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नई दिल्ली। निदेशालय (ईडी) ने आज शुक्रवार को ट्रांस-अरुणाचल हाईवे से जुड़े मुआवजा घोटाले में बड़ी कार्रवाई की। ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत इस मामले में छापेमारी अभियान शुरू किया। यह मामला भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान मुआवजे के आकलन, उसके प्रमाणन और वितरण में हुई गंभीर अनियमितताओं से जुड़ा है।
आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में सरकारी अधिकारियों और निजी लाभार्थियों की आपसी मिलीभगत के जरिए अपराध की आय अर्जित की गई और बाद में उसका धन शोधन किया गया।ईडी की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह परियोजना कुल 157.70 किलोमीटर लंबी थी, जिसे प्रशासनिक रूप से याचुली (0.00–43.635 किमी), जीरो (43.635–63.700 किमी) और रागा (63.700–149.440 किमी) सेक्टरों में विभाजित किया गया था। जांच में सामने आया है कि जीरो के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर द्वारा शुरुआत में पोटिन-बोपी खंड के लिए 289.40 करोड़ रुपए का मुआवजा आकलन तैयार किया गया था।हालांकि, बाद में राज्य स्तरीय बैठक में इस मुआवजा पैकेज को सीमित करते हुए कुल 198.56 करोड़ रुपए पर फ्रीज कर दिया गया।ईडी की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि मुआवजा वितरण के दौरान भारी मात्रा में धन को बचत खातों में डायवर्ट किया गया और कई फर्जी लाभार्थियों के नाम पर चेक जारी किए गए। इससे सरकारी खजाने को लगभग 44 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। जांच एजेंसी के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों ने जानबूझकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ट्रांस-अरुणाचल हाईवे (पोटिन–बोपी) परियोजना के याजाली सेक्टर में संरचनाओं का फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर आकलन तैयार किया और उसका प्रमाणन किया। इसके जरिए अस्तित्वहीन संरचनाओं और अयोग्य लाभार्थियों के नाम जोड़कर अवैध रूप से मुआवजा दिलाया गया।जांच के तहत ईडी ने 6 आवासीय परिसरों पर तलाशी अभियान शुरू किया है। इनमें तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर, डीएलआरएसओ, आकलन से जुड़े अधिकारी और प्रमुख निजी लाभार्थी/कनड्यूट्स के ठिकाने शामिल हैं। छापेमारी का उद्देश्य दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य जुटाना तथा अपराध की आय से अर्जित चल-अचल संपत्तियों की पहचान करना है।ईडी के अनुसार, इन छह परिसरों में से चार इटानगर और उसके आसपास स्थित हैं, एक लिकाबाली (डिब्रूगढ़ के पास) में और एक आलो में है, जो मेचुका-चीन सीमा के नजदीक स्थित है। तलाशी के ये स्थान अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी से पूर्वी हिस्सों तक फैले हुए हैं और इनमें सीमा से सटे, दुर्गम पहाड़ी इलाकों के संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्र भी शामिल हैं।तलाशी के दौरान एक फर्जी लाभार्थी के परिसर से 2.2 करोड़ रुपए नकद बरामद किए जाने की भी पुष्टि हुई है। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। -
नई दिल्ली।‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को जारी ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में छात्रों के साथ बोर्ड परीक्षाओं और जीवन की चुनौतियों पर बातचीत की। उन्होंने छात्रों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। छात्र भी प्रधानमंत्री के लिए खास गिफ्ट लेकर आए। इसी बीच सिक्किम की एक छात्रा ने उन्हें ‘चाय’ भेंट की, जिस पर पीएम मोदी ने हंसते हुए कहा कि ‘चाय वाले को चाय’।
छात्रों ने पीएम मोदी के सामने कई एक्टिविटी कींगीत और कविता से लेकर बांसुरी बजाने तक, छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने कई एक्टिविटी कीं। एक छात्रा उनका स्केच लेकर आई, जबकि एक अन्य छात्रा ने उन्हें हैंडमेड बुके दिया। उत्तराखंड का एक छात्र पीएम मोदी के लिए खास तरह की टोकरी लेकर आया, जिसका धार्मिक महत्व बसंत पंचमी के साथ जुड़ा है।एक छात्र ने पीएम मोदी को त्रिपुरा सुंदरी की तस्वीर भेंट कीएक छात्र ने पीएम मोदी को त्रिपुरा सुंदरी की तस्वीर भेंट की। वहीं असम के एक छात्र ने पीएम मोदी को अपने राज्य की पहचान यानी असम का गमछा दिया।परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के पहले एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘आपका स्टाइल-आपकी गति’ से लेकर ‘लक्ष्य के साथ तैयारी’, ‘कम प्रेशर-ज्यादा सीखना’, ‘शोर के बीच टिके रहना’, ‘बड़े सपने-बड़े काम’ तक अलग-अलग विषयों पर छात्रों से संवाद किया। इसी बीच, उन्होंने छात्रों के कई सवालों के भी जवाब दिए।पीएम मोदी ने ‘मार्क्स, गेम्स और हंसी के बीच बैलेंस’ पर भी छात्रों को महत्वपूर्ण सुझाव दिए। रायपुर के आर्यन शर्मा जैसे छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए, जो जानना चाहते थे कि पढ़ाई और असल दुनिया की तैयारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, और गुवाहाटी की प्रिया कुमारी, जो करियर की तैयारी के बारे में पूछ रही थीं, PM मोदी ने जीवन कौशल के सार पर बात की।पीएम मोदी ने रोजमर्रा की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका महत्व सिर्फ महान नहीं है, यह बेहतरीन है। प्रोफेशनल स्किल्स को लेकर पीएम मोदी ने छात्रों से खुद को ‘पूरी तरह से अप-टू-डेट’ रखने का आग्रह किया। ( -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) उनकी पीढ़ी की सुपरपावर है और इसका उपयोग समझदारी और सही तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI मेहनत की जगह नहीं लेता, बल्कि क्षमता बढ़ाने का साधन है।
