प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को ले किसानों में व्याप्त भ्रांति को दूर करने शिवराज सिंह को ज्ञापन
रायपुर। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यदि सोसायटियों के माध्यम से अल्पकालीन ऋण लेने वाले किसानों के लिये अनिवार्य है तो फिर इससे असहमति दर्ज कराने वाले किसानों को कव्हरेज से मुक्त क्यों किया जा रहा है और यदि स्वैच्छिक है तो फिर असहमति दर्ज न कराने वाले किसानों से बिना उनका सहमति लिये जबरिया उनके खाते से बैंकों द्वारा बीमा प्रीमियम की राशि का आहरण बीमा कंपनी के खाते में डालने क्यों किया जा रहा है। किसानों को संबंधित सोसायटियों से मौखिक ऊपरी आदेश होने संबंधी जानकारी मिलने से किसानों में व्याप्त आक्रोश व इस योजना के अनिवार्य अथवा स्वैच्छिक होने को लेकर व्याप्त भ्रांति को दूर करने की मांग को लेकर किसान संघर्ष समिति के संयोजक भूपेंद्र शर्मा ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह को मेल से ज्ञापन भेज वस्तुस्थिति से किसानों को अवगत कराने का आग्रह किया है । साथ ही क्षेत्रीय सांसद बृजमोहन अग्रवाल को भी ज्ञापन की प्रति दे पहल कर जल्द से जल्द इस भ्रांति को दूर करवाने का आग्रह किया है ।
ज्ञापन में लिखा गया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2025 को अधिसूचित क्षेत्र के अधिसूचित फसलों के लिये वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेने वाले किसानों के लिये लागू किया गया है और छत्तीसगढ़ में भी इसे लागू कर अलग-अलग बीमा कंपनियों को जिलेवार बीमा करने अधिकृत किया गया है । योजना को प्रश्नाकित करते हुये लिखा गया है कि यदि इन किसानों के लिये बीमा अनिवार्य है तो फिर सीधे सभी किसानों के खाते से प्रीमियम की राशि का आहरण क्यों नहीं किया जा रहा है और उन्हें सोसायटियों में बुला - बुला असहमति दर्शाने पर असहमति प्रपत्र भरवा उन्हें इस योजना से पृथक कर शेष किसानों से सहमति पत्र भरवाये बिना जबरिया उसके खाते से प्रीमियम की राशि का आहरण क्यों किया जा रहा है और यदि स्वैच्छिक है तो फिर सिर्फ इच्छुक किसानों से सहमति पत्र भरवा उनके खाते से प्रीमियम राशि का आहरण क्यों नहीं किया जा रहा है । छग में केन्द्रीय सहकारी बैंकों के अधीनस्थ सोसायटियों द्वारा 95 प्रतिशत किसानों द्वारा कृषि कार्य हेतुअल्पकालीन ऋण लेने व किसानों द्वारा खरीफ धान की फसल लेने की जानकारी देते हुये बतलाया गया है इन सोसायटियों में न तो इस योजना की प्रति ही उपलब्ध है और न ही यहां के प्रबंधकों को इस योजना की पूरी जानकारी है तो फिर किसानों की बात तो दूर । सोसायटियों के प्रबंधकों से चर्चा करने पर एक ही जवाब मिलता है कि ऊपर के आदेश से हम ऐसा कर रहे हैं । ज्ञापन में आगे जानकारी दी गयी है कि पूर्व में इस योजना में बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई थी जिस तिथि के समाप्त होते ही बैंकों द्वारा असहमति प्रपत्र न भरने वाले किसानों के खाते से प्रीमियम की राशि का आहरण कर लिया गया है लेकिन बाद में तिथि 14 अगस्त तक बढ़ाये जाने के कारण इस राशि को बीमा कंपनी के खाते में न डाल अनिच्छुक किसानों से फिर असहमति प्रपत्र भरवाया जा रहा है । उन्होंने जबरिया फसल बीमा का मामला होने पर संबंधित बैंक अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने व काटे गये प्रीमियम की राशि किसानों के खाते में वापस डलवाने का आग्रह किया है । ज्ञापन में आगे यह भी जानकारी दी गयी है कि फसल बीमा योजना के पोर्टल में नये किसानों का डाटा की प्रविष्टि न होने व संयुक्त खाता में सहखातेदार होने की स्थिति में वे इस योजना का इच्छुक होने की स्थिति में भी लाभ लेने से वंचित रह जाने वाले हैं ।





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