तान्हा पोलाः बच्चों ने पारंपरिक बर्तनों में परोसे व्यंजन
0- सजे- धजे लकड़ी और मिट्टी के बैलों को लेकर पहुंचे प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र के साथ आकर्षक उपहार देकर किया गया प्रोत्साहित
रायपुर। डिजिटल दुनिया में बच्चों को अपने संस्कारों की धरोहर सौंपना बड़ी जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र मंडल यह ज़िम्मेदारी बखूबी निभा रहा है। मंडल की सांस्कृतिक समिति की ओर से शनिवार को महाराष्ट्र मंडल भवन में तान्हा पोला उत्सव का आयोजन किया गया। इसमें बच्चे अपने मिट्टी और लकड़ी के बैलों को मनमोहक ढंग से सजाकर पहुंचे थे।
महाराष्ट्र मंडल की सांस्कृतिक समिति की प्रभारी प्रिया बख्शी और गौरी क्षीरसागर ने बताया कि तान्हा पोला उत्सव के लिए बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे। कार्यक्रम में मान्या राउत, सार्विका पांडे, अवनी राउत, सार्थक पांडे और आर्यन राउत ने अपने सजे- धजे लकड़ी के बैलों को साथ लेकर भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. कमल वर्मा और सिविल इंजीनियर और हाउस हाइफ अनुपमा बोधनकर ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि आज से समय में अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से भावी पीढ़ी को जोड़े रखने के लिए ऐसे आयोजन बहुत जरूरी है। दिव्यांग बालिका विकास गृह प्रभारी प्रसन्न निमोणकर ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए पोला के महत्व पर प्रकाश डाला।
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