बालाजी मंदिर में अष्टबंधन महासंप्रोक्षण और ब्रह्मोत्सव की तैयारियां युद्धस्तर पर

-29 फरवरी से 6 मार्च तक होंगे धार्मिक अनुष्ठान
-बड़ी स्क्रीन से होगा सीधा प्रसारण
-इस अवसर पर भिलाई के प्रतिभावान बच्चों द्वारा नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी
टी सहदेव
भिलाई नगर। सेक्टर 5 स्थित बालाजी मंदिर में अष्टबंधन महासंप्रोक्षण और ब्रह्मोत्सव की तैयारियां युद्धस्तर पर हो रही हैं। अनुष्ठान शुरू होने में सिर्फ एक दिन ही शेष है। 29 फरवरी से 6 मार्च तक होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों को देखते हुए तीनों मंदिरों का संधारण कर रंगरोगन किया गया। बता दें कि मंदिर परिसर में बालाजी मंदिर के अलावा श्रीदेवी तथा भूदेवी के मंदिर भी हैं। केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि मुख्य द्वार पर स्थित भव्य गोपुरम समेत पूरे मंदिर परिसर का भी रंगरोगन किया गया। आगंतुकों के स्वागत के लिए गोपुरम के ठीक सामने आकर्षक ढंग से सज्जित नया प्रवेश द्वार बनाया जाएगा। बुधवार तक अनुष्ठान के भव्य आयोजन के लिए मंदिर पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा।
तिरुपति से प्रधान पंडितों का जत्था रवाना
दोनों धार्मिक अनुष्ठानों को संपन्न कराने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की वैदिक यूनिवर्सिटी के 20 प्रधान पंडितों का जत्था भिलाई के लिए रवाना हो चुका है। मंदिर प्रांगण में भगवान की विशिष्ट सेवा के लिए शीशे का एक शयनकक्ष भी बनाया गया है, जिसमें एक झूला भी लगाया जाएगा। पूजा स्थल की फ्लोरिंग भी की गई, जहां विशाल पंडाल बनाया जाएगा। वाहन बेतरतीब ढंग से खड़े न हों, इसके लिए पार्किंग स्थल बनाया गया है। इसके साथ-साथ भक्तगणों की सहूलियत के लिए चप्पल स्टैंड भी तैयार किया गया है। तैयारियों में कोई कोर-कसर न रहे, आंध्र साहित्य समिति के सभी पदाधिकारी पूरी मुस्तैदी से नजर रखे हुए हैं।
बड़ी स्क्रीन से होगा सीधा प्रसारण
पूजास्थल पर अफरातफरी न हो, इसके लिए परिसर में बड़ी स्क्रीन लगाई जाएगी, ताकि श्रद्धालु बिना किसी व्यवधान के धार्मिक संस्कारों का सीधा प्रसारण देख सकें। इस अवसर पर भिलाई के प्रतिभावान बच्चों द्वारा नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इस दौरान भक्तगण कर्नाटक संगीत का भी आनंद उठा सकेंगे। दोनों अनुष्ठानों को सफल बनाने के लिए श्री साईंनाथ जनसेवा समिति, अखिल भारतीय तेलुगु कम्युनिटी वेलफेयर एसोसिएशन से संबद्ध तेलुगु सेना, कलांजलि तेलुगु नाट्य संस्था, प्रजा नाट्य मंडली, श्री सत्यसाईं सेवा समिति, छत्तीसगढ़ अग्निकुल क्षत्रिय समाज समेत कई तेलुगु भाषी सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी खुलकर सहयोग कर रहे हैं।


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