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नई दिल्ली। महत्त्वाकांक्षी सवारी सेवाएं देने के लिए ‘भारत टैक्सी’ का ट्रायल मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और गुजरात में शुरू हो गया। ड्राइवरों के स्वामित्व वाली दुनिया की पहली राष्ट्रीय गतिशीलता सहकारिता के रूप में प्रचारित सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव एक देसी कंपनी है, जो ओला, उबर व रैपिडो जैसी दिग्गज सवारी सेवा प्रदाता कंपनियों से सीधे तौर पर प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार है।
यह प्लेटफार्म पहले से ही खुद को दुनिया के सबसे बड़े ड्राइवर-स्वामित्व वाले मोबिलिटी नेटवर्क के रूप में स्थापित कर रहा है, जिसमें नई दिल्ली और गुजरात के सौराष्ट्र में कारों, ऑटो और बाइक से संबंधित 51,000 से अधिक ड्राइवर पंजीकृत हैं। भारत टैक्सी मोबाइल ऐप्लिकेशन वर्तमान में परीक्षण और प्रतिक्रिया एकत्र करने के लिए गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है।कोऑपरेटिव ने कहा कि ऐप को जल्द ही आईओएस पर भी जारी किया जाएगा। इस सेवा की खासियत है कि यह दिल्ली मेट्रो के साथ भी एकीकृत है। इसके जरिए उपयोगकर्ता एक ही स्थान पर बुकिंग कर सकते हैं। कोऑपरेटिव के एक बयान के अनुसार, ‘ऐप की अनूठी विशेषता मेट्रो रेल जैसी परिवहन सेवाओं के साथ जुड़ना है। इससे उपयोगकर्ता एक ऐप पर सभी यात्रा बुकिंग आसानी से कर सकते हैं और परिवहन के कई साधनों का उपयोग बहुत आसानी से कर सकते हैं।’कोऑपरेटिव के अनुसार, ड्राइवरों को ग्राहकों द्वारा किए गए भुगतान का पूरा हिस्सा तो मिलेगा ही, संगठन के बोर्ड में प्रतिनिधित्व, उनके शेयरों पर लाभांश और मुनाफे में भी हिस्सेदारी हासिल होगी। कोऑपरेटिव ने सवारी और ड्राइवर दोनों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ भी सहयोग संबंधी करार किया है।एक सूत्र के अनुसार, अन्य प्लेटफार्मों के समान इसके ऐप में भी ग्राहक सहायता सुविधा होगी। साथ ही ओला, उबर और रैपिडो जैसे सवारी सेवा प्रदाता एप्लिकेशन पर ड्राइवरों के मामले में ओवरलैप होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि सवारियों और ड्राइवरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली पुलिस के साथ साझेदारी और अधिकतम आय अर्जित करने की संभावना ड्राइवरों को भारत टैक्सी ऐप से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करेगी। -
नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की लोकपाल व्यवस्था के तहत वित्त वर्ष 2025 में पहली बार निजी क्षेत्र के बैंकों के खिलाफ शिकायत, सरकारी बैंकों से अधिक हुई है। रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक साल के दौरान निजी बैंकों की 1,11,119 शिकायतें आई हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 1,03,117 शिकायतें आई हैं।
आंकड़ों से पता चलता है कि रिजर्व बैंक की एकीकृत लोकपाल योजना (आरबी-आईओएस) के तहत पंजीकृत शिकायतें 13.55 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 13.3 लाख हो गई हैं, जो वित्त वर्ष 2024 में 11.8 लाख थीं।केंद्रीय बैंक को ऑफिस ऑफ द रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ऑब्ड्समैन (ओआरबीआईओ) और सेंट्रलाइज्ड रिसीट ऐंड प्रॉसेसिंग सेंटर (सीआरपीसी) के माध्यम से शिकायतें मिली हैं।वित्त वर्ष 2025 में ओआरबीआईओ से 2,96,000 शिकायतें मिलीं, जो इसके पहले वित्त वर्ष की तुलना में 0.82 प्रतिशत ज्यादा हैं। इसमें से बैंकों के खिलाफ सबसे ज्यादा 2,42,000 शिकायतें मिली हैं, जो कुल शिकायतों का 81.53 प्रतिशत है। इसके बाद एनबीएफसी की 43,864 शिकायतें आईं, जो वित्त वर्ष 2025 में कुल शिकायत का 14.80 प्रतिशत है। बैंकों में निजी क्षेत्र के बैंकों के खिलाफ शिकायतें सबसे ज्यादा थीं और वित्त वर्ष 2024 के 34.39 प्रतिशत की तुलना में वित्त वर्ष 2025 में कुल शिकायत में इनके खिलाफ शिकायत बढ़कर 37.53 प्रतिशत हो गई। बहरहाल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के खिलाफ शिकायत वित्त वर्ष 2024 में सर्वाधिक थीं, जिनका प्रतिशत 38.32 से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 34.80 प्रतिशत रह गया है।आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2025 में ऋण और एडवांस से जुड़ी सबसे अधिक 52,427 शिकायतें आई हैं। क्रेडिट कार्ड से जुड़ी शिकायतें पिछले साल से 20.04 प्रतिशत बढ़कर 50,811 हो गई हैं, जो शिकायतों में दूसरे स्थान पर है। इसके अलावा मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग को लेकर इस दौरान 49,951 शिकायतें आईं, जो कुल शिकायतों का 16.86 प्रतिशत है। -
नई दिल्ली। रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिन की बैठक कल से शुरू होगी। इसमें रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा और मुख्य दरों की घोषणा करेंगे।रिजर्व बैंक ने इस वर्ष फरवरी में प्रमुख दरें कम करने की प्रक्रिया शुरू की थी और तीन बार रेपो रेट को 100 आधार अंक घटाकर साढे पांच प्रतिशत कर दिया था। इसके बाद रेपो दर में कोई परिवर्तन नहीं किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों को यथावत जारी रख सकता है क्योंकि राजकोषीय मजबूती, लक्षित सार्वजनिक निवेश और जीएसटी में कटौती जैसे कई सुधारों से आर्थिक वृद्धि में तेज़ी आई है। लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि महंगाई का दबाव कम होने पर एमपीसी बेंचमार्क ऋण दर में 25 बीपीएस की कटौती कर सकता है। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि नागरिकों को नकली मोबाइल फोन खरीदने से बचाने के लिए अब सभी नए मोबाइल हैंडसेटों में ‘संचार साथी’ मोबाइल ऐप को इंस्टॉल किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, यह व्यवस्था टेलीकॉम संसाधनों के दुरुपयोग की रिपोर्टिंग को आसान बनाएगी और “संचार साथी” पहल की प्रभावशीलता बढ़ाएगी।28 नवंबर को जारी दिशानिर्देशों के अनुसार—मोबाइल निर्माता और आयातक यह सुनिश्चित करेंगे कि संचार साथी ऐप उपभोक्ता को पहली बार मोबाइल चालू करते समय स्पष्ट रूप से दिखाई दे।जो मोबाइल पहले से निर्मित होकर बिक्री चैनलों में मौजूद हैं, उनमें भी कंपनियों को सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह ऐप उपलब्ध कराने का प्रयास करना होगा।कंपनियों को यह प्रावधान 90 दिनों के भीतर लागू करना है और 120 दिनों में रिपोर्ट देनी होगी।