प्रधानमंत्री ने यह बात अपने आवास पर आयोजित परीक्षा पे चर्चा के नौवें संस्करण के दौरान कही। कार्यक्रम में परीक्षा की तैयारी, जीवन कौशल और भविष्य की तैयारी जैसे विषयों पर चर्चा हुई।प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के छात्रों को ऐसी तकनीकी सुविधाएं मिली हैं, जो पहले की पीढ़ियों को उपलब्ध नहीं थीं। उन्होंने कहा कि इन अवसरों का सही उपयोग करने के लिए बुद्धिमत्ता और विवेक जरूरी है। AI का उद्देश्य छात्रों की सोच और समझ को आगे बढ़ाना होना चाहिए।उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि AI का उपयोग इस तरह किया जा सकता है कि किसी जीवनी का संक्षेप में सार निकाला जाए या फिर अपनी उम्र और रुचि के अनुसार अच्छी किताबों की सूची तैयार करवाई जाए। इससे सीखने की प्रक्रिया आसान और प्रभावी बन सकती है।प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि AI का ऊपरी और सतही उपयोग सीमित लाभ देता है, जबकि सोच-समझकर किया गया उपयोग गहरी समझ और व्यक्तिगत विकास में मदद करता है।उन्होंने छात्रों से अपील की कि AI को सीखने, रचनात्मकता और नवाचार के साधन के रूप में अपनाएं, लेकिन उस पर पूरी तरह निर्भर न रहें।कार्यक्रम में चंडीगढ़ की छात्रा अनन्या शर्मा ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि AI एक सहायक उपकरण है, जो आगे बढ़ने में मदद करता है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचाने का काम मेहनत और सोच को ही करना होता है। उन्होंने बताया कि वह AI का उपयोग तकनीक से जुड़े ऐप बनाने में करती हैं।प्रधानमंत्री की यह बात कार्यक्रम के मूल उद्देश्य से जुड़ी रही, जिसमें परीक्षा को तनाव का कारण नहीं, बल्कि जीवन की यात्रा का एक पड़ाव बताया गया।यह संवाद दूरदर्शन, प्रधानमंत्री के यूट्यूब चैनल और अन्य मंचों पर सुबह 10 बजे से सीधा प्रसारित किया गया। इसमें देशभर के छात्र जुड़े।इस बार 6.76 करोड़ से अधिक लोग कार्यक्रम से जुड़े, जिनमें 4.19 करोड़ छात्र, बड़ी संख्या में शिक्षक और अभिभावक शामिल थे। कार्यक्रम का उद्देश्य परीक्षा के तनाव को कम करना और छात्रों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना रहा। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बृहस्पतिवार को लोकसभा को बताया कि केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने राज्यों को अमृत योजना के तहत संवेदनशील क्षेत्रों और जीर्ण-शीर्ण अवसंरचनाओं का व्यापक आकलन करने के लिए एक परामर्श जारी किया है, ताकि शहरी क्षेत्रों में पेयजल को दूषित होने से रोका जा सके। इंदौर में दूषित पेयजल के कारण कई लोगों की मौतें होने कुछ दिनों बाद, पिछले महीने यह परामर्श जारी किया गया। आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा, ''स्वास्थ्य संबंधी खतरों को रोकने के लिए, मंत्रालय ने जनवरी 2026 में सभी राज्यों को संवेदनशील क्षेत्रों और जीर्ण-शीर्ण अवसंरचनाओं का व्यापक आकलन करने, जल आपूर्ति पाइप लाइनों के निकट सीवर लाइन का पता लगाने और अमृत योजना के तहत निर्मित भू-स्थानिक डेटाबेस का उपयोग करके मौजूदा जल और सीवर नेटवर्क का डिजिटल मानचित्रण करने के लिए एक परामर्श जारी किया था।'' उन्होंने कहा कि जल और स्वच्छता राज्य के विषय हैं, और पुरानी पाइपलाइन और जल निकासी/सीवेज व्यवस्था की मरम्मत राज्य सरकारों और संबंधित शहरी स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी है। मंत्री ने कहा कि हालांकि, भारत सरकार योजनाबद्ध हस्तक्षेपों और परामर्श के माध्यम से राज्यों के प्रयासों में सहयोग करती है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौते के बाद स्थिरता का एहसास कर रहे विश्व को अमेरिका के साथ देश के इसी तरह के करार के बाद अब गति का भी एहसास होने लगा है। उच्च सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ''पिछले कुछ समय में विश्व के नौ बड़े देशों के साथ हमारे समझौते हुए हैं और उसमें 'मदर ऑफ आल डील' में यूरोपीय संघ के 27 देशों के साथ एकमुश्त समझौता हुआ है।'' उन्होंने कहा, ''विकसित देश अपने आप भारत के साथ व्यापार समझौता करने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई विकसित देश किसी विकासशील देश के साथ अपने आप व्यापार समझौता करता है तो यह भी अर्थजगत के लिए बहुत बड़ा संदेश है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत विश्व के साथ स्पर्धा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (एमएसएमई) नेटवर्क पर पूरा ध्यान दिया है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि जब ईयू के साथ समझौता हुआ तो लोगों को लगा कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता की संभावना बढ़ेगी। मोदी ने कहा, ''अमेरिका के साथ व्यापार समझौता होने के बाद विश्व को और भरोसा हो गया कि जो स्थिरता का एहसास हो रहा था... अब गति का भी एहसास होने लगा है। यह विश्व के लिए शुभ संकेत है।'' उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक फायदा देश के नौजवानों का होगा और इसमें बेटा और बेटियां दोनों शामिल हैं, हर वर्ग के युवा शामिल हैं।
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नयी दिल्ली. आर्थिक मामलों की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा है कि अगले वित्त वर्ष के लिए प्रस्तावित 17.2 लाख करोड़ रुपये का ऋण बाजार को बाधित किये बिना जुटाया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निजी क्षेत्र के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध हो। उन्होंने कहा, ''सरकारी ऋण कार्यक्रम में 5.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज भुगतान भी शामिल है। इस प्रकार, कुल ऋण 11.73 लाख करोड़ रुपये होगा। यानी यह पहले की तरह ही लगभग समान है।" जब उनसे पूछा गया कि क्या रिकॉर्ड 17.2 लाख करोड़ रुपये का ऋण निजी निवेश को प्रभावित कर सकता है, उन्होंने कहा, ''... हमें लगता है कि यह एक उचित आंकड़ा है। कुल मिलाकर, यह एक बड़ी राशि है, लेकिन यह भी सही है कि बड़ी संख्या में बॉन्ड भी परिपक्व हो रहे हैं।" ठाकुर ने भरोसा दिलाया कि यह कर्ज प्रबंधन योग्य है और यह आंकड़ा सावधानीपूर्वक गणना और विश्लेषण के बाद तय किया गया है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 14.61 लाख करोड़ रुपये के सकल उधारी का अनुमान लगाया है, जबकि बजट अनुमान 14.82 लाख करोड़ रुपये था। सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए बाजार से प्रतिभूतियों के माध्यम से उधार लेती है।
वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) से संबंधित बजट घोषणा के बारे में, उन्होंने कहा कि इस बजट में उद्योग की लंबे समय से जारी मांग को पूरा किया गया है। उन्होंने कहा कि वे मांग कर रहे थे कि क्या एलएलपी (सीमित जवाबदेही भागीदारी) अधिनियम में संशोधन किया जा सकता है और इसे एआईएफ की कार्यात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सकता है। संशोधन का उद्देश्य एआईएफ की परिचालन बाधाओं को दूर करना है।
