकीकरण हो एवं ऑनलाइन डिजिटल लाइब्रेरी विकसित हो। टेलीविजन स्टूडियो और सामुदायिक रेडियो स्टेशन- रेडियों संवाद 90.8 एफएम में प्रो. त्रिपाठी ने विशेष भेंटवार्ता प्रोग्राम रिकार्डिंग की।लैंगिक समानता एवं संवेदनशीलता के लिए नियमित प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और संवाद तथा निःशुल्क चिकित्सकीय एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श के लिए विशेषज्ञ पैनल के गठन की अनुशंसा की गई। कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने उनके सुझावों पर शासन से समन्वय कर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।
- 0- मेधावी छात्रा तनुजा वर्मा को मिली 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशिरायपुर. श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों के लिए उच्च शिक्षा का मजबूत आधार बन रही है। योजना के तहत सिलतरा, रायपुर निवासी पंजीकृत निर्माण श्रमिक श्री सुनील वर्मा की पुत्री तनुजा वर्मा को कक्षा 10वीं की छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की प्रावीण्य सूची में 8वां स्थान प्राप्त करने पर कुल 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।श्री सुनील वर्मा ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पंजीकृत सदस्य हैं तथा मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय के कारण पुत्री की उच्च शिक्षा का खर्च वहन करना उनके लिए कठिन था। ऐसे समय में श्रम विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना उनके परिवार के लिए बड़ी सहायता साबित हुई।उन्होंने बताया कि दिनांक 5 जून 2026 को आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह में माननीय मुख्यमंत्री के करकमलों से उनकी पुत्री को योजना के अंतर्गत 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा दोपहिया वाहन क्रय करने हेतु 1 लाख रुपये प्रदान किए गए। इस प्रकार कुल 2 लाख रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई, जिसका उपयोग उनकी पुत्री की उच्च शिक्षा में किया जाएगा।श्री वर्मा ने कहा कि यह योजना श्रमिक परिवारों के मेधावी बच्चों के सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने इस सहयोग के लिए श्रम विभाग एवं छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना वर्ष 2012 से संचालित है। योजना का उद्देश्य पंजीकृत श्रमिकों के मेधावी बच्चों को आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना तथा शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा की प्रदेश स्तरीय प्रावीण्य सूची में प्रथम 10 स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राएं पात्र होते हैं।
- 0- निःशुल्क मरम्मत सेवा से फिर सुचारू हुआ बैटरी चालित ट्रायसिकलरायपुर. समाज कल्याण विभाग अंतर्गत संचालित संबल केंद्र, रायपुर द्वारा दिव्यांग हितग्राहियों को सहायक उपकरणों की मरम्मत की निःशुल्क सुविधा प्रदान की जा रही है। इसी कड़ी में सोंडोंगरी निवासी दिव्यांग हितग्राही श्री रमेश निर्मलकर को संबल केंद्र की सहायता से उनके बैटरी चालित ट्रायसिकल की मरम्मत कर पुनः उपयोग योग्य बनाया गया है।श्री निर्मलकर अपने दैनिक आवागमन एवं आवश्यक कार्यों के लिए बैटरी चालित ट्रायसिकल का उपयोग करते हैं। ट्रायसिकल का चार्जर खराब हो जाने के कारण उन्हें आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनके दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। समस्या की जानकारी प्राप्त होने पर उन्हें समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित संबल केंद्र बुलाया गया।संबल केंद्र के तकनीकी कर्मचारियों द्वारा ट्रायसिकल का परीक्षण किया गया, जिसमें चार्जर में खराबी पाई गई। आवश्यक मरम्मत कार्य के बाद चार्जर को ठीक कर ट्रायसिकल को पुनः सुचारू रूप से संचालित करने योग्य बना दिया गया। ट्रायसिकल के पुनः चालू होने से श्री निर्मलकर को आवागमन संबंधी समस्याओं से राहत मिली है। उन्होंने समाज कल्याण विभाग एवं संबल केंद्र द्वारा प्रदान की गई निःशुल्क मरम्मत सुविधा के लिए आभार व्यक्त किया।



























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