दूरसंचार विभाग (DoT) “संचार साथी” पहल को आगे बढ़ा रहा है ताकि साइबर धोखाधड़ी में उपयोग होने वाली टेलीकॉम पहचान को रोका जा सके और देश की टेलीकॉम सुरक्षा मजबूत हो सके।संचार साथी पोर्टल और ऐप के माध्यम से नागरिक—मोबाइल का IMEI नंबर दर्ज कर उसकी प्रामाणिकता की जांच,संदिग्ध धोखाधड़ी की रिपोर्ट,खोए या चोरी हुए मोबाइल की जानकारी,अपने नाम से जारी मोबाइल कनेक्शनों की जांच,और बैंकों व वित्तीय संस्थानों के विश्वसनीय संपर्क विवरणदेख सकते हैं।ऐप-आधारित सेवाओं पर भी नई सख्तीDoT ने एक अन्य बयान में कहा कि कुछ ऐप-आधारित संचार सेवाएं भारतीय मोबाइल नंबरों का उपयोग करती हैं, लेकिन उन सेवाओं को बिना सिम कार्ड डाले भी चलने देती हैं।इस सुविधा का दुरुपयोग साइबर अपराधी, खासकर विदेशों से, कर रहे हैं।यह मुद्दा कई सरकारी एजेंसियों और अंतर-मंत्रालयी समूहों द्वारा उठाया गया था।इसी कारण DoT ने व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, स्नैपचैट, अरत्ताई, शेयरचैट, जोश, जियोचैट और सिग्नल जैसे प्रमुख ऐप प्रदाताओं के साथ कई दौर की चर्चा की।चर्चाओं के बाद टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियम, 2024 के तहत 28 नवंबर को निर्देश जारी किए गए, ताकि टेलीकॉम पहचान के दुरुपयोग को रोका जा सके और देश की संचार सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। -
नयी दिल्ली. मोटरसाइकिल विनिर्माता रॉयल एनफील्ड की नवंबर में कुल बिक्री सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर 1,00,670 इकाई हो गई। कंपनी ने नवंबर, 2024 में 82,257 इकाइयां बेची थीं।
रॉयल एनफील्ड ने सोमवार को बयान में कहा कि उसकी घरेलू बिक्री नवंबर में 90,405 इकाई रही। यह नवंबर, 2024 की 72,236 इकाइयों की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। कंपनी ने कहा कि समीक्षाधीन महीने में उसका निर्यात दो प्रतिशत बढ़कर 10,265 इकाई हो गया जो पिछले साल इसी महीने में यह 10,021 इकाई था। -
मुंबई. कृषि रसायन उद्योग का चालू वित्त वर्ष में राजस्व 6-7 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। वैश्विक मांग में सुधार और पहले के बचे माल के सामान्य स्तर पर होने से राजस्व बढ़ने का अनुमान है। सोमवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर बेहतर कृषि धरणा से चालू वित्त वर्ष में निर्यात राजस्व 8-9 प्रतिशत बढ़ जाएगा, लेकिन घरेलू मांग में ज्यादा बारिश से फसल को नुकसान, उत्पाद की वापसी और खेत तैयार होने में देरी का खतरा रहेगा। क्रिसिल रेटिंग्स के वरिष्ठ निदेशक, अनुज सेठी ने कहा, ‘‘दो साल के बड़े समायोजन के बाद प्राप्ति का स्तर स्थिर होने के साथ, 6-7 प्रतिशत की कुल वृद्धि दर परिदृश्य के मूल्य नीत होने के बजाय मात्रा नीत अधिक होना बना हुआ है।'' रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय कृषि रसायन उद्योग का राजस्व चालू वित्त वर्ष में 6-7 प्रतिशत बढ़ेगा, जिसे वैश्विक मांग में सही समय पर सुधार और पहले का बचा माल के सामान्य होने से समर्थन मिलेगा, ठीक वैसे ही जैसे लंबे मॉनसून की वजह से घरेलू उठाव धीमा हुआ है, जिससे खरीफ मौसम की बिक्री पर असर पड़ा। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले वित्त वर्ष में इस उद्योग का 8-10 प्रतिशत की दीर्घावधिक वृद्धि दर के दायरे में वापस आना, काफी कुछ निर्यात की रफ्तार बनाए रखने और घरेलू मांग बढ़ने पर निर्भर करता है। इस उद्योग के राजस्व में घरेलू और निर्यात बाजार दोनों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है। -
नयी दिल्ली. हीरो मोटोकॉर्प ने सोमवार को कहा कि नवंबर में उसकी कुल बिक्री सालाना आधार पर 31 प्रतिशत बढ़कर 6,04,490 इकाई हो गई। दोपहिया वाहन बनाने वाली कंपनी ने पिछले साल इसी महीने 4,59,805 इकाइयों की बिक्री की थी।
हीरो मोटोकॉर्प ने बयान में कहा कि पिछले महीने घरेलू बिक्री 5,70,520 इकाई रही, जबकि पिछले साल इसी समय में यह 4,39,777 इकाई थी। इस दौरान निर्यात बढ़कर 33,970 इकाई हो गया, जबकि पिछले साल नवंबर में यह 20,028 इकाई था। -
नयी दिल्ली. मजबूत वैश्विक रुख और कमजोर डॉलर के कारण सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें 3,040 रुपये उछलकर 1,33,200 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि चल रहे शादियों के मौसम के बीच आभूषणों की सतत मांग के कारण कीमती धातु को समर्थन मिला। इस दौरान 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 3,040 रुपये बढ़कर 1,32,600 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) हो गई। व्यापारियों ने कहा कि सोना अब अपने सर्वकालिक उच्च स्तर 1,34,800 रुपये प्रति 10 ग्राम (99.9 प्रतिशत शुद्धता) और 1,34,200 रुपये प्रति 10 ग्राम (99.5 प्रतिशत शुद्धता) के करीब पहुंच रहा है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘सोने ने पिछले हफ्ते की तेजी को आगे बढ़ाया, जिसे डॉलर के कमजोर होने, अगले हफ्ते फेडरल रिजर्व के द्वारा ब्याज दर कटौती की बढ़ती उम्मीदों, बड़े बैंकों के अच्छे अनुमानों और सेंट्रल बैंक की लगातार मजबूत खरीदारी से समर्थन मिला, ये सभी बाजार को ऊपर ले जाने में मदद कर रहे हैं।'' सर्राफा संघ के अनुसार, चांदी लगातार पांचवें दिन ऊपर चढ़ती रही, जो 5,800 रुपये बढ़कर 1,77,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स मिलाकर) हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 42.29 डॉलर या एक प्रतिशत बढ़कर 4,261.52 डॉलर प्रति औंस हो गया, जबकि डॉलर सूचकांक 0.19 प्रतिशत घटकर 99.27 रह गया, जिससे सर्राफा कीमतों को समर्थन मिला। साल की शुरुआत से सोने की कीमत 63.6 प्रतिशत बढ़ गई है। लगातार छठे दिन बढ़ते हुए, हाजिर चांदी दो प्रतिशत बढ़कर वैश्विक बाजारों में 57.85 डॉलर प्रति औंस के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गई। पिछले हफ़्ते चांदी 15.7 प्रतिशत उछली और 2025 में अब तक दोगुनी गई गई। ऑगमोंट में शोध प्रमुख रेनिशा चैनानी ने कहा, ‘‘चांदी की कीमत सिर्फ़ 11 महीनों में लगभग दोगुनी हो गई है और सोने से ज्यादा बढ़ी है, भले ही वर्ष 2025 में सोना सबसे लोकप्रिय जिंस था।