आर्थिक मामलों की सचिव ने कहा कि भागीदारों के प्रवेश और निकास के लिए दस्तावेज दाखिल करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा और ये संशोधन इस प्रकार के होंगे कि एलएलपी बनने पर उनकी जवाबदेही सीमित हो जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए पोर्टफोलियो निवेश योजना (पीआईएस) के माध्यम से भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों (पीआरओआई) को इक्विटी शेयर में निवेश करने की अनुमति देने का बजट प्रस्ताव एक और महत्वपूर्ण घोषणा है। ठाकुर ने कहा, ''पीआरओआई को पोर्टफोलियो निवेश योजना के माध्यम से सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों के इक्विटी शेयर में निवेश करने की अनुमति दी जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को अपने बजट भाषण में कहा, ''इस योजना के तहत एक व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए निवेश सीमा को पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का भी प्रस्ताव है। इससे सभी व्यक्तिगत पीआरओआई के लिए कुल निवेश सीमा वर्तमान 10 प्रतिशत से बढ़कर 24 प्रतिशत हो जाएगी। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को देश के पहले सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा मंच 'भारत टैक्सी' की शुरुआत की। दो महीने के सफल पायलट परीक्षण के बाद शुरू की गई यह टैक्सी सेवा फिलहाल दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में शुरू की गई है। इस मंच के उद्घाटन अवसर पर शाह ने कहा, ''अगले तीन वर्षों में भारत टैक्सी सेवा को कश्मीर से कन्याकुमारी और द्वारका से कामाख्या तक देशभर में चालू कर दिया जाएगा।'' उन्होंने कहा कि इस ऑनलाइन टैक्सी सेवा मंच से होने वाला लाभ इससे जुड़े ड्राइवरों के साथ साझा किया जाएगा। इस टैक्सी सेवा के तहत ग्राहक आवागमन के लिए कार के साथ तिपहिया और दोपहिया वाहनों की भी बुकिंग कर सकेंगे। फिलहाल देश के ऑनलाइन टैक्सी बाजार पर उबर, ओला और रैपिडो जैसी कुछ चुनिंदा कंपनियों का वर्चस्व है।
बहु-राज्य सहकारी सोसायटी अधिनियम, 2002 के तहत पंजीकृत भारत टैक्सी मंच की स्थापना छह जून, 2025 को की गई थी। इस मंच पर न तो किसी कमीशन का प्रावधान है और न ही व्यस्त समय में किसी तरह की किराया बढ़ोतरी का प्रावधान होगा। इसमें मुनाफे का सीधा वितरण ड्राइवरों के बीच किया जाता है। आठ प्रमुख सहकारी संगठनों के सहयोग से शुरू हुए इस मंच ने दो दिसंबर को दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में पायलट संचालन शुरू किया था। सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, भारत टैक्सी दुनिया का पहला और सबसे बड़ा सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा मंच और ड्राइवरों के स्वामित्व वाला सबसे बड़ा परिवहन मंच बनकर उभरा है। पायलट चरण के बाद से अब तक तीन लाख से अधिक ड्राइवर इस मंच से जुड़ चुके हैं, जबकि एक लाख से ज्यादा उपयोगकर्ताओं ने पंजीकरण कराया है। दिल्ली-एनसीआर और गुजरात में प्रतिदिन 10,000 से अधिक यात्राएं पूरी की जा रही हैं और अब तक करीब 10 करोड़ रुपये सीधे ड्राइवरों को वितरित किए जा चुके हैं। इस मंच से जुड़े ड्राइवरों को 'सारथी' कहा जाता है। यह उनके लिए स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, सेवानिवृत्ति बचत और समर्पित सहायता प्रणाली जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं को भी प्राथमिकता देता है। दिल्ली में भारत टैक्सी सेवा के लिए सात सहायता केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। -
नई दिल्ली। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएमआरसीएल) ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर किराए में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी की घोषणा की। नई दरें 9 फरवरी से लागू होंगी। बीएमआरसीएल के जनसंपर्क अधिकारी बीएल यशवंत चौहान ने बताया, “किराया निर्धारण समिति के अनुसार, हर साल एक फॉर्मूले के तहत प्रतिशत के आधार पर गणना की जाती है। इसमें अधिकतम 5 प्रतिशत और न्यूनतम 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाती है। जब गणना की गई, तो 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की जरूरत थी। चूंकि इसे लागू नहीं किया जा सकता था, इसलिए एफएफसी के अनुसार, सिर्फ 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है।”
उन्होंने बताया कि नई दरों के लागू होने के बाद न्यूनतम किराया 10 रुपए से बढ़ाकर 11 रुपए और अधिकतम किराया 90 रुपए से बढ़ाकर 95 रुपए होगा।बयान में कहा गया है, “एफएफसी ने बीएमआरसीएल के लिए संशोधित किराया संरचना की सिफारिश करते हुए पाया कि 7.5 साल बाद किराए में बदलाव और किराया जोन को 29 से घटाकर 10 करने से किराए में औसतन 51.55 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। भविष्य में बार-बार और अचानक किराए में बढ़ोतरी जैसी स्थिति से बचने के लिए समिति ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की है कि किराए को सालाना आधार पर रिवाइज किया जाए, जिसके लिए एक पारदर्शी वार्षिक ऑटोमैटिक किराया संशोधन फॉर्मूला हो, जो ऑपरेशन और मैनेजमेंट लागत या 5 प्रतिशत प्रति साल, जो भी कम हो, से जुड़ा हो और इसे निकटतम रुपए में राउंड ऑफ किया जाए।”अधिकारियों ने बताया कि एफएफसी की सिफारिशों बीएमआरसीएल पर बाध्यकारी हैं। सिफारिशों के अनुसार, यह सूचित किया जाता है कि वार्षिक ऑटोमैटिक किराया संशोधन 9 फरवरी से लागू होगा, जो बीएमआरसीएल की ओर से एफएफसी के सुझाए गए किराए को लागू करने की तारीख से 1 साल पूरा होने पर होगा।बीएमआरसीएल ने बताया कि 96.10 किलोमीटर के अपने पूरे नेटवर्क पर 10 किराया जोन में मामूली बढ़ोतरी न्यूनतम 1 रुपए और अधिकतम 5 रुपए है। बयान में कहा गया।” वित्तीय वर्ष 2024-25 के ऑडिट किए गए वित्तीय डेटा के आधार पर फॉर्मूला-आधारित इंडेक्स 10.20 प्रतिशत की लागत वृद्धि दिखाता है। हालांकि, एफएफसी की शर्त के अनुसार, किराए में बढ़ोतरी सिर्फ 5 प्रतिशत तक सीमित रखी गई है।नई दरों के बाद जीरो से दो किलोमीटर मेट्रो यात्रा का किराया 10 रुपए की जगह 11.2 रुपए होगा, 4 किलोमीटर के लिए 21.4 रुपए और इसी तरह आगे भी। बीएमआरसीएल ने कहा कि वह स्मार्ट-कार्ड, एनसीएमसी यूजर्स के लिए सभी मौजूदा यात्री-अनुकूल छूट जारी रखेगा, जैसे पीक आवर्स के दौरान 5 प्रतिशत छूट, रविवार को और तीन नेशनल हाईवे पर नॉन-पीक आवर्स के दौरान 10 प्रतिशत छूट। हालांकि, टूरिस्ट कार्ड और ग्रुप टिकट पर 5 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी लागू होगी।