किस्से कहानियों में रायपुर - टाउन हॉल में उपन्यासकार संजीव बक्शी, लेखक डॉ. चितरंजन कर ने रायपुर शहर में मोहल्लो से लेकर राजधानी बनने के सफर पर डाला विस्तृत प्रकाश
रजत जयंती महोत्सव
पुराने रायपुर शहर में 300 तालाब थे और जनसंख्या तब 25-30 हजार की थी
रायपुर/ छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना को 25 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित किये जा रहे छत्तीसगढ़ राज्य रजत जयंती महोत्सव के अंतर्गत रायपुर महापौर श्रीमती मीनल चौबे, रायपुर जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह, आयुक्त श्री विश्वदीप के निर्देश पर रायपुर जिला प्रशासन और नगर निगम रायपुर संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्त्वावधान में विविध सांस्कृतिक आयोजन किये जा रहे है।
आज आयोजन के कम में उपन्यासकार श्री संजीव बक्शी और लेखक डॉ. चितरंजन कर ने रायपुर शहर में मोहल्ले से राजधानी शहर तक बनने के सफर पर प्रकाश डाला।
श्री संजीव बक्शी और डॉक्टर चितरंजन कर ने रायपुर के गुरु घासीदास संग्रहालय, दूरदर्शन केन्द्र से देशभक्ति गीतों का प्रसारण, पुराने रायपुर शहर के इतिहास पर चर्चा की। लेखक डॉक्टर चितरंजन कर ने 40 किताबें लिखी हैँ।
वक्ताओं द्वारा जानकारी दी गयी कि शिवनाथ के ऊपरी हिस्से में 18 गढ़ और नीचले हिस्से में 18 गढ़ थे। इसीलिए क्षेत्र का नाम छत्तीसगढ़ 13 वीं 14 वीं शताब्दी के दौरान पड़ा। तब पुराने रायपुर शहर में 300 तालाब थे और शहर की जनसंख्या 25-30 हजार हुआ करती थी। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद रायपुर शहर के विकास में तेज गति आयी। वक्ताओ ने पुराने विश्वविद्यालयों के इतिहास पर चर्चा की और कहा कि पुराने रायपुर शहर का डीके हास्पिटल रायपुर नगरवासियों के लिए एक मात्र अस्पताल पुराने शहर में था। वक्ताओ ने ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर चर्चा की ।
मंच से जानकारी दी गई कि उपन्यासकार श्री संजीव बक्शी द्वारा ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर उपन्यास लिखा गया है, जिस पर फिल्म निर्देशक श्री मनोज वर्मा द्वारा फिल्म तैयार की जा रही है। ग्रामीण न्याय व्यवस्था पर आधारित उपन्यास को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का सम्मान प्राप्त हो चुका है।

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