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नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों में आज सोमवार को तेज बढ़ोतरी देखी गई, जिससे सोने का दाम 1,28,800 रुपए प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 1,75,180 रुपए प्रति किलो के पार चला गया। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट के 10 ग्राम सोने की कीमत 2,209 रुपए बढ़कर 1,28,800 रुपए हो गई, जबकि 22 कैरेट सोना 1,17,981 रुपए प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोना 96,600 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया।
चांदी में तेजी और अधिक रही। बीते 24 घंटे में चांदी की कीमत 10,821 रुपए बढ़कर 1,75,180 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। कोटक म्यूचुअल फंड के फंड मैनेजर सतीश दोंदापति ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति की कमी और इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, ऑटोमोटिव जैसे उद्योगों में चांदी के बड़े उपयोग के कारण कीमतें ऑल-टाइम हाई पर पहुंची हैं। निवेश की बढ़ती मांग ने भी आपूर्ति पर दबाव डाला है।वायदा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में तेजी रही। सोने के 05 फरवरी 2026 के कॉन्ट्रैक्ट का दाम 1,30,874 रुपए तक बढ़ गया, यानी 1.06 प्रतिशत की तेजी। चांदी के 05 मार्च 2026 के कॉन्ट्रैक्ट की कीमत 1.84 प्रतिशत बढ़कर 1,78,200 रुपए हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी रिकॉर्ड स्तर पर हैं। खबर लिखे जाने तक सोने का दाम 0.62 प्रतिशत बढ़कर 4,281 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 0.75 प्रतिशत बढ़कर 57.57 डॉलर प्रति औंस हो गया। -
नई दिल्ली। कई हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से संकेत मिले हैं कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में हालिया सुधारों से देश में आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है। वित्त मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी किए गए मासिक इकोनॉमिक रिव्यू में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जीएसटी में किए गए बदलावों ने उपभोग और मांग को बढ़ावा दिया है, जिससे आर्थिक गतिविधियां मजबूत हुई हैं।
कई हाई फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से संकेत मिले हैं कि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) में सुधार से देश में आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है। वित्त मंत्रालय की ओर से गुरुवार को जारी किए गए मासिक इकोनॉमिक रिव्यू में यह जानकारी दी गई।रिव्यू में बताया गया कि 2025 के सितंबर और अक्टूबर के दौरान ई-वे बिल जनरेशन में सालाना आधार पर 14.4 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं, वित्त वर्ष 26 के अप्रैल से अक्टूबर की अवधि के दौरान जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर 9 प्रतिशत की बढ़ोकरी हुई है, जो दिखाता है कि देश में खपत और अनुपालन तेजी से बढ़ रहा है।सरकार ने कहा कि देश की मैन्युफैक्चरिंग अर्थव्यवस्था में भी तेज उछाल देखा गया है। अक्टूबर में मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) बढ़कर 59.2 हो गया है, जो कि सितंबर में 57.5 पर था। इसकी वजह जीएसटी सुधार, उत्पादकता बढ़ना और टेक्नोलॉजी में निवेश बढ़ना है।इसके अलावा सर्विस सेक्टर में भी पीएमआई अक्टूबर में 58.9 पर रहा है, जो कि गतिविधियों में बढ़त को दर्शाता है। जब भी पीएमआई 50 से ऊपर होता है तो गतिविधियों में बढ़त होती है। पेट्रोल खपत भी बढ़कर अक्टूबर में पांच महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इसमें सालाना आधार पर 7.4 प्रतिशत का इजाफा हुआ। हालांकि, डीजल में सालाना आधार पर वृद्धि करीब सपाट रही, लेकिन खपत चार महीनों के उच्चतम स्तर पर थी। पोर्ट कार्गो गतिविधियों में भी तेज वृद्धि देखी गई है और अक्टूबर में यह दोहरे अंक में बढ़ी हैं, जो दिखाता है कि व्यापारिक गतिविधियों में तेजी बनी हुई है।रिव्यू में बताया गया कि कृषि आय मजबूत रहने के कारण ग्रामीण खपत में भी काफी सुधार हुआ है। साथ ही शहरी खपत भी मजबूत बनी हुई है। जीएसटी सुधार का पूरा असर अगली दो तिमाही में देखने को मिलेगा। -
नई दिल्ली। सेंसेक्स और निफ्टी नया ऑल-टाइम हाई बनाने के बाद गुरुवार को तेजी के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 110.87 अंक या 0.13 प्रतिशत बढ़कर 85,720.38 पर था। सत्र के दौरान इसने 86,055.86 का नया उच्चतम स्तर बनाया।निफ्टी 10.25 अंक की मामूली बढ़त के साथ 26,215.55 पर बंद हुआ और दिन के दौरान यह अपने पुराने ऑल-टाइम हाई 26,277 को तोड़कर 26,310.45 का नया उच्चतम स्तर बनाने में कामयाब रहा।बैंकिंग सेक्टर के मुख्य सूचकांक निफ्टी बैंक ने भी 59,866.60 का नया ऑल-टाइम हाई बनाया और यह कारोबार के अंत में 209.25 अंक या 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 59,737.30 पर बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में बजाज फाइनेंस, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फिनसर्व, एचयूएल, एचसीएल टेक, एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस, एलएंडटी, आईटीसी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाइटन, सन फार्मा और एनटीपीसी गेनर्स थे। मारुति सुजुकी, इटरनल (जोमैटो), अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, टाटा स्टील, टीसीएस, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, भारती एयरटेल, पावर ग्रिड, बीईएल, एक्सिस बैंक और एमएंडएम लूजर्स थे।लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हुआ। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 51 अंक की मामूली तेजी के साथ 61,113 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 95 अंक या 0.53 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,876 पर बंद हुआ।सेक्टोरल आधार पर ऑटो, पीएसयू बैंक, मेटल, रियल्टी, एनर्जी, इन्फ्रा, कमोडिटीज, कंजप्शन और पीएसई हरे निशान में बंद हुए। वहीं, प्राइवेट बैंक, आईटी, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा, एफएमसीजी औ सर्विसेज दबाव के साथ बंद हुआ।