बयान में कहा गया है, “बीएमआरसीएल का फोकस यह है कि यह छोटा सालाना बदलाव फाइनेंशियल स्थिरता और सर्विस की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए है, ताकि भविष्य में बड़े और अचानक किराए में बढ़ोतरी की जरूरत न पड़े। यह तरीका किराए को महंगाई और ऑपरेटिंग लागत के हिसाब से धीरे-धीरे बढ़ने देता है, जिससे यात्रियों को अचानक, बार-बार होने वाली बढ़ोतरी से बचाया जा सके।” - नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, बॉम्बे के वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली टी-सेल आधारित थेरेपी के लिए एक नई और आसान तकनीक विकसित की है। इस तकनीक से लैब में तैयार की गई रोग-प्रतिरोधक कोशिकाओं (T-cells) को सुरक्षित तरीके से वापस निकाला जा सकता है।CAR T-cell जैसी इम्यूनोथेरेपी में मरीज के खून से T-cells निकाली जाती हैं। इन कोशिकाओं को लैब में बड़ी संख्या में बदला और बढ़ाया जाता है, फिर दोबारा मरीज के शरीर में डाला जाता है ताकि वे कैंसर से लड़ सकें।लैब में उगाई गई इन कोशिकाओं को वापस निकालते समय यह ज़रूरी होता है कि वे जिंदा और सक्रिय बनी रहें। इसलिए उन्हें उगाने और सुरक्षित तरीके से वापस पाने की प्रक्रिया बहुत अहम होती है।IIT बॉम्बे के बायोसाइंसेज़ और बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर Prakriti Tayalia ने कहा कि कागज़ पर यह काम आसान लगता है, लेकिन असल में कोशिकाओं को सुरक्षित तरीके से वापस पाना सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा कि अगर स्वस्थ कोशिकाएं पर्याप्त संख्या में न मिलें, तो न तो सही जांच हो सकती है और न ही इलाज संभव है।शरीर के प्राकृतिक माहौल जैसा वातावरण बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने इलेक्ट्रोस्पिनिंग नाम की प्रक्रिया से बने एक खास ढांचे (स्कैफोल्ड) का इस्तेमाल किया। यह ढांचा बहुत बारीक रेशों से बनी चटाई जैसा होता है, जो मछली पकड़ने के जाल जैसा दिखाई देता है।शोध दल ने पॉलीकैप्रोलैक्टोन नाम की सामग्री से बने इस ढांचे में Jurkat T-cells को उगाया। माइक्रोस्कोप से देखने पर पाया गया कि कोशिकाएं खुद इस ढांचे के अंदर चली गईं और रेशों के बीच मजबूती से फंस गईं।अध्ययन में यह भी सामने आया कि जब कोशिकाओं को ट्रिप्सिन (trypsin) नाम के एंजाइम से निकाला गया, तो उनमें से कई नष्ट हो गईं। वहीं, जब अक्यूटेज़ (accutase) नाम के हल्के एंजाइम का इस्तेमाल किया गया, तो ज्यादा कोशिकाएं सुरक्षित रहीं और स्वस्थ T-cells की तरह व्यवहार करती रहीं।ये कोशिकाएं आपस में समूह बनाती दिखीं, जो उनके विभाजन से पहले का जरूरी चरण होता है, और वापस निकालने के बाद भी अच्छी तरह बढ़ती रहीं।प्रोफेसर टायलिया ने बताया कि ट्रिप्सिन जैसे तेज एंजाइम कोशिकाओं की सतह पर मौजूद जरूरी प्रोटीन को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे उनकी इलाज में उपयोगिता कम हो जाती है। वहीं, अक्यूटेज़ इतना हल्का है कि यह नुकसान नहीं करता।यह शोध Biomaterials Science नाम की वैज्ञानिक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे लैब में CAR T-cell जैसी उन्नत थेरेपी के लिए कोशिकाएं तैयार करना आसान हो जाएगा। प्रोफेसर टायलिया ने कहा कि अगर ऐसी आधुनिक थेरेपी को मरीजों तक पहुंचाना है, तो हर चरण अहम है—कोशिकाओं को कैसे उगाया जाए और कैसे सुरक्षित निकाला जाए, इससे इलाज के नतीजों में बड़ा फर्क पड़ता है।
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नयी दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने वित्तीय प्रलोभन और ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए भ्रामक संदेशों और लिंक के प्रसार से जुड़े अपराधों में वृद्धि का संज्ञान लिया है और कहा है कि ये लोगों के विश्वास और डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा हैं। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने धोखाधड़ी के लिए फर्जी तरीके से सिम कार्ड प्राप्त करने की एक बड़ी साजिश के ''मुख्य सूत्रधार'' होने के आरोपी दो व्यक्तियों की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि चक्षु मॉड्यूल और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों से पता चला है कि दो आरोपियों द्वारा नियंत्रित एक कंपनी को जारी किए गए कई सिम नंबरों का उपयोग ऋण, स्वीकृत क्रेडिट और वित्तीय प्रलोभनों से संबंधित भ्रामक संदेशों को प्रसारित करने के लिए किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लोगों को आर्थिक नुकसान हुआ। अदालत ने कहा कि जांच अभी शुरुआती दौर में है और पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए आरोपियों से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अदालत ने 21 जनवरी को पारित अपने आदेश में कहा, ''आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री की प्रकृति और दूरसंचार अवसंरचना के दुरुपयोग से जुड़े अपराधों में आवेदकों के प्रथम दृष्टया संबंध को देखते हुए, न्यायालय को आवेदकों को अग्रिम जमानत की असाधारण सुरक्षा प्रदान करने का कोई आधार नहीं मिलता है।'' इसमें कहा गया है, ''इस न्यायालय का मानना है कि वित्तीय प्रलोभनों के लिए भ्रामक संदेशों और लिंक के प्रसार तथा ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े अपराध बढ़ रहे हैं और लोगों के विश्वास तथा डिजिटल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।'' सीबीआई ने अग्रिम जमानत की अर्जी का विरोध किया।
एजेंसी के वकील ने बताया कि हजारों सिम कार्ड जानबूझकर गलत अंतिम उपयोगकर्ता विवरण प्रदान करके और केवाईसी प्रक्रिया का दुरुपयोग करके प्राप्त किए गए थे। इसने तर्क दिया कि इस अपराध का समाज पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और इससे डिजिटल सुरक्षा कमजोर होती है। -
नयी दिल्ली. केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए मददगार एक किताब का बुधवार को विमोचन किया। एक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान में कहा गया है कि मेघवाल ने यहां देश की शासन प्रणाली, प्रशासनिक व्यवस्था, सामाजिक न्याय और संविधान के विविध पहलुओं पर प्रकाश डालने वाली पुस्तक 'इंडियन पॉलिटी' का विमोचन किया। इस पुस्तक के लेखक भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी वाई कुमार हैं। किताब के प्रकाशक लोकेश थानी ने बताया कि यह किताब संविधान के गहन अध्ययन के बाद सिविल सेवा परीक्षा के अभ्यर्थियों को आसान भाषा में भारतीय संविधान, शासन और सामाजिक न्याय की विस्तार से जानकारी देती है।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को संसद को बताया कि देश भर में अब तक जारी किये गए कुल 11.86 करोड़ फास्टैग में से लगभग 5.9 करोड़ चालू हैं। फास्टैग का उपयोग टोल भुगतान करने के लिए किया जाता है।
