विवाहोपरांत बालाजी, श्रीदेवी व भूदेवी की धूमधाम से निकली भव्य शोभायात्रा

-बालाजी मंदिर की पचासवीं वर्षगांठ धार्मिक सद्भाव, उमंग और उत्साह से मनाई गई
टी सहदेव
भिलाई नगर। सेक्टर 05 स्थित दक्षिण भारतीयों के प्रमुख धार्मिक स्थल बालाजी मंदिर स्थापना की पचासवीं वर्षगांठ धार्मिक सद्भाव, उमंग और उत्साह के साथ मनाई गई। आंध्र साहित्य समिति के तत्वावधान में गुरुवार को सुबह भगवान बालाजी संग माता श्रीदेवी-भूदेवी का वैदिक मंत्रों और सनातन रस्मों के बीच कल्याण महोत्सव (विवाह महोत्सव) हुआ और शाम को विशेष रूप से सजे वाहन में आसीन इष्टदेव की भव्य शोभायात्रा निकाली गई। दो चरणों में हुए इस धार्मिक अनुष्ठान में ट्विनसिटी के आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में भक्त जुटे। इस दौरान कोई अप्रिय घटना न हो, इसके लिए पुलिस प्रशासन की ओर से विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई।
सनातन रस्मों के साथ हुआ विवाहोत्सव
अपने इष्टदेव के अभिषेक के लिए जल की व्यवस्था करने पंडित और समिति के पदाधिकारी ब्रह्ममुहूर्त में शिवनाथ नदी गए और वहां से कलशों में पानी भरकर लाए। उसके बाद पंडितों ने कलशों को शिरोधार्य करके पहले मंदिर की परिक्रमा की, फिर वर के रूप में बालाजी और वधुओं के रूप में माता श्रीदेवी-भूदेवी की उत्सव मूर्तियों को नूतन वस्त्रों और आभूषणों से अलंकृत कर प्रतिष्ठित किया। मूर्तियों की स्थापना के बाद पूजा-अर्चना की गई। पूजोपरांत पंडित ने भगवान बालाजी संग माता श्रीदेवी-भूदेवी का सभी सनातन रस्मों के बीच विवाह कराया। इस अनुष्ठान में के सुब्बाराव दंपती यजमान के रूप में बैठे। इस अवसर पर अग्निकुल श्रत्रिय समाज ने वर-वधुओं को धोती, साड़ियां, फल एवं फूल अर्पित किए।
मूर्तियों का जल व पंचामृत से अभिषेक
इससे पहले अनुष्ठारंभ सुप्रभातम श्लोकों से हुआ। सुप्रभातम के बाद बाद पंडित गोपालाचार्य ने शतकलशाभिषेक अनुष्ठान संपन्न कराया, जिसमें तीनों मूर्तियों की पूजा की गई। पूजा के उपरांत पहले प्रतिमाओं का जल से और उसके बाद पंचामृत से अभिषेक किया गया। अभिषेक करने के पश्चात पंडितों ने हल्दी की लेई के छोटे- छोटे गोले बनाकर, उन्हें मूर्तियों के हृदयस्थल, कंधों और सिर पर थापकर हल्दी मिश्रित जल से एक बार फिर अभिषेक कराया। तत्पश्चात पंडितों ने मुख्य कलश को शिरोधार्य करके मंदिर की परिक्रमा की। परिक्रमा के पश्चात पीतल की छिद्रयुक्त थाली से अभिमंत्रित जल प्रवाहित कर मूर्तियों को स्नान कराया गया। शतकलशाभिषेक के बाद सहस्त्रनामार्चना की गई। दोपहर को भक्तगणों के लिए महाभोग की व्यवस्था भी की गई।
शोभायात्रा में भक्तों का उमड़ पड़ा हुजूम
शाम को बालाजी मंदिर से जैसे ही भगवान की दोनों माताओं सहित सवारी निकली, भक्तगणों का उमंग और उत्साह अपने चरम पर था। विशेष रूप से सजे वाहन में आसीन अपने इष्ट देव के अलौकिक और मनोहारी रूप की एक झलक पाने के लिए भक्तगणों का हुजूम उमड़ पड़ा। शोभायात्रा जिन-जिन मार्गों से गुजरी, वहां लोगों ने फूलों की बारिश कर अपनी अगाध आस्था प्रकट की। खुर्सीपार में दीपोत्सव-सा दृश्य नजर आया। शोभायात्रा जोन-1 स्थित शिवालय, पोस्ट ऑफिस, गवर्नमेंट स्कूल, हनुमान मंदिर, श्रीराम चौक, बाल मंदिर, होम लॉज, सुभाष चौक, केनाल रोड से गुजरते हुए बोल बम चौक पर समाप्त हुई, जहां से यह यात्रा बालाजी मंदिर को लौटी। रास्ते भर पदयात्रियों का जगह-जगह फूलमालाओं से स्वागत कर उन्हें शरबत पिलाई गई, उनके लिए नाश्ते का इंतजाम भी किया गया। महिलाओं और युवतियों ने शोभायात्रा गुजरने वाले रास्तों की सजावट आकर्षक रंगोलियों से की। इस दौरान जमकर आतिशबाजी भी हुई, कहीं-कहीं आंगन दीयों से सजाए गए। पूरे अनुष्ठान में श्रीकाकुलम से पधारे वाई मोहन राव, के गणेश नादस्वरम, सांई कुमार ढोल और जी अप्पन्ना श्रुति बॉक्स पर संगति की।
गरबा की तर्ज पर कोलाटम नृत्य पेश
नगर भ्रमण के दौरान आंध्र महिला मंडली की सदस्यों ने पारंपरिक वेशभूषा में गरबा की तर्ज पर कोलाटम नृत्य पेश किया। अनुष्ठान को सफल बनाने में अध्यक्ष पीवी राव, सचिव पीएस राव, कोषाध्यक्ष टीवीएन शंकर, संयुक्त सचिव एनएस राव, कार्यकारिणी सदस्य दुर्योधन रेड्डी, के लक्ष्मीनारायण का विशेष योगदान रहा। इस मौके पर अभा तेलुगु सेना के प्रदेशाध्यक्ष नीलम चन्नाकेशवलु एवं प्रवासांध्रा प्रजा नाट्यमंडली के महासचिव सीएच श्रीनिवास विशेष रूप से उपस्थित थे।







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