बाजार के जानकारों ने कहा कि कारोबारी सत्र उतार-चढ़ाव भरा रहा। दिन के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी ने नया उच्चतम स्तर बनाया, लेकिन टिकने में नाकामयाब रहे। शुक्रवार को सरकार की ओर से दूसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी किए जाएंगे। अगर यह उम्मीद से अच्छे रहे तो इसका बाजार पर काफी सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत हरे निशान में हुई थी। सुबह 9 बजकर 26 मिनट पर सेंसेक्स 268.37 अंक या 0.31 प्रतिशत की तेजी के बाद 85,877.88 स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 72.40 अंक या 0.28 प्रतिशत की बढ़त के बाद 26,277.70 स्तर पर बना हुआ था। - मुंबई. स्थानीय शेयर बाजार में तीन कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट पर बुधवार को विराम लगा और चौतरफा लिवाली से बीएसई सेंसेक्स 1,000 अंक से अधिक चढ़ गया जबकि एनएसई निफ्टी ने फिर से 26,000 अंक के स्तर को प्राप्त कर लिया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर घटाने की उम्मीद के बीच वैश्विक बाजारों में तेजी और विदेशी संस्थागत निवेशकों के पूंजी प्रवाह से घरेलू बाजार में उछाल आया। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,022.50 अंक यानी 1.21 प्रतिशत चढ़कर 85,609.51 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान, यह 1,057.18 अंक तक चढ़ गया था। वहीं पचास शेयरों वाला एनएसई निफ्टी 320.50 अंक यानी 1.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 26,205.30 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी अपने अबतक के उच्चतम स्तर से केवल 10 अंक कम है। कारोबार के दौरान, निफ्टी 330.35 तक चढ़ गया था।विशेषज्ञों के अनुसार, रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम को लेकर बढ़ती उम्मीद ने भी निवेशकों की धारणा को मजबूत किया। सेंसेक्स की कंपनियों में बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील, रिलायंस इंडस्ट्रीज, सन फार्मा, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, एक्सिस बैंक और इन्फोसिस प्रमुख रूप से लाभ में रहीं। दूसरी तरफ, भारती एयरटेल और एशियन पेंट्स के शेयर नुकसान में रहे।बाजार में भागीदारी व्यापक रही। धातु, ऊर्जा और आईटी सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। मझोली और छोटी कंपनियों से जुड़े सूचकांकों में भी एक प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई। एशिया के अन्य बाजारों में, दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की और हांगकांग का हैंग सेंग सकारात्मक दायरे में रहे। हालांकि, चीन का शंघाई कम्पोजिट गिरावट के साथ बंद हुआ। यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में तेजी का रुख था। अमेरिकी बाजार मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुए। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लि. के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘‘वैश्विक स्तर पर, दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की बढ़ती उम्मीद के साथ ही डॉलर के कमजोर होने से बाजार धारणा में सुधार हुआ है। इसके अलावा, रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम को लेकर बढ़ती उम्मीद जोखिम उठाने की क्षमता को बढ़ा रही है।'' शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने मंगलवार को 785.32 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भी 3,912.47 करोड़ रुपये की लिवाली की। मझोली कंपनियों से जुड़ा मिडकैप सूचकांक 1.32 प्रतिशत चढ़ा जबकि छोटी कंपनियों का स्मॉलकैप 1.23 प्रतिशत के लाभ में रहा। बीएसई में सूचीबद्ध 2,800 शेयरों में तेजी रही जबकि 1,371 शेयरों में गिरावट आई। 154 शेयरों में कोई बदलाव नहीं आया। वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.03 प्रतिशत की मामूली वृद्धि के साथ 62.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। रेलिगेयर ब्रोकिंग लि. के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अजित मिश्रा ने कहा कि दिसंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित ब्याज दरों में कटौती को लेकर नए सिरे से उम्मीद बढ़ने और अगले महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की उम्मीदों ने निवेशकों की धारणा को बेहतर बनाया। उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, यूक्रेन और रूस के बीच शांति की दिशा में प्रगति की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भी बाजार धारणा को मजबूत बनाया।'' सेंसेक्स मंगलवार को 313.70 अंक टूटा था जबकि निफ्टी में 74.70 अंक की गिरावट आई थी।
- नयी दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेज़ी के चलते दिल्ली सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने की कीमतें 1,200 रुपये बढ़कर लगभग दो सप्ताह के उच्चतम स्तर 1,30,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गईं। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। बाजार विश्लेषकों ने कहा कि यह बढ़त मुख्य रूप से अगले महीने अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर में कटौती की नई उम्मीदों के कारण हुई। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत भी 1,200 रुपये बढ़कर 1,29,500 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी कर मिलाकर) पर पहुंच गया। 13 नवंबर को, 99.9 प्रतिशत और 99.5 प्रतिशत वाला सोना क्रमशः 1,30,900 रुपये और 1,30,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ था। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘फेडरल रिजर्व के संभावित ब्याज दर कटौती की बढ़ती उम्मीद के बीच बुधवार को सोने में बढ़त जारी रही और यह दो सप्ताह के उच्चस्तर पर पहुंच गया। उन्होंने कहा, ‘‘दो फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की हालिया नरम टिप्पणियों के बाद, अमेरिका के नरम वृहद आर्थिक आंकड़ों ने अगले महीने संभावित कटौती की उम्मीदों को और मजबूत किया है।'' बुधवार को चांदी की कीमतों में भी लगातार दूसरे दिन तेजी आई और यह 2,300 रुपये बढ़कर 1,63,100 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी कर मिलाकर) हो गई। वैश्विक बाजार में, हाजिर सोना 33.50 डॉलर बढ़कर 4,164.30 डॉलर प्रति औंस हो गया। इसके अलावा, विदेशी व्यापार में हाजिर चांदी 1.71 प्रतिशत बढ़कर 52.37 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।