केंद्रीय सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्गों पर 98 प्रतिशत से अधिक उपयोगकर्ता शुल्क इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (ईटीसी) प्रणाली के माध्यम से एकत्र किया जाता है। गडकरी ने उच्च सदन को बताया, ''दिसंबर 2025 तक, जारी किए गए कुल 11.86 करोड़ फास्टैग में से, लगभग 5.9 करोड़ फास्टैग चालू हालत में हैं और 'नेशनल हाईवे फी प्लाजा' पर इलेक्ट्रॉनिक टोल लेनदेन के लिए उपयोग किए जाते हैं।'' उन्होंने बताया कि इन स्थानों पर प्रतिदिन होने वाले ईटीसी लेनदेन की औसत संख्या 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) में लगभग 105 लाख है। राजमार्ग उपयोगकर्ताओं द्वारा फास्टैग का निरंतर बढ़ता उपयोग उत्साहजनक है और इससे टोल संचालन की दक्षता बढ़ी है। वार्षिक पास सुविधा के बारे में उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 2025 को इस पहल की शुरूआत किये जाने के बाद से, 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 42 लाख वार्षिक पास चालू किए जा चुके हैं, जिससे 19 करोड़ से अधिक लेनदेन सुगम हुए हैं। वर्तमान में, लगभग 25 प्रतिशत गैर-वाणिज्यिक वाहन वार्षिक पास का उपयोग करके फास्टैग लेनदेन कर रहे हैं। गडकरी ने बताया कि 2024-25 के दौरान राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह कार्यक्रम के संबंध में किये गए एक प्रभाव आकलन से पता चलता है कि ईटीसी संचालन के तहत एक वाहन द्वारा शुल्क प्लाजा को पार करने में लगने वाला औसत समय 40 सेकंड है, जबकि पहले की प्रणाली में प्रति वाहन 12.23 मिनट का समय लगता था। एक अन्य प्रश्न के लिखित जवाब में, उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों (2022-23, 2023-24 और 2024-25) के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर शुल्क प्लाजा पर एकत्र की गई कुल उपयोगकर्ता शुल्क राशि 1,65,322.67 करोड़ रुपये है। -
खरगोन (मध्यप्रदेश). राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह सेवा, कर्म और सामूहिक कल्याण की भावना का प्रतीक है। जिले के कसरावद में स्थित लेपा गांव में एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा उपकार करने में नहीं, बल्कि सेवा की भावना में निहित है और दूसरों की सेवा करना भारत का धर्म है। संघ की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार सरसंघचालक ने कहा, ''हमारे यहां चैरिटी नहीं, अपितु सेवा है। जीवन में सेवा के जो भी अवसर मिलें, सेवा करना चाहिये। सेवा से हमारी शुद्धि होती है। जिसके पास जो हो, वो देना चाहिये।'' उन्होंने कहा कि दूसरों के दुखों को नजरअंदाज करते हुए खुशी का आनंद लेना मानवीय संवेदनशीलता के खिलाफ है और समाज के दर्द को कम करना भारत का अंतर्निहित स्वभाव है एवं इसी आधार पर भारत ने दुनिया को धर्म का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि पराधीनता के दौर में भी भारत का यह चरित्र नहीं बदला।
'चरित्र निर्माण के माध्यम से राष्ट्र-निर्माण' विषय पर अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की पीड़ा को दूर करने के लिए होना चाहिए। भागवत ने कहा कि श्रम की गरिमा और आत्मनिर्भरता के महत्व को सीखना ही सच्ची शिक्षा है।उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति का मतलब केवल आर्थिक विकास नहीं है, बल्कि यह जल संसाधनों, जंगलों, नदियों, पहाड़ों, जानवरों और मनुष्यों का समग्र विकास है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि उन्होंने कार्यक्रम के दौरान मराठी ऑडियोबुक 'गोष्ट-नर्मदालयाची' का भी विमोचन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन निमाड़ अभ्युदय ग्रामीण प्रबंधन एवं विकास संघ और श्री रामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को कहा कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में मिश्रण के लिए कोयले का आयात चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में पिछले साल की तुलना में घटकर 54 प्रतिशत रह गया है, जिससे घरेलू कोयला आधारित विद्युत संयंत्रों को बड़ी राहत मिलेगी जो ज्यादा लागत से जूझ रहे हैं। कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में एक प्रश्न का लिखित उत्तर देते हुए कहा कि विद्युत क्षेत्र में मिश्रण के लिए आयात किये जाने वाले कोयले की मात्रा 2022-23 में 3.51 करोड़ टन से घटकर 2024-25 में 1.40 करोड़ टन रह गई। मंत्री ने कहा, ''साल 2025-26 (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान मिश्रण के लिए आयात किए जाने वाले कोयले की मात्रा 55 लाख टन है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1.2 करोड़ टन थी यानी पिछले साल की तुलना में 54 प्रतिशत कम है, जिससे घरेलू कोयला आधारित विद्युत संयंत्र के लिए ईंधन लागत कम हुई है।
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री अयोध्या धाम में देवी सीता के जीवन और आदर्शों को समर्पित एक 'वैदेही आर्ट गैलरी' की स्थापना का निर्देश दिया है। एक आधिकारिक बयान में बुधवार को यह जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की बैठक में कहा कि देवी सीता भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिक आदर्शों की अनुपम प्रेरणा हैं, और नई पीढ़ी को उनके उज्ज्वल चरित्र से गहराई से परिचित कराना समय की आवश्यकता है। प्रस्तावित आर्ट गैलरी की अवधारणा को रेखांकित करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि यह पारंपरिक कला संग्रहालय नहीं होना चाहिए, बल्कि अत्याधुनिक, गहन सांस्कृतिक स्थान होना चाहिए जो समकालीन तकनीक के माध्यम से सीता के जीवन, बलिदान, करुणा, गरिमा, धैर्य और आंतरिक शक्ति की आधुनिक पुनर्कथा प्रस्तुत करे। उन्होंने निर्देश दिया कि गैलरी की कथात्मक सामग्री, डिज़ाइन, दृश्य भाषा, कला और तकनीक समेत सभी पहलू दैवीय विरासत के पुनरावलोकन की भावना को प्रतिबिंबित करें और उसे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा के स्रोत के रूप में प्रस्तुत किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि 'वैदेही आर्ट गैलरी' की मूल भावना यही हो कि आगंतुक सीता माता के जीवन-संदेश को केवल देखें नहीं, बल्कि उसे अनुभव करें, समझें और आत्मसात करें। अयोध्या विकास प्राधिकरण के साथ संवाद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निकट वशिष्ठ भवन परिसर में विकसित की जा सकती। उन्होंने कहा कि इस गैलरी का विकास अयोध्या के वैश्विक सांस्कृतिक नगर के रूप में उभरने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण चरण होगा। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि मिथिला की संस्कृति, लोकपरंपरा और कला के विविध आयामों को गैलरी में प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।
