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 कृषि विभाग की सलाह, धान के साथ दलहन-तिलहन का बढ़ाएं रकबा

बिलासपुर. कृषि विभाग ने खरीफ सीजन को लेकर जिले के किसानों के लिए समसामयिक कृषि सलाह जारी करते हुए कम वर्षा की स्थिति में धान के साथ-साथ दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने की अपील की है। विभाग ने बताया कि 1 जून से 8 जुलाई 2026 तक जिले में 121.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो इस अवधि की सामान्य वर्षा 164.4 मिमी की तुलना में लगभग 26 प्रतिशत कम है। वर्षा के असमान वितरण और संभावित अल्पवृष्टि को देखते हुए किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने, जल संरक्षण करने तथा कम पानी वाली फसलों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
सहायक संचालक कृषि श्री शंशाक शिंदे ने बताया कि खरीफ सीजन के लिए जिले में खाद एवं प्रमाणित बीज का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित किया गया है। वर्तमान में जिले की 114 सहकारी समितियों एवं कृषि विभाग के कार्यालयों में 17,348 क्विंटल प्रमाणित बीज का भंडारण किया गया था, जिसमें से 15 हजार क्विंटल से अधिक बीज का वितरण किया जा चुका है। इसी प्रकार यूरिया 28,572 मीट्रिक टन, डीएपी 6,456.38 मीट्रिक टन, एमओपी 1,596 मीट्रिक टन, एनपीके 8,300 मीट्रिक टन तथा एसएसपी 8,005 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराए गए हैं। अब तक 39,541.455 मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया जा चुका है तथा वर्तमान में जिले के सहकारी समितियों में लगभग 2,200 क्विंटल प्रमाणित बीज एवं 13,389.054 मीट्रिक टन उर्वरक किसानों के लिए उपलब्ध हैं।
कृषि विभाग ने किसानों को धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) तकनीक अपनाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार यह तकनीक पानी की बचत करने के साथ-साथ खेती की लागत कम करती है और फसल जल्दी तैयार होती है। साथ ही किसानों को सहभागी धान, एमटीयू-1010, इंदिरा बारानी धान-1, दंतेश्वरी एवं पूर्णिमा जैसी कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों के उपयोग की सलाह दी गई है। विभाग ने किसानों से केवल सहकारी समितियों से प्रमाणित बीज एवं उर्वरक लेने का आग्रह भी किया है।
जिले में इस वर्ष लगभग 2,408 एकड़ क्षेत्र में हरी खाद के रूप में ढैंचा एवं मूंग की खेती की गई है। कृषि विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ढैंचा की फसल 35 से 40 दिन की होने पर उसे मिट्टी में पलट दें, जिससे भूमि में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ेगी और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम होगी। इसी प्रकार मूंग की फसल के अवशेषों को खेत में मिलाने से भी आगामी धान फसल को प्राकृतिक पोषक तत्व प्राप्त होंगे। सहायक संचालक कृषि ने बताया कि कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए राज्य शासन की कृषक उन्नति योजना तथा केंद्र सरकार की पीएम-आशा योजना का लाभ किसानों को एक साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। धान के स्थान पर मूंग, उड़द, अरहर, सोयाबीन, मूंगफली अथवा मक्का जैसी वैकल्पिक फसलें लेने वाले किसानों को कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। वहीं पीएम-आशा योजना के अंतर्गत दलहन एवं तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी।
विभाग ने बताया कि इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को एकीकृत किसान पोर्टल एवं एग्रीस्टैक पर भूमि एवं फसल का डिजिटल पंजीयन कराना अनिवार्य है। साथ ही किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी खरीफ फसलों का समय पर बीमा कराने की भी अपील की गई है, ताकि सूखा, अतिवृष्टि अथवा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके। कृषि विभाग ने जिले के किसानों से वर्तमान वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए धान के साथ-साथ दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने, वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने तथा किसी भी तकनीकी जानकारी या शासकीय योजना का लाभ लेने के लिए अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा विकासखंड कृषि कार्यालय से संपर्क करने की अपील की है।
 

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