- मुंबई। टाटा केमिकल्स ने शुक्रवार को कहा कि उसके निदेशक मंडल ने गुजरात के मीठापुर और तमिलनाडु के कुड्डालोर में अपने संयंत्रों की विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए 910 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दे दी है। टाटा केमिकल्स ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि कंपनी के निदेशक मंडल (बोर्ड) ने शुक्रवार को हुई बैठक में मीठापुर में अपने संयंत्र में डेंस सोडा ऐश विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए 135 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। इसके अलावा, कंपनी ने बताया कि बोर्ड ने तमिलनाडु के कुड्डालोर में अपने संयंत्र में ‘प्रेसिपिटेटेड सिलिका’ विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए 775 करोड़ रुपये के निवेश को भी मंजूरी दी है।
- नई दिल्ली। सरकार सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम 2021 में संशोधन करने की योजना बना रही है ताकि डिजिटल सामग्री पर नई पाबंदियां जोड़ी जा सकें। प्रस्तावित बदलावों के मुताबिक ऐसी कोई भी डिजिटल सामग्री प्रसारित नहीं की जाएगी जिसमें “अश्लील, मानहानिकारक, जानबूझकर गलत, संकेतात्मक टिप्पणी/इशारे, या आधी-सच्चाइयां हों।”नए प्रावधानों में यह भी कहा गया है कि कंटेंट अच्छा-सभ्य स्वाद या शील-शोभा के खिलाफ नहीं होना चाहिए; किसी जाति, वर्ण, धर्म, नस्ल या राष्ट्रीयता का अपमान न करे; लोगों को अपराध के लिए उकसाए या हिंसा को बढ़ावा दे या उसकी महिमा न करे।ये संशोधन विशेषकर भाग-3 के दायरे में लाए जाने की बात की जा रही है। भाग-3 उन डिजिटल वीडियो इंटरमीडियरी (जैसे YouTube, Instagram) और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स (जैसे Netflix, Amazon Prime Video, Disney+ Hotstar, SonyLIV) पर लागू होते हैं। साथ ही ये नियम समाचार चैनलों और अखबारों की डिजिटल पोर्टलों पर प्रकाशित सामग्री पर भी लागू होंगे।सूत्रों के मुताबिक सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआइबी) यह भी प्रस्तावित कर सकता है कि कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म ऐसा कंटेंट न होस्ट या प्रसारित करे जो किसी व्यक्ति, किसी समूह या भारत के सामाजिक, सार्वजनिक या नैतिक जीवन के किसी हिस्से की निंदा या बदनामी करे।इन बदलावों का उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर फैलने वाली आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री को नियंत्रित करना बताया जा रहा है। अभी ये प्रस्तावित संशोधन हैं। इन्हें अंतिम रूप देने और लागू करने की प्रक्रिया सरकार तय करेगी।सूचना और प्रसारण मंत्रालय (MIB) डिजिटल कंटेंट के लिए नए नियम लाने की तैयारी कर रहा है। इन नियमों के अनुसार किसी भी ऑनलाइन कंटेंट में किसी जाति, भाषा या क्षेत्र से जुड़े समूह का अपमान करने वाला, तंज भरा या घमंडी रवैया दिखाना प्रतिबंधित होगा।मंत्रालय का प्रस्ताव है कि ऐसे नियमों का उल्लंघन करने पर वही सजा मिलेगी जो वर्तमान में ऑनलाइन “अश्लील” सामग्री प्रसारित करने पर दी जाती है।• पहली बार दोषी पाए जाने पर – 3 साल की जेल या 5 लाख रुपये जुर्माना, या दोनों• दूसरी बार दोषी पाए जाने पर – 5 साल की जेल या 10 लाख रुपये जुर्माना, या दोनोंइसके साथ ही मंत्रालय चाहता है कि ऑनलाइन जारी हर डिजिटल कंटेंट को उसकी प्रकृति के हिसाब से वर्गीकृत किया जाए, यानी टीवी की तरह रेटिंग सिस्टम लागू किया जाए।रेटिंग इस तरह होगी:• U — सभी उम्र के लिए• U/A 7+ — 7 साल से ऊपर के बच्चों के लिए• U/A 13+ — 13 साल से ऊपर के लिए• U/A 16+ — 16 साल से ऊपर के लिए13 साल या उससे अधिक उम्र के बच्चों के लिए कंटेंट दिखाने वाले प्लेटफॉर्म्स को पेरेंटल कंट्रोल की सुविधा देना अनिवार्य होगा, ताकि माता-पिता बच्चों के लिए कंटेंट लॉक कर सकें।MIB डिजिटल वीडियो इंटरमीडियरी और OTT प्लेटफॉर्म्स के नियम लगभग तैयार कर चुका है। इसके अलावा, ब्लॉगर्स, व्लॉगर्स और इन्फ्लुएंसर्स जैसे कंटेंट क्रिएटर्स के लिए अलग नियमों पर भी विचार किया जा रहा है। इसी तरह, समाचार और करंट अफेयर्स वाले डिजिटल चैनलों के लिए भी अलग नियम बनाने पर चर्चा चल रही है।
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नयी दिल्ली ।उद्योग जगत ने चार श्रम संहिताओं को लागू किए जाने के सरकार के फैसले को ऐतहासिक कदम बताते हुए शुक्रवार को कहा कि यह आधुनिक, सरलीकृत और भविष्य के लिए तैयार श्रम परिवेश की ओर बड़ा कदम है। उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने इस सुधार को भारत के श्रम परिदृश्य के लिए ‘मील का पत्थर’ बताया। उन्होंने कहा कि यह अर्थव्यवस्था को आधुनिक, सरलीकृत और भविष्य के लिए तैयार करेगा।बनर्जी ने कहा, ‘चार श्रम संहिताओं का कार्यान्वयन एक आधुनिक, सरलीकृत और भविष्य के लिए तैयार श्रम परिवेश की ओर एक बड़ा कदम है।’
उन्होंने कहा कि 29 विभिन्न कानूनों को समेकित करके, ये संहिताएं बेहतर वेतन, मजबूत सामाजिक सुरक्षा, कार्यस्थल सुरक्षा और उद्योग के लिए अधिक भरोसेमंद नियामक वातावरण सुनिश्चित करती हैं। यह सुधार वैश्विक मानकों के अनुरूप है, जो उच्च उत्पादकता और त्वरित रोज़गार सृजन की नींव को मजबूत करेगा।सरकार ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में सभी चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया। इस प्रमुख सुधार के जरिये 29 मौजूदा श्रम कानूनों को तर्कसंगत बनाया गया है।इसमें गिग यानी अल्पकालिक अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा कवरेज, सभी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य नियुक्ति पत्र और सभी क्षेत्रों में वैधानिक न्यूनतम मजदूरी तथा समय पर भुगतान जैसे प्रावधान शामिल हैं।उद्योग मंडल फिक्की के अध्यक्ष हर्ष वर्धन अग्रवाल ने कहा, ‘चार श्रम संहिताएं कारोबार को और सुगम बनाती हैं, अनुपालन को सरल बनाती हैं और उद्योग के विकास का समर्थन करती हैं। साथ ही श्रमिकों की भलाई, सामाजिक सुरक्षा और पारदर्शिता को भी मजबूत करती हैं।’फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा कि ये संहिताएं उद्योग की प्रतिस्पर्धी क्षमताएं बढ़ाएंगी।उन्होंने कहा कि श्रमिकों के कल्याण के दृष्टिकोण से, ये संहिताएं सभी के लिए न्यूनतम मजदूरी, बेहतर कार्यस्थल सुरक्षा , वार्षिक स्वास्थ्य जांच, मातृत्व और सामाजिक सुरक्षा संरक्षण सुनिश्चित करती हैं, साथ ही महिलाओं के लिए सुरक्षित रात्रि पाली के अवसर भी प्रदान करती हैं।उन्होंने इन सुधारों को ‘विकसित भारत’ की दिशा में एक ‘परिवर्तनकारी कदम’ बताया।गिग और ब्लू-कॉलर कार्यबल के लिए मंच निआ डॉट वन के संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सचिन छाबड़ा ने कहा, ‘श्रम संहिताएं भारत में काम को समझने के तरीके में हो रहे अहम बदलाव को दर्शाती है।उन्होंने कहा, ‘‘…यह भारत के श्रम बाजार के लिए एक सकारात्मक कदम है, और अगर इसे अच्छी तरह से लागू किया जाए, तो एक ऐसे भविष्य का निर्माण किया जा सकता है जहां उत्पादकता और गरिमा मुकाबला करने की बजाय एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।’ -