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गांधीनगर. गुजरात में गांधीनगर की एक अदालत ने गृहकार्य (होमवर्क) पूरा न करने पर नौवीं कक्षा की छात्रा को थप्पड़ मारने की आरोपी स्कूल शिक्षिका को दोषी ठहराते हुए तीन साल से अधिक की सजा सुनाई है। इस घटना से छात्रा के बाएं कान का पर्दा फट गया और उसे सुनने में दिक्कत होने लगी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हिमांशु चौधरी ने 30 जनवरी को अपने फैसले में कहा कि यह अपराध एक शिक्षक द्वारा अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल था, जिससे 14 साल की लड़की को गंभीर चोट लगी और उसे ''लंबे समय तक सुनने में दिक्कत'' हुई। अदालत ने यह भी कहा कि घटना के साढ़े चार साल बाद भी पीड़िता का उपचार जारी है।
अदालत ने शिक्षिका पारुलबेन पटेल को भारतीय दंड संहिता की धारा 325 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत लड़की की पिटाई करने और जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने का दोषी ठहराया और उसे तीन साल एवं तीन महीने जेल की सजा सुनाई। अदालत ने उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि यह रकम पीड़िता को मुआवजे के तौर पर दी जाए। -
नयी दिल्ली. संसद में बुधवार को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए कहा कि भारत इस समझौते में कृषि और दुग्ध क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। गोयल ने पहले लोकसभा में और फिर राज्यसभा में अपनी ओर से भारत एवं अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते पर एक वक्तव्य दिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस समझौते से भारत को विकसित बनाने की दिशा में देश की यात्रा को मजबूती मिलेगी। गोयल ने कहा, ''दोनों देश नियमित रूप से चर्चा कर रहे थे...दोनों पक्षों ने विभिन्न स्तरों पर गहन बातचीत की है।'' उनका कहना था कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा करते हुए यह समझौता करने में सफल रहे हैं। मंत्री ने कहा, ''प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर चर्चा की और इसके बाद ट्रंप ने अमेरिका के टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की घोषणा की।'' गोयल ने कहा, ''मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि यह अमेरिका द्वारा कई प्रतिस्पर्धी देशों पर लगाए गए शुल्क से कम है।'' उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों को तुलनात्मक लाभ प्रदान करेगा।
मंत्री के अनुसार, भारतीय पक्ष विशेष रूप से कृषि और दुग्ध क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल रहा है। गोयल ने इस बात पर जोर दिया, ''खाद्य और कृषि क्षेत्र में भारत की संवेदनशीलता का ध्यान रखा गया है।''
उन्होंने कहा, ''यह ऐतिहासिक ढांचागत समझौता दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने और 2047 तक विकसित भारत बनाने की दिशा में यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।'' उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष व्यापार समझौते की प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई को अंतिम रूप देने के लिए मिलकर काम करेंगे। केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की आवश्यकताओं की सुरक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, ''देश को विकसित बनाने के पथ पर आगे बढ़ने के लिए ऊर्जा, विमानन, डेटा केंद्र और परमाणु ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता होगी और अमेरिका इन क्षेत्रों में अग्रणी देश है।'' राज्यसभा में गोयल ने जब अपना वक्तव्य दे दिया तो कांग्रेस सहित विपक्षी सदस्यों ने इस बयान पर मंत्री से स्पष्टीकरण मांगने पर जोर दिया। किंतु सभापति सी पी राधाकृष्णन ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि यह अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ा बयान है और इसके लिए आवश्यक नहीं है कि मंत्री से स्पष्टीकरण मांगा जाए। सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि उन्होंने कल ही सदन में कहा था कि सरकार दोनों सदनों में बयान देने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल मुंबई में थे और वह कल ही दिल्ली आये। नड्डा ने कहा कि गोयल कल ही लोकसभा में बयान देना चाहते थे किंतु निचला सदन नहीं चला। यदि वह कल राज्यसभा में बयान देते तो विपक्ष की ओर से यह कहा जाता कि लोकसभा में पहले क्यों बयान नहीं दिया गया। इससे पहले द्रमुक के तिरुचि शिवा ने इस बात पर आपत्ति जतायी कि गोयल ने संसद सत्र चलते हुए बाहर प्रेस वार्ता क्यों की। उन्होंने आसन का ध्यान दिलाया कि भले ही लोकसभा कल नहीं चली किंतु राज्यसभा में तो मंगलवार को सामान्य ढंग से कामकाज हुआ। इस पर सभापति राधाकृष्णन ने कहा कि नड्डा कल ही कह चुके थे कि सरकार बयान देने को तैयार है किंतु कल उच्च सदन में विपक्षी सदस्यों ने वाकआउट किया था। -
नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि जनवरी 2026 तक 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के तहत 28 लाख से अधिक परिवारों को फायदा हुआ है, जिसमें केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता के तौर पर 16,061.12 करोड़ रुपये दिए गए हैं। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सरकार नवीकरणीय ऊर्जा, भंडारण और ग्रिड एकीकरण को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक साझेदारियों को भी मजबूत कर रही है। नाइक ने सदन को बताया कि फरवरी 2024 में योजना शुरू होने के बाद से, देश भर में कुल 22,65,521 रूफटॉप सोलर (आरटीएस) प्रणाली लगाई गई हैं, जिससे 28,24,518 घरों को फायदा हुआ है और 30 जनवरी, 2026 तक केंद्रीय वित्तीय सहायता के तौर पर 16,061.12 करोड़ रुपये बांटे गए हैं। अनुमान लगाया गया है कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत एक करोड़ घरों में आरटीएस लगाने से 1,000 अरब यूनिट नवीकरणीय बिजली पैदा हो सकती है, जिससे आरटीएस प्रणाली की 25 साल की अवधि में 72 करोड़ टन कार्बन डाईऑक्साइड के बराबर उत्सर्जन में कमी आ सकती है। नाइक ने कहा कि योजना के विस्तार के लिए सरकार कई कदम उठा रही है, जिसमें राष्ट्रीयकृत बैंकों से रियायती ब्याज दर पर बिना गारंटी के ऋण की उपलब्धता और नियामक मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है।
