समाज, परिवार में सहोगे तो रहोगे: काले
-महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों और विभिन्न समितियों की बैठक में महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष ने दिए एकजुटता के टिप्स
रायपुर। समाजसेवा करने के लिए घर से निकलो हो, किसी की मदद करने के लिए घर से बाहर आए हो, तो जरूरी नहीं कि हर जगह आपकी वाह वाह हो, प्रशंसा हो। कहीं किसी को आपके कार्य अच्छे न लगे। कहीं आपके काम करने की शैली उचित न लगे। कहीं किसी अन्य वजह से सामने वाले आपसे प्रभावित न हो और वे अपनी प्रतिक्रिया आपकी आशा के खिलाफ देने लगे, तो आपको विचलित नहीं होना चाहिए।बल्कि सारी बातें सुनकर उनसे और भी बेहतर सेवा कार्य करने का वादा करना चाहिए। यही बातें संगठन में भी लागू होती हैं और परिवार में भी। आवश्यक नहीं कि सारे लोग आपकी तारीफ ही करें। आलोचनाओं को, निंदा को आपको सहना होगा और पूरी सकारात्मकता के साथ उसे स्वीकार करना होगा। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने इस आशय के विचार कार्यकारिणी सदस्यों, महिला केंद्रों की संयोजिकाओं, सह संयोजिकाओं और विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों की बैठक में व्यक्त किए।
काले ने कहा कि आजकल लोग दूसरे को सम्मान देने में कंजूसी करते हैं। ऐसे वातावरण में हम ही अपने केंद्रों की संयोजिकाओं, सह संयोजिकाओं विभिन्न समितियों के समन्वयकों, प्रभारियों, सह प्रभारियों को न सिर्फ पूरा सम्मान देना चाहिए बल्कि उनके आदेशों, आग्रहों को भी मानना चाहिए। ये जरूरी नहीं कि उनकी ओर से बोली गई हर बात से आप सहमत हों, असहमति पर भी आपको उनकी बातों का, उनका सम्मान करते हुए उनके निर्देशों का हमें पालन करना चाहिए।
मंडल अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि अब वो समय नहीं रहा, जब महिलाएं आओ बहन, चलो चुगली- चुगली खेलें कहें। अब यदि किसी महिला या पदाधिकारी का केंद्रों अथवा समितियों में अपेक्षित सम्मान नहीं होता तो वह आपसे दूर होता चला जाएगा। हमें सभी को जोड़कर रखना है। इसके लिए हमारा पहला दायित्व है कि हम सभी को महत्व दें, सम्मान दें और यह न सोचे कि उसकी ओर से हमें कितना सम्मान या महत्व मिल रहा है।
महिला प्रमुख विशाखा मदन तोपखानेवाले ने महिलाओं से केंद्र में नए- नए सदस्यों को किस तरह जोड़ा जाए, की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र के कार्यक्रम में हम गेम और किटी तो करते ही हैं। इससे हमें एक साथ मिलने- जुलने और समझने का अवसर मिलता है। उसके अलावा हमें कई सामाजिक कार्य भी करना है। इससे नए लोग हमसे जुड़ेंगे। इन कार्यों को करने के लिए संस्था के प्रति समर्पण भाव चाहिए। उन्होंने दंतकथा के माध्यम से बताया कि किस तरह समर्पण के भाव के साथ समाजसेवा की जाती है और किस तरह अपने समाज, घर और परिवार के लिए काम किया जाता है। बैठक के अंत में उपाध्यक्ष गीता दलाल ने उपस्थित सभी जनों का आभार व्यक्त किया।





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