नयी दिल्ली. अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के चलते बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत 1,500 रुपये बढ़कर 1,27,300 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। अखिल भारतीय सर्राफा संघ ने यह जानकारी दी। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,500 रुपये बढ़कर 1,26,700 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुँच गई। चांदी की कीमतों में भी तेजी आई और यह 4,000 रुपये बढ़कर 1,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गई। इससे स्थानीय सर्राफा बाजार में तीन दिन की गिरावट थम गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (जिंस) सौमिल गांधी ने कहा, ‘‘बुधवार को सोने में तेजी आई, जिसे नए सिरे से सुरक्षित निवेश की मांग का समर्थन मिला, जबकि अमेरिकी श्रम बाजार में लगातार कमजोरी के संकेतों ने संभावित ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को बनाए रखा।'' वैश्विक मोर्चे पर, हाजिर सोने ने लगातार दूसरे सत्र में अपनी बढ़त जारी रखी और 46.32 डॉलर बढ़कर 4,114.01 डॉलर प्रति औंस हो गया। मिराए एसेट शेयरखान के जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा, ‘‘निवेशकों को फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की अक्टूबर बैठक के आज रात जारी होने वाले ब्योरे का इंतजार है, जिससे हाजिर सोना 4,084 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है।'' कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी और जिंस शोध विश्लेषक कायनात चैनवाला ने बताया कि मंगलवार को सोना एक सप्ताह के निचले स्तर से उबरकर 4,065 डॉलर प्रति औंस से ऊपर बंद हुआ। इसे अमेरिका में रोजगार के कमजोर आंकड़ों और कई विलंबित वृहद आंकड़ों से पहले सतर्कता का समर्थन मिला। विदेशी व्यापार में हाजिर चांदी 3.09 प्रतिशत बढ़कर 52.26 डॉलर प्रति औंस हो गई।
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नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को Trade Intelligence & Analytics (TIA) Portal लॉन्च किया। यह पोर्टल अब देश के exporters, importers, startups और MSMEs को वह डेटा उपलब्ध कराएगा, जो अब तक केवल बड़े व्यापारिक संस्थानों की पहुंच में होता था।
गोयल ने कहा कि भारत के छोटे उद्यमियों को अब वैश्विक व्यापार से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आसानी से मिलेगी, जिससे वे Free Trade Agreements (FTAs) का बेहतर लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने बताया कि वैश्विक सर्विस सेक्टर में भारी संभावनाएं हैं और TIA Portal इन अवसरों को देश के कारोबारियों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाएगा।Data-driven trade decisions अब होंगे आसानवाणिज्य मंत्रालय ने मार्च 2024 में इस पोर्टल के विकास की शुरुआत की थी, ताकि evidence-based policymaking, सेक्टोरल इंटरवेंशन और मजबूत व्यापार विश्लेषण संभव हो सके।TIA Portal एक वन-स्टॉप एनालिटिक्स प्लेटफ़ॉर्म है जिसमें भारत, वैश्विक और द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े कई डेटाबेस शामिल हैं। यह व्यापार और मैक्रो-इकोनॉमिक संकेतकों के विश्लेषण के लिए व्यापक टूल्स उपलब्ध कराता है।मुख्य फीचर्सTrade Watch Tower: देशों और कमोडिटीज़ का विस्तृत विश्लेषण, मार्केट डाइवर्सिफिकेशन के अवसर पहचानने की सुविधाAutomated data collation: API आधारित डेटा एक्सट्रैक्शनAutomated reports: 300+ पन्नों की मासिक ट्रेड रिपोर्ट और 30+ पन्नों की सर्ज रिपोर्टChampion Products identification: वैश्विक मांग और भारत की सप्लाई क्षमता का मिलानPLI items dashboards: पॉलिसी प्रभाव का मूल्यांकनCritical Minerals Dashboard: 30 से अधिक महत्वपूर्ण खनिजों का व्यापार डेटाSurge Monitoring Tools: FTA और non-FTA देशों के साथ आयात-निर्यात में अचानक हो रहे बदलावों का विश्लेषणगोयल ने कहा कि यह पोर्टल कम लागत वाला, ओपन-सोर्स और स्केलेबल प्लेटफ़ॉर्म है, जो लंबे समय तक व्यापार विश्लेषण को सक्षम बनाएगा।नई सुविधाएँ जल्दTariff Analysis Dashboard और Target Monitoring Dashboard भी विकसित किए जा रहे हैं, जिनके जरिए टैरिफ से जुड़ी जानकारी और सेक्टर-वाइज प्रदर्शन पर नज़र रखना आसान होगा। -
नयी दिल्ली। देश का सोने का आयात अक्टूबर में लगभग तीन गुना होकर 14.72 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। अक्टूबर, 2024 में सोने का आयात 4.92 अरब डॉलर था।कुल मिलाकर इस वित्त वर्ष में अप्रैल-अक्टूबर के दौरान आयात 21.44 प्रतिशत बढ़कर 41.23 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले समान अवधि में 34 अरब डॉलर था। उच्च सोने के आयात के कारण देश का व्यापार घाटा (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) अक्टूबर में 41.68 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमतें 1.29 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास हैं।आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि आयात में वृद्धि का कारण त्योहारी मांग हो सकती है। स्विट्जरलैंड सोने के आयात का सबसे बड़ा स्रोत है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है, इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (16 प्रतिशत से अधिक) और दक्षिण अफ्रीका (लगभग 10 प्रतिशत) का स्थान है। देश के कुल आयात में इस बहुमूल्य धातु का हिस्सा पांच प्रतिशत से अधिक है। अक्टूबर, 2025 में चांदी का आयात भी 528.71 प्रतिशत बढ़कर 2.71 अरब डॉलर हो गया।