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नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने दुरुपयोग को रोकने के लिए 2.5 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय कर दिए हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि आधार दुनिया की सबसे बड़ी बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली है, जिसमें लगभग 134 करोड़ सक्रिय आधार धारक हैं। प्रसाद ने कहा, ''आधार डेटाबेस की लगातार सटीकता और शुद्धता बनाए रखने के लिए देशव्यापी अभियान के तहत, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने अब तक 2.5 करोड़ से ज़्यादा मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय कर दिए हैं।'' किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर, यह जरूरी है कि उसके आधार नंबर को निष्क्रिय कर दिया जाए ताकि संभावित पहचान धोखाधड़ी, या कल्याणकारी लाभ लेने के लिए ऐसे आधार नंबर के अनधिकृत उपयोग को रोका जा सके।
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नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा को बताया कि सिविल सेवा परीक्षा के नियम एक बदलते हुए फ्रेमवर्क का हिस्सा हैं और सरकार सभी को समान अवसर देने के लिए लगातार सुधारात्मक उपाय करती रहती है। सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा में लद्दाख के अभ्यर्थियों को भारतीय भाषा की परीक्षा उत्तीर्ण करने से छूट देने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन होने के प्रश्न पर लिखित जवाब में कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड और सिक्किम राज्यों के उम्मीदवारों के लिए भारतीय भाषा का प्रश्नपत्र अनिवार्य नहीं है। उन्होंने लद्दाख के संबंध में प्रश्न पर कहा कि सिविल सेवा परीक्षा के नियम एक बदलती रूपरेखा का हिस्सा हैं। सिविल सेवा परीक्षा हर साल तीन चरणों में आयोजित की जाती है - प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों का चयन किया जाता है। मंत्री ने कहा, ''देश भर में अभ्यर्थियों को समान अवसर देने के लिए, सरकार लगातार सुधार करती है और सुधारात्मक उपाय अपनाती है।
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मुंबई. ब्लैक रॉक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लैरी फिंक ने बुधवार को कहा कि अगले 20-25 साल भारत के नाम रहेंगे और देश अगले एक दशक या उससे अधिक समय में 8-10 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगा। 'नए युग के लिए निवेश' विषय पर उद्योगपति मुकेश अंबानी के साथ अनौपचारिक बातचीत में अमेरिकी बहुराष्ट्रीय निवेश प्रबंधन कंपनी के सीईओ ने कहा कि भारत वह देश है जिसमें वह निवेश करना चाहेंगे। उन्होंने कहा, '' भारत के इस युग में, हमारा ध्यान लोगों को यह समझाने पर है कि 'भारत का युग' होने का मतलब क्या है। जब आप भारत की वृद्धि के बारे में सोचते हैं... तो यह एक तिमाही, एक दिन या एक सप्ताह, एक वर्ष की बात नहीं है, बल्कि एक लंबा समय है। आप कह सकते हैं कि शायद यही भारत का युग है और अगले 20-25 वर्ष में भी यही स्थिति रहेगी।'' उन्होंने कहा कि भारत को विदेशी पूंजी की कम आवश्यकता है।
लैरी फिंक कहा, '' मैं भारत की वृद्धि में विश्वास रखने वाले विदेशी निवेशकों से पूंजी लाने में विश्वास रखता हूं, लेकिन किसी भी देश की मूलभूत नींव बचत पर आधारित घरेलू अर्थव्यवस्था होती है।'' उन्होंने कहा कि भारत अगले 10 से अधिक वर्ष में 8-10 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगा।
फिंक ने कहा, '' मैं यहीं निवेश करना चाहता हूं और भारतीयों को भी निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता हूं।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि डिजिटल रुपये ने देश में वाणिज्य को बदल दिया है। उन्होंने कहा, '' मैं अन्य देशों को लेकर बहुत चिंतित हूं, यहां तक कि अमेरिका भी पिछड़ रहा है।''
फिंक ने कहा कि देश के वृद्धि के साथ-साथ पूंजी बाजारों में निवेश करने के लिए अधिक लोगों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, '' हमें लोगों को दीर्घकालिक निवेश के दृष्टिकोण से सोचने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि वे भारत की महान कंपनियों के साथ विकास कर सकें, उनका हिस्सा बन सकें और उनमें भागीदार बन सकें।'' फिंक ने कहा कि उन्हें ''एआई बबल'' (ऐसी स्थिति है जहां प्रचार वास्तविक स्थिति से अधिक हो) पर विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा, '' सबसे बड़ा खतरा यह है कि अगर हम कृत्रिम मेधा (एआई) में निवेश नहीं करते हैं, तो चीन आगे निकल जाएगा।'' फिंक ने कहा कि एआई सबसे चर्चित विषयों में से एक है क्योंकि यह सबसे अधिक बदलाव लाने वाला है। -
नई दिल्ली। डीआरडीओ ने एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। ओडिशा के तट के पास चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट तकनीक का सफल परीक्षण किया गया है। इस तकनीक के सफल होने से अब भारत लंबी दूरी तक हवा में ही दुश्मन के लक्ष्य को भेदने वाली एयर-टू-एयर मिसाइलें विकसित करने में सक्षम हो सकेगा, जिससे सामरिक स्तर पर देश को अहम बढ़त मिलेगी।
इस परीक्षण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास यह अत्याधुनिक तकनीक मौजूद है। डीआरडीओ के मुताबिक, यह महत्वपूर्ण परीक्षण मंगलवार सुबह 10.45 बजे किया गया। परीक्षण के दौरान मिसाइल को पहले जमीन से लगाए गए बूस्टर की मदद से उच्च गति प्रदान की गई। इसके बाद मिसाइल के सभी प्रमुख सिस्टम तय मानकों के अनुरूप सफलतापूर्वक कार्य करते नजर आए।परीक्षण में बिना नोजल वाला बूस्टर, सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोल सिस्टम शामिल थे। पूरी उड़ान के दौरान प्राप्त आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि सिस्टम पूरी तरह स्थिर और प्रभावी रहा। बंगाल की खाड़ी के तट पर तैनात आधुनिक ट्रैकिंग उपकरणों के माध्यम से परीक्षण पर लगातार नजर रखी गई। इस लॉन्च को डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और इससे जुड़े उद्योगों की सराहना की। वहीं, डीआरडीओ प्रमुख और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी. कामत ने भी पूरी टीम को इस सफल उड़ान परीक्षण के लिए बधाई दी। इसे भारत की रक्षा तकनीक को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।गौरतलब है कि इसी माह भारत ने हाइपरसोनिक मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी। यह उपलब्धि डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (डीआरडीएल) के सहयोग से प्राप्त हुई थी, जो भारत के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकास कार्यक्रम के लिए एक निर्णायक और आधारभूत कदम मानी जा रही है।यह महत्वपूर्ण परीक्षण 9 जनवरी को डीआरडीएल की अत्याधुनिक स्क्रैमजेट कनेक्ट पाइप टेस्ट सुविधा में किया गया था। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्क्रैमजेट दहनकक्ष ने 12 मिनट से अधिक समय तक निरंतर और स्थिर संचालन का प्रदर्शन किया। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें ध्वनि की गति से पांच गुना से अधिक यानी 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा रफ्तार से लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम होती हैं। -