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मुंबई.। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के प्रबंध निदेशक रत्नाकर पटनायक ने सोमवार को जीवन बीमा क्षेत्र को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से छूट देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इससे बीमा कंपनियों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा करने में मदद मिलेगी। पटनायक ने 22 सितंबर, 2025 से सभी व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को समाप्त करने के सरकार के फैसले का भी स्वागत किया। पटनायक ने यहां सीआईआई वित्त पोषण शिखर सम्मेलन में कहा, ‘‘मेरा एक छोटा सा अनुरोध है... इस पर कोई कर नहीं है। क्या इसे जीएसटी से छूट मिल सकती है? इससे हमें कुछ इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्राप्त करने में मदद मिलेगी।'' जीएसटी परिषद ने अगस्त में इसे जीएसटी मुक्त श्रेणी में डाले बिना जीएसटी को शून्य करने का संकल्प लिया था। जीएसटी मुक्त श्रेणी के तहत, एलआईसी जैसी कंपनियां आईटीसी के मोर्चे पर लाभ के माध्यम से परिचालन लागत में बचत का लाभ उठा सकती हैं। पटनायक ने नीति निर्माताओं से सरकारी प्रतिभूतियों और राज्य विकास ऋणों की अतिरिक्त होल्डिंग को बुनियादी ढांचे और आवास निवेश के रूप में मानने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि सरकारें इसी उद्देश्य के लिए धन का उपयोग करती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में, बीमा कंपनियां आवास और बुनियादी ढांचे में अपने निवेश को 15 प्रतिशत की अनिवार्य सीमा के मुकाबले नौ प्रतिशत से थोड़ा अधिक तक ही ले जा पाई हैं। पटनायक ने सरकार से पांच लाख रुपये से अधिक प्रीमियम वाली पॉलिसियों की परिपक्वता राशि पर कर लगाने की तीन साल पुरानी नीति की समीक्षा करने की भी अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘क्या अब 10 लाख रुपये तक की पॉलिसी को संशोधित करने का समय आ गया है? परिपक्वता राशि कर-मुक्त होनी चाहिए, ताकि हम कुछ अच्छी पॉलिसी प्राप्त कर सकें और अच्छा पैसा जुटा सकें।'' पटनायक ने कॉरपोरेट बॉन्ड और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के माध्यम से देश के विकास उद्देश्यों में निवेश के लिए एलआईसी का समर्थन दोहराया।
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मुंबई। भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार तिवारी ने सोमवार को कहा कि एसबीआई जोखिम भरे नए क्षेत्रों के लिए एक ऋण गारंटी योजना लाने को लेकर सरकार के साथ बातचीत कर रहा है। तिवारी ने कहा कि एसबीआई प्राथमिकता क्षेत्र ऋण दायित्व में हरित वित्त को भी शामिल करना चाहता है, लेकिन आरबीआई और सरकार अन्य पहलुओं पर पड़ने वाले प्रभाव के कारण इस विचार के खिलाफ है। उन्होंने यहां उद्योग मंडल सीआईआई के कार्यक्रम में कहा कि एसबीआई जल्द ही एक उत्कृष्टता केंद्र शुरू करेगा जो न केवल उसे बल्कि वित्त पोषकों के व्यापक जगत को ऋण नीतियों का मसौदा तैयार करने, जोखिम का आकलन और मूल्य निर्धारण आदि जैसे पहलुओं में मदद करेगा। तिवारी ने कहा कि उत्कृष्टता केंद्र आठ क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहन, उच्चस्तरीय सौर प्रौद्योगिकी, हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया, बैटरी और डेटा सेंटर शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम सरकार से उद्योग के नए युग और जोखिम भरे पहलुओं के लिए कुछ गारंटी योजनाएं बनाने का अनुरोध कर रहे हैं।'' हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया। वर्तमान में, सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों जैसे क्षेत्रों और स्टार्टअप के लिए ऋण गारंटी योजनाएं हैं। इसके तहत ऋण न मिलने की स्थिति में वित्तपोषकों को राज्य सहायता के रूप में राहत प्रदान की जाती है। तिवारी ने कहा कि उत्कृष्टता केंद्र शोध संस्थान और बहुपक्षीय संस्थानों के साथ भी संपर्क बनाएगा और बैंक ने इस संबंध में 20 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा के मोर्चे पर कहा कि एसबीआई ने एक सरकारी योजना के तहत तीन लाख परिवारों को छतों पर सौर ऊर्जा इकाई लगाने में मदद की है। उसका लक्ष्य इस संख्या को पांच लाख तक पहुंचाने की है।
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नई दिल्ली। फेस्टिव सीजन के चलते भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में 7.5 प्रतिशत के करीब रह सकती है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।एसबीआई रिसर्च की ओर से संकलित किए गए डेटा में बताया गया कि भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती निवेश गतिविधियां बढ़ने, ग्रामीण स्तर पर खपत बढ़ने और सर्विसेज और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मजबूत वृद्धि से मिल रही है।
इस ट्रेंड को संरचनात्मक सुधारों जैसे जीएसटी 2.0 से सपोर्ट मिल रहा है, जिसने फेस्टिव डिमांड को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।एसबीआई रिसर्च ने बताया कि अधिकतर आर्थिक संकेतक अब तेजी दिखा रहे हैं। कृषि, उद्योग, सेवाओं और उपभोग से जुड़े 50 प्रमुख संकेतकों में से 83 प्रतिशत ने दूसरी तिमाही में सुधार दिखाया, जबकि पहली तिमाही में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत पर था।रिपोर्ट में बताया गया कि वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.5-8 प्रतिशत के बीच रह सकती है और जीवीए ग्रोथ करीब 8 प्रतिशत के आसपास रहने का अनुमान है।रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि आने वाली तिमाही में व्यापक स्तर पर ग्रोथ मजबूत रहने का अनुमान है। सितंबर से अक्टूबर तक चलने वाले फेस्टिव सीजन मांग को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। वहीं, जीएसटी की दरों में कटौती और मजबूत ई-कॉमर्स गतिविधियों ने ग्राहक खर्च को बढ़ाने में मदद की है।क्रेडिट और डेबिट कार्ड लेनदेन के आंकड़ों ने ऑटो, किराना, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान और यात्रा जैसी श्रेणियों में मजबूत वृद्धि दिखाई।मध्यम श्रेणी के शहरों में खर्च में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी गई, जबकि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर डेबिट कार्ड के इस्तेमाल में महानगरों ने बढ़त दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, “डेबिट कार्ड से की गई खरीदारी में किराना और सुपरमार्केट की वस्तुओं का बड़ा योगदान रहा।”रिपोर्ट में पाया गया कि जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने से अधिकांश प्रमुख उपभोग श्रेणियां अत्यधिक लचीली हो गई हैं, जिसका अर्थ है कि उपभोक्ताओं ने कम कर दरों पर मजबूत प्रतिक्रिया दी।केवल वस्त्र क्षेत्र में कम लचीलापन दिखा। एसबीआई रिसर्च का अनुमान है कि एक सामान्य भारतीय उपभोक्ता अब अपने उपभोग व्यय पर प्रति माह लगभग 7 प्रतिशत की बचत कर सकता है, और जैसे-जैसे अधिक आंकड़े उपलब्ध होंगे, यह लाभ और भी बढ़ सकता है। -