नई दिल्ली। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को ओडिशा के बालासोर में फकीर मोहन विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और विद्यार्थियों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय के नए सभागार का उद्घाटन भी किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने व्यासकवि फकीर मोहन सेनापति को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अपने विद्यार्थी जीवन में वे उनकी कालजयी कहानी ‘रेवती’ से अत्यंत प्रभावित रही हैं और इसका प्रभाव आज भी उनके मन में अमिट है। 19वीं शताब्दी में एक बालिका द्वारा शिक्षा प्राप्त करने के दृढ़ संकल्प को उन्होंने साहस और सामाजिक चेतना का प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने एक दूरस्थ आदिवासी गांव में पढ़ाई की और दृढ़ निश्चय के बल पर भुवनेश्वर जाकर हाई स्कूल और कॉलेज की शिक्षा पूरी की। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में फकीर मोहन सेनापति उनके लिए प्रेरणास्रोत रहे।राष्ट्रपति ने कहा कि फकीर मोहन को अपनी मातृभाषा से गहरा प्रेम था। उन्होंने लिखा था, “मेरी मातृभाषा मेरे लिए सर्वोपरि है।” राष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा से विद्यार्थी अपने परिवेश, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक मूल्यों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भी मातृभाषा के महत्व पर विशेष बल देती है।द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। हमारे शास्त्र और पांडुलिपियां कविता और साहित्य के साथ-साथ विज्ञान, चिकित्सा, खगोल विज्ञान और वास्तुकला जैसे क्षेत्रों में भी ज्ञान का विशाल स्रोत हैं। उन्होंने युवाओं से इस प्राचीन ज्ञान परंपरा पर शोध करने का आह्वान किया।राष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि ज्ञान, लगन और प्रतिबद्धता के बल पर वे समाज में सम्मान और पहचान प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सफल जीवन और सार्थक जीवन में अंतर होता है। प्रसिद्धि और आर्थिक सुरक्षा महत्वपूर्ण हैं, लेकिन जीवन को सार्थक बनाना उससे भी अधिक आवश्यक है।द्रौपदी मुर्मु छात्रों से आग्रह किया कि वे विकास की राह में पीछे रह गए लोगों की मदद करें। राष्ट्रपति ने कहा कि समाज का विकास तभी संभव है, जब सभी का विकास हो।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि फकीर मोहन विश्वविद्यालय अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ अनुसंधान और आउटरीच कार्यक्रमों को भी महत्व देता है। उन्होंने ‘बैक टू स्कूल’, ‘कमाओ और सीखो’ और ‘हर एक सिखाए’ जैसे कार्यक्रमों की सराहना की। साथ ही पर्यावरण जागरूकता और समुद्र तट सफाई अभियानों को भी प्रशंसनीय बताया।द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बालासोर-भद्रक क्षेत्र धान, पान और मछली के लिए प्रसिद्ध है। नीले केकड़ों और हॉर्सशू केकड़ों पर अनुसंधान केंद्र की स्थापना विश्वविद्यालय की दूरदर्शिता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि समावेशी विकास, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन में विश्वविद्यालयों की अहम भूमिका है और उन्हें इस दिशा में उत्प्रेरक बनकर कार्य करना चाहिए। -
नई दिल्ली। पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना (पीएमएसजी:एमबीवाई) एक मांग आधारित योजना है जिसके अंतर्गत देश के सभी आवासीय उपभोक्ता जिनके पास स्थानीय डिस्कॉम का ग्रिड से जुड़ा बिजली कनेक्शन है, योजना के राष्ट्रीय पोर्टल पर आवेदन करके रूफटॉप सोलर (आरटीएस) सिस्टम लगाने के लिए योजना का लाभ उठा सकते हैं।
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, फरवरी 2024 में योजना के शुभारंभ के बाद से देश भर में कुल 20,85,514 आरटीएस सिस्टम स्थापित किए गए हैं, जिससे 26,14,446 परिवारों को लाभ हुआ है और दिसंबर 2025 तक केंद्रीय वित्तीय सहायता (सीएफए) के रूप में 14,771.82 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं। पीएमएसजी: एमबीवाई के अंतर्गत यह अनुमान लगाया गया है कि 1 करोड़ घरों में आरटीएस की स्थापना से 1,000 बिलियन यूनिट नवीकरणीय बिजली का उत्पादन हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप आरटीएस प्रणाली के 25 वर्षों के जीवनकाल के दौरान 720 मिलियन टन कार्बन डायऑक्साइड (सीओ2) के बराबर उत्सर्जन में कमी आ सकती है। -
नई दिल्ली। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 31 दिसंबर, 2025 तक, 96.73 लाख से अधिक आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाए जा चुके हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने मंगलवार को राज्यसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 31 दिसंबर, 2025 तक, आयुष्मान वय वंदना कार्ड लाभार्थियों के लिए कुल 10.33 लाख अस्पताल भर्तियां स्वीकृत की गई हैं, जिनकी लागत 2,154.37 करोड़ रुपये है। इनमें से 3.93 लाख भर्ती, जिनकी लागत 820.42 करोड़ रुपये है, महिला लाभार्थियों से संबंधित हैं और 6.40 लाख भर्ती, जिनकी लागत 1333.94 करोड़ रुपये है, कार्यान्वयन करने वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में पुरुष लाभार्थियों से संबंधित हैं।गौरतलब हो, आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना भारत की जनसंख्या के सबसे निचले 40 प्रतिशत हिस्से में आने वाले 12 करोड़ परिवारों को माध्यमिक और तृतीयक स्तर की अस्पताल में भर्ती के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करती है।अक्टूबर 2024 में, इस योजना का विस्तार किया गया था। इस कार्ड के माध्यम से सामाजिक-आर्थिक स्थिति देखे बिना 4.5 करोड़ परिवारों से संबंधित 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को भी इसमें शामिल किया गया।










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