नयी दिल्ली. विदेशी बाजारों में मजबूत रुख के बीच सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत 300 रुपये बढ़कर 1,29,700 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। बाजार सूत्रों ने यह जानकारी दी। 99.5 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत भी 300 रुपये बढ़कर 1,29,100 रुपये (सभी करों सहित) हो गई।
हालांकि, सोमवार को चांदी की कीमत 1,000 रुपये घटकर 1,63,800 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी करों सहित) रह गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, हाजिर सोना 4,077.35 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रहा, जबकि हाजिर चांदी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 50.89 डॉलर प्रति औंस पर बोली गई। मिराए एसेट शेयरखान के जिंस प्रमुख प्रवीण सिंह ने कहा, ‘‘मज़बूत डॉलर के कारण हाजिर सोना फिलहाल स्थिर कारोबार कर रहा है, जबकि ताइवान पर चीन की टिप्पणियों को लेकर चीन-जापान तनाव गिरावट को कम कर रहा है।'' ऑग्मोंट की शोध प्रमुख रेनिशा चैनानी ने कहा, ‘‘पिछले हफ़्ते बाज़ार में हुई भारी बिकवाली, जो अमेरिकी फेडरल रिज़र्व के अधिकारियों की आक्रामक टिप्पणियों के कारण हुई थी, जिससे दिसंबर में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हो गई थीं, के कारण सोने की कीमतों में 2.5 प्रतिशत और चांदी की कीमतों में 5.5 प्रतिशत की गिरावट आई।'' चैनानी ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व दिसंबर में ब्याज दरों को अपरिवर्तित बनाए रखने के लिए ‘शटडाउन' का हवाला दे रहा है। -
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में घरेलू हवाई यात्रा के बढ़ते किरायों और एयरलाइंस की मनमानी के खिलाफ दाखिल याचिका पर सोमवार को अहम सुनवाई हुई। कोर्ट ने केंद्र सरकार और डीजी सिविल एविएशन को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्तों के भीतर जवाब देने को कहा है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि घरेलू उड़ानें अब आम लोगों की जरूरत बन चुकी हैं, इसलिए इन्हें आवश्यक सेवा घोषित किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि एयरलाइंस डायनेमिक प्राइसिंग के नाम पर किरायों में मनमानी बढ़ोतरी कर रही हैं। टिकट की कीमतें कभी भी अचानक बहुत बढ़ जाती हैं, जिससे यात्रियों पर बोझ पड़ता है। कई बार ऐसा होता है कि एक ही उड़ान की टिकट कुछ घंटों के अंदर काफी महंगी हो जाती है।याचिका में यह भी कहा गया है कि एयरलाइंस चेक-इन बैगेज लिमिट पर भी अपनी मनमानी कर रही है। पहले यात्रियों के लिए मुफ्त चेक-इन बैगेज की सीमा 25 किलोग्राम थी, लेकिन अब इसे घटाकर 15 किलो कर दिया गया है। इससे यात्रियों को अतिरिक्त बैगेज के नाम पर काफी पैसे चुकाने पड़ते हैं। याचिकाकर्ता ने इसे आम यात्रियों का शोषण बताया।याचिका में यह भी कहा गया कि देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में किराया निर्धारण का कोई पारदर्शी तरीका नहीं है। एयरलाइंस अपने एल्गोरिदम से किराए बढ़ाती हैं, जिसमें यात्रियों के हितों का ध्यान नहीं रखा जाता। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि वह इस पूरे सिस्टम की जांच करवाए और सरकार को स्पष्ट नियम बनाने का निर्देश दे।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत नोटिस जारी किया और सरकार से जवाब मांगा है। यात्रियों से जुड़े मुद्दे होने के कारण कोर्ट ने कहा कि यह मामला विचार योग्य है और केंद्र सरकार और डीजी (सिविल एविएशन) को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। चार हफ्तों में सरकार को जवाब देना होगा, जिसके बाद आगे की सुनवाई की जाएगी। - नयी दिल्ली । त्योहारी सीजन से पहले शुष्क ईंधन की बढ़ती मांग के कारण सितंबर में देश का कोयला आयात 13.54 प्रतिशत बढ़कर 2.20 करोड़ टन पर पहुंच गया। इससे पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने में कोयला आयात 1.94 करोड़ टन कोयले रहा था।आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में गैर-कोकिंग कोयले का आयात 1.39 करोड़ टन रहा, जो सितंबर, 2024 के 1.32 करोड़ टन के आंकड़े से थोड़ा अधिक है। इस्पात क्षेत्र के लिए आवश्यक कोकिंग कोयले का आयात एक साल पहले के 33.9 लाख टन की तुलना में बढ़कर 45 लाख टन हो गया। एमजंक्शन सर्विसेज द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-सितंबर, 2025 की अवधि के लिए, गैर-कोकिंग कोयले का आयात पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 9.19 करोड़ टन से घटकर 8.60 करोड़ टन रह गया, जबकि कोकिंग कोयले का आयात 2.81 करोड़ टन से बढ़कर 3.15 करोड़ टन हो गया। एमजंक्शन सर्विसेज एक बी2बी ई-कॉमर्स मंच है और टाटा स्टील तथा सेल का एक संयुक्त उद्यम है।इस रुझान पर टिप्पणी करते हुए, एमजंक्शन के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) विनय वर्मा ने कहा, ‘‘त्योहारों के मौसम से पहले खरीदारों द्वारा खरीदारी बढ़ाने के कारण मात्रा में वृद्धि हुई है। इस्पात मिलों की ओर से सर्दियों में पुनः भंडारण की मांग से आगे चलकर कोकिंग कोयले के आयात में तेजी आने की उम्मीद है।'' क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि धातुकर्म और औद्योगिक कोयले की मांग में मजबूती, विशेष रूप से इस्पात मिलों से, इस वर्ष बिजली क्षेत्र की खरीद में मौसमी कमजोरी को कम कर देगी। भारत विभिन्न सरकारी पहल के माध्यम से घरेलू कोयला उत्पादन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाकर कोयला आयात पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। फिर भी, देश अपनी विशिष्ट आवश्यकताओं, विशेष रूप से उच्च-श्रेणी के तापीय कोयले और कोकिंग कोयले के लिए आयात पर निर्भर बना हुआ है, जो इस्पात जैसे उद्योगों के लिए आवश्यक हैं और जिनकी घरेलू स्तर पर कमी है।

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